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कठपुतली -हिन्दी नॉवल by Ved prakash sharma
"मार डाला मार डाल विनम्र । विनम्र नामक युवक के अन्दर बैठी जाने कौन-सी ताकत ने उसे उकसाया------" मार डाल उस लड़की को!
जरा सोच, मरने के बाद वह कितनी सुन्दर लगेगी । गला दवा दे, उसकी बड़ी बड़ी आखे फटी की फटी रह जाएगी यहीं स्वीमिंग पूल के नीले से नजर अाने बाले पानी पर तैरती रह जाएगी उसकी लाश ।
" पहले वह डूबेगी ।
फिर खुबसुरत जिस्म में पानी भर जाएगा और वह फूलकर कुप्पा हो जाएगी । कांच की गोलियों की तरह बेजान हो चुकी आंखें खाली आकाश को ताकती रह जाएगी ।
वाह !
क्या सीन होगा वह । मजा आ जाएगा! विनम्र, मजा आ जाएगा ! मार डाल उसे।"
"विनम्र विनम्र ।" किसी ने उसे झझोड़ा ।
"आं" वह चौका ।
चौंककर झझोड़ने वाली की तरफ़ देखा ।
वह श्वेता थी ।
उसकी अपनी श्वेता ।
वब, जिसके साथ विनम्र यहाँ आया था । जिसे वह वहुत-वहुत प्यार करता था ।
परन्तु!
इस वक्त वह उसे अजनबी-सी लगी ।
"विनम्र । " हैरान नजर आ रही श्वेता ने पूछा---" क्या होगया है तुम्हें ?"
" म--मुझे?" विनम्र के मुह से हड़वड़ाए हुए शब्द निकले-----म-मुझे क्या होता ?"
"कुछ तो हुआ था ।" श्वेता बोली------"आस-पास आइना होता तो तुम्हें दिखाती । भभक कर लाल हो गया तुम्हारा चेहरा । ठीक यूं जैसे किसी दहकती भटृटी के नजदीक बैठे । जबड़े कस गए थे । आंखों में आखों में इस कदर हिंसक भाव उभर अाए थे कि मुझ तक को तुमसे डर लगने लगा था !"
बिनम्र को लगा------"श्वेता (shweta) ठीक कह रही है बह खुद को अभी-अभी किसी भयंकर स्वप्न से बाहर निकलता सा लगा ।।
वड़वड़़ाया-----" हां कुछ हुआ तो था । "
"क्या हुआ था?" श्वेता ने पूछा ।
" नहीं पता ।"
"अजीब बात कर रहे हो विनम्र तुन्हें कुछ हुआ और तुम्हीं को नहीं पता कया हुआ था । ज़ब तुम्हें कुछ हुआ था तब तुम 'उसे' घूर रहे थे ।"
"क-किसे ?"
"उस क्लमुंही को ।" श्वेता ने अपनी वड्री-बड्री आंखे स्वीमिंग पूल की तरफ घुमाइं।
अब.. .बिनम्र ने भी उस तरफ देखा ।
हां , वह वही थी । एक लड़की । एक ऐसी लडकी जिसके जिस्म पर केवल ब्रा और बी शेप का अण्डरवियर था ।
स्वीमिंग पूल के पानी में अपने पुरूष साथी साथ अठखेळियां कर रही थी ।।।। पुरुष अथेड्र था। लड़की से करीब दुग्नी उम्र के पुरूष ने उसे बांहो मे भरना चाहा मगर लड़की खिलखिलीई और मछली की मानिन्द पानी के अंदर तैरती चली गई यूं जैसे पुरुष को 'तरसा' रही हो !
स्वीमिंग पूलपर और लोग भी थे।
बल्कि अनेक लोग वे ।
वे शोर भी कर रहे थे मगर विनम्र के कानों में गूंजी तो सिर्फ ओर सिर्फ उस लड़की की खिलखिलाहटा यह खिलखिलाहट ।।।। विनम्र के अपने कानों मे पिघलते हुए शीशे की मानिन्द उतरती सी लगी और आंखे.. आखें एक बार फिर उसी पर जमीं रह गई ।
उस पर जिसे विनम्र ने आज से पहले कभी नहीं देखा था । वह लड़की उसके लिए पूरी तरह अजनबी थी ।
इसके इस वक्त उसे सिर्फ और सिर्फ वह लडकी ही नजर आ रहीं ।
स्वीमिंग पूल पर मौजूद भीड़ में से उसे और कोई नजर नहीं आ रहा था !!!!!
