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“नहीं साहब। ऐसा कुछ नहीं। ठीक है तुम सब हवेली वापस चले जाओ।” इसके बाद नौकरानी दरवाज़े से बाहर निकल गई। पर एक ही पल में वह दोबारा अंदर आई और अविनाश से कहा,-“ साहब एक अजीब बात है पता नहीं मुझे आप को बतानी चाहिए की नहीं।”
“बताओ क्या है?”
“एक बार सोनिया मेम साहब नहा कर के बाथरूम से जब अपने रूम में वापस आई तो मैंने देखा उनके पीठ के नीचे कमर के पास एक निशान बना हुआ है।”
“कैसा था वह निशान?”
“गोल घेरे में तलवार का निशान था।”
“गोल घेरे में तलवार का निशान! ठीक है तुम जा सकती हो।” उसके जाने के बाद अविनाश ने बेबी को अंदर बुलाया और कहा बेबी,-“जरा इंटरनेट पर पता करो की गोल घेरे में तलवार के निशान क्या मतलब होता है? शाम को एजेंसी बंद कर देना मैं ज़रा बाहर किसी काम से जा रहा हूं।” इसके बाद अविनाश सीधा डॉ मयंक के क्लिनिक दोबारा पहुंच गया
“आप मेरे ड्राइंग रूम में बैठे। मैं अभी थोड़ी देर में आता हूं। थोड़ी देर बाद मयंक ने ड्राइंग रूम में प्रवेश किया।
“क्या ड्रिंक लेना पसंद करेंगे।”
“मुझे कोई आपत्ति नहीं।”
मयंक एक ड्रिंक अविनाश को दिया और एक खुद लेकर के सोफे पर बैठ गया।
“हां कहिए क्या बात करनी थी?”
“मुझे आपसे मुझे कुछ खास बातें करनी हैं। सेठ धनपाल के कत्ल के तफ्तीश के दौरान धनपाल के फाइल में एक फोटो बरामद हुई है जिसमें आपकी और सोनिया की आपत्तिजनक स्थिति में तस्वीर है।” यह सुनते ही डॉक्टर मयंक का चेहरा उतर गया।
“और दूसरा धनपाल के लान से एक गन बरामद हुई है। बैलेस्टिक एक्स्पर्ट्स के अनुसार कत्ल उसी गन से हुआ है। और पुलिस ने पता लगा लिया है वह गन आपके के नाम से रजिस्टर्ड है।”
मयंक चौंक कर बोला,-“क्या? इसका तो मुझे पता ही नहीं था। पर आपकी जानकारी के लिए मैं ये बता दूँ कि मैंने पास के ही थाने मे अपने गन की खोने की रिपोर्ट लिखवा दी है।”
“कब लिखवाई आपने।जिस रात धनपाल का कत्ल हुआ था उसके दूसरे दिन सुबह।”
“जब आपको पता चला की गन तो गलती से गिर गई है भागते समय लान मे। तो अपने ये तरकीब निकाली और अपने गन की मिसिंग रिपोर्ट दर्ज़ करा दी।कौन आपकी बात का विश्वास करेगा।रिपोर्ट तो आपने कत्ल के बाद लिखवाई है डॉ मयंक। पुलिस कभी नहीं विश्वास करेगी।अ च्छा यही होगा की आप सब सही सही बता दे।”
“आप मेरी बात का विश्वास करें। मैंने धनपाल का कत्ल नहीं किया है। और मुझे उस फोटो के बारे कुछ भी नहीं पता है। वाकई मेरी गन चोरी हो गई है।”
अविनाश ने पूछा,-“आपके हिसाब से गन के बारे में किसको पता था?”
“जहां तक मुझे याद है सिर्फ सोनिया को।”
“सोनिया को। अच्छा एक बात बताइए वसीयत की ड्राफ्ट कॉपी आपने कहाँ रखी थी।”
“उसी अलमारी में, गन के आसपास वसीयत रखी थी। पर मैंने अभी तक वसीयत एनवेलप से निकालकर देखी भी नहीं है।”
“ठीक है इस ड्राफ्ट वसीयत को एनवेलप सहित मैं रख लेता हूँ। पुलिस आपको गिरफ्तार कर सकती है।”
“किस वजह पर।”
“वजह बहुत साफ है। सोनिया से आप के नाजायज संबंध का धनपाल को पता लगना और आपका उसको अपने ही गन से मार देना।”
“पर मैंने ऐसा कुछ नहीं किया है।”
“वह तो समय ही बताएगा कि किसने क्या किया और किसने क्या नहीं? फिर भी मैं कोशिश करूँगा मनोज अभी फिलहाल आप को गिरफ्तार ना करें। पर आप शहर छोड़ कर कहीं जाइएगा नहीं क्योंकि आप शक के दायरे में हैं? अब मैं चलता हूं।”
इसके बाद अविनाश सीधे थाने पहुंचता है। इंस्पेक्टर मनोज अपने केबिन में बैठा दिनभर की थकान से ऊंघ रहा था।
“और क्या चल रहा है?”
