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कलियुग की सीता—एक छिनार compleet

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मैं हाला की पतिदेव के साथ जाना नही चाहती थी लेकिन क्या करती??एक तो मुझे उनपर तराश आ गया था और दूसरे इतनी ज़ल्दी मुझे कोई घर भी नही मिलता…साथ ही मैं पतिदेव के साथ ऑफीस भी आ सकती थी.इसलिए मैने उन की बात माननी ही ठीक समझी.

अब्दुल की क़ैद से आज़ाद होकर मैं खुश तो थी लेकिन यह खुशी कुछ ही दिन मे प्यास बन गयी…कुछ कम हो जाए तो भी परेशानी,ज़्यादा हो जाए तो भी परेशानी….शेखो के लंड से मुझे डर तो लगने लगा था लेकिन साथ ही मेरी चूत भी लंड के लिए तरस रही थी….मैने महसूष किया था कि हबीब चाचा भी मुझ पर डोरे डालने की कोशिश कर रहे हैं…मैं हमेशा ऑफीस साड़ी मे ही जाती थी…हबीब चाचा को कुछ पेपर्स दिखाते हुए अक्सर मेरी साड़ी का आँचल नीचे गिर जाता…और फिर मैं देखती कि हबीब चाचा की आँखे मेरे ब्लाउस के गले मे ही झाँकती रह जाती…एक तो पहले से ही मेरी चूचियाँ ओवरसाइज़ थी उपर से शेखों ने उसे मसल मसल के गुब्बारा बना दिया था….कभी कभी मेरे दिल मे ख्याल आता कि हबीब चाचा से ही चुद लूँ लेकिन शेखों का लंड याद आते ही मेरी चूत कांप उठती.

पतिदेव से कुछ उम्मीद ही नही थी…ऐसे मे मैने उनके दोस्त को ही काबू मे करने की कोशिश की.जो पड़ोस मे ही रहता था…नाम था विकी,उम्र मे मुझसे 2 साल छोटा था….लेकिन यहाँ भी मेरी चूत प्यासी ही रह गयी….वो मुझे देखते ही मेरे पाँव छूकर कहता,”प्रणाम भाभी.”.उससे रिझाने के लिए मैने कई बार अपने इंटर-चुचियल स्पेस के दीदार कराए उसे लेकिन वो इतना बुद्धू था कि कहता,”भाभी आपका आँचल नीचे गिर गया है….मैं थक गयी उससे राह पर लाने मे,ऐसे मे मुझे हबीब चाचा भी अच्छे लगने लगे…मैने सोचा कोई ज़रूरी तो नही कि हर इंसान अब्दुल और बशीर चाचा जैसा ही हो…वैसे भी चुदाई तो तो वो बहुत ज़ानदार करते थे,ग़लत सिर्फ़ ये करते थे मुझे रंडी बना दिए थे….हबीब चाचा ऐसा क्यों करेंगे???मैने सोच लिया था कि हबीब चाचा को अपनी चूत की सवारी ज़रूर कराउन्गि.

दूसरा दिन महीनो से सुखी आपकी इस सीता देवी की चूत पर रिमझिम बरसात का दिन था..मैं सुबह से चुदासी थी….ब्लू कलर की साड़ी के साथ मॅचिंग ब्लाउस पहन कर मैने खूब मेकप किया था…जानबूझ कर आज मैने ब्रा नही पहनी थी और साड़ी को चूतड़ पर टाइट कर लिया था….इतने दिनो मे हबीब चाचा की भूखी नज़रो से मैं समझ चुकी थी कि वो बड़ी बड़ी चूचियों और चूतड़ के रसिया थे और इस मामले मे आपकी इस नाचीज़ सीता देवी का भी तो कोई जोड़ ही नही है…

पतिदेव के साथ ऑफीस पहुचि तो सब मर्दो को अपनी ही तरफ देखते पाया…उनकी नज़रो ने मुझे बता दिया कि मैं आज कितनी मदमस्त लग रही हूँ….अपने हुस्न पर मुझे गरूर महसूस हुआ.ऑफीस मे बहुत सारे एंप्लायी थे जो मुझे चाहने लगे थे,लेकिन मुझे कोई पसंद नही आता था.उनकी नज़रे तो बदस्तूर मेरी उठान ली हुई चूचियाँ निहारती रह गयी…उनकी हालत देखकर मुझे मज़ा आया..उन्हे क्या पता था कि उनकी जाने जिगर एक शेख से चुदने के लिए जीता जागता बॉम्ब बन कर आई है.

