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तकलीफ

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StoryPublisher

Guest
एक पुरानी कहानी है, राइटर के नाम का पता नही पर कहानी अच्छी है इसलिए पोस्ट कर रहा हूँ, जिन्होंने नही पढ़ी वो मजे ले और जिन्होंने पढ़ी है वो इग्नोर करे
 


ये कहानी मै सभी सेक्सी भाभियो को डेडीकेट करता हु. और उम्मीद करता हु की वो इसे पसंद करेगी और अपने फीडबेक देगी.

पहेले में मेरी और मेरी फेमिली के बारे जो जरुरी हे वो में फटाफट बता देता हु. तो बात कुछ तब शुरू हुई थी जब मै ९ कक्षा में पढ़ रहा था. माँ और पिताजी सूरत में रहेते थे और मै मेरे तिन भाई भाभी के साथ मुंबई में रहेता था. तीनो भाइयो की शादी हो चुकी थी. सबसे बडे भाई-भाभी का नाम सागर और सुमन था. दुसरे भाई-भाभी का नाम राकेश और ज्योति था और तीसरे का प्रकाश और पायल था. सब से छोटा में था. सुमन भाभी कुछ ३८ साल की थी, ज्योति भाभी ३२ की और पायल भाभी २७ की.

सब अपनी-अपनी फेमिली लाइफ में खुश थे. फेमिली का बिजनेस था और तीनो भाइ-भाभिया मिलजुल के रहेते थे. मेराभी तीनो भाई-भाभियों के प्रति बड़ा प्रेम था. खास कर तीनो भाभियों के प्रति क्योंकि मेरी सुबह की स्कुल थी और दिन भर में उन्ही के साथ रहेता था.

Teen age में प्रवेश कर चूका था इसीलिए हर सुन्दर स्त्री के प्रति आकर्षण रहेना स्वाभाविक था जिसमे मेरी अपनी भाभिया भी शामिल थी. मैं उन्हें खूब पसंद करता था. न की मात्र उनका स्वाभाव अच्छा था परन्तु वो सब दिखने में भी उतनी ही अच्छी थी. वो सभी गोरी तो नहीं थी पर सुन्दर थी. सुन्दरता उनके हर अंग में थी पर एसा लगता था की तीनो भाइयो ने जैसे आपस में ठान लिया था की शादी करेंगे तो बड़े बड़े स्तन वाली लड़की से ही करेंगे. कोईभी अगर भाभियों को मिलता तो पहेली नज़र उनके स्तन पर ही जाती बादमे चहेरे पे. पल्लू के निचे क्या साइज़ के स्तन होंगे वोही सोचने में कई लोगो की नज़र उनके स्तन से हटती भी नहीं थी. इसमें मैं भी शामिल हु. और कभी स्तन पर से पल्लू जरासा भी इधरउधर हुआ तब तो लोगों की शामत आ जाती. पर मैं इस बारे में लकी हु. मैंने भरभर के उनके स्तन देखने के आनंद लिया हे. कई बार एसा सोचा की वो सब मेरी माता समान है और बुरी नज़र से देखना पाप हे पर खुदको रोकना मुश्किल था जब हररोज नज़ारा ही कुछ एसा देखनेको मिले. रात को अक्सर स्त्रीया सोते वक्त अपनी ब्रा निकाल देती है और ख़ास कर अगर स्तन अपनी ब्रा में समाते न हो तब तो ब्रा फटाकसे खोल कर फ़ेंक देती है ताकि थोडा रिलेक्स रह सके और पतिओ की नींद हराम कर सके. सुबह उठते ही वो कामकाज में खो जाती हे और अक्सर उनको अपने कपड़ों का ख्याल नहीं रहेता. कई बार तो वे लोग अपनी साडी का पल्लू अपने स्तन पर से निकाल के अपनी कमर में डाल देते थे. अगर छलकते-उछलते हुए स्तनवाली और लचकती हुई कमरवाली सुंदरियाँ आप के आसपास घुमती हो तो कोई कैसे अपने आप को रोक सकता है. खास कर घर में पोछा करते वक्त स्तन का सरक के अचानक बहार आना और वो ज़ुलते हुए स्तन को दबोच के वापस अपने ब्लाउज में डालना और अपने काम में फिरसे व्यस्त होना वो सब मेरी आँखों के सामने अक्सर होता था और में उसके जी भर के मज़े लेता था.

खैर, अब मैं बात करता हूँ मेरी उस बीमारी की जिससे मेरी जिंदगी पूरी तरह बदल गई. एक रात की बात है. अचानक मेरी नींद खुल गई. मुजे लगा जैसे मेरे लंड पे किसी ने जोर से काटा हो. मैंने फटाक से मेरी हाफ पेंट उतारी और लंड को बाहर निकला. और मैंने क्या देखा? एक मकड़ी मेरे लंड पे जोर से चिपकी हुई है. बिना देर किये मैंने उसे उखाड़ फेंका किन्तु उसके दो कांटे अभी भी मेरे लंड पे गड़े हुए थे. मैं दर्द के मारे चीखा. मेरी चीख सुनके पास के रूम में से सागर भैया और सुमन भाभी दौड़े चले आये. देखा तो मैं लंड हाथ में लिए बैठा हु और दर्द से मेरी हालत ख़राब है. भैया-भाभी को मैंने सब कुछ बताया. भाभी दौड़े और फ्रिज में से बर्फ लाके भैया को मेरे लंड पे रगड़ ने को बोला ताकि दर्द कम हो और सुजन न हो. भैया ने फटाफट मेरे लंड को हाथ में लिए बर्फ की मालिश करने लगे. भाभीने तब तक सब को बुला लिया और जो हुआ उसके बारे में बताया. सब मेरी हालत देख के परेशान थे.

बर्फ के मालिश से भी कोई फर्क नहीं हो रहा था. ऊपर से मेरा दर्द और बढ़ा और मेरा लंड सुजन के मारे गधे के लंड जैसा लम्बा और मोटा हो गया. अब मेरे लिए दर्द बर्दाश से बाहर था. घर के लोग भी बेचेन थे की करे तो क्या करे. आखिर में आधी रात को डॉक्टर को फोन कर के बुलाया. डॉक्टर ने जाँच करके बोला की मुजे बर्फ के मालिश की नहीं बलके हलके से गर्म पानी की मालिश करनी थी. जिस मकड़ी ने काटा थे वो एक अलग किसम की मकड़ी थी जिसके काट ने पर गर्म पानी की मालिश राहत देती है और सुजन फैलती नहीं है. अब हलके से गर्म पानी की मालिश शुरू की. कुछ समय बाद थोड़ी सुजन कम हुई और दर्द में भी राहत थी. करीब एक घंटे बाद पूरी सुजन और दर्द गायब हो गया. सब ने रहत की सांस ली और कुछ समय मेरे साथ व्यतीत करने के बाद सब लोग वापस सोने के लिए चले गए. मुझेभी कुछ समय बाद नींद आ गयी.

 


दुसरे दिन दोपहर को वापस वोही दर्द वोही सुजन होने लगी. फिर से मेरा लंड मोटा और लम्बा हो गया. मैंने भाभियों को आवाज़ दी और वे सब काम छोड़ के मेरे पास दौड़ी आई. वापस मेरी ये हालत देख कर चिंता करने लगी. ज्योति भाभी झट से हल्का सा गर्म पानी लेके आई और मेरे लंड को अपने हाथों में लेकर मालिश करने लगी. करीब एक घंटे बाद फिरसे सब नोर्मल हो गया. शाम को जब भैया घर आये तो भाभियों ने दोपहर को जो हुआ उसके बारे में बताया. सब लोग मेरी ये अजीब किसम की तकलीफ से परेशान थे.

उस दिन शाम को सागर भैया मुझे डॉक्टर के पास लेके गए. डॉक्टर के काफी जाँच करने के बाद कहा की मेरे लंड पर से मकड़ी के दो कांटे तो निकाल ने पड़ेंगे परन्तु मकड़ी का जहर मेरे लंड के निचे की वृषण में चला गया है और जब तक जहर वृषण मैं है तब तक लंड ऐसे ही सूज जायेगा. डॉक्टर ने मेरे लंड से मकड़ी के कांटे निकाले और जहर की असर को कम करनेके लिए कुछ टेबलेट्स दिए. साथ में एक इलेक्ट्रिक से चलने वाली करीब एक फिट लम्बी प्लास्टिक की नाली भी दी. जैसे पानी का कोई पाइप हो. जिसका एक छोड़ बंध था पर दूसरे छोड़ पर एक छोटा सा छेद था. बाद में मुझे पता चला की इसे आर्टिफिसियल चूत कहते हैं जिसका अंदरका तापमान आप अपनी जरुरत के हिसाब से कम-ज्यादा कर सकते है. डॉक्टर ने बोला की जब भी मेरा लंड सूज जाये तब ये आर्टिफिसियल चूतका तापमान अपने शरीरके तापमान जितना रखके तुरंत अपना लंड उसमे डालना. ये जरुरी है की वो चूत का तापमान शरीरके तापमान जितना ही हो. इससे जहर की साइड इफेक्ट चली जाएगी और राहत भी मिलेगी.

उस रात को मेरे मन में एक ही द्रश्य छा रहा था. ज्योति भाभी कैसे मेरा लंड अपने हाथों में ले कर मालिश कर रही थी!! मेरा तो पूरा शरीर ये सोच के ही गर्म हो रहा था की ज्योति भाभी ने मेरे लंड को छुआ था. इतना ही नहीं, उन्होंने अपने हाथ में ले कर मालिश भी की थी. वो भी एक घंटे तक. वैसे तो दर्द की वजह से शुरू में मुजे कुछ भी समज नहीं थी पर जैसे ही मेरा दर्द कम हुआ वैसे ही मेरी नज़र ज्योति भाभी पड़ी. भाभी मेरे लंड की और झुके थे और छाती से पल्लू कही और गिर के पड़ा था. ब्लाउज में कैद उनके बड़े बड़े स्तन मेरी आँखों के सामने झूल रहे थे. वैसे तो कई बार उनके स्तन की गहरी खाई देखि थी पर आज पहेली बार इतने करीब से और इतनी फुरसत से करीब-करीब पुरे स्तन देखने को मिले थे. में उनके स्तन का हरएक हिस्सा आँखों से चूम रहा था यही आशा से के कही मुझे उनके निप्पल की झलक देखने को मिले या फिर उनके स्तन ब्लाउज में से सरक के बहार निकल आये. पर ऐसा कुछा न ही हुआ. खैर कोई बात नहीं पर आज मालुम पड़ा की उनके स्तन पर दो तिल है. बांये स्तन पर एक लाल तिल है और दांये स्तन पर शायद थोडा निप्पल के बाजू में एक और काला तिल है जो उनके स्तन की खूबसूरती को चार चाँद लगाते है. ऊपर से उनके लम्बे घने केसु जैसे उनके बदन पर से कोई लहराती हुई नदी जा रही हो. कुछ लटें स्तन के ऊपर से गुजरती हुई उनकी मख्खन जैसी कमर को लिपट रही थी. कुछ लटें उनके बाजुओं से गुजर कर जमीन पर बिखरी हुई थी. कुछ उनके ताज़ा खिले हुए गुलाब की पंखडी जैसे होंठो को चूम रही थी जिसे वो बार बार हटा रही थी. कुछ लटें उनके कान के झुमखे मै उल्ज़ी हुई थी. कुछ लटें उनकी कजरारी आँखों पर परदा कर रही थी. उनकी तो हर हिलचाल मैं भी संगीत था. कभी उनके झुमखे का तो कभी उनके पायल की झनकार या फिर चूड़ी की खनकार. मेरी तो नींद हराम हो चुकी थी और में यही राह देख रहा था की कब मेरा लंड फिर से सूज जाए और कब ज्योति भाभी अपने कोमल हाथों से मालिश करे!! पर अब तो मालिश कहाँ? आर्टिफीसियल चूत जो थी.

 


दुसरे दिन रात को खाना खाने के बाद सब लोग ड्राइंग रूम में बैठे थे और बाते कर रहे थे तभी फिर से लंड पर सुजन आई और सिर्फ पांच मिनट में लंड चड्डी के नीचेसे निकल कर घुटनों तक लम्बा हो गया. सबने ये होते हुए देखा और झट से मुझे मेरे कमरे में ले गए. इस बार मुझे थोडा दर्द कम था. शायद दवाई की असर थी. सागर भैया ने वो आर्टिफीसियल चूत का वायर लगाया और उसे गर्म करने को रखी. तब तक मैंने मेरी चड्डी निकाल दी और मेरे बेड पर बैठ गया. इस बार मुजे नंगे होने में कुछ शर्म भी आ रही थी. सब लोग मेरे आस पास खड़े थे और आशा करते थे की जल्द से जल्द सब ठीक हो जाय. भैया ने दो मिनट बाद कुछ जेल जैसा मेरे पुरे लंड पर लगाया और वो चूत को मेरे लंड के सुपडे के पास लाये और मुजे बोले की धीरे धीरे मैं लंड उसमे डालू. मैंने मेरे लंड को उस चूत में डाल ना शुरू किया. जैसे ही मैंने लंड को उस चूत के मुंह पर दबाया वो आगे से हलकी सी खुल गयी. जैसे जैसे मै लंड डाल रहा था वैसे वैसे वो चूत में मानो जगह बन रही थी और मुझे उसकी गर्मी का एहसास हो रहा था. वो काफी मुलायम भी थी. काफी आसानी से मेरा पूरा लंड उसमे चला गया. मेरे पुरे लंड को एक साथ एक समान गर्मी मिल रही थी और मुझे भी काफी अच्छा महेसुस हो रहा था. मेरे आस-पास बैठ के सब लोग बाते कर रहे थे और मेरे ठीक होने का इंतज़ार कर रहे थे. करीब आधे घंटे के बाद मेरा दर्द पूरा चला गया पर सुजन अभी भी थी. में भी नंगा बैठा हुआ हाथ में चूत लिए सब की बाते सुन रहा था. सोच रहा था की क्या सच में चूत ऐसी होती है!! क्या चूत में ऐसे लंड डालते है!! और लंड डाल ने का एहसास क्या ऐसा होता है!! मुजे एक अलग सा एक्साईट्मैंट हो रहा था और काफी आश्चर्य हो रहा था पर बाकी लोंगो को देखा तो लगता था की जैसे उनके लिए ये कोई नयी बात नहीं है. एकदम सहजता से एक दुसरे से बाते कर रहे थे.
 


दुसरे दिन सुबह में ही वापस सुजन आई. भैया ऑफिस जा ही रहे थे की मैंने उनको आवाज़ दी. इस बार राजेश भैया ने मेरे लंड पर जेल लगाया और चूत को गर्म कर के मुझे दी और मैंने उसमे लंड डाला. थोड़ी देर मेरे साथ बैठे तभी ज्योति भाभी आई और भैयाको कहा की आप ऑफिस जाइये वो मेरा ख्याल रखेगी. भैया चले गए और मै चूत को हाथ में लिए बैठा था. सभी भाभियाँ अपने-अपने काम में जुट गयी. थोड़े थोड़े समय के बाद ज्योति भाभी आ कर मुझे मिल कर जाती थी. करीब एक घंटे बाद जब सुजन चली गयी तो ज्योति भाभी ने चूत में से मेरा लंड निकाल कर चूत को साफ़ करने के लिए ले गयी. ये अब रोज का हो गया था. लंड कभी भी सूज जाता था. लंड का सुजना, चूत को गर्म करके उसमे डालना और भाभियों का चूत की सफाई करना जैसे नोर्मल हो गया था.

कुछ दिन बाद सुमन भाभी की छोटी बहन रीना की शादी थी. सुमन भाभी एक हफ्ते पहले ही अपने माता-पिता के घर उनकी मदद करने चले गए थे. शादी का घर था और बहोत सारे काम थे. लड़का UK में sattled एक डॉक्टर था. शादी के बाद वो दोनों एक हफ्ते के लिए हनीमून पर गए और बाद में लड़का UK वापस चला गया. रीना एक महिने बाद जाने वाली थी. कुछ दिन रीना अपने माता-पिता के साथ रुकी और कुछ दिन बाद रीना हमारे घर रुकने के लिए आई ताकि सुमन भाभी के साथ कुछ समय बिता सके. न जाने UK जाने के बाद कब वापस आना होगा.

रीना मेरी इस बीमारी से अनजान थी पर आने के दुसरेही दिन उसको पता चल गया. मेरी बीमारी और उसके इलाज के बारे में सुनके वो भी काफी आश्चर्य चकित थी. एक बार मौका देख कर मेरे पास आई और धीरे से मुझे कहा "फिरसे जब भी ऐसा हो तो मुझे बुलाना. पर ख्याल रखना की कोई देख ना ले."

