मेरा नौकर मेरी चूत का मालिक [ भाग-1]

Discussion in 'Hindi Sex Stories' started by sexstories, Jun 18, 2020.

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    sexstories Administrator Staff Member

    हाय दोस्तों ये मेरे दोस्त शोभा की कहानी है जिसकी चूत इतनी अनमनी थी कि उसे हवा खाने की भी फ़ुरसत नही थी, वो लंड क्या खाती? बरबस किसी का भी ध्यान अपने बड़े मम्मों, गुदाज जिस्म और हलकट गांड से अपनी तरफ़ खीच लेने वाली शोभा को उसका पति कभी कभार ही चोदता था। वजह थी उसका व्यवसाय में बिजी रहना और ढलती उमर। अपनी कसमसाती जवानी को कैसे संभाले अभी तो बच्चे भी नही हुए थे, चूंचियां वैसे की वैसे ही कसी हुई थीं और पतिदेव ने कभी मेरे पिछवाड़े पर ध्यान दिया नहीं इसलिये मेरी गांड भी वैसे की वैसे ही कसी पड़ी थी। आगे शोभा ने अपनी कहानी मुझे कुछ यू सुनाई। शाम को थके हारे पतिदेव आकर मेरे उपर लेट जाते और अपनी जवानी का ढलता सैलाब जल्दी से मेरे अंदर उड़ेल कर सो जाते।

    कुछ बचा भी तो नही था, वरना कब का एक बच्चा मेरे आंगन में खेल रहा होता। मैं काफ़ी परेशान थी। जब तक इस बदन को कोई रौंदे नही और मसल के ना रख दे औरत को अपनी औरतपने का पता नही चलता। मैं कोई न कोई उपाय खोज रही थी कि मुझे एक घटना ने झकझोर दिया। उस दिन मेरा नौकर बिल्लू घोड़े को धोकर आया था और बाहर में ही बाउंड्री में चापाकल पर नहा रहा था। उसने सिर्फ़ धोती पहनी थी। सूती धोती में चिपककर उसका लंड बाहर से एक दम घमासान मूसल की तरह दिख रहा था और उसके लंड के सुपाड़े से उघड़ी हुई चमड़ी उसके मुह को लाल कसैले जैसा दिखा रही थी।

    मेरे तन बदन में आग लग गयी, मैं बालकनी में खड़ी थी और कपड़े टांग रही थी। पतिदेव अपने काम पर चले गये थे, और सास अम्मा बीमार अपने कमरे में बिस्तर पर। मैं उसके लंड से अपना ध्यान नही हटा पा रही थी कि उसने अपने धोती में हाथ डालकर अपना लंड को नहलाना शुरु कर दिया। कसम उपर वाले कि ऐसा भीषण और क्यूट शिशन मेंने पहली बार देखा था। घुटनो तक लटका हुआ, बड़े अंडकोष की राजगद्दी पर विराजे हुए यह लंड एकदम किसी महाराजा की तरह शोभित हो रहा था। मुझे यह नाग बहुत प्यारा लगा, और सच बताऊं तो मै उसी पल अपने नौकर बिल्लू की हो गयी। बिल्लू की शोभा और शोभा का बिल्लू। मैंने उसे आवाज दी, बिल्लू जरा इधर आना जल्दी भाग के आओ!!!! वो बेचारा धोती संभाले भागता भागता आया। पूछा क्या है मैडम? मैंने कहा तुम्हे मेरा पलंग सही से लगवाना है, और उसे बेडरुम में लिये चली आयी। उसने देखा कि बेड तो सही पड़ा हुआ है, और जैसे ही वह कुछ पूछता, मैंने दरवाजे की घुंडी लगा दी।

    वो सहमा हुआ सा था, भले ही उसका लंड बड़ा था लेकिन वो एक निहायत शरीफ़ इंसान था जिसने कभी भी मुझे गलत नजरो से नहि देखा। ये भी उसकी गलती ही थी। उसकी धोती गीली उसके गांड और लंड के इर्द गिर्द सिमटी चिपकी हुई उसके निचले बदन का भरपूर नजारा दे रही थी। मेरे कमरे का एसी पहले से आन था, और अक्टूबर के दिन थे। थोड़ी ही देर में वह कांप रहा था। मैं उसे देख रही थी और वो मुझे देख रहा था, पर कौन पहल करे ये बतायेंगे हम आपको कहानी के दूसरे भाग में कि कैसे मेरे प्यारे नौकर को मैने अपना सब कुछ दे दिया और पतिदेव पर पूरा प्यार भी लुटाती रही।
     
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