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अंतरवासना की कहानियाँ

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कमीना भाई और ताज़ा माल बहनें

रोहन लगभग तेईस साल का दिखने में अच्छी बॉडी वाला लड़का है, शादी नहीं हुई थी अभी।

परिवार में रोहन के अलावा उसके मम्मी पापा और दो बहनें एक उन्नीस साल की एक इक्कीस साल की… कहने का

मतलब ये कि एकदम फ्रेश ताज़ा माल थी दोनों की दोनों। छोटी का नाम पायल और बड़ी का नाम सोनम, दोनों का

ही फिगर मस्त, गोरा चिट्टा रंग, गोल गोल संतरे के आकार की चूचियाँ मस्त पतली कमर चिकना पेट और एकदम

कयामत गांड।

पायल दिखने में सोनम से ज्यादा खूबसूरत थी पर सोनम भी कुछ कम नहीं थी, कॉलोनी के लगभग सभी लड़के उन

दोनों बहनों को देख कर आहें भरते थे।

रोहन के पापा बिज़नस में व्यस्त थे और अक्सर बाहर जाते रहते थे। कभी कभी तो रोहन की मम्मी को भी साथ ही

ले जाते थे।

ऐसे में घर की सारी जिम्मेदारी रोहन पर ही थी।

इन जिम्मेदारियों में भी रोहन अपनी सेक्सी बहनों को देख कर अपने अरमानों को दबा नहीं पा रहा था।

रोहन की पहली पसंद रिश्तों में चुदाई वाली कहानियाँ थी और उनमे भी सबसे ज्यादा पसंद थी भाई बहन की

चुदाई वाली कहानियाँ। आरएसएस पर भाई बहन की चुदाई की कहानियाँ पढ़ता और फिर अपनी बहनों को याद

करकर के मुठ मारता।

यहीं से उसके मन में अपनी बहनों को चोदने की तमन्ना पनपने लगी थी।

पर वो क्या कर सकता था, कहानियाँ पढ़ पढ़ के वो बहनों को पटाने के तरीके खोजता रहता।

पर उसकी उन तरीकों को अपनी बहनों पर अजमाने में फट जाती!

डर ऐसी ही चीज़ होती है यार!

आखिर में जब कण्ट्रोल करना उसके लिए मुश्किल हो गया तो उसने सबसे पहले पायल को पटाने का सोचा।

मोबाइल इसके लिए सबसे अच्छा तरीका था।

सबसे पहले उसने एक प्लान बनाया कि वो पायल को भाई बहन की चुदाई वाली कहानियाँ पढ़ने को देगा।

पर कैसे???

बहुत सोचने के बाद उसने एक दोस्त की आईडी पर एक मोबाइल सिम लिया और whatsapp पर अपनी बहन के

नंबर पर भाई बहन की चुदाई की चार पांच कहानियाँ भेज दी।

उस समय पायल रोहन के पास ही बैठी हुई थी, अनजान नंबर से आये मैसज को देख कर उसने चेक किया तो उसमें

रोहन की भेजी हुई सेक्स कहानी थी।

पायल ने रोहन के पास बैठे बैठे ही थोड़ी सी पढ़ी तो वो शर्म से लाल हो गई, उसने मोबाइल बंद किया और उठ कर

अपने कमरे में चली गई।

रोहन जानता था कि पायल वो कहानी जरूर पढ़ेगी, उसने चेक करने के लिए पायल के कमरे के दरवाजे के पास

जाकर देखा तो पायल सच में मोबाइल पर वो कहानियाँ पढ़ रही थी और उसकी आँखें वासना की लाली से भर गई

थी।

रोहन को अपनी चाल कामयाब होती नजर आ रही थी।

पायल कहानियाँ पढ़ती रही और रोहन छुप कर उसको देखता रहा। पायल कहानियाँ पढ़ते पढ़ते गर्म होने लगी थी

तभी तो उसका हाथ अपनी स्कर्ट के अन्दर जा चुका था और वो अपने हाथ से अपनी चूत को सहला रही थी।

एक बार तो रोहन के मन में आया कि लोहा गर्म है, मार दे हथोड़ा…

पर जल्दबाजी घातक हो सकती थी, उसने सब्र करना ठीक समझा।

थोड़ी देर बाद उसने हैलो का मैसेज पायल के नंबर पर भेजा तो थोड़ी देर बाद पायल का भी मैसेज आया- हू आर

यू?

रोहन कुछ देर सोचता रहा फिर उसने भी मैसज किया- मैं आपका दीवाना हूँ। जब भी आपको देखता हूँ आपको

अपनी बाहों में भरने को जी चाहता है और आपको चूमने को जी चाहता है और आपके साथ एक बार चुदाई करने

का जी चाहता है।

जवाब आया- बकवास बंद करो, जब मैं आपको जानती ही नहीं तो आपकी हिम्मत कैसे हुई मुझे ऐसे मैसज करने

की। अगर दुबारा ऐसा मैसज किया तो मैं अपने भाई को बोल दूंगी।

रोहन- हा हा हा… वैसे तुम्हें कहानियाँ कैसी लगी?

पायल का कोई जवाब नहीं आया।

रोहन ने दुबारा फिर मैसज किया कि अगर पायल और कहानियाँ पढ़ना चाहे तो वो उसे और भेज देगा।

पायल का फिर कोई जवाब नहीं आया।

रोहन ने एक और कहानी पायल के नंबर पर भेज दी।

पायल ने फिर से कहानी पढ़नी शुरू कर दी।

इस बार रोहन ने देखा की पायल ने अपनी पेंटी उतार दी और स्कर्ट को भी ऊपर कर लिया और कहानी पढ़ते पढ़ते

एक ऊँगली अपनी चूत में डाल कर हिलानी शुरू कर दी।

रोहन ने चुपचाप से उसकी ऐसा करते हुए की वीडियो बना ली।

अगले दो दिन तक रोहन ने कोई मैसज नहीं भेजा।

तीसरे दिन रोहन के पास पायल का हैलो का मैसज आया।

रोहन का दिल जोर जोर से धड़कने लगा, उसने हिम्मत करके हैल्लो का जवाब दिया।

पायल का मैसज आया कि अगर उसके पास और कहानियाँ है तो वो उसे भेज दे।

रोहन ने पूछा कि क्या उसे वो कहानियाँ पसंद आई तो पायल ने हाँ में जवाब दिया साथ ही पूछा कि क्या वो सारी

कहानियाँ सच हैं?

रोहन ने हाँ बोला तो पायल पूछने लगी कि कोई लड़की कैसे अपने सगे या कजिन भाई से ऐसे सेक्स कर सकती है।

रोहन ने झूठ बोलते हुए लिख दिया कि वो भी अपनी सगी बहन के साथ सेक्स करता है क्यूंकि यह बिल्कुल सेफ है,

ना तो बाहर मुँह मारने की जरूरत और घर की इज्जत घर में ही रह जाती है।

पायल ने जवाब में कमीना लिखा।

तो रोहन ने बदले में पूछ लिया कि क्या कहानियाँ पढ़ कर पायल का मन नहीं किया कि वो भी अपने भाई के साथ

चुदाई के मज़े ले।

पायल ने मना कर दिया और बोली कि उसे सेक्स में कोई रूचि नहीं है।

रोहन ने पूछा कि अगर रूचि नहीं है तो वो और कहानियाँ क्यों मांग रही है।

तो पायल ने जवाब दिया कि सिर्फ टाइमपास के लिए।

रोहन भी अब कमीनेपन पर आ गया था, वो चुपचाप पायल के पास जाकर बैठ गया और उसने पायल से पूछ लिया

कि क्या पायल ने कभी अपने भाई का लंड देखा है?

मैसज पढ़ते ही पायल ने रोहन की तरफ देखा और फिर जवाब लिख दिया कि ‘नहीं उसने नहीं देखा है।’

रोहन ने पूछा कि क्या पायल का दिल करता है अपने भाई का लंड देखने का?

तो पायल ने मना कर दिया।

रोहन पायल के पास बैठा हुआ पायल के चेहरे के हावभाव पढने की कोशिश कर रहा था।

स्पष्ट था कि पायल मैसज पढ़ कर गर्म हो रही थी और बार बार रोहन की तरफ और रोहन की बरमूडा में बने तम्बू

की तरफ देख रही थी।

पायल नहीं जानती थी की खुद उसका भाई उसके पास बैठ कर ये कमीनापन कर रहा था।

रोहन ने फिर से एक मैसज किया कि अगर उसका भाई उसको चोदना चाहे तो क्या वो उसको चोदने देगी?

पायल ने दो तीन गालियाँ लिख कर वापिस भेजी और मोबाइल से नेट बंद कर दिया।

मोबाइल बंद होते ही रोहन उठ कर पायल के बिल्कुल पास बैठ गया और पायल के बदन के साथ सटते हुए उसको

अपने फ़ोन में एक फनी विडियो क्लिप दिखाने लगा।

पर उसने गौर किया की पायल का ध्यान मोबाइल पर कम रोहन के टावर पर ज्यादा है।

उसने बेशर्मी से पायल के सामने ही अपने लंड को पकड़ कर नीचे दबाया जैसे तो उसको सेट करने की कोशिश कर

रहा हो।

रोहन का लंड कम से कम सात इंच का लम्बा और लगभग अढाई इंच का मोटा था। बरमूडा में तम्बू बना हुआ साफ़

नजर आ रहा था।

रोहन ने जब अपने लंड को मसला तो पायल ने एकदम से अपनी नजरे दूसरी तरफ घुमा ली और उठ कर अपने

कमरे की तरफ तेज कदमों से चली गई।

रोहन की लगाईं हुई आग अब भड़कने लगी थी।

पायल के जाने के कुछ देर बाद रोहन उठ कर पायल के कमरे की तरफ गया तो दरवाजा अन्दर से बंद था। पर रोहन

जानता था कि कहाँ से पायल के कमरे के अन्दर झाँका जा सकता है।

वो जल्दी से वहाँ पहुंचा तो रोहन की आशा के अनुरूप पायल अपनी चूत ऊँगली से रगड़ रही थी।

घर में अगर बाकी लोग ना होते तो शायद रोहन उसी समय पायल को चोदने उसके कमरे में पहुँच जाता। पर अभी

घर पर मम्मी और सोनम भी थे।

रोहन ने फिर से दो तीन दिन पायल को कोई मैसज नहीं किया और पायल के मैसज का इंतजार करने लगा।

तीसरे दिन पायल का मैसज आया की कहानी भेजो।

रोहन ने फिर से उसको दो-तीन कहानियाँ भेज दी।

पायल ने फिर से कहानियाँ पढ़ी और फिर से अपनी चूत में ऊँगली कर ली। अब रोहन का मन मचलने लगा था

पायल की चूत में अपना लंड घुसाने को।

बहुत हिम्मत करके उसने पायल को चेक करने की सोची। शाम के समय जब सोनम और मम्मी रसोई के काम में

व्यस्त थी तो रोहन ने देखा पायल मोबाइल पर कुछ कर रही थी, शायद कहानी ही पढ़ रही थी।

रोहन पायल के कमरे में गया और पायल से बिलकुल चिपक कर बैठ गया और उसने अपना हाथ पायल के कंधे पर

रखा और पायल से बोला- क्या बात है पायल आजकल सारा सारा दिन मोबाइल से ही चिपकी रहती हो, भाई से

बात करने का भी समय नहीं है तुम्हारे पास?

पायल ने घबरा कर मोबाइल साइड में रख दिया, उसने कुछ जवाब नहीं दिया पर रोहन ने पायल के शरीर में कुछ

कम्पन सी महसूस की।

पायल रोहन की बाहों में सिमटती जा रही थी, रोहन के स्पर्श ने शायद पायल की पेंटी में हलचल मचा दी थी।

रोहन ने अपना हाथ पायल के कंधे से सरका कर उसकी बगल में रख दिया और पायल को अपनी और खिंच कर

बिलकुल अपनी बाहों में भर लिया।

ऐसा करने से उसका हाथ पायल की चूची पर पड़ गया।

रोहन को जब पायल की मुलायम चूची का एहसास हुआ तो रोहन ने चूची को हल्के से दबा दिया। पायल चूची पर

रोहन का हाथ महसूस करते ही उचक पड़ी और एकदम से रोहन से अलग होकर रसोई में चली गई।

उस दिन के बाद से अब रोहन हर रोज पायल के बदन को छूने की कोशिश करता। शुरू शुरू में तो पायल झट से उठ

कर वहाँ से चली जाती थी पर जब ये हर रोज होने लगा तो पायल को भी शायद ये अच्छा लगने लगा था, अब वो

आराम से बैठी रहती थी या यूँ कहिये की वो अब रोहन से कुछ ज्यादा ही चिपक कर बैठी रहती थी।

रोहन भी कभी उसके गाल कभी माथे पर चूमता और बीच बीच में पायल को चूची को स्पर्श करता या हल्के से दबा

देता।

वो दोनों ये सब अपनी मम्मी और सोनम की निगाह से बचा कर करते थे, अब दोनों को ही एक दूसरे का स्पर्श

अच्छा लगने लगा था। ऐसे ही करीब पंद्रह दिन निकल गए।

और उस दिन…

रोहन शाम को चार बजे अपने कॉलेज से वापिस आया तो देखा कि घर पर कोई नहीं था, वो पहले अपनी मम्मी के

कमरे में गया, वो वहाँ नहीं थी।

फिर सोनम का कमरा देखा तो वो भी नहीं थी।

आखिर में जब वो पायल के कमरे के पास पहुँचा तो पायल मोबाइल पर शायद कोई कहानी पढ़ रही थी और उसने

स्कर्ट उतार कर साइड में रखी हुई थी, पेंटी भी जांघो से नीचे थी, एक हाथ में मोबाइल और दूसरे हाथ की ऊँगली

चूत में थी।

रोहन को एक दम से अपने कमरे में देख कर पायल घबरा गई और उसने जल्दी से अपनी पेंटी ऊपर की और स्कर्ट

उठा कर जल्दी से बाथरूम में घुस गई।

रोहन ने पायल को आवाज दी पर पायल ने कोई जवाब नहीं दिया।

‘पायल… पायल, अगर तुम बाहर नहीं आई तो मैं सब कुछ मम्मी को बता दूंगा.. एक मिनट में बाहर आओ वरना…’

पायल ने डरते हुए दरवाजा खोला, वो स्कर्ट पहन चुकी थी, वो घबरा कर रोने लगी।

रोहन ने उसका हाथ पकड़ा और उसको लेकर बेड पर बैठ गया- यह क्या कर रही थी पगली…?

‘भैया… प्लीज मम्मी को कुछ मत बताना… यह गलती दुबारा नहीं होगी!’ कह कर पायल जोर जोर से रोने लगी।

रोहन को तो जैसे सुनहरा मौका मिल गया था पायल को अपना बनाने का, उसने पायल को अपने सीने से लगा

लिया और चुप करवाने के बहाने पायल के शरीर पर अपना हाथ घुमाने लगा- कोई बात नहीं पायल.. इस उम्र में ये

सब हो जाता है… तू तो मेरी अच्छी बहन है ना… मैं किसी को कुछ नहीं बताउँगा, वैसे मम्मी और सोनम कहाँ गए

है?

‘वो मार्किट में गए हैं कुछ सामान लेने…’

पायल चुप हुई तो रोहन ने पायल का चेहरा ऊपर उठाया और उसकी आँखों से बहते आँसुओं को अपने होठों से चूम

लिया। पायल की आँखें बंद हो गई थी।

रोहन ने मौके का फायदा उठाया और अपने होंठ अपनी छोटी बहन के जवान रसीले होंठों पर रख दिए।

पायल ने छूटने की कोशिश की पर रोहन की मजबूत पकड़ से छुट नहीं पाई, रोहन अब पायल के रसीले होंठो का

रस पीने में लगा था।

कुछ देर छूटने के लिए छटपटाने के बाद पायल ने भी समर्पण कर दिया और अब उसका शरीर ढीला पड़ने लगा था।

रोहन ने पायल के होंठ चूमते हुए एक हाथ पायल की मुलायम चूची पर रख दिया और मसलने लगा।

पायल की साँसें तेज हो गई थी और वो भी अब रोहन से चिपकती जा रही थी।

रोहन ने पायल को खड़ा किया और उसके टॉप को ऊपर करने लगा तो पायल ने रोहन को रोकने की कोशिश की- ये

सब ठीक नहीं है भाई… हमें ऐसा नहीं करना चाहिए… आखिर हम बहन भाई हैं।

‘पायल, मैं तुम्हें बहुत प्यार करता हूँ… और बहुत दिनों से तुम्हें अपना बनाने का सपना देख रहा हूँ… आज अगर मेरा

सपना पूरा होने जा रहा है तो प्लीज मुझे मत रोक..’

पायल ‘नहीं भाई नहीं भाई’ करती रही पर रोहन ने उसकी एक ना सुनी और उसका टॉप उतार दिया।

पायल ने ब्रा नहीं पहनी हुई थी, टॉप उतारते ही उसकी दोनों संतरे के साइज़ की तनी हुई चूचियाँ रोहन के सामने

थी।

रोहन को तो जैसे कुबेर का खजाना मिल गया था, उसने कुछ देर पायल की दोनों चूचियों को अपने हाथों में मसला

और फिर पायल की एक चूची को मुँह में लेकर चूसने लगा।

पायल के जवान जिस्म को पहली बार किसी मर्द के हाथों का ऐसा मज़ा मिला था, वो मस्ती के मारे कांपने लगी

थी।

रोहन बेड पर बैठे बैठे नीचे खड़ी पायल की चूचियाँ चूस रहा था और उसके हाथ पायल की नंगी पीठ पर, पायल की

गदराए चूतड़ों पर घूम रहे थे।

चूचियाँ चूसते चूसते रोहन ने पायल की स्कर्ट खोल दी और स्कर्ट पल भर में ही पायल के कदम चूमने लगी।

स्कर्ट नीचे होते ही रोहन ने अपना एक हाथ पायल की कुंवारी चूत पर रख दिया।

पेंटी में कसी चूत भट्टी की तरह गर्म थी, पूरी पेंटी पायल की चूत से निकले कामरस से सराबोर हो रही थी।

रोहन नीचे घुटनों के बल बैठा और उसने पायल की टांगें खुली की और फिर अपना मुँह पायल की चूत पर लगा

दिया और जीभ से चाटने लगा।

पायल की टांगें जवाब देने लगी थी, उससे अब खड़ा नहीं हुआ जा रहा था।

रोहन ने पायल की पेंटी को भी उसकी जांघों से नीचे खींच दिया।

पायल की सुनहरी बालों से ढकी कुंवारी गुलाबी चूत देखते ही रोहन ने अपनी जीभ चूत पर लगा दी।

जीभ के पहले स्पर्श को महसूस करते ही पायल की चूत ने कामरस छोड़ दिया।

रोहन की जीभ कामरस का स्वाद महसूस करते ही और जोर जोर से चूत पर चलने लगी और सारा कामरस चाट

गई।

झड़ने के कारण पायल का बदन एक पल के लिए थोड़ा सा ढीला हुआ तो रोहन ने पायल को बेड पर लेटा दिया।

पायल को बेड पर लेटाने के बाद रोहन ने अपनी पेंट और अंडरवियर एक साथ नीचे की और अपना लम्बा और मोटा

लंड निकाल कर पायल के मुँह के पास कर दिया।

मोटा लंड देख कर पायल घबरा गई, पायल ने शायद लंड को प्रत्यक्ष पहली बार देखा था।

रोहन ने अपना लंड पायल के होंठो से लगाया तो पायल ने मुँह फेर लिया- भाई, मुँह में मत लगाओ, ये गन्दा है!

‘पगली जिसे तू गन्दा कह रही है, लड़कियाँ तरसती है इसे मुँह में लेने के लिए… एक बार ले कर देख, फिर बार बार

चूसने का मन ना करे तो कहना..’

पायल ना ना करती रही पर रोहन ने जबरदस्ती लंड का सुपाड़ा पायल के मुँह में घुसा दिया।

पायल तड़प उठी थी पर वो बेबस थी, शुरू में पायल ने बुझे मन से लंड के सुपारे पर जीभ चलाना शुरू किया पर

फिर पायल को भी लंड से निकले कामरस का स्वाद अच्छा लगने लगा और वो मस्ती में लंड को आइसक्रीम की तरह

चाटने और चूसने लगी।

अपनी सगी बहन के ऐसा करने से रोहन तो मस्ती के मारे सातवें आसमान पर था, उसकी मस्ती भरी आहें और

सिसकारियाँ निकल रही थी।

रोहन ने पायल को बेड पर सीधा किया और 69 की अवस्था में आते हुए लंड को पायल के मुँह में देते हुए अपनी

जीभ पायल की कुंवारी चूत पर रख दी।

दोनों भाई बहन मस्त होकर एक दुसरे के यौन अंगों को चाट और चूम रहे थे, दोनों दिन-दुनिया से बेखबर मस्ती में

लगे हुए थे।

कुछ देर की चूसा चुसाई के बाद पायल की चूत से अमृत वर्षा होने लगी तो रोहन के लंड ने भी पिचकारी छोड़ कर

पायल का मुँह वीर्य से भर दिया।

पायल को एक बार तो उबकाई आई पर रोहन का लंड अभी भी पायल के मुँह के अन्दर था तो बेबसी में वो सारा

माल गटक गई।

दोनों ही पस्त हो चुके थे पर असली काम तो अभी बाकी था।

तभी पायल बोली- भाई अब और मत करो, मम्मी और सोनम अब आने वाले होंगे और अगर कहीं वो बीच में आ

गए तो सारा मज़ा ख़राब हो जाएगा।

रोहन अब रुकना नहीं चाहता था क्यूंकि ऐसा मौका दुबारा मिलना मुश्किल था। फिर भी रोहन ने सोनम को फ़ोन

किया यह सुनिश्चित करने के लिए कि वो लोग कितनी देर में आ रहे हैं।

फ़ोन रोहन की मम्मी ने उठाया और बताया की अभी कम से कम दो घंटे और लगेंगे उनको आने में।

इतना समय तो पायल और रोहन के लिए बहुत था अपनी कामेच्छा को शांत करने के लिए।

फ़ोन काटते ही रोहन एक बार फिर से पायल पर छा गया और अपना लंड एक बार फिर से पायल के होंठों के हवाले

कर दिया।

मात्र दो मिनट में ही रोहन का लंड फिर से लोहे की छड़ की तरह सख्त हो गया था।

रोहन ने पायल को बेड के किनारे पर लेटाया और उसकी टांगों को अपने कंधे पर रख कर एक बार फिर अपनी जीभ

पायल की चूत पर लगा दी।

थूक से पायल की चूत को अच्छे से गीला करने के बाद रोहन ने खड़े होकर अपने लंड का सुपाड़ा पायल की चूत पर

रगड़ना शुरू कर दिया।

पायल अपनी पहली चुदाई से पहले घबरा रही थी, वो रोहन को बोली- भाई, मेरा पहली बार है और मुझे बहुत डर

लग रहा है, फिर तुम्हारा लंड भी तो देखो कितना मोटा और लम्बा है जबकि मेरी चूत का छेद कितना छोटा सा है।

‘मेरी जान जिसे तू छोटा सा छेद कह रही है, उसमें तो सारा का सारा जहान समा जाए फिर भी जगह बच जायेगी…

तू घबरा मत तेरा भाई अपनी बहन की चुदाई बहुत प्यार से करेगा।’

रोहन के लंड के चूत पर रगड़ने से पायल की चूत भी अब लंड को अन्दर लेने के लिए बेचैन होने लगी थी। वो भी

बार बार गांड उठा कर लंड का स्वागत करने लगी थी।

तभी रोहन ने थोड़ा लंड को चूत में दबाया तो पायल के चेहरे पर दर्द की लकीरें दिखाई देने लगी।

रोहन ने भी अंदाजा लगाया कि ऐसे तो पायल की चूत फट जायेगी और यह शोर भी बहुत मचाएगी, वो उठा और

पास में रखी तेल की शीशी लेकर आया और ढेर सारा तेल पहले पायल की चूत पर लगाया और फिर अपने लंड का

सुपारा भी तेल में अच्छे से तर कर लिया और फिर से लंड को पायल की चूत पर रगड़ने लगा।

‘भाई और कितना तड़पाओगे अब डाल भी दो अन्दर… अब नहीं रुका जा रहा है!’ बस यह बोल कर पायल ने अपनी

शामत बुला ली क्यूंकि यह सुनते ही रोहन ने जोश जोश में लंड के सुपारे को चूत के मुहाने पर लगा कर एक जोरदार

