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अजनबी हमसफर

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कार्तिक को गुस्से में देख कर पूनम झेप गयी

आई एम सॉरी मेरा इरादा आपको हर्ट करने का नही था ,लेकिन इस तरह से आपसे पैसे लेना मुझे ठीक नही लग रहा है ,आपने पहले ही मेरी इतनी मदद की है अब और कितना करेंगे - पूनम ने अपनी नजर झुका कर कहा

पूनम मैने ऐसा कुछ नही किया जिसके लिए तुम इतना सोच

रही हो और फिर तुम क्यों अपने गहने बेचोगी कौन सा तुम अपने घर से बहुत दूर हो ये रहा ग़ज़ियाबाद तुम मुझे अपने घरवालों के नंबर दे दो मैं उन्हें अभी बुलवा लेता हूँ फिर वो सब देख लेंगे की क्या करना है - कार्तिक बोला

नही नही घरवालो को नही मैं उन्हें नही बता सकती - पूनम घबरा कर बोली

कार्तिक को बड़ा अजीब लगा वह चौक गया ।

मतलब ...क्या नही बता सकती- कार्तिक ने पूछा

यही सब मैं घर मे नही बता सकती कि मैं हॉस्पिटल में हूँ पूनम ने नजर चुराते हुए कहा

क्यो ...? क्यो नही बता सकती - कार्तिक ने फिर पूछा

बस ऐसे ही वो क्या है ना अचानक से उन्हें पता चलेगा तो वो परेसान हो जाएंगे इसीलिए पूनम ने बात को सम्हालने की कोशिश की

कार्तिक ने पूनम को शंका से देखा मानो उसे पूनम की बातों पर बिल्कुल भी विश्वास नही हुआ ।

पूनम सब ठीक तो है ना जाने क्यों ऐसा लग रहा है कि तुम झूठ बोल रही हो - कार्तिक ने पूछा

नही झूठ नही ...झूठ क्यो बोलूंगी, पूनम हड़बड़ा गयी और नजर चुराने लगी उसे डरथा कि कही कार्तिक को पता न चल जाए कि वह घर से भाग कर आई है

कार्तिक को बिल्कुल भी विश्वास नही हुआ उसे लग गया कि हो न हो पूनम उससे कुछ छुपा रही है और यही बात उसे परेसान कर रही वह कैसे भी करके पूनम के असलियत तक पहुचना चाहता था ।

जारी ....

डियर रीडर यह भाग आप लोगों को कैसा लगा खूब सारी प्रतिक्रिया करके बताएं मैं आप सभी के कमेंट का बेसब्री से इंतजार करूंगा आप आप लोगों के कमेंट पढ़कर मन को बड़ी तसल्ली मिलती है क्योंकि अब आप लोगों का इस कहानी में थोड़ा बहुत मन लगने लगा और जब आप लोगों का मन पढ़ने में लगता है तो मुझे लिखने का भी मन करता है

अगला भाग बहुत जल्दी प्रकाशित करूंगा और आप लोगों के इस भाग पर प्यारे-प्यारे कमेंट का इंतजार करूंगा

लक्ष्य बहुत खुश था उसने जल्दी से अपनी बाइक स्टार्ट की और बाजार की तरफ दौड़ गया , सबसे पहले वह टैक्सी स्टैंड गया और वहां पर वह अपनी बाइक खड़ा कर के चारो तरफ ध्यान से देखने लगा ।

अचानक मानो उसकी आंखें चार सौ चालीस बोल्ट की बल्ब की तरह चमक पड़ी ।

पास में एक दुकान के पास ही उसे कुछ दिखा

वह भाग कर उस दुकान पर पहुचा और बोला

हेलो भाई साहब कैसे है ?

