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मस्तानी ताई
मस्तानी ताई
दोस्तो मैं यानी आपका दोस्त राज शर्मा आपके लिए एक और मस्त कहानी लेकर हाजिर हूँ .
***** ***** पात्र (किरदार) पररचय
01॰ ताईजी-उम्र 45 साल, खूबसूरत, बड़ी-बड़ी चुचियाँ, बड़े-बड़े चूतड़, मोटी जांघें।
02॰ सुजाता-ताईजी की बड़ी लड़की, क़द 5’6” इंच, चुचियाँ भारी-भारी, शरीर औसत फिट, मस्त गाण्ड।
03॰ पूजा-ताईजी की छोटी लड़की
04॰ माँ-कहानी के हीरो की माँ
05॰ मैं-कहानी का हीरो
06॰ भोला-ताईजी का नौकर,
07॰ पार्वती-भोला की बीवी, सांवला रंग, साधारण कद-काठी,
***** *****
दोस्तों, एक बार मैं काफ़ी दिनों के बाद अपने गाँव जा रहा था। गाँव में मेरे ताऊजी जी का परिवार रहता है। ताई जी का स्नेह मुझ पर कुछ ज्यादा ही रहता था, वो मुझे कई बार बुला चुकी थी। अचानक ताऊजी को फालिस मार गई तो मैं अपने आपको गाँव जाने से नहीं रोक पाया। आज काफ़ी दिनों बाद मैं अपने गाँव जा रहा था।
मैं घर करीबन शाम के 4:00 बजे पहुँचा, ताईजी, सुजाता और पूजा मुझे देखकर खुश भी हुई क्योंकी मैं उनसे काफ़ी समय के बाद मिल रहा था। पर इस हादसे के चलते खुद को रोने से रोक भी ना पाई और मेरे सामने रो पड़ी। मैंने तीनों को संभाला और हौसला दिया कि सब ठीक हो जाएगा।
कुछ देर बाद वो शांत हो गये, और माँ मेरे लिए चाय बनाकर ले आई। जब मैंने ताईजी से पूछा ताऊजी के बारे में तो उन्होंने बताया कि काफ़ी दिनों से टेन्शन में थे, और काम का तनाव भी बढ़ गया था, सबसे बड़ा टेन्शन उन्हें सुजाता की शादी का था, इसी वजह से उन्हे फालिस हुआ है, और अब डाक्टर कहते हैं कि उन्हें ठीक होते-होते कम से कम एक साल लग जाएगा, अगर अच्छे से देख-भाल की तो, वरना मुश्किल है ताऊजी का ठीक होना। और वो यह सब घर दो बेटियाँ, खेती का काम कैसे देख पाएँगी? ऊपर से ताऊजी की सेहत का ध्यान भी रखना था, ताईजी काफ़ी टेन्शन में थी।
मैंने ताईजी को भरोसा दिलाते हुए कहा-“सब ठीक हो जाएगा और ताऊजी की तबीयत भी ठीक हो जाएगी…”
रात में सोते वक्त मैं, माँ और पापा बैठ कर बात कर रहे थे, और मैंने जो ताईजी ने मुझसे कहा था, वो उन्हें बताया।
पापा ने कहा-“बेटा हमें भी यह सब पता है, पर इसका कुछ ना कुछ रास्ता निकालना ही पड़ेगा, मैं अपनी भाभी और दो भतीजियों को ऐसे नहीं छोड़ सकता…”
कुछ देर बात करते-करते पापा ने कहा-“बेटा तुम क्यों नहीं देख लेते यह सब, जब तक ताऊजी ठीक ना हो जाएां?”
मैं अपना फाइनल एअर का एग्जाम दे चुका था। बस अब रिजल्ट आने की देरी थी, ताकी मैं आगे पढ़ाई के लिए एडमिशन ले सकूँ। मैंने पापा से कहा-“मैं अपनी पढ़ाई कैसे छोड़ सकता हूँ?”
