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शरीर की भूख
मेरा नाम डॉली है और यह मेरी कहानी है। आशा है कि आपको अच्छी लगेगी। मेरे हस्बैंड अमर की असमय मृत्य के बाद मेरी शादी मेरे जेठ से करवा दी गई जो कि दुबई में रहते हैं। उनकी पत्नी का एक कार एक्सीडेंट में पांच साल पहले देहांत हो गया था। मैं उस समय कॉलेज में पढ़ ही रही थी। दो तीन महीने बाद मेरी शादी की बात चली और मेरे जेठ का नाम बीच में लाया गया। काफी विचार विमर्श के बाद यही तय हुआ कि हमारी शादी कर दी जाये। उन्होंने मुझे पहले पढाई खत्म कर लेने के लिए कहा। पढाई ख़त्म हो जाने के बाद वो मुझे ले जायेंगे। मेरे सास ससुर को भी यह बात ठीक लगी। मेरे जेठ संदीप लम्बे कद के ताकतवर पुरुष हैं। अभी तो मेरी दूसरी साल ही चल रही थी। वो हर साल दो बार घर आया करते थे। शादी के तुरंत बाद जब हमें एक कमरे में साथ में सोने को भी मिला तब भी उन्होंने मेरे साथ कुछ नहीं किया। शायद भाई की मृत्य के सदमे ने उन्हें कुछ भी करने से रोक रखा था। मैं खुद से तो क्या कहती। पर ६ महीने गुजर चुके थे। धीरे धीरे समय बीतने लगा और मैं पढाई में ध्यान देने लगी। गर्मियों की छुट्टीओं में संदीप घर आये। मेरे दूसरा साल खत्म हो गया था। रिजल्ट भी अच्छे आये थे। मैं खुश थी. रात के खाने के बाद वो मेरे सास ससुर से बातें करने लगे और मैं बर्तन धोने लगी। सास ससुर उन्हें समझा रहे थे कि डॉली को कहीं बाहर घूमने ले जाओ , उसका भी दिल बहल जायेगा। अब तो उसकी परीक्षाएं भी ख़त्म हो गई हैं। संदीप उन सब बातो को चुप चाप सुनते रहे और कहा की छुट्टियां काफी काम हैं और काम काफी ज्यादा। कभी बाद में समय मिलने पर घुमा लाएंगे। मैं सब सुन रही थी और मन ही मन बहुत उदास हुई। पति को गुजरे हुए १ साल से ज्यादा हो गया था। अब मेरा भी मन करता था कि फिर से कोई मेरे बदन से खेले। सास ससुर नीचे अपने कमरे में सोते थे। हमारा कमरा ऊपर था और सामने छत थी। गर्मी अधिक थी पर मेरे कमरे में एयर कंडीशनर लगा हुआ था। बर्तन साफ़ हो जाने के बाद मैं अपने कमरे में जाने लगी। ससुर जी संदीप को समझा रहे थे कि वो मेरा ख्याल रखें। कमरे के अंदर जाकर मैं चेंज करने लगी। सास ससुर के सामने मैं साड़ी ब्लाउज पहनती थी पर अपने कमरे के अंदर मैं मैक्सी या स्कर्ट टॉप पहन लिया करती थी। जब संदीप कमरे में अंदर आये तो मैं साड़ी उतार चुकी थी और ब्लाउज और पेटीकोट में थी। ब्लाउज के हुक खोल रही थी कि दरवाजा खुला और वो अंदर आ गए। मुझे चेंज करता देखकर वो बाहर जाने लगे तो मैंने उन्हें रोकते हुए कहा कि प्लीज आप मेरी वजह से बाहर न जाएँ। मैं बाथरूम में चेंज कर लूंगी। वैसे भी आप मेरे पति हो। आपके सामने कपडे बदलने में मुझे कोई शर्म नहीं आनी चाहिए। संदीप को डाइवोर्स लिए ३ साल हो चुके थे। शायद उन्हें भी अब शरीर की भूख सताने लगी थी। ऊपर से २० साल की कमसिन मैं। किसी का भी मन डोल सकता था। मैंने उनका हाथ पकड़ कर उन्हें बिस्तर पर बिठा दिया। उनकी तरफ पीठ करके ब्लाउज उतारने लगी। सामने शीशे में खुद को देखते हुए ब्लाउज के बटन खोल रही थी। शीशे में देखा तो वो मेरी तरफ ध्यान से देख रहे थे। हिम्मत करके मैंने धीरे से ब्लाउज उतार दिया। वो एक टक मेरी ओर देखे जा रहे थे। मेरा फिगर 36C - 26 - 38 है। अब मुझे बड़ी शर्म आने लगी कि पता नहीं वो क्या सोचेंगे। मैंने जल्दी से सामने पड़ी मैक्सी पहन ली। फिर मैं उनके पास आकर बैठ गई। उनसे दुबई के बारे में बातें करने लगी।
थोड़ी देर यहाँ वहां की बातें करने के बाद वो पूछने लगे कि क्या तुम रोज़ यही कपडे पहन कर सोती हो ? मैं क्या कहती। मुझे चुप देख कर वो कहने लगे कि रात को सोते वक़्त ढीले कपडे पहनने चाहिए। मैंने कहा मैंने मैक्सी पहनी तो है। वो कहने लगे और अंदर इतने टाइट कपडे पहने हैं उसका क्या ?तब तो बड़ा कह रही थी कि पति के सामने शर्म। मैंने शर्माते हुए कहा कि मुझे शर्म आती है। वो कहने लगे कि अच्छा अगर मैं उतारूँ तो? मैंने कहा आप तो मेरे पति हो आपका तो हक़ बनता है। वो कहने लगे कि डॉली मैं चाहता हूँ कि तुम आराम से रहो मेरी तरफ से तुम्हें कोई तकलीफ न हो। फिर उन्होंने मुझे खड़े होने को कहा। वो खुद मेरे पीछे खड़े हो गए. मेरी मैक्सी के ऊपर से ही उन्होंने मेरी ब्रा का हुक खोल दिया। मेरी मैक्सी धीरे धीरे ऊपर उठाई और मेरे पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया। पेटीकोट सरक कर तुरंत नीचे गिर गया। प्यार से मेरी गर्दन के पीछे किस किया और कहा यह मैक्सी ही काफी है कुछ और मत पहना करो रात में सोते समय। मैंने सामने से अपनी मैक्सी के अंदर हाथ डालकर अपनी ब्रा को बहार निकाला और फिर अपनी पैंटी भी उतार दी। अब मैं सिर्फ मैक्सी में थी। मेरे कन्धों को पकड़कर उन्होंने मुझे अपनी तरफ घुमा लिया। मैंने अपनी आँखें बंद कर ली और सोचा की शायद अब वो मुझे किस करेंगे। पर ऐसा कुछ नहीं हुआ। वो ऐसे ही मुझे देखते रहे और फिर कुछ ना होता पाकर मैंने अपनी आँखें खोल दी। मैंने उन्हें अपनी आँखों में देखते हुए पाया। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि रात बहुत हो गई है अब सो जाना चाहिए। हम दोनों बिस्तर पर लेट गए। मेरी तो हिम्मत ही नहीं हो रही थी उनसे बातें करने की। उन्होंने ही बातें शुरू की , मेरे रिजल्ट के बारे में पूछा। घर के हालातों के बारे में पूछा। यह भी पूछा की मुझे क्या अच्छा लगता है। कॉलेज में दोस्तों के बारे में। सहेलियों के बारे में। मैं सब बताती रही। एकदम से वो पूछ बैठे कि कॉलेज में मेरी सहेलियों के बॉयफ्रेंड तो होंगे ? मैंने कहा हाँ हैं तो। तुम्हारा तो कोई बॉयफ्रेंड नहीं है ना ? मैंने कहा संदीप आप भी ना कैसी बातें करते हैं। वो पूछने लगे कि कॉलेज में मेरी सबसे सबसे अच्छी दोस्त कौन है? मैंने कहा निशा मेरी सबसे अच्छी दोस्त है। उन्होंने पूछा कि निशा का कोई बॉयफ्रेंड है ? मैंने कहा हाँ है तो ? वो कहने लगे कि फिर तो उसने निशा के साथ के साथ बहुत कुछ किया होगा ? और निशा ने तुम्हें सब कुछ बताया भी होगा ? मैंने कहा हाँ निशा मुझे सब कुछ बताती है। संदीप पूछने लगे कि क्या क्या किया उन्होंने ?