दुकानदार ने उसे गौर से देखा मानो पहचानने की कोशिश कर रहा हो लेकिन पहचान नही पाया

सॉरी , क्या आप मुझे जानते है - उस दुकानदार ने कहा

नही ...मैं आपको जानता नही हूँ लेकिन मुझे आपकी थोड़ी सी मदद चाहिए - लक्ष्य ने कहा

कैसी मदद दुकानदार ने उत्सुकता से पूछा ।

दरअसल कल एक लड़की घर से चली गयी थी मैं उसे ही ढूढ रहा हूँ और मुझे शक है कि उसने यही से टैक्सी ली होगी ।

तो मैं आप के लिए क्या कर सकता हूँ ।

आप के दुकान के बाहर जो सीसीटीवी कैमरा लगा है प्लीज आप मुझे उसकी फुटेज दिखा दीजिये प्लीज सर लक्ष्य ने हाथ जोड़ कर प्रार्थना की

लेकिन मैं दुकान पर अकेला हूँ मैं कैसे दिखा दु आप बाद में आईयेगा उस दुकान दार ने अनमने भाव से लक्ष्य को टरकाते हुए कहा ।

भाई साहब प्लीज बहुत जरूरी है कही ऐसा न हो वह किसी परेसानी में आ जाय इसीलिए उसका मिलना बहुत जरूरी है बिना माँ की बच्ची है, उसके भाई ने उसे डांट दिया इसी लिए चली गयी प्लीज भाई साहब मदद कर दीजिए - लक्ष्य ने प्रार्थना की

दुकान दार को शायद उस पर दया आगयी और वह राजी हो गया ।

वह लक्ष्य को सारी फुटेज दिखाने के लिए राजी हो गया और फिर लक्ष्य ने पूनम को टैक्सी में जाते हुए देखा ।

उसने तुरंत ही शशांक को फोन मिलाया और बताया

शशांक ने कहा

ये तो मैं जानता ही हूँ वो टैक्सी से बस स्टॉप गयी है उसके बाद का नही पता है ।

शशांक की बात सुनकर लक्ष्य ने दुकानदार को थैंक्स कहा और फिर निकल गया ।

वह सीधा टैक्सी स्टैंड से बस स्टॉप पहुचा वहां पर भी कई सारे कैमरे लगे थे लक्ष्य ने किसी तरह कंट्रोल रूम में ऑपरेटर को पटाया और उसे फुटेज दिखाने के लिए राजी किया ।

ऑपरेटर लक्ष्य को लेकर कंट्रोल रूम में ले गया और फिर सारे कैमरे दिखाने लगा ।

लक्ष्य ने सबसे पहले इंट्रेंस का फुटेज देखा थोड़ी देर देखने के बाद ही लक्ष्य को पूनम आती हुई दिख गयी

लक्ष्य ने उसे फॉलो किया और फिर उसे दिल्ली की बस में

बैठते हुए देखा उसने गाड़ी का नंबर नोट किया और फिर उस ऑपरेटर को दो हजार रुपये दिया ।

अब लक्ष्य को मालूम हो चुका था की पूनम दिल्ली गयी है ।

लक्ष्य ने बस के ड्राइबरो से पूछताछ शुरू कर दी वह उस बस को ढूढने लगा जिससे पूनम दिल्ली गई थी

थोड़ी ही देर बाद उसे पता चल गया कि वह बस कहा पर है - लक्ष्य उसके पास पहुचा ।

उस बस का कंडक्टर और ड्राइबर चाय पी रहे थे लक्ष्य उनके पास पहुचा ।

लक्ष्य ने उन्हें सारी बात बताई और उनसे हेल्प मांगी

देखिये भाई साहब हर रोज जाने कितनी सवारियां मेरे बस में बैठती है मैं कैसे बता सकता हूँ कि वो कौन है

लक्ष्य ने पूनम का हुलिया बताया लेकिन कंडक्टर को कुछ भी समझ मे नही आया उसने साफ मना कर दिया ।

अच्छा ठीक है आप मुझे बस इतना बता दीजिए कि आप बस लेकर कहा तक जाते है मैं देखता हूँ - लक्ष्य ने थक हार कर पूछा ।

भाई साहब वैसे तो मेरी बस आनद विहार तक जाती है , आप वहां जा कर पता कर लीजिए शायद कुछ पता चल जाए उस कंडक्टर ने अपना पिंड छुड़ाते हुए कहा ।

लक्ष्य के लिए इतनी जानकारी काफी थी वह तुरंत ही दिल्ली की तरफ चल पड़ा ।

आनद विहार बस अड्डे पर पहुच कर उसने चारो तरफ कैमरा ढूढना शुरू कर दिया कैमरा तो वहां पर भी लगा था ।

लक्ष्य ने उसके आपरेटर को ढूढा और उसे फुटेज दिखाने का आग्रह किया लेकिन उस आपरेटर ने साफ मना कर दिया ।

