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Guest
उयईीई...जिस तरह से वो चीखी, मे सॉफ समझ गयी कि उसने उसकी 'चुनमुनिया' पकड़ ली.
हे क्या करते हो, बेसबरे...डू1... वो हंस के बोली.
पता नही चला...लो अभी बताता हूँ. और उसने और कस के हाथ से फ्रॉक के अंदर रगड़ दिया.
मस्ती से रजनी का चेहरा गुलाबी हो रहा था. वो अपने उपर से कंट्रोल खो रही थी, वो बोली,
अभी...छोड़ दो ना प्लीज़..साल भर की तो बात है, फिर तो रहूंगी ही तुम्हारे पास ना...
हल्की सी पीली गुन गुणाती धूप उसके गुलाबी चेहरे पे खेल रही थी, जहाँ एक लट उसके गालों को सहलाती लटक रही थी. सोनू ने वहीं एक चुम्मि चुरा ली और मुस्करा के बोला,
और अगर तुमने वहाँ भी ना की तो...
जैसे तुम पूछोगे ही...ना - बड़े शरीफ हो जो... शिकायत से हंस के वो बोली.
जवाब में सोनू ने उसके फ्रॉक के अंदर उसके टीन बूब्स कस के भींच लिए और कहा की,
अगर मान लो तुम तीन महीने में ही वहाँ आ गयी तो...
रजनी ने ज़ोर से सिसकी भरी. लगता है उसकी उंगलियों ने फिर कुछ और - हंस के कहा,
जो एक साल के बाद होता वो कुछ दिन पहले हो जाएगा.
मे समझ गयी कि चलो अब इन दोनों की पटरी सेट हो गयी. लेकिन तीन महीने में कैसे...उस समय तो वो तेन्थ में ही जाएगी और कोचिंग तो ग्यारहवें से शुरू होती है...मे सोचती हुई डाइनिंग टेबल की ओर चल दी. रामू टेबल सेट कर रहा था. मेने सोचा ज़रा मांझली दीदी के कमरे में भी चल के देख लूँ क्या हो रहा है. वो एक होल्डल से जूझ रही थीं. उनसे बंद नही पा रहा था. मेने रामू को आवाज़ दी और उससे होल्डल बाँधने को बोला. वो बोली, खाने का क्या हॉल है कितना टाइम लगेगा. मेने बताया कि बस लग रहा है तो वो बोली कि अगर पॅक करने वाला खाना भी बन गया होता तो...वो पॅक कर लेती वारना फिर...मेने रामू को बोला कि होल्डल आके बाद जाके किचन से गुड्डी दीदी से ले लेगा.
और गुड्डी तो जब मे किचन की ओर लौटी तो... सोनू से लसी हुई थी. मे एक खंभे के पीछे से खड़ी होके देखने लगी, उसने पहले उसे गाजर के हलवे का स्वाद चखाया और पूछा,
हे अच्छा है ना. वो चटखारे ले के बोला, बहुत. फिर थोड़ा उसने अपने हाथ से गुड्डी को खिला दिया. उसक रसीले होंठो पे लगे हलवे को फिर उसने अपनी उंगली पे लगा के चाट लिया और बोला, अब और स्वादी1 हो गया. हंसते हुए गुड्डी किचन में भाग गयी. पीछे पीछे मे...
बहुत खुश लग रही थी वो. हम दोनो खाना परोसने की तैयारी में लग गये. थोड़ी देर में रजनी और अंजलि भी आ गयीं. सब ने मिल के पाँच मिनट में ही खाना टेबल पे लगा दिया.
टेबल पे भी सोनू और रजनी की चुघल जारी थी. गुड्डी मेरे साथ खाना निकालने में लगी थी.
पिक्चर के लिए पहले तो रजनी ने मना कर दिया कि उसकी 8 बजे ट्रेन है. सबने कहा, जेठानी जी ने भी लेकिन वो ना नुकुर करती रही. लेकिन जैसे ही सोनू ने एक बार कहा रजनी प्लीज़ तो वो झट से मान गयी.
खाना हो गया... ससुराल वालें हो और गाना ना हो. अंजलि बार बार संजय को साले साले कह के छेड़ रही थी और संजय भी...डाइनिंग टेबल पे भी चालू था. उसका एक हाथ अंजलि के कंधे पे...कभी उसके गोरे गोरे गाल छेड़ता कभी उभार ...अंजलि ने भी उसने उसके हाथ को हटाने की कोई कोशिश नही की लेकिन दुलारी को चढ़ा के गाली शुरू करवा दी...एक से एक सब में संजय और सोनू का नाम रीमा से जोड़ के...वो रीमा के साथ बैठे खाना खा रहे थे. और उनका भी हाथ अपनी साली के कंधे पे...संजय को चिढ़ाते हुए वो बोले, क्यों साले मेरे माल पे ही हाथ सॉफ करने का इरादा है.
संजय के एक ओर अंजलि और दूसरी ओर गुड्डी थी. अंजलि के उभार हल्के से छूते हुए और गुड्डी के गाल पे हाथ फेर के वो बोला, अर्रे जीजू मुझे मालूम नही था कि ये माल आपके हैं.
