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अनाड़ी खिलाड़ी

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अनाड़ी खिलाड़ी

Written by HotChilly

कहानी के मुख्य पात्र

- मन्मथसिंह चौहान (कहानी का मुख्य पात्र)

- आशका चौहान (मन्मथ की बहन)

- अभिमन्युसिंह चौहान (मन्मथ के पिताजी)

- संयुक्तादेवी चौहान (मन्मथ की माताजी)

- रति (मन्मथ की पड़ोसन)

- मनीषा (मन्मथ की क्लासमेट)

इस के अलावा बहुत से पात्र है जो कहानी के दौरान आएंगे तब उनका परिचय होगा

चैप्टर – 1 : आरंभ

अभिमन्युसिंह चौहान एक 45 साल के लंबे चौड़े और हट्टे कट्टे इंसान हैं| उनका एक छोटा सा कारोबार है जिसके लिए वो काफी समय बाहर ही रहेते हैं। गाँव में उनकी काफी सारी ज़मीन भी है जिसकी देखभाल उनके पिताजी बलराम सिंह करते हैं। राजपूत हैं तो फॅमिली वैल्यूस, सही गलत की पहेचान और किसी के साथ कुछ गलत न हो उसका खयाल उन्हे हमेशा रहेता है।

उनकी धर्म पत्नी संयुक्तादेवी एक आदर्श भारतीय नारी है। जिस के लिए पति भगवान और अपना परिवार ही सब कुछ है। जब वो गर्भवती हुई तो अभिमन्युसिंह ने उन्हे अपने गाँव भिजवा दिया ताकि उनके होने वाले बच्चे और पत्नी का खयाल उनके माता पिता रख सके। क्यों के वो खुद तो ज्यादा समय बाहर बिताते थे काम के सिलसिले में। अब तो वो और ज्यादा काम करने लगे थे उनका सपना था की उनकी औलाद चाहे लड़का हो या लड़की उसे कोई तकलीफ न हो।

आखिरकार वो घड़ी आ ही गयी जिसका सबको बेसबरी से इंतज़ार था। और भगवान की दया से उनको जुड़वा बच्चे हुए। एक लड़का और एक लड़की। उन लोगों की खुशी दुगनी हो गयी लड़के का नाम उन्हों ने मन्मथ और लड़की का नाम आशका रखा।

दिन बीतने लगे और धीरे धीरे दोनों बच्चे बड़े होने लगे। मन्मथ और आशका दोनों बड़े आज्ञाकारी बच्चे थे। वो अपने माता पिता और दादाजी से बहुत प्रेम करते थे। मन्मथ पढ़ाई में बहुत अच्छा था। बस समझ लो की बिग बेंग थेओरी का शेल्डन कूपर था। आशका भी अच्छी थी पढ़ाई में पर वो जीनियस नहीं थी मन्मथ की तरह। हाँ वो क्रिएटिव काफी थी डिज़ाइन, ड्रौइंग वगैरा उसके होब्बीस थी।

मन्मथ हर जीनियस की तरह बहुत शर्मिला था। वो अपने घर पे भी खुल के बात नहीं कर पाता था। अपना कमरा बांध कर के वो हमेशा पढ़ाई करता रहता था। उसकी दुनिया सिर्फ और सिर्फ किताबें ही थी। उसकी उम्र के बच्चे खेल कूद में मस्त रहेते तब वो स्कूल कीकिताबों के अलावा रिफ्रेन्स बुक्स पढ़ता रहेता। उसका असर बोर्ड्स में दिखा। मन्मथ ने बोर्ड में टॉप किया और आशका के 70% आए। सब लोग खुश थे। मन्मथ के पापा ने अच्छा रिज़ल्ट आने की खुशी में एक पार्टी अरैंज की। वो अब शहर के एक बहुत बड़े बिज़नस मेन बन चुके थे। हर तरफ से पैसा बरस रहा था। दोनों बच्चे उनके लिए लकी साबित हुए इसी लिए वो दोनों से बेहिसाब प्यार करते थे।

पार्टी में उन्होने शहर के प्रसिद्ध लोगो को भी आमंत्रित किया था। उनके लिए यह पार्टी अपने होनहार बेटे को दुनिया के सामने लाने का एक मौका थी। आशका भी खुश थी अपने भाई की उपलब्धि पर। उसे वैसे तो मार्क्स और पर्सेंटेज ज्यादा हो या कम कोई फर्क नहीं पड़ता था। वो तो अपनी मस्ती में जी रही थी। पार्टी की सारी तैयारी आशका और उसके पिताजी दोनों मिल कर कर रहे थे। खाने पीने का सारा इंतज़ाम पिताजी ने अपने सर लिया था। और घर की साज सजावट आशका करवा रही थी।

समय : सुबह 6:00 बजे

ट्रिन!!ट्रिन!!ट्रिन!!ट्रिन!! कर के अलार्म बज सउठता ही और आशका चमक के उठ जाती है। वो टाइम देखती है और अलार्म बंद कर के फिर से सो जाती है।

धड़.... धड़... धड़.… उसके रूम का दरवाजा खतखटाने की आवाज से वो फिर चौंक के उठ जाती है।

मोम: आशकु, ओ आशकु। अरे उठजा महारानी। कब तक सोएगी। 8 बज गए है। तुम्हें तो आज पापा के साथ पार्टी के खाने का मेनू सिलैक्ट करने जाना था ना।

आशका (मन में सोचते हुए) : ओह गोड देर हो गयी। आज जल्दी जाना था और अब मोम मेरी हालत खराब कर देगी।

आशका : मोम उठ रही हूँ। मैंने अलार्म लगाया था पर फिर सो गयी।

और बनावटी गुस्से से बोलती है "और आपको कितनी बार माना किया है मुझे आशकु मत बुलाओ। पापा ने इतना प्यारा नाम रखा है आप उसे बिगाड़ देते हो। "

मोम (हस्ते हुए) : चल अब ज्यादा नाटक मत कर। उठ जा। और पापा ने नहीं यह नाम मैंने सुझाया था तेरे पापा को। उन्हे तो पुजा नाम पसंद था। और जा के देख तेरा भैया उठा के नहीं।

आशका : वो मेरा भैया नहीं है। हम दोनों में सिर्फ 5 मिनट का फर्क है।

मोम : अरे हाँ मेरी माँ, अब दरवाजा खोल और तैयार होजा वरना तेरे पापा गुस्सा करेंगे।

आशका: ओके मोम।

उसने एक पिंक कलर की साटिन की नाइटी पहनी होती है। जिसमे वो किसी अप्सरा से कम नहीं लग रही थी। वो उठ के बैठ जाती है और अपने बाल बांधने लगती है। वो एक अंगड़ाई लेती है और अपने आस पास देखती है। उसका कमरा किसी राजकुमारी की तरह सजा हुआ था। वो एक डबल बेड पर होती है। उसके आस पास कई सारे बड़े बड़े टेडी और उसकी तरह के खिलौने होते है। जो की उसके प्यारे पापा ने अपनी ट्रिप्स पर से वापस आते हुए दिये होते हैं।

उठ कर वो बाथरूम में जाती है दरवाजा लोक करती है बाथरूम में एक बड़ा सा मिरर होता है जिसमे वो अपने आप को देखती है और सेक्सी स्माइल देती है और बोलती है "गुड मॉर्निंग गोरजीयस"। अगर मिरर इंसान होता तो वहीं पर अपना दिल खो देता उसकी यह अदा पर।

अपनी नाइटी उतार कर वो अपने आप को मिरर में देखती है। अपने छोटे छोटे चुचे जो की अब नींबू से अमरूद बन रहे थे उन्हे अपने दोनों हाथो से तौलती है और सोचती है जाने किस की किस्मत खुलने वाली है जिसे मेरे जैसी हसीन बीवी मिलेगी और फिर शर्मा जाती है। शर्म से उसके गाल गुलाबी हो जाते हैं जो उसकी खूबसूरती में चार चाँद लगा देते हैं। अपने दोनों हाथ ऊपर कर के वो अपने बाल सँवरती है और ब्रश करना स्टार्ट करती है। ब्रश करते करते उसे याद आता है उसने भाई से तो उसकी चॉइस पुछी ही नहीं। वो फटा फट सुबह का रूटीन खत्म कर के अपने भाई के कमरे में जाती है और दरवाजे पर नोक करती है।

*knock* *knock*

आशका: मिस्टर आइन्स्टाइन,

*knock* *knock*

आशका: मिस्टर आइन्स्टाइन,

दो तीन बार नोक करने पर भी कोई जवाब नहीं आता तो वो थोड़ा सा धक्का देती है और दरवाजा खुल जाता है।

वहाँ पर उसका प्यारा भाई, अपने बेड पर सो रहा होता है और एक मोटी किताब उसके सीने पे पड़ी होती है। मन्मथ पढ़ते पढ़ते ही सो गया था। उसे देख कर वो हस पड़ती है,

आशका: अरे उठो कुंभकरण जी दोपहर हो गयी है।

मन्मथ दोपहर सुन के चौंक के उठ जाता है। और सीने पे पड़ी किताब उसके गोद्द में गिर जाती है।

आशका खिलखिला के हंस देती है उसे ऐसे देख के। और बोलती है

आशका: बड़ा आया पढ़ंतरा। कितना पढ़ोगे मिस्टर आइन्स्टाइन।

मन्मथ: अरे क्या है इतनी सुबह सुबह। अभी तो सोया हूँ जाओ सोने दो।

आशका: मैं आज पापा के साथ पार्टी का मेनू डिसाइड करने जा रही हूँ। अपनी फेवरिट चीज़ बोलो जो की मेनू में रख सके

मन्मथ: जो तुम लोगो को अच्छा लगे। मेरी कोई स्पेशल चॉइस नहीं है। (मुसकुराते हुए) पार्टी सिर्फ मेरे लिए नहीं है। तुम भी तो अच्छे नंबरो से पास हुई हो। सो, जो तुम्हारी पसंद वही मेरी पसंद।

 


मन्मथ सारी दुनिया में सिर्फ अपनी बहन के करीब था। उसके साथ वो आराम से बात कर लेता था। कुछ भी शेर कर सकता था उसके साथ। शायद दोनों जुड़वा थे इसलिए।

आशका: ठीक है। पर फिर बोलना मत की पूछा नहीं था।

यह बोल कर वो अपने कमरे में तैयार होने चली जाती है। कुछ देर बाद सब लोग नाश्ते की लिए डाइनिंग टेबल पर होते हैं। नाश्ता खत्म कर के आशका और उसके पापा चले जाते हैं।

मन्मथ : मोम मैं लाइब्ररी जा रहा हूँ बुक्स लाने।

मोम : अब 9 बजे ऐसी कौनसी लाइब्ररी है जो खुल गयी है। मुझे भी थोड़ा काम है। 10:30 बजे निकालना और मुझे ड्रॉप कर देना| मैं आ वापस ऑटो में आ जाऊँगी।

मन्मथ : (झिझकते हुए) मोम पर आप गाड़ी ले कर जाओ न मैं तो बाइक पर जा रहा हूँ।

मोम : ठीक है।

मन्मथ बाइक की चाबी निकाल के गैरेज में से बाइक निकालता है और गेट के पास लाके सोचता है। चलो पहेले इसे साफ कर देता हूँ फिर जाता हूँ।

बाइक साफ करते वक्त उसे दो आंखे घूर रही थी। और वो थी उसकी पड़ोस में रहेने वाले राजपुत अंकल की बेटी रति। रति मन्मथ और आशका से 2 साल छोटी थी। वो आशका की बेस्ट फ्रेंड थी और मन ही मन मन्मथ से प्यार करती थी। और मन्मथ था की उसके किताबों के अलावा कुछ और दिखाई ही नहीं देता था। हालांकि उसने यह बात आशका को भी नहीं बताई थी की वो मन्मथ से प्यार करती है।

मन्मथ बाइक साफ करने के बाद बाइक स्टार्ट कर के चला जाता है और रति उदास होकर वो जिस रास्ते पर जा रहा था उसे देखती रहेती है। आज फिर से मन्मथ ने उसकी तरफ ध्यान नहीं दिया।

मन्मथ की एक आदत थी वो लोगों के साथ मेल जोल से ज्यादा अकेला रहना पसंद करता था। इसी लिए जब भी वो फ्री होता तब वो लाइब्ररी का बहाना कर के शहर के बाहर एक मंदिर था वहाँ पर आ जाता। यह मंदिर नदी किनारे था और काफी हरियाली भी थी आसपास। इसलिए मन्मथ को यहाँ पर सुकून मिलता था यहाँ आ कर। थोड़ा वक़्त अकेले गुजारने के बाद मन्मथ घर की और वापस चल देता है। घर आ कर देखता है की वहाँ पर ताला लगा हुआ है।

वो सोचता है "अरे यार यह लोग अभी तक नहीं आए। अब मैं कहाँ जाऊ"

वो सोच ही रहा था की किसी ने कहा "अकेले क्या कर रहे हो बेटा" उसने आसपास देखा कोई नहीं था। तभी आवाज़ ने कहा "अरे इधर ऊपर देखो" उसने देखा तो पड़ोस के घर की बालकनी से उनकी पड़ोसन आंटी बोल रही थी।

मन्मथ: क क कुछ नहीं आंटीजी। लगता है घर पर कोई नहीं है।

आंटी : हाँ तुम्हारी माँ चाबी दे कर गयी है और बोल कर गयी हैं उन्हे देर हो जाएगी आते आते।

मन्मथ: ठीक है।

आंटी: तुम आओ मैं चाबी लेकर आती हूँ।

मन्मथ अपने घर के गलियारे से निकल कर पड़ोस के घर में दाखिल होता है। यह घर उसके पापा के दोस्त और दूर के रिश्तेदार प्रद्युम्नसिंह राजपूत की थी। वे दोनों एक ही गाँव के थे और उनका सब कुछ मन्मथ के पापा की ही बदौलत था। प्रद्युम्नसिंह ने लव मैरेज की थी जिसमे मन्मथ के पापा ने ही उनका साथ दिया था। गाँव में उनका रसूख होने की वजह से किसी ने उन्हे कुछ नाही बोला वर्ना प्रद्युम्नसिंह की मौत नीश्चित थी।

मन्मथ ड्राविंग रूम में आ कर देख रहा था चारो और।

आंटी: बेटा क्या देख रहे हो। बैठ जाओ आराम से।

मन्मथ: ज जी आंटी।

आंटी (ज़ोर से): बेटा रति, पानी लाना तो।

रति: जी माँ अभी लायी।

रति अपने रूम से किचन की और जाती है और एक ट्रे में पानी के दो ग्लास भर कर ड्राविंगरूम में आ ही रही होती है की मन्मथ को देख कर उसका दिल एकदम धक से जैसे रूक जाता है। उसका दिमाग काम करना जैसे रुक जाता है। वो वही पागलो की तरह खड़ी खड़ी मन्मथ को देख रही होती है। तभी उसकी माँ बोलती है, “अरे रूक क्यों गयी। जल्दी ला"

मन्मथ की और मूड के "और क्या लोगे बेटा। ठंडा या गरम?”

मन्मथ: ज जी कुछ नहीं आंटी बस आप सिर्फ चाबी दे दीजिये। मैं चला जाऊंगा।

रति (मन में): बड़ा आया चला जाऊंगा वाला। और यह माँ भी न बहुत खराब है। बोल नहीं सकती थी मैं ऐसे ही चली आई। पता होता तो ढंग के कपड़े पहन के आती।

रति ने घर पे पहनने वाले छोटे छोटे कपड़े पहेने थे। शॉर्ट स्कर्ट, ढीली ढाली टीशर्ट आज तो उसने ब्रा भी नहीं डाली थी। वैसे भी दिन में घर पर उसकी माँ और वो अकेले रहते थे तो कोई प्रोब्लेम नहीं थी ऐसी ड्रेस पहनने में। उसने ग्रे टीशर्ट और व्हाइट मिनी स्कर्ट पहेनि थी। गरमियो का मौसम था और घर में कोई रोक टॉक भी नहीं थी किसी चीज़ की तो वो ज़्यादातर ऐसे ही कपड़े पहेनती थी।

रति मन्मथ को पानी देकर उसके खतम करने के इंतज़ार में ट्रे लेकर ज़मीन के तरफ देख रही थी और पाँव से ज़मीन कुरेद रही थी। उसके सपनों का राजकुमार उसके सामने था लेकिन उसको पता नहीं था की क्या क्यीआ जाये, उसकी माँ भी तो उसके सामने खड़ी थी।

आंटी: रति बेटा, जाओ और एक बढ़िया सी चाय बना देना तो मन्मथ के लिए।

रति: जी माँ.

