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मामा भांजी के चुदाई के कारनामे

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लेखिका:-रिशुकुमारी

आदरणीय पाठको, यह मेरी पहली सच्ची सेक्सी कहानी है। अभी मेरी उम्र 21 साल है, मैं देखने में काफी आकर्षक हूँ। वैसे तो मैं सांवली और दुबली हूँ पर चेहरा आकर्षक है। मेरी कमर पतली है, पर चूतड़ चौड़े हैं.. और चूचियाँ आम के जैसी नुकीली हैं।

मेरी यह सेक्सी स्टोरी सन 2015 की है.. उस वक्त स्कूल में पढ़ती थी। ऐसे तो मैं राजशर्मा स्टोरीज़.कॉम 2014 से पढ़ती आ रही हूँ। मुझे आर एस एस के बारे में मेरी एक सहेली से पता चला था क्यूंकि उसने अपने भाई के मोबाइल पर आरएसएस साइट खुली हुई देख ली थी, तो वो भी पढ़ने लगी थी। इसलिए मुझे भी चुदाई की जानकारी समय से पहले हो गई थी। जब मैं स्कूल की बड़ी कक्षा में गई, तो मेरे एक दूर के रिश्ते के मामा जिनका नाम चिंटू था, मुझे टयूशन पढ़ाने आते थे। वो हम लोगों के घर के पास ही रहते थे। वो खुद भी कम्पटीशन की तैयारी कर रहे थे, साथ ही वो टयूशन भी पढ़ाते थे।

वैसे तो वो भी सांवले थे, लेकिन लंबे और आकर्षक थे। उनका चौड़ा सीना होने के वजह से मुझे वो बहुत ही हैंडसम दिखते थे। उनका घर पास में ही होने की वजह से वो मुझे पढ़ाने सबसे अंत में रात को 8 बजे आते थे। उस वक्त चिंटू मामा एक लोवर और टी-शर्ट पहन कर आते थे।

मुझे मामाजी अपनी ही साइड में बैठा कर पढ़ाते थे। पढ़ते समय मैं भी घर में हल्के और ढीले कपड़े पहनती थी ताकि मेरी नींबू जैसी चूचियाँ मामा को दिख जाएं क्योंकि मैं मामा को बहुत पसंद करती थी।

मामा मुझे स्टडी रूम में पढ़ाते थे इसलिए वहाँ जल्दी कोई घर के सदस्य नहीं आता था। मेरे घर में केवल 4 सदस्य रहते हैं.. मम्मी-पापा, छोटा भाई और मैं।

एक दिन की बात है.. वो मुझे पढ़ा रहे थे और मैं झुकी हुई किताब को देख रही थी। अचानक से मैंने सर उठाया तो मैंने देखा मामा मेरी चूचियाँ देख रहे थे। हम दोनों की नज़रें टकराईं तो मामाजी घबरा गए और मैं भी शर्मा गई।

अब मेरा मन मचलने लगा, मैं मुस्कुरा दी तो मामा जी भी मुस्कुरा दिए।

एक तरह से हम दोनों ने एक-दूसरे की चाहत को समझ लिया था।

उसके बाद यह सिलसिला चलता रहा.. मैं भी मामा को छेड़ने लगी और मामा भी निडर होकर मज़ा लेने लगे थे। कभी-कभी तो वो मुझे साइड से अपने बाजू से मेरी चूचियाँ को छेड़ देते थे। मैं भी यही चाहती थी और मुझे मज़ा भी मिल जाता था।

बोर्ड के एग्जाम के वजह से मुझे कहीं किसी समारोह में जाने से मना किया गया था। मेरे मम्मी-पापा मेरे मामा को बहुत ही मानते थे और उन पर बहुत भरोसा भी करते थे, चाहे वो दूर के रिश्ते में ही क्यों ना आते हों, उन्हें सब कुछ बताते थे।

कुछ ही दिन बाद मेरी मौसी की बेटी के शादी थी तो मेरी मम्मी-पापा और भाई को 2 दिन के लिए मौसी के घर जाना था। पापा ने मामा को ही मेरी देख-रेख की ज़िम्मेवारी दी और बोले- तुम मेरे ही घर के बाहर वाले कमरे में दो दिन सो जाना।

यह बात सुन कर मुझे भी गुदगुदी सी होने लगी। जब मम्मी-पापा को जाने को 5 दिन ही बचे थे, अचानक से मामा ने मुझे साइंस का प्रजनन का विषय पढ़ाने लगे। पहले तो मुझे इसके बारे में कुछ पता नहीं था, लेकिन धीरे-धीरे मुझे रूचि आने लगी और मैं जानबूझ कर अनजान बनने लगी, मैं मामा जी से कुछ भी नहीं समझने की नाटक करने लगी।

घर वालों के जाने से 2 दिन पहले मामा कुछ वीडियो लेकर आए और मुझसे बोले- मेरे मोबाइल में कुछ वीडियो हैं, उसे देख कर तुम्हें ये चैप्टर समझ आ जाएगा। मामा ने सारे वीडियो मेरे मोबाइल में सेंड कर दिए और समझाने के लिए एक वीडियो चलाया।

उस वीडियो में दो जानवर सेक्स कर रहे थे। उसके बाद के वीडियो चलते ही मैंने आँख बंद कर लीं और चेहरे को अपने हाथ से ढक लिया।

मामा ने ज़बरदस्ती मेरे हाथ हटा दिए और चुदाई देखने की ज़िद करने लगे।

मैं देखने लगी.. मैंने देखा कि एक कमसिन लड़की एक बड़ी उम्र के आदमी से सेक्स कर रही थी। पहले तो वो लड़की आदमी की लंड चूस रही थी। फिर मामा ने वीडियो को आगे बढ़ा दिया.. तो देखा कि वो लड़की 12 से 15 cm लम्बे लंड को आसानी से चूत में ले रही है।

फिर मामा ने वीडियो बंद कर दिया, अचानक से मेरी नज़र मामा के लोवर पर गई। मैंने देखा लोवर के अन्दर से मामा का लंड तन गया है.. और उनका लंड बाहर निकलने को बेताब लग रहा था।

मामा बोले- मैं जा रहा हूँ, आज की पढ़ाई खत्म.. कल आकर पढ़ा दूँगा।

मैंने भी मज़ाक में बोल दिया- आप बाहर कैसे जाएँगे?

मामा ने पूछा- क्यों?

