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अधूरी जवानी बेदर्द कहानी

अधूरी जवानी बेदर्द कहानी--6

उनके पास आते ही उन्होंने लपक कर मेरा तौलिया छीन के फर्श पर अपनी

बनियान-चड्डी पर फेंक दिया और बोले- आज तुम्हारी और अपनी दोनों की शर्म

दूर कर दूँगा। अब इस कमरे में ना तुम कपड़े पहनोगी और ना मैं !

मैं भी नंगी होते ही फटाफट उनके कम्बल में घुस गई ताकि अपना नंगापन ढक

सकूँ ! मेरे अन्दर जाते ही वे मुझसे चिपक गए, उनका नंगा शरीर मेरे नंगे

बदन से चिपक रहा था, मुझे झुरझुरी सी आ रही थी, उनका शरीर वासना की आग

में जल रहा था !

जीजाजी का बदन मेरे बदन से चिपका बड़ा भला लग रहा था ! उनका नंगा सीना

मेरे स्तनों से रगड़ खा रहा था ! वे मुझे बुरी तरह चूम रहे थे और मैं

उनकी बाँहों में मछली की तरह फिसल रही थी, उनके नंगे बदन से रगड़ खा रही

थी, उनका लिंग मेरे पेट कमर और जांघों से टकरा रहा था।

मैं भी उनके गालों-कन्धों पर चूम रही थी और उत्तेजना से काट भी रही थी।

वे भी उसके जबाब में मेरे गाल-कंधे और वक्ष पर काट रहे थे और हंस कर कह

रहे थे- आज मैं तुझे काटने को मना नहीं करूँगा, बस खून मत निकाल देना,

बाकी ये निशान तो कल तक हट जायेंगे !

और जोश में मैंने उनके गाल पर अपने दांतों के निशान बना दिए कि वे सिसिया

कर रह गए और जबाब में मेरे भी गाल काट कर मुझे सिसिया दिया !

अब वे चूमते चूमते नीचे सरक रहे थे, गालों से स्तन चूसे, फिर पेट की नाभि

में जीभ फिराई और मेरी चूत में आग सी जल गई, मुझे पता चल गया कि जीजाजी

खतरनाक सेक्स एक्सपर्ट हैं।

मेरे पति को तो मालूम ही नहीं था कि औरत के किन किन अंगों को चूमने पर मज़ा आता है।

जीजाजी पेट से जांघें, पिण्डली चूमते-चूमते सीधे मेरे पैरों के पंजों के

पास चले गए और उन्होंने मेरे पैर के पंजे का अंगूठा अपने मुँह में ले

लिया और चूसने लगे।

मैं उन्हें रोकती, तब तक मेरे शरीर में आनन्द की तरंगें उठने लगी, आज

मुझे पता चला कि पैर के अंगूठे या अंगुलियों को चूसने से भी स्त्री

कामातुर हो सकती है।

मैं सोचती रह गई कि जीजाजी ने यह ज्ञान कहाँ से लिया होगा !

मेरे मुँह से आनन्दभरी किलकारियाँ निकल रही थी पर अपने पैरों गन्दा समझ

कर मैंने उनको वहाँ से हटाना चाहा और कहा- छीः ! कोई पैरों को भी चाटता

है क्या?

वे बोले- तू मेरी जान है और तेरे अंग अंग में मुझे स्वर्ग नज़र आता है। तू

कहे तो मैं तेरी गाण्ड भी चाट सकता हूँ !

मैंने शरमा कर कहा- धत्त !

फिर वे पैरों को छोड़ कर मेरे मनपसंद स्थान पर आ गए, यानि कि मेरी....चूत

! रात के करीब 10 बज गए थे, मुझे भी थकान के कारण नींद आ रही थी, मैंने

उनसे कहा- अब मैं मैक्सी पहन लूँ क्या?

पर उन्होंने कहा- नहीं, रात भर नंगे ही सोयेंगे और रात को कभी भी मूड बन

गया तो मैं तुम्हें चोदना शुरू कर दूँगा।

मैंने कहा- ओ के ठीक है। मुझे क्या फर्क पड़ेगा, आप ही थकेंगे, मुझे तो

सिर्फ टांगें चौड़ी करनी हैं, कूदना तो आपको है।

और एक पुरानी कहावत और जोड़ दी- सड़क का क्या बिगड़ेगा, इस पर चलने वाले थकेंगे !

वे हंस पड़े और बोले- फिर तू चुदते हुए जल्दी जल्दी निकालने का क्यूँ कहती

है जब तेरा कुछ बिगड़ना ही नहीं है?

मैंने मुस्कुरा कर कहा- मैं तो आपका ख्याल करती हूँ, बुड्ढे आदमी हो इसलिए !

तो वे बोले- अब तो तुम्हें पता चल गया होगा कि मैं कितना बुड्ढा हूँ !

मैंने कहा- पता तो है न ! आपने मुझे कितना परेशान किया है ! तो जवानी में

क्या करते होंगे, बेचारी मेरी दीदी की क्या हालत होती होगी?

वो हंस पड़े !

मैंने कहा- अब सो जाओ !

तो वे बोले- नहीं, क्रिकेट का मैच आ रहा है, वो देख कर सोऊँगा, तुम सो जाओ !

मुझे तो कोई रुचि थी नहीं क्रिकेट में, मैं तो सो गई, वे भी मेरे पीछे

चिपक कर लेट गए और मैच देखने लगे !

कोई डेढ़-दो घंटे के बाद मेरी नींद खुल गई क्योंकि जीजू पीछे से मेरे

कूल्हे मसल रहे थे और मेरी एक टांग थोड़ी उठा कर मेरी चूत का छेद टटोल रहे

थे। मैं उनकी कोशिश को सरल करने के लिए थोड़ी टांग उठाते हुए बोली- क्या

हुआ ?

तो वे बोले- यार भारत मैच हार गया है साउथ अफ्रीका से ! इसलिए गम गलत

करना है ताकि मुझे नींद आ जाये !

मैंने हंस क कहा- यह तो मुझे पता ही था कि कभी भी आपका लण्ड मेरी चूत में

घुस सकता है पर इतनी जल्दी की आशा नहीं थी।

मैंने कहा- हारे, तो गम गलत करना है ! जीत जाते तो भी जीत की ख़ुशी में

चोदते ! यानि मेरी चुदाई तो होनी ही है।

ऐसा कहते हुए मैंने उनके लिए रास्ता बनाया अपनी टांग थोड़ी उठा कर !

और जीजू ने थोड़ा मेरी चूत के छेद पर थूक लगा कर पीछे से ही मेरी चूत में

अपना लण्ड सरका दिया था और घस्से लगाने लगे। इस वक़्त वो बहुत जोर से चोद

भी रहे थे, साथ ही मेरे स्तन भी बेदर्दी से मरोड़ रहे थे !

मैं उनके हाथ से अपना स्तन छुड़ाते हुए बोली- क्या करते हो? दर्द हो रहा

है। भारत को क्या मेरी चूचियों और चूत ने हराया है जो इन पर गुस्सा उतार

रहे हो?
 


