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अधूरी हसरतें

जाने से पहले इतना जरूर सुन लेना तुम चाहे जिस को भी बुला कर लाओ चाहो तो पूरा समाज यहां इकट्ठा कर लो लेकिन मुझे मैं समाज केसामने तुम्हारे घर वाले के सामने बस इतना ही कहूंगी

औरत अपनी मर्यादा से बाहर कब जाती है वह तभी अपनी मर्यादा से बाहर जाती है जब उनकी मर्जी की रखवाली उसका मर्द करने लायक ना हो,,, मैं दुनिया से चीख चीख कर बता दूंगी की मेरा पति नामर्द है वह मुझे चोद सकने के लिए सक्षम नहीं है,,।,,,, बस मुझे इतना ही कहना है बाकी सब काम अपने आप ही हो जाएगा,,, दुनिया से समाज से जो तुम अपनी और नामर्दगी को अपनी कमजोरी को छुपाते हुए आए हो,,, एक झटके में ही सबको पता चल जाएगा कि तुम्हारे अंदर क्या है तब तुम कहीं मुंह दिखाने के लायक नहीं रह जाओगे दुनिया तुम पर थुकेगी,, इसलिए थुकेगी कि तुम सब कुछ जानते हुए भी मेरी जिंदगी खराब कीए हो,,,

( इतना सुनना था कि वह अपने कदम दरवाजे से बाहर ना निकल सका उसके पांव वही जम गए,, सुगंधा जो चला कि उसे धमकी दे रही थी उसकी हिम्मत नहीं हुई कि वह बाहर जाकर सब को बुला सकें और वह वापस दरवाजे की कुंडी लगाकर कमरे के कोने में खड़ा हो गया और उसकी हालत देखकर सुगंधा बोली,,,।

यही मैं चाहती थी कि तू मेरे सामने इसी तरह से सर झुका कर और शर्मिंदा होकर खड़ा रहे मैं तेरी आंखों के सामने ही किसी गैर मर्द से नंगी होकर चुदवाऊ और तू अपनी बीवी को किसी और से चूदतेे हुए बस देखता ही रहे ना तो तुझ में रोकने की ताकत हो और ना ही तो कुछ कर सके यही तेरी सजा है।,,,

( इतना कहने के साथ ही हो अपने हाथ के इशारे से शुभम को अपनी तरफ बुलाते हुए बोली,,।)

इधर आ शुभम ले अपनी सुगंधा की कुंवारी चूचियों को अपने मुंह में भर कर के पीें ईन्हे दबा इन के साथ खेल यह सब तेरे लिए ही है,,,,,( सुगंधा उंगली के इशारे से शुभम को अपनी तरफ बुला रही थी और अपने पति की तरफ कोटिंग मुस्कान लिए हैं उसे देखकर और भी जला भुना रही थी,,, शुभम के लिए तो यह सब सोने पर सुहागा था आम के आम और गुठलियों के दाम के जैसी हालत उसकी आंखों के सामने थी,,, उसके दसों की दसों उंगलियां घी मै थी। शुभम अपने मामा की तरफ देखते हुए आगे बढ़ा और सुगंधा की दोनों चूचियों को दोनों हाथों से दबाते हुए बोला।,,,

ओहहहहहह मेरी रानी सुगंधा तुम्हें पाने के लिए मैंने ना जाने कैसे-कैसे पापड़ बेले हैं आज जी भर कर तुम्हारी जवानी का रस पीऊंगा।