तो मैं बोल दिया- आपका तो कुछ खड़ा है।

मामा शर्मा गए और समझ भी गए कि मैं भी कुछ चाहती हूँ। देर रात पढ़ाई करने के बाद मैं स्टडी रूम में ही सो जाती थी। उस रात मैं ठीक से सो नहीं पाई।

पहले तो मामा का दिए हुए सारे वीडियो देखे। चुदाई के वीडियो देखते ही देखते मेरी चुत गीली हो गई थी। फिर मैंने मामा का खड़ा लंड याद करके सारी रात बिताई।

 
फिर वो दिन आ गया.. जब सभी मौसी की बेटी के शादी में चले गए। दिन में मैं घर में अकेली थी, मुझे ऐसा लग रहा था कि आज रात कुछ तो अलग सी होगी इसलिए मैंने भी जल्दी से खाना बना लिया और 8 बजने की इंतज़ार करने लगी।

फिर अचानक से डोरबेल बजी, मैंने दरवाजा खोला तो देखा मामा हाफ़ पेंट और टी-शर्ट में आए हैं। उनका पेंट तो आधी जाँघ तक का ही था।

मामा मुझे पढ़ाने लगे, पढ़ाई खत्म होने के बाद हम लोगों ने खाना खाया। अब मैंने भी कपड़े बदल कर शॉर्ट्स और टॉप पहन लिया। हम दोनों टीवी देखने लगे। दोनों एक ही बेड पे बैठ कर टीवी देख रहे थे।

मामा को टीवी देखना पसंद नहीं था इसलिए उन्होंने मेरे पैर के तरफ सर कर लिया ताकि उन्हें टीवी ना दिखे। साथ ही मुझे भी उनके मोबाइल का स्क्रीन ना दिखे। वो मोबाइल पर हेडफोन लगा के कुछ देखने लगे।

मेरा सर मामा के पैर की तरफ था और उनके पैर मेरे सर की तरफ थे। मामा मोबाइल में बिज़ी हो गए और मैं भी टीवी देखते-देखते सोने का नाटक करने लगी। लेकिन मैं थोड़ी सी आँख खोल कर सब कुछ देख रही थी। मामा को पता नहीं चल रहा था कि मैं जागी हूँ और सब कुछ देख रही हूँ।

जब मामा को लगा कि मैं सो चुकी हूँ। उन्हें पता था कि मैं बहुत गहरी नींद में सोती हूँ और मुझे नींद में कुछ पता नहीं चलता है।

अचानक से मैंने देखा कि मामा थोड़ी-थोड़ी देर में अपना लंड दबा रहे हैं, कुछ देर बाद वो अपना लंड मसलने लगे। यह देख कर मुझे भी गुदगुदी होने लगी थी। देखते ही देखते मामा ने अपना आधा लंड हाफ़ पेंट के नीचे से निकाल दिया और बार-बार मुझे देख कर लंड को सहला रहे थे। बीच-बीच मैं वो अपने लंड पर थूक भी लगा रहे थे।

मामा का लंड एकदम काला सा और लंबा सा लगभग और काफी मोटा सा था। इस वक्त उनका लंड बिल्कुल रॉड जैसा दिख रहा था।

यह देख कर मुझे ऐसे लग रहा था जैसे मेरी चूत में हज़ारों चींटी काट रही हों। लेकिन मैं चुदास बर्दाश्त करके लंड को देखती रही। फिर मामा ने धीरे से मेरी चूचियों में अपना पैर सटा दिया।

मैं अन्दर ही अन्दर तड़पने लगी.. पर मेरी मजबूरी थी। मैं अपनी तरफ से पहले कुछ नहीं कर सकती थे, धीरे-धीरे मामा मेरी चूचियों को पैर से जोर से मसलने लगे।

मैंने हिम्मत करके करवट बदल ली, तो कुछ देर के लिए मामा सहम से गए। उन्हें लगा कि जैसे मुझे सब पता चल गया हो।

मामा के लंड से चुदने की चाहत बढ़ गई थी लेकिन मैं खुल नहीं पा रही थी।

मैं भी चालाक थी, मैं भी पहले ही अन्तर्वासना पे सब कुछ पढ़ चुकी थी। मैंने करवट लेकर अपनी गांड मामा के चेहरे की तरफ कर दी और अपना पैर भी मोड़ कर गांड थोड़ा बाहर को निकाल दी।

मामा को लगा कि मैं फिर से सो गई हूँ। थोड़ी देर बाद मुझे लगा कि मामा मेरे शॉर्ट्स को खींच रहे हैं। मैंने जानबूझ का ढीला शॉर्ट्स पहना था ताकि आसानी से खुल जाए।

धीरे से मामा ने मेरा शॉर्ट्स निकाल दिया। अब मैं पेंटी में थी और चुपचाप से करवट के बल लेटी थी।

फिर मामा ने भी अपना पेंट निकाल दिया और मेरे पीछे आ कर लेट गए। थोड़ी देर बाद मुझे एहसास हुआ कि मेरी गांड में पेंटी के ऊपर से मामा लंड रगड़ रहे हैं।

मैं इंतज़ार में थी कि कब खुला लंड मामा मेरी पेंटी के अन्दर घुसा दें। थोड़ी ही देर बाद मामा ने मेरी पेंटी को थोड़ा पीछे खींच कर लंड दोनों चूतड़ों के बीच गांड के छेद में सटा दिया और थोड़ी देर के लिए शांत हो गए। मामा के लंड का स्पर्श पाकर मुझे लग रहा था जैसे मेरी गांड के छेद पर किसी ने गरम रॉड रख दी हो।

मैं बेचैन थी कि कब मामा लंड से मेरी चूत सहलाएं, मेरी चूत पूरी तरह से गीली हो चुकी थी।

थोड़ी देर मैं मामा ने गांड के पीछे से मेरी पेंटी नीची कर दी और गांड के पीछे से ही लंड से मेरी चूत को सहलाने लगे। कुछ देर में जब उनका लंड मेरी चूत के पानी से गीला हो गया, तो उनको मालूम हो गया कि मैं सोई नहीं हूँ।

मामा ये चैक करने के लिए मेरे टॉप के अन्दर हाथ डाल कर मेरी चूचियां दबाने लगे, तो मुझसे बर्दाश्त नहीं हुआ और मैं जोर-जोर से गरम साँसें लेने लगी।

मामा ने पूछा- तू जागी है?

तो मैं शर्मा कर हाँ बोल उठी।

अब मामा ने आव देखा ना ताव.. मेरे ऊपर चढ़ कर जोर-जोर से मेरे होंठ चूसने लगे। मामा ऐसे चूस रहे थे जैसे मेरे होंठ खा जाएँगे। साथ ही साथ मामा मेरी चूत भी जोर-जोर से सहलाने लगे।

मेरी चूत इतनी छोटी थी कि केवल मामा का एक ही उंगली से सहला पा रहे थे।

मैं बार-बार मामा से बोल रही थी- अह.. और जोर से चूत मसलिए, चूत फाड़ दीजिए।

मामा रुक गए थे और मेरे लंड देखने से पहले ही उन्होंने लंड को अंडरवियर में छुपा लिया ताकि मैं मोटा लंड देखकर डर ना जाऊं या फिर मामा जल्दीबाजी में झड़ ना जाएं।

 
मामा ने फिर मेरा टॉप उतार दिया। अब मैं केवल पेंटी और स्पोर्ट ब्रा में थी। मेरी चूचियां छोटी-छोटी थीं.. इसलिए मैं स्पोर्ट ब्रा पहनती थी। कभी-कभी मेरी मम्मी नहाते वक़्त मुझे बाथरूम बुलाती हैं.. तो मम्मी नंगी ही दिख जाती हैं।

मम्मी की चूचियां अभी भी छोटी-छोटी और खड़ी-खड़ी दिखती हैं और मम्मी की चुत तो मेरी चुत से बहुत मोटी है। शायद उस में मामा का लंड आसानी से घुस जाता।

मेरी स्पोर्ट ब्रा में मेरी चूचियां नुकीली दिख रही थीं.. ये मामा को बर्दाश्त नहीं हुआ। वो मेरी चूचियां ब्रा के ऊपर से मसलने लगे। फिर मुझे ब्रा और पेंटी उतारने को बोले।

