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मा की चुची चाचा ने दबा दबा कर लाल कर दिया
हम एक छोटेसे गाव मे रहते थे, घर मे मात्र ३ लोग थे, मेरे पापा, मेरी मा माला और मै विकी, एक १९ साल का युवक. मेरी मा की शादी 18 साल कि उमर मे हो गयी थी उस समय पापा कि उम्र २० साल थी और एक साल के अन्दर मै पैदा हो गया था. मेरे चाचा यानि मेरे पिताजी के छोटे भाई- राज- और मुझमे १० साल का ही फ़र्क है .
सब कुछ ठीक चल रहा था. मै उस समय सेकन्ड इअर ग्रॅजुएशन मे था. चाचा को टिचर कि जॉब लग गयी थी और उनका ट्रान्स्फ़र हमारे सिटी के पास के एक गाव मे हो गया था. तभि पापा ने सिटी के बाहर एक प्लॉट ले लिया और उसपर छोटा सा घर बना दिया, अभी वो एरिया खाली था इसलिये आजूबाजूमे ज्यादा लोग रहने के लिये नही आये थे. पापा के ऑफिससे उन्हे ४ साल के लिये दुबई के ऑफिस जाने का ऑफर आया तो पापा ने मान लिया क्योन्कि अच्छी तनख्वा मिल रही थी. अब घर पर मै और मा ही रह गये थे.
चाचा हर हफ़्ते शनिवार को आते और सोमवार को सुबह चले जाते. उनके आने से मै और मा दोनो खुश हो जाते थे और फ़िर बाहर घुमने जाते और मजे करते थे. जब से कॉलेज जाना शुरु किया तो चुत और लन्ड के खेल के बारे मे पूरी जानकारी मिली और देखा की लडके कैसे लडकियो कि चुदई के प्लॅन बना रहे होते थे. कोई बताता की उसने अपने पडोस की आन्टी को चोद तो कोई गर्लफ़्रेन्ड की चुदई की बात बताता . दोस्तो के साथ ब्लु फ़िल्म देखते थे और फ़िर मुठ मारते थे. मेरे लन्ड का साईज़ लगभग ७ इन्च हो चुका था और मोटा भी हो गया था. अब मै रोज लन्ड की तेल से मालिश करता और मुठ मारता था. मुझे अब असली लडकी या औरत की तलाश थी, लेकिन मेरी कोई गर्ल्फ्रेंड तो नही थी. औअर इसी बीच मेरी नजर पडी एक ऐसी औरत पर जो हमेशा मेरे सामने होती थी, जी हां, मेरी मा.
मा को मैने कभी गलत नजर से नही देखा था लेकिन अभी दोस्तो से बात करके, उनकी बाते सुनकर और उनकी कहानिया सुनकर घर पर मेरे दिमाग मे यही सब कुछ चलता रहता था. इसी उधेडबुन मे मैने एक बार रात को मुठ मारी और फिर सोने की कोशिश करने लगा, लेकिन नीन्द नही आ रही रही थी, फिर उठके पानी पिनेके लिये किचन मे चल पडा. जाते जाते मा की रूम मे झांका तो दंग रह गया. मा केवल नायटी पहनकर सोयी थी, खिडकीसे आ रही चांद की रोशनीमे मा का दुधिया बदन साफ दिखाई दे रहा था. गरमी की वजह से मा बिना चादर ओढे सोयी थी. नीन्दमे उसने एक पैर मोडकर लिया था जिससे उसकी जांघ खुली दिख रही थी. सीनेसे पल्लु गिर जाने की वजह से उसकी बडी चुचिया ब्लाउझके गलेसे आधी बाहर आयी थी. मेरा दिल जोरसे धडकने लगा, आगे जाकर उन गोरी चुचीको छूने का मन कर रहा था, लेकिन उसी वक्*त मा ने करवट बदली. मै डर गया की कही मा को पता न चले और मै झटसे कमरे के बाहर आया. लेकिन उस दिन से मेरा मा की तरफ देखने का नजरिया बिल्कुलही बदल गया. मै घर पर रहता तभी मा को अलग रूप मे देखने की कोशिश करता था, कभी उसके पिछे चलकर उसके हिलते चुतडोंको देखता तो कभी किचनमे बैठकर उसको काम करते हुए उसके बदन को निहारता. मा घर मे नायटी मे रहती थी और कई बार मुझे उसकी बडी बडी चुचिया नायटी से बाहर झाकती हुई दिखाई देती थी और मा कि मटकती हुई गान्ड को भी मैने बहुत बार देखा था. मा बेखबर होकर मेरे सामने अपनी चुतडोंको लचकाती काम करती रहती थी. पर मा को चोदने या नंगा देखने का विचार जब भी मन मे आता, मै अपने आपस से ही शर्म महसूस करता था.
