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Rajsharmastories-मेरी तीन मस्त पटाखा बहनें complete

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दीदी ने आते ही मुझे किस्स करना शुरू कर दिया और मुझे गले से लगा कर दबाने लगी और गहरी गहरी साँसे लेने लगी।

मैंने दीदी को पकड़ कर नीचे लेटा दिया और उसके ऊपर लेट गया और अपने लिप्स दीदी के लिप्स पर रख कर उन्हें किस करने लगा दीदी की साँसे गरम हो गई थी और मेरा लंड भी अकडने लगा था दीदी ने मुझे पहले से भी जोर से कस के पकड़ा हुआ था।

हम अभी तक बिना बात किये ही ये सब कर रहे थे दीदी मेरी कमर पर अपना हाथ फिरा रही थी और जैसे ही उसका हाथ मेरे लंड के पास आया उसने मेरा लंड पकड़ लिया और उसे सहलाने लगी।

मै भी साइड पर हुआ और कपड़ो के ऊपर से ही दीदी के एक बूब को दबाते हुए दूसरे हाथ से उसकी चूत रगड़ने लगा हमने इसी तरह कोई १० मिनट तक बहुत प्यार किया अब तक दीदी बहुत गरम हो गई थी।

"भैया अब बस करो मुझे जाने दो कहीं राखी उठ ना जाये बाकि का कल कर लेंगे..... आह्ह्ह्ह...... भाई मुझे और मत छेड़ो मैं पागल ही जाउँगी उफ़ भैया आराम से... थोड़ा सा और दबाओ अपनी ऊँगली को मेरी चूत पर बहुत अच्छा लग रहा है ऐसे ही.... उफफ बस भाई अब छोडो मुझे जाने दो" दीदी मस्ती में बोली।

"क्या दीदी जब भी मजा आने लगता है आप जाने की बात करने लगती हो जबकि आप जानती हो की मैं आपको ऐसे जाने ही नहीं दूंगा फिर भी बेकार में बार बार एक ही बात करती हो" मैं दीदी के बूब को जोर से दबाते हुए बोला।

"ओूंमम्माआ.... अच्छा बाबा कर लो हो करना है लेकिन जल्दी करो अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा है, एक तो तेरा ये लंड जब भी इसे पकडती हूँ तो दिल करता है के इसे अंदर ले लूँ और कभी बाहर न नि कालूँ उफ़ हाय हाय भैया आराम से करो ना कम से कम कुर्ती तो ऊपर कर लो फिर किस्स करना।।।।।" दीदी मचलते हुए बोली।

मैने दीदी की कुर्ती ऊपर कर दी और दीदी के बूब्स ब्रा से बाहर निकाल कर उन्हें चाटने लगा किस करने और चूसने लगा दीदी बहुत गरम हो गई थी और मचल रही थी मैंने दीदी की सलवार नीचे कर दी और उठ कर अपना लोअर और चड्ढी उतार कर पूरा नंगा हो गया दीदी ने जब देखा की मैं नंगा हो गया हूँ तो वो झट से उलटी होकर लेट गई।

"दीदी इस तरह नहीं आज मैं आपकी चूत में अपना लंड डालूँगा गांड तो सुबह मार ली थी अब चूत की बारी है" दीदी को पलट'ते देख मैं बोला।

"नही भाई चूत आज नहीं फिर कभि, अभी तो मेरी गांड में ही लंड डालो पहले मेरी गांड के पूरे मजे ले लो फिर चूत की बारी आएगी, अब बाते मत करो और डाल दो लंड मेरी गांड में और भर दो उसे अपने गरम पानी से" दीदी अपनी गांड हिलाते हुए बोली "वैसे भी मैं अपनी चूत में पानी नहीं डलवाउंगी क्योंकि बच्चा होने का डर है लेकिन पीछे तो कोई प्रॉब्लम ही नहीं है इसलिए अभी तुम सिर्फ मेरी गांड ही मारा करो चूत का बाद में सोचेंगे अब डाल भी दो यार।।।।।।"