मैंने मना कर दिया और बोली- मुझे शर्म आती है.. पहले लाइट ऑफ करो।

वो नहीं माने और ज़बरदस्ती मेरी ब्रा और पेंटी को उतार दिया। अब मामा मुझे लेटा कर मेरी चूचियां को चूसने लगे। मेरी छोटी से चूचियां मामा के मुँह में समा गईं। मामा जोर-जोर से मेरी चूचियां चूसने लगे और अपनी ओर खींचने लगे। मुझे ऐसा लग रहा था कि मामा मेरे नीबू कच्चे ही खा जाएँगे। लगभग दस मिनट तक मामा बारी-बारी से दोनों चूचियां नोंचते रहे।

अब तक मेरी चूत फिर से गर्म पानी छोड़ने लगी थी। मामा ने मेरी गांड के नीचे तकिया रख कर मेरे दोनों पैर फैला दिए और मेरी चूत की गरम मलाई चाटने लगे। मामा ने चुत चाट-चाट कर इसकी गर्मी को ठंडा कर दिया। फिर मेरी चूत का दाने को अपने मुँह में लेकर अन्दर की तरफ खींचते हुए चूसने लगे। मेरी चूत में छोटे-छोटे गोल्डन बाल थे.. मामा जी मेरी झांटों को अपने मुँह में लेकर खींचने लगे। मैं तड़पने लगी.. उम्म्ह… अहह… हय… याह… मेरे मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगीं।

अब तक मेरी शर्म-हया सब खत्म हो चुकी थी। मैं बोल उठी- आपने तो सब कुछ कर लिया.. अब आप भी अपना दिखा दीजिए।

तो मामा हंस कर बोले- क्या दिखा दूँ?

वो मेरे मुँह से लंड शब्द सुनना चाह रहे थे.. पर मैं बोल नहीं पा रही थी। फिर भी मैंने हिम्मत करके लंड बोल दिया।

मामा बोले- खुद से मेरे अंडरवियर से लंड निकाल लो।

ये कह कर मामा जी ने मेरा हाथ पकड़ कर अंडरवियर पर रख दिया। मैं अंडरवियर के ऊपर से लंड को दबाने लगी, मामा का लंड गर्म-गर्म सा लग रहा था। उनका लंड बाहर निकलने के लिए मानो उफान मार रहा था।

मैंने हिम्मत करके मामा का अंडरवियर नीचे खींच दिया। अगले ही पल मामा का विशाल सा मोटा लंड मेरी सामने फन फैलाए खड़ा था। मैं तो डर गई कि ये मूसल मेरी चूत में कैसे घुसेगा।

मामा का लंड लगभग फूल कर 8″ लंबा और कम कम से खीरे जितना गोलाई लिए हुए था। उनका लंड लोहे जैसा सख्त सीधा और काला था। लंड थोड़ा टेढ़ा, सुपारा गर्म और पिंक था। मामा ने अपना लंड मेरी हाथ में दे दिया और आगे-पीछे करने के लिए बोले। मामा का लंड इतना मोटा था कि मेरे हाथ में नहीं आ रहा था।

फिर मामा ने मुझे लंड चूसने को बोला, मैंने मना कर दिया तो मामा ने ज़बरदस्ती मेरे मुँह में लंड डाल दिया। मेरे मुँह में मामा के लंड का सिर्फ़ टोपा ही जा पा रहा था। मैं सिर्फ़ पिंक वाला हिस्सा ही चूस पा रही थी।

मामा के लंड पर थोड़ा सा पानी आ गया था। पहले मुझे अजीब सा स्वाद लगा, फिर मामा का लंड थोड़ा नमकीन और खट्टा सा लगने लगा। कुछ पलों बाद ही मुझे मामा का लंड चूसने में मज़ा आने लगा। मैं जोर-जोर से लंड चूसने लगी।

अचानक से मामा ने लंड को मेरे मुँह से खींच लिया और बोले- अब मत चूसो नहीं तो तुम्हारे मुँह में ही झड़ जाऊंगा।

लेकिन मैं चाहती थी कि मामा मेरे मुँह में ही झड़ जाएं ताकि लंड शांत हो जाए। मैं पहले ही अन्तर्वासना मैं पढ़ चुकी थी चूत में लंड घुसते वक़्त बहुत दर्द होता था और मुझे पहले नहीं पता था कि मामा का लंड इतना मोटा होगा। मैं डर गई थी और मैं मामा से चुदवाना नहीं चाहती थी।

पर मामा कहाँ मानने वाले थे, उन्होंने मुझे मुँह के बल लेटा दिया और वे अपना लंड मेरे दोनों चूतड़ों के बीच में रख कर मेरे ऊपर चढ़ गए। मामा मेरे गले पर चूमने लगे और धीरे-धीरे अपने लंड को आगे-पीछे करने लगे। मामा का लंड मेरे चूतड़ों के ऊपर रगड़ खाने लगा, मुझे मज़ा आने लगा था। थोड़ी देर में मामा अपने लंड को चूतड़ों के पीछे से मेरी चुत में सटा कर मेरे ऊपर पोजीशन में आ गए और लंड को ऊपर-नीचे करने लगे। मामा का लंड मेरी चूत में रगड़ खाने लगा। मेरी चूत फिर से पानी से भरने लगी थी, मैं मदहोश सी होने लगी। मेरी मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगीं, गर्म साँसें चलने लगी थीं।
 
मैं चाहती थी कि मामा जल्दी से लंड मेरी चुत में पेल दें। अब मामा भी चोदना चाहते थे इसलिए मेरी गांड के नीचे तकिया रख कर फिर मेरी चूत गीली की ताकि लंड घुस सके। मामा ने अपनी जीभ मेरी चूत के अन्दर तक घुसा कर चूत को गीली किया।

फिर मामा ने अपने पैंट से से वैसलीन की डिब्बी निकाल कर ढेर सारी अपने लंड पे लगा ली और मेरी भी चूत पे लगा डाली।

अब मामा का लंड चमकने लगा था। मेरा मन तो कर रहा था कि लंड को खा जाऊं।

फिर मामा अपना लंड मेरे चूत के छेद पे रख कर सहलाने लगे। मैं डर भी रही थी और मज़ा भी ले रही थे।

मामा मेरा ध्यान हटाने के लिए मेरी चूचियां और गांड की तारीफ कर रहे थे। मैं भी आँख बंद करके शर्मा रही थी और कहीं खो सी गई थी। अचानक से मामा ने जोर से धक्का मारा।

मानो मैं मर सी गई, मेरी मुँह से जोर से चीख निकल गई- हाय मम्मी मैं मर गई, मेरी चूत फट गई।

मैं जोर जोर से रोने लगी, मामा ने मेरे होंठ पे किस करने लगे ताकि मेरी आवाज़ ना निकले।

थोड़ी देर बाद मामा ने लंड हटा लिया। मामा के लंड पे मेरी चूत की खून लग गया था, मुझे पता था कि पहली चुदाई में खून निकल जाता है। मैं बहुत देर तक दर्द से तड़पती रही।

मैंने मामा को चोदने से मना कर दिया और बोली- मैं आपको बाद में कभी चोदने दे दूँगी.. जब मेरी चूत ढीली हो जाएगी।