यह सुनकर उन्होंने स्तन मरोड़ना तो बंद कर दिया पर चूत के भरी भरकम धक्के

जारी रखे ! उन्होंने कंधे पकड़ रखे थे और अपनी एक टांग भी मेरे ऊपर रख रखी

थी वर्ना उनके धक्कों से में कुछ आगे खिसक सकती थी।

मेरी चूत में भी जीजू के धक्कों से कुछ हलचल मचनी शुरू हो गई थी ! मैं

अपने शरीर का रहस्य नहीं जान पाई कि कभी तो 6-8 महीनों में एक बार भी चूत

से पानी नहीं निकलता है। या कभी मन में ही नहीं आती है और कभी 6-8 घंटों

में ही 8-10 बार पानी निकल जाता है। यह भी कुदरत का करिश्मा ही है।

मैंने जीजू को ऊपर आने को कहा ताकि मैं भी आनन्द ले सकूँ ! पीछे से मुझे

इतना आनन्द नहीं आता है।

मैंने अपनी दोनों टांगें योग करने के अंदाज़ से उठा दी, तब तक जीजाजी ने

पास की दराज़ से निकाल कर कंडोम पहन लिया और मेरे ऊपर आकर घुड़सवारी करने

लगे, जिसे सही मायने में ऊँट सवारी कहना ज्यादा सही है क्यूंकि ऊँट पर

बैठने वाला ही कभी आगे और कभी पीछे होता है क्योंकि ऊँट के चलने का अंदाज़

ही ऐसा होता है।

उनके धक्के जबरदस्त लग रहे थे, मैंने अपनी टांगें पूरी उठा ली थी जितनी

उठा सकती थी, अब मेरी चूत बिल्कुल खड़ी अवस्था में थी जिसमें जीजू अपना

लण्ड पूरा पेल रहे थे जड़ तक !

मैंने कहा- मेरी टांगों से नीचे हाथ डालकर मेरे चूचे पकड़ लो और इन्हें

दबाओ, मुझे इन्हें दबवाना अच्छा लग रहा है।

जीजाजी ने कोशिश कि पर उनकी लम्बाई ज्यादा होने के कारण उनका बोझ मुझ पर

पड़ रहा था इसलिए उन्होंने थोड़ी देर बाद मेरे स्तन छोड़ दिए और वापिस मेरे

कूल्हे पकड़ कर झटके लगाने लगे। कमरे में खप-खप, खच-खच और हमारी जांघें

टकराने की आवाज़ें गूंज रही थी पर हमें कोई डर नहीं था किसी के सुनने का

!

करीब 10 मिनट की चुदाई के बाद मेरा दूसरी बार पानी निकल गया और जीजाजी ने

भी झटका खा कर अपना पानी छोड़ दिया !

मेरी ख़ुशी मिश्रित आवाज़ निकली- वाह, आज तो आपने कमाल कर दिया, सिर्फ 10

मिनट में ही पानी निकाल दिया !

वे बोले- यार, मैंने कहा ना कि अब मैं अपने दिमाग से कंट्रोल कर लेता हूँ

कि पानी 10 मिनट में निकलना है या 40 मिनट में !

मैंने कहा- आप ऐसे दिमाग को कंट्रोल कैसे करते हो?

तो वे बोले- सेक्स करते वक़्त सेक्स को दिमाग में नहीं रखता हूँ, तुम्हारी

आह-उह पर ध्यान नहीं देता हूँ ! कोई टेंशन वाली बात सोचता रहता हूँ तो

मेरा पानी आधा घंटा भी नहीं निकलेगा और जल्दी निकलना हो तो सेक्स का सोच

लेता हूँ ! तुम्हें पता नहीं है कि मैं काफ़ी कम उम्र से सेक्स कर रहा

हूँ, हस्तमैथुन, लड़कों से गुदामैथुन और जो उन्होंने बताया वो मैं यहाँ

नहीं बता सकती प्रतिबंध की वजह से !

और कहा- कई लड़कियों, कई भाभियों, कई रंडियों के साथ मैंने सेक्स किया है।

आज में 46 साल का हूँ तो मेरा सेक्स-अनुभव सालों साल का है। जितनी

तुम्हारी उम्र भी नहीं है। इतने अरसे के बाद मुझसे से कंट्रोल होना शुरू

हुआ है। हाँ ! स्तम्भन का ज्यादा वक्त तो मुझ में पहले से ही ईश्वर की

देन ही है। मेरे दोस्त लोग हस्त मैथुन करते थे तो उसको 61-62 कहते थे

यानि 61-62 बार लण्ड को आगे पीछे करने से उनके पानी छुट जाते थे पर मेरे

को 200-250 बार आगे पीछे करना पड़ता था !

और वो हंस पड़े, मैं बेवकूफ सी उनकी बातें सुन रही थी और एक ज्ञान लेकर

में सोने लगी और वे भी मेरी पीठ से चिपक कर सो गए !

सुबह सुबह कोई 6 बजे मेरी नींद जीजाजी के चुम्बनों से खुली ! वो मुझे

यहाँ-वहाँ चूम रहे थे।

मैंने कहा- यह सुबह-सुबह भगवान के भजन के वक़्त यह क्या कर रहे हो?

जीजाजी बोले- तभी तो भगवान के भजन में ढोलक बजानी है।

मुझे उनकी बात पर हंसी आ गई, मैंने कहा- अपनी और मेरी हालत देखो, बाल

बिखरे हुए और सारा शरीर अस्त व्यस्त हो रहा है, मुँह धोया ही नहीं और आप

इस काम के लिए शुरू हो गए?

जीजाजी बोले- सूखी चुनाई करूँगा ! सूखी चुनाई का मतलब ऐसे ही चोदेंगे और

अपना पानी नहीं निकालेंगे !

मैंने सोचा- अब ये मानेंगे तो नहीं और अपने क्या फर्क पड़ता है। बेचारे

ने इसी काम के लिए इतना खर्चा किया है। और ऐसा मौका बार बार तो मिलना

नहीं है। चल कम्मो अपनी ड्यूटी पर ! ड्यूटी क्या टांगें उठा कर लेटना है,

कपड़ों का एक रेशा ही नहीं था बदन पर ! पर रात भर से मेरी टंकी फुल हो रही

थी।

मैंने कहा- मुझे बाथरूम जाकर आने दो नहीं तो आपके डालते ही मेरा निकल

जायेगा यहीं बिस्तर पर ही !

उन्होंने कहा- जाकर आ जाओ !

मैं वापिस आई तो देखा जीजाजी का लण्ड सीधा खड़ा जैसे छत को देख रहा है।

मैंने उसे हाथ में पकड़ कर दबाया और कहा- इसकी अकड़ नहीं निकली अब तक !

जीजाजी बोले- तुम मेरी ड्रीमगर्ल हो ! तुम्हें देखते ही यह तुम्हारे

सम्मान में खड़ा हो जाता है।

मैं मुस्कुराती हुई बिस्तर पर लेटी, अपनी टांगें उठाई और बोली- आ जाओ !

जीजाजी मेरे ऊपर आये, चूत को थूक से चिकना किया और लण्ड पेल दिया ! पिछले

दिन से चुद रही चूत ढीली पड़ गई थी इसलिए सटासट लण्ड अन्दर-बाहर जा रहा

था।

मैंने कहा- कंडोम तो लगा लो ! क्या पता आपके छुट जाये तो?

जीजाजी ने कहा- स्टॉक ही नहीं बचा ! कहाँ से छुटेगा अब? अब तो मुश्किल से

छुटेगा, तुम चिंता मत करो !

करीब दस मिनट की चुदाई के बाद मैं स्खलित हो गई, मेरा सारा बदन हल्का

लगने लगा। उन्हें यह पता चल गया और उन्होंने अपना लण्ड बाहर निकाल लिया,
 


अपनी चड्डी-बनियान पहन लिया और मुझे भी कहा कि सिर्फ मैक्सी पहन लूँ

क्यूंकि अभी वेटर से चाय मंगवायेंगे !

