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मेरी गर्म कहानी में आपने पढ़ा कि चाची की चूत और गांड की चुदाई के बाद मैंने अपनी चचेरी बहन सीमा की कुंवारी बुर की चुदाई भी कर दी.
अब आगे:

सुबह उठ कर तैयार हुआ, दीदी ने मेरी ओर देख कर आँख मारी, फिर जाते समय माँ से छुप कर बोली- क्यों छोटू कैसे हो?
और हंसने लगी.
मैं कुछ बोले बिना ही क्लिनिक के लिए निकल गया.

जब शाम को आया तो माँ घर पर ही थी. मैंने अपने कमरे में जाकर कपड़े बदले और बाहर कुर्सी पर बैठ गया.
सीमा मुझे चाय देने आई.
मैंने सीमा को इशारे से माँ के प्रवचन सुनने जाने के बारे में पूछा, इशारा से ही सीमा ने भी नहीं जाने के बारे में बताई.
अब मैं सोचने लगा कि माँ को कैसे बाहर भेजू ताकि सीमा दीदी को चोद सकूं.

मैंने माँ को पूछा- माँ आज नहीं गई?
माँ- आज प्रवचन नहीं है.
मैं- आज मैं थक गया हूँ, आप ही सब्जी ले आओ न?
माँ- ठीक है, मैं ही ले आती हूँ.
कुछ देर में माँ झोला ले कर माँ बाजार चली गई.

मुझे मौका मिल गया, मैं जल्दी से सीमा को अपने कमरे में ले गया और जल्दी से नंगी करकेhttps://www.antarvasnasexstories.com/bhai-bahan/didi-ki-choot-chodne-ke-bad-gaand-mari/ दीदी की चूत में लंड पेल दिया.
सीमा दीदी बोली- अरे आराम से पेल, मुझे भी चुदना है.
मैं- माँ आ जायेगी, इसलिए जल्दी से चोद देता हूँ.
और मैं लंड अंदर बाहर करने लगा.

कुछ देर में दीदी भी मजा से सिसकारने लगी- ओह चोद, मेरे हरजाई कुत्ते भाई और ज़ोर से चोद, ओह कस कर मार मेरी चूत… और ज़ोर लगा कर धक्का मार, ओह मेरा निकल जाएगा, सीईईईई, कुत्ते, और ज़ोर से चोद मुझे… बहन की चूत को चोदने वाले बहन के लौड़े हरामी, और ज़ोर से मार, अपना पूरा लंड मेरी चूत में घुसा कर चोद कुतिया के पिल्ले… सीई… ईईई मेरा निकल जाएगा.

मैं अब और ज़ोर-ज़ोर से धक्के मारने लगा.
मेरी बहन अब किसी कुतिया की तरह से कुकिया रही थी और अपने चूतड़ों को नचा-नचा कर आगे-पीछे की तरफ धकेलते हुए मेरे लंड को अपनी चूत में लेते हुए सिसिया रही थी- ओह, चोद मेरे राजा… मेरे बहन के लंड… और ज़ोर से चोद… ओह… मेरे चुदक्कड़ बालम, उम्म्ह… अहह… हय… याह… सीईईई…
मादक सीत्कारें भरते हुए अपनी दांतों को भींचते और चूतड़ों को उचकाते हुए दीदी झड़ने लगी.

मैं भी झड़ने वाला ही था. दीदी के मुख से झड़ते समय की सिसकारियाँ निकल रही थी- ओह आई मेरी चूत मी एई में… स्सीई ईई ईई…

ठीक इसी समय मुझे ऐसा लगा जैसे मैं किसी के ज़ोर से चिल्लाने की आवाज़ सुन रहा हूँ और जब मैंने दरवाजे की तरफ मुड़ कर देखा तो ओह… सामने दरवाजे पर मेरी माँ खड़ी थी.
मैं एकदम भौंचक्का रह गया था और शीघ्रता से अपने लंड को अपनी https://www.antarvasnasexstories.com/bhai-bahan/choot-bahan-ki/बहन की चूत में से निकाल लिया.

मेरी बहन तेज़ी के साथ बिस्तर पर से उतर गई और अपनी स्कर्ट को उसने चूतड़ों पर चढ़ा लिया. दीदी ने अपना बदन कपड़ों से ढक लिया पर मेरा लंड अभी नंगा था.
माँ की नजर मेरे ही लंड पर थी- ओह…! तुम दोनों एक साथ, पापियो, क्या मैंने तुम्हें यही शिक्षा दी थी, ओह… तुमने मेरा दिमाग़ खराब कर दिया, भाई-बहन हो कर… ये कुकर्म करते हो!

मेरा लंड का पानी अभी नहीं निकला था, वो निकलने वाला ही था, अचानक से एक झटके के साथ उसमें से एक तेज धार के साथ पानी निकल गया. मेरे वीर्य की बूदें उछल कर सीधा माँ के ऊपर उसकी साड़ी और पेट पर जा गिरी जो मेरे सामने खड़ी हो कर डांट रही थी.
लंड अब पानी छोड़ कर लटक गया था. वो मेरे लंड की ओर देख ही रही थी पर कुछ नहीं बोल पाई और मेरे वीर्य को अपने साड़ी और पेट पर से साफ करने लगीं.
‘छी छी…’ कहते हुए वो कमरे से बाहर बिना कोई शब्द बोले निकल गईं.

हम दोनों एकदम अचंभित हो कर कुछ देर वहीं पर खड़े रहे, फिर हमने अपने कपड़े पहन लिए.
मैंने सीमा दीदी से कहा- शायद जल्दी के चक्कर में मेन गेट बंद करना ही भूल गया.

