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मैं खाना बनाने आऊंगी

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Antarvasna, hindi sex story मेरे पिताजी का मिजाज बहुत ही सख्त है और यदि घर में कुछ भी चीज इधर से उधर हो तो उन्हें बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं होती है वह बड़े ही डिसीप्लेन से रहना पसंद करते हैं और शायद हम लोगों को भी इसी वजह से आदत पड़ चुकी है कि हम लोग भी उन्हीं की तरह रहे। हमारे घर में मेरे दादा दादी और मेरे मम्मी पापा और मेरे दो छोटे भाई हैं घर में मैं ही बड़ा हूं हमारे परिवार में सब बहुत ही खुश रहते है लेकिन जब भी पिताजी घर पर रहते हैं तो कोई भी कुछ नहीं बोलता मम्मी भी चुप हो जाया करती हैं। शायद उन्हीं की वजह से हमारे घर में खुशियां आई क्योंकि हमारे घर में कमाने वाले वही हैं मेरे दादाजी भी रिटायर हो चुके हैं वह घर पर ही अब ज्यादा समय बिताते हैं कभी कबार वह गांव भी चले जाया करते हैं।

हम लोग अपने पड़ोस में भी ज्यादा किसी से बात नहीं किया करते हमारे पड़ोस में मिश्रा जी ने अपना घर बेच दिया था और उस घर को किसी ने खरीद लिया अब वह लोग हमारे पड़ोस में रहने आ गए है। एक दिन रात को मुझे घर आने में देर हो गई थी मैं अपने किसी दोस्त के घर पर गया हुआ था जब मैं घर पर आ गया तो मम्मी ने मुझे कहा बेटा तुम खाना खा लो। मैंने खाना खाया और उसके बाद मैं सो गया अगली सुबह वह लोग हमारे घर पर आए और कहने लगे कल रात को आपके लड़के ने हमारे घर से सामान चोरी की है मेरे पापा उस वक्त घर पर ही थे वह मेरी तरफ देखने लगे उन्होंने कहा क्या तुमने उनके घर से चोरी की है। मैंने अपने पापा से कहा पापा क्या आपको ऐसा लगता है कि मैं उनके घर से चोरी कर लूंगा मैं रात को अपने दोस्त के यहां पर था और मुझे आने में देर हो गई थी यदि आपको मुझ पर यकीन नहीं आता तो आप मम्मी से पूछ लीजिए। मेरे पापा ने मेरी मम्मी से पूछा तो मेरी मम्मी कहने लगी हां राजीव बिल्कुल सच कह रहा है उसे घर आने में देर हो गई थी। मेरे पापा ने हमारे पड़ोस में रहने वाले उन महिला से पूछा कि आपके घर से क्या चोरी हुआ है वह कहने लगे कल हमारे घर से कुछ पैसे और कुछ कीमती सामान चोरी हुआ है और रात को हमने आपके लड़के को घर आते हुए देखा था।

मेरे पापा ने उन्हें कहा यदि वह रात को घर आ रहा था तो इसका मतलब यह तो नहीं है कि हमारे बेटे ने चोरी की होगी आप लोग बिना सबूत के बेवजह उस पर इल्जाम कैसे लगा सकते हैं। वह आंटी मेरे पापा से भी ऊंची आवाज में बात करने लगी मेरे पापा ने उन्हें कहा यदि आपको ऐसा कोई शक है तो आप पुलिस में कंप्लेंट दर्ज करवा सकती हैं। वह आंटी गुस्से में हमारे दरवाजे को भटकते हुए चली गई और उन्होंने पुलिस में मेरे खिलाफ कंप्लेंट दर्ज करवा दी। मेरे पापा ने मुझसे पूछा बेटा तुम्हारी तो कहीं गलती नहीं है मैंने पापा से कहा मेरी कहीं भी गलती नहीं है क्या आप ने ऐसे संस्कार हमें दिए है जो कि हम किसी के घर से चोरी करें मेरे पापा कहने लगे ठीक है बेटा यदि तुम्हारी गलती नहीं है तो मैं उन्हें देख लूंगा। कुछ दिनों बाद पुलिस मुझसे पूछताछ करने के लिए आई लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं था उसके बाद हमारे पड़ोस में रहने वाली आंटी से हमने बात नहीं की। मैंने भी उनसे बात नहीं की क्योंकि उन्होंने मेरे ऊपर बेवजह का इल्जाम लगाया था इसलिए मैंने उनसे बात नहीं की। मैं अपने पड़ोस में कम ही बात किया करता था और कुछ दिनों बाद शायद उस चोर का भी पता चल चुका था जिस ने उन लोगों के घर से चोरी की थी तो एक दिन हमारे पड़ोस में रहने वाली आंटी हमारे घर पर आई और मुझसे उन्होंने माफी मांगी। मैंने उन्हें कहा कोई बात नहीं अब रहने दीजिए अब इन सब चीजों के बारे में बोलकर या फिर सोच कर भी कोई मतलब नहीं है। मेरी मम्मी ने कहा कि बेटा तुम भी इस बारे में भूल जाओ तो मैंने भी उसे भुलाने की कोशिश की और हम लोगों का उनके साथ बहुत अच्छा रिलेशन हो गया। एक दिन उनके घर पर उनकी भतीजी आई हुई थी उसका नाम संजना है संजना को वह आंटी हमारे घर पर ले आई और उस दिन मेरी मुलाकात संजना से हुई इत्तेफाक से संजना से मैं पहले ही मिल चुका था।