मैंने भी अपनी मैक्सी पहन ली चड्डी को भी तकिये के नीचे दबा दिया।

थोड़ी देर में जीजाजी ने इन्टारकॉम से फोन कर चाय मंगवा ली।

हमने चाय के साथ हल्का नाश्ता किया और जीजाजी नहाने चले गए।

नहा कर वापिस आये तब तक मैं लेटी हुई ही थी, उन्होंने कहा- नहा कर फटाफट

तैयार हो जाओ तो मेरा भी मूड बने !

मैंने कहा- पहले ही चोद दो ना ! नहाने के बाद वापिस ख़राब करोगे मुझे !

उन्होंने कहा- अगर मूड हो तो फिर नहा लेना ! पर मुझे पता है तुम जितनी

बार नहा कर बाहर आओगी, मुझे तुम्हें चोदना पड़ेगा क्यूंकि अब इसमें से में

पानी निकालूँगा नहीं और यह तुम्हें नहाई हुई देखते ही खड़ा हो जायेगा!

मैंने कहा- यार, तुम मुझे बार बार परेशान करोगे ! अपना पानी निकाल लो ना !

तो वो बोले- अरे तुम्हें पता नहीं है, तेरी दीदी बहुत शक्की है, मैं जब

भी कोई रात बाहर बिताता हूँ तो उसको शक हो जाता है कि किसी दूसरी को चोद

के आए होंगे ! अरर अभी मैं अपना पानी निकाल लूँ तो शाम को तेरी बुड्ढी

दीदी को देख कर मेरा लण्ड खड़ा नहीं होगा ! तुम्हें पता है, बुढ़ापा है,

मेरा कल से 3 बार पानी निकल चुका है। सब खाली हो गया है। अब शाम तक मुझे

वापिस स्टॉक बनाना है। हाँ तुम ही रहो शाम को चुदने तो अभी निकाल दूँ !

तो भी रात को तुम्हें देखते ही फिर खड़ा हो सकता है।

मैं क्या बोलती, मुझे उनकी बातें समझ में नहीं आ रही थी, बस यह पता था कि

मेरी सूखी चुनाई कितनी बार भी हो सकती है।

मैं नहा कर आई तो वे तैयार ही थे, बोले- यार, कोई नहा कर आता है तो उसके

शरीर से, बालों से पानी टपकता है तो मेरा मन हो जाता है।

मैंने कहा- मैं बाल धोकर आई हूँ, मुझे बाल सुखाने तो दो !

पर वे नहीं माने !

मेरे सर पर तौलिये बंधा था, मुझे उन्होंने बिस्तर पर लिटाया और शुरू हो गए !

इस बार उन्होंने मेरी नहाई धोई चूत भी चाटी, फिर लण्ड डाला और झटके देने शुरू !

बस वो यह ध्यान रख रहे थे कि मैं कब स्खलित होती हूँ और फिर हट जाते !

इस धक्कमपेल में मेरे सर का तौलिये भी हट गया और गीले बालों की वजह से

बिस्तर पर बड़ा निशान बन गया। मैंने कहा- ये होटल वाले क्या सोचेंगे कि

यहाँ पेशाब कर दिया !

जीजाजी ने कहा- इसकी चिंता हम क्यों करें कि हमारे पीछे होटल वाले हमारे

बारे में क्या सोचेंगे ! वे तो ये भी सोचेंगे कि साला कैसा माल पटा कर

लाया है और रात भर से मज़े ले रहा है।

मेरी और जीजू की उम्र में अंतर साफ पता चलता है।

मैंने सुना कि बन्दर अपना सम्भोग कई घंटों में पूरा करते है क्योंकि वे

शिलाजीत चाटते रहते है इसलिए थोड़ा चोदा और हट गए, फिर चोदा और हट गए। इस

प्रकार वे अपना पानी 7-8 घंटों में निकालते है। वही स्थिति जीजाजी ने भी

कर दी थी, 10 बजे तक वे मुझे कोई 5-6 बार चोद चुके थे और उनका खड़ा का

खड़ा, बस पेशाब कर आते, तब बैठता और थोड़ी देर मुझे सहलाते और फिर खड़ा हो

जाता।

मेरी हालत ख़राब हो गई, मैंने कहा- देखो आपने मेरी चूत की क्या हालत कर

दी है। अब तो रुक जाओ !

वे बोले- ठीक ! अब हमें यह कमरा भी छोड़ना है। साड़ी पहन कर तैयार हो जाओ

! अभी हमें खाना भी खाना है।

मैं फटाफट तैयार हुई, उन्होंने भी अपनी जींस और शर्ट पहन लिया।

तभी उन्हें कुछ याद आया और उन्होंने बैग से एक ट्यूब निकाली, क़ुडर्मिस

नाम की थी, बोले- चलो तुम्हारी चूत पर दवा लगाता हूँ ! वास्तव में बहुत

लाल हो रही है। और जगह-जगह से कुछ कट भी गई है। मेरे लण्ड की भी हालत

ख़राब है।

ऐसा बोल कर उन्होंने मेरे सामने ही अपनी जीन की चैन खोली लण्ड को बाहर

निकाला चमड़ी को ऊपर कर सुपारे पर ट्यूब से दवाई लगाने लगे। उनका सुपारा

भी बहुत लाल हो रहा था !

अपने लण्ड पर दवाई लगा कर उसे मोड़ कर अन्दर डाल लिया और चैन बंद कर दी

में किसी बच्चे की तरह उनकी ध्यान से हरकत देख रही थी।

फिर उन्होंने कहा- अब मैं तुम्हारे लगा दूँ, पलंग के किनारे पर लेट जाओ

और टांगे नीचे फर्श पर रखो।

मैं लेट गई, जीजाजी ने साड़ी पेटीकोट ऊँचा किया, मेरी चड्डी को काफी नीचे

किया और ट्यूब लेकर हल्के-हल्के हाथों से मेरी चूत पर दवाई लगाने लगे।

दवाई का ठंडा ठंडा स्पर्श मेरी टूटी फूटी चूत को भला लग रहा था।

वे आराम से मेरी चूत के पपोटों, चने के आसपास और ग़ाण्ड और चूत के बीच की

चमड़ी पर दवाई लगा रहे थे जहाँ से मेरे जीजाजी के ऊपर चढ़ कर चोदने से कट

लग गया था ! उनकी अंगुली दवा अन्दर तक लगा रही थी तभी मुझे चरर्र की चेन

खुलने की आवाज़ आई।

मैं चौंकी, मैंने देखा कि जीजाजी अपना लण्ड बाहर निकाल रहे हैं।

मैंने कहा- क्या करते हो? अभी तो दवा लगाई है।

उनका लण्ड तना हुआ था, वे बोले- अन्दर तक अंगुली पहुँच नहीं रही थी, इससे लगेगी !

ऐसा कह कर काफी ट्यूब अपने लण्ड पर लगाई और दवा लगी चिकनी चुत में पेल

दिया और हौले हौले धक्के लगाने लगे !

मैंने भी ठंडी साँस भर कर चड्डी पहने पहने जितनी चौड़ी टांगे हो सकती थी,

की और 5 मिनट में फिर से स्खलित हो गई क्यूंकि उनके दवा लगाने से मैं

थोड़ी गर्म तो पहले से ही थी।
 


जीजाजी को पता चला कि मैं स्खलित हो गई हूँ तो अपना लण्ड बाहर निकाल लिया

और मोड़ कर वापिस अपनी पैंट में डाल लिया, मेरी चूत पर फिर से क्रीम लगाई

और चड्डी ऊँची कर पहना दी !

