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लक्की चादर
दोस्तो मैं यानी आपका दोस्त राज शर्मा एक और छोटी सी कहानी आपके लिए लेकर हाजिर हूँ . दोस्तो ये कहानी एक ऐसी लड़की की है जो मामा समझ कर अपने सगे भाई से ही चुद गई . और जिस चादर पर उसकी भाभी की सुहाग मनी थी उसी चादर पर उसने अपने भाई से चुदाई करवाई . तो दोस्तो आपको ज़्यादा बोर ना करते हुए ये कहानी साना की ज़ुबानी ही आपको सुनाता हूँ
अभी दो महीने पह'ले ही मैं 20 साल की हो गयी हूँ. मेरे से 12 साल बड़ा मेरा एक भाई है जिस'की चार साल पह'ले शादी हो गयी है. हमारे घर में बहुत ही खुश नुमा माहॉल है. पिकनिक्स में जाना, अच्छे रेस्तराँ में जाना, कह'ने का मत'लब जिंद'गी का हर लुफ्त हम खुल के उठाते हैं. आज फिर पिक्निक का प्रोग्राम था. हम'ने एक आलीशान फार्म हाउस बुक कर'वा लिया. पिक्निक में मेरे सगे मामा और दूस'रे करीबी रिस्तेदार भी शिरक़त कर रहे थे.
मैं अपनी दूसरी रिस्ते की बहनों के साथ फार्म हाउस के स्विम्मिंग पूल में तैराकी कर रही थी. मामा हम सब को तैराकी सिखा रहे थे. हम लड़'कियों ने शलवार क़मीज़ पहनी हुई थी. मामा हम सब को बारी बारी तैराकी सिखा रहे थे. चूँकि फार्म हाउस मामा ने बुक कराया हुआ था इस वजह से हमारी फॅमिली के अलावा कोई और नहीं था. शाम का समय और हल्के हल्के बादल की वजह से मोसम (सीज़न) बहुत ही खुश गवार था. मम्मी अपनी बहनों और दूसरे रिलेटिव के साथ और पापा अपने रिलेटिव के साथ तैराकी कर रहे थे. कुच्छ फ़ासले पर भाई जान भाबी के साथ पानी में खेल रहे थे.
पानी काफ़ी ठंडा और गहरा था और ब्लू कलर के बारे स्विम्मिंग पूल की वजह से पानी भी नीले रंग का बहुत ही दिलकश लग रहा था. जहाँ हम लोग पानी मे खेल रहे थे वहाँ पानी हमारी कमर(वेस्ट) के ऊपेर था. मामा ने अब मुझे तैराकी के बारे में बताया और मेरी मदद कर ने के लिए मेर पेरो के नीचे से मुझे उठा कर हाथ और पैर की मदद से तैराकी करा रहे थे. मामा की शादी नही हुई थी और वो मेरे नाना नानी के साथ ही डिफेन्स में रह'ते थे. सब लोग अपनी बीवियों के साथ खेल रहे थे जब कि वो हम लोगों के साथ तैराकी में मसरूफ़ थे. मामा ख़ास तोर पर हमसे बहुत ही मोहब्बत कर ते थे. चूँकि मेरी मम्मी उनकी एकलौती बहन थी.
मामा ने मेरे पेरो के नीचे हाथ रखा हुआ था और मैं तैराकी के लिए हाथ पैर हिला रही थी. मामा ने अचानक हाथ हटा लिया और मैं डिसबॅलेन्स होकर गिरने लगी तो मैने मामा को पकड़ना चाहा और गल'ती से मेर हाथ मामा के लंड पर लग गये. मैं घबरा गयी लेकिन कोई ध्यान नहीः दिया. मामा ने फिर मुझे तैराकी करने को कहा और मैं फिर से तैराकी करने लगी. मामा ने अब जो हाथ रखा तो वो ऐक हाथ मेरे मम्मों के नीचे और दूसरा मेरी चूत के नीचे था. मैं अभी 17 साल की थी और मैं ना तो मम्मों पर कुच्छ पहेन'ती थी और ना ही मुझे अंडरवेर की आदत थी. मामा के हाथ मेर कपड़े गीले होने की वजह से ऐसे लग रहे थे कि मेरे मम्मे नंगे हैं.