संजना से मेरी पहली मुलाकात मेरे कॉलेज के दौरान हुई थी क्योंकि हमारे कॉलेज में एनुअल फंक्शन था और उस प्रोग्राम में संजना भी आई हुई थी संजना ने मुझे कहा कि मैंने आपको कहीं देखा है। मैंने संजना से कहा हां हम लोग इससे पहले भी मिले हैं और हम लोगों की मुलाकात कॉलेज में हुई थी उसे भी याद आया और वह कहने लगी हां बिल्कुल सही कह रहे हैं हमारी मुलाकात कॉलेज में ही हुई थी। संजना कुछ दिनों तक उन्हीं के घर पर रहने वाली थी तो संजना मुझे अक्सर मिल जाया करती थी और जब भी वह लोग हमारे घर पर आते तो वह मुझसे जरूर मिला करती थी। मेरी भी जॉब लग चुकी थी और मैं जॉब करने के लिए मुंबई चला गया था मुंबई में मैं जिस कंपनी में जॉब कर रहा था मुझे उस कंपनी में जॉब करते हुए करीब एक साल हो चुका था और मैं मुंबई में ही रहने लगा था। मैं मुंबई से अपने घर कम ही जाया करता था लेकिन काफी समय बाद मैं अपने घर गया तो मेरे पिताजी और अपने परिवार को देखकर मैं खुश था इतने समय बाद मैं सब लोगों से मिल रहा था। मैंने 15 दिन की छुट्टी ली हुई थी और मैं घर पर ही अपने परिवार के साथ ज्यादा समय बिताता था लेकिन मुझे मालूम ही नहीं पड़ा कि कब घर में मुझे 15 दिन हो गये और मुझे वापस मुंबई लौटना पड़ा।

मुंबई की भागदौड़ भरी जिंदगी में मुझे अपने लिए समय ही नहीं मिल पाता था और मैं बहुत ज्यादा बिजी रहने लगा था जिस वजह से कई बार तो मैं अपने माता-पिता से बात भी नहीं कर पाता था। मैंने एक दिन अपने माता पिता से कहा कि आप लोग भी मुंबई में आइए ना वह कहने लगे कि हम लोग मुंबई आ कर क्या करेंगे लेकिन मैंने पिताजी को मना लिया और वह लोग कुछ दिनों के लिए मुंबई आ गए। मैंने उन लोगों की व्यवस्था बड़े ही अच्छे से की और उन्हें किसी चीज की कमी नहीं होने दी मैंने अपने ऑफिस से भी छुट्टी ले ली थी और जब मेरे माता पिता मुंबई से वापस चले गए तो मुझे बड़ा ही अजीब सा महसूस हुआ। मुझे कई बार लगता कि मैं बहुत अकेला हूं और उस अकेलेपन की वजह से मुझे मेरे घर की बहुत याद आया करती थी लेकिन शायद यह भी इत्तेफाक की बात है कि संजना भी मुझे कुछ समय बाद मिल गयी। संजना मुझे मिली तो मैंने उसे बताया कि मैं तो मुंबई में ही जॉब कर रहा हूं संजना मुझे कहने लगी कि मैं भी मुंबई में ही जॉब कर रही हूं जब संजना ने मुझे बताया कि वह मुंबई में जॉब कर रही है तो मैंने संजना से कहा जिस दिन तुम्हारी छुट्टी हो उस दिन तुम मुझे मिलना। वह कहने लगी ठीक है मैं अपनी छुट्टी के दिन तुम्हे फोन करूंगी और जिस दिन संजना की छुट्टी थी उस दिन उसने मुझे फोन किया और हम दोनों ने मिलने का प्लान बनाया। हम दोनों मिले तो मुझे बहुत अच्छा लगा क्योंकि कोई जान पहचान का यदि आपको मिल जाता है तो आपको बहुत खुशी होती है। संजना मुझसे पूछने लगी की तुम्हे यहां कितना समय हो चुका है मैंने उसे बताया कि मुझे यहां पर काफी समय हो चुका है फिर मैंने भी उसे पूछा कि तुम्हें यहां पर कितना समय हुआ वह कहने लगी कि मुझे तो सिर्फ एक महीना ही हुआ है।