मैं बोला "क्यों?"

वो बोली "मुझे देखना है की ये सब कैसे होता है"

मुझे भला क्या एतराज होता. मै बोला "ठीक है. मैं बताऊंगा"

जाते जाते वो फिर से याद दिला गयी "पर किसी को मालूम नहीं होना चाहिए"

दुसरे दिन दोपहर को करीब तिन बजे फिरसे सुजन आई. मैंने इधर उधर देखा तो सब अपने अपने कमरे में थे. मैं रीना तो ढूंढ रहा था पर वो नजर नहीं आ रही थी. अब मुझसे और सहा नहीं गया और मैंने आर्टिफीसियल चूत को गर्म करने के लिए रखी और अपने लंड पर जेल लगाया. उतने में ही मैंने रीना को देखा. हलके से उसको आवाज़ दी और बुलाया.

देखते ही उसकी आँखे फटी की फटी रह गयी और बोली "Oh my God!”

कुछ क्षण बाद अपने आप को संभालते हुए दौड़ी चली गयी और सुमन भाभी को कह कर आई की एक घंटे के लिए वो बाहर जा रही है और वापस मेरे कमरे में चली आई और दरवाजा अन्दर से बंध कर दिया.

पास आते ही बोली "मुझे देखना है की तुम क्या करते हो.”

मैं बोला "ठीक है. देखो मैंने अभी अभी मेरे लंड पर जेल लगाया है. अब मैं इसे ये आर्टिफीसियल चूत मैं डालूँगा.”

वो बोली "एक मिनट रुको. क्या मैं इसे छू सकती हूँ?” उसने मेरे लंड की तरफ इशारा किया.

मैं बोला "हाँ देखो."

उसने मेरे पुरे लंड को अपने हाथ में लिया और उसके ऊपर हाथ फिराने लगी. मेरे लंड का एक एक हिस्सा वो महेसुस कर रही थी. मैं भी उत्तेजित हो रहा था और उसकी साँसे भी तेज हो रही थी. मेरे लंड पर उसके हाथों की पकड़ धीरे धीरे मजबूत हो रही थी और मुझे दर्द हो रहा था.

मैंने उसे रोक कर बोला "मुझे अब इसमें डालना होगा. मुझे दर्द हो रहा है.”

उसने झट से अपने होश संभाले और मेरे लंड पर से अपने हाथ हटा दिए. मैंने मेरा लंड वो आर्टिफीसियल चूत में डाला और पकड़ के बैठ गया.

कुछ समय की शांति के बाद मैंने थोडा डरते हुए रीना को कहा "एक बात जाननी है.”

रीना बोली "क्या?"

मै टूटते हुए लब्जों में बोला "कया...क्या...तुम नाराज तो नही होंगी?”

रीना बोली "ना बाबा. बोलो."

मै टूटते हुए लब्जों में फिर से बोला "कया...क्या...तुम भाभी को तो नही कहोगी?”

रीना बोली "अरे बाबा किसी को नहीं कहूँगी. अब बोलो भी. मुजसे डरने की कोई जरुरत नहीं."

मैं हिम्मत करके बोला "क्या.. क्या.... ल..ल... लड़की की... वो भी.. ऐसी ही होती है?” मेरा इशारा रीना चूत की तरफ था.

रीना हंस के बोली "अरे मैंने ये artificial vajaina पहली बार देखि है. मुजे नहीं मालुम वो कैसी होती है.”

मैं बोला "पर क्या दिखने में वो ऐसी ही होती है?”

रीना बोली "हाँ. आगे का भाग तो करीब वैसा ही है"

मैं बोला "तो क्या उसमे भी लंड ऐसे ही डालते है?” फिर से मेरा इशारा रीना की चूत की और था.

वो हंस के बोली "नहीं बाबा. ऐसे नहीं डालते.”

मैं बोला "तो फिर कैसे डालते हैं?”

रीना बोली "तुम अभी छोटे हो ये सब जान ने के लिए. बड़े हो जाओगे तो अपने आप ही मालुम पड़ जाएगा.”

मैं बोला "ठीक है पर क्या तुम मुझे तुम्हारी ये चूत दिखा सकती हो?”

"चूत" शब्द सुनके उसने मेरी आँखों में देखकर बोला "ना मैं नहीं दिखा सकती. तुम बहोत छोटे हो."

मै नाराज हो के बोला "तुम मेरा लंड देख सकती हो पर मैं तुम्हारी चूत नहीं देख सकता.”

मुझे नाराज देखकर वो कुछ पल रुकी और फिर बोली "ठीक है मैं तुम्हे एक दूसरी बात बताती हूँ.”

यह कह कर उसने अपने हाथो में आर्टिफीसियल चूत को लिया और मेरे लंड को बहार निकाल कर वापस अन्दर डाला. ऐसा अन्दर-बाहर करते-करते अचानक मेरे पुरे शरीरमें एक अजीब सी लहर दौड़ गयी. मैंने दोनों हाथो से रीना के हाथ पकड़ लिए. ये मेरे लिए एक अत्यंत रोमांचक अनुभव था. कुछ पलों के लिए मेरा अपने आप पर कंट्रोल नहीं था.

मेरे शांत होने पर रीना ने कहा "ऐसा ही अनुभव लड़की की चूत में जब लंड जाता है तब होता है.”

अब मैंने उसकी चूत देखने की जिद पकड़ी. अंत में हार मान के उसने प्रोमिस किया की एक दिन वो जरुर दिखाएगी और रूम दरवाजा खोल कर चली गयी.

मैंने वो चूत को सफाई के लिए बाथरूम में रख दिया. शाम को पायल भाभी मेरी खबर पूछने के लिए आई और देखा तो बाथरूम में चूत पड़ी है. उन्होंने सफाइ के लिए जैसे ही उसे हाथ में लिया वैसे ही उसमे से मेरे स्पर्म निकल कर बाहर आये. तसल्ली करने के लिए पायल भाभी ने स्पर्म को हाथ में लेकर मसल कर देखा तो उनको कुछ-कुछ समज में आया. उन्होंने मेरे सामने देखा और मेरी तबियत के बारे में फिर से पूछा. मेरे जवाब से वो संतुस्ट नहीं लगी तब उन्होंने सुमन भाभी और ज्योति भाभी को भी बुलाया और वो चूत में से निकले मेरे स्पर्म को दिखाया. उन्होंने भी स्पर्म को हाथ में मसल कर देखा और तसल्ली करने के लिए उन्होंने सूंघ के देखा. तसल्ली होने के बाद उन्होंने इशारे में अपना सर हिलाया और मेरी तरफ कुछ अजीब तरीके से देखा. ज्योति भाभी मेरे पास आई और कहा "अपनी चड्डी उतारो जरा"

मैंने मेरी चड्डी उतारी दी. सामने सभी भाभियाँ खड़ी थी और उनके सामने मै नंगा खडा था. ज्योति भाभी ने झुक कर मेरे लंड को एक हाथ से पकड़ा और मेरे सुपाडे पर से लंड की चमड़ी निचे उतारी. दुसरा हाथ मेरे सुपडे पर फिराया और वोही चिकनापन उन्हों ने पायी. सब तसल्ली करने के बाद उन्होंने पूछा "तुम्हे कुछ हुआ था क्या?”

मैंने कहा "नहीतो?"

उन्होंने फिर से पूछा "कुछ तो हुआ है. हमसे छुपाओ नहीं. हमसे छुपाओगे तो हम डॉक्टर को क्या बताएँगे? वो कैसे तुम्हारा इलाज करेंगे?”

मैंने उनकी तरफ देखा. उतने में रीना भी वहां आई. मैंने उसकी और देखा. उसको तो पता नहीं था की वहां क्या बात हो रही थी पर फिर भी उसने इशारे से मुझे कुछ भी बताने से मना किया. एक और सब भाभिओं का दबाव था तो दूसरी और रीना. फिर कुछ देर बाद मैंने रीना की और देखा और जो हुआ उसे बताना शुरू किया. बिच-बिच में मैं रीना की और देखता था. रीना के चहेरे पे घभराहट छाने लगी वो सभी भाभिओं ने भी देखा. मैंने पूरी बात बताई पर कही रीना का जिक्र नहीं किया. बात ख़तम होने पर रीना की जान में जान आई और चहेरे से डर चला गया. वो भी सभी भाभिओं ने देखा. भाभिओं ने मंद मंद मुस्कुराते हुए चैन की सांस ली की कुछ चिंता की बात नहीं है. पर पायल भाभी ने सवाल किया की "तुमने ये कहाँ से सिखा?”

मैंने वापस रीना की और देखा तो वो फिर से डर गयी और इधर उधर देखने लागी. मैंने जवाब दिया "ऐसे ही एक बार मेरा हाथ ऊपर निचे हुआ और मुझे अच्छा लगा तो मैंने फिर से किया और फिर बार बार किया तो कुछ देर बाद मेरे शरीरमें कुछ हुआ और मुझे बहोत मझा आया. तो मैंने आज फिरसे किया.”

तब तीनो भाभिया एक साथ बोल पड़ी "पर मैंने तो पहले कभी तेरे स्पर्म इसमे नहीं पाए?”

मैंने कहा "मुझे स्पर्म क्या होता है वो नहीं मालुम.”

मेरा जवाब सुनके भाभिओंने ज्यादा सवाल पूछना ठीक नहीं समझा. और अपने अपने काम में जुट गयी. थोड़ी देर बाद रीना मेरे पास आई और बोली “Thanks. तुमने मेरे बारे में कुछ बताया नहीं. मैं तो डर गयी थी.”

मैं बोला "कोई बात नहीं"

रीना जा ही रही थी की मैंने उसे रोका और कहा "रीना दीदी अभी यहाँ कोई नहीं है please मुजे तुम्हारी चूत देखनी है. दिखाओना".

रीना पास आके धीरे से बोली "ना. अभी नहीं. कोई आ जाएगा.. बाद में कभी.”

मैं रीना के घुटनों की और झुका और उसकी साड़ी को हाथ में लिए उठाने की कोशीश करते हुए बोला "बाद में तो तुम चली जाओगी. अभी एक बार दिखाओना. जल्दी से.”

वो मेरे हाथ में से उसकी साडी छुडा कर दो कदम पीछे हट गयी और कहा "ये क्या पागलपन है? कोई देखा लेगा. थोड़ी धीरज रखो. मै तुम्हे जाने से पहले जरुर दिखाउंगी.”

मैं बोला "पर अभी फटाफट दिखा दो ना..”

"उतावले मत हो. धीरज रखो.” बोलकर गुस्सा होकर वो चली गयी

उस रात को फिर से मेरी नींद उड़ गयी थी. मैं बार बार वोही अनुभव की याद कर रहा था की कितना मझा आया था. कैसे रीना मेरे लंड को अन्दर बाहर कर रही थी. कैसे उसके स्तन हिल रहे थे. उसे मालुम था की मैं उसके स्तन को एक नझर देख रहा हु फिर भी उसने अपने स्तन को पल्लू से ढंका नहीं. उसके स्तन वैसे तो भाभिओं जैसे बड़े नहीं थे पर उसका उभार एकदम परफेक्ट था. उसके सफ़ेद दूध जैसे स्तन पर एक चमक थी. उसका पूरा बदन जैसे मख्खन का बना था. उसके पेटीकोट का नाडा उसकी मख्खन जैसी कमर पर मानो छुरी का काम कर रहा था. ये सब द्रश्य सामने आते ही मेरा लंड खड़ा हो गया. उसका वादा याद आ गया की वो अपनी चूत दिखाएगी. कैसी होगी असली चूत और वो भी रीना की? और यकीं नहीं हो रहा था की रीना अपना वादा निभाएगी? अगर उसने अपनी चूत दिखाई तो मैं जरुर उसके सामने गिडगिड़ाउंगा की मुझे छू ने दे. यही तो एक मौका है. यही विचार से मैंने वो आर्टिफीसियल चूत हाथ में ली और खड़े हुए लंड पर जेल लगा कर चूत में डाला और मेरी उत्तेजना को शांत किया. चूत को बाथरूम में छोड़ दिया और सो गया.

दुसरे दिन दोपहर को मैं मेरे रूम में था और फिर से सुजन आई अब तो सुजन के बहाने में अपनी उत्तेजना को भी शांत कर लेता था. तभी छोटी भाभी पायल मेरे कमरे के पास से गुजरी. उन्होंने मुझे मेरे लंड पर चूत हिलाते हुए देख लिया पर कुछ बोली नहीं और चुप चाप चली गयी. करीब एक घंटे के बाद वो आई और मेरे बाथरूम में पड़ी चूत को साफ़ किया और बहार आके हलकी सी मुस्कान के साथ बोली "कितना गन्दा करते हो तुम इसे. ये तुम्हारे स्पर्म इसमे चिपक जाते हैं और जल्दी से साफ़ भी नहीं होते". और फिर चूतमें लगे पानी को सुखाने के लिए उसे ले गई.

एक दिन सुबह सुबह पायल भाभी के घर से फोन आया की उनके मौसाजी गुजर गए. अब समधी होने के नाते सबको उनके क्रिया कर्म में शामिल होना था पर सबको मेरी फिकर थी. मेरी ये बिमारी के कारण कोई मुझे घर में अकेला नहीं छोड़ते थे पर ये प्रसंग ही ऐसा था की सबको जाना ही पड़े. पर चिंता ये थी की पायल भाभी के मौसाजी गोवा में रहेते थे वहां जा कर आना मतलब तिन दिन की बात थी. तिन दिन तक मुज़े अकेला छोड़ना संभव नहीं था. एक सुझाव ऐसा था की मुझे साथ ले कर जाए पर मुसाफ़री के दौरान अगर सुजन आई यी तो कहाँ जाये? और एक बार सुजन आई तो ज्यादा देर तक राह नहीं देख सकते. आखिरमे रीना ने सुझाव दिया की वो मेरा ख़याल रखेगी. एक महेमानको तकलीफ देना किसीको अच्छा नहीं लगता. पर रीना ने सब को मना लिया की इस समय यही करना ठीक रहेगा और मात्र तिन दिन की ही तो बात थी. सब ने हिचकिचाहट से आखिर में रीना की बात मान ली और यह तय हुआ की सब लोग जायेंगे और रीना मेरा ख्याल रखेगी.

कुछा घंटे बाद सब लोग चले गए. घरमे मैं और रीना अकेले थे. रीना घर के बाकी काम निपटाने में जुट गयी और मैं तो बस रीना को ही देख रहा था. वो भी जानती थी की मैं उसको ही देख रहा हूँ और क्यों देख रहा हूँ. मेरी बेचेनी उससे छुपी नहीं थी. वो भी मंद मंद मुस्कुरा रही थी.

आखिर में मुझसे रहा नहीं गया. मैं बड़ी व्याकुलता से बोला "क्या कर रही हो?”

उसे जैसे कुछ पता ही न हो वैसे भोली बन कर पूछा "क्यों क्या बात है?”

अब मैं बड़ा अधीर हो गया था और कहा "रीना दीदी अबतो घर में कोई नहीं है मुझे तुम्हारी चूत दिखाओ ना.."

मैं ड्राइंग रूम मैं बैठा था. रीना मेरे पास आई और झुक कर मरे चहेरे के सामने अपना चहेरा ला कर बोली "थोड़ा और धीरज रखो. पहले मुझे घर के सारे काम पुरे कर लेने दो.”

जैसे ही वो मेरे आगे झुकी तो उसका पल्लू उसके ब्लाउज पर से गिर गया. फिरसे उसके गोरे गोरे स्तन मेरी आँखों के आगे झूल रहे थे. मैं भी क्या करता मुझे कुछ समज नहीं थी. मैंने झट से उसके स्तन को दोनों हाथों से दबोचा पर वो झट से अपने स्तन छुड़वा कर दो कदम पीछे चली गयी और गुस्सा हो कर बोली "ये क्या कर रहे हो? मेरी बात तुम्हे समज में नहीं आती? जाओ मैं तुम्हे नहीं दिखाउंगी.”

मै उसके सामने गिडगिडाने लगा और कहा "Please ऐसा मत करो...तुम जैसा बोलोगी वैसा मैं करूँगा...तुम काम पूरा कर लो मैं कुछ नहीं बोलूँगा.”

रीना बोली "तो ठीक है पर अपनी जगह से उठना भी नहीं.”

मैं बोला "ठीक है नहीं उठूँगा पर तुम अपनी चूत दिखाओगी ना?”

रीना बोली "हाँ पर मेरी बात मानोगे तो ही"

मेरे पास उसकी बात मानने के अलावा कोई और चारा नहीं था. वो आंख मिचाकती हुई वापस अपना पल्लू ठीक करके किचन में चली गयी. उसका पल्लू भी उसके पीछे पीछे किचन में चला गया.

