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देसी भाभी

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Guest
यह नई कहानी गाँव की एक भाभी की है, उनका नाम सुनीता है, उनकी उम्र 28 साल है, वो दो बच्चों की माँ है।

वे कद में थोड़ी छोटी हैं।

गाँव में शादी जल्दी हो जाने के कारण उनकी उम्र बहुत कम लगती है। गाँव में खेतीबाड़ी करने के कारण शरीर हमेशा मस्त बना रहता है।

सलवार-कमीज में तो उनका गदराया हुआ बदन कुवारी लड़कियों को भी फेल कर दे। उनकी चूचियां कुछ बड़ी थीं, जो किसी का भी लौड़ा खड़ा करने के लिए काफी हैं।

एक बार जब मैं गाँव गया तो वो मुझे एक गाँव की शादी में मिलीं। देखने में अच्छी लगीं.. मन किया कि काश यह माल पट जाए, तो इसकी लेने में बहुत मजा आएगा।

दोस्तों से पता किया तो पता चला कि वो हमारी दूर की रिश्तेदारी में से ही थीं.. बस मेरा काम बन गया।

मैंने उनसे जान पहचान बढ़ाई और शादी के माहौल में थोड़ी ही देर में वो मुझसे घुल-मिल गईं।

थोड़ी ही देर के हँसी-मजाक में हम दोनों काफी खुल गए, फिर मैंने उनका नम्बर माँगा।

तो बोलीं- क्या करोगे नम्बर का?

मैंने बोला- भाभी जी पहले नम्बर दो तो सही.. रोज आपसे मीठी-मीठी बातें करूँगा, जैसे अभी कर रहा हूँ.. जिससे दोनों का मन लगा रहेगा।

कुछ देर की आनकानी के बाद उन्होंने अपना नम्बर दे दिया।

इस बीच मैं उनसे हँसी-मजाक करता रहा।

इसी बीच मौका देख कर मैंने पीछे से उनके चूतड़ सहला दिए।

एक बार को तो वो चौंक गईं.. फिर मुस्कुराने लगीं।

अब रास्ता साफ हो गया था।

मैं उनसे सट कर बैठ गया और उनकी जाँघों को सहलाने लगा.. पर जगह ठीक नहीं थी, गाँव में इससे ज्यादा कुछ ना हो सका।

वहाँ सभी मुझे पहचानते थे, इसलिए इतने में ही सन्तोष करके मैं दिल्ली वापस आ गया।

अगले ही दिन मैंने उन्हें फोन किया।

वो बोलीं- कौन हैं आप?

मैं बोला- आपका प्यारा देवर.. इतनी जल्दी भूल गईं मुझे, आप परसों ही तो मिली थीं।

सुनीता- ओह आप हो.. कहो कैसे याद किया।

मैं बोला- भाभी आपको भूला ही कब था जो याद किया। आप हो ही इतनी सुन्दर कि आपको भुलाया ही नहीं जा रहा।

सुनीता- ओह जनाब मुझ पर लाइन मार रहे हैं.. क्या इरादा है।

मैं बोला- इरादा तो नेक है भाभी। सच कह रहा हूँ आपका चेहरा हर वक्त नजरों के सामने था, सपनों में भी आप ही आप नजर आती हो। क्या करूँ आपसे बात किए बिना मन ही नहीं माना।

फिर इस तरह हमारी रोज बातें होने लगीं। उनकी और मेरी अच्छी बनने लगी।

धीरे-धीरे बातें सेक्स की तरफ भी जाने लगीं- भाभी, आपकी सेक्स लाइफ कैसी चल रही है?

सुनीता- क्या बताएं राज.. मैं गाँव में सास-ससुर के साथ रहती हूँ। तुम्हारे भाई वहीं दिल्ली में काम करते हैं। छः महीने में 20 दिन के लिए आते हैं। बाकी समय तो खुद पर कन्ट्रोल करती हूँ।

मैंने कहा- अच्छा.. ‘मन’ नहीं करता क्या आपका।

सुनीता- करता तो है.. पर क्या करूँ, वो पास तो हैं नहीं.. तो उंगली से ही काम चलाना पड़ता है।

मैं- भाभी जी उसमें ‘वो’ मजा कहाँ.. जो असली लौड़े को चूत के अन्दर लेने में आता है।

‘हम्म.. सो तो है..’

