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मेरी प्यारी सासू माँ

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Guest
हैलो पाठको, मेरा नाम सतीश है.. आज मैं आपके सामने अपनी सासू माँ की और अपनी आप बीती डर्टी कहानी पेश करने जा रहा हूँ. मैं आशा करता हूँ कि आप सबको ये सेक्स स्टोरी पसंद आएगी.

मेरी शादी को 5 साल हो गए हैं और मेरी ससुराल मेरे ही शहर में है. मेरे सास ससुर अकेले रहते हैं. मेरी सास मोहिनी, जिनकी उम्र तकरीबन 45 साल होगी. उनकी आयु जरूर पैंतालीस साल की है, मगर वो दिखने में अभी 30-35 की ही लगती हैं. उनका साइज़ 36-30-34 का है. जब भी मैं उनकी उठी हुई गांड को देखता हूँ तो मेरी लार टपकने लगती है. मैं ऐसा कोई मौका नहीं छोड़ता था, जब उन्हें टच करने का अवसर मिलता. वे भी मेरी तरफ कनखियों से देखती रहती थीं. लेकिन मैं उनकी इस नजर कभी समझ नहीं पाया था.

एक बार मेरे ससुर जी को बाहर उनके बेटे के पास जाना पड़ा तो वो मेरी बीवी को भी अपने साथ ले गए. वे बोले कि चलो तुम्हें भी घुमा लाता हूँ. हालांकि उन्होंने मुझसे भी साथ चलने को कहा था, पर मुझे छुट्टी नहीं मिल रही थी. इसलिए मैंने साथ जाने से मना कर दिया.

मेरी सास मोहिनी ने कहा- ठीक है. मैं दामाद जी का ध्यान रखने के लिए यहीं रुक जाऊंगी. दामाद जी इतने दिन तक यहीं मेरे साथ ही रह लेंगे. मैं रहूँगी तो इनके खाने पीने का ख्याल भी रख लूँगी.

इस बात पर मेरी बीवी और ससुर राजी हो गए.. और अपने जाने की तैयारी करने लगे.

जिस दिन मेरी बीवी और ससुर बाहर गए, मैं और मेरी सास मोहिनी उन्हें स्टेशन छोड़ने गए थे. उनकी शाम को 7.30 बजे की ट्रेन थी. उनकी ट्रेन जाने के बाद स्टेशन पे ही मैं और मेरी सास मोहिनी एक दूसरे को देखने लगे.

मैंने कहा कि अब कहिए मम्मी.. अब क्या प्लान है आगे का.. अब तो आप और हम अकेले ही रह गए हैं.

तो वो बोलीं कि हां आज का खाना बाहर ही खाते हैं.

मैंने कहा- ठीक है.

फिर हमने एक होटल में डिनर किया और रात करीब 10.30 बजे हम घर पहुंच गए. उस रात मौसम बहुत सुहाना और ठंडा हो रहा था क्योंकि बारिश का मौसम आने ही वाला था, तो हवा भी तेज़ चल रही थी. मेरी कार में अंधेरा था और मेरी सासू मोहिनी मेरे बाजू वाली सीट पर बिंदास बैठी थीं.. उनका पल्लू भी उनके मम्मों से हटा हुआ था, मैं जब भी गियर चेंज करता तो मेरा हाथ उनकी जांघों से टकरा जाता.. और वो हर बार फिर थोड़ी संभल कर बैठने का नाटक करने लग जातीं.

उस दिन मेरी सास मोहिनी ने स्काई ब्लू कलर की साड़ी पहनी हुई थी और स्टेशन की भागदौड़ में उनकी साड़ी उनकी नाभि से भी नीचे हो गयी थी.. इसका उन्होंने ध्यान भी नहीं दिया था.. या वे ध्यान देना नहीं चाहती थीं.

इतने में ही बारिश शुरू हो गयी, तो मैंने कहा- मम्मी जी, कार की खिड़की बंद कर लो, पानी अन्दर आ रहा है.

तो बोली- पहली बारिश है.. और वैसे भी घर ही तो जाना है, भीग जाने दो.

मैंने कहा- ठीक है.

यह कह कर मैंने भी अपनी खिड़की खोल दी. मैंने देखा बारिश की हल्की हल्की बूँदें उनके चेहरे पे पड़ रही थीं और उनके बालों पे ओस की बूँद जैसी लग रही थीं..

घर आते आते वो थोड़ी ज्यादा ही भीग गयी थीं. मैंने कार पोर्च में पार्क खड़ी की और वो घर का गेट खोलने लगीं.