मैं सीधे हबीब चाचा के ऑफीस पहुचि…वो पहले से वहाँ बैठे थे..मुझे देखते ही वो देखते ही रह गये…उनका मूह खुला का खुला रह गया…मैने सोचा अभी ही ये हाल है,अगर और देख लेंगे तो शायद पत्थर मे तब्दील हो जाएँगे…

मैं मन ही मन हंस रही थी तभी हबीब चाचा ने कहा,”ओह्ह मिसेज़. सीता देवी….ज़रा 2012 वाली फाइल लाइए.”

मैं:”ओके सर….अभी लाती हूँ.”

फाइल लेकर मैं आई और फिर उनकी टेबल पर रखकर बताने लगी…वो पढ़ रहे थे और इधर मैने पल्लू नीचे गिरा दिया..और फिर हबीब चाचा की आँखे पेपर से हट के मेरी चूचियों पर आ जमी…आज मैं उन्हे ढँकने की कोशिश भी नही कर रही थी…ये देखकर शायद हबीब चाचा का हौसला बढ़ा होगा क्योकि जो कुछ हुआ इसकी उम्मीद मैने कभी नही की थी…

.हबीब चाचा खड़े हुए और पता नही ये इत्तिफ़ाकन हुआ था या उन्होने जान बुझ के की थी,जो भी हो वो लड़खड़ाते हुए मुझे नीचे लेते हुए फर्श पर गिर पड़े…शायद वो मेरी चुचियाँ देखकर बेकाबू हो गये थे…उनके दोनो हाथो ने मेरी चुचियाँ दबोच ली थी और वो लगातार मेरे गालो पर पप्पी लिए जा रहे थे…

मैं तो चुदने के मूड मे आई ही थी लेकिन नखड़े दिखा रही थी,,बोली”ये क्या कर रहे हैं हबीब चाचा…छोड़ दीजिए मुझे.”

हबीब चाचा:”सीता देवी….तुम चूत की मल्लिका हो…एक बार मुझसे चुद लो…कसम से पति को भूल जाओगी.”

मैने मन ही मन सोचा ,पातिदेव का लंड तो मैं कब का भूल चुकी हूँ..अब तो मुझे ऐसा लंड चाहिए जो अब्दुल का भुला सके..लेकिन सामने मे यही कहा,”लेकिन ये ग़लत है.”

मेरी बात सुने बिना हबीब चाचा ने अपना लंड निकाल कर मेरे हाथ मे थमा दिया…..महीनो बाद इतना लंबा तगड़ा लंड देख कर मेरी चूत कुलबुला उठी…..मैं कुछ देर और नखड़ा दिखाने की सोच ही रही थी कि हबीब चाचा ने मेरी साड़ी कमर तक खिसका दी और बिना देखे मेरी चूत मे लंड घुसा दिया….और ऐसे चोदने लगे जैसे कुबेर का खजाना मिल गया हो..केबिन मे किसी के आ जाने का डर था इसलिए ज़ल्दी ज़ल्दी मुझे चोद कर हबीब चाचा फ्रेश हो गये.