धक्का लगा दिया और फट की आवाज के साथ रोहन के लंड का सुपाड़ा पायल की चूत के अन्दर था।

पायल नहीं जानती थी कि पहली चुदाई में चूत के साथ साथ गांड भी फट जाती है, वो जोर से चीख पड़ी और दर्द के

मारे हाथ पैर मारने लगी।

रोहन ने पायल के होंठों पर होंठ रख कर उसको शांत करने की कोशिश की।

पायल रोहन के नीचे दबी हुई छटपटा रही थी, लंड अभी सिर्फ दो इंच ही घुसा था।

रोहन ने देर करना सही नहीं समझा और एक बार उचक कर फिर से दो जोरदार धक्के लगा कर आधे से ज्यादा लंड

पायल की चूत में उतार दिया।

पायल की हालत ऐसी थी कि जैसे अभी बेहोश हो जायेगी।

चूत से खून निकल कर गांड तक फ़ैल गया था। रोहन का लंड भी जैसे किसी शिकंजे में फंस गया था क्यूंकि पायल की

कुंवारी चूत थी ही इतनी टाईट।

फिर भी रोहन ने एक लम्बी सांस ली और फिर लगातार दो तीन धक्के लगा कर पूरा लंड पायल की चूत में फिट कर

दिया।

अब रोहन ने धक्के लगाने बंद कर दिए और पायल की चूचियों को मुँह में लेकर चुम्भ्लाने लगा और दूसरी को मसलने

लगा।

पायल दर्द के मारे अभी भी रोये जा रही थी।

‘बस मेरी बहना… बस अब दर्द नहीं होगा… देख पूरा लंड तेरी चूत में जा चुका है। जिसे तू छोटा सा छेद कहती थी

वो छेद मेरा पूरा सात इंच का लंड निगल गया है।’

‘प्लीज भाई, बहुत दर्द हो रहा है प्लीज निकाल लो… मेरी चूत फट गई है… प्लीज मुझे नहीं चुदवाना…’

‘अरे देख तो पूरा लंड घुस चुका है अब दर्द नहीं होगा…’

रोहन लगातार पायल की चूचियों और होंठों को चूमता रहा।

करीब दो तीन मिनट बाद पायल को अपना दर्द कुछ कम होता महसूस हुआ तो वो भी रोहन के चुम्बन का जवाब

चुम्बन से देने लगी। रोहन ने भी ग्रीन सिग्नल मिलते ही लंड को कुछ हरकत दी, उसने धीरे धीरे अपना लंड चूत से

लगभग आधा निकाला और फिर धीरे धीरे ही दुबारा पायल की चूत में उतार दिया।

पायल को दर्द हुआ पर अब वो इस दर्द को सहने के लिए तैयार थी।

ऐसे ही पहले धीरे धीरे लंड को अन्दर बाहर करते करते रोहन ने अपने धक्को की स्पीड बढ़ा दी। पायल की चूत ने भी

थोड़ा पानी छोड़ दिया था जिस कारण थोड़ा चिकनापन आ गया था चूत में और लंड अब पायल की चूत में फिसलने

लगा था।

पायल को भी अब चुदाई में मज़ा आने लगा था, वो भी अब रोहन के हर धक्के का स्वागत अपनी गांड उठा उठाकर

कर रही थी जो इस बात का सबूत था कि अब दोनों मज़े में थे।

करीब पांच मिनट और धीरे धीरे चुदाई चली फिर तो जैसे बेड पर तूफ़ान आ गया और दोनों बहन भाई जोरदार

चुदाई में लीन हो गए, दोनों एक दूसरे को पछाड़ने की कोशिश कर रहे थे।

लगभग दस मिनट के बाद पायल का शरीर अकड़ा और एक सरसराहट के साथ पायल की चूत पानी फेंकने लगी।

पायल की चूत का पानी रोहन को अपने लंड के पास से जाता हुआ साफ़ महसूस हो रहा था।

झड़ने के बाद पायल थोड़ी सुस्त हुई पर रोहन लगातार धक्के पर धक्के लगा रहा था।

कुछ देर की चुदाई के बाद पायल फिर से हरकत में आई और रोहन के धक्कों का जवाब देने लगी।

एक ही आसन में चुदाई करते करते रोहन अब कुछ अलग करने के मूड में था तो उसने पायल को बेड पर घोड़ी बना

लिया और फिर पीछे जाकर अपना लंड फिर से पायल की चूत में उतार दिया।

और फिर से चुदाई शुरू हो गई, रोहन के टट्टे हर धक्के के साथ थाप दे रहे थे और कमरे में फच्च फच्च की आवाज आने

लगी थी जो कमरे के माहौल को मादक बना रही थी।

समय का अंदाज नहीं पर ये चुदाई बहुत लम्बी चली और फिर पहले पायल की चूत ने तीसरी बार अपने काम रस से

रोहन के लंड को भिगो दिया और फिर कुछ देर बाद रोहन के लंड ने भी पायल की चूत को वीर्य से लबालब भर

दिया।

झड़ते ही दोनों पस्त होकर लेट गए।

रोहन का लंड अभी भी पायल की चूत में ही था जो की कुछ देर बाद सुकड़ कर फ़क की आवाज के साथ बाहर

निकल गया।

लंड के निकलते ही पायल की चूत से रोहन का वीर्य निकलकर बेड की चादर पर फैलने लगा।

करीब पांच मिनट बाद दोनों की साँसें थोड़ी शांत हुई तो पायल उठी।

पूरी चादर पर पायल की चूत से निकले खून और चुदाई से निकले कामरस के धब्बे ही धब्बे नजर आ रहे थे।

कॉलोनी के लड़कों की तरह ही रोहन भी अपनी बहनों की खूबसूरती का दीवाना था और इसी दीवानगी में उसने

अपनी छोटी बहन पायल को उत्तेजित किया और फिर एक दिन मौका मिलते ही उसकी कुंवारी चूत अपने लंड के

नाम कर ली।

तब से रोहन और पायल की मस्ती जोरों से चल रही थी।

रोहन को तीन महीने हो चुके थे पायल की चूत चोदते हुए… सब कुछ भूल कर रोहन और पायल चुदाई का आनन्द

ले रहे थे।

पर कहते हैं ना इश्क और मुश्क (खुशबू) छिपाए नहीं छिपते।

सोनम को रोहन और पायल पर शक होने लगा था। इस बात का अंदाजा रोहन और पायल दोनों को हो चुका था,

अब पायल रात को चुदने के लिए रोहन के कमरे में जाने से डरने लगी थी।

एक दिन पायल ने रोहन से इस बारे में बात की- भाई… पता नहीं क्यों पर आजकल मुझे सोनम दीदी से डर सा

लगने लगा है!

‘क्यों.. ऐसा क्या हो गया?’

‘भाई.. जब ही तुम और मैं साथ में होते हैं तो सोनम दीदी अजीब सी नजरों से देखती है… मुझे तो लगता है कि उन्हें

हम पर शक हो गया है!’

‘हाँ… कभी कभी लगता तो मुझे भी है।’

‘कुछ सोचो भाई… अगर दीदी को पता लग गया तो वो मम्मी को बता सकती है और अगर मम्मी को पता लग गया

तो समझ लो हम दोनों तो गए काम से..’

‘मेरी रानी… बात तो सही है पर किया क्या जाए? बाहर जाकर भी चुदाई करना सुरक्षित नहीं है और घर में सोनम

और मम्मी का डर!’

‘कुछ तो करना पड़ेगा ना भाई… तुमने मुझे तो लत भी ऐसी लगा दी है कि चुदाई बिना तो मैं रह ही नहीं पाती हूँ।’

‘एक तरीका है… पर है थोड़ा मुश्किल और खतरनाक भी!’

‘क्या तरीका है बताओ तो ज़रा?’

‘क्यों ना हम सोनम को भी अपने चुदाई के खेल में शामिल कर लें? एक बार अगर वो चुद गई तो फिर वो कभी कुछ

नहीं बोलेगी… पर खतरा यह है कि अगर वो नहीं मानी तो समझो की हम अपने पाँव पर खुद कुल्हाड़ी मार लेंगे ‘

‘ये तो है भाई… पर कुछ ना कुछ तो करना ही पड़ेगा.. वैसे एक बात तो है जब तुम मुझे अपने जाल में फंसा कर चोद

सकते हो तो सोनम को चोदते हुए तुम्हारी गांड क्यों फट रही है?’

‘चलो कोशिश करके देखते है… शायद काम बन ही जाए..’

दोनों ने मन बनाया कि रोहन सोनम को उत्तेजित करने की कोशिश करेगा और पायल सोनम के अन्दर वासना की

आग, कामुकता को बढ़ाने का काम करेगी ताकि सोनम भी चुदने को तैयार हो जाए।

रोहन ने वही पुराना तरीका आजमाने की सोची और उसने अनजान नंबर से सोनम के whatsapp पर भाई बहन

की चुदाई की कहानियाँ भेज दी।

उस समय पायल और सोनम साथ साथ बैठी थी, सोनम ने वो कहानी देखी और थोड़ी सी पढने के बाद छी.. कह कर

डिलीट कर दी। पायल का दिल धक् हुआ कि शायद सोनम पर यह तरीका काम नहीं करेगा।

पर वासना अच्छे अच्छे का दिमाग हिला देती है तो सोनम क्या चीज थी।

जब रोहन को पता लगा कि सोनम ने वो कहानियाँ डिलीट कर दी है तो एक बार तो वो भी परेशान हुआ पर उसने

हिम्मत करके फिर से दो तीन कहानियाँ भेज दी।

दुबारा कहानियाँ देख कर सोनम गुस्से से लाल हो गई और भेजने वाले को गालियाँ देने लगी।

पायल ने पूछा- क्या हुआ?

तो बोली- कोई कमीना गन्दी गन्दी कहानियाँ भेज रहा है।

‘ऐसा क्या है इन कहानियों में…?’ पायल ने कुरेदते हुए पूछा।

‘गन्दी कहानियाँ है यार… भाई बहन के साथ सेक्स कर रहा है… ऐसा भी कही होता है क्या..’

‘ओह्ह्ह…’

‘अगर वो कमीना मुझे मिल जाए तो कमीने की टाँगें तुड़वा दूंगी रोहन को कह कर!’

सोनम की बात सुनकर पायल अपनी हँसी नहीं रोक पा रही थी क्यूंकि वो तो जानती ही थी कि वो कमीना और

कोई नहीं, रोहन ही तो है।

‘पर तुम भाई को कहोगी क्या…’

सोनम कुछ नहीं बोली बस उठ कर अपने कमरे में चली गई।

कुछ देर बाद पायल के मन में आया कि देखें तो सही सोनम क्या कर रही है… कही वो कहानियाँ तो नहीं पढ़ रही है

अकेले में?

पायल का शक सही था… सोनम अपने बेड पर लेती हुई whatsapp पर वही कहानियाँ पढ़ रही थी। पायल ने

तुरन्त रोहन को फ़ोन करके बोला कि लोहा गर्म है।

रोहन ने फिर से सोनम को हेल्लो का मैसेज किया।

सोनम का कुछ देर बाद जवाब आया- तू कौन है कमीने और तेरी हिम्मत कैसे हुई मेरे पास ऐसी गन्दी गन्दी

कहानियाँ भेजने की?

‘ओह्ह.. तुम्हे कैसे पता कि ये कहानियाँ गन्दी हैं… तुमने पढ़ ली क्या… वैसे कौन सी कहानी ज्यादा पसंद आई?’

‘कमीने मैं तेरा नंबर पुलिस में दे रही हूँ… तेरी ऐसी तैसी ना करवाई तो मेरा भी नाम सोनम नहीं…’

‘क्या बात है… बहुत खूबसूरत नाम है तुम्हारा… सोनम…’

‘तू है कौन…?’

‘मैं जो भी हूँ… बस इतना जानता हूँ… कि तुम जवान हो खूबसूरत हो… अब तुम्हारा दिल भी करता होगा चुदाई

करवाने का…’

‘चुप कर कमीने…’

‘क्यों… तुम्हारी चूत में खुजली नहीं होती क्या… तुम्हारा मन नहीं करता क्या कि कोई आये और तुम्हारी जवानी को

चुदाई करके और निखार दे..’

‘नही… मुझे ये सब बिलकुल भी पसंद नहीं है।’

‘क्या तुम जानती हो तुम्हारी छोटी बहन चुदाई का मज़ा ले चुकी है…’

‘झूठ.. तुम यह कैसे कह सकते हो?’

‘क्यूंकि उसने मेरे एक दोस्त से ही तो चुदवाया है पहली बार.. और अब तो लगभग हर रोज वो चुदवाती है…’

‘नाम बताओ उस दोस्त का..’

‘वो मैं नहीं बता सकता…’

‘नहीं बता सकते तो दफा हो जाओ.. और दुबारा मुझे मैसेज मत करना… समझे!’

यह कह कर सोनम ने अपने फ़ोन का नेट बंद कर दिया।

सोनम जिसको पायल पर पहले से ही शक था वो हैरान और परेशान थी कि क्या करे? उलझन अब बढ़ गई थी।

शाम को जब मम्मी सब्जी लेने बाज़ार गई तो सोनम ने पायल को अपने कमरे में बुलाया- पायल मुझे पता लग गया

है कि तुम किसी लड़के के साथ सेक्स करती हो… क्या ये सच है?

पायल ने पहले तो झूठमूठ की घबराहट दिखाई और फिर सोनम के पास जाकर बोली- दीदी, वो मेरा एक बॉयफ्रेंड

है, उसने एक बार जबरदस्ती मेरे साथ सेक्स किया था!

‘बस एक बार? झूठ मत बोल मुझे सब पता है कि तू लगभग हर रोज सेक्स करती है…’

‘सच है दीदी… वो एक बार सेक्स करने के बाद मैं अपने आप को रोक ही नहीं पाई, अब तो डेली सेक्स करने का मन

करता है… क्या आप का नहीं करता?’

सोनम ने कोई जवाब नहीं दिया।

पायल सोनम के पास जाकर बैठ गई- मैं तो कहती हूँ दीदी की तुम भी एक बार चुदाई का मज़ा ले ही लो… सच में

बहुत मज़ा आता है चुदवाने में..’

पायल का ऐसा बोलना था कि सोनम ने तपाक से एक थप्पड़ पायल के मुँह पर मार दिया।

पायल थप्पड़ खा कर तिलमिला उठी और गुस्से में बोली– मैं भी देखती हूँ कि कब तक तुम अपनी चूत संभाल कर

रखती हो… चुदना तो है ही तुम्हें भी… नहीं तो इतनी मगन होकर चुदाई की कहानियाँ नहीं पढ़ रही होती अपने

फ़ोन पर। मैंने सब देख लिया है… दिल तो तुम्हारा भी कर रहा है पर बड़ी बहन हो ना.. तो छोटी पर रौब तो

दिखाना बनता ही है।

यह कह कर पायल कमरे से बाहर निकल गई।

माहौल तनाव पूर्ण था, पायल की फट रही थी कि कहीं सोनम मम्मी को ये सब ना बता दे।

फिर सोचा जो होगा देखा जाएगा।

सोनम ने किसी को कुछ नहीं बताया।

उधर रोहन ने तीन चार कहानियाँ और भेज दी भाई बहन की चुदाई वाली।

रात को कमरे में अकेले पड़े पड़े सोनम पायल के बारे में सोच रही थी तभी उसका ध्यान मोबाइल पर आई

कहानियों पर गया, वो ऐसे ही पढ़ने लगी।

पढ़ते पढ़ते सोनम पर भी सरूर सा चढ़ने लगा, आखिर उस पर भी तो नई नई जवानी फूटी थी। कहानियाँ पढ़ते

पढ़ते उसकी चूत में भी कीड़े कुलबुलाने लगे, चूत में गुदगुदी सी महसूस होने लगी और कब उसका हाथ अपने लोअर

में चला गया और कहानी पढ़ते पढ़ते अपनी चूत सहलाने लगी।

कहानी पढ़ते पढ़ते बार बार सोनम सिर्फ यही सोच रही थी कि क्या लड़कियाँ सच में अपने सगे या कजिन भाई से

चूत चुदवा लेती हैं। सोनम को शक तो था ही कि पायल शायद रोहन के साथ सेक्स करती है ये कहानियाँ पढ़ कर

उसे कुछ कुछ विश्वास भी होने लगा था कि कहीं ना कहीं कुछ तो गड़बड़ है।

अब उसका मन भी किया कि कम से कम एक बार तो रोहन का लंड देखा जाए कि कैसा है।

कहानी पढ़ते पढ़ते उसकी ऊँगली अपनी चूत पर जोर जोर से चलने लगी थी जिस कारण कुछ ही देर में वो झड़ गई।

झड़ने के बाद उसे कब नींद आई पता ही नहीं चला।

उधर रात को पायल ने रोहन को सब कुछ बता दिया। रोहन भी एक बार तो घबराया। पर सोनम ने किसी को कुछ

नहीं बताया था तो उसे विश्वास हो गया कि कुछ नहीं होगा।

सुबह के सात बजे सोनम की आँख खुली तो उसको पेशाब का जोर हो रहा था, वो उठकर बाथरूम की तरफ गई तो

देखा कि रोहन पहले से ही वहाँ खड़ा हुआ पेशाब कर रहा था।

सोनम का दिल एकदम से धक धक करने लगा, उसने थोड़ी सी कोशिश की तो उसे रोहन के लंड का लाल सुपाड़ा

नजर आया जिसमें से मूत की मोटी धार निकल रही थी।

सोनम तो लंड की मोटाई देख कर ही घबरा गई, उसकी हिम्मत ही नहीं हुई कि वो रोहन के लंड की लम्बाई भी

देखे। वो जल्दी से अपने कमरे में वापिस चली गई।

उसका दिमाग घूम गया यह सोच कर कि अगर पायल ने सच में रोहन से चुदवाया है तो उसने इतना मोटा लंड

अपनी छोटी सी चूत में लिया कैसे होगा।

रोहन के लंड के बारे में सोच सोच कर उसकी चूत गीली होने लगी थी, वो समझ ही नहीं पा रही थी कि उसको क्या

हो रहा है, एक अजीब सी बेचैनी हो रही थी।

नहाने गई तो बाथरूम में जब वो अपनी चूत धोने लगी तो एक बार फिर से उसे रोहन का लंड याद आया। उसने

अपनी उँगलियों से अपनी चूत चौड़ी करके देखी और मन ही मन बोली- नहीं, रोहन का लंड बहुत मोटा है, वो मेरी

चूत में नहीं घुस सकता। मेरी तो फट ही जायेगी अगर रोहन ने लंड अन्दर डाला तो।

यहाँ गौर करने वाली बात यह थी कि कहीं ना कहीं अब सोनम की चूत में भी चुदाई का कीड़ा कुलबुलाने लगा था।

उसने रोहन के लंड के बारे में सोचते सोचते चूत को ऊँगली से मसलना शुरू किया तो उत्तेजना के मारे वो जल्दी ही

झड़ गई और ढेर सारा पानी उसकी चूत से बह निकला था।

नहा कर वो नाश्ते की टेबल पर आई तो रोहन और पायल वहाँ पहले से ही मौजूद थे, कोई भी कुछ नहीं बोल रहा

था। आज पहली बार सोनम ने घर पर हल्का मेकअप किया था, नहीं तो वो घर पर बिलकुल सिंपल बन कर रहती

थी। मेकअप के कारण सोनम का चेहरा चमक रहा था जिसे देख कर रोहन का दिल धक धक करने लगा था।

आज सोनम ने अपने होंठों पर गहरी गुलाबी रंग की लिपस्टिक लगाई थी जिस कारण उसके होंठ जैसे रोहन को

चुम्बन के लिए आमंत्रित करते लग रहे थे।

रोहन और पायल दोनों ही कुछ समझ नहीं पा रहे थे कि सोनम के अन्दर आखिर चल क्या रहा है।

तीनो भाई बहनों ने नाश्ता किया और फिर सोनम अपने कमरे में चली गई।

रोहन ने भी पायल को अपने कमरे में आने को कहा और फिर वो भी उठ कर कमरे में चला गया। पांच मिनट के बाद

पायल रोहन के कमरे में आई तो रोहन ने पायल को किस किया और फिर दोनों सोनम के बारे में बातें करने लगे।

‘पायल मुझे लगता है कि सोनम भी अब कुछ चाहती है।’ रोहन ने कहा।

‘भाई लगता तो मुझे भी है पर बिल्ली के गले में घंटी बांधे कौन… कही बात उलटी पड़ गई तो समझो हम उलटे हो

जायेंगे।’

कुछ देर रोहन कुछ सोचता रहा और फिर बोला- पायल मेरे दिमाग में एक आईडिया है…

‘क्या?’

‘मुझे लगता है की सोनम खुद कुछ नहीं कहेगी… इसलिए हमें ही कुछ ऐसा करना पड़ेगा कि वो खुद कुछ बोले..’

‘भाई मेरे कुछ समझ में नहीं आ रहा है… खुल कर बताओ!’

‘पायल.. मुझे लगता है कि अगर सोनम हम दोनों को चुदाई करते देख ले तो शायद बात बन सकती है… वैसे इसमें

खतरा भी है पर आज के उसके हावभाव देख कर लगता है कि काम बन सकता है।’

‘ना… भाई, मैं यह खतरा मोल नहीं ले सकती।’

‘घबरा मत कुछ नहीं होगा… जब सोनम ने कल वाली बात मम्मी को नहीं बताई तो समझ सकती हो कि वो अब भी

कुछ नहीं बताएगी… हाँ हो सकता है कि वो हमारी चुदाई देख कर गर्म हो जाए और खुद चुदने के लिए तैयार हो

जाए और अगर नहीं भी होगी तो मैं तुम्हारी मदद से उसको जबरदस्ती चोद दूंगा… अगर एक बार चुद गई तो

समझो हमेशा के लिए हमारी टीम में आ जायेगी।’

‘पर मम्मी के घर में होते हम ऐसा कुछ भी नहीं कर सकते…’

‘यार कल मम्मी की किट्टी पार्टी है और मम्मी कल सुबह ग्यारह बजे से चार बजे तक बाहर होगी… बस तभी हम इस

प्लान पर काम करेंगे।’

दोनों ने एक दूसरे को किस किया और फिर पायल रसोई में आकर अपनी मम्मी के साथ काम में हाथ बंटाने लगी।

बातों बातों में ही पायल को पता लगा कि आज उसकी मम्मी को अपनी सहेली के घर जाना है क्यूंकि उसकी सहेली

के किसी नजदीकी रिश्तेदार की मृत्यु हो गई है, संस्कार है तो लगभग दो तीन घंटे लग सकते हैं।

खबर दुःख की थी पर पायल का मन ये सुन कर ख़ुशी से धड़कने लगा, उसे अपनी और सोनम की चुदाई नजर आने

लगी थी।

लगभग ग्यारह बजे मम्मी घर से चली गई। रोहन मम्मी को छोड़ने गया तब तक पायल ने चुदाई की तैयारी की।

पंद्रह मिनट में ही रोहन वापिस आ गया, आते ही उसने पायल को थोड़ा जोर से आवाज दी- मेरे कमरे में आना

सुनते ही सोनम के भी कान खड़े हो गए।

‘आ रही हूँ भाई… वैसे भी मुझे कल वाला चेप्टर दुबारा पढ़ना है आपसे !’