उन्होंने मुझे काफ़ी समझाया। बाद में मम्मी भी पापा के सुर में सुर मिलाने लगी और यह तय हो गया कि मेरे रिजल्ट आने तक, जो दो महीने बाद आने वाला था, मैं ताऊजी के घर पे ही रहूँगा और ताईजी की हर काम में मदद करूँगा।
मुझे बिल्कुल अच्छा नहीं लगा पापा मम्मी का यह निर्णय। पर मैंने कुछ नहीं कहा और छत पर चला गया। रात के तकरीबन 11:00 बजे चुके थे, सब सो गये थे। मैं यह सोचने में बिजी था कि मैं अपना टाइम कैसे बताउन्गा? तभी मेरी नजर ताऊजी के रूम में पड़ी, छत से उनके रूम की खिड़की साफ दिखाई देती थी। मैंने देखा ताईजी ताऊजी की तेल से मालीश कर रही थी।
तब तक मेरे मन में ताईजी या किसी और घर की औरत के बारे में कोई गलत विचार नहीं था। मैंने देखा ताईजी ने साड़ी पहन रखी थी और वो ताऊजी के शरीर पे मालीश कर रही थी।
वैसे आपको ताईजी के बारे में बता दूाँ। उनकी उमर करीबन 45 साल है और वो थोड़ी खूबसूरत है, उनका शरीर थोड़ी हेवी है, खास कर उनकी गाण्ड और जाँघो का एरिया और उनकी चुचियाँ भी बड़ी-बड़ी हैं।
अचानक मैंने देखा कि तेल की बोतल जो कि बिस्तर पे पड़ी हुई थी वो गिर गई। सारा तेल बिस्तर पे फैल ना जाए इसलिए ताईजी उसे साफ करने में लग गई, और इस चक्कर में थोड़ा तेल ताईजी की साड़ी पे भी लग गया। ताईजी सब साफ कर बाथरूम में चली गई, शायद अपनी साड़ी साफ करने गई होंगी।
जब वो बाहर आई तो सिर्फ़ पेटीकोट और ब्लाउज़ में थी। ताईजी का फिगर मेरी आाँखों के सामने था, और सच बताऊं तो उन्हें देखकर मेरे अंदर अजीब सी हलचल मच गई। कुछ मिनट में ही मेरा उन्हे देखने का नज़रिया बदल गया। फिर उन्होंने लाइट बंद की और सो गई। मैं बहुत निराश हुआ और सोने चला गया। मुझे पूरी रात नींद नहीं आई और मैं ताईजी के बारे में ही सोचता रहा।
किसी तरह सुबह हुई। दोनों छोटे चाचा उनका परिवार अपने घर जाने को तैयार थे। तभी पापा ने सबको बुलाया और बताया कि कुछ महीने मैं यहीं रहूँगा और ताऊजी के घर और घरवालों की देख-भाल करूँगा। सब यह सुनकर सब खुश हुए खास कर ताईजी। क्योंकी वो यह सब अकेले सांभालने में घबरा रही थी।
फिर पापा ने ताईजी से कहा-“आप निश्चिंत रहें, यह आप लोगों की देख-भाल अच्छे से करेगा…”
बस कुछ देर बाद नाश्ता कर दोनों चाचा ने अपने घर चलने की तैयारी की। दोपहर को सिर्फ़ मैं, पापा, मम्मी और ताऊजी का परिवार था। मैं पूरा दिन ताईजी को ही देखता रहा, क्योंकी अचानक वो मेरे लिए किसी हीरोइन की तरह हो गई थी, जिसे पाने के लिए मैं बेताब था। जब वो झाड़ू लगा रही थी तो पीछे से उनकी मोटी गाण्ड देखकर मन कर रहा था कि अभी जाकर अपने हाथों में भर लूँ उनके चूतड़ और उनकी गाण्ड मार दूं।