आंटी: और सुनाओ बेटा। आगे क्या करने का इरादा है? तुम तो दिखते ही नहीं कभी।

मन्मथ: जी आंटी पढ़ाई में से फुर्सत ही नहीं मिलती।

आंटी: एक तुम हो जिसे पढ़ाई में से फुर्सत नहीं मिलती और एक हमारी बेटी है जो पढ़ाई ही नहीं करती। पता नहीं क्या होगा इस लड़की का।

तभी किचन से आवाज़ आती है "माँ शक्कर खतम हो गयी है।"

आंटी: अरे वो ऊपर वाले बड़े डिब्बे में है। निकाल लो।

रति: मेरा हाथ नहीं आ रहा। आप आ कर निकाल दो।

आंटी: बेटा मन्मथ, एक काम कर दो गे? शक्कर का डिब्बा उतारना है ऊपर से। मेरा भी हाथ नहीं आता वहाँ पर।

मन्मथ: जी आंटी कोई बात नहीं।

मन्मथ कीचेन की और बढ़ता है और वहाँ का सीन देखकर उसका दिल धक्क से रुक जाता है। साँसे रुक जाती है। उसे समझ नहीं आता क्या करे।

रति स्टैंडिंग कीचेन पे चढ़ गयी थी और ऊपर के छज्जे पे से डिब्बा उतारने की कोशिश कर रही थी। पीछे से उसकी स्कर्ट ऊपर हो गयी थी जीसमें से उसकी पिंक फ्लोरल पेंटि दिखाई दे रही थी जो की एक साइड से उसकी पीछे की दरार में घुस गई थी। उसकी चिकनी टोंड और दूध की तरह सफ़ेद तांगे थोड़ी-थोड़ी थरथरा रही थी क्योंकि वो अपने पूरी कोशिश कर रही थी ऊपर से डिब्बा उतारने की।

मन्मथ को कुछ अजीब महसूस हो रहा था ऐसा उसे कभी नहीं महसूस हुआ था।

(इधर आशका और उसके पापा)

वे दोनों अभी तक तीन से चार बड़े रेस्तौरंट्स के चक्कर काट चुके थे और एक रैस्टौरेंट को फ़ाइनल कर दिया था। सारा ऑर्डर देने के बाद वे लोग पार्किंग की तरफ बढ़ रहे थे।

आशका : पापा इस्स से तो इन लोगो को घर बुला लिया होता तो अच्छा होता। मैं तो थक गयी हूँ।

पापा: अरे बेटा यहाँ आने से हमे पता तो चला की यह लोग क्या है और कितनी साफ सफाई रखते हैं। स्टाफ कैसा है। यह पार्टी हमारी इज्जत का सवाल है। में किसी भी चीज़ में कमी नहीं होने देना चाहता। तुम दोनों अब तो पढ़ाई के लिए हमसे दूर चले जाओगे फिर पता नहीं कब वापस आओ।

बोल कर वे उदास हो जाते है।

आशका: जी पापा। यू आर द बेस्ट।

बोल कर उनके गले लग जाती है। अभिमन्युसिंह भी उसके गले लगा कर उसका माथा चूम लेते हैं। और बोलते हैं "मेरी सब से प्यारी बिटिया"

जैसे ही वो अलग होते हैं और आशका मुड़ती है उसके सामने एक आदमी खड़ा था। बढ़े हुए बाल जैसे बरसो से न काटे हो, बढ़े हुए नाखून, काले-पीले दाँत, भद्दा सा चहेरा और खड़ा हुआ मोटा सा ल्ंड। हाँ वो आदमी पूरा नंगा था और उसका नागराज आशका के सामने हिचकोले खा रहा था।

 


आशका ने कभी ऐसा नहीं देखा था। वो उसे सिर्फ देखती ही रहेती ही उसे भी कुछ अजीब फीलिंग हो रही थी। उसके कान में जैसे सीटियाँ बज रही थी, और नीचे कही मीठी मीठी खुजली जैसा अहेसास हो रहा था। उसका चेहरा लाल हो गया

तभी एक जोरदार आवाज़ से वो वापस नॉर्मल हो गयी। उसने देखा उसके पापा ने उस इंसान को खींच के दो-चार थप्पड़ जड़ दिये। काफी भीड़ इकट्ठा हो गयी लोगो ने समझाया की यह पागल है और ऐसी उल जलूल हरकते करता रहेता है।

दोनों घर वापस आने के लिए निकल लेते है। सारे रास्ते कोई कुछ नहीं बोलता। आशका के सामने वही सीन चल रहा होता है। उसको वही ल्ंड दिखाई दे रहा था। और उसको 'वहाँ' पर गीला गीला लग रहा था। वो अपने दोनों पाँव ज़ोर से जोड़ लेती है। उसका दबाव उसकी योनि पर आता है उसे एक एक जादुई एहसास होता है। उसकी योनि अंदर से जैसे फड़क रही थी और अचानक बांध टूट जाता है...

(इधर मन्मथ और रति किचन में)

मन्मथ रति को निहारे जा रहा था जो की पीछे से पूरी तरह अनावृत थी और अपनी दौलत मन्मथ को दिखा रही थी। मन्मथ का सर भारी होने लगा और उसने खून का प्रवाह कहीं और बहेते हुए महसूस किया। और उसके कोई अंग में सरसराहट होने लगी। और वो अजगर की तरह बढ्ने लगा। वो अपने अजगर को एडजस्ट करने लगा पेंट में और उसका हाथ दरवाजे से टकरा गया जिसकी आवाज़ से रति डर गयी और उसका पाँव स्टैंडिंग कीचेन पर से फिसल गया और वो गिरने लगी तभी मन्मथ ने उसे थाम लिया। अब वो मन्मथ की गोद में थी। और वो मन्मथ को देखे जा रही थी। आज तो भगवान ने जैसे उसकी सारी बाते मान ली थी। यहाँ मन्मथ की हालत खराब थी। एक तो उसका ल्ंड फटने को तैयार था और उस पर रति के रेशमी बदन का एहसास कहर बरपा रहा था। मन्मथ का एक हाथ रति की बगल में से हो कर उसकी गर्दन को थामे हुए था और दूसरा हाथ उसकी नाजुक गांड पर था। रति ने मन्मथ के हाथो को अपने मुलायम पिछवाड़े पर महसूस किया और वो शर्मा गयी। उसने नजरे झुका ली। उसके गालो पर शरम की लाली फ़ेल गयी। जिसे देखते ही मन्मथ अपना दिल हार गया और उसके सब्र का बांध भी टूट गया।

यह पहली बार था जब की आशका और मन्मथ दोनों को ओर्गसम की अनुभूति हुई थी।

मन्मथ और रति दोनों ऐसे ही एक दूसरे को देखते रहे तभी बाहर से आवाज़ आई "मिला की नहीं डिब्बा" जिसे सुनके मन्मथ ने हदबड़ाहट में रति को नीचे उतरा दिया और रति भी होश में आई। उसने कहा वो वाला डिब्बा चाहिए। मन्मथ ने वो डिब्बा उतार के दिया और वापस द्रोविंग रूम में आ गया। रति तो जैसे सातवे आसमान पे थी। आज पहेली बार उसके प्रियतम ने उसको देखा था। जल्दी से वो चाय और बिस्कुट ले कर गयी जहां पर उसकी मोम और मन्मथ बैठे थे। चाय दे कर वो भी अपनी माँ के पास बैठ गयी।

आंटी: बेटा तुम अब इसको समझाओ। कुछ पढ़ाई लिखाई में भी ध्यान दे। हमेशा टीवी और फोन पर ही रहेती है।

मन्मथ: ज जी आंटी।

वो रति से नजरे नहीं मिला पा रहा था। और चुपचाप चाय पी रहा था। रति भी नजरे झुकाये कनखियो से अपने प्रियतम को देख रही थी। और अभी तक कीचेन में हुई बात को याद कर रही थी। और एक छोटी सी मुस्कुराहट आ गयी उसके होठों पे। मन्मथ ने जैसे ही नज़र उठा के उसे हसते हुए देखा तो फिर से अपने चाय पे ध्यान देने लगा।

मन्मथ: अच्छा आंटी मैं चलता हूँ।

आंटी: हाँ ये लो चाबी। और पार्टी ऑर्गनाइज़ करने में कोई काम की जरूरत हो तो बोल देना। वैसे रति हेल्प कर ही रही है।

मन्मथ: जी आंटी।

तभी कार के हॉर्न की आवाज़ आती है और मन्मथ देखता है तो उसके पापा और आशका आ चुके होते हैं। मन्मथ जाके घर खोलता है। जैसे ही दरवाजा खोलता है आशका दौड़ के अंदर चली जाती है। मन्मथ हैरान हो जाता है की इससे क्या हुआ। उसकी नज़र ऊपर जाती है तो उसे रति बालकनी में दिखाई देती है। उसे देख कर रति स्माइल कर थी है तो मन्मथ भी छोटी सी स्माइल देता है और अंदर चला जाता है।

पार्टी की सारी तैयारियां खत्म हो चुकी थी और आज रात को पार्टी थी। आशका ने रति को फोन कर के अपने साथ ही बुला लिया था पार्टी के लिए तैयार होने। दोनों आशका के कमरे में पार्टी के लिए रैडि हो रही थी। रति अपने साथ 5-6 ड्रेस ले कर आई थी। आज तो उसने ठान ली थी की मन्मथ को अपना जलवा दिखा कर चारो खाने चित कर देगी। वो आशका के साथ बात कर के मन्मथ की पसंद नापसंद का पता कर लेना चाह रही थी। और आशका उस से बात करती करती कहीं खो जा रही थी। उसे बार बार 2 दिन पहेले पार्किंग के हादसे की याद आ जाती थी और उसके बदन में एक सरसराहट होने लगती थी।

रति: दी इतनी सारी ड्रेस ले कर आई हूँ। पता नहीं चल रहा कौनसी ड्रेस पहनु।

आशका: उसमे क्या है। ट्राय कर के देख ले। तू ड्रेस बदल के आ मैं बताती हूँ कौनसी ड्रेस अच्छी लग रही है।

रति: ठीक है दी। आप भी चेंज कर लो।

वो एक ड्रेस उठाती है और बाथरूम में चली जाती है। आशका भी रैडि एक ड्रेस लेती है और अपनी टी शर्ट उतारती है। ड्रेसिंग टेबल के सामने जाकर वो खड़ी हो जाती है और अपने आप को निहारने लगती है।

उसने व्हाइट कलर की ब्रा पहेनि थी जिसमे से उसके टैनिस बोल नुमा स्तन बाहर आने को मचल रहे थे। उसकी रेशमी बांहे, उसके पतली कमर और जिसे इंग्लिश में अवर ग्लास फिगर खहेते है वो कहर बरपा रहा था। उसने एक छोटी सी शॉर्ट पहेनि थी जीसके बटन उसने खोले हल्के हल्के बाल उसे दिखाई दिये। वो देखते ही उसने दोनों हाथ ऊपर किए अपनी बगल में भी हल्के बाल नज़र आए। उसने सोचा यार यह काम बाकी रह गया है। वो सोचती है जैसे ही रति ड्रेस बदल कर आएगी वो बाथरूम में जा कर इन्हे साफ कर लेगी। तभी उसे एक सीटी की आवाज़ आती है। वो चौंक के मुड़ती है तो उसे रति जो की एक पतली सी स्लिप पहेने होती है अपने हाथ में ड्रेस ले कर खड़ी दिखाई देती है।

वो कुछ इस तरह लग रही थी।

रति: दी क्या लग रही हो। कसम से अगर कोई आप को ऐसे देख ले तो उसकी नियत खराब हो जाये।

आशका: क्या बकवास कर रही हो।

रति: सही में दीदी आप लग ही ऐसे रहे हो की किसी का भी ईमान डॉल जाये।

आशका(शर्माते हुए): चुपकर कुछ भी बोलती है। मैं तो तुझे बच्ची समझती थी। और तू तो बड़ी तेज़ हो गयी है।

तभी दरवाजा खुलता है और मन्मथ अंदर आता है। वो कुछ बोलने जा ही रहा था पर यह सीन देख कर उसका मूंह खुला का खुला ही रहे जाता है।

उसके सामने दो कमसिन लड़कियां अधनंगी खड़ी होती है। उसकी नज़र उसकी बहन पर पड़ती है जो की एक सेक्सी पोज दे कर रति की और देख रही थी। उसे आया देख कर रति अपने दोनों हाथ ऊपर कर लेती है उसके हाथो में ड्रेस होने की वजह से उसका बदन ढक जाता है। वो शरम से अपनी नजरे झुका लेती है। आशका अपने आप को ढकने की कोई कोशिश नहीं करती। गुस्से से वो मन्मथ को पूछती है "क्या बदतमीजी है। नौक नहीं कर सकते क्या?”

मन्मथ: व व वो में मैं... सॉरी मुझे नौक करना चाहिए था।

बोल कर वो नजरे झुका लेता है। और सोचता है पता नहीं ये दोनों उसके बारे में क्या सोचेगी। उसे अपनी इज्जत तार तार होती हुई नज़र आई॰

आशका: क्या काम था। कुछ ज़रूरी ही होगा। वरना तुम अपने रूम में से बाहर ही कहाँ निकलते हो।

बोल कर वो खिलखिला कर हास देती है। उसे ऐसे हँसते देख कर मन्मथ की जान में जान आई। जो माहौल भारी था वो अब नॉर्मल हो गया। मन्मथ बाथरूम की और देखता है तो रति अभी भी अपने आप को ड्रेस के पीछे छुपाए हुई थी और ज़मीन की तरफ ही देख रही थी।

आशका: उसे घुरना बंद करो और बताओ क्या काम है मिस्टर आइन्स्टाइन

मन्मथ: अरे वो मेरा मोबाइल चार्जर नहीं काम कर रहा। तुम्हारा चार्जर चाहिए था।

आशका: वहाँ बेड पर पड़ा है ले लो।

 


मन्मथ चार्जर लेता है और वापस चला जाता है। उसके जाते ही आशका रूम का दरवाजा अंदर से बंद कर देती है। मन्मथ अपने रूम मे जाकर मोबाइल चार्जिंग में रख के बेड पर लेट जाता है। वो आँख बंद करता है तो उसके सामने आशका के रूम का द्र्श्य आता है। उसे आशका दिखाई देती है, छोटे से कपड़ो में। जिसमे से उसका हुस्न दिखाई दे रहा था। उसने पहेले कभी ऐसा महसूस नहीं किया था। लेकिन आज उसे अपनी ही बहन एक जवान लड़की के रूप में दिखाई दे रही थी। जैसे जैसे वो आशका और उसके मखमली बदन के बारे में सोच रहा था वैसे धीरे धीरे उसके पैंट में हरकत होना शुरू हो गयी। उसके लंड ने गियर बदलना शुरू कर दिया। उसके खुले खुले रेशमी बाल, गोरी गोरी बाहें, उसके दो सख्त स्तन, उसकी एकदम सपाट और मदमस्त करने वाली नेवल, उसकी खुली और केले के पेड़ के तने जैसे टांगे यह सब सोचते सोचते उसका लंड टॉप गियर में आ गया था उसे अपने पैंट में तकलीफ होने लगी थी। उसने अपनी पैंट खोल दी और सिर्फ अंडरवियर में आ गया। उसने देखा उसकी अंडरवियर में लंड बिलकुल अकड़ गया था। उसने अंडरवियर भी निकाल दी जैसे ही उसने अंडरवियर खोली उसका 8’ का लंड किसी नाग की तरह झूलने लगा। उसका लिंगमुंड कपड़ो में होने की वजह से दर्द कर रहा था। मन्मथ धीरे धीरे अपने लंड को सहलाने लगा वो पहेली बार ऐसा कर रहा था। उसे बहुत अच्छा लगा और उसकी आंखे इस कामसुख को महेसूस करते हुए बंद हो गयी। जैसे जैसे वो सहेला रहा था उसके और भी अच्छा लगा उसने अपनी स्पीड बढ़ा दी। लेकिन ये उसका पहेली बार का था तो तुरंत ही उसको लिंग में दर्द होने लगा। उसने अपने आसपास देखा तो अपने टेबल पर उसने बॉडी लोशन की बोतल देखि। वो थोड़ा सा बॉडी लोशन अपने हाथ में लेता है और अपने लिंग पर मलता है और फिर से सहेलने लगता है। आशका को याद कर के हाथ की स्पीड बढ़ा देता है। 5 मिनट तक ऐसे ही करने के बाद उसे अपने अंदर के कुछ अजीब सी फीलिंग आती है। उसे लगता है जैसे उसके अंदर के कुछ निकाल जाएगा.... और बोल पड़ता है…