सोनम को अब यकीन हो गया कि मम्मी की गैर-मौजूदगी का रोहन और पायल अब फायदा उठाने वाले हैं।

उधर पायल अपनी किताबें सोनम के कमरे से उठा कर रोहन के कमरे की तरफ चल दी। प्लान के मुताबिक़ रोहन ने

पायल को अन्दर लिया और दरवाजा बंद करके कुण्डी सिर्फ इतनी लगाईं कि अगर कोई थोड़ा जोर से दरवाजा खोले

तो दरवाजा आसानी से खुल जाए।

कमरे में आते ही रोहन ने पायल को चूमना शुरू कर दिया और उसकी मस्त चुचियों को मसलना शुरू कर दिया।

पायल की मस्ती भरी सिसकारियाँ कमरे में गूंजने लगी।

सोनम भी दबे पाँव रोहन के कमरे के दरवाजे पर आ गई और कान लगा कर अन्दर की बातें सुनने लगी, अंदर से

आती सिसकारियों की आवाज सुन कर सोनम की चूत में हलचल होने लगी, एक बार तो उसके मन में आया कि वो

दरवाजा खोल कर अन्दर जाए और उन्हें यह काम करने से रोके… पर फिर सोचा कि अभी तो पायल अन्दर गई ही

है, पहले वो कुछ करने लगे तभी पकड़ने का फायदा है।

उधर अन्दर रोहन पायल को नंगी कर चुका था और पायल ने भी रोहन को नंगा कर दिया था, रोहन पायल की

चूचियों को मुँह में भर भर कर चूस रहा था और पायल जोर जोर से आहें भरते हुए रोहन के लंड को पकड़ कर

मसल रही थी।

जोर जोर से आहें कुछ तो मस्ती के कारण निकल रही थी कुछ सोनम को सुनाने के लिए थी।

पांच मिनट के बाद रोहन ने पायल को बिस्तर पर लेटाया और उसके मुँह में अपना लंड डाल दिया और खुद पायल

की टपकती चूत चाटने लगा।

सोनम से अब सब्र नहीं हो रहा था तो उसने दरवाजे को धकेला तो कुण्डी लगी होने के कारण दरवाजा नहीं खुला तो

उसने गुस्से में जोर से दरवाजे को धक्का दिया तो दरवाजा एकदम से खुल गया और सोनम एकदम से कमरे में आकर

गिरी।

अन्दर का नजारा देख कर सोनम पूरी तरह से हिल गई… कमरे में पायल रोहन का लंड चूस रही थी और रोहन

पायल की चूत!

सोनम को देख कर पायल और रोहन एक दूसरे से अलग हुए और डरने का नाटक शुरू कर दिया, पायल ने सोनम के

पाँव पकड़ लिए रोहन भी हाथ जोड़ कर किसी को ना बताने की मिन्नतें करने लगा।

पायल या रोहन दोनों में से किसी ने भी अपने आप को ढकने की कोशिश तक नहीं की थी।

रोहन का लंड जो अपनी बहन की चूत चोदने की ख़ुशी में तन कर खड़ा था, अब बिल्कुल सोनम की आँखों के सामने

था। सोनम ने असली लंड पहली बार इतनी नजदीक से देखा था। लंड देखते ही सोनम की जैसे नजर ही चिपक गई

रोहन के लंड पर… उसका गला सूखने लगा था, वो कुछ बोल ही नहीं पा रही थी।

‘तुम्म्म्म दोनों यह क्या कर रहे हो… तुम दोनों को बिल्कुल भी शर्म नहीं आई… बहन भाई होते हुए आपस में ये… ये

सब करते हुए..?’ सोनम ने थूक से गला गीला किया और उन दोनों को धमकाते हुए बोली।

पर रोहन और पायल तो पहले से ही इस सब के लिए तैयार थे, रोहन ने सोनम की टाँगें पकड़ कर माफ़ी मांगने का

नाटक करना शुरू कर दिया।

वैसे टाँगे पकड़ना तो सिर्फ एक बहाना था वो तो टांगों से शुरू होकर सोनम की चूत तक का सफ़र करने का प्लान

बनाए बैठा था, माफ़ी मांगते मांगते रोहन ने सोनम की टांगें सहलानी शुरू कर दी- दीदी… प्लीज आप यह बात

किसी को मत बताना… हम ये सब दुबारा नहीं करेंगे…’

पायल सोनम के सामने बेड पर अपनी टाँगें चौड़ी करके बैठी थी ताकि सोनम को पायल की चूत साफ़ नजर आ

जाए।

तीर निशाने पर था… सोनम की नजर भी पायल की चूत पर गई और दिमाग घूम गया कि छोटी सी चूत रोहन का

इतना मोटा लंड आखिर लेती कैसे होगी।

कहानियाँ पढ़ कर सोनम की चूत में भी चुदाई की कुछ कुछ इच्छा तो होने ही लगी थी पर वो डरती थी बस

इसीलिए अब तक उसकी चूत कुंवारी थी।

टांगें सहलाते सहलाते अचानक रोहन ने सोनम की चूत को अपनी मुट्ठी में पकड़ लिया। सोनम का ध्यान इस तरफ

बिल्कुल भी नहीं था।

इस अचानक हुए हमले से सोनम उछल पड़ी, चूत पर पहली बार किसी मर्द का एहसास कैसा होता है यह उन सब

लड़कियों और औरतों को पता है जो लंड का मज़ा ले चुकी है।

सोनम भाग कर कमरे से जाने लगी तो रोहन ने उसका रास्ता रोक लिया और थोड़ी जबरदस्ती से सोनम को पकड़

कर उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए।

सोनम कसमसाई पर रोहन की मजबूत पकड़ से छूट नहीं पाई, वो चिल्ला भी नहीं सकती थी क्यूंकि उसके होंठ तो

रोहन ने अपने होंठों से बंद कर दिए थे।

जवानी का पहला चुम्बन और वो भी सगे भाई के साथ, ये सब सोनम की चूत को गीला करने के लिए बहुत था।

लगभग पांच मिनट तक रोहन ने अपने होंठ सोनम के होंठों से नहीं हटाये।

पायल भी उनके पास आई और उसने भी सोनम की कड़क चूचियों को अपने हाथों में पकड़ कर मसलना शुरू कर

दिया।

पायल और रोहन के हमले से सोनम पस्त होने लगी थी, वासना अब सोनम के तन-बदन, दिलो-दिमाग पर छाने

लगी थी। यह बात रोहन के समझ में भी आ गई थी क्यूंकि अब सोनम का छटपटाना लगभग बंद हो गया था।

एक बार जब रोहन ने अपने होंठ सोनम के होंठो से हटाये तो चिल्लाने की जगह एक मस्ती भरी सिसकारी सोनम के

मुँह से निकली। मतलब साफ़ था कि आधा किला फ़तेह हो चुका था बस झंडा गाड़ने की देर थी।

सोनम का बदन अब भी रोहन की बाहों में ही था।

तभी पायल ने एक ही झटके से सोनम की पजामी नीचे खींच दी और सोनम की चूत को अपनी मुट्ठी में भर लिया।

चूत पानी पानी हो चुकी थी, कामरस अविरल सोनम की चूत से बह निकला था, सोनम कुछ भी बोल नहीं पा रही

थी। तभी पायल घुटनों के बल बैठी और उसने अपनी जीभ सोनम की टपकती चूत पर लगा दी।

मस्ती के इस एहसास से सोनम की टाँगें कांपने लगी थी और उसके लिए खड़ा रह पाना मुश्किल हो रहा था।

रोहन ने सोनम की कुर्ती भी निकाल दी और सोनम की सन्तरे जैसी चूचियों को होंठो में दबा कर चूसने लगा।

‘प्लीज भाई… ना करो ऐसा… ये पाप है… प्लीज छोड़ दो मुझे….’ बहुत देर बाद सोनम के होंठो से ये शब्द निकले पर

रोहन और पायल ने जैसे कुछ सुना ही नहीं और वो अपने अपने काम में लगे रहे।

सोनम बिल्कुल नंगी हो चुकी थी, वो समझ चुकी थी कि अब उसकी चूत बिना चुदे नहीं रहने वाली है।

रोहन ने सोनम को गोद में उठाया और बिस्तर पर लेटा दिया, पायल पहले की तरह सोनम की चूत चाटती रही और

रोहन ने अपना लंड सोनम के होंठों से रगड़ना शुरू कर दिया।

सोनम जो की आँखें बंद किये बेड पर लेटी हुई मज़ा ले रही थी, जैसे ही उसको रोहन के लंड का एहसास हुआ तो

उसने आँखें खोल कर देखा, लंड का विकराल रूप बिल्कुल उसकी आँखों के सामने था- नहीं भाई… प्लीज मुँह में मत

डालो… प्लीज मान जाओ रहने दो…’ सोनम ने लंड मुँह में लेने से मना किया।

‘दीदी… मुँह में लेकर तो देख बहुत मज़ा आएगा, शुरू शुरू में मुझे भी अच्छा नहीं लगता था पर अब तो जब तक लंड

चूस ना लूं चुदाई का मज़ा नहीं आता।’ पायल ने अपना अनुभव सोनम को बताया।

सोनम लंड मुँह में लेना नहीं चाहती थी पर साथ ही लंड से आ रही मादक खुशबू उसको बैचैन कर रही थी। जब

सोनम लंड मुँह में लेने के लिए तैयार नहीं हुई तो रोहन ने असली काम पर आने का मन बना लिया और उसने

पायल को एक तरफ किया और अपनी खुरदरी जीभ सोनम की चूत पर लगा दी।

सोनम एहसास मात्र से ही उत्तेजित हो गई और उसकी चूत से पानी बह निकला- भाई… मुझे बहुत डर लग रहा है…

प्लीज मुझे छोड़ दो… मेरे साथ मत करो कुछ… प्लीज भाई… छोड़ दो मुझे…

रोहन उठा और उसने अपना लंड सोनम की चूत पर रगड़ना शुरू कर दिया, सोनम का बदन लंड के स्पर्श से लहरा

उठा था। चाहे कुछ भी हो थी तो वो भी जवान, खुजली तो उसकी चूत में होती ही थी और जब से पायल और रोहन

की चुदाई का पता लगा था, तब से उसकी चूत में भी चुदाई के कीड़े कुलबुलाने लगे थे। यह बात और थी कि वो

ऊपर से इसे नफरत की नजर से देखती थी।

भाई बहन के बीच सेक्स सम्बन्ध को वो नाजायज मानती थी।

जो भी हो अब वो समझ चुकी थी कि अब रोहन का लंड उसकी चूत का उद्घाटन करके ही दम लेगा।

वो भी उत्तेजित हो चुकी थी और अब उसका भी मन हो रहा था कि जल्दी से रोहन का लंड उसकी चूत में घुस कर

उसकी खुजली मिटा दे।

अनचुदी चूत अब पानी पानी हो रही थी और लंड का स्वागत करने को तैयार थी फिर चाहे अंजाम कुछ भी हो।

रोहन ने लंड चूत पर रगड़ते रगड़ते चूत पर थोड़ा दबाव बनाया तो सोनम की छोटी सी चूत भी अपना मुँह खोलने

लगी थी। लंड चूत पर सेट करते ही रोहन ने पहले एक हल्का सा धक्का लगाया और साथ ही एक जोरदार धक्का लगा

कर लंड का सुपाड़ा सोनम की चूत में फिट कर दिया।

सोनम दर्द के मारे छटपटा गई।

रोहन पहले से जानता था कि ऐसा ही सब होगा, वो इसके लिए पहले से ही तैयार था और फिर पायल भी तो

चुदवा कर इतना जान चुकी थी कि सोनम की चूत में जब पहली बार लंड जाएगा तो वो जरूर चीखेगी चिल्लाएगी।

तभी तो धक्का लगने से पहले ही पायल ने सोनम के होंठों को अपने होंठो दबा लिया था और रोहन ने भी सोनम को

कस कर पकड़ लिया था।

सोनम दर्द के मारे चीखना चाहती थी पर वो बस छटपटा कर रह गई।

रोहन एक दो सेकंड के लिए रुका और फिर एक लम्बी साँस लेकर दो तीन जोरदार धक्के लगाए और लगभग आधा

लंड सोनम की चूत में उतार दिया।

सोनम तो जैसे बेहोश होते होते बची, दर्द की लकीरें उसकी आ।खों और चेहरे पर स्पष्ट नजर आ रही थी।

सोनम की ऐसी हालत देख कर रोहन रुक गया और सोनम की चूचियों को मसलने और मुँह में लेकर चुम्भ्लाने लगा।

रोहन के रुकने से सोनम को थोड़ा आराम मिला तो उसने जबरदस्ती पायल को अपने से दूर किया और हाथ जोड़

कर रोहन से छोड़ने की गुहार लगाने लगी- प्लीज भाई… छोड़ दो… मैं नहीं सह पाऊँगी… बहुत दर्द हो रहा है भाई…

प्लीज छोड़ दो… छोड़ दो… नहीं तो मैं मर जाऊँगी… प्लीज..

रोहन ने सोनम के टपकते आँसू अपने होंठों से साफ़ किये और बोला– मेरी प्यारी बहना… घबरा मत, जो दर्द होना

था हो चुका, अब तो सिर्फ मज़ा ही मज़ा है और फिर खुद सोच पायल तो तुझ से छोटी है और जब यह चुदवाने से

नहीं मरी तो तुम कैसे मर जाओगी?

‘बहुत दर्द हो रहा है भाई…’

रोहन ने सोनम की बात को अनसुना कर दिया और जितना लंड चूत में गया था उसी को अन्दर बाहर करने लगा,

हर धक्के के साथ सोनम थोड़ी विचलित हो जाती थी पर अब चूत से निकले पानी और खून के मिश्रण ने चूत को

अच्छे से चिकना कर दिया था जिससे लंड अब चूत में फिसलने लगा था।

रोहन हर दो तीन धक्कों के बाद एक जोर का धक्का लगाता और थोड़ा सा और लंड चूत में घुसा देता और ऐसे ही

उसने अपना पूरा लंड सोनम की चूत में फिट कर दिया।

लंड पूरा जाते ही रोहन कुछ देर के लिए रुका और सोनम के होंठो को चूसने लगा।

सोनम की आँखों से आँसू तो अब भी निकल रहे थे पर दर्द की लकीरें अब कम हो गई थी।

जब लगभग एक मिनट तक रोहन ऐसे ही पडा रहा तो सोनम का दर्द भी कम हो गया। अब सोनम ने भी अपनी

गांड को हिला कर रोहन को आगे बढ़ने के संकेत दिए।

इशारा मिलते ही रोहन ने पहले धीरे धीरे धक्के लगाने शुरू किये और फिर धक्को की स्पीड बढाता चला गया। कुछ ही

देर में बेड पर जैसे भूचाल आ गया था, अब रोहन सोनम की जबरदस्त चुदाई कर रहा था और सोनम के मुँह से भी

अब मस्ती भरी आहें और सिसकारियाँ ही निकल रही थी।

चुदाई का असली मज़ा क्या है, सोनम को इसका एहसास हो चुका था और अब वो शुरुआत में मिले दर्द को भूल कर

चुदाई के नशे में झूम रही थी, रोहन के हर धक्के के साथ वो अपनी गांड उठा उठा कर रोहन का साथ दे रही थी।

दूसरी और पायल उन दोनों की चुदाई देख कर वासना की आग में तप गई थी और अपनी उंगली से ही अपनी चूत

को रगड़ रगड़ कर पानी निकालने की कोशिश कर रही थी।

चुदाई करीब दस मिनट तक चली, सोनम दो बार झड़ चुकी थी और अब रोहन के लंड से निकलने वाले अमृत को

प्राप्त कर चूत की गर्मी ठंडा करने को मचल रही थी।

रोहन ने ज्यादा इंतज़ार नहीं करवाया, जोरदार धक्के लगाते लगाते रोहन का लंड सोनम की चूत में फूल गया था

और अब धक्कों की स्पीड भी अब दुरंतो की स्पीड को पीछे छोड़ रही थी।

दस पंद्रह धक्के और लगे और फिर रोहन के लंड का लावा सोनम की चूत की गहराईयों में समाता चला गया।

लंड से निकले वीर्य की गर्मी का एहसास मिलते ही सोनम तो जैसे स्वर्ग में पहुँच गई थी। सारा शरीर फुल की

पंखुड़ियों से भी हल्का हो गया था और चूत से तो जैसे अमृत का झरना बह निकला था।

रोहन झड़ने के बाद सोनम के ऊपर ही लेट गया और सोनम ने भी उसको अपनी बाहों और टांगों के पाश में बाँध

लिया, दोनों जैसे एक दूसरे में समा जाना चाहते थे।

सोनम चुद चुकी थी और रोहन का मिशन ‘बहन की चूत’पूरा हो चुका था।

काफी देर तक दोनों एक दूसरे से लिपटे पड़े रहे तो पायल ने ही आगे बढ़ कर दोनों को अलग किया। पायल भी

उंगली से अपनी चूत को झड़वा चुकी थी और रोहन के लंड का मज़ा लेने के लिए व्याकुल थी।

जब रोहन और सोनम अलग हुए तो दोनों के ही चेहरे पर पूर्ण संतुष्टि के भाव थे फिर भी सोनम ने रोहन को

दिखावटी गुस्सा दिखाते हुए तो तीन चार मुक्के जड़ दिए- कोई अपनी बहन के साथ भी ऐसा करता है क्या भाई…

पता है कितना दर्द कर दिया तुमने… तुम बहुत निर्दयी हो भाई…

‘दीदी ये निर्दयी नहीं, बहनचोद है बहनचोद….’ ये कह कर पायल जोर से हँस दी और उसकी बात सुनकर रोहन और

सोनम की भी हँसी छुट गई।

कुछ देर तीनो बेड पर लेटे एक दूसरे से प्यार भरी बातें करते रहे। रोहन अपनी दोनों बहनों के नंगे बदन को अपनी

बाहों में लिए बेड पर पड़ा था। सोनम प्यार से रोहन की छाती पर हाथ फेर रही थी और पायल रोहन के लंड को

धीरे धीरे मसल कर अपनी चुदाई के लिए तैयार कर रही थी।

कुछ ही देर में लंड तैयार हो गया तो रोहन ने जल्दी से पायल को घोड़ी बनाया और पीछे से लंड पायल की चूत में

उतार दिया। पायल के लिए ये सब रोज का काम था, मस्ती से उसने रोहन का पूरा लंड मात्र दो ही धक्कों में अपनी

चूत में फिट करवा लिया और फिर बेड पर दुबारा भूचाल आ गया और पायल की जबरदस्त चुदाई शुरू हो गई।

samapt
 
काम वासना और रति की इच्छा

मेरा नाम जुबैदा है। आप लोगों ने यौवन के दहलीज पर कदम रखते ही ज़िंदगी के हसीन अनुभवों के बारे में रंगीन

सपने देखना शुरू कर दिए होंगे। ऐसे सपने मैंने भी देखे थे.. जब मैं 18 साल की हो गई थी।

मेरा जन्म एक मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ है.. मेरे पिताजी किसी सरकारी कंपनी के दफ़्तर में छोटी सी पोस्ट पर

काम करते थे। मेरी माँ एक अच्छे घर से थीं.. लेकिन संप्रदाय और परंपरा के अनुसार पति के घर को अपना संसार

और पति की सेवा अपना धरम मानते हुए जीवन जी रही थीं।

पिताजी के तीन और भाई थे.. सब अच्छी पढ़ाई और तरक्की की वजह से अच्छे दिन देख रहे थे। पिताजी पढ़ाई में

उतने होशियार और तेज नहीं थे.. ऊपर से बचपन से ही उनमें आत्मविश्वास और खुद्दारी की कमी थी.. धीरज और

कर्मठता कम थी।

उनकी एक ही खूबी यदि कोई थी.. तो वो कि उनके पिताजी का समाज में बड़ा आदर था। बस खानदान के नाम पर

मेरी माँ की शादी उनसें कर दी गई थी।

माँ कभी कुछ माँगने वालों में से नहीं थीं.. जो मिला उसी से संतुष्ट थीं, वो बहुत खूबसूरत भी थीं, उनकी खूबसूरती

की वजह से पिताजी का आत्म-सम्मान और भी कम हो गया था।

पिताजी ने कभी भी ज़िंदगी में प्रयास नहीं किया.. उल्टा अपने जैसों की संगत में अपनी बदक़िस्मती की खुलकर चर्चा

करते रहते थे। ऐसी संगत में उनकी मुलाकात एक नौजवान से हुई.. जो उनके जैसे ही था।

आप तो जानते ही हैं कि जब अपने जैसे मिल जाते हैं.. तो दोस्ती बढ़ जाती है।

पिताजी उस नौजवान को अपना खास दोस्त मानने लगे और दिन-रात दोनों अपनी छोटी ज़िंदगी की तकलीफें एक-

दूसरे के साथ बाँटते रहते। वो नौजवान भी पिताजी के दफ़्तर में काम कर रहा था। उनकी दोस्ती एक दिन ऐसे मोड़

पर आ गई कि पिताजी ने उसे अपना दामाद बनाने का निश्चय कर लिया।

मेरी दो बड़ी बहनें थीं.. दोनों की शादी हो गई थी। हम तीनों एक-दूसरे के काफ़ी करीब थीं.. दोनों बहनें अपनी

सुहागरात और गृहस्थ जीवन के रंगीन अनुभवों के रहस्य मेरे साथ बाँटती थीं।

मैं उस लड़के के बारे में नहीं जानती थी। शादी तुरत-फुरत पक्की हो गई। माँ भी थोड़े ही मना करने वाली थीं.. ऊपर

से उसकी सरकारी नौकरी थी.. उस लड़के के अन्दर की बातें किसको पता.. कि वो अन्दर से कैसा है। लड़का भी तैयार

था.. मैं भोली-भाली सी थी… मगर माँ पर गई थी.. इसलिए मैं भी काफ़ी खूबसूरत थी।

मैं मैट्रिक तक ही पढ़ी थी.. लेकिन सजने-संवरने में पूरी पक्की थी.. ज़ाहिर है.. यही सब देख कर साहब तुरंत राज़ी हो

गए..

अपनी बहनों के क़िस्सों से प्रेरित होकर मैं भी उसी तरह के सुनहरे सपने देखा करती थी.. जो आप लोग शायद अभी

देख रहे हैं।

लड़कों के बारे में तो मैं 15वें साल से ही सोचने लगी थी.. 18 साल की उम्र में मेरी ख्याल चुदाई के बारे में होने लगे

थे.. कि मेरी सुहागरात कैसे कटेगी.. पति की बाँहों में कैसे सुख प्राप्त होगा.. संभोग और काम कला के आसान किस

तरह के होंगे.. रति सुख कैसा होगा.. मर्द का कामांग कैसा होगा.. आदि इत्यादि।

ऐसे रंगीन ख़याल मेरी जवानी की गर्मी को और हवा देने लगे।

सहेलियों की संगत में कुछ ऐसी शारीरिक हरकतों के बारे में ज्ञान प्राप्त हुआ.. जिससे रति सुख स्वयं अनुभव करने का

मौका मिला। हस्तमैथुन प्रयोग में मज़ा तब आने लगा.. जब तन की गर्मी बढ़ने लगी।

उन हसीन रसीली काम-शास्त्र की किताबों और पत्रिकाओं से.. जिनमें आदमी-औरत के बीच की रसभरी चुदाई कथा

का खुलकर वर्णन हुआ था.. इन किताबों की बदौलत मुझे पूरा सेक्स ज्ञान प्राप्त हुआ और मैं अच्छी तरह से समझ गई

कि एकांत में एक मनचाहा मर्द के साथ क्या करना चाहिए।

शादी के कई वर्ष बीत गए और मुझे अपने पति से वो सुख नहीं मिल सका जिसका मुझे कुछ ज्यादा ही इन्तजार था।

इस नीरस जीवन को भोगते हुए पूरे 12 साल गुजर चुके थे।

अब मैं एक 32 साल की उम्र औरत हो गई थी.. जिसके लिए एक नया जन्म हुआ.. शादीशुदा औरतें जब बच्चे पैदा

करती हैं तो उनकी परवारिश में 10 साल काट लेती हैं। जब बच्चे कुछ बड़े हो जाते और माँ की ममता और सहारे से

मुक्ति पाकर पढ़ाई और खेल कूद की ओर ध्यान बढ़ाते तो औरत का मन निश्चिन्त हो जाता और पति के प्यार के लिए

दोबारा तरसने लगता। शादी के तुरंत बाद लड़कियाँ शरम और लाज के साथ पति से मिलन करती और सेक्स की

दुनिया में पहला कदम रखती। तब उनकी आलोचना और अनुभव बहुत नादान सा होता है।

अब तक 12 साल गुज़र गए थे। एक पूरा वनवास समझ लीजिए.. पति सिर्फ़ रोटी कपड़ा और मकान की गारंटी बन

गया था।

टीवी.. वीडियो.. मैगज़ीन.. सिनेमा.. बुनाई.. सिलाई.. इत्यादि के सहारे मैंने इतने साल सुखी जीवन बिताया.. बच्चे

ना होने का मेरे पति पर कोई असर नहीं डाला। वो जानता था कि दोष उसी में है। बाहर लोग क्या सोच रहे थे क्या

मालूम? कुछ सहेलियों को मैंने यूँ ही बताया कि हम दोनों में किसी को भी कोई कमज़ोरी नहीं थी और हर कोशिश के

बावजूद बच्चा नहीं हुआ।

मैंने अपनी इच्छाओं को दबा कर रखा। मुझे जब भी जिस्म की भूख ने परेशान किया तो मैं हाथों से ही इस भूख का

निवारण कर लेती थी।

हस्तमैथुन प्रयोग मेरे लिए क्रिया कम.. दवाई ज़्यादा बन गई थी। मैं अभी भी जवान 32 साल की एक मस्त औरत हूँ..