 


बस उस दिन के बाद मेरी चुदाई का सिलसिला निकल पड़ा..हबीब चाचा अब मुझे गोद मे बैठा कर ही सारी फाइल देखते….और जब मन करता मुझे चोद लेते…बस यही डर रहता कि कोई देख ना ले….इसलिए एक दिन हबीब चाचा ने कहा,”सीता….जितनी चुदासी माल हो तुम उस हिसाब से तो तुम्हे फ़ुर्सत मे चोदना चाहिए….हर स्टाइल मे चोदना चाहिए..लेकिन यहाँ ये पासिबल नही है…इसलिए मैने सोचा है,तुम मेरे साथ वाकेशन पर चलोगि.”

उनकी बात सुनकर रोमॅन्स ने मेरे मन मे अंगड़ाई ली…मैने कहा,”लेकिन मेरे पति अकेले नही रह सकते…मैं उन्हे छोड़ के जाती हूँ तो वो पागल हो जाते हैं.”

हबीब चाचा:”तो क्या प्लान ड्रॉप कर दूं??”

मैं:”नही…आप बस मेरे पति को भी साथ ले चलिए….ऑफीस वर्क के काम के बहाने….मैं उन्हे बहका दूँगी कि ऑफीस का काम भी हो जाएगा और हनिमून भी.”

हबीब चाचा:”लेकिन तुम्हारा पति जाएगा तब तो तुम उसके साथ हनिमून मनाओगी…मेरा क्या होगा??”

मैं:”वो सब आप मुझ पर छोड़ दीजिए.”

गर्मी के दिन थे इसलिए हमने हिल स्टेशन जाने का प्लान किया था…..मैने,पतिदेव और हबीब चाचा ने वहाँ पहुच कर एक होटेल लिया और फिर ऑफीस वर्क के बहाने हबीब चाचा के साथ निकल पड़ी. हबीब चाचा की तमन्ना थी कि वो मेरे साथ स्विम्मिंग पूल मे नहाए…इसके लिए उन्होने एक कीमती स्वीम्सूट भी दे दिया था मुझे.स्विमस्यूट ऐसा था कि मुझे पहनने मे भी शर्म आ रही थी….लेकिन फिर सोचा ‘जिसने कि शर्म,उसके फूटे कर्म’….इसलिए स्विमस्यूट पहन कर हबीब चाचा के लंड पर बिजली गिराने का इरादा कर लिया…उन्ही की तो तमन्ना थी कि वो खुले आम मेरे साथ ऐसी ड्रेस मे मज़ा ले…और सच मे मुझे देखते ही हबीब चाचा का लंड खूटे की तरह तन गया.

जब रात हो गयी तो लोग भी कम हो गये लेकिन हबीब चाचा जैसे मुझे छोड़ने के मूड मे ही नही थे…जब सन्नाटा हो गया तो बोले, ”अब स्विम सूट उतार के ज़रा मुझे ज्वालामुखी का दहाना तो दिखाओ…कब से तड़प रहा हूँ.”

इतराते हुए मैने कहा,”धत्त्त…शर्म नही आती…यहाँ खुले मे कोई आ गया तो मैं तो मर जाउन्गि…

जवाब मे हबीब चाचा ने कहा,”सीता…अगर तुम नही दिखाओगि तो भी मैं मर जाउन्गा.”

मैने शरमाते हुए स्विमस्यूट उतार दिया…मेरी चूचियाँ खुली थी लेकिन चूत मैने शर्म के कारण ढँक ली थी…

हबीब चाचा का लंड फन्फाने लगा था…वो बोले ,”जल्दी से कपड़े पहन कर रूम मे चलो…वरना मैं तुम्हे यही चोद दूँगा मुझसे बर्दास्त नही हो रहा”…और सच मूच हबीब चाचा उस रात मुझे रात भर चोदते रहे….सुबह तक मेरी चूत सूज गयी थी….उफफफफफ्फ़ ये मुल्ला लोग भी कैसे हबसी की तरह चोदते हैं…सुबह उठकर मैं पतिदेव के रूम जाने लगी तो हबीब चाचा ने मुझे रोक लिया…फिर एक गोल्डन पैंटी ब्रा निकाल कर मुझे थमा दिया और कहा,”सीता…आज बीच पर चलेंगे…यह पर्स मे रख लेना.”

