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मैं, मेरी बीवी और चचेरा भाई

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मैंने कहा- तो यह भी उसी दिन देखना जब तुम्हारी पहली चुदाई होगी। क्योंकि अभी तुम्हारी भाभी को छत पर लेकर चोद लूँगा पर नई नवेली लौंडिया पर यूँ ही अपनी मलाई नहीं निकालूंगा। निकालूंगा तो उसी दिन जब सील खुलेगी।

अब मैं फिर से नेहा की चूत चाटने लगा। नेहा की चूत में से धीरे धीरे निकलता हुआ सफ़ेद लावा उसकी गांड के छेद तक जा रहा था। मैंने साथ ही अपनी ऊँगली का जादू भी दिखा ही दिया। बीच की दो उँगलियाँ उसकी चूत में डाल दी और अंगूठे से चूत के दाने के थोड़ा नीचे सहलाता रहा और जीभ से दाने को छेड़ता कभी चूस लेता था।

एक हाथ जो नेहा के वक्ष तक पहुँच तो नहीं रहा था आसानी से, पर फिर भी कोशिश कर कर के बीच बीच में नेहा के बूब्स को भी दबा रहा था।

वो पड़ी पड़ी अपनी चूत से पानी निकाल रही थी, नेहा अब तक 3 बार झड़ चुकी थी पर उसने मेरा हाथ एक भी बार नहीं पकड़ा था रोकने के लिए।

जब वो चौथी बार झड़ी तब मैंने ही ऊँगली उसकी चूत से बाहर निकाल के अच्छे से चाट कर उसकी चूत को साफ़ कर दिया।

मैं उसके अटैच बाथरूम से मुंह धोकर आया और बाहर जाने लगा।

नेहा ने अब तक कपड़े नहीं पहने थे और बिस्तर में ही इधर उधर पलट रही थी।

मुझे जाता देख फुर्ती से उठकर आई और मुझे पकड़ लिया और मुझे चूमने लगी, फिर बोली- राहुल, मुझे अपनी यादगार पहली चुदाई का इंतज़ार रहेगा। चाहे वो आज हो या कल या 30 साल बाद मेरी पहली चुदाई तुम्हारे साथ ही होगी।

नेहा अब बहुत खुल गई थी, अब वो आराम से मेरे सामने नंगी और चूत चुदाई की बातें कर पा रही थी।

मैंने कहा- नेहा तुम बला की खूबसूरत हो, तुम्हारा पूरा बदन एकदम शिल्पकार की नक्काशी की तरह पैना और सुन्दर है। तुम्हारी चूत में लंड डालने वाला खुशकिस्मत ही होगा। मैं बहुत खुशकिस्मत हूँ कि तुम यह पहला मौका मुझे देना चाहती हो।

मैंने नेहा को पूरा बाँहों में भरा, उसके होंठों को चूमा, उसके स्तनों को सहलाया, कूल्हों को दबाया और दरवाज़ा खोल कर जल्दी से भाग गया।

कमरे से बाहर निकलने के बाद मैंने सबसे पहले कोने से झाँक कर यह देखा कि नेहा ने दरवाज़ा बंद कर लिया या नहीं।

फिर जब देख लिया कि दरवाज़ा बंद हो चुका है तो छत पर जाकर फिर एक बार अंदर रोशनदान से अंदर झाँका पर लाइट बंद होने के कारण कुछ नहीं दिखा।

तब फिर छत पर आकर मैंने मधु को कॉल लगाया, मधु के कुछ बोलने से पहले ही मैं बोला- मधु मुझे तुम्हारी चुदाई करनी है, मेरे लंड को शांत कर दो और छत पर आ जाओ।

वहाँ से बिना कुछ बोले ही कॉल कट गया, मैं समझ गया था कि वहाँ आस पास काफी लोग होंगे इसलिए बिना कुछ बोले फ़ोन काट दिया है।

थोड़ी देर इंतज़ार के बाद मैंने एक सिगरेट जलाई और छत के एक कोने में जाकर बैठ गया।

थोड़ी देर में मेरे पीछे से छाती पर हाथ घूमने लगे।

मैंने कहा- थैंक्स यार, देख मेरा लंड कितना कड़क हो गया है। हाथ से मुठ भी मार लेता पर बिना चूत के यह आज मानने वाला नहीं था इसलिए कॉल कर दिया।

पीछे से आवाज़ आई- अच्छा किया जो कॉल कर दिया, मेरी भी चूत में आग लगी हुई थी।

मैंने पीछे मुड़ कर देखा तो आँखें फटी की फटी रह गई।

मेरे पीछे शिखा थी।

मैंने कहा- तू यहाँ क्या कर रही है और ये कैसी बातें कर रही है तू मुझसे?

वो बोली- भैया, कुछ दिनों में मेरी शादी हो जाएगी। तब भी तो मुझे लंड चूत सब बोलना ही होगा। तो क्यूँ न अभी से कुछ सीखा जाए। मैंने कहा- ये सब तू अपने पति के साथ करना!

और मैंने एक धक्का मार के उसे अपने आप से दूर हटाया।

शिखा बोली- देखो आपको चूत चाहिए और जब मैं छोटी थी, तब से ही आप मेरे पसंदीदा मर्द रहे हो। आप मेरे हीरो हो, मैं बचपन से ही आपकी बनना चाहती थी। जब बड़ी हुई तो पता चला कि आप भाई हो और मैं आपसे शादी नहीं कर सकती।

मैंने अपने आपको बहुत समझाया बहुत मनाया और भूलने की कोशिश की पर आप मेरे पहले प्यार हो आपको भूल पाना मेरे लिए संभव ही नहीं है। मैं आपके साथ बस एक, बस एक बार सोना चाहती हूँ। फिर दुनिया का कोई भी मर्द मेरे बदन को नोचे मुझे कोई परवाह नहीं। पर एक बार आप मेरे बदन को छू लो मेरी आत्मा को तृप्त कर दो।

मैंने सोचा- साला आज का दिन लगता है शायद सील तोड़ने का ही दिन है, अभी एक सील छोड़ कर आया तो दूसरी सील आ गई।