मैंने कहा मुझे शर्म आती है। इसपर संदीप ने कहा कि बताना तो पड़ेगा। फिर वो वही सब मेरे साथ भी करेंगे। मैं तो खुश हो गई। मैंने कहा मैं जरूर बताउंगी की निशा के बॉयफ्रेंड ने उसके साथ क्या क्या किया। पर अभी तो आप वो सब करो मेरे साथ जो आप चाहते हो। मेरी परमिशन मिलने पर वो बिस्तर से उठ गए , मुझे इशारा किया कि मैं भी उठ जाऊं। मैं उठ कर खड़ी हो गई। उन्होंने मेरे चेहरे को अपने हाथों में भरा और अपने होंठ मेरे थरथराते होठों पर रख दिए। बड़ी देर तक मेरे होठों को चूसते रहे। उन्हें भी कई सालों में कुछ नहीं मिला था। मैं भी साल भर से प्यासी थी इसलिए मैंने भी पूरा सहयोग किया। करीब 15 मिनट के बाद मैंने महसूस किया कि उनके हाथ मेरी पीठ पर चल रहे हैं। वो अपने हाथों से मुझे कस रहे थे जिससे मेरे बूब्स उनके सीने से चिपके जा रहे थे। थोड़ी देर में ही उनका एक हाथ मेरे चूतड़ तक पहुँच गया। मैक्सी के ऊपर से ही वो मेरे हिप्स को महसूस करने लगे। जब उन्होंने मेरे होठों को थोड़ी देर के लिए छोड़ा तो मैंने कहा : आप कहें तो मैं मैक्सी उतार दूँ ? उन्होंने प्यार से मेरे हिप्स दबाते हुए कहा : तुम क्यों तकलीफ करोगी अब से मैं ही तुम्हारे कपडे उतरूंगा और मैं ही पहनाऊंगा। मेरा मन तो ख़ुशी से नाच उठा। उन्होंने मेरी मैक्सी कमर तक ऊपर उठाई और मेरी नंगी कमर पर हाथ फिराते हुए मेरे हिप्स पर ले गए। क्या बताऊँ इतना मज़ा आ रहा था मन कर रहा था कि वो यह सब बस करते ही रहें। मेरी मैक्सी कमर तक चढ़ी हुई थी। कमर से नंगी थी। उन्होंने मुझे बिस्तर पर बिठा दिया और खुद बिस्तर पर चढ़ कर दीवार पर बैक रेस्ट लेकर बैठ गए। मेरे कन्धों पर हाथ रखा और अपनी ओर खींच लिया। अब मैं उनके पैरों के बीच बैठी थी और मेरी पीठ उनकी तरफ थी। उन्होंने मेरे कन्धों को चूमना शुरू किया। गर्दन के पीछे जब वो किस कर रहे थे तो इतना अच्छा लग रहा था। कितने समय बाद यह सब हो रहा था। मेरा तो मन कर रहा था कि यह सब कभी ख़त्म ना हो। मेरी गर्दन के पीछे किस करते करते उन्होंने अपने हाथ आगे करके मेरे बूब्स को अपने हाथों में भर लिया और उन्हें अपने मजबूत हाथों में उठा लिया और हलके हलके मसलने लगे। अभी भी वो मैक्सी के ऊपर से ही यह सब कर रहे थे। मैं तो लम्बी लम्बी साँसे भर रही थी और वो मेरे बूब्स मसले जा रहे थे। फिर उन्होंने अपनी टी शर्ट उतार दी। अब वो सिर्फ शॉर्ट्स में थे। मेरी मैक्सी भी धीरे धीरे करके उतारने लगे। मैंने भी अपने हाथ ऊपर कर दिए ताकि वो आराम से मैक्सी उतार सकें। एक बार फिर से उन्होंने मेरे बूब्स अपने हाथों में भरे और मसलने लगे। मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था , कई दिनों के बाद कोई मर्द मेरे बदन से इस तरह खेल रहा था। और सबसे बड़ी बात मेरे जेठ जो कि मेरे पति बन गए हैं मेरे साथ यह सब करने के लिए तैयार हो गए हैं। लग रहा था कि अब यह रिश्ता नार्मल हो जायेगा और हम पति पत्नी की तरह रह पाएँगे। काफी देर बूब्स मसलने के बाद और गर्दन के पीछे किस करने के बाद उन्होंने मेरी कमर पर हाथ फिराना शुरू किया। मेरी झांघें सहलाने लगे। पेट के निचले हिस्से पर भी हाथ फिराने लगे। शायद वो मेरी चूत को छूना चाहते थे। उनका इशारा समझकर जब भी उनके हाथ मेरी चूत के पास आते मैं अपनी टाँगे और खोल लेती। आखिरकार उनका हाथ गया। उन्होंने जल्दी से अपना हाथ वहां से हटा लिया। इसका कारण मुझे बाद में पता चला। उन्होंने जल्दी से मुझे पीठ के बल बिस्तर पर लिटा दिया और मेरी बगल में लेट गए करवट लेकर। मेरे होठों पर अपने होंठ कर दिए और किस करने लगे। यह हमारा पहला चुम्बन था। वह हलके हलके मेरे होठों पर अपने होंठ फिरा रहे थे। मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। अब रिश्ता नार्मल होता लग रहा था। लग रहा था जैसे अब सब कुछ ठीक हो जायेगा और हर रात मुझे पति का सुख मिलेगा। मैं चाहती थी कि वो मेरे साथ वो सब करें जो वो चाहते हैं और मैं उनका साथ दूँ। थोड़ी देर में उन्होंने मेरे निचले होंठ को अपने होठों में लेकर चूसना शुरू कर दिया। जब वो थोड़ी देर को रुके तो मैंने भी उनके ऊपरी होंठ को अपने होठों में भर कर चूसना शुरू कर दिया। मेरा इस तरह साथ देना शायद उन्हें अच्छा लगा। उन्होंने अपना दायाँ हाथ मेरे बाएं बूब पर रखा और उसे दबाने लगे। फिर अचानक मेरे होठों को छोड़कर मेरे बाएं बूब के निप्पल को अपने मुँह में भर लिया और जोर जोर से चूसने लगे। मैंने उनके बालों में हाथ फिराने लगी। थोड़ी देर बाद भी जब उनकी स्पीड काम नहीं हुई तो मैंने कहा मैं कहीं भागी नहीं जा रही। आप आराम से कीजिये। उन्होंने फिर मुझसे पूछा कि तुम्हें कैसा लग रहा है। मैंने कहा मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। यह अच्छा हुआ कि हमारे बीच की दूरियां कम हो गई हैं। वो मेरे एक बूब को चूसते और दूसरे को अपने हाथों से मसल रहे थे। एक सवाल करते और फिर बूब चूसने में बिजी हो जाते। वो पूछते रहते बीच बीच में कि मुझे दर्द तो नहीं हो रहा ? क्या मैं उन्हें अपना पति मान चुकी हूँ ? क्या वो ठीक से कर रहे हैं ? मैं हर सवाल का जवाब देती जा रही थी और एन्जॉय करती जा रही थी। उन्होंने कहा कि वो अपनी छुट्टियाँ बढ़वाने की सोच रहे हैं। मैं तो खुश हो गई। और पलटकर मैंने उन्हें होठों पर किस कर दिया। फिर उन्होंने कहा कि हम हनीमून पर न जाकर मम्मी पापा को तीर्थ यात्रा पर भेज देते हैं। घर पर अकेले बहुत समय मिलेगा और मैं तुमपर ध्यान दे पाउँगा जो मैं इतने समय से नहीं दे पाया। मुझे भी उनका सुझाव अच्छा लगा। मैंने उन्हें कस कर बाँहों में जकड लिया और अपने होंठ उनके होठों पर रख दिए यह कहते हुए की संदीप मैं आपसे बहुत प्यार करती हूँ। आपके लिए कुछ भी करुँगी। उन्होंने भी जवाब में मुझे बहुत किस किया और बूब्स मसले। मेरी चूत तो पानी छोड़े जा रही थी। मैं खुद से ऐसा कैसे कहती की चोदो मुझे बस ऑर्गैस्म पर ऑर्गैस्म हो रहे थे और एक वो थे की अंदर आने का नाम ही नहीं ले रहे थे। आखिर कार वो भी थक गए और सो गए। मैं काफी देर तक सोचती रही की उन्होंने इतना सब कुछ होने के बाद भी आखिर मेरी चुदाई क्यों नहीं की ?
अगले दिन सुबह वो मुझसे पहले उठ गए। जब मैं नाश्ता बनाने नीचे पहुंची तो वो मेरे सास ससुर के साथ बैठे चाय पी रहे थे और उनके जाने का प्रोग्राम उन्हें बता रहे थे। सास ससुर ने पहले तो थोड़ी आना कानी की फिर मान गए। जब तक मैं नाश्ता बना कर लायी तब तक तो संदीप ने उनके जाने के लिए टिकट भी बुक करवा दिए थे। ३ दिन बाद उनकी रवानगी थी। यह तीन दिन कैसे कटेंगे यही सोच सोच कर मैं परेशान हो रही थी और रात वाली बात सोच कर भी। आखिरकार दिन निकला और रात आ गई। मैं कुछ ज्यादा ही बन संवर कर तैयार हो रही थी। इस रात भी उन्होंने मुझे नहीं चोदा। मैं लाज शर्म के मारे उनसे पूछ भी नहीं पायी कि उन्होंने ऐसा क्यों किया ? हर रात को ऐसा ही होता था और मेरी हिम्मत नहीं होती थी पूछने की। ऐसा करते करते तीन दिन बीत गए। आज दोपहर को सास ससुर को जाना था। मैं सुबह से ही किचन में लगी थी। यह सामान पैक कर रहे थे। संदीप उन्हें ट्रेन में बिठाने के लिए ग्यारह बजे घर से निकले , मुझसे कहके गए कि एक बजे तक घर वापस आ जाऊंगा। मैं नहाने चली गई। नहा धोकर मैंने सलवार सूट पहन लिया और बैडरूम में आकर बैठ गई। बहुत सोचा कि आज तो जरूर पूछूंगी संदीप से कि उन्हें मेरे साथ सेक्स करने में क्या तकलीफ है ?
