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बजाज का सफरनामा

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StoryPublisher

Guest
किराया माफ़ (कहानी 01)

मेरा नाम संजय है, हरियाणा का रहने वाला हूँ। हिंदी सेक्सी कहानियाँ पर यह मेरी पहली कहानी है।

बात उन दिनों की है जब हमारे घर में एक कमरा किराये के लिए खाली था। हम कोई किरायेदार ढून्ढ रहे थे। एक दिन एक लड़की हमारी दुकान पर आई और मुझसे पूछने लगी- मुझे मालूम हुआ है यहाँ कोई कमरा किराये के लिए खाली है।

मैंने हाँ कर दी और कमरा दिखाने ले गया। मैंने अपनी मम्मी को बुलाया और उन्होंने ही सारी बात की लेकिन लड़की ने मना कर दिया क्योंकि किराया ज्यादा था 1500 रूपये। कुछ देर बात करने के बाद मम्मी ने किराया थोड़ा कम कर दिया 1300 रूपये।

उसने हाँ कर दी और बोली- कल से रहने आ जाऊँगी।

अगले दिन वो अपना सामान लेकर आ गई। मैंने उसकी मदद की सामान रखने में, उसके साथ उसका भाई भी था, देखने ठीक था उससे काफी बड़ा था।

वो उसी दिन चला गया था। लड़की करनाल की थी। उसका नाम पलक (बदला हुआ नाम) था। वो यहाँ से बी.टेक कर रही थी। जब उसका भाई चला गया तो मैं उसे देखने उसके कमरे में चला गया। मुझे वो बहुत पसंद थी, मैं उससे दोस्ती करना चाहता था। कुछ देर देखने के बाद वो बाहर आई और बोली- क्या देख रहे हो?

और उसने मेरे बारे में पूछा।

मैंने बताया- मैं भी डिप्लोमा पूरा कर चुका हूँ। अब अगले साल किसी कॉलेज में दाखिला लूँगा क्योंकि घर में दिक्कत थी। इसलिए नहीं लिया इस साल।

मैं उसके लिए कॉफी बना कर लाया उसने पी ली। मैंने उससे उसके बारे में पूछा और कहा- आज रात खाना हमारे यहाँ खा लेना। कल से अपना अलग बना लेना। अभी तुम्हारा सामान सैट नहीं हुआ इसलिए।

उसने मुझे थैंक्स कहा। मैं सोच रहा था कि उसे कैसे कहूँ कि मैं तुमसे प्यार करने लगा हूँ।

अगले दिन वो कॉलेज नहीं गई और मैं भी घर में अकेला था। मम्मी गई थी मार्किट, छोटा भाई स्कूल में और पापा अपने ऑफिस।

मैं वैसे दुकान पर बैठता हूँ, मैं वर्कर्स को काम बताकर खुद उसके कमरे में चला गया और उससे बातें करने लगा और बातों-बातों में मैंने उससे पूछा- तुम्हारा कोई बॉयफ्रेंड है?

तो वो शरमा गई, बोली- तुम जाओ यहाँ से, कोई हमें देखेगा तो क्या कहेगा।

मैंने कहा- तुम डरो मत, कोई कुछ नहीं कहेगा और मेरे साथ खुल कर बातें करो, डरो मत।

तो उसने कहा- नहीं है !

और उसने मुझसे पूछा- तुम्हारी कोई है?

मैंने भी ना में सर हिला दिया और मैंने कहा- अगर मैं आपका बॉयफ्रेंड बनना चाहूँ तो आपको कोई हर्ज तो नहीं होगा?

उसने कहा- इस बारे में मैंने कुछ सोचा नहीं है। आपको सोच कर बताऊँगी।

मैंने कहा- ठीक है, कल बता देना।

और चला आया। अब उसकी हाँ का इंतज़ार करने लगा।

अगले दिन वो सुबह उठकर कॉलेज चली गई। जब वो आई तो मेरी हिम्मत नहीं हुई उससे पूछने की लेकिन वो मेरी तरफ देखकर मुस्कुरा कर चली गई।

मैं समझ गया कि हाँ है। मैं उसके कमरे में चला गया और उससे पूछा- क्या सोचा फिर आपने?

तो उसने कहा- ठीक है।

मैंने कहा- ठीक से कहो क्या है?

तो वो बोली- आई लव यू।

मैं खुश था।

उसने कहा- वैसे इसमें मेरा ही फायदा है।

"वो कैसे?"