( इतना कहने के साथ ही वहां सुगंधा की चूचियों पर टूट पड़ा,, कभी ईस चूची को मुंह में लेकर पिता तो कभी दूसरी,,, कुछ पल में ही शुभम सुगंधा की सूचियों को दबाकर खेलते हुए उसे टमाटर की तरह लाल कर दिया,,, सुगंधाको इस समय बहुत मजा आ रहा था उसके मुंह से गर्म सिसकारियां निकल रही थी जिसकी आवाज सुनकर उसका पति जल भुन रहा था लेकिन कर कुछ भी नहीं पा रहा था।,,, देखते ही देखते शुभम सुगंधा के तन पर से वस्त्रों को हटाने लगा सुगंधा भी उसका साथ देते हुए,, कपड़े उतारने में उसकी मदद कर रही थी देखते ही देखते अपने पति के सामने सुगंधा शुभम के हाथों पूरी तरह से नंगी हो गई बेशर्मी दिखाते हुए सुगंधा भी शुभम के तन पर से अपने हाथों से कपड़े उतार कर उसे भी एकदम नंगा कर दि,,, कमरे में दोनों पूरी तरह से नंगे हो गए,,,, सुगंधा बिस्तर पर पीठ के बल लेटते हुए बोली,,,

शुभम मेरे राजा आज मुझसे जी भर कर प्यार करो,, मुझे ऐसा प्यार करो कि मैं जिंदगी भर याद रखूं,,,,

ऐसा ही होगा मेरी रानी आज मैं तुम्हारे पति के सामने तुम्हारी ऐसी चुदाई करूंगा कि वह जिंदगी भर पछताएगा कि वह तुमसे शादी क्यों किया,,,।

इतना कहने के साथ ही सुभम सुगंधा की रसीली बुर पर टूट पड़ा और उसे जीभ से चाटना शुरू कर दिया,,,,

पूरे कमरे में एक बार फिर से गर्म सिसकारियां गुंजने लगी,,,, सुगंधा का पति है सब देख कर मचल रहा था उसकी इच्छा हो रही थी कि वह भी अपनी पत्नी से इसी तरह से प्यार करें लेकिन मन में चाहने से क्या होता है उसके लिए तन साथ देना चाहिए जोकी उसके बस में बिल्कुल भी नहीं था,,,। जीस अंग की कामना और जिस अंग की चाह हर औरत रखती है वहीं अंग उसका शिथिल था।,,, वह बड़े गौर से शुभम को उसकी आंखों के सामने ही उसकी बीवी की बुर चाटते हुए देख रहा था और अपने आपको इस बात के लिए कोस भी रहा था कि,,, वह इस लायक क्यों नहीं है कि अपनी पत्नी को इस तरह का सुख दे सके। वह आंख फाडे,, एक औरत और मर्द को प्यार करते हुए देख रहा था और यह नजारा भी उसकी जिंदगी में पहली बार ही था शुभम पागलों की तरह उसकी रस से भरी बुर को चाटे जा रहा था।,,,

सससहहहहहहह,,,, शुभम यह क्या कर रहे हो मुझे ना जाने क्या हो रहा है मैं पागल हो जाऊंगी,,,, व,सससहहहहहहह आहहहहहहहह शुभम मेरी बुर में आग लगी हुई है प्लीज इसमें अपना लंड डालकर मुझे चोदो मुझसे रहा नहीं जा रहा है ।

इतना सुनते ही शुभम उसकी टांगों को खोल कर अपने लिए जगह बना लिया और अपने लंड को पकड़कर उसकी बुर के मुहाने पर रखकर कचकचाकर धक्का मारा,,,,बुर पहले से ही काफी गिली थी इसलिए,,,, शुभम का लंड सब कुछ चीरता हुआ बुर की गहराई में घुस गया।,,,, सुगंधा के मुंह से चीख निकल गई जिसे शुभम उसके होठों पर वोट रखकर दबाने की कोशिश करने लगा और हल्के हल्के अपनी कमर को ऊपर नीचे करते हुए उसको चोदना शुरू कर दिया यह सब सुगंधा का पति फटी आंखों से देख रहा था। कुछ ही देर में सुगंधा की चीखने की आवाज गरम सिसकारियां में बदल गई,,, उसे मजा आने लगा और वह अपने नितंबों को ऊपर की तरफ उछाल उछाल कर सुभम के लंड को अपनीबुर में लेने लगी,,,,, बहुत जोर जोर से अपने नितंबों को उत्तर उछाल रही थी मानो कि अपने पति को चिड़ा रही हो,,,। तकरीबन 35 मिनट तक सुगंधा शुभम से चुदवाती हुई और उसका पति बेबस होकर यह सब देखता रहा आखिरकार दोनों तीव्र गति से अपनी कमर को हिलाते हुए पानी छोड़ दिए ।,,,