दरवाजे का की-होल थोड़ा नीचे को था. तो सासू को जरा झुकना पड़ा.. और जैसे ही वो झुकीं.. उनका पल्लू पूरा नीचे गिर गया और गांड थोड़ा बाहर को निकल आई. इससे हुआ ये कि उनकी पतली साड़ी में से उनकी पेंटी की आउटलाइन दिखने लगी. जब वे दरवाजा खोल कर पलट कर मुझे अन्दर आने को कहने के लिए घूमी तो मेरे लंड में तो मानो आग लग गई, उनकी आधे से ज्यादा चूचियां ब्लाउज से बाहर दिख रही थीं क्योंकि उन्होंने पल्लू नीचे ही गिरा रहने दिया था.

यह देख कर मेरा तो लंड ही खड़ा हो गया. लॉक खुलते ही हम दोनों घर में घुसे तो घर में भी अंधेरा था. हमारे यहां लाइट की बहुत दिक्कत थी, ज़रा भी हवा चलती तो लाइट गोल हो जाती थी.

उन्होंने कहा- उफ़फ्फ़ … फिर लाइट चली गयी.. अब पता नहीं रात कैसे कटेगी.

तो मैंने कहा- मम्मी चिंता मत करो, मैं साथ हूँ तो आपकी रात खराब नहीं होने दूँगा.

वे हल्की से हंस पड़ीं. मुझे उनकी हंसी में कुछ मतलब समझ आया.

इतने में उन्होंने एमर्जेन्सी लाइट जलाई और मुझे देख कर फिर से हँसने लगीं. वो बोलीं कि मैं कपड़े चेंज कर लेती हूँ, आप बैठो.. फिर आप चेंज कर लेना.

मैंने कहा- ठीक है.

सासू माँ अपने रूम में चली गईं. अंधेरा होने की वजह से उन्हें डर लग रहा था तो वो आवाज देते हुए बोलीं कि मैं दरवाजा बंद नहीं कर रही हूँ क्योंकि मुझे डर लगता है.

मैंने कहा- ठीक है, आप चिंता मत करो. मैं अन्दर नहीं आऊंगा और वैसे भी अगर आ गया तो मुझे अंधेरे में कुछ दिखेगा ही नहीं.

तो इस पर वो बोलीं- वैसे भी बेटा … अब इस उम्र में मेरे पास तुम्हें दिखाने लायक कुछ है भी नहीं.

 
फिर मैं हंसते हुए ड्रॉइंग रूम में बैठ गया. मगर मेरे दिमाग़ में अभी भी उनका गिरा हुआ पल्लू और बाहर झाँकते दूध और निकली हुई गांड चल रही थी.

इतने में ही उनकी चिल्लाने की आवाज़ आई तो मैं दौड़ कर गया.. और जाते जाते ध्यान आया कि वो कपड़े बदल रही हैं तो मैं दरवाजे पे ही रुक गया.

मैंने पूछा- क्या हुआ?

तो मोहिनी जी बोलीं- अभी मेरे पैर के ऊपर से रेंगते हुए कुछ गया.

मैंने हिचक छोड़ दी और अन्दर आ गया. मैंने देखा कि उनकी साड़ी का पल्लू गिरा हुआ है और उनकी साँसें तेज़ चल रही थीं. इस स्थिति में उनके दूध ऊपर नीचे हो रहे थे. मैंने बाहर से चाँद से आती हुई रोशनी में उन्हें देखा तो वो एकदम परी लग रही थीं.

उनकी लिपस्टिक उनके होंठों पर इतने अंधेरे में भी चमक रही थी और बार बार उनके होंठ मुझे पुकार रहे थे. मैं उनके पास को गया और मैंने कहा- मैं यहीं खड़ा हूँ.. आप कपड़े बदल लो.. मैं इधर नहीं देखूँगा.

वो बोलीं- ठीक है.. आप कहीं मत जाना.

अब मैं बेड पर उनकी तरफ पीठ करके बैठ गया और मुझे उनकी चूड़ियों और गहनों की खनकने की आवाज़ आ रही थी. इतने में मेरे पास उनकी साड़ी उड़ती हुई आई और मेरी गोदी में गिरी. मुझे समझ आ गया कि ये साड़ी उन्होंने मेरी तरफ जानबूझ कर ही फेंकी है.

मैंने थोड़ा सा कनखियों से देखा तो वो पेटीकोट और ब्लाउज में खड़ी अलमारी में से कुछ निकालने की कोशिश कर रही थीं.