कुछ समय बाद वो किचन के बहार आई और मेरे सामने आकर खडी हो गयी. मै हैरान था की क्या मुझसे कोई भूल हुई है? पर उसने तो अपना पल्लू अपने बाजू से उठा कर जमीं पर डाल दिया. मैं हैरान था की वो क्या कर रही है? दुसरे ही पल उसने अपनी कमर मैं से साडी खिंच कर निकाल दी और फर्श पर गिरा दी. अब वो मात्र ब्लाउज और पेटीकोट में थी. मेरी आँखे फटी पड़ी थी. और मैं जो देख रहा था उसपे यकीन नहीं हो रहा था. मैं उसके एक एक अंग को बड़ी उत्सुकता से देख रहा था. उसके कोमल होंठ, छाती पर उभरे हुए दो स्तन, सुन्दर नाजुकसी मख्खन जैसी चिकनी कमर और बिच मैं भंवर जैसी गहरी नाभि. उसकी पूरी सुन्दरता को जैसे मैं आँखों से छू रहा था. उसने अब अपने बालों की क्लिप खोल दी और बालों को खुला छोड़ दिया. धीरे से वो पलट कर खडी हो गयी. उसके लहराते केसुओ उसकी कमर को छू रहे थे. धीरे से उसने केसुओ को अपने हाथों से ऊपर उठाया ताकि मैं उसकी पीठ देख सकू. उसकी सपाट सी चिकनी पीठ और भरी-भरी सी गांड देख कर जी मैं आया की अभी उठ कर लिपट जाऊं और पूरा का पुरा लंड उसकी गांड में गाड़ दूँ. पर मैंने चुपचाप बैठ ने का वादा जो किया था. वापस पलट कर वो मेरे सामने खडी हो गयी. वो मन से एकदम शांत लगाती थी. उसकी हर चाल में स्थिरता थी. ऐसा लगता था की उसने पहले से ही कुछ सोच कर रखा है. कुछ क्षण बाद मेरे साथ नज़रे मिलाई और बड़ी कोमलता से चलकर मेरे करीब आई. जैसे ही वो करीब आई मैंने उसे कमर से पकड़ कर और करीब खींचा. खिंचतेही मेरे होंठ उसके स्तन के बिच की गहराई में दब गए. ऐसा लगा जैसे समय वंही रूक गया हो. कुछ क्षण उसके स्तन की गहराई में गर्म साँसे लेने के बाद मैंने उसके स्तन के उभारों को चूमना चाहा पर अपने आप को मुझसे छुडा कर वो दो कदम पीछे चली गयी और इशारे से मुझे आगे न बढ़ने को कहा. अपनी साडी को वंही फर्श पर छोड़ कर वो वापस किचन में चली गयी.

 


किचन का थोडा काम निपटाकर करीब १५-२० मिनट में रीना वापस आई. मेरे करीब आकर अपने होठों को मेरे होठों के इतने करीब लायी की मुजे उसकी सांसो की गर्मी महेसूस हो रही थी. ऐसा लग रहा था की वो मुझे अभी कच्चा चबा जायेगी. पर बिना चूमे ही वो मेरे से थोडा दूर जाकर सामने के सोफे पर बैठ गयी और ब्लाउज पर से ही अपने स्तन पर हाथ रखा और धीरे धीरे उसे मसलना शुरू किया. वो हलके से अपने स्तन को हथेली में ले कर मसल रही थी और मेरी हालत देख मुस्कुरा रही थी. मुझे बेहाल देख कर उसे माझा आ रहा था. अब उसने थोडा आगे बढकर अपने दोनो पैर फैलाये. पैर के फैलने से उसका पेटीकोट सरक कर घुटनों के ऊपर आ गया पर उसकी चूत की झलक तो अभीभी देखने को नहीं मिली. अब वो एक हाथ अपने पेटीकोट में ले गयी और धीरे धीरे अपने जांघो के बिच में रगड़ने लगी. मेरी नझर उसके दोनों पैर के बिच में ही गड़ी थी की कब उसका पेटीकोट थोडा और ऊपर सरके और उसकी गोरी गोरी जांघो के बिच चूत को देख सकू. पर वो बड़ा ख़याल रखती थी की उसके पैर के बिच का राज़ में ना जान सकू. अब उसकी हाथ रगड़ ने की स्पीड धीरे धीरे तेज हो रही थी और पुरे सोफे पर वो मचल रही थी. उसने अपने फैले हुए पैर को वापस करीब लाये और अपना हाथ दोनों पैर के बिचमें से बहार निकाला. वो अब सोफे में से खडी हो गयी और मेरी ओर झुक कर अपने स्तन की क्लीवेज दिखाई. अपने हाथसे पेटीकोट घुटनों तक उठाया और दो नो हाथों से अपनी पेंटी खिंच कर उतार दी. मेरी ये कल्पना करके ही जान जा रही थी की वो पेटीकोट के अन्दर पूरी नंगी थी. अब वापस उसने अपना पेटीकोट घुटनों तक उठाया और सोफे पर अपने पैर फैला कर बैठ गयी. अभी भी मैं उसकी गोरी चिकनी जांघो के आगे कुछ नहीं देख सकता था. उसने फिर से अपनी चूत रगड़ना चालू किया. बिच बिच में वो मुझे अपनी गिली उंगलिया दिखा कर परेशान कर रही थी. मै ये सोच कर परेशान था की उसकी उंगलिया कैसे गिली हुई? मेरी परेशानी को और बढाने के लिए उसने अपनी चूत को रगड़ना छोड़ कर स्तन को दोनों हाथों से मसलने लगी. अपने स्तन मसलते समय मदहोशी में उसकी आँखे मूंद जाती थी. मेरे लिए ये सब कंट्रोल से बाहर था. मै अबतक तो पूरा गर्म हो चुका था जैसे मुझे बुखार हो.

मैं बड़े दयनीय आवाज़ में बोला "रीना दीदी मुझसे रहा नहीं जाता. P lease मुझे चूत दिखाओ ना"

मेरे बात की परवाह ना करते हुए उसने धीरे धीरे अपने ब्लाउज के हुक एक के बाद एक खोलना शुरू किया. ब्लाउज खोल कर उसने मेरी और फेंका और उठ कर मेरे पास आई. अब उसके बदन पर मात्र ब्रा और पेटीकोट पहना हुआ था. उसने मेरा चहेरा पकड़ कर अपनी छाती पर रख दिया जैसे वो कह रही हो की मेरे स्तन से तुम जी भर के खेलो पर मात्र होठों से. मैं मुरख उसकी यह मरजी को समज नहीं सका और बिना हिले उसके दो स्तन की गहराइयों में मुश्किल से सांसे ले रहा था. उसने मेरे सर को पीछे से हल्का सा धक्का दिया और उसके स्तन पर मेरे होंठ ओर जोर से दबाये. अब मेरे लिए अपने आप को रोकना मुश्किल था. मैं रीना के स्तन की गहराई को अपने होठों से चूमने लगा. रीना को अपनी बाहों में भर कर उसके स्तन पर जहाँ जगह मिली वहां चूमने लगा. मैं पागलकी तरह उसके नाजुक स्तन को कभी मुह में खींचता था तो कभी जोर से चुमता था. धीरे धीरे उसके स्तन को होठों से खिंच कर ब्रा से बहार निकाल रहा था पर उसमे काफी देर लग रही थी. मैंने हाथोंसे उसकी ब्रा में से स्तन को निकालना चाहा पर उसने मुझे रोक दिया. वो चाहती थी की मैं जो कुछ भी करू अपने होठो से ही करू. मैंने फिर से उसके कोमल स्तन को अपने मुंहमें दबोचा और स्तन को ब्रा में से खींचा. उसकी निप्पल का कुछ भाग देखने को मिला पर वापस उसकी ब्रा के अन्दर चला गया. वो मेरे इस खेल का मझा ले रही थी और देख रही थी के मैं क्या करता हु. मैंने उसके स्तन को अपने मुह से खिंच कर निकाल ने की बहोत कोशीश की पर नाकाम रहा. आखिर में मैंने दूसरा रास्ता चुना. मैंने मेरे सर को थोडा ऊपर उठा कर उसके कंधे तक ले गया और उसकी ब्रा की पट्टी को मुह से पकड़ कर उतार दी. पट्टी उतारते ही उसकी ब्रा उसके स्तन पर से छुट गयी और स्तन खुल गए. उसके नंगे स्तन का रूप देख कर मै हैरान हो गया. एकदम ताज़ा खिले गुलाब के फुल जैसा उसके निप्पल का रंग था जो उसके दूध जैसे सफ़ेद और मख्खन जैसे मुलायम स्तनकी सुन्दरता को और भी खुबसूरत बना रहा था. मैंने उतनी ही कोमलता से उसकी निप्पल को चूमा. चुमते ही रीना मेरी बाहों में मचल उठी. धीरे से उसकी निप्पल को मुंह में लिया और आहिस्ता-आहिस्ता उसके पुरे स्तनको निगलने लगा. रीना अपने आपे से बहार थी. वो मुझे अपने स्तन को चूमने के लिए और भी उकसा रही थी. उसके दोनों स्तन को जी भर कर चूमा और काटा भी. स्तन पर जगह जगह जोर से चूसने से उसका लहू उभर आया था तो कही पर दांत के निशान पड गए थे. अब उसने अपनी ब्रा निकाल फेंकी और मुझे उसकी नंगी पीठ का कुछ देर आनंद लेने दिया और फिर से अपने आप को छुड़ा कर जैसे ही वो किचन में जा रही थी की मैंने उसको पीछे से पकड़ किया. उसके दोनों स्तन को दबोच कर बोला "मैं तुम्हे अब नहीं जाने दूंगा".

उसने कहा "छोड़ दो वरना मैं तुम्हे वो नहीं दिखाउंगी. और तुम अपनी जगह से क्यों उठे? मैंने मना किया था ना?."

उसने अपने आप को छुडाने की कोशीश की पर मैंने उसके स्तन छोड़कर उसका पेटीकोट पकड़ा और ऊपर उठाया. जैसे ही घुटनों से थोडा ऊपर आया उसने अपने दोनों पैर जकड दिए और पेटीकोट को पैरों के बिच दबा दिया.

मैं लगभग रोने जैसा हो गया और चिल्लया “तुम क्यूँ मुझे परेशान कर रही हो? दिखाओना...”

उसने मुझे जोर से धक्का दिया. मेरे हाथ से उसका पेटीकोट छुट गया और मैं जा कर थोड़े दूर गिर पड़ा. वो चिल्लाई "एक कदम भी आगे बढाया तो मैं तुम्हारे साथ बात नहीं करुँगी..चुप चाप बैठे रहो...”

उसका गुस्सा देख कर मैं चुप चाप बैठ गया और वो किचनमें चली गयी.

थोडा और काम निपटाकर वो वापस आई. मेरा लंड तो वैसे भी कब से खड़ा हुआ था. आते ही उसने मेरे सब कपडे उतार दिए और मुझे पूरा नंगा कर दिया. वो आ कर मेरे आगे घुटनों पर बैठ गयी. अपने हाथों से मेरे खड़े लंड को पकड़ कर तुरंत अपने मुंह में डाल दिया और बड़ी अधीरता से चूसने लगी. हाला की मेरा लंड सुजन के समय जितना लम्बा होता है उतना लम्बा नहीं था पर जब रीना उसे पूरा का पूरा निगल जाती थी तो लंड जा कर उसके गले में अटकता था. उसके कोमल होंठ का अहेसास कुछ अलग ही आनंद दे था जो आर्टिफीसियल चूत से नहीं मिल रहा था. वो ऐसे लंड को चूम रही थी जैसे बरसों बाद उसे अपनी खोयी हुयी चीज मिली हो. वो लंड को खूब मज़े लेकर चूस रही थी और अपने मुंह में अन्दर-बाहर कर रही थी. मेरे आनंद की सीमा धीरे धीरे बढ़ रही थी और रीना लंड को चारों और से चूस रही थी. तभी अचानक मेरे पुरे बदन में एक लहर दौड़ गयी. मैंने रीना का चहेरा पकड़ का लंड को पूरा मुह में डाल दिया. रीना ने भी मुंह खोल कर लंड के लिए जगह कर दी. मैं जब शांत हुआ तब मेरा लंड मुंह में से निकाल कर अपने मुंह में छूटे हुए मेरे स्पर्म को दिखाया.

मैं बोला "रीना दीदी, बहोत मज़ा आया. और ये क्या है?”

रीना ने स्पर्म को हाथ में लिया और बोली "ये तुम्हारे स्पर्म है"

मै बोला "पर ये क्या होता है?”

रीना बोली "वो जो तुम्हे एकदम मज़ा आया ना? तब तुम्हारे लंड में से ये निकलता है? और ये अगर लड़की की चूत मैं जाए तो वो प्रेग्नेंट हो जाती है.”

मै स्पर्म को देख कर हैरान था. तभी वो उठी और अपने स्पर्म वाले हाथ धो कर वापस आई.

मैं रीना के नंगे स्तन की और देख कर बोला "दीदी तुम बहोर सुन्दर दिखती हो. तुम्हारे स्तन बहोत अच्छे है.”

रीना धीरे से मुस्कुराई और पास आकर अपने होंठ मेरे होंठ पर रख दिए. मैंने उसे अपनी बाहों में लिया और उसके होठों का रस पिने लगा. हम एक दुसरे के आलिंगन में थे तभी मैं मेरा हाथ रीना की चूत की और ले गया और पेटीकोट के ऊपर से ही उसकी चूत के ऊपर रख दिया. हाथ रखते ही रीना ने अपने पैर मेरे हाथों के आस पास कस दिए. मेरे लिए हाथ निकालना भी मुश्किल था और हाथ हिलाना भी. मैं फिर से उसके रसीले होंठ चूमने में लीन हो गया. कुछ देर बाद उसके अपने पैर की पकड़ ढीली की. मैं धीरे धीरे उसका पेटीकोट उठाने लगा. रीना ने कोई एतराज़ नहीं जताया पर मुझे उसका पेटीकोट उठाने में दिक्कत हो रही थी. रीना मेरी बाहों में से उठी और मेरे सामने खडी हो गयी. उसने पेटीकोट का नाडा खोल कर उसे पकड़ कर खड़ी रह गयी और मेरे सामने देखने लगी. मेरे आँखे उसकी चूत देखने के लिए तरस रही थी वहा रीना पेटीकोट छोड़ नहीं रहीथी. मैं रूक नहीं पाया और झट से उसके हाथों से पेटीकोट छुडाकर निचे गिरा दिया. मेरी आँखे और मुह खुला का खुला ही रह गया. जिस पल का मैं बेसब्रीसे इंतज़ार कर रहा था वो मेरे सामने था. मै रीना की चूत देखने के लिए उसके करीब गया तो वो उठ कर सामने के सोफे पर बैठ गयी और अपने पैर फिर से कस दिए. मैं उसके करीब गया और अपने हाथों से उसके पैर को धीरे धीरे फैलाया. जैसे जैसे उसके पैर खुले वैसे वैसे उसकी चूतकी दरार साफ़ दिखने लगी. जब तक मैंने उसके पैर फैलाये मेरी आँखे एक पल के लिए भी उसकी चूत पर से हट नहीं रही थी. छोटे छोटे बालों के बिच एक छोटीसी पतली सी गुलाबी दरार. मैं आश्चर्य से उसकी चूत को और उसकी गोरी जांघो को देख रहा था और जो दिख रहा था उस पर विस्वास नहीं हो रहा था. मैंने अपने हाथ रीना की चूत पर रखा और धीरे धीरे चूत को रगड़ने लगा. उसकी चूत की कोमलता को अपने हाथ से महेसुस करने लगा. चूतको रगड़तेही उसमे से चिकनेपन की आवाज़ सुनाई दी. जैसे ही मैंने चूत के होंठो को फैलाया तो उसमेसे कुछ चिकनासा रस निकल कर बाहर आया.

मैंने रीना को पूछा "ये क्या है?”

रीना बोली "ये चूत का जैल है"

मैं बोला "यहाँ कैसे आया?”

वो अधीर हो कर बोली "ये हर लड़की की चूत में से निकलता है ताकि लंड आसानी से अन्दर चला जाये"

मैंने आश्चर्य से पूछा "पर इतने छोटे काने में लंड कैसे जा सकता है?”

अब रीना की धीरज का अंत आ गया. उसने थोडा जोर से बोला "अरे तुमको क्यों चिंता हो रही है? तुम अपना लंड मेरी चूत में डाल कर देखो ना?”