फिर हमने कमरा छोड़ा, मैं तो लिफ्ट से नीचे गई, जीजाजी रेसेप्शन पर गए,

नीचे रेस्तराँ में खाना खाया और बस स्टैंड पर गये। बस में साथ-साथ बैठे,

सारे रास्ते वे पास वालों की नज़र बचा कर मेरी जांघ पर हाथ फेरते रहे, गोद

में बैग रख कर मेरा हाथ कई बार अपने लण्ड पर रखते रहे, उनका लण्ड फनफना

रहा था, मुझे पता था कि आज दीदी बहुत जोरों से चुदेगी !

फिर उनका गाँव आ गया, वे उतर गए, जब तक मेरी बस नहीं चली, खिड़की के पास

खड़े रहे, मेरी बस दूर मोड़ तक गई तब तक मुझे देखते रहे। उनका चेहरा उदास

था, मैं भी उन्हें उदास देख कर उनके प्यार लाड को याद कर उदास हो गई, फिर

अपने गाँव पहुँच गई !

मैं अपने गाँव तक पहुँची तब तक जीजाजी का आधे घंटे में दो बार फोन आ गया !

मैं समझ गई कि जीजाजी का मन मेरे में अटका है, उन्होंने बस में हाथ फेरते

हुए कई बार कहा था कि मन कर रहा है।

तो मजाक में मैंने कहा था- आ जाओ, यही बस में ही चोद दो ! हिम्मत आपकी होनी चाहिए !

और वे कसमसा कर रह गए थे !

हमारी सीट के बराबर में खड़ा एक लड़का जो 20-22 साल का था हमारी बातें सुन

कर और जीजाजी की हरकतें देख कर बेचारा गर्म हो रहा था और बार बार अपनी

पैँट ठीक कर रहा था।

मैंने यह बात जीजाजी को बताई तो उन्होंने कहा- इसे भी देख कर बात करना और

हाथ फेरना सीखने दो, हमारा क्या जाता है !

और वो बार-बार मुझे होटल में कम चोदने का अफ़सोस कर रहे थे पर मेरा जी

जानता था कि मैंने उन्हें कैसे झेला था !

खैर मैं गाँव पहुँच गई और उनसे दिन में कई बार बात होने लगी, मम्मी पापा

से छुप कर उनसे बात करने के लिए मुझे कभी छत पर जाना पड़ता था और कभी

लेट्रिन में बैठ कर बात करनी पड़ती थी !

उनकी बातें घूम फिर कर सेक्स पर ही आती थी।

अब वे बार-बार मुझसे जल्दी मिलने की बात कह रहे थे !

फिर एक दिन मैंने उन्हें कहा- आप कल आकर मेरे घर मुझसे मिल सकते हो !

सुनते ही वो खुश हो गए और बोले- क्या वाकई?

मैंने कहा- हाँ, कल 11 बजे तक आ जाओ, मम्मी ननिहाल जा रही हैं, पापा को

खेत पर जाना है, भाई जो स्कूल में पढ़ाने जाता है, वो स्कूल में ठेके पर

टीचर लगा हुआ है तो ये सभी वापिस शाम को आयेंगे !

मैंने उन्हें यह नहीं बताया कि भाभी आई हुई है और उसके एक बेटा और एक

बेटी और मेरा एक बेटा भी है। उन्होंने मेरी भाभी और उसके बच्चों का तो यह

सोचा कि वे भाभी के पीहर में होंगे और मेरे बेटे के बारे में यह सोचा कि

वो स्कूल जायेगा !

यह सोच कर वे खुश हो गए और बोले- मैं स्कूल से निकल कर बाइक से सीधा तेरे

गाँव आ जाऊँगा।

जीजाजी भी सरकारी टीचर हैं, उनका स्कूल मेरे गाँव से 25-30 किलोमीटर पर है।

मैंने कहा- हाँ, आ जाओ !

मैंने सोचा, देखेंगे, किस्मत हुई तो मौका देखा कर चौका मार लेंगे वरना

मिल तो जायेंगे क्योंकि मुझे अगले दिन जयपुर जाना था।

सुबह उन्होंने फोन पर पूछा- मम्मी ननिहाल गई क्या?

मेरी मम्मी जा रही थी इसलिए मैंने दबी आवाज में कहा- हाँ जा रही हैं !

फिर पूछा- और पापा?

मैंने कहा- वे तो जल्दी ही खेत पर गए।

यह सुनकर वे अपनी स्कूल से रवाना हो गए।

करीब 45-50 मिनट के बाद उनका फोन आया- मैं तेरे गाँव के बस स्टैण्ड तक

पहुँच गया हूँ, घर आ जाऊँ क्या?

मैंने कहा- हाँ आ जाओ जल्दी !

उस वक्त मैं कमरे में झाड़ू लगा रही थी, भाभी बाहर हाल में पोचा लगा रही

थी, मैं बिल्कुल धूल से भरी हुई थी, नहाई भी नहीं थी, घागरा और

कुर्ती-कांचली पहन रखी थी।

और वो 2-3 मिनट में बाइक लेकर घर आ गए। घर में घुसते ही मेरा और भाभी के

दोनों बच्चे उनके सामने गए खुश होकर और उनके सर पर मानो बम पड़ा ! रही

सही कसर मेरी भाभी जो पौचा लगा रही थी, उसने धोक लगा कर पूरी कर दी !

मुझे उनका चेहरा देख कर हंसी आ रही थी, उनके चेहरे पर पूरे बारह बज रहे थे !

बच्चे बाहर उनकी बाइक पर चढ़ रहे थे !

मुझे मालूम था वे आते ही मुझे बाँहों में पकड़ेंगे, वे फाटक से अन्दर आये

और जब मैंने धोक देकर कहा- आइये जीजाजी, जीजी को साथ नहीं लाये?

तो उन्होंने आशीर्वाद देते मेरा कन्धा गुस्से में जोर से दबाया मेरे मुँह

से कराह निकल गई पर हंसी भी उनकी हालत देख कर जबरदस्त आ रही थी !

फिर मैंने धीरे से कहा- मैं कल जयपुर जा रही हूँ, आपसे मिलना हो गया, यही

क्या कम है !

जीजा मुझे बाहों में लेने की कोशिश करने लगे, मैंने कहा- अरे अभी मैं धूल

से भरी हूँ, मेरी हालत ख़राब है !

ऐसा कह कर मैं एकदम नीचे बैठ कर उनकी बाहों से निकल कर बाहर भाग जाना

चाहती थी पर जीजाजी बहुत चपल थे और बहुत तेज़ भी, मेरी कोशिश उन्होंने

खुद नीचे झुक कर फ़ेल कर दी और मुझे पकड़ कर सीधा खड़ा कर दिया, सीधे मेरे

कुर्ती के ऊपर से ही स्तन पकड़े और मैं नहीं-नहीं करूँ, तब तक मेरे चुम्बन

लेकर होंठ भी चूस लिए और बोले- मेरी जान तू कैसी भी हालत में हो, मुझे तो

बहुत प्यारी लगेगी !

मैंने उन्हें कहा- अभी देखो, मुझ पर भरोसा रखो, आपका काम हो जायेगा ! अभी

बच्चे पड़ोस में जीमने जायेंगे तब मौका निकल जायेगा !

उनके मन में थोड़ी आशा जगी, उन्होंने अपनी पैंट का उभार दिखाया और कहा-

मुन्ना जाग गया है अपनी मुन्नी से मिलने के लिए !

मैं हंस पड़ी !

फिर उनको चाय पिलाई और बच्चों को जीमने भेज कर मैं बाथरूम में चली गई नहाने !
 


जीजाजी भूखे शेर की तरह मेरे घर में इधर उधर घूम रहे थे !

