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हवस ( रिश्तों में गंदगी ) complete

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Guest
हवस ( रिश्तों में गंदगी )

हेलो फ्रेंड्स वैसे तो मैं थ्रिलर स्टॉरीज ही पोस्ट करता हूँ पर जब कभी कोई अच्छी कहानी मिलती है इस सेक्शन में भी पोस्टकर देता हूँ तो फ्रेंड्स इस सेक्शन में नेट से ली गई मस्त कहानी पोस्ट करने जा रहा हूँ होप यू एंजाय इट

सुबह के 6 बजे बंबई के एक नॉर्मल से फैमिली में हलचल थी।

‘अंजुम ओ अंजुम.. कहाँ हो भाई.. जल्दी से कॉफी दे दो.. मुझे देर हो रही है।’

ये हैं अब्दुल रज़ाक़.. उम्र 44 की अच्छी कद-काठी, मगर नॉर्मल से आदमी हैं बड़ी सादगी में रहते हैं। इनके कुछ उसूल हैं, जिसकी वजह से घर के बाकी लोग भी ऐसे ही रहते हैं। इनकी खुद की कपड़ों की एक बड़ी सी शॉप है।

अंजुम- ये लो जी आपकी कॉफी, 2 मिनट क्या देर हुई.. आप तो सारा घर सर पर उठा लेते हो।

ये इनकी शरीके हयात अंजुम हैं, इनकी उम्र 34 साल है, दिखने में सुंदर हैं.. इन्होंने अपने आपको काफ़ी अच्छे से संवार कर रखा हुआ है, जिससे दूसरों के लिए इनकी उम्र का अंदाज़ा लगाना थोड़ा मुश्किल हो जाता है।

अब्दुल- अरे आसामान कैसे ना उठाऊं, तुम तो जानती हो.. मुझे टाइम पर जाने की आदत है।

अंजुम- अच्छा जी.. अब कॉफी पी लो.. नहीं तो कहोगे कि बातों में लगाकर मैंने ही आपको जाने के लिए लेट कर दिया।

अब्दुल- अरे कॉफी तो ठीक है.. मगर मेरी गुडलक कहाँ हैं आज उठी नहीं क्या वो?

शाजिया- मैं आ गई अब्बू जी.. ऐसा कभी हुआ है कि आप बाहर जाओ और मैं आपके सामने ना आऊं!

फ्रेंड्स, ये है शाजिया.. इनकी इकलौती बेटी.. उम्र 18 साल है। इसने अभी हाल ही में 12 वीं पास की है और अब इसका दाखिला कॉलेज में हो गया है।

शाजिया दिखने में एकदम सिंपल सी मगर निहायत ही खूबसूरत है, इसका दूध सा सफ़ेद रंग और बेदाग चेहरा, घने लंबे बाल, एकदम पतले होंठ, फिगर 30-26-30 की एकदम छरहरी है, शाजिया दिखने में कोई स्कूल की बच्ची जैसी लगती है। और हाँ ये बेहद सिंपल कपड़े पहनती है। कोई फैशनेबल कपड़े नहीं पहनती है। जैसा कि मैंने बताया कि इसके अब्बू को ये सब पसंद नहीं है।

अब्दुल का रोज सुबह का यही काम था कि वो शाजिया को देखे बिना घर से बाहर नहीं जाते थे।

अब्दुल- आह.. मेरी शहज़ादी.. तुझे देखे बिना तो मेरा दिन शुरू ही नहीं होता है।

अब्दुल ने शाजिया को प्यार किया और घर से निकल गए।

शाजिया- अम्मी मुझे बहुत भूख लगी है.. जल्दी से नाश्ता दो ना?

अंजुम- बेटी सब तैयार है.. जा रसोई से ले ले, मुझे सफ़ाई करनी है।

शाजिया- नहीं अम्मी आप ही लाकर दो ना प्लीज़ प्लीज़ प्लीज़..

अंजुम- शाजिया तुम्हारा दाखिला अब्बू ने कॉलेज में करवा दिया है.. अब कल से तुम कॉलेज जाओगी तो ये बच्चों वाली हरकतें अब बंद कर दो।

शाजिया- क्यों कर दूँ.. मैं तो आपकी बच्ची ही हूँ ना.. हा हा हा हा..

दोनों अम्मी-बेटी के बीच बड़ा प्यार था तो बस आख़िरकार अंजुम ने ही उसको नाश्ता लाकर दिया।

 
सुबह के 8 बजे बंबई के ही एक अलग घर में क्या चल रहा है उस पर निगाह डालते हैं।

‘राबिया कहाँ हो यार… मैं आ गया।’

यह फवाद है, उम्र 24 साल एकदम फिट इसकी शादी को अभी एक ही साल हुआ है। अब ये इस सेक्स कहानी में कहाँ से आया है.. चलिए देखते हैं।

फवाद की आवाज़ के साथ ही एक 21 साल की लड़की, जिसकी हाईट किसी मॉडल की तरह थी और रंग भी साफ फिगर 34-28-32 का, उसने एक ट्रांसपेरेंट ब्लेक नाईटी पहन रखी थी। कुल मिला कर वो सेक्स डॉल नज़र आ रही थी।

राबिया- ओ जानू मैं कहाँ जाऊंगी.. यहीं तो हूँ आपके सामने!

फवाद- क्या बात है मेरी जान.. आज तो बड़ी कयामत लग रही हो.. तुम्हारा मंसूबा क्या है?

राबिया- मंसूबा क्या होगा.. जब से तुम्हारी नाइट शिफ्ट का चक्कर शुरू हुआ है.. मेरा तो चैन सुकून सब चला गया है।

फवाद- मेरी जान ऐसा मत बोलो, अब कॉल सेंटर की जॉब है.. इसमें तो ऐसा होता रहता है। तुम्हें रात को नहीं तो क्या हुआ.. मैं दिन में तो पूरा मज़ा दे देता हूँ ना.. हा हा हा हा..

राबिया- हाँ बड़े आए मज़ा देने वाले, ऐसे करते हो जैसे मैं कहीं भागी जा रही हूँ.. पहले तो बड़े आराम से प्यार करते थे, उसके बाद चुदाई शुरू करते थे और आजकल तो बस सीधा लंड अन्दर घुसा देते हो.. जैसे मैं कहीं भागी जा रही हूँ।

फवाद- अरे अरे.. मेरी जान को इतनी शिकायत है.. तो चलो आज सारी कमी दूर कर देता हूँ।

इतना कहकर फवाद ने राबिया को गोद में उठा लिया और सामने के कमरे में ले जाकर बिस्तर पर लेटा दिया।

फवाद ने अंडरवियर को छोड़कर सारे कपड़े निकाल कर फेंक दिए और खुद बिस्तर पर राबिया के ऊपर चढ़ गया।

राबिया तो जैसे कामवासना में जल रही थी.. उसने झट से फवाद को किस करना शुरू कर दिया और अपने हाथ उसकी पीठ पर घुमाने लगी। फवाद भी उसका साथ देने लगा। अब वो भी राबिया के चुचों को दबाने में लग गया। वो कभी उसके बालों को सहलाता.. तो कभी उसके निप्पल को खींचता।

कुछ देर दोनों का प्यार चलता रहा। इस दौरान फवाद ने राबिया की नाईटी अलग कर दी थी। उसने चुदास के चलते अन्दर कुछ नहीं पहना था।

राबिया के मम्मे एकदम गोल थे.. उन पर टंके हुए से भूरे निप्पल गजब लग रहे थे। उसकी फुददी भी एकदम चिकनी थी और थोड़ी फूली हुई भी थी।

फवाद- अरे क्या बात है जानेजिगर.. आज तो अन्दर कुछ भी नहीं पहना है.. लगता है तेरी फुददी में बड़ी आग लगी है।

इतना कहकर फवाद एक निप्पल को मुँह में भर के चूसने लगा और एक हाथ से फुददी को दबाने लगा।

राबिया- आह आईईइ.. तुम आग मिटाते ही नहीं.. आह तो क्या करूँ.. उफ़फ्फ़ रात को तुमसे चुदाई करवाए कितने दिन हो गए.. आह.. दिन में तुम बस एक बार फुददी की आग ठंडी करते हो.. ये धधकती आग कैसे मिटेगी मेरे शहंशाह ।

फवाद- डार्लिंग रात भर काम करता हूँ.. अब दिन में ताक़त कहाँ बचती है.. फिर भी तुम्हें चोदता तो हूँ ना!

राबिया- आह आईईइ.. चूसो आह.. मेरी फुददी आह.. उसको भी चूसो ना.. आह वो जल रही है आह..

फवाद अब धीमे-धीमे राबिया के चुचों को जोर से दबाने और चूसने में लग गया था और उसका हाथ भी फुददी को जोर-जोर से रगड़ रहा था।

कुछ देर बाद राबिया ने फवाद को अपने से अलग कर दिया और खुद उस पर सवार हो गई।

फवाद- आह.. आराम से मेरी जान कहीं तुम्हारी नाज़ुक कमर में मोच ना आ जाए।

राबिया पर तो वासना का भूत सवार हो गया था.. उसने एक ही झटके में फवाद का अंडरवियर उतार दिया।

फवाद का 6″ का लंड उसके सामने खड़ा होकर फुददी को सलामी देने लगा।

राबिया ने झट से उसको अपने मुँह में भर लिया और मज़े से लंड चूसने लगी। इसी के साथ-साथ वो फवाद के लंड के चौकीदार उन दो आंडों को भी हाथ से हिला-हिला कर मज़ा लेने लगी।

फवाद- उफ़फ्फ़ जानेजिगर.. तेरी आह यही अदा पर तो में फिदा हूँ आह.. चूस मज़ा आ गया आह..

राबिया मज़े से लंड को चूस रही थी मगर उसकी फुददी की प्यास बढ़ती जा रही थी। इसलिए उसने लंड मुँह से निकाल दिया और खुद फवाद के मुँह की तरफ़ फुददी करके फिर से लंड चूसने लगी।

फवाद समझ गया कि इसको भी फुददी चटवानी है.. तो वो भी फुददी चाटने में शुरू हो गया.. फवाद अपनी जीभ से राबिया की गुलाबी फुददी का रस पीने में जुट गया।

कुछ देर बाद राबिया फिर से नीचे लेट गई और अपने घुटने मोड़ कर फुददी को पूरी तरह खोल कर लंड घुसेड़ने का निमन्त्रण देने लगी।

राबिया- आह फवाद.. अब बस बहुत हो गया.. डाल दो अपना लंड आह..

फवाद तो खुद फुददी की चुदाई की जल्दी में था.. उसने लंड की टोपी फुददी पर टिकाई और जोरदार धक्का मारा। एक ही बार में लंड सरसराता हुआ फुददी की गहराई में ना जाने कहाँ खो गया।

राबिया- अहह सस्स्स्सस्स मज़ा आ गया आह.. चोदो मेरे बालम आह.. अब स्पीड से चोदो आह.. बुझा दो मेरी प्यास आह.. आईईइ..

फवाद भी स्पीड से लंड अन्दर-बाहर करने लगा। राबिया गांड उठा-उठा कर उसका साथ देने लगी। यही कोई 10 मिनट ये चुदाई अपने पूरे उफान पर चलती रही। उसके बाद फवाद के लंड की नसें फूलने लगीं.. और वो चरम पे पहुँच गया।

फवाद- आह.. आह ले मेरी राबिया डार्लिंग आह.. मेरा आह.. लावा तेरी फुददी में आह.. आ रहा है आह..

राबिया- नहीं आह.. आ अभी नहीं उफ़फ्फ़ आह.. उम्म्ह… अहह… हय… याह… चोदो आह.. मेरा अभी आह.. हुआ नहीं उफ़फ्फ़ फास्ट आह फास्ट करो उफ़फ्फ़..

राबिया आगे कुछ बोलती तब तक फवाद के लंड ने रस की धारा फुददी में मारनी शुरू कर दी उसके गर्म-गर्म अहसास से राबिया का फव्वारा भी छूट गया.. वो भी झड़ने लगी।

दो मिनट तक दोनों वैसे ही शांत पड़े रहे.. उसके बाद फवाद एक तरफ़ लेट गया।

 
राबिया- क्या यार फवाद.. इतनी जल्दी पानी निकाल दिया, ठीक से मज़ा तो लेने देते.. तुम्हारी वजह से मुझे भी फुददी को भींच कर जल्दबाज़ी में पानी निकालना पड़ा।

फवाद- अरे तुमने लंड को इतना ज़बरदस्त चूसा कि वो फुददी में टिक ही नहीं पाया मगर तुमने जल्दबाज़ी क्यों की.. तुम आराम से निकालतीं।

राबिया- कैसे निकालती.. तुम्हारा पानी निकलने के साथ ही लंड मुरझा जाता है, उसके बाद आधा घंटा वेट करती क्या?