“आहह आशका आ आ आ आ" उसके लिंग में से पहेली पिचकारी निकलती है जो की दूर जाके दरवाजे पद गिरती है और फिर कई सारी पिचकारियाँ निकलती है। और उसके हाथ और बेड पर गिर पड़ती है। वो थक कर अपने बेड पर आंखे बंद कर के एलईटी जाता है। उसकी साँसे तेज़ चल रही होती है। यह उसने पहेली बार हस्तमैथुन किया था। वो भी अपनी बहन के नाम। उसका दिमाग काम करना बंद कर देता है। और वो सिर्फ इस अद्भुत अहेसास को महसूस करता है। उसका दिल अभी तक ज़ोरों से धडक रहा था।

10 मिनट तक इसी पोसिशन में रहेने के बाद उसने सोचा अब पार्टी के लिए तैयार होना चाहिए। और वो बाथरूम में जाता है और नहा के आता है और कपड़े बदल कर तैयार हो जाता है।

(इधर आशका के रूम में)

रति: तुम्हारे भैया तो कैसे बेशरम है। कैसे घूर रहे थे मुझे। (बोल कर शर्मा जाती है)

आशका को पता था की मन्मथ ने रति से ज़्यादा उसे ही देखा था और उस से वो असहज महसूस कर रही थी अपने आप को।

आशका: नहीं रे। वो ऐसा नहीं है। वो वैसे तो किसी के कमरे मे नहीं जाता। नोक करना भूल गया। और वैसे भी वो मेरा बड़ा भाई है। उसे मेरे कमरे में कभी भी आने की इजाज़त लेने क जरूर नहीं।

उसे पता नहीं क्यों वो अपने भाई को डिफ़ेंड कर रही है। पर शायद यह उनके जुड़वा होने का असर था जो कि उसे अपने भाई की किसी भी गलती को डिफ़ेंड करना सीखा रहा था।

आशका: तू वैसे बाहर क्यों आई थी? ड्रेस भी नहीं पहेनि तूने।

रति: दीदी वो यह ड्रेस पहेनने में मुश्किल हो रही थी। आप मेरी हेल्प कर दो न प्लीज।

आशका: एक काम कर तू दूसरी ड्रेस ट्राय मत कर येही सही लग रही है। वैसे भी पार्टी का टाइम हो गया है। मुझे भी तैयार होना है।

बोल कर वो एक काफी रिविलिंग ड्रेस पसंद करती है और रति के साथ बाथ रूम में घुस जाती है। बाथ रूम में जाते ही वो अपनी ब्रा और शॉर्ट निकाल देती है और सम्पूर्ण रूप से नंगी हो जाती है। जिसे देख कर रति की आँखें चौड़ी हो जाती है।

रति: दीदी आप ऐसे ही किसी की जान ले लोगे किसी दिन।

आशका: हत्त पगली। वो तो मुझे हैयर रिमूव करना है इसी लिए।

वो हैयर रिमोविंग क्रीम लेती है और अपनी दोनों बगलो में लगती है, फिर हाथ, पाँव और योनि के ऊपर आके बालो पर भी क्रीम लगती है। रति उसे ऐसे ही देखती रहेती है। उसे ऐसे देखता हुआ देख कर आशका थोड़ी झेंप जाती है। उसे से पुछती है। "तुझे भी लगानी है क्या?”

रति: नहीं दीदी में तो यह काम घर से ही कर के आई थी।

बोल कर मुस्कुरा देती है।

आशका: ठीक है।

रति उसे देखती ही रहेती है। उसकी योनि जो की छोटी सी थी और पिंक कलर की बंद डिब्बी जैसी थी। रति के अंदर कुछ कुछ होने लगता है, उसकी योनि में धीरे धीरे गीलापैन आने लगता है और उसके स्तनाग्र कडक होने लगते है और उसकी सिल्की स्लिप फाड़ के बाहर आने को बेताब हो रहे थे। उसका हाथ अपनी पैंटी पर चला जाता है जो की थोड़ी सी भीगी हुई लगती है उसको। जैसे ही उसके हाथ अपनी योनि को छूते है एक धीमी सी आह निकाल जाती है रति के मुंह से।

रति: दीदी आप बहुत सुंदर हो। अगर में लड़का होती तो आप से ही शादी करती।

आशका: चुप। कुछ भी बकवास करती है।

लेकिन उसको दिल में अच्छा लगता है। ऐसी कौनसी लड़की होगी जिसे अपने हुस्न की तारीफ नहीं पसंद होगी और वो भी दूसरी हॉट लड़की के मुंह से।

अपना काम खत्म करने के बाद आशका रति से बोलती है ला अब तेरी ड्रेस दे दे और अपने भी कपड़े उतार।

रति उसे अपनी ड्रेस देती है और अपनी स्लिप उतार देती है। अब वो सिर्फ पेंटी में थी। आशका की नज़र सबसे पहेले उसकी पतली कमर पर पड़ती है फिर धीरे धीरे ऊपर होती हुई उसकी बाहें और फिर उसके छोटे छोटे नींबू जैसे स्तनो पर पड़ती है। उसे ऐसा लगता है की वो उसे चूम ले चूस ले निचोड़ ले। रति पूछती है क्या हुआ दी। आशका धरातल पर वापस आ जाती है। और सोचती है हे भगवान यह क्या हो गया है मुझे। मैं कहीं लेसबियन तो नहीं होती जा रही। फिर बोलती है "कुछ नहीं, तू भी कुछ कम नहीं है। अभी इस उम्र में यह हाल है तो सोच बड़ी हो कर तो तू कितने लड़को को घायल करेगी"

रति: दी मुझे वैसे बहुत सारे लड़को में इंटरेस्ट नहीं है। सिर्फ एक में है। (बोल कर शर्मा जाती है)

आशका: अरे वाह कौन है वो खुश नसीब।

रति: वक़्त आने पर बताऊँगी।

आशका: ठीक है।

आशका उसे देखती है और सोचती है की कितनी खूबसूरत है रति। उसके काले बाल कंधे पर खेल रहे थे। उसकी ब्राउन आँखें जिन में उसने हल्का सा काजल डाला था जो शरम से झुकी हुई थी। उसकी हल्की गुदाज कूल्हे। आशका की साँसे तेज़ हो जाती है। रति पूछती है।

रति: दीदी क्या देख रही हो?

आशका: तुम्हें और तुम्हारी इस कातिल रूप को।

रति फिर से शर्मा जाती है। बोलती है दीदी ड्रेस पहेनाओ न। आशका उसे घूमने को कहेती है। जैसे ही रति घूमती है आशका अपनी उंगलिया रति की नंगी पीठ पर रख कर धीरे धीरे नीचे की और ले जाती है और उसकी गरदन पर अपने होंठ रख देती है। रति आशका की इस हरकत से चौंक जाती है। औद आशका की तरफ घूम जाती है।

आशका: आई एम सॉरी। पता नहीं मुझे क्या हो गया। मैं अपने आप पर काबू नहीं रख पायी।

रति: इस में सॉरी वाली कोई बात नहीं है।

और आगे बढ़ कर आशका के होंटो पर अपने होंठ रख देती है। और अपनी जीभ से आशका का मूह खोल कर उसकी जीभ को चूसने लगती है। दोनों एक दूसरे को ऐसे चूम रहे थे की जैसे खा जाएँगे एक दूसरे को। थोड़ी देर बाद दोनों अलग होते है और हाँफते हाँफते एक दूसरे को देख कर मुसकुराते है।आशका: मैंने पहेले तो नोटिस नहीं किया पर आज जब तुम्हें ऐसे देखा तो मैं अपने आप को रोक नहीं पायी। मुझे बस तुम्हारे यह बूब्स चूसने है और तुम्हारी सेक्सी एस और पुस्सी चटनी है।

रति आशका की आंखो में देख कर बोलती है आप से खेल साली रंडी।

आशका उसे ऐसा बोलते देख कर चौंक जाती है। पर देखती है रति ने गुस्से से नहीं किसी और ही अंदाज़ में यह बात काही थी। वो नीचे बैठ जाती है अपने पैर चौड़े करती है और अपनी नंगी चुत के दर्शन रति को करवाती है। एक उंगली को मूह में डाल कर गीली करती है और धीरे धीरी अपनी चुत के ऊपर रगड़ ने लगती है। उसे बहुत अच्छा लगता है अपनी चुत रगड़ कर। एक आह निकाल जाती है आशका के मूह से। उसकी इस हरकत से रति भी होर्नी होने लगती है। और अपने स्तनो को पकड़ कर मसलने लगती है। वो नीचे झुकती है और अपना सर आशका की चुत के पास ले जाती है और एक ज़ोर की सांस लेती है। "म्म आ आहह आप की पुस्सी की स्मेल बहुत अच्छी है दीदी। फिर वो अपने हाथों से आशका की छोटी सी कुँवारी अनछुई चुत को छूती है। यह पहेली बार किसी ने छुआ था आशका की चुत को। आशका कए मूह से आह निकाल जाती है। रति अपनी उंगली उसकी चुत पर गोल गोल घुमाने लगती है। थोड़ी सी अंदर डाल कर देखती है तो आशका की आंखे बाहर आ जाती है। वो माना करती है ऐसा करने को। तो रति अपना मूह चुत के आगे लेजा कर उसे चूम लेती है।

 
आशका: साली रांड तुझे मेरी चुत का टेस्ट पसंद है न? जब मैं अपनी चुत से तेरा मूह चोदूँगी तब कैसा लगेगा तूझे?

आशका को खुद को शोक लगा की वो कैसे बाजारू औरत के जैसे बात कर रही है। लेकिन वो अभी अपने आप में नहीं थी। जैसे कोई और उस पर कंट्रोल कर रहा है और उसे ऐसे बोलने पर मजबूर कर रहा हो ऐसा महसूस कर रही थी।

रति उसकी चुत को ऊपर ही ऊपर से चूसे जा रही थी। उसने चूसते चूसते ही ऊपर की और देख कर आशका को एक सेक्सी स्माइल दी। उसे ऐसे देखता देख कर आशका से रहा नहीं गया और बोली और ज़ोर से चूस कुतिया। रति ने चूसते चूसते अपनी एक उंगली ली और आशका की गुदा के छेद को कुरेदने लगी। आशका तो जैसे जन्नत में थी। उसकी आंखे बंद हो गयी थी और वो इस स्वर्गीय आनंद को अपने अंदर समेत रही थी। रति ने अचानक अपनी उंगली उसकी गांड में डाल दी। आशका को इसकी उम्मीद नहीं थी और नाही उसका शरीर इस के लिए तैयार था। वो ज़ोर से चिल्लाई और उसकी चुत ने रस छोडना शुरू कर दिया। रति उसका सारा रस चाटने लगी और बोली दीदी कैसा लगा आप को?

आशका : देट वास अमेजिंग तुमको यह सब कैसे आता है? तुम तो किसी लड़के को पसंद करती हो फिर यह क्या था?

रति: दीदी यह सब मेरी एक फ्रेंड की देन है। उसके घर पे ब्लू फिल्म देख देख कर सीखा है यह सब। चलिये अब तैयार होते हैं वरना देरी हो जाएगी पार्टी में।

आशका : हाँ पर पहेले नहाना पड़ेगा। और कुछ और निपटाना है बोल कर अपनी चुत और बगल के बाल दिखाती है।

रति: ठीक है। मैं भी नहा लेती हूँ।

दोनों नहा के रैडि हो जाती है और अपने कमरे को लोक कर के बाहर आती है तो मन्मथ को अपने कमरे के बाहर आता देखती है।

मन्मथ दोनों को देख कर अपनी नजरे झुका लेता है। लेकिन आशका बोलती है "ओए आइन्स्टाइन शर्मा ने की ज़रूरत नहीं है। हो जाता है ऐसा कभी कभी।"

मन्मथ नॉर्मल हो जाता है उसकी यह बात सुन कर। और तीनों बाहर आते हैं। देखते हैं तो मेहमान आने शुरू हो गए थे।

मन्मथ को आते देख कर सब लोगो ने उस का अभिवादन किया. मन्मथ ने उन सब का शुक्रिया अदा कर के एक कोने मे जा के खडा हो गया एक कोल्डद्रिंक के साथ. रति और आशका भी अपनी दूसरी सहेलियों के साथ मसरूफ़ हो गयी। सब लोग अपनी अपनी मस्ती में मस्त थे। पार्टी में बहुत बड़े बड़े लोग आए थे। मन्मथ के पापा ने उसको बुलाया और सब के साथ उसका परिचय करवाने लगे।

अभिमन्युसिंह : मन्मथ यह है मिस्टर शाह। यह हमारे नए कन्स्ट्रकशन बिज़नस के पार्टनर है। और यह है उनकी बेटी मनीषा।

मन्मथ: हैलो अंकल

शाह: हैलो बेटा। कोंगरेट्स इतना बढ़िया रिज़ल्ट लाने पर।

मन्मथ: शुक्रया।

शाह: आगे क्या सोचा है?

मन्मथ: इंजीन्यरिंग करने के बाद एमबीए करने की सोच रहा हूँ ताकि आगे पापा के बिज़नस में हेल्पफूल हो पाऊँ।

शाह: वेरी गुड। अभी तुम्हारा बेटा तो बहुत समझदार है। अभी से पापा को हेल्प करने की सोच रहा है।

अभिमन्युसिंह: आखिर बेटा किसका है।

मन्मथ अपनी तारीफ सुन कर थोड़ा शर्मा जाता है। उसे ऐसे शरमाता देख कर मनीषा मुस्कुराने लगती है। उन सब को ऐसे मुसकुराता देख कर मन्मथ बहाना कर के वापस एक कोने में जा के खड़ा हो जाता है। मनीषा भी मन्मथ की हम उम्र थी। वो भी इसी साल कॉलेज जॉइन करने वाली थी। उसने देखा मन्मथ अकेला खड़ा है तो वो उसकी तरफ बढ्ने लगी। मन्मथ ने उसको अपने तरफ आते हुए देखा तो वो फ़ीर से असहज होने लगा। मनीषा ने एक छोटी सी ब्लू कलर की सन ड्रेस पहेनि हुई थी जो की मुश्किल से उसके घुटने तक पहुँच रही थी। यह ड्रेस एक पतली सी डोरी से उसके रेशमी कंधे पर लटक रही थी। उसने हाइ हील्स पहेने हुए थी जिस में वो पूरी सिड़क्टिव लग रही थी।

मनीषा: हाई मन्मथ।

मन्मथ: हैलो।

मनीषा: क्यों अकेले खड़े हो? कोई फ्रेंड नहीं है क्या तुम्हारा?

मन्मथ: न न नहीं।

मनीषा: मुझ से फ्रेंड्शिप करोगे? (बोल कर फिर से मुस्कुरा देती है और अपना हाथ आगे बढ़ा देती है)

मन्मथ अपनी नजरे उठाता है और उसके मुसकुराता देख कर वो भी थोड़ी नर्वस मुस्कुराहट के साथ शेक हेंड करता है और कहता है "क्यों नहीं।"

मनीषा : यह हुई ना बात। (बोल कर उसके पास आ कर गालों पर एक छोटा सा कीस कर देती है।)

मन्मथ चौंक जाता है ऐसी हरकत से और सवालिया नजरों से उसकी तरफ देखता है।

मनीषा: फ्रेंडशिप की गिफ्ट। अब मेरा गिफ्ट दो।

मन्मथ भी उसके पास जाकर गालों पर किस करने जा ही रहा होता है की पीछे से आवाज़ आती है। "हाई आइन्स्टाइन यह क्या हो रहा हाई?”

मन्मथ और मनीषा दोनों देखते हैं तो आशका और रति दिखाई देते हैं। रति का चेहरा गुस्से से बिलकुल लाल था। और आशका भी थोड़ी नाराज़ लग रही थी।

मन्मथ: क क कुछ नहीं मैं तो बस...बोल कर चुप हो जाता हाई।

आशका: हमारा इंटरों नहीं करवाओगे?

मन्मथ: यह हैं मनीषा पापा के कन्स्ट्रकशन बिज़नस पार्टनर की बेटी। और मनी यह है मेरी बहन आशका और उसकी फ्रेंड रति।

मनीषा: हाई गल्स

दोनों उसको हाई किया। रति मनीषा को ऐसे घूर रही थी की जैसे उसे खा ही जाएगी।

रति (गुस्से में): वैसे यहाँ हो क्या रहा था?