पर यह सब किसी सपने जैसा ही था, क्योंकी मैं जानता थाकि रास्ता आसान नहीं है। जब रात को सब सो गये तो मैं भी छत पे चला गया और ताईजी के रूम में आने का इांतजार कर रहा था। तभी कुछ देर बाद ताई रूम में आई। आज उन्होंने मालीश से पहले एक खराब कपड़ा बिस्तर पे रखा और वहीं खड़े-खड़े अपनी साड़ी उतार दी। गर्मियों का वक्त भी था और शायद ताईजी ने अपनी साड़ी के खराब होने के डर से भी उसे निकालना ठीक समझा होगा। ताईजी काले रंग के ब्लाउज़ और पेटीकोट में थी, उनका रंग साफ था इसलिए खूबसूरती और भी निखर के सामने आ रही थी। जब भी वो झुकती तो उनकी चुचियाँ जो कि बाहर आने को तड़प रही थी, साफ नजर आ रही थी, और उनकी गाण्ड ने मुझे बेकाबू कर दिया था।
मैं वहीं छत पे बैठे-बैठे अपने लण्ड को मसल रहा था, और कैसे ताईजी को चोद सकूँ उस बारे में सोच रहा था। फिर जब ताईजी ने मालीश खतम की तो वो बाथरूम में चली गई, और जब बाहर आई तो मैं देखता ही रह गया। ताईजी सिर्फ़ पेटीकोट में बाहर आई, उन्होंने ब्लाउज़ निकाल दिया था, और अब वो मेरे सामने सिर्फ़ ब्रा जो कि काले रंग की थी और पेटीकोट में थी। मैंने जितना सोचा था उससे ज्यादा बड़ी चुचियाँ थी उनकी, तभी उन्होंने गाउन पहन लिया और सो गई। 4
अब मेरा सिर्फ़ एक ही अरमान था किसी तरह ताईजी को चुदवाने के लिए तैयार करने करूँ। पूरी रात ताईजी के खयालों में ही निकल गई। सुबह जब उठा तो आँखे थोड़ी सूजी हुई थी और लाल भी थी। मैं जब अपने कमरे से बाहर आया तो सबसे पहले मुझे मेरी ताईजी ही मिली। मैंने उन्हें देखकर स्माइल दी।
तब ताईजी ने कहा-“बेटा तुम्हारी आँखे सूजी हुई क्यों है और लाल भी है?”
मैंने उनसे कहा-“ताईजी आपके बारे में सोच-सोचकर नींद नहीं आती…”
उनकी आँखे भर आई। उन्हें लगा कि मैं उनके लिए इतना सोचता हूँ पर उन्हें क्या पता था कि मैं उन्हें चोदने का प्लान बना रहा हूँ। फिर जब मैं नीचे आया तो देखा कि पापा मम्मी भी घर जाने की तैयारी कर रहे थे। मैंने मम्मी से पूछा-“इतनी जल्दी?”
तभी मम्मी ने बताया-“पापा के ऑफीस में ज़रूरी काम है अब वो और नहीं रुक सकते…” इस तरह दोपहर तक पापा मम्मी भी चले गये।
अब हम 5 लोग ही बचे थे घर में। पूजा अपने किसी दोस्त के यहाँ गई थी, क्योंकी उसके भी एग्जाम कुछ दिनों में थे। सुजाता घर का सब काम देखती थी और ताईजी खेत खलिहान और ताऊजी को। दोपहर को मैंने देखा कि ताईजी एक बड़ी सी पोटली, जिसमें बहुत सारे कपड़े थे, वो लेकर खेत की तरफ जा रही थी। मैंने उन्हें आवाज़ लगाई।
ताईजी रुक गई और पूछा-“क्या है बेटा?”
मैंने कहा-“ताईजी इतनी धूप में आप कहाँ जा रहे हो?”
ताईजी ने कहा-“बेटा यह सब चादर और बाकी घर के कुछ कपड़े हैं वो देने जा रही हूँ…”
मैंने कहा-“किसे देने जा रही हैं आप?”