मैं नहा कर आई तब वे कमरे में थे, मैं कमरे में गई खुले और गीले बालों के साथ !

जीजाजी की उत्तेजना चरम सीमा पर थी !

भाभी बाहर झाड़ू लगा रही थी, मैं कमरे में गई तो मुझे कोई गाना याद आया

मैंने वो गा कर थोड़ा ठुमका लगा कर जीजाजी के अपनी कमर हिला के गाण्ड से

टक्कर मारी तो अनजान खड़े जीजाजी पलंग पर गिर गए, मुझे फिर से हंसी छुट

गई, मैं उन्हें देख कर बहुत खुश थी, मेरे लिए सेक्स कोई मायने नहीं रखता

पर जीजाजी का दिमाग सेक्स पर ही घूम रहा था इसलिए वे बस कैसे चोदूँगा-

कैसे चोदूँगा ही अपने दिमाग में सोच रहे थे, कुछ फिक्रमंद भी थे इसलिए

उन्होंने गाण्ड से ठुमका लगा कर गिराने का कोई प्रत्युत्तर नहीं दिया !

मैं खड़ी थी, जीजाजी पलंग पर बैठे थे। मुझे उन पर कुछ दया आई, मैंने अपनी

मैक्सी उठाई और अपनी नंगी चूत उनके सामने कर दी और बोली- अभी भाभी नहाने

जाएगी, तब तुम चौका लगा लेना और यह आइसक्रीम खा लो !

ऐसा कहते ही बैठे-बैठे जीजाजी ने अपना मुँह मेरी नहाई-धोई चिकनी चूत पर

लगाया और सपर-सपर चाटने लगे। आनन्द से मेरी आँखे बंद होने लगी। एक मिनट

भी नहीं चाटा होगा कि बच्चों का शोर सुनाई दिया और मैंने फटाफट अपनी

मैक्सी नीचे की और कमरे से बाहर आ गई।

अब जीजाजी का चेहरा और उनकी झुंझलाहट देखने लायक थी !

मैंने उन तीनों बच्चो को कहा- जल्दी जीम कर आ गए?

तो मेरे बेटे ने कहा- जीमन अच्छा नहीं था !

मेरी भाभी वहाँ आ गई थी और बच्चों से कह रही थी- तुम्हें एक जगह और भी जाना है !

बच्चे मना कर रहे थे- वहाँ नहीं जायेंगे, बहुत दूर घर है।

मैंने कहा- यहाँ तो तुम्हें जिमा कर 2-2 रूपये ही दिए थे, वहाँ 5-5 रूपये

देंगे और उनके जिमन भी अच्छा है।

जीजाजी भी जाने का जोर दे रहे थे कि वहाँ जीम के आओगे तो तुम्हें बाइक पर घुमाऊँगा।

खैर जीजाजी की किस्मत ने जोर मारा और बच्चे रवाना हो गए।

उनके जाते ही मैंने दरवाज़ा बंद किया, भाभी ने पानी की बाल्टियाँ बाथरूम

में रखी और अपने कपड़े लेकर बाथरूम में घुस गई।

अब घर सुनसान हो गया था, हम कमरे में भागते से गए और अन्दर वाले कमरे में

जाकर मैंने जीजाजी को कहा- अब फटाफट कर लो !

पर उन्होंने कहा- उस कमरे में नहीं, वहाँ से बाहर का ध्यान नहीं रहेगा।

इस बाहर वाले कमरे में आओ, इससे बाहर भी दीखता भी रहेगा और कमरे की

खिड़की से बाथरूम का दरवाजा भी दीखता रहेगा कि भाभी बाहर निकली तो हमें

पता चल जायेगा।

हम ये बातें फुसफुसा कर कर रहे थे !

मुझे जीजाजी का विचार पसंद आ गया, मैं जीजाजी के दिमाग की कायल हो गई और

उस कमरे में आकर खिड़की से बाथरूम का दरवाज़ा देखा वो बंद था, खिड़की पर

मच्छर जाली लगी थी इसलिए हमें तो बाहर का दिख रहा था बाहर से अन्दर कुछ

नहीं दीखता था।

मैं सीधे पलंग पर लेट गई, अपनी मैक्सी ऊँची कर दी और जीजाजी को कहा-

फटाफट अपना पानी निकाल लो ! और कुछ भी चूमा चाटी नहीं करनी है, वक़्त

बहुत कम है, किसी के आने पर आपका बिना निकले ही रह सकता है, फिर मुझे दोष

मत देना !

जीजाजी ने पैंट की चैन खोली अपने अकड़े हुए लण्ड को मुश्किल से बाहर

निकाला और मेरी ऊँची की हुई टांगों के बीच में बसी चूत के छेद में थूक

लगा कर पेल दिया !

मैंने कहा- कंडोम कहाँ है? मैं ऐसे नहीं चुदवाऊँगी !

वे बोले- यार तुमने हाथ फ़ेरने दिया नहीं, चाटने दिया नहीं, अब 2 मिनट तो

मेरे नंगे लण्ड को तुम्हारी नंगी चूत में जाकर चमड़ी से चमड़ी तो मिलने दे,

मेरी जेब में कंडोम है, अभी लगा लूँगा ! तुम्हारे चूत में ऐसे ही थोड़ी

देर घुसेगा तो यह ज्यादा गर्म हो जायेगा और मेरा भी पानी फटाफट निकल

जायेगा !

मैंने कहा- ठीक है !

अब वे जोर जोर से धक्के लगा रहे थे और उनके हर धक्के से कुछ पुराना पलंग

थोड़ा चूं चूं कर रहा था, मैं सोच रही थी कि कहीं बाहर यह आवाज़ नहीं चली

जाये। पर कोई विकल्प नहीं था।

दो मिनट बाद ही जीजाजी ने लण्ड बाहर निकल लिया और जेब से कंडोम का पैकेट

निकाल कंडोम निकलने लगे।

मैं एकदम पलंग से उठ कर बाहर गई, जीजाजी ने पूछा- क्या हुआ? कहाँ जा रही हो?

मैंने कहा- मैं थोड़ा ध्यान रख कर आ रही हूँ।

मैंने बाहर हाल में जाकर कुछ कुर्सिया खिसकाई ताकि भाभी को पता चले कि

मैं हाल में काम कर रही हूँ, साथ ही भाभी को आवाज़ देकर कहा- पानी ज्यादा

मत ख़राब करना, जल्दी से नहा लो !

वो बोली- अभी तो मैंने शुरू किया है, क्यों परेशान करती हो? अभी मुझे

नहाने में समय लगेगा !

यह सुनकर मुझे पता चल गया कि भाभी अभी नहीं बाहर आएगी और मैं फटाफट

जीजाजी के पास पहुँच गई। वो अपने लण्ड पर कंडोम चढ़ाये हाथ में लेकर

मुट्ठिया दे रहे थे। मुझे पता था ये अपना पानी जल्दी निकलने की कोशिश में

हैं, मैं यहाँ नहीं थी तब वे रुके नहीं थे और हाथ से काम चला रहे थे !

मैं फिर से फटाफट लेट गई और अपनी मैक्सी उठा कर अपनी टांगें ऊँची कर फिर

से चोदने की दावत दी !