मनीषा: मन्मथ मुझे फ्रेंडशिप गिफ्ट रिटर्न कर रहा था। (उसने मन्मथ का गाल दिखाया जिस पर उसकी लिपस्टिक का मार्क हो गया था।)

रति (मन्मथ की और घूम कर): कभी हम से भी फ्रेंडशिप कर लो ऐसी।

आशका रति की और देखती है और उसका गुस्सा देख कर सब समझ जाती है। लेकिन वो कन्फ़र्म करना चाहती है।

आशका: ओके गायज एंजॉय यौरसेल्फ। (बोल कर रति को खींच कर ले जाती है)

रति बे मन से उसके साथ जाती है।

आशका: ओएहोए बहुत जलन हो रही है। कितना धुआँ उठ रहा है तेरी गांद से देखो तो सही।

रति: मुझे गुस्सा मत दिलाओ। मैं वैसे भी अभी किसी मूड में नहीं हूँ।

आशका: तो तुम मेरे भाई से प्यार करती हो है न?

रति: हाँ। पर वो तो उस छिपकली से चिपक कर बैठा है। (उसकी आंखो से पानी निकलने लगता है)

आशका उसको बाहों में लेती है और कहेती है "अरे चील् मार। पार्टी में ऐसा होता है। वैसे भी मन्मथ है ही इतना हैंडसम की कोई भी लड़की उसके नजदीक जाना चाहेगी। उसने तो फ्रेंडशीप की है तुमउन्ध जल्द ही अपने प्यार का इज़हार कर लो कहीं देर न हो जाए। "

रति को भी यह बात ठीक लगती है। और वो मूड कर देखती है तो मन्मथ और मनीषा दोनों ही नहीं दिखाई दे रहे थे। उसकी आंखे मन्मथ को ढूंढ रही थी। उसे ना देख कर वो फिर से उदास हो गयी।

उन दोनों के जाते ही मनीषा मन्मथ को पार्टी से बाहर गार्डेन में ले आई थी। गार्डेन के बीचोबीच एक गजेबों बना हुआ था जिस में एक आराम दायक सोफा सेट और ट्पोय पड़ी हुई थी। दोनों जा कर सोफा पर बैठ जाते है

मनीषा: तुम बैठो, मैं कुछ खाने पीने का ले कर आती हूँ। (वो कुछ लेने चली जाती है)

थोड़ी देर बाद वो एक वेटर के साथ कुछ प्लेट में खाना और कुछ ड्रिंक्स ले कर आती है। एक ग्लास वो मन्मथ को देती है और एक खुद लेती है। ग्लास लेने के बाद मन्मथ पूछता है ये क्या है?

मनीषा: वाइन। ट्राय कर के देखो। (ग्लास उठा कर ) हमारी नयी दोस्ती के नाम चीयर्स

मन्मथ: मैंने कभी ट्राय नहीं किया... पर लेट्स चीयर्स

मनीषा: नर्वस लग रहे हो। पहेले कभी लड़की से बात नहीं की क्या? (बोल कर खिलखिला कर हास देती है)

मन्मथ थोड़ा झेंप जाता है। और बोलता है "ऐसी कोई बात नहीं। यह ड्रिंक में पहेली बार कर रहा हूँ इसलिए लिए। यह सब कैसे करते हैं मुझे नहीं पता।"

मनीषा: हा हा नौसिखिया। पहेले छोटा सा सिप लो और बातें करते रहो। कुछ खा भी सकते हो ताकि नशा जल्दी ना हो।

मन्मथ: अभी तक तो मुझे नशा नहीं हो रहा।

मनीषा: थोड़ी देर बाद वो भी हो जाएगा

ग्लास टेबल पर रख कर मन्मथ के नजदीक जाती है) और उसके होंठो के करीब अपने गुलाबी होंठ ले जाती है और धीरे से बोलती है॥ "मेरा रिटर्न गिफ्ट?”

मन्मथ उसको करीब आते देख कर होश खोने लगता है उसके हाथ काँपने लगते है और ग्लास में से थोड़ी वाइन गिर जाती है। मनीषा उसके हाथ पकड़ लेती है और अपने होंठ मन्मथ के होंठो पर रख देती है। मन्मथ इस हरकत से थोड़ा घबरा जाता है। और अपना सर दूर कर लेता है। मनीषा उसको देख कर एक कामुक स्माइल देती है। और फिर से उसको किस करती है। मन्मथ इस बार उसको नहीं रोकता और किस एंजॉय करने की कोशिश करता है। कुछ देर तक किस करने के बाद दोनों और करीब आ जाते है। मनीषा मन्मथ के हाथ से ग्लास लेकर टेबल पर रख देती है और उस से चिपक कर बैठ जाती है। फिर से मन्मथ को किस करना स्टार्ट कर देती है पर इस्स बार का जुनून कुछ और ही था। उस कीस में एक वहशीपन था। किसी जंगली बिल्ली की तरह वो मन्मथ के होंठ चूस रही थी। मन्मथ किसी अनाड़ी की तरह उसे सब कुछ करने दे रहा था। मनीषा ने मन्मथ के निचले होंठ को अपने दोनों होंठो के बीच ले कर चूसना शरु किया और मन्मथ की आंखे बंद हो गयी। मन्मथ को अब इस किसिंग में मज़ा आ रहा था और उसके लंड ने हरकत करना शुरू कर दिया था। थोड़ी ही देर में वो अपने पूरे उफान पर था और उसकी पेंट फाड़ कर बाहर आने को बेकरार था। मनीषा भी जोश में थी और उसकी चुत में गीली होने लगी थी। मनीषा अपना हाथा धीरे से मन्मथ के लंड पर रख देती है जो की पत्थर की तरह सख्त हो गया था। उसके लंड को देख कर बोलती है "तुम्हारे छोटे भाई को पसंद आ रहा है यह सब" मन्मथ मुस्कुरा देता है और अपना हाथ मनीषा के स्तनो पर रख देता है। जो की उत्तेजना से सख्त हो गए थे और उसके निपप्ले किसी तीर की तरह ड्रेस में से बाहर झांक रहे थे।

मन्मथ ने मनीषा को लिटा दिया और उसके स्तन धीरे धीरे दबाने लगा। मनीषा ने कहा "यह जगह सही नहीं है। कोई भी देख लेगा" मन्मथ कुछ नहीं कहेता और खड़ा हो कर कोने में जा कर स्विच बोर्ड पर एक बटन दबा देता है। गजेबों के चारो और एक पर्दा गिर जाता है। "लो अब कोई बाहर से नहीं देख पाएगा" मनीषा खुश हो जाती है। वो वैसे भी मन्मथ को देखते ही उसे पसंद करने लगी थी।

मन्मथ के साथ कीस करने से ही उसकी चुत गीली हो गयी थी और मन्मथ का सख़्त लंड पेंट पर से महसूस करने के बाद से ही उसे अपने अंदर लेने की चाहत और बुलंद हो गयी थी। उसने मन्मथ को मुसुरते हुए अपनी दोनों बाहें फैला कर अपनी और आने का इशारा किया। मन्मथ उसकी रेशमी बाहें देखता रहेता है, उसकी सिल्की आर्मपिट्स गजब लग रही थी। वो धीरे धीरे मनीषा के पास जाता है और उसे काउच पर पूरी तरह लिटा देता है। दोनों एक दूसरे को देखने लगते हैं। आस पास की दुनिया से बेखबर। मन्मथ अपने हाथ मनीषा की जांघों पर रख देता है जो की उसकी ड्रेस ऊपर होने से धीमी धीमी रोशनी में चमक रही थी। दूसरा हाथ वो एक स्तन पर रख कर धीरे से दबा देता है। मनीषा की हल्की सी आह निकाल जाती है। वो अपना निचला होंट दाँतो तले दबा लेती है। मन्मथ अपना हाथ धीरे से नीचे ले जाता है और घुटनो के पीछे वाले भाग पर अपनी उँगलियाँ फिरने लगता है। और अपना होंट उसकी खुली जांघ पर रख देता है। मनीषा इस दोहरे प्रहार से उत्तेजित हो जाती है और अपने हाथ पीछे ले जाकर काउच के हैंडल पकड़ लेती है। और मस्ती में बलखाने लगती है। मन्मथ अपने होंठो से धीरे धीरे उसकी जांघ चूसम रहा था वहाँ से धीरे धीरे उसके पाँव की और बढ्ने लगा। मनीषा जोरों से सिसकरिया ले रही थी। जिस की आवाज़ सून कर मन्मथ ऊपर देखता है तो वहाँ का नज़ारा देखता ही रहेता है। मनीषा के दोनों हाथ ऊपर थे और वो मस्ती में आँख बांध कर के सिसकारीयआ ले रही थी। मन्मथ की नज़र उसकी बिना बालो वाली बगल पर पड़ती है। उसने जब से अपनी बहन की हल्के बालो वाली आर्म पीट देखि थी तब से उसे लड़कियों की बगल देखना अच्छा लग रहा था। वो अपना ध्यान नीचे से छोड़ कर ऊपर की और आता है और उसकी आर्म पीट को सूँघता है। उसमे से उसे पर्फ्यूम और देव की मदमस्त करने वाली खुशबू आती है। वो उसकी आर्म पीट पर किस करता है और उसे अपनी जुबान से चाटने लगता है। उसे ऐसा करते देखा कर मनीषा और ज़ोर से चिल्लाती है। "आ आ आ आह ऐसे हो चाटो मेरे राजा"

तभी एक जोरदार धमाका होता है और लाइट चली जाती है।

 


मन्मथ और मनीषा इस धमाके से चौंक जाते हैं। जल्दी से अपने कपड़े ठीक करते हैं और आवाज़ की और जाने लगते हैं। वो देखते है की पार्टी में से लोग बाहर आ रहे थे धमाके की आवाज़ से। मन्मथ आगे बढ़ता है जहां धमाका हुआ था उस जगह। उसे एक जलती हुई गाड़ी दिखाई देती है जो की उसके घर के सामने पार्क की गयी होती है। गाड़ी में धमाका इतना ज़ोर का था की उनके एरिया का ट्रान्स्फ़ोर्मर भी गाड़ी के ऊपर गिर गया था। वहाँ जाके देखता है तो उसके पड़ोसी राजपूत अंकल और उनकी वाइफ़ दोनों कार में पड़े थे। तभी उसके पापा की आवाज़ आई "अरे कोई जल्दी से पानी लाओ और यह आग बुझाने का इंतेजाम करो। फायर ब्रिगेड को फोन करो।" वो और मन्मथ जल्दी से पास पड़ी मिट्टी डालने लगे गाड़ी पर। लेकिन आग इतनी ज्यादा हो गयी थी की अब कुछ करना मुश्किल था। रोने और चिल्लाने की आवाज़े आ रही थी उस तरफ मन्मथ देखता है तो रति को ऐसे रोता देख कर उसके भी आँसू आ जाते है। आशका रति को संभाल रही थी लेकिन उस पर कोई असर नहीं हो रहा था। आशका मन्मथ को आंखो से इशारा कर के अपने पास बुलाती है। मन्मथ के पास जाते ही रति उस से लिपट जाती है और दहाड़े मार कर रोने लगती है। मन्मथ उसको अलग ले कर गार्डेन की और जाने लगता है उसके साथ मनीषा और आशका भी जाने लगते है। फायर ब्रिगेड और पुलिस दोनों आते है 10 मिनट बाद लेकिन तब तक सब कुछ खत्म हो चुका था।

दूसरे दिन पुलिस अभिमन्युसिंह को इन्फॉर्म करती है की शायद ब्लास्ट सीएनजी किट फोल्टी होने से हुआ होगा, लेकिन उन्हे और इन्वैस्टिगेशन करनी पड़ेगी। कुछ दिन ऐसे ही बीत जाते है। अब रति मन्मथ के यहाँ पर रहेने लगी थी क्यों की उनके कोई दूसरे रिश्तेदार नहीं थे और जो थे उन्होने रिश्ता तोड़ लिया था रति के माँ बाप की लव मैरेज के बाद। सो कुल मिला कर अब मन्मथ की फॅमिली ही रति का सब कुछ थी। रति के पिता घर, बिज़नस और काफी सारी दूसरी प्रॉपर्टि छोड़ गए थे जिस की वजह से फाइनांशीयली तो उसे कोई तकलीफ नहीं होनी थी। इमोशनली वो बहुत टूट गयी थी और अभिमन्युसिंह की सख्त हीदायत थी आशका और मन्मथ को की उसे हर हाल में खुश रखें। दोनों कोशिश भी येही करते थे की उसे कोई तकलीफ ना हो। लेकिन अब मन्मथ और आशका दोनों को दूसरे शहर कॉलेज में पढ़ने जाना था और रति वहाँ पर अकेली रहेना नहीं चाहती थी। मन्मथ और आशका के कहेने पर अभिमन्युसिंह ने रति का एड्मिशन भी उसी शहर के एक बड़े स्कूल में करवा दिया। और तीनों को एक घर ले कर दिया ताकि उन्हे वहाँ हॉस्टल में रहेना ना पड़े। एक नौकरनी का भी इंतेजाम कर दिया जो की उनका खाने पीने का और दूसरी जरूरतों का ध्यान रख सके। मन्मथ ने इंजीन्यरिंग में दाखिला लिया था और आशका ने फार्मसी में। मनीषा को भी उसके पापा ने अपने पैसो के ज़ोर पर मन्मथ के ही कॉलेज में एड्मिशन करवा दिया था। मनीषा भी उसी घर में रहेने लगी थी। चारों के पास अपने अपने वेहिकल थे और एक कार दे रखी थी अभिमन्युसिंह ने ताकि उनलोगों को दूसरी कोई तकलीफ ना हो। धीरे धीरे उन लोगो का रूटीन सेट होने लगा था। मन्मथ सुबह सुबह 5 बजे उठ के रनिंग करने जाता और बाद में घर में ही लाइट एक्सेसइज़ कर ने लगता। 6/6:30 बजे तक तीनों लड़कियां भी उठ जाती और अपने अपने स्कूल/कॉलेज जाने की तैयारी करने लगती। रति अभी भी उस हादसे को भुला नहीं पायी थी। तीनों अपने से होती हर कोशिश कर रहे थे की रति कभी उदास ना हो। लेकिन रति अभी तक अपने माँ बाप को भुला नहीं पायी थी। हालांकि मन्मथ के करीब आ के और उस के साथ एक ही छत के नीचे रहेने से अच्छा लग रहा था। पर अभी वो रोमैन्स के मूड में नहीं थी। उन लोगों की ज़िंदगी ऐसे ही चली जा रही थी। इसी तरह से 3 महीने गुज़र जाते है।

और एक दिन...…

वो तेज़ी से एक सुनसान अंधेरी गली से भाग रही थी, उसका दिल ज़ोरों से धडक रहा था। उसे मौत का दर नहीं था पर वो लोग उसके साथ क्या करेंगे अगर पकड़ लिया तो वो डर था। रति यह सोच कर और तेज़ दौड़ने लगती है। वो उन कमीनों की गिरफ्त में नहीं आना चाहती है।

“रुक जा कुतिया तुम मुझ से बच कर नहीं जा सकती" उसके पीछे भागते आदमी ने आवाज़ दी। वो किसी भी हालत में उसे पकड़ना चाहता था। यह बसित खान था जो शहर का एक नामी गुंडा था। वो एक लंबा चौड़ा और बहुत ही काला इंसान था। उसके काले कारनामे पूरा शहर जानता था। वो हर किस्म का गलत काम करता था जुआ, दारू, ड्रग्स, लड़की सप्लाइ करना हर तरह के काम करता था और पुलिस भी उसके आगे कुछ नहीं कर पाती थी। लोगो को टोर्चर करना उसका शौक था।

“भाई रुक जाओ थोड़ा सा। सांस लेने दो। मेरी धड़कने तेज़ हो गयी है। " उसके पीछे हाँफते हुए एक आदमी ने कहा। वो लाला था जो की बसित का दाहिना हाथ था। और उसके हर काले कामो का राज़दार था।

“जब तक मैं मेरा बदला नहीं ले लेता तब तक मैं नहीं रुकूँगा। जल्दी कर भोसड़ीवाले वो भाग रही है।"

“मैं थक गया हूँ भाई। अब नहीं दौड़ा जाता। "

