अब असल काम करना शुरू कर दिया था धीरे लेकिन एक रदम में अम्मी की गांड और फुद्दी में अपना अपना लूँ इन आउट करना शुरू होगये और अम्मी सिसकने क साथ साथ चिलए बी जा रही थी की बार अम्मी ने अपने दोनों हाथ नाना की छाती पे रखे थे और अपना मौन ऊपर को किये चीला रही थी क दोनों हाथ अब अम्मी क मोठे मम्मो पर तहत और वो उन्हें बी मसल रहे थे और अम्मी क खूबसूरत सिसकते चेहरे को देख रहे थे...अम्मी की गांड का कसाव इतना ज़्यादा था क मुझे बी ज़ोर लगाना पर रहा रहा अपना हाफ लूँ हे अंदर बहार करने पे और अम्मी की गांड का होल की जो सिलवटें थी वो मेरे लूँ की गिर्द सख्ती से चिपकी थी ऐसे जैसे अब नै चोरे गई मेरे लूँ को पर मैं बी ज़ोर लगा कर धीरे धीरे अंदर बहार करना शुरू कर दिया था और नीचे से नाना ने बी शामे करना शुरू कर दिया और अम्मी क भरी जिस्म हिलना शुरू हो चूका था...अम्मी क मोठे चुतरों को न सिर्फ पकड़े रखा था बल्कि सेहला बी रहा था नरम मॉस था और फुल सफ़ेद दूध जैसा पर जहाँ जहाँ से मैं पकड़े मसल रहा था वहां वहां से अम्मी क चुतरर लाल बी होरहे थे और उन्हें पाकर मैं पोरे फोकस क साथ लूँ आधा हे अंदर बहार कर रहा रहा और आहिस्ता आहिस्ता अपनी स्पीड बी बढ़ा था क मौन से लज़्ज़त और दर्द भरी आवाज़ें सुन हम दोनों मर्दों को बी मज़ा आ रहा था और सरहाने की तरफ खरे अहमद भाई बी अपने लूँ पर मस्ती से हाथ फेर रहे थे क लम्बे बाल बंधे होअय थे पीछे ज़ुरा सा बनाया होआ था और इस की वजह से उनकी गोरी लम्बी गर्दन पीछे से साफ़ दिख रही थी और अम्मी क घड़राये जिस्म में पीछे से जो कर्व सी बनती नीचे चुतरों तक्क उसे देख मेरे दिल बी और तेज़ करने का होआ पर अब की बार मैं ने नाना से पहले भाई को इशारा किया क अपने मोटा लम्बा लूँ अम्मी क मौन में डालो तो वो नाना क सर क इधर टाँगे कर खरे होगये अम्मी क बिलकुल सामने और अम्मी जो क अपना चेहरा दर्द से इधर उधर कर चीख रही थी उन्हों ने जब देखा क अहमद भाई उनके बिलकुल सामने और इतने क़रीब है उनकी आँखों में और घबराहट क आसार नज़र आने लगे...पेहे हे दो दो लूँ आगे पीछे से झेल रही थी अब एक तीसरा मौन में बी न में सर हिलाया चीखे होअय जैसे भाई को मना कर रही हो पर भाई ने बी आगे होकर अपने हाथ से पाकर अपना मोटा लम्बा तना होआ लूँ अम्मी क खुले मौन में दाल दिया और अम्मी की चीखें अब नन्द हो चुकी थी और बास हूऊऊऊ हूऊऊऊ की आवाज़ आ रही थी और अम्मी ने अपना दया हाथ भाई की थिएस पे रखा और पीछे को undefined करना चाहा पर भाई बी सही चौपाय लगवा रहे थे और अम्मी का सर पाकर दोनों हाथों से बोल रहे थे अम्मी चूसो न अपने बेटे का लूँ...अम्मी अब चीखने से बी रह गयी थी और नाना ऊपर नीचे से अब काफी रफ़्तार पाकर चुके थे और अम्मी की गांड और फुद्दी दोनों सोरकहो में अपने अपने मोठे लूँ घुसाई जा रहे थे अब त्रपना शुरू होगयी थी वो अपने दोनों हाथों से अहमद भाई को पीछे को undefined करना छह रही थी ता क वो चीख सके हमें रुकने का कह सके पर अहमद भाई बी मज़े में थे और सही डीप छुपा लगवा रहे थे अपने लूँ को और अम्मी की बीच बीच में सांस बी बंद होरही थी...तीनों सोरकहो में मोठे लम्बे लूँ लेकर अम्मी का जहाँ बुरा हाल था वही मेरा बी कुछ कम् नै था की मोती बुण्ड उफ़ जिसको देख पता नै कितनो ने आज तकक मुठ मरी होगी उस बून्द की टाइट रैगर आगे मैं बी सिसक रहा था और पूरी जान लगा कर अम्मी की मोती गांड चपड़ रहा था और सुछ में जो मंज़र देख रहा था ऐसा पहले कभी नै था देखा अम्मी साथ क अम्मी पहली बरी एक साथ तीन मर्दो क बीच थी और ये तीन मर्द उस की ज़िन्दगी में बुहत अहमियत रखते थे तभी तो एक साथ तीनों मर्दो साथ करने में राज़ी होगयी थी...कोई ७ से ८ मिनट्स गुज़र चुके थे और अब मैं और नाना पूरी तेज़ी क साथ अम्मी की गांड और फुद्दी मरी जा रहे थे एक साथ हमारे दोनों लूँ अम्मी की गहरायी में जाते तो अम्मी का पूरा जिस्म एक झटका खता और अंदर गांड की निचली सतह से मुझे नाना का मोटा लूँ बी कुछ कुछ जैसे फील होरहा था और जहाँ नाना फुल एन्ड तक्क अपना लूँ दाल रहे थे वही मैं बी अम्मी क मोठे चुतरर पाकर गहरायी तक्क छोड़ रहा था और पूरा बीएड हिल रहा था और अम्मी अपने हाथ चला हमारे चंगुल से निकलने को तरय कर रही थी और भाई बार बार अम्मी क हॉट्ज साइड कर बोल रहे थे अम्मी चोसे न आज हे तो मज़े की रात...अम्मी भाई को आँखे दिखा रही और आँखों से पानी बी बह रहा पर हम तीनो में से किसी पे कोई असर नै होरहा था और तीनों अपनी मस्ती में लगे थे और तभी मैं अम्मी क मोठे चुतरों को चोर आगे हो कर अम्मी क दोनों बाज़ू जिस से अहमद भाई को undefined करने की नाकाम तरय कर रही थी उन्हें पीछे कर अम्मी की बल कहती कर्तव्य गोरी कमर पे रख दिए जैसे पुलिस वाले मुल्ज़िम को हथकड़ी लगते पीछे हाथ कर क वैसे हे मैं किया और एक हाथ से अम्मी क दोनों हाथो को काबू कर अम्मी की गांड के करारे धक्के लगाना शुरू कर दिए और साथ हे अपने दूसरे हाथ से अम्मी क मोठे चुतरर पे थप्पड़ मरने लगा जिस से अम्मी को और ज़्यादा दर्द हो रहा था पर अम्मी क बास नै चल रहा था अब वो guuuuuuuuuuu guuuuuuuuuu की आवाज़ कर बोलने की कोशिश करती पर भाई का लूँ अंदर तक्क मौन क इन आउट होरहा था और अम्मी से कुछ बी बोलै नै जा रहा था बी नीचे से मस्ती में अम्मी क मोठे झूल रहे मम्मो को चूस रहे थे और नीचे से मेरे साथ रयथ्म बनाये ढके बी अम्मी की फुद्दी में लगा रहा था...१५ मिनट्स से ऊपर वक़्त गुज़र चूका था और हम दोनों भौ अपनी हुसैन की पारी अम्मी को नाना साथ मिल कर ठोकी जा रहे थे कमरा थप्प्प्पप्प थपप्पपपपप पछ्ह्ह्हह्ह पछ्ह्ह्हह्ह की आवाज़ से गूंझ उठा था पर अभी बी हम तीनों में से किसी ने अम्मी पे रेहम दिखाना शुरू नै किया था आज वो रात थी हे नै जब अम्मी की बात सुनी जाती पहली बारी तीन तीन शानदार मर्द अम्मी जैसे अप्सरा और गदरायी औरत को छोड़ रहे थे और अम्मी बास अपनी जवानी अपने बाप और बेटों पे वारी जा रही थी...अम्मी की गांड क सूराख की तिघनेसस इतनी ज़्यादा होती क उस रैगर को फील कस्र मेरी बीच बीच में आह्ह्हह्ह्ह्ह निकल जाती और मैं जोश में आकर अम्मी क मोठे चुतरों में थापर बी मरने लग परता धक्कों क साथ और अम्मी की कमर पे उनके पकड़े होअय हाथ बी बीच बीच में चुटी जा रहे थे क्यों क अम्मी बी मज़बूत आसाब की मालक खातून थी बुहत ज़ोर था उन् में बी...कोई ४ मिनट्स मज़ीद गुज़रे होंगे क भाई ने मुझे इशारा किया मुझे आँखों से तो मैं समझ गया और दो तीन करारे धक्के अम्मी की मोती गांड में मार एक दम्म से एक पाचकक की आवाज़ साथ लूँ बहार निकल लिया और जूनही लूँ का मोटा टोपा बहार निकला झटके से अम्मी की गांड का सूराख एक रिंग शेप में पूरा खुल चूका था और देख लग रहा था जैसे गांड का सत्यानास होगया हो क अम्मी की मोती गांड का सूराख इस से पहले इतना ज़्यादा शायद हे कभी खुला हो कहते है न माँ होती १० से २० सेकण्ड्स गुज़रे होंगे क अम्मी की गांड क सूराख ने क्लोज होना खुदी शुरू कर दिया और मुझे यही मैजिक लगता था जो क सिर्फ क एक माँ में हो सकता क इतने मोठे लूँ से गांड छुड़वा कर बी दोबारा गांड का ऐसे नार्मल होजाना ुंबलीवबले था और यही उन्हें सब से अलग बी बनता था क इस आगे में जिस में अम्मी थी औरतों की गांड वैसे हे ढीली पर जाती पर माँ पे तो जैसे जवानी हे अभी आयी हो...