भाई साहब प्लीज बहुत जरूरी है आप की हेल्प से किसी की जिंदगी बच जाएगी - लक्ष्य ने प्रार्थना की

देखिये अगर मैं चाहू भी तो भी आप को कुछ भी नही दिखा पाऊंगा , क्योकि सारे कैमरे का सेटअप खराब हो गया है और आज कल रिकार्डिंग बंद है इसीलिए मैं आपकी कोई मदद नही कर पाऊंगा उसने कहा
 
लक्ष्य मायूस हो गया हालांकि उसे इतनी तसल्ली भी थी कि वह जान गया पूनम दिल्ली में है ।

वह सुबह से परेसान था और उसे भूख भी लगी थी इसीलिए वह थक कर एक जगह बैठ गया और सोचने लगा कि क्या करे उसके माथे पर परेसानी के लक्षण साफ साफ दिख रहे थे ।

वह उठा और बाहर आया अभी वह चलने ही वाला था कि उसे हल्का सा भूख का एहसास हुआ वह पास के ही डिपार्टमेंट स्टोर पर गया और फिर उसने पानी की बोतल और सिगरेट ली ।

पहले उसने पानी पिया फिर सिगरेट जला कर उसका कस लेने लगा उसका दिमाग उलझा हुआ था और वह बुरी तरह परेसान था ।

अचानक से उसकी नजर दो लोगो पर पड़ी जो एक बैग से कुछ टटोल रहे थे ।

लक्ष्य सिगरेट पीते हुए उन दोनों को देख रहा था वो दोनों उस बैग में से कुछ ढूढ रहे थे लेकिन शायद उन्हें वह मिल नही रही थी , और फिर उन्होंने गुस्से में आकर एक एक सामान निकालना शुरू कर दिया ।

और जैसे ही उन्होंने कपड़े निकाले लक्ष्य की आंखे सिकुड़ गयी ।

उसने जल्दी से अपनी सिगरेट फेका और दौड़ कर उन दोनों के पास पहुचा ।

उन दोनों ने लक्ष्य को देखा और बोले

अबे क्या देख रहा है चल भाग यहां से ।

लक्ष्य को मानो कुछ होश ही नही हो वह घुटने के बल वही बैठ गया और निकले हुए एक कपड़े को उठा लिया और उलट पलट कर देखने लगा फिर उसने वह कपड़ा वही पूरा खोल दिया उसकी आंखें आस्चर्य से फटी रह गयी ।

उसने आस्चर्य से उन दोनों को देखा वह शॉक्ड था

वो भाई क्या हुआ क्या देख रहा है इतने गौर से- उसमें से एक बोला ।

लक्ष्य ने मानो उसकी बात सुनी नही उसने जल्दी से बैग पर हाथ मारा और उसमें से और कपड़े निकाले और फिर उसे भी पूरा खोल के और फैला कर देखने लगा

और जब अच्छी तरह से देख लिया फिर बोला ।

यह बैग तुम लोगो को कहा से मिला ।

उन दोनों के चेहरे पर हल्का सा डर आया लेकिन फिर उसने लक्ष्य को धमकाते हुए कहा

तुमसे मतलब? तुम कौन होते हो पूछने वाले ये हमारा बैग है और उन्होंने लक्ष्य के हाथ मे पकड़े हुए कपड़ो को खींच कर वापस से बैग में ठूस लिया और जल्दी जल्दी निकलने की तैयारी करने लगे ।

ठीक है मत बताओ मैं जा रहा हूँ 100 नंबर पर फोन करने तुम लोग यही रुको अभी सब सच पता चल जाएगा लक्ष्य ने उन दोनों को धमकाया और और अपना फोन निकाल कर झूठ मूठ का नंबर डायल करने लगे

वो दोनों डर गए और बोले

मिला लो हम कोई चोर थोड़े न है ये हमारा बैग है उन्होंने कहा लेकिन उनकी आवाज में डर साफ साफ झलक रहा था ।

अच्छा तुम्हारा बैग है तो क्या तुम लड़कियों के कपड़े पहनते हो इसमे सारे कपड़े लड़कियों के है और मैं ये भी जानता हूँ कि ये कपड़े किसके है इसीलिए अच्छा है कि सब सच सच

बता दो अगर तुमने मेरी बात मान ली तो मैं तुम्हे जाने दूंगा और अगर नही मानी तो अभी पुलिस बुलाता हूँ वो खुद सच बाहर निकलवा लेगी - लक्ष्य ने कहा