इंतज़ार करना मुश्किल होगा जा रहा था। घडी की सुइयां धीरे धीरे चल रही थीं। संदीप दो बजे घर आये। मैंने दरवाजा खोला तो उन्होंने अंदर आते ही कहा अच्छी लग रही हो। जैसे ही मैंने दरवाजा बंद किया उन्होंने मुझे पीछे से अपनी बाँहों में भर लिया और मेरी गर्दन के पीछे किस करने लगे। मैं मदहोश होने लगी। होश सँभालते हुए कहा चलिए बैडरूम में चलते हैं। उन्होंने कहा अब किस बात का डर ? अब तो घर पर सिर्फ मैं और तुम ही हैं। मैं मुस्कुरा उठी। वो मेरे सपाट पेट पर सूट के ऊपर से ही हाथ फिरा रहे थे। मैं अभी अभी नहायी थी इसलिए मेरे बदन से भीनी भीनी खुशबू आ रही थी। बाल भी धोये थे इसलिए वो भी महक रहे थे। सूट के ऊपर से ही मेरे बूब्स को दबाते हुए बोले जान तुम्हारे बूब्स को खा जाने का मन करता है। मैंने कहा तो खा जाइये ना यह तो आपके लिए ही हैं। वो खुश हो गए और कहा कि चलो बैडरूम में ले चलता हूँ तुम्हें और मुझे अपनी गोद में उठा लिया। बैडरूम में पहुँच कर मुझे बिस्तर पर बैठने को कहा और मेरी सलवार उतार दी। मेरी आँखों में देखते हुए पूछा - जानू क्या मैं तुम्हारी पैंटी भी उतार सकता हूँ ? मैंने कहा मैं पूरी तरह से आपकी हूँ और आप जो चाहे मेरे साथ कर सकते हैं। वो खुश हो गए और मेरी पैंटी उतारने लगे। मेरी पैंटी उतर जाने के बाद उन्होंने मुझे बिस्तर पर बैठने का इशारा किया और मेरे पैर खोल दिए। अब हलके हलके मेरी चूत के बालों पर अपने हाथ फिराने लगे ? फिर उन्होंने पूछा कि डॉली क्या तुम्हें यहाँ बाल अच्छे लगते हैं ? मैंने कहा आपको जैसा पसंद हो। उन्होंने कहा कि मैं चाहता हूँ कि यहाँ के बाल तुम हमेशा साफ़ रखो। मैंने कहा जैसी आपकी इच्छा। उन्होंने कहा कि अभी यहाँ के बाल साफ़ करने होंगे। उन्होंने प्यार से मेरा सूट भी उतार दिया और फिर बाथरूम में ले गये। टॉयलेट सीट भी बिठा कर मेरे पैर खोल दिए और हेयर रिमूविंग क्रीम लगाने लगे। फिर उन्होंने हेयर रिमूविंग क्रीम से मेरी चूत के चारों ओर के बाल साफ़ कर दिए। जब बाल अच्छे से साफ़ हो गए तो उन्होंने मेरी चूत को हलके से पानी से धो दिया और एक साफ़ तोलिये से पोंछ दिया। वो वाश बेसिन में हाथ धोने लगे और मैं बैडरूम में जाने लगी। वो जल्दी से हाथ धोकर आये और मुझे पीछे से पकड़ लिया और ब्रा के ऊपर से ही मेरे बूब्स दबाने लगे। मैंने कहा जानू ब्रा तो उतार लो। उन्होंने ब्रा का हुक जल्दी से खोला और मेरे नंगे बूब्स को हाथों में भर कर कस के दबाने लगे। मुझे बहुत मज़ा आ रहा था। लग रहा था की आज तो सेक्स जरूर होगा। करीब पंद्रह मिनट में मेरी चूत ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया। मैंने कहा कि संदीप जानू बिस्तर पर चलते हैं आराम से लेट कर सब कीजिये ना। उन्होंने कहा नहीं मुझे जो करना है करने दो मेरा हक़ बनता है ना। मैंने प्यार से कहा जी आपका तो पूरा हक़ बनता है। इसपर संदीप ने कहा कि तुम बस एन्जॉय करो जान। फिर उन्होंने मुझे टर्न किया और मेरे होठों पर अपने होंठ लगा दिए। उनके हाथ मेरी पीठ और हिप्स पर थे। वो मुझे बेतहाशा चूमे जा रहे थे। बहुत देर तक यह सब करने के बाद उन्होंने मुझे बिस्तर पर बैठने के लिए कहा। मैं बैठ गई तो वो मेरे पैरों के बीच बैठ गए। मेरी जांघों को चूमने लगे। उनपर हाथ फिराने लगे। फिर धीरे धीरे मेरी जाँघों पर किस करना शुरू कर दिया। मैं बिस्तर पर बैठी ना रह सकी लेट गई। मुँह से सिस्कारियां निकलनी शुरू हो गईं। मेरी चूत के ऊपर आकर उन्होंने अपनी गरम साँसे छोड़ने शुरू की। फिर उन्होंने अपने होंठ उसपर रख दिए। मुझे करंट सा लगा। फिर उन्होंने अपनी जीभ को चूत के होठों पर नीचे से ऊपर फिराने लगे। मेरी टांगें बंद होने लगी पर उन्होंने अपने मजबूत हाथों से मेरी टांगों को बंद होने से रोक दिया। मेरे साथ ऐसा कभी नहीं हुआ था। उन्होंने मेरी चूत के होठों को अपनी जीभ से चाटना जारी रखा। करीब ५ मिनट बाद वो रुके और मुझसे पूछा , डॉली तुम्हें कैसा लग रहा है ? मैं समझ नहीं पा रही थी कि क्या कहूँ ? मैंने कहा मुझे बहुत अच्छा लग रहा है पर आप प्लीज ऊपर आ जाइये आपकी जगह वहां नहीं है। उन्होंने कहा कि बस तुम्हें अच्छा लगना चाहिए फिर जगह से फर्क नहीं पड़ता। और वो फिर से पूरे जोश से मेरी चूत पर अपनी जीभ का कमाल दिखाने लगे। थोड़ी और देर तक मेरी चूत चाटने के बाद उन्होंने अपनी जीभ मेरी चूत के अंदर डाल दी और धीरे धीरे उसे अंदर बाहर करने लगे। मेरी तो जैसे सारी इच्छाएँ पूरी हो गई थी। जितना सोचा था उससे कहीं ज्यादा मिल गया। बड़ी देर तक वो अपनी जीभ अंदर बाहर करते रहे जब तक कि मैं रिलैक्स नहीं हो गई। पसीना पसीना हो गई थी मैं। वो मेरे पास आकर लेट गए। जब मुझे थोड़ा होश आया तो मैंने करवट लेकर उनके होठों पर अपने होंठ रख दिए बड़ी देर तक उन्हें किस किया और कहा आपका बहुत बहुत धन्यवाद मुझे ऐसे प्यार करने के लिए। एक लम्बे अर्से से मैं तरस गई थी प्यार पाने के लिए। फिर संदीप बोले कि अब तो मैं तुम्हें कभी अकेला नहीं छोड़ूंगा।
फिर वो कॉलेज की बातें करने लगे। पूछने लगे मेरे दोस्तों के बारे में। जब निशा की बात आई तो उन्होंने पूछा कि निशा के बारे में बताओ। फिर मैं निशा और उसके बॉयफ्रेंड कि कहानी बताने लगी। निशा और उसके बॉयफ्रेंड रोहित का प्यार कैसे कॉलेज में हुआ। निशा शुरू से ही मेरी दोस्त रही है। कॉलेज के पहले महीने में ही रोहित से उसकी दोस्ती बढ़ने लगी। तीन चार महीनो में ही बात किस तक पहुँच गई। मैं हमेशा निशा के साथ ही जाया करती थी। जब उन्हें कुछ करना होता था तो निशा मुझे कुछ इशारा कर देती थी और मैं कुछ ना कुछ बहाना करके वहां से थोड़ी देर को निकल जाती थी। बाद में निशा बताया करती थी कि कैसे रोहित ने उसके साथ यह किया वो किया। संदीप पूछने लगे कि क्या किया ? मैंने कहा धत मुझे शर्म आती है। इसपर संदीप बोले कि मैं उनसे कोई शर्म ना करुँ और सब कुछ खुल कर बताऊँ। मैंने कहा कि पहले तो रोहित सिर्फ किस करता था धीरे धीरे उसने निशा के बूब्स दबाने भी शुरू कर दिए थे। जब निशा ने मुझे यह बताया तो मैंने उसे समझाया भी कि शादी से पहले यह गलत है पर वो नहीं मानी। कहने लगी कि तूने तो सब कुछ करवा रखा है। अब मुझे करने दे। धीरे धीरे उसे आदत हो गई यह सब करने की। फिर एक दिन निशा ने मुझे बताया कि रोहित ने उसे मिलने के लिए अकेले बुलाया है उसके रूम पर जो की किराये पर है। मैंने कहा तो बात अब यहाँ तक आ गई है कि तू उसके साथ सब कुछ करने के लिए तैयार है ? उसने बहुत मिन्नतें की और कहा कि वो अकेली नहीं जाएगी , मुझे भी साथ चलने को कहा। मैंने कहा तुम दोनों के बीच मेरा क्या काम ? तो निशा ने कहा कि वो सेफ फील करती है जब मैं साथ होती हूँ। मैंने कहा कि जब तुम लोगों ने तय कर ही लिया है तो मुझे इन सब में मत घसीटो। मैं वहां क्या करुँगी। निशा ने कहा कि तुम दूसरे कमरे में बैठना। उसके बहुत मनाने पर मैं मान गई। निशा ने रोहित से