मगर उन्हें मिल नहीं रहा था तो वो बोलीं कि बेटा ज़रा मेरे कपड़े निकालने में मेरी मदद कर दो.

मैंने भी हरामी बनने की सोच कर कहा- ठीक है.. अभी निकाल देता हूँ.

मैं उनके पास जाकर खड़ा हो गया तो बोलीं- क्या हुआ निकालो ना?

मैंने हाथ उनकी तरफ बढ़ा दिए.

वो बोलीं- ये क्या कर रहे हो बेटा?

मैंने कहा कि आपने ही तो कहा- कपड़े निकालने में मेरी मदद करो.

तो वो ज़ोर ज़ोर से हँसने लगीं और बोलीं कि अरे बुद्धू बेटा.. मैं ये नहीं.. मैं तो अलमारी से कपड़े निकालने को बोल रही थी.

मैंने कहा- ओह.. मुझे लगा कि शायद आप अपने…

और मैं ऐसा बोलते बोलते चुप हो गया. फिर वो पीछे को, अलमारी की तरफ अपनी पीठ और गांड मेरी तरफ करके घूमी.

फिर पता नहीं क्या हुआ कि वे एकदम से बोलीं- ठीक है मेरे ही कपड़े उतारने में मदद कर दो, बाकी मैं कर लूँगी, मेरा ब्लाउज पीछे से हुक वाला है, बस आप इसे खोल दो.

मेरी तो जैसे लॉटरी लग गयी. मैं उनके पास गया और उनकी पीठ पे हाथ रख कर ऐसी एक्टिंग करी, जैसे मुझे हुक नहीं मिल रहे हो. वो कंधे हिलाने लगीं, उन्हें शायद कुछ अजीब सा लगा हो.

इतने में मैंने उनकी गर्दन पे एक किस कर दिया तो वो एकदम से दूर होके बोलीं- बेटा, ये क्या कर रहे हो?

तो मैंने कहा- आप बहुत सुंदर लग रही हो.. तो मेरी इच्छा हुई कि आपकी सुंदरता के लिए आपको कुछ इनाम दूँ, तो मैंने दे दिया.

वो मुस्कुराईं और उन्होंने मुझे गले से लगा लिया. मेरी सासू माँ के कड़े दूध मेरी छाती से टकराए, तो मैंने उन्हें कसके बांहों में भर लिया और उनके गालों पे किस करने लगा. मैंने उनकी गर्दन पे अपनी उंगलियां चलानी शुरू कर दीं.

अब सब कुछ खुल गया था, मेरी सास मेरे साथ सेक्स करने को मचल रही थीं.

मेरी उंगलियां उनकी गर्दन के पीछे से होती हुई.. आगे उनके ब्लाउज के कोने तक आ गईं. मेरी सास मोहिनी जी की सांसें तेज़ चलने लगीं और उनकी उंगलियों की पकड़ मेरे पे और बढ़ गई. फिर मैंने उनके होंठों पे अपने होंठ रख दिए और हम एक दूसरे की सांसों में खोने लगे. इतने में उन्होंने अपने होंठ खोल दिए और मेरी जीभ उनके मुँह में अन्दर उनकी जीभ से लड़ने लगी. दो पल बाद ही हमारी लार एक दूसरे में मिलने लगीं.

फिर उनके हाथ मेरी पीठ पे रेंगने लगे और उन्होंने मेरी पैन्ट में खुरसी हुई शर्ट बाहर निकाल दी. मैं अपना हाथ उनकी पीठ पे ब्लाउज के नीचे ले गया और उनकी स्किन को छूते ही जैसे उन्हें करेंट सा लगा.

वो थोड़ा सा उचकीं और एक आआ आहह भरी. साथ ही उन्होंने अपनी छातियों को और मेरे करीब कर दिया. फिर मैंने अपने हाथ उनके पेटीकोट के ऊपर से ही उनकी गांड पे ले गया और उंगलियों से जैसे ड्रॉइंग बनाने लगा. वो भी अपनी गांड को इधर उधर हिलाने लगीं.

फिर मैंने अपने एक हाथ उनके दूध पे रख दिया और हल्के हल्के से उनके दूध पे भी ड्रॉइंग सी बनाने लगा.

अब वो पूरी तरह से मेरी हो गई थीं. मैंने उन्हें गोद में उठाया और बेड पे ले गया. इतने में ही लाइट भी आ गयी तो वो शर्मा गईं और अपना मुँह अपने हाथों से छुपाने लगीं.

उनके पैर बेड के बाहर लटक रहे थे. मैंने नीचे फर्श पर बैठे कर उनकी सैंडिल उतार दीं और उनके पैरों को सहलाने लगा.

