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अनाड़ी खिलाड़ी
Written by HotChilly
कहानी के मुख्य पात्र
- मन्मथसिंह चौहान (कहानी का मुख्य पात्र)
- आशका चौहान (मन्मथ की बहन)
- अभिमन्युसिंह चौहान (मन्मथ के पिताजी)
- संयुक्तादेवी चौहान (मन्मथ की माताजी)
- रति (मन्मथ की पड़ोसन)
- मनीषा (मन्मथ की क्लासमेट)
इस के अलावा बहुत से पात्र है जो कहानी के दौरान आएंगे तब उनका परिचय होगा
चैप्टर – 1 : आरंभ
अभिमन्युसिंह चौहान एक 45 साल के लंबे चौड़े और हट्टे कट्टे इंसान हैं| उनका एक छोटा सा कारोबार है जिसके लिए वो काफी समय बाहर ही रहेते हैं। गाँव में उनकी काफी सारी ज़मीन भी है जिसकी देखभाल उनके पिताजी बलराम सिंह करते हैं। राजपूत हैं तो फॅमिली वैल्यूस, सही गलत की पहेचान और किसी के साथ कुछ गलत न हो उसका खयाल उन्हे हमेशा रहेता है।
उनकी धर्म पत्नी संयुक्तादेवी एक आदर्श भारतीय नारी है। जिस के लिए पति भगवान और अपना परिवार ही सब कुछ है। जब वो गर्भवती हुई तो अभिमन्युसिंह ने उन्हे अपने गाँव भिजवा दिया ताकि उनके होने वाले बच्चे और पत्नी का खयाल उनके माता पिता रख सके। क्यों के वो खुद तो ज्यादा समय बाहर बिताते थे काम के सिलसिले में। अब तो वो और ज्यादा काम करने लगे थे उनका सपना था की उनकी औलाद चाहे लड़का हो या लड़की उसे कोई तकलीफ न हो।
आखिरकार वो घड़ी आ ही गयी जिसका सबको बेसबरी से इंतज़ार था। और भगवान की दया से उनको जुड़वा बच्चे हुए। एक लड़का और एक लड़की। उन लोगों की खुशी दुगनी हो गयी लड़के का नाम उन्हों ने मन्मथ और लड़की का नाम आशका रखा।
दिन बीतने लगे और धीरे धीरे दोनों बच्चे बड़े होने लगे। मन्मथ और आशका दोनों बड़े आज्ञाकारी बच्चे थे। वो अपने माता पिता और दादाजी से बहुत प्रेम करते थे। मन्मथ पढ़ाई में बहुत अच्छा था। बस समझ लो की बिग बेंग थेओरी का शेल्डन कूपर था। आशका भी अच्छी थी पढ़ाई में पर वो जीनियस नहीं थी मन्मथ की तरह। हाँ वो क्रिएटिव काफी थी डिज़ाइन, ड्रौइंग वगैरा उसके होब्बीस थी।
मन्मथ हर जीनियस की तरह बहुत शर्मिला था। वो अपने घर पे भी खुल के बात नहीं कर पाता था। अपना कमरा बांध कर के वो हमेशा पढ़ाई करता रहता था। उसकी दुनिया सिर्फ और सिर्फ किताबें ही थी। उसकी उम्र के बच्चे खेल कूद में मस्त रहेते तब वो स्कूल कीकिताबों के अलावा रिफ्रेन्स बुक्स पढ़ता रहेता। उसका असर बोर्ड्स में दिखा। मन्मथ ने बोर्ड में टॉप किया और आशका के 70% आए। सब लोग खुश थे। मन्मथ के पापा ने अच्छा रिज़ल्ट आने की खुशी में एक पार्टी अरैंज की। वो अब शहर के एक बहुत बड़े बिज़नस मेन बन चुके थे। हर तरफ से पैसा बरस रहा था। दोनों बच्चे उनके लिए लकी साबित हुए इसी लिए वो दोनों से बेहिसाब प्यार करते थे।