भी बात कर ली थी और उसे मन लिया था। अब सब रास्ता साफ़ था। फिर एक दिन सोमवार को निशा और मैं कॉलेज ना जाकर रोहित के घर चल पड़े। सारे रास्ते हमें बहुत डर लग रहा था कि कोई देख ना ले। संदीप बड़े ही चाव से यह कहानी सुन रहे थे। रोहित का किराये का घर जिस बिल्डिंग में था उसमे सब किराये पर ही रहते थे। कोई किसी से कुछ पूछता नहीं था। रोहित खुद हमें लेने मेट्रो स्टेशन आया था। घर के अंदर जाते वक़्त किसी ने हमें नहीं देखा। अंदर पहुंचकर मुझे बड़ी शांति मिली। रोहित ने हमारे लिए कोल्ड ड्रिंक पहले से ला रखी थी। हमें कोल्ड ड्रिंक देकर वो आराम से सोफे पर बैठ गया। मैं चारों ओर देखने लगी। रोहित ने कहा चलो तुम्हें घर दिखा दूँ। हम लोग ड्राइंग रूम में बैठे थे। उससे लगी एक बालकनी थी। अंदर एक कमरा और था जिसमे बिस्तर लगा हुआ था। एक अलमारी भी थी। मिरर भी था ड्रेसिंग टेबल के साथ। अंदर वाले कमरे से लग कर एक छोटा सा किचन था और टॉयलेट बाथरूम भी था। सारे घर का चक्कर लगा कर हम वापस ड्राइंग रूम में आ गए। मैं धीरे धीरे कोल्ड ड्रिंक पी रही थी जबकि निशा अपनी कोल्ड ड्रिंक खत्म कर चुकी थी। मुझे बड़ा अजीब लग रहा था कि शुरुआत कैसे होगी। शुरुआत निशा ने ही की। कहा डॉली तू यहीं बैठ, रोहित तुम अपना लैपटॉप डॉली को दे दो। वो इस पर इंटरनेट सर्फ कर लेगी। तब तक हम अंदर बैठते हैं। रोहित थोड़ा शरमा रहा था अंदर जाकर लैपटॉप ले आया और ओपन कर के मुझे दे दिया। निशा अपना बैग लेकर अंदर चली गई। रोहित ने अंदर जाने से पहले मुझसे पूछा कि मैं कम्फ़र्टेबल हूँ ? मैंने कहा तुम बस जल्दी आ जाना। उसके ओके कहा और अंदर वाले कमरे में चला गया जहाँ निशा उसका इंतज़ार कर रही थी। दरवाजा अंदर से बंद होते ही निशा की दी। रोहित मैं कब से तुम्हें मिस कर रही हूँ। फिर अंदर से किस की आवाज़ें आने लगी। मेरा बड़ा मन किया सब देखने का तो मैं दरवाजे के पास गई और चाभी के छेद से अंदर देखने लगी। अंदर की लाइट ओन थी और निशा और रोहित एक दूसरे को पागलों की तरह किस किये जा रहे थे। जब रोहित के हाथ निशा के बूब्स की तरफ बढे तो निशा ने कहा जानू कपडे ख़राब हो जायेंगे। फिर रोहित ने निशा का सूट उतार दिया। निशा ने भी अपने हाथ ऊपर कर लिए जिससे कि रोहित उसे आराम से उतार सके। संदीप मुझे पूछने लगे कि निशा का फिगर क्या है। मैंने बताया कि उसका फिगर 34C-28-36 है। वो कहने लगे अच्छा आगे सुनाओ। मैंने आगे सुनना शुरू किया। निशा को ब्रा में देखकर तो जैसे रोहित पर भूत सवार हो गया। ब्रा के ऊपर से ही वो बूब्स को मसलने लगा। निशा ने अपने हाथ पीछे ले जाकर ब्रा का हुक खोल दिया। फिर रोहित बड़ी देर तक निशा के बूब्स से खेलता रहा उन्हें दबाता रहा और चूसता रहा। फिर उसने सलवार उतारने के लिए कहा। निशा ने कहा कि जानू तुम खुद ही उतार लो। रोहित ने फिर सलवार का नाड़ा खोला और निशा ने अपने हिप्स ऊपर उठाये और रोहित ने सलवार नीचे खींच ली। फिर रोहित ने निशा की चूत वैसे ही चाटी जैसे आपने चाटी थी। संदीप बोल उठे तुम्हें अच्छा लगा ना ? मैंने कहा बहुत अच्छा लगा। जब रोहित ने अपने कपडे उतारे तब मैंने उसका पेनिस देखा। करीब सात इंच लम्बा और अच्छा खास मोटा। निशा ने तो तुरंत उसे अपने हाथों में ले लिया। रोहित ने कहा कि प्लीज इसे प्यार करो ना ? निशा ने पहले तो थोड़ी आनाकानी की फिर इस शर्त पर मान गई कि रोहित पहले इसे धोकर आये। रोहित तुरंत बाथरूम में गया और धोकर वापस आ गया। निशा ने धीरे से उसे अपने होठों से किस किया और फिर मुंह के अंदर ले लिया। संदीप ने इसपर तुरंत पूछा। क्या तुम भी ऐसा करना चाहती हो ?मैंने कहा कि मैंने पहले कभी ऐसा नहीं किया है पर अगर आप कहोगे तो मैं आपके लिए सब कुछ करुँगी। संदीप बोले कि बाद में देखते हैं। तुम आगे बताओ कि क्या हुआ। मैं आगे बताने लगी कि कैसे निशा ने पेनिस चूस चूस कर रोहित को रिलैक्स किया और उसके बाद दोनों बिस्तर पर निढाल होकर लेट गए। अभी सिर्फ दो घंटे ही हुए थे। सुबह के ग्यारह बज रहे थे और हमें पांच बजे वापस निकलना था। काफी समय था निशा और रोहित के पास अपनी प्यास बुझाने का। ऊपर से मैं पहरा देने के लिए थी। अगर निशा का फ़ोन आ जाता तो वो यह कह देती कि मेरे साथ है और अगर मेरा फ़ोन आ जाता तो मैं यह कह सकती थी की मैं निशा के साथ हूँ। थोड़ी देर बाद करीब साढ़े ग्यारह बजे दोनों ने कपडे पहले और रूम के बाहर आ गए। दोनों मुझसे आँखें चुरा रहे थे। रोहित यह कहकर बाहर चला गया कि वो कुछ खाने के लिए लायेगा। जब मैं और निशा अकेली रह गई तो मैंने पूछा बता अंदर क्या क्या हुआ ? उसने कहा डॉली मेरी दोस्त अंदर तो बहुत मज़ा आया। मैंने पूछा कि तूने सेक्स तो नहीं किया ? उसने कहा अभी तो नहीं पर अब लगता है कि कर लेना चाहिए। मैंने कहा तू जो भी कर रही है सोच समझ कर करना। थोड़ी देर में रोहित खाना लेकर आ गया। हम सब ने साथ बैठकर खाना खाया। रोहित ने ही बात शुरू की। मुझसे पूछा कि मैं कम्फ़र्टेबल हूँ या नहीं। मैंने कहा कि अब जो भी है निशा के लिए मैं कर रही हूँ और मैं ठीक हूँ। फिर रोहित ने निशा से कहा कि अगली बार से तुम जब भी आना या तो अपने घर की ड्रेस लेते आना या फिर यही एक ड्रेस छोड़ जाना। निशा ने उसे छेड़ते हुए कहा कि मेरे लिए एक ड्रेस भी नहीं खरीद सकते तुम ? हम सब हँस पड़े। तय हुआ की शाम को जाने से पहले शॉपिंग करेंगे। खाने के बाद हम पिक्चर देखने लगे। निशा ने कहा कि उसे नींद आ रही है। वो और रोहित अंदर वाले कमरे में जाकर लेट गए। करीब साढ़े तीन बजे दोनों बाहर आये और हम शॉपिंग करने चले। मेट्रो स्टेशन के पास ही एक मॉल था जिसमे हमने निशा के लिए कुछ टॉप्स और शॉर्ट्स और स्कर्ट लिए। रोहित मुझसे भी ज़िद करता रहा कि तुम भी ले लो ना पर मैंने नहीं लिए। इसके बाद हम अंडरगार्मेंट्स की शॉप में गए जहाँ रोहित और निशा ज्यादा से ज्यादा सेक्सी ब्रा और पैंटी देखने लगे। मैं साथ ही थी और निशा मुझसे पूछे जा रही थी कि यह कैसी है या यह कैसी रहेगी। काफी देर तक देखने के बाद हमने दो पेअर फाइनल किये। पीछे से रोहित ने कहा कि डॉली तुम भी ले लो ना प्लीज। मैंने उसे छेड़ते हुए कहा निशा ने ले लिए हैं ना तुम्हारा तो काम हो गया। वो मुस्कुरा उठा और सेल्स गर्ल से कहा कि वो मेरे लिए भी पैक कर दे। सेल्स गर्ल ने मुझसे पूछा कि मैडम क्या साइज पैक करुँ ? तभी निशा बीच में बोल पड़ी ब्रा के लिए 36C और पैंटी के लिए 28. रोहित के मुंह से wow निकला। मैंने परेशान होते हुए कहा कि इसमें wow वाली क्या बात है ? तो रोहित ने कहा कि तुम्हारा फिगर तो वाकई बहुत अच्छा है। मैं शरमा गई। रोहित ने पैसे चुकाए और हम शॉपिंग मॉल से बाहर आ गए। निशा ने रोहित को अपना पैकेट देते हुए कहा कि जानू यह तुम ही रख लो जब अगली बार आउंगी तब काम आएंगे। मैं अपने पैकेट अपने घर कैसे ले जाती तो निशा ने मेरे पैकेट भी रोहित को ही थमा दिए। अगली बार बुधवार का मिलने का तय हुआ। रोहित ने हमें मेट्रो स्टेशन पर छोड़ दिया और वापस घर चला गया। रास्ते भर मैं निशा से बातें करती रही कि उसे मेरा पैकेट नहीं देना चाहिए था। रोहित ने खोलकर देख लिया तो ? निशा ने मुस्कुराते हुए कहा अरे यार वो ऐसा कुछ नहीं करेगा।