लेकिन मेरी जीवन गाथा एक 50 साल की औरत सी हो गई थी।

एक दिन पति ने बताया कि उनकी बहन का बेटा हमारे यहाँ आ रहा है।

उसने मैट्रिक खत्म कर लिया है और इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए हमारे शहर के एक कॉलेज में दाखिला ले लिया

है।

पति चाहते थे कि उसे अपने घर में ही रख कर उसे पढ़ाई में मदद दें। उनका मानना था कि वो तो बदकिस्मत हैं

लेकिन इस लड़के की कामयाबी में कोई कसर ना छोड़ी जाए और इसकी तरक्की में अपनी सफलता को साकार कर

लिया जाए।

मैं क्या बोलती.. ऐसी हज़ार बातें सुन चुकी थी। इस लड़के के आने से मेरी घरेलू जिम्मेदारी थोड़ा और बढ़ जाती.. पर

उससे ज़्यादा और कुछ नहीं होगा।

फिर इस लड़के का क्या दोष? बेचारा वो हमारे हालत से कैसा जुड़ा.. उसे तो पढ़ाई करनी है। मैंने मंज़ूरी दे दी और

घर का एक बेडरूम उसे दे दिया.. ताकि वो वहाँ पढ़ाई कर सके।

करीब 30 साल के उम्र के बाद.. औरत अनुभवी और पक्के इरादे वाली हो जाती। सेक्स में दोबारा जब दिलचस्पी

जागती तो शरम के बजाए कार्यशीलता से संभोग में भाग लेती और लाज को छोड़कर नए नई तरीकों से पति के साथ

बिस्तर का खेल आज़माने की कोशिश करती है। पति भी अनुभवी हो जाता है और पत्नी को खूब मदद करता है। इस

तरह 30 साल के उम्र के बाद पति-पत्नी सेक्स की ज़िंदगी में एक नई उमंग लेकर कूद पड़ते और सेक्स का भरपूर

आनन्द लेते हैं।

मुझे बच्चे तो नहीं हुए थे और मैं 10 साल से ज़्यादा तड़फी थी। लगभग 32 साल की उम्र में मेरा मन भी इसी उम्र की

बाकी औरतों की तरह सेक्सी हो गया.. और मुरादें पूरा ना होने के कारण कुछ ज़्यादा ही तड़प रहा था.. इसीलिए जो

लाज और शर्म मुझे 12 साल पहले पाप करने से रोक चुकी थी.. आज उसी लाज और शर्म को मेरे मन ने बाहर फेंक

दिया और इच्छाओं का दरवाज़ा खोल दिया।

पति की नाकामयाबी मेरे साथ एक धोखा सा था.. पति को धोखा देना कोई पाप नहीं लग रहा था।

अगर मेरे पति बिस्तर में कामयाब और नॉर्मल होते.. तो आज उनके साथ खुश रहती.. लेकिन उनकी बारह साल की

नपुंसकता के सामने पराए मर्द के साथ सेक्स करने की सोचना पाप नहीं लग रहा था।

और तो और.. भान्जे के साथ सेक्स करने से इस पाप को घर के अन्दर तक सीमित रख सकती हूँ। किसी को कुछ पता

नहीं लगेगा। वैसे भी मैं सिर्फ़ सेक्स चाहती हूँ.. रिश्ता नहीं..

इन सब बातों से मन और भी निश्चिंत हो गया और मैंने मन ही मन चंदर से संभोग करने का इरादा बना लिया।

अपने इस नई रूप से मैं खुद चंचल हो उठी। बिस्तर से उठकर मैं आईने के सामने खड़ी हुई और नाईटी निकाल कर

अपने ही जिस्म की जाँच करने लग गई। मैं काफ़ी सेक्सी लग रही थी.. मेरी ही चाह मुझे होने लगी थी।

आप लोगों को बता दूँ कि अब मेरे मम्मे बहुत ही बड़े थे, ब्रा 36 सी की साइज़ की पहनती हूँ। उनको जितना भी

ब्लाउज.. ब्रा और साड़ी के पल्लू के सहारे ढक दूँ। उनकी गोलाई और उभार को छिपा नहीं सकती। जो भी मुझे

देखता, मेरी वक्ष-संपदा से तुरंत परिचित हो जाता।

उम्र के लिहाज़ से मेरे नितंब भी काफ़ी उभर आए थे और कमर चौड़ी और जाँघ भारी और मांसल लग रही थी।

जिस्म का रंग काफ़ी गोरा था.. माँ की देन थी.. मैं सच में बड़ी सेक्सी लगती हूँ।

उन दिनों मायके में मोहल्ले के बहुत सारे लड़के मेरे दीवाने थे। आख़िर चंदर से मेरे जिस्म का करारापन कैसे छिपता..

उसने जरूर मेरे मदमस्त यौवन पर गौर किया होगा.. शायद मेरी नग्नावस्था को भी अपने कामुक मन में बसा कर

हस्तप्रयोग भी करता होगा।

चंदर को पटाने के लिए यह सेक्सी जिस्म ही काफ़ी है।

अगले दिन.. पति ऑफिस जा चुके थे और भांजा कॉलेज निकल गया था। सब काम से निपट कर में सोफे पर बैठी

टीवी देख रही थी कि अचानक मुझे रात के किस्से का खयाल आया। मैं उठकर भान्जे के कमरे में गई और छानबीन

की.. पर उसकी अलमारी से कुछ नहीं मिला.. बिस्तर के नीचे कुछ नहीं था।

लेकिन गद्दे के नीचे कुछ किताबें मिलीं.. साथ में कन्डोम के कुछ पैकेट भी मिले।

मेरा सर चकराने लगा.. कई ख्याल एक साथ आने लगे.. मेरा दिल धड़क रहा था और ऐसा लग रहा था कि मैं कोई

जासूस की तरह किसी दुश्मन के घर में छानबीन कर रही हूँ और कभी भी पकड़ी जा सकती हूँ।

लेकिन मैं भी घर में अकेली थी.. मेरे हाथ में सेक्स की किताबें थीं और मर्दों वाले कन्डोम भी थे।

मेरा मन चंचल हो उठा.. उसी बिस्तर पर लेट कर मैंने कन्डोम के एक पैकेट को खोलकर अन्दर का माल बाहर

निकाला।

पहली बार मैं एक कन्डोम को हाथ में ले रही थी.. इससे पहले कभी करीब से देखा ही नहीं था। यह बड़ा अजीब सा

लग रहा था.. एक छोटी सी टोपी की तरह.. पैकेट पर लिखे निर्देशों को पढ़ा और तुरंत ही मेरे चंचल मन में एक

ख़याल आया।

मैं अपने कमरे में जाकर उसी मोमबत्ती को ले आई.. जिससे रात में मैंने अपने आपको शांत किया था।

मोमबत्ती मर्द के कामांग की तरह ही थी, कन्डोम के पैकेट के निर्देशों को दोबारा पढ़कर कन्डोम को मोमबत्ती पर चढ़ा

दिया और देखने लगी।

मोमबत्ती के ऊपर की तरफ कन्डोम में एक छोटा सा गुब्बारा की तरह कुछ था, शायद यहीं वीर्य जमा होता है।

इस सबको करने और देखने से मुझे काफ़ी उत्तेजना हुई। कैंडल को बगल में रखा और किताबों के पन्ने पलटने लगी।

तीनों पतली किताबें थीं.. एक में सेक्स करने के आसनों में लिए गए विदेशी प्रेमियों के सेक्सी नंगे चित्र थे और उनकी

हरकतों का संक्षिप्त वर्णन भी लिखा था। ऐसा लग रहा था.. जैसे बहुत सारे फोटो के सहारे कहानी दर्शाई जा रही हो।

शुरू से अंत तक एक दफ़्तर के बड़े बाबू और उसकी सेक्रेटरी के बीच की शर्मनाक संभोग कला का गहरा और ख़ास

वर्णन हो रहा था। सेक्रेटरी अपने बॉस की गर्मी बढ़ाने के लिए कैसे-कैसे कामुक प्रसंग कर रही थी और बॉस भी

उत्तेजित अवस्था में आकर सेक्रेटरी से अपनी दिल की बात और मिल रहे सुख का खुलासे का वर्णन कैसे कर रहा था..

यही सब लिखा था।

पूरा वर्णन हिन्दी में था और ऐसे-ऐसे शब्दों का प्रयोग हुआ.. जो काफ़ी अश्लील और लैंगिक थे।

लड़की बॉस के मोटे तगड़े लण्ड की प्रशंसा काफ़ी अश्लील और रंगीन शब्दों में कर रही थी और उसके साथ क्या कराना

चाहती है.. इसका भी खुल्लम-खुल्ला वर्णन कर रही थी।

बॉस लड़की की मादक मम्मों को दबा-दबा कर उनका गुण गा रहा था। कुछ पन्नों के बाद ऐसे गंदी हरकत पढ़ी और

देखी कि मेरा मन वासना से झूमने लगा।

सभी चित्र सच में होते हुए निकाले गए थे.. यानि लड़का-लड़की सचमुच में सेक्स कर रहे थे.. जब उनकी फोटो खींची

गई थी।

सेक्रेटरी अपनी बॉस के करारे लण्ड को चूस रही थी। इस दृश्य को देख कर मेरे पेट में अजीब सी हरकत होने लगी।

पहले काफ़ी घिनौना और गंदा लगा और उल्टी होने वाली थी.. लेकिन अपने आपको संभाला और गौर से उस चित्र

को देखा। इस तरह के साहित्य के बारे में पहले सुना तो था.. लेकिन पहली बार सचित्र देख रही थी।

मेरे दिमाग़ में वासना की ऐसी लहर दौड़ी.. कि मैं ‘आहें’ भरने लगी और मादक सीत्कारें भरने लगी।

मैं अपने आपको संभाल नहीं पा रही थी। मैंने किताब के और पन्ने खोले तो और भी अश्लील फोटो थे। अब आदमी

औरत की योनि चूस रहा था। अंत में वीर्य स्खलन का भी चित्र था।

बॉस ने अपनी सेक्रेटरी के उन्नत उरोजों पर अपना वीर्य छोड़ा.. जो किसी क्रीम की तरह साफ़ नज़र आ रहा था।

थोड़ी देर के लिए मैं लेट गई और आँखें मूंद कर भारी साँसें लेने लगी। कुछ पलों के बाद मैंने अपने आप पर काबू पाया

और उन गंदी किताबों से दूर उठकर चली गई। लेकिन इसका जो चस्का एक बार लगा सो लगा।

मैं रह नहीं पाई.. और एक घंटे के बाद वापस आ गई फिर से गद्दे के नीचे से किताब निकाली।

दूसरी दो किताबें काफ़ी सस्ते किस्म के प्रिंट में थीं। एक में चित्र बिल्कुल नहीं थे.. दूसरी किताब में दो-चार काले-

सफ़ेद रंग के फोटो थे उनमें नंगी लड़कियों की और एक संभोग रत लड़का-लड़की के रेखा चित्र बने थे।

मैं लेट कर दोनों किताबों में छपी कहानियाँ पढ़ने लगी। दोनों का लेखक कोई मस्तराम था.. नाम से ही लग रहा था

कि कोई अय्याश किस्म का लेखक होगा। पहली कहानी बिल्कुल वैसी ही थी.. जैसी मैं शादी के पहले पत्रिकाओं में

पढ़ा करती थी।

मेरे अन्दर काम-वासना बढ़ने लगी.. मेरी योनि से रस निकलने लगा था और मेरे जिस्म में गर्मी बढ़ती ही जा रही थी।

मैं अपने पैरों को एक-दूसरे से रगड़-रगड़ कर अपने आपको काबू में लाने की बेकार सी कोशिश कर रही थी।

जैसे ही मैं दूसरी कहानी पढ़ने लगी.. मेरे मस्तिष्क में दुबारा बिजली चलने लगी। सेक्स की कहानी तो रसदार थी..

लेकिन औरत और मर्द के कामांगों का ज़िक्र एकदम गंदी और अश्लील भाषा के शब्दों से भरा पड़ा था.. लंड.. चूत

इत्यादि।

इस सब को पढ़ कर मुझ में घिनौनेपन के बजाए एक अजीब सी मस्ती छा गई।

ऐसे शब्दों को पढ़-पढ़ कर काफ़ी अच्छा लग रहा था। ऊपर से ये कहानी एक देवर और भाभी के अवैध सेक्स संबंध के

शर्मनाक कारनामों के बारे में थी। कहानी के अंत में अपने पापपूर्ण जिस्मानी रिश्तों के बनने से दोनों काफ़ी खुश होते

हैं।

तीसरी कहानी ने तो मेरे दिमाग़ की बत्ती लगभग बुझा ही डाली थी।

एक भोले-भाले लड़के के साथ जबरदस्ती उसी की सेक्सी और वासना भरी कुँवारी मौसी ने सेक्स किया। इसका वर्णन

पूरे डिटेल के साथ हुआ है। मौसी और दीदी के बेटे के बीच के सेक्स का किस्सा कितनी चाव से लिखा मस्तराम साब

ने.. जैसे-जैसे कहानियाँ पढ़ती गई.. ऐसे ही अवैध और अप्राकृतिक शारीरिक संबंधों का खुला वर्णन होता गया।

यहाँ तक कि सौतेली माँ और बेटे के गंदे सेक्स की हरकतों का भी वर्णन था।

सब कहानियाँ पढ़ने पर ऐसा लग रहा था कि मस्तराम जी अप्राकृतिक संबंधों को ज़ोर दे रहे थे और उनका समर्थन

कर रहे थे।

सेक्स कला का खुला वर्णन गंदे शब्दों के साथ काफ़ी दिलचस्पी से किया गया था। औरत की गुप्त बातें जैसे माहवारी..

योनि में लगाने वाली नैपकिन.. इत्यादि के बारे में उस मस्तराम ने खुलकर लिखा था।

औरत और मर्द के बीच का पहला संपर्क और उसके बाद उस परिचय का धीरे-धीरे सेक्स संबंध में बदलने की किस्से

बड़े हुनर से लिखे गए थे।

इस साहित्य को पढ़ने के बाद अब तो मैं पूरी तरह सेक्स की दासी हो गई थी।

मन में अनेक ख़याल आ रहे थे। अवैध संबंध के बारे में कई किस्से एक साथ सामने आ रहे थे।

इस मस्ती में सब अच्छा लग रहा था। उन किताबों की एक कहानी में वर्णित एक महिला की हस्त-मैथुन की कहानी

से मुझमें प्रेरणा जाग उठी.. कन्डोम में भरी हुई कैंडल को लण्ड बनाकर अपनी योनि में लगाई और हाथ हिला-हिला

कर उसी तरह के सेक्स का अनुभव पाया.. जो सचमुच किसी मर्द के कामाँग से मिलता है।

कुछ दिन बीत गए.. भांजा हमारे घर में पूरी तरह से व्यवस्थित हो गया था। वो ज़्यादा बात नहीं करता था। मैंने भी

कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई.. बस पति के संबंधी होने के नाते उसके रहन-सहन.. खाने-पीने इत्यादि का प्रबंध करने

लगी।

वो काफ़ी पढ़ाकू किस्म का था.. हर वक्त मोटी किताबों में खोया रहता। वक़्त का पाबंद था और वक़्त पर कॉलेज

जाता। शाम को जल्दी वापस आता.. पढ़ाई करता.. थोड़ी टीवी देख लेता और सो जाता।

हमारे बीच.. मात्र अवसरों पर ही बातें हुआ करती थीं। ज़रूरत पड़ती तो मुझे ‘मामी’ पुकारता और अपनी बात कर

लेता।

मेरी जिन्दगी में उसके आने से तुरंत कोई बदलाव नहीं हुआ। एक रात पति देव जल्दी सो गए। मैं कुछ देर तक टीवी

देखती रही.. वैसे भी बेडरूम में और क्या काम था।

फिर टीवी बन्द करके मैगजीन पढ़ने लगी.. टीवी बन्द करने पर छाए हुए अचानक के सन्नाटे में मुझे कुछ सुनाई देने

लगा। ऐसा लग रहा था कि घर के किसी कोने में कोई भारी लकड़ी के बॉक्स के हिलने की आवाज़ आ रही हो। घर में

एक-दो छछूंदर घूम रहे थे.. शायद रसोई की अलमारी में छछूंदर कोई हरकत कर रहे थे। मैंने जाकर रसोई की

छानबीन की लेकिन आवाज़ वहाँ से नहीं आ रही थी। जैसे ही मैं मेहमान वाले बेडरूम के पास से गुज़री.. तो वो

आवाज़ और स्पष्ट हुई।

लगता है बेडरूम की अलमारी से आ रही है। दरवाज़ा बन्द था.. भांजा सो चुका था इसलिए दरवाज़े पर दस्तक देकर

उसे जगाना मुनासिब नहीं समझा। लेकिन ऐसा लगा कि दरवाज़ा पूरी तरह से बन्द नहीं था.. मैंने धीरे से खोलने

लगी कि दरवाजा ढलक गया और अन्दर का दृश्य तुरंत सामने आ गया।

मैंने दरवाज़े को वहीं का वहीं पकड़ी खड़ी रही.. कमरे में ज़्यादातर अंधेरा था और सिर्फ़ एक रीडिंग लैंप की रोशनी

थी।

भांजा बिस्तर के एक छोर पर पेट के बल लेटा हुआ था। ऊपर उसने कम्बल ओढ़ लिया था। बिस्तर के नीचे बगल में

फर्श पर एक किताब थी और ऐसा लग रहा था कि वो जगा था और लेटे-लेटे नीचे उस किताब को पढ़ रहा था।

बिस्तर के बगल में टेबल थी। जिस पर रखे रीडिंग लैंप की रोशनी सीधी उस किताब पर पढ़ रही थी।

मैंने सोचा ये पढ़ाकू अभी भी कुछ पढ़ रहा है.. लेकिन इस अजीब अवस्था में क्यूँ पढ़ रहा है..? आराम से बैठ कर पढ़

सकता है।

तभी मुझे इस अजीब आसन का उद्देश्य दिखाई दिया.. भांजा आगे-पीछे हिल रहा था और उसके चूतड़ कंबल के अन्दर

ऊपर-नीचे हिल रहे थे। ऐसा लग रहा था जैसे वो आगे-पीछे ऊपर-नीचे बड़ी तेज़ी से हिल रहा था। शायद तेज़ी से

बिस्तर से कुछ रगड़ रहा था।

शादी से पहले की सेक्स शिक्षा और सुहागरात के अनुभवों की बदौलत मुझे साफ़-साफ़ ये बात समझ में आई कि वो

हस्तमैथुन का प्रयोग कर रहा है।

लेकिन बिना हाथ लगाए.. वो तो अपनी मर्दानगी को बिस्तर के गद्दे से ज़ोरों से रगड़ कर रति सुख पा रहा था।

इसी से बिस्तर हिल रहा था और आवाज़ आ रही थी। शायद वो औरत के साथ सेक्स करने पर होने वाले अनुभव को

महसूस कर रहा था।

किताब में क्या लिखा है.. मुझे देखने की ज़रूरत नहीं थी.. दूर से थोड़ी रोशनी में साफ़ नज़र तो नहीं आ रहा था..

लेकिन देख सकती थी कि एक पन्ने पर कुछ औरतों के नंगी तस्वीरें थीं।

शायद काम कला में लिप्त औरत मर्द के जुड़े नंगे जिस्म भी उन चित्रों में होंगे। दूसरे पन्ने पर कुछ लिखा हुआ था..

शायद उनके कारनामों का.. उनके नंगे जिस्मों और गुप्त अंगों का खुला वर्णन लिखा हो सकता था।

मुझे इस ’घिनौनी’ हरकत से उस पर काफ़ी गुस्सा आया और जी चाहा ही अन्दर जाकर रंगे हाथों पकड़ लूँ उसे और

डांट फटकार दे दूँ। लेकिन ऐसी किताबें मैंने भी जवानी में पढ़ी थीं और हाथों से सेक्स का अनुभव पाया था।

जो वासना मुझे उन दिनों में हुई थी.. इस लड़के को भी हुई है। यह उम्र ही ऐसा है.. सेक्स के प्रति आकर्षण इस उम्र में

हर एक को होता है, हस्तप्रयोग एक गुप्त चीज़ है.. लेकिन सभी करते हैं।

सेक्स ज्ञान पाने में इसका बढ़ा महत्व भी है। मैंने चुपचाप दरवाज़ा बंद कर दिया और लौट आई। उसे अपनी प्राइवेसी

चाहिए थी और मैंने उसे दी।

कुछ गुस्सा तो था.. यह काम अपने घर में भी कर सकता था.. मेरे घर में क्यूँ..? फिर सोचा.. अपने घर तो छुट्टियों में

ही जाएगा.. तब तक इस आग को कैसे जलने दे? कोई बात नहीं.. यहीं करो।

फिर मैंने सोचा.. मेरे गद्दे और चादर पर अपना रस छोड़ेगा… ईएश.. कितना गंदा काम.. ऐसा कितने बार उसने रस

छोड़ा होगा? मुँह में लार और पेशाब की तरह वीर्य भी काफ़ी पर्सनल चीज़ है। दूसरों के लिए अछूत सी होती है।

बेचारा और कर भी क्या सकता है.. मुझे सुबह चादर धोने के लिए डालनी ही होगी.. गद्दे को बाद में देखूँगी।

इन्हीं ख़यालों में मग्न होकर अपने बेडरूम के बिस्तर पर लेट गई।

मुझे नींद नहीं आ रही थी.. भान्जे की हरकत दिमाग़ में छाई रही।

मुझे अपने कुँवारे दिन याद आ गए.. मैं सोचने लगी कि कब से कर रहा था यह हरकत? इस पढ़ाकू बुद्धू में इतनी

सेक्स की प्रेरणा कैसे आ गई? किताब कहाँ से लाया? क्या जानता है सेक्स के बारे में? वीर्य स्खलन के वक़्त सीत्कारी

भरता है क्या?

मर्दों को चरम सुख पर कैसा अनुभव होता होगा?

धीरे-धीरे मेरे ख़याल और भी रंगीन होने लगे कि उसका लण्ड कैसा होगा.. कितना बड़ा होगा.. वीर्य कैसा होगा?

क्या उसने किसी लड़की के साथ सेक्स किया है? उसकी कोई गर्लफ्रेंड तो नहीं है.. जिसके साथ वो सब कुछ कर चुका

हो.. इसे ‘स्वयं सुख’ के बारे में किसने बताया होगा? लड़कें ‘स्वयं सुख’ पाने के लिए के कितने तरीकों से अपने अंग को

उत्तेजित करते हैं.. एकांत में हस्तमैथुन करने के बाद जब वीर्य छोड़ते हैं.. तो उसका क्या करते हैं? भान्जे के वीर्य की

गंध कैसी होगी?

मेरा पूरा जिस्म पसीने से भीग गया था। मैं काफ़ी गरम हो चुकी थी.. तुरंत हाथों से अपनी ‘छोटी’ को प्रेरित करने

लगी। दिमाग़ में विकृत कल्पनाएँ अभी भी कुछ शेष बची थीं.. मेरा जी करने लगा कि भान्जे की तरह अपने कामांग

को किसी चीज़ के साथ रगड़ कर सुख पा जाऊँ..। तभी मेरी नज़र एक मोटी मोमबत्ती पर पड़ी.. जो अक्सर बिजली

जाने पर जला लेती थी.. वो बिस्तर के बगल के टेबल पर रखी थी।

उसे मैंने हाथ में लेकर अपनी योनि के लिए परखा.. काफ़ी बड़ी और मोटी सी थी.. लंबे समय तक ‘जलने’ वाली।

मोमबत्ती को बिस्तर से लंबाई के हिसाब सटा कर रख दिया.. जब मैं लेटती तो ठीक उस जगह लगा दी.. जहाँ मेरी

योनि आ रही थी.. फिर मैं ठीक उसके ऊपर लेट गई और अपने हाथों से उसको ठीक किया ताकि मोमबत्ती की लंबाई

मेरी योनि के ठीक नीचे हो।

मोमबत्ती को योनि छिद्र पर दबाया तो एक मधुर अनुभव हुआ.. योनि और बत्ती के बीच मेरी नाईटी और पेटीकोट के

कपड़े थे.. इस वजह से दर्द या चुभन नहीं था.. लेट कर मैंने जवानी की उन किताबों की कहानियाँ याद किया और

धीरे से योनि को मोमबत्ती से रगड़ने लगी।

करीब 15 मिनट के बाद बिजली की तेजी जैसा एक तेज़ झटका सा अनुभव मेरे मस्तिष्क में भर गया और मुझे समुंदर

की उठती गिरती उँची ल़हरों की तरह एक अत्यंत ही रोमांचक चरम-सुख का अनुभव हुआ। ज़ोर की सीत्कारियाँ

भरती हुई.. मैंने उस चरम सुख का आनन्द लिया।

पति देव को अच्छी तरह मालूम था कि मैं कभी-कभी हस्तमैथुन मैथुन कर लेती हूँ.. कई बार मेरी सिसकियाँ सुनकर

उठ जाते और गौर से मुझे देखते रहते। उनकी आँखों के सामने ही मैं अपनी योनि को ज़ोरों से घिसती और रगड़ती

रहती और मादक स्वरों में मिल रही सुख का आनन्द लेती रहती।

अब की ज़ोरदार सीत्कारियों से पति जागे और बोले- चुपचाप करो ना.. या दूसरे कमरे में जाकर रगड़ लो..