“अगर तुम ज़िंदा रहेना चाहते हो तो भागो वरना" कह कर उसे अपनी बंदूक दिखाता है। बसित की भी हालत खराब थी। वो भी तेज़ भागने की कोशिश कर रहा था पर उसके गोटियो में जबरदस्त दर्द हो रहा था जो की रति के एक किक का नतीजा था। इसलिए वो ज्यादा तेज़ नहीं भाग पा रहा था।

लाला अपने कमरे में सिगरेट पी रहा था तभी उसे एक चीख सुनाई दी और दरवाजा ज़ोर से बंद होने की आवाज़ आई। वो अपने बॉस के कमरे में गया तो उसे दोनों हाथों से अपना लंड पकड़ कर ज़मीन पर कराहते हुए पाया। रति ने बसित को अपने जाल में फंसा लिया था और उसे यकीन दिला दिया था की वो उस जैसे किसी मर्द के ही इंतज़ार में ही थी। और वो सब कुछ करेगी जो बशीत चाहता है। जैसे ही उसने रति के बंधन खोले उसने अपनी सारी ताकत लगा का उसे दोनों पैरो के बीच में ज़ोर से लात मारी और दरवाजा खोल कर भाग गयी। बसित दर्द के मारे दोहरा हो कर ज़मीन पर गिर गया उसे ऐसा लग रहा था की जैसे उसके अंडे फूट गए हो। वो कराह रहा था "साली रांड इसका बदला तुझे चुकाना पड़ेगा" जाते जाते रति ने यह सुन लिया और उसके शरीर में डर की एक सरसराहट फ़ेल गयी। बसित के आवाज़ में रहा गुस्सा और बदला लेने की चाहत ने उसके और ज्यादा डरा दिया था। वो उसके साथ क्या करेगा सोचा कर ही उसके घिन्न आ रही थी। मार, सुलगती हुई सिगरेट, ठंडा पानी वगैरा तो कुछ नहीं था जो की उसने बसित की आंखो में महसूस किया था जब वो उसको सिड्यूस कर रही थी। उसकी आंखो में एक वहशत भरी हवस देखि और उसके पेंट में बना हुआ तम्बू देख कर रति घबरा गयी थी। उसे पता था अगर वो इन लोगो के हाथ में आ गयी तो उसका बलात्कार तो करेंगे ही पर जान से भी मार डालेंगे। और वो मर जाना पसंद करेगी अपने मन्मथ के अलावा किसी और की होने के बजाय।

लाला यह देख कर हैरान था की इतनी चोट लगने के बावजूद बसित भागा जा रहा था। करीबन 2 किलोमीटर तक वो लोग दौड़े थे रति के पीछे। सरदियों की यह रात थी। सब लोग अपने घरो में दुबके पड़े थे और रास्ते भी सुनसान थे। सर्दियों की वजह से पुलिस भी गश्त नहीं लगा रही थी। जिसने बसित का काम आसान कर दिया था। अगर बसित दर्द में नहीं होता तो अभी तक तो उसने लड़की को पकड़ लिया होता और अपनी मनमानी कर चुका होता। बसित का एगो हर्ट हो गया था। एक चुहिया जैसी लड़की ने उसे धूल चटा दी थी। वो उसे जल्द से जल्द पकड़ कर ऐसी सज़ा देना चाहता था की पूरी जिंदगी वो लड़की याद रखे।

रति भी अपनी इज्ज़त दांव पर लगी देख कर भागे जा रही थी। उसके शरीर पर जगह जगह चोट के निशान थे। रति ने अभी भी वही कपड़े पहेने थे जिसमे इन लोगो ने उसको किडनैप किया था। स्लीव्लेस टीशर्ट जो की मुश्किल से उसके नाभि तक पहुँच रही थी, जीन्स और हील वाले सेंडल्स। भागने की वजह से उसकी टी शर्ट पसीने से भीग गयी थी। वो खुद भी पसीने से तरबतर हो गयी थी। लेकिन उस कोई परवाह नहीं थी। वो बस अपना पीछा छुड़ाना चाहती थी इन लोगो से। उसे यह भी नहीं पता था की उसे किडनैप क्यो किया गया है। लेकिन उसने अपना दिमाग लगाया और जो उसे लगा की बॉस है, उसे अपनी अदाओ के जाल में फसा कर चकमा दे कर भाग आई थी।

अपने पीछे कदमो की आहात तेज़ होते सुन वो और तेज़ भागने लगी। उसके एक कार पार्क की हुई दिखाई दी जिस की लाइट चालू थी। उसे कुछ उम्मीद जागी और वो रुक कर कार में देखती है लेकिन वहाँ कोई नहीं होता वो निराश हो जाती है। उसका पूरा बदन दर्द कर रहा था वो कहाँ है यह भी नहीं पता था। उसे बस इन लोगों से दूर जाना था। वो सिर्फ मन्मथ के बारे में ही सोच रही थी। और अपने आप को कोस रही थी जब मन्मथ ने इतनी रात को अपनी फ्रेंड से मिलने जाने को माना किया था। और वो ज़िद कर के अकेली मिलने चली गयी। वो मूड कर रोड क्रॉस करने के लिए बढ़ती है की उसे सामने से एक लाइट जलती हुई दिखाई देती है और वो आखरी चीज़ थी जो उसे दिखी और फिर उसकी आंखो के सामने अंधेरा छा गया और वो धम्म से ज़मीन पर गिर गयी।

मन्मथ और आशका रति को ढूँढने निकले थे। देर तक रति के ना आने से आशका ने रति को कॉल किया पर उसका मोबाइल बंद बता रहा था इसी लिए आशका ने घबरा कर मन्मथ को बताया की अभी तक रति नहीं आई है और दोनों मनीषा को घर पे छोड़ कर उसको ढूँढने निकाल पड़े। मनीषा भी आना चाहती थी लेकिन उन लोगो ने माना कर दिया ये बोल कर की अगर उनके जाने के बाद रति आ गयो तो किसी को तो घर पर होना चाहिए।

मन्मथ गाड़ी ड्राइव कर रहा था "मुझे ये समझ नहीं आता इतनी देर को उसको अपनी फ्रेंड से क्या काम था।"

आशका: तुम यह नहीं समझोगे। हम लड़कियां ऐसी ही होती हैं।

मन्मथ: पागल सब की सब पागल।

आशका: बस अब चुपचाप ड्राइव करो। उसने कहा था वो एमजी रोड पर रहेती है।

मन्मथ: हाँ वही ले जा रहा हूँ।

एमजी रोड पहुँच कर मन्मथ गाड़ी रोकी और आशका ने नीचे उतार कर मन्मथ को देखा। मन्मथ में इन तीन महीनो में काफी चेंज आया था लेकिन अभी भी वो लड़कियों से बात करने में शरमाता था। तीनों लड़कियां उसे इसी बात पे चिढ़ाती थी। आशका, रति और मनीषा की बात अलग थी उन के साथ मन्मथ को कोई प्रोब्लेम नहीं होती थी। आशका: मैं पूछ कर आती हूँ।

(5 मिनट बाद आशका आती है) “वो तो यहाँ से 9 बजे ही निकाल गयी थी अपनी स्कूती ले कर। "

मन्मथ: अब क्या करे। उसका फोन भी तो नहीं लग रहा। पुलिस में कम्प्लेंट करनी है?

आशका: पापा को बता दें?

मन्मथ: अरे नहीं। पापा को क्यों परेशान करना। हम लोग थोड़ा ढूंढते हैं अगर फिर भी नहीं मिली तो पापा को पूछ कर पुलिस कम्प्लेंट कर देंगे।

आशका: जैसा तुम ठीक समझो।

मन्मथ: चलो फिर। (वो कार स्टार्ट कर देता है।)

आशका: तुम्हें पता है रति तुमसे बहुत प्यार करती है।

मन्मथ: (थोड़ा मुस्कुरा कर) हा पता है।

आशका: कब से?

मन्मथ: पार्ट के दो दिन पहेले मैं उस के घर गया था घर की चाबी मोम वहाँ छोड़ गयी थी। तब पता चला। उसने अभी बताया नहीं है…

आशका: हे भगवान कैसा लड़का है। अब प्रपोज़ भी लड़की करेगी तुमको?

मन्मथ: अरे वो अभी नादान है। उसकी उम्र नहीं है यह सब करने की। इसी लिए मैं भी प्रपोज़ नहीं कर रहा।

आशका: वाह वाह। तुम करोगे खानदान का नाम रोशन। जूनियर पापा (बोल कर वो ज़ोर से हंस देती है)

मन्मथ: मैं इस लिए कह रहा हूँ क्यों की प्यार में एक ताक़त होती है। जो की आप को बना भी सकती है और बर्बाद भी कर सकती है।

आशका: प्यार बर्बाद कैसे कर सकता है?

मन्मथ: देखो अभी हम लोगो की पढ़ने लिखने की उम्र है। अगर हम अभी से प्यार व्यार के चक्कर में पड़ गए तो पढ़ाई लिखाई धारी की धारी रहे जाएगी। हम लोगो को एक दूसरे के अलावा दूसरी किसी चीज़ के मतलब नहीं रहे जाएगा। इस लिए अभी यह सब करने का टाइम नहीं आया है।

आशका: इंट्रेस्टिंग पॉइंट। ऐसा तो मैंने कभी नहीं सोचा। (थोड़ा सख्ती से) और मनीषा के साथ तुम्हारा क्या सीन है? वो बता रही थी तुम लोग बहुत आगे बढ़ गए थे पार्टी में।

मन्मथ: मैं हीट ऑफ दी मोमेंट में थोड़ा बहक गया था।

 


आशका: (ज़ोर से हंस देती है) हीट ऑफ दी मोमेंट माइ फूट। तुम्हें पता होना चाहिए कौन तुम्हें प्यार करता है और कौन यूज़ कर रहा है। तुम अब बच्चे नहीं रहे। एक बड़े बिज़नस मेन के बेटे हो। स्मार्ट और हैंडसम हो। ऐसी कई लड़कियां तुम्हारे आगे पीछे घूमेगी जिसका मकसद सिर्फ तुम्हारे करीब आ कर तुम्हारी दौलत पाना होगा।

मन्मथ: मुझे पता है। मैं बेवकूफ़ नहीं हूँ।

आशका: मैं तुम्हें इस लिए कह रहो हूँ की मुझे तुम्हारी फिक्र है और लड़की होने के नाते मुझे पता है की हम लोगो के पास ऐसी ताकत होती है की हम चाहे तो मर्दो को अपनी उँगलियों पर नाच नचाएँ।

आशका: लोग कहेते हैं औरत की खूबसूरती और उसका जिस्म उसका सबसे बड़ा हथियार होती है। जिसको यह यूज़ करना आ गया वो बहुत आगे बढ़ जाती है। अब फिल्मों की हेरोइनों को ही देख लो। अपने जिस्म की नुमाइश कर कर के करोड़ो अरबों रुपए कमा लेती है। उम्र ढलने से पहेले किसी बड़े बिसनेस् मेन को पटा कर शादी कर अपना भविष्य सुरक्षित कर लेती है।

मन्मथ उसकी बात सुन कर अपना सर हाँ में हिलाता है और सोचने पर मजबूर हो जाता है। कॉलेज में लड़कियां उसका पीछा हि नहीं छोडती। किसी ना किसी बहाने उसके पास आने की कोशिश करती रहेती थी। उसके उनके प्यार के प्रोपोसल के ठुकराने के बावजूद उस से नजदीकीया बढ़ाने की कोशिश करती रहती थी। मन्मथ इसी सोच में था और गाड़ी चला रहा था और अचानक उसने किसी साये को आते देखा और ज़ोर से ब्रेक मारता है। लेकिन तब तक उस साये से गाड़ी की टक्कर हो ही जाती है।

“हे भगवान तुम्हें लगता है यह ठीक हो जाएगी?” - आशका

“मेरी गाड़ी का एक्सिडेंट भी इसी से होना था?” - मन्मथ

“यह कोई भी हो सकता था। शुक्र मानो भगवान का की रति की हमारी गाड़ी से टक्कर हुई वरना हम इसे पूरी रात ढूंढते है रहेते" - आशका

“नहीं यह सब मेरी ही गलती है। में ख़यालों में इतना खो गया था की मुझे याद ही नाही रहा की मैं गाड़ी चला रहा हूँ। " - मन्मथ

“अपने आप को सारा दोष मत दो। ना ही मैं यह सब बात करती और नाही तुम उलझन में पड जाते"

वो दोनों शांत हो कर बैठ गए और डॉक्टर का इंतज़ार करने लगे। डॉक्टर रूम में रति को चेक कर रहे थे। आशका मन्मथ को देखती है और उसको काफी टेंशन में पाती है। जैसे कोई अपना सब कुछ खोने की कगार पर हो वैसा लग रहा था मन्मथ। आशका उसका हाथ अपने दोनों हाथो में लेती है और अपना सर उसके कंधे पर रख देती है और बोलती है "चिंता मत करो। सब ठीक हो जायेगा।" इसी तरह बैठे बैठे दोनों सो जाते हैं।

उन दोनों की आंखे सुबह की चहल पहल से खुलती है। रात की नर्सेस अपनी शिफ्ट खत्म कर के जा रही थी और सुबह वाली अपनी शिफ्ट जॉइन कर रही थी। उनकीबातों की आवाज़ से दोनों की नींद खुल जाती है। “मैं चाय और कुछ खाने का ले के आता हूँ” बोल कर मन्मथ बाहर कैंटीन की और चला जाता है। उसके जाने के कुछ देर बाद एक डॉक्टर आशका के पास आता है आशका उस से पूछती है “कैसी है रति अब”

डॉ: वो ठीक हो जाएगी।

आशका: थेंक गोड।

डॉ: लेकिन हमे उसे कुछ समय तक यहाँ हॉस्पिटल में निगरानी में रखना होगा।

आशका: ओके डॉ। पर उसने कुछ बताया?

डॉ: आप को उसकी चोट का अंदाज़ा नहीं है। अभी वो बोल सके ऐसी हालत में नहीं है।

आशका: सोर्री डॉ। मुझे बहुत चिंता हो रही थी इसी लिए पूछा।

डॉ: मैं समझ सकता हूँ। (डॉ जा कर अपना काम करने लगता है। और मन्मथ वापस चाय और बिसकुट ले कर आता है।)

आशका उसको डॉ से हुई बात बताती है। और उसे घर जाने को कहेती है। और बोलती है की शाम को तुम वापस आ जाना ताकि रात को तुम यहाँ रुक सको। वो शाम को घर चली जाएगी। और दोपहर को मनीषा को खाना ले कर भेजने को बोलती है।

मन्मथ का मन नहीं था फिर भी वो अपनी बहन की बात मान कर घर चला जाता है।

घर पहुँच कर देखता है तो मनीषा फोन पर आशका से बात कर रही थी। उस के आते ही पूछती है “अभी तो ठीक है न रति?” मन्मथ सारी बात बता कर अपने रूम में जाता है फ्रेश होने। फ्रेश हो कर वो अपने बेड पर लेट जाता है और मोबाइल पर सोंग्स ढूंढ कर बजाने लगता है।

“हम्म गाने सुने जा रहे हैं” मनीषा कमरे मे आती है।

“हाँ सोचा थोड़ा मूड ठीक हो जाएगा”

मनीषा स्माइल करती है और मन्मथ के पास उसके बेड की किनारी पर आ कर बैठ जाती है।

“मन्मथ”

“हुम्म क्या है?”

“तुम रति को पसंद करते हो ना”

“हाँ। तुम्हें कैसे पता?”

“सारी दुनिया को पता है। यह इश्क़ है छुपाए नहीं छुपता” बोल कर हंस देती है।

“वैसे मुझे कोई प्रोब्लेम नहीं है तुम किसी से भी प्यार करो।“ कह कर मन्मथ के हाथ में से फोन ले कर साइड में रख देती है। और उसके और करीब जा कर बैठ जाती है।

“तुम मेरे बारे में क्या सोचते हो?”

“क क कुछ नहीं।तुम एक अच्छी लड़की हो और मेरी दोस्त भी हो।“

“मेरे कपड़े कैसे हैं?” (कपड़ो के नाम पर उसने सिर्फ छोटी सी स्लिप पहेनि हुई थी और ब्रा भी नहीं पहेनी थी। जीस में से उसके उभार दिक रहे थे।

“अअअ अछे हैं”

’’aammphhh...”मनीषा एक कातिल स्माइल देती है और अपना हाथ मन्मथ के सीने पर रख देती है। और धीरे धीरे नीचे की और ले जाती है।

“य ये क्या कर रही हो मनीषा”

“shshshsh चुप रहो। काकी सुन लेगी।“

“हुह तभी कह रहा हूँ। ठीक से बैठो.”

