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एक दूसरे की बीबीयों के रसभरे होंठ

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Guest
एक दूसरे की बीबीयों के रसभरे होंठ

दोस्तो कहते हैं शादी के पाँच छः साल तो मस्ती में गुजर जाते है पर बाद में थोड़ी नीरसता आने लगती है इसी नीरसता को किस तरह मैने और मेरे दोस्त समीर ने दूर किया यही इस कहानी का ताना बाना है तो दोस्तो ये सुनिए कहानी समीर की ज़ुबानी ..................................

मैं हूँ समीर । आज मेरी ये सच्ची कहानी आप लोगो से शेयर कर रहा हूँ वात्स्यान ने कामसूत्र में योनी को नारी के शारीरिक आकर के हिसाब से ४ तरह से लिखा , जैसे शशक (खरोगश ), हिरनी , घोड़ी(अश्वनी) और हथनी ...शायद उस वक़्त वात्स्यान के दिमाग में सिर्फ योनी का आकर ही इक महत्वपूर्ण कारक था , इसलिए उसने योनी के आकर के हिसाब से नारी की वयख्या कर दी ...की सबसे छोटे कद की खरोगश और सबसे बड़े कद की हथनी ...और तो और उनके सफल और आनंदायक सम्भोग के लिए उन जैसे साथी का चयन भी बता दिया ...

पर मेरे अनुभव ने नारी की योनी को इन सबसे अलग इक नयी तरीके की वयख्या दी और योनी की सुन्दरता का इक पैमाना बनाया ...मेरे अनुभव ने यह समझाया की किसी भी नारी या पुरुष के शरीर के अनुपात में उसका गुप्तांग हो ऐसा जरुरी नहीं है , इसलिए किसी भारी भरकम नारी जो वात्स्यान के हिसाब से हथनी वाली श्रेणी में आती है की योनी का आकर भी बड़ा होगा और उसे सम्भोग में अपने जैसे हाथी टाइप बड़े आदमी से पूर्ण संतुष्टि मिलेगी , यह भी इक मिथ है ...

मेने उस दिन और बाद में भी जेंटलमैन क्लब में नारी की कई तरह की योनियाँ देखि , कई बार तो अच्छे लम्बे कद की लड़की की योनी बहुत छोटी और सिकुड़ी सी होती , इसके विपरीत इक छोटे कद की लड़की की योनी बड़े आकर में फैली सी होती और दोनों के योनी मार्ग भी उनकी योनियों के आकर अनुपात के हिसाब से ना होकर कभी बहुत ज्यादा खुले या तंग होते ...

मेने नारी की योनी को इक ऐसी श्रेणी में रखा जिसमे योनी की तुलना हम किसी संकरी सी गली के आगे लगे दरवाजे से कर सकते है ...इसे ऐसा समझे जैसे किसी घर के आगे इक दरवाजा है जिसमे दो पल्ले(कपाट) लगे है यानी दो किवाड़ वाला दरवाजा है ....अब यह उस दरवाजे की हालत पे निर्भर करता है की

1.दोनों कपाट इस तरह से भिड़े है की वह दोनों जुड़ कर लगभग बंद जैसे लगते है और उन दोनों कपाट के जुड़ने से दोनों के बीच में हलकी सी इक झिरी सी दिखती हो या

२. दोनों कपाट अंदर की तरफ थोड़े से खुले है, जैसे किसी ने दोनों दरवाजो को घर के अंदर धकेल का हल्का सा खोल कर छोड़ दिया है या

3. दोनों कपाट बहार की तरफ ऐसे खुले है जैसे किसी ने हड़बड़ी में दरवाजे बहार की तरफ खोल कर छोड़ दिए है या

४. इक कपाट के ऊपर दूसरा कपाट ऐसे सा चढ़ा , जैसे दरवाजा बंद करते वक़्त किसी ने अनाड़ीपन में इक कपाट पे दूसरा कपाट लगा कर छोड़ भर दिया है

मेरे अनुभव ने नारी की योनी को उनकी सुन्दरता , आकर और शारीरिक आकर के हिसाब से देखा और परखा , क्योकि नारी की योनी किसी विशेष समुदाय , देश ,रंग और जीन्स के हिसाब से अपना आकर लेती है और योनी की सुन्दरता और विशेषता या ऐसी नारी के प्रति पुरुषो में इच्छा भी उसके देश में उसी हिसाब से मापी भी जाति है ...

इन चारो श्रेणी की नारी में योनी का आकार बड़ा या छोटा कुछ भी हो सकता है और किसी व्यक्ति विशेस का अपनी योनी को स्वच्छ और साफ़ सुथरा रखना भी , योनी की सुन्दरता में चार चाँद लगा देता है ...एशियाई देश की अधिकतर नारी अपनी योनी के आसपास छोटे बाल रखती है और जापान में ऐसी योनी को बहुत आकर्षक भी माना जाता है ...इसके विपरीत योरोप के देश में अधिकतर नारी क्लीन शेव योनी रखती है या योनी के पास बाल की इक पतली लाइन सी और ऐसी योनी पुरुषो के आकर्षण का केद्र बिंदु भी होती है .....किसी पुरुष को नारी की सुनहरी या सांवली योनी में तो किसी को हलकी गुलाबी योनी में आकर्षण लगता है

मेने जितनी भी तरह की योनी को देखा और परखा , तो लगा योनी की तुलना होठो से की जा सकती है मुझे वह योनी सबसे ज्यादा आकर्षक लगी जिसमे दोनों कपाट जुड़ कर बंद से प्रतीत होते है , क्योकि यह ऐसी प्रतीत होती है जिसे किसी खुबसूरत लड़की के पतले होठ इक लिपस्टिक से सज कर जुड़े से हो , पर होठ अगर ज्यादा मोटे हो यां लटके हो तो उनमे इक तरह की बदसूरती सी आ जाति है , हो सकता है किसी को उस तह के होठ पसंद हो , क्योकि अभी कुछ दिन पहले फ़िल्मी हेरोइनो में मोटे होठो का फैशन बड़े जोरो पर था ...

मेरे अनुभव से किसी योनी के मार्ग में आगे की तरफ लटकी छोटी सी खाल जिसे मेडिकल टर्म में लाबिया मिनोर्मा (लघु कोष्ठ) बोलते है का ज्यादा फैला होना योनी की सुन्दरता को कम कर देता है ...उसका बहुत कम होना भी योनी की सुन्दरता को कम करता है ...अगर यह हद से ज्यादा हो तो सम्भोग में नारी को अनचाही दिक्कत का सामना भी करना पड़ता है , पर इसके विपरीत अगर यह थोडा आकर में छोटा हो तो , पार्टनर द्वारा मुख मैथुन में नारी को अतिरिक्त संतुष्टि और आनन्द देना वाला भी हो जाता है .... इसके विपरीत इसका ना होने से योनी में इक तह का अपना आकर्षण होता है

कितनी सारी योनियों में कंही किसी का द्वार बहुत बड़ा तो कंही सिकुड़ा सा होता , कंही लाबिया कुरूपता की हद तक लटकी होती तो कंही वह नाममात्र की जगह लेकर योनी को इक सुरक्षा कवर सा प्रदान करती , किसी किसी नारी की योनी के आसपास , लगी खरोचे या हलके दाने उनके प्रति इक अजीब सी उबकाई पैदा करते , तो किसी की योनी की चमक , उसके प्रति इक अजीब सी कशिश भी पैदा करती ...

कहने का तात्पर्य यह है की , किसी नारी का चेहरा खुबसूरत, सांचे में ढला बदन और कामुक अदाए हो और उसकी योनी भी सुंदर और आकर्षित हो ऐसा बहुत ही कम देखने को मिलता , कई बार नारी की लापरवाही उनकी योनी में अनजानी बदसूरती भी उड़ेल देती ....जबकि वह नारी हर लिहाज से अनुपम सुन्दरी होती है

 
इसी खोज में मेने कई तरह की योनियों का अध्यन किया और आज भी जब किसी खुबसूरत नारी को देखता हूँ तो मेरा मन खुद से यह सवाल करता है की , इसकी सुन्दरता किस पैमाने से नापूं , इसे शारीरक रूप से देखू या इसकी अदाए कितनी मतवाली है या इसकी आँखे कितनी गहरी या इसकी चाल कितनी मस्त है या इसके होठ कितने रसीले या इसके बाल कैसे लहराते है या इसके गाल कैसा मीठा अहसास जगाते है या इसके उरोज कितने कामुक है या इसकी टांगे कितनी चिकनी होंगी यह कपड़ो में ज्यादा खुबसूरत होगी है या बिना कपड़ो के या इसका दिल कितना खुबसूरत है वह समझू ....

अगर यह बिना कपड़ो के होगी तो क्या इसका शरीर सांचे में ढला जैसा होगा या फिर इसके उभार कसमसाते से होंगे या फिर इसकी योनी की खूबसूरती मुझे मतवाली बना सकेगी .....

अगर मैं आप लोगो से पुछु की नारी की योनी की सुन्दरता के क्या मापदंड है तो शायद अधिकतर आदमी बगले झाँकने लगेंगे , क्योकि योनी में भी सुन्दरता का कोई मापदंड हो सकता है ऐसी सोच शायद अभी विकसित नहीं हुई है या पुरुष इतनी दूर तक सोच नहीं पाया ?

