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मेरा नाम सलील है, मैं 22 साल का गोरा, स्मार्ट दिखने वाला लड़का हूँ। मैं मूल रूप से पुणे का रहने वाला हूँ लेकिन फिलहाल मुम्बई में अकेला रह रहा हूँ।
लड़कियाँ कहती हैं कि मुझमें कुछ बात है जो उन्हें मेरी तरफ आकर्षित करती है। मेरे लण्ड की लम्बाई सात इंच तथा मोटाई तीन इंच है। मेरा शरीर गठीला है क्योंकि कॉलेज के शुरूआती दिनों से ही मुझे कसरत का शौक रहा है। और मुझे चुदाई करने में बड़ा मजा आता है, वैसे चोदने में तो सबको मजा आता है।
हुआ कुछ यों कि अप्रैल में मैं अपना मूड फ्रेश करने के लिए अपनी नानी के गाँव एक हफ़्ते की छुट्टी लेकर गया। मेरी नानी करीब 80 साल से ऊपर की होंगी। गाँव में नानी जी, मेरे मामा जी, मामी जी और उनका एक लड़का यानि मेरे बड़े भाई जिनकी उम्र करीब 30 साल है, उनकी पत्नी यानि मेरी भाभी जिनकी उम्र 25 के लगभग है और उसके 2 लड़के राजू और सोनू जो दूसरी और तीसरी कक्षा में हैं, रहते हैं।
भाभी का रंग गेहुंआ है या फिर कहें कि वो गाँव की साँवली सलोनी है, बदन सामान्य और उनका कद भी ज़्यादा नहीं है, लेकिन एकदम मस्त माल हैं वो! पूरा शरीर मस्त जवानी से भरा हुआ है उनका!
मैं गाँव पहुँचा तो मुझे वहाँ जाकर गाँव के माहौल में बड़ा अच्छा लगा। गाँव की हरियाली, सड़क के किनारे लगे बड़े बड़े पेड़, लंबे-चौड़े खेत और घना जंगल, दिल को खुश कर देता था।
तो मैं दोपहर में नानी जी के घर पहुँचा, मामा जी और बड़े भैया खेतों में जा चुके थे क्योंकि इन दिनों गेहूँ की फ़सल की कटाई का काम चल रहा था तो खेत में ज़्यादा काम होता था।
गर्मी धीरे धीरे अपने शवाब में चढ़ रही थी और गाँव में बिजली ना होने की वजह से मुझे बहुत गर्मी लग रही थी। मैंने मामी जी से कहा- मुझे नहाना है!
तो उन्होंने कहा- ठीक है, 5-10 मिनट रूको, फिर नदी में नहाने चले जाना!
नदी घर से पीछे ही कुछ दूरी पर है।
मैंने अपने अंडरगार्मेंट्स और तौलिया लिया और निकल पड़ा नदी की ओर नहाने के लिए। नदी के उस पार बहुत घना जंगल है जहाँ पर कभी कभी कुछ फ़ल और लकड़ी वगैरह लेने के लिए गाँव वाले जाते हैं।
तो मैं नदी के ठंडे-ठंडे पानी में जी भर के नहाया और करीब एक घंटे बाद घर लौटा।
घर लौटने पर दोपहर का खाना तैयार रखा हुआ था, मामी जी ने कहा- सलील, खाना खा लो और उसके बाद अपने मामा और भैया को खाना देने के लिए मेरे साथ खेत चलना और घूम भी लेना!
भाभी ने मुझे खाना परोसा, और साथ में नींबू का अचार भी दिया। नींबू का अचार मुझे बड़ा स्वादिष्ट लगा, तो मैंने भाभी से कहा- भाभी जब मैं घर जाऊँगा तो ये वाला अचार मुझे घर के लिए भी देना।
तो भाभी ने कहा- भैया, यह अचार तो ख़त्म होने वाला है, मैं तुम्हारे लिए दूसरा बना दूँगी।
तब मैंने कहा- ठीक है।
और लंच ख़त्म करके मामी जी के साथ खाना लेकर खेत चला गया और फिर सबके साथ ही शाम को घर लौटा। गर्मी की दोपहर की दिन भर की तपन से घर के अंदर बहुत गर्म लग रहा था और आप लोगो को तो पता ही है कि गाँवों में बिजली तो बहुत कम ही रहती है जिससे पंखे कूलर चल नहीं सकते! लेकिन गाँव में रहने का एक फ़ायदा यह है कि घर के बाहर गर्मियों में मौसम एकदम ठंडा जाता है।
तो हम सब लोग घर के बाहर आँगन में खाट पर बैठ गये, मामी और भाभी रात के खाने की तैयारी में लग गई और मैं सोनू और राजू नानी जी मामा और भैया के साथ गाँव की गर्मियों की ठंडी शाम का मज़ा ले रहे थे।
रात को सबने खाना खाया और सोने की तैयारी करने लगे। मैं घर के बाहर ही मामा जी के साथ खाट में सोया, बड़ा मस्त लग रहा था बाहर सोने में!