मैं सोच ही रहा था कि शिखा फिर बोली- मैं बहुत सोच समझ कर ही छत पर आई हूँ, जब आपने कॉल किया तो भाभी नहीं उठी सिर्फ मेरी ही नींद खुली जबकि मैं बहुत थकी हुई थी। उस पर आपने ऐसा कहा कि आपको चूत की ज़रूरत है। तो बस मैंने सोचा कि आज शायद मेरी मन की मुराद पूरी हो सकती है। मैं तो आपके पास भीख मांगने आई हूँ, आप चाहो तो भिखारी समझ कर भगा दो और चाहो तो मुझे सिर्फ एक रात के लिए अपना लो।

मैं अभी भी कुछ कुछ सोचे ही जा रहा था।

शिखा पूरी ड्रामा कंपनी है, वो मेरे पैरों में लेट गई।

मैंने उसे उठाया और गले से लगा लिया और कहा- अभी तुम अपनी भाभी को भेज दो, तुम्हारी पहली चुदाई ऐसे करूँगा कि तुम हमेशा याद रखो। ऐसे छत पर छुप कर नहीं, कही बड़े से फूलों के बिस्तर पर उजाले में, पूरी शिद्दत के साथ।

शिखा बोली- आप मुझे गोली तो नहीं दे रहे न?

मैंने कहा- नहीं!

और मैंने उसके बूब्स दबा दिए और बोला- देखा ऐसे तो नहीं छेड़ता न अगर मेरे मन में कोई और ख्याल होता तो!

मैंने उसको फिर से गले लगाया और उसके पूरे बदन को सहलाया और चूमा, फिर अपने आप से दूर करके बोला- अब तू जा और तेरी भाभी को भेज अब मुझसे सहन नहीं हो रहा

शिखा बोली- क्यों भाभी को परेशान करते हो, आप मेरे मुंह में अपना माल निकाल दो। मैं सपनों में कई बार आपके लंड का पानी पी चुकी हूँ, वही सोच सोच के मैंने कई बार अपनी चूत में उंगली की है।

मैंने कहा- माँ की लौड़ी, यही फर्श पर चुदना चाह रही है तू, मैं तेरे को अच्छे से चोदने की सोच रहा हूँ।

वो बोली- राहुल भैया, आप कितनी अच्छी गालियाँ देते हो। ठीक है, मैं भाभी को ही भेजती हूँ। पर मैं भेजूंगी तो शक होगा आप 3-4 मिनट में दुबारा कॉल करके बुलाना, मैं जाकर ऐसे लेटूंगी कि उनकी नींद खुल जाए। पर हाँ, छत पर खुले में चोदोगे तो मैं भी देखूंगी आपको चुदाई करते हुए।

मैंने कहा- भाग यहाँ से, चल जो तेरी मर्जी देख लेना, पर अभी जा और जगा उसे।

मैंने लगभग 5 मिनट बाद कॉल लगाया तो धीरे से आवाज़ आई- हेलो!

मैंने सीधे कहा- छत पर आ जाओ।

मधु छत पर आई मैंने उसे एक कोने में लेकर गया और उसकी सलवार उतार कर लंड अंदर डाल दिया और मैं बैठ गया और उसको अपने ऊपर बैठा लिया।

उसके बाद मैं बोला- बहुत ठरक मची हुई थी। अगर तुम अभी नहीं आती तो तुम्हें उसी कमरे में आकर सबके सामने चोद डालता।

मधु बोली- आज तो शाम से मुझे भी लंड की याद आ रही थी। अच्छा किया जो आपने बुला लिया।

मधु मेरे लंड पर उछलती रही।

फिर मैंने मधु को दीवार के सहारे खड़ा कर दिया और घोड़ी बनाकर खड़ा होकर धक्के मारने लगा।

मुझे पता था ही था कि शिखा भी कहीं न कहीं से छुप कर यह सब नज़ारा देख ही रही होगी। मधु ने भी अपनी चूत में मेरे लंड को काफी दिनों बाद लिया था तो बड़े मजे से चुदवा रही थी।

काफ़ी देर बाद हम दोनों ने अपना अपना पानी छोड़ा और जाकर अपने अपने कमरों में सो गए।

सुबह उठकर नहा धोकर तैयार होकर नाश्ते के लिए जब हम इकट्ठे हुए तो देखा कि नेहा वाकयी घर पर ही थी और नाश्ता परोसने में सहायता कर रही थी।

नेहा मुझे देखकर मुस्कुराती और जानबूझ कर अपने अंग का प्रदर्शन करती।

नीलेश भी ये सब देख रहा था।

शिखा भी काम नहीं थी, कल रात की घटना के बाद उसका व्यवहार बहुत बदला हुआ था, वो मेरे सामने ऐसे बैठी थी कि मैं उसे ही देखता रहूँ।

नाश्ते के बाद मैं नीलेश को अपने साथ सिगरेट पिलाने बाहर ले गया। जब हम एक गुमटी पर रुके तो मैंने नीलेश से कहा- यार नीलेश, नेहा का तूने देख ही लिया?

नीलेश-हाँ मैं देख रहा हूँ, वो तुझसे ज्यादा ही चिपक रही है।

राहुल- यार तुझे क्या बताऊँ, ये ले मेरे कल के सारे मैसेज पढ़!

मैंने अपना मोबाइल उसे दिया और सारे मैसेज पढ़ाए।

नीलेश- तो इसका मतलब तूने उसे कल रात को ही चोद दिया?

राहुल- नहीं यार… तेरे से वादा जो किया था। उसको संतुष्ट ज़रूर किया मैंने पर ओरल और ऊँगली से… चुदाई नहीं करी!

नीलेश- वाह यार वाह… तेरे जैसे दोस्त होने चाहिए। दोस्ती के लिए साली चूत जो खुद चलकर आई, उसे भी छोड़ दिया।

राहुल- हाँ यार, चूतें तो मिलती रहेंगी, पर दोस्ती का कोई मोल नहीं है। अभी भी तू बोलेगा तो चोदूँगा, नहीं तो माँ चुदाये!