फवाद- अरे जान.. मैं फुददी चूस कर तेरा पानी निकाल देता ना!

राबिया- नहीं फवाद.. जो मज़ा लंड से पानी निकलवाने में आता है.. वो ऐसे नहीं आता है और वैसे भी दूसरी बार तुम्हारा देर से निकलता है.. मैं तब मज़ा ले लूँगी।

फवाद- ठीक है मेरी जान.. दूसरी बार तेरी जम कर चुदाई करूँगा और आज तो तेरी गांड भी मारूँगा।

राबिया- ओह नहीं फवाद, गांड नहीं.. पहले भी तुमने ट्राइ किया था.. बहुत दर्द होता है यार।

फवाद- अरे ऐसे डरेगी तो कैसे चलेगा.. आज बड़े प्यार से मारूँगा बस तू हां कर दे।

राबिया- उह फवाद तुम कितने अच्छे हो काश पहले ही ऐसे प्यार से मेरी गांड मार लेते.. तो हम दोनों को ही डबल चुदाई का कितना मज़ा आता।

फवाद- तुम तो जानती हो.. मेरी जॉब ही ऐसी है.. नहीं तो तेरी ये इच्छा भी पूरी कर देता। अच्छा अभी मुझे थोड़ा आराम करने दो उसके बाद दोबारा तेरी चुदाई करनी है।

राबिया- ठीक है मेरे प्यारे बालम.. मैं कॉफी बना के लाती हूँ.. तब तक तुम आराम कर लो।

फवाद- अरे नहीं नहीं.. अभी कॉफी क्यों.. मैं थोड़ा सुस्ता लूँ, उसके बाद जब उठूँ तब कॉफी बना देना।

राबिया- इसका मतलब तुम सो रहे हो क्या फवाद.. कभी तो अपना वादा पूरा किया करो यार?

फवाद- अरे करूँगा ना दोपहर को जब उठूँगा तो दिमाग़ और लंड तरोताजा होगा.. बस उस टाइम तेरी जमकर चुदाई करूँगा ना।

राबिया ने फवाद को मनाने की बहुत कोशिश की मगर वो सारी रात का जगा हुआ कहाँ मानने वाला था, उसने चादर खींची और सो गया।

राबिया का मूड तो एकदम खराब हो चुका था, वो वहाँ से उठकर दूसरे कमरे में चली गई और रोने लगी।

फ्रेंड्स, यहाँ तो गड़बड़ है.. चलो कहीं और देखते हैं।

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कॉलेज की कैंटीन में लड़के और लड़कियां बैठे नाश्ता कर रहे थे.. उधर एक ग्रुप सबसे अलग ही बैठा हुआ है.. जो हमारी कहानी के किरदार हैं।

तो चलो आपको उनसे मिलवा देता हूँ।

शाहिद .. अच्छी कद काठी का बॉडी बिल्डर टाइप का लड़का और इस ग्रुप का मेन लीडर भी यही है। इसकी बाकी की खूबियां बाद में बताता हूँ।

दूसरा आज़म चौधरी , आज़म की उम्र 25 साल, ये भी शाहिद की तरह जिम वगैरह जाता है.. तो इसकी बॉडी भी अच्छी बनी हुई है।

तीसरा सलमान उम्र 23 ये ठीक-ठाक सा ही है..

चौथा फैजान उम्र 24 साल दुबला-पतला सा है।

पाँचवां अमन ख़ान, इसकी उम्र 22 साल है। ये भी जिम वाला ही है और सबसे हैण्डसम भी है।

इनके साथ रज़िया , उम्र 21 साल छोटे-छोटे बाल, एकदम वाइट.. दिखने में भी मस्त फिगर 34-30-32 की है। चलो इनका परिचय तो हो गया। अब इनकी बातें भी सुन लेते हैं।

सलमान- यार कॉलेज शुरू हुए 5 दिन हो गए, कोई ढंग का माल अभी तक नहीं आया साला इस साल तो लगता है रेगिंग का मज़ा ही नहीं आएगा।

फैजान- हाँ यार इस बार तो कुछ मज़ा ही नहीं आ रहा।

शाहिद- अबे चुप साले चूतिये, कल तो उस लड़की के बड़े मज़े ले रहा था और आज कहता है मज़ा नहीं आया।

रज़िया- हाँ शाहिद साला हरामी, उसका माप लेने के बहाने उसके मम्मे दबा रहा था.. उम्म्ह… अहह… हय… याह… हा हा हा हा।

आज़म- अरे इसको तो मम्मे देखते ही छूने का मन हो जाता है.. ये साला बड़ा ठरकी है।

अमन- क्या रे रज़िया तू लड़की होकर लड़कियों की खिंचाई करती है.. वो भी गंदे तरीके से, तुझे शर्म नहीं आती क्या?

रज़िया- ओ शरीफजादे.. मैं फर्स्ट ईयर में आई थी.. पता है सालों ने क्या करवाया था मुझसे, उससे गंदा तो मैंने कुछ किया ही नहीं है।

अमन- अच्छा अच्छा ज़्यादा गुस्सा ना हो.. तेरे से कौन जीत सकता है।

सलमान- अरे अरे वो देखो नया मुर्गा आ रहा है, चलो सब मिलकर साले की लेते हैं।

फ्रेंड्स, इनकी बातों से आपको पता चल ही गया होगा कि ये कॉलेज के बिगड़े हुए सीनियर हैं

रज़िया जो है वो शाहिद की प्रेमिका है और बाकी सब ऐसे ही हैं, मौका देख कर चौका मार देते हैं।

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दूसरे दिन शाजिया जल्दी उठ गई थी, आज कॉलेज में उसका पहला दिन था, उसके अब्बू उसको छोड़ने आए थे।

आज शाजिया ने लाइट ब्लेक सलवार कमीज़ पहना था। कंधे पर दुपट्टा बांधे हुए बाल और कोई मेकअप भी नहीं, वो इस लिबास में बड़ी ही मासूम और खूबसूरत लग रही थी।

फैजान- शाहिद वो देखो एकदम नया माल आ रहा है मगर साथ में उसका अब्बू लगता है शायद।

शाहिद- अबे लगता क्या साले उसका अब्बू ही है.. अभी वापस चला जाएगा साला, इसके साथ थोड़े ही अन्दर तक आएगा।

वो सब शाजिया को आता हुआ देख रहे थे, बस उसके अब्बू उसके सर पे हाथ रख कर वापस चले गए।

जैसे ही शाजिया उनके पास से गुज़री तो आज़म ने उसको आवाज़ देकर अपने पास बुला लिया और वो भी चुपचाप उनके पास आ गई।

सलमान- तुझमें थोड़ी भी अकल नहीं क्या.. ये कॉलेज है यहाँ बच्चे नहीं आ सकते, चल वापस जा!

सलमान की बात सुनकर सब हंसने लगे।

शाजिया- ज्ज्ज..जी वो मैं फर्स्ट ईयर आर्ट्स में हूँ.. आज मेरा यहाँ पहला दिन है।

फैजान- ओये होये.. क्या बात है तू इत्ती सी तो है और कॉलेज भी आ गई, वैसे तेरी उम्र क्या है?

रज़िया- अबे चुप साले.. लड़की से उसकी उम्र नहीं पूछते।

शाहिद- तू अपना लॉजिक अपने पास रख.. उम्र नहीं पूछूँगा तो पता कैसे लगेगा कि इसकी रेगिंग किस तरह करनी है।

रज़िया- हाँ ये भी सही है, चल बेबी, जल्दी से अपने बारे में बता।

शाजिया- जी मेरा नाम शाजिया है मेरी उम्र 19 साल है और मेरे अब्बू का नाम…

सलमान- अबे चुप तेरे पूरे खानदान का नाम नहीं जानना हमें.. सिर्फ़ अपने बारे में बता नाम और उम्र हो गई.. चल अब अपना फिगर बता।

उनकी बातों से शाजिया घबरा सी गई उसके पैर काँपने लगे थे। उसने डरते हुए कहा।

शाजिया- ज्ज्जजी वो मुझे नहीं पता।

अमन- ले भाई फैजान तेरे मज़े हो गए.. कल वाली की तरह इसको भी नहीं पता, अब तू ही नाप के बता दे.. हा हा हहा हा हा..

सबके सब ठहाका लगा कर हंसने लग गए और शाजिया चुपचाप बेसहारा खड़ी उनको देखती रही।

फैजान खड़ा हुआ और शाजिया के चुचों की तरफ़ हाथ बढ़ाया तो शाहिद ने उसको रोक दिया क्योंकि शाजिया की आँखों में आँसू आने शुरू हो गए थे, जिसे शाहिद ने देख लिया था।

रज़िया- क्या हुआ शाहिद?

शाहिद- अरे देखो तुम सबने बेचारी बच्ची को डरा दिया.. कैसे रोने लगी है।

आज़म- अरे इसमें रोने की क्या बात है रेगिंग तो सीनियर का अधिकार होता है और हमने तो तुमसे माप पूछा ही था.. अब तूने नहीं बताया तो ये ले रहा है.. सिंपल..!

शाजिया- सर प्लीज़ मुझे जाने दीजिए.. मुझे सच में नहीं पता।

रज़िया- क्यों तू अंडरगार्मेंट्स नहीं पहनती क्या.. जो तुझे अपना माप नहीं पता।

उनकी गंदी बातों से शाजिया के पसीने आने शुरू हो गए.. वो बेचारी सीधी-साधी कभी ऐसी बातों के करीब भी नहीं गई और आज अचानक उसके साथ ये सब हो रहा था।

शाजिया- व्ववो.. जी ये सब अम्मी लाकर दे देती हैं तो नहीं पता।

आज़म- आज के जमाने में ये अम्मी बोल रही है.. हा हा हा अरे मॉम बोलो.. मम्मी बोलो.. ये अम्मी कुछ ज़्यादा ही ओल्ड नहीं लगता।

शाहिद- चुप करो सबके सब, एक के बाद एक बकवास किए जा रहे हो।

शाहिद थोड़ा गुस्से में आकर बोला तो सब सहम गए और शाजिया का तो हाल से बेहाल हो गया था।

शाहिद- देखो शाजिया, तुम फर्स्ट ईयर हो और रेगिंग का तो तुम्हें पता ही होगा, ये हमारा अधिकार है। अब ये तुम पर डिपेंड है कि चुपचाप हमारी बात मानती हो और पूरा साल आराम से पढ़ाई करोगी या हमें इनकार कर दो किसी से शिकायत कर दो उसके बाद ये साल 365 दिन का नहीं 1000 दिन का बन जाएगा.. इतनी तकलीफें उठानी पड़ेंगी।

शाजिया- जी जी.. मुझे पता है मैं रेडी हूँ.. प्लीज़ आप नाराज़ मत हो मगर मुझे कोई आसान सा टास्क दे दो। ये सब नहीं प्लीज़.. मुझे सच में कुछ नहीं पता।

शाजिया की बात सुनकर सलमान कुछ बोलना चाहता था मगर शाहिद ने आँख के इशारे से एक बार फिर सबको चुप रहने को कहा।

शाहिद- देखो आज तक हमने जो कहा, सबने वो किया मगर तुम रियली बहुत भोली हो.. तो चलो मैं तुम्हें बहुत से टास्क बताता हूँ, तुम खुद चाय्स करो इनमें से कौन सा तुम्हारे लिए आसान होगा।

शाजिया- जी आप बताओ, मैं कर लूँगी।

शाहिद- क्लास में जो भी सर पहले आएं, उसको थप्पड़ मारना है या वो सामने मोटू दिख रहा है उसके पेट पर एक जोर का मुक्का मार दो, ये भी नहीं तो वो कोने में जो खड़ा है.. उसको किस कर दो।

ऐसे ही बहुत से टास्क शाहिद ने बताए, जिनको सुनकर शाजिया दोबारा मायूस हो गई क्योंकि इनमें से एक भी करने की हिम्मत उसमें नहीं थी।

शाजिया- सॉरी जी आप मुझे मार लो मगर मुझसे ये सब नहीं हो पाएगा, मैं ऐसी लड़की नहीं हूँ।

रज़िया- आह.. ज़्यादा भोलेपन का नाटक मत कर.. क्लास का टाइम हो रहा है जल्दी बोल.. नहीं तो मैं बताऊं?