इसके विपरीत नारी के मन में परुष के लिंग को लेकर कंही ना कंही इक सोच छीपी होती है , यह और बात है की अधिकतर नारी अपनी सोच को अपने मन के किसी कोने में दफना देती है और वह इस सोच को अपने पति या प्रेमी से कितना भी खुला होने के वावजूद उसे बताने में संकोच करती है .....पर यह सोच उसके उत्तेजित होने और चरम अवस्था में पहुँचने पर ही मालुम होती है ...की नारी की लिंग के प्रति क्या सोच है , वह उसे सिर्फ इक मिलन का माध्यम समझती है या बच्चे पैदा करने भर का अस्त्र या शारीरिक सुख का माध्यम या फिर उसमे उसे इक ऐसा विशेष आकर्षण होता है , जिसकी कल्पना वह सिर्फ अपने मन में करती है

एक बार मेरे ऑफिस में सारे स्टाफ का मिलन समारोह हुआ। वहां स्टाफ पति बीबी के साथ में आमंत्रित थे। मेरी बीबी रुखसार की जवानी और खिली हुयी लगती थी। वह उस समय कोई २८ साल की होगी। हमारी लव मैरिज हुई थी।

रुखसार अत्यन्त सुन्दर थी। वह कमर से तो पतली थी पर उसके उरोज (मम्मे) पूरे भरे भरे और तने हुए थे। उसका बदन लचीला और उसकी कमर से उसके उरोज का घुमाव और उसके नितम्ब का घुमाव को देख कर आदमियों के मुंह में बरबस पानी आ जाना स्वाभाविक था। उसे आदमियों से बात करने में कोई झिझक नहीं होती थी।

रुखसार के कॉलेज में हजारों लड़को में कुछ ही लड़कियां थी। उनमे से एक रुखसार थी। परन्तु वह मन की इतनी मज़बूत थी की कोई लड़का उसे छेड़ने की हिम्मत नहीं जुटा पाता था। कई बार शरारती लड़कों को चप्पल से पीटने के कारण वह कॉलेज में बड़ी प्रख्यात थी। कॉलेज के लड़कों के मन में रुखसार को पाने की ख्वाहिश तो थी।

पर न पा सकने के कारण उसकी पीठ पीछे कई लड़के रुखसार के बारेमें ऐसी वैसी अफवाएं जरूर फैलाया करते थे। खास तौर से मैंने कॉलेज के कुछ लडकों को यह कहते सुना था की रुखसार का उसके साथ या किसी और के साथ अफेयर था। वह कॉलेज में लडकोसे बिंदास मिलती थी पर किसकी क्या मजाल जो उससे भद्दा मजाक करने की हिम्मत करे।

मिलन समारोह में मैंने देखा की सारे पुरुष वर्ग मेरी बीबी रुखसार को छिप छिप कर घूर रहे थे। उन बेचारों का क्या दोष? मेरी बीबी रुखसार थी ही ऐसी। उसके स्तन एकदम भरे हुए पके बड़े आम की तरह अपने ब्लाउज में बड़ी मुश्किल से समा पाते थे। मेरी बीबी के स्तनों का नाप ३४ से कम नहीं था। मैं अपनी हथेली में एक स्तन को मुश्किल से ले पाता था। उसकी पतली कमर एवं नोकीले सुन्दर नितम्ब ऐसे थे के उसे देख कर ही अच्छे अच्छों का पानी निकल जाए। वह हमेशां आदमियों की लालची और स्त्रियों की ईर्ष्या भरी नज़रों का शिकार रहती थी।

हमारी शादी को आठ साल हो चुके थे और कहते है की आठ साल के बाद एक तरह की खुजली होती है जिसे कहते है आठवें साल की खुजली (seven year itch)। तब अजीब ख्याल आते है और सेक्स में कुछ नयापन लाने की प्रबल इच्छा होती है।

शादी के कुछ सालों तक तो हमारी सेक्स लाइफ बड़ी गर्मजोश हुआ करती थी। हम २४ घंटों में पहले तो तीन तीन बार, फिर दो बार, फिर एक बार ओर जिस समय की मैं बात कर रहा हूँ उनदिनों में तो बस कभी कभी सेक्स करते थे। शादी के आठ सालों के बाद बहुत कुछ बदल जाता है। पति बीबी के बीच कोई नवीनता नहीं रहती।

एक दूसरे की कमियां और विपरीत विचारों के कारण वैमनस्य पारस्परिक मधुरता पर हावी होने लगता है। और वैसे ही पति बीबी एक दूसरे को “घर की मुर्गी दाल बराबर” समझने लगते हैं। उपरसे बच्चों की, नौकरी की, घर की, समाज की, भाई बहनों की, माँ बाप की, बगैरह जिम्मेदारी इतनी बढ़ जाती है की सेक्स के बारे में सोचने का समय बहुत कम मिलता है।

सामान्यतः मध्यम वर्ग की बीबियों पर बोझ ज्यादा रहता है। इस कारण वह शाम होते होते शारीरिक एवं मानसिक रूपसे थक जाती है। वह अपने पति के क्रीड़ा केलि आलाप की ठीकठाक प्रतिक्रया देने में अपने को असमर्थ पाती है। उस समय पारस्परिक आकर्षण कम हो जाता है। अक्सर रुखसार थक जाने की शिकायत करती और जल्दी सो जाती।

गरम होने पर भी मुझे मन मसोस कर सो जाना पड़ता था। इस कारण धीरे धीरे मेरे मनमे एक शंका ने घर कर लिया की शायद वह मेरी सेक्स करने की क्षमता से संतुष्ट नहीं है। बात भी कुछ हद तक गलत नहीं थी। जब वह गरम हो जाती थी तब कई बार उस से पहले ही मेरा वीर्य स्खलन हो जाता था। तब मेरी बीबी शायद अपना मन मसोस कर रह जाती होगी। हालांकि रुखसार ने मुझे कभी भी इस बारें में अपनी कोई शिकायत नहीं की।

मेरी बीबी को सेक्स में ज्यादा रस नहीं रहा था। जब मैं सेक्स के लिए ज्यादा तड़पता था और उसे आग्रह करता था, तो वह अपनी पैंटी निकाल कर, अपना घाघरा ऊपर करके, अपनी टाँगे खोलकर निष्क्रिय पड़ी रहती थी जब मैं उसे चोदता था। मुझे उसके यह वर्ताव से दुःख होता था, पर क्या करता?

पर कभी कबार अगर जब कोई कारण वश रुखसार गरम हो जाती थी तो फिर खुब जोश से चुदाई करवाती थी। जब वह गरम होती थी तो उसे चोदने का मज़ा ही कुछ और होता था। इसी लिए मैं ऐसे कारण ढूंढ़ता था जिससे वह गरम हो जाए।

मेरी बीबी को घूमने फिरनेका और सांस्कारिक कार्यक्रमों, नाटकों और फिल्मों देखने का बड़ा शौक था। ऐसे मौके पर वह बनठन कर तैयार हो जाती थी। और अगर उसको वह प्रोग्राम में मझा आया तो वह बड़े चाव से उसके बारे में बात करने लगती और फिर मैं उसीकी ही बात को दुहराते हुए उसके कपडे धीरे धीरे निकालता, उसके मम्मों को सहलाता और उसकी फुद्दी में उंगली डाल कर उसे गरम करता। उस समय बाते करते हुए वह भी गरम हो जाती और बड़े आनंद से मेरा साथ देती और मुझसे अच्छी तरह चुदवाती। पर ऐसा मौक़ा ज्यादा नहीं मिलता था।

हालांकि मेरी बीबी रुखसार बहुत शर्मीली, रूखी और रूढ़िवादी (मैं तो यही सोचता था) सी थी, पर जब उसे बाहर घूमने का मौका मिलता था तो वह बड़े चाव से बनठन कर तैयार होती थी। उसे कपडे पहननेका शौक था और उस समय वह शालीनता पूर्वक अपने सिमित अंग प्रदर्शन के बारे में ज्यादा चिंतित नहीं रहती थी।

उस मिलन समारोह में अपने घने लम्बे बाल रुखसार ने खुले छोड़ रखे थे। इससे तो वह और भी सेक्सी लग रही थी। उसने साड़ी तो पहन रक्खीथी पर अंचल की परत ऐसी थी की उसकी पूरी पतली कमर दिख रहीथी जिसमे उसकी नाभि और नितम्ब का उभार पर सब ताक रहे थे। वहाँ ऐसा लग रहाथा जैसे सिर्फ मेरी बीबी ही वहां थी और कोई औरत थी ही नहीं।

हालाँकि वहां करीब दस औरतें थीं। मुझे आदमियों के रुखसार को लालची निगाहों से देखना, पता नहीं क्यों, अच्छा लगता था। एक कारण तो यह था की मुझे बड़े गर्व का अनुभव होता था की मेरी बीबी उन सब की बीबियों से ज्यादा सुन्दर है।

तब घोषणा हुई की अब डांस होगा। सब को अपने साथीदार के साथ डांस फ्लोर पर आने के लिए कहा गया। उस पार्टी में मेरे बॉस ने रुखसार के साथ कुछ ज्यादा ही छूट लेने की कोशिश की। वह रुखसार के पास गया और उसने अपने साथ डांस करने के लिए रुखसार का हाथ पकड़ा और उसे खींचने लगा। रुखसार ने उसे जोरसे झटका दिया। मेरा बॉस लड़खड़ा गया। खिसियाता हुआ वह कहीं और चला गया। बॉस को रुखसार पर लाइन मारते देख मेरे अंदर एक अजीब तरह का रोमांच हो रहा था।

 
उस पार्टी में मेरा एक दोस्त राज था। हम साथ में ही काम करते थे। वह मेरी ही उम्र का था और अच्छा लंबा तंदुरस्त और सुगठित मांस पेशियोँ वाला था। उस समय उसकी कोई ३०-३२ साल की उम्र रही होगी। वह गोरा चिट्टा और गोल सा चेहरे वाला था। उसके बाल जैसे काले घने बादल समान थे।

उसने मैरून रंग की शर्ट पहनी थी और गले में स्कार्फ़ सा बाँध रख था। उसकी धीमी और नरम आवाज और सबके साथ सहजसे घुलमिल जानेवाले स्वभाव के कारण सब उसे पसंद करते थे। यहां तक के सारी स्त्रियां भी उससे बात करने के लिए उतावली रहतीं थी। वह आसानी से महिलाओ से अच्छी खासी दोस्ती बना लेता था।

पहली बार जब मैंने उसे मेरी बीबी रुखसार से मिलाया तो वह रुखसार को घूरता ही रह गया। जब उसे लगा की वह ज्यादा देर तक घूर रहा था तो उसने बड़ी विनम्रता और सहजता से माफ़ी मांगते हुए कहा, “भाभी जानजी, मुझे आपको घूर घूर कर देखने के लिए माफ़ कीजिये। मैंने इससे पहले आप सी सुन्दर लड़की नहीं देखी। मैं तो सोच भी नहीं सकता के आप शादी शुदा हैं। ”

भला कोई अगर एक शादी शुदा एक बच्चे की मांको बताये की वह एक बहुत सुन्दर लड़की है, तो वह तो पिघल जायेगी ही। बस और क्या था? मेरी बीबी रुखसार तो यह सुनते ही पानी पानी हो गयी और बाद में मुझसे बोली, “आपका दोस्त वास्तव में बड़ा सभ्य और शालीन लगता है। क्या वह शादी शुदा है?”

