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नमस्कार साथियो,
आशा ही नही अपितु पूर्णतः विश्वास है आप सब कुशल मंगल होंगे, में नया हूँ इस ग्रुप में, लेखन की तार्किक क्षमता तो नही है, लेकिन कोसिस करना चाहता हूँ,
कहानी में पात्र आते जाएंगे ओर परिचय होता जाएगा,।
रीना- उम्र 40 साल,
रंग- गेरुवा, मानो आसमान से कोई परी उतरि हो, रीना का बदन काफी भर हुआ है। वो जवानी के किनारे को छोड़ चुकी है पर जवानी उसके बदन को नहीं छोड़ रही थी। सुबह ला कसरत उसके जिस्म को चार चांद लगा रहे थे, रीना के बाल एकदम गहरे काले घने हैं जो कि उसकी गांड तक आते हैं। वो अपने बालों का खूब ख़्याल रखती है। उसका चेहरा अभी भी काफी आकर्षक था। गोरा रंग, आंखें गहरी काजल से सजी हुई। गोरे गाल उठे हुए बिल्कुल किसी रसमलाई की तरह। गुलाबी रसीले हल्के मोटे होंठ। चुचियां का साइज कोई 38 होगा। पति के गुजर जाने के बाद से ही रीना का जीवन काफी उतार चढ़ाव में व्यतीत हो रहा था, जिस्म उसका उसके काबू में नही रहता, वो अपने जिस्म को बिस्तर में लेटे लेटे सहलाती रहती थी, उसके जिस्म की तपिश उसे खाये जा रही थी, खाये भी क्यों नही किसी पुरूष से सम्पर्क हुए 5 साल जो हो गया था, रीना एक विधवा का जीवन यापन कर रही थी, उसकी मांसल रूपी छातियों से कड़कपन उसे जीने नही देता था, अपने ही आग में अपने आप को समेटे हुए जी रही थी,
रीना रोज अपने आफिस के बस से आफिस आती जाती थी, लेकिन आज आफिस का बस न आने से उसे प्राइवेट बस से आफिस जाना पड़ा ,
सलवार कुर्ती उसका बेहद पसंदीदा ड्रेस था, आज भी सलवार पहनी और उसने शीशे में अपने आप को अपनी नजरो से ख़ुद को देखा और सोचने लगी कि इतनी सुंदर जवानी बर्बाद हो रही है। उसने आह भरी और याद किया कि पिछली बार उसे सेक्स किए हुए शायद 5 साल हो गए हैं। उसे आज भी याद है जब उसके पति उसकी चुदाई करते थे, तब भी उसका मन नही भरता था, भरे भी कैसे पति का 5 इंच का लंड रीना की प्यास नही बुझा पाता, रीना एक सती का जीवन व्यतीत कर रही थी, सुबह उठकर पूजा करना, आफिस जाना और घर आकर अपने जिस्म को मसलना, चूची को अपने हाथों से दबाना मानो कोई पहाड़ दबा रही है, ये सब याद करके उसकी पैंटी में गिलापन आ गया। उसे लग रहा था कि उसका शरीर फिर से सेक्स के लिए भूखा हो रहा था। ख़ैर वो बाहर आयी और बस स्टॉप पर बस का इंतज़ार करने लगी। बस के आते ही वो उसपर चढ़ी पर उसे बैठने के लिए कोई जगह नहीं मिली। बस भीड़ से खचा खच भरी पड़ी थी, वो खड़ी हो गयी एक सीट की बैक रेल पकड़कर। अगले स्टॉप से भीड़ बढ़ने लगी।अब उसे थोड़ी तकलीफ़ सी होने लगी। उसने देखा कि दो लड़के जो अभी अभी चढ़े थे, उसे घूर रहे थे। उनकी उम्र कोई 26/27 साल की होगी।उन लड़कों ने आपस में कुछ बात की और वो भीड़ में से सरक कर उसकी तरफ़ बढ़ने लगे। थोड़ी देर में एक उसके पास आकर उससे जगह माँग कर उससे आगे निकल गया और दूसरा आकर ठीक उसके सामने खड़ा हो गया। उसने थोड़ा पीछे मुड़कर देखा तो पाया कि वो पहला लड़का अब मुड़कर ठीक उसके पीछे आकर खड़ा था।
उसे कुछ अजीब सा लगा। तभी अगले स्टॉप और ज़्यादा भीड़ चढ़ गयी। अब वो लड़के भीड़ के बहाने से उससे चिपक से गए। रीना की पहाड़ जैसी विशालकाय छातियाँ उस लड़के के मर्दाने छाती को छू रही थीं। पीछे वाला लड़का भी अब उससे चिपककर उसके पीठ पर कमीज के ऊपर हाथ रख दिया। रीना इस डबल हमले से थोड़ा सिहर उठी। उसके बदन से हिचकोले आने चालू हो गए, धङकन हाई लेबल पे जा पहुचा, सांस तक सी गई, न जाने क्या होने वाला है आगे, उसने गुस्से से पीछे वाले लड़के के तरफ देखा, लड़का मासूमियत भरी नजरों से अपने आंख को नचाते हुए मानो रीना को क्षमा याचना प्रस्तुत कर रहा हो,
कुछ देर बाद अब पीछे वाला लड़का उसकी कमीज के ऊपर से उसके ब्रा के स्ट्रैप को सहला रहा था और उसके हाथ उसकी नंगी पीठ पर रेंग रहे थे जो कमीज के पीछे के गेप के बीच का हिस्सा था। सामने वाला भी अब उसकी छाती पर अपनी छाती का दबाव बनाते हुए उसके कमीज के अंदर हाथ डाल के पेट पर सहलाने लगा। रीना का एक हाथ तो सीट का सहारा लिया हुआ था, और दूसरे हाथ से उसने इस लड़के का हाथ अपने पेट से हटाने की कोशिश किया। पर वो लड़का कहाँ मनाने वाला था। उसने एक बार हाथ हटा दिया पर जैसे ही रीना का हाथ हटा उसने फिर से उसके पेट पर हाथ रखा और उसकी नाभि को सहलाते हुए छेड़ने लगा।
पुरुष संपर्क में आये हुए रीना को वैसे भी 5 साल हो गए थे, कब तक वो अपनी तन के आग को दबाती, आग के शोले उसके मन मे उठने लगे,
उधर पीछे वाले की हरकतें भी बढ़ गयी थीं, वो अब अपना हाथ नीचे ला कर उसके नितम्बों को सहलाने लगा। रीना पीछे हाथ लेज़ाकर उसका हाथ हटाने की कोशिश की पर यह क्या उसने तो उसका हाथ अपने हाथ में पकड़कर उसको सहलाना शुरू कर दिया।
अब सामने वाला लड़का भी हाथ को उसके कमीज के निचले हिस्से तक ले आया और वहाँ सहलाना चालू रखा। रीना अपना हाथ छुड़ाकर सामने वाले के हाथ को अपनी छातियों तक जाने से रोकने की कोशिश की। अब पिछे वाले ने अपना सामने का हिस्सा उसके नितम्बों से चिपका दिया। उसके पैंट के ऊपर से उसके कड़े लिंग के अहसास से वो हिल सी गयी।
अब सामने वाला फिर से उसकी छातियों तक अपना हाथ पहुँचाने में कामयाब हो गया था। वो अब धीरे से उसकी छातियों के निचले हिस्से को दबा भी रहा था, रीना को लगा कि यह ज़्यादा ही हो रहा है। वो कुछ कहने ही वाली थी कि पीछेवाला लड़का उसके कान में फुसफुसाया : आंटी , क्यों विरोध कर रही हो, आराम से मज़ा लो ना।