नीलेश- नहीं, जब तू अपने वादे पर टिका रहा तो मैं भी अपना वादा ज़रूर निभाऊंगा। तू चोद साली को, मैं भी तुझे रंगे हाथों पकड़ कर उसे चोदूँगा।

राहुल: एक और समस्या है, प्लीज मेरी बात पूरी सुनना फिर कुछ कहना।

नीलेश आश्चर्य से- हाँ बोल?

मैंने नीलेश को शिखा वाली भी पूरी बात बता दी।

नीलेश लगभग रोने लगा।

राहुल- देख यार, तुझे इसलिए बताया क्योंकि तू दोस्त है, तुझे दिल से दोस्त माना है। तू जो कहेगा वही होगा।

नीलेश- यार जो भी हो, वो मेरी सगी बहन है पर अगर कल रात तूने उसे नहीं छोड़ा होता तो आज शायद में यह बात कह भी नहीं पाता। तू कर जो तुझे ठीक लगे, इस बारे में तो मैं तुझे न ना बोल सकता हूँ न ही हाँ।

राहुल- तू अगर इतना उदास हो रहा है तो चिंता मत कर, कुछ नहीं होगा शिखा और मेरे बीच!

नीलेश- मुझे इस सदमे से बाहर निकलने दे, मैं तुझे आज रात की खाना खाने के बाद वाली सिगरेट पर बिल्कुल साफ़ साफ़ बता दूंगा कि मेरी राय क्या है। बस तब तक तुझसे गुजारिश है कि कुछ मत करना। और हाँ, मुझे तुझ पर भरोसा है कि दोस्ती निभाना जानता है।

राहुल- तो ठीक है, आज शाम को नेहा की चुदाई करते हैं।

नीलेश- तूने जो बताया, उसके बाद तो मुझे अपनी बीवी को भी चोदने का मन नहीं है।

फ़िर थोड़ा गुस्से में- तू चोद साली रांड नेहा को।

मैंने सोचा कि अभी साला गुस्से में है अभी कुछ ज्यादा फ़ोर्स नहीं करना चाहिए इसलिए वहाँ से घर की तरफ चल दिए।
 
घर आकर मैं तो अपने मोबाइल पर गेम खेलने लगा और बीच बीच में नेहा को मैसेज भी कर रहा था।

नीलेश पता नहीं किस उधेड़बुन में लगा हुआ था।

नीलेश मुझसे थोड़ा कटा कटा सा रहा दिन भर, शाम को मेरे साथ सिगरेट पीने भी नहीं आया।

रात का खाना खाकर मैंने कहा- सिगरेट पीने चलेगा या ऐसे ही मुंह लटका के मुझे इग्नोर करता रहेगा?

नीलेश बोला- चल बाहर चलते हैं, छत पर नहीं।

हम दोनों गाड़ी पर बैठे और चले दिए दूर के किसी खोपचे में।

नीलेश- मैं तुझसे जान करके दिनभर से कटा कटा रहा क्योंकि मुझे थोड़ा टाइम चाहिए था सोचने के लिए।

फ़िर थोड़ा रूक कर बोला- और उन दोनों को भी देखना था कि उनकी प्रतिक्रिया कैसी है।

राहुल- तो क्या रहा तेरा अवलोकन?

नीलेश- भाई तेरी सारी बातें सुनने के बाद उन लोगों पर निगरानी के बाद मुझे लगा है कि (थोड़ा हँसते हुए) इतना सेंटी होने की बात नहीं है। अब कल से वो किसी और का लौड़ा भी तो लेंगी ही। उनकी भी इच्छाएँ हैं, तमन्नायें हैं, एक लड़की की चाहत है! तू मेरे दोस्त राहुल, जा तू भी क्या याद करेगा जी ले अपनी ज़िन्दगी और दिखा दे दोनों को जन्नत!

राहुल- तूने तो यार दिल खुश कर दिया, अब सुन मैंने एक प्लान बनाया है।

मैंने उसे अपना प्लान बताया।

नीलेश- इस मनसूबे की तामील भी तुम्ही को करनी है।

राहुल: हाँ भाई तू चिंता मत कर बस मेरा साथ देना, मैं योजना के तहत सबको खुश कर दूंगा।

हम लोग वापस घर चले गए, घर जाते ही मैं बुआ से बोला- बुआ, सुबह हम सब घूमने जायेंगे, आप चलोगी?

बुआ बेचारी क्या कहती, वो बोली- न भैया, तुम्हीं जाओ हम तो न जाये रहे।

मैंने सबके सामने सबसे पूछा- कौन कौन चलेगा घूमने? कल सुबह 5 बजे निकलेंगे हम लोग।

मैंने नेहा और शिखा को अलग अलग मैसेज कर दिया था कि तुम बोल देना कि तुम्हें चलना है।

नेहा और शिखा ने हाथ खड़े कर दिए।

मैंने बुआ से कहा- हम मतलब मैं, नीलेश, मधु, नीता, नेहा और शिखा कल घूमने जा रहे हैं और अगली शाम को लौटेंगे।

सभी लोग अपनी अपनी तैयारी में भिड़ गए, मैं और नीलेश पेट्रोल और हवा चेक करवा कर आ गये थे।

रात तो जैसे तैसे कट गई, सुबह 4 बजे मैं और नीलेश उठकर तैयार होकर खड़े हो गए। लड़कियों को भी चुदने का इतना भूत सवार था कि वो भी 5:30 बजे आकर गाड़ी के बगल में खड़ी हो गई थी।

सफर की शुरुआत कुछ ऐसे हुई कि गाड़ी ड्राइव नीलेश कर रहा था, आगे की सीट पर नीता बैठी थी, बीच वाली सीट पर शिखा और नेहा थे और आखिरी सीट पर मैं और मधु!

मैंने कहा- नीलेश, सबसे पहले गाड़ी किसी अच्छे से ढाबे पर रोक, वहाँ अच्छा सा नाश्ता करके चाय पीकर आगे चलेंगे।

इतनी सुबह जल्दी में हम में से किसी ने भी चाय नाश्ता नहीं किया था। अभी लगभग सभी लड़कियाँ गाड़ी में आधी नींद में ही थी। क्योंकि मुझे रात को तो किसी को कुछ समझाने का मौका नहीं मिला था इसलिए मैंने सुबह का टाइम ही चुना था।

गाड़ी हाईवे पर आते ही नीलेश ने 5 मिनट बाद ही गाड़ी रोकी, गाड़ी से उतरा और बोला- भाई सुबह सुबह नींद आ रही है, ये पकड़ चाबी, तू ही चलाना गाड़ी!