‘तो किसी और से करवा लो।’

सुनीता- नहीं यार यहाँ ऐसा नहीं कर सकती। कहीं पकड़ी गई तो पूरे गाँव में बदनामी हो जाएगी।

मैं- अच्छा मन तो है.. पर गाँव में चुदवाने से डरती हो।

सुनीता- हाँ जी, यही समझ लो।

मैं- अच्छा चुदाई की बात करने में तो कोई डर नहीं है ना।

सुनीता- नहीं.. इसमें कैसा डर। तुम मुझसे रोज खुलकर चुदाई की बातें कर सकते हो।

फिर हम रोज ही सेक्स की बातें करने लगे। दोनों बातों-बातों में रोज एक-दूसरे का पानी गिराने लगे।

एक बार मैंने पूछा- भाभी आपकी चूत कैसी है।

वो बोली- एकदम गुलाबी है।

मैं- भाभी जी इतने साल चुदने के बाद भी गुलाबी कैसे रहेगी। मैं नहीं मान सकता।

सुनीता- तो आकर देख लो.. गुलाबी ना निकली तो कहना।

मैं- अच्छा अगर देखने के बाद पसंद आ गई तो।

सुनीता- तो जो मरजी कर लेना जी।

मैं- भाभी जी तब तो देखनी ही पड़ेगी आपकी गुलाबी चूत। भाभी एक बात कहूँ फोन में आपको बहुत चोद लिया, मैं आपको सचमुच में चोदना चाहता हूँ। मेरा लौड़ा अब आपकी चूत में जाने को तड़फ रहा है। कब तक ऐसे एक-दूसरे का पानी निकालेंगे। मैं सचमुच में आपकी चूत में पानी निकालना चाहता हूँ। आपको हचक कर चोदना चाहता हूँ।

सुनीता- राज, मैं भी तुमसे चुदना तो चाहती हूँ, पर गाँव में ये संभव नहीं है। कहीं बाहर ही ये हो सकता है.. देखो कब मुलाकात होती है।

कहावत है न कि जब सच्चे मन से किसी की लेनी चाहो तो ऊपर वाला भी खुद ही जुगाड़ कर देता है।

इसी बीच यूपी में हमारे एक रिश्तेदार की लड़की की शादी फिक्स हो गई। भाभी जी को भी निमंत्रण था, मैंने उन्हें वहाँ आने के लिए मना लिया।

बस भाभी के मेरे लण्ड के नीचे आने के दिन नजदीक आने लगे।

 
आखिरकार वो दिन भी आ ही गया। मैं एक दिन पहले ही लड़की वालों के घर पहुँच गया और वहाँ का पूरा इन्तजाम देखा।

आखिर मुझे भाभी को चोदने की जगह भी तो फिक्स करनी थी ताकि उन्हें चोदने में कोई परेशानी ना हो और वो बिना डर के चुदवा सकें।

उनके घर के थोड़ी ही दूरी पर गन्ने के खेत थे। मैं पहले दिन ही जाकर खेत के अन्दर चोदने की जगह बना कर आ गया था।

वहाँ हम दोनों को कोई नहीं देख सकता था।

वैसे भी शादी के माहौल में कौन खेतों के अन्दर तक आएगा।

अगले दिन सुबह-सुबह वो भी आ गईं।

पूरे दिन हम शादी की तैयारियों में व्यस्त रहे। फिर शाम को मैं उन्हें घुमाने के बहाने अपने साथ ले गया और वहाँ से कुछ दूर पैदल चलने के बाद पीछे मुड़कर देखा कि कोई हमारा पीछा तो नहीं कर रहा है। जब पक्का हो गया कि सभी शादी में ही उलझे हुए हैं.. तो मैंने उनका हाथ पकड़ा और उन्हें गन्ने के खेतों के बीच ले गया।

सुनीता- देवर जी मुझे यहाँ क्यों लेकर आए हो।

मैं- भाभी जी आपको मालूम तो है। मुझे आपकी गुलाबी चूत देखनी है।

सुनीता- नहीं नहीं.. यहाँ नहीं। यहाँ कोई आ गया और किसी ने देख लिया तो?

