S
StoryPublisher
Guest
मैं अपने माता, पिता, छोटे भाई और चाची के साथ यूपी के एक शहर में रहता हूँ और कॉलेज में पढ़ता हूँ।
हमारा घर दो मंजिला है, जिसकी नीचे की मंजिल में एक बड़ा हॉल, दो बैडरूम जिसमें से एक में मम्मी-पापा और दूसरे में मेरा छोटा भाई सोते हैं तथा एक रसोई और दो बाथरूम है जो कि बैडरूम के साथ संलग्न है।
ऊपर की मंजिल में दो बैडरूम, जिसमें से एक बैडरूम में मैं और दूसरे बैडरूम में मेरी चाची सोती हैं तथा एक छोटा स्टोर और एक बाथरूम है। वह बाथरूम दोनों बैडरूम के बीच में है और उसमें दो दरवाज़े हैं जिस में से एक मेरे बेडरूम में और दूसरा चाची के बैडरूम में खुलता है।
मेरे पापा एक निजी कंपनी में उच्च महा-प्रबंधक हैं और रोज़ सुबह नौ बजे तक तैयार ऑफिस चले जाते तथा रात को देर से ही घर लौटते हैं।
पापा की कम्पनी की दूसरे 12 शहरों में भी शाखाएँ हैं जिनकी देखरेख के सिलसिले में अधिकतर उन्हें हर सप्ताह दो से तीन दिन के लिए बाहर जाना ही पड़ता है।
मेरी मम्मी एक कुशल गृहिणी हैं और घर के काम के साथ साथ अपने खाली समय में वह एक समाज सेवा संस्था के लिए भी काम करती हैं।
सोमवार से शुक्रवार तक मम्मी रोज़ घर का काम-काज निबटा कर सुबह दस बजे से शाम पाँच बजे तक समाज-सेवा के कार्य के लिए घर से बाहर ही व्यस्त रहती हैं।
मेरा छोटा भाई दिन में स्कूल और शाम को एयर-फोर्स में भरती की परीक्षा की तैयारी में कोचिंग और ट्रेनिंग के लिए घर से बाहर ही रहता है तथा रात आठ बजे तक ही घर लौटता था।
मैं कॉलेज में बी.कॉम के अन्तिम वर्ष की पढ़ाई कर रहा हूँ और सुबह आठ बजे कॉलेज के लिए निकल जाता था और अपराह्न 4 बजे तक ही घर पहुँचता था।
मेरी चाची भी एक गृहिणी हैं और पूरा दिन घर पर ही रहती हैं तथा घर के काम और देखभाल में माँ की सहायता करती हैं।
मेरे चाचा चाची पहले तो एक अलग घर में रहते थे लेकिन एक वर्ष पहले जब चाचा को नौकरी के सिलसिले में दुबई चले गए, तब से चाची हमारे साथ रहने आ गई।
जिस घटना का विवरण मैं आप सबके साथ साझा करना चाहता हूँ वह लगभग छह माह पहले घटी थी और उससे मिलने वाले आनन्द और संतुष्टि को मैं आज भी प्राप्त कर रहा हूँ।
घटना वाले दिन की सुबह जब कॉलेज में पहले दो पीरियड की पढ़ाई हो चुकी थी और अगले दो पीरियड खाली थे, तब मुझे याद आया कि मैं लायब्ररी की एक किताब को लाना भूल गया था और वह मुझे उसी दिन वापिस जमा करानी थी।
तभी मुझे विचार आया कि मैं इन दो खाली पीरियड में घर जाकर उस किताब को लाकर लायब्ररी में जमा करा सकता हूँ तथा बाकी के सभी पीरियड में भी उपस्थित रह सकता हूँ।
तब मैंने तुरंत बाइक उठायी और घर की ओर चल पड़ा।
जब मैंने घर पहुँच कर घंटी बजाई तो पाया कि लाइट न होने के कारण वह बज नहीं रही थी।
तब मैंने दरवाज़ा खटखटाया लेकिन किसी ने नहीं भी खोला।
यह सोच कर कि शायद माँ समाज सेवा में चली गई होगी और चाची स्नान आदि कर रही होगी, इसलिए मैंने मेरे पास जो घर की डुप्लिकेट चाबी थी उससे दरवाज़ा खोला और अन्दर गया।
घर के अंदर जाकर नीचे की मंजिल में जब मैंने माँ और चाची को नहीं पाया तब यह सोच कर की शायद चाची बाज़ार से सामान खरीदने गई होगी, मैं ऊपर की मंजिल अपने कमरे की ओर चल पड़ा।
मैं जैसे ही चाची के कमरे के पास पहुँचा तो मुझे कुछ खुसफ़ुसाने की आवाजें सुनाई दी।
मैं ठिठक कर रुक गया और दरवाज़े पर कान लगा कर ध्यान से सुनने लगा।
चाची किसी से कह रही थी– अभी तुम परसों ही तो आये थे, फिर इतनी जल्दी कैसे आना हुआ?