दूसरे दिन सुबह करीब 9 बजे नानी जी ने मुझे उठाया। मामा जी और भैया रोज़ की तरह सुबह जल्दी ही खेत के लिए जा चुके थे, भाभी ने चाय लाकर दी और कहा- भैया, आपको नींबू का अचार घर ले जाना है ना तो सोनू और राजू के साथ जंगल जाकर नींबू तोड़ लाओ।
मैंने कहा- ठीक है!
इस पर मामी जी ने कहा- बच्चों के साथ इसे जंगल क्यों भेज रही हो, सोनू और राजू तो वैसे भी कितने शरारती हैं, और सलील को जंगल के बारे में कुछ पता नहीं हैं, कहीं कोई परेशानी में ना पड़ जाए ये लोग!
तो मैंने कहा- नहीं मामी जी, मैं जंगल जाऊँगा।
तो मामी जी ने कहा- ठीक है तुम भाभी के साथ जंगल जाना।
इस पर भाभी ने कहा- मैं जंगल गई तो घर के काम कौन करेगा?
तो मामी जी ने कहा- मैं कर लूँगी, तू आज नींबू ले आ अचार के लिए!
इतना सुनते ही भाभी के चेहरे पर मुझे कुछ अजीब सी मुस्कान दिखाई दी, शायद उन्हें आज घर के कामों से छुट्टी तो मिल गई थी। फिर मामी जी ने कहा- सलील जल्दी से नहा लो और नाश्ता करके नींबू लेने जल्दी चले जाओ! ज़्यादा देर मत करना क्योकि जंगल में बहुत टाइम लगता है, तुम लोगों को लौटने में देर हो जाएगी।
मैंने वैसा ही किया और लगभग 11 बजे करीब मैं और भाभी एक बड़ा सा झोला लेकर जंगल की तरफ निकल पडे
लड़कियाँ कहती हैं कि मुझमें कुछ बात है जो उन्हें मेरी तरफ आकर्षित करती है। मेरे लण्ड की लम्बाई सात इंच तथा मोटाई तीन इंच है। मेरा शरीर गठीला है क्योंकि कॉलेज के शुरूआती दिनों से ही मुझे कसरत का शौक रहा है। और मुझे चुदाई करने में बड़ा मजा आता है, वैसे चोदने में तो सबको मजा आता है।
हुआ कुछ यों कि अप्रैल में मैं अपना मूड फ्रेश करने के लिए अपनी नानी के गाँव एक हफ़्ते की छुट्टी लेकर गया। मेरी नानी करीब 80 साल से ऊपर की होंगी। गाँव में नानी जी, मेरे मामा जी, मामी जी और उनका एक लड़का यानि मेरे बड़े भाई जिनकी उम्र करीब 30 साल है, उनकी पत्नी यानि मेरी भाभी जिनकी उम्र 25 के लगभग है और उसके 2 लड़के राजू और सोनू जो दूसरी और तीसरी कक्षा में हैं, रहते हैं।
भाभी का रंग गेहुंआ है या फिर कहें कि वो गाँव की साँवली सलोनी है, बदन सामान्य और उनका कद भी ज़्यादा नहीं है, लेकिन एकदम मस्त माल हैं वो! पूरा शरीर मस्त जवानी से भरा हुआ है उनका!
मैं गाँव पहुँचा तो मुझे वहाँ जाकर गाँव के माहौल में बड़ा अच्छा लगा। गाँव की हरियाली, सड़क के किनारे लगे बड़े बड़े पेड़, लंबे-चौड़े खेत और घना जंगल, दिल को खुश कर देता था।
तो मैं दोपहर में नानी जी के घर पहुँचा, मामा जी और बड़े भैया खेतों में जा चुके थे क्योंकि इन दिनों गेहूँ की फ़सल की कटाई का काम चल रहा था तो खेत में ज़्यादा काम होता था।
गर्मी धीरे धीरे अपने शवाब में चढ़ रही थी और गाँव में बिजली ना होने की वजह से मुझे बहुत गर्मी लग रही थी। मैंने मामी जी से कहा- मुझे नहाना है!