मैं:”लेकिन आज मेरी पतिदेव बहुत नाराज़ होंगे…शायद जाने ना दे.”

हबीब चाचा:”तो ठीक है उसे भी साथ ले चलते हैं…..और सुनो आज रेड साड़ी पहन कर आना…सिर्फ़ साड़ी अंदर कुछ नही.”

उनकी बात सुनकर मेरी चूत बिदक गयी…साले ने रात भर चोदा है…फिर भी कमिने का दिल नही भरा.”….बहरहाल हामी मे सर हिला कर मैं बाहर निकल आई…मुझे क्या पता था कि मेरा स्विम्मिंग पूल जाना मुझे फिर से किस जाल मे लपेटने जा रहा है.

मैं हबीब चाचा के कहे अनुसार ही रेड साड़ी पहन कर पतिदेव और उनके साथ निकली…पतिदेव को मनाना मेरे लिए कोई बड़ी बात नही थी…वो तो मेरे हुक्म के गुलाम थे.

बीच पर जाकर हबीब चाचा ने पतिदेव को काम के बहाने ऐसी जगह भेज दिया जहाँ से लौटने मे उनको कम से कम 3 घंटे लगते….और फिर जाकर मुझे पता चला कि हबीब चाचा ने मुझे बिना पैंटी- ब्रा पहने क्यों बुलाया था…

पतिदेव के जाते ही हबीब चाचा मुझे लेकर बीच पर टहलने लगे….पहली हरकत जो उन्होने की वो यह थी कि तुरंत अपने हाथ मेरी चूतड़ पर जमा दिए और साड़ी के उपर से ही सहलाने लगे…फिर मेरे गाल पर पप्पी लेते हुए कहा,”सीता….तुम्हारे चूतड़ जब भी मैं देखता हूँ मेरे हाथ मचलने लगते हैं…तुम जब मटक कर चलती हो तो ये ऐसे डोलती हैं कि मेरा ईमान भी डोल जाता है…”

उनकी बात सुनकर मेरी चूत शर्म से पानी पानी हो गयी…मुझे अहसास हुआ कुदरत ने मुझ पर बेपनाह हुस्न लुटा कर मेरे लिए मुसीबत खड़ी कर दी थी…एक ओर मैं इतनी हॉट थी कि पतिदेव छूते ही झाड़ जाते थे,दूसरी ओर ये मुल्ला लोग मेरे चूतडो को अपने बाप का माल समझ लिए थे..मेरे चूतड़ और चुचि दबा दबाकर इन लोगो ने और मदमस्त बना दिया था…तारीफ इनकी होती थी और भुगतना मुझे पड़ता था..एक घंटे चलते चलते हबीब चाचा ने मेरी चूतड़ की मालिश की…मैने पैंटी नही पहनी थी…इसलिए मुझे लग रहा था जैसे वो मेरे नंगे चूतड़ की मालिश कर रहे हैं…खुले आम लोगों के सामने अपने चूतडो की मालिश करवाने मे मुझे शर्म तो आ रही थी लेकिन मैं जब भी शरमाती हबीब चाचा मुझे किस कर लेते….मेरी बात समझ कर आख़िरकार हबीब चाचा ने मुझसे कहा,”जाओ सीता…उधर केबिन है,पैंटी-ब्रा पहन कर आओ…हम अब सी बाथ करेंगे….

मैने सोचा चलो जान बची और ड्रेस पहनने केबिन की ओर चल दी. गोल्डन टू पीस पहन कर मैं आई तो हबीब चाचा ने अपना कॅमरा निकाल लिया और फिर फोटो सूट करने लगे…इतने लोगो के बीच मुझे ब्रा-पैंटी मे शर्म आ रही थी लेकिन हबीब चाचा की खुशी के लिए मैने यह भी मंज़ूर कर लिया…लेकिन मुझे क्या पता था कि मेरा ये डिसीजन मुझे कहाँ खड़ा कर देगा…

 


पोज़ देते देते मैने जिस शख्स को देखा उसके बाद मेरी उपर की साँस उपर और नीचे की नीचे रह गयी….अब्दुल ख़ान थे वो…साथ मे मम्मी भी थी..शायद अब्दुल भी मम्मी को मनचाहे अंदाज़ मे चोदने के लिए यहाँ लाया था…क्योकि अब्दुल सिर्फ़ अंडरवेर मे थे और मम्मी सिर्फ़ ब्रा-पैंटी मे….