“कुछ नहीं यार आज बहुत थक गए हैं। और तुम बताओ।”
“ऐसे ही तुम्हारा ही काम कर रहे हैं।”
“यार कुछ भी कहो मैंने दोस्त बहुत अच्छा बनाया है।”
“मैं किसी खास काम से आया था? क्या तूने फिंगर प्रिंट एक्सपर्ट से फोटो पर मिले निशान का पता लगवाया”
“हां मैंने पता लगाया है। उस पर तो किसी के उंगलियों के निशान नहीं है।”
“बड़ी अजीब सी बात है आजकल लोग बहुत ही स्मार्ट हो गए हैं।हर काम दस्ताने पहन कर करते है। आपत्तिजनक फोटोग्राफ से भी किसी के उंगलियों के निशान नहीं मिले यह बड़ी चौंकाने वाली बात है। यार एक काम करो मैं डॉ मयंक से मिलकर आ रहा हूं। वकील तनेजा ने एक ड्राफ्ट वसीयत बनाई थी धनपाल के कहने पर। वो वसीयत उसने डॉक्टर मयंक को भी दी थी। इस लिफाफे के अंदर वह वसीयत है। मैं यह चाहता हूं कि तुम इस वसीयत के कागज़ के ऊपर से तो फिंगरप्रिंट्स उतरवाने का इंतजाम करो। मैं यह देखना चाहता हूं कि इस पर किस-किस के फिंगर प्रिंट्स मौजूद है। और हाँ जब तक मैं न कहूँ डॉ मयंक को गिरफ्तार मत करना। एक-दो दिन मुझे और तफ्तीश कर लेने दे। केस उलझा हुआ जरूर है लेकिन मेरे समझ में कुछ कुछ आ रहा है। कुछ चीजें मिसिंग है जिसको मैं जोड़ने की कोशिश कर रहा हूं। अभी तो मैं घर जा रहा हूं मैंने राजू को किसी काम पर लगाया हुआ है”
इसके बाद अविनाश अपने घर चला जाता है। दूसरे दिन करीब 10:00 बजे राजू कैबिन मे उससे मिलता है।
“राजू, कुछ पता चला।”
“बताओ क्या है?”
“एक बार सोनिया मेम साहब नहा कर के बाथरूम से जब अपने रूम में वापस आई तो मैंने देखा उनके पीठ के नीचे कमर के पास एक निशान बना हुआ है।”
“कैसा था वह निशान?”
“गोल घेरे में तलवार का निशान था।”
“गोल घेरे में तलवार का निशान! ठीक है तुम जा सकती हो।” उसके जाने के बाद अविनाश ने बेबी को अंदर बुलाया और कहा बेबी,-“जरा इंटरनेट पर पता करो की गोल घेरे में तलवार के निशान क्या मतलब होता है? शाम को एजेंसी बंद कर देना मैं ज़रा बाहर किसी काम से जा रहा हूं।” इसके बाद अविनाश सीधा डॉ मयंक के क्लिनिक दोबारा पहुंच गया
“आप मेरे ड्राइंग रूम में बैठे। मैं अभी थोड़ी देर में आता हूं। थोड़ी देर बाद मयंक ने ड्राइंग रूम में प्रवेश किया।
“क्या ड्रिंक लेना पसंद करेंगे।”
“मुझे कोई आपत्ति नहीं।”
मयंक एक ड्रिंक अविनाश को दिया और एक खुद लेकर के सोफे पर बैठ गया।
“हां कहिए क्या बात करनी थी?”