यह पह'ली बार था कि किसी के हाथ ने मेरे मम्मों और चूत को स्पर्श किया था. मुझे मामा का हाथ बहुत अच्छा लगा. मैं तैराकी की कोशिश कर रही थी और मामा का हाथ वहीं लगा हुआ था. मामा ने कहा कि वो हाथ हटा रहे हैं और उन्हों ने हाथ हटाया कि मैं फिर अस्थिर होगयी और ज्योन्ही मैने उनको पकड़'ना चाहा, मेरा हाथ फिर मामा के लंड पर लगा. इसबार मैने खुद ही हाथ वहीं लगाया था. मैने हाथ से महसूस किया कि मामा का लंड अब कुच्छ तना हुआ था. मैं मामा के सामने खड़ी थी और मैं ने पार'दर्शी (ट्रॅन्स्परेंट) पानी से देखा कि मामा का लंड खड़ा हुआ था. ईत'ने मैं मेरी ऐक कज़िन ने कहा कि अब मैं सीखूँगी लेकिन मैने माणा कर दिया और कहा कि मैं कुच्छ देर और सीखूँगी.
मैं फिर तैराकी करने लगी अब मैं जान बूझ कर बार बार अस्थिर होने लगी और मामा का लंड अब खूब सॉफ नज़र आ रहा था कि वो बिल्कुल सीधा खड़ा हुआ था. मैं ऐक बार तैराकी कर'ते हुए डूबने लगी. मामा ने मुझे थाम लिया और मैं खड़ी होकर मामा के सीने से लग गयी. मामा का लंड मेरे पेरो से टकरा रहा था. इस मंज़र ने मुझे बहुत ही सेक्सी कर दिया. मैने ऐक बार फिर तैराकी की कोशिश की और अब मामा ने मुझे पानी पर सीधा करके खुद मेरी टाँगों को फेला कर मेरे पीछे आ गये. अब उन्हों ने मेर पीछे से दोनो टाँगों के बीच होकर मेर पैरो को पकड़ लिया और कहा,पहले हाथों की प्रॅक्टीस करो फिर पैरों से करना. मैं मामा को दोनो टाँगों के बीच पाकर हाथों से प्रॅक्टीस करने लगी और मामा का लंड मेरी चूत के क़रीब महसूस हो रहा था जो कि बहुत ही लाजवाब लग रहा था. मैं हाथों से प्रॅक्टीस कर रही थी और दर असल मामा के लंड को चूत के क़रीब पाकर खुश हो रही थी या सेक्स में गरम हो रही थी.
मामा का लंड हिल'ता हुआ महसूस हो रहा था और उसने मेरे ठंडे पानी में डूबे हुवे बदन में आग लगा रहा था. यह एहसास मुझे पह'ली बार हुआ था और बहुत ही खुस गवार था.. मैं तैराकी तो क्या सीख'ती किसी और आग मैं जलना सीख रही थी. मैं थक गयी तो मैं खड़ी हो गयी. मामा का हाथ अब भी मेर पैरो पर था और खड़े होते ही मेरे चूतड़ के ऊपर मामा का लंड महसूस हुआ. मैं पलट कर सीधी हो गयी और मैने मामा की आँखों मे ऐक नई चमक देखी और खुद मेरे जिस्म के अंदर भी ऐक नया पैगाम था. शाम ढल चुकी थी और मैं ऐक नई ख्वाहिस महसूस कर रही थी.
मामा ने पूछा, और प्रॅक्टीस करो गी लेकिन उनका हलक खुश्क हो चुका था और बड़ी मुश्किल से उनकी आवाज़ निकल रही थी. अभी मैं जवाब ही देने वाली थी कि पापा और भैया की आवाज़ आई कि चलो अब रात हो रही हैं. मैं आवाज़ सुन कर ना चाहते हुए पानी से बाहर निकल आई
लेकिन मामा ने कहा, मैं अभी ठहर कर आ रहा हूँ. मैं समझ गयी कि वो खड़े लंड के साथ कैसे बाहर आ सकते हैं. हमलोंग फार्म हाउस के हॉल मे आ गये और थोड़ी ही देर के बाद मामा भी आ गये. वो कुच्छ चुप चुप थे.
हॉल मे भैया और मामा के साथ साथ सब ही ने हाफ पैंट पहनी हुई थी जबकि हम लड़'कियों और लॅडीस ने शलवार कमीज़ पहनी हुई थी. मम्मी और भाबी वाघिरा खााना लगा रही थी. मैं बार बार मामा को देख रही थी और जब उनकी तरफ देखती तो उनको अपनी ही तरफ देखते हुवे ही पाती. मेरे अंदर आग लगी हुई थी और मामा के लंड और हाथो की तपिश अब भी महसूस हो रही थी.