तभी उसकी बीबी डॉली जो कही बाहर गयी थी उसे मैंने देखा और मैं रुखसार से मिलवाने के लिए गया। डॉली थोड़ी लम्बी और तने हुए बदन की थी। उसकी मुस्कुरान मुझे बहुत आकर्षक लगती थी। दोनों पत्नियां मिली और थोड़ी देर बातचीत करने के बाद रुखसार और मैं एक और कपल से बातचीत करते हुए दूसरे कोने में जा के बैठ गए।

मैं देख रहा था की बार बार घूम फिर कर राज की आँखे मेरी बीबी को ताक रहीं थी। शायद रुखसार ने भी यह महसूस किया होगा, पर वह कुछ न बोली। मुझे ऐसे लग रहा था जैसे वह रुखसार पर फ़िदा ही हो गया था। राज की बीबी डॉली किसी और महिला से बातचीत करनेमें व्यस्त थी। मैंने देखा की राज खड़ा हो कर हॉल में इधर उधर घूम रहा था। घूमते घूमते जैसे स्वाभाविक रूपसे वह हमारे सामने आ खड़ा हुआ।

बड़ी सरलता से उसने अपना हाथ लम्बाया और अपना सर थोड़ा झुका कर उसने रुखसार को डांस करने को आमंत्रित किया।

रुखसार ने भोलेपन से कहा, “पर मुझे तो डांस करना नहीं आता।”

राज ने कहा, “यहां डांस कर रहे लोगों में से कितनों को आता है? तुम चिंता मत करो। मैं तुम्हे कुछ स्टेप्स सीखा दूंगा।“

रुखसार ने मेरी तरफ देखा। वह मेरी इजाजत चाह रही थी। मैंने अपना सर हिला कर उसे इजाजत दे दी। रुखसार तैयार हो गयी। मैंने देखा की राज मेरी बीबी को अपनी बाँहों में लेकर एक हाथ उसकी कमर दूसरा उसके कंधे पर रखकर एकदम करीब से उसे स्टेप्स सीखा ने लगा। उनके डांस शुरू करने के दो तिन मिनट में ही संगीत की लय धीमी हो गयी जिससे डांस करने वाले एक दूसरे से लिपट कर डांस कर सके।

मैं उसी समय वाशरूम में जानेका बहाना करके खिसक गया और ऐसी जगह छिप गया जहाँसे मैं तो उन्हें देख सकता था, पर वह मुझे नहीं देख सकते थे। मेरी बीबी बीच बीच में मुझे ढूंढ ने का प्रयास कर रही थी। मैंने देखा की राज मेरी बीबी के साथ कुछ ऐसे स्टेप्स लेता था जिससे उन दोनों की कमर और उससे निचला हिस्सा और जिस्म एकदूसरे के साथ रगड़े। इस तरह दोनों ने थोड़े समय डांस किया।

राज को मेरी बीबी के साथ अपने शरीर को रगड़ते हुए डांस करते देख कर मैं एकदम उत्तेजित सा हो गया। मुझे इसकी ईर्ष्या आनी चाहिए थी। पर उल्टा मैं तो गरम हो गया। पतलून में मेरा लण्ड खड़ा हो गया; जैसे की मैं चाहता था की राज मेरी बीबी के साथ और भी छूट ले। मुझे मेरी बीबी का पर पुरुष के साथ शारीरिक सम्बन्ध का विचार उकसाने लगा।

जब मैं वापस आया तो राज की बीबी उसके पति को मेरी सुन्दर बीबी के साथ करीब से डांस करते देख रही थी। मुझे डॉली बहुत सुन्दर लग रही थी। मैं राज की बीबी डॉली की और बहुत आकर्षित था, पर अपने विचारों को मन में ही दबा कर रखता था।

डॉली का आकर्षण मुझे तीन कारणों से बहुत ज्यादा लगा। एक उसकी सेक्सी आँखें। मुझे हमेशा ऐसा लगता था जैसे वह मुझे अपने पास बुला रही है और चुनौती दे रही है की हिम्मत हो तो पास आओ। दूसरे उसके भरे और उफान मारते हुए स्तन (मम्मे ) जो उसके ब्लाउज और ब्रा का बंधन तोड़कर खुल जाने के लिए व्याकुल लग रहे थे।

जैसे ही वह चलती थी तो उसकी छाती के दोनों परिपक्व फल ऐसे हिलते थे जैसे बारिश के मौसम में हवा के तेज झांको पर डालियाँ हिलती हैं। और तीसरे उसके कूल्हे। उसके बदन के परिमाण में वह थोड़े बड़े थे। पर थे बड़े सुडौल और सुगठित। अक्सर औरतो के बड़े कूल्हे भद्दे लगते हैं। पर डॉली के कूल्हों को नंगा करके सहलाने का मेरा मन करता था।

मैंने आगे बढ़ कर उसको डांस करने के लिए आमंत्रित किया। वह मना कैसे करती? जिसकी बीबी उसके पति के साथ डांस कर रही हो तो उसी के पति के साथ डांस करने से हिसाब बराबर हो जाता है न? राज की बीबी तैयार हो गयी। वह बहुत सुन्दर थी। शायद रुखसार और डॉली में सुंदरता का मुकाबला हो तो यह कहना बड़ा मुश्किल होगा की कौन ज्यादा सुन्दर है। फर्क सिर्फ इतना ही था की डॉली थोड़ी सी ज्यादा भरे बदन की थी, जब की रुखसार थोड़ी सी पतली थी। ज्यादा फर्क नहींथा।

 
मैं डांस ख़त्म होने के बाद जब अपनी बीबी से मिला तो मैंने उसको ये जताया की उनके डांस शुरू होने के तुरंत बाद मैं वाशरूम गया था और वहां कोई मिल गया था उससे बात कर रहा था। ये जाहिर होने नहीं दिया की मैंने उसको और राज को बदन रगड़ते हुए डांस करते देखा था।

जब हम वापस जा रहे थे तो मैंने रुखसार से कहा, “कहीं ऐसा न हो के बॉस नासमीर हो जाए। तुमने तो आज उसे बड़ा झटका दे दिया।“

तब रुखसार ने मुझसे माफ़ी मांगी और कहा “यदि तुम्हारा बॉस मुझसे प्यार से धीरे से कहता तो शायद मैं उसके साथ डांस करने के लिए मना नहीं करती। परन्तु उसने जबरदस्ती करने की कोशिश की। अगर मेरे पति को कोई आपत्ति न हो तो भला मुझे किसीके साथ भी डांस करने में क्या आपत्ति हो सकती है? आखिरकार मैंने तुम्हारे दोस्त राज के साथ भी तो डांस किया ही था न? तुम बॉस से मेरी तरफ से मांफी मांग लेना।”

मैंने रुखसार से पूछा, “क्या राज के साथ डांस करने में तुम्हे मझा आया?”

रुखसार ने कहा, “इसमें मझे की क्या बात है? एक रस्म है डांस करने की तो मैंने निभाई, वर्ना डांस में क्या रखा है?”

तब मैंने अपनी भोली सी बीबीसे कहा, “सारी कहानी डांस से ही तो शुरू होती है। पहले डांस, फिर एक दूसरे के बदन पर हाथ फेरना फिर और करीब से छूना, छेड़ खानी करना, बार बार मिलते रहना, मीठी मीठी बातें करके पटाते रहना और आखिर में सेक्स।”

रुखसार मेरी तरफ थोडासा घबराते हुए देखने लगी और बोली, “समीर, क्या डांस इसी लिए करते है? फिर तो गड़बड़ हो गयी। मुझे क्या पता? अब राज क्या सोचेगा? वह सोचेगा रुखसार भाभी जान तो फिसल गयी। शायद इसी लिए वह मुझे दुबारा कब मिलेंगे ऐसे पूछने लगा। यह तो गलत हुआ। अब में क्या करूँ?”

मैंने हँसते हुए मेरी प्यारी बीबी से कहा, “तुम ज़रा भी चिंता मत करो। मैं तो ऐसे ही मजाक कर रहा था। ऐसे कोई नहीं समझता। डांस करना तो आम बात है। पर हाँ, मैंने देखा था की राज तुम्हारे साथ डांस करते करते काफी गरम हो गया था। उसकी पतलून में उसका लण्ड खड़ा हो गया था। क्या तुमने अनुभव नहीं किया?” राज और रुखसार ने चिपककर जो डांस किया था उसके बारेमें ना तो मैंने रुखसार से पूछा था ना रुखसार ने मुझे बताया था ।

रुखसार झेंप सी गयी। उसके गाल लाल से हो गए। तब मैं समझ गया की रुखसार ने भी राज के लण्ड को महसूस किया था। शायद वह इसे नजर अंदाज़ कर गयी। मैंने उसे ढाढस देते हुए कहा, “ऐसे तो होता ही है। अगर उसका लण्ड कड़क हो गया तो उसमे उसका क्या दोष? तुम चीज़ ही ऐसी हो। तुम इतनी सेक्सी हो की तुम्हे देखकर ही अच्छे अच्छों का पानी निकल जाये।”

रुखसार थोड़ी देर चुप रही फिर बोली, “तुम भी तो डॉली से बड़े चिपक चिपक कर डांस कर रहे थे। क्या तुम्हारा खड़ा नहीं हुआ था?” अब चुप रहने की बारी मेरी थी।

मैंने धीरे से कहा, “चलो हिसाब बराबर हो गया।”

यह उस समय की बात है जब मैं राजपुर में एक मल्टीनेशनल कंपनी में सीनियर मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव था। उस समय राजपुर बड़ी ही शांत जगह हुआ करती थी। हम एक शांत अच्छी कॉलोनी में रहते थे। राज हमसे करीब ३ किलो मीटर दूर दूसरी कॉलोनी में रहता था।

उस पार्टी के कुछ ही समय के बाद राज ने मेरी कंपनी छोड़ दूसरी कंपनी में ज्वाइन कर लिया। उसे करीब एक साल हो चला था। इस बीच हमारी घनिष्ठता बढ़ी और हम एक दूसरे के घर जाने लगे। राज की बीबी डॉली और मेरी बीबी रुखसार दोनों एक दूसरे की ख़ास सहेलियां बन गयीं।

हम एक दूसरे से चोरी छुपे एक दूसरे की बीबियों को ललचा ने की कोशिश में लगे हुए थे। पर हमें बढ़िया मौका नहीं मिल रहा था। मैं डॉली करीब जाने के लिए लालायित था और राज रुखसार की और आकर्षित हुआ था। पर हमारी पत्नियां एक दूसरे के पति को कोई घास नहीं डाल रही थी। राज और मैं मिलते तो थे पर स्पष्ट बात करने की हिम्मत नहीं जुटा पाते थे।

राज मेरे घर कई बार आता था। कई बार मैं घर में नहीं भी होता था। मेरी बीबी रुखसार उसे पानी चाय पिला देती थी, पर ज्यादा बात नहीं करती थी। राज जब भी मेरी गैर हाजिरी में घर आता था तो रुखसार मुझे राज के आने के बारे में बता देती थी।

एक बार रुखसार ने मुझे कहा की राज की नियत कुछ ठीक नहीं लगती। रुखसार को लगा की वह उसपर शायद लाइन मार रहा है। सुनकर मैं मनमें ही बड़ा उत्तेजित हो गया। यदि राज मेरी बीबी के पीछे पड़ा है तो इससे मैंने दो फायदे देखे।