रीना हैरानी से अपने बेटे की उम्र के लड़कों के हौसलों को देखकर बोली: ये ठीक नहीं है, चलो मुझे छोड़ दो, नहीं तो मैं शोर मचाऊँगी।
समानेवाला लड़का अब उसकी छातियों को अपने पंजों में दबोचकर उसके कान में बोला: आंटी, मज़ा लो ना, क्या बॉडी है आपकी। क्या मस्त छातियाँ हैं।
तुफा गुजर जाएगा
ये वक्त भी ढल जाएगा
जवानी आपकी है
इस जवानी का कौन मजा पायेगा,
दरअसल बात ये है मोहन और धन्नू दोनों गहरे मित्र थे, दिल्ली के भीड़ भाड़ वाले इलाके में रहते थे, दोनों के मन मे विधवा भाभी , उम्रदराज आंटी, का चस्का लग गया था, मोहन और धन्नू पिछले 6 महीने से मेहनत करते आ रहे थे, बस वही पकड़ते थे जिस बस में भीड़ बहुत हो, लेकिन बेचारो के हाथ मे 6 महीने से कोई भी उम्रदराज औरत हाथ न आई थी, आज उन दोनों के मन मे इस आंटी की चूची और गांड देखकर मन मे ख्याल आया कि शायद ये हाथ आ जाये,
तभी पिछे वाला उसके नितम्बों में अपना खड़ा लिंग रगड़ते हुए बोला:
आंटी, आह क्या मस्त चूतर हैं आपके, हाय बहुत अच्छा लग रहा है। ऐसा कहते हुए उसके हाथ अब उसकी कुर्ती को सामने से उठाकर उसकी सलवार के ऊपर से उसकी भारी हुई जाँघों पर आ गए।
अब रीना का मन उसके बस में नही रहा और उसकी सिसकी निकल गयी और वो धीरे से बोली: कोई देख लेगा तो क्या होगा, प्लीज़ मुझे छोड़ दो। में आप लोगो के आगे हाथ जोड़ती हूँ, में ऐसी औरत नही हूँ, कृपया मुझे छोड़ दो आप लोग,
सामने वाला लड़का उसकी छातियों को दबाते हुए बोला: इतनी भीड़ है आंटी, किसी को होश नहीं है , आप मज़ा लो।
अब पिछेवाले लड़के ने उसके पेट को सहलाते हुए उसकी सलवार के ऊपर से उसकी जाँघों के जोड़ तक हाथ डाल दिया। अब रीना की पैंटी गीलीहोने लगी। काफ़ी दिनों से प्यासी तो थी ही, और अचानक उस लड़के ने उसकी चूत पर अपना हाथ रखा और वहाँ सहलाने लगा। अब वी धीरे से बोला: आंटी, प्लीज़ टाँगें फैलाओना,। और पता नहीं रीना को क्या हो गया कि उसने अपनी टाँगें फैला दीं। रीना अपनी सुद्ध बुद्ध खो दी , अब पिछेवाला लड़का उसकी चूत को सलवार के ऊपर से मुट्ठी में लेकर दबाने लगा। अब रीना की पूरी सलवार सामने से गीली होने लगी।
अब स्तिथि ये थी कि रीना की छातियाँ सामने वाले के पंजों में थीं और उसकी चूत को पीछेवाला लड़का दबा रहा था। तभी सामने वाले लड़के ने रीना का हाथ पकड़ा और अपने पैंट के ऊपर से अपने लिंग पर रख दिया। रीना सिहर उठी, उस लड़के की उम्र के हिसाब से लिंग बहुत बड़ा लग रहा था। वो चाह कर भी अपना हाथ वहाँ से नहीं हटा पायी। और उस लड़के ने रीना का हाथ दबाकर अपने लिंग को दबवाना शुरू किया। रीना की हालत अब ख़राब होने लगी थी ,और उसकी चूत में बहुत ज़्यादा खुजली सी होने लगी थी।
अब उसका हाथ अपने आप ही उसके लिंग को दबाने लगा और वो मज़े से भरने लगी थी। तभी पीछे वाले लड़के ने उसका दूसरा हाथ पकड़कर अपने लिंग पर रख दिया। रीना को लगा कि एक और मूसल सा लिंग उसके हाथ में था और वो अपने आप ही उसको भी आगे पीछे करने लगी।
तभी पीछे वाला लड़का बोला: आंटी, अगले स्टॉप पर उतर जायिये हमारे साथ। मेरा घर स्टॉप से बिलकुल पास है, और परिवार बाहर गया है। बहुत मज़ा आ जाएगा।
रीना: आह मैं ऐसे कैसे जा सकती हूँ, तुम लोगों को जानती तक नहीं। जान न पहचान बार बार सलाम, तुम लोग तो ऐसे कह रहे हो जैसे मुझे बर्षो से जानते हो,
सामने वाला लड़का बोला: आंटी, चलेंगी तो जान पहचान भी हो जाएगी। आदर सत्कार के साथ साथ जलपान भी हो जाएगी, प्लीज़ मना मत करिए , देखिए ना क्या हालत है बेचारे की आपके हाथ में आँसूँ बहा रहा है। आखिर आपके भी पास दिल है, अपने दिल से पूछिए और हम लोगो के दिल की बात मान जाइये, प्लीज आंटी, प्लीज, प्लीज प्लीज
रीना: लेकिन ये कैसे हो सकता है? मैं काम पे कोसे जाऊंगा--
वो बोला: आंटी, काम पे थोड़ी देर से चली जाइएगा ना आप, प्लीज़ चलिए स्टॉप आ गया है। प्लीज प्लीज
अब पीछे वाला लगभग रीना को धक्का देते हुए प्लीज् प्लीज कहते हुए बस के आगे वाले डोर पे ले के जाने लगा, जबकि आगे वाला रास्ता बना रहा था भीड़ में। रीना के पैर अपने आप ही उनके साथ चले जा रहे थे, वो अपने आप पर हैरान थी परेसान थी, आखिर वो कर क्या रही है, क्यों वो उन लड़कों की बात मान रही है, आखिर वो ऐसा कैसे कर रही है, एकदम अनजान लड़कों के साथ वो भी उसके बेटे की उम्र के थे, वो चली जा रही है। वो जैसे किसी सम्मोहन शक्ति में जकड़ गई थी आखिरकार प्लीज् का असर दिखाई दिया और रीना बस से उतर गयी। अब वो लड़का उसको सड़क से ही सामने की गली में अपना मकान दिखाया और बोला: आंटी बस वही मकान हमारा है।
वो उनके साथ चलती हुई फिर से सम्मोहन से निकलने की कोशिश की, और उसने चोर नज़रों से दोनों के पैंट के सामने उभारों को देखा और उसका रहा सहा संकल्प भी टूट गया। उसकी चूत में उन उभरे हुए लिंगों को देखकर बहुत खुजली सी हुई। और वो जानती थी कि आज ये खुजली मिटाए बग़ैर उसे चैन नहीं मिलने वाला।
रीना उन दोनों लड़कों के साथ उस घर में घुसी और उन्होंने उसे सोफ़े पर बिठाया और मोहन जिसका घर था, फ्रिज से ठंडा पानी , काजू का प्लेट लेकर रीना को दिया। रीना काजू खाते हुए ये सोचने लगी कि अब क्या होगा उसके साथ, आज तक उसने कभी सपनो में भी नही सोचा और देखा था कि दो लड़के जो उम्र में छोटे है उसके साथ कुछ करेंगे, यही सब सोचते हुए रीना पानी पीने लगी। रीना की कमीज का दुपट्टा एक तरफ़ सरक गया था सो उसने उसे ठीक कर अपनी छातियाँ ढक लीं।
धन्नू जो मोहन का दोस्त था, बोला : आंटी और कुछ लेंगी?