क्या बकवास कर रहा है ये मेरी बीबी के कपड़े है और पुलिस की धमकी से हम डरने वाले नही है उसमें से एक ज्यादा तेज बन रहा था उसने कहा ।

देखो अगर तुम लोग सच सच मुझे बता दो तो मैं तुम्हे कुछ नही कहूँगा और इनाम भी दूंगा पांच हजार रुपये बस मुझे इतना बता दो की ये कपड़े ये बैग तुम्हे कहा से मिला और जिसने तुम्हे ये दिया है या जिससे तुमने ये लिया है वो कहा पर है - लक्ष्य ने प्यार से पूछा

अगर तुम मुझे ये बता देते हो तो मैं तुम्हे जाने भी दूंगा और पैसे भी दूंगा - लक्ष्य कहा

पांच हजार का नाम सुनकर दोनो के आंखों में लालच साफ साफ दिखा और दोनो ने एक दूसरे को देखा मानो आपस ही आपस दोनो आंखों के रास्ते पूछ रहे हो की बताये की नही ।

लक्ष्य ने उन दोनों के अस्मासंज का फायदा उठाया उसे लगा कि गाड़ी पटरी पर आरही है इसीलिए उसने फटाक से अपने जेब से पर्स निकाला और गईं कर पांच हजार रूपये अलग

कर लिए और उन दोनों के आंखों के आगे लहराते हुए बोला

अगर तुम मुझे सब कुछ सच बता दो तो अभी के अभी ये सब तुम्हारा बोलो ।

उन दोनों की आंखों में लालच साफ साफ दिख रहा था लेकिन अब भी उनमें थोड़ी सी झिझक थी ।

देखो डरो मत मैं किसी से कुछ नही कहूँगा बस मुझे कैसे भी कर के उस लड़की तक पहुचना है जिसका यह बैग है मुझे बताओ कि वो तुम्हे कहा मिली थी लक्ष्य ने आराम से पूछा ।

बस स्टॉप पर- उसमे से एक बोला

वो वही चोर था जो पूनम का बैग छीन कर भागा था

कौनसे बस स्टॉप पर? - लक्ष्य ने पूछा ।

उसने बताया लेकिन लक्ष्य को कुछ समझ मे नही आया

चलो मुझे चल कर दिखाओ की कौन से बस स्टॉप पर लक्ष्य ने कहा और फिर उठ खड़ा हुआ

साहब पैसे वह चोर बोला

पैसे भी मिल जाएंगे पहले चलो मेरे साथ घबराओ मत पैसे

देकर जाऊंगा बस तुम मुझे सब कुछ सही सही बता दो लक्ष्य ने नोट अपनी जेब मे सरकाते हुए कहा

वे दोनों लक्ष्य को लेकर उस बस स्टॉप गए और पूरी बात बताई की कैसे पूनम वहां पर खड़ी थी और कैसे वो उसका बैग लेकर भागे ।

लक्ष्य ने ध्यान से उनकी बातें सुनी और फिर वह वहां पर पहुचा जहा पर उसने उसका बैग छीना था ।

और फिर वो भागते हुए किस तरफ गया उसने यह भी बताया ।

पूरी बात सुनकर लक्ष्य को बहुत तेज गुस्सा आया , उसने गुस्से से उस आदमी के मुह पर एक मुक्का जड़ दिया

सालो किसी मजबूर और लाचार लड़की के साथ ऐसा करते हुए शर्म नही आती , तुझे पता है तेरी वजह से वो लड़की किसी मुसीबत में भी फंस सकती है , हट्टे कट्टे हो, हाथ पैर सही सलामत है कुछ काम धाम क्यो नही करते ये चोरी चकारी से क्या मिलता है क्या कभी सोचा है कि उनपर क्या बीतती होगी जिनके साथ तुम ऐसा करते हो लक्ष्य गुस्से से दहक रहा था पूरी बात सुनकर उसके तन बदन में मानो आग

लग गयी , वह अंगारे की तरह दहक उठा ।

माफ कर दीजिए साब गलती हो गयी आइंदा से ऐसी गलती नही होगी - उस चोर ने रोते हुए कहा

लक्ष्य के मारने से उस आदमी के नाक से खून बहने लगा था जिसे उसने अपने हाथों से दबा कर रोक रखा था ।

