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( सीआईडी) चुतियापा : एपिसोड :- चुदाई का केस
सीन 1 :- सीआईडी ब्यूरो उर्फ़ चुतियापा ऑफिस
आज सीआईडी ब्यूरो में कोई केस नहीं आया है इसलिए सभी अपने अपने कामों में बिजी हैं । अभिजीत तारिका जी के बोबे मसल रहा है तो fredericks अपनी बीवी के साथ कंप्यूटर पे नंगी chat कर रहा है । विवेक ताशा के साथ चुम्मा चाटी में लगा है बाकी बचे दया और ACP प्रद्युमन अपने अपने हथियार ( लंड ) चेक कर रहे हैं की कहीं वो expire तो नहीं हो गए मतलब कि दोनों मुट्ठी मार रहे हैं । उन दोनों को देखकर लगता है कि शायद दोनों में मुठबाज़ी की प्रतियोगिता हो रही है । इधर सालुंखे टेस्ट ट्यूब में कुछ केमिकल तैयार कर रहा है , उसका प्लान है कि जब ये सब झड जायेंगे तो वो सब का वीर्य इकट्ठा करके उसपे इस केमिकल से reaction करेगा और पता लगाएगा कि कौन नामर्द है और कौन असली मर्द ।
वो सब ये काम इसलिए एक साथ कर रहे हैं क्यूंकि असली मज़ा तो सब के साथ आता है ।
तभी ACP और दया साथ साथ झड जाते हैं और चैन की सांस लेते हैं कि चलो कम से कम लंड काम तो कर रहा है ।
ACP : दया हम झड तो गए लेकिन लंड की प्यास अभी भी बरक़रार है ।
दया : हाँ सर । समझ में नहीं आ रहा क्या करें ?
ACP : मेरे पास एक आईडिया है ।
ACP ( निर्देश देते हुए ) : अभिजीत और तारिका तुम दोनों घर जाओ और जो करना है करो । fredericks तुम भी घर जाकर अपनी बीवी की गुलामी करो । ताशा तुम ये विवेक के साथ गंदे खेल बंद करो और अपने boyfriend से चुदवाओ । और सालुंखे तुझे तो पता ही है क्या करना है ।
( विवेक की झांटे सुलगती हैं और दो मन ही मन ACP को गालियाँ देता है )
ACP : दया और विवेक चलो मेरे साथ ।
( दोनों पीछे चलते हैं )
दया ( गाडी चलते हुए ) : लेकिन सर बात क्या है ? कहाँ जा रहे हैं हम ?
ACP : दया गाडी को मुन्नीबाई के कोठे पे ले चलो ।
दया और विवेक मुस्कुराते हैं और समझ जाते हैं कि आज ACP का बहुत दिन बाद खड़ा हुआ है ।
सीन 2 : मुन्नीबाई का कोठा
ACP ( कड़क आवाज़ में ) : मुन्नीबाई तुम ही हो ना ?
मुन्नीबाई ( अदा से ) : जी हाँ नाचीज़ को मुन्नी कहते हैं । कहिये क्या बात है । बहुत जानदार लग रहे हैं ।
( मुन्नी दया और विवेक की तरफ देखते हुए होंठ काटती है )
ACP ( badge दिखाते हुए ) : हम सीआईडी से हैं ।
मुन्नी : सीआईडी ? वो क्या है ? Choot In Demand ?
ACP ( कड़कता से ) : चुप !! हम सीआईडी हैं सीआईडी .. मैं ACP प्रद्युमन ।
मुन्नी ( घबराते हुए ) : ओह्ह सीआईडी । क्या बात है साब ? कुछ घपला है क्या ?