पार्टी में उन्होने शहर के प्रसिद्ध लोगो को भी आमंत्रित किया था। उनके लिए यह पार्टी अपने होनहार बेटे को दुनिया के सामने लाने का एक मौका थी। आशका भी खुश थी अपने भाई की उपलब्धि पर। उसे वैसे तो मार्क्स और पर्सेंटेज ज्यादा हो या कम कोई फर्क नहीं पड़ता था। वो तो अपनी मस्ती में जी रही थी। पार्टी की सारी तैयारी आशका और उसके पिताजी दोनों मिल कर कर रहे थे। खाने पीने का सारा इंतज़ाम पिताजी ने अपने सर लिया था। और घर की साज सजावट आशका करवा रही थी।
समय : सुबह 6:00 बजे
ट्रिन!!ट्रिन!!ट्रिन!!ट्रिन!! कर के अलार्म बज सउठता ही और आशका चमक के उठ जाती है। वो टाइम देखती है और अलार्म बंद कर के फिर से सो जाती है।
धड़.... धड़... धड़.… उसके रूम का दरवाजा खतखटाने की आवाज से वो फिर चौंक के उठ जाती है।
मोम: आशकु, ओ आशकु। अरे उठजा महारानी। कब तक सोएगी। 8 बज गए है। तुम्हें तो आज पापा के साथ पार्टी के खाने का मेनू सिलैक्ट करने जाना था ना।
आशका (मन में सोचते हुए) : ओह गोड देर हो गयी। आज जल्दी जाना था और अब मोम मेरी हालत खराब कर देगी।
आशका : मोम उठ रही हूँ। मैंने अलार्म लगाया था पर फिर सो गयी।
और बनावटी गुस्से से बोलती है "और आपको कितनी बार माना किया है मुझे आशकु मत बुलाओ। पापा ने इतना प्यारा नाम रखा है आप उसे बिगाड़ देते हो। "
मोम (हस्ते हुए) : चल अब ज्यादा नाटक मत कर। उठ जा। और पापा ने नहीं यह नाम मैंने सुझाया था तेरे पापा को। उन्हे तो पुजा नाम पसंद था। और जा के देख तेरा भैया उठा के नहीं।
आशका : वो मेरा भैया नहीं है। हम दोनों में सिर्फ 5 मिनट का फर्क है।
मोम : अरे हाँ मेरी माँ, अब दरवाजा खोल और तैयार होजा वरना तेरे पापा गुस्सा करेंगे।
आशका: ओके मोम।
उसने एक पिंक कलर की साटिन की नाइटी पहनी होती है। जिसमे वो किसी अप्सरा से कम नहीं लग रही थी। वो उठ के बैठ जाती है और अपने बाल बांधने लगती है। वो एक अंगड़ाई लेती है और अपने आस पास देखती है। उसका कमरा किसी राजकुमारी की तरह सजा हुआ था। वो एक डबल बेड पर होती है। उसके आस पास कई सारे बड़े बड़े टेडी और उसकी तरह के खिलौने होते है। जो की उसके प्यारे पापा ने अपनी ट्रिप्स पर से वापस आते हुए दिये होते हैं।
उठ कर वो बाथरूम में जाती है दरवाजा लोक करती है बाथरूम में एक बड़ा सा मिरर होता है जिसमे वो अपने आप को देखती है और सेक्सी स्माइल देती है और बोलती है "गुड मॉर्निंग गोरजीयस"। अगर मिरर इंसान होता तो वहीं पर अपना दिल खो देता उसकी यह अदा पर।
अपनी नाइटी उतार कर वो अपने आप को मिरर में देखती है। अपने छोटे छोटे चुचे जो की अब नींबू से अमरूद बन रहे थे उन्हे अपने दोनों हाथो से तौलती है और सोचती है जाने किस की किस्मत खुलने वाली है जिसे मेरे जैसी हसीन बीवी मिलेगी और फिर शर्मा जाती है। शर्म से उसके गाल गुलाबी हो जाते हैं जो उसकी खूबसूरती में चार चाँद लगा देते हैं। अपने दोनों हाथ ऊपर कर के वो अपने बाल सँवरती है और ब्रश करना स्टार्ट करती है। ब्रश करते करते उसे याद आता है उसने भाई से तो उसकी चॉइस पुछी ही नहीं। वो फटा फट सुबह का रूटीन खत्म कर के अपने भाई के कमरे में जाती है और दरवाजे पर नोक करती है।