शाहिद- रिलॅक्स रज़िया.. मैं बात कर रहा हूँ ना इससे.. सुनो शाजिया अगर तुम ऐसी लड़की नहीं हो तो ऐसी बनो, ये सब टास्क जाए भाड़ में.. एक लास्ट टास्क.. उसमें अगर ना हुई तो अंजाम बुरा होगा। तुम्हें कोई टास्क नहीं करना होगा बस हमारा ग्रुप जाय्न कर लो और धीमे-धीमे फास्ट बनो.. ऐसी गंवार मत बनी रहो। अगर एक महीने में ये सब कह दें कि तुम बदल गई हो.. थोड़ी सी भी मॉडर्न हो गई हो तो उस दिन से तुम आज़ाद.. उसके बाद चाहे तो ग्रुप में रहो चाहे मत रहो.. बोलो क्या कहती हो?

शाजिया को ये बात अच्छी लगी.. उसने बिना सोचे ‘हाँ’ कह दी।

शाहिद- ये हुई ना बात.. चलो अब सब से हाथ मिलाओ और अपनी क्लास की तरफ़ जाओ। अब तो हमारा रोज मिलना होता ही रहेगा।

शाजिया के चेहरे पे हल्की सी मुस्कान आ गई.. वो बारी-बारी सबसे हाथ मिलाने लगी.. उसके बाद चली गई।

रज़िया- शाहिद ये क्या नया फंडा है.. आज तक ऐसा नहीं हुआ कि हम किसी को बिना रेगिंग के जाने दें और दूसरी बात उसको ग्रुप में शामिल भी कर लिया, ये बात कुछ समझ नहीं आ रही?

शाहिद- मेरी जान इसी लिए तो आई एम द ग्रेट शाहिद.. अभी जो कहूँ.. सब के सब वो करो, बाकी बाद में सबको ये फंडा भी समझा दूँगा।

आज़म- शाहिद भाई, कहीं साली तेरे पे दिल तो नहीं आ गया ना?

रज़िया- अगर ऐसा हुआ तो जान से मार दूँगी उस कुतिया को.. शाहिद सिर्फ़ मेरा है और मेरा ही रहेगा हा हा हा हा..

रज़िया के साथ-साथ सब हंसने लगे।

अमन- रज़िया ये क्या फिल्मी डायलॉग मार रही थी तू?

रज़िया- अरे मज़ाक यार.. हाँ मानती हूँ मैं शाहिद को पसंद करती हूँ मगर उसकी वजह क्या है ये तो सब को पता ही है। अब ये उसको चोद कर छोड़ दे या प्यार करे.. आई डोंट केयर।

फैजान- ही ही रज़िया.. ऐसी बात मत कर यार, मेरी तो पैन्ट में हलचल शुरू हो जाती है।

रज़िया- अबे चल साले चूतिये.. मूंगफली जितना तो लंड है तेरा.. उसमें क्या हलचल होगी।

अमन- रज़िया तू तो साली पक्की रांड़ है. जब देखो फुददी और लंड की बातें लेकर बैठ जाती है।

रज़िया- अबे चुप साले बहनचोद मुझे ज़्यादा ज्ञान मत दे.. जब तू चुदाई करता है मेरी तब तो बड़ा प्यार जताता है साला अब मुझे रांड़ बोल रहा है!

आज़म- अरे यार आपस में झगड़ा मत करो, वैसे रज़िया चुदाई के टाइम तो तू खुद कहती है मुझे गालियाँ दो.. रांड़ कहो और अभी चिढ़ रही हो।

रज़िया- अबे वो टाइम बात कुछ और होती है और अभी कोई सुन लेगा तो क्या कहेगा.. समझा!

सलमान- यार, इस सबको गोली मारो और रज़िया तुमने जो ग्रुप सेक्स का वादा किया था.. उसका क्या हुआ?

रज़िया- हरामियो, सबके लंड लेकर मैंने देख लिया है। अब एक साथ सब करोगे तो मेरी हालत पतली हो जाएगी और वैसे भी इस पिद्दी को छोड़ के तुम चारों के लंड बड़े पॉवर वाले हैं, ना बाबा मुझे अपनी फुददी फड़वानी है क्या?

फैजान- फुददी तो तेरी तभी फट गई थी जब शाहिद ने तुझे पहली बार चोदा था अब कैसा डर..? मान जा ना मज़ा आएगा यार!

रज़िया- हरामियो बहुत बड़े फुददीखोर हो सब के सब.. मैंने कितनी लड़कियों की सील तुम सब से तुड़वाई है, ये सब भूल गए क्या जो अब मेरे पीछे पड़े हो?

शाहिद- अरे अब सबका इतना मन है तो मान जा.. एक-एक करके चुदवाए या एक साथ.. क्या फ़र्क पड़ता है?

रज़िया- अच्छा बाबा, ठीक है.. मान गई बस मगर कोई अच्छी सी जगह का इंतजाम कर लो.. साथ में फुल बियर का भी इंतजाम हो तभी मज़ा आएगा।

शाहिद ने ‘हाँ’ कह दी, तो सबके सब खुश हो गए।

फ्रेंड्स, टेंशन मत लो, ये रज़िया सच में रांड़ टाइप की है, ये शाहिद की गर्लफ्रेंड जरूर है.. मगर ना जाने आज तक कितने लंड ले चुकी है, इसलिए इनको जाने दो.. आगे की कहानी देखो।

 
रज़िया- यार शाहिद प्लीज़.. अब तो बता दे तेरा ये शाजिया के साथ क्या करने का मंसूबा है?

शाहिद- यार मैंने आज तक इतनी सीधी-साधी लड़की नहीं देखी वो भी यहाँ बंबई में, इसकी सादगी और हुस्न की मिलावट को मैंने गौर से देखा है, मेरा तो इसको बस देखते रहने का मन किया।

सलमान- क्या बात है प्यार-व्यार हो गया क्या तुझे हाँ..?

आज़म- अरे काहे का प्यार.. सीधे अल्फ़ाज़ में बोल ना उसको चोदना चाहता है।

शाहिद- अबे चुप सालों.. ऐसी कमसिन कली को चोदना कौन नहीं चाहेगा? मगर ये साथ दे तो ज़्यादा मज़ा आएगा.. मगर इसको देख कर तुम लोगों को क्या लगता है कि ये साथ दे पाएगी?

रज़िया- अरे क्यों नहीं देगी? जब 4 पैग अन्दर जाएंगे.. साली रांड़ बन जाएगी.. उसके बाद फुददी चुदाई का पूरा मज़ा देगी।

शाहिद- नहीं.. यही तो मैं नहीं चाहता कि ये किसी नशे का शिकार होकर मज़ा दे, तुम ज़रा सोचो ऐसी भोली लड़की.. जिसको अपना साइज़ तक पता ना हो, अगर वो अपने मन से खुलकर सेक्स करें तो बड़ी-बड़ी रंडियों को पीछे छोड़ देगी.. क्योंकि इतने सालों जो शराफत का परदा ओढ़ रखा था, वो हट जाएगा और उसके अन्दर की रांड़ बाहर आ जाएगी।

रज़िया- इसका मतलब तुमने कुछ सोच लिया है.. तभी उसको ग्रुप में शामिल किया है।

शाहिद ने ‘हाँ’ में गर्दन हिलाई और अपना प्लान उन सबको बताया, जिसे सुनकर सबके चेहरे पे ख़ुशी आ गई।

फैजान- यार उसके मम्मे बड़े प्यारे हैं… क्या समोसे से नुकीले तने हैं.. बस सबसे पहले में उनकी नोकों को अपने होंठों के बीच दबाना चाहूँगा।

अमन- अबे चुप.. सारा दिन एक ही बात.. चलो अन्दर वो हरामी जब्बार सर की क्लास है आज।

अमन की बात सुनकर सब वहाँ से चले गए..

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उधर दोपहर तक फवाद सुकून की नींद सोता रहा, तब तक राबिया ने भी अपने आपको संभाल लिया था और खाना बना कर फ्री हो गई थी।

राबिया ने फवाद को उठाया और खुद टीवी देखने बैठ गई।

तकरीबन आधा घंटा बाद फवाद फ्रेश होकर आया और राबिया को पीछे से बांहों में जकड़ लिया।

राबिया- ये क्या है फवाद.. जब करना होता है तुम करते नहीं, चलो खाना खा लो, नहीं तो ठंडा हो जाएगा।

फवाद- अरे ऐसे कैसे.. मेरी बीवी तो इतनी गर्म है और मुझे खाने के लिए बोल रही है। मेरी जान अभी खाने के बाद कोई दूसरा काम नहीं.. बस आज तेरी सारी शिकायत दूर कर दूँगा.. इतना चोदूंगा.. इतना चोदूंगा कि दो दिन तक तुम खुद ना ना कहोगी।

राबिया- रियली तुम ऐसा करोगे..! तो फिर जल्दी से खाना खा लो ना।

राबिया बेचारी सीधी-साधी.. फवाद की बात सुनकर पिघल गई, उसका गुस्सा न जाने कहाँ का कहाँ चला गया.. उसके बाद दोनों ने अच्छी तरह से लंच किया और टीवी के सामने बैठे एक-दूसरे को देख कर मुस्कुराने लगे।

फवाद- क्यों जानेजिगर, अब क्या मंसूबा है.. खाना तो हो गया अब अपनी रसीली फुददी का रस भी पिला दे।

राबिया- आ जाओ मेरे बालम.. किसने रोका है मुझसे भी अब इन्तजार नहीं होता।

इतना कहकर राबिया कमरे में गांड मटकाती हुई चली गई। उसके पीछे-पीछे फवाद भी अन्दर आ गया और उसको बिस्तर पर लेटा कर उसके जिस्म को दबोचने लग गया।

राबिया भी वासना से भरी हुई थी, वो भी पागलों की तरह फवाद को किस करने लगी।

करीब 5 मिनट तक दोनों एक-दूसरे को चूमते-चाटते रहे, इस दौरान फवाद ने राबिया को नंगी कर दिया था और उसके निप्पल चूस रहा था।

राबिया- आह.. आ अइ बालम आह.. अब बस भी करो आह.. पहले मेरी फुददी को शांत करो आह.. उसके बाद जितना मर्ज़ी मज़े ले लेना।

फवाद कुछ बोलता या करता, तभी उसके फ़ोन की रिंग कमरे में गूंजने लग गई.. उसका ध्यान फ़ोन की तरफ़ गया तो राबिया ने उसको मना किया।

फवाद- अरे एक मिनट रूको तो शायद बॉस का फ़ोन हो।

राबिया- आह.. प्लीज़ फवाद आह.. मत उठाओ उफ़ मेरी फुददी जल रही है आह..

फवाद ने राबिया की एक नहीं सुनी और फ़ोन उठा लिया और बातें करता हुआ थोड़ा टेंशन में आ गया।

कुछ देर फवाद ने फ़ोन पर बात की उसके बाद राबिया की तरफ़ देखने लगा।

राबिया- क्या हुआ फवाद सब ठीक तो है ना.. तुम इतने टेंशन में क्यों आ गए हो बताओ ना प्लीज़?

फवाद- गाँव से फ़ोन था.. दादा जी नहीं रहे.. हमें आज रात ही गाँव जाना होगा।

यह बात सुनकर राबिया की तो हालत पतली हो गई, कहाँ तो उस पर सेक्स का खुमार चढ़ा हुआ था और कहाँ ये बुरी खबर सुनने को मिली।

राबिया खड़ी हुई और फवाद के पास आकर उसके चेहरे को देखने लगी।

फवाद- राबिया प्लीज़ अब ये मत कहना की मेरी फुददी को शांत करो.. मेरा ये सब करने का अब बिल्कुल मूड नहीं है और मुझे अभी बॉस के घर जाना होगा, कुछ दिनों की छुट्टी लेनी होगी।

राबिया- फवाद तुम ये कैसी बातें कर रहे हो.. ऐसी बात सुनकर मैं ये सब कहूँगी क्या.. हाँ! तुमने मुझे क्या समझ रखा है?

