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अब तक बाहर बैठी उसके कमरे के बगल वाली लड़की भी नहा कर आ गई थी।
उसके जाते ही प्राची बोली- तुम लोग कितना टाइम लगाते हो।
मैं अन्दर मुस्कुराया।
प्राची ने शायद अंकिता को इशारे में बताया कि ये बाहर नहीं जा रही।
अंकिता ने तेज़ आवाज़ में प्राची से बोला- जाओ अब तुम भी नहा लो.. क्लास जाना है ना?
वो मुझे बताना चाहती थी कि प्राची अन्दर जा रही है।
मैंने मन में सोचा कि इतना प्यार करके अंकिता को मनाया.. अब ये प्राची वापस अन्दर आ कर फिर उससे गुस्सा न दिला दे।
अंकिता को डर था कि उस पड़ोस की लड़की को शक न हो जाए या वो गलती से भी टॉयलेट ना चली जाए।
प्राची उठी और अपनी तौलिया लिया.. और अन्दर आ गई।
उसने दरवाजा बन्द करना चाहा, पर मैंने हाथ पकड़ कर उसे रोक दिया।
दरवाजे को हिलता और लॉक न देख कर अंकिता समझ गई, उसने कहा- प्राची दरवाजा लॉक कर नहाया करो.. कितनी बार बोला है.. वरना कमरे में पानी आ जाता है।
दरअसल अंकिता ने ये मुझे सुनाया था कि दरवाजा बन्द कर लो।
शायद अब उसे मुझ पर ट्रस्ट हो गया था। बाथरूम बन्द हो गया.. अन्दर मैं और प्राची थे।
वो थोड़ा बेशरम सी थी.. या मेरी खिंचाई कर रही थी।
वो धीरे से मेरे पास आई और कान में फुसफुसाई- मुझे नहीं नहलाओगे?
उसने यह कह कर मुस्कुराते हुए मुझे देखा।
मैंने भी उसकी मुस्कान का जवाब देने के लिए हल्की मुस्कान पास की।
अब उसने खुद से अपनी मैक्सी निकाली और उससे टांग दिया।
वो पूरी नंगी हो गई थी।
मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था.. क्योंकि मुझे जोर से पॉटी लगी हुई थी।
मैं धीरे से बोला- अगर तुम घूम जाओ तो मैं हल्का हो लूँ।
वो तेजी से मुस्कुराई और मैं टॉयलेट सीट तक पहुँचा, अपनी अंडरवियर को पूरा निकाल कर बाकी दरवाजे के पास टंगें कपड़ों की तरफ फेंक दिया और बैठने के साथ ही तेजी के साथ शुरू हो गया ‘आहाह..’
अब जाकर थोड़ी राहत मिली।
प्राची अभी भी नंगी खड़ी मुस्कुरा रही थी।
मैंने इशारे से बोला- नहाओ।
उसने चूत को आगे करके छेद की तरफ इशारा करके धीरे से बोला- पेशाब लगी है। वो नहाते समय भी कर सकती थी.. पर शायद वो मेरे लंड को देखना चाहती थी या कुछ और चाहती थी.. ये तो सही से वही जाने।
मैंने उसे इशारा करके अपने पास बुलाया, वो झट से आई।
मैं थोड़ा सा सरक कर पीछे को हुआ और उससे बोला- इतनी जगह में कर सकती हो?
वो ‘हाँ’ बोली और मेरे सामने आई। ज़मीन पर बैठी.. उसने अपने दोनों पैरों को फैलाया, एक पैर को मेरे दाईं ओर फैलाया.. दूसरे को बाईं तरफ फैला कर पैरों को एकदम सीधा किया, जिससे उसकी चूत एकदम साफ़ दिख रही थी।
उसकी चूत के बाल उसकी चूत को पूरा घेरे हुए थे.. लाजवाब सा नजारा था।
वो सरक कर थोड़ा आगे हुई उसकी गाण्ड का छेद टॉयलेट सीट तक आया। वो आधी लेट चुकी थी.. उसने जैसे ही मूतना शुरू किया.. उसकी पेशाब की पतली सी धार सीधे मेरे लंड और गाण्ड को भिगोती हुई चली गई।
उसकी पेशाब गरम थी, मुझे इसका पूरा अहसास हुआ।
मेरे बदन में अजीब सी झनझनाहट हुई आह.. वो वहीं पॉटी भी करने लगी। 20249384.gif
उसके जाते ही प्राची बोली- तुम लोग कितना टाइम लगाते हो।
मैं अन्दर मुस्कुराया।
प्राची ने शायद अंकिता को इशारे में बताया कि ये बाहर नहीं जा रही।
अंकिता ने तेज़ आवाज़ में प्राची से बोला- जाओ अब तुम भी नहा लो.. क्लास जाना है ना?