मेरे जाने के बाद मम्मी ही तो बची थी उस से चुदने के लिए शायद इसलिए वो मम्मी को इस उम्र मे भी पैंटी ब्रा पहना के बीच पर घुमा रहा है….अब्दुल को देखकर मैं डर गयी थी…अगर उसने मुझे देख लिया तो फिर से शायद मैं उसी दलदल मे धँसती चली जाऊं…

इससे पहले कि वो मुझे देखे ,मुझे यहाँ से भाग जाना चाहिए…बस यही एक ख्याल था कि मैं हबीब चाचा को खिचते हुए ड्रेसिंग रूम की ओर चल दी…साड़ी पहन कर बाहर निकली और होटेल के लिए निकल पड़ी…रास्ते मे मैने हबीब चाचा से तबीयत ना ठीक होने का बहाना बना दिया..

मैं इतनी डर गयी थी कि सीधे अपने रूम मे आई और दरवाज़ा लॉक कर लिया..

.थोड़ी ही देर मे हैरान परेशान पतिदेव भी लौट आए….मेरे दिमाग़ मे सिर्फ़ अब्दुल का चेहरा नाच रहा था…मैं अकेले रहना चाहती थी थोड़ी देर इसलिए पति को सोफे पर भेज दिया और खुद बेड पर पेट के बल लेट गयी.मुझे यह भी होश नही था कि मैने ब्रा पैंटी नही पहनी है और मेरी साड़ी खुल कर नीचे खिसक गयी है…वैसे भी यहाँ डर किस से था??पतिदेव तो नामर्द थे…कोई शेख होता तो शायद उससे छुपाती भी कि कही ऐसे मदमस्त चूतड़ देखकर पागल ना हो जाए चोदने के लिए….मैं दुआ करने लगी कि अब्दुल ने मुझे ना देखा हो….

तभी कॉल्लबेल बजी…मुझे लगा शायद हबीब चाचा होंगे..इसलिए मैने साड़ी भी ठीक नही की…बस यही किया कि कोहनी के बल हो गयी. लेकिन पतिदेव की झड़प किसी के साथ होते सुनकर मैं चौंक गयी…

इस आवाज़ को मैं हज़ारो मे पहचान सकती थी,अब्दुल थे वो….एक भारतीय नारी सब कुछ भूल सकती है लेकिन अपनी सील तोड़ने वाले को कभी नही…और फिर आपकी इस सीता देवी की चूत की सील तो शादीशुदा होने के बाद तो टूटी थी लेकिन पति-परमेस्वर से नही,बल्कि अब्दुल ख़ान के फौलादी लंड से..अब्दुल पतिदेव को धक्का देते हुए अंदर चले आए थे….वो मुझे गुस्से मे देखे जा रहे थे और मैं उनको रहम भरी नज़रो से…कट्टर मुल्ला लग रहे थे वो…