उसने कहा- देखो, एक तो कॉलेज में लड़के तंग नहीं करेंगे, दूसरा किराया भी बच जायेगा।

मैंने कहा- किराया तो मम्मी लेंगी, मैं नहीं।

वो बोली- मैं तुम्हें दे दूँगी, तुम मम्मी को दे दिया करो।

मैंने कहा- देखो, किराया तो देना ही है, मेरे को या मम्मी को ! क्यों न मम्मी को ही दे दिया करो।

उसने कहा- तुम बहुत बुद्धू हो।

मैं समझ तो गया लेकिन जानबूझ कर ऐसा कर रहा था। मैंने कहा- चलो, फिर रात को मिलेंगे।

और चला गया।

रात को हम सब बाहर घूमने गए मार्कीट में।

उसने कहा- मैं कल कॉलेज नहीं जाऊँगी,संजय तुम मेरे साथ मार्कीट चलोगे?

तो मैंने कहा- मम्मी को ले जाना।

और वो मान गई।

अगले दिन पापा को फोन आया कि किसी रिश्तेदार की शादी है, सबको जाना है।

मैंने मना कर दिया जाने से, कहा- अगर सब चले जायेंगे तो पलक अकेली रह जाएगी और वो अभी जानती भी नहीं यहाँ किसी को।

तो पापा बोले- चल तू रह जीयो और दुकान भी खोल लियो।

मेरी ख़ुशी का तो ठिकाना ही नहीं रहा।

मम्मी ने मुझे कहा- जा के पलक को बता दे।

मैंने ऐसा नहीं किया, अगर बता देता तो वो शायद कह देती कि मैं भी अपने घर चली जाती हूँ थोड़े दिन के लिए।

मैंने ऐसे ही नाटक किया घर वालों के सामने।

अगले दिन सुबह ही घर वाले चले गए, जब पलक उठी तो उसने देखा कि कोई भी नहीं है। उसने मुझसे पूछा तो मैंने कहा- शादी में गए हैं, सब शाम तक आ जायेंगे।

लेकिन वो तो मैं जानता था कि घर वाले दो दिन तक नहीं आएंगे। मैं ऊपर अपने कमरे में चला गया, तभी पलक आई और बोली- नीचे पानी नहीं आ रहा, ऊपर नहा लूँ?

मैंने कहा- ठीक है, लेकिन थोड़ा जल्दी नहाना, मैंने भी नहाना है।

वो बाथरूम में चली गई। उसने अन्दर से बन्द कर लिया, मैं उसे दरवाजे के छेद से देखता रहा। मैं देखने में इतना मशगूल हो गया
 
किराया माफ़ 2 पार्ट (कहानी 01)

कि मुझे पता ही नहीं चला, उसने कब दरवाजा खोल दिया।

मेरे तो होश उड़ गए उसे ऐसे देखकर।

वो घबरा गई और बोली- तुम मुझे देख रहे थे?

मैं एकदम से अन्दर जाकर बाथरूम का दरवाजा बंद कर दिया। ताकि वो वापिस ना जा सके। मैंने उसे अपनी बाँहों में खींच लिया और चूमने लगा।

वो बोली- मैं तुम्हारी मम्मी को बताऊँगी।

मैंने कहा- जानेमन, किराया ऐसे मैं थोड़े ही दे दूंगा।

तो वो बोली- अच्छा तो तुम समझ गए थे, नाटक कर रहे थे मेरे साथ।

मैंने उसका तौलिया हटाया और कहा- जब सब पता चल गया है तो शर्म काहे की।

मैं उसकी चूचियाँ दबाने लगा उसे नशा सा चरने लगा। मैंने भी अपने और उसके सारे कपड़े उतार दिए और उसे अपना लण्ड चूसने को कहा, उसने मना कर दिया। लेकिन बाद में वो मान गई।

मैंने उससे पूछा- तुम पहले कितनी बार चुद चुकी हो?

उसने कहा- पहली बार चुद रही हूँ।

यह सुनते ही मैंने उसे उठा लिया और बेडरूम में लाकर बिस्तर पर पटक दिया और उसकी फुद्दी को देखने लगा जो अभी बंद थी।

मैं उसे चूसने लगा, वो ऊऊउ अह्ह्ह्ह की आवाजे निकालने लगी और कहने लगी- बस अब नहीं रहा जाता, धीरज डाल दो मेरी फुद्दी में, फाड़ दो इसे।

मैंने कहा- अगर इसमें डाल दिया तो बहुत रोएगी।

उसने कहा- आज रुला दो मुझे !