उस दिन हम दोनों की मुलाकात बहुत ही अच्छी रही। हम दोनों की मुलाकात अक्सर होती रहती थी मैंने एक दिन संजना से कहा कभी तुम मेरे फ्लैट पर आओ तो संजना कहने लगी ठीक है मैं जरूर आऊंगी। एक दिन वह मेरे फ्लैट पर आ गई जब वह मेरे फ्लैट में आई तो वह कहने लगी क्या तुमने अभी तक खाना नहीं खाया है। मैंने उसे कहा नहीं मैंने संजना से कहा मैं तुम्हारे लिए कुछ आर्डर करवा देता हूं तो संजना कहने लगी नहीं रहने दो मैं ही कुछ बना देती हूं। संजना मेरे लिए खाना बनाने लगी मैं उसकी तरफ देखने लगा जब मैं उसकी तरफ देखता तो मेरे अंदर उसे देखकर ना जाने उस दिन क्या फीलिंग आने लगी मैं सिर्फ उसकी गांड पर नजर मारने लगा। जब मैंने उसे अपनी बाहों में लिया तो वह कहने लगी राजीव तुम यह क्या कर रहे हो मैंने उसे कहा कुछ भी तो नहीं मैंने उसके रसीले होठों को अपने होठो में लिया तो उसे भी अच्छा लगने लगा और हम दोनों कि जवानी में उबाल आने लगा। जैसे ही मैंने संजना के स्तनों को दबाना शुरू किया तो उसके अंदर की गर्मी और भी ज्यादा बाहर आने लगी मैंने उसे बिस्तर पर लेटा दिया और उसके कपड़ों को उतारना शुरू किया जब मैंने उसकी पैंटी और ब्रा को देखा तो मेरे अंदर एक अलग ही जोश पैदा हो गया।

मैंने उसकी योनि के अंदर अपने लंड को प्रवेश करवा दिया जैसे ही मेरा लंड उसकी योनि में प्रवेश हुआ तो वह चिल्ला उठी और कहने लगी मुझे बड़ा दर्द हो रहा है लेकिन मैं उसे बड़ी तेज गति से धक्के दिए जा रहा था और मुझे उसे चोदने में बहुत मजा आता। संजना मेरा साथ दे रही थी जब मैं उसे धक्के देता तो उसके मुंह से भी सिसकिया निकल जाती और कुछ देर बाद मैने संजना को उल्टा लेटाया और कहा क्या मैं तुम्हारी गांड मार सकता हूं। वह कहने लगी नहीं मैंने आज तक कभी ट्राई नहीं किया है लेकिन मैंने भी अपने लंड पर तेल की मालिश की और संजना की गांड पर अपने लंड को सटा दिया मैंने जैसे ही उसे धक्के दिए तो उसके मुंह से आवाज निकल आई वह कहने लगी राजीव रहने दो। मैंने दोबारा कोशिश की और जब मैंने उसकी गांड के अंदर तक अपने लंड को प्रवेश करवा दिया तो वह चिल्लाने लगी और कहने लगी मुझे बड़ा दर्द हो रहा है। उसकी गांड में मेरा लंड चला गया था तो मुझे बड़ा मजा आ रहा था मैं बड़ी तेज गति से उसे धक्के दिए जाता मुझे उसे धक्के मारने में बहुत मजा आ रहा था। मैंने उसकी गांड में जमकर मजे लिए उसने मुझे खाना खिलाया और कहने लगी मैं तुम्हारे लिए खाना बनाने आऊंगी।
 
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