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इंतकाम की ज्वाला

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Guest
मेरा नाम राकेश है, मेरी पढ़ाई के बाद मुंबई में दस हजार रुपए की मेडिकल रेप्रिजेंटटिव की नौकरी लग गई थी।

मुझे औरतों को पटा कर और फंसा कर चोदने का शौक था। पाँच-छः औरतें पढ़ाई के समय से फंसी हुई थी, महीने में 4-5 बार उनसे चुदाई का मज़ा ले लेता था।

उनमें से एक औरत सीमा ने मुंबई में मेरी एक आदमी मोहन से बात कराई जो उसकी सहेली गीता का पति था और एक चाल में रहता था। मोहन से मेरा चार हजार रुपए में रहना और खाना तय हो गया। मैं मुंबई आ गया, मोहन मुझे लेने आ गया था।

35 साल का मोहन एक होटल में वेटर था। उसकी चाल में हम लोग आ गए। वहाँ उसकी बीवी गीता और वो अकेले रहते थे।

गीता करीब तीस बरस की होगी, दिखने में बुरी नहीं थी, चूचे मोटे-मोटे बाहर को निकले हुए थे और चुदाई में मस्त मज़ा देने वाली औरत लगती थी। बच्चे उनके गाँव में रहते थे। घर में सिर्फ एक कमरा, रसोई और छोटा सा बाथरूम था। बातचीत होने के बाद मैंने मोहन को एक महीने का पेशगी दे दिया।

रात को मोहन मुझे देसी दारु के अड्डे पर ले गया, मैं दारु नहीं पीता था पर मोहन ने एक बोतल देसी शराब की पी।

वापस आकर हम दोनों ने खाना खाया। रात को जमीन पर गद्दे बिछा कर हम सब सोने लगे। मुझे छोटे से कमरे मैं बड़ी बेचैनी हो रही थी। मैं थका हुआ था इसलिए मुझे जल्दी नींद आ गई।

थोड़ी देर बाद कमरे में हलचल की आवाज़ से मेरी नींद खुल गई।

गयारह बज़ रहे थे, मैंने पलट कर देखा तो मोहन गीता के ऊपर चढ़ कर उसके ब्लाउज के बटन खोल रहा था, उसने ब्लाउज उतार दिया था। मैं बगल में लेटा था, गीता की दोनों मोटी चूचियाँ बाहर निकल आई थीं।

मोहन उसकी चूचियाँ खोल कर दबाते हुए चूसने लगा।

मोटी मोटी दबती हुई नंगी चूचियाँ देखकर मेरा लण्ड खड़ा हो गया था।

इस बीच गीता ने अपने पेटीकोट का नाड़ा खोल लिया और पेटीकोट ऊपर पेट तक चढ़ा लिया। मोहन ने अपनी लुंगी खोल दी।

गीता ने उसके लण्ड को हाथ से पकड़ कर अपनी चूत पर लगा लिया, मोहन ने जाँघों से जांघें चिपकाते हुए लण्ड अंदर को ठोका। एक उह… की आवाज़ सी गूंजी, लण्ड अंदर गीता की चूत में घुस चुका था।

मोहन अब गीता को चोद रहा था, गीता अब चुद रही थी और उसकी उह… उह… उह्ह… आह… और चोदो… उई… उई… जैसी आहें छोटे से कमरे में गूंज रही थीं। उसके दोनों स्तन मोहन ने पकड़ रखे थे, उन्हें मसल रहा था।

मैं महीने में 5-6 बार औरतों की चूत मारता था इसलिए मुझे औरत का स्वाद पता था। पिछले 15 दिन से मैंने किसी की चोदी भी नहीं थी। यह सब देखकर मेरा बुरा हाल हो रहा था, न मैं आँख बंद कर पा रहा था न पूरी तरह से खोल पा रहा था।

5 मिनट बाद दोनों का खेल ख़त्म हुआ। उसके बाद मोहन खर्राटे भरने लगा, गीता भी सो गई। मुझे नींद नहीं आ रही थी, मैंने बाथरूम में जाकर मुठ मारी तब जाकर मुझे नींद आई।

अगले दिन मुझे नौकरी पर जाना था। सुबह सात बजे मैं उठ गया, गीता एक सस्ती सी धोती में उसी कमरे में कपड़े प्रेस कर रही थी। बिना ब्रा के ब्लाउज से उसकी दोनों चूचियाँ बाहर निकल रहीं थीं, जैसे कि पूछ रही हों कैसी लग रही हैं !

उसने मुझे और मोहन को नाश्ता कराया। मोहन सुबह साढ़े सात बजे जाता था और रात को आठ बजे तक आता था।

मोहन और हम एक ही ट्रेन से गए मेरा ऑफिस पास में था और फील्ड वर्क था। रात को मैं नौ बजे वापस आ गया। मोहन ने सबको यह बता रखा था मैं उसके चाचा का लड़का हूँ।

अगले दिन से मुझे सुबह नौ बजे निकलना था और मेडिकल रेप्रिजेंटटिव के काम से डॉक्टर्स से मिलना था।

अगले दिन शुक्रवार मोहन की छुट्टी थी, उसने बताया होटल में उसका ऑफ शुक्रवार को रहता है। मेरी छुट्टी रविवार को होती थी।

दो दिन बाद सन्डे को मेरा ऑफ था। शनिवार को मोहन ने मुझे बताया कि पास में सन्डे बाज़ार लगता है, कल गीता के साथ बाज़ार चले जाना।

अगले दिन सुबह सात बजे मोहन चला गया जब मेरी नींद खुली तब तक नौ बज़ रहे थे।

गीता मुझे देखकर बोली- मैं नहा कर आती हूँ।

गीता ने मेरे सामने ही अपनी साड़ी उतार दी और अंदर बाथरूम मैं चली गई। थोड़ी देर बाद बाहर निकल कर बोली- ओह, अंदर तो अँधेरा है, मैं तो भूल गई थी आज 9 से 10 बिजली बंद है।

मुस्कराते हुए बोली- अब तो अँधेरे में ही नहाना पड़ेगा !

और उसने अपने ब्लाउज के बटन खोल दिए उसकी आधी से ज्यादा चूचियाँ बाहर निकल आईं थीं।

मैं बाहर की तरफ जाने लगा।

गीता पेटीकोट का नाड़ा ढीला करते हुए मुस्करा कर बोली- आप बाहर क्यों जा रहे हैं, आप तो आप मेरे देवर हैं, यहीं बैठिये ना !

और उसने पीछे मुड़ कर अपना ब्लाउज़ उतार दिया, अपनी गर्दन घुमा कर बोली- इसे गंदे कपड़ों की डलिया में डाल दीजिए ना !

उसके मुड़ने पर मुझे उसकी एक चूची पूरी दिख गई थी ! क्या सुंदर स्तन था। देखकर लण्ड में पूरी आग लग गई थी !

 
उसके मुड़ने पर मुझे उसकी एक चूची पूरी दिख गई थी ! क्या सुंदर स्तन था। देखकर लण्ड में पूरी आग लग गई थी !