फवाद- देखो राबिया मेरा दिमाग़ मत खराब करो.. वैसे भी दिन पे दिन तुम्हारी चुदाई की भूख बढ़ती जा रही है.. एक रांड़ की तरह तुम हरकतें कर रही हो।

फवाद ने गुस्से में जो कहा उसे सुनकर राबिया का पारा सर पर चढ़ गया। एक तो वैसे ही सेक्स उसके दिमाग़ में चढ़ा हुआ था.. ऊपर से ये बातें उसको बहुत बुरी लगीं। वो फवाद से बुरी तरह झगड़ने लग गई और फवाद भी गुस्से में था, तो उसने भी ना जाने क्या से क्या बोल दिया। उसके बाद कपड़े पहने और घर से बाहर निकल गया।

राबिया वहीं बैठी देर तक रोती रही।

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फ्रेंड्स, शाजिया अब उनके ग्रुप में शामिल हो गई थी। अब रोज उनके साथ उठना बैठना, बातें करना और कभी-कभी नए स्टूडेंट की रेगिंग करना, ये सब उनके बीच चलने लगा और ऐसे ही कुछ दिन निकल गए।

एक दिन कॉलेज की कैंटीन में शाजिया उन सबके साथ बैठी हुई थी।

सलमान- यार रज़िया इतने दिन हो गए… मगर ये शाजिया हमारे बीच घुल नहीं पा रही है, मैंने इसको मासूम लड़की समझ कर मौका दिया था इसकी रेगिंग भी नहीं की थी.. मगर ये है कि हमारे साथ ठीक से पेश आती ही नहीं, अब तुम ही बताओ कि इसका क्या करें?

आज़म- करना क्या है.. जितना मौका इसको देना था, हमने दे दिया। अब बस इसकी हार्ड रेगिंग करनी होगी, ये हमारे ग्रुप के लायक नहीं है।

शाजिया इस हमले के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं थी। उसकी समझ में ही नहीं आया कि ये अचानक क्या हो गया।

शाजिया- ये आप क्या बोल रहे हो.. मैंने क्या किया? प्लीज़ आप मुझे ऐसे डराओ मत।

शाहिद- शाजिया ये तुम्हें डरा नहीं रहे.. सही बोल रहे हैं तुमने वादा किया था तुम हम जैसी बिंदास बन जाओगी, मगर अभी तक तुम्हारे अन्दर एक भी बदलाव नहीं आया।

शाजिया- शाहिद जी, मैं क्या करूँ? मुझे कुछ समझ ही नहीं आ रहा.. कैसे मैं कुछ करूँ.. आप ही प्लीज़ कुछ बताओ मैं क्या करूँ?

शाहिद- एक तरीका है.. मैं तुम्हें जो करने को कहूँ, वो चुपचाप बिना सवाल के करती जाना और हाँ अगर ‘ना’ कही.. तो उसी टाइम तुम हमारे ग्रुप से बाहर हो जाओगी। उसके बाद ये सब मिलकर क्या करेंगे.. मुझे नहीं पता!

शाजिया- जी शाहिद जी, जैसा आप कहोगे, मैं करने को तैयार हूँ, प्लीज़ आप गुस्सा मत हो बस!

शाहिद- आज मैं रज़िया को सब कुछ एक बुक में लिख कर दे दूँगा.. वो तुम्हें रोज एक टास्क देगी, तुमको उसे पूरा करना होगा और जिस दिन तुम सारे टास्क पूरे कर दोगी, समझो तुम हमारी पक्की वाली फ्रेंड बन गई हो।

शाजिया ने भी मुस्कुरा के शाहिद की बात मान ली और ‘अभी के लिए कोई टास्क दो’ ऐसा कहकर सबको चौंका दिया।

शाहिद- वाउ ये हुई ना बात.. तो चलो अभी के लिए तुम्हारा टास्क ये है कि यहाँ से वो सामने तक तुम किसी मॉडल की तरह कैटवॉक करो।

आज़म- यार, ये क्या टास्क हुआ?

आज़म आगे बोलता शाहिद ने गुस्से से उसको देखा और वो चुप हो गया।

रज़िया- क्यों शाजिया कर पाओगी ये?

शाजिया ने बिना कुछ बोले शाहिद की तरफ़ देखा और खड़ी होकर बड़ी अदा के साथ टास्क पूरा करने चल पड़ी, मगर वो कहते है ना शराफत का नकाब इतनी आसानी से नहीं उतारा जा सकता, तो शाजिया शुरू तो बड़े जोश में हुई मगर जब सबकी नज़रें उस पर गईं तो वो शर्म से पानी-पानी हो गई और स्पीड में टास्क पूरा किया, सबके सब उस पर हंसने लगे।

शाजिया- सॉरी मैं घबरा गई थी मगर मैंने किया ना.. और अबकी बार अच्छे से करूँगी।

शाहिद- गुड गर्ल.. बस आज से तुम्हारी ट्रेनिंग शुरू हो गई है, अब तुम जाओ, तुम्हारी क्लास का टाइम हो गया है।

शाजिया ख़ुशी-ख़ुशी वहाँ से चली गई उसके जाने के बाद सबने कहा कि कोई हार्ड काम करवाते उससे.. ये क्या टुच्चा सा टास्क दे दिया?

शाहिद- सालो, तुम सबको अक़ल है कि नहीं.. मुझे उसे बड़े प्यार से रांड़ बनाना है.. ऐसे जल्दबाज़ी में काम बिगड़ सकता है। रज़िया तुम सुनो शाम को मैं तुम्हें एक बुक दूँगा, उसके हिसाब से ही तुम शाजिया को टास्क दोगी, अपनी तरफ़ से कोई एक्सट्रा काम ना करना.. वरना मेरा गुस्सा तो तुम्हें पता ही है।

रज़िया- ठीक है शाहिद.. मगर मेरी एक बात समझ नहीं आ रही वो मेरे सामने तो शायद वो सब कर दे जो तुमने बताया है मगर तुम्हारे सामने कैसे करेगी?

शाहिद- तेरी समझ मेरी समझ से बहुत कम है.. शाम को बुक में देख लेना सब समझ आ जाएगा।

सलमान- यार जब वो साली गांड को मटका कर चल रही थी.. बड़ा मज़ा आ रहा था। मेरा मन तो कर रहा था कि साली की गांड में लंड घुसा दूँ, मगर ये हमारे शाहिद साहेब जो हैं, वो प्यार से इसको नंगी करेंगे। अब ना जाने वो दिन कब आएगा?

अमन- अबे फुददी के हब्शी.. क्यों उसके पीछे पड़ा है.. अभी कली है थोड़ा खिलने दो, उसके बाद उसकी महक सबको मिल जाएगी.. हा हा हा हा हा..

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फवाद जब वापस आया तो राबिया ने अपना मूड बदल लिया था और उसको सॉरी भी कहा। बस फिर क्या था दोनों ने जल्दी से पैकिंग की और गाँव के लिए निकल गए।

फ्रेंड्स, मैं आपको बता दूँ फवाद के घर में उसके अम्मी- अब्बू के अलावा एक चाचा और चाची हैं, जिनकी कोई औलाद नहीं है और फवाद भी इकलौता ही है.. एक दादा थे जो चल बसे।

शाम को गाँव में जब ये लोग पहुँचे, वहाँ दुख का माहौल था.. सभी रिश्तेदार जो आए हुए थे, वो रोने में लगे हुए थे। देर रात तक सारी क्रिया समाप्त हुई, उसके बाद सबके सोने का बंदोबस्त किया गया। राबिया और फवाद को जगह नहीं मिली तो फवाद के चाचा ने फवाद को कहा कि तुम छत पर चले जाओ और भी लोग वहाँ है और बहू वहाँ बच्चों वाले कमरे में सो जाएगी।

फ़िरोज़ फवाद के पिता उम्र 54 साल, ठीक-ठाक सी कदकाठी है। इनकी वाइफ सोफ़िया उम्र 46 साल, ये भी नॉर्मल हाउस वाइफ हैं। उसके बाद जुम्मन ख़ान ये फवाद के चाचा हैं, इनकी उम्र लगभग 50 साल के आस-पास है, हट्टे-कट्टे शरीर वाले हैं। इनकी पत्नी गायत्री.. उम्र 42 साल की है, ये भी घरेलू टाइप की महिला हैं।

जुम्मन - बहू, वो सामने कमरा है, वहाँ चली जाओ… सारे बच्चे वहीं हैं, तुम भी उनके पास कहीं लेट जाना.. बस एक दो दिन की तकलीफ़ है, फिर तो ज़्यादातर मेहमान चले ही जाएंगे।

राबिया- वो चाचा जी.. मैं जब से आई हूँ इसी साड़ी में हूँ.. पसीने के कारण ये कड़क हो गई है.. मुझे कपड़े बदलने हैं।

जुम्मन - अरे मुझे सब चाचा बुलाते है तू भी चाचा ही बोल.. और कपड़े बदलने है तो वो बाहर देख सामने गुसलखाना है, वहाँ बदल ले।

फ्रेंड्स, गाँव का माहौल तो आपको पता ही है वहाँ पक्के बाथरूम कम ही मिलते हैं. तो बाहर आँगन में एक छोटा सा बाथरूम बना था, जिसमें साइड में पत्ते लगे थे और उनमें बहुत से छेद थे, यानि बाहर वाला अन्दर का नजारा कहीं से भी आराम से देख सकता था।

राबिया- चाचा जी, काकी कहाँ हैं, वो शाम से नज़र नहीं आ रही हैं।

जुम्मन - अरे यहाँ रिवाज है ससुर के मरने पर घर की बहू को रात दूसरे घर में बितानी होती है.. वो पास के घर में सोई हैं, कल आ जाएगी।

राबिया- अच्छा ये बात है.. तब तो अम्मी जी भी साथ होंगी?

हरी- हाँ वो भी वहीं हैं . अब तू ज़्यादा बातें ना कर.. सवेरे जल्दी उठना है.. जल्दी कपड़े बदल और सो जा।

राबिया- बाहर बहुत अंधेरा है चाचा, मुझे डर लगता है.. आप थोड़ा साथ चलो ना!

राबिया का डरा हुआ चेहरा देख कर चाचा को हँसी आ गई, वो उसके साथ आँगन में आ गए। उसके बाद राबिया बाथरूम में चली गई।

राबिया ने पहले साड़ी को उतार के साइड में रख दिया उसके बाद ब्लाउज और पेटीकोट भी निकाल दिया। अब वो सिर्फ़ नीले रंग की ब्रा-पैंटी में थी, उसका कसा हुआ जिस्म देख कर किसी की भी नियत बिगड़ जाए और राबिया को ऐसा लगा भी कि शायद बाहर से उसे कोई देख रहा है। उसने जल्दी से दूसरी साड़ी पहनी और बाहर आ गई।

चाचा पहले जहाँ खड़े थे.. अभी भी वहीं थे। राबिया ने सोचा कि चाचा के अलावा तो यहाँ कोई है भी नहीं.. शायद उसका भ्रम रहा होगा.. ये सोच कर वो अन्दर जाकर सो गई।

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फ्रेंड्स, रज़िया को शाम को शाहिद ने एक बुक दे दी थी, उसके हिसाब से रज़िया को आगे का खेल खेलना था, जिसकी शुरूआत उसने कर दी।

वो सीधी रात को शाजिया के घर चली गई।

रज़िया का घर शाजिया के घर से बस कुछ ही दूरी पे था।

रज़िया- सलाम खाला.. मुझे शाजिया से थोड़ा काम है.. वो कहाँ है अभी?

अंजुम- सलाम . अरे आओ आओ बेटी.. वो अपने कमरे में है, जाओ मिल लो तब तक मैं कुछ खाने को लाती हूँ।

रज़िया- अरे नहीं खाला.. मैं अभी खाना खा कर ही आई हूँ, प्लीज़ आप कोई तकलीफ़ ना करें, ओ के!

इतना कहकर रज़िया सीधी सामने शाजिया के कमरे में चली गई जिसे देखकर शाजिया खुश हो गई।

शाजिया- अरे रज़िया, आप यहाँ कैसे आना हुआ आपका?

रज़िया- मैंने क्या समझाया था मुझे आप नहीं तुम बोलो.. इससे दोस्ती का अहसास होता है और मेरे आने की वजह है तुम्हारा टास्क जो तुम्हें देने आई हूँ।

शाजिया- इस टाइम वो भी मेरे घर में.. ये कौन सा टास्क है?

रज़िया- मेरी जान ये सिलसिला घर से ही शुरू होगा, पहले ये बता तेरे अब्बू कहाँ हैं?

शाजिया- वो तो शॉप पर हैं, देर से आएँगे.. क्यों?

रज़िया- तब ठीक है, अब शुरू होता है तेरा आज का टास्क.. तो सुन!

रज़िया बोलती रही और शाजिया आँखें फाड़े उसकी बातें सुनती रही। रज़िया ने अपनी बात पूरी करके जब शाजिया को देखा तो उसको आँख मार कर शुरू होने को कहा।

शाजिया- नहीं नहीं.. ये मेरे से नहीं हो सकता रज़िया तुम बात को समझो ये उफ़फ्फ़ कैसे होगा ये?

