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चीते का दुश्मन complete

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चीते का दुश्मन

"बेटा लूमड़ मियां. . .!" बिजय अलफांसे को एक क्षण घूरने के बाद बाईं आंख दबाकर बोला-“इसका मतलब ये हुआ कि उस फिल्म के ज़रिए तुम हर जासूस से एक-एक करोड़ रुपया ऐठोगे I”

“बिल्कुल ठीक समझे जासूस प्यारे I” अलफांसे अधिक आराम से कुर्सी पर पसरता हुआ बोला…"मेरा ख्याल है कि आजकल मूग की दाल में भीमसेनी काजल कुछ अधिक मिलाकर खाने लगे हो I"

"मगर असली फिल्म किसे दोगे लूमड़ भाई?"

"इसका निर्णय भला मैं कैसे कर सकता हू?" बड़े बिचित्र ढंग से मुस्कराया अलफांसे ।

“तो प्यारे लूमड़ खान, तुम्हारे इस सम्पूर्ण व्याख्यान का रस ये है कि हम यानी बिजय दी ग्रेट तुम्हारे हलक मेँ एक करोड़ रुपया ठूंसें और इस पर भी यह गारंटी नहीं कि फिल्म असली ही मिलेगी ।"

"जब तक तुम मुझे एक करोड रुपया नही दे देते तब तक भला मैँ तुम्हें कैसे बता सकता हूं कि मेरा इरादा तुम्हें असली फिल्म देने का है अथवा नकली I"

"बेटे तूमड़मल पक्रोड्री वाले?" एकाएक विजय का लहजा सख्त हो गया…“लोग हमेँ विजय दी ग्रेट कहते हैं ।" कहते हुए विजय ने बड़े अंदाज के साथ अपनी बांहें ऊपर चढाई और उसकी ओर बढ़ता हुआ गुर्राते हुए लहजे में बोला--"कसम छज्जन ताई की, तुम्हें फूटी कौडी भी नहीं देंगे और फिल्म हमारे पास होगी. . .ऐसा भी हो सकता है कि तुम्हारे मुंह में फंसा ये जबड़ा भी हमारे पास हो I”

"तुमसे पहले भी कह चुका हू जासूस प्यारे कि मुझे मालूम है तुम इतने मूर्ख नहीं हो I” बिना विचलित हुए अलफांसे मुस्कराते हुए बोला…“तुम खुद यहां चंगेज खां के मेकअप में आए हो I"

"ये रहस्य केवल तुम जानते हो लूमड़ भाई I” बिजय मूर्खों की भांति बोला…“और तुम्हें इतना मौका नहीं देगे कि तुम किसी और को यह बता सको I”

“अलफांसे रास्ते में आए रोडों को ठोकर मारकर हटा देता है I”

" लेकिन हम रोड़े नही, भारी पत्थर हैं लूमड़ भाई I" कहते हुए बिजय ने बडी तेजी के साथ अलफांसे पर जम्प लगा दी ।

लेकिन अलफांसे विजय के तेवर देखकर ही समझ गया था कि वह किस मूड में है? बिजय से अधिक शक्ति का प्रदर्शन करके उसने कुर्सी सहित खुद को गिरा लिया था ।

उसके बाद अलफांसे ने बडी तेजी से उठने की कोशिश की । किंतु उसका पैर कुर्सी मेँ उलझ गया…इस कारण उसे उठने में कुछ विलम्ब हुआ और इसका लाभ उठाते हुए बिजय ने ठोकर उसके चेहरे पर रसीद कर दी ।

अलफांसे उछलकर दूर जा गिरा ।

लेकिन बिजली की-सी गति से वह पलटा और इस बार उसके हाथ में रिवॉल्वर था ।

अलफांसे के हाथ में रिवॉल्वर देखते ही विजय सकपका गया । एक पल तक मूखों की भांति पलकें झपकाता हुआ बिजय उसे घूस्ता रहा…फिर भटियारिन की भांति हाथ नचाकर बोला…" हाय लूमड़ मियां, क्या दम ही निकालोगे?"

अलफांसे मुस्कराकर बोला…"ये मत समझना बेटे कि तुम संग आर्ट के जरिए इस रिवॉल्वर की गोली से बच जाओगे. . .ये साधारण रिवॉल्वर नहीं है । संग आर्ट द्धारा केवल रिवॉल्वर की नाल देखकर ये अनुमान लगाया जाता है कि गोली जिस्म के कौन-से भाग से टकराएगी. . लेकिन परेशानी ये है कि इस रिवॉल्वर की नाल दिखावटी है । गोली नाल मेँ से नहीं, कही और से निकलेगी । तुम अनुमान नहीं लगा सकते कि गोली तुम्हारे कौन से अंग में लगेगी । अत: संग आर्ट फेल ।"

". . .!" विजय ने बडी अदा के साथ आंख मारते हुए कहा…"यानी क्रि लूमड़ खान, ये साला स्पेशल रिवॉल्वर तुम्हारे घर में बनने लगा है I”

"विजय बेटे!" अलफांसे उसी प्रकार मुस्कराता हुआ बोला-“तुमने मुझसे टकराकर अपना ही नुकसान किया है । अगर यू.एन.ओ. को मालूम हो गया कि चंगेज खां तुम्हारी कैद में है और शुरू से तुम ही चंगेज खां बने हुए हो तो विश्व मे भारत की कितनी बदनामी होगी और दुम्बकटू वाली फिल्म तो अब तुम्हें मिलने का सवाल ही पैदा नहीं होता । अब देखते जाओ, मैं क्या…क्या गुल खिलाता हूं ।"

"अमां यार लूमड़ प्यारे! "

बिजय अभी कुछ कहने ही जा रहा था कि-

अचानक हवा में सनसनाता एक तीर अलफांसे की कलाई में धंस गया । रिवॉल्वर अलफांसे के हाथ से छूटकर फर्श पर गिर गया । वक्त की नजाकत को पहचानकर अलफांसे ने अपने हाथ के दर्द को भुलाकर फर्श पर पड़े रिवॉल्वर पर जम्प लगाई परंतु एक जबर्दस्त ठोकर उसके चेहरे से टकराई ।

हल्की-सी एक चीख के साथ अलफांसे दूसरी ओर उलट गया ।

"प्रणाम गुरू !" कमरे मेँ विकास क्री आवाज गूंजी ।

पलटकर अलफांसे ने देखा. . .सामने विकास खडा था। उसका पैर फर्श पर पड़े रिवॉल्वर पर था । दोनों हाथ कूल्हो पर और गुलाबी होंठों पर मधुर मुस्कान ।

"वो मारा पापड वाले को I" अपने स्थान से विजय चीखा…"प्यारे दिलजले, आज तुमने सिद्ध कर दिया कि तुम अलादीन खे वंशज हो I”

"बोलो मत गुरु! " विकास ने अलफांसे पर नजर जमाते हुए कहा…“इस समय जरा क्राइमर गुरु से बातें हो रही हैं. ..क्यों अलफांसे गुरु, क्या ख्याल है?”

"खयाल तो बडे नेक हैं I” अलफांसे अपने स्थान से उठता हुआ बोला…“जमाना ये है कि जिसने गुरु…चेले के हाथ…पैर कुतें-पजामे से बाहर निकाले वे हाथ गुरु पर ही उठते हैं I"

“सवाल हाथ उठाने का नहीं है गुरु.. .सवाल है सिद्धांत का l” अपने पैर के नीचे दबा हुआ रिबॉंत्वर उठाता हुआ विकास बोला-“ये मुकाबला चल रहा है जासूसों का । इसमें

आप क्यों दाल-भात में मूसलचंद की भांति टपक रहे हैं । टुम्बकटू को गिरफ्तार करके खिचडी हमने पकाई है और सारी…की-सारी सूत आप जाना चाहते हैं I”

"तो उन जासूसों में बिजय का भी नाम है?” अलफांसे व्यंगात्मक स्वर में बोला…“अगर अंतर्राष्टीय सीफेट सर्विस के जासूसों को पता लग जाए कि चंगेज खा विजय है तो भारत की शान मे चार चांद लग जाएं ।"

"आप विजय गुरु को ब्लैकमेल कर सकते हैं गुरु, लेकिन याद रखिए मेरा नाम विकास है ।" रिवॉल्वर का रुख वह अलफांसे की ओर करके बोला…“आप जानते है कि मेरा सिद्धांत विजय गुरु से एकदम अलग है । व्यर्थ की बातें मैं नहीं सोचा करता । अपनी किस हरकत से भारत की शान पर क्या फ़र्क पडेगा, यह सोचने का काम बिजय गुरु का है । आपका चेला हूं गुरु, आपको मालूम है कि विकास सोचता नहीं है । जो काम करना होता है, करता है । ये भी आप जानते हो गुरु कि जो भी आंख भारत की ओर तिरछी नजर से देखती है उस आंख को विकास फोड देता है । अगर आपने कोई भी ऐसा काम किया गुरु जो हिंदुस्तान के लिए हानिकारक हुआ तो कान खोलकर सुन लें . . .आपने मुझें सिखाया है दुश्मन दुश्मन होता है, उसे हमेशा के लिए खत्म कर देना ही अच्छा होता है ।”

"मतलब ये हुआ प्यारे विकास कि तुम मुझे धमकी दे रहे हो?"

"धमकी नही गुरु, चेतावनी दे रहा हू I" बिकास रिवॉल्वर उंगलियों मे घुमाता हुआ बोला…“अगर आपने कोई भी गलत कदम उठाया तो समझ लीजिएगा विकास का सबसे बडा दुश्मन अलफांसे होगा ।"

"और तुम ये समझते हो कि अलफांसे तुम्हारी दुश्मनी से डरता है I”

"इसका तो सवाल ही नहीं उठता गुरु, लेकिन ये जरूर कहूंगा कि ये दुश्मनी आपको महंगी पड़ सकती है । अच्छा है व्यर्थ ही आप हमारे रास्ते में आकर दुश्मनी न करें ।"

"मैं कब रास्ते में आ रहा हू I”

"अगर वास्तव में रास्ते मेँ नहीं आ रहे हो गुरु तो वह फिल्म हमेँ सोंप दो l” बिकास ने कहा ।

“मैंने उस फिल्म की कीमत केवल एक करोड घोषित की है, बेटे!" अलफांसे चिरपरिचित मुस्कान के साथ बोला…“एक करोड कैश मेरे हाथ पर रखो और फिल्म ले लो । रास्ता साफ़ है, सबसे बड़े जासूस तुम्ही कहलाओगे I”

"वैसे तो सोचने की बात ये भी है गुरु कि यहां मास्को मे मैं तुम्हें रुपए दे कहां से सकता हूं , लेकिन अगर किसी तरह दे भी दूं तो इसकी क्या गारंटी है कि तुम मुझे असली फिल्म ही दोगे? " विकास अलफांसे की आंखों में झांकता हुआ बोला ।

"ये तो तभी पता चलेगा जब माल मेरे हाथ पर रखोगे I” अलफांसे ने बिना विचलित हुए कहा ।

"प्यारे धनुषटंकार !" बिकास ने कमरे के रोशनदान की और देखते हुए कहा ।
 
रोशनदान पर बैठे धनुषटंकार ने विकास का संकेतु पाते ही सीधी जम्प अलफांसे के कदमों में लगाई, उसके बाद विजय के चरण स्पर्श किए और उसी के कंधे पर बैठकर जेब से सिगार निकालकर सुलगाने लगा । उसकी हरकतें देखकर तीनों अलग-अलग ढंग से मुस्कराए पर बोला कोई कुछ नहीं ।

सिगार सुलगाकर धनुषटंकार ने लापरवाही का प्रदर्शन करके एक कश लिया और धुएं का एक छल्ला हवा में उछाल दिया । उसके बाद उसने जेब से एक छोटी…सी डिबिया निकालकर बिकास की ओर उछाल दी ।

बिकास ने डिबिया को लपक लिया और उंगलियों में घुमाता हुआ बोला-"इसे देख रहे हो गुरु. . .ये वो चीज है जिसकी कीमत आप एक करोड मांग रहे हैं I"

मन…ही-मन अलफांसे चौंक पड़ा । र्कितु प्रत्यक्ष मेँ उसने चेहरे के भावों से कुछ प्रकट नहीं किया, बोला…"हम तुम्हारे गुरु हैं, बेटे. . .गच्चा मत देना ।"

"गच्चा नहीं दे रहा हू गुरु बल्कि तुम्हें समझा रहा हूं मैं आपका पक्का चेला हू I” बिकास ने कहा…“आप इस फिल्म को अपनी पानी वाली टंकी में डालकर सुरक्षित समझ रहे थे किंतु इसका क्या किया जाए कि आपका शिष्य यह जानता है कि होटल के कमरे मेँ किसी महत्त्वपूर्ण वस्तु को छुपाने का कौन-सा स्थान अधिक उचित होता है?" विकास बोलता ही चला गया-"आपका ये नाचीज चेला इसे ले आया है I”

"इसका मतलब ये हुआ बेटे कि तुम ये फिल्म मुफ्त में ही मार लाए?” अलफांसे ने मुस्कराते हुए कहा ।

“और अब मैं आपसे एक सौदा करना चाहता हूं गुरु?”