लूँ बहार निकल मैं बेडशीट से उसे साफ़ किया और अम्मी क सामने भाई की जगह पे वैसे हे घुटनो क बल हो फ़ौरन से गया तो भाई ने तब अपना लूँ अम्मी क मौन से निकला तो अम्मी खांसने लग पारी और सांस बहाल करने लगी और आँखों से पानी तो पहले हे बह रहा था फ़ौरन से अपने गीले चमक रहे मोठे लम्बे लूँ को ले कर मेरे जगह अम्मी क पीछे आगये और अम्मी को कुछ आईडिया नै होआ क एक दम्म से क्या होगया जो उनके लाडले बेटों ने अपनी पोजीशन एक्सचेंज कर ली आपस में तो सांस बहाल करने में लगी थी क्यों क भाई ने काफी देर तक्क और रफ़ तरीके से चौपा लगवाया था अम्मी से...अम्मी को होश तब आया जब एक दम्म से भाई ने पोजीशन संभाल अपना लूँ एक हे झटके में अम्मी की गांड में दाल दिया और अम्मी की एक ज़ोरदार चीख पोरे रूम में gunji,aaayyyyyyyyyyyyyyyyyyyiiiiiiiiiiiii mainnnnnnnnnnn marrrrrrrrrrrrrr gayyiiiiiiiiiii rabbbbbbaaaaaaaaaaaaa...ammi क चीखने से उनका मौन खोला फुल तो मेरे से अम्मी क फेस क जान लेवा एक्सप्रेशंस नै देखे जा सके और मस्ती में मैं ने बी अपने लूँ का मोटा टोपा अम्मी क होंठों पे लगाया जो क पहले हे खुल चुके थे और थोड़ा undefined कर उसे अंडरर कर दिया और पछहककक से मोटा टोपा अम्मी क मौन मर घुस गया और तब अम्मी का दहन मेरे पे गया और उनकी
बरी बरी आँखें और फैल गयी और ऊपर थोड़ा मौन कर मेरी और इल्तेजायी नज़रों से देखने लग पारी पर मैं बी जोश में था नीचे नाना और पीछे भाई तो हम तीनों मर्दों ने एक रयथ्म पकरि और डीएनए दानं शुरू होगये अम्मी की नशीली गदरायी जवानी को लूटने नीचे से अम्मी की फुद्दी में पोरे जोश से धक्के लगा रहे थे और उनसे ऊपर मैं ने बी अम्मी क सर दोनों सिदो से पाकर अपने दोनों हाथों से उनके मौन को छोड़ने लग प्र और टोपे तक्क लूँ बहार निकल मैं एक ढके साथ आधे से ज़्यादा लूँ अंदर घुसा डालता था और इस ला नतीजा ये निकलता क अम्मी खाँसना तो चाहती पर खांस नै प् रही थी दोनों हाथ मेरी फ्रंट थिएस पे मुझे पीछे को undefined कर रहे थे और हर धक्के साथ उनके गोर कोमल गाल फूलते जह मोटा लूँ अंदर जाता और उनके हलक़ को टच कर वापिस आता...पीछे से अहमद भाई बी किसी वेह्शी को तरह मौन बनाते ज़ोरो से अम्मी की मोती गांड पाकर मरी जा रहे थे जोशीले धक्को से साफ़ दिख रहा था क पिछले कुछ दिनों की दुरी जो उन को सहनी पारी थी अम्मी से दूर रहने की उसका सारा हिसाब निकाल रहे और पूरी मेह्नत्त साथ अम्मी की मोती गांड मर रहे थे...अम्मा को पूरा फेस आंसुओं और लूँ क थूक से भए चूका था पर मैं फिर बी अम्मी क मौन को छोड़ी जा रहा था और ऊपर देख मैं ऊपर वाले का फिर से शुक्र ऐडा कर रहा था क सुछ में तेरी कारीगरी अम्मी को देख लगता कमाल की है और ऐसी दूसरी कोई नै...एक मशरकी बा पर्दा हाउसवाइफ में बाक़िआ औरतों की तरह तीन हे सूराख होते पर पूरी ज़िन्दगी अक्सर ऐसे होता क वो बास अपनी फुद्दी क सोरकः की और से हे प्यार को महसूस कर पति खुली और डीएनए दानं शोहर शुरू और ३ से ४ मिनट्स बाद खलास लूँ चूसना गांड मरवाना ऐसी बातों को घरों की तहज़ीब दार औरतें ाचा काम नै समझती पर आज रात क इस पहर में इधर जो रहा था वो कोई बी देख सुन क यक़ीन नै कर सकता था अम्मी जैसी खातून क इस प्रो में अपने हे मायके में अपने दो दो जवान बेटों क साथ अपने सघे बाप से छुड़वा रही और वो बी इस बेदर्दी से...हम तीनों की आवाज़ें और आहों क साथ कोई सिसकियाँ सुनता तो उसे अंदाज़ा होजाता क हम तीनों किस क़िस्म क स्वर्गग में थे और ये स्वर्ग सिर्फ अम्मी की बड़ोलेट था...अम्मी पे तीनों तरफ से हो रहे वार को देख कर कोई बी यक़ीन नै कर सकता था क एक औरत में इतनी सेहन शक्ति हो सकती है क मौन को मैं अपने मोठे लूँ से छोड़ी तो जा रहा था पर अम्मी को बार बार सांस लेने में मुश्किल आ रही थी आँखें और ज़्यादा फैल चुकी थी और मौन से लगातार थूक मेरे लूँ पे लग रहा था और साथ आँखों से बेहटा नमकीन पानी सब में मुझे बजाए रेहम क जोश आने लगा और मैं नीचे अम्मी की आँखों में देख धक्के लगाने लगा और अम्मी लाख मुझे पीछे धकेलने की कोशिश करती रही पर मैं बी अम्मी क सर पे अपने हाथों की पाकर मज़बूत राखी...थप्प्प्प थप्प्प्प्प पछ्ह्ह्ह्ह पछ्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह्हह ुह्ह्हह्ह्ह्ह ये सब आवाज़े पोरे कमरे क माहौल को और चार चाँद लगा रही थी और आह्ह्हह्ह्ह्ह भरी सिसकियों की आवाज़ हम तीनों मर्दों की बीच बीच में निकल रही थी...७ से ८ मिनट्स मज़ीद ऐसे हे हम तीनों ने अम्मी क तीनों सोरकहो को जम्म क छोड़ा फिर मेरे शैतानी दिमाग़ में कुछ न्य करने का मैं आया तो मैं भाई की और इशारा किया तो भाई ने बी ४ करारे धक्के अम्मी की मोती टाइट गांड में मरे और फिर पचककककक क सठह अपना मोटा लूँ बहार निकाल लिया...तभी मैं बी अम्मी क मौन से ज़ोर लगा कर पीछे को एक झटके से लूँ बहार निकला तो अम्मी क मौन से धेरर सारा थूक और लार मेरे लूँ पे लग चुकी थी और मेरा लूँ पोरे जोश में तना होआ था और फुल चमक रहा था...लूँ मौन से निकला हे था क अम्मी ने मेरे हाथों की ढीली पाकर देख मुझे पीछे कर खांसने लग पारी और अपना मौन साफ़ कर लाल नशीली आँखों से मुझे देखने लगी और मैं बास मुस्करा रहा था क अब माँ भला क्या हिला कर सकती अचे से जानती तो है अपने लाल को...तभी नाना को बी इशारा किया तो उन्हों ने बी अम्मी की कमर क गिर्द से अपनर दोनों हाथ अलग कर लिए और अम्मी तब एक दम्म से उनके मोटे लूँ से उठी तो वही पचक्क्क्क कर क आवाज़ आयी और मैं हैरान था इतनी चुदाई क बाद बी अम्मी क दोनों सूराख इतने टाइट क आवाज़ कर रहे जैसे बोतल का ढ़क्कंन खुल रहा हो...अम्मी लूँ से उठ साइड को होगयी और अपने सांस बहाल करते होअय बीएड की दूसरी तरफ साइड टेबल पे पर जग में से गिलास में पानी दाल पीने लगी पूरी पसीने में भीगी लग रही थी इसी लिए शायद पानी पीया एक दम्म और मौन साफ़ कर जब पीछे देखा तो हम तीनो मर्द अपने मोठे तनय होअय लुणो साथ उन्ही की और देख रहे थे और अम्मी अभी बी सांसें अपनी ठीक कर रही थी और बोली कुछ नै तो मैं दोबारा से पहल करते होअय आगे होअय अम्मी की और बीएड से नीचे नंगा हे उतर अम्मी क सामने आया तो अम्मी अब मुझे देखने लग पारी जैसे पॉच रही हो क क्या करना है तो मैं अम्मी क दोनों कोमल हाथ पाकर उन्हें बीएड से खरा किया नीचे अम्मी की खरे होने में आह्ह्ह्हह्ह निकल गयी पर मैं उन्हें पहले तो खरा किया फिर अम्मी क चेहरे की और अपना चेहरा किया और उन्हें चूम लिया तो अम्मी लाल होगयी और मुझे ये देख ज़रा हैरानी नै होइ क इतनी बेदर्द रफ़ चुदाई क बाद बी उन्हों ने उफ़ तक्क न कहा और अभी बी लाल होरही थी...अम्मी और मेरा किश कोई ४० सेकण्ड्स चला क अम्मी ने होंठ अपने मुझ से चुरवाये और नटखट मुस्कराहट साथ मेरर गले में अपनी दोनों बाहें दाल प्यार से बोली अब क्या इरादा है तो मैं मुस्करा क बोलै इटादा तो बुहत नाइक है बास अपनी अम्मी जान को अपनी घोड़ में उठाना है तो अम्मी फिर से लाल होगयी तो मैं उनकी गदरायी नरम सफ़ेद कमरर क गिर्द अपने दोनों बाज़ू किये और अम्मी क मोठे चुतरों पे हाथ दोनों हाथ ले जा कर उन्हें सहलाया और अगले हे पल रक झटके क साथ मैं अम्मी की आँखों में देख इशारा कर उन्हें उठाया और ऐसे उठाया क ठीक उसी टाइम अम्मी बी ऊपर को उठी और सीधे मेरी कमर क गिर्द अपनी दोनों लम्बी टाँगे लपेट ली..