मामा भी समझ गए कि मेरी चूत का छेद बहुत छोटा है.. काफ़ी दर्द होगा।

फिर मामा ने अपने लंड से मेरी चूत को सहलाने लगे, मेरी भी चूत में बहुत सारा रस भरा था। थोड़ी ही देर में मेरी चूत से पानी निकलने लगा तो मामा भी लंड से चूत सहलाते हुए मुठ मार कर मेरी चूत पर झड़ गए और सारा पानी निकाल दिया।

उसके बाद हम दोनों काफ़ी थक गए थे। मामा ने जल्दी से एक कपड़े से मेरी चुत की सफाई की और फिर मैं नंगी ही मामा से लिपट कर सो गई।

मामा के मोटे लंड से अपनी चुत की पूरी चुदाई की कहानी मैं अगले भाग में लिखूँगी।

प्रिय पाठको, मेरी सेक्सी कहानी पर आप अपने सुझाव मुझसे ज़रूर शेयर कीजिएगा।
 
चूंकि उस रात मेरी चुदाई अधूरी रह गई थी, मैं नंगी ही मामा की बांहों में सो गई थी. सुबह जब मेरी नींद खुली तो देखा कि मामा भी नंगे थे और मैं भी नंगी ही मामा से लिपटी हुई थी.

नींद खुलते ही मैं ये सब नजारा देख कर शर्मा गई, जल्दी उठ कर मैंने कपड़े पहन लिया, फिर मैं मामा के नंगे बदन को देखने लगी, क्योंकि मैं रात में मामा के लंड को ठीक से देख नहीं पाई थी, अभी तो मामा नींद में थे. मैंने देखा कि मामा का लंड एकदम से सिकुड़ कर छोटा सा हो गया था.. मानो किसी छोटे से बच्चे की लुल्ली हो.

मैं जानती हूँ कि मर्दों में मॉर्निंग में चुदाई की सबसे ज्यादा इच्छा होती है, इसलिए मुझे लगा कि शायद मामा नींद खुलते ही मेरी चुदाई करना चाहेंगे, इसलिए मैंने उठने के साथ ही नहाकर पूरे कपड़े पहन लिए.

थोड़ी ही देर में मामा की नींद भी खुल गई और वो भी उठकर कपड़े पहन कर फ्रेश होने चले गए. मैं मामा के लिए चाय बनाने लगी. मामा जैसे ही फ्रेश हो कर निकले, मैं चाय लेकर मामा के रूम में आ गई, पर मैं ना तो मामा से नज़र मिला पाई और ना ही कुछ बोल पाई.

मैं चाय रख कर वापस किचन में आ गई और नाश्ता बनाने लगी.

अचानक से मामाजी ने किचन में आकर मुझे पीछे से बांहों में भर लिया और बोलने लगे- सॉरी.. कल रात के लिए.. नाराज़ हो मुझसे, सच में मैं तुमसे प्यार करने लगा हूँ. तुम जब तक चाहो मेरे साथ रिलेशन में रह सकती हो एक प्रेमिका के जैसे.. मैं हमेशा तुम्हारे साथ रहूँगा. मैं कभी भी तुम्हारे इच्छा के विरूद्ध नहीं जाऊंगा और जब कभी तुम्हें लगे इस रिलेशन को तोड़ देना चाहिए, मैं कभी मना नहीं करूँगा.

ये सब सुनने के बाद मैं टूट सी गई और उल्टा मुड़ कर मामा की बांहों में समा गई, मैं बोल उठी- आई लव यू मामा जी..

मामा खुश होते हुए बोले- तुम अकेले में मुझे मामा नहीं बोलोगी.

मामा मेरे होंठों हो चूसने लगे और मेरे टॉप में हाथ डाल कर मेरी चुची मसलने लगे. इससे मेरी चूत गीली होने लगी. मैं मामा से बोली- अभी नहीं.. अब जो भी करना है आपको.. रात में कीजिएगा.

फिर मैं नाश्ता बनाने लगी.

मामा जी नाश्ता करके बोले- मैं कोचिंग को जा रहा हूँ.. शाम को जब मैं आऊंगा तब मिलता हूँ. मैंने मोबाइल में तुम्हें कुछ वीडियो भेज दिए हैं.. देख लेना.

मामा जी ये कह कर मुस्कुराते हुए चले गए.

मामाजी की किचन वाली बात सोच कर मैं मुस्कराने सी लगी, खुश सी रहने लगी. पर मुझे थोड़ा बुरा भी लग रहा था कि रात को मैं मामा की चुदाई की इच्छा पूरी नहीं कर पाई. मैंने सोच लिया कि आज मामा से कैसे भी करके पूरी चुदाई कराऊंगी.

फिर मैं सोचने लगी कि आज मामा को कैसे खुश करूँ. ये सोच कर मेरी चूत गीली सी हो रही थी, जैसे ही मैंने चूत पर हाथ रखा, मेरी चूत के बाल चिपचिपा से रहे थे. फिर मेरे मन में ख्याल आया कि क्यों ना आज मामा को अपनी चूत की झांटें साफ़ करके सरप्राइज़ दूँ.

मैं सोचने लगी कि झांटें कैसे साफ़ करूँ. फिर मैंने इंटरनेट पर सर्च किया तो बहुत सारे हेयर रिमूवर दिखे पर उसके लिए मुझे मार्केट जाना पड़ता.

मैंने फिर पापा की शेविंग किट निकाली और अपनी चुत पर पापा वाली शेविंग क्रीम लगाई.. थोड़ी देरी के बाद पापा के रेज़र से चूत की झांटों की सफाई की. उसके बाद तो मानो चूत में एक अजीब से गुदगुदी सी होने लगी थी. अब मेरी चिकनी सांवली सी चुत एकदम साफ़ चिकनी और चमकदार दिख रही थी. मुझसे अपनी चुत की गुदगुदी बर्दाश्त नहीं हो रही थी.
 
मैंने मामा को मैसेज किया और पूछा- कहाँ हो आप?

तो मामा ने रिप्लाइ मैसेज किया- क्लास मैं हूँ.

मैंने फिर पूछा- आप अभी घर आ सकते हो?

तो मामा का रिप्लाइ आया- क्यों?

मैंने मैसेज किया- नीचे बहुत गुदगुदी हो रही है.

मामा ने रिप्लाइ किया- वीडियो देख लो और रात का इंतज़ार करो.

फिर मुझे वीडियो की याद आई जो कि मामा ने मॉर्निंग में दिए थे. मैं मोबाइल खोल कर वीडियो देखने लगी.

मैंने देखा कि कैसे एक छोटी लड़की, कैसे अपनी चूत को खुद से पहली बार चुदाई के लिए तैयार करती है. मैंने वीडियो में देखा कि एक कमसिन सी लड़की अपनी चुत में पहले धीरे-धीरे बैंगन डाल रही थी और अचानक से जोर-जोर से बैगन चुत में अन्दर-बाहर करने लगी. मैंने देखा कि आधा बैंगन उसकी चूत में घुस गया और चुत से खून निकलने लगा. फिर बाद में उसने अपनी चूत में खीरा भी डाल लिया. मेरे घर के पीछे बैंगन की बाड़ी लगी थी.. मैं भी उनमें से चुन कर एक लम्बा पतला और सख़्त सा बैंगन तोड़ लाई और चूत में डालने की कोशिश करने लगी. पर बैगन मेरी चुत के अन्दर जा नहीं पा रहा था.

