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सभी पाठकों को मेरा नमस्कार, पाठिकाओं को मेरे खड़े लंड का सलाम! मैं सलील आपके समक्ष फिर से हाजिर हूँ! मेरी उम्र तीस साल है मैं मकानों की ठेकेदारी करता हूँ। सेक्स करने का शौक 20 साल की उम्र से है सेक्स के लिए साथी भी मिल जाते हैं बड़े सरल तरीके से, बस धैर्य और इंतजार सबसे ज्यादा जरुरी है।
किसी के पीछे एकदम से नहीं लग जाना चाहिए, उसे भी सोचने का समय देना चाहिए।
मैं पहले से शहर में किराये का मकान में रहता था, शादी के 2 माह बाद मैं बीवी को लेकर उसी मकान में आ गया। जिस मकान में मैं ऊपर की मंजिल में रहता था, वहाँ एक और दंपत्ति किराये पर रहने कुछ समय पहले ही आये थे, पति रमेश, पत्नी नीतू और एक 5 वर्ष का बच्चा मोनू।
हम दोनों किरायेदारों के पास 2-2 कमरे थे, आगे की ओर छत थी जिस पर एक बाथरूम एक टोयलेट बना था जिसे हम दोनों किरायदार इस्तेमाल करते थे, छत की सफाई भी मिलकर एक एक दिन करते थे। छत पर हमारे कमरों का मुख्य दरवाजा खुलता था जो आगे के कमरा का था दरवाजे के साथ खिड़की भी थी जिससे रोशनी और हवा आती रहती थी। हमारे पड़ोसी किरायेदार रमेश स्कूल में टीचर थे, बच्चा मोनू नर्सरी में पढ़ता था, नीतू घर का काम देखती थी।
नीतू लगभग 24 वर्ष की बहुत ही सुन्दर महिला थी जिसका फिगर 34-28-36 होगा। जितने बड़े मोम्मे उनसे बड़े गांड के बड़े बड़े खरबूजे, जो चलते समय ऐसे मटकते थे कि दिल की धड़कन थम जाये। रंग गोरा, नैन कजरारे लेकिन शक्ल से भोली होने के बाद भी नीतू थी बहुत ही चालाक, अपना काम निकालना उसे बहुत अच्छी तरह आता था।
अक्सर नीतू मुझसे रूपये उधार मांगने आ जाती, मेरे पास अगर हुए तो दे दिए नहीं तो मना कर दिया। परन्तु उसको इसमें कभी शर्म महसूस नहीं हुई। वो मेरी बीवी के पास भी आकर बैठी रहती थी, कभी कभी मुझसे भी बात कर लेती, कभी हल्की-फुल्की मजाक भी कर लेती, जबकि उसका पति बहुत ही सीधा और शरीफ है। नीतू लालची किस्म की औरत थी अक्सर मियाँ-बीवी में रूपये-पैसे को लेकर झगड़ा होता रहता था, रमेश नीतू की मांग कभी पूरी नहीं कर पाता था।
मेरी बीवी से भी खूबसूरत होने के कारण मेरा मन हमेशा नीतू के दीदार को तरसता रहता था, उसको चोदने के सपने खुली आँखों से देखता रहता था।
उसका मर्द सुबह साढ़े सात बजे बच्चे को स्कूल लेकर जाता और दोपहर 1:30 पर घर लौटता।
एक दिन सुबहे दस बजे मैं नहाने जा रहा था, मेरी बीवी बोली- मैं बजरिया से सब्जी लेकर आती हूँ!
मैंने कहा- ठीक है!
नहाकर बाथरूम से बाहर निकला तो बाहर ही नीतू खड़ी थी, मैं तौलिया लपेटे था, कुछ झिझक सी लगी पर सोचा कि मौका अच्छा है, मैं उसे देख कर हंस दिया तो वो हंस कर बोली- सलील जी फेरी वाला बहुत ही अच्छी साड़ी लेकर आया है, आप भाभी जी के लिए खरीद लो।
तो मैंने मना कर दिया तो बोली- मुझे साड़ी पसंद है, प्लीज़ मुझे हज़ार रूपये उधार दे दो, तीन चार दिन में इनकी तनख्वाह मिलेगी तो लौटा दूंगी।
मैंने मौका देखकर कहा- अन्दर आओ, देता हूँ!
