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खबर तेरी..

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Guest
खबर तेरी..

भूले हुए सन्नाटो को चीरती सी बर्तनों की आवाजें ,मोटर गाड़ियों की पी पी और दोपहर की नमी भरी गर्मी,पास के मंदिर से आती घंटियों की आवाज और दूर के मस्जिद से आती अजान कि आवाजे, सभी के बीच मैं खामोश सा उस बर्तन की दुकान में बैठा हुआ था,हल्के हल्के चलते पंखे की हल्की हल्की हवा ने मेरे मन को हल्का हल्का सा सकून तो दे दिया था लेकिन उस हल्की हल्की सी उलझनों का क्या जो मेरे मन मे हल्के हल्के से उठ रही थी,मेरी माँ ना जाने क्या क्या लेने की फिराक में थी जिससे मुझे कोई भी मतलब नही था,मैं अपने मोबाइल में फेसबुक खोल कर उसमे ऐसे गुम था जैसे दुनिया मे इसके सिवा और कुछ नहीं हो, तभी एक प्यारी सी खुसबू मेरे नाक के पोरों को छेदते हुए मेरे मन तक उतर गई,मेरी नजर अचानक ही उठी मैं उस खुसबू के सोर्स को ढूंढने लगा,मेरी नजर एक परी सी हसीन लड़की पर जा टिकी,सफेद सलवार में लिपटी हुई वो परी नजाकत की देवी लग रही थी,उसकी मोटी सी माँ(शायद वो उसकी माँ ही हो) दुकानदार से कुछ बहस कर रही थी, साला किसे फिकर थी,मैं तो एक नशे के गिरफ्त में था, उसकी नजाकत उसकी हर हरकत, अदा शरीर की लालिमा के नशे में था,उसका वो हसीन सा चहरा ना जाने मझे इतना हसीन क्यो लग रहा था की मैं उससे अपनी निगाहे ही नही हटा पा रहा था,मैं बेशर्मी से उसे यू ही देखता रह जाता अगर मा की आवाज ने मेरा मोह भंग नही कर दिया होता,

“विकास चल जल्दी से सामान उठा ले ,और भी चीजे खरीदनी है”

सच मे इससे दुख की बात मेरे लिये और क्या हो सकती थी, मैं बुझे मन और भारी पैरो से उठा और उनके पीछे पीछे चलने लगा,वो परी मेरे जीवन मे एक ख्वाब की तरह आई और जैसे मैं फिर से जाग गया मेरी नीरस जिंदगी में वापस आ गया ,

1 महीने के बाद

मेरी जिंदगी फिर से उसी ढर्रे में आ गई थी लेकिन वो चहरा और वो खुसबू मेरे दिमाग से जा ही नही रही थी ,लाख कोशिशो के बावजूद भी मैं पागलो की तरह उसे ही याद किये जा रहा था,मेरे फाइनल ईयर का एग्जाम अब सर पर था ,जितने चक्कर मुझे काटने थे मैं काट चुका था,उस बर्तन दुकान के ,पूरे बाजार का ,जंहा भी उसके मिलने की संभावना होती मैं वँहा पहुच जाता ,पहले तो बाजार जाने के नाम से ही मैं मुह सिकोड़ा करता था और अब ,बिना कारण भी चला जाता,पर कितने दिन मैं उस हसीना को ख्वाब समझकर भुलाने में लग गया,अभी की सबसे जरूरी चीज थी एग्जाम और उसमे पास होना ,मैं दिन रात बैठा पढ़ने की कोसीसे करता मेरे सभी जिगरी दोस्तो ने भी मुझे समझाया की सपने आते है और जाते है इसके लिए जिंदगी को दाव पर नही लगाया जाता,लेकिन उन पागलो को कौन समझाए की सपनो के लिए ही तो जिया जाता है ,और कभी कभी मरा भी …..