*knock* *knock*
आशका: मिस्टर आइन्स्टाइन,
*knock* *knock*
आशका: मिस्टर आइन्स्टाइन,
दो तीन बार नोक करने पर भी कोई जवाब नहीं आता तो वो थोड़ा सा धक्का देती है और दरवाजा खुल जाता है।
वहाँ पर उसका प्यारा भाई, अपने बेड पर सो रहा होता है और एक मोटी किताब उसके सीने पे पड़ी होती है। मन्मथ पढ़ते पढ़ते ही सो गया था। उसे देख कर वो हस पड़ती है,
आशका: अरे उठो कुंभकरण जी दोपहर हो गयी है।
मन्मथ दोपहर सुन के चौंक के उठ जाता है। और सीने पे पड़ी किताब उसके गोद्द में गिर जाती है।
आशका खिलखिला के हंस देती है उसे ऐसे देख के। और बोलती है
आशका: बड़ा आया पढ़ंतरा। कितना पढ़ोगे मिस्टर आइन्स्टाइन।
मन्मथ: अरे क्या है इतनी सुबह सुबह। अभी तो सोया हूँ जाओ सोने दो।
आशका: मैं आज पापा के साथ पार्टी का मेनू डिसाइड करने जा रही हूँ। अपनी फेवरिट चीज़ बोलो जो की मेनू में रख सके
मन्मथ: जो तुम लोगो को अच्छा लगे। मेरी कोई स्पेशल चॉइस नहीं है। (मुसकुराते हुए) पार्टी सिर्फ मेरे लिए नहीं है। तुम भी तो अच्छे नंबरो से पास हुई हो। सो, जो तुम्हारी पसंद वही मेरी पसंद।
Written by HotChilly
कहानी के मुख्य पात्र
- मन्मथसिंह चौहान (कहानी का मुख्य पात्र)
- आशका चौहान (मन्मथ की बहन)
- अभिमन्युसिंह चौहान (मन्मथ के पिताजी)
- संयुक्तादेवी चौहान (मन्मथ की माताजी)
- रति (मन्मथ की पड़ोसन)
- मनीषा (मन्मथ की क्लासमेट)
इस के अलावा बहुत से पात्र है जो कहानी के दौरान आएंगे तब उनका परिचय होगा
चैप्टर – 1 : आरंभ
अभिमन्युसिंह चौहान एक 45 साल के लंबे चौड़े और हट्टे कट्टे इंसान हैं| उनका एक छोटा सा कारोबार है जिसके लिए वो काफी समय बाहर ही रहेते हैं। गाँव में उनकी काफी सारी ज़मीन भी है जिसकी देखभाल उनके पिताजी बलराम सिंह करते हैं। राजपूत हैं तो फॅमिली वैल्यूस, सही गलत की पहेचान और किसी के साथ कुछ गलत न हो उसका खयाल उन्हे हमेशा रहेता है।
उनकी धर्म पत्नी संयुक्तादेवी एक आदर्श भारतीय नारी है। जिस के लिए पति भगवान और अपना परिवार ही सब कुछ है। जब वो गर्भवती हुई तो अभिमन्युसिंह ने उन्हे अपने गाँव भिजवा दिया ताकि उनके होने वाले बच्चे और पत्नी का खयाल उनके माता पिता रख सके। क्यों के वो खुद तो ज्यादा समय बाहर बिताते थे काम के सिलसिले में। अब तो वो और ज्यादा काम करने लगे थे उनका सपना था की उनकी औलाद चाहे लड़का हो या लड़की उसे कोई तकलीफ न हो।