उसका पुरुष साथी भी नहीं ।
एक बार फिर जेहन ने बिस्फोट-सा हुआ ।।।
उसके अंदर मौजूद अंजानी ताकत चिखी -----" कितनी सुन्दर है यह लडकी, मगर मरने के बाद और भी ज्यादा सुन्दर लगेगी । हाथ-पैर ठंडे पड़ जाएगे उसके! वाह !!...मजाआ-जाएगा! बिनम्र मार डाल उसे।"
दिखो----देखो विनम्र ।’" श्वेता की घबराई हुई आवाज वहुत दूर से आती महसूस हुई----" तुम्हारा चेहरा फिर भभकने लगा है । जबड़े फिर कस गये है । तुम्हें कुछ हो रहा है विनम्र । खुद को सम्भालो !!"
"हां ।" विनम्र ने मन-ही-मन खुद से कहा ---- " श्वेता ठीक कह रही है । मुझे खुदे को सम्भालना चाहिए । वरना मैं उस लड़की को मार डालूँगा । मगर क्यों------मैं तो उसे जानता तक नहीं । फिर मैं क्यों उसे मार डालना चलता हूं? है भगवान ये मुझे क्या हो रहा है? मैं क्यों उस लड़की की गर्दन दबाना चाहता हूं ?"
"क्योंकि यह मरने के बाद सुन्दर लगेगी ।" जवाब उसके अंदर मौजूद अज्ञात ताकत ने दिया---"उससे कई गुना ज्यादा सुंदर जितनी इस वक्त लग रही है !! अपनी आंखों को सुकून पहुचाना चाहता है तो उसे मार डाल । बहुत शांती मिलेगी तेरी आत्मा को । यकीन नहीं आता तो उसकी गर्दन दबाकर देख ।"
"होश से आओ विनम्र होश में आओ ।" घबराई हुई श्वेता ने उसे एक बार फिर झंझोड़ा ।
बिनम्र फिर चौका ।
जैसे सोते से जागा हो ।
उस लडकी के अलावा भी सब कुछ नजर जाने लगा । लड़की के साथ का पुरुष भी । स्वीमिंग पूल पर मौजूद भीड भी और बुरी तरह आतंकित श्वेता भी । एक बार फिर श्वेता को अजनबियों' की-सी नजर से देखा । साथ ही महसूस किया, उसका अपना चेहरा इस वक्त पसीने से बुरी तरह भरभराया हुआ है ।
"तुम्हें फिर कुछ हुआ था विनम्र?" श्वेता ने पूछा----" आखिर बात क्या है?"
“चलो यहां से ।" श्वेता के सवालो का जवाब देने की जगह बिनम्र ने उसकी कलाई पकड़ी और तेजी के साथ 'स्वीमिंग पूल जौन' से बाहर निकलने बाले रास्ते की तरफ बढ गया ।
"अरे---अरे!" उसके साथ खिंची चली जा रही श्वेता ने कहा---"ये क्या कर रहे हो विनम्र हम लोग यहाँ 'एन्जजॉय' करने आए थे मगर तुम हो कि जाते ही बापस चलने........
"श्येता ।" उसने ठिठक-कर कहा--"अगर मैं यहाँ रुका तो उसका खून कर दूंगा ।"
"ख-खून ।" श्वेता के जिस्म का रोया खड़ा हो गया ।
"हाँ ।"
"क-किसका?"
विनम्र ने स्वीमिंग पूल में अठखेलियां कर रही लडकी की तरफ इशारा करके कहा…"उसका ।"
" क--वया बात कर रहे हो?" श्वेता हकला गई…“क्या तुम उसे जानते हो?"
"नहीं ।"
"फिर क्यो. . .क्यों खून कर दोगे उसका?"
“मुझे नहीं पता । "
"अजीब बात कर रहे हो विनम्र । जिसे जानते तक नहीं । जिससे न तुम्हारी दोस्ती है न दूश्मनी । जिससे तुम्हारा कोई सम्बन्य ही नहीं है उसे क्यों कत्ल कर दोगे ?"
"कहा न मुँझे नहीं पता ! केवल इतना जानता हूं---अगर वह लड़की मेरी आंखों के सामने रही तो मैं उसे छोड़ूंगा नहीं । क्या तुम चाहती हो मैं हत्यारा वन जाऊं ?"
"न-नहीं?" श्वेता कांपक्रर रह गई…"म-मैं भला ऐसा कैसे चाह सकती हूं ?"
"तो फिर आओ मेरे साथा निकलो यहां से ।" कहने के साथ एक बार फिर वह उसकी कलाई पकडकर "स्वीमिंग पूल जोन' से बाहर की तरफ़ बढ़ गया । लड़की अब भी अपने पुरुष साथी को 'सता' रही थी ।
"मार डाला मार डाल विनम्र । विनम्र नामक युवक के अन्दर बैठी जाने कौन-सी ताकत ने उसे उकसाया------" मार डाल उस लड़की को!