मैं मेरा लंड उसकी चूत के करीब ले गया और जैसे हे चूत के ऊपर रखा रीना ने अपने पैर फैला दिए और लंड के अन्दर घुसने का इंतझार करने लगी. और क्यों न हो? अभी अभी तो उसकी शादी हुई थी और अभी अभी उसने लंड का स्वाद चखा था. एक हफ्ते के हनीमून से क्या होता है उसमे तो प्यास भड़कती है. और एक महिना इस चुदाई की आग के साथ काटना कैसे संभव है? जब रीनाने यहाँ आकर देखा की मेरा लंड सूज कर लम्बा और मोटा हो जाता है तो उसकी चूत में पानी टपक पड़ा. एक तो चुदाई की तड़प और ऊपरसे लम्बा तगड़ा लंड. तभी रीना ने सोच लिया था की चुदाईकी आग बुझानेके लिए वो यही तगडा लंड लेगी. अब ये सुनहरा अवसर मिला है. लंड का सूपड़ा रीना की चूतकी दहेलीको चूम रहा है. चूत यही इंतजारमें अपना मुह खोले बैठी है की अभी लंड आएगा अभी मुझे पूरी तरह भर देगा.

तभी मेरे मन में फिर से वही सवाल आया "पर मेरा लंड तुम्हारी चूत में कैसे जाएगा?”

अब रीनाके लिए ये सब बर्दाश से बाहर था. उसने झट से मुझे कमर से खिंचा और पूरा लंड अपनी चूतमें ले लिया. जैसे ही लंड पूरा अन्दर चला गया तब उसके चहरे पे एक संतुष्टि का भाव छा गया. कुछ समय वो मेरा लंड अपने चूत में लिए ऐसे ही पड़ी रही. थोड़ी देर बाद बोली "देख ऐसे जाता है... अब रुकना मत....और कोई सवाल मत पूछना....”

मैंने रीना को अपनी बाँहों में लिया और उसके होठों के रस को चुमते हुए उसकी चुदाई शुरू की. एक के बाद एक उसका झडना शुरू हुआ. जैसे जैसे वो झड़ती थी वैसे मेरे लंड पर उसकी चूत की पकड़ मजबूत होती जा रही थी. अंत में मेरा झड़ने का समय आ गया. अब मेरा लंड रीना की चूत की गहराईयों को नाप रहा था. तभी थोड़ीही देर में स्पर्म की पिचकारी छूटी और रीना की चूत को भर गयी. रीना की चुदाई करना और उसकी चूत में झाडना एक परम आनंद की अनुभूति थी जो अर्तिफ़िसिअल चूत में कभी नहीं मिली.

हम काफी देर एक दुसरे की बांहों में पड़े रहे और कब नींद आ गयी पता ही नहीं चला. शाम को जब उठे तो रीना ने फिर से चुदाई की मांग की. एक और बार जम कर चुदाई के बाद अब रीना कुछ शांत लगती थी पर वो ये तिन दिनका भरपूर उपयोग करना चाहती थी.

 


मैं तो कोई स्वप्न की दुनियामें ही था. मेरे लिए ये जो हो रहा था वो कल्पना के बाहर था. पहेले जब कभी रीना हमारे घर आती थी तो अक्सर मैं उसे देखता रहेता था पर कभी ये नहीं सोचा था की मैं वही सुन्दर लड़की के कभी इतना करीब भी जा सकूँगा. और करीब क्या जाना? मैं तो उस सुन्दर नयी नवेली दुल्हन के अंदर काफी गहराइयों में जा चूका था. कुछ दिनों के बाद तो वो UK चली जाएगी. ऐसा मौका फिर कभी नहीं मिलेगा वो मैं अच्छी तरह से जानता था. रीना फिर कब मेरी जिंदगी में वापस आएगी वो नहीं जानता था. रीना तो ठीक पर ऐसी सुंदर अप्सरा जैसी लड़की की कभी चुदाई करने को मिलेगी भी या नहीं. रीनाके अलावा मेरे दिमाग मैं कोई ख़याल नहीं आ रहा था. मुझे फिरसे रीना की चुदाई करने का मन हो रहा था.

रीना किचन में खाना बना रही थी. उसकी सुहागन की चूड़ियों की खनक और पायल की झनकार मुझे और भी मदहोश कर रही थी. मैं उसके करीब गया और सोचता था की कैसे बात करूँ? कैसे कहूँ की मुझे अभी तुम्हारी चुदाई करने का मन कर रहा है. इतने में रीना ने सामनेसे ही बात शुरू की. “कैसा लगा?”

मैंने कहा "बहोत मज़ा आया. इतना मझा आया की मैं बयां नहीं कर सकता. तुम बहोत सुन्दर हो. I love you. ”.

रीना ने मेरे होंठो को प्यार से चूम कर कहा “Thanks, मुझे भी बहोत मज़ा आया. काफी दिनों के बाद ये करने का मौका मिला. और तुम चुदाई भी बहोत अच्छी करते हो. चुदाई करना तुमने कहाँ से सिखा?”

मैं बोला "ये तुमसे ही तो सिखा है"

रीना बोली "चल जूठे, मैंने तुझे कब सिखाया?”

मैं बोला "तुम इतनी सेक्सी हो की सब अपने आपही हो रहा था. मै तो केवल इतना ख्याल रखता था की कहीं मेरे स्पर्म न निकल जाये नहीतो तुम्हारी चुदाई अधूरी रह जायेगी."

रीना यह सुन कर फिर से गर्म होने लागी थी. फिर से मेरे होठों को चूमते हुए बोली "शैतान कहींका, तुम्हे मालूम है तुम्हारी ये हरकत की वजह से मैं कितनी बार झड गयी?... और तुम थे की झड ने का नाम ही नहीं लेते थे!!!”

मेरे होंठ चुमते हुए वो फिर से मदहोश होती जा रही थी और मुझे अपनी बाँहों में लेकर मदहोशी में ही कहा "मै भी यही चाहती थी की तुम कभी ना रुको और बस यूँही मेरी चुदाई करते रहो.. करते रहो...”

और रीना ने मेरे होंठ काट लिए. उसने फिर से भूखी शेरनी जैसा रूप बना लिया था. उसने सब्जी का गैस बंध कर दिया और मुझे धक्का देकर फर्श पर गिरा दिया. मेरे गिरते ही वो मुझ पर टूट पड़ी. मेरे पुरे चहरे पर उसने चुम्बनों की वर्षा कर दी. मुझे चुमते हुए ही उसने मेरे सब कपडे उतार दिए और तुरंत ही मेरे खड़े हुए लंड पर लपक गयी. उसे मुंह में लेकर खूब जोर से चूसने लगी. मेरे पूरे लंड को निगलना उसे बहोत पसंद था. वो मेरे लंड को पूरा निगल कर चूस रही थी.

तभी उसके मोबाइल की रिंग बजी. पर वो कहाँ सुननेवाली थी? काफी देर रिंग बजने के बाद उसके रंग मैं भंग पड़ा और बड़े गुस्सेसे फ़ोन उठाया. देखा तो उसके हसबंड का ही फोन था. एक क्षण के लिए तो वो अपनी धड़कन चुक गयी पर अपने आप को संभाल कर उसने अपने मुंह पर उंगली रख कर इशारे से मुझे चुप रहने को बोला.

मैंने भी इशारे पूछा "कौन है?”

उसने फिरसे इशारेमे कहा उसके हसबंड है. यह जान कर मै भी थोडा डर गया. मुझे डरा हुआ देखकर उसने मुझे इशारे से शांत रहने को कहा. मैं वैसे ही फर्श पर लेटा रहा और रीना मेरे लंड को अपने हाथ में लिए अपने हसबंड के साथ फोन पर बात करना शुरू किया. हाय-हेल्लो करने के बाद रीनाने रोमेंटिक बाते शुरू की. रीना ने बताया की वो उसको कितना मिस कर रही है और कितना तड़प रही है. यह कह कर रीना ने मेरे लंड फिर से अपने मुंह में डाला और चूसने लगी और मोबाइल को करीब ला कर उसके हसबंड को भी लंड चुसाई की आवाज़ सूना रही थी. हसबंड के पूछने पर बताया की "तुम्हारी याद में मै डिल्डो से काम चला रही हूँ और अभी उसे ही चूस रही हूँ" यह सुनकर उसका हसबंड भी मूड में आ गया और सेक्स की बातें करने लगा. उसने भी अपना पेंट निकाल कर अपना लंड हाथ में लिया और रीना को बोला "जोर से चुसो... और जोर से चुसो...."

रीना भी यही चाहती थी. वो मेरे लंड को जोर से चूसने लगी. देर तक लंड चूसने के बाद रीना से रहा नहीं गया. उसने एक के बाद एक अपने सब कपडे उतार फैंके और मेरे सामने अपने पैर फैलाकर लेट गई. एक तरफ उसने अपने हसबंड को फोन पर कहा की उसकी चूत चाटें और दूसरी और रीना ने मेरा सर पकड़ कर मेरे होंठ उसकी चूत पर कस दिए. जब मैं रीना की चूत चुस रहा था तब रीना के मुह से निकलती हुई मदहोशी की आंहे उसका हसबंड सुन रहा था. मैं रीना की चूत और उसकी मख्खन जैसी जांघे सब कुछ चाट रहा था तभी रीना ने अपने दुसरे हाथ की उँगलियों से चूत को खोल कर चौड़ा किया और बोली "मेरी चूत चाटो ना..."

मुझे इशारे से उसकी चूतके अन्दर चूसने को कहा. रीना का हसबंड भी फोन पर यह कल्पना कर रहा था की वो रीना की चूत चाट रहा है पर उसे क्या मालुम था की वास्तव में उसकी बीवी किसी और के आगे अपनी चूत खोल कर लेटी है और कोई और उसकी चूत में जीभ रगड़ रहा है.

काफी देर रीना की चूत चाटने के बाद रीना अचानक उछल पड़ी और उसके मुंह से जोर से आह निकल गयी. रीना का हसबंड समज गया की रीना झड गयी थी. और ये जान कर वो भी बड़ा उत्तेजित हो चूका था. उसने रीना को कहा की अब वो डिल्डो अपनी चूत मैं डाले. रीना अभी तक हांफ रही थी. उसने अपने हसबंड को थोड़ी देर रुकने को कहा. पर मैं बड़ा अधीर था. मैंने रीना की परवाह किये बिना उसके दोनों पैर फैलाकर उसके ऊपर चढ़ गया और लंड को उसकी चूत की गहराइयों में गाड़ दिया. रीना अभी अभी झड़ी थी इसलिए उसकी चूत काफी तंग थी. उसको बांहों में लेकर मैं आहिस्ता आहिस्ता उसकी चुदाई कर रहा था. कुछ देर बाद रीना वापस चुदाई के लिए तैयार हो गयी और कहने लगी "मुझ से और रहा नहीं जाता... मेरी चुदाई करो ना....".

दूसरी ओर उसका हसबंड यह सुन कर और भी उत्तेजित हो रहा था और कल्पनामें ही रीना की चुदाई कर रहा था. दूसरी और मैं एक ही लय से रीना की चुदाई कर रहा था और उसका हसबंड फोन पर रीना की आहें सुन कर आनंद ले रहा था. मन ही मन मैं रीना की चतुराई को दाद दे रहा था की उसने क्या दिमाग लगाया था. एक तरफ उसके हसबंड से बात भी कर रही थी ताकि उसे बुरा ना लगे और कोई शक न हो और दूसरी ओर वो अपनी चूत की आग बुझा रही थी.

पर रीना को यह नहीं पता था की इस बार चूत की आग बुझाने में स्वर्ग का आनंद मिलेगा. मैं एक लय से रीना की चूत की गहराईयोंमे मेरा लंड डाल रहा था. उस दरम्यान रीना को चूत के अन्दर कुछ अजीब सा महेसुस हो ने लगा. धीरे-धीरे उसकी आँखे मदहोशी से मूंद गयी और बेकाबू हो कर मेरी बाहों में मचलने लगी. कुछ देर बाद तो उसके हाथों से मोबाइल गिर गया और उसके दोनों हाथों से मुझे जोर से जकड लिया. उसने अपने पुरे होश खो दिए थे. रीना को ऐसी उत्तेजित पहले नहीं देखा था. मैं भी थोडा डर गया. उसने दोनों पैर मेरी कमर पर कस दिए और उछल उछल कर मेरा लंड अपनी चूतमें और अन्दर तक लेने के लिए बेताब होने लगी. करीब आधे घंटे की जम कर चुदाई के बाद रीना झड झड के थक चुकी थी पर मेरा झडने का नाम नहीं था. रीना के चहेरे पे गहरा संतोष छा गया था. रीना ने मुझे रोका और मुझे गले लगा कर बोली "बस अब और नहीं...मैं पूरी तरह से संतुष्ट हु. आज मुझे एसा सुख मिला है जैसे मैं कभी भूल नहीं पाउंगी. तुमने मुझे आज स्वर्गका सुख दे कर पूरी तरह से तृप्त किया है. आज मेरी सब इच्छाए पूरी हुई है और इसके लिए तुम्हे बहोत बहोत Thanks”

रीना के हसबंड को लगा की रीना उसे ये सब कह रही है तो वो मन हे मन खुश हो रहा था. रीना ने फटा फट फोन पर बात ख़तम करके फोन रख दिया. मेरा लंड अभी भी रीना की चूत मैं पड़ा था. रीना आगे बोली "मुझे पता है की तुम अभी तक झडे नहीं हो पर मैं तुम्हारे स्पर्म अपने हाथों से निकाल कर दूंगी.”

रीना की बातों को मानते हुए मैंने मेरा लंड रीना की चूतमें से बाहर निकाला. निकालते ही रीना की आँखे खुल गयी. मेरा लंड सूजा हुआ था. रीना को अब सब कुछ समज मैं आ रहा था की उसे स्वर्गका आनंद कैसे मिला था. मेरा तगडा लंड देख कर रीना को अपनी चूत की चिंता हुई उसने अपनी चूत की और देखा तो वो फट चुकी थी और फटने की वजह से थोडा ब्लीडिंग भी हुआ था. चूत का काना पूरा खुल गया था. पर अब मेरे लंड की सुजन का क्या करे? तब रीना ने एल पल की भी देर न करते हुए मेरा लंड वापस अपनी चूत मैं समा लिया.

उस रात डिनर के बाद रीना किचन में सब ठीक कर रही थी तभी मैंने चुपके से उसके पीछे जा कर उसकी पतली कमर में हाथ डाल कर उसे बाँहों में समा लिया.

“उ...उ...म.......रात को....” बोल कर रीना मेरी बाँहों में से छुट कर फटाफट किचन का काम निपटाने लगी.

मैंने कहा "तुम इतनी सुन्दर हो की मुझ से रहा नहीं जाता. चल ना...थोड़ी देर.....”

वो बोली "अब पांच-दस मिनिट रुक ना... काम ख़तम करके फिर बेड पर आराम से करते है ना. ....फिर पूरी रात चुदाई करना.... मैं मना नहीं करुँगी...”

“पर अभी एक बार डालने दो ना..." मैंने जिद की.

मेरी जिद के आगे वो हार कर बोली "ठीक है... पर एक ही बार.....ज्यादा नहीं...."

मैं खुश हो गया और जल्दी से मेरी चड्डी उतार दी. मेरा लंड तन कर रीना की और खड़ा था. रीना अभी उसकी पेंटी निकाल रही थी. मैं उतावला हो रहा था. रीना ने अपनी साड़ी उठा दी और प्लेटफोर्म पर अपने पैर फैला कर बैठ गई. मै तो तैयार ही था. तुरंत पास जा कर लंड को उसकी चूत में डाल दिया.

“ओ.....माँ....” लंड को अपनी चूत मैं महसूस करते ही रीना के मुंह से आह निकल गई. मैंने उसकी चुदाई शुरू ही की थी की उसने मुझे रोक लिया. “बस अभी इतना ही...बाकी का रात को.....”

“कुछ देर और please” मैंने बिनती की पर उसने एक नहीं सुनी. आखिर मै मैंने उसकी चूत में से निकाल लिया.

मुझे निराश होते देख वो बोली "तुम बेडरूम में जाओ मैं बस अभी आई...”

नाराजगी जताने के लिए मैंने उसके स्तन को पकड़ कर जोर से काट लिया और रीना मुझे पकड़ पाए उससे पहले में बेडरूम की और भाग ने लगा. उसने मुझे मार ने के लिए पास में पड़ा बेलन लिया पर तब तक तो मैं दूर जा चुका था.

“तू भाग कर कहाँ जाएगा.. तू रुक मैं अभी आई...और तुझे कुछ करने नहीं दूंगी.....” रीना झूठ मुठ का गुस्सा दिखाकर एक हाथ में अपने दुःखते हुए स्तन को पकड़ कर बोली.

मैं बेडरूम मैं जा कर रीना का इंतझार करने लगा. मुझे काफी थकान महेसुस हो रही थी और कुछ ही देर मैं मेरी कब आँख लग गयी पता ही नहीं चला.