फिर मैं बेडरूम में गई और देखा कि मामा की वैसलीन की डिब्बी वहीं पड़ी थी. मैंने वैसलीन बैंगन पर और अपनी चुत पर लगा ली और फिर से बैंगन डालने की कोशिश करने लगी. इसी के साथ मैं चुदाई का वीडियो भी देखने लगी. वीडियो देखते समय अचानक उत्तेजना से मैंने भी बैंगन को जोर से धक्का लगा दिया, तो लगभग 8 से 10 सेंटीमीटर बैंगन मेरी चुत में घुस गया. मैं दर्द से कराहने लगी और मेरी चूत से खून भी निकलने लगा. थोड़ी देर तक बैंगन को मैंने चूत के अन्दर ही घुसे रहने दिया और फिर से वीडियो देखने लगी. कुछ ही पलों में मैं बैंगन को धीरे-धीरे अन्दर बाहर करने लगी.

अब मुझे चुत में अच्छा लगने लगा था. मैंने देखा कि लगभग आधे से ज्यादा बैंगन मेरी चूत में अन्दर जाने लगा था. फिर मैंने सोचा कि क्यों ना अब थोड़ा और मोटा बैंगन चूत में डालूँ.

तो मैं थोड़ा मोटा बैंगन ले आई और उसे चुत में डालने की कोशिश करने लगी. बैंगन चुत में घुसाया तो काफ़ी दर्द होने लगा, तो मैंने बैगन छोड़ दिया और सोचा कि अब जो होना है रात में मामा से ही होगा.

मैं अब खुश थी.. शायद आज मामा को खुश कर पाऊंगी.

फिर दोपहर का खाना खाकर मामा के लंड के बारे में सोचते-सोचते सो गई. जब नींद खुली तो शाम के 5 बज चुके थे. मैं जल्दी से फ्रेश होने चली गई.

बाथरूम में मैंने चुत को अच्छे से धोया ताकि रात मैं अच्छे से अपनी चुत चटवा सकूँ.

फिर मैंने जल्दी से डिनर बना लिया और 8 बजे तक फ्री हो कर मामा का इंतज़ार करने लगी.

थोड़ी ही देर में डोरबेल बजी, मैं समझ गई कि ये ज़रूर मामा होंगे. मैंने डोर खोले तो सामने मामा आधी जाँघ तक की पेंट और टी-शर्ट पहने खड़े थे. मैंने भी नीचे छोटा सा शॉर्ट्स और ऊपर ढीला सा टॉप पहन रखा था.

मामा ने अन्दर आने के साथ ही दरवाजा बंद कर दिया और मुझे किस करने लगे. मेरे होंठ मामा के मुँह के अन्दर थे. मामा पीछे से मेरे शॉर्ट्स में हाथ डाल कर मेरी गांड सहलाने लगे.

मैं बोली- अभी नहीं.. खाना खाने के बाद जो करना है, कीजिएगा और आपके लिए एक सरप्राइज़ भी है.

मुझे समझ में आ गई थी कि आज रात मामा मेरी गांड और चूत दोनों फाड़ देंगे.

फिर हम लोगों ने दस बजे तक खाना आदि खत्म किया और बिस्तर पे आ गए. हम दोनों टीवी देखने लगे. मैं आगे लेट गई और मामा मेरे पीछे थे. मामा का लंड मेरी गांड में सटा हुआ था. टीवी देखते देखते अचानक से मामा ने मेरे टॉप में हाथ डाल कर मेरी ब्रा के ऊपर से मेरे चूचों को दबाने लगे. मैं धीरे-धीरे गर्म होने लगी और सिसकारियाँ लेने लगी.

मामा ने मुझसे पूछा- क्या सरप्राइज़ है?

तो मैं बोली- आपको अपने आप पता चल जाएगा.

अब मामा का लंड खड़ा हो गया था और मेरी गांड में चुभने लगा था. मैं चाह रही थी कि मामा जल्दी से मेरी चुदाई करें.

मामा ने मेरा टॉप उतार दिया और मैं केवल स्पोर्ट ब्रा में आ गई थी. मामा मेरे ऊपर चढ़ कर ब्रा के ऊपर से ही मेरी चुचियों को दाँत से काटने लगे. फिर मेरी ब्रा को नीचे खींच कर मेरी दोनों चुचियों को ब्रा के ऊपर से बाहर निकाल दिया. मेरे निप्पल एकदम बेर के गुठली जैसे खुरदरे, नुकीले और काले से थे. मामा मेरे निप्पलों को अपने दाँत में दबा कर खींचने लगे, मुझे बहुत गुदगुदी सी हो रही थी.

फिर मामा ने मेरी ब्रा और शॉर्ट्स निकाल दी. अब मैं केवल पेंटी में थी.

मामा मेरे ऊपर चढ़ गए और बारी-बारी से मेरी चुचियों को चूसने लगे. मेरी चूत पानी छोड़ने लगी थी. अब धीरे-धीरे मामा अपना हाथ मेरी पेंटी के अन्दर की ओर बढ़ा रहे थे. मैं मन ही मन में खुश हो रही थी कि अब मामा को सर्प्राइज़ पता चलेगी.

जैसे ही मामा का हाथ मेरी चूत पर गया, मेरी चिकनी चूत पाकर मामा की आँखों में एक चमक सी आ गई और मुझसे पूछे- चुत के बाल कहाँ गए?

यही सरप्राइजथा.

अब बाकी चुत चुदवाने की मुराद कैसे पूरी हुई और संग में गांड का क्या हुआ वो सब आपको अगले भाग में चुत खोल कर पूरी चोदन कहानी लिखूंगी.

कहानी जारी है.

 
अब तक की मेरी नोन वेज स्टोरी में आपने पढ़ा था कि मामा जी के लंड से चुत चुदवाने की मेरी अधूरी ख्वाहिश पूरी होने ही वाली थी. मैंने मामा जी के लिए अपनी चुत की झांटें भी साफ़ कर ली थीं ताकि उनको चिकनी चुत का सरप्राइज दे सकूँ.

अब आगे..

मैं बोली- मैंने आपके लिए चुत साफ़ कर दी.

मामा पागल से हो गए और झट से मेरी पेंटी निकाल कर मेरी सांवली चुत को देखने लगे.

मेरी नंगी चिकनी चुत देख कर मामा ने भी झट से अपने कपड़े उतार दिए और केवल अंडरवियर में आ गए. अंडरवियर में से मामा का लंड साफ-साफ तना-तना दिख रहा था. मामा मेरी चूत सूंघने लगे, चूत से एक अलग सी खुश्बू आ रही थी.

मामा को बर्दाश्त नहीं हुआ, तो मामा ने अपने होंठ मेरी चूत पे रख दिए और जोर-जोर से चुत चूसने लगे. मेरी चूत के दाने को मामा अपने मुँह के अन्दर ऐसे खींचने लगे.. जैसे चुत को खा ही जाएँगे. मेरी चूत के पानी को मामा ने अपनी जीभ से चाट कर साफ कर दिया और मेरी चूत के अन्दर तक अपनी खुरदरी जीभ घुसेड़ रहे थे. मैं चुत चुसाई के मज़े ले रही थी और कामुक सिसकारियाँ भी भर रही थी.