रज़िया- ओके मत करो.. ये मैं नहीं कह रही, ये सब शाहिद ने इस बुक में लिखा है। अब लास्ट बार बोलो करना है या मैं वापस जाऊं… फिर तुम ही कल शाहिद को जवाब दे देना।

शाजिया- नहीं.. जरा रूको, मगर मेरे ये करने से क्या होगा?

रज़िया- तेरे अन्दर थोड़ी झिझक है.. थोड़ा डर है, ये सारे टास्क उनको ख़तम करने के लिए हैं। अब मैं भी तो लड़की हूँ मेरे सामने तो तुम नंगी हो ही सकती हो और वैसे भी सिर्फ़ कपड़े निकालने हैं, ब्रा और पैंटी नहीं.. समझी!

शाजिया- वो तो निकाल दूँ मगर उसके बाद जो करना है वो सोच कर ही डर लग रहा है.. कही मॉम को पता लग गया तो?

रज़िया- देख यार मुझे ये सब नहीं पता अगर नहीं करना तो मैं जाती हूँ, मेरे पास ज़्यादा टाइम नहीं है।

इतना कहकर रज़िया उठ कर जाने लगी तो शाजिया डर गई और उसने जल्दी से अपनी कमीज़ निकाल दी।

शाजिया- आपा रूको, देखो मैंने निकाल दिया अब कुछ नहीं बोलूँगी.. प्लीज़ आप मत जाओ ना!

रज़िया- अरे क्या बात है आपा..! चल ठीक है अब ये भी निकाल दे।

शाजिया ने सलवार भी निकाल दी.. अब उसके 32″ के गोल मम्मे सफ़ेद ब्रा में से निकल भागने को मचल रहे थे। सफ़ेद पेट मक्खन की तरह चिकना था.. उसकी पतली कमर किसी को भी दीवाना बनाने के लिए काफ़ी थी और उसकी पैंटी का उभार साफ दर्शा रहा था कि अन्दर फुददी किसी डबलरोटी जैसी फूली हुई है।

रज़िया- वाउ अब लगी ना हमारे टाइप की.. चल अब कोई चादर ओढ़ और मेरे साथ छत पर चल।

शाजिया ने एक बड़ी सी चादर अपने जिस्म पर लपेट ली और डरते हुए कमरे से बाहर निकली तो उसकी अम्मी से उसका सामना हो गया।

अब शाजिया को शाहिद के मुताबिक़ करने का सिलसिला शुरू हो गया था।

अंजुम- ही ही.. ये क्या हुआ.. तुम ऐसे चादर क्यों ओढ़े हुए हो?

शाजिया के तो पसीने निकल गए, अब वो क्या जवाब दे। तभी रज़िया ने बात को संभाला और खाला को बहाना बना के टाल दिया। उसके बाद दोनों ऊपर चली गईं और वहाँ जाकर रज़िया ने शाजिया की चादर खींच कर अपने पास रख ली और उसे छत पर मॉडल की तरह चलने को कहा।

शाजिया- आपा पास की छत पर कोई आ गया तो उसने मुझे देख लिया तो?

रज़िया- अरे ऐसा लाजवाब हुस्न छुपाने के लिए नहीं मेरी जान.. दिखाने के लिए ही होता है.. चल अब देर मत कर मुझे जाना भी है।

शाजिया बेचारी मरती क्या ना करती.. वो धीमे-धीमे चलने लगी। उसकी ये सब हरकतें रज़िया चुपके से मोबाइल में कैद करती जा रही थी।

दस मिनट तक अलग-अलग स्टाइल में शाजिया को वॉक करवाने के बाद वो वापस नीचे आ गई और रज़िया वहाँ से चली गई, मगर शाजिया को एक अलग ही कस्मकस में डाल गई।

शाजिया को ये सब अच्छा भी लगा और थोड़ा बुरा भी फील हुआ, अगर कोई देख लेता तो क्या होता.. मगर कुल मिलाकर वो खुश थी, उसके चेहरे पे एक अलग ही मुस्कान नज़र आ रही थी।

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फ्रेंड्स, उधर राबिया को अपनी किस्मत चमकती नज़र आ रही थी.. क्योंकि वही पास ही के घर का एक लड़का जावेद राबिया को बहुत ताड़ता रहता था और राबिया को भी अपनी फ्रेंड की कही हुई बात बार-बार याद आ रही थी कि किसी और से अपनी फुददी की हवस मिटा ले।

उस लौंडे का चार दिन तक ये ताक-झाँक का खेल चलता रहा। इस बीच सारे मेहमान जा चुके थे, यहाँ तक कि फवाद के बॉस ने भी उसको अर्जेंट आने को कह दिया था।

फवाद ने जब जाने को कहा तो उसकी अम्मी ने राबिया को कुछ दिन वहीं रखने की बात कही और फवाद मान गया.. क्योंकि उसको भी कुछ दिन सुकून चाहिए था।

शाम को फ़िरोज़ ख़ान तो खेतों में चले गए। वो फसल के लिए रात वहीं सोते थे और गायत्री और विमला गाँव में भजन कीर्तन का प्रोग्राम था.. सो वहाँ चली गई थीं। घर में सिर्फ़ चाचा और राबिया रह गए थे।

राबिया को लगा आज अच्छा मौका है चाचा के सो जाने के बाद वो उस लड़के से अपनी फुददी की आग मिटा लेगी, इसी सोच के चलते उसने जावेद को मौका देख कर इशारा कर दिया कि रात को वो छत पर आएगी और उसके बाद वो घर के काम में लग गई।

रात होने के बाद वो चाचा के सोने का इन्तजार करने लगी।

वैसे तो गाँव में सब जल्दी सो जाते हैं मगर चाचा सबसे आखिरी में सोता था। आज भी वो 10 बजे के करीब राबिया के कमरे में चैक करने आया कि वो सोई या नहीं।

राबिया- चाचा आपको कुछ चाहिए क्या.. मुझे बता दीजिए?

चाचा- अरे नहीं बहू.. मैं तो तुझे देखने आया था कि तू सोई या नहीं.. वैसे तुझे पता है ना घर में कोई नहीं है, तू डरना मत.. मैं पास के कमरे में ही हूँ, डर लगे तो बता देना.. ठीक है!

राबिया- जी चाचा.. जरूर आप बेफिक्र सो जाओ.. मैं भी बस सो ही रही हूँ।

चाचा के जाने के बाद राबिया कुछ देर वैसे ही पड़ी रही.. जब उसको लगा कि चाचा सो गए। तो वो उठी उसने अपनी सेक्सी सी नाईटी पहनी और सीधी छत पर चली आई क्योंकि वो लड़का अपने घर की छत पे ही सोता था।

राबिया जब ऊपर गई तो वो लड़का ऊपर टहल रहा था। राबिया को देख कर उसके चेहरे पर ख़ुशी के भाव आ गए।

दोस्तों जावेद की उम्र कोई 20 साल की होगी.. वो एक दुबला सा लड़का था। अब राबिया जैसी हुस्न परी को देख कर उसका मन डोलना आम सी बात है।

राबिया ने उसको इशारा किया कि यहाँ आ जाओ।

तो वो अपनी छत के छज्जे से कूदकर इधर आ गया।

राबिया- तुम्हारा नाम क्या है और तुम रोज मुझे ऐसे क्यों देखते हो?

जावेद- मेरा नाम जावेद है और भाभी जान आप बड़ी सुंदर हो इसी लिए आपको देखता हूँ।

राबिया- अच्छा सच सच बता.. मेरे अन्दर तुझे क्या ज़्यादा पसंद है?

जावेद- वव..वो वो भाभी जान, आपके बाल बहुत सुंदर हैं।

राबिया समझ गई कि लड़का शर्मा रहा है और ऐसे में ये उसकी आग शांत नहीं कर पाएगा.. इसको थोड़ा खोलना पड़ेगा। इसी सोच के चलते राबिया उसके करीब को आ गई और उसकी साँसों से साँसें मिलाकर अपने मम्मे फुलाते हुए कहा- बस और कुछ पसंद नहीं.. सच जावेद बताओ ना तुम्हें और क्या पसंद है?

राबिया की गर्म साँसें जावेद को पागल बना गईं.. वो अब उसकी महकती महक में खो गया और अपना संतुलन खो बैठा। उसने राबिया को अपनी बांहों में ले लिया और जल्दी से उसके होंठों को चूम कर अलग हो गया।

राबिया- हा हा हा हा तुम एकदम से पागल हो.. अरे डर क्यों रहे हो.. जो कहना है खुल के कहो न यार और जो करना है खुल के करो.. मैं कुछ नहीं कहूँगी.. आओ मेरे पास आओ और आराम से बताओ मेरा और क्या पसंद है तुम्हें।

जावेद समझ गया कि आज कामदेव उससे बहुत खुश हैं जो ऐसी कामदेवी को उससे मिला दिया। अब उसके अन्दर की झिझक ख़त्म हो गई थी.. वो दोबारा राबिया के पास आया और उसके चुचों को दबाने लगा।

जावेद- मुझे आपके ये खरबूजे भी पसन्द हैं और ये गर्दन और पीछे आपकी भरी हुई गांड और..

जावेद अब राबिया के जिस्म को झंझोड़ने लगा.. वो पागलों की तरह कभी उसके मम्मे दबाता, कभी उसकी गांड मसकता। वो बस पागल सा हो गया था।

राबिया- आह ऑउच आराम से करो आह.. मैं कहीं भागी थोड़ी जा रही हूँ आह.. सस्स जावेद आह.. अरे रूको ऐसे ही करोगे क्या आह.. कपड़े तो निकालने दो।

राबिया पहले ही वासना की आग में जल रही थी। अब जावेद ने उसकी आग को और भड़का दिया था। उसने जावेद को अलग किया और अपने जिस्म को कपड़ों से आज़ाद किया। सोने सा चमकता जिस्म देख कर जावेद का लंड झटके खाने लगा।

राबिया- ऐसे क्या देख रहे हो.. चलो तुम भी तो अपने नाग को आज़ाद करो। मैं भी तो देखूँ कैसा है वो?

जावेद तो जैसे हुकुम का गुलाम था.. उसने एक ही झटके में अपने कपड़े निकाल फेंके, अब उसका 6″ का लंड आज़ाद राबिया को घूर रहा था।

जावेद के लंड को देख कर राबिया को ख़ुशी नहीं हुई वो किसी बड़े लंड की चाहत कर रही थी.. मगर टाइम पर जो मिले वही सही। ये सोचकर वो घुटनों के बल बैठ गई और लंड को हाथ से सहलाने लगी।

जावेद के तो पूरे जिस्म में करंट दौड़ने लग गया.. उसको ऐसा लगा जैसे उसका सारा खून लंड के रास्ते बाहर आ जाएगा।

जावेद किसी भूत की तरह खड़ा रहा और राबिया की कामवासना बढ़ती गई.. वो लंड को मुँह में लेकर चूसने लगी। ये झटका जावेद को पागल बना गया.. उम्म्ह… अहह… हय… याह… वो आसामान में उड़ने लगा। अभी कोई 2 मिनट भी नहीं हुए होंगे कि उसके लंड की नसें फूलने लगीं।

जावेद- आह.. आ भाभी मैं आह.. झड़ने वाला हूँ आह.. हटो आ..

राबिया ने उसको इशारा किया कि मुँह में ही माल निकाल दो और उसी पल जावेद के लंड से पिचकारी सीधी राबिया के गले में गिरने लगी। जावेद की साँसें फूलने लगीं.. वो काफ़ी देर तक झड़ता रहा। राबिया ने लंड को चूस कर एकदम साफ कर दिया.. आख़िरी बूँद तक उसने लंड से निचोड़ डाली।

जावेद- आ आह.. मज़ा आ गया आज तो तुमने मुझे जन्नत की सैर करा दी.. क्या मस्त लंड चूसती हो।

राबिया- अच्छा इतना मज़ा आया.. मगर तुम तो बहुत जल्दी आउट हो गए। अब जल्दी से इसे तैयार करो ताकि मैं भी इसे अपनी फुददी में लेकर हवा में उड़ सकूँ।

जावेद- अरे इतनी जल्दी कैसे होगा.. इसको दोबारा खड़े होने में टाइम लगता है.. तब तक तुम मुझसे दूर हो जाओ।

राबिया- अरे क्यों दूर क्यों हो जाऊं.. मैं इसको सहला कर फिर से खड़ा करती हूँ ना!