लेकिन वो दरवाजे के बाहर ही खड़ी रही, अन्दर नहीं आई।
मैंने सोचा था कि रूपये देते वक्त तौलिया खिसका दूँगा, मुझे नंगा देखकर कुछ बात बन जाएगी पर वो तो अन्दर ही नहीं आई। मैंने रूपये बाहर आकर दे दिए, उसने साड़ी खरीद ली।
तब तक मैं कपड़े पहन चुका था, मेरी बीवी को आने में 20-25 मिनट लग सकते थे तो मैं सीधा नीतू के कमरे चला गया, पूछा- ले ली साड़ी?
वो बोली- हाँ!
और साड़ी दिखाने लगी।
मैंने कहा- भाभी जी, पहन कर दिखाओ तो कोई बात है!
तो कहने लगी- तुम्हें क्यूँ दिखाऊँ? अपने पति को दिखाऊँगी!
मैं अपना सा मुँह लेकर आ गया, उसने मेरी और कोई तवज्जो नहीं दिया। मैंने ठान लिया कि चाहे कोई भी रास्ता अपनाना पड़े, इसकी चुत मारकर ही रहूँगा। उस दिन से ही योजना बनाने लगा कि कैसे इसे नंगा करूँ और इसके यौवन का रसपान करूँ।
रक्षाबंधन पर मेरी बीवी मायके चली गई 6-7 दिन के लिए। दो दिन तो योजना बनाने में निकल गए। हाँ, इन दो दिनों मैंने खिड़की की झिरी से उसे झाड़ू लगाते हुए देखा, उसे लगता था कि मैं सोया हुआ होऊँगा तो वह छत पर झाड़ू लगाते वक्त पूरी निश्चिंत रहती थी कि उसे कोई देख नहीं रहा होगा इसलिए बड़े ही लापरवाह तरीके से पल्लू को कमर में लपेट कर साड़ी को ऊपर चढ़ाकर कमर में खोंस कर छत की सफाई करती थी। बड़े गले के ब्लाऊज़ से उसके दिखते हुए बड़े बड़े दूध संतरे से बड़े आकार के थे, घुटनों तक चढ़ी हुई साड़ी से उसकी मखमली जांघें देखकर मेरा मन ललचा जाता।
जब वो चली जाती तो मैं बाथरूम में घुस जाता और मुठ मारकर ही बाथरूम से बाहर आता था। आखिर मैंने एक तरकीब सोच ही ली, अब जो होगा देखा जायेगा।
किसी के पीछे एकदम से नहीं लग जाना चाहिए, उसे भी सोचने का समय देना चाहिए।
मैं पहले से शहर में किराये का मकान में रहता था, शादी के 2 माह बाद मैं बीवी को लेकर उसी मकान में आ गया। जिस मकान में मैं ऊपर की मंजिल में रहता था, वहाँ एक और दंपत्ति किराये पर रहने कुछ समय पहले ही आये थे, पति रमेश, पत्नी नीतू और एक 5 वर्ष का बच्चा मोनू।
हम दोनों किरायेदारों के पास 2-2 कमरे थे, आगे की ओर छत थी जिस पर एक बाथरूम एक टोयलेट बना था जिसे हम दोनों किरायदार इस्तेमाल करते थे, छत की सफाई भी मिलकर एक एक दिन करते थे। छत पर हमारे कमरों का मुख्य दरवाजा खुलता था जो आगे के कमरा का था दरवाजे के साथ खिड़की भी थी जिससे रोशनी और हवा आती रहती थी। हमारे पड़ोसी किरायेदार रमेश स्कूल में टीचर थे, बच्चा मोनू नर्सरी में पढ़ता था, नीतू घर का काम देखती थी।
नीतू लगभग 24 वर्ष की बहुत ही सुन्दर महिला थी जिसका फिगर 34-28-36 होगा। जितने बड़े मोम्मे उनसे बड़े गांड के बड़े बड़े खरबूजे, जो चलते समय ऐसे मटकते थे कि दिल की धड़कन थम जाये। रंग गोरा, नैन कजरारे लेकिन शक्ल से भोली होने के बाद भी नीतू थी बहुत ही चालाक, अपना काम निकालना उसे बहुत अच्छी तरह आता था।
अक्सर नीतू मुझसे रूपये उधार मांगने आ जाती, मेरे पास अगर हुए तो दे दिए नहीं तो मना कर दिया। परन्तु उसको इसमें कभी शर्म महसूस नहीं हुई। वो मेरी बीवी के पास भी आकर बैठी रहती थी, कभी कभी मुझसे भी बात कर लेती, कभी हल्की-फुल्की मजाक भी कर लेती, जबकि उसका पति बहुत ही सीधा और शरीफ है। नीतू लालची किस्म की औरत थी अक्सर मियाँ-बीवी में रूपये-पैसे को लेकर झगड़ा होता रहता था, रमेश नीतू की मांग कभी पूरी नहीं कर पाता था।
मेरी बीवी से भी खूबसूरत होने के कारण मेरा मन हमेशा नीतू के दीदार को तरसता रहता था, उसको चोदने के सपने खुली आँखों से देखता रहता था।
उसका मर्द सुबह साढ़े सात बजे बच्चे को स्कूल लेकर जाता और दोपहर 1:30 पर घर लौटता।
एक दिन सुबहे दस बजे मैं नहाने जा रहा था, मेरी बीवी बोली- मैं बजरिया से सब्जी लेकर आती हूँ!