इसके बाद उसने अपना पेटीकोट ऊपर चढ़ा कर स्तनों को ढकते हुए बांध लिया, पीछे से उसकी मांसल जांघें और नंगी पीठ पूरी दिख रही थी।

मेरा लण्ड यह देख कर हथोड़ा हो गया था, मन कर रहा था कि पीछे से उसकी चूत में घुसा दूँ।

इसके बाद वो मेरी तरफ मुड़ी, उसने पेटीकोट अपने वक्ष पर बाँध रखा था, उसकी आधी चूचियाँ खुली हुई थीं और थोड़ी सी निप्पल भी दिख रही थीं, मुझे झुककर अखबार देकर बोली- आप अखबार पढ़ें, मैं जल्दी से नहा कर आती हूँ। उसके बाद चाय साथ पीयेंगे।

वो बाथरूम में घुस गई।

नहा कर जब वो बाहर आई तब मैं शेव बना रहा था, मेरी पीठ उसकी ओर थी, उसके बदन पर सिर्फ तौलिया बंधा हुआ था।

मेरे पीछे बेशर्म होते हुए उसने अपना तौलिया खोल लिया और दोनों स्तन खोलकर पोंछने लगी, शेविंग के शीशे में उसकी दोनों नंगी चूचियाँ हिलती हुई मुझे दिख रही थीं, मेरा लण्ड हिचकोले खा रहा था।

पेटीकोट पहनने के बाद स्तनों पर तौलिया डालकर वो मेरे सामने आकर बोली- भैया, चाय बना लेती हूँ, फिर हम दोंनो हाट चलते हैं। तौलिये में से हिलती अर्धनग्न चूचियाँ देखकर लण्ड लुंगी में पगलाने लगा था।

गीता भाभी चाय बनाकर मुझे चाय देने लगीं तो मेरा हाथ अनजाने में उनके स्तनों से टकरा गया। हाथ हटाते हुए मेरे मुँह से सॉरी निकल गया।

हँसते हुए गीता बोली- भैया, आप भी कितने शर्मीले हैं, जरा सा हाथ लग गया तो शरमा रहे हैं। इनके जीजाजी तो जब भी आते हैं, बार-बार जानबूझ कर मेरी गेंदें दबा देते हैं। वो तो मैं ज्यादा लिफ्ट नहीं देती, नहीं तो चोदे बिना नहीं छोड़ें।

गीता भाभी पेटीकोट में सामने बैठी हुई थीं, ऊपर सिर्फ उन्होंने तौलिया डाल रखा था, उससे केवल निप्पल ढकी हुई थीं, दोनों उरोज बगल से खुले दिख रहे थे।

गीता चहकते हुए बोली- इनका तो हाल ही मत पूछो ! आपने भी देख ही लिया होगा कि रात को रोज़ अपना लण्ड अंदर घुसा कर ही मानते हैं।

चाय पीते पीते मुझसे बोली- मैं तो सोच रही थी कि आप घर में रहेंगे तो कुछ हंसी मजाक करेंगे, लेकिन आप तो बहुत शर्मीले हैं। आपकी शर्म देखकर तो मेरे को भी शर्म आने लगी है। सीमा तो बता रही थी आपकी कई औरतों से यारी है, कुछ हमें भी किस्से बता दो ना।

मुझे लगा कि भाभी मस्ती के मूड में हैं, मैंने कहा- भाभी सच बताऊँ या झूठ?

भाभी अंगड़ाई लेते हुए बोली- जल्दी से सच बताओ !

अंगड़ाई लेने से उनका तौलिया सरक गया और उनका एक स्तन बाहर निकल आया जिसे उन्होंने हँसते हुए फ़िर से तौलिये से ढक लिया।

मैंने कहा- अब तक बीस से ज्यादा औरतों का स्वाद चख चुका हूँ। लेकिन जबरदस्ती किसी से नहीं की और जिसकी एक बार मार ली उसने दुबारा खुद कह कर अपनी चुदाई करवाई है।

भाभी बोली- सच?

बातचीत में भाभी ने जानबूझ कर तौलिया नीचे गिरा दिया, अब उनके दोनों सुंदर स्तन खुल कर बाहर आ गए थे। मुझसे रहा नहीं गया मैंने दोनों स्तनों को प्यार से पकड़ कर धीरे से दबाया और उनके चुचूक चूसते हुए कहा- आपकी चूचियाँ बहुत सुंदर हैं।

भाभी मेरे सर को सहलाते हुए बोलीं- याहू ! अब आया असली मज़ा !

रसीले स्तन दबाने और चूसने से मेरा लण्ड लुंगी में फड़फड़ा रहा था। गीता ने मेरी लुंगी की गाँठ खोल दी और मेरा लण्ड हाथ में पकड़ते हुए बोली- आह क्या मोटा लोड़ा है ! देवर जी इससे तो चुदने में मज़ा ही आ जाएगा।

गीता लेट गई और अपना पेटीकोट उठा कर बोली- एक बार चोद ही दो ! फिर दोस्ती पक्की हो जाएगी।

मैं बोला- नेक काम में देरी क्यों !

और उनकी चूत पर लण्ड लगा दिया। लण्ड पूरा अंदर तक एक बार में ही घुस गया।

गीता की आह कमरे में गूंज उठी।

हम दोनों अब चुदाई का खेल खेल रहे थे। लौड़ा बहुत देर से अंगड़ाई ले रहा था, उसने थोड़ी देर में ही हार मान ली और 18-20 धक्कों में ढेर हो गया।

मैंने गीता को अपनी बाँहों मैं चिपकाते हुए कहा- दूसरे राउंड में मज़ा ज्यादा आएगा।

गीता ने मुझे हटाते हुए अपना मुँह मेरे लण्ड पर रख कर एक लण्ड पप्पी दी और बोली- अब तो इसकी दोस्ती मेरी फ़ुद्दी से हो गई है। आज इतने से ही काम चला लो, समय मिलने पर पूरा मज़ा करेंगे। यहाँ एक बार लफड़ा हो चुका है इसलिए सावधान रहना पड़ता है। मुझे मन मारकर उठना पड़ा।

हम दोनों तैयार होकर हाट में घर का सामान खरीदने चले गए।

 
हाट से हम लोग जब वापस आए तो रास्ते में दो सुंदर और भरे बदन की औरतें बात कर रही थीं। उनमें से एक गीता से बोली- दीदी, मुझे आपसे बात करनी है, मैं अभी आपके कमरे में आती हूँ।

दूसरी औरत को देखकर गीता ने गंदा सा मुँह बनाया।

गीता मुझसे बोली- यह राखी है जो आने को कह रही है, मेरी सहेली है। दूसरी मुन्नी है, इस कुतिया मुन्नी के कारण ही मेरा लफड़ा हुआ था। दोनों के पति ट्रक पर काम करते हैं दोनों का मालिक एक ही है। पन्द्रह पन्द्रह दिन को बाहर चले जाते हैं।

मैंने गीता से कहा- दोनों मस्त माल हैं।

गीता आँख मारते हुए बोली- चोदने का मन कर रहा है?

मैं बोला- मिल जाए तो मज़ा आ जाए।

गीता होंट दबाते हुए बोली- राखी की दिलवा दूँगी।

मैंने पूछा- मुन्नी से तुम्हारा क्या लफड़ा है?

तभी राखी ऊपर आ गई और गीता से बात करने लगी। उसके जाने के बाद गीता ने मुझे बताया- राखी के यहाँ मेहमान आए हुए हैं, वो आज रात हमारे यहाँ सोएगी।

मेरा हाथ दबाते हुए गीता बोली- चुदने को राजी है, हाजार रुपए लेगी, आज रात को ही चोद लेना।

रात को रेखा, गीता, मोहन भैया और मैं एक लाइन में सोए। रात को फिर मोहन गीता को चोदने लगा।

मेरा मन भी चोदने का कर रहा था मैं अपना लण्ड सहलाने लगा मैंने देखा राखी भी जग रही थी और यह सब देखकर अपनी साड़ी उठाकर चूत में उंगली कर रही थी। मन कर रहा था दबोच लूँ साली को।

चुदाई के बाद मोहन खराटे भरने लगा। गीता ने करवट ली और राखी के कान में फुसफुसाई और बोली- जाकर राकेश के पास लेट ले, यह बार बार चूत में उंगली क्या कर रही है, आराम से चुद, इनकी चिंता मत कर, इनको को तो अब दो डंडे भी मारोगे तब भी नहीं उठेंगे।

राखी चुपचाप उठकर मेरे पास आकर लेट गई।

मैंने मुड़कर अपना हाथ उसकी नाभि पर रख दिया।

थोड़ा सहलाने पर राखी ने हाथ उठाकर अपनी चूचियों में घुसवा लिया।

राखी की चूचियाँ मुलायम और कसी हुई थीं मैंने उन्हें दबाना शुरू कर दिया।

राखी ने ब्लाउज के बटन खोल दिए और मुझसे चिपट गई, उसने लुंगी खोलकर मेरा खड़ा लोड़ा अपने हाथ में पकड़ लिया, मोटा लिंग सहलाने से उसकी साँसें गर्म हो रही थीं।