जावेद- नहीं ऐसा मत करो.. आधा घंटा से पहले ये खड़ा नहीं होगा.. शुरू में 5 मिनट में हो जाता था मगर मुझे मुठ मारने की गंदी आदत है.. बार-बार मुठ मारता हूँ.. तो इसकी नसें अब ढीली पड़ गईं। अब ये जल्दी पानी फेंक देता है और खड़ा भी देर से होता है।

जावेद की बात सुनकर राबिया को बड़ा गुस्सा आया वो तो कामवासना की आग में जल रही थी और ये ऐसी बातें कर रहा था। उसने जावेद को जोर से धक्का दिया और चिल्ला कर बोली- कमीने नामर्द कहीं के.. जब लंड में जान ही नहीं है, तो यहाँ क्या करने आया था.. मेरी आग को इतना भड़का के अब तू कहता है ये खड़ा नहीं होगा.. हरामी जल्दी से इसको खड़ा कर.. नहीं तो आज में तेरे लंड को काट के फेंक दूँगी।

राबिया का गुस्सा देख कर जावेद घबरा गया.. उसने जल्दी से अपने कपड़े समेटे और वहाँ से भाग गया और राबिया कामवासना की आग में जलती हुई वहीं खड़ी रोने लगी।

काफ़ी देर बाद राबिया ने कपड़े पहने और वो नीचे चली गई। जैसे ही वो कमरे में गई उसके होश उड़ गए क्योंकि चाचा वहीं उसके बिस्तर पे बैठे उसको गुस्से से देख रहे थे।

राबिया- इस्स चाचा.. आप यहाँ आह.. आपकी तबीयत तो ठीक है ना?

चाचा- मेरी तबीयत तो बिल्कुल ठीक है बहू.. मगर तुम्हारे लच्छन ठीक नहीं लग रहे मुझे।

राबिया- ये आप कैसी बातें कर रहे हो, मैंने क्या किया है.. मैं तो बस ऊपर खुली हवा में टहलने गई थी।

चाचा- अच्छा ये बात है तो वो जावेद को वहाँ क्या फिरोजा उतारने को बुलाया था तुमने? और उसके बाद जो किया मुझे तो बोलते हुए भी शर्म आ रही है।

राबिया समझ गई कि चाचा ने सब कुछ देख लिया है अब झूठ बोलने से कोई फायदा नहीं.. तो बस उसने उसी टाइम त्रियाचरित्र शुरू कर दिया, उसकी आँखों से आँसू बहने लगे और उसने वहीं ज़मीन पर बैठ के सिर को घुटनों में दबा लिया।

राबिया- मुझे माफ़ कर दो चाचा, मेरी कोई ग़लती नहीं है.. मैं वासना की आग में जल रही थी.. मुझसे भूल हो गई। अब आपने देख लिया तो मेरे पास मरने के सिवाए कोई चारा नहीं बचा, मैं तो बिना कुछ किए ही बर्बाद हो गई हूँ।

चाचा- अरे रोती क्यों है पगली.. मेरी बात तो सुन, मैं किसी को कुछ नहीं बताऊंगा.. अरे अगर बताना होता तो उसी समय उस कुत्ते को जान से मार देता जब वो तुझे छू रहा था, मगर मुझे अपने घर की इज़्ज़त का ख्याल है। बस इसी लिए चुपचाप वापस नीचे आ गया।

काफ़ी देर तक चाचा ने राबिया को समझाया तब कहीं जाकर वो चुप हुई और चाचा के पास बिस्तर पे बैठ गई।

चाचा- बेटी तू शादीशुदा है, अपना अच्छा-बुरा अच्छे से जानती है। फिर ये नौबत क्यों आई कि एक पराए मर्द के पास तुझे ऐसे आधी रात को जाना पड़ा?

राबिया- चाचा मैं कुछ बोलूँगी तो आपको बुरा लगेगा.. इसलिए ये बात आप ना ही पूछो तो अच्छा होगा।

चाचा- अरे ऐसे कैसे ना पूछू.. तू मेरे घर की बहू है.. क्या कमी है फवाद में? जो तुझे जावेद जैसे नामर्द के पास जाना पड़ा?

राबिया- चाचा अगर ऐसी बात है.. तो सुनो आप जावेद को नामर्द कह रहे हो ना.. तो आपका फवाद भी जावेद जैसा ही है.. एक बार में आउट हो जाता है वो भी चंद मिनटों में!

शुरू से अब तक की सारी कहानी राबिया ने चाचा को बताई कि कैसे वो दूसरे मर्द की तरफ़ आकर्षित हुई।

राबिया की बात सुनकर चाचा को दुख हुआ और साथ आँखों में चमक भी आ गई, शायद वो राबिया को भोगने का मन बना चुके थे। चाचा ने अपना हाथ राबिया की पीठ पर रखा और धीमे-धीमे फेरते हुए वो राबिया से बोले- देखो बेटी, किस्मत का लिखा तो मैं बदल नहीं सकता मगर तुमको तुम्हारे हिस्से की ख़ुशी जरूर दे सकता हूँ।

राबिया समझ गई कि चाचा क्या कहना चाहते हैं.. मगर वो अनजान बन कर पूछने लगी- कैसे.. आप मुझे ख़ुशी कैसे दोगे?

चाचा ने अब अपना हाथ पीठ से धीमे से राबिया के सीने पर रख दिया- देखो बेटी किसी अनजान मर्द से अच्छा तो ये है कि मैं ही तुझे खुश कर दूँ.. अगर तुझे एतराज़ ना हो?

राबिया की फुददी तो वैसे ही जल रही थी उसे तो बस लंड चाहिए था.. चाहे वो किसी का भी हो.. मगर चाचा की उम्र को देख कर उसको थोड़ा शक हुआ तो वो चाचा को उकसाने के लिए बोली- रहने दो चाचा.. आपसे कहाँ कुछ दिया जाएगा, फवाद भी तो आपके ही खेत की फसल है.. अब वो जवानी में ऐसा है तो आपकी तो उम्र हो गई है.. आपसे कहाँ कुछ हो पाएगा?

चाचा- अरे बेटा फसल को कीड़ा भी लगता है.. उसी तरह शहर की हवा में फवाद ऐसा हो गया, मगर मैं आज भी जवान ही हूँ.. यकीन ना आए तो खुद देख लो।

इतना कहकर चाचा ने राबिया का हाथ पकड़ा और अपने लंड पे रख दिया।

जैसे ही राबिया ने लंड को महसूस किया, उसकी आँखें फटी की फटी रह गई। क्योंकि धोती के अन्दर जो चीज थी वो काफ़ी भारी भरकम थी।

राबिया- चाचा ये क्या है.. इतना बड़ा?

चाचा- अभी कहाँ बड़ा है राबिया रानी, इसे प्यार से छू.. फिर देख कितना बड़ा होता है ये।

 
चाचा अब अपने रंग में आ गए थे। वे राबिया को बेटी से सीधे रानी बोलने लगे और साथ ही राबिया की चुची सहलाने लगे थे। राबिया को तो ऐसे ही किसी मौके की तलाश थी.. मगर चाचा उसके शौहर के चाचा थे तो वो शर्माने का नाटक करने लगी- नहीं, मुझे आपसे बड़ी शर्म आ रही है.. मैं आपका ‘ये’ नहीं सहला सकती।

चाचा पर अब सेक्स चढ़ चुका था, वो राबिया के चुचों को दोनों हाथों से मसलने लगे थे और बीच-बीच में उसकी फुददी को भी दबा देते।

राबिया- आह.. चाचा ऐसा मत करो.. मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा आह.. प्लीज़ आह.. कुछ हो जाएगा।

चाचा- अरे राबिया रानी ऐसे शर्मा मत.. जो होगा उसको होने दे, उसी में सबकी भलाई है। आज पूरी कर ले अपनी इच्छा, नहीं तो जिंदगी भर पछताएगी।

राबिया ने चाचा के लंड को पकड़ लिया और धीमे-धीमे सहलाने लगी- चाचा, किसी को पता चल गया तो क्या होगा?

चाचा- अरे रानी घर में कोई नहीं है.. किसी को कानों-कान खबर नहीं होगी.. चल अब देर ना कर!

राबिया- मैं कहाँ देर कर रही हूँ चाचा, देर तो आप कर रहे हो, जो अब तक कपड़ों के ऊपर से ही मेरे जिस्म को सहला रहे हो।

अब राबिया ने खुला निमन्त्रण चाचा को दे दिया था और चाचा भी कहाँ पीछे रहने वाले थे, उन्होंने झट से राबिया की नाईटी निकाल दी और ऊपर से नीचे तक उसको निहारने लगे।

राबिया ने अपने चुचों को चाचा के होंठों की तरफ उठाया और बोली- चाचा, देखते ही रहोगे क्या या कुछ करोगे भी?

चाचा- रुक मेरी रानी.. मुझे आराम से तेरी जवानी को निहार लेने दे.. उस दिन ब्रा में कसी तेरी चुची देख कर अल्लाह से प्रार्थना की थी कि एक बार ये चुची नंगी देखने को मिल जाएं और आज देखो अल्लाह ने मेरी सुन ली।

राबिया- ये आप क्या कह रहे हो, आपने कब देखा मुझे ब्रा में?

चाचा- अरे जब तू कपड़े बदल रही थी ना.. तब देखा था। मन तो उसी टाइम किया कि तेरे रसीले मम्मे चूस लूँ मगर तू इस घर की बहू है, तो तुझे बख्श दिया।

राबिया- हे राम.. मुझे लगा भी था कि कोई मुझे देख रहा है। चाचा आप तो बड़े चुदक्कड़ हो?

चाचा- अरे रानी मेरी चुदाई तूने अभी देखी कहाँ है, इस गाँव की ना जाने कितनी कुँवारी सील मैंने ही तोड़ी हैं और कई शादीशुदा लड़कियों को चोद कर उनको मज़ा भी दिया है।

राबिया- चाचा आप इतने बड़े चोदू हो फिर भी आपके कोई औलाद नहीं.. ये कैसे हो सकता है?

चाचा- अरे पागल, तेरी काकी बांझ है मेरे तो ना जाने कितने बेटे और बेटियां इस गाँव में घूम रहे हैं।

राबिया- वो कैसे चाचा.. मैं समझी नहीं कुछ?

चाचा- अरे रानी कई ऐसी औरतें मेरे से चुदी हैं.. जिनके शौहर उनको अम्मी ना बना सके और मैंने उनकी गोद भर दी तो इस हिसाब से मेरे कई बच्चे हुए ना.. हा हा हा हा..

चाचा के साथ राबिया भी हँसने लगी।

चाचा- बस मेरी जान ये सवाल बहुत हो गए। अब तू अपने चाचा की चुदाई देख, फिर बताना मज़ा आया कि नहीं।

राबिया- अपने अजगर को तो आज़ाद कर दो चाचा, वो कब से अन्दर तड़प रहा है बेचारा।

चाचा- उससे ज़्यादा तो तू तड़प रही है उसे देखने के लिए.. चल तू खुद उसको आज़ाद कर दे।

राबिया धीमे से चाचा के पास को हो गई और उनकी धोती को खोल कर साइड में रख दी। अन्दर से चाचा का 8″ का लंड फनफनाता हुआ बाहर निकला, उसकी मोटाई भी बहुत थी जिसे देख कर एक बार तो राबिया डर गई- हे राम.. चाचा इतना बड़ा ये कैसे जाएगा अन्दर?

चाचा- अरे रानी, ये तो कमसिन कली की फुददी में पूरा समा जाता है.. तू तो खेली खाई है। चल आजा प्यार कर इसको फिर देख ये तुझे कैसे जन्नत की सैर कराता है।

राबिया अपने घुटनों पे बैठ गई और लंड पर अपनी जीभ बड़े प्यार से घुमाने लगी। वो लंड को चाट रही थी और साथ ही साथ चाचा की गोटियों को भी हाथ से सहला रही थी।

चाचा- आह.. उम्म्ह… अहह… हय… याह… चूस रानी.. चूस.. आज बड़े दिनों बाद मेरे लंड पे किसी के होंठ लगे हैं.. आह.. आह।

लगभग 5 मिनट तक राबिया पागलों की तरह लंड को चूसती रही। वो पूरा लंड मुँह में भर रही थी और चाचा उसके मुँह को फुददी समझ कर चोदने में लगे हुए थे।

राबिया- बस चाचा अब बर्दाश्त नहीं होता.. घुसा दो अपना बम्बू मेरी फुददी में.. कर दो इसे ठंडा..!