वो मुझे बताना चाहती थी कि प्राची अन्दर जा रही है।
मैंने मन में सोचा कि इतना प्यार करके अंकिता को मनाया.. अब ये प्राची वापस अन्दर आ कर फिर उससे गुस्सा न दिला दे।
अंकिता को डर था कि उस पड़ोस की लड़की को शक न हो जाए या वो गलती से भी टॉयलेट ना चली जाए।
प्राची उठी और अपनी तौलिया लिया.. और अन्दर आ गई।
उसने दरवाजा बन्द करना चाहा, पर मैंने हाथ पकड़ कर उसे रोक दिया।
दरवाजे को हिलता और लॉक न देख कर अंकिता समझ गई, उसने कहा- प्राची दरवाजा लॉक कर नहाया करो.. कितनी बार बोला है.. वरना कमरे में पानी आ जाता है।
दरअसल अंकिता ने ये मुझे सुनाया था कि दरवाजा बन्द कर लो।
शायद अब उसे मुझ पर ट्रस्ट हो गया था। बाथरूम बन्द हो गया.. अन्दर मैं और प्राची थे।
वो थोड़ा बेशरम सी थी.. या मेरी खिंचाई कर रही थी।
वो धीरे से मेरे पास आई और कान में फुसफुसाई- मुझे नहीं नहलाओगे?
उसने यह कह कर मुस्कुराते हुए मुझे देखा।
मैंने भी उसकी मुस्कान का जवाब देने के लिए हल्की मुस्कान पास की।
अब उसने खुद से अपनी मैक्सी निकाली और उससे टांग दिया।
वो पूरी नंगी हो गई थी।
मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था.. क्योंकि मुझे जोर से पॉटी लगी हुई थी।
मैं धीरे से बोला- अगर तुम घूम जाओ तो मैं हल्का हो लूँ।
वो तेजी से मुस्कुराई और मैं टॉयलेट सीट तक पहुँचा, अपनी अंडरवियर को पूरा निकाल कर बाकी दरवाजे के पास टंगें कपड़ों की तरफ फेंक दिया और बैठने के साथ ही तेजी के साथ शुरू हो गया ‘आहाह..’
अब जाकर थोड़ी राहत मिली।
प्राची अभी भी नंगी खड़ी मुस्कुरा रही थी।
मैंने इशारे से बोला- नहाओ।
उसने चूत को आगे करके छेद की तरफ इशारा करके धीरे से बोला- पेशाब लगी है। वो नहाते समय भी कर सकती थी.. पर शायद वो मेरे लंड को देखना चाहती थी या कुछ और चाहती थी.. ये तो सही से वही जाने।
मैंने उसे इशारा करके अपने पास बुलाया, वो झट से आई।
मैं थोड़ा सा सरक कर पीछे को हुआ और उससे बोला- इतनी जगह में कर सकती हो?
वो ‘हाँ’ बोली और मेरे सामने आई। ज़मीन पर बैठी.. उसने अपने दोनों पैरों को फैलाया, एक पैर को मेरे दाईं ओर फैलाया.. दूसरे को बाईं तरफ फैला कर पैरों को एकदम सीधा किया, जिससे उसकी चूत एकदम साफ़ दिख रही थी।
उसकी चूत के बाल उसकी चूत को पूरा घेरे हुए थे.. लाजवाब सा नजारा था।
वो सरक कर थोड़ा आगे हुई उसकी गाण्ड का छेद टॉयलेट सीट तक आया। वो आधी लेट चुकी थी.. उसने जैसे ही मूतना शुरू किया.. उसकी पेशाब की पतली सी धार सीधे मेरे लंड और गाण्ड को भिगोती हुई चली गई।
उसकी पेशाब गरम थी, मुझे इसका पूरा अहसास हुआ।
मेरे बदन में अजीब सी झनझनाहट हुई आह.. वो वहीं पॉटी भी करने लगी। 20249384.gif