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अंजू की चूत की सुगन्ध

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Guest
अंजू की चूत की सुगन्ध

सलोनी रानी से सम्बंध बने हुए हैं और जब भी अवसर मिलता है हम मिलकर खूब चुदाई

कर लेते हैं।

सलोनी रानी की ही तरह एक और पाठिका की मेल आई जो उसने नीलम रानी की चुदाई की

कहानी पढ़ कर लिखी थी। उसने लिखा- चूतनिवास जी, मैं भी नीलम रानी जैसे जॉब के बदले

में चुदवाना चाहती हूँ। उसका नाम अंजू शर्मा है मैंने पूछा कि तुम सिर्फ जॉब लेने के लिये

चूत मरवाना चाहती हो या तुम्हें वैसे भी चुदास बहुत तेज़ उठा करती है।

उसने कहा- नहीं चूतनिवास जी, मेरा बहुत दिल करता है कि मैं रोज़ रोज़ चुदूं… अगर चुदाई

के साथ साथ जॉब भी मिल जाये तो एक पंथ दो काज…

मैंने पूछा- अंजू रानी, तुम पहले कभी चुदाई है?

बोली- हाँ, मैंने कई बार अपने बॉय फ्रेंड को चोदा है लेकिन अब उसकी शादी हो गई है किसी

और लड़की से, तो मैं पिछले तीन महीनों से सूखी पड़ी हूँ, उसने शादी के बाद दुबारा मिलने

की कोशिश की थी लेकिन मैंने उस धोखेबाज़ को गालियाँ देकर भगा दिया।

मैंने पूछा- क्या तुम सेक्रेटरी का काम कर सकोगी?

उसने जवाब दिया- हाँ, वैसे कभी किया तो नहीं है लेकिन मेरा वर्ड और एक्स्सेल में अच्छा

हाथ सेट है तो कर लूँगी।

मैंने फिर पूछा- रानी, तुमको मुझसे भी चोदना होगा और मेरे उस फ्रेंड से भी जो तुम्हें जॉब

देगा।

उसने कहा- मैं तो इतनी प्यासी हूँ कि जितना भी चोदी जाऊँगी उतना ही आनन्द आयेगा

मुझे… आप दोनों खुशी से मेरी चूत मारिये!

उसकी इतनी रंगीली और लंड, चूत जैसे शब्दों से भरी हुई भाषा सुन कर मैं दंग रह गया।

आमतौर पर लड़की ऐसे शब्दों का प्रयोग नहीं करती हैं, और यदि करती भी हैं तो चुदाई के

वक्त ना कि आम बोलचाल में…

अंजू रानी तो सलोनी रानी से भी एक कदम आगे थी।

उसके मुख से ये शब्द सुन कर बेहद मज़ा भी आया, खासकर जब कि उसकी आवाज़ ही

बहुत मीठी थी, बिल्कुल यूं लगता था कि कोई दूर कहीं बांसुरी बजा रहा है। पलक झपकते ही

ये चूतनिवास मस्ता गया।

मैंने अपने कुछ सहयोगियों से मालूम किया तो तीन लोगों को सेक्रेटरी की ज़रूरत थी और

जब पता चला कि यह सेक्रेटरी काम के साथ साथ चूत भी देगी तो सभी फौरन मान गये

और एक ने तो सबसे आगे बढ़ते हुए बिना किसी इंटरव्यू के उसे जॉब का ऑफर भेज दिया,

तनख्वाह भी बढ़िया लगा दी, Rs 18000 प्रति माह…

जॉब मिल जाने के बाद अंजू रानी ने फोन किया- चूत निवास जी, बताईये कहाँ और कैसे

मिलेंगे? आपने मेरी जॉब लगवाई है उसका आपसे चुद कर धन्यवाद देना है आपको…

मैंने अंजू रानी को गुड़गाँव अपने घर का पता देकर वहीं पर ही आने को कहा।

मेरी पत्नी जूसी रानी चार पांच दिन के लिये अपनी बहन के घर फ़रीदाबाद गई हुई थी।

अपनी बीवी के बिस्तर पर दूसरी लड़की को भोगने में मज़ा ही कुछ अलग होता है।

अंजू रानी अगले दिन सुबह 11 बजे मेरे घर पर पहुँच गई।

उसे मैंने ड्रॉइंग रूम में बिठा दिया। वो सिकुची सी सोफे के सिरे पर बैठ गई।

अंजू एक फैशनेबल लड़की है, सांवला रंग, बड़ी बड़ी सुन्दर सी आँखें, झक सफेद दांत और

कंधों पर लहराते हुए गहरे काले बाल। मस्त फिगर जिसमें बड़ी बड़ी चूचियाँ ऐसी कि बंदा

टकाटक घूरे ही जाये। उसकी चूचियाँ कम से कम 36C साइज़ की होंगी। गोल गोल मदमस्त

उसकी टॉप को फाड़ के बाहर कूदने को तैयार !

अंजु रानी ने एक हलके नीले रंग का स्लीवलेस टॉप और उसके नीचे एक बड़े घेरेदार प्रिंट

वाली स्कर्ट पहन रखी थी जो उसके घुटनों के नीचे तक पहुंच रही थी। पैरों में ऊंचे हील की

खूबसूरत सैंडल थी। सैंडल और स्कर्ट के बीच में अंजु रानी की सुडौल, चिकनी टांगें और

सुन्दर से पैर दीख रहे थे। उसके एक हाथ में एक बढ़िया बैग और दूसरे हाथ में एक फोल्डर

था।

अंजु रानी का चेहरा बहुत सुन्दर तो नहीं था लेकिन दिलकश ज़रूर है। उसे देख कर अच्छा

लगता था और नज़र हटाने को बिल्कुल भी दिल नहीं करता।

कद था कोई 5 फुट 5 इंच…

ज़्यादा खूबसूरत ना होते हुए भी अंजू रानी बहुत आकर्षक और सेक्सी लगती है।

मैंने कहा- रानी ज़रा चल के तो दिखाओ? बोली- क्या देखना चाहते हो? मैं लंगड़ी तो नहीं हूँ?

मैं बोला- नहीं अंजू रानी, मैं तो तुम्हारे गोल गोल नितम्ब चलते हुए कैसे झूमते हैं, ये देखना

चाहता था।

अंजु रानी खिलखिला कर हंसी… क्या मनलुभावनी हंसी है इस सेक्स बम की !!!

उठ के अंजु रानी हँसते हँसते एक मॉडल की तरह कमर लहरा लहरा के चल के दिखाने लगी।

मैं भी हंसा लेकिन साथ साथ उसके मदमस्त चूतड़ों के उछल कूद से मैं मोहित भी हो गया।

चूतनिवास… साले चोदू, कितना मज़ा आयगा जब ये मस्त नितम्ब चाटने को, हाथ फेरने और

चूमने को मिलेंगे !!!

दस कदम चल कर अंजु रानी ने मुझे मंत्रमुग्ध कर डाला। वो वापिस आकर सोफे पर बैठ

गई. इस बार वो सिकुची सिकुची नहीं बल्कि ठीक से आराम से बैठी, मुस्कराते हुए बोली-

चूत निवास जी आपसे मिलने के लिये मैंने काफी तैयारी की है।

मैं बोला- रुक ज़रा… सबसे पहले तो मुझे चूत निवास जी कहना बंद कर.. मेरे दोस्त मुझे

राजे कहते हैं और तू कह के संबोधित करते हैं। तू भी राजे कह और तू से बात कर!

अंजु रानी ने इतरा के मेरे कान में शहद घोला- मैं ना कहूँगी राजे… मैं तो राजा कहूँगी…हाँ तू

कह सकती हूँ।

मैंने पूछा- अंजू रानी, तो बता क्या तैयारी की है?

अंजू रानी बोली- राजा…मैंने तेरी सब कहानियाँ पढ़ी हैं… उन्हें पढ़ के मैंने यह अन्दाज़ लगाने

की कोशिश करी कि तू किन किन हरकतों से खुश होकर चुदासा होता है… लड़की क्या क्या

करे जिससे तेरी ठरक अंधाधुंध बढ़े… इस पर मैंने बड़े ध्यान से रिसर्च की और उसी हिसाब

से तैयारी की।
 
मैं बोला- अंजू रानी, माना तू बड़ी रिसर्च स्कॉलर है, पर अब बता तो सही क्या होम वर्क

करके आई है?

अंजू रानी खिलखिला के हंसी और बोली- तुझे लड़की का सारा बदन चाटने का बड़ा शौक है…

इसलिये मैं अपनी टांगें और बाहें वेक्सिंग करवा के आई… वैसे मेरे बाल बहुत थोड़े हैं फिर भी

मैंने सोचा कि चूतनिवास को मैं एकदम चिकनी मिलूं…

लेकिन झांटें पूरी की पूरी जंगल समान रहने दीं क्योंकि तू उनमें मुंह रगड़ता है…

बगल के बाल भी यूं ही रहने दिये…

मेरी समझ में आया कि चूतनिवास लड़की के पैरों और हाथों को चाट के बहुत उत्तेजित होता

है इसलिये मैंने पेडीक्यूर और मैनीक्यूर करवाया…

चूतनिवास को लड़की का स्वर्ण रस पीने में मज़ा आता है तो इसलिये मैं सुबह 5 बजे उठी

और टोइलेट से फ्री हो गई ताकि मेरे राजा को कम से कम 6 से 7 घंटे का जमा किया हुआ

अमृत तो मिले…

नई सैंडल खरीदी ऐसे डिज़ाइन की जिसमें तू मेरे पैर तकरीबन पूरे अच्छे से हर समय देख

सके… मैंने लिपस्टिक भी नहीं लगाई जिससे राजा को मेरे होंठ चूसने से पहले उन्हें पोंछना

न पड़े क्योंकि राजा को होंठों का स्वाद पसंद है न कि लिपस्टिक का…

फिर मैंने यह स्कर्ट और टॉप खरीदी जिसे उतारने में ज़रा भी दिक्कत ना हो…

यार चूतनिवास मेरे पांच हज़ार खर्च हो गये तेरे को खुश करने की तैयारी में… सच सच बता

मेरी रिसर्च सही है कि नहीं?

मुझे मानना पड़ा कि हाँ अंजू रानी का होम वर्क एकदम पर्फेक्ट है, मैं हंस के बोला- अंजू

रानी बिल्कुल सही…यार तू कहानी पढ़ती थी या मुझे?

उठकर मैं अंजू रानी के नज़दीक गया और उसे सोफे से उठाकर उसे आलिंगन में कस के

बाँध लिया।

मैं उसके खूबसूरत चेहरे को निहारता हुआ बोला- रानी तूने तो मुझे मोहित कर लिया है

यार… तू सच में एक सेक्स बॉम्ब है…तू पांच हज़ार की चिंता न कर, मैं दे दूंगा।

अंजू रानी थोड़ी उदास होकर बोली- नहीं राजा, तू सरासर झूठ बोल रहा है…तू कोई मेरे ऊपर

मोहित वोहित नहीं हुआ… मेरे जैसी काली लड़की पर कौन मोहित होगा… यही तो ट्रैजेडी है

मेरी कि मैं काली हूँ… मुझे मालूम है तू मेरा दिल रखने के लिये कह रहा है।

मैं उसकी चुम्मी लेकर बोला- रानी, कौन चूतिया कहता है कि तू सुन्दर नहीं है… इतनी काली

भी तू नहीं है जितना तू समझती है… तेरा रंग उत्तर भारत के एक आम हिन्दुतानी जैसा है…

गोरा नहीं है लेकिन काला भी नहीं है… थोड़ा सांवला है… तेरा हर अंग खूबसूरत है… तेरा

चेहरा कितना खिला खिला एक हंसते हुए फूल जैसा है… तू अंजू रानी सुन्दर ही नहीं बहुत

सुन्दर है… ले अब मेरी चुम्मी ले।

अंजू रानी ने खुश होके मुझे बड़े प्यार से मुंह पर चूमा और बोली- राजा…तू बहुत चूतिया

बनाता है लड़कियों को पर तेरी बातें सुन के अच्छा भी लगता है… आज कुछ ऐसा करेंगे जो

तेरी किसी भी कहानी में नहीं किया गया… मैं प्लानिंग कर के लाई हूँ… बताऊँ या ससपेन्स

रहने दूं तेरे लिये?

मैंने कहा- नहीं, बताने की ज़रूरत नहीं है, ये ससपेन्स रहे तो ज़्यादा मज़ा आयेगा।

अंजू रानी ने कहा- मैं एक गाना मोबाइल पर बजाऊँगी… उस गाने पर हम दोनों अपना एक

एक कपड़ा उतार के फेंक देंगे… मैं टॉप उतारूं तो तू शर्ट उतारना… मैं स्कर्ट उतारूं तो तू

अपनी पैंट उतारना… सिर्फ उतारना नहीं है बल्कि उतार के दूर फेंकना है… जब तक गाना

खत्म होगा हमें पूरा नंगा हो जाना है… ठीक है न?

मैं बोला- हाँ ठीक है।

उसकी चुदाई के लिये की गई इतनी प्लानिंग से मैं बहुत प्रभावित था और मुझे दिख रहा था

कि यह लड़की बेतहाशा मज़ा देने वाली है।

अंजू रानी चहक के बोली- देख राजा… दो गाने हैं जो मर्द में कामवासना इतनी ज़्यादा

भड़काते हैं जिसकी कोई हद नहीं… मैं बहुत गाने सुनती हूँ लेकिन आदमी की गोलियों में

आग लगाने वाले ये ही दो गाने मुझे सबसे अधिक पसंद हैं. तुझे बस यह चूज़ करना है कि

किस गाने पर कपड़े उतारते हुए डांस करूं और किस पर नंगी होकर…

मैं बोला- रानी, गाने कौन से हैं ये तो बताओ तभी तो चूज़ करूंगा।

अंजू रानी ने बताया- एक गाना है- हुस्न के लाखों रंग कौन सा रंग देखोगे, आग है ये बदन

कौन सा अंग देखोगे।

और दूसरा है- अंग से अंग लगा ले सांसों में है तूफान, जलने लगी है काया जलने लगी है

जान! दोनों ही गाने गज़ब के लंड खड़ा कर देने वाले हैं… अब जल्दी से बता राजा पहले किस

गाने पर नाचूँ?

मैंने कुछ देर सोचा, मैंने दोनों गाने सुने हुए थे हालांकि काफी पुराने समय के थे… फिर मैंने

फैसला किया कि ‘हुस्न के लाखों रंग’ गाना नंगे डांस के लिये बेहतर रहेगा और यही मैंने

अंजू रानी को कह दिया।

अंजू रानी ने गाना चालू किया और लगी डांस करने…

एक कैबरे डांसर की तरह वो बड़ा भड़कीला डांस कर रही थी… उसकी भाव भंगिमायें और

मुद्राएं उत्तेजित करने वाली थीं।

अंजू रानी की ज़बरदस्त चूचियाँ अंजू के नाचते हुए खूब उछल कूद कर रहे थे जिन्हें देख कर

मैं पागल हुए जा रहा था।

अचानक अंजू रानी ने नाचते नाचते अपनी स्कर्ट नीचे की और वैसे ही नाचते हुए पैर स्कर्ट

से बाहर निकाल लिये, उसने एक किक जो मारी है स्कर्ट को तो वो दस गज़ दूर जाकर

गिरी।

मैंने भी झट से अपनी पतलून उतार के दूर कहीं को उछाल फेंकी।

अंजू रानी खूब मस्त होकर डांस कर रही थी। फिर उसने अपनी टॉप भी नाचते हुए उतारी

और दूर फेंक दिया।

अब अंजू रानी केवल ब्रा और चड्डी में थी…

क्या मस्त फिगर थी यार अंजू रानी की…

और चूचों का तो कहना ही क्या !!!

ऐसे गज़ब के चूचे मैंने तो कभी नहीं देखे थे।

मेरा अंदाज़ गलत था, उसके चूचों के साइज़ के बारे में… मैंने लिखा था कि कपड़े पहने हुए

अंजू रानी के चूचुक 36C के होंगे लेकिन अब मुझे लगने लगा कि ये मतवाले चूचे 38C होने

चाहियें।

अंजू रानी के डांस के साथ ये भी नाच रहे थे और देखने वाले इस चूतनिवास की गांड फाड़े

डाल रहे थे।

तभी अंजू रानी ने अपनी ब्रा को उतार के जाने कहाँ फेक दिया और अपनी आलीशान चूचियों

को जैसे क़ैद से आज़ाद कर दिया।

बड़ी बड़ी गोल गोल मतवाली चूचियाँ ब्रा के हटते ही कूद के बाहर को निकलीं।

ओओओओओ…..ओहहह !!!!

यार चूचे हों तो अंजू रानी जैसे हों… उसके चूचे देख के मेरी सांस ऊपर की ऊपर और नीचे

की नीचे ही रह गई, गला सूख गया और माथे पर पसीना छलक उठा, बदन एकदम से मानो

चार पांच डिग्री गरम हो गया।

मस्त चिकनी चूचियाँ ! खूब बड़े बड़े, उठे हुए गहरे काले निप्पल और हर निप्पल का एक

एक बड़ा सा दायरा जिसका रंग हल्का काला ! अभी मैं खुद को संभाल भी नहीं पाया था कि

अंजू रानी ने अपनी पतली सी चड्डी भी उतार दी और उसे नाचते नाचते मेरे पास लाकर

मेरी नाक को चड्डी में घुसा दिया।

फिर उसने चड्डी को मेरी नाक और मुंह से खूब ज़ोर ज़ोर से रगड़ा।

उसकी चड्डी सूंघ के यारों मज़ा आ गया ! लुत्फ आ गया !! स्वाद आ गया !!! मुझे एक

साथ अंजू रानी की चूत, गाण्ड और झांटों की सुगंध मिल रही थी। थोड़ी सी गंध उसके पसीने

की भी इन सभी गंधों में मिली हुई थी।

एक चुदास से लबालब भरी हुई लड़की के बदन की अंतरंग सुगंधें एक साथ पहली बार मैंने

सूँघी थीं।

‘अब बहनचोद मुझे देखेगा भी या मेरी कच्छी ही में घुसा रहेगा… खायेगा क्या इसे? …एक

लड़की नंगी नाच रही है और एक गांडू चड्डी से खेले जा रहा है?’ अंजू रानी की फटकार ने

मुझे जैसे सोते से जगाया।

जैसे ही मैंने नज़र उठाई तो सारा शरीर झनझना उठा, यूँ लगा कि बिजली का एक तेज़ करंट

का तार मुझे छू गया हो।

अंजू रानी मादरजात नंगी मेरे सामने नाच रही थी और वो सेक्सी गाना बजे जा रहा था

जिसकी धुन पर मेरी चुदासी अंजू रानी डांस कर रही थी।

क्या मदमस्त फिगर थी ! क्या बदन था !! यह तो वो पटाखा था जो हिजड़ों में भी गर्मी पैदा

कर दे, कब्र में लटके पैरों को भी मिल्खा सिंह बना दे और जो लंड बरसों से ढीले पड़े हों

उनको भी खड़ा कर के लोहे के समान बना दे। यह वो लड़की थी जिस सेक्स के भंडारे को

देख कर तो सन्यासी भी बलात्कारी बन जाएँ।

अंजू रानी मचल मचल के, थिरक थिरक के नाच रही थी, उसका अंदाज़ बेहद कामुक और

उत्तेजक था।

जिसने गाना लिखा था उसे भी यह ख्याल नहीं आया होगा कि उसके मस्ती वाले गाने पर

नाचते हुए एक ज़ोरदार चुदाई का खेल होगा। नंगी अंजू रानी एक जन्नत की हूर जैसी लग

रही थी।

क्षमा चाहता हूँ अंजू रानी पूरी नंगी नहीं थी, उसने अपने सैंडल नहीं उतारे थे, नंगी अंजू रानी

अपने हाइ हील के सैंडल में डांस करती हुई गज़ब ढा रही थी।

उसकी अदाओं पर मर मिटने को जी चाहता था, लंड अकड़ अकड़ के पागल हो रहा था और

तुनके पे तुनका मारे जा रहा था मानो कि अंजू रानी को सलाम कर रहा हो।

अंजू रानी थिरकते हुए मेरे पास आई और मुझे इशारा किया कि क्योंकि उस ने अपनी चड्डी

उतार दी है तो मैं भी अपना अंडरवीयर उतार फेंकूँ।

बिना एक भी पल गंवाये मैंने अपना कच्छा उतारा और उसे एक तरफ को फेंक दिया।

कच्छे की क़ैद से आज़ाद होते ही लंड उछल उछल कर बताने लगा कि वो भी तैयार है इस

खेल का हिस्सा बन जाने के लिये…

जैसे ही मैं नंगा हुआ, अंजू थिरकती हुई मेरे करीब आ गई और उसने अपने दिलकश चूचे मेरे

चेहरे से रगड़ने शुरू कर दिये।

उसने मेरा सिर पकड़ के खूब अच्छी तरह से मेरा मुंह अपनी चूचियों से, चूचियों के बीच में

और निप्पलस में घुसा घुसा के रगड़ा। वो मेरा सिर बालों से कस के जकड़े हुए थी और जैसा

उसका दिल होता था वैसे मेरे मुंह को इधर उधर घुमाते हुए मम्‍मोँ पर दबा दबा कर रगड़ती

और कभी चूचों से मेरे मुंह को दबा देती, कभी एक, तो कभी दूसरी निप्पल मुझे चूसने को

देती।

मैं भी मस्ती से भरा हुआ था और जब भी मौका लगता उसकी चूची में दाँत गड़ा देता या

निप्पल को काट लेता।
 
थोड़ी देर के बाद मैंने अंजू रानी की कमर जकड़ ली, दूसरे हाथ से उसकी गर्दन और फिर

मैंने चूचियों को आराम से चूसना शुरू किया। यारो, क्या ही मदमस्त चूचे थे नरम, रेशम से

चिकने और बहुत ही ज़ायकेदार… चूस के मजा इतना आ रहा था कि बयान करना मुश्किल

है।

जब मैं चूची को कस के काट लेता तो अंजू रानी कराह उठती।

वो गालियाँ दिये जा रही थी- चूस चूस बहन के लौड़े चूत निवास..। चूस मादरचोद चूस..। हाँ

और ज़ोर से दाँत गाड़ इन हरामज़ादी चूचों म़ें.। काट के खा जा कुत्ते..। तू काट के खा ही जा

बहन के यार..। हाँ हाँ..। और ज़ोर से कमीने..। चूस चूस..। तेरी माँ को कुत्ते चोदें साले

हरामी..। बहन चोद..। गांडू..। चूसे जा चूसे जा साले चूसे जा..। इत्यादि इत्यादि…

और मैं चूसे गया।

मैंने अंजू रानी की चूत पर हाथ फिराया तो हाथ पूरा भीग गया।

अंजू रानी की चूत पूरी गर्म थी और चुद जाने को तैयार ही नहीं बेकरार भी…

अंजू रानी चूचियाँ चुसवाते हुए भी थिरक रही थी गाने की धुन पर… इस से चूची मुंह म़ें घुसे

घुसे भी थोड़ा थोड़ा हिल रही थी।

यह एक अनूठा अनुभव था जो मैंने पहली बार किया था, नाचते हुए इस से पहले किसी

लड़की ने चूचे नहीं चुसवाये थे।

काफी समय के बाद अंजू रानी सिसकारते हुए बोली- सुन राजा…हरामी अब मैं तेरे को ऐसा

मजा दूंगी जो तूने पहले कभी नहीं लिया होगा…अब तू चूसना बंद कर नहीं तो कुत्ते मैं गरम

होकर तुझे अभी चोद डालूँगी!

मैंने जैसे ही चूची से मुंह हटाया, अंजू रानी ने फिर से डांस करना शुरू कर दिया।

उसकी चुसी हुई गीली चूचियाँ भी नाचने लगीं जिससे मेरी ठरक बढ़े चली जा रही थी।

अंजू रानी ने अब अपनी टांग मेरे तरफ बढ़ाते हुए सैंडल पहने हुए पैर मेरे मुंह पर रख दिया

और बोली- चाट मेरे पैर भोसडी के गांडू.. जी भर के चाट इनको.. चाट चाट के मेरा दिल

खुश कर मादरचोद.. ज़रा सी कसर रह गई तो बहन के लौड़े, इन्ही सैंडल से तेरी गांड़

बजाऊँगी.. कमीने मादरचोद. अब चाट.. बहन का यार इतनी देर लगा रहा है कमीना…

अंधा क्या चाहे दो आँखें… मैंने वो हसीन पैर सैण्डल पहने पहने ही चाटना शुरू किया। उसके

पैर से सैण्डल के चमड़े को हल्की सी गंध आ रही थी। बहुत ठरक बढ़ाने वाली गंध थी

बहनचोद उसके पैरों की। मैंने दीवानों की तरह एक के बाद एक उसके दोनों पैर चाटने शुरू

किये।

बहन की लौड़ी अब भी एक पैर पर खड़े खड़े थिरके जा रही थी। जब मैं उसके पैर ऊपर से

चाट चुका तो तलवे चाटने के लिये मैंने सैण्डल उतर फेंके।

हाँ यारो, अब अंजू रानी पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी और अपने जलवा बिखेर रही थी।

मैंने बड़े मज़े से चटखारे लेते हुए अंजू रानी के सुन्दर पैरों के मक्खन जैसे चिकने और नरम

तलवों को चाटना चूसना शुरू किया। यारो, एक लड़की के पैर चाटने का मज़ा ही कुछ अलग

है।

अच्छे से अंजू रानी के तलवे चूस चाट के मैंने अपना ध्यान उसके पैरों के अंगूठे और

उंगलियों पर केन्द्रित किया। उसके अंगूठे के साथ वाली उंगली अंगूठे से ज़रा सी बड़ी थी,

बाकी की तीन उंगलियाँ थोड़ी थोड़ी करके छोटी होती जा रही थीं जैसा सब लोगों के पैरों में

होता है। उंगलियाँ गोल और सुडौल थीं और नाखून बड़े सलीके से तराशे हुए, नैचुरल शेड की

पोलिश की हुई थी।

सच में अंजू रानी किसी अच्छे ब्यूटी सैलुन में पैडीक्योर करवा के आई थी। इतने मादक पैर

देखकर उत्तेजना से भरकर मैंने एक एक करके अंजू रानी के पैरों की सभी उंगलियाँ खूब मज़े

ले ले कर चूसीं। उंगलियों के बीच के भाग पर खुश होकर खूब जीभ फिराई। यार मस्ती आ

गयी !

लंड का हाल तो यारों बद से बदतर हुए जा रहा था। अत्यधिक ठरक चढ़ने के कारण मेरे

अंडों में हल्का हल्का सा दर्द होने लगा था। शायद वो लावा से पूरे भर चुके थे और चाहते थे

कि लावा झाड़ दिया जाये।

उधर अंजू रानी की उत्तेजना भी बढ़ती जा रही थी, वो अब ज़ोर ज़ोर से सीत्कार भर रही थी,

मुझे मोटी मोटी गालियाँ दे रही थी लेकिन फिर भी गाने की धुन पर थिरके जा रही थी।

मैंने उसके पैर को पकड़ के उसे अपनी तरफ घसीटा और झट से तीन उंगलियाँ उसकी चूत

में घुसा दीं। चूतरस से लबालब भरी हुई थी और जैसे ही उंगलियाँ पूरी अंदर गईं अंजू रानी

एक ज़ोर की किलकारी मारते हुए झड़ी।

ढेर सा रस चूत से छूटा…मेरा पूरा हाथ भीग गया परंतु मैं उंगलियाँ अंदर बाहर किए जा रहा

था।

अंजू रानी तड़प उठी और उसने कस के मेरे हाथ को पकड़ लिया जिससे मैं धक्के ना लगा

सकूं- हरामी मेरी जान निकालेगा क्या?

सारा पानी तो निकल गया चूत हरामज़ादी फट जायगी अगर तू उंगली दिये जायगा तो…रुक

जा कमीने…रंडी की औलाद साले… हाय हाय…इतना तेज़ तो राजा मैं कभी नहीं झड़ी

ऊ..ऊ..ऊ… आआआ… आह बहन के यार.’

मैंने कहा- बहन चोद रंडी तू तो कह रही थी कोई स्पेशल मज़ा देगी… क्या हुआ उस स्पेशल

मज़े का… साली रांड… झड़ के बैठी है… कुतिया, माँ की लौड़ी पहले नहीं बक सकती थी की तू

झड़ने वाली है तो मैं तेरा जूस ही पी लेता… साली रंडी की औलाद… सारा रस हो गया ना

बर्बाद?

अंजू रानी ने एक गहरी सांस लेते हुए कहा- ज़रा तसल्ली रख कमीने… तूने क्यों चूत में तीन

तीन उंगलियाँ घुसेड़ दीं… घुसेड़ी तो घुसेड़ी साले ने ज़ोर से धक्के भी ठोके। अब दो मिनट

सांस ले लूँ तो मादरचोद देती हूँ तो तेरे को जन्नत का नज़ारा!