"गुरु से सौदा?"

“दुनिया ने ऐसी कोई पाबंदी नहीं बनाई है कि गुरु से सौदा नं हो सके I" विकास ने कहा…“वेसे आपसे सौदा करने में बिकास इतना खयाल जरूर रखेगा क्रि गुरु को भी लाभ हो । इजाजत हो तो फरमाऊं?"

" बको! "

"आप ये जानते हैं कि चांगली के रूप मे बिजय गुरू है ?" विकास ने बोलना शुरू किया…"ये तो निश्चित रूप से मानना होगा कि अगर ये रहस्य अन्य जासूसों के सामने खोल दिया जाए तो अंतर्राष्टीय जगत में अर्थात् विश्व राजनीति मे मारत के सम्मान को धक्का लगेगा, मगर इससे लाभ तुम्हें भी कुछ नहीं होगा, अलबत्ता इस रहस्य को गुप्त रखने मेँ आपको फाफी लाभ हो सकता है ।"

“बो लाभ भी बता दो I”

“अगर आपने यह रहस्य खोला तो मैं भी यह रहस्य स्पष्ट कर दूगा कि टुम्कटू की जांघ से निकली वास्तविक फिल्म मेरे पास है । इस प्रकार तुम्हारे हाथ कुछ नहीं लगेगा, बल्कि इसका उल्टा हुआ तो आप अन्य देशों के जासूसों से दौलत ऐठ सकते हैं । तुम्हारा उद्देश्य भी दौलत कमाना है...आप भरपूर दौलत कमा सकते हैं । इधर मैं अपने काम में लग सकता हूं । न तो मैं आपके बीच में टांग अड़ाऊंगा और न ही आप हमारे बीच में आएं?"

सुनते ही बडी गहरी मुस्कान अलफांसे के होंठों पर उभरी । वह बोला…“बेटे, विकासा मान गए कि तुम असली चेले हो . . . ये तो ठीक है कि इस सौदे मेँ तुमने मेरा भी लाभ सोचा है, मगर अपने दो मतलब एकदम हल कर गए. . .पहला ये कि बिजय का रहस्य गुप्त रखकर हिंदुस्तान को विश्व राजनीति में बदनाम होने से बचा लिया l दूसरा ये कि अपना रास्ता साफ़ कर लिया I”

"क्या मतलब? "

"माना विकास कि आज तुम दुनिया में काफी नाम कमाँ चुके हो परंतु ये मत भूलो कि हम तुम्हारे गुरु हैं l तुमने ये सोचा है कि इधर सौदे में मैं अपना लाभ देखकर जासूसों को फिल्म के चक्कर में उलझाए रखूंगा । उधर तुम आराम से इस फिल्म के रहस्यों तक पहुंच जाओगे । ये जासूस तुम्हारे मार्ग में बाधा उत्पन्न कर सकते थे, लेकिन तुम उन्हें मेरे चक्कर में उलझाकर अपना रास्ता एकदम साफ कर लेना चाहते हो, लेकिन कोई बात नहीं । गुरु तो हमेशा चेले का भला चाहता है । विजय की तरह मेरी भी दिली ख्वाहिश यही है कि दुनियाभर के जासूसों में सबसे बड़ा जासूस तुम कहलाओ । अंतर्राष्ट्रिय सीक्रेट सर्विस के चीफ तुम बनो । जब मैं तुम्हें तुम्हारी दसवीं वर्षगांठ पर उठाकर ले गया था और तुम्हें ट्रेड किया था उसी दिन से मैंने यह चाहा था कि तुम दुनिया में सबसे बड़े जासूस बनो । विश्व का कोई भी इंसान जब सबसे बड़े जासूस का नाम लेगा तो यह जरूर कहेगा कि इस जासूस क्रो अंतर्रादृट्रीय अपराधी अलफांसे ने बनाया था । धीरे-धीरे मेरे वह सारे सपने साकार होते जा रहे हैं विकास. . .जो तुम्हारे बचपन में तुम्हें लेकर मैंने बुने थे । तुम्हें मैं सबसे बड़ा जासूस देखना चाहता हू । मेरा आशीर्वाद तुम्हारे साथ है । मैं तुम्हारा ये सौदा तुम्हारी तरक्की के लिए मंजूर करता हू I"

“वो मारा पापड़ वाले को ।” सुनते ही विजय उछल पड़ा-“ लूमड़ मियां, अब कही है तुमने पते की बात. . . कसम दोनों के चेले विकास की । इस मौके पर एक खौफ़नाक झकझकी याद आ रही है । हम दोनों का बनाया हुआ ये सात फुट लम्बा पुतला विश्व में चर्चा का विषय बने यही तो हमारे सपने हैं । इसलिए तो भारत की तरफ़ से हमने इसे अंतर्राष्टीय सीक्रेट सर्विस में भेजा न I”

"झकझकी सुनाकर तुम अपने चेले को ही बोर करो ।" अलफांसे बोला-“मैं चला. ."। कहता हुआ अलफांसे दरवाजे की ओर बढ गया । उसे रोकने की कोशिश किसी ने भी नहीं की । अलबत्ता विजय विकास की बुद्धि की मन…ही-मन दाद जरूर दे रहा था ।

बिकास अपने हाथ मेँ उस फिल्म को घुमा रहा था ।

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"बस, मुझे यही उतार दो ।" मास्को की चुंगी आते ही उस व्यक्ति ने ट्रक ड्राइवर से कहा ।

ट्रक ड्राइवर ने चुंगी पर ही ट्रक रोक दिया।

उस इंसान ने ट्रक ड्राइवर को धन्यवाद दिया ।

घन्यवाद को संभालकर ड्राइवर ने अपनी जेब में रख लिया और ट्रक आगे बढा दिया ।

कुछ देर तक वह इंसान सडक पर जाते हुए उस ट्रक को देखता रहा और फिर उसने उधर से इस प्रकार दृष्टि हटाई जैसे उसे अब ट्रक में कोई दिलचस्पी न हो ।

उसके चेहरे पर अभी तक चिंता की रेखाएं अपना प्रभुत्व जमाए हुए थीं । कदाचित वह यह सोच रहा था…कि अब उसे क्या करना है...उसने इधर-उधर दुष्टि धुमाईं...और पाया कि चुंगी के इर्द-गिर्द सन्नाटा ही था.. . ।

रात के दस बज चुके थे । कुछ देर वह अपने स्थान पर खडा यूं ही सोचता रहा ।

और तभी शहर की ओर से आती हुई एक खाली टैक्सी चमकी. . . । टैक्सी चुंगी पर रुकी और उससे भी एक सवारी उतरी ।

वस इंसान आगे बढकर टैक्सी वाले से वोला-“ शहर चलोगे?”

"जी हां!" टैक्सी वाले ने उत्तर दिया ।

पता बताकर कैद से भागा हुआ वह इंसान टैक्सी में बैठा और टैक्सी फर्राटे भरती हुई मास्को शहर की तरफ बढ गई । टैक्सी तेजी से दोड़ रही थी...र्कितु उससे भी अधिक तेज' उसका मस्तिष्क सोच रहा था ।

उसे कैद मेँ पड़े हुए दस दिन गुजर गए । वह किसकी कैद मेँ था? उसे कैद करके किसी ने क्या लाभ उठाया होगा?

अंतर्राष्टीय सीक्रेट सर्विस की मीटिंग भी हो ली होगी । उसे मीटिंग मेँ न पाकर सबने क्या सोचा होगा?

मीटिंग मेँ उसकी अनुपस्थिति का उसके देश पर क्या प्रभाव पडा होगा? उसे तो यह भी पता नहीं लगा कि वह किसकी कैद में था ।

इन्ही सब प्रश्नों के उत्तर मेँ उलझता हुआ वह अपने विचारों की दुनिया मेँ बहुत आगे निकल गया था कि उसके मस्तिष्क को एक झटका-सा लगा ।

टूटी हुईं माला के मोतियों की तरह उसके विचारों की लडियां एकदम बिखर गईं ।

उसने देखा…टैक्सी उसकी मंजिल पर खडी है । वह तेजी के साथ टैक्सी से उतरा और बिल अदा करके उसे विदा किया ।

वहां द्वार पर खड़े दरबान ने रोकने का कोई प्रयास नहीं किया । वह तेजी से चलता हुआ अंदर प्रविष्ट हो गया । पांच मिनट पश्चात वह चौथी मंजिल की गैलरी में बढ रहा था ।

एक कमरे के सामने वह रुक गया । हाथ बढाकर कमरे के दरवाजे पर दस्तक दी ।

"कम इन ।" अंदर से आवाज आई ।

उसने दरवाजा अंदर को धकेल दिया I सामने एक सोफे पर जेम्सबांड बैठा हुआ था । उसके सामने मेज़ पर एक दारू का बोतल, गिलास और भुना हुआ मुर्गा रखा था। बांड ने दरवाजा खुलने के साथ ही उस तरफ देखा-सामने दरवाजे पर खडे इंसान को देखते ही बांड उछल पड़ा ।

पलक झपकते ही वह खडा हो गया और उसके हाथ मे रिवॉल्वर चमकने लगा ।

'हैंड्स अप मि. त्वांगली ।”

दरवाजे पर खड़ा इंसान बुरी तरह चौंका"…बौखलाहट के भाव उसके चेहरे पर आए । एकदम बोला-"क्या मतलब?”

"पहले आप हाथ ऊपर उठा लो, मि. त्वांगली ।" अपने रिवॉल्वर को हिलाता हुआ पूरी तरह सतर्क होकर बांड बोला……'" इस बार अगर कोई भी हरकत की तो मेरी गोली तुम्हारा भेजा उड़ा देगी I"

“मेरी समझ मेँ नहीं आ रहा है कि तुम कह क्या रहे हो?" असमंजस में फंसा त्वांगली हाथ ऊपर उठाता हुआ बोला ।

"मतलब भी सब समझ जाओगे बेटे…जरा मेरी बाईं क्लाई में बंधी हुईं पट्टी देखौ-ये चाक्रू माईक ने मारा है । एक पट्टी कपडों के नीचे पेट पर बंधी हुई है जो चंगेज खां ने मारी थी । लेकिन तुम सबसे सुर्मे निकले । हम तो आपस में लडते-मरते ही रह गए और तुम फिल्म लेकर पार हो ले I”

"मैं…!" त्यांगली की खोपडी घूम गईं-"ये तुम क्या बक रहे हो?”