जैसे तैसे मैं तैयारी कर पाया और वो तो भला हो की मैं पढ़ने में हमेशा से ही होशियार रहा था और मुझे बस रिविशन करना था पेपर हालात के मुताबिक अच्छे ही गए,शाम की पार्टी किसी अच्छे से होटल के पब में करने का प्लान किया जो की हमारे औकात के बाहर था,लेकिन एक दिन के लिए सभी मिलकर और कुछ डिस्काउंट लेकर हम उसे अपनी औकात में ढाल ही लिया था,पार्टी अपने पूरे जोरो पर थी और मैं भी अब 4 पैक डाउन था,पहली बार स्कोच चखी थी तो कुत्तों की तरह पीने का प्लान था ऐसे भी अब ना तो पढ़ाई की कोई टेंसन था ना ही कॉलेज का और सबसे बड़ी बात की ना ही किसी गर्लफ्रैंड का ,मेरे एक दोस्त को सिगरेट की तलब लगी ,और हम बाहर निकले ,ये दोपहर थी ,हा पिछले एक घंटे से उस अंधेरे कमरे में डीजे के शोर ने ये बात हमे भुला ही दिया था ,बाहर आये तो कानो में अब भी कुछ बजा बजा सा लग रहा था ,हम थोड़ा लड़खड़ा भी रहे थे,

“बे विकास बाइक ले ले “

“अरे छोड़ ना बाहर ही तो होगा कोई ठेला “

हम उसी हालत में बाहर जाने लगे कि वही आंटी ,हा वही मोटी...आंटी ...मेरा नशा कुछ देर के लिए काफूर हो गया,मैंने नजर दौड़ाई लेकिन मेरे सपनो की राजकुमारी की खबर कही नही थी,उस आंटी ने मेरे पास से गुजरते हुए मुझे अजीब निगाहों से देखा जैसे की जमाने भर की घृणा उसकी आंखों से ही छलक जाएगी ,

“अबे मैं कैसा दिख रहा हु “

“क्यो “

“यार ये मुझे ऐसे क्यो घूर रही थी जैसे मैंने कोई पाप किया हो “

“अबे पहली बात तो तू लड़का है ,दूसरा तेरी चाल बता रही है की तू पिया हुआ है ,तीसरा तेरे कपड़े बता रहे है की तू गरीब है और पी कर नाच कर आ रहा है ,और चौथा साले इतनी भद्दी आंटी को कौन घूरता है साले “

आज मेरा ये पिद्दी सा दोस्त मुझे ज्ञान का पुतला लग रहा था ,आंटी जी के लिए वहां खड़े दरबान ने वो बड़ा सा कांच का दरवाजा खोला ,आंटी एक बार फिर से मुझे देखती है कुछ बुदबुदाती है और अंदर चले जाती है ,मैंने उनके होठो की बुदबुदाहट को पढ़ने की कोशिस किया शायद उन्होंने डिसगस्टिंग कहा था ,खैर मैं दरबान के पास पहुचा ,अपने जेब को टटोला एक 5सौ का नोट मिला ,जिसे मैंने ना जाने कितने दिनों में अपने चाय सिगरेट के खर्चे से काट कर किसी इमरजेंसी के लिए बचा कर रखे थे ये इमरजेंसी ही थी ,

“ये लो “

“धन्यवाद सर “

“अच्छा ये मेडम जो यहां से अभी अभी गई आप उन्हें जानते हो “

वो आश्चर्य से मुझे देखने लगा था

“नही सर “

“अच्छा तो क्या ये हमेशा यहां आती है “

“नही पता सर यहां तो बहुत लोग आते है ,कुछ याद नही “

“ओह तो ये अभी कहा गई होंगी “

“शायद रेस्टारेंट ,या किसी से मिलने आयी होंगी किसी रूम में “

“ओके “

मैं शालीनता से वहां से आ गया ,

“अबे हो गया तेरा चले बड़ी तलब लगी है और ये पैसे कहा से निकल गए आज तो कह रहा था कंगाल है “