अब मामा समझ गए थे कि मैं चरम सीमा पर हूँ और चुदने को तैयार हूँ. मामा बोले- रिशू, मेरा लंड चूसो और गीला कर दो.

मैं बोली- पहले बाहर तो निकालिए.

मामा ने अब अपना अंडरवियर निकाल दिया. मामा का काला, लंबा, मोटा सा, गुलाबी टोपे वाला लंड मेरी आँखों के सामने तन कर खड़ा था. मैं बैंगन जो कि मॉर्निंग में मैंने अपनी चूत में डाला था, उससे मामा के लंड की तुलना करने लगी.

मामा का लंड बैंगन से काफ़ी मोटा और लंबा था. मैं समझ गई कि आज मामा मेरी चूत पक्के में फाड़ देंगे. मामा ने मेरे मुँह में अपना लंड घुसा दिया. मामा के लंड का केवल पिंक हिस्सा ही मेरे मुँह में जा पा रहा था.

मामा का लंड थोड़ा खट्टा और नमकीन लग रहा था, पर मुझे लंड चूसने में मज़ा आ रहा था. मैं मामा के लंड में धीरे-धीरे दाँत चुभाने लगी, इससे मामा को भी मज़ा आ रहा था.

मामा बोले- अह.. अब छोड़ दो.

मैं बोली- क्यों.. मुझे और चूसना है.

मामा बोले- तुम्हारे मुँह में ही झड़ जाउँगा.

तो मैं बोल उठी- झड़ जाओ.

लेकिन मामा अब चूत चुदाई शुरू करना चाह रहे थे. उन्होंने लंड हटा लिया उर मेरी गांड के नीचे तकिया लगा दिया. साथ ही मेरी दोनों टाँगों को फैला कर मेरी चूत खोल दी. अब मामा पास पड़ी अपनी पेंट की जेब से अपने वॉलेट से कुछ निकालने लगे. मैंने देखा कि मामा ने एक लाल रंग की चाकलेट जैसी कुछ चीज निकाली.

मैंने पूछा- ये क्या है?

तो मामा बोले- कन्डोम है.

मैंने पूछा- ये क्यों?

मामा बोले- देखती जाओ.

मामा ने कवर फाड़ कर रबर जैसा कुछ निकाला और उसे अपने लंड पर चढ़ा लिया.

मैंने पूछा- ये क्यों लगाया?

मामा बोले- कल रात खून निकल गया था ना.. इसलिए!

मैं बोली- इसको उतार दीजिए.. आज खून नहीं निकलेगा.. बस थोड़ा धीरे-धीरे कीजिएगा.

मामा गुस्सा करके बोले- ये ‘कीजिएगा…’ क्या होता है, जो बोलना है खुल कर बोलो, मुझे भी अच्छा लगेगा.

ये कहते हुए उन्होंने मुझे कसम दे दी. फिर मैंने सब कुछ बता दिया कि आपने जो आज वीडियो दी थी, वो देख कर मैंने भी अपनी चूत की सील तोड़ ली है और हम लोग के पास आज और कल की दो रात हैं इसलिए आज रात धीरे से चुदाई कीजिए और जब आज मेरी चूत पूरी तरह से खुल जाएगी, तो कल रात अच्छे से चुदाई कर लीजिएगा.

मामा खुश हो गए और अपने लंड पर ढेर सारा थूक लगा कर मेरी चूत में अपना लंड रख कर चुत को सहलाने लगे. फिर धीरे-धीरे मेरी चूत में लंड घुसाने लगे. मामा का लगभग आधा लंड मेरी चूत में घुस चुका था.. पर उससे आगे नहीं जा पा रहा था.. क्योंकि मेरी चूत अभी पूरी तरह से खुली नहीं थी. मामा अपने आधे लंड को ही मेरी चूत में अन्दर-बाहर करने लगे और मेरे होंठ को चूसने लगे. मैं समझ गई थी कि मामा कभी भी मेरी चूत को धक्का मार कर फाड़ सकते हैं.
 
दो मिनट तक मामा ऐसे ही धीरे-धीरे लंड को अन्दर-बाहर करते रहे और मेरे होंठ को चूसते रहे. मैं कहीं और दुनिया में खो सी गई थी कि अचानक से मामा ने जोर से धक्का मार दिया, मामा का मोटा लंबा लंड मेरी चूत को चीरते हुए पूरा अन्दर घुस गया.

मेरी चीख निकल गई- हाय मम्मी.. मेरी चूत फट गई..

मैं रोने सी लगी, मामा थोड़ी देर के लिए बिल्कुल शांत हो गए. फिर थोड़ी-थोड़ी देर में अपने लंड को अन्दर-बाहर करने लगे. इससे मुझे मज़ा आने लगा. अब तो मैं जैसे मानो चाँद सितारों के बीच खो सी गई थी.

मैं कामुकता से बोलने लगी- अह.. मामा जोर से धक्का मारो, मेरी चूत फाड़ दो..

मैं भी खुद से अपनी गांड को आगे-पीछे करने लगी थी. कुछ ही देर में मुझे एहसास हुआ कि मेरी चूत के अन्दर गुदगुदाते हुए कुछ तो गर्म सा निकल रहा है, उस वक़्त कुछ अलग सा आनन्द मिलने लगा था. मैं समझ गई कि मैं झड़ सी गई हूँ, मेरी चूत की गर्म पानी निकल चुका है. पर मामा अभी भी बहुत तेज़ी से लंड से धक्का मार रहे थे. मैंने भी अपनी टाँग को ऊपर उठा कर मामा को लॉक कर लिया, जिससे मेरी चूत और कस सी गई.

अब मामा का लंड और ज्यादा मेरी चूत के अन्दर रगड़ खाने लगा. पांच मिनट बाद मामा ने और गति बढ़ा दी. अचानक से मुझे अहसास हुआ कि मेरी चुत में किसी ने 50 ग्राम मोम पिघला कर डाल दी हो.

फिर मामा धीरे-धीरे शांत हो गए, मामा अपना लंड मेरी चूत के अन्दर ही छोड़ कर मेरे ऊपर लेट गए.

थोड़ी देर बाद मामा ने मुझसे पूछा- रिशू, मज़ा आया?

मैंने भी मुस्कुराते हुए बोला- बहुत ज्यादा..

फिर मामा बोले- और चुदाई करवानी है?

मैं बोली- आपकी मर्ज़ी..

फिर हम दोनों प्यार भरी बातें करने लगे. मैं मामा से बोली- एक बात पूछूँ?

मामा बोले- हाँ पूछो?

मैं बोली- आपका लंड इतना ज्यादा और इतनी ज्यादा गर्म पानी कैसे छोड़ता है?

तो मामा बोले- पहली बार मैंने चुदाई की है ना.. और मैंने कुछ दिनों से खुद से लंड की मुठ भी नहीं मारी थी ना.. इसलिए..

मैं नंगी ही मामा की बांहों में पड़ी थी और मामा भी नंगे थे. थोड़ी ही देर में मामा का लंड फिर से तन गया. मामा फिर से मेरी चूत को उंगली से सहलाने लगे.

मैंने मामा से पूछा- इतनी जल्दी कैसे खड़ा हो गया?

मामा बोले- तुम्हारी गांड और नींबू जैसी चुचियां देख कर लंड खड़ा हो गया.