सब खाना खा रहे थे लेकिन मैं बेदिली से खा रही थी. ऐक आग जो मेरे बदन में लगी हुई थी कम नहीं हो रही थी. मामा भी दूसरी तरफ चुप चुप थे और वो भी वही सोच रहे होंगे जो मैं सोच रही थी. मामा ऐक लंबे क़द और सेहत मंद जिस्म के मालिक थे. वो और भैया दोनो ही डेली जिम जाया कर'ते थे और इसी वजह से दोनो में बहुत दोस्ती थी. मेरी कज़िन्स मुझ से बातें कर रही थी लेकिन मुझे कोई दिलचस्पी नही हो रही थी. मैं अपने बारे में गौर कर रही थी कि मैं ऐक दुबली पतली परंतु लंबी थी. मेरी आँखे ब्राउन और स्किन कलर फेर था जबकि बाल बहुत ही सिल्की और बड़े थे. मैं अपने बारे में सोच ही रही थी कि खाना ख़तम हुआ और अब हमलोग चाय का लुफ्त उठा रहे थे और सब ही गॅप शॅप कर रहे थे. रात के अब 11 हो गये थे और आख़िर पापा ने कहा, अब सब सो जाएँ क्योंकि मॉर्निंग मे ब्रेक फास्ट कर के सब को वापिस जाना है. हॉल मने कार्पेट पर बिस्तर सेट होने लगे और मैं हॉल की दीवार के पास खिड'की के नीचे अपने बिस्तर पर लेट गयी. तमाम जेंट्स के बिस्तर हॉल में ऐक साथ सेट हुए और उनके पैरों की तरफ कुच्छ फ़ासले के बाद लॅडीस के बिस्तर सेट हुए. मैने देखा कि मामा मेरी खिड'की के बाद ऐक खिड'की छोड़ कर दूसरी खिड'की के पास बेड पर थे और उनके बराबर पापा का बेड था... हम सब के लेटने के बाद हॉल की लाइट ऑफ कर दी गयी. मेरी विंडो से चाँदनी रात छन छन कर मेरे बेड पर गिर रही थी और खिड'की के नीचे लगी हुई रात की रानी की खुश्बू ने मुझे मस्त कर दिया था.
दोस्तो मैं यानी आपका दोस्त राज शर्मा एक और छोटी सी कहानी आपके लिए लेकर हाजिर हूँ . दोस्तो ये कहानी एक ऐसी लड़की की है जो मामा समझ कर अपने सगे भाई से ही चुद गई . और जिस चादर पर उसकी भाभी की सुहाग मनी थी उसी चादर पर उसने अपने भाई से चुदाई करवाई . तो दोस्तो आपको ज़्यादा बोर ना करते हुए ये कहानी साना की ज़ुबानी ही आपको सुनाता हूँ
अभी दो महीने पह'ले ही मैं 20 साल की हो गयी हूँ. मेरे से 12 साल बड़ा मेरा एक भाई है जिस'की चार साल पह'ले शादी हो गयी है. हमारे घर में बहुत ही खुश नुमा माहॉल है. पिकनिक्स में जाना, अच्छे रेस्तराँ में जाना, कह'ने का मत'लब जिंद'गी का हर लुफ्त हम खुल के उठाते हैं. आज फिर पिक्निक का प्रोग्राम था. हम'ने एक आलीशान फार्म हाउस बुक कर'वा लिया. पिक्निक में मेरे सगे मामा और दूस'रे करीबी रिस्तेदार भी शिरक़त कर रहे थे.
मैं अपनी दूसरी रिस्ते की बहनों के साथ फार्म हाउस के स्विम्मिंग पूल में तैराकी कर रही थी. मामा हम सब को तैराकी सिखा रहे थे. हम लड़'कियों ने शलवार क़मीज़ पहनी हुई थी. मामा हम सब को बारी बारी तैराकी सिखा रहे थे. चूँकि फार्म हाउस मामा ने बुक कराया हुआ था इस वजह से हमारी फॅमिली के अलावा कोई और नहीं था. शाम का समय और हल्के हल्के बादल की वजह से मोसम (सीज़न) बहुत ही खुश गवार था. मम्मी अपनी बहनों और दूसरे रिलेटिव के साथ और पापा अपने रिलेटिव के साथ तैराकी कर रहे थे. कुच्छ फ़ासले पर भाई जान भाबी के साथ पानी में खेल रहे थे.