इतना भरी वज़न जब एक दम्म से मेरे पे प्र तो मेरे पेरो थोड़े से डगमगाये पर मैं बी अपने पेरो की गीरप नीचे कारपेट पे सही से जमा राखी थी और साथ हे मैं ज़रा बी अम्मी क सामने लौ नै हो सकता माँ होने नाट्य उन्हें हमेशा फख्र होना चाहिए क कैसे मैं उन्हें संभालता हूँ और जैसे अभी संभाला...ये था क मैं अम्मी क यूँ ऊपर खुद से होने से थोड़ा सरप्राइज ज़रूर होआ था पर मैं बी उनके मोठे चुतरों नीचे हाथ दोनों दाल उन्हें सपोर्ट दे कर अब उठा लिया होआ था और अम्मी अब पूरी तरह से किसी बच्चे की तरह मेरी घोड़ में अपनी भरी शरीर साथ चर्र चुकी थी...अम्मी की दोनों बाहें मेरे गले में थी दोनों हाथ अम्मी क चुतरों क नीचे थे और अम्मी क मोठे मम्मी जब मेरे नंगे सीने क साथ डब्ब से गए तो एक पल क लिए आह्ह्ह्हह निकल गयी नरम निप्पल्स का एहसास अपने नंगे सीने पे महसूस कर मैं मस्त होगया था तो ऊपर से अम्मी का खूबसूरत चेहरा बिलकुल मेरे चेहरे सामने था और अम्मी की गर्म साने मुझे महसूस हो रही थी और हम दोनों माँ बेटे की आँखें बी चार होरही थी...नीचे मेरा लूँ महराज पोरे ताओ में था बास उसे कोई बिल चाहिए थी जिस में घुस सके और वो बिल बास कुछ इनचेस की दुरी पे थी...हम दोनों माँ बेटे आँखें चार कर एक दूसरे में खोए थे क तभी अम्मी ने आँखें झपटी अपनी और अपने पीछे गर्दन घुमा कर देखने लगी तो मैं बी देखा तो पीछे नाना खरे था जो अम्मी क साथ लगे उनके मोठे चुतरों को एक तरफ से सेहला रहे थे और अम्मी की बैक पे चूम रहे थे...अम्मी देख लाल होते बोली अब्ब्बूउ अह्ह्ह्हह्हह तो नाना बी छोटे छोटे चुम्बन अम्मी की नरम गदरायी बल कहती कमर पे किये और फिर मुझे इशारा किया रूम क एक कोने की और जहाँ ड्रेसिंग टेबल था वहां अम्मी को ऐसे हे ले चालू तो मैं बी वैसे हे अम्मी को उधर ले गया और अब हम तीनो ड्रेसिंग टेबल में लगे मिरर क सामने थे का भरी जिस्म मेरी मज़बूत बाहों में था और नाना उन् क पीछे लगे होअय था तभी अम्मी खुदी बोली पुतर्र यहाँ क्यों शीशे सामने ले आये तो नाना बोले मेरी लाड़ली नसरीन को अब हम दोनों एक साथ प्यार करे गए पर अम्मी समझ गयी क क्या होने वाला है तो थोड़ी शर्मायी ज़रूर पर तब तक्क मैं और नाना अपनी अपनी पोजीशन सही कर चुके थे...इन् सब क बीच अहमद भाई साइड पे खरे देख रहे थे क हम क्या करने लगे अम्मी क मोठे चुत्रोब को थोड़ा और ऊपर उठाया तो नाना ने बी पीछे से अम्मी क मोठे भरी चुतरों को पाकर सपोर्ट दी मेरे साथ और अब अम्मी क हैवी बहार को निकले चुतरों का वेट हम दोनों ने आपस में बाँट लिया था पर असल पल अब आने वाला था...अम्मी को थोड़ा और ऊपर उठा लेने से
मेरे तनय होअय लूँ को ऊपर को उठने की जगह मिल गयी और अब बिना लूँ को पकड़े मैं ऐसे हे अम्मी की गीली फुद्दी की और गाइड करना चाहा पर निशाना नै लग प् रहा था से नाना ने बी अम्मी क मोठे चुतरों को पहिला कर नीचे से अपना मोटा लूँ गांड क सूराख पे लगाने लग परे थे पर खरे खरे हम दोनों मर्दों का टारगेट नै बन प् रहा था तो अम्मी बी मुस्करा उठी जैसे तन्ज़िया मुस्कराहट हो हमें चरने वाली क एक ने अपनी माँ और एक ने अपनी बेटी को उठा तो लिया पर अब निशाना नै लगा प् रहे पर हम दोनों मर्द बी कच्चे खिलाड़ी नै थे हे मेरे लूँ का मोटा टोपा अम्मी की गीली फुद्दी क सोरकः ने जा अटका और तभी पीछे से नाना ने एक हाथ से अपने मोठे टोपे को गाइड कर अम्मी की गांड क सूराख पे लगा दिया...अब वो पल आज्ञा था जब अम्मी को खर्र खरे उठाये ये एहसाल दिलाना था क मर्दानगी क्या होती और मैं और नाना ने एक दूसरे की और देखा और आँखों क इशारे से एक साथ लम्बी सांस खींच और कस क धक्का आगे पीछे मार dala....aahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhgg mainnnnnnnnnnnnnnnnnnnnn marrrrrrrrrrrrrrr gayyiiiiiiiiiii lokoooooooooooooo uhhhhhhhhhhhhhhh abbbbbbbbbuuuuuuuuuu jeeeeeeeeeeeee हयईईई rabbaaaaaaaaaaaa ahhhhhhhhhhh putrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrr मेंनननननननन मरररररररर gayyiiiiiiiiiii...ammi की दर्दनाक चीख पोरे कमरे में गुंजी क्यों क एक साथ एक हे झटके में आगे पीछे से मैं ने और नाना ने अपना अपना मोटा लूँ अम्मी की फुद्दी और गांड में दाल दिया था और आधे से ज़्यादा लूँ पहले हे झटके में घुस गया और एक साथ दोनों तरफ से लूँ अंडरर जाने से अम्मीय बी माँ ऊपर कर आँखें बंद कर चीक उठी थी...अम्मी का पूरा बदन हिल चूका था और धक्के क साथ अम्मी क मोठे मम्मी मेरे सीने में और डब्ब से गए थे और अम्मी ने जो बाहें मेरे गले में डाली थी उनकी पाकर बी और मज़बूत कर ली...धक्का इतना जानदार था क अम्मी का मौन खुल चूका था पर अभी असल तूफान आने वाला था और नाना ने फिर से बिना कोई देर किये थोड़ा थोड़ा लूँ बहार निकला और फिर से एक शानदार झटके ऊपर को दे मारा जिस से हमारे मोठे लम्बे लूँ खरे खरे हे अम्मी की गहराईयों को नापना शुरू होगये थे...अम्मी चीख रही थी और उनकी आँखें फिर से पानी बहाना शुरू होगयी ठु और मेरी आँखों में देख मिन्नतें करने लग पारी क पुतररर नाहा ahhhhhhhhhhhhh मैंन नै सेहहहहहहह पनाआआ आह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ऊऊह्ह्ह्हह्ह होलीईई पुतररररररर जेईई हयईईई एनईईईईई तेज़ज़्ज़ज़्ज़ज़ नै अब्ब्ब्बूउऊउउउ जीईई uffffffffff ुह्ह्ह्हह्ह इतनेय्यययययय मोतीबी हैईईई ahhhhhhhhhhh...ammi दर्दनाक तरीके से चीखी जा रही थी और ट्रैप बी रही थी पूरा भरी बदन हम दोनों मर्दों की बाहों में झूल रहा था और उनके मोठे मम्मी मेरी छाती साथ रैगर खायी जा रहे थे...पचककककक पचककककक की कम्मं और थप्प्प्पप्प थप्प्प्प्प की ज़्यादा आवाज़ आ रही थी और उसकी वजह आगे से पीछे से उनके मोठे चुतरों साथ हर धक्के क साथ हमारी फ्रंट थिएस का लग्न था...अम्मी अपनी गर्दन पे कंधे पे रख ट्रैप सा रही थी और कभी राइट कन्धा तो कभी लेफ्ट और फिर नशीली गीली आँखों से जब मेरी आँखों में देखती तो मैं और जोश में आजाता ुर नीचे से पूरी जान लगा ऊपर को धक्के लगता अम्मी की टाइट फुद्दी में...अम्मी को सूची इस पोज़ में काफी दर्द सेहन करना पर रहा था पर माँ और बेटी का होने का पूरा फ़र्ज़ वो दिल ो जान से निभाए जा रही थी और हमारी बाहों में झूल रही थी और टर्पी जा रही थी की आँखों में देख मुझे एक अलग हे ख़ुशी मिल रही थी...५ से ७ मिनट्स तो अम्मी काफी दर्द भरी चीखें निकली पर फिर उन्हें बी मज़ा आने लग प्र दर्द क बीच हे और बास फिर अम्मी वैसे हे उछलते होअय हमारी गोदो(झोलियों) में मज़े से आहें बी भरने लगी वो बी इस पोजीशन में काफी कम्फर्टेबले लग रही थी और इतना एक्सपीरियंस जो था उन्हें तो ऑब्वियस था...साइड लगे शीशे में जब अम्मी देखती क क्या माज़रा दिख रहा और कैसे दो दो मोठे लम्बे मस्त लूँ उनके दोनों सोरखों में आगे पीछे से ड्रिलिंग कर रहे तो चीखों क बीच हे वो शर्म्म से लाल बी होगयी थी और होना लाज़मी बी बनता था क इतना भरी खातून होने क बावजूद वो ऐसे किसी गुड़िया की तरह दो मस्त मर्दो क बीच चारि होइ थी...