मैंने उसकी चूचियों की निप्पल उमेठ उमेठ कर खड़ी कर दीं थी। मेरा लोड़ा दबाते हुए राखी बोली- बड़ा मज़ा आ रहा है। इसे चूत में लगाओ न। जल्दी से चोद दो और मत तड़पाओ।

मैंने राखी की चूचियों को हॉर्न की तरह बजाते हुए कहा- पहली बार जब भी मैं किसी औरत को चोदता हूँ तो वो अपनी चूत खुद नंगी करती है। जल्दी से अपनी चूत को खोलकर टांगें चौड़ी करो, तुम्हें चुदाई का वो मज़ा दूँगा कि हमेशा मुझसे चुदवाने को पागल रहोगी।

राखी ने अपना पेटीकोट उतार दिया और मुझे अपनी तरफ खींचते हुए बोली- अब तो डालो न ! बड़ी आग लग रही है।

अब वो पूरी नंगी हो चुकी थी। मैंने अपना हाथ उसकी चूत पर रख दिया, क्या पाव रोटी जैसी फूली हुई चूत थी।

मैं उसकी चूत का दाना रगड़ने लगा वो आह उह की आहें भरने लगी।

उसने मेरी बनियान भी उतरवा दी और मुझसे चिपक गई और चूत लण्ड के मुँह पर लगाने लगी, पूरी गर्म हो रही थी। लण्ड उसकी चूत के मुँह पर छुल रहा था। वो मेरे होंटों पर होंट लगते हुए लोड़ा अंदर लेने की कोशिश कर रही थी।

उसके चूतड़ों को दबाते हुए मैंने लण्ड उसकी गीली चूत में घुसा दिया, एक तेज आह की आवाज़ गूंज उठी।

हम दोनों के बदन एक दूसरे से रगड़ खाने लगे कमरा आह… उह… की आवाज़ों से गूंजने लगा।

राखी को मैंने अपने नीचे लेटा लिया और उसके ऊपर चढ़कर उसे चोदना शुरू कर दिया। दोनों चूचियों की मसलाई और होंटों के स्वाद ने चुदाई का मज़ा बढ़ा दिया था। एक नई औरत के स्वाद का पूरा मज़ा आ रहा था।

कुछ मिनट की चुदाई के खेल के बाद हम दोनों ने चरम सीमा का आनन्द एक साथ उठाया। इसके बाद एक दूसरे से चिपक कर हम सो गए।

अगले दिन सुबह जब मैं उठा तब मोहन जा चुके थे। मेरे बदन पर सिर्फ लुंगी बंधी हुई थी।

 
गीता अंदर बाथरूम में नहा रही थी।

कुछ देर बाद बाथरूम से गीता निकली उसने सिर्फ चड्डी पहन रखी थी और नंगे स्तनों पर तौलिया ढक रखा था।

बाहर निकल कर गीता ने मुझे देखा और होंट दबाते हुए बोली- कल तो तुमने राखी की मुनिया बड़ी मस्त बजा दी। सुबह जाते जाते कह रही थी कि भाभी कल जितना चुदने में मज़ा आया, उतना कभी नहीं आया और कह रही थी जल्दी ही दुबारा चुदूँगी।

गीता ने मेरी तरफ पीठ की और तौलिया उतारकर अपने स्तन हिलाते हुए अपनी जांघें पोंछने लगी पीछे से उसका गर्म बदन देखकर मुझसे रहा नहीं गया, मैंने पीछे से गीता की दोनों चूचियाँ हाथों में पकड़ कर उन्हें मसलने लगा और बोला- राखी की चुदाई में तो मज़ा आ गया लेकिन तुम इतना क्यों तड़पा रही हो?

गीता मुड़कर मुझसे चिपकते हुए बोली- इतने उतावले क्यों हो रहे हो? चोद लेना, चूत तो मेरी भी तुम्हारा लण्ड खाने को मचल रही है। एक बार लफड़ा हो गया था इसलिए सावधानी बरतती हूँ। अभी तुम एक अच्छे देवर की तरह यह स्तन सुडौल रखने वाला तेल मेरे स्तनों पर मल दो।

मैं यह सुन कर उत्तेजित हो गया।

गीता मेरी गोद में आकर जाँघों पर बैठ गई और मुझसे अपनी नंगी चूचियाँ पर तेल मालिश कराने लगी।

स्तन को चारों तरफ से धीरे धीरे तेल से मलते हुए बीच में चूचियाँ उमेठने में मुझे गज़ब का मज़ा आ रहा था।

मैंने मालिश करते हुए पूछा- तुम बार बार कहती हो मेरा लफड़ा हो गया था, लफड़ा क्या हुआ था, यह तो बताओ !

भाभी बोली- ठीक है, तुम मेरे अपने बन गए हो, तुम्हें बता देती हूँ किसी को बताना नहीं।

भाभी ने बताया कि पहले वो बगल वाली चाल में मुन्नी के पास वाले घर में रहती थी। मुन्नी की एक सहेली कुसुम है जो उसके गाँव से ही है, कुसुम रेलवे कॉलोनी के पास रहती है। मुन्नी कुसुम को चाल में घर दिलवाना चाह रही थी। कोई घर खाली नहीं था तो उसने मेरा घर खाली करवाने के लिए चाल चली। इनका एक दोस्त चिंटू है, उसका ऑफ बुधवार को रहता था, हम दोनों में हंसी मजाक बहुत समय से हो रहा था, हर बुधवार वो मुझसे मिलने आ जाता था और मौका पाकर वो मेरी चूचियाँ और चूतड़ भी मसल देता था।

एक दिन मुन्नी और कुसुम ने मिलकर एक साज़िश रची।

पहले मुन्नी आई उसने मुझे खीर में मिला कर कोई कामोत्तेजना बढ़ाने वाली दवा खिला दी। उस दिन ये घर में नहीं थे, मेरी बुर बुरी तरह से चुदने के लिए खुजला रही थी, एक घंटे बाद चिंटू आ गया, चिंटू ने मेरा ब्लाउज खोल दिया और मेरी नंगी चूचियाँ मलने लगा, उसने मुझे बुरी तरह से गर्म कर दिया था।

कुसुम साज़िश के तहत रसोई मैं छिपी हुई थी। इसके बाद मैं और चिंटू नंगे होकर बाथरूम में चले गए। चिंटू मुझे बाथरूम में चोदने लगा।

कुसुम ने बाहर का दरवाज़ा खोल दिया कुतिया मुन्नी इस बीच जाकर चाल के मालिक मुकुंद सेठ को बुला लाई, सबने छुपकर मेरी चुदाई का मज़ा लिया और चुदाई के बाद सेठ ने मुझे पकड़ लिया और घर खाली करने को बोल दिया।

मैं सेठ के पैरों में लोटी तब इतना तय हुआ असली बात किसी को कोई नहीं बताएगा पर मुझे घर खाली करना पड़ेगा।

मुन्नी को चुप रहने के लिए मुझे दो हजार रुपए देने पड़े। सेठ इतने में मान जाता पर कुसुम ने सेठ से मेरे सामने कहा- इसकी जवानी का थोडा मज़ा लूट लो, ऐसा मौका बार बार नहीं आता है।

सत्तर साल के सेठ में चोदने की ताकत तो थी नहीं लेकिन कुतिया कुसुम ने सेठ को उकसा दिया तो उसका लोड़ा मुझे चूसना पड़ा। हरामी का पिचकू लोड़ा बड़ी मुश्किल से आधा घंटे में खड़ा हुआ और दद सेकंड में ही मुँह में पूरा वीर्य उसने छोड़ दिया।