तो उन्होंने कहा- ठीक है, 5-10 मिनट रूको, फिर नदी में नहाने चले जाना!
नदी घर से पीछे ही कुछ दूरी पर है।
मैंने अपने अंडरगार्मेंट्स और तौलिया लिया और निकल पड़ा नदी की ओर नहाने के लिए। नदी के उस पार बहुत घना जंगल है जहाँ पर कभी कभी कुछ फ़ल और लकड़ी वगैरह लेने के लिए गाँव वाले जाते हैं।
तो मैं नदी के ठंडे-ठंडे पानी में जी भर के नहाया और करीब एक घंटे बाद घर लौटा।
घर लौटने पर दोपहर का खाना तैयार रखा हुआ था, मामी जी ने कहा- सलील, खाना खा लो और उसके बाद अपने मामा और भैया को खाना देने के लिए मेरे साथ खेत चलना और घूम भी लेना!
भाभी ने मुझे खाना परोसा, और साथ में नींबू का अचार भी दिया। नींबू का अचार मुझे बड़ा स्वादिष्ट लगा, तो मैंने भाभी से कहा- भाभी जब मैं घर जाऊँगा तो ये वाला अचार मुझे घर के लिए भी देना।
तो भाभी ने कहा- भैया, यह अचार तो ख़त्म होने वाला है, मैं तुम्हारे लिए दूसरा बना दूँगी।
तब मैंने कहा- ठीक है।
और लंच ख़त्म करके मामी जी के साथ खाना लेकर खेत चला गया और फिर सबके साथ ही शाम को घर लौटा। गर्मी की दोपहर की दिन भर की तपन से घर के अंदर बहुत गर्म लग रहा था और आप लोगो को तो पता ही है कि गाँवों में बिजली तो बहुत कम ही रहती है जिससे पंखे कूलर चल नहीं सकते! लेकिन गाँव में रहने का एक फ़ायदा यह है कि घर के बाहर गर्मियों में मौसम एकदम ठंडा जाता है।
तो हम सब लोग घर के बाहर आँगन में खाट पर बैठ गये, मामी और भाभी रात के खाने की तैयारी में लग गई और मैं सोनू और राजू नानी जी मामा और भैया के साथ गाँव की गर्मियों की ठंडी शाम का मज़ा ले रहे थे।
रात को सबने खाना खाया और सोने की तैयारी करने लगे। मैं घर के बाहर ही मामा जी के साथ खाट में सोया, बड़ा मस्त लग रहा था बाहर सोने में!
दूसरे दिन सुबह करीब 9 बजे नानी जी ने मुझे उठाया। मामा जी और भैया रोज़ की तरह सुबह जल्दी ही खेत के लिए जा चुके थे, भाभी ने चाय लाकर दी और कहा- भैया, आपको नींबू का अचार घर ले जाना है ना तो सोनू और राजू के साथ जंगल जाकर नींबू तोड़ लाओ।
मैंने कहा- ठीक है!
इस पर मामी जी ने कहा- बच्चों के साथ इसे जंगल क्यों भेज रही हो, सोनू और राजू तो वैसे भी कितने शरारती हैं, और सलील को जंगल के बारे में कुछ पता नहीं हैं, कहीं कोई परेशानी में ना पड़ जाए ये लोग!
तो मैंने कहा- नहीं मामी जी, मैं जंगल जाऊँगा।
तो मामी जी ने कहा- ठीक है तुम भाभी के साथ जंगल जाना।
इस पर भाभी ने कहा- मैं जंगल गई तो घर के काम कौन करेगा?
तो मामी जी ने कहा- मैं कर लूँगी, तू आज नींबू ले आ अचार के लिए!
इतना सुनते ही भाभी के चेहरे पर मुझे कुछ अजीब सी मुस्कान दिखाई दी, शायद उन्हें आज घर के कामों से छुट्टी तो मिल गई थी। फिर मामी जी ने कहा- सलील जल्दी से नहा लो और नाश्ता करके नींबू लेने जल्दी चले जाओ! ज़्यादा देर मत करना क्योकि जंगल में बहुत टाइम लगता है, तुम लोगों को लौटने में देर हो जाएगी।
मैंने वैसा ही किया और लगभग 11 बजे करीब मैं और भाभी एक बड़ा सा झोला लेकर जंगल की तरफ निकल पडे