उसका खून बहता हुआ देख कर लक्ष्य को उस पर दया आगया और उसने कहा ये लो पैसे जाकर अपनी मरहम पट्टी करवा लेना, और इन पैसों से कोई काम शुरू कर लेना इस चोरी चकारी से कुछ नही मिलता किसी दिन पकड़े जाओगे तो इतनी पिटाई होगी कि हड्डी पसली टूट जाएगी और फिर पूरी जिंदगी जेल में बीत जाएगी - लक्ष्य ने कहा और फिर पूनम का बैग लेकर चल पड़ा

पैसे पाकर वो दोनों ऐसे भागे मानो अगर देर कर देते तो लक्ष्य अपने दिए हुए पैसे वापस मांग लेता ।

लक्ष्य उधर ही चल पड़ा जिधर उसने बताया था ।

*********
 
दो दिन बाद राजीव के मम्मी पापा रजनी को देखने के लिए

आये उनके साथ मे राजीव की बहन श्रोती भी आई थी ।

रजनी के मम्मी पापा ने सारी तैयारी कर रखी थी ।

नास्ता पानी करने के बाद रजनी को तैयार करके लाया गया ।

रजनी सर झुकाये धीरे धीरे आयी और सबको नमस्ते कर के उन लोगो के सामने बैठ गयी ।

राजीव के मम्मी पापा ने गौर से रजनी को देखा पहली ही नजर में उन्हें रजनी भा गयी थी अब तो बस उसके बारे में पूछताछ करनी थी ।

पापा अगर आप लोगो को कुछ पूछना है तो पूछ लीजिये- श्रोती ने कहा

रजनी की मम्मी ने दो चार बाते पूछी रजनी ने उसका जबाब बहुत ही आराम और समझदारी से दिया

रजनी के पापा ने भी राजीव से दो चार बाते पूछी और फिर बोले ।

भाई साहब हमारी लड़की आपके परिवार को अच्छे से अपना लेगी बस आप उसे सेवा का मौका दीजिये मुझे पूरा विश्वास है कि वो आपके कुल और खानदान के रीति रिवाजों को अच्छी तरह निभा पाएंगी हमारे पास बहुत ज्यादा तो पैसे

नही है लेकिन हमारी दोनो लड़कियों को हमने अच्छी परवरिश और संस्कार दिए है आप को वो निराश नही करेंगी इस बात का मुझे पूरा भरोशा है बस आप मेरी बेटी को अपना लीजिये- रजनी की मम्मी ने हाथ जोड़ कर कहा

हमे भी आपसे धन धान्य नही चाहिए भगवान की दया से हमारे घर मे किसी चीज की कोई कमी है बस हमे संस्कारी और सुशील लड़की चाहिए जो हमारे घर को सम्हाल ले - रजनी के पापा बोले

आप चिंता मत कीजिये मेरी बेटी रजनी आपको शिकायत का कोई मौका नही देगी मेरी तबियत ठीक नही रहती, आपके घर मे और आपके छात्र छाया में हमारी बेटी सुरक्षित रहेगी उसे कभी भी किसी चीज के लिए रोना नही रहेगा अब सब कुछ आपके हाथ मे है आप जैसा ठीक समझे वैसा कर ले मुझे तो ये रिस्ता मंजूर है- रजनी के पापा ने कहा

तभी दरवाजे पर दस्तक हुई सब के सब दरवाजे की तरफ देखने लगे ।

रजनी की माँ जरा देखो कौन आया है - रजनी के पापा ने कहा

रजनी की मम्मी उठ कर गयी और दरवाजा खोला उन्होंने जैसे ही दरवाजा खोला उन्हें जोर दार झटका लगा दरवाजे पर मिश्राइन खड़ी थी

रजनी की मम्मी उनको देखकर अंदर तक हिल गयी क्योकि मिश्राइन की आदत वह जानती थी उनकी बोली इतनी खराब थी कि बनता काम बिगड़ जाए और इस वक्त उनका घर पर आना मतलब बनता काम बिगड़ जाए ।

क्या बात है लावण्या की माँ कोई रिश्तेदार आया है क्या ? मिश्राइन अंदर झांकती हुई बोली

नही दीदी कोई खास नही बस ऐसे ही कोई आया है बस थोड़ा सा ब्यस्त हूँ अगर कोई जरूरी काम न हो तो मैं आपसे बाद में बात करती हूँ मैं आपसे बाद में मिलती हूँ - रजनी की मम्मी ने उन्हें टरकाने की कोशिश की

