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पापा से पूछ कर माँ को चोदा
राहुल एक २० साल का नौजवान था. वह एक बहुत अमीर घर का इकलौता लडका था. उसके पापा का नाम राकेश और मम्मी का नाम श्वेता था. श्वेता की उमर ४६ साल की थी और राकेश की ५३ साल. राकेश का रिअल इस्टेट का बडा बिझनेस था. श्वेता अपने आप को बहुत फिट रखती थी और उसने अपनी खूबसूरती को अच्छी तरह से मेन्टेन किया था. उसे देखकर ऐसा लगता नही था कि वह एक २० साल के लडके की माँ है, बल्कि वह एक ३० साल की सेक्सी औरत लगती थी. श्वेता और राहुल को साथ देखकर कई लोगो को वह दोनो भाई-बहन लगते थे. श्वेता का बदन पूरा शेप मे था, बूब्स से लेकर कमर तक और कमर से लेके गान्ड तक. अपनी सुन्दरता पर उसे बहुत गर्व था, वह अक्सर फॅशनेबल कपडे पहनती थी.
राहुल का अपने कोलेज मे एक रितु नामकी लडकी के साथ चक्कर था. रितु की उमर १९ साल थी और वो और राहुल दोनो एक दूसरे को बहुत प्यार करते थे. पर रितु एक साधारन परिवार से थी.
राहुल के मम्मी पापा को राहुल के रितु के साथ चक्कर की भनक लग गई. राहुल की मम्मी श्वेता के दिमाग मे यही था कि ये एक गरीब परिवार कि लडकी है जो राहुल जैसे अमीर लडके को फसा कर उसकी दौलत हडपना चाहती है. उसने रितु के बारे मे पता लगाया और उसे मिलने के लिये बुलाया. जब वो रितु से मिली तो उसने रितु को खूब खरी खोटी सुनाई और उसे राहुल से मिलने के लिए मना कर दिया. रितु एक बहुत ही शान्त और अच्छे स्वभाव की लडकी थी और उसके दिमाग कोई गलत खयाल नही था. वह श्वेता के इस बर्ताव से बहुत डर गई और उनके घर से रोते हुए चली गई. राहुल घर आने के बाद श्वेता ने उससे झूठ ही कह दिया कि रितु उसके घर पर आई थी और वह यह कह गई कि वह किसी और लडके से प्यार करती है. राहुल अपनी मम्मी की हर बात मानता था तो उसने इस बात पर भी विश्वास कर लिया.
उसके बाद वो बहुत दिनो तक कोलेज नही गया और न ही रितु के फोन या मेसेज का कोई जवाब दिया. काफी दिनो बाद जब वो कोलेज गया तो उसे पता चला कि रितु की एक सडक हादसे मे मौत हो गई थी. राहुल को इस बात से कुछ दुख जरूर हुआ, उसने घर आने पर ये बात अपनी मम्मी को भी बताई. लेकिन उन्होने इस बात को ज्यादा सिरिअसली नही लिया और इस बात को भूल जानेकी सलाह दे दी.
पर रितु की मौत के कुछ दिन बाद ही राहुल की मम्मी श्वेता की तबियत बहुत खराब हो गई. वह एक तरह से पागल सी हो गई थी. राहुल जब भी कमरे मे अपनी मम्मी के साथ अकेला होता था तो वो उसे कस कर गले लगा लेती थी, कभी पीछे से आकर अपने बेटे को पकड लिया करती थी. एक दो बार तो राहुल की मम्मी ने अपने बेटे को किस करने की कोशिश भी की और कई बार उसके लन्ड को भी सहलाया. राहुल इन हरकतो से बहुत डर सा गया था और वो अपनी मम्मी के अब पास भी नही आता था. राहुल और उसके पिता ने उसे कई अच्छे से अच्छे डाक्टरोके पास ले जाकर दिखाया पर कुछ नही हुआ. श्वेता की हालत वैसे ही बनी रही. फिर उन्हे किसी ने सलाह दी कि उन्हे एक पन्डित के पास दिखाना चाहिए तो राहुल और उसके पापा श्वेता को उनके एक जाने माने पन्डित के पास ले गये.