 
अब मुझसे भी सबर नहीं हो रहा था और दीदी की बात भी सही थी वैसे भी मुझे सिर्फ छेद से मतलब था जहाँ मेरा लंड घुसे और अपना पानी निकाले मैंने देर नहीं की और बिना थूक लगाये अपना लंड दीदी की गांड में पेल दिया तो दीदी तिलमिला उठी।

उउइइइइइइइ.......... यार आराम से डालो ना आह्ह्ह्हह........ ठोड़ा थूक तो लगाओ ऐसे रूखे रूखे कैसे जायेगा भैया आराम से उउइइइ माँ यार थूक तो लगा लो पहले मेरी गांड फाडनी है क्या बिना थूक लगाये ही मार रहे हो उफ़ भैया नहीं जारहा है अंदर और बेकार ही दर्द भी हो रहा है" दीदी तडपते हुए बोली

"दीदी तेल लगा कर करे क्या आज, उससे दर्द बहुत कम होगा" मैं दीदी पर रहम करते हुए बोला।

"हाँ तो रोका किसने है जाओ तेल लेकर आओ" दीदी बोली।

अब मैं उठा और तेल लेकर आगया और दीदी की गांड और अपने लंड पर अच्छे से लगा लिया और दीदी के पेर फैला कर उनके बीच बैठ गया और दीदी की गांड के छेद पर लंड लगा कर धीरे धीरे अंदर करने लगा तेल की वजह से लंड आराम से दीदी की गांड में जाने लगा।

"भैया धीरे धीरे डालते जाओ आह्ह्ह्ह..... हाँ आराम से डालो जल्दी मत करो आह..... उफ..... अब तो सुबह से कम दर्द हो रहा है उउइइ ..... भाई धीरे धीरे हाँ उफ्फ्....... रुको मत ड़ालते जाओ पूरा लंड घुसा दो मेरी गांड में हाँ ऐसे ही उफ़ भैया अभी रुक जाओ दर्द हो रहा है" दीदी बड़बड़ायी।

"दीदी मुझे बहुत अच्छा लगता है जब चुदाई में आप दर्द से चीखती है,ज़ब आप दर्द से सिसियाती है, जब आप दर्द से अपनी गांड टाइट कर लेती है सच मुझे बहुत मजा आता है और मेरा दिल करता है की मैं जोर जोर से धक्के लगा कर आपको और दर्द दूँ और साथ ही मजा भी, दीदी अब थोड़ा सहन करना मैं जोर के धक्के लगाने जा रहा हूँ" कह कर मैंने लंड बाहर निकाल कर वापस जोर का धक्का लगा दिया और मेरा लंड दीदी की गांड को फाड़ते हुए अंदर जाकर कहीं टकराया।

जब लंड अंदर कहीं टकराया तो दीदी को बहुत दर्द हुआ और दीदी ने फ़ौरन अपनी गांड फुल टाइट कर ली और उसके मुँह से जोर की आह निकली और फिर अपना सर बेड पर पटक दिया।

अब मैंने फिर से पूरा लंड बाहर निकाल कर अंदर घुसेड दिया दीदी बेचारी मुझे रोक तो नहीं रही थी लेकिन उसे बहुत दर्द हो रहा था वो अपना सर बेड पर पटक रही थी और किसी तरह अपनी चीख रोके हुए थी दीदी की पहली आह के बाद मुझे बहुत मजा आरहा था मैं दीदी की गांड को हर झटके के बाद देख रहा था मेरे हर झटके के साथ दीदी के चूतड़ जोर से हिलते थे और कुछ ही देर में दीदी के चूतड़ लाल हो गए थे और मेरी कम निकलने ही वाली थी तो मैंने पूरा लंड दीदी की गांड में डाला और वहीँ रोक दिया मेरे लंड से तेज तेज पिचकारी की धार निकल कर दीदी की गांड में गिरने लगी अब दीदी को जोष आया तो उसने अपनी गांड हिलाना शुरू कर दी और गांड टाइट करके झटके देने लगी।

 
मुझे होश ही नहीं था की कब तक दीदी ने गांड हिला हिला कर चुदवाया और कब वो भी झड़ गई लेकिन मजा बहुत आया और जब मैं होश में आया तो दीदी सुकून से मेरा लंड अपनी गांड में लिए हुए मेरे नीचे पड़ी हुई थी।