रीना ने शर्माते हुए ना में सर हिलाया।
मोहन बोला: आंटी, आप बिलकुल परेशान मत होईए, यहाँ अभी कोई नहीं आएगा। ये आपबपने घर जैसा समझ सकती है, आपको कोई परेशानी नही होगी,
धन्नू,: हां आंटी मोहन ठीक कह रहा है, आप हमारी माँ जैसी है, आपको हम लोगो से कोई दिक्कत परेसानी नही आएगी,
रीना: मुझे ऑफ़िस जाना है ।
मोहन: आंटी, चली जाना ना ऑफ़िस, कहा आपका आफिस जाना कही भाग रहा है, रोज रोज तो आप काम करते ही हो, आज थोड़ा आराम और थोड़ा मज़ा तो कर लो।
रीना का चेहरा लाल हो गया, मानो ऐसा प्रतीत हुआ की उनकी बुर लपलपा गई, वो सोचने लगी, ये क्या कर बैठी , अपने से छोटे उम्र के लड़कों के कहने पे वो किस अनजान जगह आ गई और बेटे के उम्र के लड़कों के साथ यूँ ही चली आयी खैर रीना ने अपने को ढांढस बढ़ाया और मन ही मन अपने मन से कहा अब जो होना है वो तो होकर ही रहेगा।
धन्नू: आंटी हम अच्छे घरों के लड़के हैं, संस्कारी है, चूत की पूजा करना और चूत को कभी बदनाम न होने देना हमारा परम कर्तव्य है, हम लोग आपको विश्वास दिलाते है बदनाम नहीं होने देंगे, आप हम पर विश्वास करो।
तभी दोनों रीना के पैरों के पास बैठ गए। अब दोनों ने उसके पैरों को हाथ में ले लिया और उसको चूमने लगे। धन्नू बायें पैर का अँगूठा और मोहन दायीं पैर का अँगूठा चूसने लगे। सलवार को थोड़ा सरका कर धन्नू रीना के पैरों को सहलाने लगा, रीना के पैरों पे जो बाल थे भूरे भूरे वो तन गए, रीना का मन धड़कने लगा, ये सब रीना के लिए ये एक अजीब अनुभव था। अब उन दोनों ने उसके तलवे चाटने शुरू किए। फिर वो उसकी सभी उँगलियों को बारी बारी से चूमने और चूसने लगे।
फिर वो उसकी सलवार ऊपर करते हुए उसकी पिंडलियों को चूम रहे थे और अब वो घुटनों को चूम रहे थे।
अब उनके हाथ उसके पैरों पर थे और जीभ से उसकी घुटनों और उसके ऊपर जाँघों तक चाटने लग गए।रीना की आहेंनिकल रही थी। उसका ये अनुभव अनूठा था।
जब दोनों जाँघों तक पहुँचे तो रीना को खड़े करके उसकी कमीज उतार दिए।अब वो उसके सलवार का नाड़ा खोल दिया। उसका सलवार नीचे गिर गया। पैंटी में से उसकी चूत फुली हुई और वहाँ गीली सी दिख रही थी। वो दोनों जैसे मुग्ध दृष्टि से उसकी पैंटी को देख रहे थे। फिर उन्होंने उसे सोफ़े पर बैठा दिया और ख़ुद भी साथ में बैठ गए। उसके एक एक हाथ को पकड़कर दोनों ने उसकी उँगलियाँ चूमनी चालू कीं। फिर एक एक अंगुली चूमे और जीभ से चाटे। रीना बहुत ही उत्तेजित हो गयी थी। अब वो उसकी बाहों को चूमने लगे। फिर उसकी कोहनी को चूम रहे थे।
फिर उसकी स्लीव्ज़लेस ब्रा के ऊपर तक बाहोंको चूमते हुए उसकी बाँहें उठायीं और उसकी बग़लों को सूंघकर दोनों मस्ती से उसकी बग़लें चाटने लगे। रीना की आऽऽऽहहहह निकल गयी।
अब लड़कों ने उसकी गर्दन और गाल चूमे और चाटे। अब वो उसकी ब्रा के ऊपर से उसकी छातियों को चूमने लगे।
फिर दोनों उसके ब्रा के ऊपर से उसकी छातियाँ दबाने लगे। रीना की हाऽऽऽयय्यय निकल गयी।
फिर उन्होंने ब्रा के हुक खोले और उसको निकाल दिया , अब ब्रा में क़ैद उसकी बड़ी बड़ी छातियाँ बहुत ही मादक दिख रही थीं। खुले रूप में आ जाने से चूची की चार चांद लग गई, वो दोनों उसकी ब्रा के ऊपर से एक एक छाती चूमने लगे। अब रीना जैसे पागल सी हो रही थी, उसने हाथ बढ़ाकर उन दोनों के पैंट के ऊपर से उनके हथियार पकड़ लिए और मसलने लगी।अब वो ब्रा खोलकर उसकी भारी छातियाँ देखकर मस्त हो गए। वाह क्या मस्त बड़े बड़े आम थे और उसके ऊपर काले लम्बे अकड़े हुए निप्पल्स जैसे कह रहे थे कि आओ बच्चों मुझे चूसो।
रीना बोली: आह्ह्ह्ह्ह्ह चलो अपने कपड़े खोलो अब, मुझे तो नंगी कर दिया और ख़ुद पूरे कपड़े पहने खड़े हो।
दोनों ने हँसते हुए कहा: लो आंटी हम भी नंगे हो जाते हैं।
अब दोनों ने अपने कमीज़े उतारी और उनकी चौड़ी छाती देखकर वो मस्ती से भरने लगी। उनकी बाँहें भी बहुत बलशाली दिख रहीं थीं।
अब उन्होंने अपनी जींस खोली और उनकी बालोंवाली मोटी जाँघें और उसके बीच में जॉकी का उभार बहुत ही आकर्षक लग रह था।
दोनों की चड्डियाँ उनके प्रीकम से गीली थीं।
अब मोहन उसके पास आया और उसका सर अपनी चड्डी पर दबा दिया। रीना मर्दाने वीर्य की गंध से जैसे पागल हो गयी और उस जगह को जीभ से चाटने लगी। अब उसने मोहन की चड्डी को नीचे किया और उसके लंड को देखकर जैसे निहाल हो गयी और उसका मुँह अपने आप उसके पीशाब के छेद को चाटने लगा ।
फिर उसने उसके लंड की चमड़ी को पीछे किया और उसके सुपाडेको चूमते हुए चूसने लगी। और मोहन भी अपनी कमर हिलाकर जैसे उसके मुँह को चोदरहा था। तभी धन्नू उसको हटा कर अपना लंड उसके मुँह के पास लाया और रीना भी उसका लंड चूसने लगी। वो सोचने लगी, क्या मस्त लंड हैं इन दोनों लड़कों के, आज तो मज़ा ही आ जाएगा। तभी वो महसूस की अब दोनों उसकी नंगी छातियाँ मसल रहे हैं। और दोनों उसके निपल्ज़ भी मसलने लगे।
रीना को लगा कि वो झड़ जाएगी। तभी वो दोनों रीना की चूचियाँ दबाते हुए उसको खड़ा करके बेडरूम में ले के गए। फिर उसको लिटाकर उसकी पैंटी को खींचकर नीचे किया और उसकी चूतको देखकर मस्ती से अपने लंड मसलने लगे। अब मोहन ने उसकी चूत में मुँह डाल दिया और उसको चाटने लगा। धन्नू तो उसकी छातियों को मसलते हुए चूसने लगा। रीना की आऽऽऽऽहहह निकलने लगी।
अब वो अपनी कमर हिलाकर चूत को उसके मुँह पर दबाने लगी। फिर मोहन ने उसकी टाँगें उठाकर उसकी चूतमें अपना लंड पेल दिया और वो हाय्य्य्य्य कहकर चीख़ उठी। उधर धन्नू ने अपना लंड उसके मुँह में डाल दिया। अब वह दोनों उसके मुँह और चूत को चोद रहे थे। रीना की हाय्य्यय और ह्म्म्म्म्म की चीख़ों से कमरा भर गया। अब वो लंड चूसते हुए अपनी कमर उछाल कर चुदवा रही थी और उसकी चूत से फ़चफ़च की आवाज़ें आ रही थीं। मोहन घुटने के बल उसके मुँह के पास बैठ कर उसके मुँह को चोद रहा था और तभी धन्नू आह्ह्ह्ह्ह्ह करके झड़ने लगा। और फिर वो अपना वीर्यउसकी चूत में छोड़कर अपने दोस्त के लिए हट गया। अब मोहन ने अपना लंड उसके मुँह से निकला और उसके टांगों के बीच आकर उसकी चूत में एक बार ही में अपना लंड ठूँस दिया। और रीना ने भी मस्ती से अपनी कमर उछालकर उसके लंड का स्वागत किया और अब मोहन पूरी ताक़त से थप थप कर चोदने लगा। रीना भी मस्ती से अपनी चूत फड़वा रही थी और आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह करते हुए झड़ने लगी चिल्लाते हुए: हाऽऽय्यय ज़ोर से चोओओओओओदो आह्ह्ह्ह्ह्ह फाऽऽऽऽड़ दो मेरीइइइइइइइ चूउउउउउउउततत ।
मोहन भी आंटी की मस्ती से मस्त हो गया और ज़ोर ज़ोर से धक्का मारकर झड़ने लगा। फिर वो उसके ऊपर लेटकर बोला: आंटी मज़ा आया?