काफी देर से भाई अहमद साइड पे खरे देख अपना लूँ मसल रहे थे क कैसे अम्मी हम दोनों क बीच फँसी होइ और हमारे लूँ उनको छोड़ने में बिजी...नाना अम्मी की गांड में कस कस क पीछे से चुतरर उठाये जब शीशे में देखा तो अम्मी क साथ उनकी नज़रे मिली तो दोनों मुस्करा दिए और अम्मी शर्मा सी बी गयी...नाना बोले हाय मेरी लाड़ली कितनी खूबसूरत लग रही उफ़ कितनी टाइट और गर्म है तू बेटी पीछे से बी तो अम्मी बोली आप की हे तो लाड़ली हूँ न अब्बू तो नाना को ये सुन जोश चढ़ा और ३ और कस क धक्के मरे तो अम्मी चीला उठी और शीशे में से हे वैसे हे देखते होअय बोली अब्ब्बूउ अह्हह्ह्ह्ह होलीईई न तो नाना पीछे से अम्मी की गदरायी गोरी कमर को चूमते होअय बोली हैएएइ बेटीई तेरी जावणीई आगे कैसे मैं धीरे हो सकता अह्हह्ह्ह्ह हईये राबबबबब आईसीई बेटीई सब को दे तो अम्मी मुस्करा दी और चीखें और आहें जारी राखी उन्हों ने...हम दोनों क मोठे लूँ फुल रैगर कहते आगे पीछे से अम्मी की फुद्दी और गांड में घुसी जा रहे थे और इतनी स्पीड से धक्के लग रहे थे क थप्प्प्पप्प थप्प्प्पप्प को आवाज़ पूरी गूँज रही थी और अम्मी का पूरा बदन हमारी बाहों में हिचकोले से खा रहा था...इतने भरी और घड़राये जिस्म की रैगर जब हमारे नंगे सीनों पे महसूस होती तो हमारी बी मज़े से ाः निकल जाती और बास मज़बूती से अम्मी को चुतरों से थामे लगे होअय थे क भाई बी हमारे क़रीब आगये तो अम्मी का छीलते होअय उन पर बी देहां प्र तो अम्मी चमकती आँखों साथ बोली कुछ नै पर फिर पीछे गर्दन मोर तेज़ी से धक्के लगते अपने बाप यानि नाना को बोली ahhhhhhhhhhhhh अब्ब्बूउउउउ अहमद को बी बारी दे न अह्ह्ह्ह तो नाना वैसे हे पसीने से भरे माथे साथ अहमद भाई की और देखा फिर बोले ahhhhhhhhhhhhh नसरीन बेटीईई अछाअअअअअअ....और ५ कस कस धक्के मारे और अम्मी क मोठे चुतरों को मसला और फिर पचककककक से ज़ोर लगते अम्मी की मोती टाइट गांड से अपना मोटा लूँ निकला और भाई की और इशारा किया क आओ अपनी माँ का पीछे से मोर्चा संभाल लो और शुरू होजाये माँ क तरफ अपना कर्त्तव्य निभाने क लिए...भाई तो पहले हे रेडी थे अपने तनय होअय लूँ क साथ तो नाना क साथ फ़ौरन से पोजीशन रेप्लस की और मैं बी थोड़ा हेल्प की और कुछ पल धक्के नै लगाए ता क भाई अचे से सेट होजाये अम्मी क चुतरों क पीछे...भाई ने बी मेरे साथ हे पीछे से अम्मी क मोठे बहार को निकले चुतरों को पाकर थाम लिया और अम्मी क मोठे चुतरों को थोड़ा पहिला कर अपना मोटा लूँ अम्मी की गांड क सूराख पे लगाया...मैं अम्मी को अपने बाहों में थामे भाई की और हे देख रहा था क वो आँखों से दोने करे तो एक साथ शुरू करे...भौ ने बी मुझे ग्रीन सिग्नल दिया आँखों से और हम दोनों भइओ ने एक लम्बी सांस खींची तो दे मारा एक कर्रारा धक्का आगे पीछे से अम्मी की फुद्दी और गांड में और अम्मी फिर से चीला उठी ahhhhhhhhhhhhh रबबाआआ हैएएइ meroooooooooo sheroooooooooo uhhhhhhhhhh....ab बाप और बेटे की जगह की दोनों बेटो ने ले ली थी और अम्मी दर्द और मज़े से कहा रही थी अह्ह्ह्हह्हह uhhhhhhhhhh mmmmmmmmmm पर मैं और भाई पहले बी अम्मी को अपनी घोड़ में सवारों करवा चुके एक साथ तो इस लिए अम्मी को पूरी रयथ्म में एक साथ धक्के सहने पर रहे थे तरफ से बेटो द्वारा इतना ज़ालिम तरीके का प्यार सेह कर अम्मी का पूरा बदन हिल रहा ठगा और शीशे में से साइड से जब बी देखती तो दो दो मोठे तगड़े लूँ उनके अंदर जाते दीखते तो अम्मी का शर्म से चेहरा लाल होजाता...कोई ६ से ७ मिनट्स बाद हम दोनों इतनी ठण्ड में बी पसीने में भीग चुके थे और वजह सिर्फ प्यारी अम्मी जान थी कर खरे खरे अम्मी को छोड़ना सब से डिफिकल्ट जॉब था पर हम दोनों बेटे बी माँ को देवी समझ पूरी खिदमत में लगे थे ज़ोरो शोर से...सूची में अम्मी की फुद्दी का वो एहसास वो कसाव लूँ क गिर्द अंदर महसूस कर मेरी बी बीच बीच में अह्ह्ह्ह या सिसकी निकल जाती और तब अम्मी मेरे चेहरे को बारे फखर से देखती और मुस्कराती चीखों और आहों क बीच बारे मैनी ख़ेज़ अंदाज़ से जतलाना छह रही हो क दुनिया की कितनी हे हसीनाओ को छोड़ लो माँ जैसा एहसास कहीं नै मिल पाना और सुछ बी था इतनी दमदार चुदाई क बीच बी मेरे लूँ पे अंदर से कसाव फील होरहा था नरम सा गर्म सा एहसास था क उफ्फ्फ और नतीजा यही निकलता क मैं और जोश में धक्के लगाने लग परता और अम्मी और चिलाती...
कमरे में माँ और उस क दोनों बेटो का संघम उरूज पे था और कमरा बी चीख चीख कर गवाही दे रहा था क ऐसा संघम पूरी दुनिया में कोई नै हो सकता जब अपनी हे कोख से जानने बेटे अपनी हे माँ की कोख को सुख पोंछा रहे हो और वो बी इतनी बेदर्दी से...१० से १२ मिनट्स मैं ने और भाई ने जम्म क अम्मी की फूडी और गांड दोनों बजायी और इस बीच अम्मी ने जोश में आकर मेरे कंधो पे दांतों क निशान बी लगा दिए होअय थे दर्द मरे पर उस वक़्त मुझे बी जोश और अम्मी क नशे की वजह से फील नै होआ कुछ...मेरे गले में बाहें डेल अम्मी ने हर धक्के साथ उछलती ोोेपर को और नाम आँखों से मुझे आहिस्ता करने का कहती और जब दोनों तरफ से दोनों बेटे अपने मोठे लुणो क वार करते तो छीकते और ऊपर वाले को याद करती क हैएएइ रबबाआआ मेंननननन मरररररररर gayyiiiiiiiiiii और मुझे बी काट'टी क शायद मैं रुक जाओं या स्लो होजाओं...जैसे दर्द बर्दाश्त करने क लिए दांत लगा कर पीसते वैसे हे अम्मी कर रही थी और कमर पे नाख़ून बी लग रहे थे पर मजाल थी जो मेरा जोश ज़रा बी कम् होआ हो...शीशे में से साफ़ दिख रहा था क कैसे दो दो मोठे लम्बे लूँ अम्मी क दोनों सोरखों में अंदर बहार होरहे थे और इतनी स्पीड क साथ रयथ्म बी काफी थी जिस की वजह से अम्मी का पूरा जिस्म ऊपर को उठ रहा था हर धक्के साथ...पोरे रूम ठप्प्प ठप्प्प की अव्वजों से गूंज रहा था और इसी बीचे साइड पे खरे नाना को देखा जो चमकती आँखों साथ मुस्करा क देख रहे थे क कैसे उनकी लाड़ली बेटी अपने दोनों शेर बेटों क बीच में पइसस रही और तगड़े धक्के सेह रही...नाना को देख मुझे बी एहसास होआ क अब नाना को मौक़ा देना चाहिए मैं काफी देर से लगा होआ हूँ तो मैं अम्मी क होंठों को चूमा मज़े से और उनकी ज़ुबान को मौन में लेकर चूसा और फिर नाना की और इशारा किया क आजाये मेरी जगह तो नाना बी ख्सुश होगये और फिर वही होआ कुछ ७ से ८ सेकण्ड्स क लिए अम्मी को छोड़ना बंद होआ और भाई ने अम्मी का कागि वज़न अपनी तरफ किया ता क नाना मेरी जगह सेट हो सके...और पचक्क्क की आवाज़ साथ अम्मी की फुद्दी से लूँ निकला जो फुल गीला और चमक रहा था अम्मी की फुद्दी क पानी से और अम्मी की फुद्दी का सूराख खुल सा गया था पर लूँ निकलते हे बंद होना शुरू होगया खुद से ने मेरी जगह संभाल ली और अपनी लाड़ली बेटी क भरी बदन को अपनी बाहों में ले लिया और अम्मी बी पूरी चिपकक गयी नानं क गले में दाल ली और टाँगे नाना की कमर क गिर्द कर ली फिर नाना ने बी फुद्दी क सूराख पे लूँ लगाया और बास पचककककककककक कर लूँ घुसा डाला और फिर से शुरू होआ अटूट बंधन माँ बेटे और बाप का...अब मैं खरा था साइड पे और देख रहा था सामने का मंज़र क कैसे नाना और भाई अहमद अम्मी को आगे पीछे से जम्म क छोड़ रहे...मैं अम्मी को इतनी देर उठाये रखा था इसी लिए पसीना काफी आज्ञा था तो वही ा.स की ठंडी हवा में सूखने लगा और बास कानो में थप्प्प्प्प थप्प्प्पप्प क साथ अम्मी की चीखने की आवाज़ें रस घोलने लगी...