“यह तुम्हारा चान्स है मेरे साथ कुछ भी शैतानी करने का। इसे गंवा मत देना बेवकूफ़।“

“पर पर आह्ह”

मनीषा का हाथ मन्मथ के लंड तक पहुंचता है और वो उसे मसल देती है। मन्मथ की आह निकल जाती है।

“उस दिन के बाद आज मौका मिला है। उस दिन तो काफी बड़ा लग रहा थाई आज देखते हैं सही में कितना बड़ा है।“

मनीषा मन्मथ की शॉर्ट्स खींच लेती है। और मन्मथ का लंड जो की पूरा खड़ा नहीं था बाहर आ जाता है।

“हुम्म लगता है महाशय सो रहे हैं। इसको जगाना पड़ेगा।“

“अगर काकी आ गयी तो?” मन्मथ ने डरते डरते कहा (काकी उनकी नौकरानी थी।)

“नहीं आएगी वो। मैंने उन्हे दोपहर के खाने के लिए सब्जी लाने बाहर भेज दिया है। अब चुप रहो और मुझे अपना काम करने दो। “

मनीषा उसका लंड अपनी मुट्ठी में पकड़ती है और धीरे धीरे से हिलाने लगती है। वो लंड को काफी ध्यान से देख रही थी जैसे कभी उसने देखा ही ना हो। उसकी मेहनत रंग लाने लड़ी और मन्मथ का लंड अपने पूरे शबाब पर आ गया।

“हाहाहा खड़ा हो गया। अभी तो बहुत शरीफ बन रहे थे।किस के बारे में सोच रहे थे बोलो? किस को ख्यालो ख्यालो में ही चोद डाला?”

“तुम मेरा लंड पकड़ के हिला रही हो और पूछ रही हो की खड़ा क्यों हो गया?पागल हो क्या? तुम्हारे मुलायम हाथ के छूने से ही यह खड़ा हो गया था।“

“अगर में स्पीड बढ़ा दूँ तो तुम्हें और मज़ा आएगा?” कह कर वो अपनी स्पीड थोड़ी सी बढ़ा देती है।

“ओहह हाँ येस्स ऐसे ही” मन्मथ का गला सुकने लगता है।

“हेहेहे ठरकी मन्मथ”

उसके नाजुक मुलायम हाथ मन्मथ को अपने लंड के इर्दगिर्द घूमते हुए इतने अच्छे लग रहे थे। उसकी आंखे बंद हो गयी। वो उसे रोकना चाहता था पर पता नहीं क्यों नहीं रोक पाया। इतने में मनीषा ने अपना अंगूठा उसके पी हॉल पर रखा और धीरे से सहलाने लगी। उसकी इस हरकत से मन्मथ सिहर उठा और उसके मूह से आहे निकाल ने लगी।

“तुम्हारा हथियार तो बहुत सख्त हो गया हौ मन्मथ”

“हाँ क्यों की उसकी देखभाल तुम्हारे जैसी एक्सपेर्ट कर रही है। आह ओहह और तेज़ ऐसे ही उंगली घुमाओ“

“हहहेहेहे लगता हैं मैंने तुम्हारा वीक स्पॉट ढूंढ निकाला है।“

मनीषा एक हाथ को उसके लंड पर उपर नीचे कर रही थी और दूसरे हाथ के अंगूठे से उसके पी होल को सहेला रही थी। मन्मथ इतने मज़े को ज्यादा देर तक सहन नहीं कर पाया और उसका पानी छूटने लगा। उसकी पहेली धार मनीषा के स्तन पर जा कर गिरि और दूसरी उसकी जांघों पर और बाकी की उसके हाथो पर। मन्मथ अभी तक हाँफ रहा था और उसकी आंखे बंद थी। मनीषा उसको देख कर मुस्कुराइ और अपने आप को साफ करने के लिए अपने रूम में चली गयी।

थोड़ी देर बाद मनीषा वापस आती है तो देखती है मन्मथ अभी तक वही पोसिशन में था। उसकी साँसे अब नॉर्मल हो गयी थी। और उसके फ़ेस पर एक बहुत बड़ी स्माइल थी। यह पहेली बार था की किसी लड़की ने उसकी मूठ मारी थी। उसने सिर्फ पॉर्न फिल्म्स में ही देखा था ऐसा। मनीषा उसे ऐसे देख कर स्माइल करती है और उसके पास जा कर लेट जाती है। वो मन्मथ के एक हाथ को तकिया बनती है और दूसरे हाथ को अपने कूल्हे पर रख देती है और उस से चिपक जाती है।

 
मनीषा मन्मथ को लेटे हुए ही अपनी बाहों में ले लेती है और उसकी मर्दाना खुशबू को महसूस करती है और सोचती है “मन्मथ कितना प्यारा है। मैं इसे बता दूँ की मैं भी इस से प्यार करती हूँ?”फिर कुछ सोच कर वो बोलती है...मैं थोड़ा फ्रेश हो कर आती हूँ। वो बाथरूम में चली जाती है। मन्मथ देखता है तो टॉवल उसके स्टडि टेबल पर पड़ा होता है वो बोलता है “अरे यह टॉवल तो तुम यही भूल गयी।“वो टॉवल ले कर बाथरूम का दरवाजा नोक करता है। दरवाजा खुलने पर वो देखता ही रहे जाता है। उसके सामने मनीषा पूरी नंगी खड़ी थी।

“मन्मथ...”

“ओह सॉरी में टॉवल ले कर आया था। बाथरूम में टॉवल नहीं है।“

मन्मथ की आंखे मनीषा के बदन पर से हट ही नहीं रही थी। वो उसके सख्त स्तन और बिना बालो वाली चुत को देख़्ता हि रहता है। मनीषा उसे ऐसे देख कर मन ही मन मुस्कुरा देती है और बोलती है “सो स्वीट ऑफ यू। थेंक यू” और देखती है तो मन्मथ का लंड वापस अपने शबाब पर आ गया था। उसके लोअर में एक पहाड़ जैसा बना था जिसे मनीषा ललचाई नजरों से देख रही थी। मनीषा भी मन्मथ को हसरत भरी नजरों से देख रही थी। उसके शरीर में अजब सी हलचल मचने लगी थी। सिर्फ उसे देखते ही उसके योनि वाले भाग में सर सराहट हो रही थी। वो आगे बढ़ती है और मन्मथ को बाथरूम में खींच लेती है।

“क क क्या हुआ। यह क्या कर रही हो?”

“बहुत टाइम से मैं तुम्हें नंगा देखने का सोच रही थी। आज मौका भी है और हम दोनों मूड में भी है।“ बोल कर वो मन्मथ के लंड की और इशारा करती है। मन्मथ थोड़ा सा शर्मा जाता है। मनीषा उसे कहेती है “अपना लोअर उतारो”

“क क्यों?”

मनीषा हवस के मारे पागल हो रही थी और मन्मथ जैंटल मेन बन रहा था। वो एक झटके से मन्मथ का लोअर खींच कर उतार देती है। मनीषा उसके लंड को पकड़ कर हौले से दबा देती है। और दूसरे हाथ से उसके अंडे सहलाने लगती है। मनीषा की इस हरकत से मन्मथ के अंदर एक तूफान सा उठने लगता है।

“कैसा लग रहा है” – मनीषा

“आहह ऐसे ही करती रहो”

“तुम्हारा लंड बहुत बड़ा है। मैंने पहेले कभी नहीं देखा सिर्फ ब्लू फिल्मों में। और यह वैसा ही लंबा और मोटा है। “

वो लंड को सहलाना शुरू करती है और दूसरे हाथ से मन्मथ की कमर पकड़ लेती है। और मन्मथ की आंखो में देख कर बोलती है

“मन्मथ मैं बहुत दिनों से एक बात कहेना छह रही थी तुम से शायद येही सही मौका है। ”

“हाँ कहो”

“मन्मथ... आई लव यू सो मच”

“........” मन्मथ यह सुन कर अवाक रहे जाता है। उसको कुछ नहीं सूझता की क्या बोले और क्या करे। तभी मनीषा खामोशी तोड़ती है

“मुझे पता है तुम रति से प्यार करते हो।लेकिन में यह तुम से उसी दिन पार्टी में कहेना चाहती थी लेकिन मेरी हिम्मत नहीं हुई।“

मन्मथ अभी भी चुप था उसे पता नहीं चल रहा था की कोई लड़की उसे आई लव यू कहे तो क्या करना चाहिए।

“म म मैं यह यह आई लव यू तुम से एकस्पेक्ट नहीं कर रहा था।“

“पता है। लेकिन मुझे फर्क नहीं पड़ता की तुम किसी और को चाहते हो। मैं तुम्हें चाहती हूँ और हम अपना ये संबंध ऐसे ही छुपा कर रखेंगे। मैं सिर्फ तुम्हारे नजदीक रह कर खुश रहूँगी। और अपने से बनती सारी कोशीश करूंगी की तुम भी खुश रहो।“ कह कर मन्मथ को आँख मार देती है।

फिर वो झुक कर मन्मथ का लंड अपने मूह में ले लेती है और उसके लिंग मूँड पर अपनी जीभ से सहलाने लगती है।

“उहहम्म”

उसे ऐसे आहें भरता देख कर वो खुश हो जाती है और अपनी जीभ को और जगहो पर घुमाने लगती है। उसके अंडकोश को सहलाते हुए अपनी एक उंगली वो मन्मथ की गांड कि और ले जाति है. और छेद के ऊपर सर्क्युलर मोशन में उंगली घुमाती है।

“usshhhhhक्या कर रही हो वहाँ पर। बहुत अच्छा लग रहा है।“

मन्मथ झुक कर मनीषा को उठा लेता है और उसके होंटो पर एक जबर्दस्त कीस कर देता है। दोनों एक दूसरे को बुरी तरह चूस रहे थे। मन्मथ के हाथ मनीषा के बूब्स पर जाते है और वो धीरे धीरे उन्हे मसलने लगता है। मनीषा को भी अपने बूब्स पर मर्दाना हाथ फिरते देख कर अच्छा लगता है। उसने सोचा नहीं था की सिर्फ बूब्स दबवाने में भी इतना मज़ा आता होगा। उसे लगता था की आज उसकी सुहाग रात सॉरी सुहाग दिन मन कर रहेगा। यह सोच कर उसके गालों पर शरम की लालिमाछा जाती है। मन्मथ का दूसरा हाथ मनीषा की कमर से होता हुआ उसके कूल्हो पर जाता है। उसके गुदाज कूल्हो को वो कुछ देर तक सहलाता है और उसके बाद उसकी गांड की दरार पर अपनी एक उंगली ले दाता है और ऊपर से ले कर नीचे तक हल्के से ले जाता है।

“तुम बहुत खूबसूरत हो मनीषा”

मनीषा अपनी तारीफ सुनकर शर्मा जाती है। और मन्मथ को गर्दन पर हल्के से काट लेती है। “मन्मथ मैं तुम्हें अपने अंदर फील करना चाहती हूँ” मन्मथ स्माइल करता है और झट से मनीषा को पलटा देता है और उसेवॉश बेसिन को पकड़ कर खड़ा कर देता है।“ मनीषा को मन्मथ के हाथ अपनी गांड और कमर के इर्द गिर्द महसूस होते हैं। और उसके लंड की टिप अपनी चुत के मुहाने पर महसूस होती है। मन्मथ अपने लंड को मनीषा की चुत पर घिसता है और कहेता है “मनी यह मेरा फ़र्स्ट टाइम है मूजे पता नहीं कैसे करते है पर लेट्स डू इट।“

“हाँ मेरा भी फ़र्स्ट टाइम है। और में खुशनसीब हूँ की यह तुम्हारे साथ है”

मन्मथ अपने लंड पर थूक लगा कर उसे गीला करता है और एक ज़ोर का झटका मारता है। झटका इतना ज़ोर का था की मनीषा का सर सामने वाली दीवार पर टकरा जाता है उसकी आंखे बाहर आ जाती है। उसकी आँखों से आँसू बहने लगते है वो चिल्लाने लगती है “अरे अनाड़ी इतना ज़ोर से नहीं, मेरी तो जान है निकाल गयी” इतना ज़ोर से जटका मारने के बावजूद उसके लंड सिर्फ थोड़ा सा ही अंदर गया था। वो फिरसे एडजस्ट होते है और मन्मथ दूसरा धक्का देता है लेकिन इस बार थोड़ा धीरे से। इसबार मनीषा का सर दीवार से नहीं टकराता पर मन्मथ के लंड का टोपा अंदर आ गया था। मनीषा को लग रहा था की कोई उसके अंदर गरम चाकू दाल कर उसके दो टुकड़े कर रहा हो। उसे बहुत दर्द हो रहा था लेकिन वो आज किसी भी हालत में मन्मथ की होना चाहती ही। उसने मन्मथ को कहा “इसको बाहर निकाल कर साबून से थोड़ा झाग में करो।“ मन्मथ उसका कहा मान कर अपने लंड को झाग में लपेट लेता है और दोनों वापस वही पोसिशन में आ जाते हैं। “अब डाल दो अपना खूंटा” बोल कर वो मूड कर देखती है मन्मथ को। उसकी सेक्सी स्माइल देख कर मन्मथ जोश में आजाता है और एक झटके से अपना लंड उसकी छूट में डाल देता है। मनीषा को उम्मीद नहीं थी की वो इतना ज़ोर से धक्का मारेगा। “माँ मर गई रेबोला था इतना ज़ोर से नहीं। फाड़ डाला रे” बोल कर रोने लगती है। मन्मथ देखता है तो उसका लंड खून से लथपथ था वो घबरा जाता है। और मनीषा से बोलता है “ख ख खून...”

“हाँ वो तो फ़र्स्ट टाइम में निकलेगा ही। अब तुम शुरू करो लेकिन स्लो”

मन्मथ धीरे धीरे से धक्के मारना शुरू करता है मनीषा को दर्द तो हो रहा था लेकिन एक मीठा मीठा अहेसास भी हो रहा था॥ धीरे धीरे धक्को के साथ दर्द की मात्रा कम होरही थी और वो अहेसाह बढ़ता जारहा था॥

“सही हैं न कहीं स्पीड ज्यादा तो नहीं” मन्मथ धक्के लगाता हुआ बोला

“सही है। ऐसे ही करते रहो....आहह मज़ा आ रहा है।“ मनीषा जोरों से कराह ने लगती है। उसे यकीन नहीं हो रहा था की जिस से वो प्यार करती थी उसी के साथ वो चुद रही थी। और दोनों का फ़र्स्ट टाइम भी था। मन्मथ धीरे धीरे धक्के मार रहा था और उसका लंड जैसे एक संकड़ी गली में भींच गया हो ऐसा लग रहा था। उसके दोनों हाथ से मनीषा की कमर पकड़ रखी थी। एक हाथ आगे बढ़ा कर उसने मनीषा के स्तन पकड़े और ज़ोर से मसल डाला।

“ओहह इतना ज़ोर से मत दबाओ। अब ये सिर्फ तुम्हारे है।“

“आहह ओहह मनी तुम्हारी चुत में लंड ऐसा लग रहा है जैसे मक्खन में छुरी जा रही हो। कितनी सॉफ्ट है तुम्हारी चुत”

“तुम्हारा लंडभी बहुत तगड़ा है। तुम्हारी बॉडी तुम्हारी खुशबू सब ने मुझे पागल बना रखा था इतने दिनो से।मुझे खुशी है की मैं आज तुम्हारी हो गयी....”