"मैं जानता हूं चीनी औलाद कि तुम पैदाइशी दोगले होते हो ।” जेम्सबांड उसकी ओर बढता हुआ बोला लेकिन बांड के सामने अब ज्यादा होशियारी नही चलेगी । अगर तुमने नहीं बताया कि फिल्म कहां है तो इसी समय मैं तुम्हें गोली मार दूंगा ।”

"फिल्म ?" गहन आश्चर्य के साथ बोला त्वांगली-“कोन--सी फिल्म?"

'फिल्म कहां है?" बेहद कठोर स्वर मे बांड गुर्राया…'"जवाब दो वर्ना. . . ?"

"जवाब वो नहीं, मैं दूगा, बांड बेटे!" उसी समय कमरे में एक तीसरी आवाज गूंजी ।

अभी बांड और त्वांगली चौंककर पूरी तरह खुद को सम्भाल भी नहीं पाए थे कि त्वांगली के पीछे से गर्दन पर एक कैरेट पडी । वह लहराया और उसी पल उसके पीछे से किसी ने जोरदार ठोकर मारी ।

ठोकर इतनी शक्तिशाली थी कि त्वांगली बाकायदा हवा में लहराया और मुंह के बल फर्श पर बांड के कदमों मेँ जा गिरा ।

त्वांगली बेहोश हो चुका था ।

"गोली चलाई तो घाटे में रहोगे बांड I” दरवाजे से आवाज़ आई…“तुम्हारा फायदा करने तुम्हारे पास आया हू…अगर गोली चली तो इस कोठी में जितने भी जासूस हैं सब यहां आ जाएंगे और तुम घाटे में रहोगे ।”
 
बांड ने देखा…दरवाजे पर त्वांगली खड़ा था । एक पल को तो बांड चकराया परंतु अगले ही पल मुस्कराता हुआ बोला-"ओह तो मतलब ये है कि फिल्म ले जाने वाले त्वांगली तुम हो I"

"जी!" अदब से झुककर त्वांगली बोला--""खाकसार ही वह हस्ती है I"

"बको मत !" कठोर स्वर मेँ गुर्राया बांड…"तुम कौन हो?"

"पहले दरवाजा बंद कर दू?” बांड ने एक पल सोचा और बोला-“ठीक है, करदो।" त्वांगली ने दरवाजा बंद कर दिया ।

"अब बोलो, कौन हो तुम?” जेम्स बांङ ने सख्त स्वर मे पूछा ।

“नाम में क्या रखा है प्यारे, काम की बात करो I” त्वांगली जो वास्तव मेँ अलफांसे था, बोला…“और जब दो दोस्तो के बीच काम की बात होती है तो बीच में ये खिलौना नहीं होना चाहिए ।”

"ज्यादा स्मार्ट बनने की कोशिश मत करो I" बांड उसे घूरता हुआ बोला…"इतनी आसानी से तुमसे दरवाजा इसलिए बंद करवाया है क्योंकि अब इस कमरे की आवाज़ बाहर नहीं जाएगी । इस रिवॉल्वर मेँ हमेशा के लिए सुला देने वाली नींद की गोलियां हैं…किसी को पता मी नहीं लगेगा और तुम. . . I”

"मैँ जानता हू बांड कि हर जासूस का कमरा साउंड प्रूफ़ है और ये कमरा बंद भी इसीलिए किया है ताकि यहां जो हम इश्क फरमाएंगे उसकी जानकारी बाहर बालों को न हो सके I" अलफांसे ने उसकी बात बीच मेँ ही काटकर कहा ।

और बांड ने ।

"धायं! "

एकदम फायर कर दिया ।

मगर दूसरी तरफ अलफांसे था । संग आर्ट का माहिर । हल्की-सी झुकाई देकर उसने गोली को धोखा दिया और

और उससे पूर्व की बांड अगला फायर कर सके, हवा में लहराता हुआ अलफांसे का जिस्म बांड पर जा गिरा ।

बांड एकदम बौखला गया । इस्री बौखलाहट में उस समय चार चांद लग गए जब अलफांसे के बाएं हाथ की कैरेट ने उसकी रिवॉल्वर को फ़र्श पर फेंक दिया और दाएं हाथ के मजबूत घूसे ने उसे हवा मेँ उछालकर फर्श पर ला पटका ।

एक साथ इन लगातार हमलो ने बांड की हालत बैरंग कर दी परंतु फिर भी वह गजब की फुर्ती का प्रदर्शन करके एकदम खड़ा हो गया ।

उसके सामने खड़ा हुआ त्वांगली मुस्करा रहा था ।

बांड जानता था कि रिवॉल्वर की गोली से बचने की कला जासूसों में केवल विजय ही जानता है । इन दो-चार हाथीं में ही बांड ये भी समझ गया कि सामने खड़ा इंसान जबर्दस्त लड़ाका है । उसे लगा, हो न हो सामने खड़ा इंसान विजय है ।

दोनों एक-दूसरे के आमने-सामने थे । जेम्स बांड के चेहरे पर जहां हल्की…सी बौखलाहट के भाव थे वहां अलफांसे के होंठों पर गहरी मुस्कान थी ।

वह अपने दोनों कूल्डो पर हाथ रखे उससे दो कदम दूर खडा था । बांड ने खुद को सम्भाला और बोला…“मैं तुम्हें पहचान चुका हू, विजय I"

“तुमने कुछ नहीँ पहचाना है, बेटे ।" कहते हुए उसने अपने चेहरे से फेश मास्क नोच लिया ।

"तुम?" अलफांसे को सामने देखते ही बांड चौंककर दो कदम पीछे हट गया ।

"हां बेटे, ये हम हैं I" अलफांसे ने मुस्कराते हुए आगे कहा-“मैंने कहा था कि हमारे बीच में ये रिवॉल्वर नहीं होना चाहिए I”

कहता हुआ अलफांसे फर्श पर पडे रिवॉल्वर की ओर बढ़ा ।

इधर सामने अलफांसे को देखकर बांड का पूरा जिस्म तन गया था । अलफांसे की खूबियों से वह अच्छी तरह परिचित था । जैसे ही अलफांसे फ़र्श पर पड़ा रिवाॅल्बर उठाने के लिए झुका । चीते की तरह झपटा बांड ।

हालकि बांड की किसी भी हरकत का जवाब देने के लिए अलफांसे तैयार था किंतु इसके बावजूद भी वह धोखा खा गया ।

बांड ने इतनी अधिक फुर्ती का प्रदर्शन किया था कि अलफांसे जैसा व्यक्ति भी पूरी तरह सतर्क रहने के बाद मी धोखा खा गया ।

जेम्सबांड के जूते की भरपूर ठोकर उसके चेहरे पर पडी । लाख चेष्टाओं के बाद भी अलफांसे एक तरफ फर्श पर जा गिरा l

और जेम्सबांड-वह जानता था कि अगर अलफांसे को क्षण-भर का भी अवसर मिल गया तो उसके लिए खतरा बन जाएगा l

डबल ओ सैविन अपने देश और विभाग का सबसे बड़ा जासूस था । उसने कोई भी रिस्क लिए बिना अलफांसे पर जम्प लगा दी । उस समय अलफांसे ने फुर्ती से करवट बदलकर अपना स्थान छोड देने की कोशिश की थी मगर बांड ने उसकी इस कोशिश को विफल कर दिया । उसके दोनों हाथ अलफांसे की गर्दन में कस गए थे l दोनों कूल्हे वह अलफांसे के पेट पर रखे हुए था । अलफांसे को लगा जैसे फौलाद के बने दो हाथों मेँ उसकी गर्दन फंस गई है । जेम्सबांड की पकड इस प्रकार सख्त होती चली गई कि अलफांसे को अपनी सांस…क्रियां रूकती हुई-सी महसूस हुईं I

बांड उसका गला दबाने को पूरी चेष्टा कर रहा था और अलफासे खुर्द को उसके पंजे से छुडाने की चेष्टा उससे कहीं बढ़कर कर रहा था ।

हालांकि शक्ति लगाने के कारण बांड के घावों में भयानक पीड़ा हो रही थी मगर वह जानता था कि अगर वह जरा भी शिथिल हुआ तो अलफांसे उसके लिए काल बन जाएगा ।

इधर अलफांसे की स्थिति क्षण-प्रतिक्षण खराब होती जा रही थी । उसे और कुछ नहीं सूझा तो उसने अपने दाएं हाथ की उंगली पूरी शक्ति से बांड के पेट वाले घाव मे दे मारी l

बांड बिलबिला उठा ।

एक क्षण के लिए उसके हाधों में शिथिलता आई और उसी क्षण अलफांसे के दोनों पैर बांड की गर्दन से लिपट गए । अलफांसे के एक ही झटके में बांड उलट गया । बांड के हाथ से अलफांसे की गर्दन निकल गई परंतु अलफांसे भी पूरी तरह अपने प्रयास में सफ़ल नही हो सका । उसका प्रयास था कि बांड की गर्दन उसके पैरों की कैची में कैद होकर रह जाए मगर. . .बांड फर्श पर कलाबाजियां खाता हुआ लुढ़कता चला गया ।

एक ही पल में दोनों उछलकर फर्श पर खड़े हुए I

अगले पल एक ही साथ दोनों के जिस्म हवा मेँ उछले । दोनों एक-दूसरे को फ्लाइंग किक मारना चाहते थे कि हवा में दोनों के पैर उछलकर रह गए ।

दोनों एक साथ फर्श पर गिरे, मगर कम कौन था ।

एक का नाम अलफांसे था तो दूसरे का जेम्सबांड ।

एक साथ दोनों एक-दूसरे पर झपटे । दोनों के सिर आपस में टकराए । कमरे में एक ऐसी आवाज गूँजी मानो दो पत्थर एक-दूसरे से टकराए हो ।

सिर भिन्ना गए लेकिन चिंता किसी ने नहीँ की ।

पुन: झपटे ।

ऐसा लगता था जैसे दो शक्तिशाली सांड भिड गए हो ।

इस बार दोनों के हाथों की उंगलियां आपस में फंस गई, दोनों एक-दूसरे का हाथ मोड़ने के लिए शक्ति लगा रहे थे । …बांड ने अपनी सम्पूर्ण शक्ति समेटकर एक तेज झटका दिया।

इस झटके का प्रभाव यह होना था कि अलफ़ांसे के हाथ मुड जाते परंतु अलफांसे एक अनोखे और चमत्कृत कर देने वाले दांव का प्रयोग कर गया था ।
 
जैसे ही बांड ने झटका दिया, अलफांसे किसी पुतले की भांति फर्श पर से फिसलकर बांड की टांग के बीच आधा पार हो गया ।

इससे पूर्व कि बांड उसके इस अनोखे दांव के बारे मेँ कुछ समझ पाए अलफांसे ने एक जोरदार ठोकर उसकी पीठ पर जड़ दी ।

बांड के कंठ से एक चीख निकल गई और वह लहराकर फ़र्श पर गिरा ।

उसने फर्श पर से उठने के लिए बेहद फुर्ती का प्रदर्शन किया, लेकिन अलफांसे ने उसकी पसलियों में एक ठोकर रसीद कर दी । बांड पीड़ा से तड़प उठा ।

तभी दूसरी ठोकर. . . तीसरी.. चौथी. ..पांचवीं. . .इसकै बाद अलफांसे ने उसे सम्भलने का अवसर नहीं दिया ।

एक अवस्था ऐसी थी कि बांड कराहकर शिथिल-सा पडा रह गया ।

तब कहीं जाकर अलफांसे ने अपनी ठोकरों का क्रम रोका । सत्तर्कतावश अलफांसे चुपचाप खड़ा उसे देखता रहा ।

जेम्सबांड बेहोश नहीं हुआ था बल्कि कराह रहा था । अलफांसे ने फर्श पर पड़े बांड का रिवॉल्वर जेब के अंदर कर लिया और बोला--'"कहो बांड बेटे. . .मेरे बातें समझने की शक्ति आई या और तबीयत दुरुस्त करूं ।"

अपनी पूरी शक्ति लगाकर ब्रांड झूमता हुआ-सा उठकर फ़र्श पर ही बैठ गया ।

अलफांसे उसके सामने रखे हुए सोफे पर आराम से बैठता हुआ बोला-“बैसे हमारी इस मुलाकात में लडाई-झगडे की कोई बात थी नही, मगर तुम तो डबल आ सेवन हो ना. . .खुद को दुनिया का सबसे बहादुर इंसान समझते हो । मेरी बात सुने बिना ही तुमने अपने करतब दिखाने शुरू कर दिए । खैर. . .क्रोई बात नहीं, अब यह नहीं पूछोगे कि मैं आपकी सेवा में हाजिर क्यों हुआ हूं?"