रीना: आऽऽऽह हाऽऽननन बहुत मज़ा आया । हाय इतनी ज़बरदस्त चुदाई करते हो तुम दोनों । ये सब कहाँ से सिख लिए इतनी छोटी सी उम्र में?
धन्नू: आंटी आपकी जैसी ही एक आंटी ने हमें ट्रेनिंग दी है।
रीना हँसते हुए बोली: तभी तो मैं बोलूँ कि इतने जल्दी एक्स्पर्ट कैसे बन गए!
मोहन भी उसकी चुचि दबाते हुए बोला: आंटी अभी ये तो ट्रेलर था, पूरी फ़िल्म तो अभी बाक़ी है।
रीना: नहीं नहीं अब और नहीं। मुझे ऑफ़िस जाना है।
तभी मोहन और धन्नू ने उसके एक एक चुचि को मुँह में लिया और उसके निपल्ज़ को चूसने लगे।
अब रीना फिर से गरमाने लगी और उसने उनके सरों को अपने दूध पर दबा दिया और सिसकारियाँ भरने लगी।
रीना: आह्ह्ह्ह्ह छोओओओओओओड़ो ना प्लीज़ , मुझे ऑफ़िस जाना है। हाय्य्य्य्य्य मार डालोगे क़याऽऽऽऽऽऽ
धन्नू ने चुचि से मुँह उठाकर कहा: आंटी आज ऑफ़िस से छुट्टी ले लो बहुत मज़ा अभी बाक़ी है।
रीना जानती थी कि ये उसे छोड़ेंगे नहीं। उसने कहा : अच्छा मुझे ऑफ़िस फ़ोन करने दो।
मोहन उसका फ़ोन लाकर उसको दिया। अब धन्नू एक तौलिए से उसकी चूत साफ़ करने लगा और मोहन अभी भी चुचि चूस रहा था।
रीना ने बॉस को फ़ोन लगाकर कहा: सर आज छुट्टी लूँगी क्योंकि तबियत ख़राब है। तभी मोहन ने निपल्ज़ को हल्के से दाँत से काटा तो उसकी हाय्य्यय निकल गयी।
बॉस: अरे क्या बहुत तकलीफ़ में हो?
रीना : जी हाँ बस अब आराम करूँगी। और उसने फ़ोन काट दिया। धन्नू भी उसकी चूत खोलकर उसकी गुलाबी छेद को देखकर मस्त हो रहा था।
नमिता: आऽऽहहहह बड़े गंदे हो तुम लोग। हाय्य्य्य्य चलो छोओओओओओड़ो नहीं तो मैं झड़ जाऊँगी। मुझे जाने भी नही दिए तुम लोग आफिस अब और शैतानी नही, अब मुझे तुम लोग घर जाने दो ,
धन्नू: लो जी आंटी जी, अब तो आपने छुट्टी भी ले लिया फिर इतना जल्दी घर कैसे जान है, बुर में अपना चिभ डालते हुए कहा हम तो तभी छोड़ेंगे जब आप मान जानोगी हमारी रंडी बनने को।
रीना: आह चलो ठीक है, मुझे मंज़ूर है। आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह बस करो आह्ह्ह्ह्ह नहीं तो मैं झड़ जाऊँगीं।
धन्नू अपना मुँह हटाकर बहुत ही मीठी आवाज़ में बोला: मेरी जान रंडी अच्छा लगा ना?