७ से ८ मिनट्स मज़ीद नाना और भाई ने अम्मी को छोड़ा खरे खरे क अम्मी एक दम्म से चीला क बोली अब्ब्बूउउ मुझे पेशाब आया है आह्ह्ह्हह उतरो नीचे साथ नाना और भाई बी मुस्करा दिए क इतनी चुदाई से कहीं अम्मी उधर हे न मूट दे दोनों की घोड़ में इसी लिए नाना ने भाई को इशारा किया क चोर दो और पचककककक पचक्क्क्क की आवाज़ आगे पीछे आयी और दोनों लूँ निकले और अम्मी नीचे उत्तरी और जूनही उनके पाऊँ ज़मीन पे लगे तो एक दम्म से जब अपने भरी बदन का वज़न डाला तो उन् से खरा नै हो पाया तो भाई ने सहारा दिया और फिर अम्मी लरखरते होअय वाशरूम की और भागी और हम तीनों मर्द हंस दिए और अम्मी हमारी हंसी सुन शर्म्म से पानी पानी होगयी और अपने मोठे हिचकोले कहते चुतरर हिलाते वाशरूम की और नंगी गयी और दूर क्लोज कर लिया...हम तीनो मर्द अभी बी मुस्करा रहे थे और एक साथ खरे थे क मोठे लम्बे लूँ फुल तनय होअय थे...हम तीनो पीछे लगे सोफे पे बेथ गए यही सोच सोच मुस्करा रहे थे क अम्मी जैसी खातून को मूतने पे मजबूर कर दिए क़दर जम्म क चुदाई होइ थी अभी टककक...कोई ५ मिनट्स बाद दूर खुला वाशरूम का और अम्मी लरखरते होअय बहार आने लगी और हम तीनो मर्द एक साथ एक दम्म से ऐसे खरे होअय जैसे क्लास में कोई प्रोफेसर आये तो स्टूडेंट्स एक साफ फ़ौरन से खरे होजाते...अम्मी हमें खरा होते देख पानी पानी होगयी शर्म से फिर से क तीन तीन चाहने वाले तगड़े मर्द उनके लिए खरे होअय अपना अपना खरा किये होअय...अम्मी लरखरा रही थी थोड़ा पर अभी तो शुरुआत थी क बाल अभी तक्क ऊपर बंधे होअय थे ज़ुरा जैसा कोय होता है...मोठे मम्मी और गोरा बदन उफ़ अम्मी खरे होअय बी हम तीनो को अप्सरा लग रही थी स्सेधे आकर बीएड पे बैठी नंगी हे और साइड पे परे जग में से गिलास में पानी दाल पीने लगी और पूरा गिलास पानी पी डाला...ऑब्वियस था का इतना कुछ सहने पे प्यास तो लगनी और साथ इतना चीखी जो तो गाला बी सूख जाना था तीनो बी किसी रोबोट की तरह अम्मी क सामने चले गए और अम्मी जब पानी पी कर ऊपर देखा सामने तो तीन तीन मोठे लम्बे लूँ उनकी आस में थे अंदर हे अंदर खुश तो थी पर एक घबराहट उन के चेहरे पे थी जिसे देख हमें बुहत ाचा लग रहा था...इस बारी मेरे शैतानी दिमाग़ में कुछ न्य आया तो मैं नाना और भाई को बोलै बीएड पे सीधे लेत जाये एक साथ तो वो मेरी और सवालिया नज़रो से देखे पर मैं हामी भरी क लेते तो बी मेरी और अजीब नज़रो से देख रही थी बीएड क एक साइड थी और नाना और भाई दूसरी और से बीएड पे टाँगे बिछा कर सीधे लेत गए मोठे लूँ ऊपर चाट की और मौन कर खरे थे जैसे सलामी देने वाले हो हवाई फायर कर क...अम्मी को बोलै क अम्मी उठे ज़रा तो अम्मी उठो और सीढ़ी बीएड से नीचे खरी होगयी तो मैं अम्मी को आगे होकर चूमा और धीरे से उनके गाल सहलाते होअय कान में बोलै कुछ तो अम्मी मेरी और हैरानी से देखा थोड़ा फिर कुछ नै बोली तो मैं बी साइड से होकर उनका एक मोटा नरम मां दबा कर शैतानी से बीएड पे चार कर लेत गया क साथ...अब सन कुछ यूँ था क बीएड पे हम तीनो मर्द सीधे लेते होअय थे और हमारे हथियार हवा स बातें कर रहे थे और फुल एकराय होअय नसाय(वेइन्स) तक्क दिख रही थी में नाना था दूसरी पर अहमद भाई और अम्मी की साइड मैं था लेता होआ तीनों मर्दो क बीच आधे फ़ीट का गैप था...तीनों क सर क नीचे तकिये थे और तीनो मर्दो को नज़रे एक हे हसीना की और थी और वो थी अम्मी मेरी प्यारी अम्मी जान...अम्मी थोड़ा हिचकचाई पर उनका हिचकचाने बनता बी था तीन तीन मोठे तनय होअय लूंण उनके सामने अजीब पोजीशन में थे...मैं अम्मी को पॉज लेते देखा तो मैं उन्हें आँख क इशारा से ेंसुरे करवाया क आ बी जाये सब ठीक है तो अम्मी बीएड पे चारि मेरी और से तो उनके भरी मम्मी झूलते नज़र आये हिलते होअय और अम्मी पहले हम तीनों की नज़रों में देखा और हम तीनों की आँखें चमक से भरी पारी थी ऐसे जैसे जन्नत का खज़ाना मिलने वाला हो कोई और हम उस क दरवाज़े पे खरे हो और वेट कर रहे हो...अम्मी अपनी शरीर साथ सब की और देखने क बाफ मेरी और मुतवज्जा होइ और मेरी आँखों में देख अम्मी मुस्करायी और ये पहली बार था क वाशरूम से आने क बाद अम्मी क चेहरे पे मुस्कराहट आयी हो...अम्मी मेरी कमर किरद गिर्द टाँगे कर मेरे ऊपर चर्र गयी मेरी और चेहरा कर और उनके झूलते मम्मी देख मेरे उतावले पत्र में और अज़फ़ा होगया आउट मैं सर उठा क आगे को देखने लगा क क्या होने वाला और अम्मी मुझे यु मुस्कराते देखा तो मेरी गाल पे थापर मारा हलके से और लाल होते बोली बदमषः तो मैं हंस दिया...अम्मी की गोरी फुद्दी क लिप्स मैं अपने मोठे टोपे पे टच होते देखे तो अम्मी ने एक हाथ नीचे कर लूँ का मोटा टोपा अपनी फुद्दी पे लगाया और नीचे को थोड़ा दबाओ बढ़ाया तो फुद्दी क लिप्स खुले और मेरे मैं से बास यही निकला ववव क यही जन्नत का दरवाज़ा और ऐसे हे खुलता है...अम्मी की नज़रे मेरे चेहरे पे तिकी होइ थी और अपना पूरा एक्सपीरियंस दिखते होअय मेरे मोठे टोपे को फुद्दी क दूर पे लगा क थोड़ा रगड़ा जैसा तंग करना छह रही हो तो मेरी नज़रे फुद्दी से हट कर ऊपर अम्मी क चेहरे की और पारी तो अम्मी मुस्करा दी जैसे नटखट स्माइल तो मैं मौन बनाया जैसे कहना छह रहा को अम्मी न तर्पये तो अम्मी रज़ामंदी ज़हर कर प्यार से मेरी और देख अपना वज़न नीचे को डाला और पचककककक की आवाज़ आयी जब मोटा टोपा अंदर घुसा और साथ हे उनके मौन से एक सिसकी क साथ चीक बी निकली और मेरी बी मज़े से ाः निकल गयी और मैं एक हाथ आगे बढ़ा कर अम्मी क मम्मी पे टच किया राइट वाले पे तो अम्मी ने मेरे हाथ पे थापर मार हलके से आँखें दिखाई जैसे
बताना छह रही हो क ये नै डीडे होआ था अभी थोड़ी देर पहले...अभी थोड़ी देर पहले मैं अम्मी क कान में यही कहा था क अम्मी बारी बाजरी से हम तीनो की सवारी करे गई और हम सीधे लेते रहे गए हाथ नै टच कर गए...अम्मी क मरने पे मैं मुस्कराया तो अम्मी बी मुस्करायी और मैं दोनों हाथ नीचे सीधे लिटा दिए और अम्मी क हाथ में साडी कमान दे दी क अम्मी यू'रे थे कप्तान ऑफ़ थे शिप नाउ...अम्मी ने टोपा तो घुसा लिया पर थोड़ा पॉज ले रही थी और फिर मेरी आँखों में देख धीरे धीरे नीचे होने लगी और मेरा मोटा तगड़ा लूँ आहिस्ता आहिस्ता उनकी फुद्दी में ग़ायब होने लगा...आधा लूँ गया था क अम्मी ने धरमममम से से वेट दाल दिया नीचे और एक चीख ज़ोरदार उनके मौन से बरामद होइ ahhhhhhhhhhh हयईईईई putrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrr और साथ हे आँखें दर्द से बंद होगयी उनकी...मेरे बी लूँ की स्किन क गिर्द जब अम्मी की इनर फुद्दी का नरम और टाइट एहसास होआ मेरी बी एक मज़े से सिसकी निकल गयी अह्ह्ह्हह ammmiiiiiiiiiii....mera पूरा लूँ जरर टककक घुस चूका था और अम्मी की आँखें अभी बी बंद थी से १५ सेकण्ड्स क पॉज क बाद अम्मी ऊपर नीचे अपने मोठे चुतरों को हिलना शुरू होइ और मेरा मोटा लूँ कभी मुझे नज़र आता कभी नै आधे लूँ जितना हे मेरा लूँ बहार निकलती और फिर से नीचे होजाती और इस बीच अम्मी ने बैलेंस अपना बनाये रखने क लिए मेरे सीने पे दोनों हाथ रखने की बजाए अपने घुटनो पे रख ऊपर नीचे होने लगी और मैं मस्ती से ाआहें भरते अम्मी की और देखने लगा...