“क्या कहना चाहते हो?" खुद पर संयम पाने को चेष्टा करता हुआ बांड बोला ।

"लातों के भूत लातों से ही लाइन पर आते हैं I" अलफांसे बोला…"मुझे त्यांगली के मेकअप मेँ देखकर तुम ये समझ गए होंगे कि मीटिंग मेँ आज तक चंगेज खां, माईक और तुम्हारे साथ मैं ही था । तुम्हारी जानकारी के लिए बता दूं कि मैंने त्यांगली को मीटिंग से एक दिन पहले ही एक हसीना के जाल मे उलझाया और आज तक वह मेरी कैद में था । आज यह मेरी उस कैद से फरार होने में कामयाब हो गया । लेकिन मुझे इस बात का कोई अफ़सोस नहीं है । मेरा उद्देश्य पूरा हो चुका है l”

"तुम्हारा उदूदेश्य?"

"जी हां, बांड भाई ।" अलफांसे बोला-"मेरा उद्देश्य भी यही था कि मैं किसी तरह टुम्बकटू से फिल्म हासिल कर सकूं सो फिल्म इस समय मेरे कब्जे मेँ है । आप लोग यानी विश्व के चुने हुए सबसे बड़े जासूस इस फिल्म के चक्कर में हैं । आप लोग इसे इसलिए प्राप्त करना चाहते हैं ताकि आप इसके रहस्यों तक पहुच सकें और दुनिया के सबसे बड़े जासूस बन सकें. . .मगर न तो मुझे इस फिल्म के रहस्यों में कोई दिलचस्पी है और न ही कोई मुझे सबसे बड़ा जासूस बनाएगा ।”

"फिर तुम इस फिल्म के चक्कर में क्यों पड़े हुए हो?"

" बांड भाई कि इस फिल्म की तुम्हें बहुत जरूरत हैं !" अलंफासे बोला…"अर्गर इंगलैंड का डबल ओ सेविन अंतराष्ट्रीय सीक्रेट सर्विस का चीफ़ नहीं बना तो जिस जेम्सबांड क्रो दुनिया का बच्चा-बच्चा जानता है उसके जीवन की ये सबसे बडी हार होगी I”

"तुम कहना क्या चाहते हो?"

"लानत है मिस्टर बांड कि तुम अभी तक मेरा मतलब नहीं समझ सके ।" अलफांसे ने कहा…“मैं तुमसे सौदा करना चाहता हूं वेसे मैं तुम पर इस सौदे के बारे में दबाव नहीं डालूगा, क्योंकि और भी ऐसे जासूस हैं जो अंतर्राष्टीय सीक्रेट सर्विस के जासूस बनना चाहते हैं । तुम अगर चाहो तो वह फिल्म मैं एक करोड़ में तुम्हें दे सकता हू । अगर सौदा मंजूर है तो हां कहो, नहीं तो ना I”

एक पल के लिए बांड सोच में पड़ गया । बोला-“लेकिन यहां विदेश मेँ मैं एक करोड लाऊंगा कहां से?”

"मेरे ख्याल से तुम्हारी इस समस्या क्रो मास्को में स्थित इंग्लैंड का दूतावास हल कर सकता है ।"

एक बार पुन: जेम्सबांड सोच मेँ पड़ गया । फिर अलफांसे की आंखों मेँ झांकता हुआ बोला…“लेकिन तुम यह सौदा मुझसे क्यों करना चाहते हो?”

" ये तो अपने-अपने प्यार की बात है I"

" मुझे तुम्हारा ये सौदा मंजूर है I” जेम्सबांड की गर्ज थी इसलिए बोला--""बोलो, सौदा किस प्रकार होगा?"

" कल रात को ग्यारह बजे 'प्रेत खंडहर' मेँ पहुंच जाना I” अलफासे ने कहा-""डालर देना । फिल्म लेना I"

बिकास के हाथ में दबे हुए चाकू का फ़ल एक पल के लिए हवा में चमका और "खचाक" से उस इंसान की गर्दन में धंस गया । एक क्षण पूर्व भी उस इंसान को पता नहीं लग सका था कि उस पर हमला होने वाला है. . . । यह हमला उसके पीछे से हुआ था. . और इससे पूर्व कि उसके कंठ से कोई चीख निकलती, बिकास का शिकंजे जैसा हाथ ढक्कन बनकर उस इंसान के मुंह पर चिपक गया. . .चीख उसके मुंह और कंठ में इस प्रकार घुटकर रह गई. . .मानो उसका मुंह साउंड प्रूफ़ हो. . बिकास ने गर्दन मेँ र्फसा चाकू बाहर खींचा और पुन: कमर में ठूंस दिया . . . । इस प्रकार विकास ने लगातार तीन वार किए ।

बिकास के फौलादी बंधनों में छटपटाकर वह इंसान ढीला पड़ गया ।

कदाचित वह ईंश्वरपुरी के लिए रवाना हो चुका था ।

एक क्षण भी बिकास ने व्यर्थ नहीं गंवाया । उसे रेत पर खदेड़ता हुआ वह एक तरफ़ को बढ़ गया ।

इस समय उसके दूर दूर तक ब्लेड की धार जैसा पैना सन्नाटा और काजल की भांति अंधेरा था । इस समय वह समुद्र-तट पर था… ।

समुद्र की लहरे भी मानो चंद्रमा के अभाव में मातम मना रही थीं । दूर…दूर तक रेत का घुला मेदान था ।

इस अंधेरे में इंसान अपने से तीन कदम की दूरी पर खड़े इंसान को साये के रूप मेँ देखने से बडा काम नही कर सकता था ।

चारों ओर गहरा सन्नाटा और अंधेरा था । बिकास उस इंसान की लाश को घसीटता हुआ एक तरफ उगी हल्की सी

झाडियों में ले जा रहा था । जैसे ही वह झाडियों के करीब पहुचा उसी समय-----

“कमाल कर दिया मियां दिलजले I” झाडियों में से विजय की धीमी…स्री आवाज उसके कानों में पहुंची । "

आगे आगे देखो गुरु कि चेला क्या करता है?” विकास तेजी के साथ उस मृत इंसान कै जिस्म से कपडे उताऱता हुआ बोला ।

उसी पल सागर क्री ओर-एक टॉर्च चमकी। बिजय का ध्यान उस ओर केंदित हो गया । टॉर्च लगातार तीन बार चमककर बुझी । ये क्रिया बिजय के पास ही बैठे धनुषटंकार ने भी देखीं ।

यह देखते ही वह तेजी कै साथ रेत पर भागता हुआ सागर की ओर बढा और जेब से टॉर्च निकालकर सांकेतिक रूप में उसे तीन बार जलाया-बुझाया ।

उधर विकास तेजी से अपने जिस्म पर मृत व्यक्ति कै कपडे फिट करने का प्रयास कर रहा था ।

"ये साला बंदर भी अपना काम बखूबी करता है ।"

"उसके सामने बंदर मत कह देना गुरु वर्ना आपका बंदर बना देगा ।" बिकास पूरी तरह तैयार होकर बोला ।

"मोटर बोट करीब आती जा रही है प्यारे दिलजले. . .हम चलते हैं ।" विजय ने कहा और फिर उसने विकास के किसी जवाब की चिंता नहीं की बल्कि तेजी के साथ वह सागर की ओर बढा । अब वहां कै शांत वातावरण में बोट की हल्की-सी गड़गड़ाहट हस्तक्षेप कर रही थी । विजय रूका नहीं बल्कि तेजी के साथ सागर के पानी में उतरता चला गया l अगले ही पल वह पानी में तैरता हुआ अनुमान के आधार पर उस तरफ बढ रहा था जिधर से मोटर बोट की आवाज आ रही थी ।।

इधर धनुषटंकार दोनों पैरों पर दौडता हुआ पुन: झाडियों में आ गया ।

"धनुषटंकार ।” बिकास ने धीरे-से कहा I

धनुषटंकार ने दांत किटक्रिटाकर अपनी उपस्थिति की सूचना दी ।

"टॉर्च लाओ ।" विकास ने कहा और धनुषटंकार ने उसे टॉर्च थमा दी ।

बिकास तेजी से उस तरफ़ बढ़ गया जिधर वो इंसान खड़ा था जिसे विकास ने चाकू से परलोक का टिकट थमाया था I इधर धनुषटंकार आराम से उस नग्न लाश की छाती पर बैठ गया और अपनी जेब से पव्वा निकालकर होंठों से सटा लिया ।
 
टुम्बकटू की असली फिल्म बिकास ने प्राप्त कर ही ली थी । इधर उसने फिलहाल अन्य जासूसों को भी कुछ देर के लिए अपने मार्ग से हटा दिया था । अब तो उसे फिल्म के आधार पर बढ़ना था । फिल्म की पांच रीलों में से एक रील टुम्बकटू के रहस्यों तक पहुचने के लिए नक्शे की रील थी ।

उस नक्शे का बिजय, बिकास और धनुषटंकार ने भली-मांति अध्ययन किया था । अभी तक विजय, विकास के मध्य कोई बिशेष बात नही हो पाई थी ।

अलफांसे से सौदा होने के बाद से ही वे फिल्म के आधार पर आगे बढने के बारे में सोचने लगे थे । फिल्म के अनुसार उन्हें समुद्री मार्ग से बढना था । इसके लिए उनके पास कोई साधन नहीं था । तब विजय ने आइडिया दिया कि आज की रात वे समुद्र के किनारे चले, सम्भव है किसी समुद्गी वाहन पर वे कब्जा करने में सफल हो जाएं ।

इसी बिचार को लेकर रात के आठ बजे से ही उन्होंने डेरा जमा दिया था । उस समय रात के ग्यारह बजे थे ज़ब एक इंसान खुद को छुपाने का-सा प्रयास करता हुआ सागर के किनारे पर आया l

विजय, विकास और धनुष्टकांर उसकी एक-एक हरकत क्रो बडे ध्यान से नोट कर रहे थे । कुछ देऱ पश्चात उस इंसान ने ट्रांसमिटर पर किसी से बात की...इन बातों को सुनकर तीनों समझ गए कि निश्चित रूप से ये इंसान स्मगलर है और किसी बडे गैंग से ताल्लुक रखता है । मोटर बोट से उनका माल आ रहा हे और इसी माल को लेने वह यहां आया है ।

बस फिर क्या था?