"बस भाई अब तो खुश हो ना जैसा तुम चाहते थे मैंने बिलकुल वैसे ही चुदवाया है आज, अब तो जाऊँ मैं। मजा तो कर लिया ना तुमने और भाई सच तो ये है की मुझे भी तब बहुत मजा आता है जब तुम्हारा लंड मुझे दर्द देता है, जब तुम जज़बाती होकर मेरी चुदाई करते हो, सच दिल करता है की तुम्हारा लंड मेरी गांड फाड़ दे उफ्फ्फ्फ़ भैया आई लव यू सच बहुत मजा आया मुझे" दीदी बोली और मुझे चुम लिया।

फिर दीदी ने उठ कर अपने कपड़े पहने और एक बार फिर मुझे किस करके अपने रूम में चली गई और मैं भी अपना लोअर पहन कर बेड पर लेट गया।।।।।।।।।।।।।।।

इस तरह दीदी की गांड मारने की जो शुरुआत हुई तो उसके बाद लगभग मैं दो महीनो तक दीदी की गांड मारता रहा लेकिन अभी तक दीदी ने मुझे अपनी चूत चोदने का मौका नहीं दिया था जब भी मैं उनकी चूत चोदने को कहता वो कोई ना कोई बहाना बना देती।

अगले महीने मेरे बर्थडे पर दीदी ने मुझे प्यारा परफ्यूम गिफ्ट किया और हम लोग मेरा बर्थडे सेलिब्रेट करते रहे।

पता ही नहीं चला की कब रात के १२ बज गए तो सभी अपने अपने रूम में सोने के लिए चले गए मैं और दीदी सोने के लिए ऊपर अपने रूम में आने लगे तो राखी दीदी के साथ सोने के लिए साथ आने लगी तो दीदी ने उसे मना कर दिया की आज मैं थकि हुई हूँ तुम कल मेरे साथ सोना।

मैने सोचा की दीदी आज थकि है तो आज शायद कुछ नहीं होगा खैर कोई बात नहीं वैसे भी हम रोज रात ही सेक्स करते थे तो एक रात नहीं भी करते तो फरक नहीं पड़ने वाला था।

उपर आकर जब मैं दीदी को गुड नाईट कह कर अपने रूम में जाने लगा तो दीदी ने मुझे अजीब नजरो से देखा।

"उधर कहाँ जा रहे हो? चलो मेरे रूम में आओ" दीदी बोली और अपने रूम की तरफ बढ़ गयी।

मै भी दीदी के पीछे उनके रूम में आगया और बेड पर बैठ गया जबकि दीदी बाथरूम में चली गई और कुछ देर बाद जब वापस आयी तो बहुत सेक्सी मूड में थी क्योंकि वो बहुत सेक्सी स्टाइल से चल रही थी और बहुत सेक्सी नजरो से मुझे देख रही थी और उसने ड्रेस भी बहुत सेक्सी पहन रखी थी।

मैं दीदी का इशारा समझ गया और दरवाजा बंद करके भाग कर दीदी के पास आया और उसे बेड पर पटक कर किस्स करने लगा।

"नही आज तुम कुछ नहीं करोगे जो करना है मैं करुँगी, ओर अभी तुम अपनी आँखे बंद करो" दीदी मुझे अपने ऊपर से हट' ते हुए बोली।

"ओके" मैं बोला और मैंने अपनी आँखे बंद कर ली।

दीदी ने पास पड़ा उसका दुपट्टा उठाया और मेरी आँखों पर बांध दिया फिर मेरे सारे कपड़े उतार दिए मैं दीदी के सामने नंगा पड़ा था और रूम की लाइट भी ऑन थी फिर दीदी ने अपने भी कपड़े उतार दिए और मुझे माथे पर किस्स किया और फिर वो नहीं रुकि और मेरे सारे बदन पर किस्स करने लगी सिर्फ लंड पर किस्स नहीं किया और फिर दीदी ने अपना एक बूब मेरे मुँह में डाल दिया।
 


"भैया मेरे बूब को किस्स करो इनको बारी बारी मुँह में लो और खुब चूसो और चोटो मेरे निप्पल्स को भी चूसो और अपने दाँतो से काटो, आज जरा भी रहम नहीं करना इनके साथ उफ़ भैया आह्ह्ह्हह....." दीदी बोली तो मैं भी वैसा ही करने लगा।

