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बहादुर थूक सटकता, रीटा की शर्ट मे हाथ डाल कर बैच लगाने लगा, तो रीटा प्यार से बोली "ठहरो बहादुर ऐसे नही " फिर रीटा ने लाहपरवाही से अपनी शर्ट के अगले तीन बटन खोल दिये और बोली "अब लगाओ, बडी आसनी से लगेगा"।
रीटा ने शर्ट के अंदर कुछ भी नही पहन रखा था और उस नवयोवना की अवारा रसभरी छातीयों की गोलाईया व कटाव शरेआम नुमाया हो रही थी। रीटा के गौरेपन और जवानी के कसाव कटाव से रीटा की पुष्ट उरोजो मे गुलाबी और नीली गुलाबी नसे साफ दिखाई दे रही थी। खुले गले मे से उफनते उरोजो की छोटी छोटी गुलाबी चुच्कीयां बहादुर की आँखों से लुका छिप्पी खेल रहीं थीं।
रीटा भी नम्बर एक की मां की लौडी थी, अपनी शर्ट के उपर से, अपने चुच्चे की चौंच पे उंगली लगाती बोली "बहादुर बिलकुल यहा लगाना है, टिप पे,जरा जल्दी करो"।
घबराये और हडबडाये बहादुर ने अपन पूरा का पूरा हाथ रीटा की शर्ट में डाल दिया। पर बहादुर अब थौडा समभल चुका था वह रीटा को लाहपरवाह समझ हाथ निकालते निकालते रीटा की ठोस स्तनको भींच कर खींच सा दिया। रीटा समझ गई की बहादुर जाल मे तो फंस गया है पर बहादुर का डर को दूर करने के लिये कुछ करना पडेगा।
रीटा का स्कूल बैग साईकल के पीछे रख बहादुर ने रीटा की बगलौं में हाथ डाल कर रीटा को उठा अगले डन्डे पर बैठाया। ऐसा करते बहादुर ने बहुत चलाकी से रीटा की चुच्चौ की सही ठंग से दुबारा मालिश कर दी। मस्त रीटा ने सकर्ट को खूब उपर उठा के सायकल के डन्डे पर बैठ गई। रीटा ने सोचा काश बहादुर की लैडी सायकल होती और वह शान से बहादुर के लन्ड पे बैठ कर स्कूल जाती।
रास्ते मे रीटा की जवान चुच्चौ और टांगौ को देख देख कर बहादुर का लन्ड़ फुंफकार उठता। बातों बातों में रीटा बहादुर से और बहादुर रीटा से खुलता चला गया। बहादुर ने बताया के उस की शादी नही गुई और वह अकेला रहता है, तो रीटा की जोरो से गाँड कसमसा उठी और चूत मे सितार सी बजने लगी। रीटा की प्यासी चूत मे अब जैसे अस्खंया बुलबुले से फूटते जा रहे थे रीटा बोली "बहादुर तुम मुझे बहुत पसन्द हो"।
रास्ते मे बहादुर ने ईशारा कर के बताया कि वो उस का घर है, तो रीटा के दिमाग मे बिजली सा आईडीया आया। फटाक से अपनी टांगो के बीच को हाथ से दबाती बोली "हाय बहादुर मुझे बडी जोर से पिशाब आया है, प्लीज़ जरा जल्दी से अपने घर ले लो नही तो ये यही निकल जायेगा"
"ओह अच्छा बेबी" यह कह बहादुर ने साईकल तेज चला कर अपने घर के आगे रोक दी। मौका देख बहादुर ने रीटा की बगल मे हाथ डाल कर रीटा के चुच्चौ को शरैआम अपनी मुट्ठीयौं मे भीच कर रीटा को साईकल से नीचे उतारा तो रीटा के मँह से मदभरी सिसकारी निकल गई।
"आह बहादुर जल्दी मुझे लगता है कि मेरी फट ही जायेगी" रीटा अपनी चूत को जोर जोर से स्कर्ट के उपर से रगडती बोली।
"तुम साईकल को ताला लगाओ और मैं ताला खोलती हूँ" हरामज़ादी रीटा ने चाबी निकालने के बहाने बहादुर की पैंट की पाकीट मे हाथ डाल कर बहादुर का अधअकडा लन्ड का साईज़ भापा, तो सिहर उठी। बहादुर का लन्ड भी कन्या के हाथ का सपर्श से और तन गया।
रीटा ताला खोल, ठरक में हांफती और लडखडाती सी कमरे अंदर घुसी। बहादुर टायलट की तरफ ईशारा कर बोला "बेबी टायलट वह है"।