मन्मथ यह सुनकर दोनों हाथो से उसके बूब्स पकड़ता है और दबा देता है और धक्को की स्पीड बढ़ा देता है। मन्मथसे ज्यादा कंट्रोल नहीं होता और वो अपना वीर्य मनीषा के अंदर छोडने लगता है। अपनी चुत में गरम गरम वीर्य क फुहार महसूस करते ही मनीषा भी अपना पानी छोडने लगती है। दोनों हाँफते हाँफते एक दूसरे को देख कर हंस पड़ते है। और एक दूसरे आ से लिपट जाते है। थोड़ी देर बाद दोनों नहा धो कर आगे क्या करना है उसकी प्लानिंग करने लगते है। मन्मथ को रात को ही हॉस्पिटल जाना था और मनीषा दोपहर को जानेवाली थी। काकी ने खाना बना दिया था और मनीषा वो ले कर हॉस्पिटल चली जाती है।

मनीषा और काकी के चले जाने के बाद मन्मथ अपने रूम में जा कर सो जाता है। अपनी पहेली चुदाई के बाद उसे थकान महेसूस हो रही थी।

*****

“तौलिया लाना” बसित ने ज़ोहरा से कहा। ज़ोहरा बसित की बीवी थी।

“ला रही हूँ। चिल्लाने की कोई जरूरत नहीं है। “

बसित रात की भाग दौड़ के बाद थकामांदा अपने घर चला गया था। एक चुहिया सी लड़की ने उसके अहम को चोट पहुंचाई थी और वो अभी भी गुस्से में था। उसके दूसरे भी कई घर थे शहर में। वो ज़ोहरा के घर पर सिर्फ अपनी हवस बुझाने ही जाता था। ज़ोहरा पहेले उसकी कई रखैलों में से एक थी। उसने ज़ोहरा से शादी इसलिए की थी की उसने एक बेटे को जन्म दीया था। जो की उसका वारिस था उसने दूसरी कई औरतों को गर्भवती किया था लेकिन जैसे ही उसे पता चलता की लड़की होने वाली है वो अबॉरशन करवा देता और पैसे दे कर वो माँ बन ने वाली औरत का मूह बंद कर देता।

बाथरूम के बाहर तौलिया ले कर खड़ी थी ज़ोहरा। उसने कहा “कहाँथे इतने दिनो तक?”

उसे पता था की उसे संभाल कर बोलना पड़ेगा वरना बसित अगर गुस्सा हो गया तो जानवरों की तरह पिटेगा और फिर उसकी अच्छी तरह बैंड बजाएगा। सुबह सुबह जब बसित ने फोन किया तो वो घबरा गयी थी। क्यों की उसके घर पे उसका प्रेमी रात रुका था। और अगर बसित को पता चल जाता तो अभी तक दोनों की लाशे पुलिस को मिली होती। फोन आने के बाद उसने अपने प्रेमी को रवाना किया और घर की साफ सफाई की और सारे सबूत मिटा दिये जिस से लगे की रात को कोई और यहाँ रुका था। बसित से शादी उसने सिर्फ पैसो के लिए की थी। उसे पता था की उसका बेटा उसका वारिस बनेगा और अगर बसित अपने कामधंधे की वजह से मारा भी जाता है तो वो बाकी की ज़िंदगी ऐशोंआराम से गुज़र सकती है। बसित उसके पास महीने में एक दो बार ही आता था इस लिए ज़ोहरा ने भी अपनी जिस्मानी जरूरतों को पूरा करने के लिए एक लड़के को पटा लिया।

उसके सवाल पुछने से बसित गुस्सा हो गया और बाथरूम से बाहर आया और उसके बड़े बड़े स्तन देख कर उसे खून का बहाव अपने सर के बजाय दूसरे किसी अंग की तरफ जाता हुआ लगा। वही अंग जो की एक छोटी लड़की की लात खाने के बाद दर्द के मारे बेहाल था। उसका मूह खुला का खुला रहा गया था। उसे ऐसी हालत में देख कर ज़ोहरा ने एक कातिल स्माइल दी जिस से बसित अपने होंठो पर जीभ फिरने लगा। “इधर आओ और ज्यादा सवाल पुछना बैंड करो।“

यह जवाब कम और हुकुम ज्यादा था। वो बसित के पास में आई तो बसित ने कहा “नीचे जाओ” उसने यह हुक्म की भी तामीर की और धीरे धीरे बसित की आंखो में देखती दहती बैठ गयी। उसे रफ चुदाई बहुत पसंद थी और बसित यह जानता था। ज़ोहरा भी भूल गयी की वो इतने दिनो बाद घर आया है और वो बसित के लंबे मोटे काले लंड के बारे में सोचने लगी और उसकी चुत गीली होने लगी। वो अपने बॉय फ्रेंड से रेगुलर चुदवाती थी लेकिन फिर भी बसित की चुदाई की वो कायल थी। वो एक सेक्स मैनियाक थी अगर लंड ना मिले तो वो गाजर/मूली/ककड़ी या फिर किसी जानवर से भी करवा लेती थी। उसका मकसद सिर्फ अपनी हवस संतुष्ट करना था। चाहे वो कोई आदमी करे या कोई जानवर। उसने अपने हाथो से बसित का पाइजामे का नाड़ा खोला और उसकी चड्डी भी उतार दी। जैसे ही उसने कपड़े उतारे बसित का काला भुजंग जैसे जेल से रिहा हो गया हो वैसे उसके सामने डोलने लगा। ज़ोहरा की आंखो में चमक आगयी अपनी दूसरी प्यारी चीज़ देख कर (पहेली प्यारी चीज़ उसकी पैसा था) एक हाथ से उसने बसित के बोल्स सहलाना शुरू किया और अपनी जीभ के नोक से उसके लंड की नोक पर रगड़ने लगी।

“ओहह बढ़िया ऐसे ही करती रहो.... जीभ अंदर डालो...”

ज़ोहरा अपनी जीभ की नोक बसित के पी हॉल में डालती है। और उत्तेजना मे मारे बसित की आह निकाल जाती है “या खुदा ज़ोहरा जान येही जन्नत है।“ वो बाथरूम के दरवाजे को पकड़ कर खड़ा था और पीछे की और झुका हुआ था। ज़ोहरा का टैलंट कहो या स्पैशलिटी वो लंड चूसने में माहिर थी। “बताओ ना कहाँ थे इतने दिन” बोल कर ज़ोहरा ने हल्के से अपने दाँत उसके लंड की नोक पर गड़ा दिये। “आहहहहहहहह साली रंडी काट मत। वरना तेरी गांड मार दूंगा”

“हाहाहा कितने प्यारे लगते हो गुस्सा होते हो तब। अपनी बीवी के बोबे देखना पसंद करोगे?”

“ हाँ हाँ जल्दी करो“

ज़ोहरा अपनी कमीज़ और सलवार उतार देती है। उसने अंदर ब्रा नहीं पहेनि होती और उसके 40 की छाती देख कर बसित से रहा नहीं जाता और अपने हाथ उसकी छाती पर रख देता है और ज़ोर से उसके निपल मरोड़ देता है। ज़ोहरा चिल्ला उठी है “मादर छोड़ इतना ज़ोर से नहीं।“

“हा हा हा बहन की लोड़ी अब पता चला दर्द कैसे होता है” बोल कर वो उसके निपल्स को धीरे धीरे मसल ने लगता है।

ज़ोहरा को इस से सेंसेसन होने लगता है और वो फिर से अपना ध्यान बसित के लंड पर केन्द्रित करती है। इस बार वो पीहॉल पर काटने के बजाय प्रैशर देकर सुककिंग करने लाती है एक वैक्युम क्लीनर की तरह। उसके ऐसे करते ही बसित को अपने शरीर का सारा खून अपने लंड के तरफ जाता हुआ लग्ता है उसका दिमाग शून्य होने लगता है और उसकी साँसे तेज़ हो जाती है। उसे लगता है उसकी रूह लंड के रास्ते निकाल कर ज़ोहरा के मूह में चली जा रही है। वो ज़ोहरा के स्तन छोड़ कर फिर से दरवाजे को पकड़ लेता है। “कैसा लग रहा है” बसित की आवाज़ ही नहीं निकाल पाती और वो सिर्फ अपना सर हिला कर हाँ बोलता है। वो लंड को लीक करना शुरू करती है और लंबे लंबे स्ट्रोक से अपनी जीभ उसके काले लंड पर चाटने लगती है।

“आह बढ़िया... ऐसे ही करती रहो। शायद तुम्हें कोई गिफ्ट मिल जाये” गिफ्ट का सुन के वो ज़ोर ज़ोर ई से उसका लंड अपने मूह में लेना शुरू कर देती है। बसित का लंड उसके मूह के अंदर तक जा रहा था और ज़ोहरा की आँखें बाहर आ रही थी। लेकिन पैसो की हवस उसे यह सब करवा रही थी। “आहाहह” बोल कर बसित ज़ोर से झड़ जाता है। उसके वीर्य की मार पहेले ज़ोहरा को मूह पर पड़ती है और बाकी उसके नंगे स्तनो पर। वो बसित का लंड चाट चाट कर साफ करती है और अपने शरीर पर पड़ा माल भी उँगलियो में ले कर अपने चहेरे और बदन पर पोंछ लेती है। बसित खुश हो जाता है और बोलता है “आज शाम को तुम को डीयमंड का नेकलेस दूंगा।“ वो खुश हो जाती है।

“लेकिन अभी मुझे जानाहोगा”

“क्या?”

“मुझे काम है, मैं फालतू नहीं बैठा हूँ। तुम जो यह पैसा खर्च करती है और यह नेकलेस ऐसे ही नहीं आएगा।“

वो अपने कमरे में जा कर कपड़े बदलने लगता है। ज़ोहरा उसके पीछे पीछे जाती है और कहेती है “लेकिन मेरा क्या?”

“तुम्हें वेट करना होगा जब तक में वापस ना आऊँ “

“तुम इतने खुदगर्ज़ कैसे हो सकते हो??”

“मेरे पास यह सब बातों के लिए वक़्त नहीं है। ज्यादा चूल मच रही है तो खीरा लेलों अपनीचुत में। “

ज़ोहरा गुस्से से आगबबूला हो जाती है। लेकिन कुछ नहीं कह पाती बसित बाहर चला हाता है और ज़ोहरा वहीं पर खड़ी खड़ी कुछ सोचने लगती है।

*****

“ट्रिन्न ट्रिन्न ट्रिन्न”

“ट्रिन्न ट्रिन्न ट्रिन्न ट्रिन्न ट्रिन्न ट्रिन्न”

घंटी की आवाज़ से अचानक मन्मथ की नींद उड़ जाती है। वो उठ कर दरवाजा खोलता है तो अपनी माँ और आशका को देख कर हैरान रह जाता है।

“इतनी देर दरवाजा खोलने में”

“मोम में सो रहा था।“

“ओके।“

“लेकिन आप यहाँ कैसे?”

“आशका ने फोन किया था।तुम्हारे पापा रति के पास हॉस्पिटल में है।जैसे ही पता चला हम यहाँ पर आ गए।“

“आशका जाओ आराम कर लो। मैं भी सो जाती हूँ।और मन्मथ तूम आज रात को हॉस्पिटल में ही रुकोगे। शाम को पापा घर चले जाएँगे”

“ओके मोम”

 
“ट्रिन्न ट्रिन्न ट्रिन्न”

“ट्रिन्न ट्रिन्न ट्रिन्न ट्रिन्न ट्रिन्न ट्रिन्न”

घंटी की आवाज़ से अचानक मन्मथ की नींद उड़ जाती है। वो उठ कर दरवाजा खोलता है तो अपनी माँ और आशका को देख कर हैरान रह जाता है।

“इतनी देर दरवाजा खोलने में”

“मोम में सो रहा था।“

“ओके।“

“लेकिन आप यहाँ कैसे?”

“आशका ने फोन किया था।तुम्हारे पापा रति के पास हॉस्पिटल में है।जैसे ही पता चला हम यहाँ पर आ गए।“

“आशका जाओ आराम कर लो। मैं भी सो जाती हूँ।और मन्मथ तूम आज रात को हॉस्पिटल में ही रुकोगे। शाम को पापा घर चले जाएँगे”

“ओके मोम”

*****

इधर बसित घर से निकलने के बाद लाला को फोन करता है।

बसित : लाला जल्दी से फोर्टिस पहुँच जाओ। लड़की वहीं पर होनी चाहिए।

लाला:ठीक है बॉस। में 10 मिनट में वहाँ पहुंचता हूँ।

दोनों वहाँ पहुँचने के बाद मैन गेट के से थोड़ी दूर पार्क कर के बैठ जाते हैं। वे लोग वहाँ आसानी से नज़र रख सकते थे की कौन आ रहा है और कौन जा रहा है। किसी देखने वाले या सेक्युर्टी वाले को शक भी नहीं होना था। ऐसा लग रहा था की वो रिलेटिव है जिसका कोई हॉस्पिटल में एड्मिट है। लाला पेसेंजर सीट में बैठा था और उसका मोटा पेट ऑल्मोस्ट कार के डेशबोर्ड को छु रहा था। उसने एक छोटा सा पिंक जेकेट और छोटी सी पिंक टोपी पहनी थी।

लाला : बॉस आपको कैसे पता चला लड़की वहीं पर होगी?

बसित: जब हम पीछा कर रहे थे वो एरिया यहाँ से सिर्फ 1 किलोमीटर की ही दूरी पर है। वो यकीनन यहाँ पे इलाज करवा ने आई होगी। और मेंने पता भी किया कल रात एमर्जन्सि में कोई एड्मिट हुआ था या नहीं। तब पता चला एक लड़की एड्मिट हुई थी। बेहोशी की हालत मैं। उसे आईसीयू में रखा है।

लाला: बहुत खूब बॉस। लेकिन उस लड़की से क्या प्रोब्लेम है आप को?

बसित: लड़की से नहीं उसके बाप से प्रोब्लेम है। लेकिन वो साला मर गया। और मेरे पैसे डूब गए।

लाला:मतलब?

बसित: इसके बाप ने मुझ से अपना नया बिज़नस सेट करने के लिए 25 करोड़ लिए थे। लेकिन बिज़नस सेट हो उस से पहेले ही वो अल्लाह को प्यारा हो गया। ये डील सिर्फ मेरे और उसके बीच में हुई थी। तो किसी को कुछ नहीं मालूम। यह अभिमन्यु के पास रहेती है। मई उस से भी मिला लेकिन उसे भी कुछ नहीं पता। और वो साला इतनी बड़ी हस्ती है की मैं उसको कुछ भी नहीं कर सकता। उसके पॉलिटिकल कनैक्शन मुझ से भी ज्यादा है। तो मैं इस लड़की को अगवा कर के पैसे निकलवाना चाहता था। पर साली लड़की बहुत शाणी निकली और मुझे चकमा दे कर भाग गयी।

लाला: हम्म अब क्या करेंगे?

बसित: पहेले पता लगाएंगे कौन कौन उसको मिलने आता है। फिर सोचेंगे क्या करना है। बस एक बार लड़की मिल जाये फिर देखता हूँ बहनचोद अभिमन्यु क्या करता है।

बसित की आवाज़ और एक्स्प्रेशन इतने खतरनाक थे की लाला ने दूसरी तरफ नज़र कर ली। लाला भी बसित को पसंद नहीं करता था उसके गुस्से का कई बार शिकार हुआ था जिस की वजह से उसके शरीर पर कई घाव हो गए थे। वैसा ही एक घाव उसके दाये हाथ पर था जिसे देखते ही उसकी नफरत और बढ़ गयी। सिर्फ मौत का डर ही उसे बसित का साथ देने को मजबूर कर रहा था। उसका मूह सुख गया था और उसने अपनी जीभ अपने सूखे होंटो पर फिराई और कार की खिड़की से सामने देखने लगा।

हॉस्पिटल में लोगो का आना जाना बढ़ रहा था। कार, बाइक, साइकल, एम्ब्युलेन्स की आवाजाही हो रही थी। कुल मिला कर हॉस्पिटल के लिए यह एक नॉर्मल दिन था। कुछ ही देर में बसित अधीर होने लगा। लाला जानता था की यह एक खतरनाक निशानी है। उसकी फ्रस्ट्रेशन देखते ही बनती थी। उसके हात स्टेयरिंग को दबा रहे थे जैसे उसके तोड़ ही डालेगा। बसित के लिए किसी भी चीज़ का सोल्यूशंस था हिंसा। कुछ प्रोब्लेम हो तो सामने वाले को पीटो अगर ज्यादा प्रोब्लेम हो तो हाथ पाँव तोड़ डालो और उस से भी ज्यादा तो हत्या कर दो। लाला को लगा की कोई उसे घूर रहा है। उसने देखा तो बसित उसके सर को ही घूर रहा था। लाला सोचता है “अरे बहनचोद मर गयाआज फिर से पेलेगा।“

बसित: यह चूतिये जैसे गुलाबी कलर वाली टोपी क्यों पहेनि है? कितनी बार कहा है यह रंडियो वाला कलर मुझे पसंद नहीं।

लाला: गलती हो गयी बॉस। मैं भूल गया था।

लाला ने टोपी उतरी और खिड़की से बाहर फेंक दी। यह टोपी उसकी माँ ने बनाई थी और उसकी आखरी निशानी थी। लेकिन फिर भी जान है तो जहां है सोच कर उसने टोपी फेंक दी। उसकी आंखे भर आई थी पर वो रो भी नहीं सकता था। वरना बसित यही पर उसे धोना शुरू कर देता।

बसित: भोसडी के तू सुनता भी है मैं जो बोलता हूँ वो?