मैं दीदी का बूब सक्क करने लगा और दीदी बारी बारी अपने बूब्स मेरे मुँह में चेंज करने लगी मुझे बहुत मजा आरहा था।

"भैया जानते हो मैं चुदाई से पहले हर वक्त तुम्हे क्यों कहती थी की बस करो मुझे जाने दो भाई असल में जब मैं बहुत गरम हो जाती थी तब मुझसे बर्दाश्त नहीं होता था और डायरेक्ट कहने में शर्म आती थी की भाई मुझे चोदो और मुझे पता था की तुम मुझे चोदे बिना मानोगे नहीं इसीलिए मैं ऐसा कहती थी" दीदी बोली।

और इधर मैं दीदी की बाते सुनते हुए उसके बूब्स के साथ लगा हुआ था।

"और भाई जब मैं कहती थी की भाई आराम से चोदो मुझे दर्द हो रहा है धीरे करो तो मैं ऐसा इसलिए कहती थी की मेरे ऐसा करने से तुम उल्टा जोर से चोदना शुरू कर दोगे और मुझे दर्द में देख कर तुम्हे बहुत मजा आएगा और वो दर्द मुझे भी बहुत मजा देता था इसीलिए मैं बिना चिल्लाये मजे से चुद्वाती थी" दीदी ने आगे बताया।

दीदी अपने बूब्स को मेरे मुँह में जोर से दबा दबा कर चुस्वा रही थी मुझे बहुत मजा आरहा था दीदी की सेक्सी बाते सुनने में और बूब्स चाटने मे।

"भैया तुम रोज कहते थे की तुम्हे मेरी चूत में लंड डालना है और मैं मना कर देती थी वो मैं इसलिए करती थी क्योंकि मैंने सोच रखा था की तुम्हारे बर्थडे वाले दिन तुम्हे ये प्यारा सा सेक्सी गिफ्ट दूंगी जो आज तुम्हारे लिए हाजिर है और हाँ भाई आज के बाद तुम मुझे एक बार नहीं बल्कि हर रात ३ बार चोदोगे, भाई सिर्फ मैं ही जानती हूँ की आज तक तुम्हारा लंड चूत में ना लेकर मैंने कैसे बर्दाश्त किया है" दीदी की बात जारी रही।

दीदी की बात सुनकर मैं बहुत खुश हो गया पहले तो मुझे आज रात लग रहा था की कुछ नहीं होगा जबकि यहाँ रोज मुझे अपनी चूत चोदने दे रही थी जो मैं कब से चोदना चाहता था।

"लेकिन दीदी ३ बार क्यों चोदना है रोज....." मैंने पुछा

"भैया मेरे पास ३ होल है और तुम डेली इन तीनो को अपने लंड से चोदोगे" कहते हुए दीदी नीचे हुई और मेरे लंड को अपने मुँह में लिया और उसे पागलो की तरह सक्क करने लगी।

मुझे बहुत मजा आने लगा था क्योंकि दीदी के दाँत भी नहीं लग रहे थे और वो बहुत अच्छे से लंड चूस रही थी

"दीदी आप तो लंड चूसने में बहुत एक्सपर्ट लग रही हो कहाँ से सिखा आपने ये" मैंने मजे से पूछा।

"भैया जब से मैंने तुमसे सेक्स करना शुरू किया तब से मेरा दिल करता था की मैं तुम्हारा लंड मुँह में लूँ लेकिन मुझे पता नहीं था की ये कैसे करते है इसलिए मैं रोज रात अपनी ऊँगली चुस कर प्रैक्टिस करती थी और आज मैं पूरी तरह एक्सपर्ट हो गई हूँ और अपने प्यारे भाई का लंड चूस कर उसे मजा दे रही हूँ, भैया आज तुम्हे पता चलेगा की मैं तुमसे कितना प्यार करती हूँ" दीदी बोली।