इतना कह के उसने लंड को चाटना शुरू किया, खूब मुँह गीला कर के अंजू रानी ने लंड को

चाट चाट के अपनी लार से तर कर दिया। मेरा तो हाल पहले ही खराब था उसके यूं चाटने

से बड़ी मुश्किल से मैंने खुद को कंट्रोल किया।

अचानक से अंजू रानी ने लंड को अपनी मस्त चूचियों के बीच में फंसा लिया और अपने हाथ

दोनों चूचियों के अगल बगल जमा दिये।

फिर अंजू रानी ने अपने हाथों को चूचियों पर जमाये जमाये ऊपर नीचे करना शुरू किया जैसे

कि लंड की मथनी चला रही हो।

अंजू रानी के मोटे मोटे नरम गरम चूचों के बीच में आराम से फंसे हुए लंड के तो यारों मज़े

लग गये।

अंजू रानी कभी ऊपर नीचे करके तो कभी आगे पीछे करके चूचे मथती। जैसे ही लंड थोड़ा सा

सूख जाता, वो दोबारा से जीभ से चाट चाट के लौड़े को अपने मुखरस से तर कर देती।

मेरा हाल बिगड़ता जा रहा था, लंड इतनी मस्त चूचियों से मथवा कर फटने को हो गया था।

अंजू रानी को भी खूब मज़ा आ रहा था क्योंकि उसकी चूचियों को लगातार लंड का दबाव

और उसके अपने हाथों की रगड़ से अंजू रानी भी उत्तेजित हो चली थी। वो गर्मी में डूब कर

मोटी मोटी गालियाँ दे रही थी, उसके सुन्दर चेहरे पर तेज़ उत्तेजना की लाली छा गई थी और

उसकी आँखें में लाल लाल डोरे तैरने लगे थे जैसे कि खूब शराब पीने पर होता है।

चुदास का नशा यारों हर दूसरे नशे पर भारी होता है।

‘क्यों मेरे राजा? आ रहा है न मज़ा जन्नत का? पहले किसी लौंडिया ने दिया है इतना

मज़ा?… बहन के लंड आज तुझे पता चलेगा असली मज़ा क्या होता है… ले भोसड़ी के… ले

भोसड़ी वाले ले… कमीने माँ के लौड़े चूत निवास के बच्चे… ले ले ले…’ अंजू रानी के मुख से

झाग निकलने लगी थी और मस्ती में चूर होकर उसके हाथ अब तेज़ी से चल रहे थे।

चुदासी अंजू रानी अब चूचियों से मेरा लंड मसलते मसलते गहरी सीत्कारें भर रही थी।

यह बात तो माननी पड़ेगी कि लंड को अंजू रानी के गोल गोल नरम चूचियों में फंस कर जो

रगड़ाई हो रही थी उसमें मज़ा तो ऐसा आ रहा था कि पूछो नहीं।

वास्तव में इतना आनन्द पहले किसी भी चुदक्कड़ ने नहीं दिया था।

अंजू रानी बार बार लंड को चाट के गीला करती और फिर उसे मम्‍मों में मथ डालती। अंजू

रानी ने अपनी टांगें चौड़ी कर ली थीं, शायद उसकी चूत धड़ाधड़ रस छोड़ रही थी।

तभी अचानक मेरे सिर में एक बिजली सी कौंधी और मैं ज़ोर की आह भरता हुआ बड़े ज़ोर

से झड़ा।

मोटे मोटे लावा के गरम लौंदे बड़ी तेज़ी से छूटे, अंजू रानी की ठुड्डी और उसका गला मेरे

लंड की मलाई से सन गया। अंजू रानी ने बड़े प्यार से लंड को चूचियों के बीच से निकाला

और लंड के नीचे वाली मोटी नस दबा दबा के लावा को अच्छे से निकल जाने दिया।

अंजू रानी के दोनों हाथ, चूचे भी वीर्य से पूरे सन गये। वो भी स्खलित हो रही थी, बार बार

टांगें फैला और सुकड़ा रही थी और ज़ोर ज़ोर से सीत्कार ले रही थी, साथ साथ में मुझे

गालियाँ भी दिये जा रही थी।

फिर उसने अपने गले, ठुड्डी और चूचियों पर फैला हुआ लावा उंगलियों से समेटा और उंगली

चाट चाट के सारा वीर्य मुँह में ले गई।
 
‘मां के लंड.. तेरा मक्खन तो यार मस्त, ज़ायकेदार है… क्या खाता है बहन के लौड़े तू… यार

मज़ा आ गया मलाई पी के… अच्छा अब तू बता कमीने तुझे मज़ा आया या नहीं? कभी यूं

लौड़ा फिराया था चूचों में? सच सच बोलना…मेरी चूत की कसम खा के बोल?’ अंजू रानी लंड

की मलाई चाटते हुए चटखारे लेकर बोली।

मैंने सिर हिला कर हामी भरी कि हाँ वाकई में मज़ा बेहद आया।

अंजू रानी ने कहा- चल मेरे हरामी राजा अब तू मेरी चूत को चूस कर और मज़ा ले… साले

माँ के लंड ने तीन तीन बार झाड़ दिया… अब तुझे चूत चूसने को दूंगी और स्वर्ण अमृत

पिलाती हूँ…ले बहन के लंड अब तू फुल ऐश कर कमीने…

अंजू रानी टांगें चौड़ी कर के बैठ गई और बोली- चल आजा राजा मेरी टांगों के बीच में…

‘मां के लंड.. तेरा मक्खन तो यार मस्त, ज़ायकेदार है… क्या खाता है बहन के लौड़े तू… यार

मज़ा आ गया मलाई पी के… अच्छा अब तू बता कमीने तुझे मज़ा आया या नहीं? कभी यूं

लौड़ा फिराया था चूचों में? सच सच बोलना…मेरी चूत की कसम खा के बोल?’ अंजू रानी लंड

की मलाई चाटते हुए चटखारे लेकर बोली।

मैंने सिर हिला कर हामी भरी कि हाँ वाकई में मज़ा बेहद आया।

अंजू रानी ने कहा- चल मेरे हरामी राजा अब तू मेरी चूत को चूस कर और मज़ा ले… साले

माँ के लंड ने तीन तीन बार झाड़ दिया… अब तुझे चूत चूसने को दूंगी और स्वर्ण अमृत

पिलाती हूँ…ले बहन के लंड अब तू फुल ऐश कर कमीने…

अंजू रानी टांगें चौड़ी कर के बैठ गई और बोली- चल आजा राजा मेरी टांगों के बीच में…

स्वर्ग है यहाँ…कमीने गांडू की औलाद… अब सोमरस पी मेरी बुर का…आ जल्दी से आजा

बहन चोद…

मैं फटाफट उसकी रेशमी, चिकनी और मुलायम लातों के बीच बैठ गया, अपना मुंह उसकी

चूत से सटा दिया और जीभ उस रसरसाती हुई चूत में घुसा दी।

‘हाय कुत्ते… पी…मेरा रस पी… भोसड़ी के… ले… ले… ले…’ इतना कहते हुए अंजू रानी ने स्वर्ण

रस की एक तेज़ धार मेरे मुख में छोड़ी।

मैं जल्दी जल्दी उस गर्म गर्म सुनहरे अमृत को पीने लगा, वास्तव में बहुत ही ज़्यादा स्वाद

आ रहा था, अंजू रानी सुर्र सुर्र करके धार मारे जा रही थी और मैं एक पिल्ले की तरह पिये

जा रहा था।

शायद बहुत देर से रोक कर रखा हुआ था, इसलिये अंजू रानी धारा को धीमे नहीं कर पा रही

थी लेकिन फिर भी मैं तेज़ तेज़ घूँट भर के पिए जा रहा था, मेरी चेष्टा यही थी कि एक भी

बूंद नीचे गिर के बर्बाद न हो।

अंजू रानी सीत्कार भरते हुए अपना पेट खाली कर रही थी और चुदास से बौरा कर दनादन

गालियाँ दिये जा रही थी।

उसके श्याम सुन्दर मुखड़े पर छाई तमतमाहट, माथे पर पसीने की बूंदें और प्यारे से मुंह से

निकलती हुई मस्त गालियाँ मेरी ठरक को फिर से चढ़ा रहे थे… उस पर उसकी रसीली चूत

से निकलती हुई अमृत की धार! यार क्या बताऊँ!! बस यूं समझ लो कि इतने ज़ोर से झाड़ने

के बाद भी लंड दुबारा से अकड़ चुका था और तुनक तुनक कर अपनी बेसब्री दिखा रहा था।

खैर कुछ देर में अंजू रानी का स्वर्ण अमृत खाली हो गया, उसने पांच सात बार लपलप करके

बची हुई बूंदें भी मेरे मुंह में जाने दीं।

सच में अमृत ही था… पीकर इतना आनन्द मिला कि वर्णन करना दूभर।

ज्यों ही स्वर्ण रस आना बंद हुआ मैंने जीभ पूरी चूत में दे दी और लगा अंदर घुमाने।

अंजू रानी मज़े में बिलबिला उठी और चूत में लबालब भरे हुए चूतरस के मदमस्त स्वाद से

मैं भी चिहुँक गया।

ज़ोर ज़ोर से जीभ पूरी चूत में डालकर मैं मधु पीने लगा। मैं जितना रस पीता जाता था, चूत

में उस से कहीं अधिक रस फफक फफक के निकले जाता था।

सो चूत पूरी की पूरी रस से भरी ही रहती थी। कभी मैं अंजू रानी के बुर में जितनी जीभ जा

सकती है उतनी घुसा के चूत का रसपान करता तो कभी मैं योनि के होंठों को चूसता और

बीच बीच में अंजू रानी की झांटों के गलीचे जैसे जंगल में नाक रगड़ रगड़ कर मज़ा लूटता।

कई बार मैंने उसके स्वर्णरस के छेद में जीभ की नोक से रगड़ा।

अंजू रानी तेज़ी से बढ़ती हुई उत्तेजना से बौरा सी गई थी, उसने अपनी जाँघें कस कर भींच

कर मेरा सिर जकड़ लिया।

मैं भी चूतरस के मस्त स्वाद से बेहाल होने लगा था। अंजू रानी के मुंह से अजीब अजीब सी

आवाज़ें आने लगी थीं, चूत से अमृत बहुत तेज़ बहाने लगा था, वो कभी टांगें भींचती तो

कभी खोलती, कभी वो मेरे बाल खींचती और कभी ज़ोर से मुक्के मारती।

मेरा लंड पूरे ज़ोर से अकड़ गया था और बेताब हो चला था, मैंने अपना मुंह अंजू रानी की

चूत से अलग किया और खड़ा होकर उसे गोद में उठा लिया, मैं बोला- सुन हरामज़ादी… अब

बेडरूम में चलते हैं… आगे का खेल उसी पलंग पर जहाँ मैं जूसी रानी को रोज़ चोदता हूँ…

अब आयेगा ना असली मज़ा!

अंजू रानी खुशी से फूल कर बोली- हाँ हाँ राजा… तेरी बीवी के बेड पर चुदाई करेंगे… राम…

मेरी तो सोच सोच के ही चूत आनन्दमयी हो गई… तू साले है बड़ा कमीना… अच्छा एक बात

मेरी मानेगा बहनचोद?

मैंने अंजू रानी के होंठ चूमकर पूछा- बोल रानी क्या कहती है….आज तो तू जो मांगेगी

मिलेगा।

‘ठीक है चूत के पिस्सू… चूत में लंड घुसा के फोन करना अपनी बीवी को… तू उससे कैसे बात

करता है मैं सुनना चाहती हूँ… बोल माँ के लौड़े करेगा ना?’

‘कमीनी कुतिया…करूंगा करूंगा…साली रंडी!’ इतना कह के मैंने उसके होंठों से अपने होंठ

चिपका लिये और उन्हें चूसता हुआ अंजू रानी को गोदी में लिये लिये अपने बेडरूम की ओर

चल दिया।

अंजू रानी ने अपने हाथ कस के मेरी गर्दन से लिपटा लिये थे और वो खूब मज़े से अपने

होंठ चूसवा रही थी।

बेडरूम में मैंने उसे बिस्तर पर पटक दिया और एक वहशी की तरह उस पर टूट पड़ा, उसके

चूचे भम्भोड़ता हुआ मैं बोला- अब तू हरामज़ादी नाच नाच के चुदवायेगी… बहन चोद आज

तेरे बदन का कचूमर निकाल के छोडूंगा… साली सड़कछाप रांड चार दिन तक चल नहीं

पायेगी।

‘हाँ कुत्ते तोड़ दे मुझे… मां चोद के रख दे साले मेरी… और ज़ोर से निचोड़ इन मादरचोद कुचों

को…’ अंजू रानी मस्ती में सिर इधर उधर हिला रही थी।

मैंने पूरी ताक़त से उसके मम्मे दबाने और निचोड़ने शुरू किये, मैं जितना ज़ोर से कुचलता

था अंजू रानी उतनी ही मस्त हुए जा रही थी। दिख रहा था कि अब वो चुदने को व्याकुल हो

रही है।

मैंने लंड को उसकी रसरसाती हुई बुर के मुंह पर जमाया और एक ही शॉट में पूरा लंड घुसेड़

दिया, चूत काफी टाइट थी और खूब गरम भी हो रही थी, लौड़े को यूं लगा कि किसी गरम

रस से भरी हुई, बेहद संकरी व नरम नरम ग़ुफा म़ें चला गया हो।

ज्यों ही लंड चूत म़ें घुसा, अंजू रानी ने एक ज़ोर की सीत्कार भरी जबकि मैंने दुबारा से उसके

कुचमर्दन का काम शुरू कर दिया।

मैंने ज़ोर ज़ोर से अंजू रानी की निप्पलों को उमेठा, उन्हें उंगलियों म़ें दबा के कस के नोचा

और धीरे धीरे धक्के मारने लगा। अंजू रानी ने अपनी टांगें कस के मेरी कमर पर लपेट लीं

और दोनों हाथ मेरे कंधों पर जमा दिये।

‘बहन के लौड़े….बिना बताये ही ठूंस दिया इस मादरचोद लंड को… हाय हाय हाय… कमीना

बिल्कुल फंसा हुआ है चूत म़ें… हाय हाय हाय… कुत्ते बहुत मज़ा आ रहा है… तू ठहर बहनचोद

चूतनिवास के बच्चे… आज तेरे इस संडमुसंड का मैं बैंड बजाऊँगी… हाय हाय हाय…

बस यूं ही पड़ा रहने चूत म़ें… बहुत मज़ा आ रहा है… धक्के जब मैं कहूँ तब लगाना… बस तू

चूचे तोड़ता जा… उखाड़ के अलग कर दे मादरचोदों को… हाय हाय… मेरे राजा राजा राजा… मैं

तो मर जाऊँ तुझ पर!’

अंजू रानी बेतहाशा उत्तेजित होकर क़ुछ क़ुछ बके जा रही थी और मैं दबादब उसके मतवाले

मम्मे भम्भोड़े जा रहा था। अब मैं धक्के नहीं मार रहा था। जब यह हरामज़ादी चाहेगी, धक्के

मार दूँगा, मुझे कौन सी जल्दी है। यह तो मानना पड़ेगा कि अंजू रानी किसी भी मर्द को

रिझाने और उसे चोदने की कला म़ें पारंगत है।

मैं अंजू रानी के ऊपर लेट गया और लगा उसके होंठ चूसने। कभी ऊपर वाला चूसता तो कभी

नीचे वाला।

लंड को उसकी चूत म़ें घुसाये घुसाये मैं सिर्फ तुनके मार रहा था।

कुछ ही देर में अंजू रानी की ठरक इतनी बढ़ गई कि उसने मेरे होंठों से अपने होंठ अलग

करके सी सी करना शुरू कर दिया। उसकी अधखुली आँखों में उत्तेजना के नशे के मादक

गुलाबी डोरे तैरने लगे थे।

सीत्कार भरते हुए अंजू रानी ने अपनी कमर ऊपर नीचे करके धक्के लगाने की कोशिश शुरू

कर दी। उसने अपनी टांगें उछाल कर अपनी रेशमी जाँघों में मेरे सिर को जकड़ लिया।

‘चोद चूतनिवास चोद… धक्के मार मार के आज फाड़ दे चूत को… हरामज़ादी ने दुखी कर

रखा है… हाय हाय अब जल्दी कर कुत्ते… अब सबर नहीं हो रहा…’ अंजू रानी का नशा अब

काबू से बाहर होने लगा था।
 
मैंने लंड को बाहर निकाला और उसकी टांगें सिर से अलग करके उसे पलट दिया। फिर उसके

चूतड़ ऊपर को उठा के पीछे लंड लपलपाती हुई चूत में ठोक दिया। अंजू रानी ने एक चीख

मारी और कस के चूत को टाइट करके लंड को भींच लिया।

‘उठ कुतिया… अब तू एक कुतिया जैसे ही चुदेगी… उठ ऊपर को… बहन की लौड़ी अपनी

कोहनी और घुटनों पर टिक जा और चुपचुपा एक गरम कुतिया जैसे चुदवाये जा… अगर लंड

बाहर निकल गया तो कमीनी तेरी गाण्ड फाड़ दूंगा.. उठ अब रंडी की औलाद!’

अंजू रानी एक एक्सपर्ट चुदक्कड़ थी। बड़े आराम से उसने लौड़ा बाहर निकलने दिये बिना ही

खुद को पहले कोहनी के बल उठाया और फिर नितंब उठाते हुए घुटनों के बल हो गई।

मैंने भी खुद को साथ साथ उठाया ताकि लंड चूत से बाहर ना निकले।

इसके बाद मैंने पीछे से उसके मम्मे जकड़ के ऐसा दबाया, निचोड़ा और मसला है कि पूछो

मत।

कुछ देर के बाद मैंने चूचियों को राहत देने के लिये अंजू रानी के चूतड़ मसलने शुरू किए।

यार रेशम जैसे मक्खनी चूतड़ !!! उनको मसल मसल के मज़े से बुरे हाल हो गया।

बस फिर मैंने यूं ही बारी बारी से अंजू रानी का कुचों और नितम्बों को बहुत देर तक मसला

जिससे अंजू रानी ठरक से पगला गई।

अब वो चोदने की गुहार लगाने लगी, उसकी चूत से रस तो पहले ही से बहे जा रहा था-

राजा क्या आज मेरी जान निकाल के रहोगे… अब तूने देर की तो कसम से मर जाऊँगी…

अब चोद भी दे धड़ाम धड़ाम… चूत में आग लगी है राजा… दे कमीने दे ज़ोर का धक्का! अंजू

रानी बेहाल हालत में बोली।

‘नहीं कमीनी रांड… जब तक तू भीख नहीं मांगेगी तब तक मैं धक्के नहीं मारूंगा… शुरू में तू

कह रही थी ना मुझ से भीख मंगवाएगी चूत लेने की… ले बहन चोद… अब तू भीख मांग…

साली रंडी की औलाद… मांग भीख… एक धक्का फ्री में देता हूँ… ले बहन की लौडी… एक

धक्का ले.’ इतना कह के मैंने एक ज़ोरदार धक्का लगाया।

अंजू रानी मज़े से चीख पड़ी और गिड़गिड़ाते हुए कहने लगी- हाँ राजा हाँ… प्लीज़ प्लीज़ अब

और ना सताओं अपनी अंजू रानी को… हाथ जोड़ती हूँ राजा के पैरों में… प्लीज़ ज़ोर ज़ोर से

चोद डालो… प्लीज़ राजा… तू जो कहेगा मैं करूँगी… उमर भर तेरी रखैल बन के रहूंगी… बस

तू अब देर न कर!

इतना सुन कर मैंने दनादन धक्के पे धक्का ठोकना शुरू किया, मैंने उसके मम्मे जकड़ रखे

थे और उन्हें जकड़े जकड़े ही मैं धक्के लगा रहा था ताकि हर धक्के में चूचा भी कस के

मसला जाये।

अंजू रानी के बाल बिखर के इधर-उधर लहरा रहे थे, उसका सिर हर धक्के पर ऊपर नीचे हो

जाता था, वो मदमस्त होकर किलकारियाँ मारते हुए चुदवा रही थी। और क्यों ना हो, वो

बेचारी तीन चार महीने से सूखी भी तो पड़ी थी बिना चुदे। बड़े समय के बाद आज उसे मौका

मिला था कि वो हचक हचक के चोदी जाये।

उसकी चूत लगातार रस छोड रही थी, हर धक्के में थोड़ा सा रस और निकल आता, रस हर

धक्के में थोड़ा सा चूत के बाहर भी सरक आता।

अंजू रानी की जाँघें और मेरी झांटें चूत के पानी से बिल्कुल भीग गयी थीं, हर धक्के पर खूब

फचाक फचाक की आवाज़ें कमरे में गूंज उठतीं।

अंजू रानी मुंह से ‘हैं हैं हैं’ की आवाज़ें निकल रही थी, हम दोनों की साँसें फूल चुकी थीं।

अंजू रानी हाँफते हुए बोली- राजा… बस ऐसे ही चोदे जा… साले कुत्ते… बड़ा मस्त चोदता है

गांडू तू… हाँ हाँ हाँ… यूं ही धक्के दे… ठीक ठीक है मेरे कुत्ते… हैं हैं हैं… फाड़ दे मेरी चूत

कमीने… और ज़ोर से पेल बहन चोद लौडा… हाय मैं मर जाऊं… बहुत बड़ा मादरचोद है तू

कमीने!

मैंने भी हाँफते हुए कहा- तेरी माँ को भी चोदूंगा हरामज़ादी… रंडी मादरचोद… ले बहन की

लौड़ी… ले ले ले ले कमीनी कुतिया आज बनाता हूँ तेरी चूत की चटनी… बहनचोद चुदक्कड़

रांड… ले ले ले… लिये जा इस लंड को तेरी चूत में!

हर बार मैं ले ले कहता हुआ ज़ोरदार धक्का ठोकता और अंजू रानी सीत्कार लेते हुए, मज़े में

चूर होते हुए चुदवाये जाती।

यूं ही गालियाँ बकते हुए करीब 30-35 मिनट तक अंजू रानी की जमकर चूत मारी गई।

मैंने अंजू रानी को एक धक्का इतने ज़ोर से मारा कि वो मुंह के बाल बिस्तर पर ढह गई।

मैंने एक गुलाटी मारी और उसे नीचे करके खुद ऊपर हो गया, फिर मैंने दनादन धक्के पे

धक्के लगाने शुरू किये।

कमरे में चुदाई की पिच्च पिच्च, अंजू रानी की ‘हैं हैं आह आह ओह ओह’ और मेरी ‘हूँ हूँ हूँ’

की ज़ोर ज़ोर की आवाज़ें भरी हुई थीं।

कोई भी सौ मीटर दूर से भी सुन कर समझ सकता था कि यहाँ ज़बरदस्त चुदाई चल रही है।

हम पूरी तरह से बदहवास हो गये थे, अंजू रानी के बाल बिखर गये थे, उसके माथे पर

पसीना आ गया था, आँखें बंद और मुंह थोड़ा सा खुला हुआ था। अपने होशोहवास खोकर अंजू

रानी चुदने का अलौकिक आनन्द लूट रही थी।

तभी अंजू रानी ने एक किलकारी मारी, बड़े ज़ोर से हाय हाय करते हुए मेरे बाल जकड़ कर

खींचे और टांगें मेरी कमर में लिपटा कर ज़ोर ज़ोर से पैर मेरे चूतड़ों पर बरसाये।

मैं समझ गया कि वो झड़ने को है।

अंजू रानी के चूचे अपने पंजों में जकड़कर मैंने धड़ाधड़ कई धक्के पूरी ताक़त से मारे, एक

ज़ोरदार सीत्कार के साथ वो झड़ी और चूत से रस कि बौछार छोड़ते हुए एक दम निढाल सी

होकर हाय हाय करते हुए अपनी मां को याद करने लगी।

तब तक मैं भी बेहाल हो चुका था, चूत के गर्म गर्म रस से और भी उत्तेजित हो चुका था, बड़े

ज़ोरों से अंजू रानी की चूचियाँ मसलते हुए मैं भी स्खलित हो गया।

लंड से गोली की रफ़्तार से छूटे वीर्य के बड़े बड़े लौंदों से अंजू रानी कि चूत भर गई, राजा

राजा कहते हुए अंजू रानी ने मुझे खींच के लिपटा लिया और आँखें मूंद कर चुपचाप पड़ गई,

मैं भी उसके ऊपर मूर्छित सा होकर लेट गया।

हम काफी देर तक ऐसे ही पड़े रहे और अपनी उखड़ी हुई साँसें काबू में करते रहे। जब बदन

में चुदाई से चढ़ी गर्मी शांत हो गई, साँसें ठीक हो गयीं और पसीना सूख गया तो अंजू रानी

धीमे से फुसफुसाते हुए बोली- राजा आज तुझे चोदकर आनन्द आ गया… कसम से कहती

हूँ… आज मैं कितनी बार झड़ी हूँ बता नहीं सकती… बस यूं समझ ले कि मैं झड़े गई, झड़े

गई और बस झड़े गई… सबसे ज़्यादा मज़े की बात तो यह रही कि हमने तेरे बिस्तर पर

चोदा…’ इतना कहकर अंजू रानी ने बड़े प्यार से मुझे चूमा।

मैंने भी उसे चूमते हुए कहा- रानी तू भी बहुत मस्त चोदती है… तूने आज जो मज़ा दिया है

गाना बजाकर और झूम झूम कर… यार मज़े के मारे गांड़ ही फाड़ दी मेरी… अच्छा अब बता

अब और क्या मज़ा देगी?

‘साले अब क्या जान लेगा कमीने मेरी… सारा शरीर दुख रहा है… कितने ज़ोर से चूचियाँ

कुचली हैं बहनचोद… छूते ही दर्द से जान निकलने को होती है… हरामी चूत के पिस्सू…

लेकिन कमीने तूने मज़ा भी बेहद दिया… चल तुझे चूस चूस के झाड़ने का लुत्फ देती हूँ…

सच में चुदाई की हिम्मत नहीं हैं… नहीं तो बार बार चुदवा कर मज़े लूटती… बोल कैसे

चुसवायेगा? लेटे लेटे या बैठ कर? जैसे तेरी मर्ज़ी हो वैसे ही चूसूँगी।

मैंने कहा- अंजू रानी जैसे तेरी इच्छा हो तू वैसे ही चूस। मुझे तो लौड़ा चुसवाने का स्वाद

मिलेगा फिर चाहे लेते हुए मिले या खड़े हुए क्या फर्क पड़ता है। इतनी देर में लंड भी अकड़

चुका था।

अंजू रानी ने मुझे बिस्तर पर ऐसे लेटने को कहा जिससे मेरी टांगें बेड से नीचे रहें, पैर फर्श

पर टिके रहें। उसने मेरी टांगें फैला दीं और खुद भी फर्श पर घुटनों के बल बैठ गई।

फिर उसने लंड को में ले लिया और होंठों को कस के लौड़े पर चिपका दिया।

लंड अंजू रानी के गरम गरम मुंह में जाते ही फुनफुनाने लगा और उसके मुंह के भीतर ही

तुनके मारने लगा।

तब अंजू रानी ने जीभ से धीरे धीरे लंड के टोपे पर मारना शुरू किया तो यारों मेरे बदन में

यूं लगा कि बिजली की लहरें नीचे से ऊपर और ऊपर से नीचे भाग रही हैं। उसकी जीभ की

ठोकर से बड़े ज़ोर की सरसराहट हो रही थी।

अंजू रानी होंठों को आगे पीछे करके लंड को मुंह से चोद रही थी और साथ साथ जीभ सुपारे

से छुआ छुआ के मुझे पागल किये जा रही थी।

यकायक अंजू रानी ने मुंह से लंड को बाहर निकल कर अपना मुंह मेरी गाण्ड से सटा दिया

और गीली जीभ से छेद के इर्द गिर्द चाटा। इतना मज़ा आया कि जिसका कुछ हिसाब नहीं।

थोड़ी देर मेरी गाण्ड चाट के अंजू रानी ने फिर से लौडा मुंह में ले लिया और लगी जीभ से

छुआ छुआ के बेइंतिहा मज़ा देने लगी।

मैं आँखें मूंद के जन्नत का आनन्द लूटने लगा कि तभी अचानक अंजू रानी ने एक उंगली

मेरी गाण्ड में तेज़ी से पूरी की पूरी घुसा दी। उंगली गाण्ड में जाते ही ऐसी आग सी लगी

बदन में कि एक ज़ोर की चीख मारकर मैं तपाक से झड़ा।

‘दन दन दन’ लंड ने पूरा का पूरा मसाला अंजू रानी के मुंह में छोड़ दिया। बहुत दिनों के बाद

किसी लड़की ने गाण्ड में उंगली घुसा के मुझे झाड़ा था। मेरी वर्षों पहले की गर्ल फ्रेंड स्वर्गीया

चंदा रानी यह बहुत किया करती थी। जब उसकी मुझे जल्दी से झाड़ने की मर्ज़ी होती थी तो

वो यही करती थी, गाण्ड में तेज़ी से उंगली घुसेड़ती थी और मैं झड़ जाता था।

चंदा रानी चुदाई की एक महान खिलाड़िन थी। अब लगा कि अंजू रानी भी टक्कर की

खिलाड़िन है चोदम-चुदाई के खेल की।

अंजू रानी बड़े मज़े से सारा मक्खन पी गई और चटखारे लेते हुए बोली- चूतनिवास मज़ा आ

गया… बोल तुझे भी पूरा मज़ा आया कि नहीं?

‘बहुत मज़ा आया मेरी कुतिया अंजू रानी… तूने गाण्ड में क्यों उंगली दी? हराम की औलाद, मैं

उंगली घुसते ही झड़ गया।’

‘साले मादरचोद… इतना तुझे मज़ा आया कि तूने ज़ोर की चीख मारी कि सारे पड़ोसियों ने

भी सुन ली होगी… अब झड़ झड़ा के बहन का यार शिकायत कर रहा है… कमीना कुत्ता कहीं

का.’ अंजू रानी ने जवाब दिया।

यार इस चूत की भाषा तो मस्त कर देने वाली थी, मैंने उसे खींच के जकड़ लिया और कस

के एक गहरा चुबन उसके प्यारे होंठों का लिया।

अंजू रानी ने भी मस्त होकर लिपट लिपट कर चुम्बन दिया, फिर उसने बड़े ज़ोर से मेरे

चूतड़ों पर दांत मार के काटा।

मैंने दर्द से आह भरते हुए पूछा- रानी, यह किस खुशी में?

अंजू रानी ने इतराते हुए कहा- राजा यह तेरी सज़ा है…मैंने कहा था और तूने माना था कि

चूत में लंड घुसा के तू जूसी रानी को फोन करेगा और मैं तेरे बात करते हुए चोदूंगी… तूने

कहाँ किया उसे फोन… कमीने मादर चोद… अगर फोन नहीं करना था तेरी गांड फटती थी तो

पहले ही माना कर देता… साला रांड की औलाद।

‘अरे नहीं रानी…उस समय ध्यान ही नहीं रहा…कमीनी, तू नहीं याद दिला सकती थी?’ मैं

खीज के बोला।

अंजू रानी ने हंसते हुए कहा- हाय मेरा राजा… बुरा ना मान जानू मैं तो तुझे बना रही थी…

असल में हम दोनों ही जोश में भूल गये थे कि तेरी बीवी को तुझे तब फोन करना है जब तू

मेरी चूत में लौड़ा डाले हुए हो… कितना मज़ा आता ना… वो तुझसे कुछ पूछती और मैं

झकास एक तगड़ा सा धक्का मारती.. कोई बात नहीं यार, अगली बार यह काम भी कर

लेंगे… अच्छा राजा अब मैं चलती हूँ… कल जॉब जॉइन करनी है और तेरे दोस्त की चुदाई

करनी है… तीन चार दिन के बाद फिर मिलेंगे।

मैंने अंजू रानी को पांच हज़ार रुपये दिये जो उसने मुझसे मिलने की तैयारी में खर्च किये थे,

फिर एक ज़ोरदार आलिंगन में बंध कर और एक लम्बा और गहरा चुम्‍मा लेकर हम अलग

हुए।

अंजू रानी ने अपने बाल ठीक किये और कपड़े पहने और बाय-बाय कर के चली गई।

यह कथा यहीं समाप्त!
 
पारिवारिक चुदाई की कहानी

कहानी शुरू करने से पहले मैं आपका परिचय से करा देती हूँ… मेरा नाम सोनाली है, उम्र चालीस साल है. मेरे पति

का नाम रवि है, रवि एक प्राइवेट कंपनी में जॉब करते हैं और हर महीने टूर के लिए कुछ दिन घर से बाहर रहते हैं।

मेरे दो बच्चे हैं, एक बड़ा लड़का रोहन अठारह साल का है और मेरी एक बेटी अन्नू उससे दो साल छोटी है।

मैं आपको अपने बारे में बता दूँ कि मेरा रंग एकदम गोरा है और मेरा 36-28-36 का फिगर बहुत ही कातिलाना

है… मेरे स्तन अभी तक कसे हुए हैं और उन पर मेरे लाल निप्पल ऐसे लगते हैं जैसे कि रसगुल्ले पर गुलाब की पत्ती

चिपकी हो… मेरे नितम्ब भी बहुत कसे हुए और गोल हैं, जो भी उन्हें देखता है, उनके लंड उनकी पैंट में ही कस जाते

हैं।

मैं आपको बता दूं कि मेरी बढ़ती उम्र के साथ मेरा बदन और भी ज्यादा कामुक और हसीन लगने लगा है क्योंकि मैं

अपने शरीर पर अच्छा खासा ध्यान देती हूँ, निरंतर योग और व्यायाम से मैंने अपने शरीर को ऐसा बनाया है.

समय-समय पर निखार के लिए मसाज पार्लर भी जाती हूँ।

आपको कहानी के पात्रों का परिचय करा देती हूँ… आलोक मेरे जेठ जी का लड़का है और उसकी बड़ी बहन स्वाति

की अभी हाल ही में शादी हुई है।

स्वाति की शादी के बाद स्वाति और उसके पति अनिल ने हनीमून ट्रिप प्लान किया था, उनके साथ आलोक, रोहन,

अन्नू और मेरी बड़ी बहन का लड़का रोहित भी जा रहे थे। क्योंकि इस फैमिली ट्रिप में केवल बच्चे ही थे तो परिवार

वालों ने उनके साथ किसी बड़े सदस्य को भी भेजना जरूरी समझा तो उन्होंने बच्चों के साथ मेरे और रवि के जाने की

बात कही… पर रवि अपने ऑफिस के काम के चलते हुए बिजी थे तो उन्होंने जाने से मना कर दिया।

अब मुझे ही उन लोगों के साथ जाना था क्योंकि बच्चों ने ही मुझे ले जाने के लिए परिवार वालों से जिद की थी.

मैं आप सबको बता चुकी हूँ कि मैं अपने घर वालों की हमेशा से ही लाडली रही हूँ… खासकर के बच्चों की… क्योंकि

मैं उन पर किसी भी तरह की रोक टोक नहीं लगाती हूँ!

अगले दिन सुबह हम लोगों की ट्रेन थी… तो रात को सब लोग मेरे घर पर आ गए, हम लोगों ने खाना खाया और

फिर सब लोग सोने चले गए।

रोहित और आलोक, रोहन के साथ उसके कमरे में सो गए और स्वाति अनिल के साथ हॉल में सो गई.

मेरा रूम उनके बाजू में ही था… रात को जब सामान पैक करने के बाद मैं बिस्तर पर लेटी, तभी आलोक आ गया।

उस वक्त मैं नाइटी में थी… और जैसा आप लोगों को पता ही है कि मैं नाइटी के अंदर कुछ नहीं पहनती हूँ, जिस

वजह से मेरा एक एक अंग गाउन में उभर रहा था।

मैं और आलोक एक दूसरे को देख कर मुस्कुराने लगे… वह भी केवल हाफ पैंट में ही था.

