Dost Ki Padosan Bhabhi Ki Choot Chudai Ki Chah

Discussion in 'Indian Housewife' started by sexstories, Mar 8, 2017.

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    sexstories Administrator Staff Member

    आज की हिंदी सेक्स स्टोरी मेरे एक दोस्त ही है तो सुनिये उसकी कहानी उसी की ज़ुबानी:

    मेरा नाम अमित शर्मा है, उम्र 32 साल.. शादीशुदा हूँ। मैं एक प्राइवेट जॉब कर रहा हूँ और अच्छी लाइफ चल रही है।

    हिंदी सेक्स स्टोरी की सबसे बेहतरीन साईट अन्तर्वासना पर मैं पिछले 4 साल से चुदाई की कहानियां पढ़ रहा हूँ। मैंने इधर की लगभग सभी कहानियां पढ़ी हैं। मुझे अन्तर्वासना की सभी कहानियां अच्छी लगती हैं इसलिए अब मेरा भी दिल कर रहा था कि मैं भी अपनी सेक्स स्टोरी लिखूँ।

    वैसे तो मैंने 18 साल की उम्र में ही पहला सेक्स कर लिया था.. मैंने अभी तक बहुत सारी चूतों की चुदाई की है.. पर अभी जो स्टोरी, मैं लिख रहा हूँ.. वो एक महीने पहले की ही है। अगर आप सभी का अच्छा रिस्पांस मिला तो मेरे साथ घटी अन्य बहुत सारी घटनाओं के बारे में भी मैं लिखूंगा।

    मेरा एक दोस्त है बलकार, हम दोनों की दोस्ती पिछले 15 साल से है और हम दोनों पड़ोसी थे लेकिन 3 साल पहले बलकार ने मेरे पड़ोस से घर छोड़ कर किसी और जगह घर ले लिया है.. तो अब कभी-कभी मैं उसके नए घर में जाता हूँ.. परन्तु वो कभी-कभी ही मेरे घर आ पाता है।

    मैं जब भी बलकार के घर जाता था.. तो उसके घर के पास एक भाभी रहती है, जो मुझे बहुत अच्छी लगती थी। उस भाभी का नाम रितु है.. वो बहुत मस्त आइटम है। उसकी उम्र कोई 30 के आस-पास की होगी और साइज यही कोई 36-32-36 का होगा।
    भाभी के मम्मों को देख कर मेरा मन उन्हें चूसने का करता था।

    तब मैंने बलकार से बात की- ये भाभी तो बहुत मस्त लग रही है यार..
    बलकार बोला- तू देख ले.. अगर बात बनती हो तो सैट कर ले। मैं इस काम में तेरे लिए कुछ कर नहीं सकता।

    मैं एक बात तो बताना भूल गया कि बलकार की बीवी प्रेग्नेंट थी तो मेरे को बार-बार बलकार के पास जाना पड़ रहा था।
    बलकार की बीवी ने डेलिवरी में एक लड़के को जन्म दिया था।

    चूंकि बलकार का लड़का बड़े ऑपरेशन से हुआ था इसलिए बलकार की बीवी को हॉस्पिटल में ही 10 दिन के लिए भर्ती कर लिया गया था। अगले दिन रितु बलकार को बधाई देने और उसकी वाइफ का हालचाल पूछने आई.. तब मेरी भी रितु से बात हुई और अच्छी जान-पहचान हो गई।

    उस वक्त बलकार ने रितु से एक हेल्प करने के लिए भी कहा- रितु जी मेरा बड़ा बेटा दूसरी क्लास में पढ़ता है.. उसके स्कूल और खाने की दिक्कत हो रही है.. तो क्या आप उसे कुछ दिन तक सुबह तैयार करके स्कूल भिजवा सकती हो? और एक और रिक्वेस्ट है कि क्या आप मेरे और अमित के लिए खाना बना सकती हो? क्योंकि मैं तो हॉस्पिटल में ही रहूँगा और अमित मेरे घर मेरे बेटे को लेकर रात में रहेगा।

    रितु ने कहा- हाँ ठीक है आप परेशान मत हो.. आखिर हम पड़ोसी हैं। एक पड़ोसी ही तो दूसरे पड़ोसी के काम आता है।

    उस रात मैं बलकार के बेटे को लेकर बलकार के घर आ गया और हम दोनों उधर ही सो गए। सुबह करीब 8 बजे घर की डोरबेल बजी.. तो मैंने जाकर दरवाजा खोला।
    सामने रितु खड़ी थी, उसने कहा- विशाल (बलकार के बेटे का नाम) कहाँ है, उसे स्कूल भेजना है।