एक छोटी-सी स्कीम तैयार हुई और बिकास ने उसी स्कीम के आधार पर उस स्मगलर को मौत का पासपोर्ट थमा दिया । उसके कपड़े पहनकर वह खुद उसकी जगह तैनात था । योजना के अनुसार विजय सागर में पहुंच चुका था और धनुषटंकार अपने मोर्चे पर उपस्थित था ।

मोटर बोट के इंजन की आवाज प्रति पल तीव्र होती जा रही थी जो इस बात का परिचायक थी कि मोटर बोट करीब आती जा रही है । कुछ ही पल पश्चात विकास की छाती पर एक काला-सा धब्बा नजर आया I बिकास हर खतरे का मुकाबला करने को तैयार हो गया ।

मोटर बोट सागर के किनारे पर आकर रूकती । इंजन की आवाज़ बंद हो गई । मोटर बोट से लेकर सागर किनारे तक एक लम्बर-चौडा पटरा लगाया गया । चार आदमी मोटर बोट से बाहर निकले...उन चारों के हाथ में एक भारी सी पेटी थी ।
 
पटरे पर से होकर वे विकास की ओर बढे । विकास के एक हाथ में टॉर्च थी और दूसरा हाथ जेब में पड़े रिवॉल्वर पर था । उनमें से एक इंसान ने पेटी छोडकर उसका भार बाकी तीन इंसानों पर छोड़ दिया और खुद बिकास की तरफ बढा । बिकास के समीप आकर उसने कहा…“तुम रात को इस समय क्या कर रहे हो?”

उसी क्षण ।

धायं...धायं...धायं.. ।

मोटर बोट के अंदर से लगातार फायरों की आवाज उभरी ।

चारों चुरी तरह चौके. . .पेटी उनके हाथ से छूट गई । एक बार सबने पलटकर मोटर बोट की तरफ़ देखा, तभी हवा में सन्नाटा हुआ एक तीर उन चारों में से एक की भुजा में घुस गया और किसी को सम्भलने का अवसर भी नहीं मिला था कि विकास का रिवॉल्वर मात्र तीन बार गर्जा. . गोलियां बाकी तीनों के कलेजे फाड़ती हुई निकल गई । तीनों की चीख सागर से टकराकर इधर-उधर भटकी और शांत हो गई ।

ठीक इस्री प्रकार वे तीनों भी तड़पकर लहराए और रेत पर गिरकर शांत हो गए । उनका चौथा साथी तो तीर खाकर उनसे पहले ही यह महान काम कर चुका था ।

तभी दौड़ता हुआ धनुषटंकार उसके करीब आया ।

मोटर बोट के अंदर से पुन: फायरों की आवाज आई ।

विकास विद्युत गति से पटरे पर होता हुआ मोटर बोट की और भागा । अभी वह पटरे के बीच में ही था कि स्टीमर कै दरवाजे पर विजय नजर आया । दोनों अपने-अपने स्थान ठिठक गये ।

फिर विजय बोला--- " मैदान साफ है प्यारे ।"

"शाबाश गुरु ।" बिकास इस प्रकार बोला मानो वह बिजय का बुजुर्ग हो ।

"अब इन सबको उठाकर मोटर बोट में डाल लो प्यारे I” बिजय बोला…“किसी को यह मालूम नहीं होना चाहिए किं आज यहां मास्को के इतिहास की सबसे जबर्दस्त घटना घटी है I”

उधर धनुषटंकार पैर फैलाकर बंद पेटी पर बैठा था. . पव्बा उसके हाथ मेँ था । दस मिनट में ही विजय और विकास ने पांच लाशों और उस पेटी को मोटर बोट के अंदर पहुंचा दिया । मोटर बोट के अंदर सात लाशें थीं जिनकी रूह ईश्वरपुरी भेजने का श्रेय विजय क्रो था ।

विजय कै कपड़े क्योंकि गीले हो चुके थे, इसलिए वह उन्हें उतारकर एक मृत व्यक्ति कै कपड़े अपने बदन पर डाल रहा था ।

"अगर तुम स्याणे हो प्यादे दिलजले तो फौरन यह जगह छोड दो ।"

"चेले मियां I" विकास ने धनुषटंकार से कहा…"तुम चालक-कक्ष में जाकर मोटर बोट को सम्भालो । अभी हमेँ जरा गुरु से प्यार की बातें करनी हैं l"

आदेश मिलते ही धनुषटंकार उस कक्ष से चला गया । पटरा अंदर खींचकर मोटर बोट का दरवाजा बंद कर लिया गया था । कपडे इत्यादि बदलकर विजय विकास की ओर देखकर बोला…" अब बोलो प्यारे दिलजले.........कैसा इश्क फरमाना चाहते हो l”

"पहले तो ये बताओ गुरु कि तुम हिंदुस्तान से मास्को कैसे आ गए?"

"पहला सवाल तुमने ऐसा किया है प्यारे कि जी में आता है तेरा जबड़ा तोड़ दूं l" विजय केबिन मेँ पडी हुई एक कुर्सी पर बैठता हुआ बोला…"अवे अक्ल के दुश्मन, हम जासूस आदमी. . .भला यहां आने में देर कितनी लगती है l”

"मेरा मतलब यह है गुरु कि आप यहां आए क्यों हैं?” बिकास ने कहा ।

"मुझे लगता है मियां कि तुम्हारी बुद्धि का दिवाला निकल गया है ।" विजय झुंझला गया…“अबे, तुम हमारे प्यारे चेले हो. . .हमें पहले ही मालूम था कि इन जासूसों में तुम्हारे बहुत से दुश्मन हैं जो तुम्हें धरती पर देखना नहीं चाहते । जेम्सबांड और माईक से तो तुम्हारी खानदानी दुश्मनी चल रही है और तुम पहले ही इनकी खाल उघेड़ चुके हो । हमेँ मालूम था कि ये लोग तुम्हारी हत्या का प्रयास करेंगे और प्यारे, हम तुम्हें यानी अकेले बच्चे क्रो इनके बीच में कैसे छोड देते । अब खुद भी आ गए ताकि हम अपने जान से प्यारे चेले की मदद कर सकें ।”

"इसका मतलब आप मेरी सुरक्षा के लिए मास्को आए हैं I”

"अब तुम्हारी बुद्धि सही पटरी पर दोड़ रही है ।” बिजय ने कहा…“तुम्हारी सुरक्षा के लिए आए हैं और सुरक्षा की भी है । तुम्हारी सुरक्षा हेतु हमारे लिए यह जान लेना परम आवश्यक था कि तुम्हारे दुश्मन क्या चाल चल रहे हैं I यह जानने के लिए जरूरी था कि हम किसी प्रकार दुश्मनों के ग्रुप में घुस जाएं । इसके लिए हमने पाकिस्तानी जासूस चंगेज खां को मृत्युलोक के लिए रवाना किया और खुद चंगेज खां बन गए ।"

"इसका मतलब आपने चंगेज खां की हत्या कर दी ।"

"साले की लाश क्रो भारी पत्थर से बांधकर सागर मे डाल दिया...लाश भी किसी क्रो नहीं मिलेगी ।" बिजय ने बताया…“इस प्रकार हम बांड और माईक के ग्रुप में पहुंच गए । जैसा कि हमें मालूम था बाकायदा तुम्हारी हत्या का प्लान बनाया गया । हम भी उस प्लान में शामिल थे । पहली ही मुलाकात में मालूम हुआ कि चांगली कै रूप में हमारा लूमड भाई अटका हुआ है । अकेले मेँ बातें हुईं तो उसने भी यही बताया कि वह भी तुम्हारी सुरक्षा कै लिए चांगली बना है I”

"उन्हें अंत्तर्राष्ट्रीय सीक्रेट सर्विस के विषय मेँ कैसे मालूम हुआ?"

“इसके जवाब में वह केवल यह कहता है कि उसका नाम अलफांसे है I” बिजय ने बताया…"इस प्रकार हम दोनों मिलकर माईक और बांड की साजिशों से तुम्हें बचाते रहे। तुम्हें याद होगा कि जब तुम मास्को आए और तुम पर चार नकाबपोशों ने हमला किया उस समय एक रहस्यमय इंसान ने तुम्हारी मदद की थी, यह रहस्यमय इंसान अपना लूमड़ भाई था । लेकिन यहां एक बात मुझे पूछनी है l”

"क्या? "

"उस रात तुम बिस्तर पर नहीं थे । चादर ढंकी हुई थी और बिस्तर पर इस प्रकार की क्रिया हो रही थी मानो कोई सांस ले रहा हो I”

“वो कोई खास बात नही है I” विकास ने कहा'…"एक ब्लाडर मैंने पलंग पर चादर से ढंककर रख दिया था --

पलंग के नीचे बैठा हुआ धनुषटंकार बारम्बार उसमें हवा भर और निकाल रहा था ।"
 
" वैरी गुड प्यारे I” विजय बोला…""अब तुम और हमारी कारगुजारी सुनो । जिस समय तुम टुम्बकटू को गिरफ्तार कर रहे थे उस समय बांड और माईक ने वहां सभी सैनिकों के स्थान पर अपने किराए के आदमी लगा दिए । हमने भी ठीक बैसी ही चाल चली…यानी कि छ: किराए के आदमी लिए और माईक, बांड के आदमियों को बेहोश कर दिया । उधर मैं एक नकाबपोश बना और बांड और माईक के पास पहुच गया । ये घटना मैंने ठीक उस समय की जब तुम टुम्बकटू को गिरफ्तार कर रहे थे । मेरा इस घटना का उद्देश्य केवल यह था कि मैं उन्हें वहां उलझाए रखूं ताकि तुम्हारे रास्ते में किसी प्रकार की बाधा न डाल सकें । उनको उसी कमरे में बंद करके मैँ अपने कमरे मेँ पहुचा और मैं और अलफांसे खुद ही अपना मुंह काला करके माईक और बांड के पास पहुच गए और कहा कि एक रहस्यमय काला नकाबपोश हमारा ये हाल कर गया है । हमारे सामने ही बांड के आदमी हैबिन ने उसे ट्रांसमिटर पर सूचना दी कि तुमने टुम्बकटू को गिरफ्तार कर लिया है. . .बस. . .ये सूचना पाकर हम संतुष्ट हो गए कि हम अपने उद्देश्य में सफल हो गए हैं । हमारा उद्देश्य यही था कि तुम टुम्बकटू को गिरफ्तार कर लो और बांड अथवा माईक तुम्हारे मार्ग मेँ किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न कर सकें ।"

"इसका मतलब यह है कि आप जगह-जगह मेरी सहायता करते रहे हैं I”

"बेशक ।"

"तो आपने मुझे यहां क्यो भेजा था , गुरू ?" विकास का लहजा गम्भीर हो गया I

"तुम्हारी बुद्धि फिर उलटती जा रही है प्यारे !" विजय ने कहा…""अबे, तुम्हें दुनिया का सबसे बडा जासूस जो बनाना है !"

"मतलब ये है कि मैं अपनी प्रतिभा से सबसे बड़ा जासूस नहीं बनूंगा ।" विकास का लहजा गम्भीर होता चला गया ।।

"तुम कहना क्या चाहते हो?”