रवि भी हमारे बगल से ही बैठे हुए थे.

तभी आलोक बोला- चाची, मुझे थोड़ा दूध चाहिए!

तो मैं उठ कर किचन की तरफ जाने लगी।

आलोक भी मेरे पीछे-पीछे किचन में आ गया. मैं आलोक के लिए दूध गर्म कर रही थी, तभी आलोक ने पीछे से

आकर मुझे अपनी बाहों में जकड़ लिया और मेरे गाउन के अंदर हाथ डालकर मेरे मम्मों को मसलने लगा।

आलोक का लंड बिल्कुल तन चुका था और मेरी गांड की दरार से टकरा रहा था.

तभी मैं पीछे पलटी और आलोक से कहा- अभी नहीं आलोक, कोई देख लेगा!

तो आलोक बोला- ठीक है चाची जी… पर एक गुड नाईट किस तो मिल ही सकती है ना?

और इतना बोलकर आलोक ने अपने होंठ मेरे होंठों के ऊपर रख दिए और मेरे होंठों को चूमना शुरू कर दिया।

हम दोनों एक दूसरे होठों का रसपान कर रहे थे… एक दूसरे को चुंबन करने में हम इतने मशगूल हो गए कि गैस पर

रखा हुआ दूध भूल गए, तभी दूध गर्म होकर बाहर गिरने लगा और फिर हम दोनों एक दूसरे से अलग हुए.

जाते-जाते आलोक ने मेरी चूत को सहला दिया जिससे मेरे अंदर चुदाई का कीड़ा गुनगुनाने लगा।

आलोक को दूध दे कर मैं वापस कमरे में आ गई और गेट बंद कर लिया.

इससे पहले कि मैं बिस्तर पर जाती, रवि मेरे पास आए और मुझे गेट के सहारे टिका कर मेरे होठों को चूमने लगे।

मैंने कहा- आराम से करो, बच्चे भी पास में ही हैं, कुछ सुन लिया तो जाने क्या सोचेंगे!

रवि ने कहा- बच्चे क्या सोचेंगे… वे भी अब समझदार हो गए हैं, उन्हें पता है कि एक पति और पत्नी बंद कमरे में क्या

करते हैं!

मैंने रवि को पीछे धक्का देते हुए खुद से अलग कर दिया और बिस्तर पर जाकर लेट गई। मैंने रवि से कहा- तुम्हें शर्म

नहीं आती… खुद इतने बड़े हो गए हो और बच्चों जैसी बातें करते हो… स्वाति और अनिल अभी हॉल में सो रहे हैं, वे

सुन लेंगे तो क्या सोचेंगे?

रवि ने कहा- कुछ नहीं सोचेंगे… बल्कि हमारी चुदाई की आवाज सुनकर उनकी चुदाई शुरू हो जाएगी।

मैंने रवि को हल के स्वर में डांटते हुए कहा- चुप रहो तुम…

रवि भी बिस्तर पर आकर मेरे पास लेट गए और कहने लगे- अब ज्यादा नखरे मत दिखाओ… वैसे भी अब अगले 10

दिन तक में बिना तुम्हारी चुदाई के ही रहने वाला हूँ…

मेरा भी चुदने का मूड था तो मैंने कहा- ठीक है बाबा… नाराज मत हो… कर लो अपनी मन की इच्छा पूरी… पर

आराम से करना।

मेरे इतना बोलते ही रवि मेरे गाउन को उतारने लगे और अगले ही पल में उन्होंने मुझे ऊपर से लेकर नीचे तक पूरी

नंगी कर दिया… और खुद भी बिल्कुल नंगे होकर मेरे ऊपर लेट गए।

रवि इतने उत्तेजित थे कि कुछ सुनना ही नहीं चाहते थे, मेरे ऊपर लेटते ही उन्होंने मेरे शरीर को चूमना शुरू कर

दिया. पहले तो रवि ने मेरे गालों पर किस करना शुरू किया और फिर जैसे ही उन्होंने मेरे होंठों को चूमा तो मैं भी

उत्तेजित होने लगी।

काफी देर तक रवि ने मेरे होंठो को चूमा, इस बीच रवि के हाथ लगातार मेरे मम्मों का मर्दन किए जा रहे थे. इस

लगातार मर्दन से मेरे मम्मे एकदम सख्त और लाल पड़ गए थे, मैं कराह रही थी।

रवि का लंड खड़ा हो चुका था और मेरी चूत पर रगड़ खा रहा था जिससे मेरी चूत गीली होने लगी.

जैसा कि आप सब लोगों को पता ही है कि मेरे मम्में मेरे शरीर का मुख्य आकर्षण केंद्र हैं तो इसलिए चुदाई के दौरान

सबसे पहले मेरे मम्मों का ही बलात्कार किया जाता है और मुझे भी यह पसंद है।

रवि ने मेरे मम्मों को अपने मुंह में ले लिया और चूसने लगे, जब रवि ने मेरे निप्पल काटे तो मैं सनसना गई… मैं

सिसकार कर बोली- और जोर से काटो!

फिर रवि के हाथ धीरे धीरे मेरी टांगों की तरफ बढ़ने लगे और जब रवि ने मेरी गोल मोते चूतड़ पकड़ कर दबाए तो

मैं बोली- मेरी चूचियों को और जोर से चूसो।

मुझे बहुत मजा आ रहा था क्योंकि रवि मुझे बहुत ही प्यार से चोदते हैं, वे मुझे चोदते समय बिल्कुल भी दर्द का

अनुभव नहीं होने देते.

कुछ देर तक रवि ने मेरे मम्मों को भरपूर तरीके से चूसा और दबाया. मेरे पति को चूत चाटना पसंद नहीं है और ना

ही वह मुझसे अपना लंड चूसवाते हैं।

फिर रवि मेरे ऊपर से उठ गए और गद्दे के नीचे से कंडोम निकालकर अपने लंड पर चढ़ाने लगे पर मैंने उन्हें कंडोम

चढ़ाने से रोक दिया… आज मेरा मूड कुछ अलग ही था आज मैं रवि के लंड को चूसकर उनको बहुत मजा देना

चाहती थी।

रवि कंडोम का पैकेट लेकर मेरे पास आए और मुझसे कहने लगे- क्या हुआ सोना… मुझे रोक क्यों दिया?

मैंने हंसते हुए उनकी बात को अनसुना कर दिया और फिर उनका हाथ पकड़ कर रवि को बिस्तर पर लेटा दिया।

रवि पीठ के बल बिस्तर पर लेटे हुए थे, मैंने उनके होठों पर एक किस की और फिर उनकी टांगों के बीच में आकर

घोड़ी बनकर बैठ गई. मेरे भरे हुए नग्न शरीर के कारण रवि का लंड सातवें आसमान की ऊंचाइयों को छू रहा था.

मैंने रवि के लंड को अपने हाथ में लिया और उसे अपने हाथों से सहलाते हुए अपने मुंह में ले लिया।

रवि को मेरा ऐसा करना बड़ा ही अजीब लगा क्योंकि मैं बहुत कम ही उनका लंड चूसती थी. पर रवि समझ गए थे

कि मैं यह सब इसलिए कर रही हूँ ताकि अगले कुछ दिनों तक रवि को मेरी कमी ना खले।

मैं रवि के लंड को अपने मुंह में लेकर चूस रही थी, मेरे थूक की वजह से रवि का लंड पूरा गीला हो चुका था जिस

कारण गूँ-गूँ और फिचर-फिचर की आवाज़ आ रही थी.

जवाब मैं रवि ने भी अपने लंड से मेरे मुंह को चोदना शुरू कर दिया।

फिर रवि ने कहा- मैं और इंतज़ार नहीं कर सकता सोना… मैं बहुत उत्तेजित हूँ… अब मुझे चोदने दो!

मैंने भी देर ना करते हुए रवि के लंड को अपने मुंह से बाहर निकाला और उनके बगल में जाकर सीधी लेट गई.

हालांकि मेरे चूसने की वजह से रवि का लंड बिल्कुल गीला था…पर फिर भी उन्होंने अपने लंड पर कंडोम चढ़ा

लिया… चुदाई के दौरान रवि सुरक्षा का पूरा ध्यान रखते हैं।

फिर रवि ने अपने दोनों हाथों से मेरी टांगों को फैलाया और अपने लंड को मेरी चूत के छेद पर रखकर अंदर की

तरफ धक्का देने लगे.

रवि का लंड रोहन और आलोक की अपेक्षा थोड़ा बड़ा और मोटा है इसीलिए मुझे रवि के साथ चुदाई के दौरान

थोड़ा सा मीठा दर्द महसूस होता है। रवि का लंड मेरी चूत में घुसते ही मैं कराह उठी और बोली- उईईई… माँ…

उम्म्ह… अहह… हय… याह… जरा धीरे… रवि… आवाजें बाहर जा रही होंगी.

रवि को इन सब से कुछ लेना-देना नहीं था, वे बेफिक्र होकर मेरी चुदाई कर रहे थे।

उत्तेजना के कारण मेरा शरीर अकड़ने लगा और मैं झड़ने लगी… मेरी चूत से रस की धार बाहर बहने लगी पर रवि

का लंड अभी भी मेरी चूत के अंदर बाहर हो रहा था.

चुदाई के कारण हो रही ‘फच-फच’ की आवाजों से पूरे रूम का वातावरण गर्म होने लगा.

तभी रवि ने मुझे उठाया और उठाकर घोड़ी बना दिया।

हमारे बेड के सामने ही ड्रेसिंग टेबल रखी हुई थी, जब मैं घोड़ी बनी तब मेरा मुंह ड्रेसिंग टेबल के ही सामने था और

मैं शीशे में ऐसे ही अपने नंगे बदन को निहारने लगी.

मेरे बाल खुले हुए थे और मेरे बाए कंधे की तरफ थे… मेरे दोनों मम्मे मेरे वक्ष से नीचे की तरफ लटक रहे थे।

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तभी रवि पीछे से मेरी गांड की तरफ गए, अपने लंड को मेरी चूत पर रख दिया और अपना पूरा लंड एक ही बार में

मेरी गुलाबी चूत में पेल दिया.

‘हाय…! रवि…’ मेरे मुँह से आनन्द भरी सीत्कार निकल गई और मैं उस धक्के से आगे की तरफ हो गई।

रवि मुझे चोदते हुए बोले- सोना… तुम्हारी चूत तो बहुत गर्म हो रही है.

और फिर अपना लंड मेरी चूत के अंदर बाहर घुसेड़ने लगे और मैं अपने नंगे मम्मे और कमर को हिलते हुए शीशे में

देख रही थी… मैं आह भरते हुए कराहने लगी- हाँ… और अंदर… रवि!

रवि भी अपने लंड को हर धक्के के साथ मेरी चूत की गहराइयों में उतार रहे थे.

लगातार चुदाई के कारण मैं दोबारा झड़ने लगी और चिल्लाते हुए बोली- चोदो… मुझे… आहहहह… मेरी चूत…

हम चुदाई में इतने लीन हो गए थे कि यह भी भूल गए थे कि हमारे घर पर मेहमान आए हुए हैं।

रवि ने पीछे से अपने हाथों से मेरे मम्मों को मसलना शुरू कर दिया… मुझे रवि के हाथ अपनी छाती पर आग की

तरह महसूस हो रहे थे जिस वजह से मैं और गर्म होने लगी। मेरी चूत के अंदर रवि के लंड के झटके और तेज़ हो गए

और मैं फिर से चीखने लगी- और… जोर से चोदो मुझे रवि… आहहहह… मैं फिर से झड़ रही हूँ… जानू… अपना यह

पूरा लंड मेरी चूत में पेल दो!

मेरी बेहद गर्म और टाइट चूत उनके लन्ड को कसकर जकड़े हुए थी… पर वे अभी तक झड़े नहीं थे और उनका लंड

अभी भी मेरी चूत के अंदर ही था।

थोड़ी देर तक धक्के मारने के बाद रवि बोले- मैं झड़ रहा हूँ…

और फिर रवि अपने गर्मागर्म रस की पिचकारी चूत के अंदर कंडोम में ही छोड़ने लगे.

जब रवि पूरी तरह से स्खलित हो गए तो उन्होंने अपना लंड मेरी चूत से बाहर निकाल दिया और फिर उठकर

बाथरूम चले गए।

मैं वैसे ही नंगी बिस्तर पर उल्टी लेटी रही.

मैं बहुत थक चुकी थी.

जब रवि बाथरुम से बाहर आए तो उन्होंने मुझे उठाया और फिर मैं भी उठकर बाथरूम जाकर अपनी चूत को साफ

करने लगी।

वापस आकर मैंने केवल अपना गाउन पहना और फिर यह देखने के लिए कि सब लोग सो गए या नहीं… मैं दरवाजा

खोल कर बाहर गई.

और सब तो सो गए थे… पर स्वाति और अनिल अभी तक नहीं सोए थे… वे कुछ बातें कर रहे थे।

मैंने उन दोनों से कहा- साढ़े बारह बजने को हैं… और तुम लोग अभी तक नहीं सोए? हमें कल जल्दी जाना है…

तो वे दोनों मुस्कुराने लगे और स्वाति मुझसे हंसते हुए बोली- चाची… आप क्यों नहीं सोई अभी तक?

उनकी मुस्कुराहट देखकर मैं सब समझ गई, मैंने स्वाति से कहा- बस थोड़ा सामान पैक कर रही थी… अब सोने ही

जा रही हूँ!

और फिर मैं उन लोगों को गुड नाइट बोलकर रूम में आ गई और सो गई।

अगले दिन सुबह मैं जल्दी उठ गई और फिर सब लोगों को उठा दिया, हम सब लोग तैयार हुए और फिर रवि हम

सब को रेलवे स्टेशन छोड़ आए.

हमारी ट्रेन सुबह छह बजे थी.

थोड़ी देर बाद ट्रेन आ गई और हम लोग ट्रेन में बैठ गए।

रात को दस बजे हमारी ट्रेन नैनीताल पहुँच गई… हमने वहां से टैक्सी बुक की और अपने होटल में पहुंच गए. अनिल

ने होटल ऑनलाइन ही बुक किये थे तो हमें जाते ही वहाँ तीन कमरे मिल गए।

हमने अपने अपने कमरे चुन लिए. स्वाति और अनिल एक कमरे में… आलोक और रोहित एक कमरे में थे और रोहन,

अन्नू और मैं… हम तीनों एक ही कमरे में रुक गए क्योंकि हमारा रूम थोड़ा बड़ा था।

सफर के कारण हम लोग पसीने से नहा रहे थे… तभी आलोक हमारे कमरे में आया, बोला- चलो, सब लोग

स्वीमिंगपूल में नहाने चलते हैं।

मैंने आलोक से कहा- कहाँ है पूल… और इतनी रात को कौन-कौन जा रहा है?

आलोक ने कहा- अरे चाची जी… यहीं होटल में ही है… और सब लोग नहाने जा रहे हैं… आप भी चलो।

मैंने कहा- नहीं… मैं नहीं जा रही… तुम लोग जाओ।

सब लोग जाने के लिए तैयार हो गए और मुझसे भी चलने के लिए जिद करने लगे तो मैंने सभी को समझाते हुए

कहा- ना ही मेरे पास स्विमिंग कॉस्ट्यूम है और ना ही मुझे तैरना आता है..

तभी स्वाति और अनिल मेरे रूम में आ गए।

अनिल ने मुझसे कहा- आपको जो ठीक लगे… आप वह पहन कर चल सकती हैं… और हम लोग तो बस वहां मस्ती

करने जा रहे हैं!

अनिल के कहने पर मैं भी चलने के लिए तैयार हो गई।

सब लोग चलने के लिए तैयार थे… रोहन, आलोक, रोहित और अनिल सभी ने केवल हाफ पैंट ही पहने हुए थे… अन्नू

ने भी एक टी-शर्ट और एक हॉट पैंट पहना हुआ था… स्वाति भी टी-शर्ट और कैपरी में थी।

मेरे पास पहनने के लिए केवल एक गाउन ही था जो मुझे रात मैं पहनना था. मैंने स्वाति को अपनी यह दुविधा

बताई तो स्वाति ने अपनी एक नाइटी लाकर मुझे दे दी और मुझे वह पहनने के लिए कहा।

स्वाति की नाइटी केवल घुटनों तक ही थी और आर्मलेस थी… उस नाइटी को कमर पर बांधने के लिए एक रिबन

लगी हुई थी.

बच्चों के सामने इसे पहनने में मुझे थोड़ी हिचकिचाहट हो रही थी… पर बच्चों को इसमें कोई प्रॉब्लम नहीं थी।

हम सब रूम से निकलकर स्विमिंग पूल पहुंच गए और फिर सब लोग पूल में उतर कर नहाने लगे… रात के समय

केवल हम लोग ही पूल में नहा रहे थे, और कोई नहीं था… बस पास में बेंच पर एक आदमी बैठा हुआ था.

हम सब लोग पूल में नहाने लगे, हम सब लोग साथ में ही नहा रहे थे।

सब लोग पूरी तरह से गीले थे… गीली होने की वजह से मेरी नाइटी मेरे शरीर से बिल्कुल चिपक गई… मेरे साथ

साथ अन्नू और स्वाति दोनों की टीशर्ट भी उनके मम्मों से चिपकी हुई थी जिसमें से हम सभी के उभार साफ नजर आ

रहे थे.

तभी आलोक और रोहन दोनों ने हम लोगों के पास आकर हमें पानी में इधर-उधर खींचना शुरू कर दिया और मेरे

साथ मस्ती करने लगे।

रोहन भी मेरे पास आया और मुझसे कहा- मम्मी… मैं आपको तैरना सिखाता हूँ।

मैंने कहा- हां… ठीक है.. जब तक हम इस होटल में हैं, तुम लोग मुझे तैरना सिखा दो।

रोहन मेरे पीछे आ गया और वह मुझसे चिपक कर खड़ा हो गया. रोहन का लंड भी टाइट हो गया था और फिर वो

अपने लंड को मेरी गांड पर घिसने लगा… हम लोग चार फीट गहरे पानी में थे… पानी में होने की वजह से ना किसी

को कुछ दिख रहा था… ना ही कुछ समझ आ रहा था।

रोहन ने मुझे मेरे हाथ फैलाने के लिए कहा… फिर रोहन ने अपने एक हाथ को मेरी कमर पर रखा और दूसरे हाथ से

मेरे हाथ को पकड़ लिया… फिर वह मुझे तैरना सिखाने लगा… रोहन पीछे से अपने लंड से बॉक्सर में ही मेरी गांड

पर झटके देने लगा।

मैंने रोहन से धीरे से कहा- अभी रुक जाओ…यह सही वक्त नहीं है कोई देख लेगा…

रोहन भी हल्के स्वर में बोला- मम्मी, आप बस तैरने पर अपना ध्यान लगाओ बाकी सब मुझ पर छोड़ दो…

और फिर वो झटकों के साथ साथ मुझे पानी के अंदर हाथ पैर चलाना सिखाने लगा।

तभी मेरी नज़र सामने बैंच पर बैठे उस आदमी पर गई जो कि शुरू से ही हम लोगों को नहाते हुए देख रहा था…

उस आदमी की नज़र मेरी और और लड़कियों की तरफ ही थी।

तभी हम दोनों की नज़रें आपस मे टकरा गई… और वो मेरी तरफ घूरते हुए मुस्कुरा दिया.

जवाब में मैंने उस आदमी से नज़र हटा ली.

रोहन मेरे पीछे ही था और मेरे हाथों को पकड़ा हुआ था…तभी उसके झटके तेज हो गए और वो झड़ने लगा।

मैंने रोहन से कहा- रोहन खाली हो गया क्या तेरा?

तो रोहन ने कहा- हाँ मम्मी, मुझसे कंट्रोल ही नहीं हुआ…

उत्तेजना के कारण मेरी चूत भी पानी छोड़ रही थी।

ग्यारह बजने को थे… फिर हम लोग पूल से वापस अपने अपने रूम में आ गए. अन्नू रोहन और मैं तीनों ही गीले थे.

रूम में आकर हम लोग खुद को पौंछने लगे. तब तक अन्नू बाथरूम से कपड़े बदलकर आ गई और फिर स्वाति के रूम

में चली गई।

अब मैं और रोहन ही रूम में बचे थे, रोहन ने अन्नू के जाते ही गेट को लॉक कर दिया और मेरे हाथ से टॉवल लेकर

बिस्तर पर फेंक दिया.

मैं कुछ बोलती, उससे पहले ही रोहन ने मेरे होंठों को चूमना शुरू कर दिया… फिर रोहन ने मेरी नाइटी को खोलकर

उतार दिया।

मैं बस ब्रा और पैंटी में ही खड़ी थी. मेरे होंठ रोहन की गिरफ्त से छूटते ही मैंने रोहन से कहा- रोहन बेटा, तू तो

इतना उतावला हो रहा है जैसे मैंने कभी तुझे चोदने ही नहीं दिया ।

रोहन बोला- ऐसी बात नहीं है मम्मी… आज जब से आपको पूल में नहाती हुई देखा है.. मुझसे रहा ही नहीं जा रहा।

मैंने हँसते हुए रोहन को अपने गले से लगा लिया. रोहन के दोनों हाथ मेरी कमर से होते हुए मेरी पीठ पर लिपटे हुए

थे, मैंने रोहन से कहा- मेरा राजा बेटा अपनी मम्मी से इतना प्यार करता है?

रोहन ने हां में सर हिला दिया।

तभी रोहन ने पीछे से ही मेरी ब्रा के हुक को खोल दिया और मेरी ब्रा को खींचता हुआ मुझसे दूर हो गया. मैं

अधनंगी थी और अपने स्तनों को देखने लगी… फिर मैंने रोहन की तरफ देखते हुए उसे कहा- रोहन, बहुत शरारती

हो गया है तू?

और फिर हम दोनों हँसने लगे।

हम दोनों अभी भी गीले थे… रोहन मेरे पास आया और मेरे मम्मों पर एक चुम्मी देते हुए मेरी पैंटी को भी उतार

दिया… मेरी नाइटी, ब्रा और पैंटी वही जमीन पर पड़ी हुई थी… मैं बिल्कुल नंगी रोहन के सामने खड़ी थी और फिर

रोहन टॉवल लेकर मेरे नंगे शरीर को पौंछने लगा.

फिर मैंने भी झुककर रोहन की हाफ पैंट को उतार दिया… और फिर रोहन की चड्डी को भी उतार दिया.

कपड़ों से आजाद होते ही रोहन का लण्ड फनफनाने लगा।

पूल में झड़ने की वजह से रोहन की चड्डी और उसका लण्ड दोनों ही उसके वीर्य से लथपथ थे.

मैं जमीन पर घुटनों के बल बैठ गई और मैंने रोहन के गीले लण्ड को अपनी जीभ से चाटना शुरू कर दिया… वीर्य के

कारण लण्ड का स्वाद काफी अच्छा लग रहा था।

फिर हम दोनों उठ कर बिस्तर पर लेट गए, रोहन मेरे ऊपर आकर आकर 69 की पोजीशन में लेट गया… फिर रोहन

ने मेरी चूत को चाटना और चूसना शुरू कर दिया.

रोहन का लण्ड मेरे मुंह के सामने था तो मैंने भी रोहन के लण्ड को अपने मुंह मे भर लिया और उसे चूसने लगी.

रोहन ने उत्तेजित होकर अपने लण्ड से मेरे मुंह को चोदना शुरू कर दिया।

रोहन अपनी जीभ को मेरी चूत के अंदर बाहर कर रहा था… मेरी चूत काफी देर से पानी छोड़ रही थी तो मैं ज्यादा

देर तक नहीं टिक पाई और झड़ने लगी… मेरी चूत से रस की धार बहने लगी जिसे रोहन ने चाटना शुरू कर दिया।

चूत चाटने के बाद रोहन मेरे ऊपर से उठ गया और अपना लण्ड मेरे मुँह से बाहर निकाल कर अपने हाथों से

पकड़कर सहलाते हुए मुझसे बोला- मम्मी… अब बताओ, किस पोजीशन में चुदना पसंद करोगी आप?

मैंने रोहन से बिना कुछ कहे अपनी दोनों टांगों को फैला दिया… रोहन को मैंने चुदाई का काफी ज्ञान दिया है… अब

वो काफी अनुभवी हो गया है.

मेरे टाँगें फैलाते ही वो मुस्कुराते हुए मेरी टांगों के बीच आकर घुटनों के बल बैठ गया और फिर मेरी दोनों टाँगों को

पकड़कर अपनी कमर के बगल में ले गया. इससे मेरी दोनों जाँघें रोहन की कमर पर टिक गई और मेरी कमर बिस्तर

से थोड़ी ऊपर हवा में झूलने लगी।

रोहन ने देरी न करते हुए अपने लण्ड को मेरी चूत पर टिकाया और एक जोरदार धक्के के साथ अपना करीब सात इंच

लम्बा और दो इंच मोटा लण्ड मेरी चूत में उतार दिया जो सीधा मेरी बच्चेदानी से जा टकराया.

रोहन के इस धक्के के साथ मैं भी चीखते हुए आगे गिर पड़ी।

मैंने दर्द में चीखते हुए रोहन से कहा- उइईईई…माँ… मर गई…मैं… रोहन… तेरी माँ हू मैं… कोई किराये की वेश्या

नहीं हूँ जो इतनी बेदर्दी से धक्के मार रहा है… उम्म्ह… अहह… हय… याह… ओह्ह…मम्मा…

रोहन ने कहा- सॉरी मम्मी… आज मैं बहुत हॉर्नी हो रहा हूँ… अगर मुझे पता होता कि आपको दर्द होगा तो मैं धीरे

से ही धक्के मारता!

इतना बोलकर रोहन ने मुझे चोदना शुरू कर दिया।

रोहन का लण्ड मेरी चूत की गहराई को छूता हुआ वापस बाहर आकर दोबारा मेरी चूत की गहराई में उतर जाता.

मैं भी रोहन के हर धक्कों पर अपनी कमर उछाल कर रोहन को ओर उत्तेजित कर रही थी।

रोहन लगातार मेरी चूत के अंदर अपने लण्ड से वार कर रहा था… मैं भी चुदाई का मजा लेते हुए सिसकार रही थी-

आहह… रोहन… बस ऐसे ही… चोद मुझे…चोद दे… मेरी चूत को अपने इस मोटे लंड से… और ज़ोर से… और ज़ोर

से… हाँ बेटा.. ऐसे ही… बस ऐसे ही चोद मुझे… आहहहह… रोहन.. मेरे लाल… चोद डाल अपनी मम्मी को… आहह…

तभी रोहन ने मेरे मटकते हुए पेट को चाटना शुरू कर दिया और फिर मेरी नाभि में थूक दिया और फिर मेरी नाभि

को चाटते हुए नाभि को जीभ से कुरेदने लगा.

ये सब मुझे काफी उत्तेजित कर रहा था।

कुछ देर की चुदाई के बाद मैं झड़ने को हुई तो मैं रोहन से बोली- उफफ्फ़… रोहन… ओह्ह… माय्य… गॉडड… फ़क्क…

मीईई… रोहन… मैं झड़ने वाली हूँ… उफ्फ़… आहह… चोद दे अपनी माँ की चूत…

और फिर मैं झड़ने लगी।

रोहन अभी तक मेरी चुदाई कर रहा था पर मैं थक चुकी थी, मैंने अपना शरीर ढीला छोड़ दिया.

रोहन समझ गया था कि मैं अब थक चुकी हूँ तो उसने अपना लण्ड मेरी चूत से बाहर निकाल लिया।

रोहन मुझसे बोला- मम्मी… बहुत दिनों से मैंने आपकी गांड नहीं मारी है…

और फिर उसने अपना लण्ड वैसे ही मेरी चूत से निकालकर मेरी गांड के छेद पर लगाया और फिर अपने लण्ड को

मेरी गांड में डालने लगा।

रोहन का लण्ड गीला था… पर मेरी गांड भी कसी हुई थी क्योंकि मैं कभी कभार ही अपनी गांड के अंदर लण्ड लेती

हूँ।

गीला होने की वजह से रोहन के लण्ड का सुपारा तो अंदर चला गया पर मेरी कसी हुई गांड में लंड को और अंदर

डालने के चक्कर में रोहन झड़ने लगा… झड़ते वक्त रोहन ने अपना शरीर मेरे ऊपर रख दिया और ऊपर से ही गांड पर

झटके देने लगा।

सुपारा अंदर होने की वजह से रोहन का वीर्य मेरी गांड के अंदर ही भर गया. झड़ने के बाद रोहन ने अपने लंड को

बाहर खींच लिया और मेरी बगल में आकर लेट गया.

रोहन के लंड निकालते ही उसका वीर्य मेरी गांड से बहकर बाहर आने लगा जिसे रोकने के लिए मैं उलटी होकर लेट

गई।

हम दोनों निढाल होकर बिस्तर पर लेटे हुए थे… रोहन मुझसे आकर चिपक गया और मेरे बालों को हाथ से सहलाने

लगा।

मैंने रोहन से कहा- रोहन… भर गया तेरा मन… या अभी भी कुछ बचा है… और आज तो गांड मारने से पहले ही तू

आउट हो गया।

रोहन ने कहा- आपकी गांड बहुत कसी हुई है मम्मी… और मैं तब ही झड़ने वाला था जब मैंने आपकी चूत से लण्ड

निकाला था।

फिर मैंने रोहन से कपड़े पहनने के लिए कहा और मैं खुद को साफ करने के लिए नंगी ही उठकर बाथरूम जाने लगी।

रोहन ने अपने साफ कपड़े पहन लिए और मैं जमीन से सभी कपड़े उठाकर बाथरूम चली गई.

रोहन का वीर्य मेरी गांड से निकलकर मेरी जांघों पर आ रहा था.

मैं शावर चालू करके उसके नीचे नहाने लगी.

तभी मुझे रूम की घंटी की आवाज़ सुनाई दी.. पर मैंने उस पर गौर नहीं किया।

मुझे नहाने में थोड़ी देर लग गई… नहाने के बाद मुझे याद आया कि जल्दी में मैं अपनी ब्रा, पैंटी और गाउन बाहर ही

छोड़ आई हूँ…

तो मैंने रोहन को आवाज़ लगाते हुए कहा- रोहन, मेरे कपड़े बैग पर ही रह गए है… जरा मुझे दे तो जा?

मैं बिल्कुल नंगी गीली ही खड़ी थी… अपने बदन को पौंछने के लिए मेरे पास टॉवल भी नहीं था… तभी बाथरूम के

गेट पर दस्तक हुई।

मैंने तुरंत ही दरवाज़ा खोल दिया…और सामने रोहित मेरे कपड़े लिए हुए खड़ा था… मैं बिल्कुल नंगी उसकी आँखों के

सामने खड़ी थी और उसकी नज़र मेरे नंगे बदन पर टिकी थी।

रोहित को सामने देख मैं घबरा गई और गेट के पीछे चली गई… मैंने गेट के पीछे से ही अपने एक हाथ से रोहित से

कपड़े ले लिए और फिर गेट बंद कर दिया।

मैंने जल्दी से अपने कपड़े पहने और बाहर आ गई.

रोहित वहीं बेड पर बैठा हुआ था.

अभी जो हुआ था… उसके बारे में कुछ भी बात करने के लिए नहीं था… और हम दोनों नज़रें भी नहीं मिला पा रहे थे

पर फिर भी मैंने रोहित से पूछा- रोहन कहाँ है?

रोहित ने कहा- वो आलोक भैया के साथ गया है।

इससे पहले कि मैं उससे कुछ कहती, रोहन और अन्नू रूम में आ गए… फिर मैंने रोहित से कोई बात नहीं की.

कुछ देर बाद रोहित अपने रूम में चला गया और फिर हम तीनों भी सो गए.

मैं बिस्तर के कोने से सो रही थी… अन्नू बीच में थी और रोहन दूसरे कोने पर!

मुझे नींद नहीं आ रही थी… मैं तो बस यही सोच रही थी ‘जाने रोहित क्या सोच रहा होगा…उसे भी खुद पर ग्लानि

हो रही होगी?’

वैसे रोहन और रोहित हर बात आपस मे शेयर करते है तो मैंने सोचा कि कल में रोहन से इस घटना के बारे में बात

करुँगी.