जीजाजी तैयार ही थे, उन्होंने फटाफट अन्दर डाला और एक्सप्रेस ट्रेन की

तरह शुरू हो गए। उनके कूल्हे बिजली की गति से ऊपर-नीचे हो रहे थे और उनकी

तूफानी रफ़्तार से मेरी चूत पसीज गई थी, पानी छोड़ रही थी, मुझे स्वर्गिक

आनंद मिल रहा था और मैं पीछे तिरछी होकर खिड़की को देखना बंद कर जीजाजी

से चिपक गई और अपनी गाण्ड उचका-उचका कर चुदा रही थी। मेरी दबी-दबी

आहें-कराहें निकल रही थी।

पहले मेरा मज़े लेने की कोई इच्छा नहीं थी, मैं सोचती थी कि जीजाजी का

पानी निकाल कर इन्हें खुश करना है, पर मेरे भी आनन्द के सोते फ़ूट पड़े थे।

और जीजाजी ने भी झटका खाकर धीरे-धीरे होकर अपना लण्ड फटाफट बाहर निकाला,
 


कंडोम की गांठ लगा कर अपनी जेब में डाल लिया और बाहर हाल में चले गए !

उनके चेहरे से संतुष्टि झलक रही थी।

मैंने भी अपने पानी से गीली हुई चूत को वहाँ पड़े पुराने कपड़े से पौंछा,

फटाफट चड्डी पहन ली और मैक्सी को सही कर भाभी के बाथरूम के पास चली गई।

मुझे अचम्भा हुआ कि जीजू की चुदाई सिर्फ 6-7 मिनट चली थी, यानि मौके के

हिसाब से वे सही में अपना पानी निकाल लेते हैं ! हाँ गति उनकी बहुत तेज़

थी।

जीजू बाहर हाल में लेट कर अपनी सांसें सही कर रहे थे !

भाभी भी नहा कर बाहर आ गई, थोड़ी देर में बच्चे भी आ गए और अब मेरी ड्यूटी

पूरी हो गई थी इसलिए मुझे कोई चिन्ता नहीं थी !

थोड़ी देर बाद जीजाजी के साथ बाज़ार गई उनकी बाइक पर बैठ कर, मैंने जब तक

दूकान से सामान लिया तब तक आगे एक गन्दा नाला था, जिसमें जीजाजी जेब में

लाया हुआ कंडोम फेंक आये !

वापिस घर पहुँची तो मैंने जीजाजी को कहा- आप अपने गाँव कल ही जाना, सुबह

मेरी जल्दी की गाड़ी है, आप मुझे बाइक पर स्टेशन छोड़ देना ! आपके ससुरजी

भी शाम को आ जायेंगे, उनसे भी मिल लेना और जो बच्चो से वादा किया था,

इन्हें भी बाइक पर घुमा लाओ ! चलो हमें हमारे खेत ले जाओ !

वहाँ पापा की चाय लेकर जानी थी !

अब बाइक पर मैं, मेरी भाभी उसके दो बच्चे एक टंकी पर, दूसरा उसकी गोद में

! जीजाजी और भाभी के बीच में मैं ही बैठी थी, मुझे पता था इतने जने बाइक

पर बैठेंगे तो एक दूसरे से चिपक कर बैठना पड़ेगा और मैं नहीं चाहती थी कि

मेरे जीजाजी के पीठ में मेरी भाभी के स्तन चुभें !

वास्तव में वहाँ मुझे ईष्या हो रही थी।

इस प्रकार हम सब बाइक पर बैठ गए, रास्ते में काफी रेत थी, जीजाजी सावधानी

से चला रहे थे पर एक मोड़ पर हमारी बाइक रेत के कारण टेढ़ी हो गई पर

जीजाजी ने गिरने नहीं दिया।

खैर हम खेत पर पहुँच गए, पापा बहुत खुश हुए जीजाजी को देख कर !

फिर हम वापिस आ गए, तब मेरी मम्मी भी ननिहाअल से आ गई, वो बड़ी शक्की है,

उन्होंने पूछा- तेरे जीजाजी कब आये? ये कभी आते तो नहीं हैं, आज कैसे आ

गए? और तेरी दीदी को साथ क्यों नहीं लाये?

ऐसी बातें वो मुझसे पूछ रही थी। मैंने उसका शक दूर किया पर अब मुझे पता

चल गया था कि अब ऐसा कोई काम नहीं करना है जिससे मम्मी को और शक हो जाये।

ये बातें मैंने जीजाजी को भी इशारों से बता दी थी !

जीजाजी ने पूछा- यार, मैं रात को रुकूँगा तो मेरा काम हो सकता है क्या?

पर मैंने उनको सख्ती से चेतावनी दे दी कि आपका काम मैंने कर दिया है, अब

रात को आपने कुछ करने की कोशिश की तो अपना रिश्ता आज से टूट जायेगा !

इतना सुनते ही जीजाजी चुप हो गए और बोले- मैं ऐसा कुछ नहीं करूँगा, मैं

संतुष्ट हूँ, बस अपने रिश्ते तोड़ने वाली बात मत करो यार ! मेरे दिल में

दर्द होता है !

मुझे जल्दी उठना था, रात को सामान भी बांधना था। वास्तव में जीजाजी ने

अपना वादा निभाया, मुझे नहीं छेड़ा, चुपचाप हाल में सोते रहे।

मुझे पता था कि मेरी मम्मी कमरे में सो रही हैं पर हर आहट पर उनके कान

लगे हुए हैं, अब उनको क्या पता कि जो होना था वो दोपहर में ही हो गया !

औरत का मन होता है तो वो कहीं भी और कभी भी चुदवा लेती है, उसके लिए कोई

पहरा काम नहीं आता है !

सुबह चार बजे जयपुर के लिए गाड़ी थी, मैंने जीजाजी को और अपने भाई को 3.30

बजे उठा दिया था, वो दोनों और मैं साथ-साथ स्टेशन गए। मुझे पता था कि

लेडीज डिब्बा गार्ड के डिब्बे के पास लगता है इसलिए हम काफी पीछे गए,

आगे-आगे भाई चल रहा था और उसके कंधे पर मेरा बैग था। स्टेशन के इस तरफ 4

बजे से पहले इतने यात्री भी नहीं थे इसलिए जीजाजी चलते चलते कई बार मेरे

चूतड़ों पर हाथ फेर देते थे तो कभी स्तन दबा देते थे। कुछ ठण्ड भी लग रही

थी और मैं उनके चिपक कर भी चल रही थी। मेरा भाई जो आगे चल रहा था, उसे

हमारी इस लीला का कुछ पता नहीं था !

मैं भी रात में जीजाजी के सेक्स के लिए कोशिश नहीं करने पर उनसे खुश थी,

मुझे पता था कि उनके लिए कितना मुश्किल हुआ होगा पने पर काबू करना इसलिए

मैंने चलते चलते उनका गाल चूम कर उन्हें इसका इनाम दे दिया !

गाड़ी आई और मैं बैठ गई, जीजाजी और मेरा भाई दोनों बाहर रहे। मेरी भी

ट्रेन चल रही थी, मैं उन्हें देख रही थी, साथ जाते जाते दोनों ही लम्बे

थे, दोनों लम्बू वापिस घर जा रहे थे जब तक मैं देखती रही मैं और वे दोनों

हाथ हिलाते रहे। फिर मैं आकर बर्थ पर बैठ गई और अपनी ड्यूटी संभाल ली !

जीजाजी का फोन आता, कहते- अब जब भी तुम्हें गाँव जाना हो, मुझे फोन करना,

मैं जयपुर आ जाऊँगा, एक रात वहीं होटल में ठहरेंगे, फिर साथ ही गाँव आ

जायेंगे !

मैंने कहा- पहले कुछ नहीं कह सकती, बाद में सोचेंगे !

मेरी माहवारी की तारीख जीजाजी को पता होती, मेरी माहवारी हमेशा महीने के

4 दिन पहले आती उस हिसाब से जीजाजी हर माहवारी की तारीख का अंदाज़ अगले

महीने 4 दिन पहले से लगा लेते !