पठान सूट मे थे वो और चेहरे पर मुल्लो वाली ही दाढ़ी.मैने अपनी खिसकी हुई साड़ी संभाली तो वो और गुस्से मे आ गये.उन्होने ब्लाउस मे उंगली फँसा के मुझे बेड से नीचे खीच लिया…ब्लाउस चर्र्र से फॅट गयी और मैं बचाने के चक्कर मे खड़ी हो गयी थी.अपनी बीवी का ब्लाउस गैर मर्द के हाथो फटता देख पतिदेव मे पता नही कहाँ से मर्दानगी आ गयी…वो अब्दुल पर झपट पड़े लेकिन शेख फिर भी शेख होते हैं….अब्दुल ने पतिदेव को मार मार के अधमरा कर दिया ..बगल मे एक पिंक ब्रा देख कर मैं उसे पहनने लगी जबकि अब्दुल पतिदेव पर गुर्रा रहे थे ,”देख …सीता डार्लिंग को तो तू खुद चोद पाता नही है…अगर मैं चोद देता हूँ तो उसकी चूत घिस तो जाती नही…ख़ुसी ख़ुसी अपनी बीवी चुदवायेगा तो तुझे एक दर्ज़न बच्चे दूँगा खेलने के लिए वरना ये किसी रंडी खाने मे चुदती फ़िरेगी…..खैर तुझसे तो मैं बाद मे निपटुन्गा,पहले तेरी इस चूत की देवी से तो निपट लूँ….मैं नंगी खड़ी थी वहाँ सिवाय एक ब्रा के और पतिदेव बेबस!!!

फिर अब्दुल मेरे पास आए और हवा मे हाथ लहरा के मेरे चूतड़ पर ज़ोर का थप्पड़ लगा दिया…मैं दर्द से बिलबिला उठी…मेरे सामने आ गया था मेरे चूतड़ का सबसे बड़ा फन.अब्दुल गुस्से मे बिफर रहे थे,”साली….क्या सोच कर भागी थी तू???भूल गयी कि मैने तुझे एक दर्ज़न बच्चे देने का वादा किया था.”

मैने बिलख कर कहा,”अब्दुल….मैं तो खुद आपके लंड की दीवानी हूँ…लेकिन आपने मुझ पर ज़ुल्म किया था अपने दोस्तों के पास भेज कर….अगर आपने ऐसा नही किया होता तो मैं कभी आपको छोड़ कर नही जाती.”

मेरी बात सुनकर अब्दुल थोड़े नरम पड़ गये….बोले,”अगर ऐसा था तो तुम मुझसे कहती ना…मेरे लंड को महीनो तरसाने की क्या ज़रूरत थी??चलो अब हम फिर से वही वापस घर चलेंगे…बोलो चलोगि ना???”मैने हामी भरते हुए कहा,”हां…लेकिन हमारे साथ मेरे पति भी चलेंगे…मेरे बिना वो पागल हो जाते हैं.”

अब्दुल:”ठीक है डार्लिंग…तुम्हारा पति भी चलेगा लेकिन पहले महीनो से मैं तुम्हारी चूत का प्यासा हूँ…मैं तुम्हे अभी चोदुन्गा.मैने खिलखिला के अब्दुल का लंड पकड़ लिया तो अब्दुल ने मेरे गाल पर पप्पी ले ली,फिर कहा,”ऐसे ही खिलखिला खिलखिला के चुदना सीता डार्लिंग.”

पतिदेव हैरत मे थे कि क्या से क्या हो गया.

अब्दुल की महीनो की प्यास ही थी कि उन्होने तुरंत मुझे बेड पर खीच लिया और नंगे होकर मुझे अपने उपर बैठा लिया…उनकी हड़बड़ी देखकर मुझे खुद पर गुमान सा हुआ कि मैं ऐसी माल हूँ जिसे हर कोई चोदने के लिए तड़प्ता रहता है…..अब्दुल ने मेरी चूचियों को ब्रा से बाहर निकाल दिया और और हाथ मे लेकर मसल्ने लगे….खिलखिलाकर मैं थोड़ा उपर उचकी और अब्दुल का लंड अपनी चूत मे घुसा लिया…फिर हाथो को पीछे कर के सर पे रख लिया और हौले हौले पुश करने लगी…..मुझे थोड़ा दर्द महसूस हो रहा था…अब्दुल का लंड था ही ऐसा…ना जाने कितने शेखों के लंड की सवारी कर चुकी थी आपकी यह सीता देवी लेकिन अब्दुल का लंड हमेशा ही मेरी चूत मे पिस्टन की तरह जाता महसूस होता…