मैं- भाभी जी यहाँ खेतों के बीच में कोई नहीं आता है। वैसे भी यहाँ हम दोनों को कोई नहीं जानता, मान जाओ ना.. फिर ऐसा मौका कभी नहीं मिलेगा और आपकी चूत देखने को ही तो आपको यहाँ शादी में बुलाया है। किसी को पता नहीं चलेगा, तुम चिन्ता ना करो।

थोड़ी देर मनाने के बाद वो मान गईं। वैसे भी उन्हें पता तो चल ही गया था कि आज कुछ न कुछ तो होकर ही रहेगा।

मैंने अपना गमछा बिछाकर उन्हें अपने पास बिठाया। थोड़ी देर हाथों को सहलाकर उनके होंठों में अपने होंठ रख दिए। वो भी महीनों की प्यासी थीं और अपने गाँव से चुदने ही आई थीं।

उन्होंने मुझे जकड़ लिया, मैंने भी अपने हाथों से उनकी चूचियों को दबाना शुरू किया और कपड़ों के ऊपर से ही उनकी चूत सहलाने लगा।

वो भी बहुत ज्यादा गर्म हो गई थीं।

कुछ ही मिनट की चुसाई के बाद हम दोनों अलग हुए.. दोनों का बुरा हाल था, मेरा लण्ड पैंट में तम्बू बन गया था, दोनों ने फटाफट अपने-अपने कपड़े उतार कर साइड में रख लिए।

आग दोनों तरफ बराबर लगी थी।

फिर मैंने देखा वाकयी उनकी चूत गुलाबी थी।

मैं- वाह भाभी.. आपकी चूत तो सचमुच में गुलाबी है। इसे देखकर तो मजा आ गया।

सुनीता- राज क्या करूँ.. ज्यादा चुदी नहीं है ना.. पूरे साल में 30 दिन तो कुल चुदती है ये, बाक़ी साल भर सूखी रहती है.. तो गुलाबी तो होगी ही।

मैं- चिन्ता न करो भाभी.. आज मैं इसे पूरी तरह से तर कर दूँगा.. देखो मेरा लौड़ा इसे सींचने के लिए कब से तैयार खड़ा है।

फिर हम दोनों 69 में आ गए.. वो मेरा लौड़ा चूस रही थीं और मैं उनकी गुलाबी चूत को चूस रहा था। वो मेरा लौड़ा लगातार ऐसे चूसे जा रही थीं, जैसे मूली समझ कर खा जाना चाहती हों।

उनकी चूत चूसने में और उनके चूचियां दबाने में बहुत मजा आ रहा था। चूत में जीभ की रगड़ से वो कुछ ही देर में झडने लगीं.. मैंने उनका सारा पानी पी लिया।

मैंने भी उनके मुँह में ही धक्के लगाने शुरू कर दिए। कुछ ही समय में मेरा लावा भी उनके मुँह में गिरने लगा जिसे वो पूरा चाट-चाट कर साफ कर गईं।

हम दोनों को ही इस ओरल सेक्स चूसा चुसाई में बहुत मजा आया।

थोड़ी देर सुस्ताने के बाद वो फिर से मेरा लौड़ा सहलाने लगीं, मेरा हथियार फिर से खड़ा हो गया था।

सुनीता- अब ना तड़पाओ राज, डाल दो इसे मेरी चूत के अन्दर.. ये लण्ड खाने को कब से तड़फ रही है।