ACP : हमें रंडियां चोदनी हैं। बुलाओ उन्हें ।
मुन्नी : लेकिन साब मुझे अच्छी तरह पता है आपके बारे में आप तो एक नंबर के चोदु रंडीबाज़ हो । मेरे पास अभी यहाँ एक के साथ एक फ्री वाला माल है जो आपको पसंद नहीं आयेगा । मैं आपको एक address देती हूँ आप वहां चले जाओ ।
ACP ( मुस्कुराते हुए ) : चलो दया काम हो गया ।
( दया और विवेक मुन्नी को flying kiss देकर निकल जाते हैं )
सीन 3: रंडी का घर
दया दरवाज़ा खटखटाता है । कोई जवाब नहीं ।
ACP : दया दरवाज़ा तोड़ दो । आज तो चोदना ही है ।
( दया अपनी एक लात मरता है और दरवाज़ा पूरी तरह टूट के गिर जाता है )
( ACP रंडी को कमरों में ढूंढ़ रहा होता है तभी )
विवेक : सर यहाँ एक लाश है ।
( सब उधर भागते हैं तो वहां एक लड़की की लाश होती है )
ACP : भेन्चोद KLPD
दया : सर लाश देखकर लगता है ज्यादा चोदने से मरी है ।
ACP : हाँ दया । लेकिन एक रंडी चोदने से कैसे मर सकती है । इसकी तो रात दिन चुदाई की आदत होगी । ऐसा powerful चोदु कौन है जिसने चोद चोद के रंडी को ही मार डाला ।
ACP : घर को अच्छी तरह चेक करो । कुछ न कुछ तो मिलेगा ।
( घर की चेकिंग चलती है और फिर )
दया : सर बस ये रंडी का visiting card और ये used कंडोम मिला है ।
ACP : इसे सालुंखे के पास लेकर चलो दया । ये कंडोम खूनी का ही है । यही हमें उस तक पहुंचाएगा ।
ACP : दया तुम मेरे साथ चलो और विवेक ये दरवाज़ा जो दया ने तोड़ा है तुम उसको ठीक करो ।
विवेक : लेकिन सर मैं ही हमेशा ये चुतियापे के काम क्यूँ करता हूँ ? एक बार एक केस में जब 70 साल की बुढ़िया की भोस चाटनी थी तब भी मैं ही गया था और वो जब एक बार वो मोती औरत को चोदना था तो भी मैं ही फंसा था क्युंकी उसकी चर्बी की वजह से किसी का लंड उसको चोद नहीं पा रहा था ।
ACP : क्यूंकि तुम हमारे जूनियर हो ।
( विवेक की झांटे फिर फायर होती हैं )
सीन 4 : सीआईडी ब्यूरो
( सालुंखे उस कंडोम पे कुछ टेस्ट कर रहा है और ACP और दया इधर उधर छुपकर लंड सहला रहे हैं ।)
सालुंखे : आ जाओ यार अब बस भी करो सहलाना ।
ACP : हाँ सालुंखे क्या पता चला ?
सालुंखे : हाँ बॉस इसकी मौत ज्यादा चोदने से ही हुई है ।
ACP ( दया की तरफ देखकर चौंकते हुए ) : अच्छा । और वो कंडोम का क्या पता चला ?
सालुंखे : ये कंडोम कोई मामूली कंडोम नहीं है ।
एक्प : क्या मतलब सालुंखे ?
सालुंखे : मतलब ये कि ये बहुत ही स्पेशल और exclusive कंडोम है जिसका नाम है " जिंदगी के साथ भी , जिंदगी के बाद भी " कंडोम । इसकी खासियत है की इसको पहनने के बाद इंसान झड़ता ही नहीं ।
ACP ( बुरी तरह चौंकते हुए ) : क्या ?