वो बोलीं कि जब भी तुम मेरे पैर छूते थे.. तो मुझे कुछ अजीब सी फीलिंग होती थी.. आज समझ में आया कि वो सब क्यों होता था. क्योंकि तुम्हारे अन्दर भी उतनी ही आग लगी थी, जितनी कि मेरे अन्दर लगी है.

मैंने कहा- हां.

फिर मैंने उनके पैरों की उंगलियों को चूमना शुरू किया तो वो सिसकारियां लेने लगीं- आहह उम्म्म्म ममम ऊऊहह बेटा.. आज मेरी हर इच्छा पूरी कर दो..

मैंने कहा- हां सासू माँ, आज तो मैं आपकी और मेरी दोनों की हर इच्छा पूरी कर दूँगा.

फिर मैं उनको चूमते हुए थोड़ा ऊपर उनके पैरों की एड़ियों तक आ गया तो उनकी पायल बजने लगी. एक हाथ से मैं उनके पैर पे हाथ फेर रहा था और दूसरे हाथ से मैं उनके पेट पे ड्राइंग सी बना रहा था.

वो अपनी गांड को हिलाते हिलाते उचक रही थीं और मुँह से तरह तरह की आवाजें निकाल रही थी- ह्म्म्म्म म आहह बेटा आअहह ओह…

फिर मैं उनके पास पलंग पे आकर बैठ गया और उन्हें भी उठाकर बिठा दिया. अब उन्होंने अपना काम शुरू किया और मेरी शर्ट के सारे बटन खोल कर मेरी बेल्ट उतार दी. फिर मेरी जीन्स भी खींचने लगीं.. थोड़ी देर में ही मैं उनके सामने सिर्फ़ अपनी जॉकी में था; उन्होंने मेरी अंडरवियर के ऊपर से ही मेरे लंड को पकड़ के सहलाना शुरू कर दिया. तो मेरा लंड फूल के जॉकी से बाहर आने को करने लगा.

वो बोलीं- इसे क्यों क़ैद करके रखा है.. इसे आज़ाद तो कर दो.

मैंने कहा- क़ैद मैंने किया है ताकि तुम्हारे हाथों से आजाद हो सके.

उन्होंने अंडरवियर के ऊपर से ही मेरे लंड को एक किस किया और उनके होंठों की लिपस्टिक का हल्का सा निशान मेरी अंडरवियर पे पड़ गया.

वो अंडरवियर उसके बाद मैंने कभी नहीं पहनी और आज तक संभाल के रखी है.

फिर उन्होंने अपने हाथ मेरी गांड के नीचे से मेरी अंडरवियर के अन्दर डाले और एक ही झटके में मेरा लंड फुदक कर बाहर उनके मुँह के सामने स्प्रिंग की तरह हिलने लगा.

फिर उन्होंने झुक कर कहा- आज मैं तुम्हें बताऊंगी कि मैं क्यों इतने दिनों से तड़प रही थी.

और ऐसा कहते कहते उन्होंने अपनी मुट्ठी में मेरा लंड पकड़ लिया. किसी कॉर्क की बॉटल की तरह मेरा लंड मेरी सास के हाथ में था. दूसरे हाथ से वो मेरे बॉल्स को सहला रही थीं.

‘ह्म्म्म्म .. आआआहह.. साआसूउउउ माँआ आआहह.. मेरी मनमोहिनीई ईईई..’

मेरे कामुक स्वर कमरे में गूंजने लगे.

फिर उन्होंने मेरे प्यूबिक रीजन पे अपने होंठ रख दिए और अपने होंठ वहां फिराने लगीं. इससे मेरे लंड का साइज़ और बढ़ने लगा. धीरे धीरे करते हुए वो मेरे लंड पे आ गईं और फिर उन्होंने मेरा लंड अपने मुँह में ले लिया.

अ.. आहह.. दोस्तो क्या मस्त फीलिंग थी.. मैं शब्दों में बयान तो नहीं कर सकता.. मगर फिर भी कोशिश कर रहा हूँ.. मेरी सासू माँ के गीले गीले मुँह से मेरा लंड और भी गरम हो रहा था और बढ़ता ही जा रहा था. इतना बड़ा मेरा लंड आज तक कभी नहीं हुआ था.

 
मेरी सास की चुदाई की इस सेक्स स्टोरी के पिछले भाग

मेरी प्यारी चुदासी सासू माँ-1

में आपने पढ़ा कि मैं अपनी सास के मुँह में अपना लंड डाल कर मजा ले रहा था.