“सुन यार मुझे थोड़ा काम याद आ गया है घर जाना है बहुत जरूरी है भाई”

“साले पागल है क्या स्कोच...भूल गया क्या कुत्ते जैसा पीना है ,साले पूरे पैसे दे दिए है अब वो वापस नही मिलेगा ,अभी 3 घण्टे और है ,बे नाचना है “

“भाई समझ बहुत इमरजेंसी है “

मेरा दोस्त शायद कुछ समझ गया था ,

“लड़की का चक्कर ,साले तू भी जाएगा अब “

मैं अपनी बाइक लेकर होटल के पास की टापरी में बैठ गया ,जंहा से मेरे दोस्तो की नजर से भी बचा रहू और होटल के गेट पर भी नजर रहे ,आखिर लगभग 2 घंटे के बाद वो समय आया जब एक सफेद रंग की कार होटल से निकलती है जिसे मोटी आंटी ड्राइव कर रही थी ,मैंने आहिस्ता से अपनी बाइक उस कार के पीछे लगा लिया जो की एक बड़े से बंगले में जा घुसी ,वाह मेरा ससुर तो बड़ा पैसे वाला लग रहा है ,मेरे दिमाग ने मुझसे कहा ,खैर पैसे का क्या है मुझे तो बस मेरी जान की झलक दिख जाय ,मैंने घर का बोर्ड देखा वो पंजाबी परिवार था ,इतने बड़े घर की लड़की और कपड़े तो उसने …..,यार सलवार कमीज ही तो था,हा सफेद था,मंहगा लग रहा था या सस्ता ये तो मैंने ध्यान ही नही दिया ,कोई नही अब बस इसे पटाना है और घर वालो को इटरकास्ट शादी को मनाना है ,यस विकास यू केन डु इट ,

मेरे मन ने ना जाने कितनी बाते सोच ली थी बस एक ही बात बाकी रह गई थी जिसके लिए मैं इतने समय से तडफ रहा था

वो एक झलक जिसे पाकर मैं दीवाना हो गया था ,मैं पास के ही पान ठेले वाले के पास जाकर खड़ा हो गया ,एक सिगरेट मांगी लेकिन फिर याद आया की साला ससुराल के सामने खड़ा है ,एक कोल्ड्रिंक मांग ली ,तीन पी गया ,दो पान ,

“भैया जी किसी का इंतजार कर रहे हो क्या “

“अरे नही पाजी बस ,”मैंने भैया जी को पाजी कहा ,देखा साला अभी से ससुराल के रंग में रंग गया ,मैं मंद मंद मुस्कुराया ,

“यू बार बार सामने क्या देख रहे हो “

“तू अपना काम कर ना यार, चल एक चाय पिला और एक सिगरेट भी “

मेरा दिमाग झंड हो गया था,साला फेसबुक के सारे अपडेट पढ़ चुका था लेकिन कोई हलचल उस बंगले से नही आ रही थी ,पता नही लोग कैसे किसी पर नजर रखते है मैं तो डेढ़ घंटे में ही बोर हो गया ,

“क्या हुआ भैया जी झल्ला कहे रहे हो ,मेडम जी को ताकने आये हो क्या “वो साला अपने पान से गंदे हुए दन्तो को दिखता हुआ मेरे दुखती रग पर हाथ फेर गया ,मैं हड़बड़ाया लेकिन उसने जिस तरह से ये कहा था उससे लगता था की कोई तो ऐसी मेडम यंहा रहती है जिसे देखने यहाँ लोग आया करते है ,

“अरे क्या शर्माते हो भैया उनके आशिक तो आते जाते रहते है ,तुम नए लग रहे हो “मैं आश्चर्य से उसे देखा

“अभी तुम्हारा कुछ नही हो सकता अभी साहब घर पर है ,और अभी अभी तो मेडम बाहर से वापस आयी है “

ये साला उस मोटी को मेडम समझ रहा था ,

“इनकी कोई बेटी नही है क्या “

अब उसके दिमाग ने झटका दिया ,

“हैप्पी बिटिया, ???”