वो अपनी टांगें फैलाकर जमीन पर लेट गईं।

मैंने भी अपने लौड़े पर थूक लगाया और उनकी चूत के दाने पर रगड़ने लगा।

वो तो पागल सी हो गईं.. उन्होंने खुद मेरा लण्ड पकड़ कर अपनी चूत के मुहाने पर लगा लिया और ऊपर को जोर लगाने लगीं।

मैंने भी लण्ड को चूत पर दबाना शुरू किया.. चिकनी चूत होने के कारण लण्ड को रास्ता बनाने में ज्यादा टाइम नहीं लगा।

लण्ड पूरा अन्दर जाते ही उनके मुँह से एक लम्बी ‘आह..’ निकली।

चूत वाकयी में टाइट थी, शायद बहुत समय बाद चुदने के कारण ऐसा था। मैंने धीरे-धीरे धक्के लगाने शुरू किए।

दोनों को बहुत मजा आ रहा था।

वो उछल-उछल कर मेरा साथ दे रही थीं, हर धक्के के साथ उनकी मादक सिसकारियाँ निकल रही थीं- आहह आहह.. राज और जोर से.. मैं कब से इसे अपने अन्दर लेने को तड़फ रही थी.. आहहह आहह.. जोर से पेलो राज..

‘आहह.. भाभी.. मैं खुद कई दिन से तुम्हें चोदना चाह रहा था.. आखिर आज आप मेरे लण्ड के नीचे आ ही गईं.. कसम से लाजवाब हो भाभी.. आपने तो दिल खुश कर दिया.. लो और लो..’

मैं उन्हें हचक कर चोदने लगा।

उन्होंने भी चुदाई के खूब मजे लिए, फिर एकदम से वो अकड़ गईं- आहह आहहह.. मैं आ रही हूँ राज.. और जोर से चोदो..

कुछ ही देर में उन्होंने पानी छोड़ दिया।

 
अब तो उन्हें चोदने में और भी मजा आने लगा, उनकी चूत में लण्ड के अन्दर-बाहर होते समय ‘फच्च.. फच्च..’ की आवाज गूंज रही थी और उनके मुँह से कामुक सिसकारियाँ माहौल को मस्त बना रही थीं।

मैंने उन्हें हर तरीके से चोदा.. उन्होंने दो बार और पानी छोड़ दिया।

अब मेरा लौड़ा भी जवाब देने लग गया, मेरा भी होने वाला था- भाभी मेरा होने वाला है.. बोलो कहाँ गिराऊँ।

मैंने धक्के तेज कर दिए।

सुनीता- राज, अन्दर ही गिरा दो.. कब से चूत सूखी पड़ी है.. इसे अपने पानी से सींच दो.. मैं तुम्हें अपने अन्दर महसूस करना चाहती हूँ। डरने की कोई बात नहीं, मैंने आपरेशन करा रखा है।

मैं- दिल खुश कर दिया भाभी आपने तो.. चूत के अन्दर माल गिराने का तो मजा ही और है.. वैसे भी मुझे अन्दर गिराने में बहुत मजा आता है।

मैंने कुछ ही झटकों के बाद अपना सारा पानी उनकी चूत के अन्दर भर दिया और थोड़ी देर बाद लण्ड बाहर निकाल कर उनके बगल में लेट गया।

मैं- बोलो भाभीजान.. मजा आया कि नहीं.. चूत की खुजली मिटी की नहीं..

सुनीता- राज आज बड़े दिनों बाद चूत को इतना सुकून मिला। मेरी कई दिनों से बंजर जमीन आज तुम्हारे पानी से तर हो गई। सच में बहुत मजा आया तुम बहुत अच्छा चोदते हो.. कहाँ से सीखा ये सब?