अम्मी क मोठे मम्मी हिलने लगे उनके मेरे लूँ पे उछलने क साथ साथ और मैं बास उन्ही को देखने लगा और हर धक्के साथ अम्मी क खूबसूरत चेहरे क चेंज होते एक्सप्रेशंस बी मुझे और जोश दिला रहे थे और अब अम्मॉ ने बी हाफ से ज़्यादा लूँ अंदर बहार लेना शुरू के दिया था और सिसकियों क साथ चिलायी बी जा रही थी ahhhhhhhhhhh putarrrrrrrrrr उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ रब्बबाआ ैंआआआ मोटाआ ैय्यियय ुह्ह्हह्ह ममममममम...अम्मी जैसी खातून क लिए यु घुटनो पे हाथ रख पेरो क बल मेरे लूँ की सवारी करना आसान नै था पर अम्मी अपना पूरा एक्सपीरियंस दिखते होअय अपने लाडले को जन्नत की सैर करवा रही और मैं बी मज़े में बीच बीच आँखे बंद कर लेता और फील करता अपने लूँ को अम्मी क अंडरर से ४ मिनट्स होअय होंगे क अम्मी अब अपना हुनर दिखाना शुरू हो चुकी थी लूँ क मोठे टोपे तक्क वो ऊपर को आती और ध्रम्म से नीचे वज़न दाल देती और थप्प्प्पप्प क सठह पछ्ह्ह्हह्ह्ह्ह की बी आवाज़ आती...अम्मी क मोठे चुतररर नीचे से मेरी थिएस साथ टकराते तो बुहत हैवी क़िस्म की आवाज़ आती का पूरा बदन हिल रहा था और मैं उनके माथे पर आ रहे पसीने देख समझ सकता था क अम्मी क लिए ये पोज़ कितना डिफिकल्ट है हे उनके घुटने इतने जानदार नै क उनका भरी वज़न सही से सेह सके ऊपर से यूँ वाशरूम में बैठने वाले पोज़ मेरे लूँ की सवारी करना आसान बिलकुल नै था...अम्मी पे मुझे बेशुमार प्यार आ रहा था क सुछ में माँ से भर्र कर कोई नै इस पूरी दुनिआ में...अम्मी अब मौन खुले छीलते होअय मेरे लूँ पे उछाल रही रही और उनका पूरा बदन हिला रहा था और मैं जैसे मेस्मेरिजे हो रहा था....अम्मी और मेरे में कुछ तो बात थी जब बी हम एक दूसरे में क साथ होते यु तो इर्द गिर्द की दुनिआ को भूल हे जाते और ऐसा हे कुछ अभी होरहा था और भाई क तरफ दहन हे नै जा रहा था और तभी मेरा जब देहां गया तो मैं नाना और भाई दोनों अपने अपन लूँ को सहलाते होअय हमारी और हे देख रहे थे तो मैं बी स्माइल पास की पर वो दोनों बी उतावले हो रहे थे और होते बी क्यों न अम्मी जैसे खातून का वेट जो कर रहे थे...५ से ६ मिनट्स मैक्स होअय होंगे क मैं अम्मी को साथ लेते नाना की और इशारा किया तो अम्मी थोड़ा रुकी और नीचे आगे को झुक कर मुझे किश करते बोली putarrrrrrrrrr बहततततततत मोटाआ हैईईई अह्हह्ह्ह्ह की तरफ से यूँ तारीफ सुन रहा नै गया पर हाथ टच नै कर सकता था...अम्मिणे मुझे चूमा और पाचकक की आवाज़ साथ मेरे लूँ से उठी तो मेरा मोटा लूँ ऐसे चमक रहा था जैसे किसी ने चमका दिया हो और चमकाने वाली और कोई बाई अम्मी थी....अब अम्मी मुझ से हटी और नाना जो क मेरी साइड लेते थे बीच में उन् क ऊपर चारि और टाँगे इधर उधर उनकी कमर क गिर्द कर क पेरो क बल होइ और नाना की तरफ देख थोड़ी कमांडिंग नेचर में बोली अब्बू हाथ नीचे हे रखने और साथ हे शर्मा सी गयी की ये ऐडा देख न सिर्फ नाना ने ाःह भरी बल के मैं ने बी क कैसे एक बेटी बाप को हुक्म सा दे रही...नाना बदले में मुस्करा क बास इतना हे बोले क जो हुक्म मेरी लाड़ली का और अम्मी फिर मुस्करा दी किसी क़ातिल हसीना क जैसे और पोजीशन सेट कर नाना क लूँ को अपनी फुद्दी पे सेट कर ध्रम्म से नीचे और साथ हे चीख परीईई ahhhhhhhhhhhhh abbbbuuuuuuuuuu jeeeeeeeeeee और नाना बी सिसक उठे ufffffffffff मेरिइइइइ लाडलीयई nasreennnnnnnnnn और फिर अम्मी ने थोड़ा ऊपर हो पूरा वज़न दाल दिया और पूरा लूँ नाना क अम्मी की फुद्दी में और दोनों बाप बेटी सिसक उठे फिर से और बास फिर अम्मी बी नाना की सवारी करने लगी पूरी हिम्मत से और नाना बेबस से लेते बास मज़े ले रहे थे अपने लाड़ली द्वारा अपने मोठे लूँ पर उछलने की वजह से और अम्मी अपना पूरा एक्सपीरियंस दिखते होअय अपने बाप को पूरा एहसास दिला रही थी क उन्हों ने कितनी बरी ग़लती कर दी जो उनकी जगह नाना ने खला समरीन को प्रेफर किया उनकी जवानी से अभी तक्क...नाना मज़े में थे और अम्मी पूरी मेह्नत्त से उछाल रही थी और उनके मोठे मम्मी उछलते देख हम दोनों भइओ को बी जोश आने लगा और तभी कोई ४ से ५ मिनट्स होअय होंगे क अम्मी को इशारा मेरा दिख गया क अब भाई अहमद की बरी जन्नत की सैर करने की तो अम्मी नाना को देख बोली अब्ब्बूउऊउउउउउ जेईईई और इतना कह बास अम्मी ऊपर को उठह्ह गयी और नाना का लूँ उनकी गुफा से निकल गया और अम्मी फ़ौरन से साइड को मज़ीद होकर भाई अहमद क ऊपर आगयी और नाना ऐसे जैसे एक पल में किसी ने ाआसमाँ से ज़मीन पे ला पट्खा हो समझ सकता था उनकी सिचुएशन क्यों क कुछ पल पहले मेरे साथ बी शामे होआ था उन्हें आँखों से तसली दी टमवो मुस्करा दिए और साइड पे तब टककक अम्मी ने अहमद भाई क लूँ ऊपर बी उछलना शुरू कर दिया होआ था और भाई मज़े स सिसक रहे थे और अम्मी मज़े और दर्द भरे एहसास साथ चिलए जा रही थी ahhhhhhhhhhh अहमददददददद पुतरररर्त्तत्त uhhhhhhhhhh मम ममममममममम....मैं टाइम सामने लगी घरी से नोट कर रहा था और अम्मी का बी ख्याल कर रहा था क उनको ४ से ५ मिनट्स का हे एक एक राउंड कर क सवारी करने परे वर्ण मुश्किल होजाता उनके लिए इतने भरी जिस्म साथ भाई को बी अम्मी ने अपनी मखमली गर्मं नरम और टाइट जन्नत की सैर करवाई और फिर अहमद भाई क ऊपर स्व बी उताररर गयी...१३ से १४ मिनट्स सभी लुणो की सवारी करने क बाद अम्मी हांफ रही थी और हम तीनों मर्द अभी बी उतावले थे दोनों मर्दो को कुछ सेकण्ड्स रुकने को कहा क अम्मी संभाल जाये थोड़ा सा...अम्मी बीएड क एक साइड बेतहु थी और जब सांस संभली तो पीछे मुर कर देखा तो हम तीनों मर्द बीएड क ऊपर हे खरे थे और हमारे सर ऊपर वाली चतत्त से थोड़ी हे दूर लग रहे थे जहाँ पे पंखा था जब फिर से देखा हम तीनो को तो अपने माथे का पसीना साफ़ किया तो इस बार मेरे बोलने से पहले हे नाना बोल परे बेटी नसरीन इधर कर घोरी बन तो अम्मी थोड़ी हिची ज़रूर पर बाप का कहना था कैसे नै मानती...अम्मी किसी तरह हम तीनो क सामने आकर अपने भरी जिस्म साथ घुटनो क बल गोरी बन गयी और सामने दोनों अपनी कुहियो नीचे तक्किय कर लिया और जब झुकी सही से अम्मी की विशाल गांड क चुतररर बहार को निकल आये उफ्फ्फ मेरे साथ नाना और भाई ने बी ठंडी आह्ह्ह्ह भरी अम्मी की मोती गांड देख और अम्मी जो क थोड़ी देर पहले हांफ रही थी अब फिर से अपने अप्सरा वाले रूप में आ चुकी थी और बिना पीछे देख सर आगे से ज़्यादा झुका लिया तकिये पे और इस से उनके मोठे चुतररर और फैल कर बहार निकल आये और तभी अम्मी ने केहर ढाया अपने चुतरों को पीछे से हिला कर जैसे कोई भैंस अपना पिछवारा हिला कर सांड को प्रोवोके(उकसाना) करती वैसे हे अम्मी ने अपनी मोती गांड हिलायी तो उनके मोठे चुतरर आपस में ठप्प्प थप्प्प्प कर टकराये और वो सुरीली आवाज़ हम तीनो क लुणो को खूब भाई पर मसला अब ये बन रहा था क कोण पहले जाये मेरी प्यारी अम्मी जाएं का क़िला फ़तेह करने तो नाना मेरी और इशारा कर बोली अली पुतररर देख तेरी माँ क चुतरररर वाले ने तेरी माँ को बना कर अपनी कारीगरी इस मामले में ख़त्म कर डाली क तेरी माँ जैसी और नै होगी कभी...सीक्वेंस वाइज बी मेरा हे नंबर बनता था तो मैं अपने लूँ को हाथ से हला शेरी दी क शेरर लूँ देख