मेरा नाम डॉली है और यह मेरी कहानी है। आशा है कि आपको अच्छी लगेगी। मेरे हस्बैंड अमर की असमय मृत्य के बाद मेरी शादी मेरे जेठ से करवा दी गई जो कि दुबई में रहते हैं। उनकी पत्नी का एक कार एक्सीडेंट में पांच साल पहले देहांत हो गया था। मैं उस समय कॉलेज में पढ़ ही रही थी। दो तीन महीने बाद मेरी शादी की बात चली और मेरे जेठ का नाम बीच में लाया गया। काफी विचार विमर्श के बाद यही तय हुआ कि हमारी शादी कर दी जाये। उन्होंने मुझे पहले पढाई खत्म कर लेने के लिए कहा। पढाई ख़त्म हो जाने के बाद वो मुझे ले जायेंगे। मेरे सास ससुर को भी यह बात ठीक लगी। मेरे जेठ संदीप लम्बे कद के ताकतवर पुरुष हैं। अभी तो मेरी दूसरी साल ही चल रही थी। वो हर साल दो बार घर आया करते थे। शादी के तुरंत बाद जब हमें एक कमरे में साथ में सोने को भी मिला तब भी उन्होंने मेरे साथ कुछ नहीं किया। शायद भाई की मृत्य के सदमे ने उन्हें कुछ भी करने से रोक रखा था। मैं खुद से तो क्या कहती। पर ६ महीने गुजर चुके थे। धीरे धीरे समय बीतने लगा और मैं पढाई में ध्यान देने लगी। गर्मियों की छुट्टीओं में संदीप घर आये। मेरे दूसरा साल खत्म हो गया था। रिजल्ट भी अच्छे आये थे। मैं खुश थी. रात के खाने के बाद वो मेरे सास ससुर से बातें करने लगे और मैं बर्तन धोने लगी। सास ससुर उन्हें समझा रहे थे कि डॉली को कहीं बाहर घूमने ले जाओ , उसका भी दिल बहल जायेगा। अब तो उसकी परीक्षाएं भी ख़त्म हो गई हैं। संदीप उन सब बातो को चुप चाप सुनते रहे और कहा की छुट्टियां काफी काम हैं और काम काफी ज्यादा। कभी बाद में समय मिलने पर घुमा लाएंगे। मैं सब सुन रही थी और मन ही मन बहुत उदास हुई। पति को गुजरे हुए १ साल से ज्यादा हो गया था। अब मेरा भी मन करता था कि फिर से कोई मेरे बदन से खेले। सास ससुर नीचे अपने कमरे में सोते थे। हमारा कमरा ऊपर था और सामने छत थी। गर्मी अधिक थी पर मेरे कमरे में एयर कंडीशनर लगा हुआ था। बर्तन साफ़ हो जाने के बाद मैं अपने कमरे में जाने लगी। ससुर जी संदीप को समझा रहे थे कि वो मेरा ख्याल रखें। कमरे के अंदर जाकर मैं चेंज करने लगी। सास ससुर के सामने मैं साड़ी ब्लाउज पहनती थी पर अपने कमरे के अंदर मैं मैक्सी या स्कर्ट टॉप पहन लिया करती थी। जब संदीप कमरे में अंदर आये तो मैं साड़ी उतार चुकी थी और ब्लाउज और पेटीकोट में थी। ब्लाउज के हुक खोल रही थी कि दरवाजा खुला और वो अंदर आ गए। मुझे चेंज करता देखकर वो बाहर जाने लगे तो मैंने उन्हें रोकते हुए कहा कि प्लीज आप मेरी वजह से बाहर न जाएँ। मैं बाथरूम में चेंज कर लूंगी। वैसे भी आप मेरे पति हो। आपके सामने कपडे बदलने में मुझे कोई शर्म नहीं आनी चाहिए। संदीप को डाइवोर्स लिए ३ साल हो चुके थे। शायद उन्हें भी अब शरीर की भूख सताने लगी थी। ऊपर से २० साल की कमसिन मैं। किसी का भी मन डोल सकता था। मैंने उनका हाथ पकड़ कर उन्हें बिस्तर पर बिठा दिया। उनकी तरफ पीठ करके ब्लाउज उतारने लगी। सामने शीशे में खुद को देखते हुए ब्लाउज के बटन खोल रही थी। शीशे में देखा तो वो मेरी तरफ ध्यान से देख रहे थे। हिम्मत करके मैंने धीरे से ब्लाउज उतार दिया। वो एक टक मेरी ओर देखे जा रहे थे। मेरा फिगर 36C - 26 - 38 है। अब मुझे बड़ी शर्म आने लगी कि पता नहीं वो क्या सोचेंगे। मैंने जल्दी से सामने पड़ी मैक्सी पहन ली। फिर मैं उनके पास आकर बैठ गई। उनसे दुबई के बारे में बातें करने लगी।
थोड़ी देर यहाँ वहां की बातें करने के बाद वो पूछने लगे कि क्या तुम रोज़ यही कपडे पहन कर सोती हो ? मैं क्या कहती। मुझे चुप देख कर वो कहने लगे कि रात को सोते वक़्त ढीले कपडे पहनने चाहिए। मैंने कहा मैंने मैक्सी पहनी तो है। वो कहने लगे और अंदर इतने टाइट कपडे पहने हैं उसका क्या ?तब तो बड़ा कह रही थी कि पति के सामने शर्म। मैंने शर्माते हुए कहा कि मुझे शर्म आती है। वो कहने लगे कि अच्छा अगर मैं उतारूँ तो? मैंने कहा आप तो मेरे पति हो आपका तो हक़ बनता है। वो कहने लगे कि डॉली मैं चाहता हूँ कि तुम आराम से रहो मेरी तरफ से तुम्हें कोई तकलीफ न हो। फिर उन्होंने मुझे खड़े होने को कहा। वो खुद मेरे पीछे खड़े हो गए. मेरी मैक्सी के ऊपर से ही उन्होंने मेरी ब्रा का हुक खोल दिया। मेरी मैक्सी धीरे धीरे ऊपर उठाई और मेरे पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया। पेटीकोट सरक कर तुरंत नीचे गिर गया। प्यार से मेरी गर्दन के पीछे किस किया और कहा यह मैक्सी ही काफी है कुछ और मत पहना करो रात में सोते समय। मैंने सामने से अपनी मैक्सी के अंदर हाथ डालकर अपनी ब्रा को बहार निकाला और फिर अपनी पैंटी भी उतार दी। अब मैं सिर्फ मैक्सी में थी। मेरे कन्धों को पकड़कर उन्होंने मुझे अपनी तरफ घुमा लिया। मैंने अपनी आँखें बंद कर ली और सोचा की शायद अब वो मुझे किस करेंगे। पर ऐसा कुछ नहीं हुआ। वो ऐसे ही मुझे देखते रहे और फिर कुछ ना होता पाकर मैंने अपनी आँखें खोल दी। मैंने उन्हें अपनी आँखों में देखते हुए पाया। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि रात बहुत हो गई है अब सो जाना चाहिए। हम दोनों बिस्तर पर लेट गए। मेरी तो हिम्मत ही नहीं हो रही थी उनसे बातें करने की। उन्होंने ही बातें शुरू की , मेरे रिजल्ट के बारे में पूछा। घर के हालातों के बारे में पूछा। यह भी पूछा की मुझे क्या अच्छा लगता है। कॉलेज में दोस्तों के बारे में। सहेलियों के बारे में। मैं सब बताती रही। एकदम से वो पूछ बैठे कि कॉलेज में मेरी सहेलियों के बॉयफ्रेंड तो होंगे ? मैंने कहा हाँ हैं तो। तुम्हारा तो कोई बॉयफ्रेंड नहीं है ना ? मैंने कहा संदीप आप भी ना कैसी बातें करते हैं। वो पूछने लगे कि कॉलेज में मेरी सबसे सबसे अच्छी दोस्त कौन है? मैंने कहा निशा मेरी सबसे अच्छी दोस्त है। उन्होंने पूछा कि निशा का कोई बॉयफ्रेंड है ? मैंने कहा हाँ है तो ? वो कहने लगे कि फिर तो उसने निशा के साथ के साथ बहुत कुछ किया होगा ? और निशा ने तुम्हें सब कुछ बताया भी होगा ? मैंने कहा हाँ निशा मुझे सब कुछ बताती है। संदीप पूछने लगे कि क्या क्या किया उन्होंने ?