एक तो यह की राज का इतिहास और चरित्र देखते हुए तो यही लग रहा था रुखसार के साथ वह कुछ न कुछ तो करेगा ही।यह सोच कर मेरी धड़कन बढ़ गयी। मैं चाहता था की मेरी बीबी और राज के बीच बात आगे बढे। तभी तो मैं भी उसकी बीबी के पास आसानी से जा सकता था। हालांकि मेरी बीबी राज से काफी प्रभावित तो थी परन्तु वह राज को जराभी आगे बढ़ने मौका नहीं दे रही थी, ।

 
एक दिन मेरी गैर हाजिरी में राज ने मेरी बीबी रुखसार को एक उपहार देना चाहा। रुखसार ने उसे लेने से सख्ती से इन्कार कर दिया। राज मायूस सा हो गया। जब हम अगली बार मिले तो मैंने उसे दुखी देख कर पूछा की आखिर बात क्या थी। राज ने बताया की वह जोधपुर गया था और वहां से एक अच्छे हेंडीक्राफ्ट के दो सैंपल लाया था जिसमे से एक वह हमें देना चाहता था, पर रुखसार ने उसे हड़का दिया।

राज ने बात बात में मुझसे कहा की उसका मेरे छोटे से बेटे से खेलने का बहुत मन करता है। मेरा बेटा राज से काफी घुलमिल गया था। राज चाहता था की वह उसके लिए कुछ खिलौना लाये, पर वह रुखसार से डरता था। तब मैंने उसे सांत्वना देते हुए कहा की उस रात को मैं रुखसार से बात करूँगा।

उस रात जब हम सोने के लिए तैयार हुए तब मैंने रुखसार से उस बात को छेड़ा। मैंने कहा, “रुखसार डार्लिंग, आपने राज का दिल क्यों दुखाया? वह बेचारा हमारे लिए कुछ छोटी मोटी गिफ्ट लाया तो आपने उसे बुरी तरह से डांट दिया।”

यह सुन रुखसार खिसिया गयी और बोली, “मुझे पता नहीं था की वह इस बारेमें आपसे बात करता है। मैंने सोचा शायद वह आपसे छुपकर मुझसे मिलने आता है और ऐसे उपहार देकर मुझे पटाने की कोशिश कर रहा है।”

मैंने कहा, “नहीं, ऐसा नहीं है। वह मुझे सब कुछ बताता है। मैंने ही उसे हमारे यहाँ आकर मुन्नुसे खेलने के लिए कहा है। उसकी गिफ्ट तुमने वापस की तो वह बड़ा दुखी है। तुम उसकी गिफ्ट का गलत मतलब मत निकालना। मैं मानता हूँ की वह तुम्हारी तरफ कुछ आकर्षित तो है, पर उसमे उसका कोई दोष नहीं। भला कौन मर्द ऐसा है जो तुमसे आकर्षित न होगा? तुम इतनी सेक्सी जो हो।” ऐसा कह कर मैंने बात बात में रुखसार को यह कह दिया की राज उसके प्रति आकर्षित है।

रुखसार ने थोड़ा शर्मा कर कहा, “ठीक है बाबा, गलती हो गयी। तुम कह रहे हो तो अबसे मैं ध्यान रखूंगी तुम्हारे दोस्तका। उसे दुखी नहीं करुँगी, बस? अब तो खुश?” मैंने रुखसार के पास जाकर उसे बाँहों में भर कर एक चुम्बन कर लिया। मुझे ऐसे लगा जैसे मरी बीबी ने मेरी यह बात सुन कर राहत की सांस ली। वह मेरी बात सुनकर खुश दिख रही थी। मुझे लगा जैसे मैंने उसके मन की बात ही कह डाली। शायद उसे खुद अफ़सोस हो रहा था की क्यों उसने राज को डांट दिया।

रुखसार ने भी मेरे होंठ से होंठ चिपका कर और मेरे मुंह में अपनी जीभ डालकर मेरा रस चूसते हुए मेरी बाँहों में सिमटकर बोली, “तुम बहुत ही भले इंसान और एक संवेदनशील पति हो। तुम्हारी जगह कोई और होता तो अपने दोस्त को इतना सपोर्ट न करता। मुझे राज का चाल चलन ठीक नहीं लग रहा था और इसी वजह से मैं उसे दूर रखना चाहती थी। कई बार मुझे लगता है को वह एक अच्छा इंसान है। कभी कभी लगता है की वह मुझ पर डोरे डाल रहा है। अब तुम मुझे रोक रहे हो और उसे छूट दे रहे हो तो फिर मैं क्या करूँ?“

एक पल के लिए मुझे लगा जैसे मेरी बीबी ने अपनी नासमीरगी और असहायता प्रगट की। फिर उस ने आँख नचाते हुए कहा, “मेरी राय में तो ऐसे दोस्त को प्रोत्साहन देना ठीक नहीं , कहीं ऐसा न हो की वह तुम्हारी बीबी को वशमें कर ले और तुम हाथ मलते रह जाओ।“

मैं कहाँ चुप रहने वाला था। मैंने भी रुखसार से उसी लहजे में कहा, “डार्लिंग तुम अपने आप को जानती हो उससे मैं तुम्हे ज्यादा अच्छा जानता हूँ। मैं जानता हूँ की तुम पर कोई कितने ही डोरे डाले या ऐसा हो जाए की आवेश में तुम किसी के साथ कुछ कर भी लो फिर भी तुम मेरी ही रहोगी। हमारे तन मात्र की ही शादी नहीं हुयी, शादी हमारे मन की और परिवार की भी तो हुयी है , सही है या गलत?”

मेरी सीधी सादी बीबी कुछ सोचमें पड़ गयी और फिर अपना सर हिलाते हुए कहा, “हाँ तुम सही कह रहे हो।” फिर वह मुझसे लिपट गयी और बोली, “डार्लिंग क्या सच में तुम्हें तुम्हारी बीबी पर इतना विश्वास है?

उस वक्त ही मैं समझ गया की मेरी घरेलु वफादार बीबी असमंजस में तो है परंतु थोड़ी सी पिघली भी है।

मैंने रुखसार को बाँहों में और करीब दबाते उसके ब्लाउज में हाथ डाला। उसके रसीले स्तन युगल को बारी बारी दबाते और उसकी निप्पल को सहलाते और दबाते हुए और भी छेड़ा। मैंने कहा, “एक बात तो तुमने ठीक कही। राज तुम पर फ़िदा तो है। तुम्हारे लताड़ने पर बेचारा बहुत दुखी था। वह जब तुम को देखता है तो उसकी आँखे बार बार तुम्हारे स्तन पर ही टिक जाती है।”

रुखसार एकदम सहम सी गयी। थोड़ी पीछे हट कर उस ने मेरी बात को खारिज करते हुए कहा, “ऐसी कोई बात नहीं है। तुम मर्दों को तो सेक्स के अलावा और कुछ सूझता ही नहीं। परन्तु राज ऐसा नहीं लगता।”

मैंने उसे और उकसाते हुए कहा, “अच्छा? राज भी तो एक मर्द ही है। अगर फिर भी यदि तुम ऐसा समझती हो की राज ऐसा नहीं है तो चलो एक टेस्ट करते हैं। एक काम करो। तुम उसे थोड़ा उकसाओ। जब वह आये तो उसे अपने कुछ सेक्सी पोज़ दो, फिर देखो। अगर तुम्हे वह कसके बाँहों में जकड न ले तो कहना।” मेरी बीबी यह सुनते ही एकदम गुस्सा कर बोली, “बस भी करो। शर्म नहीं आती अपनी बीबी से ऐसी बाते करते हुए?” रुखसार पलट कर सो गयी।

मैंने उसे बाँहों में जकड कर बोला, ‘अरे भाई माफ़ भी करो। मैं तो मजाक कर रहा था।”

तब रुखसार ने करवट ली और थोड़ा मुस्कुरा कर बोली, “कोई बात नहीं। मैं भी तो खाली गुस्से का दिखावा कर रही थी। ”

मैंने उसे बाँहों में और कस कर दबाया और बोला, “पर रुखसार, एक बात बताऊँ? बेचारा राज, वास्तव में तुम्हारा आशिक हो गया है। वह कभी कबार गलती से या आवेश में तुम्हे थोड़ा छेड़ता या छू लेता है तो बेचारे पर गुस्सा कर उसका दिल मत तोडना।”

 
रुखसार तब एकदम उत्तेजित हो गयी। मेरी बात को टालते हुए मेरे कड़क लण्ड पर हाथ रख कर उस को सहलाते हुए बोली, “तुम भी कमाल के पति हो। अपने दोस्त पर इतने मेहरबान हो। चलो ठीक है, मैं ध्यान रखूंगी, पर देखो तो, यह बेचारा कितना उतावला हो रहा है अपनी सहेली से मिलने के लिए। उसका भी तो ध्यान रखो। अब अपना काम तो पूरा करो।”

मैं समझ गया की रुखसार गरम हो गयी थी । मैं तुरंत अपना पजामा उतार कर नंगा हो गया और फुर्ती से रुखसार के नाईट गाउन को भी उतार दिया। हमारे दो नंगे बदन एक दूसरे के साथ रगड़कर जैसे काम वासना की आग पैदा कर रहे थे। मेरा लंड एकदम फौलाद की तरह कड़क हो गया था। मैंने रुखसार की फुद्दी पर हाथ रखा तो पाया की वह तो अपना रस ऐसे बहा रही थी जैसे झरना बह रहा हो।

मैंने अपनी बीबी को कहा, “जानेमन तुम बड़ी गरम हो गयी हो। क्या बात है?”

रुखसार ने भी उसी लहजे में कहा, “तुम ऐसी बातें कर कर के मुझे गरम जो कर रहे हो।“

उसके बाद रुखसार ने बोलना बंद किया। बोल कैसे पाती? मेरा लण्ड बड़े प्यारसे उसने अपने मुंह में ले जो लिया था। वह उसे ऐसे चूसने लगी जैसे बच्चे बर्फ के गोले में से रस चूसते है। पहले उसे लण्ड चूसना अच्छा नहीं लगता था। परन्तु उस दिन वह मुझे बहुत खुश करना चाहती थी।

उस रात को मैं भूल नहीं पाउँगा। उस ने खूब चुदवाया। वह तिन बार झड़ गयी और मैं दो बार। मुझे लगा जैसे मेरे दोस्त राज का तीर निशाने पर लग रहा था।

मैं सुबह उठ कर तैयार होकर जब ऑफिस जा रहा था तब मैंने जाते जाते रुखसार को एक लम्बी सी किस होठों पर की। फिर बाई बाई करते हुए कहा, “तुम्हे याद तो है ना? एक बार राज को थोड़ा उकसा कर उसका टेस्ट करके तो देखो की तुम सच्ची हो या मैं। बोलो करोगी ना?”

मेरी बीबी रुखसार ने मुझे धक्का देते हुए कहा, “ठीक है बाबा, याद है। मैं सोचूंगी। अब ऑफिस भी जाओगे या यही बातें करते रहोगे?