हम दोनों के अंदर इतनी हिम्मत नहीं थी कि हम कमरे से बाहर जा सके. मेरी बहन और मैं बहुत डरे हुए थे.
दीदी कमरे से बाहर निकली और मैं अपने कमरे में ही रह गया.

रात के 11 बजे लगभग माँ जगाने आई- चलो खाना खा लो!
खाने का मन नहीं था पर डर से ना नहीं कह पाया. मैं बाहर निकल कर माँ के सामने नजर झुकाए हुए चुपचाप खाना खाया और अपने कमरे में सो गया.

सुबह जल्दी से तैयार हो कर समय से पहले ही क्लिनिक के लिए निकल गया.

शाम को लौटा और अपने कमरे जाकर कपड़े चेंज कर अपने बेड पर बैठ गया. अब सोच रहा था कि सीमा और माँ का सामना तो दिन में हुआ होगा पर मैं क्या करूँ?
फिर मैं अपने कमरे से बाहर निकला.
माँ अपने कमरे में थीं.
मैं हिम्मत कर के माँ के कमरे की ओर चला गया. दरवाज़ खुला था और मैं सीधा माँ के पास इस तरह से गया जैसे कुछ हुआ ही नहीं है. पर मुझे सीमा नजर नहीं आ रही थी.

मैंने माँ से पूछा- क्या आपने खाना खाया.
उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया.
फिर मैंने पूछा- माँ सीमा नजर नहीं आ रही है?
माँ गुस्से से बोली- क्यों सीमा फिर चाहिए, पाप करते समय शर्म नहीं आती है… तुम्हारे चाचा आये थे वो उसे शहर ले गए. अब वे लोग वहीं रहेंगे.
मैं माँ की ओर देख रहा था- माँ चाय नहीं बनाओगी?
‘बनाती हूँ!’ और उठ कर माँ किचन में चली गई.

माँ कुछ देर में चाय बना कर लाई, मैं चाय लेकर पीने लगा. माँ अभी भी गुस्से में थी.
मैं माँ से बोला- माँ इतनी गुस्से में क्यों हो?
माँ- गुस्सा नहीं करूं तुम पे… तुमने कोई ऐसी हरकत नहीं की है पाप किया है पाप!

मैं भी एकदम से बोल दिया- माँ, अगर ये पाप है तो जो https://www.antarvasnasexstories.co...e-sexy-ammi-chacha-choot-chudayi-tubewell/तुम चाचा के साथ करती हो वो क्या है?
माँ मेरी ओर देखती रह गई और बोली- क्या, क्या करती हूँ मैं?
मैं- तुम भी तो चाचा से चुदती हो!

चोदना शब्द सुन कर अपने साड़ी को मुँह पर रख ली.

मैं फिर बोला- तुम अगर गुस्सा करोगी तो मैं पापा से बोल दूँगा.
अब माँ नोर्मल हो गई- अरे अशोक क्या कह रहे हो… भूल जाओ, मैंने कुछ नहीं देखा है… पापा से कुछ मत कहना!
मैं- ठीक है, नहीं कहूँगा!

मैं चाय पीने लगा. फिर माँ मेरे पास बैठ गई. उनके ब्लाउज का आगे का एक बटन खुला हुआ था जिसके कारण उनकी चूचियाँ एकदम बाहर की ओर निकली हुई दिख रही थीं.
‘देखो, मैं तुम्हें डांट तो नहीं रही, मगर फिर भी मैं पूछना चाहती हूँ कि तुम ऐसा कैसे कर सकते हो? वो तुम्हारी बहन है. क्या तुम्हें डर नहीं लगा?’
वो मुझे से लगातार पूछ रही थी- बताओ मुझे! क्या तुम्हें ज़रा भी शर्म नहीं महसूस नहीं हुई या पाप का अहसास नहीं हुआ? अपनी बहन को चोदते हुए!!

मैंने अपना सिर नीचे झुका लिया और कोई जवाब नहीं दिया. मैं मन ही मन सोच रहा था कि वो मेरी सगी बहन थोड़े ही है.
फिर मेरा हाथ पकड़ कर अपने हाथों में ले लिया और बोली- बेटे कल से तुमने मुझे बहुत गर्म कर दिया है, जब तुम्हारा माल मेरे ऊपर गिरा है तब से गर्म हो चुकी हूँ. तुम, तुम्हारी बहन को कल बहुत जबरदस्त तरीके से चुदाई कर रहे थे.

मैं शर्म से लाल हो रहा था और माँ की बातों को ध्यान से सुन रहा था फिर वो आगे बोली- बेटा, जैसा कि मैं समझती हूँ, तुम गलत ही किया है क्योंकि सामाजिक परम्पराओं के अनुसार यह पाप है.
मैंने हां में सर हिला के अपनी गलती मान ली.

फिर माँ अचानक बोली- बेटा, क्या तुम एक और पाप करना चाहोगे? तुम मेरे बेटे हो, तुम तो मुझे चोद नहीं सकते पर तुम अपने किसी दोस्त को बुला कर मुझे भी चुदवा दो! मैं भी बहुत गर्म हो गई हूँ.
‘माँ, क्या तुम सच में ऐसा कुछ सोच रही हो?’ मैं धीरे से बोला.
‘क्या तुम्हें अब भी कुछ शक़ हो रहा है? ज़रा अपनी माँ के लिय भी कुछ करो.’
‘ठीक है माँ, मैं अभी कुछ करता हूँ. मुझे भूख लगी है मेरे लिए कुछ खाना बनाओ मैं अभी कुछ करता हूँ.’
माँ खुश होकर किचन में चली गई.
मैंने अपने दोस्त आलोक को फोन किया कि जल्दी से आ मेरे घर जा… रात का खाना तूने यहीं पर खाना है.
 
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