तब ताईजी ने बताया-“हमारे पम्पहाउस पे एक मजदूर रखा है, वो वहीं रहता है अपनी बीवी के साथ। उसी की बीवी को धोने के लिए देने जा रही हूँ…”
मेरे पास भी कोई काम नहीं था तो मैंने कहा-“लाओ ताईजी मैं ले लेता हूँ…” फिर मैंने ताईजी के हाथ से पोटली ले लिया और उन्हें कहा-“चलिए…”
ताईजी मेरे आगे चल रही थी। ताईजी ने ब्लू कलर की साड़ी और मेचिंग ब्लाउज़ पहन रखा था, और गर्मी की वजह से उन्हें बहुत पसीना आ रहा था, इससे उनकी सफेद ब्रा भी दिख रही थी। ताईजी मेरे आगे चल रही थी और उनके मटकते हुए चूतड़ देखकर मन कर रहा था उन्हें वहीं चोद दूं, पर मैं मजबूर था। खैर, जब हम पम्पहाउस पर पहुँचे तो वहाँ कोई नहीं था। ताईजी ने आवाज़ लगाई। उस औरत का नाम पार्वती था। पर काफ़ी देर तक जब कोई नहीं आया।
तभी एक दूसरा मजदूर आया और उसने बताया कि भोला और पार्वती के किसी रिश्तेदार के यहाँ मौत हो गई है, वहाँ गये हैं, कल तक आ जाएँगे।
मैंने ताईजी से पूछा-“अब घर वापस चलें?
ताईजी ने कहा-“अब यहाँ तक आ ही गये हैं तो कपड़े धो ही लिए जाएां। क्या भरोसा यह लोग कल आएँ के ना आएँ?” फिर कहा-“क्या तू मेरी मदद करूँगा?
मैंने तुरंत हां कर दी।
फिर ताईजी पम्पहाउस में गई वहाँ से कपड़े धोने का सामान ले आई और हम ट्यूबवेल के पास चले गये। वहाँ जाते ही ताईजी ने अपनी साड़ी को थोड़ा ऊँचा कर उसे कमर में फँसा दिया, ताकी उनकी साड़ी गीली ना हो। उनकी गोरी टाँगे देखकर मन कर रहा था उन्हें छू लूँ और किस करूँ।
मस्तानी ताई
दोस्तो मैं यानी आपका दोस्त राज शर्मा आपके लिए एक और मस्त कहानी लेकर हाजिर हूँ .
***** ***** पात्र (किरदार) पररचय
01॰ ताईजी-उम्र 45 साल, खूबसूरत, बड़ी-बड़ी चुचियाँ, बड़े-बड़े चूतड़, मोटी जांघें।
02॰ सुजाता-ताईजी की बड़ी लड़की, क़द 5’6” इंच, चुचियाँ भारी-भारी, शरीर औसत फिट, मस्त गाण्ड।
03॰ पूजा-ताईजी की छोटी लड़की
04॰ माँ-कहानी के हीरो की माँ
05॰ मैं-कहानी का हीरो
06॰ भोला-ताईजी का नौकर,
07॰ पार्वती-भोला की बीवी, सांवला रंग, साधारण कद-काठी,
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दोस्तों, एक बार मैं काफ़ी दिनों के बाद अपने गाँव जा रहा था। गाँव में मेरे ताऊजी जी का परिवार रहता है। ताई जी का स्नेह मुझ पर कुछ ज्यादा ही रहता था, वो मुझे कई बार बुला चुकी थी। अचानक ताऊजी को फालिस मार गई तो मैं अपने आपको गाँव जाने से नहीं रोक पाया। आज काफ़ी दिनों बाद मैं अपने गाँव जा रहा था।
मैं घर करीबन शाम के 4:00 बजे पहुँचा, ताईजी, सुजाता और पूजा मुझे देखकर खुश भी हुई क्योंकी मैं उनसे काफ़ी समय के बाद मिल रहा था। पर इस हादसे के चलते खुद को रोने से रोक भी ना पाई और मेरे सामने रो पड़ी। मैंने तीनों को संभाला और हौसला दिया कि सब ठीक हो जाएगा।