अब आगे..

मैंने अपने हाथ अपनी सासू माँ के बालों में फंसा लिए और उनका मुँह अपने लंड पे दबाने लगा. फिर मोहिनी जी ने भी अपनी स्पीड धीरे धीरे बढ़ा दी. अब वो पूरा लंड अपने मुँह में ले चुकी थीं.. और उसे अन्दर बाहर करके मुझे मुखचोदन करवा रही थीं.

तभी मेरा बदन अकड़ने लगा और मैंने कहा- बस मम्मी, रुक जाओ … नहीं तो मैं आपको गंदा कर दूँगा.

वो बोलीं- कर दो… आज तो तुम मेरे साथ जो करना चाहो, कर दो… ह्म्म्म्म म.. ऊऊहह दामाआद हो तो ऐसा.. आह.. उहह..

तभी मैंने एकदम से पिचकारी छोड़ दी उनके मुँह में जो सीधे उनके गले में उतर गई. बाद में मेरी सास ने मेरे लंड से जो धीरे धीरे रस बह रहा था, उसे भी चाट के साफ़ कर दिया.

अब उनका चेहरे और गर्दन की स्किन एकदम लाल हो गयी थी.

वो उठीं और जाकर मुँह धोकर फिर से बाथरूम से लिपस्टिक लगा आईं. इसके बाद वे आकर मेरे बगल में लेट गईं.

अब फिर से उन्होंने अपने हाथ धीरे धीरे मेरे सीने पे चलाना शुरू किए और कुछ ही पल बाद वो उठ कर मेरे सीने पे बैठ गईं और मेरे निप्पल को किस करने लगीं. इससे मेरा लंड फिर से तन्नाने लगा. फिर उन्होंने मेरे लंड को हाथ से पकड़ लिया और अपनी उंगलियां मेरी गोटियों और गांड के छेद पे फिराने लगीं.

फिर तो मैंने उन्हें झटके से अपने नीचे लेटा दिया.. और उनके पेटीकोट के ऊपर से ही मैंने अपना लंड उनकी चूत पे दबाने लगा था.

मेरी सास बोलीं- क्या आज मेरे पेटीकोट को भी अन्दर डाल दोगे?

तो मैंने कहा- पेटीकोट ही नहीं उसके नीचे पेंटी भी होगी ना.. वो भी आज डाल दूँगा.. तो मेरा जूस फिल्टर होकर जाएगा.

मेरी इस बात पर हम दोनों ही हँसने लगे.

फिर मैंने उन्हें उल्टा घुमा दिया. अब वो पेट के बल लेटी थीं और मेरे हाथ उनकी पीठ पर से चलते हुए.. उनकी गांड को क्रॉस करते हुए उनके पैरों पर आ गए थे. फिर मैंने उनके ब्लाउज के सारे हुक खोले और उन्हें अपने सामने बिठा लिया. फिर मैंने अपने दोनों हाथ उनके पीछे लेजा कर उनके ब्लाउज को उतार दिया. उन्होंने अन्दर सफ़ेद रंग की ब्रा बहनी थी, जिसके बीच में एक फूल बना था.

उन्होंने अपने दोनों हाथ मेरे कंधे के दोनों तरफ रख दिए और मैं नीच झुक कर उनकी बगलों में घुस कर सूंघने लगा. वही पुरानी उनकी प्यारी से खुशबू पसीने में मिक्स होकर आ रही थी, जो मुझे काफ़ी पसंद थी. मैं अपनी सास की बगलों को चाटने लगा.

फिर वो लेट गईं और मैं उनकी बगलें चाटते हुए उनकी ब्रा के साइड में आ गया. वो मेरे मुँह में देने के लिए अपने दूध उचकाने लगीं. मैं उन्हें किस करते हुए उनकी नाभि तक आ गया.

वॉवव… क्या सीन था. उनकी नाभि के पास पसीने की बूंदें थीं और उनकी नाभि ऐसी चमक रही थी, जैसे कोई सोना धूप में चमचमाता है. मैंने झुक कर अपनी जीभ उनकी नाभि में डाल दी और उन्होंने एकदम से उचक के मेरा सिर पकड़ लिया.. और अन्दर को दबाने लगीं- आआमम्म्म.. क्या कर रहे हो कितना तड़पा रहे हो दामाद जी!