पन्डित ने श्वेता को देखते ही बता दिया कि इस पर एक अशुभ साया है. राहुल और उसके पापा घबरा गये. उन्होने पन्डित से कहा कि इसका क्या इलाज है. पन्डित ने कहा कि तुम इस शनिवार को मेरे पास ले आना, उस दिन इसका इलाज खुद इसी के मुह से सुन लेना.
वैसे तो राहुल और उसके पिता बहुत मॉडर्न विचारोके थे लेकिन श्वेता की बीमारी ने सबको हैरान करके छोड था. बडे से बडे स्पेशालिस्ट अगर हार चुके थे तो यह नुस्खा अपनाने मे क्या हर्ज होगा यह सोचकर वो दोनो पन्डित की बात मान गए.
उन्होने अपने घर की नौकरानी को श्वेता का खयाल रखने के लिये रखा था, श्वेता की बीमारी की बात उन्होने घर के बाहर किसी को नही बताई थी.
पन्डितके यहा से लौट आनेपर रात के वक्त राहुल अपने कमरे मे सो रहा था. उसके कमरे के दरवाजे पर एक दस्तक हुई. उसने दरवाजा खोला तो वहा पर उसकी मम्मी थी जो दरवाजा खुलनेपर एकदम कमरे के अन्दर आ गई और दरवाजा बन्द कर दिया. फिर उसने राहुल को गले से लग लिया और उसके होठो को चूमने की कोशिश करने लग गई और अपने हाथ को राहुल के लन्ड पर मसलने लग गई. राहुल ने इसका विरोध किया और अपनी मम्मी को एक झटके के साथ दूर किया. राहुल ने ढकेलनेपर श्वेता धम्म से बेड पर गिर गई और बेहोश हो गई. राहुल ने अपनी मम्मी की साँसे चेक की, वो तो चल रही थी. उसने किसी को न जगाते हुए अपनी मम्मी को उठाकर उनके कमरे मे ले जाकर बेड पर लिटा दिया और खुद अपने कमरे मे आकर बेड पर लेट गया. वह उस वक्त बहुत घबरा गया था पर उसने ये बात किसी को नही बताई.
शनिवार के दिन राहुल और उसके पिता श्वेता को फिर से पन्डित के पास ले गये. पन्डित ने उसे एक गोल चक्र के बीच मे बिठा दिय और कुछ मन्त्र पढने शुरु किये. धीरे धीरे श्वेता के अन्दर का वो साया उस पर भारी होने लगा और श्वेता थोडी पागलो वाली हरकते करने लगी. पन्डित ने उससे पूछ
"कौन हो तुम?"
उसने जवाब दिया" मै रितु हूँ"
यह सुन कर राहुल की तो बोलती बन्द हो गई. पन्डित ने फिर पूछा
"तू इसके शरीर मै क्या कर रही हो"
उसने जवाब दिया "यह औरत और इसका बेटा मेरी मौत का कारन है, मुझे इनसे बदला चाहिय. मुझे इसके बेटे के साथ शादी करके सुहागरात मनानी है."
इतना कह कर श्वेता जोर जोर से हसने लगी और बेहोश हो गई.
पन्डित ने राहुल से अपनी माँ को सम्भालने के लिये कहा. राहुल के पापा ने पन्डित से पूछा कि यह क्या था पन्डित जी.
पन्डित ने कहा कि यह सब सच ही था जो आपने देखा. यह जो लडकी आपकी बीवी के अन्दर है यह इसके शरीर को तब तक नही छोडेगी जब तक इसका बदला पूरा नही हो जाता. राहुल के पापा ने कहा
"पर पन्डित जी इसके बदले का मतलब ये है कि राहुल को अपनी माँ से शादी करके सुहागरात मनानी होगी."
पन्डित ने कहा "यही तो इसका बदला है. यह ऐसा साया है जो अपना बदला पूरा न होने पर शरीर को मार देन्गे और कभी आपके बेटे का पीछा नही छोडेन्गे. आप चाहे किसी के पास चले जाओ कोई इसका इलाज नही कर सकता"
राहुल और राकेश श्वेता को लेकर घर आ गये और श्वेता को उसके कमरे मे ले गये. वह पर उन्होने २-३ नौकरानियो को रख दिय और २४ घन्टे श्वेता का ध्यान रखने को कहा.