अब आप सोचेंगे माहवारी का कहानी में क्या मतलब? पर मतलब है इसलिए यह बात

बता रही हूँ !

मैंने उन्हें 3-4 दिन पहले गाँव जाने की तारीख बता दी तो उन्होंने कहा-

तेरी माहवारी आने की तारीख है उस दिन, इसलिए तू मेडिकल स्टोर से

संडे-मंडे की गोलियाँ ले लेना, दो दिन पहले से रोज़ की एक ! ये गोलियाँ

माहवारी का दिन आगे खिसकाने के काम आती हैं !

पर मुझे गोलियाँ लेना पसंद नहीं था इसलिए मैं उन्हें झूठ ही कह दिया कि हाँ ले ली !

वो फोन पर बात करते, उनके लिए मेरे फिक्स डायलोग थे ! जैसे वो एक बात

पूछते थे- अपना काम कब व कैसे होगा?

मेरा डायलोग था- देख के मौका मारो चौका !

वो पूछते- कंडोम कितने लाऊँ?

मेरा डायलोग होता था- एज यू लाइक !

हर फोन पर मुझसे चुम्बन जरूर मांगते थे और कहते थे- ये चुम्बन जब तुम

मुझसे मिलेगी तो वापिस लौटा दूँगा !

जब तक चुम्बन नहीं देती, मुझे फोन नहीं रखने देते, अगर रख भी देती तो

चुम्बन के लिए वापिस लगा देते !

जिस दिन मैं रवाना हुई, जिसका डर था, वही हो गया, मेरी माहवारी शुरू हो गई !

मैंने कपड़ा लगाया और रवाना हुई। अब मैंने जीजाजी फोन किया- कहाँ हो?

वो बोले- रास्ते में हूँ, आ रहा हूँ मेरी जान !

मैंने कुछ अटकते अटकते कहा- आपका काम तो नहीं होगा !

उन्होंने एकदम से पूछा- क्यों?

मैंने कहा- मेरी माहवारी शुरू हो गई है !
 


उन्होंने फिर पूछा- संडे मंडे गोली नहीं ली क्या?

मैंने झूठ ही कहा- आज सुबह ही ली है पर नहीं रुका !

जीजाजी ने कहा- अरे यार। दो दिन पहले से लेनी थी। खैर कोई बात नहीं। मुझे

तेरे साथ रहना है ! रात भर मेरे सीने से चिपक कर सो जाना, मेरा दिल हल्का

हो जायेगा और मुझे तुमसे बातें करनी हैं, साथ रहना है, सेक्स कोई जरूरी

नहीं है।

वे मुझे होटल में ले गए और फ़िर वही कहा कि सेक्स जरूरी नहीं है।

मैं उनकी बातें सुनकर उनके प्रति प्यार में भर गई, फिर मैंने कहा- वैसे

मेरे इतना ज्यादा खून नहीं आता है, फिर आज तो पहला दिन है !

तो बोले- फिर तुम चिंता मत करो, वैसे भी मैं कंडोम साथ लाया हूँ और उनको

प्रयोग करता ही हूँ, बस आइसक्रीम खाने को नहीं मिलेगी !

मैंने सोचा- चलो, ज्यादा नाराज़ तो नहीं हुए ! मैं सोच रही थी कि मेरी

गलती से उनका आनन्द चला गया पर वो मुझ पर नाराज़ नहीं हुए !

मुझे किसी ने कहा था कि औरत के जब माहवारी आती है तो कुछ बदबू सी आती है,

अब मुझे इस बदबू का कोई पता ही नहीं चलना था क्योंकि मेरे नाक में कोई

बीमारी है, मुझे ना तो कोई खुशबू आती है और ना ही बदबू, इस कारण मैं कई

बार सब्जी बनाते बनाते जला देती हूँ !

इसलिए जीजाजी कभी अपने बिस्तर पर खुशबू छिड़क कर या फ़ूल बिछा कर चुदाई

करते हैं तो मैं कहती हूँ मुझे उस खुशबू का कोई पता ही नहीं चलता तो

क्यों पैसे लगाते हो !

फिर उन्होंने कहा- तुम्हारी नाक का ऑप्रेशन करवाना पड़ेगा !

मैंने कहा- मुझे नहीं करवाना, मुझे तो चीरे और टांके के नाम से ही डर

लगता है और आपको फायदा है, आप भले कैसे ही रहो, मुझे तो बदबू आएगी नहीं !

और मैं हंस देती थी !

जीजाजी ने कहा- तब तो अच्छा है, मेरे सेंट और स्प्रे के पैसे बच गए !

पर मुझे लग रहा था कि शायद जीजाजी को मेरी बदबू ना आ जाये ! इसलिए मैंने

उन्हें उलाहना दिया- आज मैं आपके काम की नहीं हूँ, इसलिए आप ना तो नजदीक

आ रहे हैं और ना ही मुझे गले लगा रहे हैं !

इतरा कर कही हुई मेरी यह बात सुनकर जीजाजी फटाफट मेरे पास आकर लेट गए और

मुझे गले से लगा लिया, बोले- ऐसी बात नहीं है जान ! तूने मुझे पहले ही

बता दिया था ना फिर भी मैंने तुझे उस वक़्त भी यही कहा था ना कि मुझे

तुम्हारे से चिपक कर सोना है, उससे ही मुझे बहुत ख़ुशी मिल जाएगी !

ऐसा सुनकर मैं भी खुश हो गई और उनके चिपक गई !

अब वो मुझे बाँहों में पकड़ कर चूम रहे थे, उनके हाथ मेरे कंधों और स्तनों

पर फिर रहे थे, वो मेरी गोलाइयों को मसल रहे थे, उनके होंठ मेरे चेहरे,

मेरे गाल, चिबुक, मेरे कानों की लटकन और ललाट पर चुम्बन कर रहे थे !

मैं भी कभी कभी उन्हें चूम लेती थी और फिर वो मेरे होंठ चूसने लगे, बीच

बीच में वो मेरे साँस लेने के लिए छोड़ देते !

मुझे आज तक यह तरीका नहीं आया कि होंट चूसते चुसाते साँस कैसे ली जाती

है, जीजाजी को भी पता था इसलिए वो होंट छोड़कर मुझे साँस लेने का मौका दे

रहे थे !

मैं गर्म हो रही थी और गोली ना लेने के लिए पछता भी रही थी, पर अब क्या हो सकता था।

अब वे मसलते-मसलते पेट तक आ गए थे और जांघों पर हाथ फेर रहे थे इस बीच

उन्होंने अपनी लुंगी हटा कर चड्डी उतार दी थी, अपना फनफनाता और बुरी तरह

से अकड़ा लण्ड मेरे हाथ में पकड़ा दिया था जिसे मैं कभी दबा रही थी, मसल

रही थी और कभी उसे ऊपर नीचे कर रही थी।

वो आड़े होकर मेरे हाथ में ही झटके लगा रहे थे। मैंने हथेली गोल करके ऐसा

उनका लण्ड पकड़ा हुआ था जैसे वो चूत चोद रहे हों। अब उनके लण्ड का स्पर्श

मेरी कमर और पेट पर हो रहा था ! मेरी सांसें तेज हो गई थी, चूत में जैसे

चींटियाँ काट रही थी और ऐसा लग रहा था कि चूत में कुछ अटका हुआ है जिसे

अन्दर कुछ डाल कर निकलना पड़ेगा !