 
"दीदी सच आप बहुत अच्छी हो और मुझसे बहुत प्यार करती हो, दीदी अब आप मेरे झड़ने तक मेरा लंड चूसो मैं आज सारी रात आपको चोदना चाहता हूँ और आपके सभी होल्स में अपना माल गिराना चाहता हूँ ऊफ्फ दीदी जोर से मेरा लंड पूरा अपने मुँह को बहुत मजा आरहा है, हाँ दीदी यस यस ऐसे ही ओह्ह दीदी प्ल्ज़ थोड़ा इधर हो जाओ मैं आपका बूब दबाना चाहता हूँ दीदी आपको पता नहीं है की मैं आपके बूब्स का कितना दिवाना हूँ अहहहह दीदी कितने सॉफ्ट और बड़े बड़े है आपके बूब्स उफ़ दीदी और जोर से चूसो मेरा बस निकलने ही वाला है" मैं दीदी का सर अपने लंड पर दबाते हुए बोला।

और दीदी जोर जोर से मेरे लंड चूसने लगी जब मुझसे बर्दाश्त नहीं हुआ तो मैंने दीदी का सर पकड़ कर दो चार धक्के जोर के लगाये और मेरा लंड दीदी के मुँह में ही फट पड़ा और दीदी का मुँह मेरे माल से भर गया दीदी भी कहाँ पीछे रहने वाली थी वो मेरे माल की एक एक बून्द पी गई।।।।।।।।।।।।

फिर दीदी उठी और अपनी चूत मेरे मुँह पर रख दी वववओऊववव क्या स्मेल थी दीदी की चूत की।

"ले भैया आज चाट मेरी चूत को और जब अच्छे से गीली हो जाये तब इसमें अपना लंड घुसा कर जबरदस्त चुदाई करना इसकी" दीदी बोली।

ओर फिर दीदी मेरे सीने पर दोनों तरफ पेर डाल कर बैठ गई उसकी चूत मेरे मुँह से लगी हुई थी और मैं उसे चाटे जारहा था और अपनी जीभ भी चूत की लाइन पर घुमा रहा था।

मेरे मुँह की गर्मी और मेरी जीभ की हरकतो को दीदी की चूत सहन नहीं कर पायी और दीदी मेरे मुँह में ही झड़ गई उसका पूरा नमकिन पानी मैं पी गया।

झडने के बाद दीदी जैसे ही होश में आयी वो मेरे ऊपर से हट कर साइड में दोनों टांगे फैला कर लेट गई।

"चल मेरे भाई अब तोड़ दे मेरी सील और कर ले अपने मन की पूरी। ये तेरे लिए मेरी तरफ से बर्थडे गिफ्ट है" दीदी बोली।

मेरी आँखों के सामने बहुत ही दिलकश नजारा था दीदी की गुलाबी चिकनी बिना बालो वाली रस बहातीचूत मुझे अपनी तरफ बुला रही थी।

ओर फिर मैंने भी देर नहीं की और दीदी की टाँगों के बीच आगया।

"दीदी पहली बार है दर्द होगा" मैं बोला।

"तु टेंशन मत ले मैं सहन कर लूँगी" दीदी बोली।

दीदी की बात सुनकर मैंने अपना लंड उसकी चूत के छेद पर लगाया और धीरे धीरे आगे बढ़ने लगा लेकिन दीदी की चूत बहुत टाइट थी तो लंड अंदर जा ही नहीं रहा था।

"भाई ऐसे नहीं होगा एक जोर का धक्का लगा वरना मुझे दर्द भी होगा और हम कुछ कर भी नहीं पाएँगे" दीदी बोली और पास पड़ा कपडा अपने मुँह में भर लिया।

 
मैं भी परेशान हो गया था तो मैंने एक जोर का धक्का लगाया जिससे मेरा १/४ लंड दीदी की चूत में घुस गया और दीदी की एक चीख निकल गई जो मुँह में कपडा होने के कारन वहीँ घुट कर रह गई।

लेकिन मेरा लंड जैसे किसी दीवार से टकरा रहा था जो उसे अंदर नहीं जाने दे रही थी तो मैंने लंड वापस खिंच कर एक और जोरदार धक्का लगाया जिससे मेरा लंड दीदी की सील को तोड़ते हुए आधा अंदर घुस गया।