मैंने कहा- ठीक है!
नहाकर बाथरूम से बाहर निकला तो बाहर ही नीतू खड़ी थी, मैं तौलिया लपेटे था, कुछ झिझक सी लगी पर सोचा कि मौका अच्छा है, मैं उसे देख कर हंस दिया तो वो हंस कर बोली- सलील जी फेरी वाला बहुत ही अच्छी साड़ी लेकर आया है, आप भाभी जी के लिए खरीद लो।
तो मैंने मना कर दिया तो बोली- मुझे साड़ी पसंद है, प्लीज़ मुझे हज़ार रूपये उधार दे दो, तीन चार दिन में इनकी तनख्वाह मिलेगी तो लौटा दूंगी।
मैंने मौका देखकर कहा- अन्दर आओ, देता हूँ!
लेकिन वो दरवाजे के बाहर ही खड़ी रही, अन्दर नहीं आई।
मैंने सोचा था कि रूपये देते वक्त तौलिया खिसका दूँगा, मुझे नंगा देखकर कुछ बात बन जाएगी पर वो तो अन्दर ही नहीं आई। मैंने रूपये बाहर आकर दे दिए, उसने साड़ी खरीद ली।
तब तक मैं कपड़े पहन चुका था, मेरी बीवी को आने में 20-25 मिनट लग सकते थे तो मैं सीधा नीतू के कमरे चला गया, पूछा- ले ली साड़ी?
वो बोली- हाँ!
और साड़ी दिखाने लगी।
मैंने कहा- भाभी जी, पहन कर दिखाओ तो कोई बात है!
तो कहने लगी- तुम्हें क्यूँ दिखाऊँ? अपने पति को दिखाऊँगी!
मैं अपना सा मुँह लेकर आ गया, उसने मेरी और कोई तवज्जो नहीं दिया। मैंने ठान लिया कि चाहे कोई भी रास्ता अपनाना पड़े, इसकी चुत मारकर ही रहूँगा। उस दिन से ही योजना बनाने लगा कि कैसे इसे नंगा करूँ और इसके यौवन का रसपान करूँ।
रक्षाबंधन पर मेरी बीवी मायके चली गई 6-7 दिन के लिए। दो दिन तो योजना बनाने में निकल गए। हाँ, इन दो दिनों मैंने खिड़की की झिरी से उसे झाड़ू लगाते हुए देखा, उसे लगता था कि मैं सोया हुआ होऊँगा तो वह छत पर झाड़ू लगाते वक्त पूरी निश्चिंत रहती थी कि उसे कोई देख नहीं रहा होगा इसलिए बड़े ही लापरवाह तरीके से पल्लू को कमर में लपेट कर साड़ी को ऊपर चढ़ाकर कमर में खोंस कर छत की सफाई करती थी। बड़े गले के ब्लाऊज़ से उसके दिखते हुए बड़े बड़े दूध संतरे से बड़े आकार के थे, घुटनों तक चढ़ी हुई साड़ी से उसकी मखमली जांघें देखकर मेरा मन ललचा जाता।
जब वो चली जाती तो मैं बाथरूम में घुस जाता और मुठ मारकर ही बाथरूम से बाहर आता था। आखिर मैंने एक तरकीब सोच ही ली, अब जो होगा देखा जायेगा।