दरवाजे के बाहर तीन जोड़ी चप्पल रखे है तो मुझे लगा कि कोई खास आया है क्योकि तुम्हारे घर मे ऐसे चप्पल जूट कोई पहनता नही है इसी लिए हाल खबर लेने चली आई अब तुम नही चाहती हो कि आऊ तो नही आती हूँ वैसे कुछ जरूरी काम था वरना तुम तो जानती हो कि मिश्राइन बिना किसी मतलब के कही नही जाती - मिश्राइन ने बुरा से मुह बना कर कहा

अरे दीदी ऐसी बात नही है आपने सच कहा कोई मेहमान

आया है रजनी की मां का झूठ पकड़ा गया इसी लिए वह झेप सी गयी आप बताइए क्या जरूरी काम था उन्होंने झेंपते हुए कहा ।

वो क्या है ना मेरे घर मे आज चीनी खत्म हो गयी है और मेरा चाय पीने का बहुत मन कर रहा था क्योकि मेरे सिर में बहुत तेज दर्द है तो इसीलिए सोचा कि चलकर आपसे थोड़ी बाते भी कर लूं और चाय भी पी लूंगी जिससे सिर का दर्द कम हो जाये - मिश्राइन ने कहा

लेकिन दीदी अभी तो मेहमान है अभी कैसे - रजनी की मम्मी उन्हें घर के अंदर बुलाने में हिचकिचा रही थी

अरे तो क्या हुआ मैं कौन सा तुम्हारे रिस्तेदारो को कुछ कह रही हूँ और ऐसे कौन से रिस्तेदार आये है जो मुझे नही जानते ,सबको तो मैं जानती हूँ तुम चिंता मत करो जल्दी निकल जाऊंगी बस एक कप चाय पिला दो - मिश्राइन ने कहा

रजनी की मम्मी के सामने कोई चारा नही बचा उसे न चाहते हुए भी सब कुछ बताना पड़ा क्योंकि मिश्राइन बहुत मुँहफट थी और अगर इस बार वह झूठ बोलती तो क्या पता वो मुह खोल कर कह देती

दरअसल दीदी रजनी को देखने आए है रजनी की मम्मी हिचकिचाते हुए बोली

अरे वाह ये तो बहुत अच्छी बात है , मैं भी यही सोच रही थी कि रजनी का भी घर कैसे भी करके बस जाए फिर आप लोग तीर्थ करने चले जाओ , तो क्या मुझे अपना दामाद दिखाओगी नही- मिश्राइन ने सामने से पूछा

क्यो नही दिखाउंगी उसमे कैसी चोरी दीदी आखिर आप मेरी पड़ोसी है बड़ी है रजनी की मम्मी ने अनमने भाव से कहा

तो हटो चलो अंदर - मिश्राइन ने कहा और और बिना किसी की परवाह किये जबरदस्ती अंदर आगयी ।

रजनी की मम्मी कसमसा कर रह गयी ।लेकिन कर भी क्या सकती थी

मिश्राइन सबको नमस्ते करके अंदर आकर बैठ गयी

बाते चल ही रही थी कि वो बीच मे कूद पड़ी और रजनी की तारीफों के पुल बाधने लगी ।

भाई साहब मैं तो बचपन से रजनी को देखती आयी हूँ इसके जैसी सुशील लड़की पूरे गाँव मे नही है, क्या खाना , क्या

कपड़ा, क्या सिलाई कढाई सब कामो में रजनी नंबर एक है और पढ़ने में भी सबसे तेज थी मेरी बड़ी वाली लड़की को रजनी ही टक्कर देती थी पूरे गाँव मे और कोई भी उसके बराबर नही ठहरता था वो भी बहुत ही गुनी है मैं तो कहती हूँ कि आप ज्यादा मत सोचो बिचारो बस हां ही कर दो आप को रजनी जैसी बहू नही मिलेगी- मिश्राइन ने कहा

मिश्राइन की बाते सुनकर रजनी के मम्मी पापा मुस्कुरा कर रह गए

और उन्ही के साथ राजीव के मम्मी पापा भी मुस्कुराने लगे

ठीक है हमने कब मना किया है बस अपने बेटे से एक बार सलाह मशविरा कर लू हमे तो आपकी बेटी पसंद है अब जिसके साथ रहना है उसकी भी तो राय जाननी जरूरी है कल को कोई बात हो तो यह कहने लायक न हो कि आपने हमसे पूछा नही - रजनी के पापा मुस्कुराते हुए बोले

क्यो राजीव सही कह रहा हूँ न ?