सुबह उठकर देखा तो ग्याराह बजे थे. मैं फटाफट उठा और देखा तो रीना भी अभी तक सोयी हुई थी. सुबह सुबह में अगर बाजू में बिखरी हुई जुल्फ़े और अस्तव्यस्त कपड़ों में रसीले होंठ वाली अप्सरा सोई हुई हो तो लंड कैसे सोता रहेगा? पर उसे जगाने का मन नहीं करता था. बस ऐसे ही उसे जी भर कर देखता रहूँ. उसकी सुन्दरताको आँखों में समालू. उसकी आँखे, होंठ, गोरे गाल, कोमल उंगलिया, छत की और ताकते हुए स्तन और उसके ऊपर मेरे काटने का निशान, नाजुक कमर, मलाई जैसी जांघ. साडी को चुपके से थोडा और उठाया तो मेरी प्यारी चूत. सब कुछ मैं जी भर के करीब से देख रहा था. उसकी खुशबु को सांसो मैं भर रहा था. मैं मेरे होंठ उसकी चूत के करीब ले गया और धीरे से उसके पैर फैलाये ताकि मैं उसके पैरो के बिच लेटकर चूत को करीब से देख सकू. जैसे ही उसकी चूत के करीब गया तो चूत की खुशबु से मैं होश खो बैठा. मैं इतना करीब था की मेरी सांसे उसकी चूत को छु रही थी. गहरी सांसो में मैं उसकी सुगंध कैद करना चाहता था. अपने दोनों हाथों की उंगलिओं से बड़ी सावधानी से उसकी चूत को थोडा चौड़ा किया ताकि उसकी अन्दरकी सुंदरता भी मन मैं समा लू. अभी तो उसकी चूत को पूरा खोला भी नहीं था पर लग रहा था की मैं गुलाब की कली को खोल रहा हूँ. चूतके अन्दर जैसे तजा गुलाब की दो पंखडीयां आपस मैं चिपकी हुई है. वो इतनी कोमल थी की उसे छुने की मेरी हिम्मत नहीं हो रही थी. मैं मेरे होंठ उसकी चूत के करीब ले गया और जीभकी मदद से उसकी दोनों पंखडियों को अलग किया. अलग करते ही उसकी चूत में बचे मेरे स्पर्म सरक कर चद्दर पर गिरे. मेरे होंठ उसकी चूत को छूते नहीं थे पर इतने करीब थे की चूत की गरमी महेसुस हो रही थी. उसकी चूत के हरएक गुसबम्प की तस्वीर मैं मेरी नजरों में कैद कर रहा था. मेरे होंठ ज्यादा देर तक रुक न सके और हार कर उसकी चूत पंखडियों को थोडा और फैला कर उसमे चिपक गए. मेरे ठन्डे होंठ उसकी चूत मैं छूते ही रीना जाग गयी. उसकी चूत मैं मेरे होंठ गड़े हुए देख अपनी चूत को मेरे होठों से दूर कर के वो झट से बेड पर बैठ गयी और बोली “इतनी सुबह हो गयी है और तुमने मुझे जगाया क्यों नहीं?.

मै बोला "क्यों जगाऊ? फिर तुम घर के काम में लग जाओगी और मैं तेरी राह देखता रहूँगा..”

वो तुरंत बहार भागी और भागते हुए बोली "बहार दूधवाले ने दूध रखा होगा... अगर तुरंत लिया नहीं तो बिल्ली के हाथ लग सकता है.”

दूध लेकर वापस वो अपने काम मैं लग गयी.

मैं बोला "वापस काम? चलो न थोड़ी देर करते हैं"

वो बोली "फिर रात को क्यों सो गए? पूरी रात पड़ी थी हमारे पास.... मै आई तो तुम गहरी नींद में सोये पड़े थे.”

मै बोला “तो जगाया क्यों नहीं?”

वो बोली “एक बार तुम्हे हिलाया था पर तुम इतनी गहरी नींद में थे की उठने का नाम ही नहीं लेते थे.... फिर मैं भी तो थक गयी थी और चूतको भी आराम देना था ताकि वो सिल जाए. ”

कुछ देर रुक कर बोली "दोपहर को करते है... तब तक मैं सब काम फटाफट निपटा लेती हूँ... ठीक है?”

मुझे समझाकर फिर से वो अपने काम मैं जुट गयी.

करीब दोपहर को तिन बजे थे हमने खाना का लिया था और रीनाने सब काम निपटा लिया था. वो थोड़ी थक गयी थी और ड्राइंगरूम में आ कर अपने आप को सोफे पर झोंक दिया. अभी कुछ ही देर हुई थी की मेरे लंड की सुजन शुरू होने लगी. मै एक ओर रीना की ओर देख रहा था तो दूसरी ओर मेरे लंड को बड़ा होते देख रहा था. मैंने रीना को आवाझ दी "रीना... देखो...”

रीना ने आँख उठा कर देखा तो मेरा तगड़ा लंड उसकी चूत के इंतझार मैं तन कर खड़ा था. थकान होते हुए भी उसने तुरंत उठ कर अपनी साड़ी खिंच कर निकाल फेंकी. अपने पेटीकोट को उठा कर अपनी पेंटी उतार ली और मैं जहाँ बैठा था वो सोफे पर चढ़ गयी. अपने दोनो पैर सोफे के दोनों बाजू रख कर खड़ी हो गई. नीचे देख कर उसने मेरे लंड की ऊंचाई नाप ली और मेरे कंधे का सहारा लेकर अपने चुतड को निचे लाई. जैसे ही उसकी चूत मेरे सुपडे के बराबर ऊपर आई तो एक हाथ की पहेली दो उँगलियों से उसने अपनी चूत खोली. जितनी हो सके उतनी चूत को चौड़ी करके उसने

सुपडे के ऊपर रख दिया और धीरे से सुपडे को चूत मैं समा लिया. सुपड़ेको निगलने के बाद उसकी आँख मूंद गयी और मुंह से "आ....आ......आ.......आ....ह..." निकल गयी. वो कुछ क्षण रुकी और धीरे धीरे बड़ी सावधानी से वो मेरे लंड पर बैठ गयी. उसकी चूत ने मेरा पूरा लंड समा लिया था जैसे अजगर अपने शिकार को निगलता हो. इतना लम्बा और तगड़ा लंड उसकी छोटीसी चुतमे कैसे समता होगा. पक्का उसकी नाभिके पार निकल चूका होगा. इस तरफ मेरा पूरा लंड अपनी चूत में समाये रीना मेरे कंधे पर सर रख कर ढल गयी और थकी हुई आवाज़ मैं बोली “अभी कुछ मत करना....कुछ देर मुझे थकान उतारने दो.....”. और वो ऐसे ही पड़ी रही.

करीब दस मिनट बाद डोर बेल बजा. रीना और मैं गभरा गए. अब क्या करे? दरवाजे पर कौन होगा? और अभी दरवाजा कैसे खोले? मेरे लंड को रीना की चूत की सख्त जरुरत थी. लेकीन दरवाजा खोलना जरुरी था. इतने मैं दो-तिन बार बैल बजी. रीना तुरंत सोफे पर खड़ी हो गयी अपनी चूत मैं से मेरे लंड को निकाल दिया और लंड को छुपाने के लिए उसके ऊपर एक तकिया रख दिया. जो भी दरवाजे पर है उसे झटपट विदा करने के इरादे से उसने फटाफट साडी पहन कर दरवाजा खोला. और देखा तो उसकी सहेलियां थी. रीना को देखतेही ख़ुशी के मारे रीना को गले लगा लिया और रीना कुछ कहे उससे पहले सब सहेलियां घर के अन्दर चली आई.

“माया, सुषमा, नीला, नूपुर ...... तुम लोग? इतने दिनों के बाद?” रिनाकी आवाज़ मैं ख़ुशी भी थी और डर भी था.

“हाँ... तेरे साथ झगड़ा करने के लिए आये हैं... " सुषमा झूठा गुस्सा दिखाकर बोली

“तुमने छुप-छुप कर शादी कर ली... हमें अपनी शादी मैं बुलाया क्यों नहीं?” माया बिच मैं ही टूट पड़ी.

“और वो तो ठीक.. तुम हमेशा के लिए UK जा रही हो तो हमें मिलने की भी इच्छा नहीं होती है?” सुषमा ने फिरसे रीना को लिया.

रीना अपने आप को सँभालते हुए बोली “पर.. सब इतना जल्दी हो गया की कुछ सोचने का वक्त ही नहीं मिला.. I am sorry.... please माफ़ कर दो... "

रीना को गिडगिडाते हुए देख कर नुपुर से रहा नहीं गया "अरे ये लोग तो तुम्हे वैसे ही चिढ़ा रहे हैं.... हमने कल ही तेरे घर फोन किया था और आंटी ने सब बताया....हमें सब पता है...इसीलिए हमने आज साथ मै बिताने का प्लान किया है.... हम पहले शॉपिंग करेंगे... फिर मूवी देखेंगे और साथ मैं डिनर करेंगे....”

“चलो अब फटाफट तैयार हो जाओ.” सुषमा ने आर्डर किया.

रीना ने चिंता जताई “प्लान तो बहोत अच्छा है... पर काश मैं आ सकती. .. “

“क्यों... क्यूँ नहीं आ सकती... चल अब नाटक बंध कर और तैयार हो जा.....तू मूड ख़राब मत कर....” नीला बोली.

चारो सहेलियों में से नीला के अलावा सब की शादी हो चुकी थी. नीला अभी भी लड़का ढूंढ रही थी. मेरे सामने ये सब लोग कब से बाते कर रहे थे और मैं सूजे हुए लंड को तकिये के निचे छुपा कर बैठा था.... मैंने आवाज़ दी "रीना.....” और उसे इशारा कर के मेरे लंड की याद दिलाई.

रीना सब सहेलियों की बातो मैं मुझे भूल ही गयी थी. अचानक याद आने पर उसने झट से दरवाजा बंध किया और सब को ड्राइंगरूम में बिठाया. सब सहेलियां उसकी और ओर एकदूसरे की ओर आश्चर्य से देख रही थी और सोच रही थी रीना ये क्या कर रही है? अचानक उसे क्या हो गया? इतने में रीना सोफे पर चढ़ गयी. तकिये को लंड पर से हटाया और पेटीकोट ऊपर उठा कर मेरे लंड को उसकी चूत मैं गाड़ दिया... सब सहेलियों को ये देखकर जोर का झटका लगा. उन सब का मुंह और आँखे फटी की फटी रह गई. एक तो इतना तगडा और लम्बा लंड था और रीना ने पलक झपक ते ही अपनी चूत मैं ले लिया और ऊपर बैठ गयी जैसे कुछ हुआ ही न हो!!!. रीना ने मेरे लंड पर बैठे बैठे सब को कहा "इसमे हैरान होने की कोई बात नहीं है... आप सब शांत हो जाओ... मैं सब बताती हूँ....” रीना ने फिर पूरी कहानी सब को बताई. जैसे जैसे उनको मेरे बारे मैं मालुम पड़ा वे लोग अचम्बे मैं पड गए....उनके लिए ये सब पर यकीन करना असंभव था.... पर लम्बा तगड़ा और सुजा हुआ लंड तो उन्होंने अपनी आँखों से देखा था.... तो क्या ये सब सच था?
 
चारो सहेलियों को कुछ समज में नहीं आ रहा था की क्या करे... उन्हों ने एक दुसरे के सामने देखा और फिर कुछ देर बाद सुषमाने रीना को कहा "ठीक है..अगर ऐसा ही है तो हम तुम्हारी राह देखतें है. जैसे ही ये ठीक हो जाय हम शोपिंग के लिए निकालेंगे..”

सब लोग सहमत हो गए. चारो सहेलियां हमारे सामने ही बैठी रही और आपस मैं बातें करने लगी. रीना भी उनके साथ बातों में जुड़ गयी. रीना का मुंह उनकी और था ओर पीठ मेरी और थी. उसक पेटीकोट जांघो के ऊपर तक चढ़ा हुआ था. सामने बैठे हुए को उसकी चूत साफ़ नज़र थी और चूत में घुसा हुआ मेरा लंड. उनकी बातें चालू थी और मैं अपने काम मैं जुट गया. मैंने रीना के अपने एक हाथ से रीना के स्तन को मसलना शुरू किया और दुसरा हाथ उसकी चूत के ऊपर रगड़ ने लगा. रीना को मज़ा आ रहा था और बात करते करते वो बिच में आहें भर लेती थी. चारो सहेलियां भी ये सब देख रही थी. "आह धीरे से दबाओ दुःखता है...” रीना ने मेरा हाथ रोक लिया.

मैंने कहा "रीना ब्लाउज खोलो ना...” और जवाब की परवाह किये बिना मैं उसका ब्लाउज खोलने लगा. रीना ने कोई एतराज नहीं किया....

ये सब देख कर नुपुर बोली "रीना तेरी तो शादी अभी अभी हुई है तो फिर.....?" उसके चहेरे पर सवाल था.

रीना ने कहा "नुपुर, मैं और प्रकाश जब हनीमून पर गए थे तब हमने खूब मजे किये थे. हम ने बेशुमार चुदाई की. मेरे लिए हम वाइन की बोतल मंगवाते थे और प्रकाश के लिए टकीला की. भरपूर नशे मैं हम जन्नत मैं चले जाते थे और फिर जम कर चुदाई. हम ना दिन देखते थे ना रात. हम चौबीसों घंटे नशे में धुत रहते थे और चुदाई के अलावा कोई काम नहीं था. और हनीमून के बाद तो प्रकाश वापस UK चला जायेगा इसीलिए हम कोई पल गंवाना नहीं चाहते थे और जब तक पूरी तरह से थक कर चूर नहीं हो जाते हमारी चुदाई चलती थी. कई बार तो मैं इतनी थक जाती थी की मैं कब सो जाती थी मुझे पता ही नहीं रहता था. पर प्रकाश ने तो एक बार चुदाई शुरू की तो ख़तम करके ही छोड़ता था. काफी बार तो उसने मुझे नींद मैं ही चोदा था. तिन दिन तक तो हम हमारे रूम मैं से बाहर नहीं निकले थे. जो भी मंगवाना था वो रूम सर्विस से मंगवा लेते थे. उन तिन दिन मे तो मेरी चूत काफी खुल गयी थी. प्रकाश जब उसका लंड डालता था तो बड़ी आसानी से अन्दर घुस जाता था. और कुछ देर बाद तो पता भी नहीं चलता था की उसका लंड मेरी चूत मैं है भी या नहीं. चौथी रात फिर से मन भर कर चुदाई की और हम दोनों थक कर बेड पर बिखर गए. थकान के मारे किसीकी हिलने की भी ताकत नहीं थी. प्रकाश तो दूसरी ही क्षण मे गहरी नींदमे खो गया. मैं भी तुरंत सो गयी थी. ”

रीना की बात सब लोग बड़े ध्यान से सुन रहे थे. रीना ने थोडा सांस लेकर आगे कहा "देर रात को वापस उसने मेरे पैर फैलाये. मैं नशे में चूर और आधी नींद मै थी और मुजमे हिलने का भी होश नहीं था. मेरी आँख भी नहीं खुल रही थी. नींद मै ही कहा "प्रकाश सोने दो न.. सुबह करेंगे...” पर उसने जैसे कुछ सूना ही नहीं और चूत मै लंड डाल ने लगा. जैसे जैसे वो अन्दर डालता गया मुझे एक अजीब संतोष की अनुभूति होने लगी. एसा लगा जैसे मेरी चूत पूरी भर गयी हो और जैसे मेरा मन इसीके लिए तरस रहा था और उसे मिल गया हो. ठीक वैसा ही मजा मुझे अभी आ रहा है. खैर, जब उसने चुदाई शुरू की तब तो मैं पागल ही हो गयी. मुझे ऐसी संतोष की अनुभूति पहले कभी नहीं हुई थी. ऐसा लगा की जैसे मेरी चूत कंवारी है और मैं पहली बार चुद रही हूँ. उसने दो-तिन धक्के जम कर मारा पर तुरंत झड गया और अपना लंड चूत मैं से निकाल दिया. मेरी प्यास जगा कर के वो खुद झड गया. मेरे पास हिलनेकी भी ताकत नहीं थी की उसको मेरी बाहों मै जकड कर रखु. मैंने बेहोशी मैं ही नाराज हो कर कहा "प्रकाश...करो ना... क्यों छोड़ दिया....". पर उसने मुझे प्यासी ही छोड़ दी.”