सभी की आँखों में कई सवाल थे, नीलेश को यह नहीं पता था कि हम जा कहाँ रहे हैं।

नेहा यह सोच रही थी कि इतने सारे लोगों के बीच आखिर उसकी चुदाई कैसे होगी।

शिखा सोच रही थी कि नीलेश हो लाये ही क्यूँ।मधु को कोई आईडिया नहीं था कि आखिर ये सब हो क्या रहा है।

नीता सोच रही थी कि नेहा और शिखा के आने से अब भी हम लोग चुदाई का कोई खेल नहीं खेल पाएंगे।

खैर सभी लोग नाश्ते के लिए अपनी अपनी जगह विराजमान हुए।

मैंने सिगरेट जलाई तो सभी यही सोच रहे थे कि राहुल सिगरेट पीता है शायद इसको नहीं पता होगा।

मैंने नाश्ता आर्डर किया, फिर नीलेश को साइड में लेकर गया।

नीलेश कुछ पूछता उससे पहले मैंने कहा- देख प्लान के अनुसार अपन लोग कहीं न कहीं तो जाना ही था। मैंने यहाँ से 70 km दूर एक फार्म हाउस बुक किया है, वहाँ अपन एक घंटे में पहुंच जायेंगे।

नीलेश बोला- 70 km तो 40 मिनट में ही पहुंच जायेंगे।

मैंने कहा- वो फार्म हाउस ऑन रोड नहीं है, हाईवे से कच्चा रास्ता है वहाँ से 25 किलोमीटर अंदर है।

नीलेश बोला- बहुत अच्छे!

मैंने कहा- अब तू जा और मधु को भेज!

मधु बोली- ये अपन कहाँ जा रहे हैं।

मैंने कहा- एक सेक्स ट्रिप पर…

मधु बोली- कैसा सेक्स ट्रिप यार? दोनों बहनों को साथ लाये हो..

बोलते हुए उसके दिमाग में ख्याल आया तो बोली- जो मैं सोच रही हूँ, वो सही है क्या?

मैंने कहा- हाँ… ये दोनों भी मुझसे चुदना चाहती हैं।

मधु बोली- फिर तो मज़ा आएगा… पर नीलेश भैया?

मैंने कहा- मेरी बात हो गई है।

मधु मुस्कुराती हुई अपना नाश्ता करने जाने लगी।

मैंने कहा- देखो अभी ऐसे ही शो करना कि तुम्हें कुछ नहीं पता और जरा नीता को भेजो।

नीता को भी मैंने पूरा ब्यौरा दे दिया और कहा कि नेहा को भेजो।

नेहा के आते ही मैं बोला- नेहा बस तुम मुझ पर भरोसा रखो, यह ट्रिप तुम्हारे लिए ज़िन्दगी भर यादगार रहेगी। कोई सवाल जवाब मत करना, बस मैं जैसा कहूँ, करती जाना। अब जाओ और शिखा को भेजो।

नेहा गर्दन नीचे करके चली गई।

शिखा के आते ही मैंने कहा- देख तेरी इच्छा ज़रूर पूरी होगी, बस मुझसे कुछ मत पूछना, जो कहूँ, बस वो करती जाना।

अब गाड़ी मैंने चलाई, मेरे साथ मधु बैठी।

बीच में नीलेश और नीता और आखिरी सीट पर नेहा और शिखा।

गाड़ी अपनी फुल स्पीड से हाईवे पर दौड़ रही थी, कोई किसी से कोई बात नहीं कर रहा था।

गाड़ी कुछ ही पलों में कच्चे रास्ते पर उतर चुकी थी। गड्डों में धक्के खाते हुए हम लोग फार्म हाउस के सामने थे।

फार्म हाउस दिखने में किसी पुराने बंगले जैसा था, आस पास काफी पेड़ और बागान थे, दीवारों पर बेलें चढ़ रही थी, कहीं कहीं दीवार में काई भी जमी हुई थी, दरवाज़े बिल्कुल पुराने से नील रंग से पुते हुए थे।

गाड़ी का हॉर्न मारा तो एक आदमी हमारी गाड़ी की तरफ भागता हुआ दिखाई पड़ा।

कोई लोकल गांव वाला सा ही लग रहा था।

उसने आते ही पूछा- क्या आपका नाम राहुल है?

मैंने कहा- हाँ।

तो बोला- साब लेट हो रहे थे तो वो चाबी मुझे दे गए हैं। ये लीजिए चाबी और मैं भी चला… मेरी भैंसें चारे के लिए मेरा इंतज़ार कर रही होंगी।

हमें भी कुछ ऐसा ही माहौल चाहिए था।

मैंने उसे चाबी वापिस दी, सामान तो उसने अंदर रखवाया।

नीलेश ने उसे 10 रुपए दे दिए वो वहाँ से चला गया।

अंदर से घर काफी सुन्दर और साफ़ सुथरा था।

मैंने अंदर आते ही सबसे कहा- सब अपने लिए एक एक कमरा घेर लो।

शिखा और नेहा दोनों फर्स्ट फ्लोर की तरफ भागी, नीता और मधु आराम से नीचे ही एक एक कमरा देख लिया।

सभी कमरों के साथ अटैच लेट बाथ था ही, साथ ही हर बाथरूम में एक एक बाथटब भी था।

दोनों लड़कियों के ऊपर जाते ही मैंने नीता को बाँहों में भरा और बोला- यहाँ हर कमरे में बाथटब लगा है और तुझे हर बाथटब में चोदूँगा।

नीता के बूब्स दबाकर मैंने कहा- ये तो पहले से ही बड़े सख्त हो चुके हैं।

नीता बोली- आप तो मुझे बाद में चोदोगे, मैं तो रास्ते भर अपने सपनों में आपसे चुदती हुई आई हूँ।