पानी काफ़ी ठंडा और गहरा था और ब्लू कलर के बारे स्विम्मिंग पूल की वजह से पानी भी नीले रंग का बहुत ही दिलकश लग रहा था. जहाँ हम लोग पानी मे खेल रहे थे वहाँ पानी हमारी कमर(वेस्ट) के ऊपेर था. मामा ने अब मुझे तैराकी के बारे में बताया और मेरी मदद कर ने के लिए मेर पेरो के नीचे से मुझे उठा कर हाथ और पैर की मदद से तैराकी करा रहे थे. मामा की शादी नही हुई थी और वो मेरे नाना नानी के साथ ही डिफेन्स में रह'ते थे. सब लोग अपनी बीवियों के साथ खेल रहे थे जब कि वो हम लोगों के साथ तैराकी में मसरूफ़ थे. मामा ख़ास तोर पर हमसे बहुत ही मोहब्बत कर ते थे. चूँकि मेरी मम्मी उनकी एकलौती बहन थी.
मामा ने मेरे पेरो के नीचे हाथ रखा हुआ था और मैं तैराकी के लिए हाथ पैर हिला रही थी. मामा ने अचानक हाथ हटा लिया और मैं डिसबॅलेन्स होकर गिरने लगी तो मैने मामा को पकड़ना चाहा और गल'ती से मेर हाथ मामा के लंड पर लग गये. मैं घबरा गयी लेकिन कोई ध्यान नहीः दिया. मामा ने फिर मुझे तैराकी करने को कहा और मैं फिर से तैराकी करने लगी. मामा ने अब जो हाथ रखा तो वो ऐक हाथ मेरे मम्मों के नीचे और दूसरा मेरी चूत के नीचे था. मैं अभी 17 साल की थी और मैं ना तो मम्मों पर कुच्छ पहेन'ती थी और ना ही मुझे अंडरवेर की आदत थी. मामा के हाथ मेर कपड़े गीले होने की वजह से ऐसे लग रहे थे कि मेरे मम्मे नंगे हैं.
यह पह'ली बार था कि किसी के हाथ ने मेरे मम्मों और चूत को स्पर्श किया था. मुझे मामा का हाथ बहुत अच्छा लगा. मैं तैराकी की कोशिश कर रही थी और मामा का हाथ वहीं लगा हुआ था. मामा ने कहा कि वो हाथ हटा रहे हैं और उन्हों ने हाथ हटाया कि मैं फिर अस्थिर होगयी और ज्योन्ही मैने उनको पकड़'ना चाहा, मेरा हाथ फिर मामा के लंड पर लगा. इसबार मैने खुद ही हाथ वहीं लगाया था. मैने हाथ से महसूस किया कि मामा का लंड अब कुच्छ तना हुआ था. मैं मामा के सामने खड़ी थी और मैं ने पार'दर्शी (ट्रॅन्स्परेंट) पानी से देखा कि मामा का लंड खड़ा हुआ था. ईत'ने मैं मेरी ऐक कज़िन ने कहा कि अब मैं सीखूँगी लेकिन मैने माणा कर दिया और कहा कि मैं कुच्छ देर और सीखूँगी.
मैं फिर तैराकी करने लगी अब मैं जान बूझ कर बार बार अस्थिर होने लगी और मामा का लंड अब खूब सॉफ नज़र आ रहा था कि वो बिल्कुल सीधा खड़ा हुआ था. मैं ऐक बार तैराकी कर'ते हुए डूबने लगी. मामा ने मुझे थाम लिया और मैं खड़ी होकर मामा के सीने से लग गयी. मामा का लंड मेरे पेरो से टकरा रहा था. इस मंज़र ने मुझे बहुत ही सेक्सी कर दिया. मैने ऐक बार फिर तैराकी की कोशिश की और अब मामा ने मुझे पानी पर सीधा करके खुद मेरी टाँगों को फेला कर मेरे पीछे आ गये. अब उन्हों ने मेर पीछे से दोनो टाँगों के बीच होकर मेर पैरो को पकड़ लिया और कहा,पहले हाथों की प्रॅक्टीस करो फिर पैरों से करना. मैं मामा को दोनो टाँगों के बीच पाकर हाथों से प्रॅक्टीस करने लगी और मामा का लंड मेरी चूत के क़रीब महसूस हो रहा था जो कि बहुत ही लाजवाब लग रहा था. मैं हाथों से प्रॅक्टीस कर रही थी और दर असल मामा के लंड को चूत के क़रीब पाकर खुश हो रही थी या सेक्स में गरम हो रही थी.
