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डॉली यह सारी बातें सब के बीच बैठकर कर चुकी थी ।
दूसरे दिन सुबह ही राजनी सोनितपुर के लिए नकल गई।
निलेश उसे छोड़ने शहर गया ,जहां पर शैलेश पूनम और गौरी भी राजनी से मिल चुके थे।
पूनम ने गले लगाते हुए कहा ,राजनी खुशी-खुशी जाओ ,और जल्दी से दो महीने बाद मेरे शैलेश की बहू बनकर मेरे घर आओ ।
इस बार जाते हुए राजनी ने विकास और पूनम के पैर छुए थे।
पूनम ने एक बार फिर राजनी को अपने गले लगा लिया।
राजनी सोनितपुर के लिए निकल गई थी । और ठीक 2 दिन बाद शैलेश भी मुंबई के लिए निकल गया।
आप काफी हद तक डॉली को ऐसे लग रहा था, कि उसके दिल का बोझ कुछ कम हुआ है ।
उसने नीलेश से भी कह दिया था, कि वह सारी बातें रमैया के फैमिली वालों को बता दे।
और इधर फैसला चाहे बड़ा ही था, लेकिन वो ले चुकी थी । एक बार फिर से राज को वापस लाने के लिए।
तैयारियां करते हुए एक महीने से ऊपर हो गया था ।
अब डॉली मौका देख रही थी ,कि वह कब राज को लेने जाए ।
उसने कैलेंडर उठाते हुए तारीख देखी ,कि संडे और सैटरडे के अलावा अगर आगे पीछे कोई छुट्टी हो ,तो उसमें वह एप्लीकेशन देकर तेजपुर के लिए निकल जाएगी ।
और आज से सिर्फ 8 दिन बाद ही उसे संडे सैटरडे के साथ एक मंडे की छुट्टी भी दिख गई थी ,और ट्यूसडे की छुट्टी की एप्लीकेशन साथ में लगाते हुए ,राजनी को पूरे 4 दिन की छुट्टी मिल गई थी।
2 दिन बाद जब छुट्टी सैंक्शन हो गई
तो उसने ऑनलाइन गुवाहाटी के लिए ट्रेन से रिजर्वेशन भी करवा लिया ।
लेकिन अभी तक इस बारे में उसने किसी को भी कुछ नहीं बताया था।
इन फैक्ट वह जाते समय भी काकी को कुछ नहीं बताना चाहती थी ।
पर इस तरह से अचानक गायब हो जाना काकी परेशान हो जाएगी ।
इसलिए डॉली ने एक साफ सुंदर राइटिंग में चिट्ठी लिखी ,,,जो जाने से पहले वह काकी तक पहुंचाना चाहती थी।
मेरी प्यारी काकी
मुझे पता है ,मेरी जिंदगी में शायद मुझसे ज्यादा मुझे अगर किसी ने जाना है ,तो वह आप हो । बचपन से आज तक मेरे हर फैसले में आपने मेरा साथ दिया है।
एक माँ से भी बढ़कर मुझे समझा है, मेरी मदद की है।
काफी आज मैंने जो फैसला लिया है मुझे पूरा भरोसा है ,कि आप आज भी मेरा साथ देंगी।
ताकि मुझे आपके साथ और आशीर्वाद की बहुत जरूरत है । क्योंकि जो फैसला मुझे लेना पड़ रहा है ,,,,,
राज के साथ-साथ हम सबके लिए भी वह सही होगा ।
अब जो बात मैं आपसे कहने जा रही हूं शायद वह सुनकर आप परेशान होगी।
पर प्लीज आप अपने आप को संभालना ,,,और मेरे फैसले में मेरा साथ देना ।
काकी मैं राज को लेने जा रही हूं ।
लेकिन मुझे पता है ,कि वह अपनी जिम्मेदारी से मुंह नहीं मोड़ सकते ।
अगर आज तक मैंने राज के हर फैसले में उनका साथ दिया है ।
तो अब जो मेरा फैसला है ,मैं उम्मीद करूंगी ,कि वो भी उस फैसले में मेरा साथ दें ।
काकी मेरा फैसला यह है ।
कि मैं काम्या और उसकी दोनों बच्चियों को इस घर में लेकर आऊंगी।
मुझे पता है ,,,काम्या ऐसे कभी नहीं आएगी ।
इसलिए मजबूरन मैं काम्या को अपनी छोटी बहन और राज की पत्नी बनाकर इस घर में लाऊंगी ।
और अब चाहे कुछ भी हो जाए ,4 दिन बाद राज मेरे साथ इस घर में वापस जरूर आएंगे ,,,