यही सब सोचते सोचते मैं सो गई।

अगले दिन सुबह दस बजे तक हम सब लोग नहा धोकर तैयार हो गए, फिर हमने होटल में नाश्ता किया और फिर

हमने होटल से ही एक एक्स यू वी कार बुक कर ली… जो हमने वहाँ की ज्यादातर जगह घूमने के लिए बुक की थी।

कैब अपने सही समय पर हमें लेने पहुंच गई, हम उसमें नैनीताल घूमने निकल गए।

आलोक सबसे आगे बैठा हुआ था… अनिल, स्वाति, अन्नू और रोहित बीच वाली सीट पर बैठे थे… और मैं और रोहन

सबसे पीछे बैठे हुए थे… बिल्कुल आमने सामने वाली सीट पर!

मैं रोहन से कल रोहित और मेरे साथ हुई घटना के बारे में बात करना चाहती थी… वैसे तो रोहित मुझसे बहुत

मस्ताता था पर कल हुई घटना के बाद से रोहित ने मुझसे बात नहीं की थी।

शायद रोहित ग्लानि के कारण कुछ बोल नहीं पा रहा था और मैं भी उसे कुछ कहने में असमर्थ थी… यह तो हम

दोनों ही जानते थे कि जो कुछ भी हुआ अनजाने में ही हुआ था।

रोहन और रोहित दोनों हम उम्र थे और वे मौसेरे भाई होने से ज्यादा अच्छे दोस्त थे… इसीलिए मैंने रोहन को इस

बारे में बताना उचित समझा। मैंने रोहन को इशारे से अपनी तरफ बुलाया तो वो अपनी सीट से उठकर मेरे बगल में

आकर बैठ गया और बोला- क्या बात है मम्मी?

मैंने उसे धीमी आवाज़ में बोलने का इशारा किया और फिर रोहन को कल उसके जाने के बाद हुई घटना के बारे में

बताया…

यह सब सुनकर रोहन बोला- मम्मी… मैं रोहित को समझाऊँगा कि वो यह सब ज्यादा सिरियस ना ले… यह सब बस

एक भूल थी।

मैंने रोहन से कहा- रोहन… कहीं वो यह न समझे कि मैं तुझे दिखाने के लिए बाथरूम में नंगी खड़ी थी।

रोहन ने कहा- मम्मी… मैं कुछ समझा नहीं?

मैंने रोहन से कहा- रोहित ये ना सोचे कि अगर मेरी जगह रोहन होता तो वो भी मुझे नंगी देख लेता।

रोहन ने कहा- आप चिंता मत करो मम्मी… हम दोनों काफी फ्रैंक हैं… मैं उससे सीधा यही पूछ लूंगा।

मैंने कहा- अच्छा… कितने फ्रैंक हो तुम लोग?
 
पारिवारिक चुदाई की कहानी-2

रोहन बोला- इतने कि हम एक दूसरे से सभी बाते शेयर करते हैं… चाहे वो चुदाई की हो या लड़की बाजी की… हम

लोग साथ में पोर्न देखते हैं… और कभी कभी एक दूसरे की मुठ भी मार देते हैं।

मैंने चौंक कर रोहन से कहा- क्या… मैं तो उसे बहुत भोला समझती थी.. और तुम दोनों ये गलत हरकतें भी करते

हो?

रोहन ने कहा- मैंने कहा था ना आपसे कि हम बहुत फ्रैंक हैं… और इसमें गलत क्या है मम्मी… आप ही कहती हो कि

कभी कभी मुठ भी मार लेनी चाहिए।

मैंने रोहन से कहा- जैसा तुम्हे ठीक लगे करो… पर उससे इस बारे में बात जरूर कर लेना…

रोहन हाँ बोल कर सामने अपनी सीट पर बैठ गया।

रोहित के बारे में यह सुनकर मुझे बड़ा अजीब लगा क्योंकि वो मेरे साथ बिल्कुल बच्चों वाली हरकतें करता था जो

मुझे काफी पसंद था… पर अब मेरा रवैया भी रोहित के प्रति बदल गया।

थोड़ी देर बाद हम लोग गोरखालैंड पहुंच गए… और सब लोग वहाँ घूमने लगे.

उसके बाद भी हमने दो तीन जगह घूमी और फिर शाम को छह बजे तक हम वापस होटल आ गए।

होटल से आने के बाद हम लोग फ्रेश हुए और फिर सब लोगों का मार्किट जाने का प्लान बना.

पर मैंने उनके साथ जाने से मना कर दिया क्योंकि कार में सफर करते करते मेरा मन भारी हो गया था।

सब लोग बाजार घूमने चले गए… मैं अपने रूम में अकेली ही थी और बोर हो रही थी तो मैंने एक स्लीवलेस और

डीप नैक ब्लाउज वाली साड़ी पहनी जिसमें से मेरे आधे मम्मे बाहर को आ रहे थे और फिर मैं नीचे जाकर होटल

रिसेप्शन के पास पड़े हुए सोफे पर बैठ गई।

मैं वहाँ पर रखी हुई मैगज़ीन पढ़ने लगी.

तभी एक आदमी मेरे पास आकर बैठ गया… मैंने उसकी तरफ देखा भी नहीं था।

उस अनजान आदमी ने मुझे ‘हैलो’ कहा…

मैंने नज़र उठा कर उसकी तरफ देखा… यह वही आदमी था जो हमें कल पूल में नहाते वक्त घूर रहा था… उसकी उम्र

कुछ तेंतीस-चौंतीस के आसपास थी और देखने में भी वह काफी आकर्षक था।

मैंने भी प्रतिउत्तर में उसे ‘हैलो’ बोला.

फिर उसने मुझे पूछा- आप यहाँ घूमने आए हैं क्या?

मैंने कहा- हाँ… मैं अपने बच्चों के साथ आई हूँ… और आप?

तो उसने कहा- मैं काम के सिलसिले से यहाँ आया हूँ और आज रात को ही वापस जा रहा हूँ.

फिर वो बोला- वैसे मेरा नाम आदित्य है!

और अपना एक हाथ मेरी तरफ बढ़ा दिया।

मैंने उससे हाथ मिलाते हुए कहा- मैं सोनाली हूँ… और हाउसवाइफ हूँ।

आदित्य की नज़र मेरे अधनंगे मम्मों पर ही थी… जिसे मैंने नोटिस कर लिया.

उसका इस कदर मुझे घूरना मुझे उत्तेजित करने लगा.

तभी आदित्य बोला- वैसे आप काफी खूबसूरत हैं… और कल स्विमिंग पूल में तो आप और भी ज्यादा क़यामत लग

रही थी।

एक अजनबी के मुख से ऐसा सुनना मुझे काफी अजीब लग रहा था पर साथ ही उसके शब्द मुझे काफी उत्तेजना दे

रहे थे… मैंने आदित्य की बात पर मुस्कुराते हुए उसे धन्यवाद कहा। मैं समझ रही थी कि ये मेरे कामुक बदन का भोग

लगाना चाहता है और शायद मैं भी यही चाहती थी और इसके लिए तैयार थी.

मेरी साड़ी मेरी नाभि से काफी नीचे बंधी हुई थी जिससे आदित्य मेरी नाभि के साफ दर्शन कर रहा था.

मेरा सर चकरा रहा था तो मैं अपने माथे को हाथ से दबाने लगी।

आदित्य ने मुझसे पूछा- सोनाली जी, आप ठीक तो हैं ना?

मैंने कहा- मेरा सर चकरा रहा है और थोड़ा दर्द भी हो रहा है।

तो आदित्य ने कहा- आप मेरे रूम में चलिए… मेरे पास टेबलेट रखी हुई है.

तो मैंने मना कर दिया।

आदित्य ने कहा- सोनाली जी… मुझ पर विश्वास रखिये… और आपको दवा की जरूरत है… आपके साथ वाले लोग

भी बाहर गए हुए हैं और आप बिल्कुल अकेली हैं तो इसी बहाने हम लोग थोड़ी और बातें कर लेंगे।

आदित्य के ज्यादा जोर देने पर मैंने उसे कहा- आदित्य आप सेकण्ड फ्लोर पर मेरे ही रूम में आ जाइये… तब तक मैं

अपने कपड़े भी चेंज कर लूँगी।

आदित्य वहाँ से उठकर अपने रूम में चला गया और मैं अपने रूम में आ गई.

मैं रूम में जाकर बिस्तर पर अपने हाथों को फैलाकर से उल्टी होकर गिर पड़ी।

मैंने गेट लॉक नहीं किया था.

तभी दरवाज़े पर एक दस्तक देते हुए आदित्य ने दरवाजा खोल दिया… दरवाज़ा खुलते ही मैंने तिरछी नज़र से देखा

तो आदित्य मेरी गांड के उभार को घूर रहा था.

मैं उठकर बैठ गई और आदित्य से बोली- आ गए आप…!

मैंने आदित्य को अपने साथ बेड पर बिठा लिया.

तभी आदित्य ने मुझे एक टेबलेट देते हुए कहा- सोनाली जी… आप ये टैबलेट खा लीजिये।

मैंने वो टेबलेट खा ली और फिर हम दोनों लोग बातें करने लगे.

मैंने आदित्य से पूछा- क्या तुम शादीशुदा हो?

आदित्य ने कहा- हाँ… मेरी शादी अभी एक साल पहले ही हुई है।

टैबलेट खाने के बाद मेरा सर और भारी होने लगा… मैंने आपना गाउन उठाया और बाथरूम जाते हुए आदित्य से

कहा- दो मिनट रुको… मैं अभी चेंज करके आती हूँ.

आदित्य ने कहा- ठीक है।

मैंने बाथरूम में जाकर साड़ी, ब्लाउज उतार दिया और गाउन पहन लिया.

मुझे हल्का नशा सा होने लगा… बाथरूम से बाहर आते ही मेरे कदम डगमगाने लगे… जैसे तैसे मै बिस्तर पर आकर

लेट गई।

मैंने आदित्य से कहा- आदित्य, ये तुमने मुझे कोन सी टेबलेट खिला दी… मेरा सर बहुत भारी हो रहा है.

आदित्य ने कुछ नहीं कहा.

थोड़ी देर में मुझे पूरी तरह से नशा हो गया… मुझे कुछ भी होश नहीं था, मैं कुछ भी बड़बड़ाने लगी।

आदित्य उठकर मेरे पास आया और बोला- आप ठीक तो हैं ना?

मुझे नहीं पता कि मैंने उसकी बात का क्या जवाब दिया… मेरे साथ जो हो रहा था… मैं वो सब देख तो रही थी… पर

कुछ समझ नहीं पा रही थी, ना ही कुछ बोल पा रही थी।

तभी आदित्य ने मेरे गाउन को उतारना शुरू कर दिया… उसने मेरे गाउन को उतार कर नीचे फेंक दिया… मैं बस ब्रा

पैंटी में ही थी.

फिर आदित्य ने मेरी ब्रा उतार दी और मेरे मम्मों को मसलने लगा… वो अपने एक हाथ से मेरे मम्मे मसल रहा था.

उसने अपने दूसरे हाथ से मेरी पैंटी को मेरी जांघों तक नीचे कर दिया।

मैं किसी लाश की तरह पड़ी हुई थी.

आदित्य ने मेरे मम्मे अपने मुँह में लिए और उन्हें काटने लगा… जैसे ही उसने मेरे निप्पल को काटा, मैं दर्द के मारे

‘आईई… ‘ करते हुए चीख पड़ी।

आदित्य ने मेरी तरफ देखा, उठ कर मेरे मुँह के पास आ गया और फिर उसने मेरे होंठों को अपने होंठों में रखकर

चूमना शुरू कर दिया… वो मेरे मुँह के अंदर थूककर मेरी जीभ को चाटने लगा।

फिर आदित्य खड़ा हुआ और अपने कपड़े उतार कर नंगा हो गया… फिर उसने अपने खड़े लंड को अपने हाथों में

लिया और मेरे होंठों पर अपने लण्ड का सुपारा रगड़ने लगा।

थोड़ी देर तक अपना सुपारा रगड़ने के बाद आदित्य ने मेरे मुँह को खोला और अपने लण्ड को मेरे मुँह में डालकर मेरे

मुँह को चोदने लगा… मैं नीचे थी और आदित्य मेरे ऊपर… उसका लंड मेरे मुंह को गले तक चोद रहा था… थूक में

लिसने की वजह से मेरे मुँह से ‘गूँ… गूँ…’ की आवाज़ आ रही थी.

तभी आदित्य में अपना पूरा लंड मेरे गले में उतार दिया और वहीं रुक गया।

उसका लण्ड बहुत लम्बा था.. और काफी मोटा भी… मेरे गले में लंड अटकने की वजह से मैं सांस नहीं ले पाई और

अपने हाथ पैरों को पटकने लगी… ना मैं चीख पा रही थी और ना ही उसे रोक पा रही थी… मेरी आँखों से आंसुओं

की धार बहने लगी।

जब आदित्य को लगा कि अब मैं और नहीं सह सकती तो उसने अपना लण्ड मेरे मुँह से बाहर खींच लिया… लण्ड

बाहर निकलते ही मैं बिस्तर पर झटके खाते हुए… .लम्बी लंबी सांसें लेने लगी। मेरे लिए यह अनुभव किसी मृत्यु से

कम नहीं था।

आदित्य ने उठकर मुझे पलटा दिया… अब मेरी गांड आदित्य के सामने थी… वो उठकर मेरी गांड की तरफ आया और

मेरे चूतड़ों को मसलने लगा… फिर उसने मेरे चूतड़ों पर जोर जोर से थप्पड़ मारना शुरू कर दिया… पर मुझे इस दर्द

का कोई अनुभव नहीं हो रहा था।

आदित्य ने उठकर मेरी कमर के नीचे तीन तकिये लगा दिए… जिससे मेरी गांड ऊपर को उठ गई… पर मेरे मम्मे

बिस्तर पर ही थे और मेरा मुँह बाएं तरफ था… गांड उठने के साथ ही मेरी चूत भी पीछे की तरफ उभर आई।

आदित्य ने भी जल्दबाजी करते हुए मेरी चूत में अपनी दो उंगलियां घुसेड़ दी और बहुत ही तेजी से वो मेरी चूत को

उंगलियों से चोदने लगा.

तभी उसने अपने दूसरे हाथ की दो उंगलियों को थूक लगाते हुए मेरी गांड के छेद में डाल दिया।

आदित्य के दोनों हाथ मेरी गांड और चूत की चुदाई कर रहे थे… इस दोहरी उंगली चुदाई में मुझे बस हल्का दर्द हो

रहा था… जिसे मैं झेल रही थी… कुछ देर की चुदाई के बाद मैंने झड़ना शुरू कर दिया… आदित्य अभी भी अपनी

उंगलियां चूत और गांड के अंदर बाहर कर रहा था… इसी कारण जब मैं झड़ने लगी तो मेरी चूत से रस बाहर गिरने

लगा… और फिर आदित्य ने अपनी उंगलियों को बाहर निकाल कर मेरी चूत का रस चाटना शुरू कर दिया।

अब आदित्य उठा और अपने दोनों हाथों से मेरी गांड के छेद को खोलने लगा… जब मेरी गांड का गुलाबी छेद हल्का

सा खुल गया तो उसने अपने लण्ड के सुपारे को मेरी गांड के छेद में फंसा दिया और फिर मेरे दोनों चूतड़ों को आजाद

कर दिया।

फिर आदित्य ने मेरी कमर को दोनों तरफ से अपने हाथों से पकड़ा और फिर जोर लगाया… उसका आधे से ज्यादा

लण्ड मेरी गांड के अंदर समा गया. उम्म्ह… अहह… हय… याह… तभी उसका लण्ड दूसरे जोरदार धक्के के साथ मेरी

गांड को भेदता हुआ पूरा अंदर घुस गया.

मुझे असहनीय पीड़ा हुई पर… इस बार मेरे शरीर ने मेरा साथ छोड़ दिया था… मैं चीख तक नहीं पाई… बस मेरी

आँखों से आंसुओं की मोटी धार बहे जा रही थी।

मेरी गांड चुदाई आप अन्तर्वासना सेक्स स्टोरीज डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं!

गोली के नशे के कारण ना तो मैं कुछ बोल पा रही थी… और ना ही कुछ होने से रोक सकती थी… मेरे शरीर के साथ

साथ… मेरी जुबान को भी लकवा मार गया था।

आदित्य अपने पूरे जोर से मेरी गांड को चोद रहा था… उसका लण्ड मेरी गांड के अंदर तक जा रहा था… थोड़ी देर

बाद उसने अपना लण्ड गांड से बाहर निकाला और फिर एक धक्के के साथ ही मेरी चूत में उतार दिया… रोज की चूत

चुदाई के कारण मुझे चूत के अंदर लण्ड लेने में ज्यादा दर्द नहीं हुआ।

आदित्य घुटनों के बल बैठकर अपना लण्ड मेरी चूत के अंदर बाहर कर रहा था… इस एक तरफा चुदाई में आदित्य

किसी सांड की भांति मुझे चोद रहा था… उसका लंड बड़ी तेजी के साथ मेरी चूत की चुदाई कर रहा था।

काफी देर की चुदाई के बाद उसका लण्ड मेरी चूत के अंदर ही झटके खाने लगा… आदित्य मेरी चूत के अंदर ही झड़ने

लगा… उसका गरम वीर्य सीधा मेरी बच्चेदानी में ही जा रहा था… इतनी देर की चुदाई में शायद मैं भी झड़ चुकी थी।

जब आदित्य का पूर्ण रूप से वीर्य स्खलन हो गया… तो उसने अपना लंड मेरी चूत से बाहर निकाल लिया… फिर वो

उठा और उसने दो टैबलेट निकाल कर मेरे मुँह में डाल दी. उनमें से शायद एक पेनकिलर थी और एक नींद की… और

फिर ऊपर से मुझे पानी पिला दिया।

मैं अभी ही उसी अवस्था मे लेटी हुई थी… उल्टी और कमर के नीचे तकिये लेकर!

आदित्य मेरे बगल में आकर लेट गया… मेरी नज़रें उसी की तरफ थी… और फिर मैं वैसे ही पड़े पड़े सो गई।

अगले दिन सुबह जब मेरी नींद खुली तो मैं अन्नू और रोहन के साथ सो रही थी… मैंने खुद को देखा तो मैं गाउन

पहने हुए थी और अंदर ब्रा पैंटी भी पहनी थी।

पर फिर मैं वैसे ही लेटी रही और पिछली रात के बारे में सोचने लगी… मुझे कल के बारे में कुछ भी स्पष्ट याद नहीं

था और न ही मुझे कोई दर्द हो रहा था… बस कुछ तस्वीरें सी चल रही थी दिमाग के अंदर… और यह कहानी उन्ही

तस्वीरों के आधार पर है।

जो भी हुआ… गत रात में हुई मेरी गांड और चूत की चुदाई के बारे में सोच कर मेरे लबों पर एक मुस्कान सी आ

गई…

सगी मौसी की चुदाई

अभी तक आपने पढ़ा कि मैं अपने बेटे रोहन, बेटी अन्नू, मेरे जेठ का बेटा आलोक, आलोक की नवविवाहिता बहन

स्वाति और स्वाति के पति अनिल, मेरी बहन का बेटा रोहित… के साथ नैनीताल घूमने आई हुई हूँ. पिछली रात मैं

होटल में एक अनजान आदमी आदित्य से चुदी.

अब आगे-

अगले दिन सुबह जब मेरी नींद खुली तो मैं अन्नू और रोहन के साथ सो रही थी… मैंने खुद को देखा तो मैं गाउन

पहने हुए थी और अंदर ब्रा पैंटी भी पहनी थी।

पर फिर मैं वैसे ही लेटी रही और पिछली रात के बारे में सोचने लगी।

मुझे कल के बारे में कुछ भी स्पष्ट याद नहीं था और न ही मुझे कोई दर्द हो रहा था… बस कुछ तस्वीरें सी चल रही

थी दिमाग के अंदर… और यह कहानी उन्ही तस्वीरों के आधार पर है।

जो भी हुआ… गत रात में हुई मेरी गांड और चूत की चुदाई के बारे में सोच कर मेरे लबों पर एक मुस्कान सी आ

गई।

थोड़ी देर बाद रोहन भी जाग गया. मैं रोहन और अन्नू के बीच में ही सो रही थी तो रोहन मुझसे लिपट गया, उसने

अपने हाथ मेरी कमर पर रख दिये और मैंने रोहन की तरफ करवट ले ली।

करवट लेते ही रोहन ने मेरे होंठों पर एक चुम्मी दी और मुझसे बोला- गुड मॉर्निंग मम्मी…

मैंने भी मुस्कुराते हुए रोहन को गुड मोर्निंग कहा।

फिर रोहन ने कहा- मम्मी कल आपकी तबियत ठीक तो थी ना?

मैंने उसे पूछा- क्यों.. क्या हुआ?

तो रोहन ने कहा- कल जब हम लोग वापस आए थे..तो आप बहुत गहरी नींद में सो रही थी.. और दरवाज़ा भी लॉक

नहीं था।

मैंने कहा- मैं बस थोड़ा थक गई थी शायद… इसलिए गहरी नींद में सोई हुई थी।

रोहन ने कहा- मम्मी.. कल मैंने रोहित से बात की थी।

मैंने पूछा- अच्छा.. क्या बात हुई तुम लोगों के बीच में?

रोहन ने कहा- मम्मी मैंने उससे बातों में पूछा कि तूने कभी किसी नंगी औरत या नंगी लड़की को देखा है.. तो रोहित

बोला कि उसने कई बार अपनी मम्मी (यानि कि मेरी बहन) को नंगी देखा है।

मैंने रोहन से कहा- तो तूने क्या कहा रोहित से?

रोहन ने कहा- मम्मी फिर मैंने भी उसे बता दिया कि मैंने भी आपको कई बार नंगी देखा है।

मैंने रोहन पर गुस्सा करते हुए कहा- रोहन पागल हो गया है क्या तू… ऐसा बोलने की क्या जरूरत थी तुझे?

रोहन ने कहा- मम्मी, जरूरत थी तभी तो मैंने उसे यह सब बोला। उसके बाद रोहित ने खुद ही मुझसे बोल दिया कि

परसों उसने गलती से आपको नंगी देख लिया था… तो मैंने उसे समझा दिया कि आप भी उसकी माँ जैसी हो.. और

इतनी छोटी सी बात का कोई बुरा नहीं मानता है।

मैंने रोहन से कहा- चल ठीक है.. अब जो हुआ उसे भूल जाओ.. अब आगे के बारे में सोचो।

तभी अन्नू भी सोकर उठ गई, उसके बाद हम लोग तैयार होने लगे।

जब मैं नहाने जा रही थी तभी रोहित रूम में आ गया। हम दोनों की नज़रें आपस में टकरा गई..अब रोहित मुझे एक

लड़के की तरह नहीं बल्कि एक मर्द के रूप में नज़र आ रहा था क्योंकि जब से रोहन ने मुझे उन दोनों के कारनामे

बताये हैं तब से मेरा नजरिया रोहित के प्रति पूर्ण रूप से बदल चुका है।

तभी रोहित ने मुझसे कहा- मौसीजी… मेरी तबियत ठीक नहीं है, मैं आप लोगों के साथ घूमने नहीं चल पाऊँगा।

सब लोग तैयार हो चुके थे.. आलोक, स्वाति और अनिल बाहर हमारा ही इंतज़ार कर रहे थे… क्योंकि रोहित की

तबियत ठीक नहीं थी तो मुझे भी उसकी देखभाल के लिए वही रुकना पड़ा।

सब लोगों के जाने के बाद रोहित मेरे ही रूम में आ गया. मैं अभी भी कल रात वाला गाउन और कपड़े पहने हुए थी।

मैंने उसे एक टेबलेट लाकर दी और उसे वही आराम करने के लिए कहा।

रोहित वहीं सो गया.

मैं भी अकेली बोर हो रही थी तो मैं भी रोहित के साथ बेड पर लेट गई और थोड़ी देर बाद मैं भी सो गई।

करीब दो बजे मेरी नींद खुली… रोहित उस वक्त अपना मोबाइल चला रहा था… मैंने रोहित से पूछा- रोहित, अब

तबियत कैसी है?

रोहित ने मेरी तरफ देखा और कहा- अब मैं ठीक हूँ मौसी!

तभी रोहित की नज़र मेरी जाँघों की तरफ गई और उसने अपनी नजरें झुका ली… तभी मुझे पता लगा कि लेटने की

वजह से मेरा गाउन मेरी जाँघों तक चढ़ा हुआ था जिसके अंदर से मेरी पैंटी भी आराम से देखी जा सकती थी।

मैं रोहित की तरफ देखते हुए खुद को ठीक करते हुए बिस्तर से उठ गई. मेरी नज़र रोहित की पैंट की तरफ गई

क्योंकि उसका लंड खड़ा हो चुका था और वो उसे अपने हाथों से छिपाने की नाकाम कोशिशें कर रहा था। शायद वो

काफी देर से मेरी जांघों और पैंटी को निहार रहा था।

रोहित का खड़ा लंड देखकर मुझे कल की चुदाई की याद आने लगी… और अब मेरी भी चूत में खुजली होने लगी।

रोहित भी काफी सुंदर और आकर्षक लगता है पर वो रोहन से भी करीब एक साल छोटा है।

उसके बाद हम दोनों आपस में बाते करने लगे। जब रोहित को लगा कि मैं परसो के बारे में उससे नाराज़ नहीं हूँ तो

उसने मुझसे कहा- मौसीजी उस दिन के लिए सॉरी… वो सब एक गलतफहमी की वजह से हुआ था।

मैंने रोहित से कहा- कोई बात नहीं…

और हंसते हुए रोहित से बोली- अब जो देखना था… वो तो तूने देख लिया।

मेरी बात सुनकर रोहित भी मुस्कुरा दिया और बोला- मौसी वैसे आप अभी तक बहुत सुंदर और सेक्सी हो… काश

आपको फिर से एक बार और उस हालत में देख सकूं।

रोहित की बात सुनकर मेरे ऊपर भी चुदास हावी होने लगी और मैंने कहा- अच्छा… बड़ा देखने का मन है तेरा…

अभी ही दिखा दूँ क्या और वैसे मेरे अलावा किस किस को नंगी देख लिया है तूने?

रोहित ने कहा- कभी कभी मम्मी जब नहाकर आती है तो मेरे सामने ही कपड़े बदल लेती हैं… तभी उनको देख लेता

हूँ और मैं भी नहाकर उनके सामने ही कपड़े बदल लेता हूँ।

तो मैंने कहा- मुझे पूजा (मेरी बहन और रोहित की माँ) से तेरी शिकायत करनी पड़ेगी… बहुत गलत बातें सीखने

लगा है तू!

फिर मैंने रोहित से कहा- रोहित मैं नहाने जा रही हूँ… अगर कहीं जाना हो तो बता कर जाना… नहीं तो किसी और

की नज़र मुझ पर पड़ जाएगी।

रोहित ने कहा- मौसीजी चलिए ना हम पूल में नहाएंगे!

मेरा भी पूल में नहाने का मन था तो मैंने उसे हाँ बोल दिया।

फिर रोहित ने मुझे कहा- मौसी पर मेरी एक शर्त है… आप पूल में गाउन पहन कर नहीं जाओगी।

मैंने रोहित से कहा- तो फिर मैं क्या पहनूँगी रोहित?

रोहित ने वही दीवार पर टंगी अन्नू की स्कर्ट और लो टीशर्ट की तरफ इशारा करते हुए कहा- आज आप ये कपड़े

पहनोगी।

मैंने उसे मना कर दिया.

पर फिर रोहित ने मुझे अपनी कसम दे दी तो ना चाहते हुए भी मुझे वो कपड़े पहनने के लिए हाँ बोलना पड़ा।

मैं उन कपड़ो को लेकर बाथरूम जाने लगी तो रोहित ने मुझे रोक लिया और बोला- यहीं बदल लीजिये ना मौसी

प्लीज?

रोहित के ज्यादा जोर देने पर मैं मान गई… वैसे भी वो मुझे नंगी देख ही चुका था और मैं भी गर्म हो रही थी।

मैंने कहा- चल ठीक है… अब तुझसे भी क्या शर्माना… तू भी अपने कपड़े बदल ले।

रोहित ने कहा- मौसीजी… पहले आप बदलिए फिर मैं अपने रूम में जाकर बदल लूंगा।

मैंने कहा- तेरे कहने पर मैं तेरे सामने ही कपड़े पहन रही हूँ और तू मुझसे शर्मा रहा है… मैं भी तेरी माँ जैसी हूँ… तुम

मेरे सामने भी बदल सकते हो… चलो यहीं बदलो… देखो, मैं भी तुम्हारे सामने ही बदल रही हूँ।

मैंने रोहित का जवाब सुने बिना ही अपने गाउन को खोल दिया जो मेरे हाथों और पैरों से सरकता हुआ जमीन पर

गिर पड़ा। मैंने अंदर काले रंग की ब्रा पैंटी पहनी हुई थी, गाउन के उतरते ही मेरा चमकदार संगमरमरी बदन रोहित

के सामने उजागर हो गया, रोहित बिना अपनी आँखें बंद किये मेरे बदन को टकटकी लगाए घूर रहा था।

मैंने देर न करते हुए अन्नू की स्कर्ट और टीशर्ट को पहन लिया। अन्नू की स्कर्ट तो मुझे जाँघों तक आ गई पर उसकी

टीशर्ट मेरे स्तनों को मुश्किल से ढक पा रही थी और मेरे पेट तक ही आ रही थी।

काली स्कर्ट और सफेद टीशर्ट के बीच में मेरी नंगी कमर किसी चांद से कम नहीं लग रही थी.

यह सब देखकर रोहित का लंड अपने उफान पर आ गया और पैंट के ऊपर से उसका उभार साफ दिख रहा था।

कपड़े पहनकर मैंने रोहित से कहा- मेरा तो हो गया… अब तेरी बारी है।

रोहित ने कहा- मौसी, मैंने अंदर चड्डी नहीं पहनी है।
 
पारिवारिक चुदाई की कहानी-3

मैंने कहा- अच्छा तो ये बात है, तूने भी तो मुझे नंगी देखा है… अब शर्मा मत… मैं भी तुम्हारी मम्मी जैसी हूँ और तुम

मेरे बेटे जैसे हो… हमें एक दूसरे को नंगा देखने में शर्म कैसी?

रोहित ने मेरी बात सुनते ही अपना लोवर उतार दिया… लोवर उतरते ही उसका खड़ा मोटा लंड फनफनाता हुआ

बाहर आ गया… मेरी नज़र तो रोहित के लंड पर ही टिकी रह गई… इतने मोटे लंड को देखकर मेरी चुदाई करने की

इच्छा फिर से जागृत हो गई।

रोहित ने अपना बॉक्सर उठाया और पहनने लगा.

मैंने छेड़ते हुए रोहित से कहा- तुम तो काफी बड़े हो गए हो रोहित!

और अपने होठों पर जीभ फिरते हुए एक चुदासी मुस्कान रोहित को दे दी।

फिर हम लोग पूल में आ गए… थोड़ी भीड़ थी इसलिए हम लोग ज्यादा देर वहाँ नहीं रुके और वापस अपने रूम में

आ गए।

हम दोनों बिल्कुल खामोश थे।

मैंने रोहित से कहा- हमें यहाँ फिर से नहा लेना चाहिए रोहित…

और इतना बोलते ही मैंने अपनी टीशर्ट और स्कर्ट उतार दी। मैंने रोहित से कहा- रोहित क्या तुम मेरे साथ नहाना

चाहोगे क्योंकि मुझे अपनी पीठ पर साबुन लगवाना है तो बेहतर होगा हम दोनों साथ में ही नहा लेते हैं।

रोहित भी मेरे नंगे जिस्म को देखने के लिए काफी उत्तेजित था… उसने तुरंत हाँ कर दी।

पर मैंने कहा- रोहित तुम ये बॉक्सर पहनकर मेरे साथ ठीक से नहीं नहा पाओगे।

रोहित ने भी चतुराई दिखाते हुए कहा- हाँ.. मौसी पर आप भी अपनी ब्रा पैंटी पहनकर मेरे साथ ठीक ने नहीं नहा

पाओगी.. आपको भी ये उतारनी पड़ेंगी।

मैंने कहा- ठीक है… मैं भी उतार देती हूँ!

और इतना बोलकर मैंने अपनी ब्रा का हुक खोलकर उसे नीचे गिरा दिया और फिर अपनी उंगलियों से खींचकर पैंटी

को भी उतार दिया.

रोहित मेरे नंगे जिस्म, मेरी नंगी चुची, मेरी नंगी चुत को देखकर बिल्कुल ठगा सा रह गया। मैंने उसे होश दिलाते

हुए कहा- अब तू अपना बॉक्सर खुद उतारेगा या मैं उतारूं?