मुझ पर उनकी बातों का कोई असर नहीं हुआ.. मेरे कपड़े योनि के रस से गीले हो चुके थे।

कुछ ही पलों के बाद मेरा शरीर हल्का हुआ और एक मीठी नींद आने लगी.. मैंने बत्तियाँ बुझा दीं।

सब लोगों के दिमाग़ में सेक्स की प्रेरणा और दबाव एक जैसे नहीं होती।

कुछ लोगों में सेक्स की इच्छा बहुत होती है.. तो कुछ लोगों में सेक्स की इच्छा मामूली सी होती है।

मैं उन लड़कियों में से हूँ जिनमें काम वासना और रति की इच्छा 19 साल के उम्र से ही कुछ ज़्यादा ही उभर उठी थी।

शादी मेरे लिए उस द्वार का टाला गया था.. जिसको खोलना मेरे जैसी कुँवारी लड़कियों के लिए पाबंदित था। जबकि

उस दौर में मेरी कुछ सहेलियों के ब्वॉय-फ्रेण्ड थे.. जिनके साथ उन्होंनें इस द्वार को तोड़ डाले थे.. पर मैं ऐसे परिवार

से थी.. जहाँ इच्छाओं को लाज और इज़्ज़त के बल पर दबा देना चाहिए जैसी मान्यताएं थीं।

इस सबके लिए शादी के बाद कोई पाबंदी नहीं होती है।

मेरी कम उम्र में शादी हो गई थी.. लेकिन तब भी मेरा शरीर शादी के बाद सेक्स के लिए पूरी तरह से तैयार था।

कम उम्र में ही मेरी माहवारी शुरू हो गई थी और मैं इस सब के लिए परिपक्व हो गई थी।

एक मर्द को सुख देकर उसके बच्चे की माँ बनने के लिए मैं समर्थ थी। केवल 19 साल की उम्र में मेरा जिस्म एक 25

साल की औरत की जवानी से भारी था।

सुहागरात को मैंने सिर्फ़ थोड़े ही देर तक लाज शर्म का ढोंग किया और पहली ही रात में मैं लड़की से औरत बन गई

थी। जब मेरे पति ने मेरे कौमार्य को भंग करते हुए अपनी जवानी को मेरे यौवन में समा दिया और अपना बीज मेरी

कोख में बो दिया।

पूरी तरह से विवस्त्र.. मैंने हर उल्लंघन को तोड़ दिया और पति को अपनी अनछुई जवानी के मर्मांग को खुलकर परोस

दिया।

पतिदेव ने मेरे उन हर अंग को दबा-दबा कर खूब टटोले और चूमने लगे.. जिन्हें आज तक मेरे सिवा और कोई नहीं

देख सका था। पति की उस मदभरी सख़्त ‘मर्दानगी’ को जब मैंने अपने हाथ में लिया.. तो मेरा मन उस मधुर अनुभव

को पूरी तरह से संभाल नहीं पाया और मैंने कामुक सीतकारियाँ भरते हुए.. उसे दबा-दबा कर.. अपने मदभरे यौन

अंग के छिद्र से मिला दिया।

सुहागरात वैसे ही कटी.. जैसे मैंने सपना देखा.. पर मेरी ज़िंदगी सिर्फ़ एक दिन की ख़ुशी थी.. पति की छोटी सोच..

छोटी सोच से ग्रसित सड़ा सा आत्मसम्मान.. निकम्मापन इत्यादि.. बहुत जल्दी ही बाहर आ गए।

खुशी के कुछ पल जल्दी ही ख़तम हो गए और हमारे बीच एक बर्फ की दीवार बनने लगी.. जो सीधे बिस्तर पर ख़त्म

हो रही थी। पति अपनी कमज़ोरियों को पत्नी पर ज़ाहिर करने लग जाए.. तो शादी की गर्मी लगभग ख़्त्म ही समझो।

बिल्कुल मेरे माता-पिता की तरह पति भी मेरी खूबसूरती से परेशान थे। उनकी नाकामयाबी.. मेरे खूबसूरती से हर

पल हार रही थी।

उनके ज़हन में बस एक ही ख़याल था कि लोग यही बात कर रहे होंगे कि ऐसी हसीन बीवी के साथ ऐसा नाकामयाब

इंसान कैसा? इस छोटे ख्याल की वजह से उन्होंने मेरे साथ आँखें मिलाना भी छोड़ दिया।

बिस्तर पर बर्फ की दीवार जम चुकी थी और हमारे दोनों के बीच मीलों का फासला बन चुका था.. जिसके कारण

हमारा मिलन पूरी तरह से बन्द हो गया था।

केवल 20 साल की उम्र में ही मेरे विवाहित जीवन का आखिरी पत्ता गिर चुका था.. कभी-कभी उनके मन में थोड़ी सी

आत्मविश्वास भरी हिम्मत उभरती.. और वो रात को मेरे ऊपर मुझे आज़माने के लिए चढ़ जाते थे.. ऐसे मौकों पर मैं

भी खुलकर उनका साथ देती.. यही सोचकर कि बुझते दिए में तेल डाल कर ज्योति को और तेज करूँ.. लेकिन ज्योति

थोड़ी देर में ही बुझ जाती और वो बिना कुछ हासिल किए ही ढेर हो जाते।

अपने पति के साथ वो अधबुझी आग एक सुलगती लौ की तरह मेरे अन्दर ऐसी आग लगाकर रह जाती.. जो मुझे रात

भर जलाती रहती।

आख़िर मायके जाकर की सहेलियों से मिली.. और हस्तमैथुन प्रयोग सीख कर उसके उपचार से खुद को शांत करने

लगी।

पिताजी ने इस बेरंग शादी को अपनी नाकामयाबी के क़िस्सों में एक और किस्सा बनाकर अपना मुँह मोड़ लिया।

दोनों बहनें बच्चों की परवरिश में मग्न मुझसे दूर हो गईं। माँ भी क्या करती.. खुद हालत से मजबूर मुझे भी वही

नसीयत देती.. जो उन्होंने अपनी जीवन में इस्तेमाल किया।

हालत से सुलह कर लो और पूजा-पाठ में लगे रहो.. केवल 20 साल की उम्र में पूजा-पाठ कैसे होगा? जब मन और तन

की माँगें ज़ोर पकड़ रही हैं। मन को कैसे काबू करूँ? जवानी की आग को कैसे बुझा दूँ?

यही सब सोचते हुए मैं अपने भांजे से रिश्ता बनाने के लिए सोचने लगी।

फिर मैंने किसी विद्वान की उस उक्ति को ध्यान में लिया.. जिसमें कहा गया था कि आवश्यकता ही अविष्कार की

जननी है.. मैंने इसी युक्ति को ध्यान में लेते हुए अपने भांजे से अपने जिस्मानी रिश्ते बनाने के लिए प्रयास शुरू कर

दिए।

शाम को जब चंदर कॉलेज से लौट आया.. चाय देने के बहाने उसके कमरे में गई और उससे बातचीत छेड़ने का प्रयास

किया।

चंदर बड़ा ही शर्मीला था.. मेरी तरफ देख भी नहीं रहा था और नज़र बचाते हुए बात कर रहा था।

मैं एक पीले रंग की पारदर्शी साड़ी और सफेद रंग का पारदर्शी ब्लाउज पहने हुई थी, मेरा ब्लाउज काफ़ी सेक्सी

किस्म का था।

ब्लाउज का गला काफी खुला था जिसमें से मेरी चूचियों की गोलाई बीचों-बीच से बाहर निकली पड़ रही थीं।

ब्लाउज के अन्दर की ब्रा भी काफ़ी सेक्सी किस्म की थी.. और जिस तरह से उनमें मेरी गोलाइयाँ फंसी हुई थीं.. उससे

सब कुछ साफ़-साफ़ नज़र आ रहा था। लेकिन जिसको दिखाना चाहती थी.. वो तो नज़र भी नहीं मिला रहा था।

मैं यूँ ही कॉलेज के बारे में कुछ बातें करने लगी। शरमाते हुए वो कुछ जवाब भी दे रहा था।

इसी तरह बातों-बातों मैं उससे पूछ पड़ी- क्या तुम्हारे कॉलेज में लड़कियाँ नहीं पढ़तीं?

उसने कहा- पढ़ती हैं.. लेकिन बहुत कम.. इंजीनियरिंग में आर्ट्स और कॉमर्स के मुक़ाबले कम लड़कियाँ हैं।

फिर मैंने पूछा- इन लड़कियों में कोई स्पेशल फ्रेंड?

चंदर शर्मा गया और अपने मुँह और भी नीचे कर दिया, शरमाते हुए कहा- नहीं.. ऐसा कोई नहीं है..

मैंने और पूछा- क्या कोई भी गर्ल-फ्रेंड नहीं? तुम्हारी उम्र के लड़कों के लिए ये तो मामूली बात है..

चंदर और भी शरमाता रहा और मैं धीरे-धीरे हमारे बीच की दूरी मिटाती गई।

‘चंदर, शरमाते क्यों हो? गर्ल फ्रेंड होना कोई बुरी बात नहीं.. बल्कि आजकल तो ये ही जायज़ है कि लड़का-लड़की

अपने जीवन-साथी को खुद ही चुन लें.. बताओ.. कभी लड़कियों के बारे में सोचते ही नहीं क्या..? उनकी ओर

आकर्षित नहीं होते क्या?’

अब चंदर शर्म से पानी-पानी हो गया.. बड़ी मुश्किल से जवाब दिया- जी मामी.. ऐसी कोई बात नहीं.. मेरा ध्यान तो

पढ़ाई में है.. आजकल कम्पटीशन ज़्यादा है.. इन सब बातों के लिए वक़्त ही कहाँ है.. मैं ऐसे मामलों में बहुत पीछे हूँ।

मैंने एक और तीर छोड़ा- तो क्या ये सब बेकार की बातें हैं?

‘अरे हमारे ज़माने में इस उम्र के लड़के-लड़कियों की शादी हो जाती थी और वो तो सुहागरात भी मना डालते और

बच्चे भी पैदा कर लेते थे। तुम्हारा जेनरेशन तो फास्ट है.. और तुम कहते हो कि लड़कियों के बारे में सोचते ही नहीं

हो.. क्या किसी लड़की को देखकर आकर्षण सा नहीं होता? कुछ नहीं लगता तुम्हें? और आजकल की लड़कियाँ ऐसे-

ऐसे ड्रेस पहनती हैं.. उस सब को देख कर कुछ तो महसूस होता होगा.. उनके करीब जाने की इच्छा.. उनसे बात करने

की इच्छा.. उन्हें छूने की इच्छा.. किस करने की इच्छा.. कुछ और करने की इच्छा?’

चंदर की आँखें एकदम बड़ी हो गई, उसे शरम तो आ रही थी.. लेकिन मेरी बात सुनकर उसे अचरज भी हुआ- मामी..

प्लीज़..!

उसने ज़ोर से कहा और शर्म से मुस्कुराते हुए मुँह मोड़ लिया- मैं ऐसा कुछ नहीं सोचता हूँ.. मैं सीधा सादा लड़का हूँ..

मैं मुस्कुरा उठी.. मुझे मालूम था कि चंदर कितना सीधा-सादा था।

उस रात की हरकत ने खूब दिखाया मुझे.. ऐसी सेक्सी किताबें पढ़ता है और देखो कैसा नाटक कर रहा है। मैंने भी हार

नहीं मानी.. मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था.. मेरे अन्दर भी बहुत कुछ हो रहा था.. मुझमें बेशर्मी बढ़ रही थी।

‘इतने भी सीधे-साधे मत बनो कि सुहागरात के दिन पत्नी को छूना तो दूर मुँह भी देखने से शरमाओ.. अरे इस उम्र में

तो सबको सेक्स की जिज्ञासा होती है.. यह तो एक सहज बात है। झिझक छोड़ो और खुलकर बात करो.. अब तुम बड़े

हो गए हो.. शरमाने से स्मार्ट नहीं बन सकते..’

चंदर फिर भी मुँह मोड़े हुए शर्म से मुस्कुरा रहा था।

‘ठीक है भाई.. अब और नहीं पूछती.. लेकिन गर्ल-फ्रेंड होना.. लड़कियों की ओर आकर्षित होना या सेक्स के बारे में

सोचना.. ये सब बुरी बात नहीं है। अरे आजकल तुम्हारी उम्र के लड़के-लड़कियां एक दूसरे के साथ सेक्स भी कर लेते

हैं.. अब सब चलता है..’

यह कहते हुए मैं कमरे से निकल गई।

कल शनिवार है.. पति देर से घर आते हैं और वो भी शराब के नशे में धुत्त होकर आते हैं।

हर शनिवार अपने निकम्मे दोस्तों के साथ दारू पीते और घर लौट कर चुपचाप सो जाते।

चंदर का कॉलेज सिर्फ़ आधे दिन के लिए खुलता और वो दोपहर को लौट आता था। मेरी योजना के मुताबिक उसके

लौटने के बाद हम दोनों के पास 10 घंटों का एकांत समय होता था.. इसी दौरान मैं उसके साथ कुछ और सनसनीखेज

बातें छेड़कर गद्दे के नीचे रखी अश्लील किताबें और कन्डोम उसके सामने निकालती और उसे प्रलोभित करके अपने वश

में ले लेती और कामातुर होने पर मजबूर करने लगी थी। शर्म और लाज से वो पूरी तरह मेरे वश में हो गया था। मेरी

जवान जिस्म को देख उसकी नीयत तो बदलेगी ही.. उसके बाद.. आप समझ सकते हो..

जब तन की प्यास बुझी.. तो सब कुछ बदल सा गया। पहले जब भी रात के अंधेरे में उसकी हरकत करती और चरम

सुख के सनसनाते हुए पल जब बीत जाते.. तो ऐसा लगता कि अचानक मेरा मन पूरा शांत हो गया है।

कुछ ही पल पहले की करतूतें बुरी और अश्लील लगने लगता था.. अपने कुकर्म पर पछतावा होता था.. लेकिन अब मुझे

कोई पछतावा नहीं था।

बल्कि एक ऐसी चंचल मस्ती चाह थी कि दोबारा करने को जी चाह रहा था। सेक्स की प्यासी तो थी.. लेकिन मैंने

इस तरह अश्लील साहित्य के सहारे जलती हुई वासना की आग में और भी घी डाल दिया था।

भारी साँसें भरती हुई मैंने दोबारा उन किताबों के अन्दर झाँका.. गंदे अश्लील चित्रों को देखते ही एक नई उमंग मेरे

अन्दर दौड़ी.. बहुत सारे सनसनीखेज विचार मन में जन्म ले रहे थे। उन विचारों में एक विचार था कि मेरा भांजा

चंदर जब इन किताबों को पढ़ता तो उसके दिमाग़ में कैसे ख़याल आते? क्या वो भी किसी लड़की के साथ ये सब कुछ

करता हुआ सपना देखता था क्या?

दिमाग़ की ट्रेन का ब्रेक फेल हो गया और मेरे मन में ऐसे-ऐसे विचार आने लगे कि मानो कोई बड़ा सा बाँध टूट पड़ा

हो और बाँध में क़ैद पानी उछल-उछल कर बहता जा रहा हो।

चंदर के नंगे जिस्म का दृश्य मेरे मन में आने लगा। थोड़ी ही देर में ख़यालों में अपने आपको भान्जे के साथ संभोग

करते हुए देखने लगी।

बस.. फिर क्या था.. ट्रेन पटरी से उतर गई और ख़यालों की दुनिया से असल जगत में आ पहुँची.. लाज और शर्म भी

डूब गई.. छी: .. कितना गंदा ख़याल है।

मैंने तुरन्त उठकर सब कुछ ठीक कर दिया और ठंडे पानी से नहा लिया ताकि जिस्म की गर्मी मिटा सकूँ। नहाने के बाद

नाइटी पहन ली और खाना खाकर बेडरूम में लेट गई।

इसके बाद एक बार चस्का जो लगा.. सो लगा.. यह तो पहले ही बता चुकी हूँ.. मन जब काबू में ना हो तो दौड़ पड़ता

है.. और मेरा मन फिर से ट्रेन की तरह दौड़ने लगा। वही अश्लील विचार मुझे फिर से तंग करने लगे।

अवैध संबंध वाली कहानियों में मामी-भान्जे की एक सनसनाती हुई सेक्स की कहानी थी। जिसमें मामी सब हद पर

करते हुए भान्जे के साथ ऐसी हरकतें कर बैठती.. जो एक पति-पत्नी भी एकांत में करने से शरमाते हैं।

मैं मामी की जगह अपने आपको देखने लगी और भान्जे की जगह चंदर को।

मेरे शरीर में करेंट सा दौड़ रहा था और मैं बेहताशा गीली हो रही थी.. अपनी आँखें बन्द करती तो यही दृश्य सामने

आ जाता.. आँखें खोलती तो फिर से बन्द करके वही सपना देखने की इच्छा होती।

मन में शर्म और लाज ने मस्ती और वासना से जंग छेड़ रहे थे। आख़िर बहकता हुए मन ने शर्म और लाज को अपने

आपसे मिटा डाला। आख़िर कब तक मैं अपने जिस्म को ऐसी दंड देती रहूंगी।

पहली बार जो मेरे और चंदर के अवैध सम्बन्ध बने तो मन ग्लानि से भर उठा था और उसी समय सोच लिया था कि

अब आगे से इसके साथ ऐसा नहीं करूँगी.. पर आप सब तो जानते ही हैं कि ये आग ऐसी आग है जो कभी भी नहीं

बुझती है सो चंदर से शारीरिक रिश्ते बनते रहे।

मुझे नहीं मालूम कि मैं सही किया या गलत किया पर तब भी यदि सामाजिक वर्जनाओं को एक बार के लिए भूल भी

जाएं तो कायनात की शुरुआत में आदम और हव्वा की कहानी याद आती है जब न रिश्ते थे और न कोई सामाजिक

बंधन था.. बस जिस प्रकार उस बनाने वाले की रचनाओं ने सृजन करते हुए खुद की ‘संख्या वृद्धि’ का प्रयास किया.. मैं

उसी को अपनाती रही.. लेकिन सृजन करके सन्तान का कोई प्रयास नहीं किया.. उधर लोकाचार और पति से कुछ

भय बना रहा।

ये मेरी जीवन डायरी के कुछ अंश हैं जो मैंने आप सभी के सामने प्रस्तुत करने का प्रयास किया है।

samapt
 
गेटपास का रहस्य-1

सुनीता की शादी होने के बाद एक बार फिर से मैं तन्हा हो गया था, मैं चाहकर भी सुधा या

सुनीता से नहीं मिल सकता था क्योंकि मैं नहीं चाहता था मेरी वजह से उनको कोई परेशानी

हो इसी तरह से मेरे दिन कट रहे थे। पर मेरे नसीब में तो कुछ और ही लिखा था, सुनीता

की शादी के 2 महीने बाद ही मेरे साथ एक और रोमांचकारी घटना घटी, इस घटना को अपने

शब्दों में पिरो कर एक बार फिर मैं आपके सामने आया हूँ।

वो दिन मुझे आज भी याद है, उस दिन रविवार था और मैं सोकर भी लेट ही उठा, मैं नहा

धोकर टी.वी पर प्रोग्राम देख रहा था, सुबह के करीब 10:30 बजे थे, तभी किसी ने मेरे घर

का दरवाजा खटखटाया, मैंने दरवाजा खोला, तो मेरे सामने मेरा दोस्त प्रेम खड़ा था, प्रेम मुझे

देखते ही बोला- साजन, चल यार मुझे कपड़े खरीदने हैं, तुम मेरे साथ मार्किट चलो।

कपड़े का नाम सुनकर मुझे भी याद आया- यार कपड़े तो मुझे भी खरीदने हैं, एक मिनट

रुक, मैं अभी आया जूते पहनकर !

मैंने अपने जूते पहने और कुछ रूपये अपनी जेब मे डालकर बाहर आकर प्रेम से बोला- अब

चलते हैं।

अभी हम घर से बाहर निकल कर सड़क पर आये ही थे कि हमें एक और दोस्त मिल गया,

जिसका नाम राजू था, प्रेम ने राजू से पूछा- गेटपास बाहर है क्या?

तो उसने कहा- हाँ है।

उन दोनों की बात मेरी तो समझ में नहीं आ रही थी, वो किस बारे में बात कर रहे हैं।

इतना बता कर वो चला गया, मैंने प्रेम से पूछा- यह गेटपास क्या है, इस गेटपास का क्या

रहस्य है?

"तुझे नहीं पता गेटपास के बारे में?"

मैंने उससे बोला- नहीं यार, मुझे नहीं इस बारे में !

प्रेम ने मुझसे कहा- चल, तुझे सब बताता हूँ।

हम सड़क पर आ गये और एक जगह रुककर प्रेम ने मुझे इशारा करते हुए बोला- उधर देख!

मैं उसी तरफ देखने लगा जिधर प्रेम ने मुझे इशारा किया था।

एक चार मंजिला मकान था, उसकी पहली मंजिल पर एक लड़की खड़ी थी, बेहद ही सुन्दर

उसने उस टाइम हाफ पेंट और टी–शर्ट पहनी हुई थी, उसकी उम्र लगभग 18 साल की लग

रही थी, हाईट उसकी 5'0" की थी और उसके बूब्स भी ज्यादा बड़े नहीं थे, उसको देख कर

मेरे मुँह से निकल गया- वाह क्या माल है !

मैंने प्रेम से पूछा- कौन है ये? क्या नाम है इसका?

प्रेम बोला- देख लिया? चल अब, तुझे रास्ते में बताता हूँ सब कुछ !

और फिर हम दोनों मार्किट की तरफ चल दिए, रास्ते में प्रेम बोला- तूने अभी पूछा था न कि

गेटपास क्या है? तो ये है गेटपास इसका हमने कोड रखा हुआ है, नाम हमें भी नहीं पता

अभी तक।

मैं- अच्छा तो यह है गेटपास, कब आया यह?

प्रेम- दो महीने हो गए हैं इसको आये हुए !

मैं- इसके पीछे कौन-कौन लगा हुआ है?

प्रेम- बस तू ही नहीं है, बाकी सब हैं।

मैं- किसी की बात बनी या नहीं?

प्रेम- कहाँ यार ! यह किसी को घास भी नहीं डालती।

मैं- ठीक है, मैं भी कोशिश करता हूँ, शायद मुझसे हो जाये।

प्रेम- हम में से किसी से तो हुई नहीं, तुझसे हो जाएगी ये?

मुझे उसकी बात सुनकर बहुत गुस्सा आया, मैं ताव में आकर उससे बोला- तुम सब को दो

महीने हो गए, इसका नाम भी पता नहीं कर पाए, दो दिन के बाद यह मेरे साथ होगी।

मेरी बात सुनकर प्रेम हँसने लगा और बोला- जब हो जाये तो मुझे भी बता देना !