मैं फिर पलटा और उसको बाँहों में जकड कर बोला, “सोचना नहीं, करना है। बोलो करोगी ना? वादा करो।“

मुझे बाहर आँगन में मस्ती करते हुए देख कर रुखसार हड़बड़ा गयी और बोली, “कैसे पागल हो। क्याकर रहे हो? आसपास सब लोग खड़े देख रहे हैं। ठीक है बाबा मैं करुँगी। वादा करती हूँ। अब तुम जाओ भी।”

मैं हँसते हुए चल पड़ा।

उस दिन दोपहर को मैंने राज से फ़ोन पर पूछा, “रुखसार ने मुझे मैगी के दो पैकेट लाने के लिए कहा था, पर मुझे अभी काम है। मैं जा नहीं पाउँगा। क्या तुम मैगी के दो पैकेट रुखसार को घर दे आओगे? मैं तुम्हारा एहसानमंद रहूँगा।”

मैं जानता था की राज को तो मेरे घर जाने का बहाना चाहिए था। उसे इससे बढ़िया बहाना और क्या मिल सकता था? उसने तुरंत कहा की वह मेरे घर के पास ही कहीं जा रहा था। वह जरूर मैगी के पैकेट पहुंचा देगा। मैंने तुरंत रुखसार को फ़ोन किया और बोला, “रुखसार डार्लिंग, राज थोड़ी देर में हमारे घर आएगा। क्या उसका स्वागत करने के लिए तैयार रहोगी?”

रुखसार ने झुंझलाते हुए कहा, “तुम क्या अभी तक उस बात को भूले नहीं हो? तुम राज की परीक्षा कर रहे हो या मेरी? आखिर तुम चाहते क्या हो?”

मैंने कहा,”तुम मुझे यह बताओ, तुम करोगी या नहीं?”

तब रुखसार ने असहायता दिखाते हुए कहा, “मैं क्या करूँ? ठीक है बाबा, मैं चेंज करती हूँ। लगता है तुम मुझसे कुछ न कुछ उल्टापुल्टा करवाके ही रहोगे पर अगर कुछ गड़बड़ हो गई, तो मुझे दोष मत देना।”

मैंने कहा, “तुम मेरी डार्लिंग हो मैं तुम्हें बहुत प्यार करता हूँ और करता रहूंगा। यह करने के लिए मैं तुम्हे जान बुझ कर कह रहा हूँ। कुछ होगा तो वह मेरी गलती है, ना की तुम्हारी। मैं तुम्हें कभी भी दोष नहीं दूंगा। ”

हमारी बात चित के आधे घंटे में ही राज घर पहुंचा और उसने बेल बजाई पर किसीने दरवाजा नहीं खोला। तब राज ने दरवाजे को धक्का दिया तो दरवाजा खुल गया। जब वह अंदर आया तो घर में कोई नहीं था। उसने बाथरूम में नहाने की आवाज सुनी।

राज समझ गया की रुखसार बाथरूम में नहा रही थी। राज ड्राइंग रूम में बैठ कर इंतेजार करने लगा। तभी बाथरूम के अंदर से आवाज आयी, “सुचित्रा, मैं आती हूँ। तू रसोई में जा कर बर्तन साफ़ कर।” सुचित्रा हमारे घर में सफाई, बर्तन, पोछा इत्यादि करती थी। राज समझ गया की रुखसार को लगा की सुचित्रा आयी थी।

थोड़ी ही देर में रुखसार बाथरूम से बाहर आयी। वह तौलिये में लिपटी हुई थी। जब उसने देखा की रसोई में कोई नहीं था तो वह ड्राइंग रूम में आयी। तब उसने राज को देखा। राज ने रुखसार को तौलिये में लिपटे हुए देखा तो उसकी तो सिटी पट्टी गुम हो गयी।

रुखसार का आधे से ज्यादा बदन खुला हुआ था। उसके उन्नत स्तनोँ का मस्त उभार दिख रहा था। तौलिया रुखसार की जांघों तक ही था। रुखसार की सुडौल जांघे राज को पागल बना रही थी। रुखसार के भीगे हुए बाल उसके मुंह और पुरे बदन पर बिखरे हुए थे। भीगी हुयी रुखसार उसे सेक्स की मूर्ति लग रही थी।

जब रुखसार ने राज को देखा तो वह एकदम चिल्लाने लगी। फिर यह सोच कर एकदम चुप हो गयी की कहीं पड़ौसी उसकी चीख सुनकर भागते हुए आ न जाएँ। वह थोडी सहम कर बोली, “अरे राज, तुम? यहाँ, इस वक्त?”

राज की जबान पर तो जैसे ताला लग गया था। बड़ी मुश्किल से बोला, “रुखसार मुझे माफ़ कर दो। मुझे पता नहीं था की तुम नहा रही हो। मैंने घंटी तो बजायी पर दरवाजे पर कोई न आया। समीर ने फ़ोन किया था की तुम्हे मैगी के दो पैकेट चाहिए। वह देर से आयेगा इस लिए उसने यह पैकेट मुझे लाकर तुम्हे देने के लिए बोला।”

ऐसा कहते हुए राज ने रुखसार को मैगी के दो पैकेट हाथ में थमाये। पर उसकी नजर तो रुखसार के मम्मो पर अटकी हुयी थी। जब रुखसार मैगी लेने करीब आयी तो राज से तौलिये में झांके बगैर रहा नहीं गया। हालाँकि रुखसार ने तौलिया एकदम ताकत से पकड़ रखा था, रुखसार के स्तन तौलिये में समा नहीं रहे थे और बाहर से ही दिखायी दे रहे थे। रुखसार की जांघे घुटने से ऊपर तक नंगी थीं। उस समय राज का मन किया की वह रुखसार को अपने आहोश में कर के वहीँ उस पर चढ़ जाय और चोद डाले।

 
राज रुखसार के अधनंगे बदन को देख कर अपना नियंत्रण रख नहीं पाया। उसने आगे बढ़ कर रुखसार को अपनी बाँहों में ले लिया। रुखसार ने शायद राज के मन के भाव भाँप लिए थे। उसने आपना तौलिया और ताकत से पकड़ा। रुखसार की अपनी समस्या थी। वह एक हाथ में तौलिया पकडे थी और दूसरे हाथ में मैगी। वह राज का विरोध करने में असमर्थ थी। उसने अपने बदन को हिला हिला कर राज के बाहुपाश से छूटने की बड़ी कोशिश की, पर राज की ताकत के सामने उसकी एक न चली।

राज ने उसे अपनी बाहोँ में लपेट कर अपने होठ रुखसार के होठ पर रखना चाहा। तब रुखसार ने एक हाथ में पकड़ा मैगी का पैकेट फेंक दिया और उस हाथ से राज को धक्का देकर दूर हटाया और भागती हुयी बैडरूम में चली गयी। अचानक उसे ध्यान आया की उसने अपने पीछे बैडरूम का दरवाजा तो बंद नहीं किया था। वह डर के मारे कांप रही थी की कहीं राज पीछे पीछे बैडरूम में न आ जाए। पर जब रुखसार ने पीछे मुड़कर देखा तो राज भौंचक्का सा ड्राइंग रूम में बुत की तरह खड़ा उसे देख रहा था।

थोड़ी देर मैं रुखसार कपडे चेंज कर नाईट गाउन पहन कर आयी। राज ड्राइंग रूम में ही था। रुखसार ने अपने केश बाँधे नहीं थे। खुले बालों में वो फिर भी उतनी ही सेक्सी लग रही थी। राज ने देखा की गाउन के नीचे शायद रुखसार ने कुछ और पहना नहीं था। क्योंकि उसके बदन के सारे उभार उसके गाउन में से साफ़ नजर आ रहे थे। उस वक्त राज की शक्ल रोनी सी हो गयी।

राज ने नीचे झुक कर रुखसार से कहा, “भाभी जान मुझे माफ़ कर दीजिये। आप को उस हालत में देख कर मैं अपने आप को कण्ट्रोल नहीं कर पाया। मैंने बड़ी भारी गलती कर दी। जब तक आप मुझे माफ़ नहीं करेंगे तब तक मैं यहां से नहीं जाऊँगा। और समीर को इस बारेमें मत बताइयेगा। कहीं वह मुझसे बोलना बंद न कर दे।“

रुखसार तो जानती थी की उस ने ही राज को उकसाया था। उसे तो पता था की अगर राज ने उसे ऐसी हालत में देखा तो क्या होगा। वह शुक्र मना रही थी की राज उसके पीछे बैडरूम में नहीं आया। अगर वह आया होता तो रुखसार उसे रोक नहीं पाती।

रुखसार तब हंस पड़ी और बोली, “राज तुम कोई चिंता मत करो। जो हुआ इसमें तुम्हारा कोई दोष नहीं है। मुझे भी उस हालात में ड्राइंग रूम में नहीं आना चाहिए था। तुम्हारी जगह कोई और भी तो हो सकता था। तब तो और भी मुसीबत हो जाती। मैं समीर को कुछ नहीं बताऊंगी। मैं चिल्लाने के लिए शर्मिंदा हूँ। तुम बैठो, मैं तुम्हारे लिए चाय लेकर आती हूँ।“ यह कह कर रुखसार रसोई में से चाय बना कर ले आयी।

राज को चाय देते हुए रुखसार ने राज से कहा, “माफ़ी तो मुझे भी तुमसे मांगनी है। मैंने तुम्हारी गिफ्ट को नकार दिया था उसके लिए प्लीज मुझे माफ़ कर देना। मैं तुम्हें गलत समझ रही थी। समीर ने मुझे बताया की तुम वह गिफ्ट उसे पूछ कर ही मुझे दे रहे थे।“

फिर रुखसार ने उसे शरारत भरे लहजे में कहा, “अब मुझे वह गिफ्ट चाहिए। और वह ही नहीं और भी गिफ्ट लाते रहना।“

उसके बाद तो जैसे राज की चांदी हो गयी। इसके बाद रुखसार राज से कोई औपचारिकता नहीं रखती थी। जब भी राज आता तो रुखसार ख़ास उसे बात करने ड्राइंग रूम में उसके पास आती और उसके साथ भी बैठ जाती थी। कई बार रुखसार राज को रसोई में भी बुला लेती और दोनों इधर उधर की बातें करते।

मेरे सामने भी रुखसार अब राज से शर्माती नहीं थी। कई बार मैंने देखा तो वह राज के कोई जोक पर राज का हाथ पकड़ कर हंसती थी। परंतु उन के बीच कोई जातीयता वाली बात नहीं दिख रही थी। अब जब वह घर आता तो उसकी आव भगत होने लगी। वह मुन्नू के साथ खेलता और उसको कभी चॉकलेट तो कभी आइसक्रीम ला कर उसने मुन्नू का मन जीत लीया। रुखसार के साथ भी उसने काफी दोस्ती बनाली थी।