"कहना ये चाहता हू गुरु कि आप मेरे अंदर हीन भावना को जन्म दे रहे हैं l” दृढता के साथ बोला विकास-"क्या विकास के अंदर इतनी प्रतिभा नहीं हैं कि वह माईक और बांड जैसे दुश्मनों से अपनी सुरक्षा कर सकै । गुरु, क्या तुम्हें , अपने चेले पर इतना भी बिश्वास नहीँ है कि वह अपने दुश्मनों से मुकाबला कर सकता है? इससे जाहिर होता है कि तुम्हे मेरी शक्ति पर विश्वास नहीं है! अगर विश्वास नहीं है गुरु तो क्यों मुझे मास्को भेजा? क्यों अपनी जगह मुझे अंतर्राष्ट्रीय सीक्रेट सर्विस में भेजा? जब आप मुझमें प्रतिभा नहीं समझते तो क्यों मुझें सबसे बड़ा जासूस बनाना चाहते हैं? नहीं गुरु. . .नही. . .मुझे नहीं बनना सबसे बडा जासूस ' जब मेरे अंदर प्रतिभा नहीं है तो क्यों मुझे आप कुछ बनाना चाहते हैं . . .ये गलत है गुरु . . बिल्कुल गलत I”

"यह तुम क्या कर रहे हो प्यारे दिलजले?"

“ठीक है गुरु I” विकास भड़क गया…"मेरे अंदर प्रतिभा नहीं है तो मैं स्रीक्रेट सर्विस का चीफ नहीं बनूँगा !"

"तुम तो प्यारे उस्री कहावत पर चल रहे हो कि ' गधे को दिया नून और गधा कहे मेरी आंख फोडे ' !" विजय बोला किं-“एक तो हमने तुम्हारी मदद की और उसके बदले में तुम हमारा शुक्रिया करने से तो गए उल्टे हम पर राशन-पानी लेकर चढ़ रहे हो l”

“मुझे ऐसी मदद नहीं चाहिए, गुरु ।" विकास पूरी तरह भडक गया…"ये माना कि मैं आज जो भी हूं आपकी बदौलत हूं । जगह-जगह आपने मेरी मदद की ।। मेरी जान बचाई ।। मेरे साथ रहे हैं, ये भी ठीक है गुरु कि अगर आप साथ न होते तो विकास कभी का खत्म हो चुका होता, मेरे जिस्म का जर्रा-जर्रा आपकी अमानत है, गुरु I चाहो तो जान ले सकते हो, लेकिन मेरे अंदर हीन भावना पैदा मत करो । मेरा और आपका रिश्ता एक बाप और बेटे जैसा है । बाप पाल-पोसकर बेटे को बड़ा करता है, उसे दुनिया दिखाता है । दुनिया का ऊच-नीच सिखाता है । उसे बड़ा करता है मगर जब बेटा सब कुछ समझने लगता है तो वह उसे दुनिया से टकराने के लिए छोड़ देता है । इसके बाद. . .बेटा ही बाप की लाठी बनता है ।"

"लेकिन बेटे, बेटा चाहे कुछ भी हो जाए, बाप के लिए बेटा बेटा ही रहता है I बाप को हमेशा उसकी चिंता रहती है ।"

"जिस बेटे के ऊपर बुढापे तक बाप का हाथ रहे वो बेटा कभी लायक नहीं बन सकता ।" विकास ने कहा-“तुमने इतिहास पढा होगा गुरु, अधिकांश महान पुरुष जो बने हैं, छोटी उम्र में ही जिनके ऊपर से बाप का हाथ उठ गया है , वे अकेले ही अपनी प्रतिभा से महान बने हैं । जिन बेटों के सिर पर जवानी तक किसी बड़े का हाथ रहता है वे अपनी प्रतिभा का प्रयोग नही करते और निकम्मे बन जाते हैं ।"

"मेरी समझ में नहीं आता गुरु कि आप कब तक मेरी सहायता करेंगे?"

“जब तक कर सकेंगे ।”

"गलत है गुरु, एकदम गलत I” विकास गुर्रा उठा-" मुझे पसंद नहीं है कि आप अब भी मेरी मदद करें I आपकी मदद से मैँ सबसे बड़ा जासूस भी नहीं बनना चाहता। अब या तो आप भारत लौट जाओ अन्यथा मैं जा रहा हू।”

सुनकर बिजय के दिमाग में एक विस्फोट-सा हुआ । आने वाले खतरे का ज्ञान उसे हो गया । वह समझ गया कि बिकास के दिमाग में यह बात जम चुकी है और अब किसी भी प्रकाऱ उसे समझाया नहीं जा सकता I फिर भी वह बात को सम्भालने का प्रयास करता हुआ बोला-'" तुम बात को समझने का प्रयास करो, विकास ।"

"बात को समझने की बुद्धि मुझमें नहीं है, गुरु l” बिकास दृढ़ता के साथ बोला…“मैं केवल यह जानता हूं कि मैं अकेला अपने रास्ते पर बढ सकता हू I कम-से-कम इस केस में मै आपकी मदद नहीं ले सकता I मैं जो करूंगा, अपनी प्रतिम से करूगा I”

विजय समझ गया था कि अब विकास की समझ में उसकी एक बात भी नही आएगी, बोला…“अच्छा प्यारे दिलजले, मैं तुम्हारी बात मान लेता हू । मैं तुम्हारी इस केस में कोई मदद नहीं करूंगा I जो करोगे तुम करोगे । मैं केवल तुम्हारे साथ रहूंगा I"

"साथ क्यों रहेंगे?"

“केवल इसलिए कि मैं भी टुम्बकटू के रहस्यों को जानना चाहता हू I”

"तो वादा करो गुरु कि आप इस केस में कहीँ भी मेरी कोई मदद नहीं करोगे?” विकास ने कहा ।

विजय ने वादा किया और तब कहीं जाकर विकास माना ।

उसके मानते ही विजय के दिमाग से एक भार-सा हल्का हो गया, बोला-"'तुम मान गए प्यारे दिलजले, इसी खुशी में एक-एक झकझकी पेशे खिदमत है I"

इससे पूर्व कि विकास कुछ कहे, विजय ने झकझकी शुरू कर दी

'क्वारे रहोगे तो सुख से रहोगे लाला,

शादी कर नाक में नकेल मत डलवाओ जी,

रोके न कोऊ और टोके न क्रोऊ तुम्हें,

जाड़ेन में चाहे महीना मत नहाओ जी,

नाचो जी, गाओ जी, चाहे जहां जाओ जी,

रात को सिनेमा से डेढ बजे आओ I'

" ये काका हाथरसी की रचना सुनाकर हमेँ बोर कर रहे हो गुरु I” विकास मुस्कराता हुआ बोला…“मैं तुम्हें दिलजली सुनाता हू गुरु, सुनो खुद मेरी बनाई हुई है । हाँ तो पेश है ।"

बिजय कानों मेँ उंगली ठूंसकर बैठ गया ।
 
टुम्बकटू के मुह से हल्की-सी कराह निकली ।

धीरे-धीरे उसकी चेतना वापस आ रही थी ।

उसे नहीं पता था कि वह कितनी देर बेहोश रहा?

उसकी अचेतना के बीच क्या-क्या हो गया?

धीरे-धीरे उसके मस्तिष्क ने भी कार्य करना शुरू कर दिया ।

उसे याद आया…अपने चैलेंज के मुताबिक वह विकास को यह अवसर देने के लिए विकास के पास गया था कि उसे गिरफ्तार कर सकता है तो कर ले ।

वह एक पाइप के अंदर से होता हुआ विकास के कमरे की और बढ रहा था कि अचानक पूरा पाइप मधुमक्खियों और ततेयों से भर गया । इसके बाद वह अपने किसी शब्द का प्रयोग नहीं कर सका और उसकी हालत खराब हो गई । इसके पश्चात वह बेहोश हो गया ।।

वह धटना याद आते ही उसे अपने जिस्म में होने वाली भयंकर पीडा का भी अनुभव हुआ । उसका सारा जिस्म किसी पके हुए फोड़े की भांति दुख रहा था। सबसे अधिक पीड़ा उसे अपनी जांघ मे महसूस हुई । वह आंख खोलने का प्रयास कर रहा था परंतु उसे सफलता नही मिल पा रही थी ।

उसी क्षण ढेर सारा पानी उसके चेहरे से टकराया।

उसकी एक ही झटके में उसकी आंखे खुल गई । पहले उसे अपने सामने का दृश्य धुंधला-सा नजर आया, उसके बाद दृश्य साफ होता चला गया । उसने देखा उसके सामने एक आदमी खंडा था I उसके हाथ में एक खाली जग था ।

टुम्बकटू समझ गया कि उसके ऊपर फेका गया पानी इसी जग से गिराया गया है । उसके सामने खड़े इंसान की दाई पिंडली में पट्टी बंधी हुई थी । टुम्बकटू ने देखा-इस समय वह खुद भी रस्सियों से जकडा हुआ था ।। उसने हिलने का प्रयास किया किंतु सफल न हो सका ।। खुर्द को मुक्त कराने के विचार को स्थगित कर बोला ।

"तुम शायद युगोस्लाविंया के जासूस बरगेन शाॅ हो !"

"तुमने ठीक पहचाना ।"

वारगेन शाॅ बोला----" तुम्हें इसीलिए होश में लाया गया है ताकि तुम मुझे बताओ कि उस फिल्म में क्या था?"

“क्या मतलब? ” चौंककर टुम्बकटू ने अपनी जांघ की ओर देखा । जांघ मेँ जहां फिल्म थी वहां इस समय घाव हो रहा था…“फिल्म कहां है?"

"आपरेशन करके तुम्हारी फिल्म मैंने निकल ली ।"

"तुमने!" एक गुर्राहट-सी टुम्बकदू के मुह से निकली-“कहां है फिल्म? फिल्म मुझे वापस कर दो l"

"फिल्म मेरे पास नही है I" बरगेन शों बोला…“अगर मेरे पास होती तो मैं व्यर्थ में तुम्हें होश में लाकर फिल्म के बारे मेँ क्यों पूछता?"

"किसके पास है?” बुरी तरह गुर्रा उटा टुम्बकटू।

" बको मत I” बरगेन शॉ ने खूंखार स्वर मेँ कहा…“तुम्हरि प्रश्नों का जवाब देने के लिए मैं तुम्हें होश में नहीं लाया हू। चुपचाप मेरे सवालों का जवाब दो वरना इसी समय गोली मारकर तुम्हारा खेल हमेशा के लिए खत्म कर दूगा ।”

मन-ही-मन टुम्बकटू ने सोचा, तेरी शामत आई है जासूस की दुम । इसलिए तू मुझे होश में लाया है परंतु प्रत्यक्ष मेँ टुम्बकटू बोला-“डाट क्यों रहे हो भाई साहब मैं तुम्हारे सब सवालों का जवाब टेपरिकॉर्डर की तरह दूंगा । लेकिन जरा टेप में वैटरी तो डालो l”

“क्या मतलब? "

"एक गिलास पानी I"

बरगेन शॉ ने टुम्बकटू को खा जाने वाली नजरों से घूरा और फिर एक गिलास पानी लेने चला गया ।

बस, यही तो टुम्बकटू चाहता था ।

यह पता लगते ही कि उसकी फिल्म निकाल ली गई है, उसके दिमाग का वैलेस बिगड गया था । वह अब जल्दी-से-जल्दी कुछ करना चाहता था ।

हालांकि उसका जिस्म बुरी तरह सूजा हुआ था । हर भाग में भयानक पीडा हो रही थी किंतु इतना सबके बावजूद भी बरगेन शॉ के कमरे से निकलते ही टुम्बकटू ने अपनी सम्पूर्ण शक्ति को समेटा और अपने जिस्म को फुलाना शुरू कर दिया ।

रस्सी उसके घावों मेँ सिमटने लगी । भयानक पीड़ा से अंदर…ही-अंदर वह कराह उठा र्किंतु इस दर्द क्रो सहन करके भी वह अपने जिस्म क्रो किसी गुब्बारे की भांति फुलाता चला गया ।

एक मिनट बाद ही रस्सी एक झटके के साथ टूट गई ।

उधर बाथरूम से पानी का गिलास लेकर बरगेन शॉ चला ही था फि अचानक उसके सिर पर एक जोरदार चपत पडी ।

उसकी खोपडी भन्ना गई । आंखों के आगे लाल-पीले तारे नाच उठे । गिलास उसके हाथ से छूटकर फ़र्श पर गिर गया ।

"क्या कर रहे हो?" टुम्बकटू की ऐसी आवाज उसके कान मे पड्री मानो फुलपावर पर चलता हुआ रेडियो एकाएक खराब हो गया हो…“इतना कीमती गिलास फोड़ते हुए तुम्हें ज़रा भी शर्म नहीं आईं, इसीलिए तुम धरती निवासियों का बेड़ा गर्क होता है ।"

बरगेन शॉ ने चौंककर देखा।

उसके ठीक सामने खडा हुआ टुम्बकटू किसी गन्ने की भांति लहरा रहा था ।
 
बरगेन शॉ की आंखों के सामने जैसे दुनिया का सबसे बडा आश्चर्य खडा था । हैरत से उसकी आंखें फैल गई । मुह से केवल यही निकला-“तुम ?"