मैंने कहा मुझे शर्म आती है। इसपर संदीप ने कहा कि बताना तो पड़ेगा। फिर वो वही सब मेरे साथ भी करेंगे। मैं तो खुश हो गई। मैंने कहा मैं जरूर बताउंगी की निशा के बॉयफ्रेंड ने उसके साथ क्या क्या किया। पर अभी तो आप वो सब करो मेरे साथ जो आप चाहते हो। मेरी परमिशन मिलने पर वो बिस्तर से उठ गए , मुझे इशारा किया कि मैं भी उठ जाऊं। मैं उठ कर खड़ी हो गई। उन्होंने मेरे चेहरे को अपने हाथों में भरा और अपने होंठ मेरे थरथराते होठों पर रख दिए। बड़ी देर तक मेरे होठों को चूसते रहे। उन्हें भी कई सालों में कुछ नहीं मिला था। मैं भी साल भर से प्यासी थी इसलिए मैंने भी पूरा सहयोग किया। करीब 15 मिनट के बाद मैंने महसूस किया कि उनके हाथ मेरी पीठ पर चल रहे हैं। वो अपने हाथों से मुझे कस रहे थे जिससे मेरे बूब्स उनके सीने से चिपके जा रहे थे। थोड़ी देर में ही उनका एक हाथ मेरे चूतड़ तक पहुँच गया। मैक्सी के ऊपर से ही वो मेरे हिप्स को महसूस करने लगे। जब उन्होंने मेरे होठों को थोड़ी देर के लिए छोड़ा तो मैंने कहा : आप कहें तो मैं मैक्सी उतार दूँ ? उन्होंने प्यार से मेरे हिप्स दबाते हुए कहा : तुम क्यों तकलीफ करोगी अब से मैं ही तुम्हारे कपडे उतरूंगा और मैं ही पहनाऊंगा। मेरा मन तो ख़ुशी से नाच उठा। उन्होंने मेरी मैक्सी कमर तक ऊपर उठाई और मेरी नंगी कमर पर हाथ फिराते हुए मेरे हिप्स पर ले गए। क्या बताऊँ इतना मज़ा आ रहा था मन कर रहा था कि वो यह सब बस करते ही रहें। मेरी मैक्सी कमर तक चढ़ी हुई थी। कमर से नंगी थी। उन्होंने मुझे बिस्तर पर बिठा दिया और खुद बिस्तर पर चढ़ कर दीवार पर बैक रेस्ट लेकर बैठ गए। मेरे कन्धों पर हाथ रखा और अपनी ओर खींच लिया। अब मैं उनके पैरों के बीच बैठी थी और मेरी पीठ उनकी तरफ थी। उन्होंने मेरे कन्धों को चूमना शुरू किया। गर्दन के पीछे जब वो किस कर रहे थे तो इतना अच्छा लग रहा था। कितने समय बाद यह सब हो रहा था। मेरा तो मन कर रहा था कि यह सब कभी ख़त्म ना हो। मेरी गर्दन के पीछे किस करते करते उन्होंने अपने हाथ आगे करके मेरे बूब्स को अपने हाथों में भर लिया और उन्हें अपने मजबूत हाथों में उठा लिया और हलके हलके मसलने लगे। अभी भी वो मैक्सी के ऊपर से ही यह सब कर रहे थे। मैं तो लम्बी लम्बी साँसे भर रही थी और वो मेरे बूब्स मसले जा रहे थे। फिर उन्होंने अपनी टी शर्ट उतार दी। अब वो सिर्फ शॉर्ट्स में थे। मेरी मैक्सी भी धीरे धीरे करके उतारने लगे। मैंने भी अपने हाथ ऊपर कर दिए ताकि वो आराम से मैक्सी उतार सकें। एक बार फिर से उन्होंने मेरे बूब्स अपने हाथों में भरे और मसलने लगे। मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था , कई दिनों के बाद कोई मर्द मेरे बदन से इस तरह खेल रहा था। और सबसे बड़ी बात मेरे जेठ जो कि मेरे पति बन गए हैं मेरे साथ यह सब करने के लिए तैयार हो गए हैं। लग रहा था कि अब यह रिश्ता नार्मल हो जायेगा और हम पति पत्नी की तरह रह पाएँगे। काफी देर बूब्स मसलने के बाद और गर्दन के पीछे किस करने के बाद उन्होंने मेरी कमर पर हाथ फिराना शुरू किया। मेरी झांघें सहलाने लगे। पेट के निचले हिस्से पर भी हाथ फिराने लगे। शायद वो मेरी चूत को छूना चाहते थे। उनका इशारा समझकर जब भी उनके हाथ मेरी चूत के पास आते मैं अपनी टाँगे और खोल लेती। आखिरकार उनका हाथ गया। उन्होंने जल्दी से अपना हाथ वहां से हटा लिया। इसका कारण मुझे बाद में पता चला। उन्होंने जल्दी से मुझे पीठ के बल बिस्तर पर लिटा दिया और मेरी बगल में लेट गए करवट लेकर। मेरे होठों पर अपने होंठ कर दिए और किस करने लगे। यह हमारा पहला चुम्बन था। वह हलके हलके मेरे होठों पर अपने होंठ फिरा रहे थे। मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। अब रिश्ता नार्मल होता लग रहा था। लग रहा था जैसे अब सब कुछ ठीक हो जायेगा और हर रात मुझे पति का सुख मिलेगा। मैं चाहती थी कि वो मेरे साथ वो सब करें जो वो चाहते हैं और मैं उनका साथ दूँ। थोड़ी देर में उन्होंने मेरे निचले होंठ को अपने होठों में लेकर चूसना शुरू कर दिया। जब वो थोड़ी देर को रुके तो मैंने भी उनके ऊपरी होंठ को अपने होठों में भर कर चूसना शुरू कर दिया। मेरा इस तरह साथ देना शायद उन्हें अच्छा लगा। उन्होंने अपना दायाँ हाथ मेरे बाएं बूब पर रखा और उसे दबाने लगे। फिर अचानक मेरे होठों को छोड़कर मेरे बाएं बूब के निप्पल को अपने मुँह में भर लिया और जोर जोर से चूसने लगे। मैंने उनके बालों में हाथ फिराने लगी। थोड़ी देर बाद भी जब उनकी स्पीड काम नहीं हुई तो मैंने कहा मैं कहीं भागी नहीं जा रही। आप आराम से कीजिये। उन्होंने फिर मुझसे पूछा कि तुम्हें कैसा लग रहा है। मैंने कहा मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। यह अच्छा हुआ कि हमारे बीच की दूरियां कम हो गई हैं। वो मेरे एक बूब को चूसते और दूसरे को अपने हाथों से मसल रहे थे। एक सवाल करते और फिर बूब चूसने में बिजी हो जाते। वो पूछते रहते बीच बीच में कि मुझे दर्द तो नहीं हो रहा ? क्या मैं उन्हें अपना पति मान चुकी हूँ ? क्या वो ठीक से कर रहे हैं ? मैं हर सवाल का जवाब देती जा रही थी और एन्जॉय करती जा रही थी। उन्होंने कहा कि वो अपनी छुट्टियाँ बढ़वाने की सोच रहे हैं। मैं तो खुश हो गई। और पलटकर मैंने उन्हें होठों पर किस कर दिया। फिर उन्होंने कहा कि हम हनीमून पर न जाकर मम्मी पापा को तीर्थ यात्रा पर भेज देते हैं। घर पर अकेले बहुत समय मिलेगा और मैं तुमपर ध्यान दे पाउँगा जो मैं इतने समय से नहीं दे पाया। मुझे भी उनका सुझाव अच्छा लगा। मैंने उन्हें कस कर बाँहों में जकड लिया और अपने होंठ उनके होठों पर रख दिए यह कहते हुए की संदीप मैं आपसे बहुत प्यार करती हूँ। आपके लिए कुछ भी करुँगी। उन्होंने भी जवाब में मुझे बहुत किस किया और बूब्स मसले। मेरी चूत तो पानी छोड़े जा रही थी। मैं खुद से ऐसा कैसे कहती की चोदो मुझे बस ऑर्गैस्म पर ऑर्गैस्म हो रहे थे और एक वो थे की अंदर आने का नाम ही नहीं ले रहे थे। आखिर कार वो भी थक गए और सो गए। मैं काफी देर तक सोचती रही की उन्होंने इतना सब कुछ होने के बाद भी आखिर मेरी चुदाई क्यों नहीं की ?
अगले दिन सुबह वो मुझसे पहले उठ गए। जब मैं नाश्ता बनाने नीचे पहुंची तो वो मेरे सास ससुर के साथ बैठे चाय पी रहे थे और उनके जाने का प्रोग्राम उन्हें बता रहे थे। सास ससुर ने पहले तो थोड़ी आना कानी की फिर मान गए। जब तक मैं नाश्ता बना कर लायी तब तक तो संदीप ने उनके जाने के लिए टिकट भी बुक करवा दिए थे। ३ दिन बाद उनकी रवानगी थी। यह तीन दिन कैसे कटेंगे यही सोच सोच कर मैं परेशान हो रही थी और रात वाली बात सोच कर भी। आखिरकार दिन निकला और रात आ गई। मैं कुछ ज्यादा ही बन संवर कर तैयार हो रही थी। इस रात भी उन्होंने मुझे नहीं चोदा। मैं लाज शर्म के मारे उनसे पूछ भी नहीं पायी कि उन्होंने ऐसा क्यों किया ? हर रात को ऐसा ही होता था और मेरी हिम्मत नहीं होती थी पूछने की। ऐसा करते करते तीन दिन बीत गए। आज दोपहर को सास ससुर को जाना था। मैं सुबह से ही किचन में लगी थी। यह सामान पैक कर रहे थे। संदीप उन्हें ट्रेन में बिठाने के लिए ग्यारह बजे घर से निकले , मुझसे कहके गए कि एक बजे तक घर वापस आ जाऊंगा। मैं नहाने चली गई। नहा धोकर मैंने सलवार सूट पहन लिया और बैडरूम में आकर बैठ गई। बहुत सोचा कि आज तो जरूर पूछूंगी संदीप से कि उन्हें मेरे साथ सेक्स करने में क्या तकलीफ है ?