हैप्पी ??? कोई नही शादी के बाद बदल दूंगा ,

“वो होस्टल में रहती है ,कालेज में पड़ती है ,लेकिन तुम अगर उसके पीछे हो तो भूल जाओ बेटा, माँ को पटा ले बेटी के ख्वाब मत दिख तेरे औकात से बाहर की है “ वो मुझे ऊपर से नीचे तक देखता हुआ बोला ,साला एक ही बार में भैया से बेटा में उतर गया था ,

“अरे भइया जी हमारी औकात क्या है ये तो हम बाद में बताएंगे बिहारी है अभी एक पान और खिलाओ और हैप्पी के कालेज का पता बताओ “

“अरे ऐसे ही फोकटिया ??”

“अरे कहे फोकटिया भैया ,आप बताओ तो इनाम मिल जाएगा “

“सेट थॉमस इंजीनियरिंग कॉलेज में है ,2nd सेमेस्टर “

“अरे वँहा ये भी इंजीनियर बन रही है ,सही है भइया,हम भी इंजीनियर वो भी इंजीनियर दोनो मिलकर इंजीनियर इंजीनियर खेलेंगे काहे सही कहा ना “

वो फिर से अपने गंदे दांतो को दिखता हुआ जोरो से हँसा,

“हम तुम्हे नही बताते लेकिन तुम भी अपने बिहार के हो ना इसलिए बता दिए ,अब निकालो हमारा इनाम “

“अरे भैया हम तो यही के है लोकल ,लेकिन अपनी हैप्पी के लिए बिहारी भी बन जायँगे और पंजाबी भी बुझे की नही बुझे “

मैं जोरो से हँसता रहा और वो ठगा सा मुझे देखने लगा ,

“खैर इनाम तो हम आपको देंगे अभी तो बिल बस बता दो ,इनाम नही बाद में वादा करते है जिस दिन हमारी राजकुमारी हमे मिल जाएगी आपको ईमान से नहला देंगे ,”

वो मुझे घूरता रहा लेकिन मैं बिल चुका कर वापस आ गया,

खोज जारी है ……

1 महीने फिर से बीत गए ,रोज कालेज के चक्कर लगा लगा कर मेरी दोस्ती वहां के केंटीन वाले से लेकर चपरासी तक से हो गई थी लेकिन ना हैप्पी मिली ना मेरा मूड हैप्पी हुआ ,हैप्पी नाम की कई लडकिया मिल गई लेकिन मेरी हैप्पी कहा थी ,

,मैंने अपने एग्जाम में अच्छे अंक लाये लेकिन किसी केम्पस में नही गया ,घर वाले मेरे जान के दुश्मन बने फिर रहे थे ,वो मुझे नॉकरी करते देखना चाहते थे ,लेकिन मुझे गेट निकलना था,क्योकि किसी ज्ञानी दोस्त ने कहा की बाहर से लड़की का पता नही चलेगा अंदर जाना पड़ेगा ,बड़े घर की लड़की है ,होस्टल में रहती है ,अंदर जा तो सबका डिटेल पता चलेगा और अंदर जाने का एक आसान रास्ता है की तू यहां की फैकल्टी बन जा ,गेट निकाल ले ऐसे भी इन्हें गेट क्वालीफाई बन्दों की जरूरत है आराम से अंदर ….

मैं पागलो की तरह पढ़ने लगा ,कहते है ना की अगर किसी चीज को शिद्दत से चाहो तो वो मिल जाती है ,मैंने 2 महीने की टेबलतोड़ तैयारी से गेट क्वालीफाई कर लिया ,और एक ही महीने में मैं कालेज के अंदर ,साला बहुत ढूंढा लेकिन वो नही मिली ,कपूर सरनेम के सभी हैप्पीयो से मिल लिया यहां तक की लड़को से भी लेकिन वो नही मिली ,

कोई खबर नही आती …….