    उसने विशाल को तैयार कर दिया और मैं उसे स्कूल छोड़ने निकल गया। जब मैं विशाल को स्कूल से छोड़ कर वापस आया तो रितु किचन में खाना बना रही थी।

    मैं भी किचन में ही चला गया और रितु से बातें करने लगा। रितु ने अपनी साड़ी नाभि के काफी नीचे से बाँधी हुई थी। मैंने नोटिस किया कि जब पहले जब में विशाल को स्कूल छोड़ने जा रहा था तब तो रितु ने नाभि के ऊपर साड़ी बाँधी थी और अब साड़ी नाभि के नीचे है।
    रितु का गोरा बदन देख कर मेरा मन उसे चोदने का करने लगा था।

    हम काफी हँसी-मजाक कर रहे थे।
    मैंने रितु से कहा- मैं नहा कर आता हूँ।

    मैं नहाने चला गया। जब मैं नहा कर बाहर आया तो मैंने सोचा क्यों न रितु के सामने में तौलिया में ही जाऊँ और देखूँ कि वो क्या रिएक्शन देती है। तो मैंने सिर्फ तौलिया ही लपेट लिया और किचन में आ गया।

    रितु ने जब मुझे देखा तो कहने लगी- ये क्या.. आप सिर्फ तौलिया में ही आ गए?
    मैंने कहा- तो क्या हुआ.. आपको मेरा ऐसे आना बुरा लगा क्या?
    तो उसने कहा- ऐसी बात नहीं है.. मुझे कोई दिक्कत नहीं है.. मैं तो नॉर्मली ही कह रही थी।

    अब तक मेरा लंड थोड़ा खड़ा सा हो गया था जो कि तौलिया के ऊपर से साफ दिखाई दे रहा था।

    रितु ने कहा- मैंने खाना बना दिया है और टिफिन में पैक भी कर दिया है। आप उसे लेकर हॉस्पिटल चले जाना, मुझे भी जाना है।
    इतना कह कर वो चली गई।
     
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    फिर अगले 3-4 दिन तक ऐसे ही चलता रहा। मैं रोज नहाने के बाद तौलिया में ही रितु के सामने जाता।
    अब रितु भी मेरी इन हरकतों का मजा लेने लगी थी, इधर मेरी रितु को चोदने की इच्छा बढ़ती जा रही थी।

    फिर एक दिन मैंने ये ठान लिया कि आज तो में रितु को चोद कर ही रहूँगा। उस दिन जब मैं नहा कर आया तो मैंने सोचा कि आज अपने लंड के दर्शन रितु को करवा ही देता हूँ। तो जब मैं सिर्फ तौलिया लपेट का आया तो मैंने तौलिया को कुछ इस तरह लपेटा कि मेरे हल्के से झटका देने से वो खुल जाए। मैं किचन में जा कर खड़ा हो गया और रितु की सुंदरता को निहारने लगा। मेरा लंड भी खड़ा होने लगा था। फिर कुछ देर बाद रितु जब कुछ लेने के लिए मेरी तरफ मुड़ी तो मैंने अपने हाथ से झटका दे कर अपना तौलिया को खोल दिया और तौलिया नीचे गिर गया।

    मैं ऐसे बन कर खड़ा रहा जैसे मुझे इस बात का अहसास ही नहीं है कि मेरा तौलिया खुला ही न हो।

    कुछ सेकण्ड तो रितु मुझे ऐसे ही देखते रही और मैं भी उसे देखता रहा। फिर कुछ सेकण्ड बाद रितु ने मुझसे कहा- अमित जी आपका तौलिया खुल गया है।

    तो मैंने नीचे देखा और चौंकने का नाटक करते हुए अपने हाथों से लंड को छुपाने का प्रयास किया।
    मैंने रितु से कहा- प्लीज़ आप मेरा तौलिया उठा दीजिए।

    रितु मेरे पास आई और मेरा तौलिया उठा कर मुझे दिया, मैंने वापस तौलिया लपेट लिया।
    कुछ देर बाद रितु ने मुझसे कहा- अमित जी.. मैं आपसे एक बात कहूँ?
    तो मैंने कहा- हाँ रितु कहो?
    तो वो बोली- आपका ‘वो’ तो काफी बड़ा है।

    मैं तो समझ गया कि रितु लंड की बात कर रही है.. पर मैंने अंजान बनते हुए उससे कहा- क्या रितु?
    वो थोड़ा शरमाई और बोली- आपका लंड..