अचानक मेरी चूत पर अपनी दी हुई रिंग ना देख कर अब्दुल बोले,”सीता…तुम्हारी चूत से वो रिंग कहाँ गायब हो गया??हालाकी मैने खुद वो रिंग निकाल कर रख दी थी लेकिन टालने के लिए कह दिया,”पतिदेव ने निकाल दी थी…अब छोड़ो भी रिंग को चोदिये मुझे”.सुनकर अब्दुल मस्ती मे आ गये.मैं अब्दुल के लंड पर हौले हौले क़ब्रे डॅन्स कर रही थी और वो मुझे इशारों से तेज धक्के लगाने की इलतज़ा कर रहे थे…मैं शरारत से धक्के बंद कर देती तो वो तड़प उठते….एक दो बार तो उन्होने इलतज़ा की लेकिन मुझे खुद को तडपाने के मूड मे देख कर मेरे चूतड़ पर थप्पड़ लगा दिया.थप्पड़ का इतना ही असर हुआ कि मैं सीधे अब्दुल के लंड पर बैठ गयी और उनका लंड सब दीवारो को फाड़ते हुए बच्चेदानी से टकराया.

जोश मे आकर अब्दुल ने मेरी ब्रा खोल के फेंक दी और खुद मेरे पीछे आकर मेरी चूत मे लंड घुसा दिए और ताबड़तोड़ धक्के बरसाते चले गये…मेरे मूह से उहह,अया,हाईईइ मर गयी मम्मी निकलने लगा..जबकि अब्दुल दोनो हाथो मे मेरी चुचिया दबाए मुझे चोदते रहे.मेरे ठीक सामने पतिदेव अधमरे पड़े थे …मैं मुस्कुराकर उन्हे देख रही थी कि शायद इस से ही उनका गम कुछ हल्का हो…लेकिन मेरी मुस्कुराहट देखकर पतिदेव ने इस हालत मे भी अपनी नुन्नि बाहर निकाल ली और मूठ मारने लगे.ये देखकर तो बेसखता ही मेरी हँसी निकल गयी…और मेरी हँसी सुनकर अब्दुल वहसी बन गये…इतने धक्को के बाद मुझे लग गया कि झड़ने वाली हूँ..और झाड़ भी गयी…लेकिन अब्दुल का खुन्टा अभी भी वैसा ही खड़ा…और फिर अब्दुल ने वो किया जिसकी मुझे सुरू से तो आदत नही थी लेकिन शेखों के शौक के कारण उसकी खिलाड़ी बन चुकी थी…

मेरे भारी भारी चूतड़ पर सबका दिल आ जाता था और सब मेरी गान्ड मार लेते थे…और फिर अब्दुल तो मेरी गान्ड के आशिक़ थे.अब्दुल मुझे गोद मे उठाए सोफे पर आ गये…और गोद मे बिठाए बिठाए मेरी गान्ड मे अपना लंड डाल दिया….मैं गान्ड मरवाने मे इतनी उस्ताद हो चुकी थी कि बस थोड़ा सा दर्द हुआ सुरू मे,फिर तो मज़ा ही मज़ा….अब्दुल धक्के पर धक्के दिए जा रहे थे…बस फिर क्या था…अब्दुल भी झाड़ गये..

उस चुदाई के बाद हम सब वापस अपने घर के लिए रवाना हुए…मम्मी मुझसे मिलकर खुस तो थी लेकिन सोच रही थी कि फिर से वही ज़िंदगी बन गयी मेरी…लेकिन मैने मम्मी को समझा दिया कि अब अब्दुल ऐसा नही करेंगे.

इसके बाद तो मेरी जिंदगी बदल गई अब मेरी चूत को भूखा नही रहना पड़ता जब मन करता है अपनी चूत

की प्यास बुझा लेती हूँ मेरी कहानी आपको कैसी लगी ज़रूर बताना आपकी चुदासी सीता देवी

समाप्त

एंड

 
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