शुभम जल्दी-जल्दी अपने कपड़े पहन लिया और वहां दरवाजे तक पहुंचा ही था कि तभी सुगंधा उसे रात को भी आने का आमंत्रण दे दी।,,,, जिसे शुभम शहर मुस्कुरा कर स्वीकार कर लिया और उसका पति जो कि कौन है में खड़े होकर यह सब देख रहा था ना चाहते हुए भी मौन स्वीकृति दे ही दिया था।

रात को भी ज्यादा सुगंधा के कमरे में पहुंचा तो कमरे का दरवाजा खुला ही था अंदर पहुंचकर देखा कि उसका पति अलग बिस्तर लगाकर जमीन पर लेटा हुआ था और सुगंधा बिस्तर पर टांगे फैलाकर उस का बेसब्री से इंतजार कर रही थी शुभम दरवाजा बंद करके कड़ी लगाया और बिस्तर पर लेटते हुए सुगंधा को अपनी बाहों में भर लिया,,, और फिर एक बार फिर से अपने ही पति के सामने सुगंधा बेशर्म होकर अपनी भांजे से चुदाई का मस्त खेल रात भर खेलती रहीं,,,, सुबह जब शुभम सुगंधा के कमरे से जाने को हुआ तो सुगंधा जो कि अभी भी पूरी तरह से नंगी थी अपने पति के सामने ही शुभम के गले लग कर रोने लगी,,,, शुभम उसके गोलाकार नंगी नितंबों कौ सहलाते हुए बोला,,,।

सुगंधा मैं समझ सकता हूं कि तुम पर क्या गुजर रही होगी तो तुमसे बस यही कहना चाहता हूं कि तुम समझदार हो पढ़ी लिखी हो और खूबसूरत भी हो,, और सच कहूं ये तुम्हारे लायक ( सुगंधा के पति की तरफ इशारा करते हुए) बिल्कुल भी नहीं है। तुम समझदार हो अपनी जिंदगी का फैसला खुद भी कर सकती हो,, अपनी जिंदगी को अच्छे से गुजारना है या फिर ऐसे ही तड़प तड़प कर यह तुम अच्छी तरह से फैसला कर सकती हो,,,

इतना कहकर शुभम कमरे से बाहर निकल गया,,,

शुभम और निर्मला दोनों शहर जा रहे हैं थे अपने अपने सामान को दोनों ने गाड़ी में रख दिया था। घर के सभी लोग ऊदास थे,,, घर की सभी औरतों की आंखें नम थी और साथ ही उनकी बुर भी नम थी । आखिरकार उनके प्यासे कुंए के लिए शुभम सावन की बौछार बनकर उनकी जिंदगी में आया था। शुभम को भी काफी दुख हो रहा था क्योंकि गांव में आकर उसकी जिंदगी बदल गई थी यहां पर उसे एक साथ ढेर सारी औरतों का प्यार मिला था,, इसलिए जाते समय उसकी आंखों में भी पानी आ गया था। शुभम और निर्मला गाड़ी में बैठकर शहर की तरफ निकल गए,, सुगंधा भी

शुभम को बाय-बाय करते हुए अपने पति को छोड़ने का फैसला कर ली थी।

तकरीबन रात को 8:00 बजे निर्मला और शुभम अपने घर पहुंच गए थे दोनों काफी थके नजर आ रहे थे।,,, घर की चाबी जो कि एक निर्मला के पास ही थी उसे शुभम को थमाते हुए वह बोली,,।

तुम जाकर दरवाजा खोलो तब तक मैं गाड़ी गैराज में खड़ी करके आती हुं।,,

( शुभम पूरी तरह से थका हुआ था इसलिए बेमन से निर्मला के हाथों से चाबी लेकर गाड़ी से नीचे उतर गया,,, और गेट खोल कर आगे बढ़ने लगा शुभम दिलबर गाड़ी के सफर की वजह से काफी थक चुका था इसलिए उसके कदम भी लड़खड़ा रहे थे।,,,, निर्मला ने गांव से निकलते समय अपने पति अशोक को फोन नहीं की थी कि वह शहर वापस लौट रही है,,,। इसलिए अशोक इस बात से वाकिफ नहीं था कि निर्मला आज ही शहर लौटने वाली थी।