कुसुम कुतिया ने इस बीच मेरी गांड में मोमबत्ती डाल दी और मुकुंद सेठ के हाथों से मेरी गांड मोमबत्ती से चुदवाती रही। दोनों हरामिनें ताली बजा बजा कर आधे घंटे तक मेरी लुटती जवानी का मज़ा लेती रही। इतना होने के बाद भी हमें घर बदलना पड़ा वो तो पास में ही राखी की चाल में यह घर खाली हुआ था, मुझे मिल गया।

गीता ने इस बीच उठकर अपनी चड्डी उतार दी और मेरी लुंगी भी उतरवा दी और मेरा लोड़ा तेल से नहला दिया, अपनी टांगें फ़ैला कर चूत मेरे गर्म और मोटे आठ इंची लण्ड पर रख दी और जाँघों पर लोड़ा अंदर तक घुसवाते हुए मेरी तरफ मुँह करके बैठ गई, मुस्कराते हुए बोली चूचियों की मालिश तो तुमने कर दी अब मेरी चूत की मालिश अपने लण्ड से और कर दो।

 
गीता ने किस्सा जारी रखा, वो बोली- सेठ ने कुसुम को भी घर देने से मना कर दिया। कुतिया के चक्कर में मेरी इज्ज़त की अच्छी चुदाई हो गई। मुझे कभी मौका मिला तो साली को सबके सामने नंगा करूंगी और दोनों की जवानी लुटवाऊँगी।

मैंने गीता की चूत की चुदाई करते हुए चूचियाँ दबाई और बोला- भाभी जान, तुम चिंता न करो, कुतिया तुम्हारे सामने अपने हाथों से चड्डी उतारेगी और नंगी होगी। तुम्हारी बेइज्ज़ती का पूरा बदला मैं लूँगा।

गीता बोली- मजाक करते हो !

मैंने कहा- आप साथ दोगी तो एक महीने में मुन्नी की मुनिया में तुम्हारे सामने जिसका कहोगी उसका लोड़ा डलवा दूँगा। आप बस उससे थोड़ी दोस्ती बढ़ाओ।

गीता बोली- ऐसा होगा तो बड़ा मज़ा आ जाएगा ! तुम कहते हो तो मैं उससे दोस्ती बढ़ाती हूँ।

गीता की चूत में लोड़ा गए आधा घंटा हो गया था अब उसके वीर्य त्याग का समय आ गया और मैंने पूरा वीर्य गीता की चूत में उतार दिया। इसके बाद मैं अपने ऑफिस चला गया।

3872लेट गई और अपना पेटीकोट उठा कर बोली- एक बार चोद ही दो ! फिर दोस्ती पक्की हो जाएगी।

मैं बोला- नेक काम में देरी क्यों !

और उनकी चूत पर लण्ड लगा दिया। लण्ड पूरा अंदर तक एक बार में ही घुस गया। गीता की आह कमरे में गूंज उठी। हम दोनों अब चुदाई का खेल खेल रहे थे। लौड़ा बहुत देर से अंगड़ाई ले रहा था, उसने थोड़ी देर में ही हार मान ली और 18-20 धक्कों में ढेर हो गया।

मैंने गीता को अपनी बाँहों मैं चिपकाते हुए कहा- दूसरे राउंड में मज़ा ज्यादा आएगा।

गीता ने मुझे हटाते हुए अपना मुँह मेरे लण्ड पर रख कर एक लण्ड पप्पी दी और बोली- अब तो इसकी दोस्ती मेरी फ़ुद्दी से हो गई है। आज इतने से ही काम चला लो, समय मिलने पर पूरा मज़ा करेंगे। यहाँ एक बार लफड़ा हो चुका है इसलिए सावधान रहना पड़ता है।

मुझे मन मारकर उठना पड़ा। हम दोनों तैयार होकर हाट में घर का सामान खरीदने चले गए।

हाट से हम लोग जब वापस आए तो रास्ते में दो सुंदर और भरे बदन की औरतें बात कर रही थीं। उनमें से एक गीता से बोली- दीदी, मुझे आपसे बात करनी है, मैं अभी आपके कमरे में आती हूँ।

दूसरी औरत को देखकर गीता ने गंदा सा मुँह बनाया। गीता मुझसे बोली- यह राखी है जो आने को कह रही है, मेरी सहेली है। दूसरी मुन्नी है, इस कुतिया मुन्नी के कारण ही मेरा लफड़ा हुआ था। दोनों के पति ट्रक पर काम करते हैं दोनों का मालिक एक ही है। पन्द्रह पन्द्रह दिन को बाहर चले जाते हैं।

मैंने गीता से कहा- दोनों मस्त माल हैं।

गीता आँख मारते हुए बोली- चोदने का मन कर रहा है?

मैं बोला- मिल जाए तो मज़ा आ जाए।

गीता होंट दबाते हुए बोली- राखी की दिलवा दूँगी।

मैंने पूछा- मुन्नी से तुम्हारा क्या लफड़ा है?

तभी राखी ऊपर आ गई और गीता से बात करने लगी। उसके जाने के बाद गीता ने मुझे बताया- राखी के यहाँ मेहमान आए हुए हैं, वो आज रात हमारे यहाँ सोएगी।

मेरा हाथ दबाते हुए गीता बोली- चुदने को राजी है, हाजार रुपए लेगी, आज रात को ही चोद लेना।

रात को रेखा, गीता, मोहन भैया और मैं एक लाइन में सोए। रात को फिर मोहन गीता को चोदने लगा। मेरा मन भी चोदने का कर रहा था मैं अपना लण्ड सहलाने लगा मैंने देखा राखी भी जग रही थी और यह सब देखकर अपनी साड़ी उठाकर चूत में उंगली कर रही थी। मन कर रहा था दबोच लूँ साली को।

चुदाई के बाद मोहन खराटे भरने लगा। गीता ने करवट ली और राखी के कान में फुसफुसाई और बोली- जाकर राकेश के पास लेट ले, यह बार बार चूत में उंगली क्या कर रही है, आराम से चुद, इनकी चिंता मत कर, इनको को तो अब दो डंडे भी मारोगे तब भी नहीं उठेंगे।

राखी चुपचाप उठकर मेरे पास आकर लेट गई। मैंने मुड़कर अपना हाथ उसकी नाभि पर रख दिया। थोड़ा सहलाने पर राखी ने हाथ उठाकर अपनी चूचियों में घुसवा लिया। राखी की चूचियाँ मुलायम और कसी हुई थीं मैंने उन्हें दबाना शुरू कर दिया। राखी ने ब्लाउज के बटन खोल दिए और मुझसे चिपट गई, उसने लुंगी खोलकर मेरा खड़ा लोड़ा अपने हाथ में पकड़ लिया, मोटा लिंग सहलाने से उसकी साँसें गर्म हो रही थीं।

मैंने उसकी चूचियों की निप्पल उमेठ उमेठ कर खड़ी कर दीं थी। मेरा लोड़ा दबाते हुए राखी बोली- बड़ा मज़ा आ रहा है। इसे चूत में लगाओ न। जल्दी से चोद दो और मत तड़पाओ।

मैंने राखी की चूचियों को हॉर्न की तरह बजाते हुए कहा- पहली बार जब भी मैं किसी औरत को चोदता हूँ तो वो अपनी चूत खुद नंगी करती है। जल्दी से अपनी चूत को खोलकर टांगें चौड़ी करो, तुम्हें चुदाई का वो मज़ा दूँगा कि हमेशा मुझसे चुदवाने को पागल रहोगी। राखी ने अपना पेटीकोट उतार दिया और मुझे अपनी तरफ खींचते हुए बोली- अब तो डालो न ! बड़ी आग लग रही है।

 
अब वो पूरी नंगी हो चुकी थी। मैंने अपना हाथ उसकी चूत पर रख दिया, क्या पाव रोटी जैसी फूली हुई चूत थी। मैं उसकी चूत का दाना रगड़ने लगा वो आह उह की आहें भरने लगी। उसने मेरी बनियान भी उतरवा दी और मुझसे चिपक गई और चूत लण्ड के मुँह पर लगाने लगी, पूरी गर्म हो रही थी। लण्ड उसकी चूत के मुँह पर छुल रहा था। वो मेरे होंटों पर होंट लगते हुए लोड़ा अंदर लेने की कोशिश कर रही थी।