राकेश और राहुल बाहरके कमरेमे मे आकर बैठ गए. राकेश के चेहरे पर थोडा गुस्सा था. वो गुस्से से राहुल से बोला,
"ये सब तेरी वजह से हुआ है. तुझे ज्यादा प्यार का भूत सवार हो रखा था. अब देख तेरे उस भूत ने तेरी माँ का क्या हाल कर दिया है"
राहुल भी गुस्सेसे बोला,
"ये मेरी वजह से नही हुआ, ये आप लोगो की वजह से ही हुआ है. अगर मम्मी उस दिन रितु से प्यार से बात कर के उसे समझा देती तो ये सब न होता. पर आपको तो अपनी दौलत का घमन्ड दिखाना था. अब क्या कर सकते हो उस दौलत से"
यह कह कर राहुल वहा से चला
गया.
कुछ दिन तक राहुल और उसके पापा मे ऐसी ही खिटपिट होती रही. फिर एक दिन राहुल और राकेश दोनो घर मे बैठे थे तो राकेश ने कहा,
"राहुल मै पन्डित जी के पास गया था. पन्डित जी ने बताया कि वो भूतनी जो तेरी माँ के अन्दर है वो जो मान्ग रही है उसे इस रविवार तक न मिला तो वो तेरी मम्मी को खतम कर देगी."
राहुल आश्चर्य से बोला,
"पर पापा रविवार तो परसो ही है, तो फिर क्या करना है?"
राकेश ने कहा,
"करना क्या है, जो वो कह रही है वो ही करना पडेगा. और तो कोई चारा भी तो नही है"
राहुल ने कहा,
"पापा आप मजाक तो नही कर रहे. आपने सुना नही था उस दिन क्या कहा था उसने. ये तो असम्भव है"
राकेश ने कहा,
"देखो राहुल मैने पन्डित जी से बात की थी, उन्होने कहा कि यही एक आखरी मौका है जिस्से श्वेता बच सकती है. नही तो हम उसे हमेशा के लिये खो देन्गे. यह सब तुमसे शुरु हुआ था, अब तुम्हे ही इसे खतम करना होगा. ये बात बस हम दोनो के बीच मे ही रहेगी"
राहुल एक २० साल का नौजवान था. वह एक बहुत अमीर घर का इकलौता लडका था. उसके पापा का नाम राकेश और मम्मी का नाम श्वेता था. श्वेता की उमर ४६ साल की थी और राकेश की ५३ साल. राकेश का रिअल इस्टेट का बडा बिझनेस था. श्वेता अपने आप को बहुत फिट रखती थी और उसने अपनी खूबसूरती को अच्छी तरह से मेन्टेन किया था. उसे देखकर ऐसा लगता नही था कि वह एक २० साल के लडके की माँ है, बल्कि वह एक ३० साल की सेक्सी औरत लगती थी. श्वेता और राहुल को साथ देखकर कई लोगो को वह दोनो भाई-बहन लगते थे. श्वेता का बदन पूरा शेप मे था, बूब्स से लेकर कमर तक और कमर से लेके गान्ड तक. अपनी सुन्दरता पर उसे बहुत गर्व था, वह अक्सर फॅशनेबल कपडे पहनती थी.
राहुल का अपने कोलेज मे एक रितु नामकी लडकी के साथ चक्कर था. रितु की उमर १९ साल थी और वो और राहुल दोनो एक दूसरे को बहुत प्यार करते थे. पर रितु एक साधारन परिवार से थी.
राहुल के मम्मी पापा को राहुल के रितु के साथ चक्कर की भनक लग गई. राहुल की मम्मी श्वेता के दिमाग मे यही था कि ये एक गरीब परिवार कि लडकी है जो राहुल जैसे अमीर लडके को फसा कर उसकी दौलत हडपना चाहती है. उसने रितु के बारे मे पता लगाया और उसे मिलने के लिये बुलाया. जब वो रितु से मिली तो उसने रितु को खूब खरी खोटी सुनाई और उसे राहुल से मिलने के लिए मना कर दिया. रितु एक बहुत ही शान्त और अच्छे स्वभाव की लडकी थी और उसके दिमाग कोई गलत खयाल नही था. वह श्वेता के इस बर्ताव से बहुत डर गई और उनके घर से रोते हुए चली गई. राहुल घर आने के बाद श्वेता ने उससे झूठ ही कह दिया कि रितु उसके घर पर आई थी और वह यह कह गई कि वह किसी और लडके से प्यार करती है. राहुल अपनी मम्मी की हर बात मानता था तो उसने इस बात पर भी विश्वास कर लिया.