“मुझे आपसे मुझे कुछ खास बातें करनी हैं। सेठ धनपाल के कत्ल के तफ्तीश के दौरान धनपाल के फाइल में एक फोटो बरामद हुई है जिसमें आपकी और सोनिया की आपत्तिजनक स्थिति में तस्वीर है।” यह सुनते ही डॉक्टर मयंक का चेहरा उतर गया।
“और दूसरा धनपाल के लान से एक गन बरामद हुई है। बैलेस्टिक एक्स्पर्ट्स के अनुसार कत्ल उसी गन से हुआ है। और पुलिस ने पता लगा लिया है वह गन आपके के नाम से रजिस्टर्ड है।”
मयंक चौंक कर बोला,-“क्या? इसका तो मुझे पता ही नहीं था। पर आपकी जानकारी के लिए मैं ये बता दूँ कि मैंने पास के ही थाने मे अपने गन की खोने की रिपोर्ट लिखवा दी है।”
“कब लिखवाई आपने।जिस रात धनपाल का कत्ल हुआ था उसके दूसरे दिन सुबह।”
“जब आपको पता चला की गन तो गलती से गिर गई है भागते समय लान मे। तो अपने ये तरकीब निकाली और अपने गन की मिसिंग रिपोर्ट दर्ज़ करा दी।कौन आपकी बात का विश्वास करेगा।रिपोर्ट तो आपने कत्ल के बाद लिखवाई है डॉ मयंक। पुलिस कभी नहीं विश्वास करेगी।अ च्छा यही होगा की आप सब सही सही बता दे।”
“आप मेरी बात का विश्वास करें। मैंने धनपाल का कत्ल नहीं किया है। और मुझे उस फोटो के बारे कुछ भी नहीं पता है। वाकई मेरी गन चोरी हो गई है।”
अविनाश ने पूछा,-“आपके हिसाब से गन के बारे में किसको पता था?”
“जहां तक मुझे याद है सिर्फ सोनिया को।”
“सोनिया को। अच्छा एक बात बताइए वसीयत की ड्राफ्ट कॉपी आपने कहाँ रखी थी।”
“उसी अलमारी में, गन के आसपास वसीयत रखी थी। पर मैंने अभी तक वसीयत एनवेलप से निकालकर देखी भी नहीं है।”
“ठीक है इस ड्राफ्ट वसीयत को एनवेलप सहित मैं रख लेता हूँ। पुलिस आपको गिरफ्तार कर सकती है।”
“किस वजह पर।”
“वजह बहुत साफ है। सोनिया से आप के नाजायज संबंध का धनपाल को पता लगना और आपका उसको अपने ही गन से मार देना।”
“पर मैंने ऐसा कुछ नहीं किया है।”
“वह तो समय ही बताएगा कि किसने क्या किया और किसने क्या नहीं? फिर भी मैं कोशिश करूँगा मनोज अभी फिलहाल आप को गिरफ्तार ना करें। पर आप शहर छोड़ कर कहीं जाइएगा नहीं क्योंकि आप शक के दायरे में हैं? अब मैं चलता हूं।”
इसके बाद अविनाश सीधे थाने पहुंचता है। इंस्पेक्टर मनोज अपने केबिन में बैठा दिनभर की थकान से ऊंघ रहा था।
“और क्या चल रहा है?”
“कुछ नहीं यार आज बहुत थक गए हैं। और तुम बताओ।”
“ऐसे ही तुम्हारा ही काम कर रहे हैं।”
“यार कुछ भी कहो मैंने दोस्त बहुत अच्छा बनाया है।”
“मैं किसी खास काम से आया था? क्या तूने फिंगर प्रिंट एक्सपर्ट से फोटो पर मिले निशान का पता लगवाया”
“हां मैंने पता लगाया है। उस पर तो किसी के उंगलियों के निशान नहीं है।”
“बड़ी अजीब सी बात है आजकल लोग बहुत ही स्मार्ट हो गए हैं।हर काम दस्ताने पहन कर करते है। आपत्तिजनक फोटोग्राफ से भी किसी के उंगलियों के निशान नहीं मिले यह बड़ी चौंकाने वाली बात है। यार एक काम करो मैं डॉ मयंक से मिलकर आ रहा हूं। वकील तनेजा ने एक ड्राफ्ट वसीयत बनाई थी धनपाल के कहने पर। वो वसीयत उसने डॉक्टर मयंक को भी दी थी। इस लिफाफे के अंदर वह वसीयत है। मैं यह चाहता हूं कि तुम इस वसीयत के कागज़ के ऊपर से तो फिंगरप्रिंट्स उतरवाने का इंतजाम करो। मैं यह देखना चाहता हूं कि इस पर किस-किस के फिंगर प्रिंट्स मौजूद है। और हाँ जब तक मैं न कहूँ डॉ मयंक को गिरफ्तार मत करना। एक-दो दिन मुझे और तफ्तीश कर लेने दे। केस उलझा हुआ जरूर है लेकिन मेरे समझ में कुछ कुछ आ रहा है। कुछ चीजें मिसिंग है जिसको मैं जोड़ने की कोशिश कर रहा हूं। अभी तो मैं घर जा रहा हूं मैंने राजू को किसी काम पर लगाया हुआ है”
इसके बाद अविनाश अपने घर चला जाता है। दूसरे दिन करीब 10:00 बजे राजू कैबिन मे उससे मिलता है।
“राजू, कुछ पता चला।”