किसी आदमी की आवाज सुनाई दी- मेरी जान, आज तो तुम्हारे पिताजी यानि मेरे ताऊजी ने भेजा है यह सामान देकर। और सच कहूँ तो मेरा मन भी तुमसे मिलने के लिए का बहुत आतुर था।
हमारा घर दो मंजिला है, जिसकी नीचे की मंजिल में एक बड़ा हॉल, दो बैडरूम जिसमें से एक में मम्मी-पापा और दूसरे में मेरा छोटा भाई सोते हैं तथा एक रसोई और दो बाथरूम है जो कि बैडरूम के साथ संलग्न है।
ऊपर की मंजिल में दो बैडरूम, जिसमें से एक बैडरूम में मैं और दूसरे बैडरूम में मेरी चाची सोती हैं तथा एक छोटा स्टोर और एक बाथरूम है। वह बाथरूम दोनों बैडरूम के बीच में है और उसमें दो दरवाज़े हैं जिस में से एक मेरे बेडरूम में और दूसरा चाची के बैडरूम में खुलता है।
मेरे पापा एक निजी कंपनी में उच्च महा-प्रबंधक हैं और रोज़ सुबह नौ बजे तक तैयार ऑफिस चले जाते तथा रात को देर से ही घर लौटते हैं।
पापा की कम्पनी की दूसरे 12 शहरों में भी शाखाएँ हैं जिनकी देखरेख के सिलसिले में अधिकतर उन्हें हर सप्ताह दो से तीन दिन के लिए बाहर जाना ही पड़ता है।
मेरी मम्मी एक कुशल गृहिणी हैं और घर के काम के साथ साथ अपने खाली समय में वह एक समाज सेवा संस्था के लिए भी काम करती हैं।
सोमवार से शुक्रवार तक मम्मी रोज़ घर का काम-काज निबटा कर सुबह दस बजे से शाम पाँच बजे तक समाज-सेवा के कार्य के लिए घर से बाहर ही व्यस्त रहती हैं।
मेरा छोटा भाई दिन में स्कूल और शाम को एयर-फोर्स में भरती की परीक्षा की तैयारी में कोचिंग और ट्रेनिंग के लिए घर से बाहर ही रहता है तथा रात आठ बजे तक ही घर लौटता था।
मैं कॉलेज में बी.कॉम के अन्तिम वर्ष की पढ़ाई कर रहा हूँ और सुबह आठ बजे कॉलेज के लिए निकल जाता था और अपराह्न 4 बजे तक ही घर पहुँचता था।
मेरी चाची भी एक गृहिणी हैं और पूरा दिन घर पर ही रहती हैं तथा घर के काम और देखभाल में माँ की सहायता करती हैं।
मेरे चाचा चाची पहले तो एक अलग घर में रहते थे लेकिन एक वर्ष पहले जब चाचा को नौकरी के सिलसिले में दुबई चले गए, तब से चाची हमारे साथ रहने आ गई।
जिस घटना का विवरण मैं आप सबके साथ साझा करना चाहता हूँ वह लगभग छह माह पहले घटी थी और उससे मिलने वाले आनन्द और संतुष्टि को मैं आज भी प्राप्त कर रहा हूँ।
घटना वाले दिन की सुबह जब कॉलेज में पहले दो पीरियड की पढ़ाई हो चुकी थी और अगले दो पीरियड खाली थे, तब मुझे याद आया कि मैं लायब्ररी की एक किताब को लाना भूल गया था और वह मुझे उसी दिन वापिस जमा करानी थी।
तभी मुझे विचार आया कि मैं इन दो खाली पीरियड में घर जाकर उस किताब को लाकर लायब्ररी में जमा करा सकता हूँ तथा बाकी के सभी पीरियड में भी उपस्थित रह सकता हूँ।
तब मैंने तुरंत बाइक उठायी और घर की ओर चल पड़ा।
जब मैंने घर पहुँच कर घंटी बजाई तो पाया कि लाइट न होने के कारण वह बज नहीं रही थी।
तब मैंने दरवाज़ा खटखटाया लेकिन किसी ने नहीं भी खोला।
यह सोच कर कि शायद माँ समाज सेवा में चली गई होगी और चाची स्नान आदि कर रही होगी, इसलिए मैंने मेरे पास जो घर की डुप्लिकेट चाबी थी उससे दरवाज़ा खोला और अन्दर गया।
घर के अंदर जाकर नीचे की मंजिल में जब मैंने माँ और चाची को नहीं पाया तब यह सोच कर की शायद चाची बाज़ार से सामान खरीदने गई होगी, मैं ऊपर की मंजिल अपने कमरे की ओर चल पड़ा।
मैं जैसे ही चाची के कमरे के पास पहुँचा तो मुझे कुछ खुसफ़ुसाने की आवाजें सुनाई दी।
मैं ठिठक कर रुक गया और दरवाज़े पर कान लगा कर ध्यान से सुनने लगा।
चाची किसी से कह रही थी– अभी तुम परसों ही तो आये थे, फिर इतनी जल्दी कैसे आना हुआ?
किसी आदमी की आवाज सुनाई दी- मेरी जान, आज तो तुम्हारे पिताजी यानि मेरे ताऊजी ने भेजा है यह सामान देकर। और सच कहूँ तो मेरा मन भी तुमसे मिलने के लिए का बहुत आतुर था।