कुछ देर बाद वो शांत हो गये, और माँ मेरे लिए चाय बनाकर ले आई। जब मैंने ताईजी से पूछा ताऊजी के बारे में तो उन्होंने बताया कि काफ़ी दिनों से टेन्शन में थे, और काम का तनाव भी बढ़ गया था, सबसे बड़ा टेन्शन उन्हें सुजाता की शादी का था, इसी वजह से उन्हे फालिस हुआ है, और अब डाक्टर कहते हैं कि उन्हें ठीक होते-होते कम से कम एक साल लग जाएगा, अगर अच्छे से देख-भाल की तो, वरना मुश्किल है ताऊजी का ठीक होना। और वो यह सब घर दो बेटियाँ, खेती का काम कैसे देख पाएँगी? ऊपर से ताऊजी की सेहत का ध्यान भी रखना था, ताईजी काफ़ी टेन्शन में थी।
मैंने ताईजी को भरोसा दिलाते हुए कहा-“सब ठीक हो जाएगा और ताऊजी की तबीयत भी ठीक हो जाएगी…”
रात में सोते वक्त मैं, माँ और पापा बैठ कर बात कर रहे थे, और मैंने जो ताईजी ने मुझसे कहा था, वो उन्हें बताया।
पापा ने कहा-“बेटा हमें भी यह सब पता है, पर इसका कुछ ना कुछ रास्ता निकालना ही पड़ेगा, मैं अपनी भाभी और दो भतीजियों को ऐसे नहीं छोड़ सकता…”
कुछ देर बात करते-करते पापा ने कहा-“बेटा तुम क्यों नहीं देख लेते यह सब, जब तक ताऊजी ठीक ना हो जाएां?”
मैं अपना फाइनल एअर का एग्जाम दे चुका था। बस अब रिजल्ट आने की देरी थी, ताकी मैं आगे पढ़ाई के लिए एडमिशन ले सकूँ। मैंने पापा से कहा-“मैं अपनी पढ़ाई कैसे छोड़ सकता हूँ?”
उन्होंने मुझे काफ़ी समझाया। बाद में मम्मी भी पापा के सुर में सुर मिलाने लगी और यह तय हो गया कि मेरे रिजल्ट आने तक, जो दो महीने बाद आने वाला था, मैं ताऊजी के घर पे ही रहूँगा और ताईजी की हर काम में मदद करूँगा।
मुझे बिल्कुल अच्छा नहीं लगा पापा मम्मी का यह निर्णय। पर मैंने कुछ नहीं कहा और छत पर चला गया। रात के तकरीबन 11:00 बजे चुके थे, सब सो गये थे। मैं यह सोचने में बिजी था कि मैं अपना टाइम कैसे बताउन्गा? तभी मेरी नजर ताऊजी के रूम में पड़ी, छत से उनके रूम की खिड़की साफ दिखाई देती थी। मैंने देखा ताईजी ताऊजी की तेल से मालीश कर रही थी।
तब तक मेरे मन में ताईजी या किसी और घर की औरत के बारे में कोई गलत विचार नहीं था। मैंने देखा ताईजी ने साड़ी पहन रखी थी और वो ताऊजी के शरीर पे मालीश कर रही थी।
वैसे आपको ताईजी के बारे में बता दूाँ। उनकी उमर करीबन 45 साल है और वो थोड़ी खूबसूरत है, उनका शरीर थोड़ी हेवी है, खास कर उनकी गाण्ड और जाँघो का एरिया और उनकी चुचियाँ भी बड़ी-बड़ी हैं।
अचानक मैंने देखा कि तेल की बोतल जो कि बिस्तर पे पड़ी हुई थी वो गिर गई। सारा तेल बिस्तर पे फैल ना जाए इसलिए ताईजी उसे साफ करने में लग गई, और इस चक्कर में थोड़ा तेल ताईजी की साड़ी पे भी लग गया। ताईजी सब साफ कर बाथरूम में चली गई, शायद अपनी साड़ी साफ करने गई होंगी।