मैंने उनके पेटीकोट के नाड़े में अपनी उंगलियां फंसाईं और उसे खींच दिया. पेटीकोट हटा तो मुझे उनकी रेड और वाइट आदि लाइन्स वाली पेंटी के थोड़े थोड़े दर्शन होने लगे. मैंने अपना हाथ नीचे फिराते हुए उनके पेटीकोट को नीचे को सरकाया और जब मेरा हाथ उनकी पेंटी के ऊपर से उनकी चूत को छूते हुए निकला, तो जैसे वो मर ही गईं.

वो एकदम से सीत्कार करने लगीं- उउफफ्फ़ सीईईईईईई बेटा अब तो कुछ कर ही दो.. आआआअहह..

इस वक्त वो मेरे सामने पसीने में नहाई हुई सिर्फ़ सफेद ब्रा और रेड और वाइट आड़े स्ट्रिप्स वाली पेंटी में लेटी हुई थीं. और वो ऐसे तड़प रही थीं, जैसे कम पानी में कोई मछली तड़फती है. फिर मैंने अपने पैरों की उंगलियां उनकी पेंटी के ऊपर से ही चूत पे रख दीं. वो तो इतनी अधिक चुदासी थीं कि मेरी उंगलियों को ही चुत के अन्दर घुसाने में लग गईं और अपनी गांड मटकाने लगीं.

मैंने उन्हें उठा कर अपनी गोद में बिठा लिया. वो लपक कर मेरी गोदी में आ गईं, उनकी दोनों टांगें मेरी कमर से लिपटी हुई थीं. मैंने उनके होंठों को किस करना शुरू किया और उनको अपने से चिपका कर अपने हाथ उनके पीठ पे फिराने लगा. उनके बालों में हाथ डाल के मैंने उनका सिर पीछे को कर दिया और अपने होंठ उनकी गर्दन पे रख दिया.

फिर धीरे धीरे नीचे उनकी दूध घाटी तक आ गया और उसी वक्त मैंने पीछे से उनकी ब्रा का हुक खोल दिया. उनके कड़क हो चुके मम्मे एकदम से जैसे आज़ाद हो गए और उनकी ब्रा लटक गई. फिर मैंने उसे ऐसे ही लिटा दिया और उनकी ब्रा उतार फेंकी.

वो मेरे सामने मेरी कमर में पैर लपेटे हुए सिर्फ़ पेंटी में लेटी हुई थीं जो गीली होने लगी थी. एक मस्त सी खूशबू पूरे रूम में छा गयी थी. मैंने उनके निप्पलों पर हल्के हल्के से मसाज देनी शुरू की.. और फिर धीरे धीरे अपनी हथेलियों से ग्रिप बनाते हुए उनके दूध पकड़ कर सहलाने लगा साथ ही उनकी नाभि में अपनी जीभ घुसा दी.

 
अब मेरी जीभ उनकी नाभि और प्यूबिक रीजन में उनकी पेंटी के ऊपर घूम रही थी. अपने हाथ से मैं उनके दूध मसल रहा था और अपनी उंगलियों के बीच में उनके निप्पलों को फंसा फंसा के दबा रहा था. वो अपनी गांड उचका उचका कर मेरे लंड से अपनी चूत को दबा रही थीं.

मैंने उनकी चूत के ऊपर पेंटी के ऊपर से ही अपने होंठ रख दिए.. तो एकदम से मेरी सास की आवाज़ निकल गई- उउऊहफफ्फ़.

वो बोलीं- ऐसा लगा जैसे कि तुमने जलती हुई माचिस की तीली डाल दी हो.. ह्म्म्म्म म.. उम्म्म्म..

मेरे हाथ उनके मम्मों से नीचे होते हुए पीछे उनकी कमर तक पहुंच गए थे और मैंने उनकी जांघों को मसाज करना शुरू कर दिया. फिर मोहिनी ने अपनी टांगें खोल दीं और चौड़ी कर दीं. अब मैं अपने मुँह से उन्हें पेंटी के ऊपर से ही चोद रहा था और वो तड़प रही थीं- हमम्म्म.. बेटा आह आआआअहह आई लव यू.. फक्क मी राजाआ.. आअहह..

मेरे हाथ उनकी जांघों से होते हुए साइड से उनकी पेंटी के अन्दर चले गए. मैंने उनकी पेंटी खींच के उतार दी.

आआआअहह … मोहिनी ने क्या मस्त चूत पाई थी.. उनकी चूत पे एक भी बाल नहीं था… और ऐसी गुलाबी रंगत लिए हुए फूली सी चूत थी कि मेरा लंड बाग़ बाग़ हो गया. इस वक्त मेरी सास की चूत में से पानी सा रिस रहा था, जो उनकी चूत की लाइन से होता हुआ, उनकी गांड के छेद में घुसते हुए बिस्तर पर भी टपक रहा था.