यह बात यही पर खत्म हो गई।

उसके बाद हम दोनों ने मार्किट से कपड़े ख़रीदे और अपने घर आ गए, घर आकर मैं सोच में

पड़ गया, ताव में आकर मैंने प्रेम को बोल तो दिया है पर यह होगा कैसे? तभी मुझे याद

आया उस लड़की के पड़ोस में तो मेरी चाची जी रहती है, उनके दो बच्चे हैं, एक लड़का और

एक लड़की, उनमें सबसे बड़ी लड़की थी, उसका नाम दीपशिखा है, और वो मुझे बहुत मानती

है, मैं भी उसकी बहुत मानता हूँ, दीपशिखा मेरी छोटी बहन है, और उससे छोटा भाई है

जिसका नाम आशु है, तो मैंने सोचा इस काम में दीपशिखा मेरी मदद कर सकती है।

मैं अपनी चाची जी के घर गया, उस वक़्त चाची जी खाना बना रही थी और वो दोनों भाई

बहन टी वी देख रहे थे, चाची मुझे देख कर बोली- कहाँ रहता है? नजर भी नहीं आता, तूने

तो यहाँ आना ही छोड़ दिया।

मैं चाची जी से बोला- ऐसी तो कोई बात नहीं है, मुझे टाइम नहीं मिल पाता, इसलिए मेरा

आना कम हो गया है।

चाची बोली- चल अन्दर बैठ, खाना बना रही हूँ। अब आया है तो खाना खाकर ही जाना।

मैंने- कहा ठीक है चाची जी !

मैं घर के अन्दर चला गया। दीपशिखा और आशु दोनों अन्दर बैठे टी वी देख रहे थे,

दीपशिखा मुझे देखकर बोली- भाई, आज कैसे घर का रास्ता भूल गये?

मैं- ऐसी कोई बात नहीं है, आजकल मुझे टाइम नहीं मिलता, पर आज तुमसे कुछ काम भी

था।

दीपशिखा- क्या बात है भाई, बोलो ना !

तभी चाची ने ने आवाज लगाई- दीप, खाना ले जाओ !

"भाई, मैं अभी आई !" और इतना कह कर दीप खाना लेने रसोई में चली गई। कुछ देर बाद

चाची जी और दीप खाना लेकर कमरे में आ गई, हम सब ने मिलकर खाना खाया।

खाना खाने के बाद चाची जी बर्तन लेकर रसोई में चली गई साफ़ करने के लिए, चाची जी के

जाते ही मैं दीप से बोला- तुम्हारे पड़ोस में जो नये किरायेदार आये है, उनकी एक लड़की है,

मुझे उससे दोस्ती करनी है, क्या तुम मेरी मदद करोगी।

दीप- अच्छा वो, वो तो मेरी फ्रेंड है वही न जो पहली मंजिल पर रहती है?

मैं- हाँ वही, क्या नाम है उसका?

दीप- अच्छा उसका नाम तो मयूरी है, ठीक है मैं उससे बात करके देखती हूँ, फिर मैं आपको

बता दूंगी।

मैं- कब तक बता दोगी?

दीप- आज ही शाम को !

मैं- ठीक है, मैं इंतजार करूँगा शाम को।

इतना कह कर मैं वहाँ से अपने घर चला आया और यही सोचता रहा अब आगे क्या होगा,

अभी मुझे घर पर आये हुए दो ही घंटे हुए थे कि दीप मेरे घर पर आई और बोली- भाई चलो

मेरे साथ, मयूरी आपको देखना चाहती है, आपको देखने के बाद ही वो बताएगी, वो आप से

दोस्ती करेगी या नहीं !

मैंने कहा- ठीक है, चलो मैं चलता हूँ।

और फिर मैं दीप के साथ बाहर चला गया।

हम दोनों दीप के घर पर पहुँचे तो दीप ने कहा- भाई। आप बैठो मैं उसको बुला कर लाती हूँ।

दीप के घर पर उस वक़्त कोई नहीं था क्योंकि चाची जी पड़ोस में बैठी थी और उसका छोटा

भाई ट्यूशन गया हुआ था, मैं घर के अन्दर जाकर बैठ गया, दीप मयूरी को बुलाने के लिए

चली गई।

कुछ देर बाद दीप मयूरी को साथ लेकर घर में आई, क्या लग रही थी मन तो कर रहा था

कि....?

छोड़ो, मन की बातों को मन तो पता नहीं क्या क्या करता है।

आज भी उसने हाफ पेंट और टीशर्ट पहनी हुई थी, इन कपड़ों में उसका गोरा बदन और भी

मादक लग रहा था, गोल चेहरा पतली सी कमर उसकी नंगी जाँघ को देकर ही मेरा लौड़ा

खड़ा हो गया था, वो कमसिन सी लड़की मुझे बेहद हसीन और सुन्दर लग रही थी।

दीप ने मयूरी से कहा- ये हैं मेरे भाई, इनका नाम साजन है और तुमसे दोस्ती करना चाहते

हैं, तुमने देखने को बोला था अब देख ले अच्छी तरह से, तुम दोनों बैठ कर बाते करो, मैं तब

तक चाय बनाती हूँ।

इतना कह कर दीप रसोई में जाने लगी तो मयूरी ने दीप का हाथ पकड़ कर उसको रोकते

हुए बोली- तुम भी यहीं पर रहो !

दीप ने मयूरी से हाथ छुड़ाते हुए उसके कान में कहा- क्यों क्या हुआ? पसंद नहीं आये क्या

मेरे भैया?

मयूरी- नहीं ऐसी बात नहीं है।

दीप- फिर जाओ उनके पास और बात करो ! मैं अभी आई।

इतना कह कर दीप रसोई में चली गई, मयूरी मेरे सामने खडी हुई थी और मैं सोफे पर बैठा

हुआ था। मैं खड़ा हुआ और मयूरी का हाथ पकड़ा तो वो बुरी तरह से कांप गई, उसने अपनी

आँखें नीची कर ली, उसका हाथ मेरे हाथ में आया तो मुझे ऐसा लगा जैसे मैंने कोई फूल

हाथ में ले लिया हो।

मैं- क्या मैं आपको पसन्द नहीं हूँ, अगर तुम बोलो तो मैं चला जाता हूँ।

मयूरी- मैंने कब कहा !

उसका यह जवाब सुनकर मेरा मन गद्गद हो गया, उसका हाथ पकड़ कर उसको सोफ़े पर

बैठा दिया और खुद भी उसके साथ चिपक कर बैठ गया, उसका हाथ अब भी मेरे ही हाथों में

था, उसने भी अपना हाथ छुड़ाने की कोशिश नहीं की, उसका हाथ अपने हाथ में लिए हुए मैं

मयूरी से बोला- जबसे तुम को देखा है, तबसे मैं तुमको चाहने लगा हूँ तुम बहुत ही सुन्दर

हो।

मेरी बात सुनकर उसने मेरी तरफ देखा, पर कहा कुछ नहीं, उसकी आँखें बता रही थी कि वो

भी भी मुझे पसन्द करने लगी है।

मैं उसका हाथ हल्के से दबाते हुए बोला- तुम कुछ तो बोलो?

मयूरी कुछ बोलती, उससे पहले दीप चाय लेकर कमरे में आ गई और वो बोलते-बोलते चुप

हो गई।

फिर हम तीनों ने चाय पी, दीप ने मयूरी को छेड़ते हुए उससे बोली- कुछ बात भी की या ऐसे

ही चुपचाप बैठे हो तुम दोनों?

दीप की बात सुनकर मयूरी ने अपनी नजरें नीचे झुका ली और जमीन पर बिछे कालीन को

अपने पैर के अंगूठे से कुरेदने लगी, बोली कुछ नहीं !

उसको बोलता न देख दीप ने मुझे पूछा- भाई, बात की आपने या नहीं?

मैंने दीप से कहा- अभी शुरू ही की थी और तुम आ गई, इससे मैंने कुछ पूछा था पर तेरे

आने से ये चुप हो गई।

"अच्छा जी, मुझसे शर्म आती है अब इसको?" दीप अपनी आँखें निकलती हुई बोली।

दीप ने मुझसे कहा- भाई आप एक काम करो, इसको ऊपर वाले कमरे ले ले जाओ और बात

कर लो, पर जल्दी करना, कहीं मम्मी न आ जायें वैसे तो मम्मी को आने में एक घंटा

लगेगा।

मैंने दीप से कहा- अगर चाची जी आ गई तो क्या कहोगी?

दीप मयूरी से बोली- एक काम करो, तुम मेरी कुछ किताबें ले जाना, ऊपर अगर मम्मी

आएगी भी तो बोल दूँगी, इसको कुछ समझ नहीं आ रहा था और भाई भी आ गए तो मैंने

ही भाई को बोला था पढ़ाने के लिए।

मुझे भी दीप की यह बात कुछ हद तक सही लगी, फिर दीप ने कुछ किताब निकल कर

मयूरी को दी और कहा- जाओ, अब और खुल कर बात करना !

मयूरी के गाल शर्म से लाल हो गए थे, फिर मैं अपने साथ मयूरी को ऊपर के कमरे में ले

गया।

ऊपर आकर मैंने मयूरी के हाथों से किताबें लेकर बेड पर रख दी, हम दोनों अभी खड़े हुए थे।

मयूरी का हाथ पकड़ कर उसकी आँखों में देखते हुए बोला- तुमने जवाब नहीं दिया?

मेरी बात जैसे उसने सुनी ही न हो, वो चुपचाप खड़ी रही, उसको चुप चाप खड़ी देखकर मैं

मयूरी से बोला- अगर ऐसे ही चुप रहना है तो मैं जा रहा हूँ।

इतना कह कर जैसे ही मैं मुड़ने को हुआ, मयूरी ने मुझे पकड़कर मेरे सीने से लग गई और

अपने दोनों हाथों से मेरी कमर पकड़ ली, तभी एकाएक वो मेरे गाल को चूमने लगी।

अचानक हुए इस हमले से मैं हैरान हो गया, मुझे मयूरी से ऐसी आशा नहीं थी पर अब मैं

बहुत खुश था क्योंकि उसने मेरे गालों को चूम कर अपना जवाब दे दिया था। इससे अच्छा

जवाब मुझे आज तक किसी ने नहीं दिया था।

अपने प्यार का इजहार मयूरी ने बहुत ही अनोखे अन्दाज से किया था, फिर मयूरी ने मेरे

सीने पर अपना सर रख दिया और अपने दूसरे हाथ से मेरे सीने को सहला रही थी।

मैंने मयूरी के माथे पर चुम्बन किया और उसका चेहरा अपने एक हाथ से ऊपर की ओर

किया तो उसने अपने आँखें बंद कर ली, मेरा एक हाथ उसकी कमर में लिपटा हुआ था। मैंने

उसकी दोनों आँखों को चूमा फिर उसके माथे को चूमा।

अब शायद उसको भी अन्दाजा हो गया था, कि अब आगे क्या होने वाला है, तभी तो उसकी

दिल की धड़कनें बहुत तेजी से बढ़ने लगी थी, उसकी दिल की धडकन मुझे साफ़ साफ़ सुने

दे रही थी। उसके पतले-पतले होंठ, धडकनों की ताल पर थिरक रहे थे। मैंने अपने होंठ को

उसके थिरकते होंठों के ऊपर रख दिए अब उसके लबों की थिरकन बन्द हो चुकी थी।

उसने मुझे अपने दोनों हाथों से इस तरह जकड़ लिया था मानो कह रही हो समां जाओ

मुझमें। फिर मैं उसके नीचे वाले होंठ को अपने होंठ में दबा कर उसके लबों का अमृत रस

पीने लगा, क्या मस्त स्वाद था उसके होंठों का, मुझे ऐसा लग रहा था कि जैसे मैंने गुलाब

की पंखुड़ियों पर अपने होंठ रख दिए हो और उसका स्वाद ऐसा जैसे मीठे मीठे रसगुल्लों का।

अभी मुझे उसके लबों का रस पीते हुए दस मिनट ही हुये थे। मुझे लगा कि कोई सीढ़ियों से

कोई ऊपर आ रहा है, इसलिए मैंने मयूरी के लबों को अपने होंठों की कैद से आजाद कर

दिया और फिर मैं मयूरी से धीरे से बोला- लगता है कोई आ रहा है।

इतना सुनते ही वो भी मुझसे लग हो गई और अपनी उखड़ी हुई सांसों को नियंत्रण करने की

कोशिश करने लगी और इधर मैंने जल्दी से एक किताब अपने हाथ में ले ली कि देखने वाले

को यह लगे कि मैं उसको पढ़ा रहा हूँ।

अभी हम दोनों सम्भले ही थे कि दीपशिखा कमरे के गेट पर खड़ी हो गई और वो हम दोनों

को घबराया हुआ देख कर उसकी हंसी निकल पड़ी। दीप के हँसने के अंदाज से मुझे यह

आभास हो गया था कि अभी सब कुछ ठीक है।

दीप ने मुझसे कहा- सॉरी भाई ! मैंने आपको डिस्टर्ब किया।

मैंने दीप से कहा- कोई बात नहीं बोलो तुम?

ये शब्द मैं दीप से कह जरूर रहा था पर मुझे दीप पर बहुत गुस्सा आ रहा था कि इसको भी

अभी ही आना था !

अभी मैं सोच ही रहा था कि दीप की आवाज मेरे कानों में सुनाई पड़ी- भैया, मम्मी अभी

आई थी।

दीप ने इतना ही कहा था कि मेरी और मयूरी की हालत खराब हो गई, मैंने दीप से पूछा-

क्या चाची जी आई गई हैं?

दीप ने कहा- आई थी पर घबराने बात नहीं है, मम्मी पड़ोस वाली आंटी के साथ मार्किट कुछ

सामान लेने गई है। बस वो मुझे इतना ही बताने आई थी और वो अब कम से कम दो घंटे

से पहले नहीं आयेंगी इसलिए आप दोनों आराम से बात करो !

दीप की बात सुनकर मेरी जान में जान आई और अब मयूरी के चेहरे पर भी ख़ुशी की

झलक दिखाई दे रही थी।

दीप ने मुझसे कहा- भाई, आपकी इससे कुछ बात हुई या नहीं या ये अभी भी शरमा रही है?

दीप की बात सुनकर मयूरी ने अपनी नज़र नीची कर ली, मैंने दीप से कहा- हाँ, कुछ बात तो

हुई है, और कुछ रह रही है।

दीप ने कहा- ठीक है, आप बात करो मुझे घर का काम निपटाना है, मैं तो चलूँ !

और इतना कह कर वो जाने के लिए मुड़ी और जैसे ही जाने को हुई तो वो रुक गई, जैसे

उसको कुछ याद आया हो। दीप वापस हमारी तरफ मुड़ी और वो बोली- सॉरी भाई, मयूरी से

कुछ कहना था, वो तो मैं भूल ही गई !

और फिर वो मयूरी के पास पहुँची और उसके कान में दीप ने बहुत धीरे से कुछ कहा जो

मुझे सुनाई नहीं दिया पर दीप की बात सुन कर मयूरी अब कुछ ज्यादा ही शरमा रही थी।

दीप ने मयूरी से जो कहना था, वो कहा और वो जैसे आई थी वो वैसे ही नीचे वापस चली

गई।

दीप के जाने के बाद मैंने किताब को एक तरफ रखी और मयूरी के पास पहुँचा, उसका हाथ

अपने हाथ में पकड़ कर उससे पूछा- दीप ने क्या कहा आपसे?

मयूरी ने कहा- कुछ नहीं कहा बस ! ऐसे ही ! कोई खास बात नहीं है।

पर यह कहते हुए उसके चेहरा शर्म से लाल हो रहा था, मुझे यह तो पता था कि दीप ने

उसको कुछ ऐसी बात बोली है जो उसको बताने में संकोच हो रहा था।

मैंने मयूरी के दोनों कंधों पर अपने हाथ रख कर उसको अपनी तरफ खींचा और वो भी मेरे

पास खिंचती हुई चली आई, मैं अपने होंठ उसके कान के पास ले जाकर उससे बोला- बोलो

न, क्या कहा था?

पर उसने कुछ नहीं कहा और वो चुपचाप खड़ी रही। उसको बोलता न देख मैंने अपने होंठ

उसकी गर्दन पर रख दिए। उसकी गर्दन पर चुम्बन अंकित करने लगा।

मयूरी ने अपने सर एक तरफ कर लिया जिससे मैं उस जगह को सही से चूम सकूँ, वो भी

अपने एक हाथ से मेरे सर के बाल सहलाने लगी और मैं उसकी गर्दन को चूमता हुआ उसके

कंधे तक पहुँच नीचे की ओर जाने लगा, अब मैं उसको चूमता हुआ उसके वक्ष पर पहुँच

गया, फिर मैंने टीशर्ट के ऊपर से दोनों उभारों को चूमा 'म्मूऊऊऊ आआह्ह्ह्ह !' और मयूरी

के मुँह से आवाज निकलने लगी, मैं मयूरी की तरफ देखने लगा।

उस वक़्त वो अपने निचले होंठ को अपने दांतों से काट रही थी और कोशिश कर रही थी

उसके मुख से कोई आवाज न निकले पर इतनी कोशिश के बावजूद उसके मुँह से आवाज

निकल ही गई। मैं उसके पीछे जाकर खड़ा हो गया अब उसके कूल्हे मेरे लंड के सामने थे,

मेरा लंड भी पूरी तरह तैयार हो चुका था, मैंने अपने लंड को मयूरी के चूतड़ों पर लगाते हुए

उसकी गर्दन को चूमने लगा और साथ ही मैंने अपने दोनों हाथों से उसके दोनों बूब्स पकड़

लिए।

जैसे ही मेरे हाथ उसके बूब्स पर पहुँचे, मयूरी का बदन कांपने लगा जिसको मैं महसूस कर

रहा था, मयूरी के बूब्स बहुत ही कठोर हो चुके थे। मैंने उसके उरोजों को अपने हाथों से

हल्का सा दबाया तो मुझे पता चला कि उसने टी शर्ट के नीचे कुछ भी नहीं पहना था, मयूरी

के बूब्स पकड़ कर ही मुझे उसका सही साइज का पता चला उसके बूब्स का साइज शायद

26 था।

मैं मयूरी के बूब्स आहिस्ता आहिस्ता दबा रहा था और वो भी मदहोश होकर अपने बूब्स मुझे

मसलवा रही थी, कुछ देर ऐसे ही टीशर्ट के ऊपर उसके बूब्स मसलने के बाद मैंने अपने दोनों

हाथ उसकी टी शर्ट के अन्दर डाल दिए और उसकी नग्न चूचियों को अपने हाथों में थाम

लिया। जैसे ही मैंने उसकी नग्न चूचियों को पकड़ा तो मेरा लंड मानो फटने की कगार पर आ

गया था।

इससे पहले में कुछ और आगे बढ़ता, उसने मुझे रोक दिया और बोली- दरवाजा खुला हुआ है।

मैंने एक नजर उसको देखा और फिर दरवाजे को, जो सही में खुला हुआ था, मैंने किसी तरह

अपने को कंट्रोल किया और कुछ समय के लिए मैं मयूरी से लग हो गया, मैंने मयूरी से

कहा- तुम ही बताओ, क्या करें?

तो वो शरमाते हुये बोली- पहले दरवाजा बन्द कर आओ !

मैं उसकी मन की बात को समझ चुका था, फिर भी मैं उससे बोला- कोई आ गया तो? तब

क्या होगा?

मेरी बात सुन कर वो मेरे सीने से लग गई और बोली- कोई नहीं आएगा और अगर कोई

आएगा भी तो दीपशिखा संभाल लेगी। दीपशिखा ने मेरे कान में यही कहा था।

मयूरी की बात सुनकर मुझे पता चल गया था कि आग बराबर की लगी हुई है, मैंने मयूरी से

कहा- अच्छा जी, पहले क्यों नहीं बताया तुमने? और इतना कह कर उसके होंठ चूम लिए

और फिर मैंने उसको अपने से अलग किया और दरवाजा बंद कर दिया।

जैसे ही मैं दरवाजा बंद करके मयूरी के पास पहुँचा तो मयूरी बोली- एक मिनट, मैं फ्रेश हो

कर आती हूँ !

और इतना कह कर मयूरी बाथरूम में चली गई जो उसी रूम में अटैच था, अन्दर जाकर

उसने बाथरूम का दरवाजा बंद नहीं किया था, मुझे वहीं पर खड़े हुए सब दिख रहा था कि वो

क्या कर रही है, वो अपना चेहरा पानी से धो रही थी, मुझसे से अब यह दूरी बर्दाश्त नहीं हो

रही थी, इसलिए मैं भी उसके पीछे-पीछे बाथरूम में पहुँच गया, वो अभी अपना मुँह धो ही

रही थी।

मैंने उसको पीछे से पकड़ लिया और अपने दोनों हाथ उसके बूब्स पर रखा दिए, वो सीधी

खड़ी हो गई और मैं उसकी गर्दन पर किस करने लगा, मयूरी ने अपना गीला हाथ मेरे हाथ

के ऊपर रख दिया और मेरे हाथ से अपने बूब्स को पकड़ कर दबाने लगी, फिर मैं भी उसके

बूब्स को और जोर से दबाने लगा।

मयूरी ने अपना चेहरा पीछे की तरह घुमाया और मेरे होंठ से अपने गीले होंठ मिला दिए और

उनको चूसने लगी।

फिर मैंने उसको घुमाकर अपने सामने की तरफ किया और उसकी टीशर्ट को उतरने लगा तो

मयूरी ने मेरे हाथ पकड़ लिए और मुझे मना करने लगी, पर मैं कहाँ मानने वाला था, मैंने

उसकी टीशर्ट उतार कर ही दम लिया, उसने टीशर्ट के नीचे कुछ भी नहीं पहना था, उसकी

नग्न चूचियाँ अब मेरी नजरों के सामने थी, मयूरी ऊपर से नंगी हो चुकी थी, इसलिए वो

मुझसे शर्म के मारे नजरे नहीं मिला पा रही थी।

मयूरी अपनी दोनों चूचियों को अपने दोनों हाथ से छुपाने की कोशिश करने लगी पर मैंने

उसके हाथ को हटाते हुए उसको कहा- जानम, इतनी खूबसूरत चीज को क्यों छुपा रही हो

और वैसे भी अब इन पर मेरा ही तो हक है।

मयूरी ने मेरी बात सुनकर कुछ नहीं कहा और धीरे धीरे अपने दोनों हाथ अपनी चूचियों से

हटा दिए ! क्या मस्त उभार थे उसके वक्ष पर ! मौसमी के आकार के, उन पर उसकी गुलाबी

निप्पल ! मन बेकाबू हुए जा रहा था।

मैंने उसके नग्न बूब्स पर अपने हाथ रखे तो मयूरी का शरीर कांप गया अब मेरे हाथों में

उसके दोनों बूब्स थे और उनको मैं बड़े ही प्यार से सहला रहा था, मैंने सहलाते हुए एक

स्तन के ऊपर अपने होंठ रख दिए अब तो मयूरी की हालत और भी पतली हो गई, पहले

मैंने उसके बूब्स को बारी-बारी चूमा और फिर एक बूब्स को अपने मुँह में लेकर उसको ऐसे

चूसने लगा जैसे कोई बच्चा टॉफ़ी चूसता है।

मयूरी के मुँह से सिसकारियाँ निकल रही थी, वो बहुत ही गर्म हो चुकी थी।

गर्म तो मैं भी हो चुका था पर मैंने अपने आप को संभाला हुआ था वरना इन कुँवारी चूचियों

को छूने मात्र से ही लंड पानी छोड़ देता, मैं अपना पूरा मुँह खोल कर उसकी पूरी की पूरी

चूची अपने मुँह में लेकर उसको चूसने लगा, दोनों चूचियों को बारी-बारी जी भर कर चूसा,

चूस-चूस कर पूरा गीला कर दिया। उसकी चूचियाँ उत्तेजना के कारण और भी कठोर हो गई

थी।

फिर मैंने उसको अपने सीने से लगा लिया और उसको चूमते हुए मैंने अपना एक हाथ उसके

हाफ पेंट के ऊपर उसकी चूत पर रख दिया, उसको ऊपर से ही सहलाने लगा। मेरा हाथ जैसे

ही उसकी चूत पर पड़ा, वो सीधी हो गई और मेरे होंठ को जोर-जोर से चूसने लगी,

अब तक मैंने उसकी हाफ पेंट के बटन खोल दिये थे, जैसे ही हाफ पेंट के बटन खुले तो वो

नीचे सरक कर उसके पैरों में आ गई।

इससे आगे मैं कुछ और करता पर, तभी दरवाजे पर दस्तक हुई और साथ ही दीपशिखा की

आवाज भी आई- भाई, मैं हूँ दीपशिखा, जरा बाहर आओ !

मैंने दीप से बोला- एक मिनट रुको, मैं अभी आया !

मैंने मयूरी को बोला- तुम बाथरूम का दरवाजा बन्द कर लो, मैं अभी आता हूँ।

फिर मयूरी को उसी हालत में छोड़ कर मैं बाहर आ गया। बाथरूम से मेरे निकलते ही मयूरी

ने बाथरूम का दरवाजा बंद कर लिया।

मैंने दरवाजा खोला तो दीप सामने खड़ी थी और कुछ घबराई हुई सी लग रही थी, मैंने दीप

से पूछा- क्या हुआ? तुम इतनी घबराई हुई क्यों हो?