आपकी डॉली
2 दिन बाद डॉली को तेजपुर के लिए निकलना था ।
डॉली ने सारी तैयारियां कर ली ,और चिट्ठी को भी अच्छी तरह से एक लिफाफे में चिपकाते हुए बंद किया ,और अपने पास रख लिया ।
ताकि जाने से पहले वह चिट्ठी पिंकी को दे कर कहे ,,,कि उसके कहने के अनुसार यह चिट्ठी वो काकी को पढ़ कर बता दे। सारी तैयारियां हो गई थी, दूसरे दिन डॉली को तेजपुर के लिए निकलना था। और सुबह ऑफिस जाते वक्त ही उसने अपना छोटा सा बैग भी साथ में ले लिया था ।
अभी तक काकी को या पिंकी को इस बारे में कुछ भी नहीं बताया था उसने। लिफाफा बंद कर कान्हा जी के पास मंदिर में रखा ,और माथा टेकते हुए निकल गई ।
आज फ्राइडे था ,डॉली ने दिनभर ऑफिस किया और शाम को 700 बजे उसकी ट्रेन थी गुवाहाटी जाने के
लिए ।
रास्ते में डॉली ने सोचा अब फोन करके पिंकी को बता देती है ,कि चिट्ठी उसने कान्हा जी के पास रखी है।
शाम को 6 ,,7 बजे जब उसके ऑफिस से आने का टाइम होता है ।
उस वक्त तक वह चिट्ठी पढ़कर काकी को बता देना ,कि उसमें क्या लिखा है ।
लेकिन डॉली ने जैसे ही फोन निकालने के लिए बैग में हाथ डाला ,पता चला कि जल्दबाजी में फोन तो घर पर ही भूल गई है ।
यह एक बहुत बड़ी प्रॉब्लम थी ,पर अब वापस लौटना भी मुमकिन नहीं था। क्योंकि बस 10 मिनट बाद वह शहर पहुंचने ही वाली थी ।
अब जो होगा देखा जाएगा ,,यह सोचते हुए डॉली ने दिनभर ऑफिस किया ।
और निकलने से पहले ऑफिस के फोन से ही फोन लगाकर पिंकी को सब कुछ बता दिया ।
डॉली गुवाहाटी के लिए निकल गई थी। गुवाहाटी पहुंचकर वहां से टैक्सी लेकर वह राज के पास जाने वाली थी।
दूसरे दिन सुबह ही राजनी सोनितपुर के लिए नकल गई।
निलेश उसे छोड़ने शहर गया ,जहां पर शैलेश पूनम और गौरी भी राजनी से मिल चुके थे।
पूनम ने गले लगाते हुए कहा ,राजनी खुशी-खुशी जाओ ,और जल्दी से दो महीने बाद मेरे शैलेश की बहू बनकर मेरे घर आओ ।
इस बार जाते हुए राजनी ने विकास और पूनम के पैर छुए थे।
पूनम ने एक बार फिर राजनी को अपने गले लगा लिया।
राजनी सोनितपुर के लिए निकल गई थी । और ठीक 2 दिन बाद शैलेश भी मुंबई के लिए निकल गया।
आप काफी हद तक डॉली को ऐसे लग रहा था, कि उसके दिल का बोझ कुछ कम हुआ है ।
उसने नीलेश से भी कह दिया था, कि वह सारी बातें रमैया के फैमिली वालों को बता दे।
और इधर फैसला चाहे बड़ा ही था, लेकिन वो ले चुकी थी । एक बार फिर से राज को वापस लाने के लिए।
तैयारियां करते हुए एक महीने से ऊपर हो गया था ।
अब डॉली मौका देख रही थी ,कि वह कब राज को लेने जाए ।
उसने कैलेंडर उठाते हुए तारीख देखी ,कि संडे और सैटरडे के अलावा अगर आगे पीछे कोई छुट्टी हो ,तो उसमें वह एप्लीकेशन देकर तेजपुर के लिए निकल जाएगी ।
और आज से सिर्फ 8 दिन बाद ही उसे संडे सैटरडे के साथ एक मंडे की छुट्टी भी दिख गई थी ,और ट्यूसडे की छुट्टी की एप्लीकेशन साथ में लगाते हुए ,राजनी को पूरे 4 दिन की छुट्टी मिल गई थी।
2 दिन बाद जब छुट्टी सैंक्शन हो गई
तो उसने ऑनलाइन गुवाहाटी के लिए ट्रेन से रिजर्वेशन भी करवा लिया ।
लेकिन अभी तक इस बारे में उसने किसी को भी कुछ नहीं बताया था।