    रितु के मुँह से ‘लंड’ शब्द सुन कर मेरी तो जैसे मन की मुराद ही पूरी हो गई हो।
    मैंने रितु से कहा- अच्छा.. एक बार और देखना चाहोगी?

    वो और शरमाने लगी तो मैंने झट से अपना तौलिया निकाल दिया।
    अब रितु की नज़रें नीचे मेरे लंड पर जम गई थीं।
    मैंने उससे कहा- एक बार देखो तो..

    ये कहते हुए मैं उसकी तरफ बढ़ा और अपना लंड उसके हाथ में दे दिया।

    जैसे ही रितु के हाथ में लंड आया.. वो उसे सहलाने लगी, मुझे मजा आने लगा।
    फिर मैंने धीरे से उससे बोला- चूसो इसे!

    तो रितु नीचे बैठ गई और मेरे लंड को अपने मुँह में ले लिया और लंड चूसने लगी।

    कुछ देर वो इसी तरह मेरा लंड चूसती रही। फिर मैंने रितु को खड़ा किया और उसे गोद में उठा लिया और बेडरूम में ले आया। अब मैं धीरे-धीरे उसको बाँहों में जकड़ते हुए उसके होंठों को चूसने लगा।

    उसने अपने आपको मेरे हवाले कर दिया, मैंने एक-एक करके उसके सारे कपड़े उतार दिए। अब वो सिर्फ पेंटी और ब्रा में ही थी।
    जैसे ही मैं उसके पेट पर अपना हाथ फेरते-फेरते उसकी पेंटी पर ले गया, मुझे उसकी पेंटी पर कुछ गीला-गीला सा लगा।

    मैंने उसकी पेंटी उतार दी और उसकी चूत में उंगली डालने लगा। मैं अब धीरे-धीरे उसके पूरे बदन को चूमने लगा और चूमते-चूमते उसकी दोनों टांगों के बीच में आ गया। मैंने उसकी चूत में अपनी जीभ डाल दी।

    जैसे ही मैंने अपने होंठ रितु की चूत के होंठों से टच किए थे कि उसने एक सिसकारी भरी लम्बी ‘आह ह्हहह..’ निकल गई।
    ‘बस.. आज के लिए इतना ही रहने दो.. तुम हॉस्पिटल पहुँचने में लेट हो जाओगे..’

    लेकिन बहुत टाइम के बाद फंसी मछली को मैं भला ऐसे कहाँ छोड़ने वाला था, मैंने उसको कसकर अपनी पकड़ में बाँध रखा था और मैं जानता था कि अब उसे अगर मैंने खुश कर दिया तो फिर मैं उसे कभी भी चोद सकता हूँ।

    फिर मैंने रितु से कहा- अच्छा ठीक है.. तो मैं बलकार को फ़ोन करके बोल देता हूँ कि मैं थोड़ा लेट हो जाऊंगा।
    मैंने तुरंत बलकार को फ़ोन लगाया और उसे बोला- यार मैं थोड़ा लेट आऊंगा।
    उसने भी ‘ओके..’ कह दिया।

    फ़ोन रखते ही मैं फिर अपनी जीभ को रितु की में चूत में घुमाने लगा। जैसे ही मैंने उसके क्लिट पर जीभ घुमाई, वो तड़फ उठी और मेरा सर अपने दोनों हाथों से पकड़ कर अपनी चूत में दबाने लगी। ऐसा लग रहा था कि जैसे अब उसने पूर्ण रूप से अपने आपको मेरे हवाले कर दिया हो।

    मैं लगातार उसकी प्यारी सी चूत में अपनी जीभ चलाए जा रहा था। वो धीरे-धीरे अपने चूतड़ को ऊपर-नीचे कर रही थी।

    उसके बाद मैं समय को बर्बाद न करते हुए मैंने रितु की दोनों टांगें इतनी ऊपर उठा दीं कि अब मुझे उसकी खुली हुई चूत साफ साफ दिखाई देने लगी।
     
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    अब तक मेरा लंड भी पूरी तरह से चूत पाने के लिए मदहोश हुआ जा रहा था।

    मैंने अपना लंड रितु की चूत पर रख दिया और हल्का-हल्का उसकी चूत को अपने लंड से सहलाता रहा। जैसे ही मेरे लंड का कुछ ही हिस्सा चूत के अन्दर गया, वो तड़फ उठी। मगर इस मिलन का वो भी पूरा मजा लेना चाहती थी, तो उसने खुद ही अपने होंठ मेरे होंठों से चिपका लिए और अब मुझे उसके चेहरे से उसका दर्द साफ दिखाई दे रहा था। लेकिन मैंने भी उसका ध्यान करते हुए आराम आराम से चुदाई करना जारी रखा।

