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Incest डॉक्टर का फूल पारीवारिक धमाका

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Guest
दोस्तो मैं आपका सलिल फिर एक नई कहानी शरू करने जा रहा हु जो एक पारिवारिक इन्सेस्ट कहानी है जो एक डॉक्टर के परिवार पर आधारित है अगर कुछ स्पेलिंग में त्रुटि हो तो माफ करना और अच्छी हो या बुरी कमेंट जरूर करना

आपका अपना

सलिल
 
अपडेट 1

हाय आय ऍम ऋषभ शहा, में सूरत में रहता हू. मैं एक फिजिशियन डॉक्टर हू. मेरी उमर

२६ साल है. फ्रंड्स में एक डॉक्टर हूँ इसीलिए आप सब से कह ता हूँ की अपना खयाल

रखे. दिन में १० गिलास पाणी पिए यह आप के चेहरे को खिला देगा और वजन भी कम कर

देगा, और अपने चेहरे पर से पसिना पोछते रहे, कयूंकि आपने अक्सर देखा होगा की डॉक्टर हमेशा फेयर और गुड लुकिंग होता है, क्यूँकि वो अपनी

केअर करते हे. प्लीज् टेक केअर

अब में अपनी स्टोरी पर आता हू. यह बात तब की हे जब में २० साल का था और मेडिकल

कॉलेज में पढता मेरे घर में मेरे परेंट्स है. पापा डॉ. सतीश शहा जो एक कैंसर

सर्जन हैं और माँ भी एक जनरल डॉक्टर . उनका नाम नीता शहा है. शायद आप जानते

होंगे की हर डॉक्टर अपने बच्चों को डॉक्टर ही बनाना चाहता हे, इसीलिए मैं भी मेडिकल

कॉलेज में एंटर हो गया. मेरे १२थ में थोड़े नंबर कम आये थे इसीलिए मुझे अहमदबाद

जाना पडा मेरे घर में मेरे पापा से बड़े एक चाचा हे वह अहमदाबाद में ही डॉ. हे और मेरी

चाची भी पर वह डॉक्टरी छोड़ कर सोशल एक्टिविटी में ज्यादा पार्ट लेती हे. वह बहुत ही

अच्छी हे. मेरे चाचा का नाम प्रदीप शहा वह ५० साल के हे और बहुत बिजी रहते हे. मेरी

चाची का नाम शीला शहा हे. वह ४२ साल की हे लेकिन ३२ की लगती हे. बहोत अच्छे से उन्होंने

अपने आप को फिट रक्खा हे. और थैंक्स टू फेयरनेस क्रीम्स और ब्यूटी अवरेनेस्स, अब हर

आच्छे घर में बड़ी उम्र औरतें भी अपने आप को मेन्टेन करने में बिजी रहती हे.

१स्ट स्टोरी : बड़ी चाची की चुदाई

जी तो में सूरत से अहमेदाबाद शिफ़्ट हो गया, वैसे तो में अहमदाबाद में चाचा चाची के

यहाँ रह चुका हूँ इसीलिए मुझे कोई परेशानी नहीं हुई. मैं मेडिकल कॉलेज में पहले दिन

गया और देखा तो बहुत सी अच्छी लड़कियां थी, जैसे में कोई फैशन कॉलेज में आ गया

हूं. बहोत अच्छा लगा. फिर में शाम को घर आया तो चाची कहीं बाहर गयी थी. मैं अपने

रूम में गया और अपने लैपटॉप पर ब्लू फिल्म्स देखने लगा. थोड़ी देर के बाद जब डोर बेल

बजी तो मैंने डरवाजा खोला तो चाची आई थी. आते ही उन्होंने मेरे पहले दिन के बारे में

पूछ. जी में यह बता दून की मेरे चाची का कोई बेटा नहीं था, एक बेटी थी वह भी

मैरिड थी, जिन्हे में कोमल दीदी कहता था अब घर मे मैं और चाचा चाची ही रहते है चाची को में कई बार में अपने ड्रीम्स में फैंटसी कर चुका हूँ लेकिन कभी उससे

आंगे बढ्ने की हिम्मत नहीं हुई, क्यूँकि वह मुझे अपने बेटे जैसा मानती थी और हमेशा

रेशु बेटा ही कह कर पुकारती थी. जहाँ तक मुझे पता है उनके मन में भी मेरे बारे में

शायद कोई गन्दा ख्याल नहीं होगा. तक़रीबन एक महिना बीत गया था, की एक दिन में अपने

रूम में एक दम नंगा हो कर मूठ मार रहा था और ब्लू फिल्म देख रहा था की मुझे तभी

खयाल आया की में तो खिड़की के सामने खड़ा हू, और मैंने नोटिस किया की सामने वाली आंटी

मुझे देख रही हे. मेरे तो पसीने छूट गए क्यूँकि में पहली बार ऐसा काम करते हुए पक़डा

गया था, ऐसे टाइम पर डर सभी को लगता हे. मैंने फटाक से खिड़की बंद की और अपने रूम

मे छुप कर बैठ गया. शाम को आंटी घर आई उन्होंने मुझे पुकारा पर मैंने उनके सामने

जाना ठीक नहीं संमझा क्यूँकि वो आंटी मेरी चाची को अच्छे से जानती थी. लेट जब ९ बजे

चाचा घर लौटे तो में अपने रूम से बाहर निकला और फ़टाफ़ट उनके साथ डिनर निपटा के

वापस अपने रूम में चला गया और जा के सोचने लगा की उस आंटी ने चाची को कुछ बताया

भी की नहीं पर में कुछ नहीं समझा दूसरे दिन भी में लेट उठा, बाहर देखा तो कोई

नही था मैं नहा धो कर कॉलेज के लिए निकल गया. जैसे ही मैंने घर लॉक किया तो

देखा की वो आंटी मेरे सामने थी और अपना बरंडा साफ़ कर रही थी लेकिन मुझे देख कर

वह अपने घर में चलि गयी और धडाम से डरवाजा बंद कर दिया. शाम को में घर लौटा

तो भी सब नार्मल था मुझे यकीन हो गया की उस आंटी को बस गुस्सा आया हे उन्होंने मेरी

चाची को कुछ नहीं बताया. चाची भी नार्मल थी और चाचा भी. मैं अब बिन्दास था,

ऐसे ही दो दिन निकल गये, में अपने काम में मस्त था लेकिन अब ध्यान रखने लगा था की कोई

मुझे पकड़ न ले. फिर उस दिन शाम को चाचा का कॉल आया की वह सर्जरी में हे उन्हें इसी

वजह से लेट हो जायेगा तो चाची ने मुझे डिनर के लिये बुलाया और में डिनर टेबल पर आ

गया और किचन में उनकी हेल्प करने लगा और मैंने सारा खाना डायनिंग टेबल पर सजा दिया.

चाची आज खुश लग रही थी और में भी की में बच गया.

हम खाना खाने लगे और बातें करने लगे,

चाची : "खाना कैसा बना हे, रेशु"

मे : "बहुत अच्छा, आपके हाथ से कभी खाना बुरा बनता ही नहि...!

चाची:"अच्छा, तो फिर एक रोटी और लो".

मे: "नहीं आंटी अभी पेट् भर चुका है

चाची: "अच्छा, रेशु एक बात तो बताओ..

मे: "हाँ औंटी..?

चाची: "तुममे अक्कल हे की नहीं?

मे: "क्यों औंटी.. मैंने क्या किया?

चाची:"तुम पडोसवाली आंटी के सामने क्या कर रहे थे?
 
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