मैंने नीता के टॉप के अंदर हाथ डाल के बूब्स को अच्छे से सहलाया, फिर मैंने कहा- जरा कुंवारी चूत सहला आऊँ।

नीता बोली- आप तो मुझे बाद में चोदोगे, मैं तो रास्ते भर अपने सपनों में आपसे चुदती हुई आई हूँ।

मैंने नीता के टॉप के अंदर हाथ डाल के बूब्स को अच्छे से सहलाया, फिर मैंने कहा- जरा कुंवारी चूत सहला आऊँ।

नीता को छोड़कर मैं ऊपर आ गया।

ऊपर दोनों अपने अपने रूम में जा चुकी थी।

मैंने पहला रूम खोला, वो रूम नेहा का था, अंदर जाते ही वो बोली- देखो राहुल, मेरे कमरे से बाहर का नज़ारा और भी खूबसरत लग रहा है।

मैंने कहा- तुमसे ज्यादा नहीं लग रहा, तुम सबसे ज्यादा खूबसूरत हो।

मैंने कहते हुए नेहा को बाँहों में भर लिया और उसके कूल्हे दबा दिए।

नेहा बोली- आज तो आप सुबह से ही मूड में लग रहे हो।

मैंने कहा- मूड में तो उस रात भी था पर तुम्हें तुम्हारी पहली चुदाई छत के कंकड़ भरे फर्श पर देना नहीं चाहता था। कमरे में तुम चीख नहीं पाती। छुप छुप के करने में मज़ा इसके आगे की बारी में आएगा।

नेहा बोली- चीख तो मैं यहाँ भी नहीं पाऊँगी। और आप ये सब करोगे कैसे? रात को तो आपको भाभी के साथ भी सोना होगा न?

मैंने कहा- तुम उसकी चिंता मत करो, मैं मैनेज कर लूंगा।

बातें करते करते मैं नेहा के बदन को सहलाता भी जा रहा था।

वो बोली- मैं तो एक ही रात में आपसे इतनी खुल गई हूँ कि आपको बताते हुए मुझे बिल्कुल शर्म नहीं आ रही कि मैं आपके छूने से गीली हो चुकी हूँ।

मैंने उसकी चूत की तरफ हाथ बढ़ाया तो उसने मेरा हाथ पकड़ लिया और बोली- मैं आपको रोकना नहीं चाहती पर इसके आगे मैं रुकना भी नहीं चाहती।

मैंने अपना हाथ पीछे खींच लिया और कहा- ठीक है, मुझे भी अपने आप को रोकना नहीं है।

थोड़ा बूब्स को सहला पुचकार कर मैंने उससे कहा- तुम यहीं कमरे में रहो, मैं जब आवाज़ लगाऊँ तो नीचे आ जाना।

उसके कमरे का दरवाज़ा बंद करके में दूसरे कमरे में गया जहाँ शिखा थी।

शिखा के कमरे में जाकर उसको बाँहों में लेकर उसके बदन से खेलते हुए कहा- तुम आज मुझे बहुत हॉट लग रही हो। मैंने पहले कभी तुम्हें इस तरह क्यूँ नहीं देखा, यही सोच रहा हूँ।

शिखा बोली- भैया, जब आप मुझे नंगी करेंगे तब और भी ज्यादा हॉट लगूंगी, आज तक मेरे बदन को कोई नहीं देख पाया है और आप इसे छूने जा रहे हैं। मुझे मेरे जिस्म पर नाज़ है, मैं चाहती हूँ कि आप मेरे जिस्म का एक भी कोना मत छोड़ना जिसे आपने न छुआ हो।

मैंने कहा- तुम थोड़ा जल्दी में हो, अभी कुछ नहीं हो सकता नीचे से अभी कोई भी आ सकता है। तुम थोड़ा सा और इंतज़ार करो, तुम्हारी हर तमन्ना पूरी हो जाएगी।

शिखा बोली- मैं तो बचपन से ही इन्तजार कर रही हूँ, थोड़ा और कर लूँगी। पर आप नीचे जाने से पहले मुझे एक चुम्मी तो कर सकते हैं न।

बस मैंने अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिए।

शिखा ने मेरे होंठों को इस तरह चूसना शुरू किया जैसे कोई बछड़ा दिन भर का भूखा गाय के थन से लगकर दूध पीता हो। वो किसी डी ग्रेड मूवी के एक्ट्रेस की तरह मेरा हाथ पकड़ कर अपने उभारों पर रखवा रही थी।

जब उसने मेरे होंठों को छोड़ा तो मैंने कहा- शिखा तुम बहुत अच्छी और सुन्दर हो। तुम्हारा बदन बहुत ही कोमल और ताज़ा है। तुम मुझसे शारीरिक रूप से कितना प्यार करती हो, तुम्हारी आँखें बता रही हैं। पर एक बात कहूँ?

शिखा बोली- हाँ हाँ कहिये न?

मैंने कहा- देखो, ये सब तुम्हारा व्यवहार और बदन और आँखें सब बता रही है तुम्हें किसी डी ग्रेड मूवी से कुछ सीखने की ज़रूरत नहीं, तुम्हें मतलब तुमको जो भी अच्छा लगता है, वो करो, किसी को कॉपी करने की कोशिश में तुम खूखी रह जाओगी।

शिखा ने आँखें नीची कर ली और कुछ न बोली, बस अपने पैर के अंगूठे के नाख़ून से जमीन खुरचने लगी।

मैंने अपनी बात को बढ़ाते हुए कहा- शिखा, मैं जानता हूँ कि तुम मेरी बात समझ गई हो पर यह मत समझना कि मैं तुम्हें कोई हिदायत दे रहा हूँ जिससे मैं एन्जॉय कर पाऊँ बल्कि मैं चाहता हूँ कि तुम अपने आने वाले पलों को पूरी तरह जियो।

शिखा नीचे देखते हुए ही गर्दन हिला दी।

मैं कमरे से बाहर आ गया था। कमरे से बाहर आते ही दरवाज़ा जोर से बंद हुआ।

मैं जब नीचे पहुँचा तो नीता अपने कमरे में थी और मधु अपने में, मैंने दोनों कमरों के बीच खड़ा होकर पूछा- नीलेश कहाँ है?