मैं भी मामा के लंड को मसलने लगी, लंड एकदम लोहे की रॉड जैसा कड़ा हो गया था. मैं भी फिर से गर्म होने लगी थी, मैं बोली- मामा जल्दी से आप अपना लंड मेरी चूत में घुसा दीजिए.

मामा बोले- अब मैं नहीं चुदाई करूँगा.. तुम मेरे लंड पर बैठ कर चुदाई करवा लो.

मामा अपने लंड को पकड़ कर नीचे लेट गए और बोले- मेरे लंड पर चूत रख कर बैठ जाओ.

मैंने वैसे ही किया, जैसे मामा बोले.

अब मामा का लंड पूरी तरह से मेरी चूत में समा गया था. मामा का 7″ लंबा लंड अब मेरी चूत के अन्दर पेट तक धक्का मार रहा था. मैं भी अपनी गांड की ऊपर-नीचे करने लगी. मुझे जन्नत का एहसास होने लगा. थोड़ी देर बाद मामा बोले- अब उल्टा मुड़ जाओ. मुझे चुदाई करते हुए तुम्हारी गांड देखनी है.

मैं भी उल्टा मुड़ कर मामा के लंड पर बैठ गई, मुझे भी अच्छा लग रहा था.

मामा का लंड का सुपारा मेरी चूत में रगड़ मार रहा था, मामा भी पीछे से मेरी गांड को पकड़ कर ऊपर-नीचे कर रहे थे. फिर मामा ने अचानक से मुझसे कहा- साइड में घोड़ी बन जाओ.

मुझे लगा कि शायद मामा मुझे घोड़ी बना कर पीछे से चुदाई करेंगे. मैं घोड़ी बन गई, मामा मेरी गांड के छेद में वैसलीन लगाने लगे.

मैंने डर से पूछा- ये क्या कर रहे हैं?

तो मामा बोले- मुझे तुम्हारी गांड मारनी है.

मैं मना करने लगी कि मुझे दर्द होगा.

पर मामा ने मेरी एक ना सुनी और गांड में ढेर सारी वैसलीन लगाने के बाद लंड को मेरी गांड के छेद पर रख कर अन्दर घुसाने की कोशिश करने लगे. मुझे दर्द होने लगा.. मैं कराहने लगी और रोते हुए बोली- मैं आपको कल रात गांड मारने दे दूँगी पर अभी छोड़ दीजिए.

मामा मान गए और मुझे घोड़ी ही बना कर पीछे से चुत चुदाई करने लगे. दस मिनट तक मामा मेरी जोरदार चुदाई करते रहे.. मैं भी लंड से चुदने के मजे लेती रही. मैं मादक सिसकारियाँ भरती रही, मैं अब झड़ने वाली थी. मेरे मुँह से जोर-जोर से चीख निकलने लगीं- उम्म्ह… अहह… हय… याह…

तभी मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया, पर मामा रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे. थोड़ी देर बाद मामा ने रफ़्तार बढ़ा दी मैं समझ गई. मामा फिर से मेरी चूत में आग उगलने वाले थे.

मैं बोली- मामा लंड का पानी बाहर ही गिरा दो.

मामा ने अचानक से लंड चुत से खींचा और मेरे मुँह में डाल दिया. उनका सारा पानी मेरे मुँह में निकल गया.

मुझे ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने गरम पानी में ईमली और नमक मिला कर मुँह में डाल दिया हो.

अब हम दोनों काफ़ी थक गए थे, दोनों एक-दूसरे की बांहों में नंगे पड़े रहे और कब नींद आ गई पता ही नहीं चला. दोस्तों अब विदा लेती हूँ, आगे की गांड मराने की कहानी अगले भाग में लिखूँगी.

आपको मेरी नोन वेज स्टोरी अच्छी लगी?

कहानी जारी रहेगी

 
अब मैं अपनी कामुकता से भरी सच्ची कहानी को आगे बढ़ाती हूँ.

उस रात पहली बार मेरी पूरी चुदाई हुई थी, वो भी 2 बार लगातार, मामा ने मेरी चुदाई करते हुए गांड देखने के बाद मेरी गांड भी मारने की कोशिश की पर मुझे दर्द होने के वजह से मैंने मामा को मना कर दिया तो मामा जी ने ज़िद नहीं की क्योंकि वो मुझे बहुत प्यार करते थे.

चुदाई के बाद हम दोनों इतने थक गये थे कि कब नींद आ गयी, पता ही नहीं चला.

सुबह मैं नींद में ही थी कि मुझे अपनी चुची में गुदगुदाहट का अहसास होने लगा. मैंने जब आँख खोली तो देखा कि मामा आज मुझसे पहले ही जाग गये थे और मेरी चुची सहला रहे थे.

मैं समझ गयी कि मामा आज मॉर्निंग वाली चुदाई करेंगे. मैं भी यही चाहती थी क्योंकि मैंने कहीं पढ़ा था कि मर्दों में सुबह नींद खुलने के बाद सबसे ज़्यादा चुदाई की इच्छा होती है और बहुत ही प्यार और कामुकता भरी चुदाई करते हैं.

मैं भी गर्म सी होने लगी. अचानक से मुझे याद आई कि रात की चुदाई के बाद मैं बिना चूत धोये सो गयी थी. मुझे लगा कि मामा मेरी चूत तो अभी ज़रूर चाटेंगे और रात की चुदाई का मामा के लंड और मेरी चूत का रस तो मेरी चूत में ही लगा होगा, मैंने सोचा कि मैं अपनी चूत धोकर आती हूँ, मैं मामा से बोली- मैं आती हूँ थोड़ी देर में!

तो मामा बोले- मुझे चुदाई करनी है, अभी मत जाओ.

मैं बोली- मैं आती हूँ ना बाथरूम से सू सू करके!

तो मामा ने मना नहीं किया, मैं उठ कर कपड़े पहनने लगी तो मामा ने पूछा- कपड़े क्यों पहन रही हो? नंगी ही जाकर आ जाओ ना!

मैं बोली- बाहर के रूम की खिड़की खुली हुई है, कोई देख लेगा क्यूंकि हम लोगों का कामन बाथरूम है.

तो मामा कुछ नहीं बोले.

जब मैं बाथरूम में गयी और पेंटी निकाल कर चूत धोने बैठी तो मेरी चूत से मादकता भरी खुशबू आ रही थी जैसे कि मामा जी का लंड मेरे आस पास ही हो. जब मैंने चूत पे हाथ डाला तो सारा रस सुख गया था और मेरी चूत में चिपचिपाहट सी लग रही थी. मैंने चूत को अच्छे से धोया और सूखे कपड़े से पौंछ डाली, फिर भी मेरी चूत से खुशबू आ रही थी.

मैं कपड़े पहन कर बाथरूम से बाहर आ गयी, मैंने सोचा कि जब उठ गयी हूँ तो रात के झूठे बर्तन धो लेती हूँ, फिर चुदाई करवा लूँगी मामा जी से ताकि चुदाई के बाद मामा जी को जल्द से चाय और नाशता दे दूँगी.

मैं केवल पेंटी और टॉप में थी. बाथरूम जाने से पहले मैं जल्दी जल्दी में केवल पेंटी और टॉप ही पहन पाई थी क्योंकि बाथरूम से वापस आने के बाद चुदाई ही करवानी थी.