भाई साहब मैं आपको एक आध दिन में बताता हूँ की क्या और कैसे करना है राजेव के पापा बोले

भाई साहब हमे कोई जल्दी नही है आप आराम से सोच विचार लीजिये हम गरीब जरूर है लेकिन हमारी बेटियों ने

हमे कभी भी बेटो की कमी नही होने दी दोनो निडर सहासी और समझदार है वो कभी भी आपको निराश नही करेंगी - रजनी के पापा बोले

बिल्कुल सही कहा आपने अरे समझदार और सहासी न होती तो इतने दिनों तक अकेले कैसे रह पाती अब लावण्या को ही देख लो अकेले जा कर अपनी बहन को उस नरक से निकाल लायी बिना समझदारी के ही मिश्राइन ने कहा

मतलब किसको कहा से निकाल लायी- राजीव के माममी पापा चौक गए

और रजनी के मम्मी पापा के चेहरे का रंग एक पल में सफेद हो गया वो जिस बात से डर रहे थे वही हो गया था ।

कुछ नही ये तो बस ऐसे ही क्या दीदी आप भी चाय पीजिये न ठंडी हो रही है रजनी की मम्मी ने तुरंत बात को सम्हाला और बात को बदलते हुए कहा

अच्छा मैं चलता हूँ मैं आपको फोन करके बता दूंगा की क्या तय हुआ है- राजीव के पापा ने कहा

जी ठीक है रजनी के पापा ने हाथ जोड़ कर कहा और

दरवाजे तक उनके साथ गए ।

चलो अच्छा हुआ रजनी के लिए इतना अच्छा रिस्ता आया ये लोग बहुत अच्छे लोग है और सपन्न और समझदार भी लगते है वरना रजनी ने जो किया है उससे इतना अच्छा घर बार मिलना बहुत मुश्किल था लेकिन रजनी की किस्मत अच्छी है जो उसकी इतने अच्छे घर मे शादी हो रही है ,वो भी दुबारा वरना ऐसे कौन करता है शादी उस लड़की से जो एक बार घर से भाग गई हो - मिश्राइन ने कहा

दीदी शांत रहिये अभी वो लोग दरवाजे पर ही है सुन लेंगे रजनी की मम्मी ने मिश्राइन का हाथ दबाया

अरे तो मैं क्या कोई गलत बोल रही हूँ , और रजनी की माँ ऐसी बाते छुपती कहा है एक न एक दिन राज तो खुल ही जाना है और अगर पहले ही सब कुछ क्लियर रहेगा तो बाद में कोई दिक्कत नही होगी बाकी रजनी मेरी भी बेटी जैसी है उसका घर बार बस जाए तो मुझे क्या तकलीफ होगी- मिश्राइन ने मुह बिगाड़ते हुए कहा जाहिर सी बात है उन्हें रजनी की मम्मी का इस तरह टोकना अच्छा नही लगा ।

उन्होंने जल्दी से चाय सटका और बोली अच्छा चलती हूँ रजनी की माँ बहुत काम है आज तो चाय का भी स्वाद नही

आ।रहा है ऐसा लग रहा था गरम पानी पी रही हूँ न दूध का पता चल रहा न मीठे का और न ही पट्टी का आज मनसे चाय नही बनाई हो , पता नही चाय ठीक नही बनी थी या मुह का स्वाद चला गया है और सिर तो दर्द से फटा जा रहा है अब जाकर आराम करूँगी तब शायद उतरे सिर मिश्राइन ने कहा और जाने लगी ।

रजनी की मम्मी ने मानो राहत की सास ली हो ।उन्होंने एक बार भी उनको रुकने के लिए नही कहा ।

पूनम की बाते सुनकर कार्तिक को यकीन हो गया कि हो न हो पूनम उससे कोई न कोई बात छुपा रही है ।लेकिन अभी कुछ भी न तो पूछने का समय था और न ही जानने का , सबसे पहले पूनम का ठीक होना जरूरी था सके बाद ही वह पूनम से बात कर सकता था ।
 
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