इंतज़ार करना मुश्किल होगा जा रहा था। घडी की सुइयां धीरे धीरे चल रही थीं। संदीप दो बजे घर आये। मैंने दरवाजा खोला तो उन्होंने अंदर आते ही कहा अच्छी लग रही हो। जैसे ही मैंने दरवाजा बंद किया उन्होंने मुझे पीछे से अपनी बाँहों में भर लिया और मेरी गर्दन के पीछे किस करने लगे। मैं मदहोश होने लगी। होश सँभालते हुए कहा चलिए बैडरूम में चलते हैं। उन्होंने कहा अब किस बात का डर ? अब तो घर पर सिर्फ मैं और तुम ही हैं। मैं मुस्कुरा उठी। वो मेरे सपाट पेट पर सूट के ऊपर से ही हाथ फिरा रहे थे। मैं अभी अभी नहायी थी इसलिए मेरे बदन से भीनी भीनी खुशबू आ रही थी। बाल भी धोये थे इसलिए वो भी महक रहे थे। सूट के ऊपर से ही मेरे बूब्स को दबाते हुए बोले जान तुम्हारे बूब्स को खा जाने का मन करता है। मैंने कहा तो खा जाइये ना यह तो आपके लिए ही हैं। वो खुश हो गए और कहा कि चलो बैडरूम में ले चलता हूँ तुम्हें और मुझे अपनी गोद में उठा लिया। बैडरूम में पहुँच कर मुझे बिस्तर पर बैठने को कहा और मेरी सलवार उतार दी। मेरी आँखों में देखते हुए पूछा - जानू क्या मैं तुम्हारी पैंटी भी उतार सकता हूँ ? मैंने कहा मैं पूरी तरह से आपकी हूँ और आप जो चाहे मेरे साथ कर सकते हैं। वो खुश हो गए और मेरी पैंटी उतारने लगे। मेरी पैंटी उतर जाने के बाद उन्होंने मुझे बिस्तर पर बैठने का इशारा किया और मेरे पैर खोल दिए। अब हलके हलके मेरी चूत के बालों पर अपने हाथ फिराने लगे ? फिर उन्होंने पूछा कि डॉली क्या तुम्हें यहाँ बाल अच्छे लगते हैं ? मैंने कहा आपको जैसा पसंद हो। उन्होंने कहा कि मैं चाहता हूँ कि यहाँ के बाल तुम हमेशा साफ़ रखो। मैंने कहा जैसी आपकी इच्छा। उन्होंने कहा कि अभी यहाँ के बाल साफ़ करने होंगे। उन्होंने प्यार से मेरा सूट भी उतार दिया और फिर बाथरूम में ले गये। टॉयलेट सीट भी बिठा कर मेरे पैर खोल दिए और हेयर रिमूविंग क्रीम लगाने लगे। फिर उन्होंने हेयर रिमूविंग क्रीम से मेरी चूत के चारों ओर के बाल साफ़ कर दिए। जब बाल अच्छे से साफ़ हो गए तो उन्होंने मेरी चूत को हलके से पानी से धो दिया और एक साफ़ तोलिये से पोंछ दिया। वो वाश बेसिन में हाथ धोने लगे और मैं बैडरूम में जाने लगी। वो जल्दी से हाथ धोकर आये और मुझे पीछे से पकड़ लिया और ब्रा के ऊपर से ही मेरे बूब्स दबाने लगे। मैंने कहा जानू ब्रा तो उतार लो। उन्होंने ब्रा का हुक जल्दी से खोला और मेरे नंगे बूब्स को हाथों में भर कर कस के दबाने लगे। मुझे बहुत मज़ा आ रहा था। लग रहा था की आज तो सेक्स जरूर होगा। करीब पंद्रह मिनट में मेरी चूत ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया। मैंने कहा कि संदीप जानू बिस्तर पर चलते हैं आराम से लेट कर सब कीजिये ना। उन्होंने कहा नहीं मुझे जो करना है करने दो मेरा हक़ बनता है ना। मैंने प्यार से कहा जी आपका तो पूरा हक़ बनता है। इसपर संदीप ने कहा कि तुम बस एन्जॉय करो जान। फिर उन्होंने मुझे टर्न किया और मेरे होठों पर अपने होंठ लगा दिए। उनके हाथ मेरी पीठ और हिप्स पर थे। वो मुझे बेतहाशा चूमे जा रहे थे। बहुत देर तक यह सब करने के बाद उन्होंने मुझे बिस्तर पर बैठने के लिए कहा। मैं बैठ गई तो वो मेरे पैरों के बीच बैठ गए। मेरी जांघों को चूमने लगे। उनपर हाथ फिराने लगे। फिर धीरे धीरे मेरी जाँघों पर किस करना शुरू कर दिया। मैं बिस्तर पर बैठी ना रह सकी लेट गई। मुँह से सिस्कारियां निकलनी शुरू हो गईं। मेरी चूत के ऊपर आकर उन्होंने अपनी गरम साँसे छोड़ने शुरू की। फिर उन्होंने अपने होंठ उसपर रख दिए। मुझे करंट सा लगा। फिर उन्होंने अपनी जीभ को चूत के होठों पर नीचे से ऊपर फिराने लगे। मेरी टांगें बंद होने लगी पर उन्होंने अपने मजबूत हाथों से मेरी टांगों को बंद होने से रोक दिया। मेरे साथ ऐसा कभी नहीं हुआ था। उन्होंने मेरी चूत के होठों को अपनी जीभ से चाटना जारी रखा। करीब ५ मिनट बाद वो रुके और मुझसे पूछा , डॉली तुम्हें कैसा लग रहा है ? मैं समझ नहीं पा रही थी कि क्या कहूँ ? मैंने कहा मुझे बहुत अच्छा लग रहा है पर आप प्लीज ऊपर आ जाइये आपकी जगह वहां नहीं है। उन्होंने कहा कि बस तुम्हें अच्छा लगना चाहिए फिर जगह से फर्क नहीं पड़ता। और वो फिर से पूरे जोश से मेरी चूत पर अपनी जीभ का कमाल दिखाने लगे। थोड़ी और देर तक मेरी चूत चाटने के बाद उन्होंने अपनी जीभ मेरी चूत के अंदर डाल दी और धीरे धीरे उसे अंदर बाहर करने लगे। मेरी तो जैसे सारी इच्छाएँ पूरी हो गई थी। जितना सोचा था उससे कहीं ज्यादा मिल गया। बड़ी देर तक वो अपनी जीभ अंदर बाहर करते रहे जब तक कि मैं रिलैक्स नहीं हो गई। पसीना पसीना हो गई थी मैं। वो मेरे पास आकर लेट गए। जब मुझे थोड़ा होश आया तो मैंने करवट लेकर उनके होठों पर अपने होंठ रख दिए बड़ी देर तक उन्हें किस किया और कहा आपका बहुत बहुत धन्यवाद मुझे ऐसे प्यार करने के लिए। एक लम्बे अर्से से मैं तरस गई थी प्यार पाने के लिए। फिर संदीप बोले कि अब तो मैं तुम्हें कभी अकेला नहीं छोड़ूंगा।
फिर वो कॉलेज की बातें करने लगे। पूछने लगे मेरे दोस्तों के बारे में। जब निशा की बात आई तो उन्होंने पूछा कि निशा के बारे में बताओ। फिर मैं निशा और उसके बॉयफ्रेंड कि कहानी बताने लगी। निशा और उसके बॉयफ्रेंड रोहित का प्यार कैसे कॉलेज में हुआ। निशा शुरू से ही मेरी दोस्त रही है। कॉलेज के पहले महीने में ही रोहित से उसकी दोस्ती बढ़ने लगी। तीन चार महीनो में ही बात किस तक पहुँच गई। मैं हमेशा निशा के साथ ही जाया करती थी। जब उन्हें कुछ करना होता था तो निशा मुझे कुछ इशारा कर देती थी और मैं कुछ ना कुछ बहाना करके वहां से थोड़ी देर को निकल जाती थी। बाद में निशा बताया करती थी कि कैसे रोहित ने उसके साथ यह किया वो किया। संदीप पूछने लगे कि क्या किया ? मैंने कहा धत मुझे शर्म आती है। इसपर संदीप बोले कि मैं उनसे कोई शर्म ना करुँ और सब कुछ खुल कर बताऊँ। मैंने कहा कि पहले तो रोहित सिर्फ किस करता था धीरे धीरे उसने निशा के बूब्स दबाने भी शुरू कर दिए थे। जब निशा ने मुझे यह बताया तो मैंने उसे समझाया भी कि शादी से पहले यह गलत है पर वो नहीं मानी। कहने लगी कि तूने तो सब कुछ करवा रखा है। अब मुझे करने दे। धीरे धीरे उसे आदत हो गई यह सब करने की। फिर एक दिन निशा ने मुझे बताया कि रोहित ने उसे मिलने के लिए अकेले बुलाया है उसके रूम पर जो की किराये पर है। मैंने कहा तो बात अब यहाँ तक आ गई है कि तू उसके साथ सब कुछ करने के लिए तैयार है ? उसने बहुत मिन्नतें की और कहा कि वो अकेली नहीं जाएगी , मुझे भी साथ चलने को कहा। मैंने कहा तुम दोनों के बीच मेरा क्या काम ? तो निशा ने कहा कि वो सेफ फील करती है जब मैं साथ होती हूँ। मैंने कहा कि जब तुम लोगों ने तय कर ही लिया है तो मुझे इन सब में मत घसीटो। मैं वहां क्या करुँगी। निशा ने कहा कि तुम दूसरे कमरे में बैठना। उसके बहुत मनाने पर मैं मान गई। निशा ने रोहित से भी बात कर ली थी और उसे मन लिया था। अब सब रास्ता साफ़ था। फिर एक दिन सोमवार को निशा और मैं कॉलेज ना जाकर रोहित के घर चल