रोहित अभी भी थोड़ा शर्मा रहा था पर फिर उसने अपना बॉक्सर उतार दिया.

उसका लंड अभी भी खड़ा था… जाहिर सी बात थी यह सब मेरे नंगे बदन के कारण ही था। उसका खड़ा लंड देखकर

मैं समझ गई कि रोहित क्यों इतना शर्मा रहा है.

मैंने रोहित से उसके लंड की तरफ इशारा करते हुए कहा- तो क्या तुम इसलिये इतने शर्मा रहे हो… अरे बेटा यह तो

प्राकृतिक है… और मुझे खुशी है कि ये सब मेरी वजह से हो रहा है… मतलब अब तुम बिल्कुल जवान हो चुके हो।

फिर हम दोनों बाथरूम में आ गए. आते ही मैं सीधा बाथटब में लेट गई और हाथ देकर रोहित को भी अंदर बुला

लिया. मैंने रोहित के हाथ में साबुन देते हुए कहा- मेरी पीठ पर मल दो इसे!

मैं अपना चेहरा पानी से बाहर निकालकर टब में उल्टी लेट गई और रोहित मेरी कमर को अपनी टाँगों के बीच में

रखकर मेरी गांड पर बैठ गया.. रोहित का लंड तो शांत होने का नाम ही नहीं ले रहा था… ऊपर से मेरी नंगी पीठ

का स्पर्श उसे और उत्तेजित कर रहा था। उसका लंबा लंड उचक-उचक कर अपनी मौसी की गांड को छूने की कोशिश

कर रहा था।

तभी उसका लंड मेरी गांड के छेद पर टकरा गया…जिस कारण मैं चिहुँक गई और रोहित से बोली- अभी मुझे पीछे

कुछ टकराया है।

रोहित सकपका गया और उसने अपना लंड पीछे लेते हुए कहा- माफ करना मौसीजी…गलती से टच हो गया।

मैंने रोहित को समझाते हुए कहा- इसमे कोई गलत बात नहीं है कि हमारे शरीर के हिस्से आपस में टकरा जाए।

मैं भी अब सीधी बैठ गई और रोहित के हाथों से साबुन लेकर बोली- लाओ मैं भी तुम्हारी पीठ पर साबुन लगा देती

हूँ!

फिर मैंने रोहित की पीठ और फिर उसकी छाती पर भी साबुन मल दिया.

साबुन लगते वक्त मेरे मम्मे रोहित के शरीर से रगड़ खा रहे थे।

मैंने रोहित से कहा- रोहित, अब मेरी छाती पर साबुन लगाने की तुम्हारी बारी है.

तो रोहित शर्मा गया पर उसने अपने हाथों में साबुन ले लिया और फिर उसने मेरे उरोजों को अपने हाथों में भर

लिया और उन पर साबुन लगाने लगा.

रोहित का सपना आज सच हो रहा था।

हम दोनों बिल्कुल नंगे तो थे ही और अब आपस में काफी खुल चुके थे, मैंने रोहित के खड़े लंड को अपने हाथों से

टटोलते हुए कहा- तुम अपने सामान को ठीक से साफ नहीं करते क्या… देखो तो ये कितना काला हो रहा है…लाओ

मैं इसे साफ कर देती हूँ।

मैंने अपने हाथों में साबुन लगाया और अपने दोनों हाथों से रोहित के लंड को अपने हाथों में भर लिया और उसे

रगड़ने लगी.

रोहित काफी उत्तेजित हो गया, उसने भी अपने हाथों से मेरी चूचियों को उमेठना शुरू कर दिया. हम दोनों भली

भांति जानते थे कि अब हम दोनों रुकने वाले नहीं है।

रोहित के लंड को सहलाने से उसने सिसकारियां भरनी शुरू कर दी- आहहहहह मौसी… रूक्को… मैं झड़ने वाला हूँ…

आपके हाथ गंदे हो जाएंगे।

मैंने रोहित से कहा- रोहित अगर तुम चाहो तो मेरे मुँह में भी झड़ सकते हो।

रोहित ने कहा- क्या सच में मौसी… आप मेरा वीर्य अपने मुँह के अंदर लेना चाहोगी?

मैंने तुरंत अपनी जीभ बाहर निकालते हुए रोहित के लंड को चाटना शुरू कर दिया और फिर उसके लंड को मुँह के

अंदर भर लिया ‘उमम्म… उम्म…’ की आवाज़ के साथ रोहित का लंड मेरे मुँह को चोदने लगा.

रोहित अपने चरम पर ही चल रहा था, उसने मेरे चूचों को जोर से खींचते हुए मेरे मुँह में ही झड़ना शुरू कर दिया

‘आहह… मममा… सस्सी… ये लो… मैं तो गया…

और फिर उसके लंड से पिचकारियां निकलने लगी, मेरा मुँह रोहित के स्वादिष्ट वीर्य से पूरा भर गया, जिसे मैंने

अंदर गटक लिया।

झड़ने के बाद रोहित ने मुझे अपनी बांहों में भर लिया और बोला- मौसी… जिंदगी में पहली बार मैं किसी के मुंह में

झड़ा हूँ… और मजा भी बहुत आ रहा था।

मैंने रोहित की बातों को सुनकर उसके माथे पर एक चुम्बन दिया और उससे कहा- ये तो अभी मजे की शुरूआत है…

अगर तुम चाहो तो आगे और भी मजा आएगा तुम्हें!

रोहित ने कहा- सच मौसी… आप बहुत अच्छी और सेक्सी हो, काश हम लोग हमेशा ऐसे ही रह सकते साथ में… तो

कितना मजा आता।

मैंने रोहित से पूछा- रोहित कभी सेक्स किया है तूने… या किसी को करते हुए देखा है?

रोहित ने कहा- कभी किया तो नहीं है पर मम्मी पापा को कई बार करते हुए देखा है मैंने!

मैंने रोहित को हल्की सी चिमटी काटते हुए कहा- सच में बहुत बदमाश है तू… अपने मम्मी पापा को भी नहीं छोड़ा।

रोहित का लंड फिर से खड़ा हो गया, उसने अपने लंड को हाथ में लेकर कहा- मौसीजी अब आगे का मजा भी दे

दीजिए ना मुझे!

मैंने कहा- अब क्या सारे मजे यही टब में लेगा… चल अंदर चलते हैं।

फिर मैंने अपने नंगे जिस्म को टब से बाहर निकाला और रोहित मेरा हाथ पकड़कर मुझे अंदर ले गया।

रूम में जाकर मैं गीली ही बिस्तर पर पीठ के बल लेट गई, मैंने रोहित को मेरी तरफ बुलाया और अपनी टाँगें फैलाते

हुए कहा- अब चूसने की बारी तेरी है।

रोहित मेरी टाँगों के बीच आकर बैठ गया और अपने होठों को मेरी चूत पर रख कर चुम्मियां देने लगा… और फिर

रोहित अपनी जीभ से मेरी चूत को कुरेदने लगा।

जैसे ही रोहित ने अपनी जीभ से मेरी चूत को रगड़ा, मैं चिल्लाई- और जोर से चूस मेरी चूत… को…

रोहित अभी नया खिलाड़ी था तो उसे तैयार करने के लिए उसका आत्मबल भी बढ़ाना जरूरी था।

कुछ देर बाद मैं भी अपने चरम पर आ गई और मेरी चूत से पानी का ज्वालामुखी फट पड़ा, मैं भी चिल्लाते हुए

बोल रही थी- रोहित… मैं झड़ी.. उइई… माँआआआँ… उम्म्ह… अहह… हय… याह… मेरी… चूस ले मुझे… पी जा मेरा

पानी… आआहहह…

जब मैं पूरी तरह से झड़ गई तो रोहित ने अपना मुँह मेरी चूत पर से हटाया, उसका चेहरा मेरे पानी से सन चुका

था, उसने भी जी भरकर मेरा पानी पिया था।

मैंने रोहित से कहा- रोहित, अब अपना लंड मेरी चूत के अंदर डाल दो।

रोहित ने वैसा ही किया, वो मेरे ऊपर लेट गया और अपने लंड को चूत पर रगड़ने लगा. मैं अपने हाथों से रोहित के

लंड को पकड़कर अपनी चूत पर सेट कर अंदर डालने लगी और फिर रोहित से धक्का देने के लिए कहा।

रोहित ने अपने लंड पर दबाव देते हुए कहा- मौसी… आपकी चूत बहुत टाइट है और मुझे भी हल्का दर्द हो रहा है।

मैंने कहा- तुम्हारा लंड है ही इतना मोटा… कि तुम्हें मेरी चूत इतनी कसी हुई लग रही है… और फिर पहली बार

करने में थोड़ा दर्द तो होता ही है… और मेरी चूत भी अंदर से फटे जा रही है।

मैंने फिर से रोहित से कहा- अब रुको मत रोहित… अपना लंड मेरी चूत की गहराइयों में उतार दो…. एक ही बार में

घुसेड़ दो इसे मेरी चूत के अंदर!

यह सुनकर रोहित ने एक जोरदार धक्का मारा और पूरा का पूरा लंड मेरी चूत में पेल दिया.

मैंने चीखते हुए रोहित से कहा- और अंदर तक डाल अपने लंड को!

रोहित ने भी अब मेरी जोरदार चुदाई शुरू कर दी, वो अपने गहरे और लंबे धक्कों के साथ मेरी चूत को चोद रहा था।

कुछ देर की जोरदार चुदाई के बाद मैं भी झड़ने को हुई तो मेरे मुंह से बस सिसकारियां ही निकल रही थी

‘आआआअह्ह्ह.. चोद मुझे बेटा… चोद डाल… और अन्दर डाल… अपना लंड… चोद मुझे… चोद मुझे… आआआह्ह्ह…

डाल अपना मोटा लंड अपनी मौसी की चूत में… आहहह… आहह्ह… मैं भी झड़ने वाली हूँ… आहह… पेल दे और

अंदर…’

और फिर मैंने भी झड़ना शुरू कर दिया।

रोहित भी फिर ज्यादा देर तक नहीं टिक पाया और उसने भी जोरदार धक्कों के साथ मेरी चूत में झड़ना शुरू कर

दिया। जब उसका पूरा गर्म वीर्य मेरी चूत में समा गया तो उसने अपना लंड बाहर खींच लिया… मेरी चूत के पानी

की वजह से वो किसी तारे के समान चमक रहा था।

हम दोनों शांत होकर बिस्तर पर लेट गए.

रोहित ने मुझे चूमते हुए कहा- मौसी, काश मैं आपको रोज चोद सकता… तो कितना मजा आता।

रोहित की बात सुनकर मैं मुस्कुराते हुए बिस्तर से उठ कर बाथरूम चली गई और खुद को साफ करने लगी। रोहित

ने भी तब तक अपने कपड़े पहन लिए।

शाम के सात बजने को थे और सब लोग भी आने वाले थे… मैं भी कपड़े पहनकर तैयार हो गई… फिर हम दोनों

आपस में बातें करने लगे।

मैंने रोहित से पूछा- तूने अपने मम्मी पापा की चुदाई करते हुए देखा है… तो फिर तेरा भी मन होता होगा ना अपनी

माँ की चुदाई करने का?

रोहित ने कहा- हाँ होता तो बहुत है… पर मम्मी के साथ ये सब कर पाना नामुमकिन है… तो बस हिला कर ही काम

चला लेता हूँ।

हम दोनों बात कर ही रहे थे कि तब तक सब लोग आ गए… और फिर हम सब लोग खाना खाकर अपने अपने रूम

में चले गए।

चाची की गांड चुदाई

रोहित के साथ चुदाई करने के बाद हम लोग तैयार होकर कमरे में बैठकर बाते करने लगे।

मैंने रोहित से पूछा- तूने अपने मम्मी पापा की चुदाई करते हुए देखा है… तो फिर तेरा भी मन होता होगा ना अपनी

माँ की चुदाई करने का?

रोहित ने कहा- हाँ होता तो बहुत है… पर मम्मी के साथ ये सब कर पाना नामुमकिन है… तो बस हिला कर ही काम

चला लेता हूँ।

हम दोनों बात कर ही रहे थे कि तब तक सब लोग आ गए और फिर हम सब लोग खाना खाकर अपने अपने कमरों

में चले गए।

रात को रोहन और अन्नू रूम में आकर मेरे साथ बेड पर लेट गए।

तभी रोहन ने पूछा- मम्मी आपका आज का दिन कैसा रहा? आप तो यहां पर बोर होती रही होंगी और हम लोगों ने

तो आज बहुत मस्ती की… मैं तो इतना थक गया था कि चल भी नहीं पा रहा हूं सही से।

अन्नू भी बोली- मम्मा सच में आज तो आपको चलना ही था… आपने मिस कर दिया आज।

मैं उन दोनों के बीच में लेटी हुई थी। मैंने अपने दोनों हाथो से अपने बच्चों के सर को सहलाया और उनसे कहा- तुम

लोग अच्छे से एन्जॉय करो। रोहित की तबियत ठीक नहीं थी वरना मैं भी चल देती।

थोड़ी देर तक इधर उधर की बाते करने के बाद अन्नू और रोहन सो गए।

मेरी भी नींद लगने ही वाली थी कि तभी मेरे फोन पर एक मैसेज आया। मैंने फ़ोन उठाकर देखा तो वो मैसेज

आलोक का था, उसने मुझे गुड़ नाईट विश किया था। फिर मैंने भी आलोक को मेसेज किया।

आलोक- गुड़ नाईट चाची।

मैं- गुड नाईट।

आलोक- आपको जगा तो नहीं दिया मैंने?

मैं- अभी तो मैं सोई भी नहीं हूं… तो तू जगाएगा कैसे।

आलोक- मुझे भी नींद नहीं आ रही… क्या हम लोग होटल की छत पर चल सकते हैं, थोड़ी फ्रेश हवा भी मिल

जाएगी।

मैंने मोबाइल में समय देखते हुए उसे रिप्लाई किया- अभी एक बजने वाला है इतनी रात को ऊपर जाना ठीक नहीं

होगा।

आलोक- अरे मैं हूं ना चाची… आप तो बेवजह डर रही हो।

आलोक के मनाने पर मैं मान गयी और अपने बच्चों को देखते हुए धीरे से बेड से उठकर रूम के बाहर आई और

दरवाजा बाहर से लॉक कर दिया। आलोक रूम के बाहर खड़ा हुआ मेरा ही इन्तजार कर रहा था।

फिर हम दोनों लिफ्ट से टॉप फ्लोर पर गए, और वहाँ से सीढ़ियाँ चढ़कर ऊपर छत पर पहुँच गए।

होटल सिटी से थोड़ा दूर था और सात फ्लोर का था तो आसपास कोई घर या होटल इतने ऊंचे नहीं थे। छत पर हम

दोनों के अलावा कोई नहीं था तो छत पर आते ही आलोक ने एक बार छत का मुआयना लिया और फिर उसने छत

के दरवाजे को लॉक कर दिया ताकि कोई ऊपर ना आने पाए।

छत पर बिल्कुल अंधेरा था तो मैं आलोक से साथ ही खड़ी थी। बरसात का सीजन चल रहा तो आसमान में बादल

छाए हुए थे जिस वजह से चंद्रमा की रोशनी भी नहीं आ रही थी।

आलोक को गेट बंद करते देख मैंने कहा- आलोक क्या कर रहे हो? अगर किसी को ऊपर आना हुआ हो तो?

आलोक ने कहा- इतनी रात को सब अपनी पत्नी और गर्लफ्रेंड के साथ सेक्स कर रहे होंगे… कोई आएगा तो खोल

देंगे।

फिर आलोक मुझे वहाँ से एक कोने में ले आया। वहाँ से नीचे देखने पर आसपास का नज़ारा स्ट्रीटलाइट की पीली

रोशनी में बड़ा ही प्यारा लग रहा था।

मैं बॉउंड्री से टिककर बाहर के नजारे देख रही थी, तभी आलोक ने पीछे से आकर मुझे जोर से जकड़ लिया, उसका

जकड़ना इतना तेज था कि मेरे मुंह से ‘आआ आआहहह हहह…’ निकल गयी।

आलोक का लंड बिल्कुल खड़ा हो चुका था जो कि मुझे साफ-साफ मेरी गांड की दरार में महसूस हो रहा था, आलोक

ने मेरी गर्दन को पीछे से चूमना शुरू कर दिया।

मैंने सिसकारियां भरते हुए उसे कहा- इतना जोर से क्यूँ पकड़ा है मुझे… आआहहह…

आलोक ने कहा- चाची, आप इतने दिनों बाद मुझे मिली हो इसीलिए आज मैं आपको अपनी बांहों में कस कर रखना

चाहता हूं.

और इतना बोलते ही उसने अपने दोनों हाथों से मेरे गोल चूचों को मसलना शुरू कर दिया।

मैं उस समय नाईट गाउन पहनी हुई थी जो की बूब्स से लेकर कमर तक चैन के साथ अटैच थी और अंदर केवल पैंटी

ही पहनी हुई थी क्योंकि सोने के लिए मैंने अपनी ब्रा निकाल दी थी। आलोक भी टीशर्ट और कैप्री में था।

गर्दन पर चुम्बन की वजह से मैं काफी गर्म हो गयी थी। तभी आलोक ने मेरे गाउन की चैन को खोलकर बूब्स तक

नीचे कर दिया और अपने दोनों हाथ मेरे गाउन के अंदर डाल कर मेरे मम्मों का मर्दन करने लगा।

आलोक अपने हाथों से मेरे निप्पल्स को मरोड़ रहा था और मेरी गर्दन को चूम रहा था।

फिर आलोक ने मुझे अपनी तरफ घुमाया और मेरे होंठों को चूमने लगा। मेरे मम्में मेरे गाउन से बाहर निकले हुए थे

जो कि अब आलोक की छाती में समा रहे थे। आलोक ने भी अपनी टीशर्ट उतार दी और फिर से मुझे अपनी बांहों में

जकड़ कर मेरे होंठों को चूमने लगा।

मुझे आलोक का गठीला बदन अपने मम्मों पर महसूस हो रहा था।

आलोक ने मुझे किस करते हुए अपने हाथों को मेरी कमर पर लपेट लिया और मेरे गाउन को मेरी जांघों के ऊपर की

तरफ खींचने लगा। आलोक ने मेरे गाउन को मेरी कमर तक ऊपर उठा दिया औऱ फिर अपने एक हाथ को मेरी पैंटी

के अंदर डालकर मेरी गांड की गोलाई और चूत को सहलाना शुरू कर दिया।

आलोक ने फिर आगे से अपने दूसरे हाथ से मेरी पैंटी को नीचे सरका दिया और अपनी सीधे हाथ की दो उंगलियों को

मेरी चूत में डालकर अंदर बाहर करना शुरू कर दिया। मेरे जेठ के बेटे आलोक ने मेरे होंठों को छोड़कर अब मेरे

मम्मों से रसपान करना शुरू कर दिया। आलोक किसी जानवर की भांति मेरे मम्मों को चूस रहा था और मेरे

निप्पल्स भी चबा रहा था।

मैं बस ‘आआहहह… उम्म्ह… अहह… हय… याह… ऊऊह…’ ही कर रही थी क्योंकि अब और कुछ मेरे बस में नहीं था।

तभी आलोक ने अपने दूसरे हाथ से मेरी गांड के छेद को चौड़ाया और अपनी बडी उंगली को मेरी गांड के अंदर डाल

दिया जिस वजह से मैं थोड़ा ऊपर की तरफ उछल गयी। मैं काफी उत्तेजित हो गयी थी क्योंकि मेरे दोनो छेद आलोक

की उंगलियों द्वारा चोदे जा रहे थे।

थोड़ी देर तक ऐसा करने के बाद उसने मेरी चूत से अपनी उंगलियाँ बाहर निकाल ली पर मेरी गांड को वह अभी थी

अपनी उंगली से चोद रहा था। फिर आलोक ने मुझे बाउंड्री वॉल से टिकाया और मेरे उठे हुए गाउन को मेरे हाथों में

पकड़ा दिया और खुद घुटनों के बल बैठ कर मेरी चूत को चाटने लगा।

आलोक की जीभ का स्पर्श मेरी चूत के अंदर होते ही मैंने झड़ना शुरू कर दिया और मैंने गाउन को अपने हाथों से

छोड़कर आलोक के सिर को पकड़ लिया और अपनी चूत को झटकों के साथ आलोक के मुँह पर रगड़ना शुरू कर

दिया।

मैंने सिसकारते हुए अपना सारा पानी आलोक के मुंह पर छोड़ दिया जिसे आलोक ने बिल्कुल चाटकर साफ कर

दिया।

आलोक उठ कर खड़ा हो गया और मेरी गांड से अपनी उंगली निकालकर मुझसे बोला- आई लव यू चाची… आपका

पानी बड़ा ही स्वादिष्ट है आज बड़े दिनों बाद पीने का मौका मिला।

मैंने भी हँसते हुए उसे कहा- लव यू टू आलोक… अब जो भी करना है जल्दी कर… काफी रात हो गयी है।

मेरी टाँगें और मम्मे अभी भी खुले हुए थे और रात के समय ठंडी हवा लगने के कारण मैं कांपने लगी। आलोक ने

बिल्कुल भी देरी ना करते हुए अपनी कैप्री उतार दी। उसने अंदर चड्डी नहीं पहनी थी। कैप्री उतरते ही उसने अपना

खड़ा लंड मेरे हाथ में थमा दिया जिसे मैंने सहलाना शरू कर दिया।

मैंने भी आलोक के लंड को गीला करने के लिए नीचे बैठकर उसे चूसना शुरू कर दिया। आलोक के लंड से वीर्य जैसा

चिपचिपा पानी निकल रहा था जिसे मैंने अपने मुंह में लेकर सोख लिया। करीब दो मिनट तक लंड चूसने के बाद

मैंने उसके लंड को अपने मुंह से निकाल दिया।

मेरी चूत भी पानी छोड़ने की वजह से काफी गीली हो चुकी थी। फिर आलोक ने मुझे दीवाल से टिकाया और मेरे

गाउन की पूरी चैन को खोल दिया जिससे मेरा गाउन मेरी टांगों से नीचे गिर गया।

अब मैं पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी और बाहर चल रही ठंडी हवा मेरे रोम रोम को उत्तेजित कर रही थी। मुझे

ऐसा करते हुए डर भी लग रहा था क्योंकि खुले में चुदाई करने का ये मेरा पहला अनुभव था… पर जब कामुकता

हावी हो जाती है तो क्या सही है और क्या गलत… कुछ समझ नहीं आता है।

आलोक ने मुझे टिकाकर खड़ा किया और फिर मुझसे सटकर ही उसने अपने लंड को मेरी चूत पर रगड़ना शुरू कर

दिया और फिर धीरे धीरे उसने अपने लंड का सुपारा मेरी चूत के अंदर कर दिया।

आलोक ने मेरे होंठों को अपने होंठों से बांध लिया और पूरी दम के साथ उसने अगले धक्के में अपना पूरा लंड मेरी चूत

में भर दिया। मेरे होंठों को चूमने की वजह से में चीख नहीं पाई लेकिन मेरी घुटी हुई आवाज भी आसपास गूंज गयी

और अपने पैर की उंगलियों के बल खड़ी हो गई।

मैं आलोक के होंठों को चूमना छोड़कर दर्द से सिसकार उठी- ऊऊह्ह माँ… उम्म्ह… अहह… हय… आआहह…

मैंने आलोक को हल्की आवाज में डाँटते हुए कहा- पागल हो गया है क्या… अभी मैं चीख पड़ती तो किसी को पता

चल जाता।

पर आलोक ने मेरी बातों को अनसुना कर दिया और फिर से मेरे होंठों को चूमना शुरु कर दिया।

आलोक अब जोर जोर के धक्कों के साथ अपने लंड को अंदर बाहर करने लगा, मैं भी अपनी कमर उठा उठा कर

आलोक के लंड से चुद रही थी।

हम दोनों के नंगे बदन की गर्मी उस ठंडी हवा में एक दूसरे को साफ महसूस हो रही थी।

थोड़ी देर तक इसी तरह लगातार चोदने के बाद मैं थक गई तो मैंने आलोक से पोजीशन बदलने के लिए कहा।

आलोक ने वैसे ही अपना लंड मेरी चूत में झटके मरते हुए कहा- चाची, छत ज्यादा साफ नहीं है, वरना हम यहीं लेट

कर चुदाई करते। पर तुरंत ही उसके मन मैं एक विचार आया और उसने मुझसे बाउंडरी पर हाथ रखकर खड़े होने के

लिए कहा।

मैं आलोक की बात मानते हुए अपने दोनों हाथों को सामने बाउंडरी के ऊपर रख कर खड़ी हो गयी। इस वज़ह से

मेरी गांड और कमर पीछे की तरफ को उभर आई ऒर सामने से मुझे बाहर का सारा नजारा दिखाई दे रहा था।

अगर ऊँचाई ज्यादा न होती और दिन का समय होता तो सड़क चलते आदमी मेरे नंगे झूलते हुए मम्मों को देख

सकता था। पर अभी अंधेरा इतना था कि किसी को कुछ दिखाई नहीं दे सकता था।

इस तरह झुककर खड़े होने की वजह से मैं किसी डॉगी की पोजीशन में थी। अब आलोक ने पीछे से आकर अपने लंड

को मेरी चूत पर लगाया और इस बार उसने हल्के हल्के धक्कों के साथ अपने लंड से मेरी चूत को अंदर तक चीर

दिया।

आलोक ने अपने धक्कों की गति को बढ़ा दिया… जिस वजह से मेरा शरीर उसके हर धक्कों के साथ आगे पीछे होने

लगा और मेरे कसे हुए मम्मे भी मेरे शरीर के साथ झूलने लगे। आलोक ने अपने हाथों को आगे बढ़ाकर मेरे दोनों

मम्मों को पकड़ कर मसलना शुरू कर दिया। मेरे मुँह से हल्की हल्की सीत्कार ‘आआहहह… आआऊऊहहह… ओह

आलोक… और जोर से चोदो मुझे… फ़क मी हार्डर..’ आसपास के माहौल को और भी गर्म कर रही थी।

काफी देर तक इसी तरह चोदने के बाद मैं अपने चरम पर पहुँच गई और मैंने अपनी चूत से आलोक के लंड पर

दबाव बनाते हुए झड़ना शुरू कर दिया। मेरी चूत से निकलता हुआ पानी मेरी टांगों से बहता हुआ नीचे तक पहुँच

रहा था। आलोक अभी भी मेरी चूत मार रहा था पर अब चुदाई की आवाज़ें कुछ बढ़ सी गयी थी।

तभी आलोक ने मेरी चूत से अपना लंड निकाला और नीचे झुककर मेरी रिसती हुई चूत को चाटने लगा। उसकी जीभ

का स्पर्श मेरी चूत को अलग ही शांति प्रदान कर रहा था। उसने मेरी जांघों को भी चाटकर साफ कर दिया।

आलोक ने अपने मुँह को मेरी चूत से हटाते हुए मेरी गांड के पास लाया और अपने थूक से मेरी गांड को गीला करना

शुरू कर दिया।

मैं समझ गयी कि अब आगे क्या होगा।

मैंने पीछे मुड़कर आलोक को मुस्कुराते हुए कहा- आगे से मन नहीं भरा जो अब पीछे की तरफ जा रहे हो?

आलोक ने कहा- चाची… अगर आपकी गांड नहीं चोद पाया तो फिर मेरे इतने दिनों का इन्तजार बेकार ही रह

जाएगा।

मैंने उसकी बात पर हँसते हुए कहा- हां कर ले… पर जरा आराम से करना!

और फिर वापस उसी अवस्था में आ गयी।

आलोक ने आगे बढ़ते हुए अपने लंड को मेरी गांड के छेद पर टिकाया और बड़े ही प्यार के साथ उसे अंदर डालने

लगा। मेरी गांड के लाल छेद को भेदते वक्त मेरी आँखें बंद हो गईं और मेरे माथे पर दर्द के कारण शिकन आने लगी

क्योंकि मैं जब कभी ही अपनी गांड चुदवाया करती थी और आलोक का लंड भी कुछ ज्यादा ही मोटा था।

आलोक ने धीरे धीरे से अपना लंड मेरी गाण्ड में डाल दिया और फिर उसने धक्के देना शरू कर दिये. आलोक का लंड

जितनी गति से मेरी गांड के अंदर होता मैं उतना मस्त हो जाती।

उसने काफी देर तक मेरी गांड को उसी अवस्था में चोदा। फिर जब वो झड़ने को हुआ तो उसने अपने धक्कों को

दोगुनी रफ्तार के साथ मेरी गांड मारने लगा और अंततः उसने ‘आआहहह… चाची… मैं गया… आपकी… गांड… के…

अंदर…’ कहते हुए अपना गर्म वीर्य कई पिचकारियों के साथ मेरी गांड के अंदर त्याग दिया।

झड़ने के बाद आलोक अकड़कर मुझसे वैसे ही लिपट गया। कुछ ही देर बाद उसने अपने लंड को बाहर निकाल

लिया। फिर हम दोनों ने अपने कपड़े पहने और खुद को ठीक किया.

आलोक का वीर्य मेरी गांड से रिसकर बाहर आने लगा. पर मैं इतना थक चुकी थी कि खुद को साफ करने की हिम्मत

नहीं जुटा पायी।

उसके बाद हम दोनों नीचे आ गए और अपने अपने रूम में आकर सोने लगे। मैं भी धीरे से बेड पर जाकर रोहन और

अन्नू के बीच लेट गयी। थोड़ा हलचल होने की वजह से रोहन ने नींद में करवट लेते हुए मुझे खुद से लिपटा लिया

और फिर मैं भी वैसे ही सो गई।

उस रात के बाद हम लोगो को चुदाई करने का समय ही नहीं मिल पाया और फिर सफर के खत्म होने के बाद हम

लोग वापस अपने घर आ गए। अब बस मैं थी , रोहन था और मेरे पति।
 
बदनाम रिश्ते

मेरा नाम टीना है और यह कहानी मेरे बारे में है

एक दिन की बात है की मम्मी पापा दो दिनों के लिए बाहर जाने वाले थे तो उन्होंने

मेरे भाई से कहा की घर का ख्याल रखना कही जाना नहीं तुम और टीना को ही रहना

है दो दिन अकेले तो उस पर समीर (भाई ) ने कहा की पापा आज मेरा क्रिकेट मेच है

मैं नहीं रुकुंगा शाम को वापस आ जाऊंगा तो पापा ने कहा की बेटा टीना ऐसा करना

की शाम तक के लिए किसी सहेली को बुला लेना मैंने कहा ठीक है पापा वोह लोग ११

बजे की ट्रेन से चले गए और भाई भी आधे घंटे बाद यह कह के चला गया की मैं जा

रहा हूँ तू किसी सहेली को बुला ले मैं पांच या छः बजे तक आ जाऊंगा. मैंने भी सोचा

की क्या फर्क पड़ता है अकेले रह लुंगी जाने देती हूँ समीर को.

मैं उसके जाने के बाद टी वी देखने बैठ गई थोड़ी देर बाद मैंने सोचा की अब १ बज

रहा है नहा धो लेती हूँ फिर कुछ बना लूंगी खाने के लिए तो मैंने अपने ब्रा पेंटी उठाये

तोवेल लिया और बाथरूम में घुस गई कपडे उतार के घर में कोई था नहीं तो कोई

टेंशन भी नहीं थी.

जवान तो मैं हो ही गई थी पर कमाल की बात थी की मैंने अभी तक किसी से

चुदवाया नहीं था बस कभी कभी अपनी चूत में ऊँगली डाल के उस को मज़े दिला

लेती थी आज भी अकेली थी तो बाथरूम में जब मैं नंगी होके नहाने लगी तो मन

किया की क्यूं ना थोडा मजा लिया जाये तो मैं अपनी चूत में उंगी डाल के उसे

सहलाने लगी थोडा बहुत मसल मसल के मैंने चूत को गरम कर लिया अपने बूब्स से

खेलने लगी उंगली डालने के कारन अब मस्ती छाने लगी थी चूत गरम हो गई थी

अचानक मेरे मोबाइल पर किसी का कॉल आया तो मैंने सोचा आने दो नहा के कॉल

बेक कर लूंगी पर मोबाइल फिर से बज उठा मुझे बड़ा गुस्सा आया की यहाँ चूत में

गर्मी चढ़ रही है जाने कौन है जो मेरी चूत का दुश्मन बना जा रहा है.