क्रमशः…………………………….
हे क्या करते हो, बेसबरे...डू1... वो हंस के बोली.
पता नही चला...लो अभी बताता हूँ. और उसने और कस के हाथ से फ्रॉक के अंदर रगड़ दिया.
मस्ती से रजनी का चेहरा गुलाबी हो रहा था. वो अपने उपर से कंट्रोल खो रही थी, वो बोली,
अभी...छोड़ दो ना प्लीज़..साल भर की तो बात है, फिर तो रहूंगी ही तुम्हारे पास ना...
हल्की सी पीली गुन गुणाती धूप उसके गुलाबी चेहरे पे खेल रही थी, जहाँ एक लट उसके गालों को सहलाती लटक रही थी. सोनू ने वहीं एक चुम्मि चुरा ली और मुस्करा के बोला,
और अगर तुमने वहाँ भी ना की तो...
जैसे तुम पूछोगे ही...ना - बड़े शरीफ हो जो... शिकायत से हंस के वो बोली.
जवाब में सोनू ने उसके फ्रॉक के अंदर उसके टीन बूब्स कस के भींच लिए और कहा की,
अगर मान लो तुम तीन महीने में ही वहाँ आ गयी तो...
रजनी ने ज़ोर से सिसकी भरी. लगता है उसकी उंगलियों ने फिर कुछ और - हंस के कहा,
जो एक साल के बाद होता वो कुछ दिन पहले हो जाएगा.
मे समझ गयी कि चलो अब इन दोनों की पटरी सेट हो गयी. लेकिन तीन महीने में कैसे...उस समय तो वो तेन्थ में ही जाएगी और कोचिंग तो ग्यारहवें से शुरू होती है...मे सोचती हुई डाइनिंग टेबल की ओर चल दी. रामू टेबल सेट कर रहा था. मेने सोचा ज़रा मांझली दीदी के कमरे में भी चल के देख लूँ क्या हो रहा है. वो एक होल्डल से जूझ रही थीं. उनसे बंद नही पा रहा था. मेने रामू को आवाज़ दी और उससे होल्डल बाँधने को बोला. वो बोली, खाने का क्या हॉल है कितना टाइम लगेगा. मेने बताया कि बस लग रहा है तो वो बोली कि अगर पॅक करने वाला खाना भी बन गया होता तो...वो पॅक कर लेती वारना फिर...मेने रामू को बोला कि होल्डल आके बाद जाके किचन से गुड्डी दीदी से ले लेगा.
और गुड्डी तो जब मे किचन की ओर लौटी तो... सोनू से लसी हुई थी. मे एक खंभे के पीछे से खड़ी होके देखने लगी, उसने पहले उसे गाजर के हलवे का स्वाद चखाया और पूछा,
हे अच्छा है ना. वो चटखारे ले के बोला, बहुत. फिर थोड़ा उसने अपने हाथ से गुड्डी को खिला दिया. उसक रसीले होंठो पे लगे हलवे को फिर उसने अपनी उंगली पे लगा के चाट लिया और बोला, अब और स्वादी1 हो गया. हंसते हुए गुड्डी किचन में भाग गयी. पीछे पीछे मे...
बहुत खुश लग रही थी वो. हम दोनो खाना परोसने की तैयारी में लग गये. थोड़ी देर में रजनी और अंजलि भी आ गयीं. सब ने मिल के पाँच मिनट में ही खाना टेबल पे लगा दिया.
टेबल पे भी सोनू और रजनी की चुघल जारी थी. गुड्डी मेरे साथ खाना निकालने में लगी थी.
पिक्चर के लिए पहले तो रजनी ने मना कर दिया कि उसकी 8 बजे ट्रेन है. सबने कहा, जेठानी जी ने भी लेकिन वो ना नुकुर करती रही. लेकिन जैसे ही सोनू ने एक बार कहा रजनी प्लीज़ तो वो झट से मान गयी.
खाना हो गया... ससुराल वालें हो और गाना ना हो. अंजलि बार बार संजय को साले साले कह के छेड़ रही थी और संजय भी...डाइनिंग टेबल पे भी चालू था. उसका एक हाथ अंजलि के कंधे पे...कभी उसके गोरे गोरे गाल छेड़ता कभी उभार ...अंजलि ने भी उसने उसके हाथ को हटाने की कोई कोशिश नही की लेकिन दुलारी को चढ़ा के गाली शुरू करवा दी...एक से एक सब में संजय और सोनू का नाम रीमा से जोड़ के...वो रीमा के साथ बैठे खाना खा रहे थे. और उनका भी हाथ अपनी साली के कंधे पे...संजय को चिढ़ाते हुए वो बोले, क्यों साले मेरे माल पे ही हाथ सॉफ करने का इरादा है.
संजय के एक ओर अंजलि और दूसरी ओर गुड्डी थी. अंजलि के उभार हल्के से छूते हुए और गुड्डी के गाल पे हाथ फेर के वो बोला, अर्रे जीजू मुझे मालूम नही था कि ये माल आपके हैं.
क्रमशः…………………………….