S
StoryPublisher
Guest
अंदाज़
डॉली जब उस डिपार्टमेटल स्टोर में दाखिल हुई तो एकाएक ही सबकी नजरें उसकी तरफ उठ गई।
क्योंकि वह अत्यंत सुन्दर थी। शक्ल-सूरत से किसी अमीर घराने की नजर आती थी, लेकिन उसने जो वस्त्र पहने ररवे थे, वे बहुत ही घटिया थे। ऐसे वस्त्र तो घर में बर्तन-झाडू का काम करने वाली नौकरानियां भी नहीं पहनती। लेकिन इतने घटिया वस्त्र पहने होने के बावजूद भी वह बड़े आत्मविश्वास के साथ डिपार्टमेंटल स्टोर में घूम-घूम कर सब वस्तुओं को देख रही थी और उनके भाव पूछ रही थी, मानो वह बहुत-सा सामान वहां से खरीदना चाहती हो।
यही कारण था कि स्टोर में किसी ने उसे रोका-टोका नहीं था।
जब वह एक काऊंटर पर कुछ ड्रेस देख रही थी तो तभी एक मालदार सेठ ने स्टोर में प्रवेश किया। डॉली ने तुरन्त फैसला कर लिया कि यही व्यक्ति आज उसका शिकार है।
.
वह तेज-तेज चलती हुई उसके पास पहुचं गई और मुस्कराकर बोली- 'हाथ अंकल।'
'हाय।' उस अमीर व्यक्ति ने भी उत्तर में कहा
लेकिन वह गहरी नजरों से डॉली को घुरने लगा मानो पहचानने की कोशिश कर रहा हो।
_ 'अंकल मैं डॉली हूं-आपकी बेटी रीटा की सहेली और क्लासमेट।'
'ओह! डॉली।' उस अमीर व्यक्ति ने कहा जैसे कुछ याद आ गया हो, लेकिन तुम यहां इन कपड़ों में...?'
'अंकल वास्तव में कालेज में फैंसी ड्रेस कम्पीटीशन था। मुझे एक गरीब भिखारिन लड़की का लिबास पहनना था। लगती हूं ना बिकुल गरीब और भिखारिन लड़की?'
अजनबी ने सिर हिलाकर गंभीर और रोबदार स्वर कहा-'हूं...लगती हो।'
'और अंकल, वह रीटा है ना आपकी बेटी। वह राजकुमारी बनी थी। बिकुल असली राजकुमारी मालूम हो रही थी। फिर क्यों न मालूम हो। है तो वह आपकी ही बेटी।'
'तुम शायद रीता की बात कर रही हो?'
'हां रीता, हम लोग उसे प्यार से रीटा कहते हैं। अच्छा अंकल, मुझे कुछ शॉपिंग करनी है।'
फिर वह तेज-तेज चलती हुई उस जगह आई, जहां मूल्यवान कपड़ों के हैंगर लाइन से लटके हुए थे।
डॉली ने जल्दी से हैंगर से एक शानदार मूल्यवान लम्बा, सफेद, सितारे टंका लबादा उतारा और सेल्जगर्ल से संबोधित होकर जल्दी-जल्दी बोली
'मै यह लबादा ट्राई करूंगी।'
डॉली जब उस डिपार्टमेटल स्टोर में दाखिल हुई तो एकाएक ही सबकी नजरें उसकी तरफ उठ गई।
क्योंकि वह अत्यंत सुन्दर थी। शक्ल-सूरत से किसी अमीर घराने की नजर आती थी, लेकिन उसने जो वस्त्र पहने ररवे थे, वे बहुत ही घटिया थे। ऐसे वस्त्र तो घर में बर्तन-झाडू का काम करने वाली नौकरानियां भी नहीं पहनती। लेकिन इतने घटिया वस्त्र पहने होने के बावजूद भी वह बड़े आत्मविश्वास के साथ डिपार्टमेंटल स्टोर में घूम-घूम कर सब वस्तुओं को देख रही थी और उनके भाव पूछ रही थी, मानो वह बहुत-सा सामान वहां से खरीदना चाहती हो।
यही कारण था कि स्टोर में किसी ने उसे रोका-टोका नहीं था।
जब वह एक काऊंटर पर कुछ ड्रेस देख रही थी तो तभी एक मालदार सेठ ने स्टोर में प्रवेश किया। डॉली ने तुरन्त फैसला कर लिया कि यही व्यक्ति आज उसका शिकार है।
.
वह तेज-तेज चलती हुई उसके पास पहुचं गई और मुस्कराकर बोली- 'हाथ अंकल।'
'हाय।' उस अमीर व्यक्ति ने भी उत्तर में कहा
लेकिन वह गहरी नजरों से डॉली को घुरने लगा मानो पहचानने की कोशिश कर रहा हो।
_ 'अंकल मैं डॉली हूं-आपकी बेटी रीटा की सहेली और क्लासमेट।'
'ओह! डॉली।' उस अमीर व्यक्ति ने कहा जैसे कुछ याद आ गया हो, लेकिन तुम यहां इन कपड़ों में...?'
'अंकल वास्तव में कालेज में फैंसी ड्रेस कम्पीटीशन था। मुझे एक गरीब भिखारिन लड़की का लिबास पहनना था। लगती हूं ना बिकुल गरीब और भिखारिन लड़की?'
अजनबी ने सिर हिलाकर गंभीर और रोबदार स्वर कहा-'हूं...लगती हो।'
'और अंकल, वह रीटा है ना आपकी बेटी। वह राजकुमारी बनी थी। बिकुल असली राजकुमारी मालूम हो रही थी। फिर क्यों न मालूम हो। है तो वह आपकी ही बेटी।'
'तुम शायद रीता की बात कर रही हो?'
'हां रीता, हम लोग उसे प्यार से रीटा कहते हैं। अच्छा अंकल, मुझे कुछ शॉपिंग करनी है।'
फिर वह तेज-तेज चलती हुई उस जगह आई, जहां मूल्यवान कपड़ों के हैंगर लाइन से लटके हुए थे।
डॉली ने जल्दी से हैंगर से एक शानदार मूल्यवान लम्बा, सफेद, सितारे टंका लबादा उतारा और सेल्जगर्ल से संबोधित होकर जल्दी-जल्दी बोली
'मै यह लबादा ट्राई करूंगी।'