आखिरकार वो घड़ी आ ही गयी जिसका सबको बेसबरी से इंतज़ार था। और भगवान की दया से उनको जुड़वा बच्चे हुए। एक लड़का और एक लड़की। उन लोगों की खुशी दुगनी हो गयी लड़के का नाम उन्हों ने मन्मथ और लड़की का नाम आशका रखा।
दिन बीतने लगे और धीरे धीरे दोनों बच्चे बड़े होने लगे। मन्मथ और आशका दोनों बड़े आज्ञाकारी बच्चे थे। वो अपने माता पिता और दादाजी से बहुत प्रेम करते थे। मन्मथ पढ़ाई में बहुत अच्छा था। बस समझ लो की बिग बेंग थेओरी का शेल्डन कूपर था। आशका भी अच्छी थी पढ़ाई में पर वो जीनियस नहीं थी मन्मथ की तरह। हाँ वो क्रिएटिव काफी थी डिज़ाइन, ड्रौइंग वगैरा उसके होब्बीस थी।
मन्मथ हर जीनियस की तरह बहुत शर्मिला था। वो अपने घर पे भी खुल के बात नहीं कर पाता था। अपना कमरा बांध कर के वो हमेशा पढ़ाई करता रहता था। उसकी दुनिया सिर्फ और सिर्फ किताबें ही थी। उसकी उम्र के बच्चे खेल कूद में मस्त रहेते तब वो स्कूल कीकिताबों के अलावा रिफ्रेन्स बुक्स पढ़ता रहेता। उसका असर बोर्ड्स में दिखा। मन्मथ ने बोर्ड में टॉप किया और आशका के 70% आए। सब लोग खुश थे। मन्मथ के पापा ने अच्छा रिज़ल्ट आने की खुशी में एक पार्टी अरैंज की। वो अब शहर के एक बहुत बड़े बिज़नस मेन बन चुके थे। हर तरफ से पैसा बरस रहा था। दोनों बच्चे उनके लिए लकी साबित हुए इसी लिए वो दोनों से बेहिसाब प्यार करते थे।
पार्टी में उन्होने शहर के प्रसिद्ध लोगो को भी आमंत्रित किया था। उनके लिए यह पार्टी अपने होनहार बेटे को दुनिया के सामने लाने का एक मौका थी। आशका भी खुश थी अपने भाई की उपलब्धि पर। उसे वैसे तो मार्क्स और पर्सेंटेज ज्यादा हो या कम कोई फर्क नहीं पड़ता था। वो तो अपनी मस्ती में जी रही थी। पार्टी की सारी तैयारी आशका और उसके पिताजी दोनों मिल कर कर रहे थे। खाने पीने का सारा इंतज़ाम पिताजी ने अपने सर लिया था। और घर की साज सजावट आशका करवा रही थी।
समय : सुबह 6:00 बजे
ट्रिन!!ट्रिन!!ट्रिन!!ट्रिन!! कर के अलार्म बज सउठता ही और आशका चमक के उठ जाती है। वो टाइम देखती है और अलार्म बंद कर के फिर से सो जाती है।
धड़.... धड़... धड़.… उसके रूम का दरवाजा खतखटाने की आवाज से वो फिर चौंक के उठ जाती है।
मोम: आशकु, ओ आशकु। अरे उठजा महारानी। कब तक सोएगी। 8 बज गए है। तुम्हें तो आज पापा के साथ पार्टी के खाने का मेनू सिलैक्ट करने जाना था ना।
आशका (मन में सोचते हुए) : ओह गोड देर हो गयी। आज जल्दी जाना था और अब मोम मेरी हालत खराब कर देगी।
आशका : मोम उठ रही हूँ। मैंने अलार्म लगाया था पर फिर सो गयी।
और बनावटी गुस्से से बोलती है "और आपको कितनी बार माना किया है मुझे आशकु मत बुलाओ। पापा ने इतना प्यारा नाम रखा है आप उसे बिगाड़ देते हो। "
मोम (हस्ते हुए) : चल अब ज्यादा नाटक मत कर। उठ जा। और पापा ने नहीं यह नाम मैंने सुझाया था तेरे पापा को। उन्हे तो पुजा नाम पसंद था। और जा के देख तेरा भैया उठा के नहीं।