दया : ओह्ह तो ये बात है । खुनी ने ये कंडोम पहना और वो चोदता ही रहा जब तक वो मर नहीं गयी और जल्दी में कंडोम वहीँ छोड़ गया ।
ACP : दया इस चोदु खुनी को मैं छोडूंगा नहीं जिसने मेरा KLPD किया है । सब को ड्यूटी पे बुलाओ और शहर के सारे कंडोम वालो से पता करो ये कंडोम किसने खरीदा था । वो कहावत है न, " भागते खूनी का कंडोम ही सही " ।
( दया सबको फ़ोन लगता है । सब अपनी चुदाई की रासलीला आधी अधूरी छोड़ कर हाज़िर होते हैं ।)
सीन 5 :
सारे सीआईडी की चूतिया टीम पूरे शहर में उस condom वाले को ढूंढ़ रही है । एक medical store से दूसरे medical store लेकिन कुछ पता नहीं चल रहा । तभी वो एक medical store में घुसते है और उस condom को दिखाकर पूछते हैं । medical store वाला भागने की कोशिश करता है लेकिन सामने खड़ी ताशा के दूधों से टकरा जाता है ।
दया : भागेगा तू !! अभी दिखता हूँ । तेरी गांड मरेगी आज ।
दया अपने pant की zip खोलता है । मेडिकल स्टोर वाला घबरा जाता है और रोने लगता है ।
स्टोर वाला : नहीं साब ऐसा मत करो । मुझे ये काम करने के बदले चूत मिली थी साब ।
दया : चल अब सब सच सच बता ।
सीन 6 :
सब लोग पूछताछ के बाद सीआईडी bureau पहुँचते हैं ।
fredricks : सर इतनी पूछताछ के बाद मेरा pressure high हो गया है ।
ACP : ये प्रेशर व्रेशर का बहाना मत बनाओ fredricks हमें पता है तुम side में मुट्ठी मारने जा रहे हो ।
fredricks ( जोकर की तरह मुंह बनाते हुए ) : अरे सर .... मैं तो ....
ACP : हाँ दया क्या पता चला ?
दया : सर उस मेडिकल वाले ने तो ये कंडोम एक आदमी को बेचा था ।
ACP : दया मेरी सूरत पे चूतिया उल्लू का पट्ठा लिखा है क्या ?
दया : वैसे सर लिखा तो नहीं पर आप एक नंबर के चूतिया हो ।
ACP : मजाक नहीं दया । ये तो मुझे भी पता है कि ये एक आदमी ने ख़रीदा है लेकिन किसने दया ? आखिर कौन हो सकता है ये ?
दया : हाँ सर उसने एक बात और बताई है ।
ACP : क्या ?
दया : सर ये CONDOM कोई आम इन्सान नहीं पहन सकता । इसे पहनने वाला एक खास बीमारी का शिकार होता है जिसका नाम है " ये प्यास है बड़ी " । सर इस बीमारी में इन्सान की चुदाई की प्यास इतनी बढ़ जाती है कि इन्सान सिर्फ और सिर्फ चुदाई के बारे में सोचता है ।
ACP ( मुस्कुराते हुए ) : ओह्ह्ह्ह ।
ACP ( मन में ) : यार ये बीमारी मुझे क्यों नहीं हुई ।
दया : सर आपने कुछ कहा ?
ACP : नहीं दया । ये सालुंखे बस अब अपना लंड हिलाने के काबिल रह गया है । असली INFORMATION तो उस मेडिकल वाले ने दी है ।
सालुंखे : ACP साब अपना लंड तो खड़ा होता नहीं तो दूसरों को तो मज़ा लेने दो । तुम अपना लंड तो बैसाखी के सहारे खड़ा करते हो ।
ACP : चुप साले । ये मेरा शेर भले ही महीने भर च्यवनप्राश खाने के बाद खड़ा होता हो लेकिन आज भी मेरी तरह कड़क है ।
ACP ( दया की तरफ देखते हुए ) : अगर ऐसी बात है दया तो खुनी ज़रूर किसी नीम हकीम या लंड स्पेशलिस्ट के पास गया होगा । अभिजीत तुम सारे HOSPITALS और हकीमों के पास जाओ और पता लगाओ ।
अभिजीत : जी सर !!
ACP : और हाँ सुनो ....
अभिजीत : जी सर ?
ACP : जब तुम पूछताछ के लिए " हकीम हमेशा जवान " के यहाँ जाओ तो वहां से मेरे लिए लोहा भस्म , चांदी भस्म , सोना भस्म , शिलाजीत युक्त स्पेशल मिश्रण ले आना ।
अभिजीत : सर आपका 5वीं बार शादी का मूड है क्या ?
ACP : ह्म्म्म ... नहीं ACTUALLY मैं अपना लंड इतना खड़ा करना चाहता हूँ कि जब मैं मूतने जाऊं तो मूत मेरे पैरों पर न गिरे । क्योंकि मैं अपने बेजान लंड से जब मूतता हूँ तो धार मेरे ही पैरों पर गिर जाती है ।
अभिजीत : OK SIR ....