मैं- आप जैसी भाभियों की ही दुआ है। उन्होंने ही सिखाया। भाभी मजा आया हो तो एक राउण्ड और हो जाए। देखो मेरा लण्ड फिर से खड़ा हो गया। इसे एक बार और अपनी चूत की सवारी कर लेने दो।

अब भाभी का उतावलापन देखने लायक था

उन्होंने हँसते हुए फिर से चूत पसार दी मैंने उनकी दोनों टांगों को कन्धे पर रखकर फिर उन्हें दबा कर चोदा और एक बार फिर उनकी चूत तर कर दी।

उसके बाद हम दोनों ने अपने कपड़े पहनने शुरू किए और वापस बारात में आ गए।

यहाँ आकर देखा सब नार्मल था.. किसी को भनक भी नहीं थी कि भाभी मेरे से चुद कर आ गई हैं।

रात में भाभी मेरे पास आई और बोलीं- आज तो बहुत मजा आया.. अब कैसे मिलेंगे। मैं तुमसे और चुदना चाहती हूँ।

मैं बोला- भाभी इसके लिए तो तुम्हें कुछ महीनों के लिए दिल्ली आना पड़ेगा। भाई को कुछ महीने दिल्ली घूमने आने के लिए मना लो, बाक़ी की कसर वहीं पूरी कर दूँगा।

अगले दिन बारात की विदाई के साथ ही हम लोग भी अपने-अपने रास्ते आ गए।

कुछ दिनों के बाद भाभी ने भाई को दिल्ली आने के लिए मना लिया और फिर दिल्ली आकर भाभी ने फोन कर कर बताया कि वो दिल्ली आ चुकी हैं और दो महीनों के लिए अपने बच्चों को सास-ससुर के पास गाँव में छोड़कर और अब आप जल्दी मिलने का जुगाड़ लगा कर मिलने के लिए आओ।

मैं भी अगले ही दिन भाभी से मिलने उनके कमरे में जा पहुँचा और भाई से जान-पहचान बढ़ाई।

आखिर थे तो वो हमारी ही रिश्तेदारी में ही, सो जल्द ही वो मुझसे सध गए।

दो दिन बाद ही मैंने उन्हें अपने रूम में बुलाया और वो आ गए।

भाई पीने के शौकीन थे मैंने उन्हें पिला कर मस्त कर दिया।

भाई बोले- यार तेरी भाभी दिल्ली घूमने के लिए आई है.. पर मेरी तो ड्यूटी ही ऐसी है। इस महीने तो मैं घुमा ही नहीं सकता हूँ.. हाँ अगले महीने से मेरी नाईट-ड्यूटी है, फिर बात बन सकती है। बड़ी टेंशन में हूँ.. यार कैसे करूँ।

मैंने बोला- टेंशन काहे की, ये तो कोई बड़ी बात नहीं है.. अगर आप बुरा ना माने तो मैं उनको घुमा देता हूँ। आखिर भाभी के लिए अपना भी तो कोई फर्ज बनता है।

भाई बाले- अरे ये तो बहुत बढि़या है। तुम इस महीने, अगर तुम्हें टाइम मिले तो कुछ जगह तुम घुमा देना.. बाक़ी जगह अगले महीने मैं घुमा दूँगा.. और हाँ कभी-कभी हमारे रूम के भी चक्कर लगा लेना। दिन में तुम्हारी भाभी अकेली रहेगी.. तो तुम्हारे आने से उसका भी मन लगा रहेगा।

यही तो हम दोनों चाहते थे, अब आने- जाने का रास्ता भी साफ हो गया था।

अगले दिन ही मैं सुबह की ड्यूटी करके सीधा उनके रूम में चला गया।

भाभी ने गले लगाकर मेरा स्वागत किया, मैंने भी जोर से उनके दोनों चूचे दबाकर उन्हें जोर की झप्पी मारी।

भाभी- बड़े उतावले लग रहे हो देवर जी.. आते ही शुरू हो गए।

मैं बोला- भाभी तुम चीज ही ऐसी हो.. तुम्हें देखते ही तुम्हारी लेने को मन करता है।

सुनीता- ओहो ये बात है.. मेरी भी ले लेना.. पहले चाय-नाश्ता तो कर लो।

 
मैं बोला- भाभी मुझे चाय-नाश्ते की नहीं कुछ और ही भूख प्यास लगी है, वो खिला-पिला दो.. मन वैसे ही तृप्त हो जाएगा।