उसके चूतड़ों को दबाते हुए मैंने लण्ड उसकी गीली चूत में घुसा दिया, एक तेज आह की आवाज़ गूंज उठी। हम दोनों के बदन एक दूसरे से रगड़ खाने लगे कमरा आह… उह… की आवाज़ों से गूंजने लगा। राखी को मैंने अपने नीचे लेटा लिया और उसके ऊपर चढ़कर उसे चोदना शुरू कर दिया। दोनों चूचियों की मसलाई और होंटों के स्वाद ने चुदाई का मज़ा बढ़ा दिया था। एक नई औरत के स्वाद का पूरा मज़ा आ रहा था।

कुछ मिनट की चुदाई के खेल के बाद हम दोनों ने चरम सीमा का आनन्द एक साथ उठाया। इसके बाद एक दूसरे से चिपक कर हम सो गए।

अगले दिन सुबह जब मैं उठा तब मोहन जा चुके थे। मेरे बदन पर सिर्फ लुंगी बंधी हुई थी। गीता अंदर बाथरूम में नहा रही थी। कुछ देर बाद बाथरूम से गीता निकली उसने सिर्फ चड्डी पहन रखी थी और नंगे स्तनों पर तौलिया ढक रखा था। बाहर निकल कर गीता ने मुझे देखा और होंट दबाते हुए बोली- कल तो तुमने राखी की मुनिया बड़ी मस्त बजा दी। सुबह जाते जाते कह रही थी कि भाभी कल जितना चुदने में मज़ा आया, उतना कभी नहीं आया और कह रही थी जल्दी ही दुबारा चुदूँगी।

गीता ने मेरी तरफ पीठ की और तौलिया उतारकर अपने स्तन हिलाते हुए अपनी जांघें पोंछने लगी पीछे से उसका गर्म बदन देखकर मुझसे रहा नहीं गया, मैंने पीछे से गीता की दोनों चूचियाँ हाथों में पकड़ कर उन्हें मसलने लगा और बोला- राखी की चुदाई में तो मज़ा आ गया लेकिन तुम इतना क्यों तड़पा रही हो?गीता मुड़कर मुझसे चिपकते हुए बोली- इतने उतावले क्यों हो रहे हो? चोद लेना, चूत तो मेरी भी तुम्हारा लण्ड खाने को मचल रही है। एक बार लफड़ा हो गया था इसलिए सावधानी बरतती हूँ। अभी तुम एक अच्छे देवर की तरह यह स्तन सुडौल रखने वाला तेल मेरे स्तनों पर मल दो।

मैं यह सुन कर उत्तेजित हो गया।

गीता मेरी गोद में आकर जाँघों पर बैठ गई और मुझसे अपनी नंगी चूचियाँ पर तेल मालिश कराने लगी। स्तन को चारों तरफ से धीरे धीरे तेल से मलते हुए बीच में चूचियाँ उमेठने में मुझे गज़ब का मज़ा आ रहा था।

मैंने मालिश करते हुए पूछा- तुम बार बार कहती हो मेरा लफड़ा हो गया था, लफड़ा क्या हुआ था, यह तो बताओ !

भाभी बोली- ठीक है, तुम मेरे अपने बन गए हो, तुम्हें बता देती हूँ किसी को बताना नहीं।

भाभी ने बताया कि पहले वो बगल वाली चाल में मुन्नी के पास वाले घर में रहती थी। मुन्नी की एक सहेली कुसुम है जो उसके गाँव से ही है, कुसुम रेलवे कॉलोनी के पास रहती है। मुन्नी कुसुम को चाल में घर दिलवाना चाह रही थी। कोई घर खाली नहीं था तो उसने मेरा घर खाली करवाने के लिए चाल चली। इनका एक दोस्त चिंटू है, उसका ऑफ बुधवार को रहता था, हम दोनों में हंसी मजाक बहुत समय से हो रहा था, हर बुधवार वो मुझसे मिलने आ जाता था और मौका पाकर वो मेरी चूचियाँ और चूतड़ भी मसल देता था।

एक दिन मुन्नी और कुसुम ने मिलकर एक साज़िश रची। पहले मुन्नी आई उसने मुझे खीर में मिला कर कोई कामोत्तेजना बढ़ाने वाली दवा खिला दी। उस दिन ये घर में नहीं थे, मेरी बुर बुरी तरह से चुदने के लिए खुजला रही थी, एक घंटे बाद चिंटू आ गया, चिंटू ने मेरा ब्लाउज खोल दिया और मेरी नंगी चूचियाँ मलने लगा, उसने मुझे बुरी तरह से गर्म कर दिया था। कुसुम साज़िश के तहत रसोई मैं छिपी हुई थी। इसके बाद मैं और चिंटू नंगे होकर बाथरूम में चले गए। चिंटू मुझे बाथरूम में चोदने लगा।

 
कुसुम ने बाहर का दरवाज़ा खोल दिया कुतिया मुन्नी इस बीच जाकर चाल के मालिक मुकुंद सेठ को बुला लाई, सबने छुपकर मेरी चुदाई का मज़ा लिया और चुदाई के बाद सेठ ने मुझे पकड़ लिया और घर खाली करने को बोल दिया। मैं सेठ के पैरों में लोटी तब इतना तय हुआ असली बात किसी को कोई नहीं बताएगा पर मुझे घर खाली करना पड़ेगा।

मुन्नी को चुप रहने के लिए मुझे दो हजार रुपए देने पड़े। सेठ इतने में मान जाता पर कुसुम ने सेठ से मेरे सामने कहा- इसकी जवानी का थोडा मज़ा लूट लो, ऐसा मौका बार बार नहीं आता है।

सत्तर साल के सेठ में चोदने की ताकत तो थी नहीं लेकिन कुतिया कुसुम ने सेठ को उकसा दिया तो उसका लोड़ा मुझे चूसना पड़ा। हरामी का पिचकू लोड़ा बड़ी मुश्किल से आधा घंटे में खड़ा हुआ और दद सेकंड में ही मुँह में पूरा वीर्य उसने छोड़ दिया।

कुसुम कुतिया ने इस बीच मेरी गांड में मोमबत्ती डाल दी और मुकुंद सेठ के हाथों से मेरी गांड मोमबत्ती से चुदवाती रही। दोनों हरामिनें ताली बजा बजा कर आधे घंटे तक मेरी लुटती जवानी का मज़ा लेती रही। इतना होने के बाद भी हमें घर बदलना पड़ा वो तो पास में ही राखी की चाल में यह घर खाली हुआ था, मुझे मिल गया।

गीता ने इस बीच उठकर अपनी चड्डी उतार दी और मेरी लुंगी भी उतरवा दी और मेरा लोड़ा तेल से नहला दिया, अपनी टांगें फ़ैला कर चूत मेरे गर्म और मोटे आठ इंची लण्ड पर रख दी और जाँघों पर लोड़ा अंदर तक घुसवाते हुए मेरी तरफ मुँह करके बैठ गई, मुस्कराते हुए बोली चूचियों की मालिश तो तुमने कर दी अब मेरी चूत की मालिश अपने लण्ड से और कर दो।

गीता ने किस्सा जारी रखा, वो बोली- सेठ ने कुसुम को भी घर देने से मना कर दिया। कुतिया के चक्कर में मेरी इज्ज़त की अच्छी चुदाई हो गई। मुझे कभी मौका मिला तो साली को सबके सामने नंगा करूंगी और दोनों की जवानी लुटवाऊँगी।

मैंने गीता की चूत की चुदाई करते हुए चूचियाँ दबाई और बोला- भाभी जान, तुम चिंता न करो, कुतिया तुम्हारे सामने अपने हाथों से चड्डी उतारेगी और नंगी होगी। तुम्हारी बेइज्ज़ती का पूरा बदला मैं लूँगा।

गीता बोली- मजाक करते हो !