“जी ।" बडे सभ्य ढंग से टुम्बकटू झुककर बोला…“हुजूर की सेवा में ये नाचीज ही उपस्थित हुआ है ।”

"लेकिन...लेकिन !” बरगेन शॉ बुरी तरह बोखला गया था-""तुम खुल कैसे गए?"

“क्या ?" उसी प्रकार के मूड में फिर बोला टुम्बकटू-“क्या मैंने खुलकर महाराज की शान में कोई गुस्ताखी कर दी? अगर आपको गुलाम की आजादी नागवार गुजरी हो तो मैं फिर उन्हीं रस्सियों में बंध जाऊं I"

बरगेन शॉ अपनी आंखों के सामने जो देख रहा था उस पर विश्वास नहीं कर पा रहा था । वह समझ नहीं पा रहा था कि बीसवीं सदी का ये कार्टून इतनी जल्दी इतने सख्त बंधनों से आजाद कैसे हो गया । दूसरे, वह टुम्बकटू की बात करने की स्टाइल पर चमत्कृत था ।

“अगर इजाजत हो तो गुलाम आपकी सेवा मेँ चंद शब्द प्रस्तुत करे I” कहते-कहते अदब के साथ टुम्बकटू ने अपने दोनों हाथ जोड़ दिए ।

बरगेन शॉ को अपनी खोपडी अंतरिक्ष में तैरती-स्री महसूस हो रही थी । खुद वह संयम पाने का प्रयास करता हुआ बोला-“क्या कहना चाहते हो?"

"मालिक से केवल इतनी-सी दरख्वास्त है कि वे गुलाम क्रो ये बताने की कृपा करें कि गुलाम की फिल्म कहा है?”

जवाब के स्थान पर बरगेन शॉ ने रिवॉल्वर निकाला और उसकी ओर तानकर बोला…“अगर हिले तो गोली मार दूगा I"

"अरे अजीब किस्म के अहमक आदमी हो जनाब I” टुम्बकटू बोला-"शराफत की भाषा को रद्दी की टोकरी में डाल रखा है ।"

किंतु बरगेन शॉ ने फायर कर दिया ।

टुम्बकटू वहां कहां था? चपत तो बरगेन शॉ के पीछे से लगी साथ ही दुम्बकटू की आवाज-“मुझ जैसे आज्ञाकारी गुलाम पर फूल बरसाकर हुजूरे आला अपना ही नुकसान कर रहे हैं I” कहते समय टुम्बकटू ने उसके सिर पर चपत इतनी जोर की मारी थी कि बरगेन शों का सम्पूर्ण जिस्म झन्ना उठा l रिवॉल्वर तो उसके हाथ से गिरा ही, साथ ही खुद भी गिर गया । उसकी आंखों के सामने अंधेरा-सा छा गया था I

"ये क्या कर रहे हो मालिक?" अपनी सलाई-सी बाहों का सहारा देकर टुम्बकटू बरगेन शॉ को उठाता हुआ बोला-" भला ऐसे भी कहीं गिरना चाहिए ।"

बरगेन शॉ क्रो लगा कि वह बुरा र्फसा है । इस चपत से उसे भली प्रकार टुम्बकटू की शक्ति का अनुमान हो गया । यह भी वह समझ गया कि अब टुम्बकटू को सम्भालना उसके बस का रोग नहीं है । बरगेन शॉ को लग रहा था कि उसे होश में लाकर उसने जीवन की सबसे बडी भूल की है । अभी उसका दिमाग हवा मेँ ही उड रहा था कि उसने महसूस किया ।

उसका सम्पूर्ण जिस्म किन्हीं दो लोहे की रॉडों में कसकर उठा लिया गया है । ये लोहे की रॉर्डे अन्य कुछ नहीं टुम्बकटू की बांहें थीं ।

इसके बाद उसने महसूस किया कि टुम्बकटू उसे लेकर चल दिया । हवा में चकराते हुए उसके मस्तिष्क को एक झटका-सा लगा ।

उसने महसूस किया कि उसे एक सोफे पर फेंक दिया गया है ।

"मैं हुजूर से एक बार पुन: हाथ जोडकर बिनती करता हूं मुझे बता दें कि फिल्म किस महापुरुष के पास है?"

“मुझसे जेम्सबांड छीनकर ले गया है l" बरगेन शाॅ ने बता देने में अपनी भलाई समझी ।

“मेरे बेहोश रहने पर क्या हुआ?”

अपनी जान बचाने के लिए बरगेन शॉ ने उसे यह सब कुछ बता दिया जो वह जानता था ।

"धन्यवाद ।" कहने के साथ ही टुम्बकटू ने एक चपत उसके गाल पर जड़ दिया । बिना किसी चू पटाक के बरगेन शॉ सोफे पर गिर गया ।

टुम्बकटू एक झटके के साथ उठता हुआ बोला…“क्षमा करना मालिक, केवल बेहोश किया है ।”

जेम्सबांड शीशे के सामने खडे होकर अपनी टाई की नॉट ठीक कर ही रहा था कि-एक जोरदार चपत उसके सिर पर पडी । इस एक ही चपत में बांड की आंखों के सामने लाल…पीले तारे नाच उठे । फिर भी वह खुद क्रो संभालकर अपनी तरफ़ से पूरी फुर्ती के साथ पलटा, मगर पीछे कोई नहीं था । उसी समय एक चपत उसकी कमर पर पडी । उसे महसूस हुआ जैसे लोहे की कोई पत्ती जोर से उसकी कमर में मारी गई हो | वह पुन: अपनी एडी पर घूम गया ।

“वहां नहीं जनाब जेम्सबांड, खादिम यहां आराम फरमा रहा है I”

बिजली की…सी गति से बांड पलटा। देखा, सामने गन्ने जैसा टुम्बकटू सोफे पर लेटा हुआ था । एक क्षण को बांड की आंखों में हैरत कै…से भाव उभर आए । उसकी समझ में नहीं आया था कि गन्ने जैसे इस बीसवीं सदी के विचित्र कार्टून में बला की फुर्ती और शक्ति कहां छिपी हुई है! टुम्बकटू का सारा जिस्म सूजा हुआ था किंतु फिर भी उसकी शक्ति और फुर्ती में किसी प्रकार की शिथिलता नहीं थी l

न जाने क्यों अब तो टुम्बकटू को देखने मात्र से बांड के दिल में भय…सा समा जाता था । उसकी समझ मेँ नहीं आता था कि इस छलावे से किस प्रकार टकराया जा सकता है?

टुम्बकटू को देखकर उसके जिस्म मेँ झुरझुरी-सी दोड़ गई र्कितु फिर भी वह खुद पर संयम पाने की चेष्टा करता हुआ बोला…“टुम्बकटू।”

"जी मालिक I" बड़े अदब के साथ बोला टुम्बकटू-“खदिम को इस्री नाम से पुकारा जाता है I”

"तुम यहां क्यों आए ही?” बांड ने प्रश्न किया I

"बातचीत में हमेशा शिष्ट भाषा का प्रयोग करना चाहिए मेरे मालिक ।" टुम्बकटू ने कहा…“ये कहिए कि गुलाम स्वामी की सेवा में क्या प्रार्थना लेकर उपस्थित हुआ है । इसका जवाब ये है हुजूर कि आपके गुलाम की फिल्म किसी ने निकाल ली है और नाचीज को पता लगा है कि वह आपकी सेवा में है !"

"तुम क्या चाहते हो?”

"हुजूरे आला ने एक बार फिर अशिष्ट भाषा का प्रयोग किया है ।" इस बार दुम्बकटू खडा हो गया…“कहना ये चाहिए था कि ये तुच्छ बालक आपके सामने किस बिनती को लेकर उपस्थित हुआ है और इसका उत्तर ये है स्वामी जी, बच्चा आपसे प्रार्थना करता है कि वह फिल्म हमें सौंपने की कृपा करें । मैं आपका कृतज्ञ रहूगा I”

जेम्सबांड का दिमाग काफी तेजी से काम कर रहा था । वह यह सोचने का प्रयास कर रहा था कि उस कार्टून से पीछा कैसे छुड़ाया जाए? मगर फिलहाल उसे कोई तरकीब सुझाई नहीं दे रही थी l उसकी जेब में रिवॉल्वर पड़ा था किंतु इस बात को वह भली…भांति समझ चुका था कि टुम्बकटू के सामने रिबॉंल्बर निकालना एकदम व्यर्थ सिद्ध होगा । इस समय उसके सामने खड़ा हुआ टुम्बकटू उसके जीवन का सबसे बड़ा सरदर्द था । उसके जीवन मेँ टुम्बकटू जैसा दूसरा जंतु नही आया था । वह समझ नहीं पा रहा था कि इस पर काबू कैसे किया जा सकता है? किंतु अपनी कमजोरी जाहिर न करके वह बोला…"अगर मैं तुम्हें वह फिल्म देने से इंकार कर दू. . .?" हालांकि कहते समय अंदर तक कांप गया था बांड ।

"तो मैं हुजूर की सेवा अपने ढंग से करने के लिए बाध्य हो जाऊंगा ।” टुम्बकटू गन्ने की भांति लहराता हुआ बोला-“वेसे मैँ गुलाम हूं इसलिए स्वामी की शान में कोई गुस्ताखी करना मुझे शोभा नहीं देता मगर मेरी त्रुटि को मालिक क्षमा कर देगे मुझे आशा है ।"

"अगर मेरे पास फिल्म ही न हो?"

"वैसे तो आप जैसे महान स्वामी को मिथ्या वचन शोभा नहीं देते किंतु अगर ये सत्य है तो मेरी आपसे विनती है किं मुझे बताने का कष्ट करे । फिल्म किस महान पुरुष पर है? ताकि मैं उन्ही की सेवा में पहुंचकर उनके चरणों मे आनंद की प्राप्ति कर सकू ।"

"मैँ सच कह रहा हू फिल्म अलफांसे के पास है ।"

"जासूसों के बीच ये अपराधी जानवर कहां से पैदा हो गया?"