यह कहकर मैंने दरवाजा बंद किया और उनके होंठों पर होंठ रख दिए।

भाभी गर्म होने लगीं और मेरा साथ देने लगीं।

धीरे-धीरे हम दोनों ने अपने कपड़े अपने जिस्म से अलग किए।

क्या लग रही थीं वो.. उन्होंने चुदने की पूरी तैयारी कर रखी थी।

चूत बिल्कुल साफ थी.. एक भी बाल नहीं था भाभी की चिकनी चूत पर।

हम दोनों एक-दूसरे को चूसकर आपस में सुख लेने लगे।

भाभी ने थोड़ी देर लौड़ा चूसने के बाद मुँह से बाहर निकाल लिया- ओह राज चलो.. अब जल्दी से लौड़ा चूत के अन्दर डाल दो। ये तुम्हारा लण्ड लेने को बड़ी तड़फ रही है।

मैं बोला- क्या बात है भाभी दिल्ली आने के बाद भी भाई का नहीं लिया क्या.. जो लण्ड लेने को इतनी उतावली हो?

सुनीता- क्या बताऊँ राज.. उन्हें कहाँ मेरी पड़ी है। कल रात ही ‘उनका’ लिया था। उन्होंने फटाफट लण्ड अन्दर डाला और दस-बारह धक्के मारे और अपना पानी गिराकर करवट बदल कर चुपचाप सो गए। मैंने उन्हें कितना कहा कि मेरा अभी मन कर रहा है, पर वो थकान का बहाना बना गए और मैं सारी रात तड़फती रही। तब से इन्तजार में हूँ कि कब तुम आओ और तुम्हारे लण्ड को अपनी चूत के अन्दर लूँ। अब फटाफट इसे अन्दर पेलकर मेरी चूत की प्यास बुझाओ बाक़ी सब बाद में।

मैंने भी देर करना ठीक नहीं समझा और मैंने उन्हें घोड़ी बनने को कहा।

भाभी घोड़ी बन गईं और मैंने पीछे से लण्ड उनकी चूत में डालकर ‘घपाघप’ उन्हें चोदने लगा। हर धक्के के साथ उनकी कामुक सिसकारियां निकल रही थीं।

‘आहह आहह.. ऐसे ही राज.. आहह आहहह.. और जोर लगाओ.. आहह चूत को तुम्हारे लौड़े से बड़ी शान्ति मिल रही है।’

‘हाँ भाभी ले अन्दर तक ले ले.. आह्ह..’

‘ओह हाई मैय्या चुद गई रे.. ऐ.. हा हा ऐसे ही बड़ा जालिम है रे तेरा लौड़ा.. अन्दर तक मजा देता है.. और जोर से रगड़ो मुझे.. राज सारी ताकत लगा दो..’

मैंने भी गति बढ़ा दी और रगड़ कर उनकी चूत पेलाई करने लगा।

फिर मैंने उसे अपने ऊपर आने को कहा और खुद बिस्तर पर लेट गया। वो मेरे खड़े लौड़े पर बैठ गईं और कमर उछाल-उछाल कर चुदने लगीं।

‘हाय हाय मर गई.. फट गई रे मेरी चूत.. ऐसे तो बड़े अन्दर तक जा रहा है ये.. ओहह आहहह..’

मैं- जोर लगाओ भाभी.. अभी मैं नहीं आप मुझे चोद रही हो। जितनी ताकत है आप में.. उतनी ताकत से मेरे लण्ड की सवारी करो.. तभी आपको और ज्यादा मजा आएगा।

‘आहह राज.. मैं तो बावली हो गई.. इतना मजा मुझे कभी नहीं आया। चूत की सारी खुजली मिट गई.. आहह मैं आने वाली हूँ राज..’