जबसे पिताजी दुबई गये थे मैने एक चीज देख रहा था कि चाचा अब घर पे बहुत समय बिताते थे. माभी उनके साथे बहुत खुलकर बाते किया करती थी और उनकी हर चीज का हसके जबाब देती थी. चाचा अनजाने मे मा की चुचिया और उसकी भरी हुई गान्ड को घूरते हुए मैने कई बार देखा.
एक बार मै बाहर अपने दोस्तोके साथ खेल रहा था, चाचा घरपरही थे, बीच मे मै पानी पिने के लिये घर आया और बगैर आवाज दिये सीधा किचन मे घुस गया, वहा पे मैने देखा कि मा और चाचा एकदम एक दुसरे से सट के खडे थे, मा हमेशा की तरह नायटी मे थी लेकिन एक फर्क था, आमतौर पे मा नायटी के निचे स्लिप पहनती थी, आज उसने वह स्लिप नही पहनी थी जिसकी वजह से उसकी ब्रा और पॅंटी साफ दिखाई दे रही थी, और चाचा का एक हाथ उसके बडे बडे चुतडोंपर घूम रहा था. उस पतलीसी नायटी से मा का नंगा शरीर बडा खूबसुरत और सेक्सी दिखाई दे रहा. था मेरे आने की आहट सुनके वो दोनो थोडा दूर हो गये, लेकिन मा का चेहरा लाल हो चुका था, चाचा भी थोडे सकपकाये थे, वो मेरे साथ किचन से बाहर आ गये. जैसे दिन बितते गये, ये बाते अक्सर होती थी, चाचा मा के शरीरको छूना चाहते थे, आतेजाते उनकी बडी चुचियोंको कोहनीसे जानबूझकर मसलते थे, कभी मा के बिलकुल पास खडे होकर अपना पॅंटका अगला हिस्सा मा की गान्डपर भिडाके खडे रहते थे. कई बार मैने चाचा को मा के सामने ऐसी स्थिती मे अपना पँट का अगला हिस्सा अ*ॅड्जस्ट करते हुए देखा था. मा भी अब चाचा के सामने और खुल गयी थी, वो उनके सामने कुछ ज्यादा ही झुक कर कुछ सामान रखती या उठाती थी और अगर मा का मुह चाचा की तरफ़ होता तो उन्हे मा कि अध-नन्गी चुचिया साफ दिखाई देती थी, मा भी उनकी यह हरकत देखकर मुस्कुराकर उन्हे सहमती जताती थी. एक बार मै और चाचा टिव्ही देख रहे थे. घरपे मै और चाचा लुंगी पहना करते थे. उसी समय मा कमरे मे आयी और खिडकी खोल के खिडकीके सामने खडी हो गयी. हमने उसकी तरफ देखा............और देखते रह गये. खिडकीसे आनेवाली रोशनीसे उसकी झिनी नायटीसे मा का खूबसुरत जिस्म साफ दिखाई दे रहा था. मैने अनजानेमे चाचाकी तरफ देखा, वो बिना नजर हटाए वो नजारा देखे जा रहे थे, और देखते ही देखते उनके लुंगीमे एक तंबूजैसा हो गया, शायद उनका लन्ड टाईट हुआ होगा, मै जानबूझकर थोडासा खासा, तो चाचा एकदम होषमे आ गये और उठकर अंदर के कमरे मे चले गये.
इन सारी बातोसे मुझे पता चला था की दाल मे जरूर कुछ काला है. मैने एक प्लान बनाया. अगली बार जैसे ही चाचा आये मैने मा को बोला कि आज रात मै अपने दोस्तो के साथ रात को ९ से १२ वाल मूवी देखने जा रह हु. मा और चाचा इस बात से बहुत खुष होते दिखाई दिये, वैसे मा ने थोडी चिन्ता जताई लेकिन चाचा ने उन्हे समझाया कि लडका अब बडा हो गया है. उपरसे चाचा ने मुझे पैसे भी दिये और कहा कि खाना भी वही दोस्तोके साथ खा लेना. लगभग साडेआठ बजे मै घर से निकला, थोडी दूर जाकर चुपकेसे लौट आया, घर के पिछे की दिवार पर चढकर बरामदे के पिछे जाके चुपसे खडा हो गया. वहा पर मा के बेडरूम की खिडकी थी जिसमे लोहे कि ग्रिल लगी हुइ थी पर गरमी के वजह से अंदर की काच का हिस्सा खुला रखा था. उसपर केवल एक पर्दा टंगा हुआ था. मैने धीरे से पर्दा हटाया और अन्दर देखा. कमरे के अन्दर चाचा नन्गे खडे थे उन्होने सिर्फ़ अंडरवेअर पहना थ, मा दरवाजे से अंदर आयी और उन्हे इस हालत मे देखतेही हसने लगी, मा ने सिर्फ नायटी पहनी थी.