तेरी मंज़ल तेरी एक आँख सामने है जा और फ़तेह कर ले जाने की बात तो डीडे होगयी पर किस होल में करना ये नै डीडे होआ और ना टाइम लिमिट तो नाना बोले मोती गांड को थोक दाल अली पुतररररर तेरी बड़ोलेट हे तो आज नसरीन का ये फल हम बी चखः रहे...नाना की बात सुन मुझे समझ आयी क नाना मुझे सारा क्रेडिट क्यों दे रहे क्यों क अम्मी की मोती वर्जिन गांड की सील खोलने वाला मैं था हे अहमद भाई बोले एक एक मिनट्स का राउंड और दिखा देना कितना दम्मम... मैं दिल में सोचा क यही मौक़ा है तो मैं नीचे लूँ की और देखा तो लूँ ा.स की ठण्ड की वजह से ड्राई हो चूका था तो मैं आगे होकर बजाए घुटनों पे आने क मैं पेरो क बॉल हे नीचे झुका अम्मी की मोती गांड पे और अम्मी को कुछ आईडिया नै था पीछे कोण पर जब नाना मेरा नाम लिया तब समझी क उनका लाडला है उनकी मोती गांड का असल वारिस....मैं थूक अकथा करा अपने मौन में सुर जब अम्मी क मोठे चुतरों को पहिला कर गांड का टाइट सोरकः दिखा तो यक़ीन नै आ रहा था क अभी कुछ देर पहले आधा घंटा घोड़ में उठा कर बरी बरी से गांड मरी थी...लूँ का मोटा टोपा गांड क सोरकः पे लगने की देर थी क मैं मौन में अकथा किया थोक नीचे फेंका जो सीधा लूँ क टोपे पे जा लगा और थोड़ा गांड को सोरकः पे लूँ क टोपे को बास उस थूक से थोड़ा बुहत चिकना किया और बास दोनों मोठे फैले होअय चुतरों को थाम दोनों हाथों से मैं अपनी सांस खींच एक लूँ क मोठे टोपे पे दबाओ बढ़ाया और लूँ क दबाओ से गांड का टाइट सूराख थोड़ा खुला तो मैं देख पागल हे होगया और एक कस्सस क धक्का दे मारा और लूँ आधे से ज़्यादा अंडरर्ड्र्र अम्मी ज़ोरदार चींईख क साथ बोली ahhhhhhhhhhh मेरिइइइइइइ बूंदडडडडडडड ालईईईई पुतरररररर पर अब वो मौक़ा या पल नै था जब कोई बी पुतर्र अपनी माँ की बार सुनता मिल चूका क १ मिनट का राउंड बॉस तो मैं नै देखा कुछ और थोड़ा लूँ बहार खींच करारा धक्का दे मारा और अम्मी की टाइट मोती गांड को चीरता लूँ एन्ड तक्क जा पोहंचा और अम्मी पागलो जैसे चिलाना शुरू कर दिया और आगे को जैसे उल्टा हो क रेंगते वैसे करना छह पर मेरे हाथों की गृप उनके चुतरों पे मज़बूत थी काफी तो वो मेरे नीचे से नै निकल सकीय...ऐसे था जैसे मैं उनके ऊपर झुका होआ पेरो क बल और धक्के बी मेरे ऊपर से नीचे को थे उनकी मोती गांड me....ahhhhhhhhhhhhh uhhhhhhhhhh ममममममममम हयईईईई putarrrrrrrrrr merriiiiiiiiii bundddddddddddddd ahhhhhhhhhhhh rabbaaaaaaaaaaaaaaa ुह्ह्ह्हह्ह्ह्ह....अम्मी की दर्दनाक चीखे इतनी ज़्यादा थी क मुझे बी दर लगने लग प्र क बहार कोई सुन न ले पर मैं फुल फोकस गांड चुदाई पे करते होअय डीएनए दांण गहरे धक्के लगता गया और वो एक मिनट्स अम्मी पे इतना भरी परे गए अम्मी ने सोचा नै था थप्प्प्प्प की आवाज़ तो ऐसे आ थी अम्मी क मोठे चुतरों से टकराने पे जैसे कोई म्यूजिक बीट्स बज रही हों...मैं पागलो जैसे ढके पे धक्का उफ्फ्फ किसी इंजन क पिस्टन जैसे लगा था और फाइनली एक मिनट होने वाला होआ तो मैं और वेह्शी बन्न गया और तेज़ी से अम्मी की मोती गांड मरी जाने लगा और तभी मैं टाइम देखा और खरचहहहहहह कर क जैसे खंजरर किसी क अंदर से निकलते वैसे लूँ अम्मी की मोती गांड क सोरकः से निकला तो अम्मी की गांड का सोरकः पूरा रिंग शेप में खुला था और अंडररर अँधेरा दिख रहा था गहरायी तक्क जैसे पता नै कोनसी गुफा हो...मैं सोचा था कुछ पल अम्मी सांस ले गई इतनी ज़ालिमाना गांड चुदाई से पर मुझे शॉक तब लगा जब मेरा लूँ निकलने की देर थी क नाना पीछे से आगे होअय और मुझे साइड किया और इस से पहले अम्मी की गांड का सोरकः बंद होता या अम्मी आगे को गिर पार्टी हांफने खातिर उन्हों ने अम्मी क मोठे चुतररर पाकर अपना मोटा लूँ अम्मी क बंद होते गांड क टाइट सोरकः पे लगा एक कस्सस क धक्का दे मारा और अम्मी फिरररर से chilayiiiiiiiiiii aaaaaaaaaaaaayyyyyyyyyyyyyiiiioo uhhhhhhhhhh पर नाना बी पोरे महार थे उन्हों ने बी मुझे कॉपी करते दर्दनाक तरीके से अम्मी पे काबू करते अम्मी की मोती गांड मरते गए और अम्मी चिलाती गयी और नाना क ोूपर से नीचे को लगाए गहरे करारे धक्के सेहती गयी नाना क गुर्राने पे अम्मी बिना फेस पीछे किये समझ गयी क नाना है तो अब्ब्ब्बूउऊउउउ जेईईईई अब्ब्ब्बूउऊउउउ जीईई ahhhhhhhhhhh ुह्ह्ह्हह्ह कर क बहततततत चिलायी पर सब बे सूद ने बी काफी दम्म दिखाया पर मेरे जितना कहा....१ मिनट होआ क शामे जैसे नाना किये मेरे साथ अहमद भाई बी नाना क पछ्ह्ककककक कर क लूँ निकलते हे उनकी पोजीशन संभाल ली और अम्मी को फिर संभालने का मौक़ा नै दिया और गांड में लूँ दाल मोती गांड ठोकने लगे...ये क्विक चुदाई देख कोई नै कह सकता था क नीचे पारी सब सेह रही औरतट ज़िंदा है इतनी बेदर्दी से छोड़ रहे थे और ग़ज़ब ऊपर से ये क १ १ मिनट क राउंड एक क नाद एक लगते गए हम तीनो और अम्मी तकिये में मौन दे तकिया अपने आंसुओ से गीला करते चिलाती गयी और रोटी गयी पर हम तीनों मर्द बी कहाँ बाज़ आये ४ राउंड लगाए ऐसे हे उस कर्कटी ठंडडड में और अम्मी की गांड का सत्यानास जैसे कर दिया हो अम्मी हमारे चुंगुल से निकलने की बुहत तरय की पर उनका पला मर्दो से पारा होआ था तीनो ऐसे जैसे एक रौ में आगे पीछे खरे हो अपनी अपनी बरी पर अम्मी की गांड की डॉजियन उरई जा रशे थे...१२ से १३ मिनट्स की दर्दनाक गांड चुदाई क बाद जब आखिर में नाना हटाया गांड से लूँ निकल कर तो अम्मी ध्रम्म से आगे को पसररर गयी और उलटी लौट गयी उनकी गांड का सोरकः फुल खुल चूका था और अम्मी क आंसुओ से पूरा तकिया गीला हो चूका था और उनके हाथों की पाकर बेडशीट पे उफ़ अम्मी रट आंसू बहते साँसे संभालने लगी....कितनी मिन्नतें और रेहम की भीखे मांगी होगी इन् पिछले १२ से १३ मिनट्स पर मजाल थी जो हम तीनो पे कोई बी असर की हो...गांड चुदाई क बाद हम तीनों मर्द बी बीएड से नीचे उताररर पानी बरी बरी पीने लगे क्यों क हम तीनो बी पसीने से भीग चुके थे इतनी देर में...ऐसे था जैसे तीनो पहलवान रिंग से फाइट कर क बहार निकले हो बास फरक इतना था क मैच अभी एन्ड नै होआ था...अम्मी उलटी लेती अब रोना तो बंद कर दी थी पर सिसक रही थी और लम्बी साँसे ले रही थी बीच इस तरह की ढेर २ मिनट्स की ब्रेक से हम तीनो बी खुद पर कण्ट्रोल कर प् रहे थे नाना...पर अभी कहाँ तूफान थमा था सीढ़ी होइ कहते होअय तो तकिया गीला साइड किया तो नाना आगे होकर अम्मी को चूमा तो अम्मी का रिएक्शन देख हम तीनो हैरान रह गए क अम्मी बी किश का जवाब दिया बेदर्दी से होइ गांड चुदाई क बाद बी अम्मी ने ज़रा घील नै किया जिस से हमारा हौसला बी बढ़ा और मैं नाना को इशारा किया और नाना ने अम्मी को अपनी बाहों में लेकर बीएड पे नीचे सीधा लेते और फिर से अम्मी को अपने मोठे लूँ पे बिठा डाला बरी फुद्दी में लूँ डाला और फिर अम्मी को चूमते दिलासा देते हाथ से मुझे इशारा किया और मैं पीछे से मोती विशाल चुतरों वाली गांड में घुसस्स गया अम्मी की और डीएनए दानं शुरू होइ फिर से घमासान चुदाई बारी से कभी मैं गांड मरता कभी भाई कब्बी नाना और कभी मैं नीचे फुद्दी में घुसा होता कभी चौपाय लगवा रहे होते...कभी सीधा लिटा कर बारी बारी फुद्दी को या अम्मी क मौन को छोड़ते का बुरा हाल था पर मजाल थी जो उन्हों ने हिम्मत हारी हो क सिरे पे ला कर उनका चेहरा बीएड से बहार की और कर टाँगे उठा कर एक फुद्दी मार रहा होता तो दोसरा बीएड से नीचे खरा अम्मी क मौन को नीचे पीची को झुकाये उल्टा कर उस क मौन में लूँ डेल छोड़ रहा था बरी अम्मी की सांसें बंद होइ पर ठीक वक़्त पे मौन से लूँ निकाल लेते...