आशका : वो मेरा भैया नहीं है। हम दोनों में सिर्फ 5 मिनट का फर्क है।
मोम : अरे हाँ मेरी माँ, अब दरवाजा खोल और तैयार होजा वरना तेरे पापा गुस्सा करेंगे।
आशका: ओके मोम।
उसने एक पिंक कलर की साटिन की नाइटी पहनी होती है। जिसमे वो किसी अप्सरा से कम नहीं लग रही थी। वो उठ के बैठ जाती है और अपने बाल बांधने लगती है। वो एक अंगड़ाई लेती है और अपने आस पास देखती है। उसका कमरा किसी राजकुमारी की तरह सजा हुआ था। वो एक डबल बेड पर होती है। उसके आस पास कई सारे बड़े बड़े टेडी और उसकी तरह के खिलौने होते है। जो की उसके प्यारे पापा ने अपनी ट्रिप्स पर से वापस आते हुए दिये होते हैं।
उठ कर वो बाथरूम में जाती है दरवाजा लोक करती है बाथरूम में एक बड़ा सा मिरर होता है जिसमे वो अपने आप को देखती है और सेक्सी स्माइल देती है और बोलती है "गुड मॉर्निंग गोरजीयस"। अगर मिरर इंसान होता तो वहीं पर अपना दिल खो देता उसकी यह अदा पर।
अपनी नाइटी उतार कर वो अपने आप को मिरर में देखती है। अपने छोटे छोटे चुचे जो की अब नींबू से अमरूद बन रहे थे उन्हे अपने दोनों हाथो से तौलती है और सोचती है जाने किस की किस्मत खुलने वाली है जिसे मेरे जैसी हसीन बीवी मिलेगी और फिर शर्मा जाती है। शर्म से उसके गाल गुलाबी हो जाते हैं जो उसकी खूबसूरती में चार चाँद लगा देते हैं। अपने दोनों हाथ ऊपर कर के वो अपने बाल सँवरती है और ब्रश करना स्टार्ट करती है। ब्रश करते करते उसे याद आता है उसने भाई से तो उसकी चॉइस पुछी ही नहीं। वो फटा फट सुबह का रूटीन खत्म कर के अपने भाई के कमरे में जाती है और दरवाजे पर नोक करती है।
*knock* *knock*
आशका: मिस्टर आइन्स्टाइन,
*knock* *knock*
आशका: मिस्टर आइन्स्टाइन,
दो तीन बार नोक करने पर भी कोई जवाब नहीं आता तो वो थोड़ा सा धक्का देती है और दरवाजा खुल जाता है।
वहाँ पर उसका प्यारा भाई, अपने बेड पर सो रहा होता है और एक मोटी किताब उसके सीने पे पड़ी होती है। मन्मथ पढ़ते पढ़ते ही सो गया था। उसे देख कर वो हस पड़ती है,
आशका: अरे उठो कुंभकरण जी दोपहर हो गयी है।
मन्मथ दोपहर सुन के चौंक के उठ जाता है। और सीने पे पड़ी किताब उसके गोद्द में गिर जाती है।
आशका खिलखिला के हंस देती है उसे ऐसे देख के। और बोलती है
आशका: बड़ा आया पढ़ंतरा। कितना पढ़ोगे मिस्टर आइन्स्टाइन।
मन्मथ: अरे क्या है इतनी सुबह सुबह। अभी तो सोया हूँ जाओ सोने दो।
आशका: मैं आज पापा के साथ पार्टी का मेनू डिसाइड करने जा रही हूँ। अपनी फेवरिट चीज़ बोलो जो की मेनू में रख सके
मन्मथ: जो तुम लोगो को अच्छा लगे। मेरी कोई स्पेशल चॉइस नहीं है। (मुसकुराते हुए) पार्टी सिर्फ मेरे लिए नहीं है। तुम भी तो अच्छे नंबरो से पास हुई हो। सो, जो तुम्हारी पसंद वही मेरी पसंद।