थोड़ी देर बाद दया के पास फ़ोन आता है
दया : हाँ अभिजीत !!
दया : ओह्ह्ह !! मैं अभी वहां पहुँचता हूँ ।
सीन 7 :
सब लोग एक घर के सामने खड़े हैं । दया अपनी पावरफुल लात से दरवाज़ा तोड़ता है । अन्दर से कोई निकलकर भागता है ।
सब उसका पीछा करते हैं और उसे पकड़ लेते हैं ।
अभिजीत : सर ये है सुनील । उस रंडी का BOYFRIEND और खुनी ।
सुनील : मैंने कुछ नहीं किया है ।
ACP : दया इसे झाड़ियों के पीछे ले जाओ और अपने तरीके से समझाओ । क्योंकि अगर यहाँ समझोगे तो आस पास के APARTMENTS की लड़कियां तुम्हारा फौलादी लंड देख कर भीड़ लगा लेंगी ।
दया अपनी PANT खोलकर लंड सुनील के मुंह में दे देता है । सुनील गूं गूं करने लगता है ।
सीन 8 :
सुनील बीच में कुर्सी पर बैठा है । पूरी टीम उसके आस पास उसको घेरे हुए कड़ी है ।
ACP ( गुस्से से ) : बताओ !! क्यों मारा बेचारी को ??
सुनील : बेचारी नहीं थी वो । प्यार करता था मैं उससे सर !
दया : तो प्यार में मार दिया उसे ?
सुनील : वो अपनी चूत मुझे कभी कभी देती थी और अपनी गांड कभी नहीं मारने देती थी ।
मैंने उससे कहा " अपनों को डांट रही हो , और गैरों को बाँट रही हो " ये अछि बात नहीं है तो उसने मुझे गांड पे लात मार के घर से निकाल दिया । मैंने उसी दिन उससे बदला लेने का सोच लिया था । इस प्लान से मुझे उसकी चूत - गांड भी मिलती और किसी को पता भी नहीं चलता । लेकिन जल्दी में वो CONDOM वहीँ रह गया ।
ACP : अब जेल में चूतें लेना । लंड कटने का ORDER आने तक ।
samaapt
सीन 1 :- सीआईडी ब्यूरो उर्फ़ चुतियापा ऑफिस
आज सीआईडी ब्यूरो में कोई केस नहीं आया है इसलिए सभी अपने अपने कामों में बिजी हैं । अभिजीत तारिका जी के बोबे मसल रहा है तो fredericks अपनी बीवी के साथ कंप्यूटर पे नंगी chat कर रहा है । विवेक ताशा के साथ चुम्मा चाटी में लगा है बाकी बचे दया और ACP प्रद्युमन अपने अपने हथियार ( लंड ) चेक कर रहे हैं की कहीं वो expire तो नहीं हो गए मतलब कि दोनों मुट्ठी मार रहे हैं । उन दोनों को देखकर लगता है कि शायद दोनों में मुठबाज़ी की प्रतियोगिता हो रही है । इधर सालुंखे टेस्ट ट्यूब में कुछ केमिकल तैयार कर रहा है , उसका प्लान है कि जब ये सब झड जायेंगे तो वो सब का वीर्य इकट्ठा करके उसपे इस केमिकल से reaction करेगा और पता लगाएगा कि कौन नामर्द है और कौन असली मर्द ।
वो सब ये काम इसलिए एक साथ कर रहे हैं क्यूंकि असली मज़ा तो सब के साथ आता है ।
तभी ACP और दया साथ साथ झड जाते हैं और चैन की सांस लेते हैं कि चलो कम से कम लंड काम तो कर रहा है ।
ACP : दया हम झड तो गए लेकिन लंड की प्यास अभी भी बरक़रार है ।
दया : हाँ सर । समझ में नहीं आ रहा क्या करें ?