मैं अभी अपनी सास की चूत के दीदार ही कर रहा था कि इतने में ही उन्होंने मेरा मुँह पकड़ कर अपने चूत पे दबा दिया.

“आआआ आअहह उई उम्म्म्म…”

फिर मैंने धीरे से उनकी चूत की फांकों को खोला और अन्दर से उनका चना सा दाना दिखने लगा, तो मैंने अपनी जीभ से उसे छेड़ दिया. वो फिर से तड़प गईं.

मैंने अपनी जीभ उनकी पूरी चूत पे फिरानी शुरू की तो वो उचक उचक के मेरा साथ देने लगीं. मैं साथ साथ अपने हाथों से उनकी जांघें, दूध, बगलें, पेट, गांड सब मसल रहा था.

इतने में ही मेरी सास का बदन टाइट हो गया और एकदम से वो ढीली पड़ गईं. वो झड़ चुकी थीं और उनकी चूत का रस मेरे मुँह में आ रहा था. मुझे ऐसा लग रहा था कि नमकीन अमृत पी रहा होऊं.

मैंने अपनी सास की चूत का पूरा रस पी लिया.. यहां तक कि जो रस चादर पे भी गिर रहा था, वो भी मैंने चाट लिया.

अब मेरी सास मुझसे बोलीं- तुम बहुत नॉटी हो मुझे किए बिना ही ठंडा कर दिया, लेकिन मुझे अभी तृप्ति नहीं मिली है, मैं बाथरूम से आती हूँ. अभी मुझे सूसू आ रही है.

तो मैंने कहा- तो कहीं जाने की क्या ज़रूरत है.. यहीं मैं हुआ ना तुम्हारी टॉयलेट सीट.. आ जाओ.

मेरी सास बोलीं- धत्त् शरम नहीं आती क्या..?

तो मैंने अपनी सास को अपनी तरफ खींचते हुए कहा कि अब भी तुम्हें मुझसे किसी काम में शर्म आएगी क्या?

फिर वो मना करने लगीं, तो मैं ज़िद करने लगा.. अंततः वो मान गईं.

अब मैं नीचे फर्श पर लेट गया. वो 69 में मेरे ऊपर मेरे मुँह पे अपनी चूत लगा कर बैठ गईं और उन्होंने अपने मुँह में मेरा लंड पकड़ लिया.

फिर मेरा इशारा पाते ही उन्होंने एक तेज़ धार छोड़ी, सर्रर्र… करके उनकी पेशाब मेरे मुँह में आने लगी.

“आआआहह मज़ा आ गया मेरी जान.. इतना मज़ा तो किसी कोल्ड ड्रिंक में भी नहीं आता.. जो आपकी इस हॉट ड्रिंक में है मम्मी जी…”

दो पल बाद ही उनकी चूत में से टॉयलेट की बूँद बूँद टपक रही थी.. मगर मैं एक भी बूँद नहीं मिस करना चाहता था, तो मैंने ज़ोर से उनकी चूत पर अपने मुँह का ढक्कन लगा कर पूरा रस चाट लिया.

मैं अब बिस्तर पर आ गया, हल्की होने के बाद वो भी मेरी बाजू में लेट गईं और अपने हाथों से मेरा लंड सहलाते हुए उससे खेलने लगीं.

मेरे हाथ इस वक्त अपनी सास की चूत पे थे और मैं उनकी चूत को सहला रहा था. मैंने धीरे धीरे उनकी चूत पे हाथ फेरते हुए अपनी एक उंगली को उनकी चूत में डाल दी, तो वो थोड़ी उचक कर बोलीं- क्या कर रहे हो यार.. बता दो दिया करो.

मैं उसी एक उंगली को उनकी चूत में अन्दर बाहर करने लगा. चूत कुछ गरम हुई तो मैंने धीरे से अपनी दूसरी उंगली भी डाल दी.

अब वो फिर से गर्म होने लगी थीं, मेरी सास बोलीं- आ जाओ राजा.. अब देर मत करो.

मैंने उन्हें अपने नीचे लिटाया और उनकी दोनों टांगें चौड़ा कर फैला दीं. अपनी उंगलियों से उनकी चूत की फांकों को फैला दिया और अपने लंड का सुपारा मैंने चूत के मुहाने पर रख दिया.