शुभम आंखों को मिलते हैं दरवाजे में चाबी लगा कर घुमाने लगा और दरवाजे का लाॉक खुल गया,,, वह दरवाजे को हल्के से खोलते हुए घर में प्रवेश किया,,,,

हल्की हल्की नींद लगने की वजह से शुभम अभी भी आंखों को मसल रहा था,,, इसी दौरान उसके कानों में चप्प चप्प की आवाज सुनाई दे रही थी और यह आवाज को सुनकर शुभम पूरी तरह से चौक गया,,,,, वजह से ही अपनी आंख खोलकर सामने देखा तो सामने का नजारा देख कर उसके होश उड़ गए,,, सामने डाइनिंग टेबल पर एक लड़की जोंकि भरे हुए देह की थी वह झुकी हुई थी और उसका लॉन्ग स्कर्ट कमर तक उठा हुआ था,,,, और उसे पीछे से उसके पापा जोर जोर से अपनी कमर हिलाते हुए उसको चोद रहे थे,, यह देखकर शुभम तो एकदम से हैरान रह गया वह आश्चर्य के साथ बोला,,,,

पापा,,,,, यह सब क्या हो रहा है,,,।

( इतना सुनते ही जैसे अशोक और मधु नींद से जगे हो इस तरह से सक पका गए,,, दोनों संभोग सुख में इतनी ज्यादा खो गए थे कि दरवाजा खोलने का आवाज तक उनके कानों में नहीं पड़ा,,,, अशोक तो अपने सामने अपने बेटे को खड़ा देखकर एकदम से चौक गया और घबराते हुए बोला,,,,

सससससस,,,,, सुभम,,, तुम,,,, तुम कब आए बेटा,,,,,

( इतना कहते हुए वह अपने पजामे को ऊपर करने लगा,,, और मधु अपनी टी-शर्ट को नीचे सरका कर अपने दोनों गोलाइयों को छुपा ले गई,, और हड़बड़ा कर सीढ़ी पर चढ़ते हुए वह टांगों में फंसी अपनी पेंटी को पहनते हुए सीढ़ियां चढ़ने लगी,,,, नजारा बेहद कामुक था जिसे देखकर शुभम का भी मन डोल गया था मधु की गोल गोल गोरी गोरी गदराई गांड जब तक मधु अपने पेंटी के अंदर छुपाती तब तक शुभम ऊसे नजर भर कर देख चुका था।,,, वाला बताते हुए मेहमानों के लिए बने कमरे के अंदर चली गई थी,,,, शुभम हक्का-बक्का का वहीं खड़ा था उसे इस नजारे की उम्मीद बिल्कुल भी नहीं थी अभी भी उसकी नजर मेहमान के लिए बने कमरे की तरफ ही थी ।,,,, शुभम को इस तरह से उस कमरे की तरफ देखता हुआ पाकर अशोक बोला,,,।

यैं तेरी बुआ है,,,मधु,,,,, ( नज़रे झुका कर बोला)

बुआ,,,,,,, मतलब कि आप की छोटी बहन,,,,,,

हां,,,,,, ( अशोक फिर से शर्मिंदगी से झुकी नज़रों को ऊपर उठाए बिना ही बोला,,,।)

पापा मतलब आप अपनी छोटी बहन को घर बुलाकर उसको चोद रहे थे इसका मतलब है कि जब तक हम लोग गांव में थे तब से ये तुम्हारी बहन तुम्हारे साथ ही थी,,, और आप रोज उसको इसी तरह से चोदते हैं और वहां के बिना संकोच के आप से चुदवा लेती है ।

देख शुभम इस बारे में तु अपनी मम्मी को बिल्कुल भी मत बताना,,, ( अशोक अपने बेटी के सवाल का जवाब दिए बिना ही बोला,,,।)