ना वो मिली ना ही उनकी कुछ खबर मिली ….

ना जाने कब उनकी खबर मिले…..

ये एक एक लाइन के शेर उसी तरह से अधूरे है जिस तरह से मैं अपने राजकुमारी के बिना अधूरा था ,

लेकिन मेरी नॉकरी तो लग चुकी थी और घर वालो को एक और कीड़ा काटना शुरू हो चुका था जो की हमारे मिडिल क्लास के बन्दों की सबसे बड़ी प्रॉब्लम है,मेरी शादी का कीड़ा ……

“अरे देख भी ले अच्छी लड़की है ,अब तो तू कमाता भी है “

मेरे बाप को तो बस कामना ही दिखता था ,

“कमाता हुआ क्या क्या मतलब जिंदगी बर्बाद कर लू,उस क्लर्क की बेटी के लिए “

“अरे तो मैं कौन सा आईएएस ऑफिसर हु ,और तू कौन सा सुंदर पिंचई बन गया है ,हमारे बराबरी का रिश्ता है समझ गया “

“अरे देख लो भइया नाम बड़ा ही मस्त है कविता ...वाह “मेरी बहन जब भी जुबान खोलती थी ऐसा लगता था की गाला घोट दु इसका

“अरे देख भी ले बेटा पापा ने वादा कर लिया है “

अरे मेरी प्यारी मा तुम क्यो नही समझती की अगर तुम उस दिन जिद करके मुझे बाजार नही ले जाती तो मैं किसी कविता क्या किसी कहानी से भी शादी कर लेता ,

“मैं घण्टा शादी नही करूँगा किसी कविता फविता से “

“अरे माँ के सामने गली देगा तू “

“अब ये घंटा कौन सी गली होती है “

“अरे माँ आज ये घण्टा बोल रहा है बाद में पता नही क्या क्या बोलेगा ,और समझ लो फिर शराब ,सिगरेट छि छि “

मेरी बहन ना सिर्फ आग लगती है उसमे घी भी डालती है

“है भगवान इसी दिन के लिए …”मेरी मा कुछ बोलने ही वाली थी की मैं जो सर पकड़ कर बैठा था उठा

“ठीक है ठीक है मैं जा रहा हु ओके देख लेते है की कविता कितनी अच्छी लिखी गई थी “

माँ के चहरे में आश्चर्य जनक रूप से परिवर्तन आया और वो अपने आंखों का काजल निकल मेरे गालो में लगा दिया ….

ये मेरा पहली बार था ,मैं सर नीचे किये बस उस पानी के ग्लास को देख रहा था जो अभी अभी किसी ने मुझे दिया था ,मेरी इतनी हिम्मत ही नही हो रही थी पानी देने वाले का चहरा भी देख सकू ,

“ऐसे आपके बेटे ने केम्पस क्यो नही लिया “

“बस भाई साहब आज कल के बच्चे क्या करते है क्यो करते है समझ ही नही आता “

“हा वो तो है ,हमारी बेटी भी पहले सेंट थॉमस से इंजीनियरिंग कर रही थी लेकिन अभी इसी साल उसने वहां से छोड़कर देवक़ीनदान साइंस कालेज में एड्मिसन लिया है,अभी BSC कर रही है , “

मेरा दिमाग चकरा गया ,साली कैसी पागल लड़की है ,इतने अच्छे कालेज को छोड़कर उस साधारण से कालेज में चली गई ,भाई ये तो तेरे लायक नही हो सकती ,

“अरे बच्चों कम से कम एक दूजे का चहरा तो देख लो फिर कहोगे की देखा ही नही ,अब इस जमाने में भी कोई इतना शर्माता है भला “

मैंने धीरे से सर उठाया ,नजर मिली और भाईसाहब …..