तो दीप ने कहा- भाई, पता नहीं मम्मी जल्दी कैसे वापस आ गई हैं, आप दोनों जल्दी से

नीचे आ जाओ, मम्मी अभी जिस आंटी के साथ गई थी, उनके घर गई हैं सानान छुड़वाने के

लिए, इससे पहले मम्मी वापस आयें, आप दोनों नीचे आ जाओ !

और इतना कह कर वो नीचे चली गई।

मैं वापस मयूरी के पास आया और मयूरी को बोला- जान तुम बाहर आ जाओ, दीपशिखा

नीचे गई।

इतना सुनकर उसने बाथरूम का दरवाजा खोला और जिस हालत में उसको छोड़ कर गया था

वो अब भी उसी हालत में ही थी और उसी हालत में ही मेरे सामने आ गई, उसकी हाफ पेन्ट

अब भी उसके दोनों पैरो में फंसी हुई थी, मैं उसके नजदीक गया और नीचे झुक कर उसकी

बिना बालों की चूत पर एक चुम्बन किया। मयूरी की चूत देख कर ही मुझे पता चल गया था

कि वो अभी वो कुँवारी है। फिर मैंने उसके पैरों में फंसी हुई हाफ पेंट को पकड़ कर ऊपर

किया और उसके बटन लगाने लगा।

मयूरी मेरी इन हरकतों को बड़े गौर से देख रही थी, उसके हाफ पेन्ट के बटन लगाने के बाद

मैं ऊपर उठा और उसके होंठों को चूमते हुए बोला- सॉरी जान, चाची जी आ गई हैं, हमको

अभी तुरंत नीचे जाना होगा।

मेरी बात सुनकर कर उसका खिला हुआ चेहरा मुरझा गया पर उसने मुझसे कुछ भी नहीं

कहा और ना ही कोई शिकायत की, फिर उसने भी जल्दी से अपनी टीशर्ट पहनी और हम

दोनों नीचे वाले कमरे में आकर बैठ गये।

अभी तक चाची जी वापस नहीं आई थी, हम आपस में बात करने लगे, मैंने उसके बारे में

सब कुछ जान लिया जैसे वो कहाँ पढ़ती है, उसके पिता का क्या नाम है, वो क्या काम करते

हैं, उसके घर में कितने सदस्य हैं, उनके नाम क्या हैं, मुझे जो कुछ भी पता करना था, मैंने

वो सब मयूरी से पूछ लिया।

अभी हम बात कर ही रहे थे कि चाची जी आ गई और मुझे देखकर बोली- अरे तुम कब

आये?

मैंने चाची जी को सफ़ेद झूठ बोला- बस चाची जी अभी अभी आया हूँ आपके आने से कुछ

देर पहले !

चाची की मेरी बातों पर पूरा विश्वास था इसलिए उन्होंने और कुछ मुझसे नहीं पूछा, चाची

जी ने दीपशिखा को चाय बनाने के लिए बोला तो दीपशिखा रसोई में जाने लगी तो मयूरी ने

कहा- मैं भी आती हूँ ! वो दोनों रसोई में चली गई चाय बनाने के लिए। मैं और चाची जी

बात करने लगे। कुछ देर बाद ही मयूरी और दीप चाय लेकर आ गई, हम सबने चाय पी और

उसके बाद मैं अपने घर आ गया।

घर आकर देखा तो शाम के चार बज चुके थे, मैंने अपने जो जरूरी काम थे, वो निपटाये और

फिर कुछ देर आराम करने के लिए बेड पर लेट गया।

मैं बहुत खुश था क्योंकि जो मैंने प्रेम से दावा किया था वो तो काम मैंने कर ही दिया था।

शाम के सात बजते ही मैं फिर से घर से बाहर निकल गया, बाहर आकर देखा तो मेरे सारे

दोस्त मयूरी के बारे में ही बातें कर रहे थे, ठीक उसके घर से कुछ ही दूरी पर, मैं उनके पास

पहुँचा, मेरा चेहरा ख़ुशी के कारण खिला हुआ था तो सभी दोस्तों को पता चल गया कि आज

मैं बहुत ही खुश हूँ।

प्रेम ने मुझसे पूछा- क्या बात है, आज बहुत खुश दिखाई दे रहा है?

मैंने प्रेम से कहा- मैंने तुमको जो बोला था, वो मैंने कर दिखाया इसलिए मैं बहुत ही खुश हूँ।

प्रेम- क्या मतलब?

मैं- मेरी उससे बात हो गई है?

प्रेम- किससे? गेटपास से?

मैं- हाँ, उसी से ! और वो भी मुझ पर पूरी तरह फ़िदा है।

प्रेम- मैं नहीं मानता, अच्छा उसका नाम क्या है?

मैं- उसका नाम मयूरी है और मुझे जो भी कुछ उसके बारे में जो पता था मैंने वो सब बता

दिया, मेरी बात सुनकर सबको आश्चर्य हो रहा था, सभी दोस्त मेरी बात को बहुत ही ध्यान

से सुन रहे थे पर मेरी बात को किसी को भी विश्वास नहीं हो रहा था।

प्रेम- हम नहीं मानते, यह जो तुम बता रहे हो, यह तुम अपनी तरफ से ही बना कर कह रहे

हो।

मैं- मैं सच कह रहा हूँ।

प्रेम- अच्छा सच कह रहा है तो देख वो ऊपर ही खड़ी है जरा उसको नीचे बुला और उससे

बात कर, तब हम तेरी बात पर विश्वास करेंगे।

मैं- ठीक है पर मेरी एक शर्त है, जब तक मैं उससे बात करूँ तो कोई भी बीच में नहीं

आयेगा और न ही कुछ बोलेगा।

प्रेम- ठीक है, हम में से कोई बीच में नहीं आयेगा।

मैं- ठीक है, मैं तुम सबको उससे बात करके दिखता हूँ।

और इतना कह कर मैं मयूरी के घर के सामने जा पहुँचा, जैसे ही मैं उसके घर के सामने

पहुँचा, मयूरी ने मुझे देख लिया मैंने उसको इशारा करके उसको नीचे आने के लिए कहा,

मयूरी ने अपने सर को हिलाकर मुझे अपने नीचे आने का संकेत दिया, कुछ देर पश्चात् वो

मेरे सामने खड़ी थी, उसने आते ही मुझे कहा- आप भी ना ! जल्दी बोलो, कहीं मम्मी ने देख

लिया तो मुसीबत हो जाएगी।

मयूरी की आवाज में पकड़े जाने का डर साफ़ महसूस हो रहा था।

मैं- मेरा मन नहीं लग रहा था, मुझे तुम्हारी बहुत याद आ रही थी इसलिए तुमको बुलाया,

क्या तुम मेरे साथ कुछ देर के लिए मार्किट चल सकती हो?

मयूरी- इस वक़्त किसी ने देख लिया तो?

फिर कुछ सोचती हुई बोली- ठीक है, पर हम जल्दी वापस आ जायेंगे।

मैं- ठीक है।

मयूरी- दो मिनट रुको, मैं चप्पल पहन कर आती हूँ, आप इतने थोड़ आगे चलो।

और इतना कह कर वो ऊपर चप्पल पहने चली गई, उधर सभी दोस्तों की निगाह मेरे पर

टिकी हुई थी, वो सब मुझे बहुत ही ध्यान से देख रहे थे, मैं उसके घर के आगे से हट कर

कुछ आगे की तरफ खड़ा हो गया कुछ देर बाद मयूरी भी आ गई, फिर हम दोनों मार्किट की

तरफ चल दिये, मेरे सभी दोस्त हमारे पीछे पीछे आ रहे थे हमसे कुछ दूरी बना कर !

मैंने उसका हाथ अपने हाथ में लिया और उसको बोला- अब कब मिलोगी जैसे हम आज

मिले थे?

मयूरी ने कहा- पता नहीं, जब कोई मौक़ा मिलेगा तभी तो हम मिल पायेंगे !

इसी तरह बात करते हुये हम मार्किट में घूमने लगे और फिर हम कुछ ही देर में वापस आ

गए, मैंने उसको उसके घर छोड़ा और फिर मैं अपने दोस्तों के पास आ गया।

उन्होंने मुझे चारों तरफ़ से घेर लिया, सभी का एक ही सवाल था- भाई, तुमने ये सब कैसे

किया, हम तो इसका दो महीने में नाम भी पता नहीं कर पाये और तुमने तो कुछ ही घंटों में

इसको सेट भी कर भी लिया, ऐसा क्या जादू किया तुमने जो यह तुम्हारी दीवानी हो गई,

जब तुमने उसको बुलाया था वो नंगे पैर ही तुमसे मिलने भागी चली आई।

मैंने उन सबको कहा- यह राज की बात है, राज ही रहने दो, अगर मैंने तुम को यह बता

दिया तो मुझे कौन पूछेगा।

इस पर प्रेम ने कहा- मान गए साजन तुमको, तुमने जो कहा वो पूरा कर दिखाया, वो भी

कुछ ही घंटों में और इतने लोगों के बीच से ले उड़ना बहुत बड़ी बात है, तुमने उसको सेट

कर के बहुत बड़ा काम किया है, वास्तव में तुम्हारा साजन नाम बिलकुल सही है।

इस घटना के बाद मैं सभी दोस्तों का चहेता बन गया।

*****

मुझे मयूरी से मिले हुए दो दिन हो गए थे हमें ऐसा कोई अवसर नहीं मिला पर हाँ हम एक

दूसरे को देख जरूर लेते थे, पर जब- जब मैं उसको देखता था तो मेरी लंड की प्यास ओर

भी बढ़ जाती और शायद मयूरी का भी यही हाल था।

तीसरे दिन की बात है मैं अपने ऑफिस में था, तो करीब चार बजे मेरे चाचा जी फोन आया

और उन्होंने कहा- आज मैं और तुम्हारी चाची घर पर नहीं हैं क्योंकि तेरी चाची के पिताजी

की तबियत बहुत ज्यादा खराब है, हम उनको देखने आये हुये थे पर उनकी ज्यादा तबियत

खराब हो जाने के करण हम आज घर पर नहीं आ पायेंगे। घर पर दीपशिखा और आशु दोनों

अकेले हैं, तुम एक काम करना ऑफिस से घर जल्दी चले जाना और हमारे घर पर ही सो

जाना ! वैसे तो मैंने भाभी (मेरी मम्मी) को बोल दिया है, हम कल सुबह तक आ जायेंगे !

मैंने कहा- ठीक है चाचा जी, मैं घर जल्दी चला जाऊँगा !

और उन्होंने फ़ोन काट दिया।

नानाजी की तबियत के बारे में सुनकर में दु:खी तो बहुत हुआ पर मुझे इस बात की खुशी भी

थी कि मैं आज चाचा जी के यहाँ सोऊँगा और दीप से कह कर मयूरी को भी बुला लूँगा।

मैंने ऑफिस का काम जल्दी से निपटाया और अपने घर पहुँच गया, घर पहुँच कर मम्मी ने

मुझे बताया- तेरे चाचा का फ़ोन आया था आज तू उनके घर पर सो जाना, दोनों बच्चे अकेले

हैं।

मैंने मम्मी जी कहा- चाचा जी ने मुझे फ़ोन पर बता दिया था !

और इतना कह कर मैं नहाने के लिए बाथरूम में चला गया।

जब मैं नहा कर आया तो मम्मी ने कहा- मैं खाना बना देती हूँ, तू खाना खाकर वहीं पर

चला जा और उन दोनों के लिए भी खाना ले जाना !

मैंने मम्मी से कहा- मैं भी उन्हीं के साथ खा लूँगा, आप खाना बना दो !

कुछ देर बाद मम्मी ने हम तीनों का खाना पैक कर दिया, मैं खाना लेकर दीप के घर पहुँच

गया, मैंने दीप को खाना देते हुए कहा- खाना मत बनाना क्योंकि इसमें हम तीनों का खाना

है। आज चाचा जी और चाची जी नहीं आयेगे और आज रात मैं यही पर सोऊँगा।

दीप ने मुझसे कहा- भाई, मुझे पता है, मुझे पापा जी ने फ़ोन करके बता दिया था और यह

अच्छा हुआ कि आप खाना भी ले आये, अब मुझे खाना नहीं बनाना पड़ेगा।

kramashah
 
गेटपास का रहस्य-2

मैंने दीप से कहा- आज तुमको खाना तो बनाना पड़ेगा नहीं, तो मेरा एक काम कर दे?

मेरी बात सुनकर दीप बोली- मुझे पता है भाई, आप क्या बोलोगे ! आप चिंता मत करो, मुझे

जैसे ही पता चला कि पापा और मम्मी आज नहीं आयेंगे और आप यहाँ पर सोओगे तो मैंने

मयूरी की मम्मी को बोल दिया था कि आज घर पर मम्मी और पापा नहीं आयेंगे इसलिए

मयूरी को हमारे घर भेज दो सोने के लिये ! और उसकी मम्मी मान भी गई, मयूरी आज

रात यही पर सोयेगी।

मैंने खुश होते हुये कहा- दीप, यह तो तुमने बहुत ही अच्छा काम कर दिया, मैं भी तुमको

यही कहने वाला था।

दीप बोली- भाई मुझे पता था इसलिए तो आपके कहने से पहले ही मैंने ये सब कर दिया।

दीप मुझसे बोली- भाई, उसकी मम्मी को ये पता नहीं चलना चाहिए कि आप भी यहीं पर

सोओगे, नहीं तो वो मयूरी को यहाँ आने नहीं देगी।

मैंने दीप से कहा- ठीक है, मयूरी किस टाइम यहाँ पर आ जायेगी?

दीप बोली- 9 बजे तक मयूरी यहाँ पर आ जाएगी।

मैंने टाइम देखा तो अभी रात के 8 ही बजे थे, मैंने दीप से कहा- मैं अभी अपने दोस्तों के

पास जा रहा हूँ और मैं 9:30 बजे आ जाऊँगा, फिर उसकी मम्मी को भी पता भी नहीं

चलेगा।

दीप ने कहा- ठीक है भाई, आप टाइम पर आ जाना, हम खाना तभी खायेंगे जब आप आ

जाओगे।

फिर मैं जैसे ही जाने के लिये मुड़ा तो दीप ने कहा- भाई एक बात पूछूँ, अगर आप बुरा न

मानो तो?

मैंने कहा- हाँ-हाँ पूछो ना, क्या बात है?

दीप बोली- भाई, आपने मयूरी पर ऐसा क्या जादू कर दिया, जब देखो आप ही के बारे में

बात करती रहती है और आपसे मिलने के लिए वो आप से भी ज्यादा उतावली है।

अब मैं दीप से क्या कहता, उसकी बात सुनकर मुस्कुराते हुए कहा- मुझे नहीं पता, मैंने ऐसा

कुछ नहीं किया, तुम मयूरी से ही पूछ लो। दीप बोली- वो तो कुछ बताती नहीं है, बस आप

ही के बारे में बात करती रहती है !

मैं दीप की बात सुनकर मुस्कुराता हुआ बाहर घर से बाहर निकल गया, उसको कुछ बता भी

तो नहीं सकता था।

फिर मैं अपने दोस्तों के पास गया तो देखा वो कैरम खेल रहे थे, मैं भी उनके साथ खेलने

लगा पर मेरा कैरम खेलने में बिल्कुल भी मन नहीं लग रहा था, मैं तो बस यही सोच रहा

था कब 9:30 बजें और मैं मयूरी के पास पहुँचूँ और उसको अपनी बांहों में समेट लूँ, पर मुझे

अभी कुछ देर और इंतजार करना था ! ये इंतजार के पल भी कितने लम्बे होते हैं, यह आप

सब को पता ही होगा, इसलिये ना चाहते हुए भी मैं कैरम खेल रहा था।

कैरम खेलते-खेलते मुझे वहाँ पर रात के 9 बज गए, मुझसे अब और इंतजार भी नहीं हो रहा

था इसलिए मैंने अपने दोस्तों से कहा- यारो मैं चलता हूँ !

प्रेम बोला- क्या बात है? आज इतनी जल्दी जा रहे हो?

मैंने प्रेम से कहा- हाँ यार, मुझे कुछ काम है जो आज ही करना है !

मैंने प्रेम से झूठ बोला, प्रेम ने मुझसे कहा- कम से कम यह गेम तो पूरा कर ले, फिर चले

जाना।

फिर से मैं ना चाहते हुये कैरम खेलने बैठ गया और वो गेम 10 मिनट में ही खत्म हो गया।

मैंने टाइम देखा तो 9:12 मिनट हो चुके थे, मैंने अपने दोस्तों से विदा ली और अपनी चाची

के घर के लिए निकल पड़ा।

रास्ते में मैं सोच रहा था अब तक तो मयूरी भी आ गई होगी और यही सोचते-सोचते मैं

चाची जी के घर के सामने पहुँच गया।

मैंने घड़ी में टाइम देखा तो 9:28 हो चुके थे।

दीप भी मेरे इंतजार मैं बाहर ही खड़ी थी, दीप ने मुझे देखकर गेट का दरवाजा बिना आवाज

किये खोल दिया, मैं घर के अन्दर आ गया, अन्दर पहुँचते ही मेरी नजर मयूरी को तलाश

करने लगी, पर वो मुझे कहीं भी नज़र नहीं आई, आशु बैठा टी वी देख रहा था।

दीप मुझे कुछ परेशान दिखाई दे रही थी, दीप ने मुझे इशारे से रसोईघर में आने को कहा

और फिर दीप ने आशु को बोला- भाई आ गए हैं, मैं खाना गर्म करके लाती हूँ !

और इतना कह कर वो रसोईघर में चली गई मैं भी हाथ मुँह-धोने का बहाना करके मैं भी

रसोईघर मैं चला गया।

रसोई में पहुँच कर मैंने दीप से कहा- क्या बात है दीप? मयूरी कहीं दिखाई नहीं दे रही?

दीप ने कहा- पता नहीं भाई, मुझे भी कुछ समझ नहीं आ रहा है कि वो अभी तक क्यों नहीं

आई !

फिर मैंने दीप को कहा- कम से कम पता तो करती कि वो अब तक क्यों नहीं आई?

दीप ने कहा- भाई मैं आपका इंतजार कर रही थी, पहले हम खाना खा लेते हैं। फिर मैं उसके

घर जाकर पता करती हूँ।

मैंने कहा- ठीक है !

दीप ने खाना गर्म किया और हम तीनों ने मिलकर खाया।

दीप ने मुझसे कहा- भाई आप ऊपर वाले कमरे में चले जाओ, मैं पता करके आती हूँ ! कहीं

ऐसा न हो कि मयूरी की मम्मी भी साथ आ जायें !

मैंने कहा- ठीक है, मैं ऊपर के कमरे में जा रहा हूँ।

जैसे ही मैं ऊपर जाने को हुआ तो मयूरी सामने से आती हुई नजर आई और उसके पीछे

उसकी मम्मी !

उसकी मम्मी की नजर में आये बिना मैं जल्दी से ऊपर के कमरे में पहुँच गया और मयूरी

की मम्मी के जाने का इंतजार करने लगा। कुछ देर बाद दीप मुझे बुलाने ऊपर आई और

बोली- भाई, मयूरी की मम्मी चली गई है, चलो नीचे चलते हैं।

हम दोनों नीचे कमरे में आ गये।

मयूरी मुझे देखते ही खड़ी हो गई जो अब से पहले सोफे पर बैठी हुई थी, मेरी और मयूरी की

आँखें चार हुई वो मंद-मंद मुस्कुरा रही थी। जब मैंने उसको ऊपर से नीचे की तरफ देखा तो

उसने शर्ट और स्कर्ट पहनी हुई थी, इन कपड़ों में मयूरी बेहद हसीन लग रही थी, अब वहाँ

हम चार लोग थे।

मैं मयूरी के पास पहुँचा और उसके साथ सोफे पर बैठ गया। दीप भी दूसरे सोफे पर बैठ गई

और फिर हम चारों टी वी पर मूवी देखने लगे। आशु और दीप दोनों भाई बहन मूवी देखने में

मग्न थे और मैं मयूरी का हाथ पकड़ कर उसको सहला रहा था।

कुछ देर के बाद मूवी खत्म हो गई, मैंने दीप से पूछा कैसे- कैसे सोना है?

तो दीप ने कहा भाई आप ऊपर वाले कमरे में सो जाओ और हम तीनो यहाँ नीचे सो जायेंगे।

दीप की बात सुनकर मुझे बहुत ही गुस्सा आया और उसको गुस्से में बोला- ठीक है मैं ऊपर

जा रहा हूँ सोने के लिए, पर मुझे एक जग में पानी दे दो, मुझे रात को प्यास लगती है।

दीप ने कहा- भाई, आप ऊपर चलो, मैं लेकर आती हूँ।

उसके बाद मैं ऊपर के कमरे में आ गया और आराम से बेड पर लेट गया। अभी मुझे लेटे

हुए 10 ही मिनट हुये थे, दीप और मयूरी दोनों पानी का जग ऊपर आ गई। जग मेज पर

रखने के बाद वो मेरे पास बेड पर ही बैठ गई।

मैंने दीप से नाराज होते हुये कहा- अगर मयूरी को नीचे ही सुलाना था तो मुझे क्यों बुलाया?

दीप ने मेरी तरफ मुस्कुराते हुए कहा- भाई, आप तो बेकार में ही नाराज हो रहे हो !

अभी आशु जाग रहा है और यह अभी आपके पास आ गई तो आशु को भी पता चल जायेगा

और वो मम्मी और पापा को बता देगा इसलिए जब तक आशु सो नहीं जाता, तब तक इसको

मेरे साथ नीचे रहने दो, जब आशु सो जायेगा तो यह आपके पास आ जाएगी।

दीप की बात सुनकर मेरा गुस्सा रफू-चक्कर हो गया, उसकी बात भी सही थी, मैं बेकार मैं ही

ग़ुस्सा हो रहा था, मैंने कहा- ठीक है, तुम जाओ और जल्दी से आशु को सुलाकर इसको ऊपर

भेजो !

मैंने मयूरी की तरफ इशारा करते हुए कहा।

दीप ने हँसते हुए कहा- ठीक है भाई ! मैं इसको जल्दी भेज दूंगी !

और इतना कह कर वो मयूरी का हाथ पकड़कर जाने लगी तो मैंने दीप से कहा- दीप, तुम

चलो, मयूरी आब?ईई पांच मिनट में आती है।

मेरी बात सुनकर दीप ने मयूरी का हाथ छोड़ दिया और उसको बोला- जल्दी नीचे आना !

मयूरी जो अभी तक चुपचाप थी, उसने कहा- ठीक है मैं पाँच मिनट में आई।

मयूरी की बात सुनकर दीप नीचे चली गई, मैंने मयूरी का हाथ बेड पर लेटे-लेटे पकड़ा और

उसको अपनी तरफ खींच लिया, वो सीधे बेड पर आ गिरी अब वो मेरे सामने थी।

उसने कहा- यह क्या कर रहे हो, मैं कहीं भागी थोड़े ही जा रही हूँ, मैं अभी आ जाऊँगी थोड़ी

देर में आशु के सोते ही !

मैंने उसका हाथ छोड़ते हुये कहा- ठीक है, पर जल्दी आना, मैं इंतजार करुँगा।

मयूरी बेड से उठी और उसने मेरे होठों को चूमते हुए कहा- अच्छा जी, मैं जल्दी आऊँगी !

और इतना कहते ही वो भी नीचे चली गई, उसके जाने के बाद मैं सोने की तैयारी करने

लगा, मुझे पता था कि आज मयूरी को चुदना है और मैंने उसको चोदना है और उसके लिए

मुझे अपने भी कपड़े उतारने पड़ेगे, इसलिए मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिए अंडरवियर

छोड़कर, मैं अंडरवियर में ही लेट गया और मयूरी का इंतजार करने लगा।

मयूरी का इंतजार करते-करते कब मैं नींद की आग़ोश में पहुँच गया, मुझे पता भी नहीं चला,

करीब एक घंटे बाद मुझे अहसास हुआ जैसे कि मेरे साथ और भी कोई लेटा हुआ है, उसका

एक हाथ मेरी नंगी छाती को सहला रहा था।

मैंने अपनी आँखें खोल कर देखा तो वो मयूरी थी जिसका हाथ मेरी छाती पर रेंग रहा था।

मैंने लेटे हुए ही उसको अपने सीने से लगा लिया और उसके होंठों को चूमते हुये बोला- तुम

कब आई?