ACP : मेरे पास एक आईडिया है ।
ACP ( निर्देश देते हुए ) : अभिजीत और तारिका तुम दोनों घर जाओ और जो करना है करो । fredericks तुम भी घर जाकर अपनी बीवी की गुलामी करो । ताशा तुम ये विवेक के साथ गंदे खेल बंद करो और अपने boyfriend से चुदवाओ । और सालुंखे तुझे तो पता ही है क्या करना है ।
( विवेक की झांटे सुलगती हैं और दो मन ही मन ACP को गालियाँ देता है )
ACP : दया और विवेक चलो मेरे साथ ।
( दोनों पीछे चलते हैं )
दया ( गाडी चलते हुए ) : लेकिन सर बात क्या है ? कहाँ जा रहे हैं हम ?
ACP : दया गाडी को मुन्नीबाई के कोठे पे ले चलो ।
दया और विवेक मुस्कुराते हैं और समझ जाते हैं कि आज ACP का बहुत दिन बाद खड़ा हुआ है ।
सीन 2 : मुन्नीबाई का कोठा
ACP ( कड़क आवाज़ में ) : मुन्नीबाई तुम ही हो ना ?
मुन्नीबाई ( अदा से ) : जी हाँ नाचीज़ को मुन्नी कहते हैं । कहिये क्या बात है । बहुत जानदार लग रहे हैं ।
( मुन्नी दया और विवेक की तरफ देखते हुए होंठ काटती है )
ACP ( badge दिखाते हुए ) : हम सीआईडी से हैं ।
मुन्नी : सीआईडी ? वो क्या है ? Choot In Demand ?
ACP ( कड़कता से ) : चुप !! हम सीआईडी हैं सीआईडी .. मैं ACP प्रद्युमन ।
मुन्नी ( घबराते हुए ) : ओह्ह सीआईडी । क्या बात है साब ? कुछ घपला है क्या ?
ACP : हमें रंडियां चोदनी हैं। बुलाओ उन्हें ।
मुन्नी : लेकिन साब मुझे अच्छी तरह पता है आपके बारे में आप तो एक नंबर के चोदु रंडीबाज़ हो । मेरे पास अभी यहाँ एक के साथ एक फ्री वाला माल है जो आपको पसंद नहीं आयेगा । मैं आपको एक address देती हूँ आप वहां चले जाओ ।
ACP ( मुस्कुराते हुए ) : चलो दया काम हो गया ।
( दया और विवेक मुन्नी को flying kiss देकर निकल जाते हैं )
सीन 3: रंडी का घर
दया दरवाज़ा खटखटाता है । कोई जवाब नहीं ।
ACP : दया दरवाज़ा तोड़ दो । आज तो चोदना ही है ।
( दया अपनी एक लात मरता है और दरवाज़ा पूरी तरह टूट के गिर जाता है )
( ACP रंडी को कमरों में ढूंढ़ रहा होता है तभी )
विवेक : सर यहाँ एक लाश है ।
( सब उधर भागते हैं तो वहां एक लड़की की लाश होती है )
ACP : भेन्चोद KLPD
दया : सर लाश देखकर लगता है ज्यादा चोदने से मरी है ।
ACP : हाँ दया । लेकिन एक रंडी चोदने से कैसे मर सकती है । इसकी तो रात दिन चुदाई की आदत होगी । ऐसा powerful चोदु कौन है जिसने चोद चोद के रंडी को ही मार डाला ।
ACP : घर को अच्छी तरह चेक करो । कुछ न कुछ तो मिलेगा ।
( घर की चेकिंग चलती है और फिर )
दया : सर बस ये रंडी का visiting card और ये used कंडोम मिला है ।
ACP : इसे सालुंखे के पास लेकर चलो दया । ये कंडोम खूनी का ही है । यही हमें उस तक पहुंचाएगा ।
ACP : दया तुम मेरे साथ चलो और विवेक ये दरवाज़ा जो दया ने तोड़ा है तुम उसको ठीक करो ।
विवेक : लेकिन सर मैं ही हमेशा ये चुतियापे के काम क्यूँ करता हूँ ? एक बार एक केस में जब 70 साल की बुढ़िया की भोस चाटनी थी तब भी मैं ही गया था और वो जब एक बार वो मोती औरत को चोदना था तो भी मैं ही फंसा था क्युंकी उसकी चर्बी की वजह से किसी का लंड उसको चोद नहीं पा रहा था ।
ACP : क्यूंकि तुम हमारे जूनियर हो ।
( विवेक की झांटे फिर फायर होती हैं )
सीन 4 : सीआईडी ब्यूरो
( सालुंखे उस कंडोम पे कुछ टेस्ट कर रहा है और ACP और दया इधर उधर छुपकर लंड सहला रहे हैं ।)
सालुंखे : आ जाओ यार अब बस भी करो सहलाना ।
ACP : हाँ सालुंखे क्या पता चला ?