रीना ने आगे कहा "दुसरे दिन सुबह मैं नींद मे ही थी और उसने फिर से अपना लंड मेरी चूत मैं डाला. जैसे जैसे उसने अपना लंड मेरी चूत में डाला मेरे पुरे बदन मैं फिर से एक मदहोशी की लहर दौड़ गयी. उसका लंड और अन्दर डालने के लिए मैंने बंध आँख ही उसकी जांघो को दोनों हाथो पकड़ कर अपनी और खिंचा. जैसे ही उसके लंड ने मेरी चूत की गहराइयों को छुआ मुझे एक अजीब सुख की अनुभूति हुई. पर दूसरी ही क्षण मैं हैरान हो गयी की मैंने जिसे छुआ वो प्रकाश नहीं है. मैं तुरंत अपने बेड पर उठ गयी और देखा तो वो होटल के रूम सर्विस वाला करीब २० साल का लड़का था. मेरी सूझ बुझ चली गयी. मैंने प्रकाश को बुलाने के लिए चिल्लाई पर प्रकाश रूम मैं नहीं था. इस तरफ वो लड़का पूरी तरह से डर गया. वो दोनो हाथ जोड़कर माफ़ी माँगने लगा और शांत होने के लिए गिडगिडाने लगा. वो तुरंत मेरे पैरों में पड गया और अपनी गलती के लिए रोने लागा. मैं थोड़ी शांत हुई. वो लड़का सर झुका कर मेरे पैरो में रो रहा था और मैं अभी भी उसके आगे नंगी बैठी थी. मैंने अपना बदन रजाई से ढँक लिया और उसको चले जाने को कहा. उसने अपना पेंट पहना और फिर से हाथ जोड़ कर बिनती करने लागा की मैं उसकी शिकायत न करू और माफ़ कर दू. मैंने फिर से चिल्लाकर उसे रूम से चले जाने को कहा. वो घभराता हुआ धीरे धीरे दरवाजे की और जा रहा था. मैंने उसे रोक कर पूछा की क्या कल देर रात को तुम आये थे? उसने सर झुका कर दोनों हाथ जोड़ कर कहा "जी मैडम". मुझे और एक झटका लगा की क्या कल रात को मैं एक पराये लंड से चुद गयी? मैंने अपने आप को संभालते हुए पूछा "इससे पहले कितनी बार तुमने मेरे साथ ऐसा किया है?” उसने डरते हुए कहा "जी मैडम.. कभी नहीं". मैंने पूछा "तूम ने मेरे साथ ऐसा क्यों किया? उसने वो चुप रहा. मैंने फिर से चिल्लाकर पूछा तो वो घभराता हुआ बोला "जी मैडम, आप बहोत सुन्दर है" उसके मुंह से तारीफ़ सुन कर मन को अच्छा लगा और थोडा गुस्सा ठंडा हुआ. डर के मारे उसकी आवाज़ नहीं निकल रही थी. कुछ देर रुकने के बाद उसने आगे कहा "कल रात का डिनर के बाद जब मैं प्लेट लेने को आया तो आप और साब बेड पर गहरी नींद मैं पड़े थे. आप के कपडे कमर तक चढ़ गए थे. मैं आपको देख कर होश खो बैठा और गलती हो गयी.” वो फिर माफ़ी के लिए गिडगिडाने लगा. मैंने कहा "ठीक है इस बार जाने देती हूँ पर दुबारा ऐसा सोचना भी मत.” वो मुंडी हिला कर चला गया. मेरे पास बदनामी से बचने के लिए और कोई रास्ता नहीं था. अगर प्रकाश को मालुम पड़ता तो शायद वो मुझे कभी माफ़ नहीं करता और शायद मुझे छोड़ भी देता. मैं इसी ख्यालों मैं खोयी हुई थी की प्रकाश आया. मैंने पूछा की वो कहाँ था. तो उसने बताया की वो निचे होटल के रिसेप्शन डेस्क गया था और आस-पास शोपिंग के मार्केट के बारे में इनफार्मेशन ले रहा था. तभी मुझे समजमें आया की जैसे ही प्रकाश रूम मै से निकला होगा तब उस लडके ने मौका पा कर मेरी चुदाई का प्लान बनाया होगा. “

रीना ने आगे कहा "उस दिन मैं अपने आप को काफी कोसती रही. शोपिंग मैं भी मन नहीं लाग रहा था. शोपिंग के बाद दोपहर को हम फिर से रूम पर आये और बस फिर से चुदाई शुरू. पर इस बार बात कुछ अलग थी. प्रकाश का लंड मुझे मेरी चूत मैं महेसुस नहीं हो रहा था. ऐसा लग रहा था की कोई पतली पेन्सिल से मेरी चुदाई हो रही है. मुझे तुरंत उस लडके का खयाल आया. उसका हाथ जोडकर गिडगिडाना और दूसरी और उसके तगड़े लंड का मेरी आँखों के सामने झुलना. कहाँ उसका तगडा लंड और कहाँ ये पेन्सिल. पर ये सब खयालोंका कोई मतलब नहीं था और मुझे मेरी पेन्सिल से ही संतोष मानना था. में सब भूल कर चुदाई में लग गयी. दुसरे दिन शाम को हम निकल ने वाले थे तो जितना समय हमारे पास था उसका पूरा उपयोग करना था. पर जब भी चुदाई के बिच में हम ब्रेक लेते थे तो मुझे उस लडके का ही ख़याल आता था. मैं अनजाने मैं ही उसके लंड की कामना करने लगी थी. मुझे पता नहीं था पर शायद मैं उसके लंड को मेरी चूत मैं महसूस करना चाहती थी. मन को कहीं चाहत थी की एक बार पुरे होशमें मै उसके मोटे लंड का अनुभव करू. ऐसे सब विचार मनकी गहराइयों मैं चल रहे थे. वो लड़का रूम सर्विस के लिए काफी बार रूम मैं आया और गया. मेरा मन मेरे काबू मैं नहीं था. मैं उसका ध्यान आकर्षित करने के लिए कभी मेरे स्तन खुले रख देती थी तो कभी अपने पैर फैला कर चूत को खुला कर देती थी. पर वो नीची मुंडी करके बिना इधर-उधर देखे आता था और चला जाता था. मेरी हर कोशीश नाकाम रहती थी. रात को चुदाई के बाद हमने डिनर किया और डिनर के बाद प्रकाश थकान के मारे तुरंत सो गया. में भी काफी थक गयी थी पर उसके इंतजार में मैं मुश्किल से जग रही थी. थोड़े समय बाद वो प्लेट्स लेने के लिए आया. मैं उसी का इंतजार कर रही थी. क्या पता जिंदगी मैं कभी ऐसा लंड मिले भी या नहीं. जैसे ही वो आया मैंने उसे आकर्षित करने की बहोत कोशीश की. मैं बेड पर नंगी लेटी हुई थी. उसके आते ही मैंने अपने दोनों पैर फैला कर चूत को अपनी उँगलियों से खोला ताकि वो मेरी गुलाबी चूत देख सके. पर वो कोशीश भी नाकाम रही. वो बिलकुल ध्यान नहीं दे रहा था. मेरी इच्छा पर पानी फिर गया. मैं निराश हो कर उसके लंड के खयालों मैं सो गयी. मेरी इच्छा अधूरी रह गयी और हम हनीमून से वापस आये. आने के बाद मैं यहाँ सुमनदीदी के घर आई. जब मुझे नील के लंड की बिमारी के बारे मैं पता चला तो एक तरफ बुरा लगा और एक तरफ खुशी हुई. ऊपरवाले ने मेरी सुन ली. और जब ऊपरवाला देता है तो छप्पर फाड़के देता है. मुझे तिन दिन तक नील का लंड पाने की आज़ादी मिली. मुझे मेरी कल्पना से भी ज्यादा मिला. उस लडके का लंड तगड़ा जरुर था पर नील का लंड तगड़ा और लम्बा है. वो चूत फाड़ कर गहराइयों में ऐसे चला जाता है की में अपने आप को भूल जाती हूँ. अब तू ही बता ऐसे लंड के साथ तुझे फिरसे हनीमून का मौका मिले तो तू क्या करेगी?”

रीना का सवाल सुनते ही एसा लगा की सभी सहेलियां जैसे कोई स्वप्न से जगी हो. माया का सलवार खुल कर उसके पैरों में था. उसके पैंटी उतरकर घुटनों मैं आ चुकी थी. सुषमाने अपना टाईट पेंट उतार कर बाजु मैं रख दिया था और पैंटी पैरों मै गिरी पड़ी थी. नीला जो कंवारी थी उसका स्कर्ट कमर ऊपर तक चढ़ा हुआ था और पैंटी घुटनों में थी. और नुपुर की साडी सोफे पर खुली पड़ी थी और पेटीकोट और पैंटी उसके पैरों में थी. चारों अपने पैर फैला कर अपनी नंगी चूत को हाथों से रगड़ रही थी और उसमे उंगलियाँ डाल रही थी. रीना का सवाल सुनते ही वो सब होश मैं आये और रीना ने तगड़े लंड की ऐसी प्यास लगायी थी की उसे पाने के लिए सब के होंठ और गला सुख गया था.

अगर आप भूखे हैं और आप के सामने स्वादिष्ट खाना पड़ा है और खाने की ख्श्बू से कैसे मुंह में से पानी आता है वैसे ही सब की चूत में पानी आ गया. मेरी नज़रों के सामने चार खुबसूरत रस टपकाती हुई गिली चूतें थी और एक चूत जिसके अन्दर मेरा पूरा लंड गडा हुआ था. चारों चूत मैं से एक कंवारी थी जिसने कभी लंड का स्वाद नहीं चखा था और बाकी तिन चूतों को उनके पति के अलावा किसी और ने नही रगड़ा था. पर सभी चूतें जैसे एकदम सिल की हुई थी. चारों अपने पैर फैलाये हुए बैठी थी. मुझे लगा की पैर फैलने पर उनकी चूतें खुल जायेगी और मैं उनकी गुलाबी पंखडीयां देख सकूँगा पर इन सब की चूत बराबर से टाईट थी जैसे फेविकोल का मजबूत जोड़ हो. पर पानी अपना रास्ता बना ही लेता है और उसे तो चूत मैं से निकलना ही था. सभी अपनी चूतें अपने हाथों से मसल रही थी. जैसेही उनको होश आया तो शर्म के मारे सब अपनी अपनी चूतें पास मैं पड़े तकिये से ढकने लगी. पर नंगी जांघो को कैसे ढकें? मेरे आँखों के सामने चार चार गोरी चट्टी जांघे सिकुड़कर बंध हो गयी. रीना ने अपनी चुदाई रोककर कहा "रिलेक्स फ्रेंड्स.. इतना भी क्या शर्माना...”

माया बोली "शर्म तो आएगी ही ना? किसी के सामने मैं ऐसे नंगी नहीं हुई...”

सुषमा ने मजाक किया "अपने पति के सामने भी नहीं?”

नीला बोली "उसको तो अपनी चूत मै ही रखती है...”

माया शर्म के मारे गुस्से से बोली "हाँ तो चूत मैं ही रखूंगी न? तुम्हारे पतियों की तरह उनकी जॉब नहीं है. महीनोभर ट्रावेल पर मुझसे दूर रहते हैं. वापस आते हैं तो पता नहीं कब वापस जाना पड़े? फिर? ऐसे मैं तू क्या करेगी?”

नुपुर भी मजाक के मुड़ में बोली "तेरा पति tour पर जाता है इसमे नीला क्या करेगी? उसे तो कभी लंड लिया ही नहीं है तो उससे दूरी मैं कैसी तकलीफ होती है वो ये बेचारी क्या जाने?

माया बोली "मौका भी है नीला. आज हो ही जाए."

नीला बोली "चल साली मैं तेरे जैसी चुदक्कड नहीं हूँ. मैं तो मेरे पति से ही अपना सिल तुड़वाउंगी.”

माया बोली "तेरे लिए तो वोही ठीक रहेगा तू ये लंड ले भी नहीं सकती"

नीला बोली "तू ले सकती है तो जा न.. ले ले..”

नुपुर बिच मैं पड़ी "अरे ये तुम लोग नील के सामने क्या बोल रही हो? और अपने कपडे तो पहन लो"

सब को फिर से अहेसास हुआ की वे अभी भी नंगी है. सब उठकर अपने कपडे पहनने लगे.

रीना ने फिर से चुदाई से ब्रेक लेकर बोला "its ok.. नील के लिए ये सब अभी नया नहीं है. उसने तुम लोगों को नंगा देखने से पहले मुझे नंगा देखा है. और तो और कल से मैं उससे चुदवा रही हूँ. उससे अब क्या शर्माना?”

सुषमा बोली "तू तो UK चली जाएगी. हम तो यही रहने वाले है. नील ने हमें नंगा देख लिया है. किसीको पता चल गया तो?“

रीना बोली "कैसे पता चलेगा? कोई बाहर किसीको थोडे ही बोलेगा? और नील की गेरेंटी मैं लेती हूँ. आप लोग बेफ़िक्र हो जाओ. वो ऐसा लड़का नहीं है.”

सबको रीना की बात पर भरोसा था पर फिर भी सब शर्मा रहे थे.

रीना ने कहा "अब इतना भी क्या शर्माना. अभी तक तो आप सब नंगी थी तब शर्म नहीं आई. अब अचानक शर्म आने लगी?”

मैंने उनको आश्वासन देते हुए कहा "आप जरा भी चिंता न करे. मैं किसी को कुछ नहीं कहूँगा. promise”.

सभी रीना की बात पर सहमत थी. वैसे भी नील ने हमारी चूतें देख ही ली है तो अब और क्या शर्माना. सहमत होना और शर्माना तो एक दिखावा था. हकीकत मैं तो सब अपने आप को रोकने मैं नाकाम रही थी. उनकी वासना उनकी बुध्धि पर सवार हो चुकी थी. वो दिमाग का कुछ सुनना नहीं चाहती थी. उन सब की वासना की आग भड़क उठी थी ऊपर से मैंने किसी को कुछ नहीं कहने का वचन दिया जो उनको बेशर्म बनाने के लिए काफी था. पहले नुपुरने, फिर माया ने, फिर सुषमा ने और अंत मैं निलाने एक के बाद एक शर्म को छोड़ कर सब ने अपने पैर फैलाये. पैर फैलाते ही सबकी चूत मैं से वो दबा हुआ रस निकल कर बहार आया. सबने वो देखा. मैंने भी देखा. रीना बोली "देखो तुम्हारी चूत तुम्हारा हाल बयां कर रही है.. मैं तो कहती हूँ...ऐसा मोका फिर कभी नहीं मिलेगा. नील का लंड अभी सुजा हुआ है..फिर नहीं होगा और बाद मैं जिंदगी भर अफ़सोस कराती रहोगी..” थोड़ी देर सबके चहरे का भाव देखकर बोली "मैं तो उसके साथ ही हूँ और मेरे पास तो आज, कल का पूरा दिन और कल की पूरी रात है. तब तक तो मैं उसके लंड को निचोड़ लुंगी. पर आप लोंगो के पास तो यही एक मौका है.” एसा बोलकर रीना धीरे धीरे खड़ी होकर उसकी चूत मैं से मेरा लंड निकाल ने लगी. सबकी नजरे रीना की चूत पर थी. रीना उठती गयी उठती गयी पर मेरा लंड ख़तम होने का नाम नहीं ले रहा था. सब यही सोच रहे थे की अभी लंड का सूपड़ा निकलेगा पर जब रीना काफी ऊपर तक उठी तब जाके सूपड़ा रीना की चूत के रस मैं नहाया हुआ दिखा. सबका मुंह और आँखे खुली की खुली रह गयी.

रीना उठकर मेरे पास बैठ गयी. हम लोग रह देख रहे थे की कोई तो चुदाई के लिए उठेगी. पर कोई हिम्मत नहीं कर रहा था. मै भी सब को देख रहा था. माया अपनी उंगलियाँ चूत की गहराईयों में डालने के लिए बड़ी मचल रही थी. मैं उठ कर माया के पास गया और उसके फैले हुए पैरों के बिच में अपने घुटनों के बल बैठ गया. बैठते ही मेरा लंड उसकी चूत में गडी हुई उँगलियों को छुआ. लंड के छूते ही उसकी साँसे तेज हो गयी और अपनी कमर से ऊपर उठ कर चूत मैं से उंगलियाँ निकाल कर लंड को अपने हाथों से चूत पर दबा दिया. मेरे लंड को बड़े प्यार से सहलाने लगी उसकी आँखे बंध हो गयी जैसे गहरी नींद मै चली गयी हो. उसकी चूत उछल-उछल कर मेरे लंड को टकरा रही थी. पर वो कुछ बोल नहीं पा रही थी. सबको माया की ये हालत देखकर बड़ी तरस आई. सब माया की मदद के लिए उसके पास गए. सुषमा ने माया को पूछा "कितना टाइम हुआ?” काफी समय बाद लंड का स्पर्श होने पर माया का बदन कांप रहा था. उसका बदन गर्म हो रहा था. वो कांपते हुए बोली "तत..तिन.. तिन मममहि...ने.. हु हु हुए".