मेरे चेहरे पर बदलते भाव जीजाजी ने महसूस कर लिए और मेरी चूत चड्डी के

ऊपर से ही दबाने लगे। वो अन्दर अंगुली नहीं करके पूरी चूत को अंगूठे और

अंगुली के बीच में पकड़ कर दबा रहे थे और मेरी सिसकारियाँ निकल रही थी।

आखिर मेरे सब्र का बांध टूट गया और मैंने बेशरम हो कर पूछ लिया- आप

चोदोगे मुझे? इस हालत में भी चोद दोगे? आपको अजीब और गन्दा तो नहीं

लगेगा?

वे मेरी आँखों के लाल डोरे वासना से थरथराते होंट देख रहे थे, बोले- मुझे

कोई फर्क नहीं पड़ता, मैं कई बार तेरी दीदी को माहवारी में चोद चुका हूँ

और वैसे भी मुझे कंडोम लगा कर चोदना है, जो भी लगेगा, कंडोम के लगेगा हम

सावधानी से चुदाई करेंगे !

फिर मैंने सावधानी से अपनी चड्डी उतारी, मेरी टांगें ऊँची हो गई थी, फिर

मैंने सावधानी से चूत पर लगा कपड़ा हटाया, उस पर खून नहीं लगा हुआ था,

वैसे भी मेरे खून नाम मात्र का आता है, मेरी चूत के अन्दर कुछ लाल लाल सा

लग रहा था।

मैं जीजाजी के चेहरे की तरफ देख रही थी पर मुझे वहाँ घृणा नज़र नहीं आई

बल्कि उनके चेहरे पर मेरी चूत देख कर चोदने का जोश दिख रहा था।

मैंने राहत की साँस ली, चड्डी और कपड़े को पलंग के नीचे रख कर अपनी टांगें

उठा कर उनका इंतजार करने लगी।

उन्होंने फटाफट दराज़ से कंडोम निकाला, वे कमरे में आते ही अपनी काम की

चीजें कंडोम आदि दराज़ में रख देते हैं, और उसे अपने लण्ड पर चढ़ा लिया।

वो अपने घुटनों के बल बैठे थे, फिर कंडोम के ऊपर ही अपने सुपारे पर थूक

लगाया और उसे पकड़ कर मेरी चूत के छेद पर अटका दिया। उन्हें पता था कि गलत

जगह र्ख कर धक्का लगने पर मेरी चूत और गाण्ड के बीच की चमड़ी कट सी जाती

है और मैं दर्द से दोहरी हो जाती हूँ और फिर वो घाव कई दिन बोरोलीन लगाने

से ठीक होता है। इसलिए वे पहले अपने हाथ से अपने लण्ड को सही जगह टिकाते

हैं फिर अन्दर धकेलते हैं, आधा अन्दर चले जाने के बाद फिर और से धक्का

मारते हैं। उन्होंने वही किया और उनका लण्ड मेरे इंतजार करती और खून से

गीली चूत में सररर से जैसे उसे चीरता सा चला गया।

थोड़ी देर तक जब तक उनका लण्ड मेरी कई दिनों की बिना चुदी चूत जो महीने भर

में बिना चुदाई के कुंवारी जैसी हो जाती है, को रवां करता है, 10-15

धक्कों के बाद मेरी चूत इस नए मेहमान को पूरा कबूल करती है फिर उसके

स्वागत के लिए पानी छोड़ती है, तब यह आराम से आ जा सकता है, फिर उनके

धक्के तूफानी हो जाते हैं। अब उन्हें मेरे घर की तरह जल्दी तो छूटना नहीं

था पर स्थिति खास अच्छी भी नहीं थी।

मुझे जब मज़ा आता तो मैं अपनी योनि का संकुचन करती तो उनकी गति धीमी हो

जाती और बोलते- तेरे पास यह गोड गिफ्ट है, ऐसा कोई नहीं कर सकती, तू तो

अपनी चूत को भींच कर मुझे किसी कुंवारी लड़की को चोदने जैसा मज़ा दे देती

है।

और फिर मैं ज्यादा भींच लेती तो उनकी चुदाई रुक जाती और बोलते- साली

तोड़ेगी क्या? यार कुछ तो ढीला छोड़ जिससे मैं अन्दर-बाहर कर सकूँ !

और मैं मुस्कुरा कर थोड़ा ढीला छोड़ती और फिर कस लेती ! फिर ढीला छोडती !

इससे उनका और मेरा आनन्द बढ़ जाता और वे दुगने जोश से धक्के मारने लगते !

मेरा भी पानी कई बार छुट गया था जिसका सबूत मैंने उनका गला काट कर दे

दिया था, फिर 15 मिनट के बाद वे भी झटके खाते-खाते रुक गए और सावधानी से

अपना लण्ड बाहर निकाला।

कंडोम लाल हो रहा था पर उन्होंने उसे हटाकर कंडोम के मुँह पर गांठ लगा दी

और उसमें जीजाजी के अजन्मे करोड़ों बच्चो को भी बंद कर दराज़ में दाल दिया

और नंगे ही बाथरूम जाकर पेशाब कर और लण्ड को धोकर आ गए।

फिर मैं गई और गीज़र चला कर गर्म पानी से 10-15 मिनट तक चूत धोई। गर्म

पानी मेरी चुदी चूत को भला लग रहा था, मैं आधे घंटे तक बाथरूम में ही रही

और गर्म पानी से अपनी चूत सेंकती रही जो मुझे बड़ी भली लग रही थी !

क्योंकि माहवारी में मेरा चुदाने का मौका कई साल बाद आया था इसलिए कुछ

ज्यादा ही दर्द था पर जीजाजी ने सही कहा था कि आ तेरी नाली साफ कर दूँ

ताकि कचरा जो अटका हुआ है तेजी से बहे !

वास्तव मेरी योनि से रक्तस्राव की रफ़्तार तेज हो गई थी ! मेरे इतनी देर

बाथरूम में रहने के दौरान जीजाजी 2-3 बार बाथरूम के पास आकर देख गए थे कि

अब तक मैं बाथरूम में क्या कर रही हूँ !

होटल में हम दोनों ही बाथरूम का दरवाज़ा बंद नहीं करते है इसलिए वे देखने

आये तो कभी तो मैं उन्हें कमोड पर बैठी मिली और कभी चूत पर गर्म पानी के

छपके लगाती !

और वो मुस्कुरा कर वापिस चले जाते ! जबाब में मैं भी हंस कर कहती- देखो

आपने पीट पीट कर इसका क्या हाल कर दिया है, इसको गर्म पानी से सेक रही

हूँ।

थोड़ी देर बाद फिर आये और बोले- मुझे भी पेशाब लगी है !

मैंने कहा- कर लो ! मेरे सामने मूत निकलता नहीं है? सीटी की आवाज़

निकालूँ क्या जिससे आपको सू सू लग जाये जैसे बच्चे को लग जाता है !

वे हंस पड़े अपना लण्ड निकाल कर कमोड के अन्दर धार मारनी चाही, मैं लगातार

उन्हें देख रही थी और वास्तव में काफी देर तक उनको पेशाब नहीं लगी। फिर

उन्होंने अपनी आँखें बंद रखी तब उनकी धार बड़े जोर से बह निकली !

फिर हम वहाँ से पलंग पर आ गए और पास में बैठ कर टीवी देखने लगे !

उनके हाथ मेरे यहाँ-वहाँ घूम रहे थे और कई बार उन्होंने मेरा मुँह चूमा

और कहा- इस हालत में भी अपने दर्द की परवाह ना करके जो तुमने चुदा कर

मुझे मजा दिया है इसके लिए धन्यवाद !

मैं मुस्कुरा कर रह गई !
 
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