मैंने कहा- आप साथ दोगी तो एक महीने में मुन्नी की मुनिया में तुम्हारे सामने जिसका कहोगी उसका लोड़ा डलवा दूँगा। आप बस उससे थोड़ी दोस्ती बढ़ाओ।

गीता बोली- ऐसा होगा तो बड़ा मज़ा आ जाएगा ! तुम कहते हो तो मैं उससे दोस्ती बढ़ाती हूँ।

गीता की चूत में लोड़ा गए आधा घंटा हो गया था अब उसके वीर्य त्याग का समय आ गया और मैंने पूरा वीर्य गीता की चूत में उतार दिया। इसके बाद मैं अपने ऑफिस चला गया।

कहानी जारी रहेगी।

 
अगले दिन दोपहर का समय था, मैं पास के एक काम्प्लेक्स में खड़ा था, तभी राखी उधर आई तो मुझे देखकर मुस्कराई, राखी से मैंने पूछा- किस काम से आई हो?

राखी बोली- मेरे पति को अगले महीने ट्रक पर जाना है, मालिक एक बार ट्रक पर जाने के लिए ट्रक के खर्चे के पच्चीस हजार देता है कल मालिक का नौकर अगले टूर के लिए मुझे और मुन्नी को रुपए दे गया है। अभी 15 दिन हैं जाने में तो पैसे बैंक में जमा कर देती हूँ, घर में चोरी का डर रहता है। मुन्नी तो पैसे अपने घर में ही रखती है।

इसके बाद राखी धीरे से बोली- तुमसे चुदने का मन कर रहा है।

मैंने कहा- नेकी और पूछ पूछ ! शाम को भाभी के घर पर आ जाना, मुझे भी ख़ुशी होगी तुम्हें चोद कर ! उस रात तो मज़ा आ गया था।

राखी बोली- मेरा पति शक्की है, उस दिन तो मेहमान आ गए थे इसलिए मौका मिल गया था। कहीं बाहर चलकर मज़े करते हैं।

हम दोनों ने दो दिन बाद एक जगह मिलने का वादा कर लिया। दो दिन बाद राखी को लेकर मैं एक अड्डे पर चला गया जहाँ दो सौ रुपए में दो घंटे को कमरा मिलता था। राखी और मैंने चुदाई का मज़ा लिया।

इसके बाद राखी मेरी गोद मैं बैठकर बतियाने लगी तो मैंने कुसुम और मुन्नी की बात छेड़ दी।

बातों बातों में राखी ने बताया कि दो दिन पहले मेरे जाने के बाद कुसुम पोस्ट ऑफिस के पास मिली थी काफ़ी रुपए मनी आर्डर कर रही थी। रेलवे कलोनी में एक के घर काम करती है उससे पच्चीस हजार रुपए उधार लिए थे। कुसुम के भाई और बाप जेल में हैं, गाँव में एक लफड़ा हो गया था, उसके भाई ने एक आदमी को मार दिया था समझौते के लिए पचास हजार की बात हुई है। पच्चीस हजार की और जरूरत बता रही थी। मुझसे ट्रक वाले रुपए मांगने लगी। मैंने कान पकड़े और वहाँ से भाग ली।

उसने मुझे मुन्नी और कुसुम के बारे में कई बातें बताई, उसने बताया कि एक बार मुन्नी का हाथ टूट गया था तो 15 दिन कुसुम ने मुन्नी के यहाँ खाना बनाया था। मैंने राखी की निप्पल उमेठते हुए कहा- तुम कुसुम से बोलो कि मुन्नी के पास रुपये हैं, ले ले।

राखी हँसते हुए बोली- मुन्नी का पति उसका गला दबा देगा अगर उसने ट्रक के पैसे कुसुम को दे दिए। सौ-सौ रुपए के लिए पीट देता है मुन्नी को।

मैंने राखी के होंट चूसते हुए कहा- तुम उसे एक बार बता दो कि मुन्नी के पास पैसे रखे हैं, बदले में ये 500 रुपए रखो !

और मैंने राखी को 500 रुपए दे दिए।

राखी बोली- ठीक है, कल ही बोल देती हूँ।

उसके बाद एक बार हमने चुदाई का खेल और खेला और अपने घर को वापस हो लिए।

मेरे कहे अनुसार भाभी ने मुन्नी से दोस्ती कर ली। मैंने भाभी से कहा- मेरी पहचान भी मुन्नी से करा दो, तभी कुतिया से तुम्हारी बेइज्ज़ती का बदला लिया जा सकेगा।

गीता ने एक दिन मुन्नी को चाय पर बुला लिया। जब मैं ऑफिस से आया मुन्नी और गीता चाय पी रही थीं। गीता ने मेरा परिचय मुन्नी से कराया और बोली- यह इनका चचेरा भाई है।

मैं मुन्नी का बदन घूर घूर कर देखने लगा, पूरा नई नवेली औरत जैसा था। जवानी का रस टपक रहा था ब्लाउज के अंदर से सफ़ेद ब्रा दिख रही थी।

मुन्नी को चोदने के लिए मेरा लण्ड परेशान होने लगा था।

मुन्नी से मेरी भी बातचीत होने लगी मैंने मुन्नी को बताया- मुंबई में पच्चीस हजार की नौकरी कर रहा हूँ।

इस बीच मैंने अपनी जेब से एक सौ की गड्डी निकाली और आँख दबाते हुए बोला- भाभी, ये दस हजार रुपए हैं, रख देना जरा।

5-6 दिन बाद शाम को भाभी ने बताया- आज मुन्नी परेशान सी घूम रही थी। राखी बता रही थी कि किसी ने इसके पच्चीस हजार रुपए चुरा लिए हैं।

गीता भाभी खुश थीं, बोलीं- बड़ा मज़ा आया ! रंडी सबसे उधार मांग रही है, कोई सौ रुपल्ली देने को भी तैयार नहीं है। इस चाल में भी आई थी और मेरे सामने से भी निकली थी, रोते हुए बोली कि उसने एक लिफाफे में पैसे रखे थे, चोरी हो गए दो दिन बाद ये आएँगे तो पीट पीट कर बुरी हालत कर देंगे।

मैंने मौका देखकर गीता के चूतड़ दबाए और बोला- भाभी, अब मेरा खेल देखो। राखी से कहो वो मुन्नी को बोले कि राकेश भैया से पैसे उधार मांगे तो मिल सकते हैं।

गीता बोली- तुम क्यों दोगे?

मैंने स्तन दबाते हुए एक पप्पी गीता को दी और बोला- इसकी चूत जो आपके सामने मारनी है ! आपको बदनाम किया था न इसने ! और आपके दो हजार भी तो वापस दिलाने हैं।

भाभी ने राखी से मुन्नी को कहला दिया कि अगर राकेश भैया से पैसे मांगे तो मिल सकते हैं।

अगले दिन रविवार था, भाभी अकेले हाट चली गई थी, योजना के मुताबिक राखी ने मुन्नी को बता दिया कि मैं घर पर अकेला हूँ।

मौका देखकर मुन्नी अंदर आ गई, आज अच्छी तरह सजी थी, नाभी के काफी नीचे उसने पेटीकोट बांध रखी थी पूरा चिकना पेट और गर्भ प्रदेश दिख रहा था, मुझे देखकर बोली- भाभी नहीं हैं?

मैंने कहा- आ रही होंगी, आप बैठो !

वो सामने पड़ी खाट पर बैठ गई।

 
मैं किताब पढ़ने का नाटक करने लगा। इस बीच उसने बड़ी मीठी आवाज़ में कहा- भैया, आप मेरी मदद कर दो न।

मैंने अनजान बनते हुए उसकी तरफ देखा और कहा- कैसी मदद?