"अरे, तुम तो तय्यार हो एकदम" मा की मुहसे यह बात सुनकर मै हैरान हो गया, मा हमेशा चाचा से ’आप’ कहके बात करती थी, लेकिन यहा पे तो वह उनके सामने एकदम खुलके और बडी बेशरमीसे पेश आ रही थी.
"और नही तो क्या माला जान, इतने दिनसे मुझे इस पल का इंतजार था, अब सब्र किस बात का" ऐसा कहके चाचाने मा को अपनी बाहोमे दबोच लिया और उनके होटोपे अपने होट रख दिये, पहले मा ने थोडी ना-नुकुर करने की कोशिश की, लेकिन कुछही समय मे वोभी उनका साथ बखुबी देने लगी, बडा अजीब सा नजारा था, मेरी अधेड उम्र मा, अपनेसे कुछ साल छोटे देवरसे लिपटचिपट कर चुम्मी दे रही थी और उनका साथ भी दे रही थी, उसके हाथ चाचाकी पीठ पर घूम रहे थे, चाचा ने भी मा को कसके जकड रखा था, और वो मा के चुतडोंको सहला रहे थे, कुछ देर ऐसेही चूमने के बाद चाचाने मा को अलग किया और बोले
"डार्लिंग, अब और रहा नही जाता, जल्दीसे तुम्हारा ये खूबसुरत बदन मुझे देखने दो, जिसके लिये मै तरस रहा हू" चाचा भी मा से खुलके बाते कर रहे थे, आमतौरपे वो मा को ’भाभी’ और ’आप’ कहकर पुकारते थे, लेकिन यहा पे मामला कुछ औरही था.
हम एक छोटेसे गाव मे रहते थे, घर मे मात्र ३ लोग थे, मेरे पापा, मेरी मा माला और मै विकी, एक १९ साल का युवक. मेरी मा की शादी 18 साल कि उमर मे हो गयी थी उस समय पापा कि उम्र २० साल थी और एक साल के अन्दर मै पैदा हो गया था. मेरे चाचा यानि मेरे पिताजी के छोटे भाई- राज- और मुझमे १० साल का ही फ़र्क है .
सब कुछ ठीक चल रहा था. मै उस समय सेकन्ड इअर ग्रॅजुएशन मे था. चाचा को टिचर कि जॉब लग गयी थी और उनका ट्रान्स्फ़र हमारे सिटी के पास के एक गाव मे हो गया था. तभि पापा ने सिटी के बाहर एक प्लॉट ले लिया और उसपर छोटा सा घर बना दिया, अभी वो एरिया खाली था इसलिये आजूबाजूमे ज्यादा लोग रहने के लिये नही आये थे. पापा के ऑफिससे उन्हे ४ साल के लिये दुबई के ऑफिस जाने का ऑफर आया तो पापा ने मान लिया क्योन्कि अच्छी तनख्वा मिल रही थी. अब घर पर मै और मा ही रह गये थे.
चाचा हर हफ़्ते शनिवार को आते और सोमवार को सुबह चले जाते. उनके आने से मै और मा दोनो खुश हो जाते थे और फ़िर बाहर घुमने जाते और मजे करते थे. जब से कॉलेज जाना शुरु किया तो चुत और लन्ड के खेल के बारे मे पूरी जानकारी मिली और देखा की लडके कैसे लडकियो कि चुदई के प्लॅन बना रहे होते थे. कोई बताता की उसने अपने पडोस की आन्टी को चोद तो कोई गर्लफ़्रेन्ड की चुदई की बात बताता . दोस्तो के साथ ब्लु फ़िल्म देखते थे और फ़िर मुठ मारते थे. मेरे लन्ड का साईज़ लगभग ७ इन्च हो चुका था और मोटा भी हो गया था. अब मै रोज लन्ड की तेल से मालिश करता और मुठ मारता था. मुझे अब असली लडकी या औरत की तलाश थी, लेकिन मेरी कोई गर्ल्फ्रेंड तो नही थी. औअर इसी बीच मेरी नजर पडी एक ऐसी औरत पर जो हमेशा मेरे सामने होती थी, जी हां, मेरी मा.