अब वे और जोर-जोर से लण्ड पर उछलने लगीं।

कुछ ही देर में वो लण्ड पर ढेर हो गईं, उनके पानी से मेरा लण्ड तर हो गया था।

सुनीता- राज.. अब मेरे बस की नहीं है। अब तुम ही करो.. मेरी तो इस लण्ड की सवारी में जान ही निकल गई।

मैंने कुछ देर उनकी चूत चाटी और साथ में गांड में उंगली करने लगा।

भाभी- राज अब जाके चूत को सुकून मिला.. अरे ये क्या कर रहे हो दर्द हो रहा है।

मैं- भाभी जैसे आपने मेरी लण्ड की सवारी की है.. मुझे भी आपकी गांड की सवारी करनी है। मैं आपकी गांड मारना चाहता हूँ।

 
सुनीता- राज सोचना भी मत.. नहीं तो तुम्हें मेरी चूत से भी हाथ धोना पड़ेगा। मैं जिन्दगी में कभी गांड नहीं मरवाऊँगी.. ज्यादा जिद मत करना। एक बार तुम्हारे भाई ने मारी थी.. पूरा हफ्ता ढंग से टट्टी भी नहीं कर पाई थी। तुम चूत मारो बस.. जितनी मारनी है।

वो गुस्सा हो गईं.. मैंने भी सोचा कहीं गांड के चक्कर में चूत से भी हाथ ना धोना पड़ जाए.. इसलिए मन मार लिया और माफी माँगकर अपना कड़क लण्ड उनके मुँह में दे दिया।

उन्होंने उसे अच्छी तरह से चूस कर गीला कर दिया।

मैंने उन्हें लिटाकर उनकी टांगें अपने कन्धों पर रखी और गीला लण्ड उनकी चूत में उतार दिया।

फिर उनकी ठुकाई शुरू हो गई, पूरा कमरा हम दोनों की आवाजों से गूजने लगा, चूत और लण्ड एक-दूसरे को हराने में लगे हुए थे।

मैंने उन्हें हचक कर चोदा और अन्त में अपने वीर्य की पिचकारियां उनकी चूत में मार दीं।

सुनीता- आहह मजा आ गया राज.. अब इसी तरह पूरे दो महीने मुझे चोदते रहना। मैं तुमसे ही चुदने के लिए यहाँ आई हूँ.. कोई दिल्ली घूमना नहीं.. बस तुम्हारे लण्ड की सवारी करनी है मुझे। इन दो महीनों में अपने इस झूले पर जितना झुला सकते हो, झुला दो मुझे!

मैं- भाभी आपको शिकायत का कोई मौका नहीं मिलेगा.. मैं आपकी चूत की सैर करूँगा और आपको भी करवाऊँगा।

इस तरह पूरे एक महीने मैंने उनकी कभी उनके रूम में.. कभी घूमने के बहाने लाकर अपने रूम में जमकर चुदाई की।

दूसरे महीने भाई की नाइट ड्यूटी के कारण कम टाइम मिला, पर मौका निकाल कर हम दोनों अपनी हवस शान्त कर ही लेते थे।

रात में उनके साथ सोने को उनके पड़ोस की भाभी आती थीं.. जिससे उन्होंने अच्छी दोस्ती बना ली थी।

दो महीने रहने के बाद भाभी अपने गांव वापस चली जाने वाली थीं.. पर वो जाने से पहले मेरे लण्ड का जुगाड़ बना कर गईं। मैं उनकी मदद से उनके बगल में रहने वाली भाभी को चोद सका।

यह सब हुआ यूं कि भाभी को एक महीना लगातार चोदने के बाद एक दिन उन्हें चोदते हुए मैंने भाभी से कहा- भाभी आपने मेरे लण्ड की आदत खराब कर दी है। अगले महीने तो आप चली जाओगी, फिर मेरे लण्ड का क्या होगा। जाने पहले इसका कुछ इन्तजाम तो करती जाओ।