दिल ने शायद धड़कना बंद कर दिया था ,जिसकी खबर में जहां भटका था वो मेरे सामने थी ,मैं पागल हँस लू या रो लू समझ से परे था ,वो भी मुझे आंखे फाडे देख रही थी ,उसकी नजाकत गायब थी और हम दोनो जो अभी शर्माते हुए बैठे थे एक दूसरे को ऐसे देखे जा रहे थे की कोई जन्म से बेशर्म आदमी भी शर्मा जाय

“तो आपका नाम कविता है “

“तो आपका नाम विकास है “

दोनो ही चौके ,हमारे घर वालो को तो कुछ समझ नही आ रहा था की ये हो क्या रहा है ,वो कभी मुझे देखते तो कभी उसे

“हमे अकेले में बात करनी है “

जिसे मैं लाजवंती समझता था वो तो खतरनाक निकली ,लड़की का बाप भी झेंपा

“हा हा क्यो नही जाओ ना इसे अपने कमरे में ले जाओ “

वो उठी और मेरे हाथो को पकड़कर खिंचते हुए अपने कमरे में ले गई और अंदर से लगा दिया

एक जोरदार चाटा मेरे गालो में पड़ा ,

“पहले नही बता सकते थे की तुम्हारा नाम सुलभ पांडे नही है तुम्हारे चक्कर में मैं अपना कॉलेज छोड़कर उस घटिया से कालेज में चली गई ,साले वहां के लड़को को तो बात करने की भी तमीज नही है ,”

“अच्छा और मैं जो तुम्हारे लिए लाखो का पैकेज छोड़कर पढ़ा रहा हु ,मैं तो तुम्हे हैप्पी कपूर समझ रहा था “

“हैप्पी कपूर ?वो तो मेरे पापा के बॉस की बेटी है जिसकी बीबी के साथ मैं उस दिन तुमसे मिली थी “

“तो मुझे बताया था मैं तो उसे ही तुम्हारी मा समझ रहा था “

“और मैं उसे जो तुम्हारे साथ थी “

“वो सच में मेरी माँ है ,और सुलभ उनकी सहेली का बेटा है “

हम दोनो की नजर फिर से मिली ,

“नही ये सपना है ये सही नही हो सकता “

कविता इधर उधर बेचैनी से घूमने लगी ,मैंने उसे पकड़ा और खीचकर एक थप्पड़ जड़ दिया .वो होश में आयी हमारी नजर मिली अब हम दोनो को ही पता था की ये सपना नही था ,दोनो की आंखे जैसे एक दूजे में ही खो जाने को बने हो ,दोनो की आंखों में आंसू ना जाने कब आ गया था ,दोनो एक दूजे को ऐसे गले लगे जैसे सदियों से हम तडफ रहे थे ,हा ये जुदाई के दिन सदियों से कम भी तो नही थे …………………

आखिर मिल ही गई खबर तेरी ….

यहां कहानी खत्म है

लेकिन अंत में एक सीन और ..

“ये लो बबुआ भइया तुम्हार इनाम और ये हमारी शादी का कारड “

पानवाला मुझे अजीब निगाहों से देखता है कभी मेरे द्वारा दिए गए चेक को देखता है ,

“25 हजार ??? क्या सच में हैप्पी मेडम तुमसे शादी कर रही है ,”

मैं एक अंगड़ाई लेता हु और उसके हाथो से वो चेक छीन लेता हु .

“अरे हैप्पी मेडम तो हमारी बारात में नाचेंगी बबुआ भईया ,और पाना की ठेला लगाओगे आप ,तो वेन्यू में आ जाना ऑर्डर दे दिया समझो और शादी के बाद ये चेक ले जाना ,हमे तो मिल गई हमारी राजकुमारी “

मैं नाचता हुआ वहां से चला गया…..
 
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