बिल्कुल भी नहीं बताऊंगा,,,,( शुभम मुस्कुराते हुए बोला।,,) लेकिन इसमें मेरा क्या फायदा होगा,,,।

फायदा?( अशोक आश्चार्य के साथ बोला वह काफी घबराया हुआ था।)

फायदा मतलब की मै आपकी इन सभी गंदी हरकतों को छुपाता फरु मम्मी को ना बताऊं तो मुझे भी तो कुछ मिलना चाहिए ना,,,,।

तो मांग बेटा तुझे क्या चाहीए मैं सब कुछ देने को तैयार हूं,,, जो तु मांगेगा सब कुछ मिलेगा,,,,( अशोक चेहरे पर प्रसन्नता के भाव लाता हुआ बोला क्योंकि शुभम की बात से उसे लगने लगा था कि वह यह राज छुपाने के बदले में उससे जेब खर्च या और कुछ मांगेगा। लेकिन सुभम बहुत चालाक था वह अपने पापा से बोला,,,।)

मैं अभी कुछ नहीं मांगूंगा बस इतना याद रखना कि मैं आपकी यह सब करतुतो को मम्मी से नहीं बताऊंगा तुम्हारी ऑफिस की सेक्रेटरी और मेरी बुआ मतलब कि तुम्हारी खुद की सगी बहन के साथ जो आप चुदाई का खेल खेल रहे हैं यह राज राज ही रहेगा लेकिन याद रखना उसके बदले में 1 दिन जरूर मैं आपसे कुछ मांगुगा,, तब आप उस समय बिलकुल भी इनकार करने की कोशिश मत करना वरना यह सब काली करतुते मैं मम्मी से बता दूंगा,,,,

 
तू बिल्कुल भी चिंता मत कर जैसे तू मर्द की जबान लगता है जैसे मेरी मर्द की जुबान रखता हूं मौका नहीं पर मैं अपने वादे की भरपाई जरूर करूंगा (अशोक खुश होता हुआ बोला,,, इसी दौरान निर्मला भी कमरे में प्रवेश की और उसे देखकर अशोक बोला,,।)

क्या निर्मला एक फोन तो कर दी होती कि मैं आने वाली हूं,,,।

क्यों मेरे आने से आपको बुरा लगा क्या? ( निर्मला मुंह बनाते हुए बोली)

अरे यह बात नहीं है अगर फोन कर दी होती तो मैं मधु से खाना बनवा दिया होता,,,

( इतना सुनते ही निर्मला के पैर वही जम गए,,, लगभग चौकते हुए बोल़ी,,,।)

मधु,,,,,,,, मधु यहां आई है,,,, ।

निर्मला इस समय बहुत दुखी है उसके पति ने उसको बहुत दुख दिया इसलिए वह सब कुछ छोड़ कर मेरे भरोसे इधर आई है।,,

( अशोक बड़े ही दुखी स्वर में बोल रहा था और सुबह मन ही मन उसकी बात सुनकर बोल रहा था कि इसीलिए वह उसका पूरा फायदा उठाते हुए उसको चोद रहा था,,,।)

बस कुछ दिनों की बात है निर्मला मैं उसके रहने का अलग बंदोबस्त कर दूंगा तब वो यहां से चली जाएगी,,,

( इतना सुनकर निर्मला को राहत हुई, क्योंकि मधु के आने की बात सुनकर वह परेशान हो गई थी अगर वह घर रहती तो उस के रहते हुए वह शुभम के साथ रंगरलिया नहीं मना सकतीे थी,,, इसलिए अशोक की बातों से वह मन ही मन खुश होने लगी इस दौरान कमरे में दरवाजे के पीछे खड़ी होकर मधु इन सब की बातें सुन रही थी,, तब तक वह अपने कपड़े दुरुस्त करके फ्रेश हो चुकी थी,,, वह तुरंत अपने कमरे से बाहर निकल कर आई और निर्मला के पैरों को छूकर उसे नमस्ते की,,,, निर्मला भी मधु का अभिवादन स्वीकार करते हुए उसे उठाकर गले लगा ली,, और उसको दुलार ते हुए बस औपचारिकता बस बोली,,,।

तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो मैं तो हम तो तुम्हारे साथ हैं और किसी बात की जरूरत हो तो हमसे जरूर कहना,,,।

इसलिए तो भाभी आप लोगों के पास आई हूं क्योंकि मैं जानती हूं कि इस दुनिया में आप आप लोगों के सिवा मेरा कोई नहीं है आप ही लोग मेरे सहारा हो।,,,

( शुभम अपनी बुआ की बातें सुनकर मन ही मन उसके भोलेपन के पीछे एक वासना यह चेहरा छुपा हुआ है इस बारे में सोच कर मन ही मन मुस्कुरा भीं रहा था क्योंकि उसे देखते ही उसे वापस याद आने लगा जब वह अपनी नंगी गोरी गोरी गांड को पेंटी के अंदर छुपाते हुए सीढ़ियां चढ़ रही थी शुभम का मन अपनी बुआं पर डोलने लगा था।,,, वह बड़े गौर से मधु के खूबसूरत चेहरे को देख रहा था उसका भरा हुआ बदन खास करके टी शर्ट में तनी हुई उसकी दोनों गोलाइयां,,, शुभम को ललचा रही थी,,,। मधु ठीक से सुभम से नजर नहीं मिला पा रही थी बार-बार वह उसकी तरफ देखकर अपनी नजरों को नीचे झुका ले रही थी।,, क्योंकि वह अच्छी तरह से जानती थी कि शुभम उसका भतीजा है और वहां कमरे में आते हैं उसे उसके पापा से मतलब कि अपने खुद के सगे बड़े भाई से चुदते हुए देख लिया था। इसलिए शर्मिंदगी बस ना तो सुभम से कुछ बोल रही थी और ना ही नजर मिला रही थी।,,, बस इधर-उधर नजरे घुमाते हुए निर्मला से बातें किए जा रहीे थी,,,

निर्मला काफी थकी हुई थी इसलिए वह अपने कमरे में चली गई मधु भी अपने कमरे की तरफ जाने लगी,, लेकिन सुभम की ललचाई आंखें मधु की सीढ़ियां चढ़ने की वजह से मटकती हुई गांड को ही घुऱे जा रही थी।,, शुभम की नजर अब अपनी बुआ पर पड़ गई थी और वह मन में सोचने भी लगा था कि इसे हासिल करने में कोई ज्यादा दिक्कत नहीं पेश आएगी क्योंकि उसने उसे अपनी आंखों से अपने ही बड़े भाई मतलब अपने पापा से चुदवाते हुए जो देख लिया था। मधु भी अपने कमरे में जा चुकी थी। अशोक टेबल के सहारे नजरें झुका कर खड़ा था। शुभम अपने पापा की तरफ देखते हुए बोला,,

पापा आपसे बहुत ही चालू किस्म के होते जा रहे हैं अपनी ही सेक्रेट्री के साथ रंगरेलियां मनाते हुए मैं तुम्हें देख लिया,,, जिसके हर जाने के रूप मे उसने आपसे लाखों रुपया एंठ चुकी थी। उस राज को तो मैं अपने सीने में दफन कर ले गया मम्मी से कुछ भी नहीं बताया,, लेकिन आज जो मैंने अपनी आंखों से देखा है उसे देखने के बाद मुझे अजीब सा लगने लगा है । मतलब कि आप अपनी छोटी बहन के साथ ही,,, ऐसा कैसे हो गया पापा,,,,,

बेटा शुभम आप कुछ भी मत बोल जो होना था सो हो गया,,,,,

लेकिन कैसे,,, वह मान कैसे गई।? ( शुभम जानबूझकर अपने बाप से ऊगलवाना चाहता था,,, इसलिए सवाल पर सवाल पूछे जा रहा था।)

यार सुभम तु मुझे परेशान मत कर,,,,

ऐसा मत कहो पापा मैं तुम्हारे इतने बड़े राज को राज रखा हुं कुछ तो जवाब दो,,,

( शुभम अपने पापा को ब्लैकमेल करने के अंदाज में बोला शुभम की यह बात अशोक भी समझ रहा था इसलिए वहं ना चाहते हुए भी बोला,,,।)