जरा सोच, मरने के बाद वह कितनी सुन्दर लगेगी । गला दवा दे, उसकी बड़ी बड़ी आखे फटी की फटी रह जाएगी यहीं स्वीमिंग पूल के नीले से नजर अाने बाले पानी पर तैरती रह जाएगी उसकी लाश ।
" पहले वह डूबेगी ।
फिर खुबसुरत जिस्म में पानी भर जाएगा और वह फूलकर कुप्पा हो जाएगी । कांच की गोलियों की तरह बेजान हो चुकी आंखें खाली आकाश को ताकती रह जाएगी ।
वाह !
क्या सीन होगा वह । मजा आ जाएगा! विनम्र, मजा आ जाएगा ! मार डाल उसे।"
"विनम्र विनम्र ।" किसी ने उसे झझोड़ा ।
"आं" वह चौका ।
चौंककर झझोड़ने वाली की तरफ़ देखा ।
वह श्वेता थी ।
उसकी अपनी श्वेता ।
वब, जिसके साथ विनम्र यहाँ आया था । जिसे वह वहुत-वहुत प्यार करता था ।
परन्तु!
इस वक्त वह उसे अजनबी-सी लगी ।
"विनम्र । " हैरान नजर आ रही श्वेता ने पूछा---" क्या होगया है तुम्हें ?"
" म--मुझे?" विनम्र के मुह से हड़वड़ाए हुए शब्द निकले-----म-मुझे क्या होता ?"
"कुछ तो हुआ था ।" श्वेता बोली------"आस-पास आइना होता तो तुम्हें दिखाती । भभक कर लाल हो गया तुम्हारा चेहरा । ठीक यूं जैसे किसी दहकती भटृटी के नजदीक बैठे । जबड़े कस गए थे । आंखों में आखों में इस कदर हिंसक भाव उभर अाए थे कि मुझ तक को तुमसे डर लगने लगा था !"
बिनम्र को लगा------"श्वेता (shweta) ठीक कह रही है बह खुद को अभी-अभी किसी भयंकर स्वप्न से बाहर निकलता सा लगा ।।
वड़वड़़ाया-----" हां कुछ हुआ तो था । "
"क्या हुआ था?" श्वेता ने पूछा ।
" नहीं पता ।"
"अजीब बात कर रहे हो विनम्र तुन्हें कुछ हुआ और तुम्हीं को नहीं पता कया हुआ था । ज़ब तुम्हें कुछ हुआ था तब तुम 'उसे' घूर रहे थे ।"
"क-किसे ?"
"उस क्लमुंही को ।" श्वेता ने अपनी वड्री-बड्री आंखे स्वीमिंग पूल की तरफ घुमाइं।
अब.. .बिनम्र ने भी उस तरफ देखा ।
हां , वह वही थी । एक लड़की । एक ऐसी लडकी जिसके जिस्म पर केवल ब्रा और बी शेप का अण्डरवियर था ।
स्वीमिंग पूल के पानी में अपने पुरूष साथी साथ अठखेळियां कर रही थी ।।।। पुरुष अथेड्र था। लड़की से करीब दुग्नी उम्र के पुरूष ने उसे बांहो मे भरना चाहा मगर लड़की खिलखिलीई और मछली की मानिन्द पानी के अंदर तैरती चली गई यूं जैसे पुरुष को 'तरसा' रही हो !
स्वीमिंग पूलपर और लोग भी थे।
बल्कि अनेक लोग वे ।
वे शोर भी कर रहे थे मगर विनम्र के कानों में गूंजी तो सिर्फ ओर सिर्फ उस लड़की की खिलखिलाहटा यह खिलखिलाहट ।।।। विनम्र के अपने कानों मे पिघलते हुए शीशे की मानिन्द उतरती सी लगी और आंखे.. आखें एक बार फिर उसी पर जमीं रह गई ।
उस पर जिसे विनम्र ने आज से पहले कभी नहीं देखा था । वह लड़की उसके लिए पूरी तरह अजनबी थी ।
इसके इस वक्त उसे सिर्फ और सिर्फ वह लडकी ही नजर आ रहीं ।
स्वीमिंग पूल पर मौजूद भीड़ में से उसे और कोई नजर नहीं आ रहा था !!!!!