तीसरी बार बजी तो मैंने सोचा की कही पापा का ना हो तो मैं बाथरूम से टॉवेल लपेट

के कमरे में आई तो फ़ोन फिर से बज उठा मैंने जल्दी से मोबाइल उठाया तो देखा की

आकाश ( मेरा बॉय फ्रेंड) का फ़ोन था.

मैंने हेल्लो बोला तो बोला जान इतना टाइम कैसे लगा किया कॉल ले ने में मैंने कहा

की नहा रही थी तुम्हे भी तो चैन नहीं है नहाने भी नहीं दिया ठीक से तो आकाश ने

शरारत से कहा की वाह जान मैंने भी आ जून क्या नहाने साथ तुम्हारे मैं थोड़ी शर्मा

सी गई तो मैंने कहा धत्त शरारती कही की वह हंस पड़ा बोला यार टीना मैं कौन सा

आने ही वाला था मरना है क्या वह आके तुम्हारे मम्मी पापा मुझे मार डालेंगे तो

अचानक मेरे मुह से निकल गया की अरे वह लोग तो हैं नहीं यार आज घर में मैं

अकेली ही हूँ भाई भी नहीं है तो आकाश ने कहा की वाह जानेमन आज तो मौका है

आ जाऊं क्या थोड़ी मस्ती हो जाये मैंने कहा की पागलो जैसी बात नहीं करो चलो अब

मैं जा रही हूँ नहा के आती हूँ फिर खाना भी बनाना है मुझे अपने लिए तुम्हे क्या है

तो वह बोला की जानू मैं पिज्जा ले आता हूँ वही पर थोड़े मजे भी कर लूँगा तुम्हारे

साथ मैंने कहा की नहीं नहीं आना मत यहाँ पर. उसने कहा की जैसी तुम्हारी मर्ज़ी.

मैं फिर से बाथरूम में घुस गई और नहाने लगी नहाते नहाते मैंने चूत पर साबुन

लगाया अपने नीचे के बालो को भी थोडा सा साबुन लगा के साफ़ किया तो जब मैं

चूत पर साबुन लगा रही थी तो चूत में फिर से सनसनाहट होने लगी तो मैंने फिर से

उंगली डाल के चूत को रगड़ना शुरू कर दिया अचानक मैं वासना से पागल सी हो गई

ऐसा लग रहा था की उफ़ यह पतली सी ऊँगली क्या मज़ा देगी कोई मोटी चीज़ होती

तो मजा आ जाता बस यही सोचते हुए अचानक मेरे मन में ख़याल आया की टीना

आज चूत की गर्मी निकलने का अच्छा मौका है माँ पापा भी नहीं है भाई शाम तक

आने वाला नहीं है तो क्यूं ना आकाश को बुला लिया जाये बस यह ख़याल आते ही

मैंने चूत से खेलना छोड़ के अपने नीचे के बाल रिमूवर से साफ़ किये ताकि पहली बार

चुदने जा रही हूँ तो बॉय फ्रेंड को भी तो मजा आना चाहिए फिर मैंने फटाफट नहाया

और बाहर आ के आकाश को फ़ोन लगाया की उस ने फ़ोन उठाया तो बोला की जानू

क्या हुआ कैसे कॉल किया तो मैंने कहा की पिज्जा खाने का मन हो रहा है ला रहे हो

क्या?

(मैंने उसे यह नहीं बताया की आज मैं चुदाई की आग में जल रही हूँ मैंने सोचा की

उस को थोडा सा तडपाऊँगी तो अपने आप ही कहेगा की आज कुछ कर लेने दो मन

मत करो )

उसने कहा की जानू तुम्हारे लिए कुछ भी बोलो कब आना है मैंने कहा की आ जाओ

जल्दी से भूख लग रही है बड़ी (वह बात अलग है की पिज्जा की नहीं चुदाई की) उस

ने कहा की डोमिनो से पिज्जा ले के आ रहा है वह बस थोड़ी देर में.

उसके बाद मैंने अपनी एक लेस वाली बढ़िया सी ब्रा और पेंटी निकली और पहन ली

बढ़िया परफ्यूम लगाया और एक टॉप निकाल के पहन लिया जींस पहन ही रही थी की

ख्याल आया की नहीं जींस नहीं कोई मिनी स्कर्ट पहनी जाये ताकी आकाश को रिझाने

में आसानी रहेगी तो मैंने एक सेक्सी सी मिनी स्कर्ट पहन ली फिर शीशे में देखा की

हाँ अब मैं किसी भी लड़के का लंड खड़ा करने लायक दिख रही हूँ आज आकाश मुझे

खुद कहेगा की आज मुझे अपनी जवानी का मज़ा ले लेने दो. मैं अपने आप को शीशे

में निहार रही थी की घंटी बजी मैं समझ गई की आकाश आ गया है पिज्जा ले के

मैंने तेज़ी में गेट की तरफ गई और दरवाजा खोला तो वह आकाश ही खड़ा था.

उस ने मुझे देख के कहा की क्या बात है जानेमन आज तो क़यामत लग रही ही देख

के ही बिजली गिर रही है दिल पर मैंने शरमाते हुए कहा की चलो बेकार की बातें मत

करो रोज़ जैसी ही तो लग रही हूँ अब जल्दी से अन्दर आ जाओ वरना कालोनी वाले

देख ना ले मैंने आकाश का हाँथ पकड़ा और उसे अन्दर खीच लिया आकाश अन्दर आ

गया तो मैं पलट के दरवाजे को लौक लगाने मुड़ी तो उस ने मुझे वापस खीच लिया

और अपने होठ मेरे होठों पर रख दिए मुझे बांहों में भर लिया और मुझे किस करने

लगा मैं तो आग में जल ही रही थी जवानी की मैंने भी उस को कस के बाहों में भर

लिया और उस के होंठों को चूमने लगी मेरा साथ पा के तो आकाश पागल सा हो गया

उस ने मुझे अपनी बाहों में मसलना शुरू कर दिया जैसे आज मेरा अंग अंग तोड़ देगा

मैंने उस के कहा की उफ़ छोडो भी मुझे पिज्जा उस ने जमीन पर छोड़ दिया था और

अब मेरे होठो को छोड़ के वह मेरी गर्दन मेरे गाल को चूमते हुए बोल उठा की आज

तो ऐसा लग रहा है की कच्चा चबा जाऊं जानेमन कामाल की लग रही हो.

मैंने कहा हटो भी पिज्जा ठंडा हो रहा है मुझे भूख लगी है उस ने कहा की जानू आज

तो तुम इतनी हॉट लग रही हो की पिज्जा भी तुम्हारी जवानी के आगे ठंडा ही लगेगा

मैंने उसे धक्का दे कर अपने आप को छुडाया ओउर पिज्जा ले के सोफे पर बैठ गई

और टीवी चला लिया तो आकाश भी मेरे बगल में आ के बैठ गया उस ने कहा की

टीना मैं पिज्जा लगा तो अब कम से कम लेन का मेहनताना तो ले लेने देती ठीक से

मैं हंस पड़ी उसे चिड़ाते हुए मैंने कहा की फिर तो मुझे खुद ही डोमिनो फोन कर के

माँगा लेना था और जो पिज्जा देने आता उसे दो चार किस दे के कहती की हो गए

तुम्हारे पैसे अब जाओ तो आकाश ने कहा की जानेमन वोह चला भी जाता पर अगर

उस का खड़ा हो जाता तो तुम्हारी लिए बिना नहीं जाता और कहते हुए उस ने मेरे

नंगी जांघ पर हाँथ फेर दिया.

मैं तो अभी मस्त हो के पिज्जा खाने के नाटक कर रही थी मैंने उसे रोका नहीं तो उस

की हिम्मत बड़ी और और ने हाँथ थोड़ा और अन्दर कर दिया अब आकाश मेरी स्कर्ट

के अन्दर हाँथ ड़ाल के मेरी जांघ को रगड़ रहा था मुझे मजा आने लगा था.मैंने टीवी

के चैनल चेंज करने का नाटक किया और फिर से पिज्जा में मस्त हो गई तो उस ने

मौका देख के जांघ को मसलना शुरू कर दिया और थोड़ा अन्दर की और हाँथ बड़ा के

मेरे पेंटी को छूने लगा तो मैंने थोड़ा सा नाटक करते हुए उस के हाँथ पर चांटा मारा

और कहा की हटो भी क्या मस्ती कर रहे हो और उस की तरफ नकली गुस्से से देखा.

तो मुझे समझ में आ गया की आकाश का चेहरा लाल होने लगा था उस पर मस्ती

छाने लगी थी मैं समझ गई की तीर निशाने पर लग गया है अब ज्यादा देर नहीं है

मेरी सील टूटने में अन्दर से डर भी लग रहा था की पहली बार है ऐसा ना हो की सह

नहीं पाऊं मैं लंड को अपनी छोटी सी चूत में फिर सोचा की जो होगा देखेंगे मर

जवानी का मज़ा तो लेना है आज चाहे कुछ भी हो जाये मैं फिर से टीवी की तरफ

देखने लगी मन टीवी में नहीं लग रहा था पर नाटक तो करना था ना की आकाश ये

न समझे की उस की गर्ल फ्रेंड तो बिगड़ी हुयी लड़की है.

मैं चाहती थी की वो ही मुझ से कहे की आज सेक्स कर लेने दो मुझे ताकि मेरा काम

भी हो जाये और उस की नज़र में यह भी रहे की मैंने आकाश के कहने पर ही अपनी

सील तुडवाई है मैंने आकाश को रोका नहीं तो उस की हिम्मत और बढ़ गई उस ने

जांघ पर हाँथ फेरना बंद कर दिया और अब उस ने अपना हाँथ मेरे टॉप के नीचे से

अन्दर ड़ाल दिया और मेरे बूब्स को मसलने लगा तो मैंने कहा हाय क्या कर रहे हो

क्यूं शैतानी कर रहे हो यह कहते हुए मैंने उस के हाँथ को पकड़ लिया तो उस ने कहा

की जानू प्लीज थोड़े मज़े ही ले लेने दो ना मैंने कहा हटो यह सब शादी के बाद करने

के काम है किस तो चलता है यह सब नहीं. आकाश का तो तब तक मन बन गया था

की आ मेरी ले के ही मानेगा तो उस ने मुझे प्यार की कसम देते हुए कहा की जानू

तुम मुझ से प्यार करती हो तो मुझे आज रोको मत तो मैंने भी थोड़े नाटक करते हुए

उसे मेरे बूब्स दबाने दिए तो मुझे भी थोड़ी मस्ती आने लगी मैं भी सिसकारी भरने

लगी तो उस को और मजा आने लगा तो उस ने मुझे सोफे पर धकेल दिया.

मेरे ऊपर चढ़ के मेरे लिप्स चूमने लगा और अपने हाँथ से मेरे बूब्स को मसलने लगा

मैं उफ़ उफ़ करने लगी और उस से कहने लगी की हाय आकाश मत करो ना कुछ

कुछ होता है अन्दर तो उस ने कहा की होने तो जानेमन प्यार की आग है जो तुम्हारे

अन्दर जल रही है आज मुझे अपनी जवानी की आग को बुझा लेने दो कहते हुए मेरी

स्कर्ट के उंदर हाँथ ड़ाल के उसे नीचे सरका दिया और फिर मेरी पेंटी में हाँथ ड़ाल के

मेरी चूत को रगड़ने लगा.

टीना - हाय क्या कर रहे हो आग सी लग रही है अन्दर मत करो ना

आकाश - जानू आज जो हो रहा है हो जाने दो प्लीज मत रोको मुझे आज कहते हुए

उस ने मेरे टॉप को ऊपर कर दिया और ब्रा को भी बूब्स से हटा के ऊपर कर दिया

और फिर एक निप्पल को मुह में लेके चूसने लगा और दूसरे को अपनी उँगलियों में

दबा के मसलने लगा.

टीना - क्या कर रहे हो लेस वाली ब्रा है फट जाएगी उतार लेने दो

आकाश - जानेमन आज तो मैं जाने क्या क्या फाड़ दूंगा तुम नहीं जानती.

टीना - चलो हटो ना उतार लेने दो ना प्लीज

आकाश - ठीक है उतार लो

मैंने धीरे से अपना टॉप उतार के साईड में ड़ाल दिया तो उस ने हाँथ बढ़ा के मेरे ब्रा

को उतार दिया और मुझे फिर से धक्का दे के नीचे सोफे पर गिरा दिया और फिर मेरे

बूब्स को चूसने लगा और मसलने लगा

थोड़ी देर बूब्स से खेलने के बाद उस ने मेरी स्कर्ट को खीच के नीचे ड़ाल दिया और

मेरी मेंटी सरका के उतार दी और मेरी चूत को रगड़ने लगा अपनी उँगलियों से.

आकाश - वाह जानेमन आज तो झांटे भी साफ कर रखी हैं तुम ने तो

टीना - हाँ आज कोई नहीं थी तो मैंने सोचा की चलो साफ़ कर लेती हूँ.

आकाश - जानेमन आज तो सब कमाल कर रही हो तुम तो कहते हुए उस ने थोडा

झुक के मेरी चूत को चूम लिया

टीना- म्मम्म सीईईईई क्या करते हो आकाश

आकाश - इतनी प्यारी चूत को किस नहीं करू क्या अभी तो बहुत कुछ करना है उस

ने मेरी चूत को उंगली से फाड़ा और अपनी जीभ अन्दर घुसा दी

टीना - सीईईईईईए हाय रे मर गई म्मम्मम्म मेरी सिस्कारिया सुन के उस को जोश

आ गया और उस ने मेरी चूत को और जोर से चाटना शुरू कर दिया

और तभी दरवाजा खुला ( क्यूंकि मैं दरवाजा बंद नहीं कर पाई थी क्योंकि आकाश ने

मुझे खीच लिया था किस करने के लिए जब मैं लोक करने जा रही थी दरवाजे को )

*****

समीर और उस के एक दोस्त ने अन्दर कदम रखा और वह सोफे का नजारा देख के

वह चिल्ला पड़ा क्या हो रहा है यह साले हट वह से तेरी माँ की ****

मैं अन्दर तक कांप गई ऐसा लग रहा था की जमीन फट जाये और मैं उस में समां

जाऊं

समीर - बंटी भाई पकड़ साले को माँ चो** देंगे साले की मेरी बहन के साथ क्या कर

रहा हे यह..

बंटी - ठीक है समीर

आकाश - अरे सुनो तो

मैं जल्दी से अपने कपडे समेट के अपनी नंगे शरीर को छुपाते हुए अपने कमरे की

तरफ भागी पलट के पीछे देखा तो समीर ने आकाश को धक्का दे दिया था पर बंटी

मेरे तरफ देख के हंस रहा था मुझे गुस्सा भी आया और शर्म भी मैं सीधे अपने कमरे

में भाग गई अन्दर मैं जल्दी से अपनी ब्रा पेंटी पहन के जल्दी से बाकि के कपडे

पहनने लगी तब तक आकाश के पिटने की आवाजे आती रही मैं कपडे पहनते हुए

सोचने लगी की अब मैं मर गई भाई पापा को बता देगा और बंटी मुझे पूरी कालोनी में

बदनाम कर देगा चूत तो चुदाने मिली नहीं और बदनामी मुफ्त में मिल रही है. मैं

कपडे पहन के अपने बेड पर जा के लेट गई मैंने सोचा की भाई आएगा तो क्या कहूँगी

पर होना कुछ और था आज रिश्ते बदनाम होने थे

भाई का सामना करने के बारे में सोचने रही थी वह बंटी मेरे भाई को कुछ और

समझा रहा था यह बात मुझे बाद में पता चली की बंटी ने भाई को कहा की यार

समीर मिठाई का डब्बा घर में रखा हो तो खाने की बनती है कोई बाहर वाला

(आकाश) खाले यह गलत है और फिर हम अगर कुछ कर भी ले तो तेरी बहन को

कोई कमी थोड़ी हो जाएगी समुद्र में से एक दो लोटे निकाल लो तो पानी कम थोड़ी हो

जायेगा तेरी बहन तो जवानी की आग में जल ही रही है यह लौंडा नहीं तो कोई और

आ जायेगा उसे चोदने के लिए. चूत तो है ही चुदने के लिए हम चोद ले.

कोई बाहर वाला मजे ले जायेगा और हम ताकते रह जायंगे वैसे भी हम एक बार कर

ले तो चूत का क्या बिगड़ जायेगा ( सच तो यह है की शायद भाई भी चाहता था की

उस के बहन की जवानी का मज़ा लूट लिया जाये) उस ने बंटी का साथ दिया और

फिर उस ने मेरे कमरे में कदम रखा तो मैं सकपका गई मेरा रोना छूट गया मैंने रोते

हुए भाई को कहा की भाई आकाश और मैं एक दूसरे से प्यार करते हैं हम शादी करने

की सोच रहे हैं उस का ऍम. बी. बी. एस. हो जाये तो वह पापा मम्मी को भेजेगा

हमारे यहाँ बात करने मैं अपनी ही धुन में कहे जा रही थी मैंने यह नहीं देखा की

समीर वासना भरी नजरो से मुझे घूर रहा था फिर पीछे से बंटी ने कमरे में कदम

रखा.

टीना - समीर बंटी को कहे की वो बाहर निकल जाये यह हमारे बीच के बात है.

बंटी - क्यूं जब वह सोफे पर नंगी हो हो के चुदवा रही थी तब गेट बंद नहीं किया तब

ध्यान नहीं आया की कोई आ जायेगा.

टीना - समीर इसे बाहर निकालो ना देखो न कैसी गन्दी भाषा में बात कर रहा ही

मुझ से .

बंटी - अरे अभी गन्दा काम खुद कर रही थी ऐसी चुदास लग रही थी तो हम से कह

देती बाहर वाले को बुलाने की क्या जरुरत थी.

टीना - बन्तीईईईए चुप हो जा समीर कुछ कहते क्यूं नहीं अपने दोस्त को.

समीर - चुप साली एक तो घर में लौंडे बुला के मुह कला करवाती है और हमें चुप

रहने को कहती है

मैं सन्न रह गई की भाई कैसी भाषा में मुझ से बात कर रहा है मैंने कहा की तुम

दोनों बाहर निकल जाओ.

टीना - समीर तुम अपने दोस्त को ले के चले जाओ वरना मैं पापा मम्मी से तुम्हारी

शिकायत कर दूंगी.

समीर - तू क्या शिकायत करेगी वो तो मैं करूँगा तेरी अगर तुने मेरी बात नहीं मानी

तो बताऊंगा की कैसे तू उस के साथ चुदवा रही थी. शादी करनी है तो ठीक है पर

चुदाई करवाने कैसे बैठ गई तू.

मैं चुप हो गई मुझे समझ में नहीं आया की क्या कहूं मुझे कुछ समझ में नहीं आया

की क्या कहूं क्या करू.

अभी मैं कुछ समझ पाती की बंटी आगे आया और मुझे बाहों में भर के मुझे किस

करने लगा मैंने उस को धक्का दिया और समीर के तरफ देख के बोला की समीर ऐसे

क्या देख रहे हो यह तुम्हारी बहन की इज्जत पर हाँथ ड़ाल तुम खड़े हो.

समीर - खड़ा तो मैं हूँ ही और मेरा लंड भी खड़ा हो रहा है तेरी जवानी देख के जब तू

नंगी भाग रही थी ना तो पेंट में फनफना उठा था मेरा लौडा.

बंटी - साली तेरी जवानी देख के तो पूरा मुहल्ला तेरा दीवाना हो जाये हम दोनों की

क्या है

टीना - समीर तुम दोनों निकल जाओ मेरे कमरे से वरना मैं चिल्लाउंगी

बंटी - चिल्लाएगी साली क्यूं तू चाहती है की हम तेरे हाँथ पैर बाँध के तेरे साथ वो

सब करे जो तुम अभी मजे ले के कर रही थी शांति से हम दोनों को खुश कर दे वरना

आज तेरी इज्जत लूटनी पड़ेगी हमें कहते हुए उसने मुझे धक्का देके बेड पर गिरा

दिया फिर उस ने समीर से कहा की समीर आजा अब किस का इंतज़ार कर रहा है .

समीर - इंतज़ार किस का करू बंटी यार लौड़े को बहुत सरका लगा लगा की शांत

किया है आज जब मौका है तो चूत को छोड़ दूंगा क्या?

बंटी - तो फिर आ जा जल्दी से कहते हुए उस ने मेरी स्कर्ट के अन्दर हाँथ ड़ाल दिया

और मेरी चूत को मसल मसल के देखने लगा

समीर - सुन बंटी पहले मेरी बारी क्यूंकि माल तो मेरे घर का है ना तो चूत के दरवाजे

मेरे लौड़े से ही खुलेंगे फिर समीर ने मुझ से कहा की क्यूं साली छिनाल पहले कितनो

के साथ चुदवा चुकी है?

टीना - भाई ऐसा मत करो मेरे साथ मैं तुम्हारी बहन हूँ कुछ तो सोचो भगवान् के

लिए मैंने कभी किसी के साथ कुछ नहीं किया है मैं कुवारी हूँ अभी तक.

समीर - भाई वाह आज तो मज़ा आ गया कुवारी लड़की की सील तोड़ने का मौका

मिला है आक्जो बंटी भाई मज़ा आ गया कहते हुए उस ने मेरे रोने को ना देखते हुए

मेरे स्कर्ट को खींच के उतार दिया मैं हाँथ जोड़ के कहने लगी के प्लीज मुझे छोड़ दो

लेकिन उन लोगो को सुनना थोड़ी था मेरी कोई बात वोह तो हवास की आग में पागल

हो गए थे जैसे ही समीर ने मेरी स्कर्ट उतारी तो मेरी नंगी टाँगे देख के बंटी पागल सा

हो गया उस ने मेरी टांगो को ही जीभ से चाटना शुरू कर दिया और समीर बेड पर आ

गया और मेरी पेट पर बैठ के मेरे टॉप को उतरने लगा तो मैंने अपने टॉप को पकड़

लिया तो उस ने गुस्से में उसे फाड़ दिया अब मेरा फटा हुआ टॉप एक तरफ गिरा पड़ा

था उस ने गुस्से में मेरी ब्रा भी खीची तो वो भी तार तार हो गई समीर मेरे बूब्स को

मसलने लगा कहने लगा की हाय रे कैसे प्यार हैं इतने गोरे ढूध तो मैंने कभी ब्लू

फिल्मो में भी नहीं देखे हैं कहते हुए उस ने मेरे निप्पलस को खीचना शुरू कर दिया

मुझे दर्द होने लगा मैंने कहा भाई ऐसा मत करो प्लीज मुझे लग रही है तो उस ने

मुझे चांटा मारा और कहा की अब मुझे भाई कहा तो साली काट के रख दूंगा तेरे

निप्पलस को समीर ने मेरे बूब्स को और जोर जोर से मसलना शुरू कर दिया वह बंटी

मेरे टांगो को चाट रहा था और धीरे धीरे ऊपर की तरफ बाद रहा था उस ने समीर को

देख के मेरी पेंटी भी फाड़ के ही उतारी.

अब मेरे शरीर पर कपड़ो के नाम पर कुछ चिंदिया लटक रही थी उस ने मेरी टांगो को

फेलाने की कोशिश की तो मैंने जोर लगा के अपनी चूत को छिपा लिया टांगो को क्रोस

में बंद कर लिया तो बंटी ने समीर को कहा की समीर यह साली तो कुछ करने नहीं दे

रही है यार टाँगे बंद कर ली साली ने.

तो समीरे ने कहा की रुक जरा और कहते हुए उस ने मेरे निप्पलस को खीचना शुरू

कर दिया ऊपर की तरफ मैं दर्द से चिल्ला padi तो उस ने कहा की टाँगे खोल ले नहीं

तो खींच के इतने लम्बे कर दूंगा की घुटनों तक लटकेंगे मैंने कहा ठीक है ठीक है मैं

खोल रही हूँ टाँगे प्लीज निप्पलस को छोड़ दो कहते हुए मैंने अपनी टाँगे फैला ली.

समीर ने कहा की हरामी छोड़ने मत लग जइयो पहले मैं चोदुंगा तो बंटी ने कहा नहीं

यार पहले तेरी बारी है मैं तो सिर्फ चाट के थोडा रस पी रहा हूँ कुवारी चूत का

कहते हुए उस ने मेरी चूत में ऊँगली ड़ाल दी.

बंटी - हाय रे देखो तो कितनी गरम है चूत इसकी लगता है भट्टी लगा रखी है

अन्दर.

समीर - अच्छा ! बूब्स भी बड़े मस्त है छिनाल के कहते हुए समीर मेरे ऊपर से उठ

गया और बोला की अब तो साला लौडा पेंट के अन्दर रुक ही नहीं रहा कहते हुए उस

ने अपनी पेंट अंडरवेयर समेट उतार कर फेक दी तो बंटी ने मेरे चूत की फाको को

अलग किया और उस के अन्दर अपनी जीभ ड़ाल दी और चूत के जी स्पोट को

मसलने लगा उस ने मेरी चूत को चाट चाट के गीला कर दिया ऊपर से मेरी चूत को

मसल मसल के लाल कर दिया अब मुझे भी मजा आने लगा था तो anjane में ही मैं

अपनी चूत को उछलने लगी अपने आप ही मेरे अन्दर मस्ती आने लगी जब कोई

लड़की मस्त हो जाती है तो उसकी कमर में अपने आप लोच आ जाती है उस की

कमर अपने आप मचलने लगती है तो यह देख के बंटी ने कहा की समीर भाई चूत

पर मस्ती छाने लगी है चुदाई के लिए तैयार यह छेद यह सुन के समीर मेरे ऊपर से

उठ गया और अपने लौड़े को मसलते हुए बोला की तो फिर मेरी बारी शुरू मेरे बाद तू

निपट लेना मैंने देखा की समीर का लंड काफी बड़ा था मैंने आकाश का लंड तो कभी

देखा नहीं था तो कह नहीं पाई की किस का बड़ा है समीर ने कहा की टीना तैयार हो

जा चुदाने के लिए कहते हुए उस ने मेरी चूत पर अपना लौडा रख दिया मस्ती तो

मुझ पर भी छ गई थी पर मैं कुछ कह नहीं रही थी अपने आप को मैंने कंट्रोल कर

रखा था फिर समीर ने मेरी चूत के छेद पर अपने लंड का दबाव बढाया तो लंड थोडा

सा अन्दर गया पर मुझे ऐसा लगा की किसी ने चूत में चाकू ड़ाल दिया हो मेरी चूत

में दर्द होने लगा तब तक समीर ने थोडा और जोर लगा के अन्दर डालने की कोशिश

की तो मैं दर्द से चिल्ला पड़ी.

टीना - समीर छोड़ दो मुझे लग रही है बहुत दर्द हो रहा है नीचे

बंटी - चुप रह साली कुवारी चूत है पहली बार तो लगेगी ही जब उस लौंडे से चुद्वाती

तो नहीं लगती क्या?

समीर - टीना चुप चाप कर लेने दे नहीं तो मैं जबरदस्ती ड़ाल दूंगा प्यार से चुद्वायेगी

तो आराम से करूँगा?

मैं चुप चाप हो के वापस लेट गई तो समीर ने धीरे से थोडा और अन्दर ड़ाल दिया

और मैं फिर दर्द से तड़प उठी समीर ने धीरे धीरे अपना लंड अन्दर पलना शुरू कर

दिया मैं दर्द सह के लेती रही समीर आराम से ड़ाल रहा था उस ने वापस निकाल

लिया अपने लंड को और फिर एक बार धीरे से अन्दर ड़ाल दिया ऐसा करते करते उस

ने अपने लौड़े को अचानक मेरी चूत में पूरा पेल दिया मैं दर्द से उचक गई आँख से

आंसू निकल आये तो समीर ने कहा की अब बस पूरा चला गया है अब दर्द नहीं होगा

कहते हुए समीर ने मेरे चूत को छोड़ना चालू कर दिया धीरे धीरे उस ने अपने लंड को

आगे पीछे करना शुरू कर दिया तब तक बंटी भी अपने कपडे उतार के नंगा हो गया

था उस का समीर के मुकाबले थोडा छोटा था

बंटी - समीर भाई मैं क्या अपना लौडा हाँथ में लिए खड़ा रहूँ क्या ?

समीर - अरे यार तो मैं करू ? एक काम कर ना ब्लू फिल्मो की तरह तूभी अपना

लौडा चुसवा के देख मजा आता होगा उस में भी बंटी को बात जम गई वो मेरे ऊपर

आ गया और अपना लंड मेरे मुह के पास लाते हुए बोला की चल जरा चूस के दिखा

मेरे लौड़े को देखे तो कैसा मज़ा आता है मैंने कहा.

टीना - छी छी मैं नहीं लेती मुह में गन्दा होता है यह.

बंटी - साली नखरे ना कर अब जल्दी से मुझ भी खुश करना शुरू कर दे नहीं तो तेरी

गांड में ही पेल दूंगा .

समीर - ले ले टीना वरना अभी तो चूत में दर्द है बाद में गांड में भी दर्द हो जायेगा हा

हा हा

टीना - ठीक है पर प्लीज बंटी से नहीं करवाउंगी मैं बहुत दर्द हो रहा है मुझे.

बंटी - ठीक है पहले जरा लौड़े को चूस तो.

मैंने अपने मुह को थोडा था खोला तो बंटी ने मेरे होठो पर अपने लंड को रख दिया तो

मैंने भी उसे चाट के देखा तो मुझे स्वाद बड़ा अजीब सा लगा मैंने मुह हटा लिया तो

उस ने मेरे सर को पकड़ के अपने लौड़े के पास लाते हुए कहा की चूस भी ले अब

जानेमन तो मैंने थोडा मुह खोल के उस के लौड़े को अन्दर लिया तो मुझे भी मज़ा सा

आया और ध्यान चूत की तरफ से हट गया तो दर्द भी कम लगने लगा मैंने बंटी के

लंड को चुसना चुरू कर दिया तो वो मस्ती से कहने लगा हाय रे बड़ा मज़ा आता है

चुस्वाने में तो यार यह ब्लू फिल्म वाले तभी सबसे पहले मुह में देते हैं फिर चोदते हैं

वह जाने मन मज़ा आ गया आज तो चूस अच्छे से चूस तभी समीर ने मेरी चूत में

अपने लंड के धक्के तेज कर दिए अब मुझे भी मज़ा आ रहा था दर्द गायब हो गया

था तो मैंने भी मज़ा लेने लगी चूत को उचका उचका के समीर का लंड लेने लगी 5 -

7 मिनट बाद समीर ने तेजी से मुझे चोदना शुरू कर दिया और अचानक ऐसा लगा की

अन्दर कुछ गरम सा भर गया है.

समीर लस्त पस्त हो के अपने लंड को निकाल के कहने लगा अआः आः आह आज तो

जन्नत का मज़ा आ गया बंटी भाई मैं तो फ्री हो गया तेरी बारी है बंटी फट से उठा

और नीचे आ के मेरी चूत का निशाना लेने लगा उस ने अपना लंड डाला मेरी चूत में

तो वो आसानी से चला गया क्यूंकि एक तो चूत फ़ैल गई थी थोड़ी और ऊपर से

समीर के वीर्य ने अन्दर चिकनाई पैदा कर दी थी उस ने तेज़ी दिखाई और मेरे चूत में

लंड पेलने लगा जोर जोर से तो अभी उस ने कुछ धक्के दिए होंगे की मुझे ऐसा लगा

की मेरे उंदर से कुछ निकल रहा है ऐसा लगा की पेशाब आ गया है पर यह था जब

मैं पहली बार झड़ी थी किसी लौड़े से. मेरा मन भर गया तो मुझे मज़ा आना बंद हो

गया तो मुझे फिर से दर्द भी होने लगा था पर बंटी था की रुक ही नहीं रहा था उस

के धक्के तेज़ होते जा रहे थे वो तो समीर से ज्यादा फास्ट चुदाई कर रहा था मैंने

कहा की मुझे दर्द हो रहा है तो समीर ने कहा की कुछ देर और पड़ी रह बंटी को भी

निपट लेने दे उसे भी तो पता चले की चूत में माल निकलने में क्या मज़ा आता है

समीर मेरे बगल में आ के लेट गया और मेरे बूब्स से खेलने लगा.

बंटी का लंड छोटा जरूर था पर वो समीर से ज्यादा दमदार था उस की चुदाई से मेरी

चूत में जलन सी होने लगी पर मैं क्या करती चुप कर के उस के लंड को झेलती रही.