जब वो बाहर आई तो सिर्फ़ पेटीकोट और ब्लाउज़ में थी। ताईजी का फिगर मेरी आाँखों के सामने था, और सच बताऊं तो उन्हें देखकर मेरे अंदर अजीब सी हलचल मच गई। कुछ मिनट में ही मेरा उन्हे देखने का नज़रिया बदल गया। फिर उन्होंने लाइट बंद की और सो गई। मैं बहुत निराश हुआ और सोने चला गया। मुझे पूरी रात नींद नहीं आई और मैं ताईजी के बारे में ही सोचता रहा।
किसी तरह सुबह हुई। दोनों छोटे चाचा उनका परिवार अपने घर जाने को तैयार थे। तभी पापा ने सबको बुलाया और बताया कि कुछ महीने मैं यहीं रहूँगा और ताऊजी के घर और घरवालों की देख-भाल करूँगा। सब यह सुनकर सब खुश हुए खास कर ताईजी। क्योंकी वो यह सब अकेले सांभालने में घबरा रही थी।
फिर पापा ने ताईजी से कहा-“आप निश्चिंत रहें, यह आप लोगों की देख-भाल अच्छे से करेगा…”
बस कुछ देर बाद नाश्ता कर दोनों चाचा ने अपने घर चलने की तैयारी की। दोपहर को सिर्फ़ मैं, पापा, मम्मी और ताऊजी का परिवार था। मैं पूरा दिन ताईजी को ही देखता रहा, क्योंकी अचानक वो मेरे लिए किसी हीरोइन की तरह हो गई थी, जिसे पाने के लिए मैं बेताब था। जब वो झाड़ू लगा रही थी तो पीछे से उनकी मोटी गाण्ड देखकर मन कर रहा था कि अभी जाकर अपने हाथों में भर लूँ उनके चूतड़ और उनकी गाण्ड मार दूं।
पर यह सब किसी सपने जैसा ही था, क्योंकी मैं जानता थाकि रास्ता आसान नहीं है। जब रात को सब सो गये तो मैं भी छत पे चला गया और ताईजी के रूम में आने का इांतजार कर रहा था। तभी कुछ देर बाद ताई रूम में आई। आज उन्होंने मालीश से पहले एक खराब कपड़ा बिस्तर पे रखा और वहीं खड़े-खड़े अपनी साड़ी उतार दी। गर्मियों का वक्त भी था और शायद ताईजी ने अपनी साड़ी के खराब होने के डर से भी उसे निकालना ठीक समझा होगा। ताईजी काले रंग के ब्लाउज़ और पेटीकोट में थी, उनका रंग साफ था इसलिए खूबसूरती और भी निखर के सामने आ रही थी। जब भी वो झुकती तो उनकी चुचियाँ जो कि बाहर आने को तड़प रही थी, साफ नजर आ रही थी, और उनकी गाण्ड ने मुझे बेकाबू कर दिया था।
मैं वहीं छत पे बैठे-बैठे अपने लण्ड को मसल रहा था, और कैसे ताईजी को चोद सकूँ उस बारे में सोच रहा था। फिर जब ताईजी ने मालीश खतम की तो वो बाथरूम में चली गई, और जब बाहर आई तो मैं देखता ही रह गया। ताईजी सिर्फ़ पेटीकोट में बाहर आई, उन्होंने ब्लाउज़ निकाल दिया था, और अब वो मेरे सामने सिर्फ़ ब्रा जो कि काले रंग की थी और पेटीकोट में थी। मैंने जितना सोचा था उससे ज्यादा बड़ी चुचियाँ थी उनकी, तभी उन्होंने गाउन पहन लिया और सो गई। 4
अब मेरा सिर्फ़ एक ही अरमान था किसी तरह ताईजी को चुदवाने के लिए तैयार करने करूँ। पूरी रात ताईजी के खयालों में ही निकल गई। सुबह जब उठा तो आँखे थोड़ी सूजी हुई थी और लाल भी थी। मैं जब अपने कमरे से बाहर आया तो सबसे पहले मुझे मेरी ताईजी ही मिली। मैंने उन्हें देखकर स्माइल दी।
तब ताईजी ने कहा-“बेटा तुम्हारी आँखे सूजी हुई क्यों है और लाल भी है?”