लंड का स्पर्श अपनी चुत पर पाते ही मेरी सास के मुँह से ‘आआआहह..’ निकल गया. वे बोलीं- इस पल के इंतज़ार में न जाने कितने साल गुज़ार दिए दामाद जी.. क्या आपको मेरे इशारे समझ में ही नहीं आ रहे थे?

मैंने कहा- देर से ही सही.. मगर समझ तो गया मेरी जान मोहिनीई. आअहह..

 
इतने में मैंने एक झटके में ही अपना लंड अपनी सास की चूत की गहराइयों में उतार दिया.

मेरी सास ने मुझे गाली देते हुए ‘आहह साले ह्म्म्म्म .. ऊऊओह..’ भरी और उन्होंने मुझे अपने ऊपर खींच लिया और अपने दूध मेरे मुँह में घुसेड़ कर कहा- लो खा जाओ, पी जाओ.. तुम साले मुझे मम्मी बोलते हो मगर दूध नहीं पियोगे… तो कैसे मैं तेरी मम्मी बनूँगी.

मैंने अपनी सास के दूध चुसकते हुए धीरे धीरे अपने लंड को अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया. मैं एक हाथ से उनके बालों में डाल कर उनकी गर्दन को पकड़े हुए था और दूसरे हाथ से उनके दूध को जड़ से पकड़ कर अपने मुँह में घुसाए हुए खूब ज़ोर ज़ोर से चूस रहा था.

“हम्म्मम.. दामाआआद जीईईई.. बेटाअ राजाआ.. खूब.. चोद दोव आज अपनी सास को.. अपनी बीवी की माँआआअ चोद दोओ.. ”

“मोहिनीईई आआअहह उम्म्म्म.. ऊउउ फफ्फ़ क्या.. मजा आआ.. रहाआ.. है मेरी जान…”

इस तरह की चुदासी आवाजों से कमरा गूंजने लगा. फिर मैं उठ कर बैठा और मैंने दोनों हाथ से अपनी सास के दूध मसलने शुरू कर दिए और बारी बारी से उन्हें चूसने भी लगा. साथ ही लंड के धक्के तो चालू ही थे.

करीब 20 मिनट लंड पेलने के बाद उनकी चूत की तो माँ चुद गयी थी. मेरे लंड को भी उलटी करने का मूड बन गया था. अब हम दोनों ही झड़ने वाले थे. उन्होंने मेरी पीठ पे अपनी पकड़ और मजबूत कर ली और मैंने उनकी गर्दन को ऐसा पकड़ा जैसे कि अब मैं उनकी गर्दन को मरोड़ ही दूँगा. उनके एक दूध को अपने मुँह में भर के ऐसे भींच लिया, जैसे काट कर छाती से अलग ही कर दूँगा.

हम दोनों के शरीर एकदम से एक दूसरे से चिपक गए और कड़क हो गए. बस फिर 2 मिनट के बाद एक तेज सीत्कार के बाद हम दोनों निढाल हो गए. अब हम दोनों एक साथ झड़ चुके थे.

मैं थोड़ी देर ऐसा ही पड़ा रहा और फिर लंड निकालने लगा तो वो बोलीं- ऐसे ही रहने दो.. उसे मेरी पार्किंग में ही रहने दो.. अच्छा लग रहा है.

फिर थोड़ी देर से हम दोनों ने एक और नया सेशन स्टार्ट किया मगर अबकी बार मैंने उन्हें घोड़ी बना कर उनकी चूत में पीछे से लंड डाल दिया और उनके लटकते हुए मम्मों को अपने दोनों हाथों से पकड़ कर मसल दिए.

उस रात हम दोनों ने 5 बार चुदाई की थी. उसके बाद जब तक मेरी बीवी वापस नहीं आ गई, मैं रोज उसकी माँ चोदता रहा.

तो यह थी मेरी सास के साथ मेरी पहली सुहागरात की कहानी.. इसके बाद तो जैसे कुदरत हम पर मेहरबान हो गयी थी, उस टाइम एक महीना हम दोनों एक दूसरे के साथ रहे और फिर थोड़े दिनों बाद राखी पर भी उन्होंने मुझे एक दिन के लिए रहने को बुला लिया था. फिर जब भी मौका मिलता, हम दोनों अपना प्रोग्राम शुरू कर देते.

फिर से एक बार ससुर को बाहर जाना हुआ तो वे मेरी बीवी के साथ मुझे अकेले छोड़ कर चले गए. मेरी सास ने एक हफ्ते के लिए मुझे फिर से अपनी हवस बुझाने के लिए बुला लिया. फिर से मैंने मेरी सास की चुदाई की कहानी लिख डाली.
 
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