मा को मैने कभी गलत नजर से नही देखा था लेकिन अभी दोस्तो से बात करके, उनकी बाते सुनकर और उनकी कहानिया सुनकर घर पर मेरे दिमाग मे यही सब कुछ चलता रहता था. इसी उधेडबुन मे मैने एक बार रात को मुठ मारी और फिर सोने की कोशिश करने लगा, लेकिन नीन्द नही आ रही रही थी, फिर उठके पानी पिनेके लिये किचन मे चल पडा. जाते जाते मा की रूम मे झांका तो दंग रह गया. मा केवल नायटी पहनकर सोयी थी, खिडकीसे आ रही चांद की रोशनीमे मा का दुधिया बदन साफ दिखाई दे रहा था. गरमी की वजह से मा बिना चादर ओढे सोयी थी. नीन्दमे उसने एक पैर मोडकर लिया था जिससे उसकी जांघ खुली दिख रही थी. सीनेसे पल्लु गिर जाने की वजह से उसकी बडी चुचिया ब्लाउझके गलेसे आधी बाहर आयी थी. मेरा दिल जोरसे धडकने लगा, आगे जाकर उन गोरी चुचीको छूने का मन कर रहा था, लेकिन उसी वक्*त मा ने करवट बदली. मै डर गया की कही मा को पता न चले और मै झटसे कमरे के बाहर आया. लेकिन उस दिन से मेरा मा की तरफ देखने का नजरिया बिल्कुलही बदल गया. मै घर पर रहता तभी मा को अलग रूप मे देखने की कोशिश करता था, कभी उसके पिछे चलकर उसके हिलते चुतडोंको देखता तो कभी किचनमे बैठकर उसको काम करते हुए उसके बदन को निहारता. मा घर मे नायटी मे रहती थी और कई बार मुझे उसकी बडी बडी चुचिया नायटी से बाहर झाकती हुई दिखाई देती थी और मा कि मटकती हुई गान्ड को भी मैने बहुत बार देखा था. मा बेखबर होकर मेरे सामने अपनी चुतडोंको लचकाती काम करती रहती थी. पर मा को चोदने या नंगा देखने का विचार जब भी मन मे आता, मै अपने आपस से ही शर्म महसूस करता था.
जबसे पिताजी दुबई गये थे मैने एक चीज देख रहा था कि चाचा अब घर पे बहुत समय बिताते थे. माभी उनके साथे बहुत खुलकर बाते किया करती थी और उनकी हर चीज का हसके जबाब देती थी. चाचा अनजाने मे मा की चुचिया और उसकी भरी हुई गान्ड को घूरते हुए मैने कई बार देखा.
एक बार मै बाहर अपने दोस्तोके साथ खेल रहा था, चाचा घरपरही थे, बीच मे मै पानी पिने के लिये घर आया और बगैर आवाज दिये सीधा किचन मे घुस गया, वहा पे मैने देखा कि मा और चाचा एकदम एक दुसरे से सट के खडे थे, मा हमेशा की तरह नायटी मे थी लेकिन एक फर्क था, आमतौर पे मा नायटी के निचे स्लिप पहनती थी, आज उसने वह स्लिप नही पहनी थी जिसकी वजह से उसकी ब्रा और पॅंटी साफ दिखाई दे रही थी, और चाचा का एक हाथ उसके बडे बडे चुतडोंपर घूम रहा था. उस पतलीसी नायटी से मा का नंगा शरीर बडा खूबसुरत और सेक्सी दिखाई दे रहा. था मेरे आने की आहट सुनके वो दोनो थोडा दूर हो गये, लेकिन मा का चेहरा लाल हो चुका था, चाचा भी थोडे सकपकाये थे, वो मेरे साथ किचन से बाहर आ गये. जैसे दिन बितते गये, ये बाते अक्सर होती थी, चाचा मा के शरीरको छूना चाहते थे, आतेजाते उनकी बडी चुचियोंको कोहनीसे जानबूझकर मसलते थे, कभी मा के बिलकुल पास खडे होकर अपना पॅंटका अगला हिस्सा मा की गान्डपर भिडाके खडे रहते थे. कई बार मैने चाचा को मा के सामने ऐसी स्थिती मे अपना पँट का अगला हिस्सा अ*ॅड्जस्ट करते हुए देखा था. मा भी अब चाचा