मैंने उनसे कहा-“ताईजी आपके बारे में सोच-सोचकर नींद नहीं आती…”
उनकी आँखे भर आई। उन्हें लगा कि मैं उनके लिए इतना सोचता हूँ पर उन्हें क्या पता था कि मैं उन्हें चोदने का प्लान बना रहा हूँ। फिर जब मैं नीचे आया तो देखा कि पापा मम्मी भी घर जाने की तैयारी कर रहे थे। मैंने मम्मी से पूछा-“इतनी जल्दी?”
तभी मम्मी ने बताया-“पापा के ऑफीस में ज़रूरी काम है अब वो और नहीं रुक सकते…” इस तरह दोपहर तक पापा मम्मी भी चले गये।
अब हम 5 लोग ही बचे थे घर में। पूजा अपने किसी दोस्त के यहाँ गई थी, क्योंकी उसके भी एग्जाम कुछ दिनों में थे। सुजाता घर का सब काम देखती थी और ताईजी खेत खलिहान और ताऊजी को। दोपहर को मैंने देखा कि ताईजी एक बड़ी सी पोटली, जिसमें बहुत सारे कपड़े थे, वो लेकर खेत की तरफ जा रही थी। मैंने उन्हें आवाज़ लगाई।
ताईजी रुक गई और पूछा-“क्या है बेटा?”
मैंने कहा-“ताईजी इतनी धूप में आप कहाँ जा रहे हो?”
ताईजी ने कहा-“बेटा यह सब चादर और बाकी घर के कुछ कपड़े हैं वो देने जा रही हूँ…”
मैंने कहा-“किसे देने जा रही हैं आप?”
तब ताईजी ने बताया-“हमारे पम्पहाउस पे एक मजदूर रखा है, वो वहीं रहता है अपनी बीवी के साथ। उसी की बीवी को धोने के लिए देने जा रही हूँ…”
मेरे पास भी कोई काम नहीं था तो मैंने कहा-“लाओ ताईजी मैं ले लेता हूँ…” फिर मैंने ताईजी के हाथ से पोटली ले लिया और उन्हें कहा-“चलिए…”
ताईजी मेरे आगे चल रही थी। ताईजी ने ब्लू कलर की साड़ी और मेचिंग ब्लाउज़ पहन रखा था, और गर्मी की वजह से उन्हें बहुत पसीना आ रहा था, इससे उनकी सफेद ब्रा भी दिख रही थी। ताईजी मेरे आगे चल रही थी और उनके मटकते हुए चूतड़ देखकर मन कर रहा था उन्हें वहीं चोद दूं, पर मैं मजबूर था। खैर, जब हम पम्पहाउस पर पहुँचे तो वहाँ कोई नहीं था। ताईजी ने आवाज़ लगाई। उस औरत का नाम पार्वती था। पर काफ़ी देर तक जब कोई नहीं आया।
तभी एक दूसरा मजदूर आया और उसने बताया कि भोला और पार्वती के किसी रिश्तेदार के यहाँ मौत हो गई है, वहाँ गये हैं, कल तक आ जाएँगे।
मैंने ताईजी से पूछा-“अब घर वापस चलें?
ताईजी ने कहा-“अब यहाँ तक आ ही गये हैं तो कपड़े धो ही लिए जाएां। क्या भरोसा यह लोग कल आएँ के ना आएँ?” फिर कहा-“क्या तू मेरी मदद करूँगा?
मैंने तुरंत हां कर दी।
फिर ताईजी पम्पहाउस में गई वहाँ से कपड़े धोने का सामान ले आई और हम ट्यूबवेल के पास चले गये। वहाँ जाते ही ताईजी ने अपनी साड़ी को थोड़ा ऊँचा कर उसे कमर में फँसा दिया, ताकी उनकी साड़ी गीली ना हो। उनकी गोरी टाँगे देखकर मन कर रहा था उन्हें छू लूँ और किस करूँ।