पड़े। सारे रास्ते हमें बहुत डर लग रहा था कि कोई देख ना ले। संदीप बड़े ही चाव से यह कहानी सुन रहे थे। रोहित का किराये का घर जिस बिल्डिंग में था उसमे सब किराये पर ही रहते थे। कोई किसी से कुछ पूछता नहीं था। रोहित खुद हमें लेने मेट्रो स्टेशन आया था। घर के अंदर जाते वक़्त किसी ने हमें नहीं देखा। अंदर पहुंचकर मुझे बड़ी शांति मिली। रोहित ने हमारे लिए कोल्ड ड्रिंक पहले से ला रखी थी। हमें कोल्ड ड्रिंक देकर वो आराम से सोफे पर बैठ गया। मैं चारों ओर देखने लगी। रोहित ने कहा चलो तुम्हें घर दिखा दूँ। हम लोग ड्राइंग रूम में बैठे थे। उससे लगी एक बालकनी थी। अंदर एक कमरा और था जिसमे बिस्तर लगा हुआ था। एक अलमारी भी थी। मिरर भी था ड्रेसिंग टेबल के साथ। अंदर वाले कमरे से लग कर एक छोटा सा किचन था और टॉयलेट बाथरूम भी था। सारे घर का चक्कर लगा कर हम वापस ड्राइंग रूम में आ गए। मैं धीरे धीरे कोल्ड ड्रिंक पी रही थी जबकि निशा अपनी कोल्ड ड्रिंक खत्म कर चुकी थी। मुझे बड़ा अजीब लग रहा था कि शुरुआत कैसे होगी। शुरुआत निशा ने ही की। कहा डॉली तू यहीं बैठ, रोहित तुम अपना लैपटॉप डॉली को दे दो। वो इस पर इंटरनेट सर्फ कर लेगी। तब तक हम अंदर बैठते हैं। रोहित थोड़ा शरमा रहा था अंदर जाकर लैपटॉप ले आया और ओपन कर के मुझे दे दिया। निशा अपना बैग लेकर अंदर चली गई। रोहित ने अंदर जाने से पहले मुझसे पूछा कि मैं कम्फ़र्टेबल हूँ ? मैंने कहा तुम बस जल्दी आ जाना। उसके ओके कहा और अंदर वाले कमरे में चला गया जहाँ निशा उसका इंतज़ार कर रही थी। दरवाजा अंदर से बंद होते ही निशा की दी। रोहित मैं कब से तुम्हें मिस कर रही हूँ। फिर अंदर से किस की आवाज़ें आने लगी। मेरा बड़ा मन किया सब देखने का तो मैं दरवाजे के पास गई और चाभी के छेद से अंदर देखने लगी। अंदर की लाइट ओन थी और निशा और रोहित एक दूसरे को पागलों की तरह किस किये जा रहे थे। जब रोहित के हाथ निशा के बूब्स की तरफ बढे तो निशा ने कहा जानू कपडे ख़राब हो जायेंगे। फिर रोहित ने निशा का सूट उतार दिया। निशा ने भी अपने हाथ ऊपर कर लिए जिससे कि रोहित उसे आराम से उतार सके। संदीप मुझे पूछने लगे कि निशा का फिगर क्या है। मैंने बताया कि उसका फिगर 34C-28-36 है। वो कहने लगे अच्छा आगे सुनाओ। मैंने आगे सुनना शुरू किया। निशा को ब्रा में देखकर तो जैसे रोहित पर भूत सवार हो गया। ब्रा के ऊपर से ही वो बूब्स को मसलने लगा। निशा ने अपने हाथ पीछे ले जाकर ब्रा का हुक खोल दिया। फिर रोहित बड़ी देर तक निशा के बूब्स से खेलता रहा उन्हें दबाता रहा और चूसता रहा। फिर उसने सलवार उतारने के लिए कहा। निशा ने कहा कि जानू तुम खुद ही उतार लो। रोहित ने फिर सलवार का नाड़ा खोला और निशा ने अपने हिप्स ऊपर उठाये और रोहित ने सलवार नीचे खींच ली। फिर रोहित ने निशा की चूत वैसे ही चाटी जैसे आपने चाटी थी। संदीप बोल उठे तुम्हें अच्छा लगा ना ? मैंने कहा बहुत अच्छा लगा। जब रोहित ने अपने कपडे उतारे तब मैंने उसका पेनिस देखा। करीब सात इंच लम्बा और अच्छा खास मोटा। निशा ने तो तुरंत उसे अपने हाथों में ले लिया। रोहित ने कहा कि प्लीज इसे प्यार करो ना ? निशा ने पहले तो थोड़ी आनाकानी की फिर इस शर्त पर मान गई कि रोहित पहले इसे धोकर आये। रोहित तुरंत बाथरूम में गया और धोकर वापस आ गया। निशा ने धीरे से उसे अपने होठों से किस किया और फिर मुंह के अंदर ले लिया। संदीप ने इसपर तुरंत पूछा। क्या तुम भी ऐसा करना चाहती हो ?मैंने कहा कि मैंने पहले कभी ऐसा नहीं किया है पर अगर आप कहोगे तो मैं आपके लिए सब कुछ करुँगी। संदीप बोले कि बाद में देखते हैं। तुम आगे बताओ कि क्या हुआ। मैं आगे बताने लगी कि कैसे निशा ने पेनिस चूस चूस कर रोहित को रिलैक्स किया और उसके बाद दोनों बिस्तर पर निढाल होकर लेट गए। अभी सिर्फ दो घंटे ही हुए थे। सुबह के ग्यारह बज रहे थे और हमें पांच बजे वापस निकलना था। काफी समय था निशा और रोहित के पास अपनी प्यास बुझाने का। ऊपर से मैं पहरा देने के लिए थी। अगर निशा का फ़ोन आ जाता तो वो यह कह देती कि मेरे साथ है और अगर मेरा फ़ोन आ जाता तो मैं यह कह सकती थी की मैं निशा के साथ हूँ। थोड़ी देर बाद करीब साढ़े ग्यारह बजे दोनों ने कपडे पहले और रूम के बाहर आ गए। दोनों मुझसे आँखें चुरा रहे थे। रोहित यह कहकर बाहर चला गया कि वो कुछ खाने के लिए लायेगा। जब मैं और निशा अकेली रह गई तो मैंने पूछा बता अंदर क्या क्या हुआ ? उसने कहा डॉली मेरी दोस्त अंदर तो बहुत मज़ा आया। मैंने पूछा कि तूने सेक्स तो नहीं किया ? उसने कहा अभी तो नहीं पर अब लगता है कि कर लेना चाहिए। मैंने कहा तू जो भी कर रही है सोच समझ कर करना। थोड़ी देर में रोहित खाना लेकर आ गया। हम सब ने साथ बैठकर खाना खाया। रोहित ने ही बात शुरू की। मुझसे पूछा कि मैं कम्फ़र्टेबल हूँ या नहीं। मैंने कहा कि अब जो भी है निशा के लिए मैं कर रही हूँ और मैं ठीक हूँ। फिर रोहित ने निशा से कहा कि अगली बार से तुम जब भी आना या तो अपने घर की ड्रेस लेते आना या फिर यही एक ड्रेस छोड़ जाना। निशा ने उसे छेड़ते हुए कहा कि मेरे लिए एक ड्रेस भी नहीं खरीद सकते तुम ? हम सब हँस पड़े। तय हुआ की शाम को जाने से पहले शॉपिंग करेंगे। खाने के बाद हम पिक्चर देखने लगे। निशा ने कहा कि उसे नींद आ रही है। वो और रोहित अंदर वाले कमरे में जाकर लेट गए। करीब साढ़े तीन बजे दोनों बाहर आये और हम शॉपिंग करने चले। मेट्रो स्टेशन के पास ही एक मॉल था जिसमे हमने निशा के लिए कुछ टॉप्स और शॉर्ट्स और स्कर्ट लिए। रोहित मुझसे भी ज़िद करता रहा कि तुम भी ले लो ना पर मैंने नहीं लिए। इसके बाद हम अंडरगार्मेंट्स की शॉप में गए जहाँ रोहित और निशा ज्यादा से ज्यादा सेक्सी ब्रा और पैंटी देखने लगे। मैं साथ ही थी और निशा मुझसे पूछे जा रही थी कि यह कैसी है या यह कैसी रहेगी। काफी देर तक देखने के बाद हमने दो पेअर फाइनल किये। पीछे से रोहित ने कहा कि डॉली तुम भी ले लो ना प्लीज। मैंने उसे छेड़ते हुए कहा निशा ने ले लिए हैं ना तुम्हारा तो काम हो गया। वो मुस्कुरा उठा और सेल्स गर्ल से कहा कि वो मेरे लिए भी पैक कर दे। सेल्स गर्ल ने मुझसे पूछा कि मैडम क्या साइज पैक करुँ ? तभी निशा बीच में बोल पड़ी ब्रा के लिए 36C और पैंटी के लिए 28. रोहित के मुंह से wow निकला। मैंने परेशान होते हुए कहा कि इसमें wow वाली क्या बात है ? तो रोहित ने कहा कि तुम्हारा फिगर तो वाकई बहुत अच्छा है। मैं शरमा गई। रोहित ने पैसे चुकाए और हम शॉपिंग मॉल से बाहर आ गए। निशा ने रोहित को अपना पैकेट देते हुए कहा कि जानू यह तुम ही रख लो जब अगली बार आउंगी तब काम आएंगे। मैं अपने पैकेट अपने घर कैसे ले जाती तो निशा ने मेरे पैकेट भी रोहित को ही थमा दिए। अगली बार बुधवार का मिलने का तय हुआ। रोहित ने हमें मेट्रो स्टेशन पर छोड़ दिया और वापस घर चला गया। रास्ते भर मैं निशा से बातें करती रही कि उसे मेरा पैकेट नहीं देना चाहिए था। रोहित ने खोलकर देख लिया तो ? निशा ने मुस्कुराते हुए कहा अरे यार वो ऐसा कुछ नहीं करेगा।