रीना: हाऽऽयय्यय हाँ लौड़े बहुत अच्छा लगा। आह तुम दोनों तो आज मुझे पागल ही कर दोगे।
धन्नू: आंटी हम आपको पागल नहीं करेंगे बस आपको बहुत मज़ा देंगे। प्यार करेंगे, आपकी चूत से, चूची से, आपके हर एक अंग से, आपकी वर्षो की प्यास बुझाएंगे, आपको सिर्फ और सिर्फ लंड की सवारी कराएंगे,
मोहन: हां आंटी आपको एक रंडी की तरह चुदाई करेंगे, आपकी गांड में अपना जीभ डालकर आपको मस्त करेंगे, आपकी चूत का मूत्र अपनी जिह्वा से लगाकर सोमरस का पान करेंगे, आंटी ज़रा उलटी लेटो ना प्लीज़।
रीना उत्तेजना से काँप कर पेट के बल लेट गयी। अब मोहन उसकी पीठ को जीभ से चाट रहा था। उधर धन्नू उसके तलवों को चाट रहा था और धीरे धीरे ऊपर आ रहा था। मोहन पीठ चाटते हुए नीचे जा रहा था। रीना का शरीर जैसे जलने लगा, मदहोसी के आलम में रीना बूत की तरह चिपक गई, और वो आहें भर रही थीं।
धन्नू: आह आंटी आपकी पिंडलियाँ कितनी नरम हैं और जाँघें भी कितनी चिकनी हैं। इसी तरह करते करते धन्नू अपनी जीभ को रीना के बुर में घुसा देता है, रीना आय हाय ओ हो क्या हो गया......मुझे........धी...... रे.......आ.....ह..........अरे......म......ममी........बचाओ.................................करती रही और रीना की चूत मूत दी........ रीना को लगा उसका पानी गिरेगा लेकिन ये क्या रीना ने मूत दिया, और धन्नू मजे से रीना की चूत का मूत किसी सांड की तरह पीने लगा,
दोस्तो आज इतना ही, कैसा लगा अवगत जरूर कीजियेगा
आशा ही नही अपितु पूर्णतः विश्वास है आप सब कुशल मंगल होंगे, में नया हूँ इस ग्रुप में, लेखन की तार्किक क्षमता तो नही है, लेकिन कोसिस करना चाहता हूँ,
कहानी में पात्र आते जाएंगे ओर परिचय होता जाएगा,।
रीना- उम्र 40 साल,
रंग- गेरुवा, मानो आसमान से कोई परी उतरि हो, रीना का बदन काफी भर हुआ है। वो जवानी के किनारे को छोड़ चुकी है पर जवानी उसके बदन को नहीं छोड़ रही थी। सुबह ला कसरत उसके जिस्म को चार चांद लगा रहे थे, रीना के बाल एकदम गहरे काले घने हैं जो कि उसकी गांड तक आते हैं। वो अपने बालों का खूब ख़्याल रखती है। उसका चेहरा अभी भी काफी आकर्षक था। गोरा रंग, आंखें गहरी काजल से सजी हुई। गोरे गाल उठे हुए बिल्कुल किसी रसमलाई की तरह। गुलाबी रसीले हल्के मोटे होंठ। चुचियां का साइज कोई 38 होगा। पति के गुजर जाने के बाद से ही रीना का जीवन काफी उतार चढ़ाव में व्यतीत हो रहा था, जिस्म उसका उसके काबू में नही रहता, वो अपने जिस्म को बिस्तर में लेटे लेटे सहलाती रहती थी, उसके जिस्म की तपिश उसे खाये जा रही थी, खाये भी क्यों नही किसी पुरूष से सम्पर्क हुए 5 साल जो हो गया था, रीना एक विधवा का जीवन यापन कर रही थी, उसकी मांसल रूपी छातियों से कड़कपन उसे जीने नही देता था, अपने ही आग में अपने आप को समेटे हुए जी रही थी,
रीना रोज अपने आफिस के बस से आफिस आती जाती थी, लेकिन आज आफिस का बस न आने से उसे प्राइवेट बस से आफिस जाना पड़ा ,
सलवार कुर्ती उसका बेहद पसंदीदा ड्रेस था, आज भी सलवार पहनी और उसने शीशे में अपने आप को अपनी नजरो से ख़ुद को देखा और सोचने लगी कि इतनी सुंदर जवानी बर्बाद हो रही है। उसने आह भरी और याद किया कि पिछली बार उसे सेक्स किए हुए शायद 5 साल हो गए हैं। उसे आज भी याद है जब उसके पति उसकी चुदाई करते थे, तब भी उसका मन नही भरता था, भरे भी कैसे पति का 5 इंच का लंड रीना की प्यास नही बुझा पाता, रीना एक सती का जीवन व्यतीत कर रही थी, सुबह उठकर पूजा करना, आफिस जाना और घर आकर अपने जिस्म को मसलना, चूची को अपने हाथों से दबाना मानो कोई पहाड़ दबा रही है, ये सब याद करके उसकी पैंटी में गिलापन आ गया। उसे लग रहा था कि उसका शरीर फिर से सेक्स के लिए भूखा हो रहा था। ख़ैर वो बाहर आयी और बस स्टॉप पर बस का इंतज़ार करने लगी। बस के आते ही वो उसपर चढ़ी पर उसे बैठने के लिए कोई जगह नहीं मिली। बस भीड़ से खचा खच भरी पड़ी थी, वो खड़ी हो गयी एक सीट की बैक रेल पकड़कर। अगले स्टॉप से भीड़ बढ़ने लगी।अब उसे थोड़ी तकलीफ़ सी होने लगी। उसने देखा कि दो लड़के जो अभी अभी चढ़े थे, उसे घूर रहे थे। उनकी उम्र कोई 26/27 साल की होगी।उन लड़कों ने आपस में कुछ बात की और वो भीड़ में से सरक कर उसकी तरफ़ बढ़ने लगे। थोड़ी देर में एक उसके पास आकर उससे जगह माँग कर उससे आगे निकल गया और दूसरा आकर ठीक उसके सामने खड़ा हो गया। उसने थोड़ा पीछे मुड़कर देखा तो पाया कि वो पहला लड़का अब मुड़कर ठीक उसके पीछे आकर खड़ा था।
उसे कुछ अजीब सा लगा। तभी अगले स्टॉप और ज़्यादा भीड़ चढ़ गयी। अब वो लड़के भीड़ के बहाने से उससे चिपक से गए। रीना की पहाड़ जैसी विशालकाय छातियाँ उस लड़के के मर्दाने छाती को छू रही थीं। पीछे वाला लड़का भी अब उससे चिपककर उसके पीठ पर कमीज के ऊपर हाथ रख दिया। रीना इस डबल हमले से थोड़ा सिहर उठी। उसके बदन से हिचकोले आने चालू हो गए, धङकन हाई लेबल पे जा पहुचा, सांस तक सी गई, न जाने क्या होने वाला है आगे, उसने गुस्से से पीछे वाले लड़के के तरफ देखा, लड़का मासूमियत भरी नजरों से अपने आंख को नचाते हुए मानो रीना को क्षमा याचना प्रस्तुत कर रहा हो,
कुछ देर बाद अब पीछे वाला लड़का उसकी कमीज के ऊपर से उसके ब्रा के स्ट्रैप को सहला रहा था और उसके हाथ उसकी नंगी पीठ पर रेंग रहे थे जो कमीज के पीछे के गेप के बीच का हिस्सा था। सामने वाला भी अब उसकी छाती पर अपनी छाती का दबाव बनाते हुए उसके कमीज के अंदर हाथ डाल के पेट पर सहलाने लगा। रीना का एक हाथ तो सीट का सहारा लिया हुआ था, और दूसरे हाथ से उसने इस लड़के का हाथ अपने पेट से हटाने की कोशिश किया। पर वो लड़का कहाँ मनाने वाला था। उसने एक बार हाथ हटा दिया पर जैसे ही रीना का हाथ हटा उसने फिर से उसके पेट पर हाथ रखा और उसकी नाभि को सहलाते हुए छेड़ने लगा।
पुरुष संपर्क में आये हुए रीना को वैसे भी 5 साल हो गए थे, कब तक वो अपनी तन के आग को दबाती, आग के शोले उसके मन मे उठने लगे,
उधर पीछे वाले की हरकतें भी बढ़ गयी थीं, वो अब अपना हाथ नीचे ला कर उसके नितम्बों को सहलाने लगा। रीना पीछे हाथ लेज़ाकर उसका हाथ हटाने की कोशिश की पर यह क्या उसने तो उसका हाथ अपने हाथ में पकड़कर उसको सहलाना शुरू कर दिया।