मैंने तेल लिया और उसकी फुद्दी पर लगा दिया और लंड पर भी लगाया और लंड उसकी फुद्दी के मुख पर रख दिया। मैंने जोर से धक्का दिया और लंड थोड़ा सा उसकी फुद्दी में गया तो वो दर्द के मारे चिल्लाने लगी- निकालो इसे !

मैंने उसके होंटों पर अपने होंट रख दिए ताकि आवाज ज्यादा ना आये और एक जोर का झटका और मारा, लंड उसकी फुद्दी को चीरता हुआ आधा अन्दर चला गया।

कुछ देर मैं ऐसे ही रहा उसके बाद धीरे-धीरे धक्के लगाने शुरु किए।

उसे भी मजा आने लगा, वो भी गांड उठा कर मेरा साथ देने लगी। अब पूरे कमरे में पच पच पच की आवाजें आने लगी। वो दो बार झड़ चुकी थी। मैंने अपना लंड निकाला और देखा चादर पर खून लगा था। उसे दर्द हो रही थी। उससे उठा भी नहीं जा रहा था।

उसने कहा- अब कुछ और भी करना है क्या जो निकाल लिया।

मैंने कहा- तुम्हें पता नहीं क्या मेरा पानी अभी नहीं निकला।

वो बोली- अब यह क्या होता है मुझे नहीं पता।

मैंने कहा- जैसे तुम्हारी फुद्दी में से निकला है ऐसे ही मेरे लंड में से निकलेगा।

तो वो बोली- अब अन्दर मत डालना, दर्द हो रहा है।

मैंने कहा- चलो नहीं डालता, कहीं और डाल लेता हूँ।

पूछने लगी- कहाँ?

मैंने उसकी गांड की तरफ इशारा किया तो बोलने लगी- नहीं ! सुना है यहाँ ज्यादा दर्द होता है।

मैं उसकी गांड मारना चाहता था। मैंने अब तक जितनी भी लड़किया चोदी हैं सबकी गांड जरूर मारी है। गांड मारने का अपना अलग ही स्वाद है। मैंने उसे झूठा दिलासा दिया कि फुद्दी की बजाये गांड मरवाने में दर्द कम होता है। पहले ना नुकुर करती रही। बाद में मान गई।

मैंने वेसलिन की डिब्बी उठाई और उसकी गांड पर लगा दी।

वो बोली- यह क्या कर रहे हो।

मैंने कहा- इससे दर्द नहीं होगा !

और एक उंगली उसकी गांड में धीरे से डाल दी। उसे दर्द होने लगी।

मैंने कहा- अभी थोड़ी देर में मजा आयेगा मेरी जान !

मैंने उंगली निकाली और उसे घोड़ी बना दिया उसकी कमर कस कर पकड़ ली और लंड उसकी गांड में डालने लगा। लंड ज्यादा मोटा होने के कारण अन्दर नहीं जा रहा था, मैंने वेसलिन और लगा दी एक जोर का झटका दिया लंड आधा अंदर चला गया।

वो चिल्लाने लगी। मैंने पीछे से उसका मुह बंद कर दिया हाथ से और चोदने लगा पाँच मिनट के बाद मैं तैयार था फारिग होने के लिए। मैंने अपना लंड निकाला और उसके मुंह में दे दिया और उसके मुंह में पानी छोड़ दिया।

वो सारा पानी पी गई। उसे दर्द हो रहा था। मैंने उसे गोद में उठाया, बाथरूम ले गया और उसे फिर से नहलाया और खुद भी नहाया। उस दिन वो कॉलेज नहीं गई थी।
 
दोस्तों इस में आपको रोज़ नयी नयी और छोटी कहानिया पड़ने को मिलेगी। कुछ महाएपिसोड भी इस में मिलेंगे तो कमेंट और आपको कहानी कैसी लगी बताना
 
जंगल में सेक्स चूत कला

एक दिन जेन जंगल में टार्जन से मिली। वह उससे बहुत लगाव रखती है, उसके जीवन के बारे में बातचीत के क्रम में जेन ने उससे पूछा कि उसने सेक्स का आनन्द कैसे लिया। उसने पूछा कि “सेक्स क्या है?” जेन ने उसे समझाया कि सेक्स क्या होता है, तो उसने कहा कि “ओह, मैं तो पेङ के तने में बने छेद का इस्तेमाल करता हूँ।”