उसने उठ कर दरवाज़ा बंद किया और जानबूझ कर साड़ी का पल्लू नीचे गिरा दिया, पूरी चूचियाँ नंगी दिख रही थीं, ब्रा उसने पहनी नहीं थी, पारदर्शी ब्लाउज का सिर्फ एक बटन लगा था। उसकी काली निप्पल और उसके तने हुए स्तनों ने तो मेरे लोड़े में आग लगा दी।

मुन्नी बोली- राखी कह रही थी कि आप मुझे रुपए दे सकते हैं, प्लीज़ मुझे पच्चीस हजार उधार दे दीजिए न, आप ही मुझे अब बचा सकते हैं।

अपनी गोल नाभि में उंगली घुमाते हुए बोली- आप जो कहेंगे वो मैं करने को राज़ी हूँ।

मुर्गी फंसने वाली थी, मैंने आँख मारते हुए उसके स्तनों की तरफ इशारा करते हुए कहा- आपके संतरे बहुत सुंदर हैं।

उसने अपने ब्लाउज का एकमात्र बटन भी खोल दिया और बोली- आप चूस कर देखिये न बहुत मज़ा आएगा।

मस्त स्तन मेरे सामने खुले हुए थे, मैं अपने को रोक नहीं पाया और आगे बढ़कर उन्हें अपने हाथों में भर लिया।

उसकी नंगी चूचियाँ कस कर दबाते हुए दोनों चूचियाँ बारी बारी से मुँह में भर कर कई बार चूसीं।

मुन्नी 25-26 साल की जवान गरम औरत थी, उसने मेरा लण्ड गीला कर दिया था।

चूचियाँ दबाने के बाद मैंने उसकी नाभि और पेट को होंटों से चाटा और बोला- आप जैसी सुन्दर रस भरी औरत को मना तो नहीं कर सकता पर अभी मेरे पास सिर्फ पांच हजार जमा हैं।

मुन्नी रोने का नाटक करती हुई बोली- आप मुझे पच्चीस का इंतजाम करा दो बदले मैं आप मेरा पूरा रस पी लेना, पूरा मज़ा आपको दूँगी, आप कहोगे तो मुँह में भी ले लूँगी।

मेरा मन ख़ुशी से उछल उठा, मैंने कहा- सच? जल्दी से मुँह में लो, अब रहा नहीं जा रहा, आज तक किसी ने मेरा लोड़ा नहीं चूसा है।

आगे बढ़कर मुन्नी ने चेन खोलकर मेरा लोड़ा पैंट से बाहर निकला और बिना देर किये अपने मुँह में भर लिया और बड़े प्रेम से चूसने लगी।

इस बीच मैंने उसकी साड़ी पीछे से उठा कर नंगे चूतड़ दबाने शुरू कर दिए, उसकी गांड में एक उंगली भी घुसा दी, बड़ी टाईट गाण्ड थी।

मुन्नी बड़े प्यार से दस मिनट तक लण्ड चूसती रही, मुझे उसने पूरा मज़ा दिया। उसके बाद वो पूरा रस मुँह में गटक गई।

मैंने उसे उठाकर अपने से चिपकाया और बोला- अभी तुम ये पांच रखो और कल मुझे लोकल स्टेशन पर 12 बजे मिलो, वहाँ ठीक से बात करते हैं।

मुन्नी पाँच हजार रुपए लेकर वहाँ से चली गई।

अगले दिन स्टेशन पर जब मैं 12 बजे पहुँचा तो मुन्नी सजी धजी साड़ी में खड़ी थी, मुझे देख कर मुस्कराई, हम दोनों एक कोठी में चले गए।

कोठी में मेरे जानकार गार्ड ने दो सौ रुपए लेकर हमें एक प्राइवेट जगह पर खुले में बैठा दिया और एक चटाई बैठने के लिए दे दी और मुझसे बोला- जो मन में आए, वो कर लो, एक घंटे तक आसपास कोई नहीं आएगा।

उसके जाने के बाद मुन्नी मेरी गोदी में उछल कर बैठ गई, उसका ब्लाउज मैंने खोल दिया और उसके उभारों पर हाथ फेरते हुए बोला- पहले थोड़ा प्यार हो जाए।

मुन्नी ने मेरे होंटों में होंट लगा दिए और हम दोनों एक दूसरे के मुँह में जीभ घुसा कर एक दूसरे को चूसने लगे।

मुन्नी के होंट चूसते हुए मैंने मुन्नी की चूचियाँ दबा दबा के कड़ी कर दीं, मुन्नी ने भी मेरी पेंट खोलकर लोड़ा बाहर निकाल लिया और उसे सहलाने लगी, आह भरती हुई बोली- आपका तो बहुत मोटा है।

मेरा हाथ उसकी साड़ी के अंदर घुस गया था, उसकी चड्डी में हाथ डालते हुए मैं उसकी चिकनी चूत सहलाने लगा, साथ ही साथ उसकी चूत का दाना रगड़ने लगा, उन्माद में बोला- वाह, क्या चिकनी और फूली हुई चूत है रानी।

मुन्नी सिसकारियाँ लेती हुई बोली- निगोड़ी को चोद दीजिए न ! आज सुबह उठकर आपके लिए ही चिकनी करी है।

मैंने कहा- मुन्नी जान, पहली बार जब भी मैं किसी औरत को चोदता हूँ तो वो अपनी चूत खुद खोलती है, अब जल्दी से अपनी चड्डी उतारो और अपनी चूत को चौड़ा करो, फिर तुम्हें जन्नत का मज़ा दूँगा।

मुन्नी चटाई पर लेट गई और अपनी चड्डी उतार कर उसने साड़ी और पेटीकोट ऊपर तक उठा दिया, सामने उसकी पाव भाजी की तरह फूली हुई गुदाज़ चूत दिखने लगी, अब अपने पर काबू रखना मुश्किल था, मैंने लण्ड उसकी चूत के मुँह पर रख दिया।

मुन्नी पूरी गरम थी, बिना देर किये उसने नीचे सरकते हुए लण्ड चूत में डलवा लिया और सिसकारियाँ भरते हुए बोली- आह, चोदो न ! बड़ा अच्छा लग रहा है, क्या मोटा लण्ड है।

उसकी चूत में लण्ड पेल कर मैंने चुदाई शुरू कर दी। वो गर्म आहें भर रही थी और चुदने का पूरा मज़ा ले रही थी। खुले में मुन्नी की चुदाई का अलग ही मज़ा आ रहा था।

थोड़ी देर बाद उसने अपनी टांगें मेरी पीठ पर मोड़ लीं और ढेर सारा पानी छोड़ दिया, उसकी बुर झड़ गई थी।

मैंने उसे उठा दिया, मेरा लण्ड अभी गर्म था, अबकी मैंने उसे आधा लेटा कर घोड़ी बना दिया और उसकी चूत में पीछे से अपना लोड़ा लगा दिया, दोनों चूचियाँ हाथों से दबाते हुए खुले में उसकी चोदने लगा, वो मस्ती भरी उह… आह… ऊई… से अपनी ख़ुशी जाहिर करने लगी।

कुछ देर चोदने के बाद मैंने वीर्य उसकी चूत में भर दिया।

कपड़े सही करने के बाद मुन्नी मुझसे चिपक गई और बोली- आप मुझे उधार पैसे दे दो, मैं हर महीने हज़ार हजार करके चुका दूंगी। मैंने उसका हाथ दबाते हुए कहा- मुझे क्या फायदा होगा?

मुन्नी बोली- आप जो कहोगे वो करने को मैं तयार हूँ। अगर मुझे पैसे नहीं मिले तो मैं बर्बाद हो जाऊँगी।

उसने बोलना जारी रखा, वो बोली- रसोई में मैंने संभाल कर दाल के डिब्बे में पैसे रखे थे, पता नहीं कौन ले गया। जब दो दिन पहले मैंने देखा तो खाली लिफाफा रखा था।

‘तुम किसी उधार देने वाले साहूकार से उधार क्यों नहीं ले लेतीं?’