अब सामने वाला लड़का भी हाथ को उसके कमीज के निचले हिस्से तक ले आया और वहाँ सहलाना चालू रखा। रीना अपना हाथ छुड़ाकर सामने वाले के हाथ को अपनी छातियों तक जाने से रोकने की कोशिश की। अब पिछे वाले ने अपना सामने का हिस्सा उसके नितम्बों से चिपका दिया। उसके पैंट के ऊपर से उसके कड़े लिंग के अहसास से वो हिल सी गयी।
अब सामने वाला फिर से उसकी छातियों तक अपना हाथ पहुँचाने में कामयाब हो गया था। वो अब धीरे से उसकी छातियों के निचले हिस्से को दबा भी रहा था, रीना को लगा कि यह ज़्यादा ही हो रहा है। वो कुछ कहने ही वाली थी कि पीछेवाला लड़का उसके कान में फुसफुसाया : आंटी , क्यों विरोध कर रही हो, आराम से मज़ा लो ना।
रीना हैरानी से अपने बेटे की उम्र के लड़कों के हौसलों को देखकर बोली: ये ठीक नहीं है, चलो मुझे छोड़ दो, नहीं तो मैं शोर मचाऊँगी।
समानेवाला लड़का अब उसकी छातियों को अपने पंजों में दबोचकर उसके कान में बोला: आंटी, मज़ा लो ना, क्या बॉडी है आपकी। क्या मस्त छातियाँ हैं।
तुफा गुजर जाएगा
ये वक्त भी ढल जाएगा
जवानी आपकी है
इस जवानी का कौन मजा पायेगा,
दरअसल बात ये है मोहन और धन्नू दोनों गहरे मित्र थे, दिल्ली के भीड़ भाड़ वाले इलाके में रहते थे, दोनों के मन मे विधवा भाभी , उम्रदराज आंटी, का चस्का लग गया था, मोहन और धन्नू पिछले 6 महीने से मेहनत करते आ रहे थे, बस वही पकड़ते थे जिस बस में भीड़ बहुत हो, लेकिन बेचारो के हाथ मे 6 महीने से कोई भी उम्रदराज औरत हाथ न आई थी, आज उन दोनों के मन मे इस आंटी की चूची और गांड देखकर मन मे ख्याल आया कि शायद ये हाथ आ जाये,
तभी पिछे वाला उसके नितम्बों में अपना खड़ा लिंग रगड़ते हुए बोला:
आंटी, आह क्या मस्त चूतर हैं आपके, हाय बहुत अच्छा लग रहा है। ऐसा कहते हुए उसके हाथ अब उसकी कुर्ती को सामने से उठाकर उसकी सलवार के ऊपर से उसकी भारी हुई जाँघों पर आ गए।
अब रीना का मन उसके बस में नही रहा और उसकी सिसकी निकल गयी और वो धीरे से बोली: कोई देख लेगा तो क्या होगा, प्लीज़ मुझे छोड़ दो। में आप लोगो के आगे हाथ जोड़ती हूँ, में ऐसी औरत नही हूँ, कृपया मुझे छोड़ दो आप लोग,
सामने वाला लड़का उसकी छातियों को दबाते हुए बोला: इतनी भीड़ है आंटी, किसी को होश नहीं है , आप मज़ा लो।
अब पिछेवाले लड़के ने उसके पेट को सहलाते हुए उसकी सलवार के ऊपर से उसकी जाँघों के जोड़ तक हाथ डाल दिया। अब रीना की पैंटी गीलीहोने लगी। काफ़ी दिनों से प्यासी तो थी ही, और अचानक उस लड़के ने उसकी चूत पर अपना हाथ रखा और वहाँ सहलाने लगा। अब वी धीरे से बोला: आंटी, प्लीज़ टाँगें फैलाओना,। और पता नहीं रीना को क्या हो गया कि उसने अपनी टाँगें फैला दीं। रीना अपनी सुद्ध बुद्ध खो दी , अब पिछेवाला लड़का उसकी चूत को सलवार के ऊपर से मुट्ठी में लेकर दबाने लगा। अब रीना की पूरी सलवार सामने से गीली होने लगी।
अब स्तिथि ये थी कि रीना की छातियाँ सामने वाले के पंजों में थीं और उसकी चूत को पीछेवाला लड़का दबा रहा था। तभी सामने वाले लड़के ने रीना का हाथ पकड़ा और अपने पैंट के ऊपर से अपने लिंग पर रख दिया। रीना सिहर उठी, उस लड़के की उम्र के हिसाब से लिंग बहुत बड़ा लग रहा था। वो चाह कर भी अपना हाथ वहाँ से नहीं हटा पायी। और उस लड़के ने रीना का हाथ दबाकर अपने लिंग को दबवाना शुरू किया। रीना की हालत अब ख़राब होने लगी थी ,और उसकी चूत में बहुत ज़्यादा खुजली सी होने लगी थी।
अब उसका हाथ अपने आप ही उसके लिंग को दबाने लगा और वो मज़े से भरने लगी थी। तभी पीछे वाले लड़के ने उसका दूसरा हाथ पकड़कर अपने लिंग पर रख दिया। रीना को लगा कि एक और मूसल सा लिंग उसके हाथ में था और वो अपने आप ही उसको भी आगे पीछे करने लगी।
तभी पीछे वाला लड़का बोला: आंटी, अगले स्टॉप पर उतर जायिये हमारे साथ। मेरा घर स्टॉप से बिलकुल पास है, और परिवार बाहर गया है। बहुत मज़ा आ जाएगा।
रीना: आह मैं ऐसे कैसे जा सकती हूँ, तुम लोगों को जानती तक नहीं। जान न पहचान बार बार सलाम, तुम लोग तो ऐसे कह रहे हो जैसे मुझे बर्षो से जानते हो,
सामने वाला लड़का बोला: आंटी, चलेंगी तो जान पहचान भी हो जाएगी। आदर सत्कार के साथ साथ जलपान भी हो जाएगी, प्लीज़ मना मत करिए , देखिए ना क्या हालत है बेचारे की आपके हाथ में आँसूँ बहा रहा है। आखिर आपके भी पास दिल है, अपने दिल से पूछिए और हम लोगो के दिल की बात मान जाइये, प्लीज आंटी, प्लीज, प्लीज प्लीज
रीना: लेकिन ये कैसे हो सकता है? मैं काम पे कोसे जाऊंगा--
वो बोला: आंटी, काम पे थोड़ी देर से चली जाइएगा ना आप, प्लीज़ चलिए स्टॉप आ गया है। प्लीज प्लीज
अब पीछे वाला लगभग रीना को धक्का देते हुए प्लीज् प्लीज कहते हुए बस के आगे वाले डोर पे ले के जाने लगा, जबकि आगे वाला रास्ता बना रहा था भीड़ में। रीना के पैर अपने आप ही उनके साथ चले जा रहे थे, वो अपने आप पर हैरान थी परेसान थी, आखिर वो कर क्या रही है, क्यों वो उन लड़कों की बात मान रही है, आखिर वो ऐसा कैसे कर रही है, एकदम अनजान लड़कों के साथ वो भी उसके बेटे की उम्र के थे, वो चली जा रही है। वो जैसे किसी सम्मोहन शक्ति में जकड़ गई थी आखिरकार प्लीज् का असर दिखाई दिया और रीना बस से उतर गयी। अब वो लड़का उसको सड़क से ही सामने की गली में अपना मकान दिखाया और बोला: आंटी बस वही मकान हमारा है।
वो उनके साथ चलती हुई फिर से सम्मोहन से निकलने की कोशिश की, और उसने चोर नज़रों से दोनों के पैंट के सामने उभारों को देखा और उसका रहा सहा संकल्प भी टूट गया। उसकी चूत में उन उभरे हुए लिंगों को देखकर बहुत खुजली सी हुई। और वो जानती थी कि आज ये खुजली मिटाए बग़ैर उसे चैन नहीं मिलने वाला।
रीना उन दोनों लड़कों के साथ उस घर में घुसी और उन्होंने उसे सोफ़े पर बिठाया और मोहन जिसका घर था, फ्रिज से ठंडा पानी , काजू का प्लेट लेकर रीना को दिया। रीना काजू खाते हुए ये सोचने लगी कि अब क्या होगा उसके साथ, आज तक उसने कभी सपनो में भी नही सोचा और देखा था कि दो लड़के जो उम्र में छोटे है उसके साथ कुछ करेंगे, यही सब सोचते हुए रीना पानी पीने लगी। रीना की कमीज का दुपट्टा एक तरफ़ सरक गया था सो उसने उसे ठीक कर अपनी छातियाँ ढक लीं।
धन्नू जो मोहन का दोस्त था, बोला : आंटी और कुछ लेंगी?