मैं जब नहीं रहता था तब भी राज आता जाता रहता था। जब भी राज मेरी गैर हाजिरी में आता तब मुझे राज और रुखसार दोनों बता देते थे। रुखसार राज को छोटे मोटे काम भी बताने लग गयी थी। राज कभी मेरी गैर हाजिरी में सब्जी लाता तो कभी ग्रोसरी।

मैंने महसूस किया की धीरे धीरे राज और मेरी बीबी रुखसार के बीच कुछ कुछ बात बन रही थी। अगर बात बन नहीं रही थी तो उनके बीच कोई बात में वैमनस्य भी नहीं रहां था। रुखसार के मनमें राज के प्रति अब पहले जितना शक और डर नहीं रहा था।

मैं जब घर नहीं रहता था तब भी राज आता जाता रहता था। जब भी राज मेरी गैर हाजिरी में आता तब मुझे राज और रुखसार दोनों बता देते थे। रुखसार राज को छोटे मोटे काम भी बताने लग गयी। राज कभी मेरी गैर हाजिरी में सब्जी लाता तो कभी ग्रोसरी।

मैंने महसूस किया की धीरे धीरे राज और मेरी बीबी रुखसार के बीच कुछ कुछ बात बन रही थी। रुखसार के मनमें राज के प्रति अब पहले जितना शक और डर नहीं रहा था।

इसका फायदा मुझे भी तो होना ही था। अब राज मुझ पर और भी मेहरबान होने लगा। एकदिन अचानक ही वह घर आया। रुखसार रसोई में व्यस्त थी। मैंने उसे हालचाल पूछा। हम दोनों खड़े थे की अचानक उसके हाथमे से एक लिफाफा नीचे गिरकर मेरे पांव पर पड़ा।

मुझे ऐसा लगा जैसे राजने लिफाफा जान बुझ कर गिराया था। मैंने झुक कर जैसे उसे उठाया तो उसमे से एक तस्वीर फिसल कर बहार निकल पड़ी। वह तस्वीर उसकी बीबी डॉली की थी।

वह समंदर के किनारे बिकिनी पहने खड़ी थी। उसकी नशीली आँखें जैसे सामने से खुली चुनौती दे रही थी। उसके मद मस्त उरोज जैसे उस बिकिनी में समा नहीं रहे थे। छोटी सी लंगोटी की तरह की एक पट्टी उसकी भरी हुई फुद्दी को मुश्किल से छुपा पा रही थी। उसके गठीले कूल्हे जैसे चुदवाने का आवाहन कर रहे थे। उसे देख कर मैं थोड़े समय तो बोल ही नहीं पाया। मैं एकदम हक्का बक्का सा रह गया।

अचानक मुझे ध्यान आया की राज मुझे घूर कर देख रहा है। मैं खिसिया गया और हड़बड़ा कर बोला, “यार, सॉरी। मुझे यह देखना नहीं चाइये था।”

राज एकदम हंस पड़ा और बोला, “तुम क्यों नहीं देख सकते? उस दिन उस बीच पर पता नहीं कितने लोगों ने डॉली को इस बिकिनी में आधा नंगा देखा था। तुम तो फिर भी अपने हो। क्या यदि तुम्हारे पास रुखसार की कोई ऐसी तस्वीर हो तो तुम मुझे नहीं दिखाओगे?”

उसके इस सवाल का मेरे पास कोई जवाब नहीं था। मैंने अपनी मुंडी हिलाते हुए कहा, “बात तो ठीक है। मैं भी तो तुम्हे जरूर दिखाऊंगा ही।”

राज ने हँसते हुए पूरा लिफाफा मेरे हाथ में थमा दिया और बोला, “इस लिफाफे में हमारे हनीमून की सारी तस्वीरें हैं। इसमें डॉली के, मेरे और हमारे बड़े सेक्सी पोज़ हैं। तुम इन्हें जी भर के देख सकते हो। मैं तुमसे कुछ भी छिपाना नहीं चाहता। तुम चाहो तो इसे रुखसार के साथ भी शेयर कर सकते हो। आखिर में, मैं तुम दोनों में और हम दोनों में कोई फर्क नहीं समझता।”

राज ने जैसे बात बात में अपने मन की बात कह डाली। उसकी बात पहले तो मेरी समझ में नहीं आई, पर उसके चले जाने के बाद जब में उसकी बात पर विचार कर रहा था तब मैं धीरे धीरे उसका इशारा समझने लगा। उसकी बात के मायने बड़े गहरे थे।

मुझे ऐसा लगा जैसे वह यह संकेत दे रहा था की उसकी बीबी और मेरी बीबी में कोई अंतर नहीं है। उसका मतलब यह था की मेरी बीबी उसकी बीबी और उसकी बीबी मेरी बीबी भी हो सकती है। साफ़ शब्दों में कहें तो वह बीबियों की अदलाबदली की तरफ इशारा कर रहा था।

जैसे जैसे मैं सोचता गया मुझे उसका सारा प्लान समझ में आने लगा। मैं भी तो वही चाहता था जो वह चाहता था। फिर ज्यादा सोचना कैसा। फिर मेरे मनमे एक कुशंका आई। कहीं मैं अपनी प्रिय बीबी को खो तो नहीं दूंगा? कहीं वह राज की आशिक तो नहीं बन जायेगी? पर यह तो हो ही नहीं सकता था क्यूंकि राज भी तो उसकी बीबी को बहुत चाहता था। उसकी एक बच्ची भी तो थी। हमारा भी तो मुन्नू था। शंका का तो तुरंत समाधान हो गया। हाँ एक बात जरूर थी।

एक बार शर्म का पर्दा हट जानेसे, यह हो सकता है की राज रुखसार को बार बार चोदना चाहे, या रुखसार बार बार राज से चुदवाना चाहे। तब मैंने यह सोचकर मन को मनाया की आखिर राज और रुखसार समझदार हैं। वह अगर चोदना चाहे भी तो मुझसे बिना पूछे कुछ नहीं करेंगे। यदि मेरी मर्जी से ही यह होता है तो भला, मुझे राज और रुखसार की चुदाई में कोई आपत्ति नहीं लगी।

दूसरे रुखसार समझदार थी। वह मुझे पूछे बिना कुछ भी ऐसा नहीं करेगी जिससे हमारा घर संसार आहत हो। यदि मान लिया जाये की राज बहक जाता है, तो रुखसार फिर राज को कंट्रोल कर सकती है। मैं जानता था की रुखसार एक शेरनी की तरह है। वह यदि चाहे तो राज को घरमें घुसने भी न दे। उसने पहले कई बार राज को हड़का दिया था।

राज अपनी बीबी से भी तो डरता था। किसी एक को बहकने से रोकने के लिए तीन लोग खड़े थे, बच्चों को इस गिनती में शामिल न किया जाय तो। मेरी इस शंका का भी भलीभांति समाधान हो गया। सबसे बड़ी बात यह थी की रुखसार मुझे बहुत चाहती थी और मैं जानता था की सेक्स और प्रेम का अंतर वह जानती थी। शंका का तो तुरंत समाधान हो गया।

मैंने सोचा की शंका कुशंका करते रहेंगे तो आगे बढ़ नहीं सकते। आखिर कुछ पाने के किये कुछ समझौता तो करना पड़ता ही है। और फिर हम सब कहाँ एकसाथ सारी ज़िन्दगी रहने वाले थे। अब बात थी बीबियों को पटाने की। यह एक बड़ी चुनौती थी।

फिर मेरे मनमें एक बात आई। दो औरतों को एकसाथ चुदवाने के लिए राज़ी करना मुझे कठिन लगा। वैसे ही औरतें बड़ी ईर्षालु होती है। वह अपने पति को दुसरी औरत को चोदते हुए देख सके यह मुझे मुश्किल सा लग रहा था। ऐसा करने की बात करने से पहले मैंने सोचा क्यों न पहले हम दो मर्द एक बीबी को तैयार करते हैं।

एक बीबी को अगर हमने फ़ांस लिया तो दूसरी आराम से फँस जायेगी। और अगर एक फँस गयी तो फिर वह दुसरी को जरूर चुदवाने के लिए तैयार करेगी। साथ साथ मैं पहले रुखसार को चुदवाने का मजा लेना चाहता था। मेरे मनमे एक तरह का पागलपन सवार हो गया था।

 
वैसे मेरे मन में भी तो यह इच्छा थी की मेरी बीबी भी एक बार गैर मर्द का टेस्ट करे। मैं देखना चाहता था की मेरे सामने दूसरा मर्द कैसे मेरी बीबी को चोदता है, मेरी बीबी कैसे उससे चुदवाती है और मैं भी दूसरे मर्द के साथ मिलकर कैसे मेरी बीबी को चोदता हूँ। कई बार मैंने देखा था की मैं तो झड़ गया था पर मेरी बीबी नहीं झड़ पाई और अपना मन मसोस कर रह गयी। अगर रुखसार को दो मर्द चोदते हैं तो साफ़ बात है की वह भी ओर्गाज़म का ज्यादा से ज्यादा मजा ले सकती है।

उसको बार बार झड़ने से वह बहुत एन्जॉय करेगी। यही बात को सोच कर मैं जोश में आ गया। राज और रुखसार की केमिस्ट्री देख कर में पागल सा हो रहा था। मैं रुखसार को राज से चुदवाने के बारें में गम्भीरता से सोचने लगा।

राज का मेरी बीबी की और आकर्षण (आकर्षण से ज्यादा उपयुक्त शब्द था पागलपन) को मैं भली भांति जानता था। राज को रुखसार की और से थोड़ा सा भी सकारात्मक रवैया दिखाई दिया तब तो राज रुखसार का पीछा नहीं छोड़ेगा। और यदि एकबार उस ने रुखसार का नंगा जिस्म देख लिया तो फिर तो मुझे पता था की वह उसे बार बार चोदना चाहेगा।

तब वह आसानी से डॉली को मुझसे चुदवाने के लिए तैयार कर पाएगा इस बातका मुझे पूरा यकीन था। दूसरे, तब रुखसार भी डॉली को राजी कर लेगी। मैं जानता था की यदि रुखसार चाहेगी तो डॉली को जरूर तैयार कर सकती है। पर इसके लिए पहले रुखसार के अवरोध का बाँध तोड़ना जरुरी था।

रुखसार को गरम करने के लिए मैं अनायास ही राज की बात छेड़ देता था। बातों बातों में मैं कुछ न कुछ ऐसे विषय ला देता था की रुखसार गरम हो जाए। मैंने एक रात जब रुखसार थकी हुयी थी और सोने जा रही थी, तब उसको गर्म करने के इरादे से राज के बारेमें बात छेड़ी।

मैंने वह लीफाफा निकाला जिसमें डॉली और राज के सेक्सी पोसेस वाली तस्वीरें थी। रुखसार एक के बाद एक तस्वीरें देखने लगी। मैंने टेढ़ी नजर से देखा की रुखसार डॉली में ज्यादा दिलचस्पी नहीं ले रही थी, पर राज की छोटे से जांघिये में उस के उठे हुए लण्ड वाली और जांघिये को छोड़ कर बाकी पूरी नंगी तस्वीरों को वह थोड़े ज्यादा ही ध्यान से देख रही थी।

मैंने जैसे इसको देखा ही नहीं, ऐसे जताते हुए बोला, “जब राज ने मुझे डॉली की ऐसी आधी नंगी तस्वीरें देखते हुए पकड़ लिया तो मुझे बड़ी शर्मिंदगी हुयी। मैंने राज से माफ़ी मांगी। तब राज ने क्या कहा मालुम है?”