बसित की गर्दन की नसे फूल गयी थी और आंखे गुस्से से लाक हो रही थी और ऐसा लग रहा था की अभी बाहर आ जाएंगी। उसने मुट्ठी से स्टेयरिंग ज़ोर से पकड़ लिया था। ऐसा लग रहा था की वो अभी के अभी फट जाएगा गुस्से से।

लाला: माफ करना बॉस। मुझे वो टोपी बहुत पसंद है। वो मेरी माँ की आखरी निशानी थी।

बसित: अगली बार ऐसा हुआ तो गाँड़ मार दूंगा।

लाला एक छोटे से पिल्ले की तरह मिमिया रहा था बसित के सामने उसका दिल जोरों से धडक रहा था। यह पहेली बार था की बसित के किसी चीज़ के मना करने पर उसने उसकी खिलाफत में कुछ कहा था। वैसे तो लाला ने भी कई लोगो को पीटा था कई लोगो के हाथ पैर तोड़े थे एक दो मर्डर भी किए दे लेकिन बसित के आगे उसका कोई चान्स नहीं था। बसित की ताकत इतनी थी की वो कुछ करने की सोच भी नहीं सकता था। तभी उसे अपने पेट में दर्द सा महेसूस होता है। बसित ने उसके पेट में एक ज़ोर का घूंसा मारा था। वो दर्द के मारे दोहरा हो गया था। वो कराह ही रहा था और दूसरे वार की राह देख रहा था की तभी उसे एक गाड़ी के हॉर्न की आवाज़ आई और उसने देखा तो एक काली मर्सिडीज में से कोई रोबदार आदमी जा रहा था। उसने देखा बसित उस आदमी को घूर रहा था। बसित के होंटो पर शैतानी मुस्कान नाच उठती है। वो बोलता है “जब तुम्हें वो टोपी इतनी पसंद है तो डाल लो अपनी गांड में” लाला ने अपनी किस्मत को और उस आदमी को धन्यवाद दिया और झट से नीचे उतर कर टोपी लेली। अंदर आ कर उसने कहा “वो कौन था बॉस”

बसित: वो अभिमन्यु सिंह था।

फिर धीरे से एक खौफनाक आवाज़ में बोलता है “मैं आ रहा हूँ अभिमन्युसिंघ तुम्हारे लिए। मैं तुम्हें ऐसी मौत दूंगा की दुनिया याद रखेगी।“

बसित कार स्टार्ट करता है और यू-टर्न ले कर उस मर्सिडीज के पीछे लेता है। वो थोड़ा ही दूर गया होगा की उसे पीछे से हॉर्न की आवाज़ आती है वो रियर व्यू मिरर में देखता है तो एक जीप जिसमे कमांडो टाइप के हथियारबंद लोग थे वो साइड मांग रही थी। वो साइड दे देता है और देखता है तो वो अभिमन्यु की गाड़ी के पीछे टेलगेटिंग करी हुई जाने लगती है। बसित के माथे पर शिकन आ जाती ही वो देखता है तो वैसी ही एक जीप आगे पाइलोटिंग कर रही थी अभिमन्यु की गाड़ी को। कुल मिलाकर 10 कमांडो अभिमन्यु के आगे और पीछे थे। बसित को अपना काम मुश्किल होता दिख रहा था। वो सोच ही रहा था की वो इस काम को कैसे अंजाम दे की वो गाडियाँ एक गेट में दाखिल हो जाती है वो बोर्ड पढ़ के अपने सर पीट लेता है। अभिमन्युसिंघ पुलिस कमिश्नर की ऑफिस में गया था। यह तो बसित को भी क्लियर हो गया था की अभिमन्यु पुलिस से भी मदद लेगा। और कुछ भी करना होगा तो प्लानिंग के साथ और वो बसित के बस की बात नहीं थी। वो धीरे धीरे गाड़ी आगे ले लेता है और फिर से हॉस्पिटल के रास्ते पर चलने लगता है। और पहेले जहां खड़ा था वही पर जा कर मायूस हो कर खड़ा हो जाता है। उसे हॉस्पिटल में घुस कर लड़की को मारना या अगवा करना अब तो नामुमकिन लग रहा था। वो अपना सर पकड़ कर बैठ जाता है।

 
हॉस्पिटल में अभी तक रति को होश नहीं आया था लेकिन उसकी हालत बेहतर थी इसलिए उसे आईसीयू से निकाल कर स्पेशल रूम में शिफ्ट कर दिया गया था। आशका भी उसके साथ थी। शाम होने पर मन्मथ हॉस्पिटल में जाता है और आशका अपने घर चली जाती है। वो काफी थकी हुई लग रही थी। सब के मना करने के बावजूद मनीषा भी हॉस्पिटल आई थी। यह बोल कर की लड़की हॉस्पिटल में है तो कुछ काम ऐसे होंगे की मन्मथ नहीं कर पाएगा तो किसी महिला का वह होना आवश्यक है। यह सुन कर मन्मथ की माँ भी उन के साथ आ गयी। अब रूम में स्पेस सिर्फ 2 लोगो के लिए ही थी तो मन्मथ बाहर लॉबी में जा कर एक खाली बेंच पर बैठ जाता है। पिछले कुछ दिनो की भाग दौड़ से वो थक गया था और जल्द की उसे नींद आने लगी तो वो bench पर ही लेट गया और सो गया। तभी उसकी नींद किसी के बुलाने पर खुल जाती है। वो देखता है तो मनीषा उसे उठा रही थी।

“डॉक्टर बुला रहे है। शायद कुछ मेडिसिन वगैरा मंगवानी होगी।“

वे दोनों कमरे में जाते हैं वहाँ पर एक डॉक्टर और एक नर्स खड़े होते हैं और रति को एकसमीन कर रहे होते हैं। मन्मथ घबरा जाता है

“डॉक्टर कोई सिरियस बात तो नहीं है ना?”

डॉक्टर ने उसे देखा फिर हंस कर कहा “नहीं। सिर्फ ये दवाइया ले आओ। यह दवाई हॉस्पिटल के स्टोर में नहीं होंगी। तुम्हें बाहर से ले कर आणि होगी। ला कर मुझे दिखा देना मैं फिर बताऊंगा उसे कैसे देना है।“

“ठीक है। लेकिन डॉक्टर इसे कब तक होश आएगा?”

“जल्द ही। सिचुएशन इम्प्रूव हो रही है। पिछले दो दिनो मैं काफी इम्प्रोवेमेंट दिखाया है।लेट्स होप फॉर द बेस्ट।और हाँ मेरा ऑफिस इसी फ्लोर पर है। आस्क फॉर डॉ कार्तिक’स ऑफिस।“

तभी उसकी माँ बोल उठी है “डॉ यह manmathभी काफी दुबला हो गया है। अगर आप एक बार इसे भी एकसमीन कर लेते तो अच्छा होता।“

डॉ ज़ोर से हंस देते हैं। “माँ का दिल। ठीक है में इसे भी एकसमीन कर लूँगा और बॉडी ग्रोथ की दवाई भी लिख दूंगा अगर जरूरत पड़ी तो। पर पहेले यह दवाई ज़रूरी है।“

मन्मथ अपनी माँ को कोसते कोसते जल्द ही वहाँ से निकल जाता है वहाँ से और दो घंटे के बाद दवाई ले कर आता है और डॉ कार्तिक का ऑफिस ढूँढने लगता है। एक ऑफिस पर नेम प्लेट लगी थी डॉ कार्तिक के नाम की। लेकिन वो बंद था। वो परेशान हो जाता है और सोचता है क्या करे। वो सिस्टर’स रूम में जा कर पूछता है “डॉ कार्तिक ने यह दवाई मँगवाई थी। लेकिन वो नहीं है ऑफिस में।“

नर्स : “वो तो चले गए। उनकी शिफ्ट खतम हो गयी। वोनाइट ड्यूटी वाले डॉक्टर को बता कर गए होंगे। रूम नो 803 में जाओ वो डॉक्टर’स रूम है।“

मन्मथ 803 में जाता है वहाँ पे एक और नर्स बैठी होती है। मन्मथ डॉ कार्तिक के बारे में कहता है।

नर्स: हाँ। डॉ कार्तिक बता कर गए है।

वो दवाई चेक करती है और बोलती है ठीक है इसे दिन में 3 टाइम देना है इसे पेशंट के पास ही रखो। बाद में चेकअप रूम में आ जाना डॉ ने तुम्हारा चेकअप करने को बोला है। मन्मथ दवाई दे कर चेकअप रूम में आता है। नर्स उसे कपड़े उतारने को कहती है और एक हॉस्पिटल का गाऊन दे देती है और चली जाती है।

मन्मथ थोड़ा घबरा रहा था एक तो वो डॉक्टर के चेकअप रूम में था और गाऊन पहन कर उसे अजीब सी फीलिंग आ रही थी। नर्स उसे बोल कर तो गयी थी की डॉक्टर जल्द ही आ जाएंगे उसे इंतज़ार नहीं करना पड़ेगा। रात का समय था और फ्लोर पर कोई नहीं था। सन्नाटा छाया हुआ था और मन्मथ डॉक्टर का इंतज़ार करते करते बोर हो रहा था। ठंड बढ़ गयी थी तो उसके रोंगटे खड़े हो गए थे। उसने सोचा “यह डॉक्टर के ऑफिस इतने ठंडे क्यों होते हैं? एसी भी चालू नहीं है फिर भी इतनी ठंड लग रही है।“

मन्मथ को यह समझ नहीं आ रहा था की सिर्फ चेकअप के लिए सारे कपड़े क्यों उतरवा दिये? और माँ को भी क्या जरूरत थी यह सब करने की। वो तो सुपेरिओर शेप में था एकदम हट्टा कट्टा। मन्मथ चेकअप रूम में आस पास नज़र डालता है। कई टाइप के चार्ट्स लटक रहे थे और कई मेडिकल बुक्स और मेगेजीन्स पड़े थे डॉक्टर के टेबल पर। वो उठ कर एक मेगेजीन उठा ही रहा था की अचानक दरवाजा खुलता है और नर्स अंदर आती है “ तुम ठीक तो हो ना?”

“हाँ ठीक हूँ।सिर्फ थोड़ी ठंड लग रही है।“शर्मीली मुस्कुराहट के साथ मन्मथ ने नर्स को कहा।

मन्मथ काफी हेंडसम था और ऊपर से उसकी यह मुस्कुराहट ने नर्स की धड़कन तेज़ कर दी। और इधर मन्मथ भी अन ईज़ी फील कर रहा था। एक तो हॉस्पिटल गाउन और उसके नीचे कुछ नहीं पहना था। उस पर एक क्यूट नर्स बार बार आ कर उस से बात कर रही थी। उसकी धड़कने बढ़ गयी थी उस नर्स को देख कर। नर्स के सिल्की डार्क ब्राउन बाल, छोटी सी नाक, भरे पूरे होंठ, लाइट ब्राउन आंखे वो देखता ही रहा। नर्स भी उसे ऐसे अपने और देखता हुआ देख कर शर्मा गयी। उसने लेब कोट पहेना था जिस के बटन खुले थे और उसके अंदर उसने डीप नेक टॉप पहेना था जिस में से उसकी गलियों का दर्शन हो रहा था मन्मथ को। उसने नर्स से उसका नाम पूछा नर्स ने कहा “जेनी” जेनी 24 साल की एक मदमस्त लड़की थी। मन्मथ ने पहेली बार किसी एडल्ट लड़की को इतने करीब से देखा था। नर्स ने ब्लड प्रैशर नापने की मशीन निकाली और मन्मथ के आर्म्स पर लगाई और पम्प प्रैस करने लगी। मन्मथ का दिल और ते से धड़कने लगा जेनी उसके काफी करीब थी और उसकी खुशबू जैसे मन्मथ को नशे में डूबा रही थी।

जेनी ने कहा “तुम्हारा ब्लड प्रैशर काफी ज्यादा है एक 18 साल के लड़के ले लिए। क्या सोच रहे थे? गर्ल फ्रेंड के बारे में?” बोल कर वो खिलखिला कर हंस देती है। मन्मथ कुछ नहीं बोल पाता सिर्फ एक ज़ोर की सांस लेता है। वो गाउन के अंदर बिलकुल नंगा था और यह खूबसूरत नर्स उसके साथ फ्लर्ट कर रही थी।

“मैं हीटर चालू कर देती हूँ। कुछ ही देर में डॉक्टर आएंगे तब तक तुम आराम करो।“

जैसे ही हीटर ऑन होता है मन्मथ की ठंडी गायब होने लगती है और उसे इस गर्माहट में सुकून मिलता है। वो लाऊंज चैर पर लेट जाता है और डॉक्टर का वेट करने लगता है।

उसे दरवाजे के बाहर कुछ आवाज़े सुनाई देती है दरवाजा खुलता है और जेनी अंदर आती है। बोलती है “डॉक्टर आ गए हैं। यह है डॉक्टर इशानी“बोल कर वो दरवाजे से हट कर खड़ी हो जाती है। मन्मथ का दिल जैसे धड़कना बंद हो गया। उसकी साँसे रुक गयी और देखता ही रहा। उसकी नयी कृश क्यूट नर्स के बगल में एक 30 साल की खूबसूरत औरत खड़ी थी। उसे लगा इस से खूबसूरत दुनिया में कोई हो ही नहीं सकता। उसे अपनी मैथ्स टीचर की याद आ जाती है जिस पर उसे बचपन में कृश था। लेकिन यह तो उन से कई गुना ज्यादा खूबसूरत थी। डॉ इशानी के बाल जेननी की ही तरह सिल्की और ब्राउन थे जिनहे उसने पोनी टेल में बंधे हुए थे। उसकी आंखे गोल्डेन ब्राउन कलर की थी, और उसकी स्किन जैसे सोने जैसी थी गोल्डेन। वो इंडियन नहीं बल्कि किसी लेटीनो ब्युटि जैसी लग रही थी एक्सोटिक। इशानी ने भी लेब कोट पहेना था जिस पर उस नेम टेग था। उसके अंदर एक व्हाइट टॉप और एक छोटी सी स्कर्ट पहेनि थी जिस में से उसके पेरफक्तली शेप्ड टाँगे और उसमे हाइ हिल्स। वो टाँगे देख कर सोचता है डॉ काफी वर्क आउट करती होगी तभी इतनी शेप में है।

उसके रोंगटे फिर से खड़े होने लगे थे और उसका चेहरा गरमाने लगा था और लाल हो गया था। इन दो खूबसूरत हसीनाओ के सामने वो इस बेवकूफाना गाउन में अच्छा नहीं फील कर रहा था। उसे पता नहीं चला क्या कहे उसने कहा

“हैलो डॉ।“

“हैलो मन्मथ। “ इशानी ने अपनी सुरीली आवाज़ में कहा।

मनमथ को अन ईज़ी फील करता देख कर डॉ ने कहा “यह तुम्हारा फ़र्स्ट टाइमचेकअप है न फ़ीमेल डॉ से?”

“ज ज जी डॉ।“

“इसमे डरने वाली कोई बात नहीं है। डॉ तुम्हारा अच्छे से चेक अप करेंगी और में भी यहीं रहूँगी। हम पूरी कोशिश करेंगे की तुम्हें कोई तकलीफ नहीं हो” – जेनी

“ओके” मन्मथ बोल कर हल्के से मुस्कुरा देता है।

“वेरी गुड। क्या खूबसूरत स्माइल है। आवाज़ भी अच्छी है। “ – डॉ इशानी

मन्मथ रीएक्ट नहीं कर पाता और डॉ को अपनी तरफ घूरता पाता है। और उसे लगता है डॉ ने उसको एक छोटी सी स्माइल दी वो और भी कन्फ्युज हो जाता है। जेनी की भी येही हालत थी।

इशानी : “तुम्हारा फुल्ल बॉडी चेक अप करने को कहा है डॉ कार्तिक ने।तुम्हारे पापा के दोस्त है और हमारे सीनियर तो हम पूरी कोशिश करेंगे के हमारा काम में कोई कमी ना हो।“

मन्मथ: “ओके डॉ”

इशानी : “तुम्हें पता है प्रोस्टेट ग्लैंड क्या होता है?”

मन्मथ ने सुना तो था लेकिन फिर भी बोलता है “शायद नहीं”
 
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