सालुंखे : हाँ बॉस इसकी मौत ज्यादा चोदने से ही हुई है ।
ACP ( दया की तरफ देखकर चौंकते हुए ) : अच्छा । और वो कंडोम का क्या पता चला ?
सालुंखे : ये कंडोम कोई मामूली कंडोम नहीं है ।
एक्प : क्या मतलब सालुंखे ?
सालुंखे : मतलब ये कि ये बहुत ही स्पेशल और exclusive कंडोम है जिसका नाम है " जिंदगी के साथ भी , जिंदगी के बाद भी " कंडोम । इसकी खासियत है की इसको पहनने के बाद इंसान झड़ता ही नहीं ।
ACP ( बुरी तरह चौंकते हुए ) : क्या ?
दया : ओह्ह तो ये बात है । खुनी ने ये कंडोम पहना और वो चोदता ही रहा जब तक वो मर नहीं गयी और जल्दी में कंडोम वहीँ छोड़ गया ।
ACP : दया इस चोदु खुनी को मैं छोडूंगा नहीं जिसने मेरा KLPD किया है । सब को ड्यूटी पे बुलाओ और शहर के सारे कंडोम वालो से पता करो ये कंडोम किसने खरीदा था । वो कहावत है न, " भागते खूनी का कंडोम ही सही " ।
( दया सबको फ़ोन लगता है । सब अपनी चुदाई की रासलीला आधी अधूरी छोड़ कर हाज़िर होते हैं ।)
सीन 5 :
सारे सीआईडी की चूतिया टीम पूरे शहर में उस condom वाले को ढूंढ़ रही है । एक medical store से दूसरे medical store लेकिन कुछ पता नहीं चल रहा । तभी वो एक medical store में घुसते है और उस condom को दिखाकर पूछते हैं । medical store वाला भागने की कोशिश करता है लेकिन सामने खड़ी ताशा के दूधों से टकरा जाता है ।
दया : भागेगा तू !! अभी दिखता हूँ । तेरी गांड मरेगी आज ।
दया अपने pant की zip खोलता है । मेडिकल स्टोर वाला घबरा जाता है और रोने लगता है ।
स्टोर वाला : नहीं साब ऐसा मत करो । मुझे ये काम करने के बदले चूत मिली थी साब ।
दया : चल अब सब सच सच बता ।
सीन 6 :
सब लोग पूछताछ के बाद सीआईडी bureau पहुँचते हैं ।
fredricks : सर इतनी पूछताछ के बाद मेरा pressure high हो गया है ।
ACP : ये प्रेशर व्रेशर का बहाना मत बनाओ fredricks हमें पता है तुम side में मुट्ठी मारने जा रहे हो ।
fredricks ( जोकर की तरह मुंह बनाते हुए ) : अरे सर .... मैं तो ....
ACP : हाँ दया क्या पता चला ?
दया : सर उस मेडिकल वाले ने तो ये कंडोम एक आदमी को बेचा था ।
ACP : दया मेरी सूरत पे चूतिया उल्लू का पट्ठा लिखा है क्या ?
दया : वैसे सर लिखा तो नहीं पर आप एक नंबर के चूतिया हो ।
ACP : मजाक नहीं दया । ये तो मुझे भी पता है कि ये एक आदमी ने ख़रीदा है लेकिन किसने दया ? आखिर कौन हो सकता है ये ?
दया : हाँ सर उसने एक बात और बताई है ।
ACP : क्या ?
दया : सर ये CONDOM कोई आम इन्सान नहीं पहन सकता । इसे पहनने वाला एक खास बीमारी का शिकार होता है जिसका नाम है " ये प्यास है बड़ी " । सर इस बीमारी में इन्सान की चुदाई की प्यास इतनी बढ़ जाती है कि इन्सान सिर्फ और सिर्फ चुदाई के बारे में सोचता है ।
ACP ( मुस्कुराते हुए ) : ओह्ह्ह्ह ।
ACP ( मन में ) : यार ये बीमारी मुझे क्यों नहीं हुई ।
दया : सर आपने कुछ कहा ?