डॉली ने मेरी तरफ सवालिया नजर से देखते हुए अपनी उत्सुकता को दबाने का प्रयास करते हुए पूछा “क्या कहा राज ने?”

मैंने फ़ौरन कहा, “राज ने कहा, डॉली की ऐसी आधी नंगी तस्वीर यदि मैंने देख ली तो क्या हुआ? उसे तो उस समय बीच पर सैकड़ों लोगो ने आधी नंगी बिकिनी में देखा था। उसने कहा हम दोनों कपल में क्या अंतर है? डॉली और रुखसार या समीर और राज सब एक ही तो हैं? हम को हमारे बीच ऐसा कोई अंतर नहीं रखना चाहिए। ” मैंने फिर रुखसार से पूछा, “कुछ समझी?”

रुखसार बोली, “हाँ, सही तो है। हम दोनों कपल अब इतने करीब हैं की हम में एक तरहकी आत्मीयता है। उसने ठीक ही कहा। उसमें सोचने की क्या बात है?”

तब मैंने रुखसार के गाल पर चूंटी भरते हुए कहा, “हाय मेरी बुद्धू बीबी। तू इसका मतलब नहीं समझी। राज का कहने का मतलब शायद ये था की चाहे राज हो या मैं, तुम्हारे लिए दोनों बराबर होने चाहिए। और चाहे राज हो या मैं, डॉली के लिए भी दोनों बराबर होने चाहिए। इसका मतलब समझी?”

रुखसार फिर भी भोलेपन से मुझे ताकती रही तब मैंने कहा, “हे भगवान्, मेरी बीबी कितनी बुद्धू है। अरे राज यह इशारा कर रहा था की चाहे तुम हो चाहे डॉली हो राज के लिए दोनों बीबीयां ही हैं। वैसे ही डॉली के लिए भी हम दोनों उसके पति ही हैं। इसका मतलब है हम एक दूसरे की बीबियों की अदलाबदली कर सकते हैं। मतलब हम एक दूसरे की बीबियों को चोद सकते हैं।”

यह सुनकर रुखसार एकदम अकड़ गयी और बोली, “यह क्या बात हुई। भाई एक दूसरे की बीबियों के साथ थोड़ा मिलना जुलना, थोड़ी शरारत अथवा थोड़ी सी छेड़ खानी ठीक है, पर अदलाबदली की बात कहाँ से आई? बड़ी गलत बात कही राज ने अगर उसका यह मतलब समझता है वह तो।

पर मुझे लगता है शायद उसका कहनेका वह मतलब नहीं था। यह सब बातें तुमने ही बनायी लगाती है। वह तो शालीन और सीधासादा है।” मैं अपने ही मन में मेरी सरल बीबी की यह बात सुन कर हंस रहा था। राज और सीधा सादा?”

मैंने तीर निशाने पर लगाने के लिए कहा, “राज ने और क्या कहा सुनोगी?” रुखसार ने अपनी मुंडी हिला कर हाँ कहा।

मैंने कहा, ‘तब राज ने मुझसे पूछा, अगर तुम्हारी ऐसी आधी नंगी तस्वीरें हों तो मैं उनको राज के साथ शेयर नहीं करूँगा क्या? मैं क्या बोलता? मैंने कहा हाँ जरूर करूँगा।”

रुखसार यह सुनते ही एकदम सहम गई। वह मुझ से नजर भी मिला नहीं पा रही थी। शर्म से उसका मुंह लाल होगया था। रुखसार सोचमें पड़ गयी और बोली, “यदि मेरी ऐसी तस्वीर तुम्हारे पास होती तो क्या तुम राज को दिखाते? यह बात तो ठीक नहीं। पर खैर मेरी ऐसी तस्वीरें कहाँ है, जो तुम राज को दिखाओगे? हम तो हनीमून पर कहीं गए ही नहीं।” उसके चेहरे पर निराशा सी छा गयी।

मैंने उसे सांत्वना देते हुए कहा, ” अब तो तुम्हें और मुझे ऐसे तस्वीरें खिंचवानी पड़ेंगी।”

रुखसार से पट से बोली, ‘ताकि तुम उसे राज को दिखा सको?”

 
मैंने सीधे ही पूछा, “हाँ, वो तो मुझे दिखानी ही पड़ेंगी। मैंने वचन जो दे दिया है राज को। पर तब क्या तुमे ऐतराज़ होगा? अरे हाँ याद आया, राज ने तुमको आधा नंगा तो उस दिन देख ही लिया था न, जिस दिन तुम तौलिया लपेट कर उससे मिलने आयी थी?”

रुखसार ने कोई जवाब नहीं दिया। वह मेरेसे एकदम सट रही थी और गरम हो गई थी। उस रात भी हमने खूब जोर शोर से सेक्स किया। अब तो मुझे रुखसार को गरम करने की चाभी सी जैसे मिल गयी थी। जब भी रुखसार थकान का बहाना करके सोने के लिए जाती और अगर मेरा मूड उसे चोदने का होता तो मैं राज की कोई न कोई रसीली बात छेड़ देता।

कई बार तो मुझे बाते बनानी पड़ती थी। परन्तु मेरी बुद्धू बीबी यह समझ नहीं पाती थी की मैं उसे चोदने के लिए तैयार करने के लिए यह सब सुना रहा था। अब मुझे इसी बात को आगे बढ़ाने के लिए अग्रसर होना था।

पर मुझे कुछ ज्यादा करने की जरुरत नहीं पड़ी। बात अपने आप ही बनने लग रही थी। एक दिन राज घूमते घूमते मुझे मिलने आया। मैं उस दिन टीवी पर मेरा मन पसंद एक खास मैच देख रहा था। तब रुखसार ने रसोई में से मुझे आवाज़ दी। वह मुझे एक डिब्बा उतारने के लिए कह रही थी।

मैंने उसे कहा राज को कहो। वह उतार देगा। यह सुनकर राज एकदम रसोई में पहुंचा तो देखा की रुखसार को ऊपर के शेल्फ से एक डिब्बा उतारना था। राज ने रुखसार से कहा की वह प्लेटफार्म पर चढ़ कर डिब्बा उतार लेगा। पर रुखसार नहीं मानी।

उसके बुलाने पर भी मैं रसोई में नहीं गया उस बात से वह चिढ़ी हुयी थी। उसके सर पर एक तरह का जूनून सवार था की वह डब्बा स्वयं ही उतारेगी। किसीकी मदद नहीं लेगी। वह खुद रसोई के प्लेटफार्म के ऊपर चढने की कोशिश कर रही थी। प्लेटफार्म की ऊंचाई ज्यादा होने के कारण वह ऊपर चढ़ नहीं पा रही थी। उसने अपना एक पॉंव ऊपर उठाया और प्लेटफार्म पर रखा तो उसकी साड़ी सरक कर कमर पर आ गयी और उसकी जांघें राज के सामने ही नंगी हो गईं।

राज की शक्ल उस समय देखने वाली थी। वह रुखसार की खूबसूरत जाँघें देख भौंचक्का सा रह गया। उसके चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगी। जब रुखसार ने राज के चेहरे के भाव देखे तो वह कुछ सकपका कर खड़ी हो गयी। उसने अपनी साडी ठीक की। राज ने अपने आप को सम्हाला और दुबारा कहा की वह लम्बा है और वह आसानी से डिब्बा उतार लेगा। पर रुखसार फिर भी न मानी।

रुखसार ने राज से कहा की वह खुद ही ऊपर चढ़ेगी। तब राज ने रुखसार को आगे बढ़ाया और रुखसार को सहारा देने के लिए तैयार हुआ। राज ने थोड़ा झुक रुखसार की दोनों बगल में अपने हाथ डाल दिए और बड़ी ताकत लगाकर उसे ऊपर उठाया। बाप रे, मुझे जब बाद में पता लगा तो मेरे लण्ड से जैसे पानी झरने लगा।

रुखसार के बगलों में हाथ डालके उसे ऊपर उठाने से राज का क्या हाल हुआ होगा यह समझना मुश्किल नहीं था। जरूर उसने कुछ तो शरारत की होगी। वैसे भी उसने रुखसार के स्तनों पर अपना अंगूठा तो जरूर दबाया होगा। मैंने देखा था की राज रुखसार के स्तनों पर फ़िदा था और जब भी उसे देखो तो उसकी नजर वहीं टिकी रहती थी।

रुखसार प्लेटफार्म पर तो चढ़ गयी पर लड़खड़ाने लगी। राज ने कस कर रुखसार के पाँव पकडे और कहा, “रुखसार भाभी जान संभल कर। गिरना मत।”

परन्तु रुखसार डिब्बा नीचे उतरते लड़खड़ाई और सीधी राज पर जा गिरी। राज और रुखसार दोनों धड़ाम से नीचे गिरे। नीचे राज और उसके ऊपर रुखसार। जब मैंने धमाके की आवाज़ सुनी तो भागता हुआ रसोई में गया और देखा की बड़ा रोमांटिक सीन चल रहा था।

रुखसार राज के उपर लेटी हुयी थी और राज रुखसार को अपनी बाहों में लिए हुए रुखसार के नीचे दबा था। दोनों के होठ एक दूसरे को जैसे चुम्बन करने वाले थे। राज का एक हाथ रुखसार के एक स्तन पर था। मैं ठीकसे देख तो नहीं पाया पर राज और रुखसार के हावभाव से ऐसे लग रहा था जैसे शायद वह उस स्तन को जोर से दबा रहा था।

न चाहते हुए भी मैं हंस पड़ा और ताली बजाते हुए बोला, “भाई वाह, क्या रोमांटिक सिन चल रहा है।”