लेकिन इतने में ही दीदी की हालत ख़राब हो गई थी वो अपने हाथ पेर झटक रही थी और लगातार गुणं गुणं की आवाज़ें उसके मुँह से निकल रही थी उसकी आँखों से आँसुओ की धार बह रही थी लेकिन उसने मुझे हटाने की कोशिश नहीं की थी।

मैने भी सोचा की बार बार दीदी को दर्द नहीं देना है इसलिए एक के बाद एक धक्के लगा कर पूरा लंड दीदी की चूत में भर दिया।

मेरी इस हरकत से दीदी तडपते हुए बेहोश हो गई और मैं बहुत डर गया लेकिन फिर भी मैंने अपना लंड बाहर नहीं निकाला और दीदी के बूब्स चुसते हुए उसके गालो को थपथपाने लगा थोड़ी देर बाद ही दीदी कसमसाई और धीरे धीरे होश में आगई तो मैंने उसके मुँह से कपडा निकाल दिया।

"दीदी बहुत दर्द हुआ ना आपको, सॉरी दीदी लेकिन ऐसा मैंने इसलिए किया क्योंकि मैं नहीं चाहता था की आपको बार बार दर्द हो और देखो ना अब मेरा पूरा लंड आपकी चूत में है" मैं बड़े प्यार से बोला।

"भैया दर्द तो बहुत हुआ लेकिन मैं जानती थी की ऐसा होगा ही इसीलिए तो मैंने मुँह में कपडा डाल लिया था लेकिन फिर भी मुझे तुमसे इतनी बेरहमी की उम्मीद नहीं थी, खैर जो हुआ सो हुआ अच्छा हुआ की तुम्हारा पूरा लंड एक बार में ही अंदर चला गया अब थोड़ी देर ऐसे ही पड़े रहो जब मैं बोलूँ तब धक्के लगाना" दीदी कराहते हुए बोली।

मै भी अब थोड़ा रिलैक्स हो गया और वापस दीदी के होठो को किस्स करते हुए उसके बूब्स के साथ खेलने लगा दीदी भी थोड़ी देर बाद किसिंग में मेरा साथ देने लगी थी।

कोई १० मिनट बाद दीदी की चूत गीली होने लगी थी और अब दीदी भी अपनी कमर हिलाने लगी थी जो मेरे लिए इशारा था की अब मैं आगे बढ़ सकता हूँ।

तो मैंने भी अब धीरे धीरे लंड अंदर बाहर करना शुरू कर दिया दीदी की चूत बहुत टाइट थी तो मेरा लंड बिलकुल रगड़ते हुए इन आउट हो रहा था और अब उसमें जलन भी हो रही थी लेकिन जैसे जैसे दीदी की चूत पानी छोड़ रही थी वैसे वैसे ही दीदी की चूत को गिरफ्त ढीली पड़ती जारही थी।

थोड़ी ही देर में दीदी भी कमर उठा उठा कर मेरे धक्को का जवाब देने लगी तो मेरे धक्को की स्पीड बढ़ने लगी और थोड़ी देर बाद ही पूरी स्पीड में दीदी को चोदने लगा।

ऐसे लग रहा था जैसे रूम में भुचाल आगया हो दोनों ही तरफ से सेम स्पीड में शॉट लग रहे थे और कोई १० मिनट की चुदाई के बाद ही मैं दीदी की चूत में झड़ गया मेरे लंड से निकलती बौछारो को दीदी की चूत बर्दाश्त नहीं कर पायी और वो भी झड़ने लगी दीदी ने मुझे कस कर पकड़ लिया और मेरे सर पर हाथ फेरने लगी।

कोई १५ मिनट तक हम वैसे ही पड़े रहे और फिर दीदी उठ कर बाथरूम चली गई और इधर मैं सोच रहा था की मैं कितना लकी हूँ जो दो महीनो के अंदर ही मैंने दीदी के तीनो होल में लंड डाल दिया था।

उसके बाद उस रात हमने तीन बार और चुदाई की और फिर तो जैसे ये रोज का ही खेल हो गया था जब तक की दीदी की शादी नहीं हो गई लेकिन उसके बाद भी हम चुदाई का कोई भी मौका नहीं छोड़ते थे।।।।।।।।।।

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★ ★ ★ ★ ★ समाप्त ★ ★ ★ ★ ★

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