चाचा- मेरी राबिया रानी.. ऐसे थोड़ी सीधे घुसा दूँगा, पहले तेरी फुददी का रस पीऊंगा तुझे जल बिन मछली की तरह तड़पाऊंगा उसके बाद कहीं तेरी चुदाई करूँगा।

चाचा ने राबिया को बिस्तर पर चित्त लेटा दिया और उसके चुचों को चूसने लगा। फिर धीमे-धीमे चाचा उसके पूरे जिस्म को ऐसे चाटने लगा जैसे वो कोई रसमलाई हो और आख़िर में जब चाचा के गर्म होंठ उसकी फुददी पर जा लगे। राबिया ने एक लंबी सांस ली और उसकी फुददी का झरना बह गया।

राबिया- आआहह सस्स्सस चाचा ओप्पस एयाया सस्स्स..

चाचा भी पका हुआ रांड़बाज था.. सारा रस जीभ से चाट गया।

चाचा- अरे मेरी राबिया रानी.. बहुत जल्दी झड़ गई.. तूने तो ठीक से फुददी को चूसने भी नहीं दिया।

राबिया- कब से वासना की आग में जल रही थी.. ऊपर से अपने मेरी आग को और भड़का दिया तो मुझसे बर्दाश्त ना हुआ।

चाचा- अच्छा हुआ जो झड़ गई.. अब मेरे लंड से दोबारा झड़ना तू.. ले संभाल मेरे मूसल को।

इतना कहकर चाचा ने लंड फुददी पे टिकाया और जोर का झटका मार दिया.. आधा लंड फुददी को फैलाता हुआ अन्दर घुस गया।

राबिया- आऐय यइ उफफफफ्फ़ बहुत मोटा है आपका आह.. आराम से जान लोगे क्या?

चाचा ने राबिया की बात अनसुनी करते हुए लंड को पीछे खींचा और फिर से एक जोरदार दे धक्का दिया। इस बार पूरा 8″ का लंड राबिया की फुददी में खो गया.. उसके साथ ही राबिया की चीख निकल गई।

राबिया- आआआ आआआ आआआअ..

चाचा- अरे चिल्लाती क्यों है रानी.. फवाद ने तेरी फुददी को आधा ही खोला था आज मैंने पूरी फुददी खोल दी.. अब तू मज़े ले।

चाचा को ऐसी मस्त फुददी मिल गई, वो अब कहाँ रुकने वाले थे.. उन्होंने राबिया को रेल बना दिया। लंड के दे झटके.. दे झटके.. चाचा तो इस वक्त रेस के घोड़े बने हुए थे और राबिया हर बार चीख कर रह जाती।

करीब 15 मिनट तक चुदाई चलती रही। अब राबिया की फुददी में लंड बराबर फिट हो गया था और उसको अब बड़ा मज़ा आ रहा था।

राबिया- आह.. आ सस्स चाचा उफ़फ्फ़ मैं गई.. आह जोर से चोदो.. आआ आआ मेरा रस निकल रहा है एयाया सस्सस्स गई आह..

चाचा- ले आह.. साली रांड ले आह.. ज्ज़र..जा आज आह तेरी फुददी को आह.. पूरा सुकून देके मानूँगा ले आह.. ले..

चाचा झटके पे झटके लगा रहा था और राबिया की फुददी पानी झड़ रही थी। जब राबिया झड़ के शांत हो गई तो उसको अब फुददी में जलन सी होने लगी।

राबिया- आह.. चाचा आह.. अब निकाल भी दो अपना पानी आह.. कब तक चोदोगे आइईइ फुददी जलने लगी है अब तो आह..

चाचा- उहह उहह साली रांड ये तेरे नामर्द शौहर का लंड नहीं है जो जल्दी ठंडा हो जाएगा आह.. ले ले गाँव का तगड़ा लंड है आह.. आ पूरा मज़ा लेकर ही झड़ेगा।

चाचा स्पीड से राबिया की फुददी में लंड के झटके मार रहे थे। अब राबिया भी वापस गर्म हो गई और गांड को उछाल-उछाल के चाचा का साथ देने लगी। चाचा ने राबिया को घोड़ी बना कर चोदना शुरू किया। अब हर झटके के साथ राबिया की आह.. निकाल रही थी।

दस मिनट ऐसे ही गुजर गए अब चाचा का लावा किसी भी पल फूटने वाला था, वो और ज़्यादा स्पीड से चोदने लग गए थे।

राबिया- आह.. आ चाचा उफ़फ्फ़ आज तो जिंदगी का आह.. आ असली मज़ा आ गया आह.. और जोर से आह.. मैं गई आह.. चाचा आह.. उईईइ आह।

चाचा- उम्म्ह… अहह… हय… याह… ले रांड आह.. मेरा भी आह.. निकलने वाला है आह.. अफ..

चुदाई का तूफान अपने चरम पे था चाचा के मूसल ने लावा बरसाना शुरू कर दिया। उसकी गर्म धार राबिया की फुददी को बड़ा सुकून दे रही थी.. उसी के साथ राबिया भी झड़ गई।

काफ़ी देर तक दोनों हांफते रहे और एक-दूसरे को देख के मुस्कुराते रहे।

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रात को 11 बजे रज़िया चुपके से घर से बाहर निकल जाती है। बाहर शाहिद बाइक पे खड़ा उसका वेट कर रहा था। वो सीधी जाकर बाइक पर बैठ जाती है और दोनों एक मकान में चले जाते हैं।

रज़िया- ऐसी क्या जरूरत आ गई शाहिद जो तुमने मुझे ऐसे अर्जेंट में बुलाया?

शाहिद- सब्र कर मेरी जान.. ऐसी भी क्या जल्दी है, आराम से बैठ पहले.. फिर बताता हूँ।

रज़िया- ठीक है जानू जैसा तुम कहो, लो बैठ गई अब बोलो क्या बात है?

शाहिद- यार आज शाम से लंड में हलचल मची हुई है, सोचा तुझे बुलाकर तेरी फुददी की ठुकाई करूँगा।

रज़िया- क्या बात है मेरे शहंशाह.. इस हलचल की कोई खास वजह तो ज़रूर होगी?

शाहिद- हाँ वजह तो बहुत बड़ी है मगर तुझे बता नहीं सकता।

रज़िया- क्या यार शाहिद.. मुझपे भरोसा नहीं है क्या तुम्हें?

शाहिद- ऐसी बात नहीं है यार.. तू समझा कर, सही मौका आएगा तब तुझे बता दूँगा। फिलहाल तू कपड़े निकाल लंड में दर्द होने लगा है।

रज़िया- ही ही ऐसा क्या हो गया.. लगता है कोई बहुत ज़्यादा हॉट माल देख के आया है.. तभी ये हाल है। मगर मेरे शहंशाह आज तो तुम्हारी रज़िया तुम्हारी कोई मदद नहीं कर सकती क्योंकि आज सिग्नल रेड है.. लंड की नो एंट्री हा हा हा हा हा..

शाहिद- अबे बहनचोद साली ये क्या बोल रही है.. सारा मूड खराब कर दिया।

रज़िया धीमे से शाहिद के पास गई और उसके लंड को सहलाते हुए कहा- अरे नाराज़ क्यों होता है, मेरे ये होंठ किसी फुददी से कम हैं क्या और साथ में ऐसा नजारा दिखाऊंगी तुझे कि 5 मिनट में तू पानी फेंक देगा।

शाहिद सवालिया नज़रों से रज़िया को देख रहा था और रज़िया उसके लंड को पेंट से आज़ाद कर रही थी। रज़िया ने पेंट उसके घुटनों तक खिसका दी और अंडरवियर को भी नीचे कर दिया।

शाहिद का 8″ का लंड आज़ाद हो गया.. वो मोटा भी काफ़ी था। वैसे तो रज़िया कई बार उसको अपनी फुददी में ले चुकी थी मगर आज ये कुछ ज़्यादा ही तना हुआ था।

रज़िया- ओ माय गॉड.. ये क्या शाहिद इतना कड़क.. प्लीज़ शाहिद बताओ ना ऐसा क्या हुआ कि आज ये जरूरत से ज़्यादा कड़क हो गया?

शाहिद- अबे ये सब बातें बाद में.. पहले इसका इलाज तो कर, लगता है आज फट ही जाएगा साला ये.. और वो नजारा क्या दिखाने वाली थी.. तू वो तो दिखा साली?

रज़िया- सब्र कर मेरे शहंशाह पहले इसको थोड़ा प्यार तो कर लूँ।

रज़िया लंड को बड़े प्यार से अपनी जीभ से चाटने लगी और धीमे-धीमे सुपारे को अपने मुँह में भर लिया।

शाहिद- आह.. उफ़फ्फ़ रज़िया मज़ा आ रहा है आह.. साली तू पक्की चुदक्कड़ है आह.. क्या चूसती है अफ..

दस मिनट तक रज़िया लंड से खेलती रही उसको पूरा मुँह में लेकर चूसती कभी गोटियों को हाथ से छेड़ती तो कभी मुँह से चूसती।

ये हरकतें शाहिद को पागल बना रही थीं वो सिसक रहा था और मज़े में उसकी आँखें बंद थीं। अचानक रज़िया ने लंड मुँह से बाहर निकाल लिया और शाहिद को देख कर मुस्कुराने लगी।

अचानक मज़ा खराब होने से शाहिद ने जल्दी से आँखें खोलीं।

शाहिद- साली कुतिया क्या हुआ कितना मज़ा आ रहा था.. निकाल क्यों दिया?

रज़िया- तेरा स्टेमिना मुझसे छुपा नहीं है.. साला फुददी का भुर्ता बना देता है तब जाकर तू झड़ता है। ऐसे चूसने से तेरा कुछ नहीं होगा, ये ले और इसको देख के मेरे मुँह को फुददी समझ कर चोद.. तब तू हल्का होगा।

रज़िया ने शाजिया का जो वीडियो बनाया था उसको चालू करके फ़ोन शाहिद को दे दिया और दोबारा उसके लंड को मुँह में लेकर होंठ भींच लिए।

शाजिया का अनछुआ हुस्न देख कर शाहिद की आँखें फटी की फटी रह गईं.. उसका लंड और ज़्यादा सख़्त और गर्म हो गया। शाजिया की ब्रा में कैद मम्मे और उसकी फूली हुई फुददी उसको मदहोश कर रही थी। वो अब अपना आपा खो चुका था उसने रज़िया के सर को कस के पकड़ा और जोर-जोर से उसके मुँह को चोदने लगा।

शाहिद- आहह शाजिया आह.. साली क्या मस्त है रे तू आह.. साली उफ़फ्फ़ पहले साली शबनम ने आह पागल किया आह साली अब तेरा हुस्न देख के आह.. हाल बुरा हो गया आह.. ले साली ले उहह उहह उहह..

दो मिनट भी नहीं लगे उसको.. और उसका लंड फट गया। सारा रस रज़िया के गले में जा पहुँचा और लंड पिचकारी पे पिचकारी मारता रहा। शायद आज से पहले उसका इतना रस नहीं निकला था.. जितना आज निकला।

रज़िया ने सारा रस निगल लिया और लंड को अच्छे से चाट कर साफ किया और थोड़ा गुस्से से शाहिद की तरफ देखा- साले कमीने, मेरे लिए तो कभी ऐसा जोश नहीं आया तुझे.. और आज इस रांड़ को देख के बहुत जल्दी पानी फेंक दिया तूने.. और ये शबनम कौन है, जिसके चक्कर में तू शाम से लंड कड़क करके घूम रहा है?

शबनम का नाम रज़िया के मुँह से सुनकर शाहिद की आँखें फटी की फटी रह गईं, वो सोचने लगा कि इसको शबनम के बारे में कैसे पता लगा। फिर उसने दिमाग़ पे जोर दिया तो उसको याद आया कि अभी मज़े के चक्कर में उसको शबनम याद आई थी और उसने उसका नाम लिया था।

रज़िया- अबे सोच क्या रहा है बता कौन है ये शबनम?

शाहिद- क्क..कौन शबनम मुझे क्या पता कौन है क्या बोल रही है तू?

रज़िया- देख शाहिद नाटक मत कर.. सच सच बता दे और मुझसे कैसा डर..! तू शाजिया को चोद या किसी शबनम को, मुझे फरक नहीं पड़ता.. बस मेरी चुदाई बराबर करते रहना.. प्लीज़ बता ना यार?