उसके बाद वो बहुत दिनो तक कोलेज नही गया और न ही रितु के फोन या मेसेज का कोई जवाब दिया. काफी दिनो बाद जब वो कोलेज गया तो उसे पता चला कि रितु की एक सडक हादसे मे मौत हो गई थी. राहुल को इस बात से कुछ दुख जरूर हुआ, उसने घर आने पर ये बात अपनी मम्मी को भी बताई. लेकिन उन्होने इस बात को ज्यादा सिरिअसली नही लिया और इस बात को भूल जानेकी सलाह दे दी.
पर रितु की मौत के कुछ दिन बाद ही राहुल की मम्मी श्वेता की तबियत बहुत खराब हो गई. वह एक तरह से पागल सी हो गई थी. राहुल जब भी कमरे मे अपनी मम्मी के साथ अकेला होता था तो वो उसे कस कर गले लगा लेती थी, कभी पीछे से आकर अपने बेटे को पकड लिया करती थी. एक दो बार तो राहुल की मम्मी ने अपने बेटे को किस करने की कोशिश भी की और कई बार उसके लन्ड को भी सहलाया. राहुल इन हरकतो से बहुत डर सा गया था और वो अपनी मम्मी के अब पास भी नही आता था. राहुल और उसके पिता ने उसे कई अच्छे से अच्छे डाक्टरोके पास ले जाकर दिखाया पर कुछ नही हुआ. श्वेता की हालत वैसे ही बनी रही. फिर उन्हे किसी ने सलाह दी कि उन्हे एक पन्डित के पास दिखाना चाहिए तो राहुल और उसके पापा श्वेता को उनके एक जाने माने पन्डित के पास ले गये.
पन्डित ने श्वेता को देखते ही बता दिया कि इस पर एक अशुभ साया है. राहुल और उसके पापा घबरा गये. उन्होने पन्डित से कहा कि इसका क्या इलाज है. पन्डित ने कहा कि तुम इस शनिवार को मेरे पास ले आना, उस दिन इसका इलाज खुद इसी के मुह से सुन लेना.
वैसे तो राहुल और उसके पिता बहुत मॉडर्न विचारोके थे लेकिन श्वेता की बीमारी ने सबको हैरान करके छोड था. बडे से बडे स्पेशालिस्ट अगर हार चुके थे तो यह नुस्खा अपनाने मे क्या हर्ज होगा यह सोचकर वो दोनो पन्डित की बात मान गए.
उन्होने अपने घर की नौकरानी को श्वेता का खयाल रखने के लिये रखा था, श्वेता की बीमारी की बात उन्होने घर के बाहर किसी को नही बताई थी.
पन्डितके यहा से लौट आनेपर रात के वक्त राहुल अपने कमरे मे सो रहा था. उसके कमरे के दरवाजे पर एक दस्तक हुई. उसने दरवाजा खोला तो वहा पर उसकी मम्मी थी जो दरवाजा खुलनेपर एकदम कमरे के अन्दर आ गई और दरवाजा बन्द कर दिया. फिर उसने राहुल को गले से लग लिया और उसके होठो को चूमने की कोशिश करने लग गई और अपने हाथ को राहुल के लन्ड पर मसलने लग गई. राहुल ने इसका विरोध किया और अपनी मम्मी को एक झटके के साथ दूर किया. राहुल ने ढकेलनेपर श्वेता धम्म से बेड पर गिर गई और बेहोश हो गई. राहुल ने अपनी मम्मी की साँसे चेक की, वो तो चल रही थी. उसने किसी को न जगाते हुए अपनी मम्मी को उठाकर उनके कमरे मे ले जाकर बेड पर लिटा दिया और खुद अपने कमरे मे आकर बेड पर लेट गया. वह उस वक्त बहुत घबरा गया था पर उसने ये बात किसी को नही बताई.