रीना ने शर्माते हुए ना में सर हिलाया।
मोहन बोला: आंटी, आप बिलकुल परेशान मत होईए, यहाँ अभी कोई नहीं आएगा। ये आपबपने घर जैसा समझ सकती है, आपको कोई परेशानी नही होगी,
धन्नू,: हां आंटी मोहन ठीक कह रहा है, आप हमारी माँ जैसी है, आपको हम लोगो से कोई दिक्कत परेसानी नही आएगी,
रीना: मुझे ऑफ़िस जाना है ।
मोहन: आंटी, चली जाना ना ऑफ़िस, कहा आपका आफिस जाना कही भाग रहा है, रोज रोज तो आप काम करते ही हो, आज थोड़ा आराम और थोड़ा मज़ा तो कर लो।
रीना का चेहरा लाल हो गया, मानो ऐसा प्रतीत हुआ की उनकी बुर लपलपा गई, वो सोचने लगी, ये क्या कर बैठी , अपने से छोटे उम्र के लड़कों के कहने पे वो किस अनजान जगह आ गई और बेटे के उम्र के लड़कों के साथ यूँ ही चली आयी खैर रीना ने अपने को ढांढस बढ़ाया और मन ही मन अपने मन से कहा अब जो होना है वो तो होकर ही रहेगा।
धन्नू: आंटी हम अच्छे घरों के लड़के हैं, संस्कारी है, चूत की पूजा करना और चूत को कभी बदनाम न होने देना हमारा परम कर्तव्य है, हम लोग आपको विश्वास दिलाते है बदनाम नहीं होने देंगे, आप हम पर विश्वास करो।
तभी दोनों रीना के पैरों के पास बैठ गए। अब दोनों ने उसके पैरों को हाथ में ले लिया और उसको चूमने लगे। धन्नू बायें पैर का अँगूठा और मोहन दायीं पैर का अँगूठा चूसने लगे। सलवार को थोड़ा सरका कर धन्नू रीना के पैरों को सहलाने लगा, रीना के पैरों पे जो बाल थे भूरे भूरे वो तन गए, रीना का मन धड़कने लगा, ये सब रीना के लिए ये एक अजीब अनुभव था। अब उन दोनों ने उसके तलवे चाटने शुरू किए। फिर वो उसकी सभी उँगलियों को बारी बारी से चूमने और चूसने लगे।
फिर वो उसकी सलवार ऊपर करते हुए उसकी पिंडलियों को चूम रहे थे और अब वो घुटनों को चूम रहे थे।
अब उनके हाथ उसके पैरों पर थे और जीभ से उसकी घुटनों और उसके ऊपर जाँघों तक चाटने लग गए।रीना की आहेंनिकल रही थी। उसका ये अनुभव अनूठा था।
जब दोनों जाँघों तक पहुँचे तो रीना को खड़े करके उसकी कमीज उतार दिए।अब वो उसके सलवार का नाड़ा खोल दिया। उसका सलवार नीचे गिर गया। पैंटी में से उसकी चूत फुली हुई और वहाँ गीली सी दिख रही थी। वो दोनों जैसे मुग्ध दृष्टि से उसकी पैंटी को देख रहे थे। फिर उन्होंने उसे सोफ़े पर बैठा दिया और ख़ुद भी साथ में बैठ गए। उसके एक एक हाथ को पकड़कर दोनों ने उसकी उँगलियाँ चूमनी चालू कीं। फिर एक एक अंगुली चूमे और जीभ से चाटे। रीना बहुत ही उत्तेजित हो गयी थी। अब वो उसकी बाहों को चूमने लगे। फिर उसकी कोहनी को चूम रहे थे।
फिर उसकी स्लीव्ज़लेस ब्रा के ऊपर तक बाहोंको चूमते हुए उसकी बाँहें उठायीं और उसकी बग़लों को सूंघकर दोनों मस्ती से उसकी बग़लें चाटने लगे। रीना की आऽऽऽहहहह निकल गयी।
अब लड़कों ने उसकी गर्दन और गाल चूमे और चाटे। अब वो उसकी ब्रा के ऊपर से उसकी छातियों को चूमने लगे।
फिर दोनों उसके ब्रा के ऊपर से उसकी छातियाँ दबाने लगे। रीना की हाऽऽऽयय्यय निकल गयी।
फिर उन्होंने ब्रा के हुक खोले और उसको निकाल दिया , अब ब्रा में क़ैद उसकी बड़ी बड़ी छातियाँ बहुत ही मादक दिख रही थीं। खुले रूप में आ जाने से चूची की चार चांद लग गई, वो दोनों उसकी ब्रा के ऊपर से एक एक छाती चूमने लगे। अब रीना जैसे पागल सी हो रही थी, उसने हाथ बढ़ाकर उन दोनों के पैंट के ऊपर से उनके हथियार पकड़ लिए और मसलने लगी।अब वो ब्रा खोलकर उसकी भारी छातियाँ देखकर मस्त हो गए। वाह क्या मस्त बड़े बड़े आम थे और उसके ऊपर काले लम्बे अकड़े हुए निप्पल्स जैसे कह रहे थे कि आओ बच्चों मुझे चूसो।
रीना बोली: आह्ह्ह्ह्ह्ह चलो अपने कपड़े खोलो अब, मुझे तो नंगी कर दिया और ख़ुद पूरे कपड़े पहने खड़े हो।
दोनों ने हँसते हुए कहा: लो आंटी हम भी नंगे हो जाते हैं।
अब दोनों ने अपने कमीज़े उतारी और उनकी चौड़ी छाती देखकर वो मस्ती से भरने लगी। उनकी बाँहें भी बहुत बलशाली दिख रहीं थीं।
अब उन्होंने अपनी जींस खोली और उनकी बालोंवाली मोटी जाँघें और उसके बीच में जॉकी का उभार बहुत ही आकर्षक लग रह था।
दोनों की चड्डियाँ उनके प्रीकम से गीली थीं।
अब मोहन उसके पास आया और उसका सर अपनी चड्डी पर दबा दिया। रीना मर्दाने वीर्य की गंध से जैसे पागल हो गयी और उस जगह को जीभ से चाटने लगी। अब उसने मोहन की चड्डी को नीचे किया और उसके लंड को देखकर जैसे निहाल हो गयी और उसका मुँह अपने आप उसके पीशाब के छेद को चाटने लगा ।
फिर उसने उसके लंड की चमड़ी को पीछे किया और उसके सुपाडेको चूमते हुए चूसने लगी। और मोहन भी अपनी कमर हिलाकर जैसे उसके मुँह को चोदरहा था। तभी धन्नू उसको हटा कर अपना लंड उसके मुँह के पास लाया और रीना भी उसका लंड चूसने लगी। वो सोचने लगी, क्या मस्त लंड हैं इन दोनों लड़कों के, आज तो मज़ा ही आ जाएगा। तभी वो महसूस की अब दोनों उसकी नंगी छातियाँ मसल रहे हैं। और दोनों उसके निपल्ज़ भी मसलने लगे।
रीना को लगा कि वो झड़ जाएगी। तभी वो दोनों रीना की चूचियाँ दबाते हुए उसको खड़ा करके बेडरूम में ले के गए। फिर उसको लिटाकर उसकी पैंटी को खींचकर नीचे किया और उसकी चूतको देखकर मस्ती से अपने लंड मसलने लगे। अब मोहन ने उसकी चूत में मुँह डाल दिया और उसको चाटने लगा। धन्नू तो उसकी छातियों को मसलते हुए चूसने लगा। रीना की आऽऽऽऽहहह निकलने लगी।
अब वो अपनी कमर हिलाकर चूत को उसके मुँह पर दबाने लगी। फिर मोहन ने उसकी टाँगें उठाकर उसकी चूतमें अपना लंड पेल दिया और वो हाय्य्य्य्य कहकर चीख़ उठी। उधर धन्नू ने अपना लंड उसके मुँह में डाल दिया। अब वह दोनों उसके मुँह और चूत को चोद रहे थे। रीना की हाय्य्यय और ह्म्म्म्म्म की चीख़ों से कमरा भर गया। अब वो लंड चूसते हुए अपनी कमर उछाल कर चुदवा रही थी और उसकी चूत से फ़चफ़च की आवाज़ें आ रही थीं। मोहन घुटने के बल उसके मुँह के पास बैठ कर उसके मुँह को चोद रहा था और तभी धन्नू आह्ह्ह्ह्ह्ह करके झड़ने लगा। और फिर वो अपना वीर्यउसकी चूत में छोड़कर अपने दोस्त के लिए हट गया। अब मोहन ने अपना लंड उसके मुँह से निकला और उसके टांगों के बीच आकर उसकी चूत में एक बार ही में अपना लंड ठूँस दिया। और रीना ने भी मस्ती से अपनी कमर उछालकर उसके लंड का स्वागत किया और अब मोहन पूरी ताक़त से थप थप कर चोदने लगा। रीना भी मस्ती से अपनी चूत फड़वा रही थी और आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह करते हुए झड़ने लगी चिल्लाते हुए: हाऽऽय्यय ज़ोर से चोओओओओओदो आह्ह्ह्ह्ह्ह फाऽऽऽऽड़ दो मेरीइइइइइइइ चूउउउउउउउततत ।
मोहन भी आंटी की मस्ती से मस्त हो गया और ज़ोर ज़ोर से धक्का मारकर झड़ने लगा। फिर वो उसके ऊपर लेटकर बोला: आंटी मज़ा आया?