तभी बंटी के शरीर ने झटका खाया और उस ने भी मेरी चूत में अपना वीर्य निकाल

दिया फिर से एक गरम अहसास से चूत भर गई बंटी ने चूत से अपना लोडा निकलने

की कोशिश नहीं की और मेरे ऊपर ही लेट गया हाँफते हुए समीर ने कहा की बंटी

मज़ा आया की नहीं तो बंटी ने कहा की यार ऐसा लगा की अगर यह कहती की चूत

चुदवाने का हजारो लुंगी तो भी मैं देने को तैयार हो जाऊं थोड़ी देर बंटी मेरे ऊपर ही

लेते रहा तब तक समीर मेरे बूब्स से खेल ता रहा . फिर बंटी उठा और उस ने कहा

की एक राउंड और हो जाये क्या मैंने कहा नहीं अब नहीं अब मैं किसी कीमत पर

राजी नहीं हूँ तेरे से चुदवाने के किये समझा अब निकल जा यहाँ से और अपनी शक्ल

नहीं दिखाना मुझे समीर ने उसे इशारा किया की अब बस. समीर ने कहा की चल बंटी

अब बस करे तो मुझे लगा की लगता है की समीर की इंसानियत जाग गई है पर क्या

कहूं तो बंटी ने अपना लंड मेरे अन्दर से निकाल और अपने कपडे उठाये और बहार

निकल गया और समीर भी अपनी पेंट पहन के बाहर निकल गया.

पहली बार में ही दो लोगो से अपनी सील तुडवा के मेरे अंग अंग में दर्द हो रहा था मैं

अब घिन सी महसूस कर रही थी की छी सालो ने मेरे अन्दर ही अपनी गन्दगी

निकाल दी. यही सोचते हुए मैं बेड पर से उठी ही थी की मेरी चूत में से कुछ निकलने

का अहसास हुआ तो मैंने देखा की चूत में से खून निकल रहा था वोह बहता हुआ मेरी

जांघ से फैलता हुआ नीचे आ रहा था साथ में दोनों के वीर्य का थोडा सा हिस्सा बाहर

आ रहा था मैं तेज़ी में बाथरूम की तरफ बड़ी तो चलने में ऐसा लगा की चूत में दर्द

की लहर उठ गई हो मगर मैं सब सहती हुयी बाथरूम गई वह मैंने अपने आप को

साफ़ किया चूत को अच्छे से साफ़ किया और एक बार गरम पानी से सिकाई की

जब तक मैं बाहर आई अपने को साफ़ कर के तब तक बंटी जा चुका था और समीर

मेरे बेड पर नंगा लेता था और अपने खड़े लंड को सहला रहा था मैंने उसे देख के कहा

की अब नहीं मेरे बस का नहीं है अब कुछ करना अभी अभी एक बार करवाया तो खून

की धार निकल रही थी अब तो मैं मर ही जाउंगी तो वो बोला की करना तो तुझे

पड़ेगा अब राजी राजी कर ले या जबरदस्ती वैसे भी सील एक बार टूटती है बार बार

नहीं खून नहीं आएगा अब समझी अब आ जा जल्दी से और मुझे भी अपने लौड़े को

चुस्वाने का मज़ा लेने दे साली बंटी का तो बड़ा रस ले ले के चूस रही थी.

समीर ने मुझे पहली ही बार में पूरी रात भर चोदा पहली ही बार में मैंने इतना दर्द

सहा की अब तो दर्द में ही मज़ा आता है उस ने मुझे चोदा तो चोदा ही साथ में मुझे

अपना वीर्य भी पिलाया मेरी फिल्म भी बनायीं अपने mobile से सुबह मैंने समीर से

कहा की अगर मैं प्रेग्नेंट हो गई तो उस ने कहा की आज तो मैं गोली ला देता हूँ 72

घंटे वाली पर तू अब रोज़ वाली गोली खाना शुरू कर दे मैंने मना किया तो उस ने

मुझे कहा की वो अपने 4 - 5 दोस्तों को ले आएगा किसी दिन मुझे चुदवाने के लिए

और चुदवाना तो पड़ेगा तुझे उन से नहीं तो मेरी विडियो मेरे बॉय फ्रेंड को देखा देगा

फिर भूल जाओ फिर उस डॉक्टर से शादी की तो और वैसे भी चूत घिस थोड़े जाएगी

चुदवाने से हा हा हा ........

*****

माँ और पापा तो दो दिन के लिए गए थे और अभी तो एक ही दिन हुआ था.

अगले दिन सुबह ही समीर ( भाई ) मार्केट से इमरजेंसी contraceptive pills ले आया

था और उस ने मुझे खिला दी थी यहाँ तक की समीर ने महीने भर खाने वाली

contraceptive पिल्स ला दी थी की अब तुझे रोज़ खाना है ताकि तू पेट से ना हो

जाये मुझे तो समझ में नहीं आ रहा था की क्या करूँ समीर तो हद से ज्यादा पागल

हुआ जा रहा था और तो और वो सुबह जब वापस आया तो फिर कहने लगा की कपडे

उतार मुझे चुदाई करनी है मैंने मना किया तो उस ने मुझे पीटना शुरू कर दिया मेरी

सलवार कमीज फाड़ दी थी तो मैंने हार के उस के साथ फिर सेक्स किया.

वो चोद के सोफे पर ही लेट गया मैंने अपने फटे कपडे उठाये और अपने कमरे में चेंज

करने चली गई वापस आ के मैं खाना बनाने लग गई किचन में जब मैं किचन में थी

तो घंटी बजने की आवाज आई

( यहाँ शुरू हुयी मेरी बर्बादी की कहानी या यूं कह ले की मेरी चुदैल बनने की कहानी )

घंटी बजी तो समीर ने दरवाजा खोला तो बंटी और उस के साथ समीर के तीन और

दोस्त खड़े थे समीर ने उन से कहा की आओ दोस्तों अन्दर आओ आज अचानक सब

एक साथ कैसे मेरे यहाँ आ गए ? ( किचन ड्रएंग रूम एकदम लगे हुए हैं हमारे घर में

तो मुझे सब बाते सुनने में आ रही थी.)

बंटी - यार समीर कल तेरे यहाँ से निकला तो बस हवा में उड़ रहा था बड़ा हल्का

हल्का लग रहा था यह तीनो (आशु , जावेद , दीपक ) बाहर ही मिल गए मुझे मस्ती

में देख के पूछने लगे की भाई बंटी क्या बात है हवा में उड़े कहा चले जा रहे हो ?

समीर - तो तुने क्या कह दिया समीर ने गुस्से में बंटी की तरफ देखा तो बंटी

कमीनेपन से मुस्कुरा उठा.

बंटी - भाई वही निकल गया जो अपना कल का राज़ था क्या करू यार इतना मज़ा

जिंदगी में कभी नहीं आया तो मजा अपने दोस्तो से कैसे नहीं शेयर करता.

समीर - साले मादर चो***** अब कह ही दिया तो यहाँ क्यूं आया है अब ?

बंटी - भाई मैंने तो इन भोस**वालो को मन किया था की मैं नहीं जाऊंगा समीर भाई

के पास लेकिन साले ये मुझे कहने लगे की अगर नहीं चले तो पूरी कालोनी में हल्ला

मचा देंगे की कैसे समीर ने अपनी बहन की सील तोड़ी और दोस्त से भी चुदवाया.

समीर - आशु क्या बकवास है यह क्यूं आये हो यहाँ बोलो ?

आशु - यार समीर देख भाई ऐसा है तुम दोनों ने तो कल बोतल की सील तोड़ ही ली

है तो एक एक घूँट हम भी पी ले तो क्या चला जायेगा चूत तो चूत है कितना भी

डालो उस का क्या बिगड़ जायेगा और फिर हम दोस्तों ने भी आज तक एक बार भी

नहीं चुदाई की है किसी की --- यह सुन के मेरे हाँथ पाँव फूल गए मेरी चूत में अभी

तक दर्द हो रहा था और अब यह 4 और चले आये हैं मैं रो पड़ी की एक आकाश से

अपनी प्यास बुझ वाना चाहती थी अब तो सारी कालोनी मेरे से अपनी प्यास बुझाना

चाहता है अगर मैंने आकाश को बुलवाया नहीं होता सिर्फ अपनी उंगली से ही अपनी

आग बुझा ली होती तो यह दिन नहीं देखना पड़ता.

समीर - आआआशूऊउ क्या बकवास कर रहा है गुस्से में समीर ने बोला साले मादरचोद

मेरी बहन है कोई रंडी नहीं है की आये और पैसे दे के चोद के चले गए

आशु - हम कहा पैसे दे रहे हैं समीर भाई हम तो फ्री में चोद के जायेंगे और रंडी नहीं

है तो कल अपने भाई से चुदवाने से पहले मर क्यूं नहीं गई ? और आराम से बात

ख़त्म कर लो तो ठीक है नहीं तो ऐसी बदनामी कर देंगे की घर से निकल नहीं

पाओगे और यह भी वादा है की हम फिर नहीं आयेंगे बस यार एक बार हमें भी चुदाई

का मज़ा लेने दे ना कल बंटी ने जो सुनाया है कल का किस्सा की हम तो कल से 4

बार मुट्ठ मार चुके हैं की टीना के नाम पर एक और सही एक और सही करते हुए

चार बार सरका लगा दिया है अब तो तभी मजा आयेगा जब टीना की चूत में पेल लेंगे

एक बार सच्चा वादा है दोस्त की फिर से फ्री की चूत समझ के नहीं आयेगे तेरे पास

पक्का सब राजी हो दोस्तों की नहीं आशु ने सब की तरफ देख के बोला तो सब कह

उठे की हाँ समीर भाई पक्का वादा है हमारा.

बंटी - समीर मान जा यार अपने ही तो दोस्त हैं सब मिल बाँट के कर लेंगे एक बार

तो क्या जायेगा और कभी हमें मौका मिला तो हम भी तुझे कोई लौंडिया चुदवा देंगे

समीर अब लालच में आने लगा था.

समीर - यार समझा करो यार वो कोई चुदैल नहीं है यार तुम सब एक साथ चुदाई

करने लग जाओगे तो ऐसा ना हो की कुछ परेशानी हो जाये ?

जावेद - यार समीर कुछ नहीं होता है यार रस तो गन्ने का निकलता है मशीन का

क्या जाता है ? और हम कोई जानवर थोड़ी है की उस के साथ जबरदस्ती थोड़ी करेंगे

सब प्यार से हो जायेगा यार उसे भी मजा आएगा ऐसा थोड़ी होता है की सिर्फ लौंडे ही

मज़ा लेते हैं लडकियां भी तो चुतड उचका उचका के चुद वाती हैं .

दीपक - भाई सुन ले तू ध्यान से मैं तो चोदे बिना नहीं जाऊंगा यहाँ से दीपक ने

धमकाते हुए समीर से कहा राजी राजी चुदवा दे टीना को नहीं तो तू जनता है की मैं

क्या कर सकता हूँ .

समीर कुछ कहने की स्थिति में नहीं था उसे भी समझ में नहीं आ रहा था क्या करे

अब उस ने भी हालात से समझौता कर लिया था तो उसे ने कहा

समीर - ठीक है दोस्तों आज चूत पार्टी मेरी तरफ से लेकिन रात को दारू तुम लोग

पिलवाओगे और मुर्गा भी बोलो जल्दी से मंजूर है की नहीं वरना जाओ जो करना है

कर लो मैं नहीं करने दूंगा कुछ तुम लोगो को

आशु - हुर्रे यह हुयी ना यारो वाली बात समीर भाई रात की पार्टी हम लोगो की तरफ

से पक्की क्यूं दोस्तों ?

दीपक - जावेद - याहूऊऊ समीर भाई पक्का रात को पार्टी हमारी तरफ से दोनों एक

साथ बोल पड़े की तो बुला ना यार अब टीना को लौड़े को कब तक मसलते रहे हम ?

समीर - टीना ओ टीना यहाँ आना जरा

मैंने सब सुन लिया था अब मैं भी समझ गई थी की यह चार आज मुझे चोदे बिना

नहीं जायेंगे और फिर समीर तो है ही बहनचोद साला वो क्यूं छोड़ेगा मुझे चोदे बिना

मैं समझ गई की आज हॉस्पिटल जाने की नौबत आ सकती है प्यार से करवा ले तो

शायद दर्द कम हो और तुने अगर प्यार से बात ना मानी तो यह साले तेरा रेप करने

से भी नहीं चुकेंगे तो मैंने भी मन बना लिया की अब जो होगा देखा जायेगा. मैंने वही

से आवाज लगे आ रही हूँ भाई . मैं बाहर निकल के आई तो सब मुझे घूरने लगे मैंने

कहा की क्या बात है ?

समीर - टीना यह चारो तेरी चूत चोदना चाहते हैं बोल रहे हैं की अगर इन्हे मन किया

तुने तो यह कल की बात सब से कह देंगे अब तू जो कहे तेरी मर्ज़ी बोल इन्हें भगा दूं

यहाँ से क्या ? समीर भी अब खुली खुली भाषा में मुझ से बात कर रहा था भाई बहन

वाली कोई बात थी ही नहीं उस के शब्दों में मैंने सर झुका लिया और वही खड़ी रही

कुछ कहे बिना तो सब समझ गए की मेरी हाँ है वरना तो मैं अब तक चिल्लाने लगती

की निकल जाओ यहाँ से या ऐसा ही कुछ.

आशु - दोस्तों टीना क्यूं मना करेगी क्यूं टीना हम कोई दुश्मन थोड़े हैं उसके पूरा मज़ा

देंगे टीना को भी कहते हुए वो मेरे करीब आ गया.

मेरा हाँथ पकड़ के मुझे सोफे पर ले आया मैं सर झुका के उस के साथ चलती हुयी

सोफे पर बैठ गई तो फिर क्या था सब पिल पड़े मुझे पर

जावेद - यारो मैं तो एक ब्लू फिल्म भी लाया हूँ ग्रुप सेक्स वाली चला दूं क्या DVD

पर ?

बंटी - यार मुझे तो टीना के मम्मे बड़े पसंद आये हैं कहते हुए वोह मेरे पीछे खड़ा

होके सोफे के पीछे से थोड़ा झुक के मेरे बूब्स दबाने लगा.

आशु - साले हरामी लगा ना देर क्या कर रहा है ? जैसे जैसे उस में चुदाई होगी हम

भी वैसा ही करेंगे कभी ग्रुप में चुदाई की नहीं है तो उस से सीख के ही कर लेंगे

दीपक - जानेमन आ जा अब मेरी बाहों में कहते हुए उस ने मेरे होंठ चूम लिए और

मेरे बूब्स मसलने लगा उतनी देर में आशु ने अपनी पेंट उतार दे और पूरा नंगा हो

गया उस का लंड पहले से ही खडा था आशु को देख के समीर ने भी अपनी पेंट उतार

दी तो जावेद वही से चिल्लाया की अबे मुझे भी आने दो तब तक बंटी भी पीछे खड़े

हुए अपने कपडे उतार चुका था जावेद ने भी अपने कपडे उतार के वही जमीन पर डाल

दिए और सोफे के पास आ गया उन सब को नंगा देख के दीपक भी नंगा हो गया और

सब मुझे देखने लगे की मैं अपने कपडे उतारू आशु ने कहा की यार सोफे पर नहीं हो

पायेगा चलो बेद पर चलते हैं तो आशु सब से आगे आया और बोला की मुझे मौका दो

( आशु ६ फुट का लम्बा तगड़ा लड़का था) कहते हुए उस ने मुझे अपनी बाहों में उठा

लिया बोला की बोलो कहा ले के चालू तो समीर ने कहा की पापा के कमरे में ही चलते

हैं डबल बेड डाला हुआ है तो वोह सब मुझे कमरे में ले आये और आशु ने मुझे बेड

पर पटक दिया जैसे ही मैं बेड पर गिरी सब मुझ पर पिल गए आशु ने आगे बढ़ के

मेरी सलवार का नाडा खोल दिया और मेरी सलवार खीच के उतार दी समीर ने कहा

की अब जल्दी से कुर्ता भी उतार दे वरना एक और फट जाएगा पहले ही एक फट गया

है तो मैं उठ के कुर्ता उतारने लगी तो जावेद ने मेरी पेंटी नीचे खीच दी और मेरी चूत

पर हाँथ फेर के बोला वाह क्या चिकनी चूत है साली ऐसी तो फिल्मो में भी नहीं देखी

है

समीर तब तक DVD निकाल के ले आया था और उस ने पापा की टीवी पर लगा दी

थी ब्लू फिल्म उस में सीन चालू हुआ तो उस में चार लड़के एक लड़की को चूम रहे थे

कोई उसकी चूत चाट रहा था तो कोई उसके बूब्स .

वहां पर तो चार थे यहाँ पांच सब मेरे बगल में खड़े थे की क्या करे और कौन कहा

शुरू हो जाये ? तब तक मैंने अपनी कुर्ती निकाल दी थी और ब्रा भी अब मेरे बूब्स

लटक रहे थे उन सभी को लग रहा था की कहा से शुरू करे तो समीर ने ही शुरुवार

कर दी की भाई लोग जिस को जहा जगह मिले शुरू हो जाओ मैं तो सबसे पहले

अपना लौड़ा चुस्वाऊंगा तभी जावेद ने कहा की भाई लोग फिल्म में देखो वहा पर भी

चारो खड़े हो के अपना लौड़ा चुसवा रहे हैं बारी बारी तो आशु ने कहा की चलो हम भी

वैसा ही करते हैं पांचो मेरे सामने बेड पर खड़े हो गए अपना लौड़ा हाँथ से हिलाते हुए

दीपक ने कहा की अब चल साली हमारे लौड़े चूस जैसे फिल्म में चूस रही है वोह

छिनाल मैं बिना कुछ बोले अपने सामने खड़े समीर के लौड़े को पकड़ के अपने मुह में

लेने लगी और उसे चूसने लगी तो समीर आहें भरने लगा आह्ह्ह आह्ह्ह म्मम्मम

समीर बोला तू तो जल्दी सीख गई है टीना की लौड़ा कैसे चूसा जाता है पक्की छिनाल

निकली तू तो मैंने अभी समीर के लौड़े को मुह में थोड़ी देर चूसा ही था की बंटी ने

समीर के लौड़े के साथ साथ मुझे अपना लौड़ा भी पकड़ा दिया तो मैं जल्दी जल्दी

दोनों के लंड मुह में लेने लगी कभी बंटी का कभी समीर का थोड़ी देर बाद आशु ने

कहा की अब मेरी बारी तो मैं उस के तरफ मुड गई और उस के लौड़े को पकड़ के

हिलाने लगी तो उस ने मेरे बाल पकड़ लिए बोला छिनाल मुह में ले हिलाना नहीं है तो

मैंने उस के लौड़े को भी मुह में ले के चूस लिया और उस के लौड़े को मुह से अन्दर

बाहर करने लगी थोड़ी देर बाद जावेद अपना लौड़ा लेके मेरे सामने चला आया तो मैंने

उस के लौड़े को चूसना शुरू कर दिया उस का लौड़ा बड़ा छोटा था एक बार को तो

मुझे हंसी आ गई की इतना छोटा है और चला है चोदने खैर समीर को बड़ी देर हो

गई थी खड़े हुए उस का सबसे पहले चूसा था मैंने तो उस को सहन नहीं हुआ और

वोह बेड पर लेट गया और मेरे नीचे अपना सर ले के आ गया और मेरी चूत चाटने

लगा अब चार अपना लौड़ा चुसवा रहे थे समीर बेड पर लेट के मेरी चूत को चाट रहा

था अब मुझे भी मज़ा आने लगा था.

मैं भी फिल्म की तरफ देखती हुयी मस्ती से सब के लौड़े बारी बारी चूसने लगी थी

कभी बंटी तो कभी दीपक का तो कभी आशु का तो कभी जावेद का लौड़ा मेरे मुह में

आ रहा था सब के स्वाद ले ले के मैं चूस रही थी १० मिनट बाद मेरा मुह दुखने लगा

और ऐसा लगने लगा की लौड़े चूस चूस के मेरे होंठ फट जायेंगे तो मैंने कहा की अब

बस कर मुझे दर्द हो रहा है मुह में.

आशु - तो जानेमन हम क्या करे तेरे पास चूत तो एक ही है और हम पांच जब तक

एक चोदेगा बाकि के चार तो कुछ ना कुछ करेंगे ही ना.

जावेद - समीर भाई मुझे पहले चोदने दो ना प्लीज.

समीर - तो आ जा ना किस ने रोका है ?

जावेद - अबे तो मैं चोदु कैसे तुम लोग उसे छोडो तो

आशु - अबे तो हम क्या करेंगे तब तक ?

तभी दीपक का ध्यान फिल्म की तरफ गया तो उस ने कहा की सालो जैसे वोह चोद

रहे हैं वैसे ही करो न तो सब ने देखा की उस में लड़की को एक लड़का मिशनरी पोज

में चोद रहा था बाकि उस के शरीर से खेल रहे थे और बारी बारी अपना लौड़ा चुसवा

रहे थे तो जावेद ने मुझे बेड पर धक्का दे दिया और अपना लंड मेरी चूत के दरवाजे

पर रख दिया और कहा की भाई लोग मैं चोद रहा हूँ अब तुम लोग अपनी अपनी

जगह पसंद कर लो कहते हुए उस ने अपना छोटा सा लंड मेरी चूत में पेल दिया मुझे

ज्यादा लगी नहीं क्यूंकि उस का बड़ा नहीं था उसे ने अपने घुटने मोड़ रखे थे और

मेरी चूत में अपना लंड पेल रखा था बाकि चारो सोच रहे थे की कौन कहा जाये तो

आशु मेरे ऊपर आ गया और उस ने मेरे बूब्स चूसने शुरू कर दिए मुझे भी थोडा मज़ा

आने लगा था और दर्द भी कम था तो मैं भी मस्ती में उन का साथ देने लगी थी

मैंने समीर का लौड़ा अपने हाँथ में पकड़ा और उस से कहा की आओ मैं तुम्हारा लौड़ा

चूस लूं तो समीर खुश हो गया वाह रानी अब तो मस्ती में आ गई हो समीर ने मेरे

सर के नीचे तकिया लगाया और घुटने मोड़ के बैठ गया मेरे मुह के पास.

मैंने थोड़ा सा सर ऊपर किया और समीर के लौड़े को मुह में भर लिया और गप्पा गप

मुह में लेने लगी समीर की हाय हाय निकल गा जब मैंने मुह को टाईट कर के उस के

लौड़े को कस के चूसना शुरू कर दिया तो.

बंटी - समीर यार अकेले अकेले मज़े ले रहा है हमें भी तो लेने दे कहते हुए वोह मेरे

सर की दूसरी तरफ आ गया अपना लौड़ा ले के तो समीर ने कहा की जरा बंटी को भी

अपने मुह का मज़ा दे दे टीना

आशु मजे से मेरे बूब्स पर मुह मार रहा था कभी निप्पल तो कभी पुरे बूब को मसल

मसल के दबा रहा था खली खड़ा था. दीपक तो मैंने दीपक की तरफ देखा और फिर

अपने दूसरे बूब्स की तरफ देखा तो वो मेरा इशारा समझ गया की मैं उस अपने दूसरे

बूब को चूसने के लिए कह रही हूँ वोह भी झट से मेरे दूसरे बूब पर पिल गया और

मेरे दोनों बूब्स को अब आशु और दीपक कुत्ते की तरह भम्भोड़ रहे थे जैसे किसी कुत्ते

को पहली बार बोटी मिली हो. समीर और बंटी अपने मोटे मोटे लौड़े मेरे मुह में पेल रहे

थे और जावेद मजे से मेरी चूत में लगा था पांच मिनट बाद आशु दीपक बाटी समीर

ने अपनी अपनी जगह बदल ली अब मैं आशु का और दीपक का लौड़ा चूस रही थी (

सब में दीपक का लौड़ा सबसे बड़ा था और भयानक मोटा था ) समीर और बंटी मेरे

बूब्स पर थे और जावेद के धक्के मेरी चूत में तेज़ हो गए थे और तभी

जावेद - भाई लोग मैं तो झड़ने वाला हूँ आह्ह्ह म्मम्म कहते हुए उस ने चुदाई तेज़

कर दी मेरी चूत की और चार पांच धक्को के बाद ही उस ने अपनी सारी गंदगी मेरे

अन्दर डाल दी मेरी चूत एक गरम से अहसास से भर गई.

जावेद ने अपना लौड़ा मेरी चूत से निकाल और हट गया और बोला अब जिस को

आना हो आ जाओ मैं तो निपट गया.

आशु - यार समीर अब मेरी बारी तुम दोनों तो कल भी निपट चुके हो आज पहले हम

लोगो को कर लेने दो

समीर - जा बेटा ऐश कर तू भी क्या याद रखेगा

आशु फटाफट उठा और अपना लौड़ा ले के मेरी चूत के पास बैठ गया और चूत में

लौड़ा डालने की कोशिश करने लगा पर उस का गया नहीं क्यूंकि ????

ऊओह्ह्ह्ह आह आह क्या कर रहे हो आशु मैंने कहा चूत में डाल वोह नीचे है थोड़ी

पहले किसी की चूत देखि नहीं है क्या ?

तो आशु ने शरमाते हुए कहा की हाँ पहली बार ही है हम सब का तो मैंने कहा की तू

तो सब में अनाड़ी लग रहा है कहते हुए मैंने दीपक का मोटा सा लौड़ा वापस अपने

मुह में भर लिया और समीर और बंटी हँसते हुए मेरे बूब्स चूसने लगे आशु ने फिर

निशाना लेते हुए डाला तो अन्दर चला गया चूत में मेरी मुझे अब थोडा सा दर्द हुया

लेकिन जावेद के वीर्य से चूत भरी थी तो उस के वीर्य ने क्रीम का काम किया और

उस का लंड आराम से अन्दर चला गया आशु ने मेरी चुदाई शुरू कर दी धीरे धीरे

जावेद तब तक जा के अपने कपड़ो में से सिगरेट निकाल लाया था और वही पीने लगा

था आशु ने अभी थोड़े धक्के ही मारे होने की उस के लंड ने मेरी चूत में पिचकारी

चला दी

आशु - मर गया रे आःह्ह्ह म्मम्म यह क्या हुआ यार मेरे साथ इतनी जल्दी कैसे चूत

में पिचकारी चल गई

समीर - साले हरामी जब चोदा नहीं जाता तो क्यों सब से पहले जाने की जिद्द कर

रहा था. दीपक हट साले मैं बताता हूँ कैसे की जाती है चुदाई दीपक ने मेरे हाँथ से

अपना लंड खीचा और कहा की देख जानेमन मैं कैसे तेरी चूत का बाजा बजता हूँ तो

मैंने भी मस्ती में कहा की फाड़ मत देना बस बाकि जो करना है करो तुम्हारा बड़ा

मोटा है थोडा आराम से करना अब मेरी चूत में दो लोगो का वीर्य भर गया था दीपक

गया और उस ने मेरी चूत पर अपना लौड़ा रख के जो पेला है मैं उचक गई.

टीना - आह आह्ह्ह क्या कर रहे हो ?आःह्ह मार डालोगे क्या फ्री की चूत है तो क्या

फाड़ दोगे ?

दीपक - हाँ साली रंडी मैं तेरी फाड़ ही डालूँगा क्योंकि तू दूसरी बार तो देगी नहीं चोदने

तो एक बार में ही तेरा बाजा ऐसा बजाऊंगा की याद रखेगी की किस मर्द से पाला पडा

था.

टीना - देखो दीपक आराम से करो वरना मैं नहीं करने दूँगी कुछ

दीपक - अरे गुस्सा क्यूं होती हो जाने मन मैं आराम से ही करूंगा वोह तो मैं पहली

बार में अपने लोडे को पूरा पेल रहा था ताकि एक ही बार दर्द हो फिर बाद में मज़ा

आ जाये तुझे भी. मैंने मन ही मन सोचा की अगर चूत में पहले से ही वीर्य नहीं पड़ा

होता तो इस ने तो मेरी फाड़ ही देनी थी लेकिन दीपक बाद में सच में आराम से करने

लगा उस ने बड़े धीरे धीरे से धक्के लगाना शुरू किया और साथ ही साथ मेरे चूत की

फुनगी को भी अपने हाँथ से मसल रहा था तो मुझे भी बड़ा मज़ा आ रहा था दर्द तो

हो रहा था लेकिन दर्द में भी मज़ा आ रहा था मेरी चुदाई अब रफ़्तार पकड़ती जा रही

थी दीपक ने मेरी कमर को कस के पकड़ लिया और जोर से चोटे मरना शुरू कर

दिया मैं दर्द से आह आह उई उई करने लगी मज़ा भी था और दर्द भी तो मेरी आवाजे

निकल रही थी सिस्कारिया भर रही थी मैं साथ साथ मैं चिल्लाते भी जा रही थी की

धीरे धीरे उसे १५ मिनट हो गए मुझे चोदते चोदते तो मैंने कहा की बस करो मैं दो

बार झड चुकी हूँ अब तक अब तो मुझे छोड़ दो तो दीपक ने कहा की बस जानेमन मैं

भी झड़ने वाला हूँ उस ने मेरी कमर में अपने नाखून गडा दिए और जो चुदाई शुरू की

मेरी की क्या कहू उसके हर धक्के पर मैं उचक उचक जा रही थी मेरे बूब्स उछल

उछल के यहाँ वहाँ हो रहे थे उस ने मेरी बुरी हालत कर दी अब तो मैं समीर और बंटी

के लौड़े चूसना भूल के सिसकारी भर रही थी दर्द हद्द से ज्यादा बड गया था की तभी

ऐसा लगा की ढेर सारा गरम पानी मेरे अन्दर भर गया हो दीपक ने भी मेरी चूत में

अपना वीर्य निकाल दिया था और वोह पसीने से लथपथ था यहाँ मेरी हालत भी ख़राब

हो गई थी चूत में जलन होने लगी थी मैंने चूत पर हाँथ लगा के देखा तो हल्का

हल्का खून सा दिखाई दिया मैं समझ गई की दीपक ने मेरी चूत का भुरता बना दिया

है साले ने फाड़ के ही रख दी है सच में

तीन लौड़े मेरी चुदाई कर चुके थे अभी तो दो और लौड़े बचे थे और मेरी हालत खराब

हो गई थी दीपक ने भी अपना लौड़ा मेरी चूत से निकाल लिया तभी चूत में से देर

सारा वीर्य बाहर निकल के बेड पर गिर गया आखिर तीन तीन लौडों का वीर्य था कब

तक अपनी छोटी सी चूत में भर के रखती

मैंने समीर से कहा की अब मेरे बस का नहीं है चुदवाना मुझे प्लीज छोड़ दो तो बंटी

ने कहा की नहीं नहीं ऐसा कैसे हो सकता है मैं क्या चुतिया हूँ जो ऐसे ही चला जाऊं

कहते हुए वोह जल्दी से मेरी चूत पर आ के बैठ गया और अपने लंड को मेरी चूत पर

रखने लगा मैंने कहा की जो करना है जल्दी कर लो मैं एक बार दर्द सह के सब करवा

लुंगी अब देर मत करो मुझ से अब ज्यादा दर्द सहन नहीं होगा यह सुन के समीर ने

कहा के बस करो बे अब जल्दी निपट लो मेरी भी बारी आनी है अभी

तो बंटी ने जल्दी से अपना लौड़ा मेरी चूत में डाल दिया और मेरी चुदाई का फोर्थ

राऊंड चालू हो गया तब तक आशु जो की सब से जल्दी झड गया था उस का खड़ा भी

हो गया सब से जल्दी तो उस ने कहा की यार मैं तो मजे ले ही नहीं पाया मैं तो आठ

दस चोटों में ही झड गया था था देखो ना कितनी जल्दी फिर खड़ा हो गया है मुझे

एक बार और करने दो ना मैं तब तक अपना ध्यान दर्द से हटाने के लिए ब्लू फिल्म

देख रही थी ताकि मेरा ध्यान चूत पर ना जा के कही और लगा रहे तो दर्द कम

महसूस होगा मैंने ब्लू फिल्म में देखा की लड़की ने एक लड़के का लंड अपने मुह में ही

झडवा लिया तो मैंने भी फुल छिनाल बन के कहा की आ जा तेरा मैं अपने मुह से

निकाल देती हूँ एक बार और वरना हमेशा रोता रहेगा की मुझे मजा नहीं आया था.