मैं

किचन में जाकर बर्तन धोने लगी.

अचानक से मामा किचन में आ गये और मुझे पीछे से दबोच लिया, मेरी गांड में पेंटी के ऊपर से मामा का लंड चुभ रहा था, मैं समझ गयी कि मामा नंगे आ गये हैं.

गले के ऊपर से मामा मेरी टॉप में हाथ डाल कर मेरी चुची मसलने लगे.

मैं बोली- मामा जी, आप मुझे थोड़ा समय दो, मैं बर्तन धोकर रूम में आती हूँ, उसके बाद आपको अपनी बहन की बेटी के साथ जो करना है, कीजिएगा.

पर मामा जी मानने वाले कहाँ थे, मामा जी बोले- आज मैं अपनी भानजी की चूत की चुदाई किचन में ही करूँगा.

मैं बोली- यहाँ कैसे करेंगे? चोट लग जाएगी.

मामा बोले- तुम देखती जाओ!

मामा ने झट से मुझे अपनी ओर घुमाया और मेरे होंठ चूसने लगे, मेरे हाथ में अपना लंड पकड़ा दिया. अब मैं मामा जी को क़िस भी कर रही थी और लंड भी पकड़े हुई थी. मामा मेरे हाथ में अपना हाथ रख कर आगे पीछे करने लगे जिससे मामा का लंड मेरे हाथ में रगड़ खाने लगा. मैं भी मामा जी के लंड के आगे के गुलाबी हिस्से को हाथ में मसलने लगी.

फिर मामा ने मेरी झट से मेरी पेंटी और टॉप उतार दिए और मेरी चुची को मुँह में लेकर चूसने लगे. मैंने भी अपनी चुची को दोनों हाथ से ऊपर की ओर सहारा दिया और गला को पीछे की ओर झुका कर अपने छाती को आगे की ओर तान दी. मेरी दोनों चुची और भी उभर कर मामा के मुँह में समा गयी, मामा जी का एक हाथ मेरी कमर को पकड़े था और दूसरा हाथ मेरी गांड के पीछे से मेरी चूत सहला रहा था, मुझे बहुत ही ज़्यादा मज़ा आने लगा था. हर बार चुदाई में मामा जी एक अलग सा अहसास दिला रहे थे
 
मैं गर्म हो गयी थी, मेरी चूत से पानी निकलने लगा था, मैं बड़बड़ाने सी लगी थी- मामा जी, जल्दी से चोदिये, अब बर्दाश्त नहीं हो रहा है.

मामा जी को भी लगा कि मेरी चूत पूरी गीली हो गई है, उन्होंने मुझे किचन की स्लैब पर बैठा कर मेरी दोनों जाँघों को फैला कर अपने होंठ मेरी चूत के होंठों से लगा दिए।

मेरी चूत से एक भीनी भीनी सी खुशबू आ रही थी जो मामा को पागल बना रही थी. मेरी चूत मामा के मुँह में समा सी गयी थी और मामा मेरी चूत के दाने पे अपनी जीभ फेर रहे थे. मुझे एक

गुदगुदाहट सी महसूस हो रही थी चूत के अंदर, मामा जी मेरी चूत के दाने को ऐसे अपनी ओर खींच रहे थे जैसे मेग्गी खा रहे हों.

मामा जी ने मेरी चूत चाट चाट कर पूरा पानी साफ कर दिया. अब मामा जी मुझे किचन के स्लैब से नीचे उतारा और खुद बैठ कर अपने हाथ से अपने लंड को सहलाने लगे, ऊपर नीचे करने लगे. मेरी नज़र जब मामा जी लंड पे पड़ी, मैं सहम सी गयी, इस बार सबसे ज़्यादा विशाल और मोटा लग रहा था, एकदम कड़ा सा ऊपर की ओर तना हुआ था.

मैंने मामा से पूछा- आज इतनी बड़ा क्यों दिख रहा है आपका लंड, और कैसे घुसेगा मेरी चूत में?

तो मामा बोले- मॉर्निंग टाइम है ना इसलिए इस टाइम में सबसे ज्यादा रस भरा होता है इसलिये लंड ज़्यादा तना हुआ और खड़ा और मोटा लंबा होता है, किसी ना किसी तरह से घुसा दूँगा.

फिर मामा बोले- अब जल्दी से मेरा लंड चूस कर गीला कर दो ताकि गीला लंड तुम्हारी चूत में आसानी से घुस जाए.

मैं मना करने लगी और बोली- आज बहुत मोटा और लंबा है, मुँह में नहीं जा पाएगा.

मामा ज़बरदस्ती मेरा सर पकड़ कर मेरे मुँह में लंड सटाने लगे, मामा एक हाथ से अपना लंड पकड़े हुए थे और दूसरे हाथ से मेरा सर, मेरे मुँह को मामा जी का लंड छूने लगा, मामा जी के लंड से एक मादक सी, कामुकता भरी खुशबू आ रही थी जैसे मामा जी रात में चुदाई के बाद लंड साफ ना किया और लंड में लगा हुआ रस लंड पे ही सूख गया हो.

मैं मदहोश सा होने लगी, मैं सोचने लगी कि अगर खुशबू इतनी मादक है तो मुझे चूसने में कितना मज़ा मिलेगा.

मैं मान गयी और मामा जी का लंड चूसने लगी, मामा जी का लंड इतना मोटा था कि सिर्फ़ टोपा ही मेरे मुँह में जा पा रहा था. जैसे ही लंड मेरी मुँह के अंदर गया, मुझे कुछ खुरदरा सा लगा और थोड़ी देर बाद मुझे लंड खट्टा और नमकीन सा लगने लगा, मैं समझ गयी कि रात की चुदाई के बाद मामा जी ने लंड नहीं धोया, इसलिए लंड में लगा रस सूख कर मामा जी के लंड में ही चिपक गया है. इसलये पहले लंड चूसने में खुरदरा सा लग रहा था और खुशबू भी आ रही थी.

मैं अब मामा के लंड की खुशबू ले लेकर चूस रही थी. अब मामा जी का लंड पूरी तरह से गीला हो चुका था, अब मामा लंड मेरे मुँह से निकाल कर नीचे उतर गये. फिर मामा ने मुझे स्लैब की ओर मोड़ कर झुका दिया, मैंने दोनों हाथ से स्लैब को पकड़ लिया, मामा फिर मेरे चूतड़ के पीछे से मेरी चूत सहलने लगे, मेरी चूत दोबारा से सूख चुकी थी, मामा जी ने नीचे झुक कर अपने दोनों हाथ से मेरे चूतड़ फैला कर गांड के पीछे से मेरी चूत चाटने लगे, मैंने भी और ज़्यादा झुक कर अपनी गांड फैला दी ताकि मामा आसानी से चूत चाट सकें और मज़ा लेने लगी.

बीच बीच में मामा जी की जीभ मेरी गांड के छेद में चली जाती थी तो मेरी गांड के अंदर अजीब सी गुदगुदी होने लगती थी और मैं सिसकारियाँ भरने लग जाती थी, साथ ही साथ मैं अपनी गांड को अंदर की ओर खींच लेती थी जिससे मेरे दोनों चूतड़ एक दूसरे से चिपक जाती थी और मामा की जीभ मेरे चूतड़ों के बीच फँस सी जाती थी.
 
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