मामा का लंड हिल'ता हुआ महसूस हो रहा था और उसने मेरे ठंडे पानी में डूबे हुवे बदन में आग लगा रहा था. यह एहसास मुझे पह'ली बार हुआ था और बहुत ही खुस गवार था.. मैं तैराकी तो क्या सीख'ती किसी और आग मैं जलना सीख रही थी. मैं थक गयी तो मैं खड़ी हो गयी. मामा का हाथ अब भी मेर पैरो पर था और खड़े होते ही मेरे चूतड़ के ऊपर मामा का लंड महसूस हुआ. मैं पलट कर सीधी हो गयी और मैने मामा की आँखों मे ऐक नई चमक देखी और खुद मेरे जिस्म के अंदर भी ऐक नया पैगाम था. शाम ढल चुकी थी और मैं ऐक नई ख्वाहिस महसूस कर रही थी.
मामा ने पूछा, और प्रॅक्टीस करो गी लेकिन उनका हलक खुश्क हो चुका था और बड़ी मुश्किल से उनकी आवाज़ निकल रही थी. अभी मैं जवाब ही देने वाली थी कि पापा और भैया की आवाज़ आई कि चलो अब रात हो रही हैं. मैं आवाज़ सुन कर ना चाहते हुए पानी से बाहर निकल आई
लेकिन मामा ने कहा, मैं अभी ठहर कर आ रहा हूँ. मैं समझ गयी कि वो खड़े लंड के साथ कैसे बाहर आ सकते हैं. हमलोंग फार्म हाउस के हॉल मे आ गये और थोड़ी ही देर के बाद मामा भी आ गये. वो कुच्छ चुप चुप थे.
हॉल मे भैया और मामा के साथ साथ सब ही ने हाफ पैंट पहनी हुई थी जबकि हम लड़'कियों और लॅडीस ने शलवार कमीज़ पहनी हुई थी. मम्मी और भाबी वाघिरा खााना लगा रही थी. मैं बार बार मामा को देख रही थी और जब उनकी तरफ देखती तो उनको अपनी ही तरफ देखते हुवे ही पाती. मेरे अंदर आग लगी हुई थी और मामा के लंड और हाथो की तपिश अब भी महसूस हो रही थी.
सब खाना खा रहे थे लेकिन मैं बेदिली से खा रही थी. ऐक आग जो मेरे बदन में लगी हुई थी कम नहीं हो रही थी. मामा भी दूसरी तरफ चुप चुप थे और वो भी वही सोच रहे होंगे जो मैं सोच रही थी. मामा ऐक लंबे क़द और सेहत मंद जिस्म के मालिक थे. वो और भैया दोनो ही डेली जिम जाया कर'ते थे और इसी वजह से दोनो में बहुत दोस्ती थी. मेरी कज़िन्स मुझ से बातें कर रही थी लेकिन मुझे कोई दिलचस्पी नही हो रही थी. मैं अपने बारे में गौर कर रही थी कि मैं ऐक दुबली पतली परंतु लंबी थी. मेरी आँखे ब्राउन और स्किन कलर फेर था जबकि बाल बहुत ही सिल्की और बड़े थे. मैं अपने बारे में सोच ही रही थी कि खाना ख़तम हुआ और अब हमलोग चाय का लुफ्त उठा रहे थे और सब ही गॅप शॅप कर रहे थे. रात के अब 11 हो गये थे और आख़िर पापा ने कहा, अब सब सो जाएँ क्योंकि मॉर्निंग मे ब्रेक फास्ट कर के सब को वापिस जाना है. हॉल मने कार्पेट पर बिस्तर सेट होने लगे और मैं हॉल की दीवार के पास खिड'की के नीचे अपने बिस्तर पर लेट गयी. तमाम जेंट्स के बिस्तर हॉल में ऐक साथ सेट हुए और उनके पैरों की तरफ कुच्छ फ़ासले के बाद लॅडीस के बिस्तर सेट हुए. मैने देखा कि मामा मेरी खिड'की के बाद ऐक खिड'की छोड़ कर दूसरी खिड'की के पास बेड पर थे और उनके बराबर पापा का बेड था... हम सब के लेटने के बाद हॉल की लाइट ऑफ कर दी गयी. मेरी विंडो से चाँदनी रात छन छन कर मेरे बेड पर गिर रही थी और खिड'की के नीचे लगी हुई रात की रानी की खुश्बू ने मुझे मस्त कर दिया था.