समीर - साली तू तो पूरी रंडियों जैसी बातें करने लगी अब तो

टीना - तुने वही तो बना दिया है मुझे मैंने समीर से कहा और आग बरसाती नज़रो से

उसे घूरा तो समीर सकपका के दूसरी तरफ देखने लगा

टीना - आ जा आशु तुझे वोह मजा दूँगी की तू भी क्या याद करेगा (अब मुझ को भी

समझ में नहीं आ रहा था की मुझे क्या हो गया है)

आशु तेज़ी में मेरे मुह के पास अपना लौड़ा ले के आ गया की ऐसा ना हो की मेरा

मन बदल जाये मैंने आशु का लौड़ा अपने मुह में चूसना शुरू कर दिया और ऐसे कस

कस के की आशु की हालत पतली हो गई की कब मैं उस का लौड़ा अपने मुह से

निकालू तब तक बंटी ने मेरे चूत में अपना लावा निकाल दिया उस को फिर से भर

दिया अपने वीर्य से बंटी हटा नहीं की मेरा बहनचोद भाई भी तेज़ी से पिल गया मेरी

चूत में.

थोड़ी देर में ही मैंने आशु की वोह गत बना दी की उस ने मेरे मुह में ही अपना वीर्य

निकाल बैठा तो मैं उसे धक्का दे दिया की हट अब और पूरा वीर्य साइड में थूक दिया

उधर समीर के धक्के शुरू थे उस ने भी दीपक की तरह से मेरी कमर पकड़ के मेरी

चूत चोदना चुरू कर दिया था और थोड़ी देर में उस ने भी मेरी चूत में अपना वीर्य

निकल दिया और मेरे ऊपर लस्ट पस्त होके लेट गया अब तक मेरे पुरे अंग अंग में

दर्द की लहरे उठने लगी थी ऐसा लग रहा था की किसी ने मेरी बहुत पिटाई कर दी

हो

मैं अपनी आँख बंद कर के लेट गई थी मैंने आँख बंद करे करे ही कहा की अब सब

यहाँ से निकल जाओ तेज़ी में वरना ठीक नहीं होगा ( अब तक मैं समझ गई थी की

हर मर्द चूत का गुलाम होता है अगर चूत चाहे तो मर्द से कुछ भी करवा सकती है ).

सब बिना कुछ बोले बाहर चले गए यहाँ तक की समीर भी उठा और सीधे बाहर

निकल गया मैं एक घंटे तक वैसे ही नंगी लेटी रही दर्द और मज़ा क्या था कुछ समझ

में नहीं आ रहा था लेकिन अब दिमाग में काफी कुछ साफ़ हो गया था की यहाँ कोई

रिश्ता नहीं है बस चूत और लंड का रिश्ता है.

सब चले गए थे दीपक आशु जावेद और बंटी भी. समीर टीवी देख रहा था मैं उठी

सीधे बाथरूम में घुस गई अब मुझे अपने आप से घिन सी आ रही थी ऐसा लग रहा

था की जाने क्या करू मैं अपना मैं कम से कम १ घंटे तक नहाती रही क्यूंकि मुझे

लगता रहा की मैं अब भी गन्दी हूँ लेकिन एक ओरत कितनी गन्दी हो सकती है मुझे

बाद में मालूम चला.
 
बहन की चुदाई के साथ फैशन शो

यह बात आज से 1 साल पहले की है, मेरे घर में मेरे अलावा, मम्मी, पापा और एक बड़ी बहन रहती है, जिसकी उम्र

तब 20 साल होगी और में कोई 18 साल का था. मेरी मम्मी और बहन जितनी मॉडर्न और बोल्ड थी, में उतना ही

सीधा और शांत था. मेरे पड़ोस के कई लोग तो मुझे पहचानते भी नहीं थे, क्योंकि में आमतौर पर घर में रहना ही

पसंद करता था, जबकि मेरी बड़ी बहन और मम्मी रोज़ाना मार्केटिंग पर जाती थी.

उन दोनों माँ- बेटी का बदन गदराया हुआ था और वो दोनों छोटी बड़ी बहन लगती थी. मेरे पापा सरकारी ऑडिटर

होने के कारण अधिकतर टूर पर ही रहते थे. मेरी मम्मी और बहन बड़े खुले विचारो वाली थी और वो दोनों ही घर

में बड़े बिंदास अंदाज़ में रहती थी. मेरी मम्मी को थोड़ी ब्लडप्रेशर की शिकायत थी तो इस कारण उनसे ज़्यादा गर्मी

सहन नहीं होती थी इस कारण वह घर में बड़े और चौड़े गले का ब्लाउज और पेटीकोट पहने रहती या फिर नाइटी

में घूमती. फिर वही मेरी बहन भी अपने बदन का भूगोल दिखाती रहती थी. उन दोनों के बदन के नज़ारे देखकर

मुझे कहीं और मुँह मारने की कोई ज़रूरत ही नहीं पड़ती थी.

अब जब भी मम्मी घर का काम करती तो उनके सफेद मांसल स्तन उनका ब्लाउज फाड़कर बाहर आने को होते, तो

वहीं मम्मी अपना पेटीकोट भी घुटनों के ऊपर तक उठा लेती, जिस वजह से मुझे मम्मी की सफेद केले के तने के

समान गोरी जांघे भी दिखाई पड़ती रहती थी, लेकिन में जब भी उन्हें चोरी छुपे देखता, तो मेरी बहन मुझे घुरते हुए

ही मिलती, तो इस कारण में अपनी निगाहें झुका लेता, तो कई बार वो हल्के से मुस्कुरा भी देती, लेकिन में उसके

मन की बात भाप नहीं पाता था.

मेरी बहन ने गर्मियों में कॉलेज के समर कोर्स में ड्रेस डिज़ाइनिंग का कोर्स शुरू किया था और क्लास के आखरी में

उसके कॉलेज में फैशन शो था, जिसमें मेरी बहन ने भी भाग लिया था. अब उसे अपनी खुद की डिज़ाइन की हुई ड्रेस

पहनकर रेम्प पर शो देना था. अब नियम यह था कि जो भी ड्रेस बने वो महँगी ना हो और लेटेस्ट डिज़ाइन की

मॉडर्न ड्रेस हो, तो मेरी बहन पूरा दिन सोचती रही कि क्या ड्रेस डिज़ाइन करे? लेकिन अब उसे कुछ समझ में नहीं

आ रहा था और इसके अलावा उसे फैशन शो में रेम्प पर चलने की प्रेक्टीस भी करनी थी.

अब मम्मी होती तो ज़रूर कुछ अच्छा आइडिया देती, लेकिन मम्मी और पापा तो घूमने के लिए 10-12 दिनों के

लिए बाहर गये थे. फिर तब उसने मेरी मदद माँगी, तो मैंने दिमाग़ पर ज़ोर देकर उसे अपने पुराने कपड़ो से कुछ

नया करने का आइडिया दिया.

फिर वो कुछ सोचकर बहुत खुश हुई और मुझे घर के ऊपर बने स्टोर रूम में ले गयी. फिर वहाँ हमने पुराने कपड़ो के

पोटले को खोला, जिसमें से उसके कोई 8-10 साल पुराने कपड़े मिल गये. मम्मी ने उन्हें शायद इसलिए संभाल रखा

था, क्योंकि मेरी बहन का बदन बड़ी तेज़ी से विकसित हुआ था और उसके कई कपड़े उसे तब छोटे पड़ने लगे थे, तो

किसी ज़रूरतमंद को देने के विचार से उन्हें मम्मी ने रोक लिया था और शायद उन्हें देना भूल गयी थी.

ख़ैर फिर हम कुछ ड्रेस लेकर नीचे आए और उन्हें साफ करके प्रेस करके उनसे कोई नयी ड्रेस बनाने का विचार शुरू

कर दिया. अब एक स्कर्ट जो कि डेनिम का था, उसे हमने ढीला करके मेरी बहन की कमर के नाप का कर दिया,

लेकिन उसकी लम्बाई बहन के कूल्हों पर चढ़ने के बाद वो मिनी स्कर्ट की ही रह गयी थी. अब में तो उसे इतनी

छोटी मिनी स्कर्ट नहीं पहनने देना चाहता था, लेकिन उसने कहा कि वहाँ ड्रेस मॉडर्न होनी चाहिए और फिर वह

लेडीस कॉलेज है, जहाँ केवल लेडीस ही होगी.

फिर इसके बाद उसने एक स्मोकिंग वर्क किया हुआ टॉप निकाला, अब उसको सभी साईड से ढीला करने के बाद भी

वो उसकी बॉडी पर टाईट था तो तब वो बोली कि चल मेरी मदद कर और मेरा सही से नाप ले.

पहले तो में कुछ समझा नहीं, लेकिन जब वो अपने हाथ में इंच टेप लेकर मेरे सामने खड़ी हो गयी तो मैंने कहा कि

मुझे नहीं आता.

वो बोली कि यदि मेरी सहेलियाँ उस फैशन शो में भाग नहीं ले रही होती, तो वो मुझे तकलीफ़ नहीं देती, क्योंकि

यदि उसकी सहेलियों को उसका यह आइडिया पता चल गया तो वो भी ऐसा ही कुछ ड्रेस तैयार करके प्रतियोगिता

जीत जाएगी और यदि फिर भी मुझे कुछ तकलीफ़ है तो कोई बात नहीं, में अपना बॉडी का नाप गली के कोने वाले

जेंट्*स टेलर से करवा लूँगी या फिर शो से अपना नाम वापस ले लूँगी.

उसकी यह बातों को सुनकर मैंने अपने हाथ में इंच टेप ले लिया और कहा कि बताओ नाप कैसे लेना है? तो वह खुश

हो गयी और बोली कि मुझे बिल्कुल फिक्स नाप चाहिए क्योंकि में ऐसी ड्रेस डिज़ाइन करूँगी, जो कि मेरे बदन को

छुपाए कम और दिखाए ज़्यादा.

अब उसकी बातों को सुनकर में चुप सा हो गया था. फिर उसने तत्काल अपनी टी-शर्ट मेरे सामने ही खोल दी,

जिसमें उसने एक लेडीस शमीज़ पहन रखी थी और उसमें से उसकी ब्लेक ब्रा की स्ट्रिप्स बाहर आ रही थी. फिर

उसने बिना शर्म संकोच के मुझे नाप लेने का बोला, तो पहले तो में अपने हाथों को उसके बदन से बड़ी दूरी से ही

कोशिश कर रहा था, लेकिन जब वो गुस्सा करके बोली कि तुम मेरे सगे भाई हो कोई गैर मर्द नहीं हो, तो में कुछ

नॉर्मल हुआ.

मैंने उसके फिगर का सही से नाप लिया और उसने उसी मिनी स्कर्ट और शमीज में अपनी ड्रेस तैयार की, लेकिन जब

उसने उसे ट्राई किया तो शायद वो सही से फिट नहीं रही, तो उसने मुझे फिर एक बार अपने सीने का नाप लेने को

बोला और इस बार उसने अपनी शमीज भी उतार फेंकी, क्योंकि उसके अनुसार इसके कारण उसका सही नाप नहीं

आ पा रहा था.

अब उसे केवल ब्लेक ब्रा में देखकर मेरे होश उड़ गये थे, उसके सफेद मांसल स्तन ऐसे लग रहे थे मानों उन्हें

जबरदस्ती ब्रा में ठूस रखा हो. फिर मुझे इस तरह फटी-फटी आँखो से घुरते हुए देखकर वो बोली कि क्या पहले कभी

किसी लेडी के सीने को नहीं देखा क्या? तो मेरे मुँह से बोल नहीं फूटे. फिर वो बोली कि मम्मी के सीने को तो बड़ी

आँख फाड़-फाड़कर देखता है, क्यों है ना? नहीं देखता है क्या? अब में क्या जवाब देता? तो में चुपचाप अपनी

निगाहें नीची किए देखता रहा.

वो बोली कि छोड़ में तो मज़ाक कर रही थी, चल फटाफट से मेरा सही नाप ले और इस बार के नाप में सही में कुछ

अंतर आया है. फिर इसके बाद तो उसने नये नाप से जो ड्रेस तैयार की और उसे पहनकर जब वो मेरे सामने आई, तो

में चौंक सा पड़ा. अब उसका पुराना सा स्मोकिंग ड्रेस काट छांटकर एक ऐसी डिज़ाइनर ब्रा का रूप ले चुका था,

जिसमें मेरी बहन की छाती मुश्किल से समा रही थी.

अब ऐसा लग रहा था कि मानों अब फटा अब फटा और नीचे पहना मिनी स्कर्ट इतना छोटा था कि जरा सा झुकने

पर उसकी सफ़ेद पेंटी दिखाई पड़ती थी और ऊपर नाभि से भी इतना नीचे बँधा था की 1 इंच और नीचे शायद

उसके गुप्तांग ही दिखाई पड़ जाते. फिर इस प्रकार की उसने लगभग 4-5 ड्रेस तैयार की और अब इन सभी ड्रेस में

उसके शरीर का पूरा मुआयना हो रहा था और ऊपर से वो थोड़ी मांसल देह की थी, लेकिन में खुद भी उसके बदन के

भूगोल को निहारते हुए उसको अपने विचारो में लाकर दो बार मुठ मार चुका था.

अगले दिन वो मुझे मार्केट लेकर गयी और दो जोड़ी ऊँची हील की सैंडल खरीदी और इसके बाद वो मुझे एक लेडीस

स्टोर में ले गयी, जहाँ के सभी सेल्समैन जेंट्*स थे, तो वहाँ मेरी बहन ने चाइनीस पेटर्न की ब्रा और पेंटी खरीदी. अब

वो बिल्कुल बिंदास होकर अपना साईज़ और डिज़ाइन बता रही थी. फिर उसने बिना स्ट्रिप वाली इतनी छोटी ब्रा

खरीदी, जो शायद ही उसकी निपल्स को भी ढँके और इसके अलावा उसने ब्रा में पहनने वाली कप और हेयर रिमूवर

लोशन आदि भी खरीदा था.

अब शाम को जब हम बाज़ार में ही भरपेट नाश्ता आदि खा पीकर घर आ रहे थे, तो वो बाइक पर मुझसे ऐसे

चिपककर बैठी थी मानों मेरी बहन ना होकर मेरी कोई गर्लफ्रेंड हो. अब वो बाइक पर सलवार सूट पहने दोनों तरफ

अपने पैर डालकर बैठी थी और मेरे ब्रेक लगाने पर उसके मोटे-मोटे बूब्स मेरी पीठ पर आ टकराते थे. अब जीन्स में

मेरा उत्तेजित लंड भी बड़ा परेशान कर रहा था. अब जब हम आधे रास्ते में होंगे तो तभी जोरो की बारिश होने लगी

और फिर मैंने गाड़ी रोकी, तो उसने मना कर दिया कि नहीं चलते रहो.

जब हम पूरी तरह से भीगकर घर आए तो मैंने देखा कि मेरी बहन के गीले कपड़े पूरी तरह से भीगकर उसके बदन से

चिपक चुके थे और उसकी सफेद ब्रा उसमें से साफ दिखाई पड़ रही थी. फिर घर में घुसने के बाद में टावल लेकर जब

बाथरूम से बाहर आया तो मैंने देखा कि मेरी बहन दरवाजा बंद करने के बाद अपनी कुर्ती उतार रही थी. फिर उसने

मेरे सामने ही मेरे हाथ से एक टावल लिया और उसे अपने सीने पर लपेटते हुए अपनी ब्रा, पेंटी और सलवार भी

खोल दी.

अब उसने केवल एक टावल अपने सीने पर बाँध रखा था, जिसमें से उसके सीने का उभार साफ-साफ दिखाई पड़

रहा था और नीचे उसकी नंगी जांघे साफ-साफ दिखाई पड़ रही थी. अब इससे पहले वो मुझे कभी इतनी ज़्यादा

बिंदास नज़र नहीं आई थी और उसकी आँखों में तैरती शरारत मुझे किसी अलग चीज़ का अहसास करा रही थी.

उसके बाल सूखने के बाद उसने मुझसे कहा कि चलो रेम्प पर चलने की अभ्यास कर लेते है और उसने अभी-अभी

लाई हुई न्यू सैंडल को पहनकर 2-3 मोटी-मोटी बुक्स को अपने सिर पर रखा और बड़े ही सेक्सी कदमों से वो हॉल

के बीचों बीच चलने लगी. फिर कुछ देर की कोशिश के बाद तो उसकी चाल ही बदल गयी. अब उसके हिलते हुए

चूतड़ों को देखकर तो मेरा लंड तना जा रहा था और मेरी आँखे उसके बदन का भूगोल नापे जा रही थी. फिर तभी

अचानक से उसका संतुलन बिगाड़ गया और उसकी हाई हिल्स सैंडल एक और मुड़ गयी तो जिस वजह से उसके पैर

में मोच आ गयी और वो तेज दर्द से चीख पड़ी. फिर मैंने दौड़कर उसे थामा और आहिस्ता से उसे बेडरूम में ले

जाकर बेड पर बैठा दिया.

अब उसके पैरो के पंजो में हल्की सी सूजन सी आ गयी थी, लेकिन उसकी चोट ज़्यादा गहरी नहीं थी. फिर में जल्दी

से मूव ले आया और उसे देने लगा, तो वो बोली कि मुझसे नहीं लगेगा, तू ही लगा देना.

में ज़मीन पर बैठ गया और वो बेड पर अपने पैर लटकाकर बैठी थी. अब उसकी गोरी-गोरी सफेद टांगो पर अपना

एक हाथ लगते ही मेरे बदन में करंट सा लगने लगा था और वह कराहती जा रही थी और अपने पैरों को बार-बार

मोड़कर अपने दर्द को दबा रही थी. अब जब वो अपना पैर ऊपर उठाती, तो में उसकी जांघो के जोड़ो तक अपनी

निगाहें मारने की कोशिश करता, लेकिन कहीं पकड़ा ना जाऊं इसलिए बहुत होशियारी बरत रहा था.

तब मुझे लगा कि मेरी बहन जानबूझ कर मुझे अपने बदन की नुमाइश करा रही थी, क्योंकि इस समय उसने अपने

बदन पर केवल एक टावल लपेट रखा था और यदि वो चाहती तो पहले ही अपने कपड़े चेंज कर लेती. फिर मैंने भी

मौके का फायदा उठाने में ही अपनी समझदारी समझी और में अपने हाथों को उसकी जांघो तक फैरने लगा, जिस

वजह से शायद वो भी उत्तेजित होने लगी थी, तो तब वो मुझसे बोली कि मुझे बाथरूम जाना है, प्लीज मेरी मदद

करोंगे.

में उसे अपने कंधो का सहारा देकर बाथरूम में ले गया, लेकिन वहाँ वो बोली कि में अपने इस पैर पर वजन नहीं दे

पा रही हूँ, अब में नीचे कैसे बैठूं? तो तब मैंने उसे सहारा देकर सीट पर बैठा दिया और बाहर जाने लगा, तो वो

बोली कि यहीं रुक जा, बस 2 मिनट की बात ही तो है. अब यह तो मेरे मन का काम हो गया था तो में वहीं रुक

गया और मैंने अपना मुँह दूसरी तरफ फैर लिया. फिर कुछ देर के बाद मुझे पेशाब करने की सिटी के समान आवाज़

सुनाई पड़ने लगी तो जिसे सुनकर में पलटकर देखने के लिए तड़प सा गया.

फिर तभी वो बोल पड़ी कि तू भी बाथरूम कर ले, तो मैंने कहा कि हाँ बाद में कर लूँगा, तो वो हंसकर बोली कि

क्यों शरमाता है? में लड़की होकर तेरे सामने पेशाब कर रही हूँ और एक तू है कि बस. फिर तब मैंने कहा कि में कहाँ

सामने हूँ? तो वो बोली कि मैंने तो नहीं कहा मुँह फैरने के लिए. फिर तब में चौंक सा गया और फिर मैंने उसकी

तरफ अपना मुँह किया और फिर में भी अपने तने हुए लंड को बाहर निकालकर उसके सामने ही पेशाब करने लगा.

फिर मेरे लंड के आकार को देखकर उसकी आँखे फटी की फटी रह गयी और वो मानों भूत की तरह मेरे लंड को

एकटक देखने लगी. फिर तब में बोल पड़ा कि क्या हुआ? तो वो बोली कि कुछ नहीं.

अब में जानबूझ कर अपने लंड को अपने हाथों में हिलाते हुए बिल्कुल उसके पास पहुँच गया था. अब वो हैरानी से

बोल पड़ी कि यह क्या है? तो मैंने बड़ी बेशर्मी से उससे कहा कि खुद ही अपने हाथ में लेकर देख लो. फिर उसने सीट

पर बैठे-बैठे ही मेरा लंड अपने हाथ में ले लिया और उसे सहलाने लगी.

अब उसके हाथों का नर्म स्पर्श होते ही मेरा लंड फिर से तन गया था और अपने पूरे आकार में आ गया था. अब उसके

चेहरे पर भय मिश्रित मुस्कान थी और अब वो धीरे-धीरे से खड़ी होने लगी थी. फिर में उसे सहारा देकर बाथरूम से

बाहर ले आया और फिर से उसे बेड पर छोड़ दिया. फिर अचानक से वो बोली कि जो अंडरगार्मेंट में लाई हूँ, वो मुझे

दे दो तो में उन्हें ट्राई कर लूँ, यदि कोई साईज़ का प्रोब्लम हुआ तो बाद में वो चेंज नहीं करेगा. फिर मैंने उसे

अंडरगार्मेंट से भरा बैग ला दिया.

जब में पानी पीकर आया तो मैंने देखा कि वो ब्रा और पेंटी में बेड पर बैठी थी और मुझे देखकर बोली कि कहाँ चला

गया था? बता में कैसी लग रही हूँ? अब इस ब्रा में उसके स्तन समा ही नहीं रहे थे. अब ऐसा लग रहा था कि मानों

अभी कबूतर पिंजरा तोड़कर बाहर आ जाएंगे. अब केवल उसकी निप्पल ही ढकी हुई थी और नीचे पहनी पेंटी में से

भी उसके पूरे मांसल कूल्हें बाहर थे, अब केवल उसकी चूत ही ढकी हुई थी.

फिर मैंने उससे कहा कि ऐसी ब्रा पेंटी क्यों खरीदी? तो वो बोली कि जो ड्रेस में फैशन शो के दौरान पहनूंगी यदि

उसमें वही नॉर्मल ब्रा पहनती तो वो बाहर निकलती और इसमें तो कंधे के स्ट्रिप्स भी नहीं है इस कारण यह ज़्यादा

सही रहेगी.

तभी मेरी निगाह उसकी लाई हुई एक और पेंटी पर पड़ी, जिसमें कहने के नाम पर केवल दो रस्सियाँ थी, एक तो

कमर पर रहती है और दूसरी दोनों जांघो के बीच की, जो कि नाम की ही थी.

मैंने कहा कि यह क्या बला है? तो वो हंस पड़ी और बोली कि इसे जी-स्ट्रिंग कहते है और फिर उसने अपनी पेंटी मेरे

सामने ही खोलकर उसे पहन लिया और फिर जब वो कुछ उठाने के लिए झुकी, तो में उसके नंगे कूल्हें देखता ही रह

गया. अब मुझे उसकी गांड का छेद साफ-साफ दिखाई पड़ रहा था. फिर जब वो आगे मुड़ी, तो में बोला कि अब पैर

का दर्द कैसा है? तो वो बोली कि अब बहुत आराम है और फिर वो अपने दोनों पैरों को हवा में उछालते हुए अपने

दोनों पैरों को चौड़ा करके अपनी जांघो के जोड़ को दिखाने लगी.

अब इस समय वो पक्की रंडी की तरह हरकतें कर रही थी. फिर में भी उसके बेड पर जाकर बैठ गया और उसके पैरों

को अपने हाथों में लेकर सहलाते हुए उसे कामुक नजरों से देखने लगा. अब उसकी जी-स्ट्रिंग की पट्टी उसकी कचोरी

की तरह फूली हुई चूत में धसी हुई थी, जिस वजह से मुझे उसकी चूत की फांके साफ-साफ़ दिखाई पड़ रही थी और

उसमें से उसकी चिकनी, बिना बालों वाली चूत का गुलाबी हिस्सा साफ-साफ झलक रहा था.

अब तो मेरा 1-2 पल बिताना भारी होता जा रहा था, तो तभी उसने झटके से मुझे अपनी तरफ खींचा और मेरे

होंठो को अपने मुँह में लेकर चूसने लगी और अपनी जीभ को मेरे मुँह में घुमाने लगी थी.

अब में भी उसकी इस हरकत से जोश में आ गया और उसे पकड़कर उसकी ब्रा को निकाल फेंका. अब उसके मांसल

स्तन उसकी ब्रा से बाहर आते ही उसके सीने पर ऐसे तने हुए थे मानों कि किसी सुंदर मीनार के ऊपर डोम बने हो

और उन पर तीखी-तीखी गुलाबी निपल्स ग़ज़ब ढा रही थी.

फिर मैंने जैसे ही उसके स्तनों को अपने हाथों के पंजो में लेकर दबाया, तो वो अपनी आँखें बंद करके चीख पड़ी. फिर

मैंने उसके कड़क निपल्स को जैसे ही अपने मुँह में लेकर चूसना शुरू किया तो वो पलटकर मेरे लंड को टावल में से

बाहर निकालकर अपने मुँह में लेकर चूसने लगी. फिर मैंने अपने एक हाथ की उंगलियाँ उसकी चूत में जैसे ही

घुसाई, तो वो चीख पड़ी और मेरी उंगलियाँ उसके मादक रस से भीग गयी. फिर मैंने तत्काल उसकी पेंटी निकाल

फेंकी और उसकी चूत को अपने मुँह में लेकर चूसने लगा. अब इस समय हम दोनों 69 की पोज़िशन में थे और अब

मेरे द्वारा उसे लगातार चूसने से वो चीखते हुए झड़ गयी और में उसके मादक रस को पूरा पी गया. अब वो थक

चुकी थी, लेकिन अब वो मेरे लंड को अपने मुँह से बाहर निकालना नहीं चाहती थी.

अब मेरे लंड को उसने पूरी तरह से अपने थूक से गीला कर रखा था और उसे अपने गले की गहराई तक ले-लेकर

चूस रही थी. फिर तभी अचानक से में भी जोश में आ गया और मैंने उसे अपने लंड को मुँह से बाहर करने को बोला,

तो वो नहीं मानी और उसने मेरे लंड को अपने मुँह में ही झड़ने दिया.

अब इतने जोश में होने के कारण बहुत सारा वीर्य उसके मुँह और छाती पर फैल गया था, जिसकी उसने अपने सीने

पर मालिश कर ली थी. अब में भी थककर लेट गया था, लेकिन उसने मेरे लंड को सहलाना चालू रखा. फिर मैंने

धीरे से उससे पूछा कि यह सब कहाँ से सीखा? तो वो बोली कि मेरी सभी सहेलियाँ किसी ना किसी मर्द से संबंध

रखकर मज़े मारती है, वो सालियाँ कोई अपने भाई, बाप, रिश्तेदारो, बॉयफ्रेंड या फिर ड्राईवर, घरेलू नौकर किसी

से भी मज़े लूटती है और एक में हूँ जो सालों से तड़प रही हूँ और यह सब तो मैंने अपनी सहेलियों के साथ ब्लू फिल्म

देखकर ही सीखा है, साली वो विदेशी लड़कियाँ कैसे अपनी चूत और गांड में लंड लेकर तीसरा मुँह में लिए चूसती

रहती है? और एक फिल्म में तो एक चूत में दो-दो लंड घुसते दिखाया गया था.

अब उसकी इस तरह बेबाक बातचीत से मेरा लंड फिर से गर्मा गया था और वो भी यह बात समझ गयी और उसने

तत्काल मेरे लंड को अपने मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया. फिर जब मैंने कहा कि तू मुझ पर इतनी मेहरबान क्यों

हुई? तो वो बोली कि इसके भी दो कारण है पहला तो यह कि बाहर मुँह मारकर काला मुँह करने से अच्छा तो अपने

भाई से मज़े लेना ज़्यादा अच्छा है, ना बीमारी लगे ना किसी से मुँह छुपाना पड़े. फिर तभी मैंने पूछा कि दूसरा

कारण क्या है?

वो बोली कि वो और बड़ा कारण है, क्योंकि मम्मी भी तुझ पर अपनी निगाहें जमाए हुए है और में जब भी मम्मी के

साथ किटी पार्टी में जाती हूँ, तो मम्मी की सभी सहेलियाँ बस एक यही चुदाई की बातें करती है, वो सभी रंडियां

किसी ना किसी से मरवाती है इसलिए मम्मी की भी इच्छा बहुत होती है, लेकिन वो घर से बाहर किसी पराए मर्द

के साथ संबंध रखने से बचना चाहती है और अब मुझे यह समझ आ चुका था कि वो तेरे ऊपर डोरे डालने लगी है,

तभी तो आजकल वो तेरे सामने ज़्यादा से ज़्यादा खुद को दिखाती है.

फिर मैंने भी मौके की नज़ाकत को भापकर तुझे पहले सेट कर लिया, क्योंकि यदि मम्मी मुझसे पहले तुझे सेट कर

लेती, तो तू मेरी और इतनी जल्दी ध्यान नहीं देता.

फिर मैंने कहा कि मान गया बहना तेरी राजनीति को, लेकिन हमारे पास कोई कंडोम या बचाव का साधन तो है ही

नहीं. फिर वो बोली कि तू चिंता मतकर मैंने पहले से ही गोली खाना शुरू कर दिया है. तब मैंने आश्चर्य से कहा कि

मानों तेरी दाल नहीं ग़लती तो तू क्या करती? तो वो बोली कि साला ऐसा हुस्न देखकर तो 70 साल के बूढ़े का भी

लंड खड़ा हो जाए, फिर तू तो जवान मर्द है और ऊपर से जिस तरह तू मम्मी के ब्लाउज में अपनी आँखें गाढ़ता था,

उससे ही में समझ गयी थी कि तुझे तो में पूरा ही निगल जाउंगी.

फिर उसकी ऐसी बातें सुनकर मैंने तत्काल अपना लपलपाता हुआ लंड उसकी चूत में पेल दिया, तो पहले तो वो

थोड़ी बिलबिलाई, तड़पी, लेकिन दूसरे झटके में तो पूरा लंड अंदर डलवाकर ज़ोर-जोर से मचलने लगी.

अब उसकी आवाज सुनकर मैंने अपने धक्को की स्पीड और तेज़ कर दी थी. फिर लगभग आधे घंटे के बाद हम दोनों

साथ-साथ ही झड़ गये और वैसे ही नंगे सो गये. फिर सुबह लगभग 5 बजे मेरी बहन ने फिर से मेरे लंड को अपने

मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया, तो मैंने उसे पकड़कर फिर से एक जोरदार राउंड लगा दिया.

उसके पैरो में आई मोच तो साधारण ही थी, जो कि अगले दिन ठीक हो चुकी थी. अब अगले दो दिनों के बाद उसके

कॉलेज में फैशन शो था, तो वहाँ उसने मुझे अपना फोटोग्राफर बताकर एंट्री करवा दी. वो गर्ल्स कॉलेज होने के

कारण वहाँ नाम मात्र के ही जेंट्*स थे, फिर वहाँ उसके द्वारा डिज़ाइन किए हुए कपड़ो को सबसे ज़्यादा पसंद किया

गया, क्योंकि वो लुक से हटकर मॉडर्न और कम बजट वाले थे. फिर जब वो उन्हें पहनकर रेम्प पर आई तो माहौल

गर्मा गया, अब सभी लड़कियाँ ज़ोर-जोर से सिटी बजाने लगी थी और फास्ट म्यूज़िक कि आवाज पर सभी लड़कियाँ

नाचने लगी थी.

अब यह सभी लड़कियाँ जब कॉलेज आई थी, तो तब वो अलग कपड़ो में थी, लेकिन शो शुरू होने तक सभी ने मॉडर्न

ड्रेस पहन ली थी. फिर मैंने भी अपने नये डिजिटल कैमरे से उन सभी की खूब फोटो खींची. फिर इस प्रोग्राम में मेरी

बहन को ड्रेस डिज़ाइनिंग और फैशन शो दोनों में ही फर्स्ट अवॉर्ड मिला और फिर जब मम्मी वापस आई तो तब वो

यह सब सुनकर बहुत खुश हुई, लेकिन अभी वो हम दोनों भाई बहनों के बीच के संबंध के बारे में कुछ नहीं जानती

है.

समाप्त
 
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