“तुम मेरा यकीन करो, फिल्म वास्तव मेँ अलफांसे के पास है I” जेम्सबांड ने न जाने क्या सोचकर सच बोल दिया…"वह एक करोड़ डॉलर्स मेँ मुझे बेच रहा है । इस समय मैं उसी के पास जाने की तैयारी कर रहा था ।"

"एक करोड र्डोंलसं की झलक दिखाने का सौभाग्य प्रदान कीजीये?”

बांड ने अपने समीप रखा सूटकेस खोलकर दिखा दिया । टुम्बकटू ने उचटती-सी नजर से सूटकेस को देखा और बोला…“क्षमा करना स्वामी, गुलाम धोखे मे नहीं आया । मुझे तो ये डॉलर नहीं लगते हैं I”

"हैं ही नकली !" बांड ने छोटा-सा उत्तर दिया !

"मैं बंदापरवर का मतलब नहीं समझा I” टुम्बकटू बराबर किसी गुलाम की भांति बात कर रहा था…“क्या मालिक अलफांसे को धोखा देना चाहते हैं?”

"धोखा नहीं बल्कि अलफांसे द्वारा दिए गए धोखे का बदला लेना चाहता हूं l”

"मूर्ख बच्चे की बुद्धिमानी का दरवाजा जरा छोटा है सरकार ।" टुम्बकटू पुन: बोला-"अर्थात् हुजूर से बिनती है कि जो कहें गीता पर हाथ रखकर सच-सच कहे ।”

“असल बात ये है कि अलफांसे ने उस फिल्म का सौदा केवल मुझसे ही नहीं किया है, बल्कि लगभग हर जासूस से किया है I” बांड ने कहना शुरू किया'-""मुझसे पहले वह जासूसों से पांच करोड डॉलर कमा चुका है । किया उसने ये है कि वह हर जासूस से अलग-अलग मिला और फिल्म का सौदा किया । हर जासूस को मुझसे पहले का टाइम दे रखा था व हर जासूस क्योंकि सबसे बडा जासूस बनने के लिए अकेला ही वह फिल्म हथियाना चाहता था इसलिए किसी भी जासूस ने एक…दूसरे से जिक्र नहीं किया और इस चक्कर में पांच जासूस ठग लिए गए । सबको उल्टी-सीधी फिल्मेँ दे दी गई हैं । अचानक ये पांच जासूस मिल गए और उनके बीच में रहस्य खुल गया कि अलफांसे जासूसों को ठग रहा है । इसकी भनक लगते ही इन पांचों जासूसों ने हम सभी जासूसों की एक मीटिंग बुला ली । इस मीटिंग में ये स्पष्ट हो गया कि लगभग हर जासूस से अलफांसे का सौदा हो चुका है । इस मीटिंग में भारतीय जासूस विकास, पाकिस्तानी चंगेज खां और यूगोस्लाविया का बरगेन शॉ उपस्थित नहीं थे । मगर उपस्थित जासूस इस नतीजे पर पहुच गए कि अलफांसे हम सबको एक ही ढंग से ठग रहा है । वह असली फिल्म किसी को नहीं देगा । छठा नम्बर मेरा है । हम सब जासूसों ने मिलकर एक योजना बनाई डै और वह यह कि इस बार मैं उसे नकली डॉलर दूं I"

"क्या मैं जान सक्ता हूं महान स्वामी, कि इससे लाभ क्या होगा? "

"उसने ग्यारह बजे मुझसे मिलने का समय रखा है ।"

जेम्स बांड बोला-" हम सब जासूसों ने उसे एक साथ घेरने की योजना बनाई है ।"

टुम्बकटू ने उससे ये भी पूछ लिया कि मिलने का टाईम कहां का तय हुआ है ।

बस इतनी-सी बात करके टुम्बकटू एक रोशनदान कै जरिए छलावे की भांति वहां से निकल गया l
 
उसके जाते ही बांड ने खुद को हत्का-सा महसूस किया । एक मिनट तक वह अपने स्थान पर उसी तऱह खडा हुआ सोचता रहा, फिर एकदम कमरे से बाहर निकल गया ।

अगले पंद्रह मिनट पश्चात ।

सब जासूस एक ही स्थान पर एकत्रित थे ।

"क्यों बे अंग्रेज की दुम ।" बागारोफ़ कह रहा था-“अब क्या सोचकर ये मजमा लगाया है?"

“मेरे पास टुम्बकटू आया था, चचा! "

“तो फिर कौन-सी तोप आई थी हरामी के पिल्ले?" बागारोफ़ अपनी आदत के मुताबिक बोला…"हम इसमें क्या हथेली लगा सकते हैं?”

"वो मुझसे सब कुछ पूछ गया I”

"अबे क्या सब कुछ?”

“अलफांसे को घेरने की प्लानिंग I”

“और , हरामजादे, तूने बता दिया ।" भडक कर बोला बागारोफ--" अबे क्या सोचकर बता दिया?”

“अगर वो आपके सामने आता चचा, तो तुम्हारा पेशाब निकल जाता ।"

“बोलती पर ढवकन लगा ले वरना सिर का तबला बना दूगा ।” बागारोफ गुर्राया-“टुम्बकटू ना हो गया साला कुम्भकरण हो गया ।"

"बांड सही कहता है, चचा ।" समर्थन बारगेन शा ने किया…“वास्तव में टुम्बकटू बहुत खतरनाक है I"

“लगता है हरामखोर कि तेरा पेशाब निकल चुका है ।” बागारोफ बोला ।

"चचा . . ! " माईक ने बोलना चाहा ।

"तमीज से बोल भूतनी के ।" माईक की बात बीच मे ही काटकर बागारोफ बोला…"वरना मिट्टी का तेल छिड़ककर सारे अमरीका में आग लगा दूंगा । जल्दी खडा हो और बोल कि क्या तीर मारना चाहता है I"

"मैं ये कहना चाहता हू चचा, कि इस समय नौ बजे हैं I"

“अबे तो फिर कौन…सी तेरी अम्मा के मरने का टाइम है?” बीच में भड़का बागारोफ-"बजे हैं तो बजने दे I"

"माईक शायद ये कहना चाहता है कि हम अपनी योजना बदल सकते हैं I” त्यांगली बोला ।

"तुम बिल्कुल सही समझे हो, त्वांगली I” माईक ने कहा-“अलफांसे से तो टुम्बकटू खुद निबट लेगा । वे बात करते हैं तो गुप्त रूप से हमेँ उनकी बातें सुननी हैं और टुम्बकटू पर नजर रखनी है । एक बात ध्यान देने योग्य ये भी हे कि विकास और चंगेज खां आश्चर्यजनक रूप से हम लोगों के बीच से गायब हैं । हमेँ ये भी पता लगाना है कि वे कहां हैँ और किस चक्कर में हैं?"

उनकी ये वार्ता मात्र बीस मिनट तक चली ।

अचानक अलफांसे के कान पर एक जोरदार चपत पडी ।

अलफांसे को ऐसा लगा जैसे उसके चारों ओर अजीब सा सन्नाटा छा गया है । वह अपनी तरफ़ से पूरी फुर्ती फे साथ पलटा किंतु वह कुछ देख न सका । उसके चारों ओर गहन अंधेरा था । कठिनता से तीन गज दूर का व्यक्ति साये के रूप मेँ दिखाई दे सकता था मगर उसे कुछ भी दिखाई नहीं दिया ।

इस समय वह यहां जेम्सबांड की प्रतीक्षा कर रहा था l

"क्राइमर भाई, यहां क्या मटर भुना रहे हो?” मात्र आवाज से ही अलफांसे समझ गया कि ये हरकत दुम्बकटू की है l यह एहसास होते ही वह एकदम सतर्क हो गया और पहले से भी कही अधिक फुर्ती का प्रदर्शन करके आवाज की दिशा में घूम गया । उसे लगा उसके सामने काफी समीप कोई गन्ना हवा के झोंकों के साथ धीरे-धीरे हिल रहा है l उसके मुह से मात्र एक शब्द निकला…“टुम्बकटू?”

“जीं हां, क्राइमर मियां…खादिम को इसी लेबिल से पुकारा जाता है I" गन्ने से आवाज निकली ।

एक क्षण के लिए अलफांसे पर जो बौखलाहट हावी हुई थी उस पर उसने शीघ्र ही काबू पा लिया, बोला-"तुम इस समय यहां?"

"क्यों, क्या गुलाम क्री हाजिरी आपको पसंद नहीं आई?" टुम्बकटू अपनी आदत के मुताबिक आदरात्मक स्वर मेँ बोला I

"तुम यहां क्यों आए हो?" अलफांसे ने सख्त लहजे में प्रश्न किया ।

"मुझें कहते हुए शर्म आती है क्राइमर भाईं कि आपको भी बात करने का ढंग नहीं आता ।” टुम्बकटू शिष्ट स्वर मेँ बोला…"हम तो जनाब किबला की शान से दुबले हुए जा रहे हैं और जनाबे किबला हैं कि हम पर राशन-पानी लेकर चढ़ रहे हैं । क्राइमर मियां, सच बात तो ये है कि हमें तुमसे लगता है डर इसलिए यही इल्लजा है कि कृपा करके हमसे शिष्ट भाषा में बात करें, वरना व्यर्थ ही आपकी एकाध हड्डी आपका साथ छोढ़ देगी I”

"बेटे कार्टून? गुर्राया अलफांसे-“मेरा नाम अलफांसे है । होश मेँ बात करो । इस समय यहां क्या कर रहे हो?”

"महान क्राइमर की सेवा में हाजिर हू ।”

"क्या चाहते हो?"

“अगर खादिम की फिल्म लौटा दें तो खादिम खुश हो जाएगा I” टुम्बकटू बोला…“लेक्रिन उससे पहले एक बात ये भी है क्राइमर भाई कि मुझे वो फिल्म नहीं चाहिए जो आप पहले मी पांच जासूसों को दे चुके हैं और अब यहां बांड को देने के चक्कर में खड़े हो l”

"इसका मतलब तुम सब कुछ जानते हो?" अलफांसे सतर्क लहजे में बोला ।

"हमने बड़े भाई की शान में कोई गुस्ताखी तो नहीं की ?"

"तुमसे बाद में बातें होंगी । फिलहाल या तो तुम चुपचाप एक तरफ़ छुप जाओ अथवा यहां से चले जाओ, अन्यथा मुझे अपने रास्ते से तुम्हें हटाने के लिए दूसरे रास्ते अख्यियार करने पड़ेगे l” अलफांसे के स्वर में कही भी ऐसा लोच नहीं था जो ये प्रदर्शित करता कि वह टुम्बकटू से लेशमात्र भी प्रभावित है I

"हुजूर, आपका हुक्म सर-आंखों पर I” टुम्बकटू बोला…“लेकिन क्या आप हमारी एक बात पर और गौर फरमाने की कृपा करेगे?”

" क्या ?"

"हम आपको ये बताना चाहते हैं कि आपका यहां उपस्थित रहना न केवल व्यर्थ है बल्कि खतरनाक भी है । अब आप प्रश्न कोंगे कि क्यों? तो इसका सींधा-सा जवाब ये है हजरते हमाम, कि जेम्सबांड आपकी चाल को समझ चुका है I अर्थात् वह जानता है कि आप पहले पांच जासूसों की भांति उसे भी असती फिल्म नहीं देंगे । इसका जवाब आपको देने के लिए न केवल उसके पास नकली डॉलर है बल्कि सब जासूस आपको घेरने की योजना भी बना रहे हैं I”

“क्या मतलब?" अलफांसे हल्के-से चौंका ।
 

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