तो उसने जवाब दिया- बस अभी 10 मिनट पहले ही।

मैंने नाराज होते हुये कहा- तुमने मुझे जगाया क्यों नहीं?

मयूरी बोली- आप सोते हुए बहुत अच्छे लग रहे थे इसलिए मेरी आपको उठाने की हिम्मत

नहीं हुई।

उसकी इस अदा पर मैंने फिर से उसके होंठों को चूम लिए और उससे पूछा- नीचे वो दोनों सो

गए है क्या?

मयूरी बोली- हाँ, वो दोनों सो गए हैं, तभी तो उन दोनों के सोने के बाद ही मैं आई हूँ।

मेरी नज़र खुले हुए गेट पर पड़ी, मैं मयूरी से अलग हुआ और उठ कर दरवाजा बंद किया।

दरवाजा बंद करके मैं बेड पर वापस आ गया, मयूरी बेड पर लेटी हुई मुस्कुरा रही थी मैं सीधे

उसकी जाँघों पर जा बैठा, उसके दोनों हाथ पर अपने हाथों से पकड़ लिए तो मयूरी ने

मुस्कुराते हुये कहा- यह क्या कर रह हो जी?

मैंने उससे कहा- प्यार कर रहा हूँ, जो उस दिन अधूरा रह गया था ! उस दिन का अधूरा

प्यार आज पूरा करूँगा।

मयूरी ने मुझसे कहा- आप यहाँ पर सोने आये हो या ये सब करने?

मैंने कहा- मैं तो बस प्यार करने के लिए आया हूँ तुमको और तुम तो ऐसे कह रही हो जैसे

तुम नहीं चाहती ये सब?

मयूरी ने कुछ नहीं कहा, बस अपनी आँखें बंद कर ली।

उसके आँखें बंद करते ही मैं उस पर झुक गया और उसके गालों को चूमने लगा। उसने अपने

दोनों हाथ मेरे कंधों पर रख दिए। मैंने उसके कानों को चूमा, कानों को चूमता हुआ मैं उस

पर पूरी तरह से लेट गया और उसके पैरों को अपने पैरों से अलग-अलग कर दिये, अब मेरे

पैर उसके पैरों के बीच बिस्तर पर थे उसने अपने पैर फैला दिए थे, मैं उसकी गर्दन पर पहुँच

गया था, मयूरी ने अपना चेहरा ऊपर की तरफ कर दिया जिससे मुझे उसकी गर्दन पर किस

करने में कोई परेशानी न हो, मैं उसकी ठोड़ी को चूमता हुआ नीचे तरफ जाने लगा।

मयूरी ने अपनी टाँगों मोड़ लिया जिसके कारण उसकी स्कर्ट नीचे सरक गई अब मेरी जाँघ

उसकी जाँघ से रगड़ खाने लगी, मेरे हाथ उसके खुले हुए बालों को सहला रहे थे, फिर मैंने

उसके होंठों पर अपने होंठ चिपका दिए और उसके निचले होंठ को अपने होंठ में दबा कर

चूसने लगा। मैंने उसके लबों को चूसते हुए मैंने अपनी जीभ उसके मुँह में डाल दी, मयूरी

मेरी जीभ को बड़े ही प्यार से चूस रही थी, उसने अपनी जीभ मेरे मुँह में डाल दी, मैं उसकी

जीभ को चूसने लगा।

कुछ देर तक हम दोनों एक दूसरे के होंठों को चूमते चाटते रहे, फिर मैं उसके शर्ट के बटन

खोलने लगा, सारे बटन खोलने के बाद मुझे उसका गोरा बदन और भी मनमोहक लग रहा

था, उसने सफ़ेद जाली वाली ब्रा पहनी हुई थी जिससे उसके बूब्स और भी अच्छे लग रहे थे।

मैंने उसके नंगे पेट पर चुम्बन किया उसके पेट को चूमने के बाद मैंने अपने लब उसके वक्ष

पर रख दिए, पर वो अभी भी ब्रा की कैद में ही थे।

मयूरी के बूब्स को मैं अपने हाथों से दबाते हुए उसकी चूचियों को ब्रा के ऊपर से हल्के हल्के

अपने दांतों से काटने लगा, मेरे ऐसा करने से मयूरी की सिसकारियाँ निकलने लगी ऊन्न्न

आन्न्नन्ह्ह ! मयूरी ने अपने हाथों से अपनी ब्रा नीचे सरका दी, ब्रा के नीचे होते ही उसकी

चूचियाँ नग्न हो चुकी थी, मैं तो पहले से ही उसकी चूची को ब्रा के ऊपर से चूस रहा था।

मयूरी की ब्रा नीचे होते ही मेरे होंठ उसकी नंगी चूची पर आ गए फिर मैंने उसकी चूची को

चूसते हुए उसकी शर्ट को उसके हाथों से निकाल दिया, मयूरी मुझे अपने स्तन चूसते हुए देख

रही थी उसकी आँखों में अजीब सा नशा दिखाई दे रहा था फिर मैंने उसके स्तन की घुंडी को

अपने लबों में दबाते हुये चूसने लगा, अब मयूरी के मुंह से सिसकियाँ निकलने लगी ऊन्न्न

आन्न्नन्ह्ह उसकी छोटी- छोटी चूचियो को चूसते-चूसते मैंने उनको अपने मुँह में पूरा ले

लिया।

फिर तो मयूरी के मुँह से और भी ज्यादा आवाज ऊन्न्न आन्न्नन्ह्ह निकलने लगी फिर मैं

उसके स्तन चूसते हुए उसकी जाँघ पर हाथ फिराने लगा, फिर मेरा हाथ उसकी पेंटी के ऊपर

पहुँच गया, अब मैं उसकी चूत को पेंटी के ऊपर से सहला रहा था, मेरे होंठ उसकी चूची

चूसने में व्यस्त थे और मयूरी का एक हाथ मेरी पीठ पर और दूसरा मेरे बाल सहला रहे थे

उसके मुंह से ऊउह ऊउईई का स्वर निकल रहा था।

मैं जैसे-जैसे उसकी चूची की निप्पल चूस और उसकी चूत को सहला रहा था, मयूरी के बाहों

के घेरे और भी मजबूत और कसते जा रहे थे। मेरा लंड अब पूरी तरह से उत्तेजित हो चुका

था और वो अंडरवियर से बाहर आने को मचल रहा था, मैं उसकी चूत को सहलाता जा रहा

था, अचानक वो ऊपर की तरफ उठने लगी अब वो उठ कर बैठ गई थी।

मेरा हाथ अब भी उसकी चूत पर ही था, मैं उसके पीछे जाकर बैठ गया और उसकी कमीज

और ब्रा को पूरी तरह से निकाल दिया, अब वो ऊपर से पूरी नंगी हो चुकी थी। मयूरी ने

अपनी पीठ मेरी छाती पर टिका दी, उसकी जुल्फ़ें बिखर हुई थी, मैंने उसकी पेंटी के अन्दर

हाथ डाल दिया अब मेरा हाथ उसकी बिना बालों की चूत पर था, उसकी चूत बुरी तरह से

गीली हो चुकी थी।

जैसे ही मैंने उसकी चूत के छेद पर उंगली रखी तो वो बुरी तरह से हिल गई, उसने अपना

हाथ मेरे हाथ पर रख दिया, उसकी आँखें उत्तेजना के करण बंद हो चुकी थी, उसने अपना

चेहरा मेरे होंठ के करीब कर लिया फिर मैंने अपने होंठ उसके गालों पर रगड़ने शुरू कर

दिये, मेरे हाथ की एक उंगली उसकी चूत में एक इंच अन्दर जा चुकी थी और मेरा दूसरा

हाथ उसकी जाँघ सहला रहा था, जैसे ही मैं उसकी चूत में अपनी उंगली हिलाता तो वो बहुत

जोर से हिल जाती, उसके मुँह से ऊन्न्नन्न आआह्ह्ह्ह ऊऊउ सिसकारियाँ निकल रही थी।

फिर मैंने उसको बेड पर लिटा दिया और उसकी पेंटी उतार दी, अब उसके शरीर पर मात्र

उसकी स्कर्ट ही बची थी जैसे ही मैंने उसकी पेंटी उतारी तो वो अपनी चूत को छुपाते हुए

उल्टी हो कर लेट गई, मैं नीचे की ओर झुक गया और उसकी कुँवारी चूत पर अपने होंठ रख

दिए, मेरे होंठ चूत पर रखते ही उसने अपने चूतड़ ऊपर की ओर उठा दिए।

अब उसकी चूत और उसका छेद मुझे साफ़-साफ़ दिखाई दे रहा था, बिना बालों की कुँवारी

चूत मुझे आज पहली बार देखने को मिली थी, क्या मस्त नजारा था मेरा लंड तो पहले से ही

बेकाबू हो रहा था, मयूरी की चूत देखने के बाद तो मेरे लंड से लार बहने लगी, जिसके कारण

मेरा अंडरवियर ऊपर से गीला हो चुका था।

फिर मैंने अपने दोनों हाथ उसकी जांघों के बीच में से निकाल कर उसकी कमर को पकड़

लिया।

फिर मैंने अपने होंठ उसकी चूत पर टिका दिए और उसकी चूत को चाटने लगा, मयूरी की

कुँवारी चूत चाटने में मुझे बहुत ही मज़ा आ रहा था, मन तो कर रहा था कि उसकी चूत को

खा जाऊँ ! फिर मैंने अपनी जीभ उसकी चूत के अन्दर घुसा दी, फिर मैं उसको अपनी जीभ

से चोदने लगा ऊऊऊ आअ ह्ह्ह्ह की आवाज उसके मुँह से निकल कर पूरे कमरे में गूंज रही

थी।

मयूरी भी अपने कूल्हे आगे पीछे करती हुई चूत की चुसाई का भरपूर आनन्द ले रही थी,

उसकी गांड उठी हुई और उसका चेहरा बेड से लगा हुआ था उसके बाल आगे की तरफ उसके

चेहरे पर बिखरे हुए थे उसके चेहरे पर बिखरे हुए बाल, उसकी सुन्दरता को चार चाँद लगा रहे

थे।

कुछ देर मैं उसकी ऐसे ही चूत चाटता और चूसता रहा, मयूरी की चूत मेरे थूक से भीग चुकी

थी, फिर मैंने उसको सीधे लिटाया और फिर से उसकी चूत को चाटने लगा।

मयूरी की चूत को चूसने के साथ साथ ही मैंने उसकी चूत मैं अपने एक उंगली घुसा दी और

उसको आगे पीछे करने लगा, अब तो उसकी और भी हालत और भी खराब हो गई थी, वो

अपनी टाँगें कभी फैला लेती तो कभी उनको मोड़ लेती, मेरा हाथ मयूरी की चूत के पानी से

भीग चुका था अब मेरा लंड भी जोर मारने लगा मुझसे अब नहीं रहा जा रहा था।

मयूरी को छोड़कर मैं खुद ही बेड पर लेट गया मयूरी उठी और मेरे लंड को देखा जोकि

अंडरवियर से बाहर आने के लिए मचल रहा था, मयूरी ने अपने होंठ से मेरे लंड को

अंडरवियर के ऊपर पकड़ा और अपने होंठों से पकड कर अंडरवियर के ऊपर से ही चूसने

लगी, उसने अपने दोनों हाथों से मेरी दोनों जांघों को थाम रखा था, उसके होंठ मेरे लंड को

बहुत आराम पहुँचा रहे थे कुछ देर बाद मयूरी ने मेरा अंडरवियर नीचे सरका दिया और फिर

उसने मेरा लंड बिना हाथ लगाये अपने मुंह में लिया और उसको चूसने लगी, अब

सिसकारियाँ लेने की बारी मेरी थी।

मेरा लंड मयूरी के मुंह में जाकर और भी फ़ूल गया था, उसने मेरा लंड चूसते हुये मेरा

अंडरवियर मेरे पैरों से निकाल दिया। मेरे शरीर पर तो मात्र के अंडरवियर ही था, अब वो

उसको भी निकाल चुकी थी। मयूरी के मुँह में इतनी गर्माहट थी, मुझे तो लग रहा था कि

मेरा वीर्य अब निकला पर मैंने अपने आपको किसी तरह संभाला मैंने जल्दी से उसको फिर

से नीचे बेड पर लिटाया और उसकी स्कर्ट भी उतार दी, अब हम दोनों सम्पूर्ण रूप से नग्न

अवस्था में थे।

मेरा लंड अब मयूरी की चूत में जाने के लिए उतावला हो रहा था और वो भी अपनी चूत में

लंड डलवाने के लिए मरी जा रही थी, वो मेरा लंड पकड़ कर अपनी चूत पर लगाने लगी,

मयूरी की चूत तो पहले से ही इतना पानी छोड़ चुकी थी कि पूछो नहीं, मैंने उसकी टांगों को

चौड़ा किया और अपने लंड को चूत के छेद पर सेट किया।

फिर मैंने उसकी कमर को अपने दोनों हाथों से पकड़ लिया, मैंने मयूरी की तरफ देखा तो वो

मुस्कुरा रही थी, मैंने उसको कहा- मैं अपना लंड तेरी चूत में डाल रहा हूँ, तुम तैयार हो?

तो उसने अपना सर हिला कर अपनी सहमति का इज़हार किया। फिर क्या था मैंने उसकी

कमर पकड़ कर एक जोरदार धक्का उसकी चूत पर मारा पर यह क्या, मेरा लंड तो फ़िसल

गया।

मयूरी की चूत बहुत ज्यादा कसी थी, मयूरी मेरी इस हालत पर मुस्कुरा रही थी मयूरी ने

मुझसे कहा- एक मिनट रुको !

उसने अपने हाथ से अपनी चूत का मुँह पकड़ कर चौड़ा किया और बोली- अब डालो अपना !

पर धीरे से डालना।

मैंने फिर से अपना लंड उसकी चूत के ऊपर टिकाकर ज़ोरदार धक्का मारा, अबकी बार मेरा

लंड उसकी चूत को चीरता हुआ अन्दर दो इंच अन्दर चला गया !

'ऊऊ ऊउईईई ईईईईईई म्म्हह्ह्ह्हह्ह्ह्हा !' मयूरी जोर से चीख पड़ी।

अगर मैं जल्दी से उसके मुँह को अपने हाथ से बंद नहीं करता तो पता नहीं क्या हो जाता,

वो तो शुक्र था कि खिड़की दरवाजे मैंने पहले से ही बंद कर दिए थे वरना इस रात के

सन्नाटे में उसकी ये चीखें पता नहीं कहाँ तक पहुँचती।

मैं मयूरी से बोला- क्या करती हो? मरओगी क्या?

मयूरी मुझे अपने दोनों हाथ से पीछे की ओर धकेलने की कोशिश कर रही थी। मैंने उसके

मुंह से अपना हाथ हटा लिया।

मेरे हाथ हटाते ही मयूरी मुझसे कहने लगी- जल्दी से अपना लंड बाहर निकालो, मुझे बहुत

दर्द हो रहा है।

मैंने उसको दिलासा देते हुए कहा- अब नहीं होगा, जितना अन्दर है, उससे ज्यादा मैं ओर

नहीं डालूँगा पर मुझे लंड बाहर निकालने के लिए मत कहो।

उसने कहा- मेरी जान निकली जा रही है और तुम कह रहे हो कि !!

उसके ये शब्द उसके मुँह में ही रह गए क्योंकि तब तक मैंने अपने होंठ से उसके होंठ

चिपका दिए थे और बड़े ही प्यार से चूसे जा रहा था।

मेरा लंड अब भी उसकी चूत में ही था मैंने उसके होंठ चूसते हुए उसकी एक चूची को अपने

हाथ से मसलने लगा। कुछ देर बाद ही वो भी मुझे सहयोग करने लगी और अपनी गांड को

हिलाने लगी, तब मैं समझ गया कि अब इसको दर्द नहीं हो रहा बल्कि इसको भी मज़ा आ

रहा है, मैंने मयूरी के होंठ को अपने होंठ से कसकर चिपका दिये और उसको कस कर पकड़

लिया। फिर मैंने अपना लंड उसकी चूत से थोड़ा सा बाहर निकाल कर एक जोरदार धक्का

उसकी चूत पे दे मारा।

'ग्ग्ग्गूऊउ ग्ग्ग्नन्न्न्न' की आवाज उसके बंद मुँह से आने लगी।

मयूरी की गांड हवा में ऊपर को उठी और फिर बेड से टिक गई अगर मैंने उसको पकड़ा नहीं

होता तो यकीनन वो मेरे लंड को बाहर निकाल देती, उसके नाख़ून मेरी पीठ में गड़ गए थे

जिससे मुझे भी कुछ पीड़ा का आभास हो रहा था।

मैंने मयूरी की तरफ देखा तो उसकी आँख से आँसू निकल रहे थे, मैंने अपने होंठ उसके होंठ

से अलग किये तो वो बोली- साजन जी, मुझे बहुत दर्द हो रहा है, अब नहीं सहा जायेगा, मैं

मर जाऊँगी, प्लीज इसको बाहर निकाल लो।

मैंने अपने दोनों हाथों से उसकी दोनों चूचियों को सहलाते हुए कहा- अब कुछ नहीं होगा

जान, जो होना था वो हो गया ! देखो मेरा लंड तेरी चूत में पूरा समा गया है, बस कुछ ही

पलों में दर्द भी खत्म हो जायेगा।

मेरे लंड पर मयूरी की चूत से कुछ गर्म गर्म निकलता महसूस हो रहा था। मैंने देखा तो

उसकी चूत से खून निकल रहा था। अब वो कुँवारी नहीं रही मुझे अपने ऊपर गर्व हो रहा था

चलो एक लड़की को तो मैंने औरत बनाया।

फिर मैं उसकी चूची को बारी बारी चूसने और सहलाने लगा, कुछ देर बाद उसका दर्द कुछ

कम हुआ तो वो मेरी पीठ सहलाने लगी, मैंने उससे पूछा- क्या अभी भी दर्द है?

तो उसने कहा- दर्द तो है पर मीठा मीठा !

उसकी बात सुनकर मेरा लंड मयूरी की चूत के ही अन्दर ठुमके मारने लगा जिससे उसको भी

बहुत अच्छा लग रहा था। फिर मैं घुटनों के बल बैठ गया और उसकी टांगों को मोड़ दिया,

अब उसकी एड़ी उसके कूल्हों से लगी हुई थी।

मैंने उसके उठे हुए घुटनों को अपने दोनों हाथों से पकड़ा और फिर उसकी चूत पर धीरे-धीरे

धक्के लगाने लगा, उसने भी अपने हाथ मेरे हाथ के ऊपर रख दिए। अब शायद उसको भी

आनन्द की अनुभूति हो रही थी, तभी तो उसकी मुँह से सिसकारियाँ निकल रही थी। कुछ देर

तो मैंने धीरे धीरे धक्के लगाये और फिर मैंने उसकी चूत पर तेजी से धक्के लगाने लगा।

'ऊन्न्न ऐईइ ऊऊई ईईइमा' करती हुई वो मुझसे चुद रही थी।

मयूरी की चूचियाँ मेरे धक्के लगाने के साथ-साथ हिल रही थी जिसे देख कर मुझे बहुत मज़ा

आ रहा था। फिर मैं तीव्र गति से उसकी चूत पर प्रहार करने लगा, मयूरी की चूत पर धक्के

लगाते हुये मैं उसके गालों को चूमने लगा।

उस वक़्त मयूरी ने मुझे अपनी बांहों के हार मेरे गले में पहना दिए थे उसके बूब्स हिलते हुए

मेरी छाती से रगड़ खा रहे थे, मैंने अपने दोनों हाथ से उसके दोनों कंधों को पकड़ रखा था

और मैं जम कर उसकी चूत को अपने लंड से ढीला किये जा रहा था। उसकी आवाज पूरे

कमरे में आआह्ह्ह मम्म गूंज रही थी।

कुछ देर बाद मयूरी ने अपने दोनों पैर मेरी कमर पर रख दिए और मैंने उसके घुटनों को

उसकी चूचियों से मिलाते हुए उसके पैरों को अपनी बगल में दबा लिए फिर मैं उस पर पूरा

झुक गया और उसके लबों को चूसते हुए उसकी चूत पर धक्के पे धक्के मारने लगा।

अचानक मयूरी ने मुझे कस कर जकड़ लिया, मुझे इस बात का आभास हो चुका था कि अब

मयूरी झड़ने वाली है।

इसलिए मैंने भी अपनी गति को और तेज कर दिया जिससे मैं भी उसके साथ झड़ने का

आनन्द प्राप्त कर सकूँ। अब मयूरी मेरे होंठों को बहुत ही कस कर चूस रही थी, उसकी

चूचियाँ मेरी छाती से दब कर मेरा उत्साह बढ़ा रही थी, मेरे लंड का लावा अब छूटने ही वाला

था और मयूरी का भी, मैंने अपनी धक्के लगाने की स्पीड और तेज कर दी।

कुछ ही पलों बाद मयूरी जोर से चीखी- ऊऊउह्ह ह्हह्हहाआआ ईईईह्ह्ह्हाआआआ !

और इसके के साथ मयूरी की चूत में रिमझिम बारिश होने लगी उसकी बारिश की बूंदें मेरे

लंड पर गिरते ही मेरे लंड ने अपना लावा मयूरी की चूत में उगल दिया। मयूरी ने अपने पैर

सीधे कर लिए और मैं उसके ऊपर ही लेट गया हम दोनों की सांसें बहुत ही तेज चल रही

थी, मयूरी के चेहरे पर ख़ुशी साफ़ दिखाई दे रही थी।

हम दोनों ने एक दूसरे को चूमा, कुछ देर बाद मेरा लंड उसकी चूत से अपने आप ही बाहर

आ गया।

फिर हम दोनों उठे तो मयूरी ने देखा कि चादर खून लाल हो गई थी, उसकी चूत से रज और

वीर्य मिल कर बाहर निकल रहा था।

मयूरी खून से सनी चादर देख कर मुस्कुराते हुए मुझसे बोली- पहली बार किसी मर्द ने मुझे

हाथ लगाया है और वो तुम हो ! देखो तुमने मेरी चूत को फाड़ कर इसकी क्या हालत बना

दी !

मैं बस मुस्कुरा कर रह गया।

मयूरी बेड से उठने को हुई तो उससे उठा नहीं जा रहा था, मैं उसको सहारा देते हुए उसको

बाथरूम लेकर गया और मैंने उसको और उसने मुझे सही से साफ़ किया। हम दोनों बेड पर

आये तो खून से सनी चादर बेड से उठाने लगा तो मयूरी कहने लगी- क्या कर रहे हो?

मैंने कहा- कल चाचा जी और चाची जी वापस आयेंगे और चादर की यह हालत देखेंगे तो

बेकार में बवाल हो जायेगा, मैं इसको धो देता हूँ ! और फिर चादर सुबह तक ऐसी ही रही तो

दीप भी क्या सोचेगी।

मेरी बात सुनकर मयूरी ने मुझसे चादर छीनते हुए कहा- आप रहने दो, इसको में धोती हूँ।

मैंने कहा- तुमसे उठा तो जा नहीं रहा, तुम आराम करो, मैं इसको धोकर अभी आता हूँ,

सुबह तक सूख भी जाएगी।

मैंने उसको धोकर सुखाने के लिए डाल दिया और फिर से मयूरी के पास पहुँच गया। फिर

हमने दो बार ओर चुदाई की, मयूरी तो मेरे चुदाई करने के तरीके से मुझ पर और भी ज्यादा

फ़िदा हो गई थी, मैंने उसको अलग-अलग तरीकों से उसकी चुदाई जो की थी।

हमारी चुदाई सुबह पांच बजे तक चली।

मयूरी ने मुझसे कहा- सुबह हो गई है। इससे पहले कोई उठ जाये, मैं नीचे चली जाती हूँ।

मैंने भी सहमति में अपना सर हिलाया, वो उठी और मुझको एक लंबा सा चुम्बन करके दीप

के पास चली गई।

मैंने उसे ना जाने कितनी ही बार उसको चोदा, करीब 6 महीने बाद मुझे ऑफिस के काम से

लखनऊ जाना पड़ा और 20 दिन बाद जब मैं वापस आया तो मयूरी वहाँ से मकान खाली

कर के जा चुकी थी।

मैंने दीप से उसके बारे में पूछा तो उसने कहा- मुझे भी बता कर नहीं गई, कहाँ जा रही है।

मैंने उसको काफी तलाश किया पर उसका कुछ पता नहीं चल पाया।

samapt
 
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