बीएड का कोई कोना कोई सिरा नै छोरा था जहाँ अम्मी को छोड़ा न हो पता नै कितनी बरी झरि और इतना पानी छोरा क अब तो बीएड शीट हर तरफ से गीली फील होती जहा बी कर क अम्मी को छोड़ने लगते का भरी शरीर हम तीनो क लिए जैसे माँ की गुड़िया जैसे होगया था एक साथ उठा उठा कर पटकक पटककक कर पता नै कितने आसनो(पोसिशन्स) में छोड़ा अम्मी को क अम्मी की फिर बी बास नै होइ...पहला राउंड कोई ढेर घंटे से ऊपर चला और आगे पीछे हम तीनों मर्द अम्मी क मौन में झरे नाना ने बास की फिर भाई ने और एन्ड पे जा कर मैं झरा ने इस से पहले कभी इतना पानी नै पिया होगा लुणो का...पहले राउंड क बाद अम्मी बेसुध पारी रही बुरा हाल था पर उनके वेहम ो गमान में नै था ल तीनो मर्द अभी बी और करने की ाएस में है तरह उठ कर लरखरते गिरते मदद लेते वाशरूम तक्क पोहंची और कुछ फ्रेश होकर बहार आयी और बीएड पे लेत गयी तीनों बी साइड पे परे हांफ रहे थे सोफे पे तो कोई कारपेट पे हे...कोई आधे घंटे बाद
मैं उठा पहले और पानी पिया और अम्मी को बी पिलाया जो क काफी थक्क गयी थी पर इसी बीच नाना बी अम्मी क पास आगये और बातें शुरू होइ इन् बातों में मजाल थी जो अम्मी ने एक बी हिला किया हो...कोई पोन घंटे बाद फिर से तीनों मर्दो का मूड बना और अम्मी क लाख मन करने क बावजूद २ण्ड राउंड शुरू किया राउंड पहले से बी ज़्यादा दर्दनाक रहा अम्मी क लिए और उतना हे टफ हम तीनो मर्दो क लिए...सुबह ५ सारे ५ का टाइम था जब हम सेकंड राउंड से फ़ारिग़ होअय अब किसी में बी जान नै रही थी का तो सब से बुरा हाल दर्द से काढ़ा रही थी फुद्दी और गांड को आज से पहले एक साथ कभी ऐसे नै छोड़ा था तीन तीन मर्दो ने...दूसरे राउंड में हम तीनों मर्दो ने अम्मी को अपने अपने लूँ क थिक पानी से नहलाया और इतना पानी ल अम्मी का फ्रंट से पूरा जिम भीग चूका था पर अम्मी में इतनी जान नै थी क वो हाथ से अपना मौन साफ़ कर सके...जितना मौन में गया उतना चाट गयी किसी तरह बाक़ी आँखों दूध सब सफ़ेद गहरे मादय से भरा प्र था...हम तीनों बी नीचे हे कारपेट पे बिछ गए क्यों क बीएड पे अम्मी थी काढ़ा रही और बेडशीट गीली थी जगज जगह से पर अम्मी को उस से बी फरक नै प्र और वो थकावट और दर्द क अम्रे उधर हे किसी तरह सो गयी...मैं उठ क सोफे पे होगया और भाई और नाना नीचे हे सोगये...अगली एक नयी सुबह ला सरझ निकल चूका था...आज नौशीन और एपीआई हुमा की बरात आणि थी और शुक्र था टाइम शाम का था वर्ण सुबह कहाँ उठा जाना था भाई की बारात कल जनि थी...मैं मीठी नींद की आग़ोश में था क तभी मुझे फील होआ क जैसे कोई दूर नॉक कर रहा हो तो मैं आँख खुली माली और टाइम की और देखा तो नज़र नै आ रहा घ साफ़ तो थोड़ा और आँखों को मॉल कर देखा तो ११ बज रहे थे और मैं हैरान होगया क इतनी देर सोते रहे नीचे देखा तो नाना और भाई अहमद सोये होअय थे घोड़ो जैसे और बीएड पे अम्मी सोई होइ थी जैसी भंग्ग पी ली हो सब ने...मैं जब हालत देखे कमरे क और खुद को ननगा देखा तो आवाज़ निकल पोछा कोण है तो बहार से आवाज़ जो आयी उसे सुन थोड़ी जान में जान आयी क्यों क मैं डर रहा था अब्बू न हो पर वो आवाज़ एपीआई रज़िया की थी तो वैसे हे पोछा अकेली हो न एपीआई तो एपीआई हाँ में जवाब दिया तो मैं दरवाज़े की एक साइड हो थोड़ा सा दूर खुला तो एपीआई अंदर आना चाहा तो मैं बोलै एपीआई नै अभी प्ल्ज़ एपीआई बोली प्ल्ज़ क बचे टाइम देखा है सब पॉच रहे नीचे बे दरवाज़ा नॉक कर कर क चले गए की ये बात सुन मेरी तो जैसे जान हाथ में आ गयी और मैं बोलै अभी कहाँ है अब्बू तो एपीआई बोली रमीज़ा क कमरे में फ्रेश होरहे शायद मैं एपीआई को बोलै प्ल्ज़ आप १० मिनट्स बाद आयी गए तो एपीआई बोली सुनो तो नीचे मां लोग नाना बारे पॉच रहे सुबह से वो बी नै दिख रहे कोई मिलने बी आये थे आदमी उन् से हवेली तो मैं जवाब देने में थोड़ा हकलाया तो एपीआई थोड़ा undefined किया और मेरी पाकर जवाब सोचने की वजह से थोड़ी ढीली होइ और एपीआई undefined किया तो दूर से एपीआई को साइड से अंदर का नज़ारा दिखा तो उनके तो पेरो तले से ज़मीन जैसे निकल गयी खोले देख रही रही मैं पीछे मुरर देखा तो शुक्र घ नाना और भाई सोफे क उस तरफ थे बास उनके सोये फावस दिख थे और बीएड पे अम्मी नंगी दिख रही थी...एपीआई ये सब देख अब्बी शॉक में थी क मैं बोलै एपीआई प्ल्ज़ १० मिनट्स आप जाये अभी और इतना कह कर दूर बंद मर दिया...उफ़ जान में जान आयी और मैं बीएड की और बर्न से पहले नाना और भाई को उठाया और बोलै उठो और वो दोनों किसी तरह उठे तो मैं फ़ौरन से कपड़े पहनने को बोलै उन्हें और वो कपड़े पहन लिए तो उन्हें undefined कर बाहर की और निककते बोलै प्ल्ज़ चले जाये अभी किसी बी वक़्त आ सकते ऊपर और डर क मरे वो दोनों बी जल्दी से गए और जाते होअय मैं नाना को बोल दिया क हवेली चले जाये सीधा वहां कोई आदमज बी आये है और अहमद भाई और नाना दोनों चले गए और उनको जाते नीचे से एपीआई रज़िया ने देख लिया और वो ऊपर आने लगी और ऊपर आ मर दूर ज़ोर से नॉक करने लगी तो मैं दूर खुला तब मैं शॉर्ट्स में था बास...एपीआई अंदर घुसी तो मैं पीछे से लॉक किया ता क कोई और न आ सके...पीछे मुरा तो एपीआई ने नाक पे हाथ रखा होआ था क्यों क पोरे रूम में स्पर्म की स्मेल थी फैली होइ...एपीआई ने अम्मी को बीएड पे देखा तो जल्दी से आगे बरही और अम्मी को उठाने लगी मकिसी तरह मुश्कलों से अम्मी उठी एपीआई ने उन्हें बीएड से टैक लगा कर बिठाया और पोछा अम्मी आप ठीक है न तो अम्मी बोली पानी रज़िया बेटी तो पानी पिलाया तो अम्मी का गोरा जिस्म देख वो सेहम गयी क्यों क जगह जगह लाल निशान थे काटने क कुछ झाकरने क मम्मो पे पे पे अम्मी को जब उठाया तो पोरे चुतरर लाल थापरो से और ठोकई से...एपीआई मुझे ग़ुस्से से देख बोली अली ये क्या हाल किया है अम्मी का उफ्फ्फ खुडया अम्मीईई उठे तो अम्मी काढ़ा क किसी तरह उठी तो अकेली एपीआई से संभाली नै जा रही थी एपीआई ने मुझे इशारा किया तो मैं बी हेल्प की बुहत ग़ुस्से हो रही थी और अम्मी लरखरति आवाज़ से बास इतना कह रही बेटी मैं ठीक हूँ कुछ नै होआ...मैं चुप्पी तान ली थी...हम दोनों बहिन भाई अम्मी को वाशरूम लेकर गए और उन्हें गर्म पानी से नहलाने लगे तो एपीआई जब देखा क अम्मी का पूरा फेस भरा पारा लुणो क पानी से और पानी जम्म चूका अम्मी क फेस पे मम्मो पे तो एपीआई और ज़्यादा डांटा मुझे...किसो तरह हम दोनों में रैगर रैगर क अम्मी को नहलाया गर्म पानी से तो अम्मॉ थोड़ा रिलैक्स होइ सहर दे का बहार लाये एपीआई उन्हें शलवार नयी पहनाने लगी तो नीचे बेथ फुद्दी को घोर से देखा जो सूझ चुकी थी undefined और गांड का छेद बी जयस्व चील चला हो ऐसा लग रहा था...एपीआई लगातार मुझे बातें सुना रही थी और फिर कपड़े पहना कर बेडशीट चेंज की कपड़े और गांड साफ़ किया की पूरी बोतल स्प्रे के डाली क स्मेल जाये रूम से...फिर मुझे बोली जाओं नहाओ तो मैं बी गया चुप कर क और नाहा क निकला बहार तो रूम का नक़्शा हे चेंज हो चूका था और अब्बू अम्मी क पास बीएड पे बैठे थे...मेरी सिटी पीती घुम्म हो गईइइइइइइइ अब्बू को देखा अम्मी क साथ यूँ देख और तभी अब्बू ने मेरा नाम पुकार कर बुलाया क इधर आओ...