दोनों ने एक साथ इशारा करके बताया कि बाहर की तरफ।

मैं बिना किसी कमरे में घुसे हुए बाहर की तरफ रुख कर गया।

बाहर नीलेश खड़ा खड़ा सिगरेट पी रहा था।

मैं- क्यों बे भोसड़ी के, यहाँ क्या माँ चुदा रहा है?

नीलेश- सिगरेट पी रहा हूँ, ले तू भी पी ले।

मैं- क्या हुआ, कुछ मूड अच्छा नहीं लग रहा?

नीलेश सिगरेट मेरी तरफ बढ़ाते हुए- नहीं ऐसा कुछ नहीं है।

मैं कश लगाकर धुआँ फेंकते हुए- अबे चूतिये बोल, चूत जैसी शक्ल मत बना।

नीलेश थोड़ा बिफर कर- यार तू तो दो नई और कुंवारी चूत चोदेगा वो भी दोनों मेरी बहनें… मैं बाहर बैठकर मुठ मारूँगा क्या?

मैं- मुझे पता था गांडू, मुझे पता था। तू आखिर में अपनी ऐसे ही माँ चुदायेगा। बोल तेरी क्या इच्छा है ?

नीलेश- मुझे भी दोनों चूत मारनी है।

मैं- तू शिखा को भी..?

मैं थोड़ा विराम लेकर बोला- शिखा के साथ भी करेगा क्या?

नीलेश- हाँ जैसे तू भाई, ऐसे में भी भाई… बहनचोद ही बनना है मुझे भी!

मैं- मेरी एक बात मनेगा?

नीलेश ने हाँ में सर हिलाया।

मैंने कहा- देख कुंवारी चूत तो सिर्फ हम दोनों में से एक को ही मिल सकती है। मेरे चोदने के बाद मैं उन्हें इतना खोल लूंगा कि तू भी आराम से दोनों को चोद पाएगा।

नीलेश- कुछ नहीं से कुछ तो बेहतर है। तुझे जो करना है कर, बस मुझे दोनों चूत दिलवा देना।

मैं- हाँ माँ के लवडे, मुझे तो तूने दलाल समझ रखा है न?

हम लोग थोड़ी देर चुप रहे और सिगरेट पीते रहे।

फिर मैंने कहा- एक काम कर, तू मेरी पहली चुदाई की वीडियो बनाएगा।

नीलेश बोला- तू चिंता मत कर, तू नहीं भी बोलता तो भी बनाता, बाहर आया ही देखने ये था कि कहाँ से इन दोनों के कमरे के अंदर झाँका जा सकता है।

मैंने पूछा- मिल गया कोई रास्ता?

नीलेश ने हाथ के इशारे से जगह दिखाई, वो एक फर्स्ट फ्लोर पर बना हुआ बड़ी बालकनी थी।

मैंने कहा- वहाँ जायेगा कैसे?

तो उसने मुझे सीढ़ी भी दिखा दी।

मैंने कहा- फिर तो मधु और नीता को भी यहाँ ले आना चुदाई के टाइम!

हम दोनों सिगरेट पीते हुए बंगले के अंदर आ गये।

मैंने कमरे के सामने आते ही कहा- यार यह तूने सही किया कि कमरा आमने सामने का ही चुना। बोल तू कौन से कमरे में जायेगा?

मधु और नीता दोनों अपने अपने कमरे में टीवी पर कुछ देख रही थी। मधु के कमरे में टेबल पर बोतल गिलास बर्फ चिप्स जैसे कई आइटम रखे हुए थे। दोनों ने ही नाइटी पहनी हुई थी। मधु की हल्के गुलाबी रंग की आगे से खुलने वाली चिकने कपड़े की थी, वहीं नीता की नाइटी मैरून रंग की थी, नीता की नाइटी से सब कुछ आर पार दिखाई पड़ रहा था और उसने अंदर कुछ नहीं पहना था, मधु की नाइटी झीनी नहीं थी पर में तो अच्छे से जानता ही था कि इसने भी अंदर कुछ नहीं पहना होगा।
 
इससे पहले कि नीलेश कुछ कह पाता, मैं नीता के कमरे में घुसने लगा। मुझे नीता के कमरे में जाता देख नीलेश भी मधु के कमरे की तरफ चल दिया।

नीता बोली- भैया, आज तो आपके जलवे हैं, चार चार चूतें आपके लिए बेताब है।

मैंने कहा- यार!!! थोड़ी और कोशिश बाकी है अभी… जब चारों की चार चूतें एक ही बिस्तर पर होंगी, तब आएगा मजा!

नीता बोली- भैया, आज तो आपके जलवे हैं, चार चार चूतें आपके लिए बेताब है।

मैंने कहा- यार!!! थोड़ी और कोशिश बाकी है अभी… जब चारों की चार चूतें एक ही बिस्तर पर होंगी, तब आएगा मजा! क्योंकि तुम दोनों तो हो ही कमाल की… पर उन दोनों का पहली बार है, पता नहीं साली मानेंगी या नहीं।

नीता बोली- अरे आप तो जादूगर हो, आप कैसे न कैसे उन दोनों को भी मना ही लोगे… बाकी हम सब आपकी बातें मानेंगे ही, जैसा आप कहोगे वैसा करेंगे! फिर बाकी किस्मत अपनी अपनी।

हम दोनों अब एक दूजे की बाहों में आलिंगनबद्ध हो चुके थे। नीता के भड़काऊ कपड़ों के कारण मेरा लंड पहले से ही अपनी औकात में आ चुका था।

इधर न हमने दरवाज़ा बंद किया था न ही नीलेश ने।

नीलेश भी मधु को पीछे से पकड़ कर उसके बूब्स दबा रहा था और मधु की गर्दन पर धीरे धीरे चूम रहा था। मधु हमारी तरफ देख कर अपने आप को उत्तेजित कर रही थी।

मैं और नीता भी अब मधु और नीलेश के कमरे में आ गये। नीलेश मधु के बड़े बड़े उभारों को चूमते हुए बोला- क्या हुआ?