जेन घबरा कर बोली, “तुम कुछ नहीं जानते, मैं तुम्हें दिखाऊँगी कि इसे सही तरीके से कैसे करते हैं। उसने अपने सारे कपङे उतारे और जमीन पर लेट गयी। उसने अपने पैर फैलाये और चूत की ओर दिखाकर बोली, “यहाँ, तुम्हें इसमें घुसाना होगा।”

टार्जन ने शेर की खाल उतारी, उसके थोङा समीप आया और उसकी टाँगों के बीच एक जोरदार लात मारी। जेन दर्द के मारे दोहरी हो गई और ज़मीन पर लोटने लगी। फिर किसी तरह उसने खुद पर काबू पाया और पूछा “तुमने ऐसा क्यों किया?”

“टार्जन डालने से पहले पता करता है कि छेद में कहीं मधुमक्खियाँ तो नहीं हैं!”
 
चुटकुला: रोबोट सेक्रेटरी!

दो दोस्त उनमें से एक के ऑफिस में मिलते हैं, जो नयी टेक्नॉलजी में अत्याधिक रूचि रखने के लिए जाना जाता है।

“हाय दोस्त कैसे हो?”

“अच्छा हूँ यार। मुबारक़ हो, तुम्हारी नयी सेक्रेटरी बहुत ख़ूबसूरत है!”

“अच्छा, मुझे खुशी हुई जो तुम्हें वह पसन्द आयी। यक़ीन करो या नहीं, वह एक रोबोट है!”

“हो ही नहीं सकता! ऐसा भला कैसे संभव है?”

“ऐसा ही है! वह जापान में बनी आधुनिकतम मॉडल है। मैं तुम्हें बताता हूँ कि वह किस प्रकार से काम करती है। अगर तुम उसकी बायीं चूची दबाते हो, तो वह तुम्हारी बातें रिकॉर्ड करती है। अगर तुम उसकी दायीं चूची दबाते हो तो वह लेटर टाईप करती है। इतना ही नहीं, वह सेक्स भी कर सकती है!”

“क्या बात कर रहे हो यार, तुम मज़ाक कर रहे हो, है ना?”

“नहीं वो ऐसी ही है, अगर तुम चाहो तो आज़मा भी सकते हो”

तब उसका दोस्त उसे रेस्टरूम में ले जाता है और थोङी देर रहता है, अचानक उसके चिल्लाने की आवाज़ आती है “आईईईईईईईईईई… बचाओ!”

ओह्ह्ह्ह्हहह!

“आहहह्ह्हहहहहह! हाय्य्ययययययय!”

पहला दोस्त कहता है, “ओह! मैं तो उसे बताना भूल ही गया कि उसकी गाँड एक पेंसिल-शार्पनर है!”
 
प्रियंका कहानी 2

मैं संजय आप सबका बहुत शुक्रगुजार हूँ कि आप सब मेरी कहानी पढ़ने के बाद मुझे comment करके मेरा हौसला बढ़ाते हैं। आप सबकी comment पढ़ कर मेरा भी मन मचल उठता है आप सबको चुदाई की दास्ताँ बताने के लिए।

आज जो कहानी मैं आप सबके लिए लेकर आया हूँ उसमें मैं शरीक नहीं हूँ पर यह मेरी आँखों देखी चुदाई की घटना है।

मैं तो अपनी ही मस्ती में रहता था। अड़ोस-पड़ोस की बातों पर मैं कभी गौर नहीं करता था पर तभी मुझे कुछ ऐसा पता लगा कि यह कहानी बन गई।

प्रियंका नाम है उसका। उम्र यही कोई चौबीस पच्चीस के आस पास। शादी को चार साल हो चुके है प्रियंका की। एक बच्चे की माँ है वो ! जब वो शादी करके ससुराल आई थी तो उसका बदन किसी कमसिन कली जैसा नाजुक सा था पर अब जब से वो माँ बनी है उसका शरीर कुछ भर सा गया है तो मस्त माल बन गई है प्रियंका।

अब आती है कहानी की बात...