    कुछ देर बाद मेरा लौड़ा पूरी तरह उसकी चूत में प्रवेश करके उसे आसमान में उड़ने का अहसास करा रहा था।

    मैं अपनी तूफानी रफ़्तार में उसको आसमान की सैर करा रहा था।

    कुछ ही देर में रितु चरम पर आ गई और सिसयाने लगी- आआआ.. उम्म्ह… अहह… हय… याह… आआअह.. अमित मैं तो आ रही हूँ.. आज से पहले मुझे इतना मजा कभी नहीं मिला!
    वो यह कहते हुए झड़ गई।

    अब वो ढीली पड़ चुकी थी और कुछ देर बाद मैं भी झड़ गया। कुछ देर तक हम ऐसे ही पड़े रहे.. पर मैं अभी कहाँ रुकने वाला था, मैं फिर से उसके मम्मों को दबाने लगा।
    उसने कहा- आह्ह.. आहिस्ता-आहिस्ता दबाओ.. लगती है यार..
    तो मैं आहिस्ता-आहिस्ता उसके मम्मों को अपने हाथों से दबाने लगा।

    अब उसकी साँसें तेज हो रही थीं, उसने मुझसे अपने चूचे चूसने को कहा। मैं उसका एक चूचा चूसने लगा और पूरा चाटने लगा और फिर थोड़ी देर के बाद मैंने उसका दूसरा चूचा भी चूसा।

    फिर थोड़ी देर के बाद मैंने उसकी चूत में अपनी एक उंगली घुसा दी.. तो वो मचल गई। अब वो जोर-जोर से सिसकारियां ले रही थी।
    यह हिंदी सेक्स स्टोरी आप अन्तर्वासना सेक्स स्टोरीज डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं!

    कुछ ही देर में हम दोनों 69 की पोज़िशन में आ गए थे। फिर मैंने उसके चूत के दाने को अपने दांतों से थोड़ा सा दबाया और वो एकदम से मचल गई।

    फिर मैं अपनी जीभ को उसकी चूत के अन्दर डालकर अन्दर-बाहर हिलाने लगा। वो सिसकारियां भरने लगी और बहुत गर्म हो गई।
    वो मेरी बांहों में आकर मुझसे लिपट गई और धीरे से कहने लगी- अब मत तड़पाओ, अब मेरे अन्दर जल्दी से डालो, मैं मर रही हूँ।

    अब मैं एक कुर्सी पर बैठ गया और उसको आगे की तरफ झुकाकर उसे मेरे लंड पर बैठा लिया और ज़ोर से एक ही झटके में मेरा पूरा लंड उसकी चूत में घुसा दिया। वो दर्द के मारे अपने होंठों को दबाने लगी और उसने मुझे पीछे से पकड़ लिया।

    फिर मैंने उसको थोड़ी देर तक ऐसे ही बैठाया और मैं भी यूं ही बैठा रहा।

    कुछ देर बाद उसे भी मजा आने लगा था और वो भी आगे-पीछे होने लगी थी। अब मैंने भी पीछे से धक्के देने शुरू कर दिए थे। फिर दस मिनट के बाद उसकी रफ़्तार तेज हो गई और अब मेरा भी निकलने वाला था, इसलिए मैंने भी जोर-जोर से धक्के लगाना शुरू कर दिए थे। फिर थोड़ी देर के बाद वो मुझ पर बैठ गई और मैं भी उसके दोनों मम्मों को ज़ोर-जोर से दबाने लगा।

    फिर हम दोनों ने एक साथ अपना-अपना पानी छोड़ दिया और फिर हम दोनों थोड़ी देर तक ऐसे ही बातें करते रहे। फिर मैंने अपने कपड़े पहने और हॉस्पिटल चला गया।

    जाते टाइम मैंने रितु से कहा- अब जब तक बलकार और उसकी वाइफ हॉस्पिटल से घर नहीं आ जाते.. तब तक मैं तुम्हे रोज चोदूँगा.. चुदोगी न मेरी जान?
    तो रितु ने भी ‘हाँ’ कर दी।

    उसके बाद अगले 4 दिन तक हमने रोज ऐसे ही चुदाई की।

    दोस्तो, आप सभी को मेरी यह चुदाई की कहानी कैसी लगी.. बताइएगा जरूर!
     
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