मैंने कहा- चलो जल्दी से कुछ खा लेते हैं।

नीलेश मधु की जांघ को नाइटी के ऊपर से सहलाता हुआ बोला- हाँ लगा लो खाना।

मैंने कहा- मैं इस बीच सभी लड़कियों के साथ बदमाशियाँ करूँगा, तुम सभी ऐसे इग्नोर करना जैसे कि कुछ हुआ ही न हो या तुमने कुछ देखा ही न हो।

सभी लोगो ने हाँ में हाँ मिला दी।

मैंने नीता के चूतड़ मसलते और चांटा मारते हुए कहा- शिखा और नेहा नीचे आ जाओ, तुम दोनों भी कुछ खा लो।

किसी की कोई न आवाज़ आई, न ही कोई नीचे आया।

मैंने कहा- तुम लोग बाहर डाइनिंग टेबल पर खाना लगाओ, मैं उन दोनों को लेकर आता हूँ।

पहले मैं शिखा के कमरे में गया और बाहर से जोर से बोला- क्यूँ तेरे को सुनाई नहीं दे रहा?

बोलते हुए मैंने दरवाज़ा खोला तो कमरे में कोई नहीं था।

मैंने सब जगह देखा, मुझे कोई नहीं दिखा तो मैंने फिर से आवाज़ लगाई- शिखा!! ओ शिखा !!!

मैं नेहा के कमरे में जाकर चेक करने ही वाला था, तभी मैंने सोचा कि एक बार बाथरूम में भी चेक कर लूँ।

बाथरूम का दरवाज़ा खटखटाया और प्यार से बोला- शिखा क्या तुम अंदर हो?

शिखा बोली- हाँ भैया, अंदर आ जाओ।

मैं दरवाज़ा खोल कर अंदर गया, शिखा बाथटब में पानी से किलकारी करती हुई नंगी पड़ी थी।

मेरी आँखें उसका बदन देखकर फटी की फटी रह गई, वो मुझे गलत नहीं कह रही थी, उसके बूब्स कुछ 36″ के रहे होंगे साथ की डार्क पिंक या हल्का ब्राउन रंग के उसके निप्पल, बिल्कुल सुराहीदार गर्दन, घने काले बाल जिनका जूड़ा बना हुआ था।

बाकी पूरा बदन तो पानी में डूबा हुआ था इसलिए उसके बारे में अभी कुछ भी कहना गलत ही होगा।

मैं शिखा को घूरे जा रहा था तो शिखा मेरी तरफ पानी फेंक कर बोली- भैया ये आप ही के लिए है, आइये इसे छू लीजिए।

मैंने कहा- शिखा, तुम मेरा इम्तिहान ले रही हो। इतने खूबसूरत बदन को छूने के बाद कौन साला उसे छोड़ सकता है।

शिखा बोली- तो जाना ही क्यूँ है?

मैं बोला- क्योंकि तेरे भैया भाभी भी हमारे साथ हैं, इसलिए।

शिखा को जैसे एकदम याद आया कि वो हनीमून पर नहीं, अपने बाकी रिश्तेदारों के साथ आई है, बोली- ओह हाँ… मैं तो भूल गई थी, आप चलो नीचे, मैं आती हूँ।

मैंने धीरे से कहा- देखो, तुम जो भी पहनो पर अंदर के कपड़े मत पहनना।

शिखा हल्की सी मुस्कुरा दी और हाँ में गर्दन हिला दी।

नेहा के कमरे में गया तो नेहा अपने बिस्तर पर पड़ी पड़ी अपनी चूत मसल रही थी। उसने एक फ्रॉक पहना हुआ था और अपनी पैंटी के अंदर हाथ डाल के ऊँगली करने में मशरूफ थी।

मेरे कमरे में जाते ही उसने ऊपर चादर डाल ली, फिर मुझे देखकर बोली- ओह मैं तो डर गई थी, मुझे लगा कोई और होगा।

और फिर से अपनी चूत सहलाने लगी।

मैं उसके करीब गया और बोला- इसे मेरे लिए छोड़ दो, और आ जाओ कुछ खाते हैं।

नेहा बोली- मुझे तो भूख ही नहीं लग रही, मुझे तो प्यास लगी है। तुम मेरी प्यास क्यूँ नहीं बुझा देते।

मैंने कहा- मैं तुम्हारी प्यास भूख सब मिटाऊँगा अभी सभी लोग खाने पर इंतज़ार कर रहे हैं। बस तुम रायता मत खाना, उसमें नींद की दवाई है। सभी लोग सो जाएंगे, फिर हम खुल के मस्ती करेंगे।

यह मैंने ऐसे ही बोल दिया था।

‘और हाँ तुम अपने कपड़ो/न के अंदर कुछ मत पहन कर आना!’.

नेहा बोली- आप कहो तो कुछ भी न पहनूं!

मैंने कहा- तेरी मर्जी… नीचे और भी लोग हैं। वर्ना क्या मैं तुम्हें कपड़े पहनने देता।

नेहा बोली- आपकी ऐसी ही बातों पर तो मर मिटी हूँ, आप चलो, मैं आती हूँ।

मैं नीचे आया तो सभी लोग डाइनिंग टेबल पर बैठे थे।

मधु तो वही नाइटी पहनी थी, मधु की नाइटी पूरी पैर तक लम्बी थी।

पर नीता ने स्टॉल अपने ऊपर ओढ़ लिया था, नीता की नाइटी थोड़ी छोटी भी थी, वो घुटनों से थोड़ा ऊपर तक ही आती थी।

दोनों लड़कियाँ मटक मटक कर नीचे आ रही थी।

नीलेश की भी दोनों लड़कियों के लिए नजर बदल गई थी इसलिए उसका दिल भी हिचकोले ले रहा था।

जब सभी लोग अपनी अपनी जगह बैठ गए तो मधु बोली- यहाँ किचन में केवल 3 ही प्लेट्स थी। तो नीलेश और नीता एक प्लेट में खा लेंगे, मैं और राहुल एक प्लेट में, क्या आप दोनों एक प्लेट में खा लेंगी?