इन फैक्ट वह जाते समय भी काकी को कुछ नहीं बताना चाहती थी ।
पर इस तरह से अचानक गायब हो जाना काकी परेशान हो जाएगी ।
इसलिए डॉली ने एक साफ सुंदर राइटिंग में चिट्ठी लिखी ,,,जो जाने से पहले वह काकी तक पहुंचाना चाहती थी।
मेरी प्यारी काकी
मुझे पता है ,मेरी जिंदगी में शायद मुझसे ज्यादा मुझे अगर किसी ने जाना है ,तो वह आप हो । बचपन से आज तक मेरे हर फैसले में आपने मेरा साथ दिया है।
एक माँ से भी बढ़कर मुझे समझा है, मेरी मदद की है।
काफी आज मैंने जो फैसला लिया है मुझे पूरा भरोसा है ,कि आप आज भी मेरा साथ देंगी।
ताकि मुझे आपके साथ और आशीर्वाद की बहुत जरूरत है । क्योंकि जो फैसला मुझे लेना पड़ रहा है ,,,,,
राज के साथ-साथ हम सबके लिए भी वह सही होगा ।
अब जो बात मैं आपसे कहने जा रही हूं शायद वह सुनकर आप परेशान होगी।
पर प्लीज आप अपने आप को संभालना ,,,और मेरे फैसले में मेरा साथ देना ।
काकी मैं राज को लेने जा रही हूं ।
लेकिन मुझे पता है ,कि वह अपनी जिम्मेदारी से मुंह नहीं मोड़ सकते ।
अगर आज तक मैंने राज के हर फैसले में उनका साथ दिया है ।
तो अब जो मेरा फैसला है ,मैं उम्मीद करूंगी ,कि वो भी उस फैसले में मेरा साथ दें ।
काकी मेरा फैसला यह है ।
कि मैं काम्या और उसकी दोनों बच्चियों को इस घर में लेकर आऊंगी।
मुझे पता है ,,,काम्या ऐसे कभी नहीं आएगी ।
इसलिए मजबूरन मैं काम्या को अपनी छोटी बहन और राज की पत्नी बनाकर इस घर में लाऊंगी ।
और अब चाहे कुछ भी हो जाए ,4 दिन बाद राज मेरे साथ इस घर में वापस जरूर आएंगे ,,,
आपकी डॉली
2 दिन बाद डॉली को तेजपुर के लिए निकलना था ।
डॉली ने सारी तैयारियां कर ली ,और चिट्ठी को भी अच्छी तरह से एक लिफाफे में चिपकाते हुए बंद किया ,और अपने पास रख लिया ।
ताकि जाने से पहले वह चिट्ठी पिंकी को दे कर कहे ,,,कि उसके कहने के अनुसार यह चिट्ठी वो काकी को पढ़ कर बता दे। सारी तैयारियां हो गई थी, दूसरे दिन डॉली को तेजपुर के लिए निकलना था। और सुबह ऑफिस जाते वक्त ही उसने अपना छोटा सा बैग भी साथ में ले लिया था ।
अभी तक काकी को या पिंकी को इस बारे में कुछ भी नहीं बताया था उसने। लिफाफा बंद कर कान्हा जी के पास मंदिर में रखा ,और माथा टेकते हुए निकल गई ।
आज फ्राइडे था ,डॉली ने दिनभर ऑफिस किया और शाम को 700 बजे उसकी ट्रेन थी गुवाहाटी जाने के
लिए ।
रास्ते में डॉली ने सोचा अब फोन करके पिंकी को बता देती है ,कि चिट्ठी उसने कान्हा जी के पास रखी है।
शाम को 6 ,,7 बजे जब उसके ऑफिस से आने का टाइम होता है ।
उस वक्त तक वह चिट्ठी पढ़कर काकी को बता देना ,कि उसमें क्या लिखा है ।
लेकिन डॉली ने जैसे ही फोन निकालने के लिए बैग में हाथ डाला ,पता चला कि जल्दबाजी में फोन तो घर पर ही भूल गई है ।
यह एक बहुत बड़ी प्रॉब्लम थी ,पर अब वापस लौटना भी मुमकिन नहीं था। क्योंकि बस 10 मिनट बाद वह शहर पहुंचने ही वाली थी ।
अब जो होगा देखा जाएगा ,,यह सोचते हुए डॉली ने दिनभर ऑफिस किया ।
और निकलने से पहले ऑफिस के फोन से ही फोन लगाकर पिंकी को सब कुछ बता दिया ।
डॉली गुवाहाटी के लिए निकल गई थी। गुवाहाटी पहुंचकर वहां से टैक्सी लेकर वह राज के पास जाने वाली थी।