राज और रुखसार एकदम हड़बड़ाते हुए उठ खड़े हुए। रुखसार ने अपनी साड़ी ठीक की और बोली, “मैंने तो तुम्हे बुलाया था। तुम्हे फुर्सत कहाँ? तुमने अपने इस दोस्त को भेज दिया और देखो क्या हुआ। मैं क्या करती?” रुखसार के गाल शर्म के मारे लाल हो रहे थे। वह आगे कुछ बोल नहीं पायी।

जब मैं वापस ड्राइंग रूम में आया तो राज मेरे पीछे पीछे आया और बोला, “समीर, मुझे माफ़ करदे यार। यह सब जान बुझ कर नहीं हुआ।”

मैं हंस पड़ा और बोला, “पागल मत बन। मैं जानता हूँ। यह सब अचानक ही हुआ था। और यह कौन सी बड़ी बात है? ठीक है यार, वैसे भी तो कई बार हम एक दूसरे की बीबियों से गले मिलते ही हैं न? यह छोटी मोटी छेड़छाड़ तो चलती रहती है। चिंता मत कर।” यह कह कर जैसे मैंने उसको आगे बढ़नेकी हरी झंडी दे दी।

अब तो राज मेरा ऋणी हो गया। वह मुझको अपनी बीबी से मिलवाने के लिए उतावला हो रहा था। एकदिन जब हम फ़ोन पर बात कर रहे थे तब मैंने बात बात में राज को कहा , “मैं घर के सारे मशीनों, जैसे वाशिंग मशीन, टीवी, हीटर इत्यादि का छोटामोटा काम घर में ही कर लेता हूँ। सारा बिजली का काम भी मैं ही कर लेता हूँ। तुम्हें या डॉली को यदि कोई दिक्कत हो तो मुझे बेझिझक बुला लेना।”

यह सुन राज जैसे उछल पड़ा। वह कहने लगा की उसकी बीबी डॉली घर में कोई भी उपकरण काम नहीं करते तो बड़ी गुस्सा हो जाती है और राज की जान को मुसीबत खड़ी कर देती है। मेरे प्रस्ताव से वह बहुत खुश हुआ और उसने कहा की वह जरूर मुझे बुलाएगा।

उसी दिन देर शाम को उसने मुझे फ़ोन किया और घर आने को कहा। उसने कहा की उसका टीवी नहीं चल रहा था। मैं राज के घर गया। मैंने तुरंत ही उसके टीवी को देखा तो बिजली के प्लग का तार निकला हुआ था। मैंने तार लगाया और टीवी चालू कर दिया। मुझे ऐसा लगा जैसे शायद राज ने ही वह तार जान बुझ कर निकाल दिया था ताकि वह उस बहाने मुझे बुला सके।

डॉली बहुत खुश थी। उसकी मन पसंद सीरियल तब आने वाली थी। डॉली इतनी खुश हो गयी की मेरे पास आई और मेरा हाथ पकड़ कर मेरा धन्यवाद करने लगी। उसने कहा, “समीर, राज इन मामलों में बिलकुल निकम्मा है। वह छोटा सा काम भी कर नहीं पाता।”

मैंने बड़ी नम्रता से कहा, “भाभी जान जी, आप निश्चिंत रहिये, यदि कोई भी ऐसी परेशानी हो तो कभीभी, ऑफिस समय छोड़ कर चाहे दिन हो या आधी रात हो, मुझे बुला लीजिए। ज़रा सा भी मत हिचकिचाइए। मैं हाजिर हो जाऊँगा।” यह सुन डॉली बहुत खुश हुई और चाय बनाने के लिए जाने लगी।

 
राज ने उसे रोककर कहा, “देखो डॉली, समीर मेरा ख़ास दोस्त है। अगर मैं न भी होऊं और तुम्हें यदि कोई भी दिक्कत हो तो दिन हो या आधी रात, उसे बुलाने में कोईभी झिझक न करना।”

बस अब तो मेरा रास्ता भी खुलता दीख रहा था। डॉली ने राज के रहते हुए मुझे एक दो बार बुलाया। राज ने फिर डॉली को जोर देते हुए कहा की उस की गैर मौजूदगी में भी वह मुझे बुलाने में झिझके नहीं। राज भी तो काफी समय टूर पर जाता रहता था।

डॉली ने एकबार मुझे रात के दस बजे फ़ोन किया की उसके बाथरूम का नलका ज्यादा पानी लीक कर रहा था। यदि उसको तुरंत ठीक नहीं किया तो उसकी पानी की टंकी खाली हो सकती थी। राज उस समय टूर पर था।

जब डॉली का फ़ोन आया तब मैंने अपने पास पड़े हुए सामानमें से कुछ वॉशर, प्लास इत्यादि निकाला। जब रुखसार ने पूछा तो मैंने सारी बात बतायी। रुखसार मेरी और थोड़ी टेढ़ी नजर करके देखा, पर कुछ ना बोली।

मैंने उससे पूछा, “तुम चलोगी क्या? तब वह बोली, “बुलाया तो तुमको है। मैं क्यूँ बनूँ कबाब मैं हड्डी?”

जब मैं खिसिया सा गया तो हंस कर बोली, “अरे मियां, तुम जाओ, मैं तो मजाक कर रही थी। मैं बहुत मजेदार सीरियल देख रही हूँ। जाओ अपना काम करके आ जाना।”

फिर थोड़े धीरे शरारत भरे ढंग से बोली, “अगर कुछ बताने लायक हो तो बताना। छुपाना मत। मैं बुरा नहीं मानूंगी।”

मैं भी उसे कहाँ छोड़ने वाला था? मैंने कहा, “हाँ, जरूर बताऊंगा। पर निश्चिंत रहना, मैं डॉली को रसोई के प्लेटफार्म पर चढ़ा कर नीचे नहीं गिराऊंगा।”

मेरे मजाक से मेरी भोली बीबी झेंप सी गयी। तब मैंने उसके होंठ पर किस करते हुए हंस कर कहा, “जानेमन, मैं भी मजाक ही कर रहा था।“

मैं डॉली के घर गया उस समय वह नाईटी पहने हुए थी। उसने अंदर कुछ भी नहीं पहन रखा था। मुझे देखकर उसने अपने कंधे पर एक चुन्नी सी डाल दी और बोली, “देखो ना, मैं आपको इतनी देर रात को परेशान कर रही हूँ। पर क्या करूँ? राज नहीं है। खैर, वह होता तो भी क्या करता? वह तो दूसरे दिन प्लम्बर को बुलाऊंगा यह कह कर सो जाता..

तुमने कहा था की मैं तुम्हे आधी रात को भी बुला सकती हूँ। तब फिर मैंने हिम्मत करके तुम्हे बुलाया। अगर यह अभी ठीक नहीं हुआ तो पूरी रात पानी जाता रहेगा और कल सुबह टंकीखाली हो जाएगी। फिर घर का सारा काम ठप्प हो जायगा।“ डॉली बेचारी बड़ी परेशान लग रही थी।

मैंने बाथरूम में जाकर देखा की नलके का वॉशर खराब था। मैं जब बाथरूम में घुसा तो डॉली भी मेरे साथ बाथरूम में घुसी। मैं एक स्टूल सा लेकर बैठ गया। डॉली आकर ठीक मेरे बगल में खड़ी हो गयी। मैं उसकी गरम साँसों को अपने गालों पर महसूस कर रहा था। एक दो बार मैंने अपनी कोहनी हटाई तो उसके बूब्स से टकराई।

मेरे शरीर में जैसे एक झनझनाहट सी दौड़ गयी। मेरी धड़कनें तेज हो गयी। मेरा मेरा ध्यान काम पर कहाँ लगना था। वह इतनी करीब खड़ी थी की मेरी कोहनी उसके भरे हुए स्तन को जैसे छू रही थी। मेरी तो हालत ख़राब थी, पर डॉली को तो जैसे कोई फरक नहीं पड़ता था। मैंने अपने पास से एक वॉशर निकाला और झटसे बदल दिया।

बस नलका टपकना बंद हो गया। डॉली ऐसी खुश हुयी जैसे उसकी लाटरी लग गयी हो। जैसे ही मैं बाथरूम से बाहर निकला तो वह मुझसे लिपट सी गयी। मैं क्या बताऊँ मेरी हालत कैसी थी। मेरा लण्ड मेरी पतलून में ऐसे खड़ा हो गया था जैसे सैनिक परेड में खड़ा हो। डॉली जब मुझसे लिपट गयी तब शायद उसने भी मेरे कड़क लण्ड को महसूस किया होगा।

वह थोड़ी झेंप कर अलग हो गयी और बोली, “समीर, मैं आज तुम्हे बता नहीं सकती की मैं कितनी खुश हूँ। आज शाम से मैं परेशान थी की मैं क्या करूँ। तुम्हें डिस्टर्ब करने के लिए मुझे माफ़ तो करोगे न? पता नहीं मैं तुम्हारा यह अहसान कैसे चुकाऊंगी।” डॉली ने फिर मेरा हाथ अपने हाथ में लिया और उसे सहलाते अपना आभार जताया।

मैंने यह बोलना चाहा की, “बस एकबार मुझसे चुदवालों, हिसाब बराबर हो जाएगा। ” पर मैं कुछ बोल नहीं पाया।

मैंने डॉली के कन्धों पर अपना हाथ रखा और बोला, “डॉली, राज ने एक बार मुझसे कहा था की मैं रुखसार में और तुम में फर्क न समझूँ, और तुम और रुखसार, राज और मुझ में फर्क मत समझना। क्या तुम भी राज से सहमत हो?”

डॉली ने अपनी मुंडी हिलायी और बिना बोले अपनी सहमति जतायी।

मैंने कहा, “तो फिर एहसान कैसा? अगर यही समस्या रुखसार की होती तो क्या मैं उसके लिए इतना काम न करता?” मेरी यह बात सुनकर डॉली थोड़ी सी इमोशनल हो गयी। वह मेरा हाथ पकड़ कर मुझे बाहर तक छोड़ने आयी। बाहर जाते जाते एकदो बार डॉली के भरे हुए बड़े बडे मम्मे मेरी बाँहों पर टकराये।

मैं समझ नहीं पाया की क्या यह डॉली जान बुझ कर कर रही थी और मुझे कोई इशारा कर रही थी या चलते चलते चलते हिलते हुए वह अनायास ही मेरी बाहों से टकरा गए थे।

मैंने भी डॉली को यह सन्देश दे डाला की वह मुझमें और राज में फर्क ना समझे। मैं बाहर जाकर अपनी बाइक पर बैठ कर वापस चला आया।

उसदिन के बाद कुछ दिनों तक कई बार मुझे अफ़सोस होता रहा की यदि उसदिन मैं चाहता तो शायद डॉली को अपनी बाँहों में लेकर उसको किस करता उस के गोरे बदन को नंगा कर और शायद चोद भी पाता। परंतु मैं जल्द बाज़ी में हमारे संबंधों को बिगाड़ना नहीं चाहता था।

 
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