नुपुर बोल पड़ी "ओह माय गॉड... इतना समय तूने कैसे काटा? तुम कैसे रह सकी?”

सुषमा बोली "मैं तो दो दिन होता है तो तरस जाती हूँ और तूने तिन महीने निकाले? पागल हो गयी है क्या? तू उनको इतने लंबे समय के लिए जाने क्यों देती हो?"

माया किसी का जवाब देने की हालत मैं नहीं थी. वो तो उछल-उछल कर अपनी चूत को लंड से टकरा रही थी और अपनी चूत को मेरे लंड पर रगड़ रही थी. ”

रीना बोली "माया, ओ माया....होश मैं आओ..”

नुपुर बोली "माया.. डाल दे..”

माया ने सर हिला कर मना किया.

नुपुर बोली "जिद मत कर.. तेरी हालत देख...तू ले ले..”

माया बोली "मेरा पति...कभी माफ़...नहीं..”

रीना ने उसकी बात पूरी होने से पहले ही काट दिया...”तेरे पति को कुछ नहीं मालुम पड़ेगा..मैं सच कहती हूँ..मुझ पर भरोसा रख..”

मैंने पूछा "माया दीदी डालने दो ना... आपकी चूत बहोत सुन्दर है..please..."

माया ये सुनते ही मुझे अपनी बाहों में भर लिया और मेरे लंड के सुपडे को अपनी चूत मैं समाने के लिए तड़प ने लगी. मैंने भी उसकी चूत मैं डालने की कोशीश की पर मेरा लंड सरक कर यहाँ वहां चला जाता था. माया की चूत काफी कड़क हो चुकी थी और खुलने का नाम नहीं ले रही थी. इसीलिए मेरा लंड उसके अन्दर नहीं जा रहा था. सुषमा ने मुझे मायाके ऊपर से उठाने को कहा. मेरे उठने पर नीला ने मायाको सहारा देकर बिठाया और मायाका कमीज़ निकालने लगी. मायाके स्तन बहोत बड़े थे. शायद मेरे सर जितने बड़े होंगे. निकालते समय कमीज़ उसके स्तन पर अटक गया. निलाने जोर लगाकर कमिज़को ऊपर खिंचा. जैसे जैसे नीलाने कमिज़को ऊपर खींचा, मायाके दोनों स्तन कमिज़के साथ ऊपर उठे और कमिज़ निकलतेही वे गिरकर निचे पड़े. उसकी नीचेकी आधी ब्रा स्तनके ऊपर चढ़ गयी थी और निचेसे आधे स्तन नंगे दिखने लगे. बिना देर किये नीलाने उसके ब्रा के हुक खोल कर मायाके स्तन को आज़ाद किया. आज़ाद होते ही दोनों स्तन अपनी अपनी जगह झूलने लगे. नुपुरने मायाको वापस सोफे पर सुला दिया और माया के स्तन को सहलाने लागी. माया अब अपने आपे में नहीं रही. निलाने माया के बाल खुले कर दिए. सबने मायाको कमर से जकड दिया ताकि वो उछलना बंध करे. मायाकी कमर कंट्रोलमैं आते ही मैंने उसके पैर फैलाए और मेरा सूपड़ा फिरसे उसकी चूत पर रखा. मेरा लंड उसकी चूत मैं इतनी आसानी से जाने वाला नहीं था वो मैं जानता था. मैंने अपने दोनों हाथोंसे मायाकी चूत को खोला और सुपडे को उसकी चूत के काने पर दबाया. अब सुपडे की इधर-उधर जाने की कोई गुंजाइश नहीं थी. मेरा सूपड़ा गरम था पर माया की चूत उससे कई गुना गरम थी. उसको मेरा लंड ठंडा लग रहा था. उसकी चूत को कुछ ठंडा छुते ही माया कमर से उछल पड़ी और मेरा लंड फिरसे बहार निकल गया.

मैंने मायाकी कमरको दोनों हाथों से पकड़ा और लंड को उसके काने ऊपर रख कर एक जोर का धक्का मारा और माया के ऊपर गिर पड़ा. मेरा मुंह उसके दोनों स्तन की गहराई के बिच दब गया और लंड उसकी चूत को चिर कर उसकी गहराई को नाप रहा था. माया जोर से चीखी और लगभग बेहोश हो गई. मैं उसके ऊपर से उठा. सब लोग उसे हवा डालने लगे और उसका पसीना पोछने लगे. माया हिलने की हालत मैं नहीं थी और उसने मुझे भी हिलने से रोका. मैं रुक गया. माया की साँसे फूली हुई थी. उसका गला सुख रहा था. कुछ देर बाद वो शांत हुई और अपनी आँखे खोल कर आसपास देखा. उसने नीला को अपने पास खिंचा और उसके होठों को चूमने लगी. अपने हाथों से अपने स्तन को सहलाने लगी. उसके साथ नुपुर और रीना भी जुड़ गयी. मायाके हाथों को हटाकर

दोनो ने एक-एक स्तन पर कब्ज़ा कर लिया. उसे सहलाने लगे, चूमने लगे, चूसने लगे. दोनों के नंगे गोरे और मांसल चुतड मेरी और थे. मैंने दोनों के चुतड पर हाथ रखा और उसे सहलाने लगा. रीना के लिए ये नयी बात नहीं थी पर नुपुर के चुतड को छूते ही जैसे उसे करंट लगा. पहली बार कोई पराया हाथ उसकी चुतड को छू रहा था तो झटका तो लगेगा ही. करंट लगने पर कैसे हम अपने हाथों को तुरंत खिंच लेते है वैसे नुपुर ने अपने चुतड खिंच ली और पीछे मुड़कर मेरी और देखा. मेरी आँखों मैं आँखे डाली और फिरसे माया के स्तन सहलाने मैं जुट गयी. जैसे उसने मुझे उसके चुतड के साथ खेलने की अनुमती दे दी हो. मैंने फिरसे उसके चुतड पर हाथ रखा. अब उसका कोई रिएक्शन नहीं था. उसके चुतड पर एक चमाट मारी और उसे अपनी मुठ्ठी में दबाया. एसा लग रहाथा जैसे कोई मसका-बन हो. चमाट पड़तेही चुतड पर लहू उभर आया. दो चार और चमाट लगाने पर उसकी चुतड लाल हो गयी. वो द्रश्य बेहद खुबसूरत था. गोरी दूध जैसी चुतड पर लाल रंग और बिच मैं काले घने बालों मैं घिरी चूत और उसके बराबर बिच मैं लाल चूत पतली सी की दरार. दरार मैं से निकला हुआ चूत का रस उसके चूत के घने बालों मैं यहाँ वहां चिपका हुआ था. एक अदभुत नजारा था. मैंने अपनी पहली दो उंगलिओं को उसकी चूत पर रगडा और चूत का रस उसकी पूरी चूत पर और उसकी चुतड पर मल दिया. उसकी चूत बेहद मुलायम थी. उसमे अंगूठा डालते ही दबा हुआ रस निकल कर उसकी जांघो पर गिरा. रीना और नुपुर की चूतें सहलाते हुए मैंने धीरे धीरे मेरे लंड माया की चूत से बाहर निकाला. उसकी चूत मेरे लंड पर बड़ी मजबूती से चिपकी हुई थी. लंड निकालते हुए एसा लग रहा था की उसकी चूत मेरे लंड को चूस रही हो. लंड निकालते ही मालुम पड़ा की उसकी चूत खुल चुकी थी और हलकीसी फट गयी थी और थोडा खून निकल आया था. बिना कुछ देर किये मैंने फिर से मेरा लंड उसकी चूत मैं गाड़ दिया. अब माया को कुछ संतोष की अनुभूति हो रही थी. लंड का उसकी गहराईयों को छूते ही उसने मरी सहूलियत के लिए अपने पैर और फैलाए. मैंने लंड को फिरसे निकाला और देखा तो माया की चूत अपना मुंह फाड़े बैठी है. अब मैं भी उसकी चुदाई के लिए उतावला था उसकी चुदाई शुरू की. हर एक धक्के पर वो मुझे और जोर से करने के लिए उकसा रही थी और मेरा लंड भी हर बार नयी गहराई को छू रहा था. एक लय से माया चुद रही थी और नीला के होंठ और जोर से चूस रही थी. इस तरफ सुषमा माया की चूत के पास बैठ गयी और मेरी गोटीयों से खेलने लगी. करीब पांच मिनट मै ही माया उछल पड़ी. सब लोग बाजु हट गए और मैं उसके ऊपर चढ़ गया. वो झड ने लगी थी उसकी चूतने मेरे लंड के ऊपर जोर की पकड़ जमा ली थी पर मैं उसी लय से उसकी चुदाई करता रहा. रीना की तरह वो भी बस झड़ती ही चली. एक के बाद एक सतत कई बार झड़ने से वो संतोष की सभी सीमाए पार कर चुकी थी. उसके चहरे पर एक परम शांति और परम सुख का भाव था. सबने माया का हाथ पकड़ कर रखा था नहीं तो वो मेरी पीठ को जरुर नोंच लेती. मेरी पीठ की चमड़ी उखेड लेती. अब मैंने मायाकी चूत मैं से लंड को निकाल दिया. माया अपना पूरा शरीर ढीला छोड़ कर सोफे पर आँख बंध करके सो गयी.

 
सुषमा जैसे उसी पल की राह देख रही थी. उसने मेरे लंड को पकड़ कर अपने मुंह मैं ले लिया. बड़ी बेताबी से वो पुरे लंडको चूसने लगी उसने मेरा लंड पर से माया का रस पूरी तरह से साफ़ कर दिया. पर मैं लंड चुसवाने के मुड मैं नहीं था. मैं सुषमा से मेरा लंड छुड़वा कर वहां से उठा और नीला को पकड़ा. नीला को खिंच कर बाजू के सोफे पर धक्का देकर गिरा दिया. निलाके गिरते ही उसके पैर कुल गए और मैं उसके ऊपर चढ़ गया. ये सब इतना जल्दी हो गया की नीला कुछ समज पाए उसके पहले मेरा लंडका सूपड़ा उसकी क्लीन शेव की हुई चिकनी चूत का सिल तोड़कर चला गया.

"उ...इ.....माँआआ ......आ.....आ.....ह......" नीलाकी चीख निकल गयी और उसके के आँख और मुंह फटे के फटे रह गए. अपने पास मैं पड़े तकिये को निचोड़ दिया. दूसरीही क्षण तकिये को छोड़ कर उसने मुझे धक्का मारा और मैं उसके सामने गिर पड़ा. नुपुर और रीना तुरंत नीला के पास पहुंचे और उसे शांत करने लगे. नीला गुस्से से चिल्लाई "ये क्या कर रहे हो? मुझे नहीं चुदवाना है.”

नुपुर बोली "शांत हो जा.. नीला.”

नीला फिर से गुस्से से चिल्लाई "What the hell he did...”

नुपुर बोली "Calm down नीला.. उसमे नील की गलती नहीं है.. तू तो जानती है उसकी बिमारी..... ”

नीला बोली "पर मुझे नहीं सेकना उसके लंड को.... “

मै हैरान था और थोडा डरा हुआ था की मुझसे कुछ गलत हो गया. मैंने धीरे से कहा "Sorry...अगर मुझसे कोई गलती हो गई हो तो.. “

नीला बोली "गलती? तुम्हे मालुम है तुमने क्या किया?”

मुझे अभी भी समज मैं नहीं आ रहा था की मैंने क्या किया. नीलादीदी नंगी थी और उनकी उनकी चुदाई के लिए मैं उनके ऊपर चढ़ा. उसमे मेरी क्या गलती? मैं बस उसकी और चहेरे पर एक सवाल के साथ देखता रहा.

नुपुर बोली "हाँ पर नील को नहीं मालुम की लड़की का सिल क्या होता है.”

नीला ने अपनी चूत दिखाकर बोली "ये देखो उसने मेरी चूत का क्या हाल किया है. सिल तो क्या उसने पूरी चूत फाड़ दी है. ”

मैंने नीला की और देखा. मुझे ये लोग जो बोल रहे थे वो कुछ समजमें नहीं आ रहा था की किस सिल की बात कर रहे है और मैंने उसे कैसे तोड़ा? मैं बारी बारी सबके चहरे के सामने इसी सवालके साथ देख रहा था.

एक तरफ नुपुर और रीना, नीला को समझा रहे थे तो दूसरी और सुषमा मेरी परेशानी समज गयी और मेरे पास आई. उसने कहा "इधर आ" बोलकर वो मेरे पासके सोफे पर बैठी. उसने अपने पैर फैलाए ताकि मैं उसकी चूत देख सकूँ. उसने फिर से मुझे बुलाया. मैं उठकर उनके पास गया.

“नीचे बैठ..”

मैं उसकी चूत के सामने बैठ गया. उसने अपनी चूत खोलकर मुझे सब समझाने लगी की सिल क्या होता है और चूत मैं किस जगह को छूने से लड़की को अच्छा लगता है. वो बोली "मेरा तो सिल कबका टूट चुका है पर नीला का सिल तूने आज तोडा. इसीलिए वो गुस्सा है..”

मैंने कहा "मुझे लगा की वो नंगी है तो मतलब की मैं उनकी चुदाई कर सकता हूँ.”

सुषमा हंस कर बोली "हर नंगी लड़की जरुरी नहीं है की वो चुदवायेगी..”

मैं परेशान था "अगर उनको चुदवाना नहीं था तो नंगी क्यों हुई?”

सुषमा बोली "वो उत्तेजित हो गई थी और खाली अपनी चूत सहलाकर संतोष ले रही थी. उसे चुदवाना तो है पर अभी नहीं. वो अपने fiance से ही चुदवाना चाहती थी. “

मैंने कहा "आप भी?”

सुषमा के चहरेका भाव मेरा सवाल सुनकर तुरंत बदल गए. उसकी आँखों मैं मस्ती छा गयी और मुस्कुराते हुए बोली "हम लोग नीला के जैसे बुद्धू नहीं है की ऐसा मौका हाथ से जाने दे.. क्यों नुपुर?”

नुपुर बोली "तो क्या? नीला को तो कुछ समज नहीं है. उसने कभी लंड लिया ही नहीं तो उसे क्या समझाये? पर हम टाइम वेस्ट नहीं करा सकते वरना उसका लंड वापस नोर्मल हो जाएगा.”

नुपुर नीला को छोड़ कर हमारे पास आई और सुषमा के ऊपर पीठके बल सो गयी. मेरे सामने एक के ऊपर चूत अपने पैर फैलाए लबलबाती पड़ी थी.

सुषमा बोली "चल अब सोचता क्या है? डाल न? तुझे इन्विटेशन देना पडेगा क्या?”

मैं थोडा हिचकिचा रहा था "क्या नुपुरदीदी को भी...”

नुपुर बिच मैं ही नीला के सामने उसे चिडाते हुए बोली "अरे कर न? मैं नीला नहीं हूँ...चल चढ़ जा...”

मैंने भी नीला की और देखा. सुषमासे अब सहा नहीं गया. उसने मुझे मेरे लंडसे पकड़ कर खिंचा और लंडके सुपडे को अपनी चूतके काने पर रख दिया. “चल न... टाइम पास मत कर".

अब मैंने नुपुर को उसकी पतली कमर से पकड़ा और सुषमा की चूत पर सूपड़ा दबाया. सुपडे के आगे नन्ही सी चूत थी. थोडा ज्यादा जोर लगाने पर सूपड़ा लपक कर अन्दर घुस गया. लंड घुसते ही उसका चहरा जैसे पानी मैं देर तक डूबे रहने के बाद कोई पानी के बहार सर निकालता है और सांस लेनेके लिए बेताब हो वैसा था. वो एकदम हडबडा गयी थी. उसने मुझे थोड़ी देर रुकने को कहा. उसकी जोर जोर से सांसे चल रही थी और यहाँ नुपुर ऊपर नीचे हो रही थी. कुछ देर बाद उसकी साँसे शांत हुई और कहा "ओह नुपुर...... क्या लंड है साले का !!...जिंदगीभर का अफ़सोस रह जाता अगर....

"आ...ह...."

"नील थोडा धीरे.....”

“oh my god.... "

"आह... रुक...... रुक जा रे.... ”

“पूरा डाल दिया क्या?”

मैं कुछ कहूँ उससे पहले रीना बोली "अभी तो आधा ही लिया है तूने...”

सुषमा बोली "चल झूठी....”

रीना बोली "ठीक है नील... उसे पूरा डाल कर दिखा...”

दुसरे ही पल एक धक्का मारा और पूरा लंड सुषमा की चूत मैं समा गया. सुषमा एक जोर के झटके के साथ उछली और बेहोश हो गयी. उसका भी गला सुखा गया और कुछभी बोलने की हालत मैं न रही.