प्रियंका का घर मेरे घर के बिल्कुल सामने ही है। उस दिन दोपहर में मैं छत पर किसी काम से गया तो मुझे प्रियंका के घर में कुछ हलचल सी महसूस हुई। तभी प्रियंका के घर से उसके चिल्लाने की आवाज आई। मैंने उसके चिल्लाने पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया क्यूंकि उसके घर में तो अक्सर झगड़ा होता रहता था।

पर उसी शाम को मेरे कॉलोनी के ही एक लड़के ने मुझे कुछ ऐसा बताया कि मैं समझ ही नहीं पाया कि यह सच है या झूठ।

उसने मुझे बताया था कि

प्रियंका के ससुर राम सिंह ने प्रियंका के चुच्चे मसल दिए थे इसीलिए प्रियंका दिन में चिल्ला रही थी।

"चुचे मसल दिए थे? और वो भी उसके ससुर ने...?"

मैं विश्वास नहीं कर पा रहा था। मैंने उसकी बात को मजाक समझ कर नजरंदाज कर दिया। पर उसकी बात सुन कर मेरे अंदर सच जानने की बेचैनी बढ़ गई थी। प्रियंका का पति अक्सर हफ्तों के लिए घर से बाहर रहता था तो मुझे लगा कि बात सच भी हो सकती है।

अब तो मेरी नजर हर समय प्रियंका के घर पर लगी रहती। रविवार के दिन जब घर पर होता तो सारा दिन बस इसी काम पर लगा रहता। करीब पन्द्रह दिन हो गए थे नजर रखते हुए पर अभी तक कुछ नजर नहीं आया था। एक फायदा जरूर हो गया था कि प्रियंका से मेरी नजरें चार होने लगी थी। वो शायद यह समझ रही थी कि मैं उसको पटाने के मूड में हूँ पर उसे क्या पता था कि मेरा इरादा क्या है।

उस दिन भी रविवार था, मैं सुबह सुबह ही कुछ लेने के बहाने से उनके घर गया तो पता लगा कि घर में आज सिर्फ प्रियंका और उसका ससुर ही है। उसकी सास उसके देवर को लेकर किसी रिश्तेदारी में गई थी और पति तो पहले से ही बाहर गया हुआ था। मुझे एहसास हुआ कि आज कुछ ना कुछ देखने को मिल सकता है।

गर्मियों के दिन थे तो दोपहर के समय कॉलोनी की गलियाँ खाली पड़ी थी। हमारा घर भी एक बंद गली में है तो उसमे वैसे भी लोगों का आना जाना ना के बराबर ही होता है। मेरे कान और आँख दोनों प्रियंका के घर पर ही लगे थे। करीब दो बजे मुझे प्रियंका के जोर जोर से बोलने की आवाज आई तो मैं सतर्क हो गया।

मैं अपने घर से निकला और प्रियंका के घर की खिड़की के पास जाकर खड़ा हो गया।

"पापा जी... कुछ तो शर्म करो... बहू हूँ मैं तुम्हारी..."

"बहु जो मर्जी कह पर अब मुझ से नहीं रुका जाता... जब से तेरी जवानी देखी है मेरे लण्ड में दुबारा से मस्ती चढ़ने लगी है।"

"बुड्ढे कुछ तो शर्म कर... ज्यादा आग लगी है तो अपनी औरत के पास जा... मुझे क्यों खराब करने पर तुला है?"

"बस एक बार बहू... सारी उम्र तेरी गुलामी करूँगा..."

"आह्ह... पापा जी छोड़ो मुझे... आह चूची छोड़ो मेरी... दर्द हो रहा है.... उईई माँ... बहनचोद छोड़ मुझे !"

मैं समझ गया था कि बुड्ढा पूरी रौनक में है और आज तो वो प्रियंका की चूत फाड़ कर ही मानेगा। अंदर की आवाजें सुन कर मेरी बेचैनी बढ़ गई थी। अब तो मैं यह देखने को बेचैन था कि आखिर कमरे में हो क्या रहा है। मैं अंदर झाँकने के लिए जगह ढूँढ रहा था। तभी मुझे ध्यान आया कि प्रियंका के घर के पिछली तरफ खाली प्लाट है और उस तरफ की दीवार भी बहुत नीची है।

मैं दौड़ कर उधर गया। पर नजर फिर भी कुछ नहीं आया। मेरी बेचैनी बढ़ती जा रही थी।

आखिर में मैंने थोड़ा खतरा मोल लेने का मन बना लिया और फिर बिना देर किये मैं दीवार फ़ांद कर प्रियंका के घर के अंदर घुस गया। दबे पाँव मैं उस कमरे के दरवाजे पर पहुँच गया जिसमें से उन दोनों की आवाजें आ रही थी।

"पापा जी मत करो ऐसा... अगर तुम्हारे बेटे को पता लग गया तो सोच लो वो तुम्हारी क्या हालत करेगा !"

