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लेखिका:-नीतू पाटिल
“आहऽऽऽ… ओह… आहऽऽऽ… फक…फक मी हार्ड बेबी… डीप… डीप और अंदर… आहऽऽऽ” हर धक्के के साथ मेरी सिसकारियाँ बढ़ रही थी।
मेरे मुँह से निकलती हुई कामुक सिसकारियाँ सुनकर उसने अपने धक्के और तेज कर दिए, उसके हर धक्के से मेरे स्तन ज़ोरों से हिलने लगे। मेरे हिलते हुए स्तनों को अपने हाथों में पकड़कर वह मेरी चुत में सटासट लंड के वार करने लगा। हम दोनों की मादक आवाजें पूरे रूम में गूंज रही थी, चुत लंड की आवाजें भी उनमें घुल मिल रही थी।
पिछले दस मिनट से वह मुझे ऐसे ही कूट रहा था, मैं अब अपने शिखर की ओर बढ़ रही थी, उसकी पीठ को सहलाते हुए नीचे से कमर को हिलाते हुए उसका पूरा लंड चुत में ले रही थी। उसके मुख को देखते देखते अचानक मेरी नजर दरवाजे पर पड़ी… दरवाजे पर मम्मी खड़ी थी।
वो कब आयी … हमें पता ही नहीं चला, हमें उस अवस्था में देख कर ग़ुस्से से मम्मी का चेहरा लाल हो गया था। मैंने उसको धक्का देकर मेरे ऊपर से हटाया फिर चादर को अपने बदन पर लपेटकर सीधा बाथरूम में घुस गई।
मैं जाकर कमोड पर बैठ गयी, बाहर वह संकेत को … मेरे बोयफ़्रेंड को बहुत अपमानित कर रही थी। फिर उसके गाल पर दो चमाट मार कर उसको घर से बाहर निकाल दिया।
थोड़ी देर बाद डैड के बोलने की आवाज कानों में पड़ी, वे मम्मी को समझा रहे थे पर मम्मी उन पर ही चिल्ला रही थी।
थोड़ी देर बाद उनकी आवाजें बंद हो गयी तो मैं बाथरूम में रखी नाईट ड्रेस को पहनकर बाहर आ गयी।
बाहर दोनों ही नहीं थे, शायद हॉल में गए होंगे, इसलिए मैं बेड पर बैठ गई। कुछ ही देर पहले इसी बेड पर मेरा बॉयफ्रेंड मुझे कूट रहा था और अब उसी बेड पर किसी अपराधी की तरह बैठी थी। हमेशा देर से आने वाली मम्मी और पापा आज जल्दी घर आ गए और मुझे उस अवस्था में देख लिया।
कुछ देर मैं वैसे ही रूम में बैठी थी फिर थोड़ी देर बाद तैयार होकर बाहर जाने लगी।
“किधर जा रही हो?” मम्मी ने मुझे पूछा।
“तुमको क्या करना है?” मैं उससे आँखें चुराते हुए कार की चाबी लेने लगी।
‘चटाक… चटाक…’ मेरा जवाब सुनते ही उसने मेरे दोनों गालों पर ज़ोरों से दो चांटे जड़ दिए।
“चाबी रखो नीचे और बैठो यहाँ!”
उनकी ऊंची आवाज सुनकर मैं थोड़ा डर गई, चाबी फिर से टेबल पर रख कर मैं अपने रूम में जाने लगी।
“तुम्हें रूम में जाने को नहीं बोला, यहां बैठो!” उसके आवाज में गुस्सा साफ साफ झलक रहा था.
मैं सहम कर वही बैठ गई।
“तुम कुछ बोलते क्यों नहीं विक्रम?” मम्मी ने पापा को बोला।
“सुधा… हो गयी छोटी सी गलती बेटी से..” वे बोलते हुए रुक गए।
“यह क्या छोटी गलती है… लड़कों को घर में बुलाकर गंदी हरकतें करती है… शर्म नहीं आई तुझे…”
“गंदी हरकत नहीं की… वी आर इन रिलेशनसशिप सिन्स सिक्स मंथ!” मेरे गाल सहलाते हुए मैं ग़ुस्से से मम्मी को बोली।
“कल कुछ हो गया तो कहाँ जाओगी… उसने तुम्हारी बदनामी की तो किसको मुँह दिखाओगी? कौन तुमसे शादी करेगा?
“दैट्स नन ऑफ यूअर बिज़नेस, मैं मेरा देख लूंगी। तुम खुश रहो अपने पति के साथ, चाहो तो मैं जाती हूँ दूसरी जगह। वैसे भी मेरे पापा का घर खाली ही पड़ा है, मुझे नहीं रहना आपके साथ!” मैं उठकर अपने रूम में जाने लगी.
तभी पापा ने मेरा हाथ पकड़ लिया और मुझे रोक दिया- नीतू बेटा, अच्छी बच्ची हो ना तुम, ऐसा कोई बोलता है अपनी मम्मा को, से सोरी टू हर, आगे से ऐसी गलती मत करना!
पापा मुझे गले लगाते हुए शांति से बोले तो मेरा गुस्सा थोड़ा कम हुआ।
“सॉरी मम्मा सॉरी डैड, अब आगे से ऐसा नहीं होगा.” कहकर मैं अपने रूम में चली गई।
मेरे पीछे उनकी खुसुर पुसुर शुरू हो गयी, शायद मम्मी को पापा का शांत रहना पसंद नहीं आया। वह दिन तो जैसे तैसे कट गया पर आगे मुझ पर कड़क वॉच रहने लगी।