वो बोलीं- मुझे पता है मेरे चोदू देवर कि मैंने तुम्हारे लण्ड को बिगाड़ दिया है। इसे चूत का चस्का लग गया है। मैंने इसका जुगाड़ बना दिया है.. तुम्हें मेरे जाने के बाद भी चूत मिलेगी। पर तब तक तुम्हें मुझे ही चोदना पड़ेगा। मेरे जाने के बाद ही उस दूसरी चूत में लण्ड लगाना।

मैं- अरे वाह मेरी जान.. पर कैसे और किसकी।

भाभी- पहले वादा करो कि मेरे जाने के बाद ही उसकी लोगे। मैं जब तक यहाँ हूँ तुम्हारे लण्ड को किसी से नहीं बांट सकती.. वो बस मेरी ही चूत में चाहिए।

मैं- भाभी वादा रहा, आपके जाने से पहले उसे हाथ तक नहीं लगाऊँगा। अब तो बता दो कौन है वो?

फिर भाभी बताने लगीं- पिछले महीने से ही मैंने अपने पड़ोस की भाभी से दोस्ती की है.. जब तुम नहीं होते तो हम दोनों आपस में गप्पें लड़ाते हैं। बातों-बातों में उसने बताया कि उसका पति मार्केटिंग में है.. इसलिए ज्यादातर बाहर ही रहता है और जब घर में भी होता है तो काम का बहाना बना कर उसे ज्यादा नहीं चोद पाता है।

बस तभी मैंने उसे तुम्हारे लिए पटाने की सोची और उसे बता दिया कि कैसे शादी में तुमने मुझे चोदा था और तुम्हारे ही कहने पर मैं दिल्ली आई हूँ और अब यहाँ जब भी समय मिलता है मैं तुमसे खूब चुदवाती हूँ। मैं रोज उसकी चूत की भूख बढ़ाने लगी। आखिर वो बेचारी कब तक सहन करती और उसने मुझसे कह ही दिया कि वो भी तुमसे चुदना चाहती है। अब खुश हो तुम?

मैं- वाह भाभी.. आपने तो आज लौड़े को खुश कर दिया।

यह कहकर मैं नई चूत मिलने की सोचकर उन्हें और जोर से चोदने लगा।

थोड़ी ही देर में मेरी सारी खुशी उनकी चूत में बह गई।

भाभी ने अगले ही दिन उससे मेरी मुलाकात करवा दी। उसका नाम कंचन था। उम्र 25 साल, वो एक बच्चे की माँ थी। वो देखने में बहुत सुन्दर थीं.. या ये कहो चोदने लायक माल थीं। उनकी जवानी ने उन्हें देखते ही मेरा लण्ड खड़ा कर दिया था।

पर भाभी को वादा किया था, निभाना तो था ही.. आखिर ये माल उन्हीं ने मेरे लिए पटाया था।

मैंने उससे कहा- देखो भाभी आपको मुझे अपने बगल में रूम दिलाना पड़ेगा। ऐसे तो हम पकड़े जाएंगे। ये तो मेरी गाँव की भाभी हैं.. इसलिए यहाँ आकर इन्हें चोदने में तो मुझे कोई कुछ नहीं कर सकता.. पर मैं आपको दिन में नहीं चोद सकता इसलिए बगल में रूम का जुगाड़ करो। तब तक मैं आपको चोदूँगा भी नहीं।

उससे दूर रहने का यही एक बहाना था।

सुनीता भाभी मेरी बातों से खुश हो गईं और इस महीने जब भी टाइम लगा उनकी खूब चुदाई की।

उधर कंचन ने मेरे लिए कमरा ढूँढ ही लिया।

तब तक भाभी गाँव चली गईं।

उनके गाँव जाने के बाद अब मुझे कंचन की ही लेनी थी, तो मैंने भी कमरा चेन्ज कर लिया और उनके बगल मेंआ गया। कुछ ही दिनों में वहाँ सबसे जान-पहचान हो गई, पर उसे चोदने का मौका नहीं मिल पा रहा था।

आगे आपको बताऊँगा कि मेरे लौड़े को कंचन भाभी की चूत का स्वाद कैसे मिला।

 
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