"प्रियंका अब कुछ मत बोल बेटा... अब मैं नहीं रुक सकता..."

"
 
प्रियंका कहानी 2

आह्हह्ह !" प्रियंका की बड़ी सी आह सुनकर मैं समझ गया कि बुड्ढा कुछ कर रहा है। मैंने कमरे के अंदर झाँका तो मेरा लण्ड जो पहले से ही खड़ा हो चुका था, फटने को हो गया। मैंने देखा कि बुड्ढा नीचे से बिलकुल नंगा होकर अपना लण्ड सहला सहला कर खड़ा कर रहा था।प्रियंका बेड पर बैठी हुई थी और रो रही थी। रामसिंह बीच बीच में उसकी चूची3 को पकड़ कर मसलता तो वो छटपटा उठती थी।

मुझे प्रियंका का ऐसे बेड पर बैठे रहना अजीब लग रहा था क्यूंकि अगर प्रियंका चुदवाना नहीं चाहती थी तो वो बेड पर इतने आराम से कैसे बैठी थी। वो उठ कर बाहर क्यों नहीं आ रही थी या क्यों नहीं वो बूढ़े का ज्यादा विरोध कर रही थी। दाल में कुछ काला जरूर था।

तभी राम सिंह ने प्रियंका का हाथ पकड़ कर अपने लण्ड पर रखा। प्रियंका ने एक बार तो हाथ पीछे खींच लिया पर जब राम सिंह ने दुबारा उसका हाथ पकड़ कर लण्ड पर रखा तो वो रोते हुए राम सिंह का लण्ड सहलाने लगी। राम सिंह अब आँखें बंद करके आहें भर रहा था।

कुछ देर बाद राम सिंह ने प्रियंका को लण्ड चाटने के लिए कहा तो प्रियंका ने मना कर दिया। राम सिंह ने जबरदस्ती लण्ड मुँह में घुसाया तो प्रियंका ने मुँह झटक कर लण्ड बाहर निकाल दिया।

राम सिंह थोड़ा नाराज हुआ और फिर वो प्रियंका के कपड़े उतारने लगा। नजारा बहुत मस्त तैयार हो रहा था तो मैंने झट से मोबाइल निकाला और उनकी मूवी बनाने लगा। प्रियंका थोड़ा विरोध कर रही थी पर राम सिंह ने कुछ ही देर में प्रियंका को नंगा कर दिया।

प्रियंका का नंगा बदन देख कर मेरी हालत खराब होने लगी थी। दिल कर रहा था कि अभी कमरे में घुस जाऊँ और बूढ़े की गाण्ड पर लात मार कर बाहर निकाल दूँ और खुद ही चोद डालूं उस मदमस्त जवानी को।

नंगी होने के बाद प्रियंका अपने हाथों से अपनी चूचियों और चूत को छुपाने की कोशिश करते हुए बेड पर बैठ गई। तभी राम सिंह ने उसको धक्का देकर बेड पर लेटा दिया और खुद उसकी टांगों के बीच बैठ कर उसकी चूत चाटने लगा।

प्रियंका का विरोध अब लगभग खत्म हो गया था। अब रोने की आवाज सिसकारियों और सीत्कारों की आवाज में बदल गई थी।

"आह्ह... पापा जी... ओह्ह्ह... आह्ह्ह... मत कर कमीने..." प्रियंका बड़बड़ा रही थी। उसके हाथ अब राम सिंह का सिर अपनी चूत पर दबा रहा था जिससे एहसास हो रहा था कि प्रियंका भी अब चुदास से भरने लगी थी।

दो मिनट के बाद कमरे का नजारा ही बदल गया था। प्रियंका पूरी गर्म हो गई थी और उसने अब राम सिंह को अपने नीचे कर लिया था। अब वो राम सिंह के मुँह के ऊपर बैठ कर अपनी चूत चटवा रही थी।

"बहन के लण्ड... बेटी चोद... खा मेरी चूत को खा जा... आह्ह... खा मेरी चूत को खा...ओह्ह्ह..."