ACP : नहीं दया । ये सालुंखे बस अब अपना लंड हिलाने के काबिल रह गया है । असली INFORMATION तो उस मेडिकल वाले ने दी है ।
सालुंखे : ACP साब अपना लंड तो खड़ा होता नहीं तो दूसरों को तो मज़ा लेने दो । तुम अपना लंड तो बैसाखी के सहारे खड़ा करते हो ।
ACP : चुप साले । ये मेरा शेर भले ही महीने भर च्यवनप्राश खाने के बाद खड़ा होता हो लेकिन आज भी मेरी तरह कड़क है ।
ACP ( दया की तरफ देखते हुए ) : अगर ऐसी बात है दया तो खुनी ज़रूर किसी नीम हकीम या लंड स्पेशलिस्ट के पास गया होगा । अभिजीत तुम सारे HOSPITALS और हकीमों के पास जाओ और पता लगाओ ।
अभिजीत : जी सर !!
ACP : और हाँ सुनो ....
अभिजीत : जी सर ?
ACP : जब तुम पूछताछ के लिए " हकीम हमेशा जवान " के यहाँ जाओ तो वहां से मेरे लिए लोहा भस्म , चांदी भस्म , सोना भस्म , शिलाजीत युक्त स्पेशल मिश्रण ले आना ।
अभिजीत : सर आपका 5वीं बार शादी का मूड है क्या ?
ACP : ह्म्म्म ... नहीं ACTUALLY मैं अपना लंड इतना खड़ा करना चाहता हूँ कि जब मैं मूतने जाऊं तो मूत मेरे पैरों पर न गिरे । क्योंकि मैं अपने बेजान लंड से जब मूतता हूँ तो धार मेरे ही पैरों पर गिर जाती है ।
अभिजीत : OK SIR ....
थोड़ी देर बाद दया के पास फ़ोन आता है
दया : हाँ अभिजीत !!
दया : ओह्ह्ह !! मैं अभी वहां पहुँचता हूँ ।
सीन 7 :
सब लोग एक घर के सामने खड़े हैं । दया अपनी पावरफुल लात से दरवाज़ा तोड़ता है । अन्दर से कोई निकलकर भागता है ।
सब उसका पीछा करते हैं और उसे पकड़ लेते हैं ।
अभिजीत : सर ये है सुनील । उस रंडी का BOYFRIEND और खुनी ।
सुनील : मैंने कुछ नहीं किया है ।
ACP : दया इसे झाड़ियों के पीछे ले जाओ और अपने तरीके से समझाओ । क्योंकि अगर यहाँ समझोगे तो आस पास के APARTMENTS की लड़कियां तुम्हारा फौलादी लंड देख कर भीड़ लगा लेंगी ।
दया अपनी PANT खोलकर लंड सुनील के मुंह में दे देता है । सुनील गूं गूं करने लगता है ।
सीन 8 :
सुनील बीच में कुर्सी पर बैठा है । पूरी टीम उसके आस पास उसको घेरे हुए कड़ी है ।
ACP ( गुस्से से ) : बताओ !! क्यों मारा बेचारी को ??
सुनील : बेचारी नहीं थी वो । प्यार करता था मैं उससे सर !
दया : तो प्यार में मार दिया उसे ?
सुनील : वो अपनी चूत मुझे कभी कभी देती थी और अपनी गांड कभी नहीं मारने देती थी ।
मैंने उससे कहा " अपनों को डांट रही हो , और गैरों को बाँट रही हो " ये अछि बात नहीं है तो उसने मुझे गांड पे लात मार के घर से निकाल दिया । मैंने उसी दिन उससे बदला लेने का सोच लिया था । इस प्लान से मुझे उसकी चूत - गांड भी मिलती और किसी को पता भी नहीं चलता । लेकिन जल्दी में वो CONDOM वहीँ रह गया ।
ACP : अब जेल में चूतें लेना । लंड कटने का ORDER आने तक ।
samaapt