रीना भागी दौड़ी आई और सुषमा को हवा डालने लगी.

नीला बोली "देख... इतना दर्द होता है तो मजा कैसे आएगा?”

रीना बोली "तू चुप बैठ.. तुझे कुछ समज मैं नहीं आयेगा...”

रीना आगे बोली "नील... तू नुपुर मैं डाल दे..."

मैंने सुषमा की चूत मैं से लंड निकाला और नुपुर की चूत पर रगडा. नुपुर पहले से ही तैयार थी. उसे मालुम था की कितना दर्द होगा और दर्द के बाद कितना आनंद होगा. लंड का स्पर्श होते ही नुपुर को जैसे करंट लगा. लंड के सुपडे को अपने हाथों से अपनी चूत पर रगड़ ने लगी और सुपडे को पूरा गिला कर अपने अन्दर डाल दिया. सूपड़ा अन्दर जाते ही उसके फैले हुए पैर मेरी कमरके आसपास लिपट गए. क्या पता मेरा सुपदा चूत मैं जाते ही इनको क्या हो जाता है? थोड़ी देर तक तो कोई हिलता भी नहीं है. जैसे किसी ने चूत मैं चाकू डाल दिया हो!! थोड़ी देर बाद नुपुर को जान आई और उसने कहा "तू कुछ मत करना... जो करना है मैं ही करुँगी....”

यह बोलकर उसने अपनी जांघो से मेरी कमर को जकड लिया और अपने पैरों से मुझे अपने पास खिंचने लगी. डिलीवरी जितना दर्द सहते हुए उसकी चूत धीरे धीरे मेरा लंड निगल रही थी.

“आ...ह.....”

“माँ......”

“मर गयी.....”

“ओ.....ह...”

“आ.............इ..”

आखिरमें पुरे लंड को निगल कर बोली....”तू अब हिलना मत... मैं जब बोलूंगी तब ही हिलना...."

नुपुर की चूत अन्दर से लबालब हो रही थी. लंड को अन्दर से कभी जकड रही थी तो कभी छोड़ रही थी. उसका बदन जैसे मोम की कोई मूरत हो. उसके पुरे बदन को मैं महेसुस करने लगा. जैसे ये सब मेरे लंड के लिए मर रहे थे वैसे ही मैं भी ये सब बेहद खुबसूरत बदन को पा कर धन्य हो रहा था. अपने आप को कह रहा था की ये बिमारी २४ घंटे क्यों नहीं रहती? चारों की चारों काफी अच्छे घर की लड़कियाँ थी जो कभी दुसरे पुरुष के बारेमें ऐसा सोचतीभी नहीं थी. और आज मेरे लंड ने उनको बहका दिया? सोचते हुए मैंने नुपुर के रुई जैसे स्तन पर हाथ रखा. मेरे हाथ पर अपने हाथ रख दिए और वो खुद ही मेरे हाथों से अपने स्तन दबोच रही थी. कुछ देर ऊपर से सहलाने के बाद उसके ब्लाउज के अन्दर हाथ डाला और ब्लाउज को थोडा ऊपर खिंचा. एक के बाद एक उसके हुक खोलकर ब्लाउज को उसके स्तन पर से दूर किया. .अपनी नज़रों के सामने वो ब्लाउज के हुक को खुलते हुए देख रही थी. इन सब ने इतनी सहजता उसने अपना पूरा बदन मुझे सोंप दिया था की मैं हैरान था. ये सब ऐसी रूप सुंदरियाँ थी की जैसे दूध से नहाई हुई संगेमरमर की कोई मूरत हो जिसके ऊपर मख्खन का लेप किया हो. कोमल इतने की अगर इन्हें जोर से पकड़ लिया तो लहू उभर आये. सब के स्तनको देख कर कोई भी कह देगा की ये खाते पीते घराने की लड़कियाँ है.

जब चूत का लबलबाना थोडा कम हुआ तो उसने अपनी जांघे फैलादी. मेरी कमर से उसकी जांघे छुट गई और मैं उसके ऊपर गिर पड़ा. गिरते ही उसने मेरे होंठ चूम लिए और आँखों मैं आँखे डाल कर बोली "नील... तुम्हारी वजहसे हमें ये खुशीयाँ नसीब हुई है. हम सब तुम्हे जिंदगी भर नहीं भूलेंगे”

थोडा रुक कर बोली "आज अपनी ये दीदी पर रहेम मत करना.. तुझे मेरी कसम...”

सुषमा नीचेसे बोली "और अपनी ये दीदी पर रहेम करो....और फिरसे मेरी चूत भर दो.”

दोनों मख्खन जैसी चूतें चुदवाने के लिए मचल रही थी.

दूसरी तरफ रीना नीला को समझा रही थी "ये देख....अरे तू चिंता मत कर. एक महीने मैं तेरी चूत वापस नोर्मल हो जाएगी. किसी को पता भी नहीं चलेगा.”

नीला बोली "बहोत दर्द कर रहा है...ये क्या कर दीया उसने..”

रीना बोली "तू फिकर मत कर.. ऐसाही होता है.. शुरूमै दर्द होता है और बाद मैं इतना मजा आता है की तू सब दर्द भूल जाएगी और हम सब की तरह उछल-उछल कर चुद्वायेगी..”

सुषमा "आ... ह....”

नुपुर "ओह... माँ......”

सुषमा "मर गयी....”

नुपुर "कर ना......”

सुषमा "और अन्दर...”

नुपुर "हा.....य.....”

सुषमा "ओ......”

नुपुर "इ.......”

सुषमा "उ.........म.... ”

नुपुर और सुषमा दोनों साथ मैं बोली "अधुरा मत छोड़......पूरा डाल ना........”

सुषमा "ओ............”

नुपुर "हां.......”

सुषमा "ऐसे.......”

नुपुर "हाँ....”

सुषमा "हा....ये.......”

नुपुर "ओ.........”

......

......

.....

धीरे धीरे सुषमा की चूत कड़क होने लगी. नुपुर अभी भी मजे लेने के मुड मैं थी. दस-बारा धक्के मैं सुषमा उछल पड़ी. नुपुर बाजू मैं गिर पड़ी. सुषमा के पुरे बदन मैं ख़ुशी की लहरे दौड़ गयी. पूरा बदन मैं जैसे ताजगी छा गयी. झड़ने के बाद सुषमा की चूत की पकड़ काफी मजबूत हो गयी जो मुझे पागल कर रही थी. नुपुर के गिरते ही मैं सुषमा के ऊपर चढ़ गया और उसे बाँहों मैं जकड कर उसकी जम कर चुदाई की. सुषमा इतनी बार झड़ी की आखिर मैं नुपुर ने उसे छुडाया और मुझे हलकासा धक्का देकर जमीन पर गिरा दिया. सुषमा भी तृप्त होकर सोफे पर शांत होकर पड़ी थी.
 
नुपुर के धक्के से मैं पीठ के बल गिरा पड़ा था की वो मेरे ऊपर खड़ी हो गयी और मैं उसके पैरों के बिच मैं सुषमा के चूत के रस से लथपथ लंड को लेकर सोया पड़ा था. कमर से झुक कर मेरे पुरे लंड को माया के दुपट्टे से साफ़ किया और एक हाथ से मेरे लंड को पकड़ा. अपनी चुतड निचे लायी और चूत को सुपडे के ऊपर रख कर लंड को छोड़ दिया. मेरा लंड का सूपड़ा उसकी चूत में अटका हुआ था.

“अब मेरी बारी...” नुपुर ने अपना हक़ जताते हुए बोला.

अपनी चुतड को ऊपर नीचे करके वो मेरे सुपडे को अन्दर-बहार कर रही थी. मेरा सूपड़ा उसकी चूत का मुंह दबाकर अन्दर जाता था और चूत को अपने साथ खिंच कर निकलता था. जैसे वो अपनी चूत से मेरा सूपड़ा चूस रही हो. अपनी आँख बंध करके बड़े मज़े वो मेरे लंड की चुदाई कर रही थी और अपनी चूत की प्यास बुझा रही थी. उसे कोई जल्दी नहीं थी. उसे मालुम था की अब कतार में कोई नहीं है. एक लय से वो चूत से लंड को चूस रही थी और उसी लय से उसके स्तन झूल रहे थे.

धीरे धीरे नुपुर की चूत का रस मेरे लंड पर उतरने लगा. उसके चहरे पर गहरा संतोष छा रहा था. उसकी जुल्फे मेरी छाती पर बिखरी पड़ी थी. कभी मैं उसकी खुशबूदार जुल्फों से खेलता था तो कभी उसके बड़े बड़े स्तन को अपने हाथों मैं समाने की कोशीश करता था.

“नील धीरे......... दुखता है....”

उसी लय के साथ चुदाई करते हुए धीरे धीरे वो लंड को और अन्दर डालने लगी. जैसे जैसे लंड अन्दर लेती गयी वैसे वैसे वो पागल होती चली. कुछ ही देर मैं मेरा पूरा लंड उसके रस से लथपथ हो गया. वो जैसे लंड पर उठक-बैठक कर रही थी. पुरे लंड को चूतमें से निकाल कर वापस पूरा समा लेती थी. एसा करना आसन नहीं था. कुछ ही देर मैं तो थक गयी और लंड पर बैठ गयी और मेरे ऊपर ढल पड़ी. उसकी जुल्फों तले मेरा सर ढँक गया और उसके स्तन मेरी छाती पर दबे हुए थे. कुछ देर ऐसे ही पड़े रहने के बाद उसकी थकान कम हुई. अपना सर उठाकर मेरे चहरे से अपनी जुल्फे हटाई और बोली “ऊपर आजा....”

उसने धीरे धीरे अपनी चूत में से मेरा लंड निकाल कर खड़ी हुई. मेरा हाथ पकड़ कर खड़ा किया और मुझे लेकर सोफे के पास आई. वो सोफे पर बैठी और अपने पैर पुरे फैला दिए.

नीला को ये सब देख कर यकीन नहीं हो रहा था की इतना दर्द सहने के बाद भी मझा आता है. वो सोच रही थी के खाली लंड का सूपड़ा जाने से मेरी हालत ये थी तो पूरा लंड लेने का तो कोई चान्स ही नहीं है. मैं सोच भी नहीं सकती. पर उसने अपनी नज़रों से देखा की रीना, माया, नुपुर और सुषमा सब की चूत मैं नील का लंड समा गया और लंड लेने के बाद सबके चहरे पर एक अजीब सा आनंद और संतोष साफ़ नजर आ रहा था. और ये नुपुर को तो देखो. अपना पैर फैलाए हुए अपनी चुदाई के लिए कितनी बेताब है. इसकी चूत की हालत तो देखो. पूरी खुली पड़ी है जैसे चूहे का बिल हो. और मेरी चूत भी तो बेहाल है. रस झड-झड के कितनी चिपचिपी हो गयी है और अन्दर से तो लब लब हो रही है. नीला उठी और अपना टॉप निकाल दिया. ब्रा का हुक खोला और दुसरे ही पल उसे उतार फैका. जब टॉप पहना था तब लगता नहीं था की नीला के स्तन इतने बड़े होंगे. टॉप निकालते ही मालुम पड़ा की ये तो एक्स्ट्रा लार्ज है. और जब ब्रा निकाली तब तो मेरी आंखे और मुंह खुले के खुले रह गए. उसके अनछुए उन्नत स्तन और उस पर लाल रंग की निप्पल पर से मेरी नजर नहीं हटती थी. नुपुर की कमर के दोनों बाजू पर अपने पैर डाल कर खड़ी हो गई.

नुपुर बोली "good...नीला . आजा.. कुछ सोच मत....तू जिंदगी भर मुझे याद करेगी...बहोत मझा आएगा... ”

नीला ने कुछ जवाब नहीं दिया.

मैं नुपुर की खुली चूत के आगे अपने घुटनों के बल बैठ गया. मेरा लंड अब बराबर नुपुर की चूत के आगे था. बिना देर किये मैंने मेरा पूरा लंड नुपुर मैं गाड़ दिया. नुपुर के लिए अब ये नया नहीं था.

“ऐसे ही पूरा निकाल कर डाल...” नुपुर ने अपने इच्छा बताई.

मैंने भी उसकी इच्छा अनुसार अपना पूरा लंड निकाल कर उसकी चूत की गहराईयों मैं गाड़ रहा था. हर बार लंड डालते समय मेरा मुंह नीला की चुतड के बिच टकरा रहा था. उसका लाभ उठाते हुए नीला आगे से पूरा नुपुर के ऊपर झुक गयी और अपने स्तन उसके स्तन पर रख दिए. आगे झुकते ही अब उसकी चूत पर मेरा मुह टकराने लगा. नीलाने अपने पैर थोड़े और फैलाए ताकि उसकी चूत के ज्यादा से ज्यादा भाग को मेरा मुंह छुए. मैं नीला से डरा हुआ था और कोशीश करता था की मेरा मुंह उसकी चूत से दूर रहे पर वो अपनी चूत जानबुज कर मेरे चहरे के पास ला रही थी. कुछ समय एसा चला तब नीला से रहा नहीं गया और बोली "अरे चाट ना...”

मैं अभी भी हीचकीचा रहा था.

रीना बोली "तेरा गुस्सा देख कर वो डर गया है... “

नीला बोली "अरे बाबा sorry....अब आ भी जा... “ उसने अपने दोनों हाथ पीछे ला कर मेरे सर को पकड़ कर उसकी चूत पर दबा दिया. उसकी चूत की खुशबु से मैं पागल हो गया चुदाई की स्पीड तेज हो गई. नीला की जांघो और चुतड पर चुम्बनों की झड़ी लगा दी. काफी जगह पर तो काटने से निशान पड़ गए और खून उभर आया. एक तो वो गोरी चट्टी थी और ऊपरसे मैंने उसकी चुतड और जांघो का हर एक हिस्सा मुहमे दबा के चूसा तो उसका दूध जैसा बदन सेब जैसा लाल हो गया. जब नीला ने अपनी चुतड और जांघो पर जगह जगह खून उभरा हुआ देखा तो बोली "नील ज्यादा नीचे नहीं... मेरा स्कर्ट छोटा है.. सबको दाग दीखेंगे.....”.

और बेसब्र हो कर बोली "मेरी चूत पर किस करो न.....”

मैं जानबुज कर उसको तड़पा रहा था. उसकी चूत के आसपास हर जगह मैं चूम रहा था पर उसकी चूत करीब आ कर उसे छोड़ देता था. अपनी दोनों उँगलियों से उसकी चूत को खोल रखी थी और वो भी राह देख रही थी की कब मैं उसकी चूत चुमू. पर उसकी चूत की महेक ही पागल कर देने वाली थी.

“नील...अब नहीं रहा जाता... चाट न....”

“आप की चूत बहोत सुन्दर है... उसकी खुशबु बहोत अच्छी है...” मैं मेरे होंठ नीला की चूत के करीब लाया. मेरी गर्म साँसे नीला की चूत मैं महेसूस हो रही थी.

“अभी सूंघना छोड़ न....क्यों तड़पा रहा है?.. मारूंगी अब तुझे...” नीला अब जंगली बिल्ली की तरह गरजने लगी. उसने मेरा हाथ हटा कर खुद अपनी उँगलियों से अपनी चूत चौड़ी की. मैंने नुपुर की चूत मैं से लंड निकाला और खड़ा हो गया. लंड को नीला की चूत के करीब लाकर चूत के आसपास रगडा. उसने लंड को लपक कर पकड़ा और खिंच कर जबरजस्ती चूत मैं डालने लगी पर नुपुर की चूत के रस में लिपटा हुआ लंड उसके हाथ से फिसल गया. मैंने नीला को धक्का दे कर सोफे पर गिरा दिया. नुपुर ने अपनी बाहें फैलाई और मै उसकी बाहों मैं समा गया. और फिर हम दोनों के होंठ सील गए और बस चुदाई मैं लिन हो गए. एक लय से चुदाई करते करते हुए नुपुर तृप्त होती गई. और एक क्षण आई जब उसने संतुष्ट हो कर पूरा बदन ढीला करके सोफे पर छोड़ दिया.

काफी देर से शांत बैठी हुई रीना ने अब कहा "नील अब बस कर...वो अब कुछ भी महेसूस करने के हाल मैं नहीं है....”

मैंने कहा "पर नुपुर दीदी की चूत बहोत अच्छी है... करने दो न.....”

नुपुर आधी बेहोशी की हालत मैं बोली "तू चिंता मर कर... मैं फिर आउंगी... “

वहीँ सुषमा और माया भी अपनी ताकत जुटाकर बोली "तू ही क्यों?... हम सब आयेंगे.....उसकी बात सुनकर सभी हंसने लगे

THE END
 
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