उसका पुरुष साथी भी नहीं ।
एक बार फिर जेहन ने बिस्फोट-सा हुआ ।।।
उसके अंदर मौजूद अंजानी ताकत चिखी -----" कितनी सुन्दर है यह लडकी, मगर मरने के बाद और भी ज्यादा सुन्दर लगेगी । हाथ-पैर ठंडे पड़ जाएगे उसके! वाह !!...मजाआ-जाएगा! बिनम्र मार डाल उसे।"
दिखो----देखो विनम्र ।’" श्वेता की घबराई हुई आवाज वहुत दूर से आती महसूस हुई----" तुम्हारा चेहरा फिर भभकने लगा है । जबड़े फिर कस गये है । तुम्हें कुछ हो रहा है विनम्र । खुद को सम्भालो !!"
"हां ।" विनम्र ने मन-ही-मन खुद से कहा ---- " श्वेता ठीक कह रही है । मुझे खुदे को सम्भालना चाहिए । वरना मैं उस लड़की को मार डालूँगा । मगर क्यों------मैं तो उसे जानता तक नहीं । फिर मैं क्यों उसे मार डालना चलता हूं? है भगवान ये मुझे क्या हो रहा है? मैं क्यों उस लड़की की गर्दन दबाना चाहता हूं ?"
"क्योंकि यह मरने के बाद सुन्दर लगेगी ।" जवाब उसके अंदर मौजूद अज्ञात ताकत ने दिया---"उससे कई गुना ज्यादा सुंदर जितनी इस वक्त लग रही है !! अपनी आंखों को सुकून पहुचाना चाहता है तो उसे मार डाल । बहुत शांती मिलेगी तेरी आत्मा को । यकीन नहीं आता तो उसकी गर्दन दबाकर देख ।"
"होश से आओ विनम्र होश में आओ ।" घबराई हुई श्वेता ने उसे एक बार फिर झंझोड़ा ।
बिनम्र फिर चौका ।
जैसे सोते से जागा हो ।
उस लडकी के अलावा भी सब कुछ नजर जाने लगा । लड़की के साथ का पुरुष भी । स्वीमिंग पूल पर मौजूद भीड भी और बुरी तरह आतंकित श्वेता भी । एक बार फिर श्वेता को अजनबियों' की-सी नजर से देखा । साथ ही महसूस किया, उसका अपना चेहरा इस वक्त पसीने से बुरी तरह भरभराया हुआ है ।
"तुम्हें फिर कुछ हुआ था विनम्र?" श्वेता ने पूछा----" आखिर बात क्या है?"
“चलो यहां से ।" श्वेता के सवालो का जवाब देने की जगह बिनम्र ने उसकी कलाई पकड़ी और तेजी के साथ 'स्वीमिंग पूल जौन' से बाहर निकलने बाले रास्ते की तरफ बढ गया ।
"अरे---अरे!" उसके साथ खिंची चली जा रही श्वेता ने कहा---"ये क्या कर रहे हो विनम्र हम लोग यहाँ 'एन्जजॉय' करने आए थे मगर तुम हो कि जाते ही बापस चलने........
"श्येता ।" उसने ठिठक-कर कहा--"अगर मैं यहाँ रुका तो उसका खून कर दूंगा ।"
"ख-खून ।" श्वेता के जिस्म का रोया खड़ा हो गया ।
"हाँ ।"
"क-किसका?"
विनम्र ने स्वीमिंग पूल में अठखेलियां कर रही लडकी की तरफ इशारा करके कहा…"उसका ।"
" क--वया बात कर रहे हो?" श्वेता हकला गई…“क्या तुम उसे जानते हो?"
"नहीं ।"
"फिर क्यो. . .क्यों खून कर दोगे उसका?"
“मुझे नहीं पता । "
"अजीब बात कर रहे हो विनम्र । जिसे जानते तक नहीं । जिससे न तुम्हारी दोस्ती है न दूश्मनी । जिससे तुम्हारा कोई सम्बन्य ही नहीं है उसे क्यों कत्ल कर दोगे ?"
"कहा न मुँझे नहीं पता ! केवल इतना जानता हूं---अगर वह लड़की मेरी आंखों के सामने रही तो मैं उसे छोड़ूंगा नहीं । क्या तुम चाहती हो मैं हत्यारा वन जाऊं ?"
"न-नहीं?" श्वेता कांपक्रर रह गई…"म-मैं भला ऐसा कैसे चाह सकती हूं ?"
"तो फिर आओ मेरे साथा निकलो यहां से ।" कहने के साथ एक बार फिर वह उसकी कलाई पकडकर "स्वीमिंग पूल जोन' से बाहर की तरफ़ बढ़ गया । लड़की अब भी अपने पुरुष साथी को 'सता' रही थी ।