के सामने और खुल गयी थी, वो उनके सामने कुछ ज्यादा ही झुक कर कुछ सामान रखती या उठाती थी और अगर मा का मुह चाचा की तरफ़ होता तो उन्हे मा कि अध-नन्गी चुचिया साफ दिखाई देती थी, मा भी उनकी यह हरकत देखकर मुस्कुराकर उन्हे सहमती जताती थी. एक बार मै और चाचा टिव्ही देख रहे थे. घरपे मै और चाचा लुंगी पहना करते थे. उसी समय मा कमरे मे आयी और खिडकी खोल के खिडकीके सामने खडी हो गयी. हमने उसकी तरफ देखा............और देखते रह गये. खिडकीसे आनेवाली रोशनीसे उसकी झिनी नायटीसे मा का खूबसुरत जिस्म साफ दिखाई दे रहा था. मैने अनजानेमे चाचाकी तरफ देखा, वो बिना नजर हटाए वो नजारा देखे जा रहे थे, और देखते ही देखते उनके लुंगीमे एक तंबूजैसा हो गया, शायद उनका लन्ड टाईट हुआ होगा, मै जानबूझकर थोडासा खासा, तो चाचा एकदम होषमे आ गये और उठकर अंदर के कमरे मे चले गये.
इन सारी बातोसे मुझे पता चला था की दाल मे जरूर कुछ काला है. मैने एक प्लान बनाया. अगली बार जैसे ही चाचा आये मैने मा को बोला कि आज रात मै अपने दोस्तो के साथ रात को ९ से १२ वाल मूवी देखने जा रह हु. मा और चाचा इस बात से बहुत खुष होते दिखाई दिये, वैसे मा ने थोडी चिन्ता जताई लेकिन चाचा ने उन्हे समझाया कि लडका अब बडा हो गया है. उपरसे चाचा ने मुझे पैसे भी दिये और कहा कि खाना भी वही दोस्तोके साथ खा लेना. लगभग साडेआठ बजे मै घर से निकला, थोडी दूर जाकर चुपकेसे लौट आया, घर के पिछे की दिवार पर चढकर बरामदे के पिछे जाके चुपसे खडा हो गया. वहा पर मा के बेडरूम की खिडकी थी जिसमे लोहे कि ग्रिल लगी हुइ थी पर गरमी के वजह से अंदर की काच का हिस्सा खुला रखा था. उसपर केवल एक पर्दा टंगा हुआ था. मैने धीरे से पर्दा हटाया और अन्दर देखा. कमरे के अन्दर चाचा नन्गे खडे थे उन्होने सिर्फ़ अंडरवेअर पहना थ, मा दरवाजे से अंदर आयी और उन्हे इस हालत मे देखतेही हसने लगी, मा ने सिर्फ नायटी पहनी थी.
"अरे, तुम तो तय्यार हो एकदम" मा की मुहसे यह बात सुनकर मै हैरान हो गया, मा हमेशा चाचा से ’आप’ कहके बात करती थी, लेकिन यहा पे तो वह उनके सामने एकदम खुलके और बडी बेशरमीसे पेश आ रही थी.
"और नही तो क्या माला जान, इतने दिनसे मुझे इस पल का इंतजार था, अब सब्र किस बात का" ऐसा कहके चाचाने मा को अपनी बाहोमे दबोच लिया और उनके होटोपे अपने होट रख दिये, पहले मा ने थोडी ना-नुकुर करने की कोशिश की, लेकिन कुछही समय मे वोभी उनका साथ बखुबी देने लगी, बडा अजीब सा नजारा था, मेरी अधेड उम्र मा, अपनेसे कुछ साल छोटे देवरसे लिपटचिपट कर चुम्मी दे रही थी और उनका साथ भी दे रही थी, उसके हाथ चाचाकी पीठ पर घूम रहे थे, चाचा ने भी मा को कसके जकड रखा था, और वो मा के चुतडोंको सहला रहे थे, कुछ देर ऐसेही चूमने के बाद चाचाने मा को अलग किया और बोले
"डार्लिंग, अब और रहा नही जाता, जल्दीसे तुम्हारा ये खूबसुरत बदन मुझे देखने दो, जिसके लिये मै तरस रहा हू" चाचा भी मा से खुलके बाते कर रहे थे, आमतौरपे वो मा को ’भाभी’ और ’आप’ कहकर पुकारते थे, लेकिन यहा पे मामला कुछ औरही था.