रीना: आऽऽऽह हाऽऽननन बहुत मज़ा आया । हाय इतनी ज़बरदस्त चुदाई करते हो तुम दोनों । ये सब कहाँ से सिख लिए इतनी छोटी सी उम्र में?
धन्नू: आंटी आपकी जैसी ही एक आंटी ने हमें ट्रेनिंग दी है।
रीना हँसते हुए बोली: तभी तो मैं बोलूँ कि इतने जल्दी एक्स्पर्ट कैसे बन गए!
मोहन भी उसकी चुचि दबाते हुए बोला: आंटी अभी ये तो ट्रेलर था, पूरी फ़िल्म तो अभी बाक़ी है।
रीना: नहीं नहीं अब और नहीं। मुझे ऑफ़िस जाना है।
तभी मोहन और धन्नू ने उसके एक एक चुचि को मुँह में लिया और उसके निपल्ज़ को चूसने लगे।
अब रीना फिर से गरमाने लगी और उसने उनके सरों को अपने दूध पर दबा दिया और सिसकारियाँ भरने लगी।
रीना: आह्ह्ह्ह्ह छोओओओओओओड़ो ना प्लीज़ , मुझे ऑफ़िस जाना है। हाय्य्य्य्य्य मार डालोगे क़याऽऽऽऽऽऽ
धन्नू ने चुचि से मुँह उठाकर कहा: आंटी आज ऑफ़िस से छुट्टी ले लो बहुत मज़ा अभी बाक़ी है।
रीना जानती थी कि ये उसे छोड़ेंगे नहीं। उसने कहा : अच्छा मुझे ऑफ़िस फ़ोन करने दो।
मोहन उसका फ़ोन लाकर उसको दिया। अब धन्नू एक तौलिए से उसकी चूत साफ़ करने लगा और मोहन अभी भी चुचि चूस रहा था।
रीना ने बॉस को फ़ोन लगाकर कहा: सर आज छुट्टी लूँगी क्योंकि तबियत ख़राब है। तभी मोहन ने निपल्ज़ को हल्के से दाँत से काटा तो उसकी हाय्य्यय निकल गयी।
बॉस: अरे क्या बहुत तकलीफ़ में हो?
रीना : जी हाँ बस अब आराम करूँगी। और उसने फ़ोन काट दिया। धन्नू भी उसकी चूत खोलकर उसकी गुलाबी छेद को देखकर मस्त हो रहा था।
नमिता: आऽऽहहहह बड़े गंदे हो तुम लोग। हाय्य्य्य्य चलो छोओओओओओड़ो नहीं तो मैं झड़ जाऊँगी। मुझे जाने भी नही दिए तुम लोग आफिस अब और शैतानी नही, अब मुझे तुम लोग घर जाने दो ,
धन्नू: लो जी आंटी जी, अब तो आपने छुट्टी भी ले लिया फिर इतना जल्दी घर कैसे जान है, बुर में अपना चिभ डालते हुए कहा हम तो तभी छोड़ेंगे जब आप मान जानोगी हमारी रंडी बनने को।
रीना: आह चलो ठीक है, मुझे मंज़ूर है। आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह बस करो आह्ह्ह्ह्ह नहीं तो मैं झड़ जाऊँगीं।
धन्नू अपना मुँह हटाकर बहुत ही मीठी आवाज़ में बोला: मेरी जान रंडी अच्छा लगा ना?
रीना: हाऽऽयय्यय हाँ लौड़े बहुत अच्छा लगा। आह तुम दोनों तो आज मुझे पागल ही कर दोगे।
धन्नू: आंटी हम आपको पागल नहीं करेंगे बस आपको बहुत मज़ा देंगे। प्यार करेंगे, आपकी चूत से, चूची से, आपके हर एक अंग से, आपकी वर्षो की प्यास बुझाएंगे, आपको सिर्फ और सिर्फ लंड की सवारी कराएंगे,
मोहन: हां आंटी आपको एक रंडी की तरह चुदाई करेंगे, आपकी गांड में अपना जीभ डालकर आपको मस्त करेंगे, आपकी चूत का मूत्र अपनी जिह्वा से लगाकर सोमरस का पान करेंगे, आंटी ज़रा उलटी लेटो ना प्लीज़।
रीना उत्तेजना से काँप कर पेट के बल लेट गयी। अब मोहन उसकी पीठ को जीभ से चाट रहा था। उधर धन्नू उसके तलवों को चाट रहा था और धीरे धीरे ऊपर आ रहा था। मोहन पीठ चाटते हुए नीचे जा रहा था। रीना का शरीर जैसे जलने लगा, मदहोसी के आलम में रीना बूत की तरह चिपक गई, और वो आहें भर रही थीं।
धन्नू: आह आंटी आपकी पिंडलियाँ कितनी नरम हैं और जाँघें भी कितनी चिकनी हैं। इसी तरह करते करते धन्नू अपनी जीभ को रीना के बुर में घुसा देता है, रीना आय हाय ओ हो क्या हो गया......मुझे........धी...... रे.......आ.....ह..........अरे......म......ममी........बचाओ.................................करती रही और रीना की चूत मूत दी........ रीना को लगा उसका पानी गिरेगा लेकिन ये क्या रीना ने मूत दिया, और धन्नू मजे से रीना की चूत का मूत किसी सांड की तरह पीने लगा,
दोस्तो आज इतना ही, कैसा लगा अवगत जरूर कीजियेगा