शनिवार के दिन राहुल और उसके पिता श्वेता को फिर से पन्डित के पास ले गये. पन्डित ने उसे एक गोल चक्र के बीच मे बिठा दिय और कुछ मन्त्र पढने शुरु किये. धीरे धीरे श्वेता के अन्दर का वो साया उस पर भारी होने लगा और श्वेता थोडी पागलो वाली हरकते करने लगी. पन्डित ने उससे पूछ
"कौन हो तुम?"
उसने जवाब दिया" मै रितु हूँ"
यह सुन कर राहुल की तो बोलती बन्द हो गई. पन्डित ने फिर पूछा
"तू इसके शरीर मै क्या कर रही हो"
उसने जवाब दिया "यह औरत और इसका बेटा मेरी मौत का कारन है, मुझे इनसे बदला चाहिय. मुझे इसके बेटे के साथ शादी करके सुहागरात मनानी है."
इतना कह कर श्वेता जोर जोर से हसने लगी और बेहोश हो गई.
पन्डित ने राहुल से अपनी माँ को सम्भालने के लिये कहा. राहुल के पापा ने पन्डित से पूछा कि यह क्या था पन्डित जी.
पन्डित ने कहा कि यह सब सच ही था जो आपने देखा. यह जो लडकी आपकी बीवी के अन्दर है यह इसके शरीर को तब तक नही छोडेगी जब तक इसका बदला पूरा नही हो जाता. राहुल के पापा ने कहा
"पर पन्डित जी इसके बदले का मतलब ये है कि राहुल को अपनी माँ से शादी करके सुहागरात मनानी होगी."
पन्डित ने कहा "यही तो इसका बदला है. यह ऐसा साया है जो अपना बदला पूरा न होने पर शरीर को मार देन्गे और कभी आपके बेटे का पीछा नही छोडेन्गे. आप चाहे किसी के पास चले जाओ कोई इसका इलाज नही कर सकता"
राहुल और राकेश श्वेता को लेकर घर आ गये और श्वेता को उसके कमरे मे ले गये. वह पर उन्होने २-३ नौकरानियो को रख दिय और २४ घन्टे श्वेता का ध्यान रखने को कहा.
राकेश और राहुल बाहरके कमरेमे मे आकर बैठ गए. राकेश के चेहरे पर थोडा गुस्सा था. वो गुस्से से राहुल से बोला,
"ये सब तेरी वजह से हुआ है. तुझे ज्यादा प्यार का भूत सवार हो रखा था. अब देख तेरे उस भूत ने तेरी माँ का क्या हाल कर दिया है"
राहुल भी गुस्सेसे बोला,
"ये मेरी वजह से नही हुआ, ये आप लोगो की वजह से ही हुआ है. अगर मम्मी उस दिन रितु से प्यार से बात कर के उसे समझा देती तो ये सब न होता. पर आपको तो अपनी दौलत का घमन्ड दिखाना था. अब क्या कर सकते हो उस दौलत से"
यह कह कर राहुल वहा से चला
गया.
कुछ दिन तक राहुल और उसके पापा मे ऐसी ही खिटपिट होती रही. फिर एक दिन राहुल और राकेश दोनो घर मे बैठे थे तो राकेश ने कहा,
"राहुल मै पन्डित जी के पास गया था. पन्डित जी ने बताया कि वो भूतनी जो तेरी माँ के अन्दर है वो जो मान्ग रही है उसे इस रविवार तक न मिला तो वो तेरी मम्मी को खतम कर देगी."
राहुल आश्चर्य से बोला,
"पर पापा रविवार तो परसो ही है, तो फिर क्या करना है?"
राकेश ने कहा,
"करना क्या है, जो वो कह रही है वो ही करना पडेगा. और तो कोई चारा भी तो नही है"
राहुल ने कहा,
"पापा आप मजाक तो नही कर रहे. आपने सुना नही था उस दिन क्या कहा था उसने. ये तो असम्भव है"
राकेश ने कहा,
"देखो राहुल मैने पन्डित जी से बात की थी, उन्होने कहा कि यही एक आखरी मौका है जिस्से श्वेता बच सकती है. नही तो हम उसे हमेशा के लिये खो देन्गे. यह सब तुमसे शुरु हुआ था, अब तुम्हे ही इसे खतम करना होगा. ये बात बस हम दोनो के बीच मे ही रहेगी"