मुन्नी रोते हुए बोली- साहूकार तो बुरी तरह लूट लेते हैं, एक बार इन्होंने दो हजार लिए थे, पूरे पांच हजार लौटने पड़े कुछ ही महीने बाद। सबको यह भी पता है कि हम पर पैसों की तंगी है। मेरी एक सहेली अंजना तो दस हजार के उधार के चक्कर में इतनी बुरी फंसी की उसके पति ने ही उससे परेशान होकर उसे कोठे पर बेच दिया। इन्हें पता चल गया तो ये भी मुझे कोठे पर बेच देंगे, पहले भी एक बार मैं इन्हें पाँच हजार का चूना लगा चुकी हूँ। बाप रे ! रंडी बनने से तो अच्छा है आपसे ही चुद लूँ। मैं वादा करती हूँ आपको अभी जैसा मज़ा दिया उससे भी ज्यादा जब भी आप कहोगे, तब दूंगी और पैसे भी लौटा दूंगी।

मुन्नी को झूठी सहानभूति दिखाते हुए मैंने कहा- दस हजार रुपए भाभी के पास रखे हैं, बाकी रुपए मुझे उधार लेने पड़ेंगे। मैं पैसे का तो इंतजाम कर दूंगा लेकिन तुम्हारा विश्वास कैसे करूँ?

मैंने कहा- भाभी ने मुझे तुम्हारे बारे में सब बता दिया है किस तरह से तुमने उन्हें बेइज्ज़त करके चाल से निकलवा दिया था।

मुन्नी रोते हुए बोली- हाँ, मुझसे गलती हो गई थी। गीता के चिंटू से सम्बन्ध बहुत पहले से हैं। गीता उससे चुदती रहती थी। मैं कुसुम को अपने पास कमरा दिलवाना चाहती थी। उस दिन हमने और कुसुम ने प्लान करके रंगे हाथों चुदते हुए पकड़ लिया। उधर से मुकुंद सेठ आ गए और उन्होंने घर खाली करने को कह दिया साथ ही साथ चुप रहने के बदले अपना लोड़ा भी गीता को हम दोनों के सामने चुसवाया। दो हजार रुपए मैंने भी चुप रहने के ले लिए थे, मैं उन्हें वो दो हजार रुपए वापस कर दूंगी।

मैंने कहा- भाभी मुझे इतने प्यार से रखती हैं, उनकी सहमति के बिना मैं और पैसे तुम्हें नहीं दूंगा और अपनी प्यारी भाभी की बेइज्ज़ती का बदला तो लेना ही पड़ेगा। भाभी की कुछ शर्तें हैं, अगर तुम उनकी बात मान लोगी तो मैं तुम्हें पैसे के साथ साथ एक सुंदर इनाम भी दूँगा, तुम खुश हो जाओगी। शाम को तुम मोहन भैया के आने से पहले भाभी से मिलो।

मुन्नी बुझे हुए चेहरे के साथ बोली- ठीक है, शाम को आती हूँ।

कहानी जारी रहेगी।

 
मैं घर चार बजे पहुँच गया, भाभी को जब मैंने यह सब बताया तो उनकी ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा, उन्होंने मुझे बाहों में भर लिया और मेरी तीन चार पप्पी ले लीं।

उसके बाद हम लोगों ने आपस में योजना बनाई कि भाभी की बेइज्ज़ती का बदला कैसे लेना है।

मैंने भाभी से पूछा- मुन्नी रुपयों के लिए चुदने को क्यों तैयार है? अपने पति को चोरी की बात क्यों नहीं बता देती?

भाभी हँसते हुए बोली- ये सुसरी मुन्नी बड़ी बदमाश है। पहले कई बार अपने पति से छुपकर घर पैसे भेज देती थी।

एक बार इसके पति ने सबके सामने इसकी खूब पिटाई करी और साथ ही बोल दिया कि तुझे कोठे पर बेच दूँगा, तबसे डरी हुई है। इसका पति तो यह मानेगा ही नहीं कि पैसे चोरी हो गए हैं।

मुन्नी शाम को सात बजे भाभी के कमरे में आ गई थी भाभी के चेहरे पर मुस्कान थी, हँसते हुए बोली- आओ मुन्नी आओ ! राकेश ने मुझे सब बता दिया है। तुमने तो मुझे बदनाम करने की कोई कसर ही नहीं छोड़ी थी और मेरी चूत चुदाई का खूब मज़ा लिया था। लेकिन मैं तुझे बदनाम नहीं होने दूँगी। मज़बूरी तो औरतों को रंडी भी बना देती है। अंजना का तो तुझे पता ही है इस उधारी के चक्कर में उसने अपना मंगलसूत्र और सास का जेवर बेच दिया था उसके पति ने परेशान होकर उसे चंपा बाई के कोठे पर बेच दिया था… कल राखी बता रही थी कि मुन्नू दूधवाला उसे कोठे पर चोद कर आया था। बेचारी रो रही थी कह रही थी रोज़ दस बारह लण्ड डलवाती है चंपा बाई। तू भी उस दिन मुझे रंडी बना कर छोड़ती वो ! तो मुकुंद सेठ मान गए थे किसी को पता नहीं चला।

मुन्नी बोली- दीदी, मुझे मेरी करनी के लिए माफ़ कर दो। आप ही मुझे आज मेरी मुसीबत से बचा सकती हो। राकेश भैया से उधार दिला दो न ! मैं आपके लिए हुए दो हजार और उधार के पैसे हर महीने कुछ कुछ देकर चुका दूँगी।

‘देख मुन्नी, विश्वास तो मेरा अब तुझ पर रहा नहीं ! पैसे मैं तुझे देवर राकेश से दिलवा दूंगी लेकिन इसके लिए तुझे अपनी नंगी फोटो खिंचवानी पड़ेंगी और राकेश भैया से मुकुंद सेठ के सामने चुदना पड़ेगा। पैसे देती जाना और अपनी फोटो लेती जाना ! ब्लैकमेल मैं करती नहीं, लेकिन बदमाश को बदमाशी से ही पकड़ा जाता है। राकेश जी ब्याज में तेरी जवानी का रस पी लेंगे पर तूने हर महीने मूल के एक हजार नहीं दिए तो राकेश के दोस्तों को भी अपनी जवानी का रस पिलाना पड़ेगा। बदले में मूल ये अपने दोस्तों से ले लेंगे और यह पूरी चाल में पता है कि मैं वायदे की पक्की हूँ।’

मुन्नी को सांप सूंघ गया और वो वहाँ से उठकर चली गई।

मैं और भाभी अकेले थे। मैंने भाभी के ब्लाउज के अंदर हाथ डाला और चूचियाँ मलते हुए बोला- कुतिया कल सुबह दुबारा आएगी और देखना तुम्हारे सामने नंगी होकर मेरे लोड़े पर पर बैठेगी।

अगले दिन मोहन के जाते ही मुन्नी अंदर आ गई और बोली- दीदी, मेरी इज्ज़त तुम्हरे हाथ में है। राकेश भैया से तो मैं चुद लूँगी लेकिन मुकुंद सेठ को मत बीच में लाओ, नहीं तो तुम्हारी तरह ही मुझे भी वो चाल से निकलने को कहेगा और मेरी फोटो मत खींचना, किसी के हाथ पड़ गईं तो मैं कहीं की नहीं रहूँगी। मैं आपके पैर पकड़ती हूँ।

मुन्नी आगे बढ़कर भाभी के पैर छूने लगी। भाभी के चेहरे पर जीतने की मुस्कराहट थी, मेरी तरफ देखती हुई बोली- औरत औरत का सम्मान नहीं करेगी तो कौन करेगा।

उन्होंने मुन्नी को हटाते हुए कहा- चल तेरी बात मानी ! अब न तो मैं मुकुंद सेठ को बुलाऊँगी, न ही तेरी फोटो खिंचवाऊँगी लेकिन बदले में मुन्नी के साथ साथ तुझे अपनी चुन्नी भी चुदवानी पड़ेगी।

 
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