शाहिद- शबनम को मार गोली और ये बता क्या तूने ये वीडियो शाम को बनाया? साली क्या मस्त लग रही है इसको देख के लंड बेकाबू हो गया और फट से पानी फेंक दिया।

रज़िया- हाँ मैं उसके घर गई थी वैसे एक बात तो माननी पड़ेगी। साली कुतिया सच में काफ़ी सुंदर है। एक बार तो मेरी भी लार टपकने लगी उसके जिस्म को देख कर.. मन किया साली की फुददी चाट लूँ।

शाहिद- मेरी जान मैं तो उसको पहली बार देख कर ही समझ गया था, इसी लिए ये गेम खेला.. अब तू बस उससे टास्क करवाती जा और देख कैसे मैं उसको टॉप की रांड़ बनाता हूँ।

रज़िया- अच्छा ये बात है.. चलो देखते हैं।

अचानक रज़िया को याद आता है कि शाहिद उसको बातों में लगा कर शबनम की बात को टाल रहा है।

रज़िया- यार शाहिद प्लीज़ तू मुझे बातों में उलझा मत.. बता ना शबनम का क्या चक्कर है और वैसे भी तूने आज तक कितनी लड़किया चोदी हैं मगर आज जो तेरी हालत थी, उससे लगता है ये शबनम कोई बम्ब नहीं पूरी की पूरी बारूद की फॅक्टरी है।

शाहिद- तू जैसा सोच रही है बात वैसी नहीं है यार!

रज़िया- अरे तो यार जो भी है तू बताएगा तब पता लगेगी ना.. चल बता अब!

शाहिद- साली तू ऐसे मानेगी भी नहीं, बताऊंगा थोड़ा सब्र कर गला सूख रहा है और बाथरूम भी जाना है तू ऐसा कर में बाथरूम में फ्रेश होकर आता हूँ तब तक तू फ्रीज़ से बियर निकाल के ला और गिलास भी साथ लाना।

शाहिद के दिमाग़ में कोई बहुत बड़ी बात घूम रही थी, वो रज़िया को बताए या ना बताए बस यही सोचता हुआ फ्रेश होने चला गया और रज़िया भी बियर लाने चली गई।

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चाचा- क्यों राबिया रानी, मज़ा आया या नहीं..!

राबिया- चाचा मेरी जिंदगी में ऐसा मज़ा कभी नहीं आया, आपका लंड सच में बहुत तगड़ा है। देखो इसने मेरी फुददी का क्या हाल किया है।

चाचा- अरे रानी अभी कहाँ.. अभी तो बस शुरूआत है, आगे-आगे देख.. मैं तुझे कितने मज़े देता हूँ।

चाचा की बात सुनकर राबिया के होंठों पे एक मुस्कान आ गई। वो धीमे से चाचा के सीने से चिपक गई और लंड को सहलाने लगी। चाचा का लंड भी शायद इसी चाहत में था.. इसलिए राबिया के हाथ लगते ही वो बढ़ने लगा।

चाचा- आह.. रानी तेरे हाथों में कैसा जादू है.. देख लंड कैसे तन गया उफ.. वैसे एक बात तो बता अगर मेरे बीज से तुझे पेट रह गया तो तू क्या करेगी?

राबिया- करना क्या है चाचा ये तो ख़ुशी की बात है.. आपके तगड़े लंड से बच्चा पैदा होगा.. तो वो भी आपकी तरह मजबूत होगा, फवाद के जैसा नामर्द नहीं होगा। उसकी बीवी आपको दुआ देगी सारी जिंदगी के कैसा मर्द पैदा किया है।

चाचा- अच्छा जरूरी थोड़े ही है.. कोई लड़की भी हो सकती है।

राबिया- लड़की होगी तो भी अच्छा है उसमें मेरी खूबसूरती और आपके जैसी ताक़त होगी.. वो भी अपने शौहर को फुल मज़ा देगी।

अपनी बहू की बात सुनकर चाचा मुस्कुराने लगे और राबिया को अपनी बांहों में भर लिया।

राबिया की कामवासना अब दोबारा जाग गई थी, वो लंड को अब मुँह में लेकर चूसने लगी थी। उधर चाचा भी अब गर्म हो गए थे- आह.. चूस रानी आज तो मेरे लंड के भाग खुल गए.. तेरी जैसी अप्सरा इसको चूस रही है.. ओफ.. चल रानी घूम जा और मुझे भी तेरी फुददी का रस पीने दे।

अब दोनों 69 के पोज़ में हो गए और एक-दूसरे का रस चाटने लगे। दस मिनट तक ये चुसाई चलती रही उसके बाद चाचा सीधे होकर लेट गए और राबिया को समझते देर ना लगी कि चाचा क्या चाहते हैं।

राबिया सीधे जाकर चाचा के खड़े लंड पर अपनी फुददी सैट करके बैठ गई और धीमे-धीमे ऊपर-नीचे होने लगी।

चाचा- आह.. राबिया रानी तू तो बड़ी समझदार है आह.. उम्म्ह… अहह… हय… याह… कूद रानी मेरे लंड पे कूद आह.. कर दे इसको अपनी फुददी में गायब आह.. उहह ले आह.. ले पूरा खा ले।

चाचा भी अब नीचे से झटके मारने लगे थे और राबिया गांड को ऊपर-नीचे करके मज़ा ले रही थी। अब कमरे में दोनों की आहें गूँजने लगी थीं और चुदाई का तूफान जोरों पे था।

राबिया- आह.. चाचा आह जोर से आह.. काश मेरी शादी आपसे हुई होती आह.. मज़ा आ जाता आह.. कब से प्यासी थी में आह.. आज अपने मेरी फुददी को तृप्त कर दिया आह.. आह..

बहू की बातें चाचा को और जोश दिला रही थीं.. वो स्पीड से धक्के मारने लगे और राबिया को अपने ऊपर लेटा कर उसके निप्पल को चूसने लगे।

कुछ मिनट ये चुदाई चली, चाचा के तगड़े लंड के दमदार झटके राबिया की फुददी सह नहीं पाई और उसकी फुददी का बाँध टूट गया.. वो लंबी साँसें लेते हुए झड़ने लगी। राबिया तो ठंडी हो गई.. मगर चाचा के लंड का जोश तो वैसा का वैसा ही था। अब राबिया को लंड की चोट बर्दाश्त नहीं हो रही थी.. वो झट से लंड से उठ गई और फ़ौरन लंड को मुँह में लेकर चूसने लगी।

चाचा- आह साली छिनाल आह.. ये क्या किया फुददी में मज़ा आ रहा था.. उफ़ चूस साली चूस आह.. अब तुझे घोड़ी बना के ऐसे शॉट मारूँगा आह.. तू क्या याद करेगी।

थोड़ी देर लंड चूसने के बाद राबिया समझ गई कि ये लंड मुँह से नहीं फुददी से ही ठंडा होगा तो वो घोड़ी बन गई- आह.. चाचा ले आह.. कर ले अपना अरमान पूरा आह.. ले तेरी घोड़ी तैयार है आजा चढ़ जा!

चाचा खड़ा हुआ और राबिया के पीछे जाकर लंड को फुददी पे सैट किया फिर राबिया की कमर को कस के पकड़ के एक जोरदार धक्का मारा तो पूरा लंड एक हे बार में राबिया की फुददी में जड़ तक समा गया।

राबिया- आआईइ चाचा मार डाला रे.. उफ़ आह.. आज तो बरसों की चुदाई आपने एक ही रात में कर दी आह.. आ उफ़फ्फ़ मारो आह.. और धक्के मारो आह.. आ..

चाचा अब स्पीड से राबिया की फुददी में लंड पेल रहे थे और साथ में अपनी उंगली से राबिया की गांड का भी मुआयना कर रहे थे- आह.. ले साली रांड आह.. तेरी गांड तो बहुत कसी हुई लगती है आह.. फवाद ने इसको ज़्यादा नहीं चोदा होगा।

राबिया- आह.. ऑउच नहीं चाचा.. उफ़फ्फ़ प्लीज़ आप बस फुददी से ही संतुष्ट हो जाओ.. आह.. गांड नहीं ये आपका मूसल झेल नहीं पाएगी।

चाचा- क्यों रानी आह.. ले दुनिया में कोई फुददी और गांड ऐसी नहीं बनी जो लंड ना ले सके.. रानी अल्लाह ने ये बनाई ही चुदाई के लिए है आह.. ले आह आह ले..

चाचा अब बहुत तेज झटके मारने लगे थे.. उनका लंड फूलने लगा था। राबिया की फुददी तो फिर से झड़ गई मगर चाचा फिर भी 5 मिनट और उसको चोदते रहे, तब कहीं जाकर उनका लावा फूटा और वो निढाल होकर राबिया के पास लेट गए। चाचा ने राबिया को अपने सीने पे लिटा लिया।

चाचा- उफ साली क्या गर्म माल है रे तू कितनी चुदाई की.. साला मन ही नहीं भरता।

राबिया- आह.. चाचा आप हो ही असली मर्द.. कसम से मज़ा आ गया। अब तो जब तक यहाँ हूँ.. रोज ऐसे ही आपसे चुदाई करवाऊंगी।

चाचा- अच्छा मेरी रानी को लंड इतना पसंद आया.. मगर आज तो कोई नहीं इसलिए खुल कर चुदाई हो गई। रोज थोड़े ऐसा हो सकेगा.. कल तो सब यहाँ होंगे ही फिर?

राबिया- होने दो.. मुझे किसी का डर नहीं.. जब उस लड़के से चुदने मैं छत पर जा सकती हूँ.. तो आपसे क्यों नहीं?

चाचा- हा हा हा साली पक्की चुदक्कड़ है तू.. चल घबरा मत, मैं कोई ना कोई तरकीब लगा लूँगा। मगर आज बस एक बार तेरी गांड भी मार लेने दे.. साली बहुत कसी हुई है.. मेरा तो मन ललचा गया।

राबिया- नहीं चाचा, प्लीज़ नहीं, ये तो फवाद के लंड से ही बहुत दर्द करती है.. फिर आपका तो बम्बू है.. ये तो मेरी गांड को फाड़ ही देगा।

चाचा- अरे एक बार तो फुददी में भी दर्द होता है.. तू डर मत.. मैं हौले-हौले मारूँगा और वैसे ये खुली हुई तो है ही, तो ज़्यादा दर्द नहीं होगा तुझे।

राबिया- नहीं चाचा खुली हुई नहीं है, शादी के दस दिन बाद फवाद ने एक बार मारी थी.. मेरी जान निकल गई थी। उसके बाद कोई 2 महीने बाद दोबारा मारी तब भी वही हाल हुआ। बस तब से ना फवाद ने कहा.. ना मैंने कहा।

चाचा- ही ही राबिया रानी तभी कहूँ ये गुलाबी छेद ऐसे बंद क्यों है.. तू ज़िद ना कर मैं तो गांड मारके ही रहूँगा। अब तू मेरी रानी है.. मेरी बात मानने का तेरा फ़र्ज़ बनता है.. समझी!

राबिया- ठीक है चाचा.. आप इतना कह रहे हो तो मान लेती हूँ मगर मेरी भी एक शर्त है। आप आज मेरी गांड नहीं मारोगे.. क्योंकि आज तो फुददी का ही हाल बुरा हो गया.. आप कल मेरी गांड मार लेना।

चाचा- अरे पगली.. कल तो सब होंगे गांड में लंड जाएगा तो तुझे दर्द होगा और तू चिल्लाएगी, तो सबको पता लग जाएगा।

राबिया- नहीं चाचा.. आप मेरी चिंता मत करो मैं सब संभाल लूँगी प्लीज़ मान जाओ।

चाचा- अच्छा ठीक है.. मान गया मगर आज की रात फुददी तो मरवाएगी ना!

दोबारा चुदाई के नाम से राबिया की आँखें थोड़ी बड़ी हो गईं।

राबिया- अरे चाचा आप आदमी हो या घोड़े.. कितना चोदोगे? देखो मेरी फुददी का क्या हाल हो गया.. सूजन आ गई!

राबिया की बात सुनकर चाचा को हँसी आ गई- अब तू घोड़ा समझ या गधा.. भाई मेरी तो आदत है एक बार में कम से कम 3 या 4 बार चुदाई ना करूँ तो मज़ा नहीं आता।

राबिया- मन तो मेरा भी यही है मगर हाथ पैर जवाब दे गए। आपकी चुदाई इतनी लंबी होती है क्या बताऊं।

चाचा- अरे अभी थोड़े करूँगा.. तू थोड़ा आराम कर ले उसके बाद चुदाई करूँगा और वैसे तूने मेरा लंड रस भी नहीं पिया तो मैं अबकी बार तेरे मुँह में रस डालूँगा।

राबिया- समझ गई चाचा.. आप नहीं मानोगे.. चलो मुझे थोड़ा सोने दो कमर में दर्द हो रहा है। उसके बाद आप चाहे फुददी में पानी निकालो या मुँह में.. आपकी मर्ज़ी।

चाचा- चल ठीक है.. तू आराम कर मैं तब तक थोड़ा बाहर हो आता हूँ।

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