प्रियंका मस्ती में बड़बड़ा रही थी और राम सिंह की बोलती बंद थी। वो चुपचाप पड़ा प्रियंका की चूत चाट रहा था। कुछ देर बाद प्रियंका नीचे उतरी और राम सिंह के लण्ड को जोर जोर से मसलने लगी। राम सिंह का लण्ड पूरे शवाब पर आ चुका था। मुझे भी प्रियंका की चुदाई बहुत नजदीक लग रही थी। तभी प्रियंका नीचे बैठ कर राम सिंह के लण्ड को मुँह में लेकर जोर जोर से चूसने लगी और राम सिंह मस्ती के मारे बेहाल हो गया।

कुछ देर लण्ड चुसवाने के बाद राम सिंह ने प्रियंका को उठा कर फिर से बेड पर लेटा दिया और एक तकिया प्रियंका के चूतड़ों के नीचे लगा दिया। जैसे ही राम सिंह ने अपने लण्ड का लाल लाल सुपाड़ा प्रियंका की चूत पर रखा तो प्रियंका मस्ती से चिल्ला उठी।

"अब जल्दी से अंदर डाल बेटी चोद... अब किसकी इंतज़ार कर रहा है।"

राम सिंह ने बिना कुछ कहे एक जोरदार धक्का लगा दिया और लण्ड प्रियंका की चूत में उतार दिया। प्रियंका एकदम से चीख पड़ी थी।

"बहुत मोटा है कमीने तेरा तो... काश तेरे बेटे का भी तेरे जैसा होता..."

इससे आगे प्रियंका कुछ बोल पाती, इससे पहले ही राम सिंह ने दो तीन ताबड़तोड़ धक्के लगा कर पूरा लण्ड प्रियंका की चूत में उतार दिया।

प्रियंका दर्द के मारे छटपटा गई।

पूरा लण्ड घुसाने के बाद राम सिंह थोड़ा रुका और प्रियंका की चूचियों को चूसने लगा। प्रियंका की छटपटाहट कम हुई तो राम सिंह ने धीरे धीरे लण्ड अंदर बाहर करना शुरू कर दिया। प्रियंका का चुदक्कड़ रूप सामने आने लगा था। वो भी अब हर धक्के का जवाब अपने कूल्हे उठा उठा कर देने लगी थी।

"चोद मेरे बूढ़े राजा...चोद मुझे... तेरा बेटा तो आग लगा कर भाग जाता है... अब तू ही ठंडा कर इस आग को... चोद अपने मोटे लण्ड से मुझे जोर जोर से चोद... पूरा जोर लगा बूढ़े..." प्रियंका अब राम सिंह को जोर जोर से चोदने के लिए उकसा रही थी।

राम सिंह भी लंबे लंबे धक्के लगा लगा कर प्रियंका को चोद रहा था।

वो दोनों चुदाई में मग्न थे पर मेरा लण्ड अब दर्द करने लगा था। मन में आया कि वापिस चलूँ पर सजीव चुदाई देखने का मौका बार बार नहीं आता है सो वहीं खड़े खड़े लण्ड को बाहर निकाल कर मसलने लगा।

लगभग आठ दस मिनट की चुदाई के बाद प्रियंका झड़ गई तो राम सिंह भी चिल्ला उठा," मैं गया.... मैं गया..."

और आठ दस धक्कों के बाद ही वो प्रियंका के ऊपर औंधे मुँह गिर पड़ा। प्रियंका ने भी अपनी टांगों में जकड़ लिया अपने ससुर जी को और प्यार से उसके बालों में हाथ फेरने लगी। दोनों पसीने से लथपथ हो गए थे।

चुदाई पूरी हो चुकी थी। अब मैं भी वहाँ खड़ा होकर क्या करता सो चुपचाप दीवार कूद कर अपने घर वापिस आया और बाथरूम में जाकर लण्ड को शान्त किया।

कुछ दिन बाद प्रियंका मुझे अकेली मिली। उसने मुझे बताया कि उस दिन उसने मुझे उन दोनों की चुदाई देखते देख लिया था। मुझे विश्वास नहीं हुआ। आज भी प्रियंका मुझ से चुदने को तैयार बैठी है पर ना जाने क्यूँ उसको चोदने का मेरा मन ही नहीं होता है। मुझे पता है कि वो आज भी अपने ससुर से चुदवाती होगी। बस यही सोच कर मैं पीछे हट जाता हूँ।
 
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