दोनों ने हाँ कर दी।

मैं तब तक बोला- मैं तो सबकी प्लेट में खाऊँगा।

हमने ढाबे से पूरियाँ और आलू की सब्जी पैक करा ली थी। बस प्लेट्स में खाना रखा तो सबसे पहले शिखा ने मुझे अपने हाथ से खिलाया।

मैंने भी शिखा को खिलाया और जान करके थोड़ा सा गिरा दिया जो शिखा के बूब्स पर जाकर गिरा। मैंने सबके सामने उसके बूब्स के अंदर हाथ डाल के वो आलू उठाया और खा गया।

बाकी सभी सामान्य रहे पर शिखा और नेहा आशचर्य में मुंह खोले और आँखें फाड़े देख रही थी।

मैंने अगला कौर नेहा को खिलाया।

नेहा आगे की ओर से खुलने वाला बाथरोब स्टाइल की नाइटी पहनी थी। उसका कौर कुछ ऐसे गिराया कि वो उसकी जांघों पर गिरा।

मैंने जांघों में ऐसे हाथ डाला कि वो कौर थोड़ा और खिसक कर उसकी जांघों के नीचे कुर्सी पर जा गिरा। वहाँ अंदर हाथ डाल के मैंने उसके चूतड़ भी छुए और चूत को भी हाथ लगा दिया और कौर उठा कर खिला दिया।

फ़िर मैंने मधु से कहा- अरे वो रायता तो निकालो।

मधु बोली- अच्छा याद दिला दिया, मैंने वो फ्रिज में रख दिया था, मैं बस अभी लाई।

मैंने नीता की प्लेट में से एक कौर बनाया और अपने होंठों में पकड़ कर नीता को खिलाया।

नीता ने बड़े आराम से मेरे होंठों से वो कौर ले लिया।

मधु तब तक रायता ले आई थी और ये सब उसकी आँखों के सामने ही हुआ।

दोनों लड़कियाँ मतलब शिखा और नेहा सिर्फ यही देख रही थी और सोच रही होंगी कि मैं ऐसे काम अपनी बीवी की मौजूदगी में कैसे कर सकता हूँ।

खैर मैं वहाँ से अपनी बीवी को खिलाने गया तो बीवी को कौर खिला कर सबके सामने उसके बूब्स दबा दिए।

पर किसी के चेहरे पर कोई रिएक्शन नहीं दिखा, बस नेहा और शिखा का मुंह अब तक खुला था।

शिखा के लिए ज़िन्दगी का पहला किसी पुरुष का स्पर्श था अपनी चूत पर, वो भी काफी लोगो के सामने…

वैसे किसी को दिख नहीं रहा था पर सब जानते तो थे ही।

पर बेचारी अपनी सिसकारी भी नहीं ले सकी और मैंने उसकी चूत पर एक किस करके अपनी चम्मच उठा ली।

सभी लोग रायता ले रहे थे पर नेहा ने रायता नहीं लिया।

मैं नीलेश से बोला- नीलेश यार, बहुत पेट भर गया, अब तो नींद आ रही है।नीलेश बोला- हाँ यार, नींद आ रही है।

मैंने कहा- सिगरेट जला!

नीलेश मुझे डांटने वाली मुद्रा में देख रहा था, फिर बोला- मैं इन दोनों के सामने नहीं पीता!

तो शिखा बोली- लेकिन हमें पता तो है ही!

नेहा बोली- पी लो, कोई नहीं!

नीलेश ने मुस्कुरा कर सिगरेट जला दी।

मैंने तीनों मतलब नीलेश, मधु और नीता को मैसेज किया कि मैंने नेहा को बताया है कि तुम्हारे रायते में नींद की गोली थी इसलिए वो चाहे तो खुल के चुद सकती है पर शिखा को कैसे मैनेज करेंगे। इसलिए तुम लोग उसे अपने कमरे में रखो और उसके कान में कोई लीड लगा दो और अच्छे अच्छे गाने सुनने दो। थोड़ी देर में नींद की नौटंकी शुरू कर देना जब तक में नेहा को ऊपर नहीं ले जाता।

मधु बोली- यार मेरे तो सर में दर्द हो रहा है, शाम को घूमने चलेंगे अब तो सोते हैं, बहुत तेज़ नींद आ रही है।

नीता बोली- हाँ, मुझे भी पता नहीं क्यूँ बहुत तेज़ नींद आ रही है।

नीलेश बोला- अरे कुछ नहीं है, आज सुबह जल्दी उठ गए थे न इसलिए नींद आ रही हैम चलो सोते हैं।

मधु बोली- शिखा दी, आपसे कभी बात नहीं हो पाती, आओ आप मेरे साथ, अपन दोनों बातें करेंगे।

नीता बोली- हाँ भाभी, जब तक नींद नहीं आती, बातें करते हैं, आ जाओ नेहा दी आप भी हमारे साथ आ जाओ।

नेहा मौके पर चौका मार बोली- मुझे भी नींद आ रही है, मैं अपने कमरे में सोने जा रही हूँ। जब नींद खुलेगी तो आ जाऊँगी।

मधु, नीता और शिखा, नीता वाले कमरे में चले गए, नीलेश उठकर मधु वाले कमरे में चला गया।

अब बचे मैं और नेहा, मैंने नेहा को उठाया और गोद में उठा लिया, मैंने उसे सीढ़ियों पर ही चूमना शुरू कर दिया।

नेहा बोली- कोई देख लेगा?

मैंने कहा- मुझे कोई डर पड़ा है किसी का? आज तुम भी खुल कर प्यार करो और मैं भी खुल कर मोहब्बत करूँगा।

नेहा बोली- कोई सुन लेगा, अभी कोई सोया नहीं है।

मैंने कहा- सुन लेने दो, तू कहे तो यहीं सीढ़ियों पर तुझे चोद कर दिखाऊँ कि कितनी आग लगी है।

नेहा कुछ नहीं बोली, सिर्फ मेरी आँखों में देखती रही।

मैं उसके कमरे को पार कर चुका था, नेहा बोली- मेरा कमरा वो निकल गया।

मैंने कहा- वो तुम्हारा कमरा हो सकता है, पर मोहब्बत करने के लिए एक और कमरा तैयार करवाया है मैंने।

नेहा की आँखों में अपना सरप्राइज देखने की ललक देखी मैंने।

मैंने कहा- आँखें बंद करो।
 
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