शुभम यह सब अचानक हो गया और इसने तेरी बुआ की भी रजामंदी थी।

क्या कह रहे हो पापा बुआ खुद यह चीहती थी,, लेकीन यह कैसे हो गया, आप तो उसके बड़े भाइ हो,,,,क्या ऊन्हे जरा भी लाज नहीं आई आपके करवाने में और तो और तुम्हें भी बिल्कुल भी शर्म नहीं आई अपनी ही बहन के साथ इस तरह की हरकत करने में,,,।

( अशोक अपने बेटे के इस तरह के सवाल से झुंझला रहा था लेकिन क्या करें उसकी भी मजबूरी थी। ना चाहते हुए भी वह अपने बेटे से बोला।)

तू बिल्कुल भी नहीं समझेगा शुभम यह सब अपने आप ही हो गया कुछ मेरी जरूरत थी तो कुछ तेरी बुआ की वैसे भी तो काफी महीनों से तेरी बुआ अपने पति के बिना अकेले ही हैं। तो उसे भी जरूरत थी और यह सब हो गया।

लेकिन मुझे समझ में नहीं आ रहा है कि गैर औरत तक तो ठीक था आप तो घर की औरत मतलब खुद की बहन के साथ यह सब,,,,,

देख शुभम जब तू बड़ा होगा ना,,, तो ऐसे ही किसी हालात मैं तुझे भी यह सब करना पड़ जाएगा तब तु यह सब सवाल नहीं पूछेगा। यह सब हालात और जरूरत की बात है।

मतलब घर के अंदर यह सब रिश्ते जायज है।

( शुभम के इस तरह के सवालों से अशोक पूरी तरह से घिर चुका था अब ऐसे रिश्ते को वह गलत भी तो नहीं बता सकता था,, इसलिए वह बोला।)

हां बेटा यह सब जरूरतों की बात है इसमें कुछ भी गलत नहीं है ।

तो क्या अगर मेरा भी इसी तरह का रिश्ता मम्मी के साथ हो जाए तो आपको कोई एतराज तो नहीं है।

( शुभम तपाक से बोला और इस बार अशोक उसे कुछ भी बोल नहीं पाया बस उसे आश्चर्य से देखता रहेगा तो शुभम ही बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,।)

मैं मजाक कर रहा हूं देखना चाहता था कि आप क्या कहते हैं,,।

बस मैं यही बोलना चाहता हूं कि तुझे मैं सब कुछ दूंगा जो तू चाहेगा बस इस राज को राज ही रखना,,,

( इतना कहने के साथ ही अशोक जाने लगा और उसे लिए जाते हुए देख कर शुभम बोला)

आप चिंता मत करो पापा यह राज,, राज ही रहेगा,,,।

( इतना कहकर सुभम भी अपने कमरे में चला गया,,, पत्थर की वजह से वह काफी थकान महसूस कर रहा था इसलिए बिस्तर पर पड़ते ही वह गया,,,।

सुबह जल्दी तैयार होकर निर्मला और शुभम दोनों स्कूल के लिए रवाना हो गए,,, सुबह उठते ही मधु ने निर्मला कह दिया था कि जब तक वह इधर है तब तक रसोई का काम वही संभालेगी,,, इसलिए निर्मला को रसोई के काम से फुर्सत मिल गई थी और वह नहाने के तुरंत बाद नाश्ता करके शुभम के साथ स्कूल के लिए चलेी गई,,,

सुबह जल्दी जाने वाला अशोक ऑफिस में अब लेट जाता था इसका एक कारण यह था कि रोज सुबह सुबह मधु के साथ रंगरेलियां मनाते हुए उसे देर हो जाती थी और वह देर से ही ऑफिस जाने लगा था। सुबह उठकर वह देखा तो निर्मला और शुभम दोनों स्कूल जा चुके थे इसलिए थोड़ा उसके मन में रंगीनीयत छाने लगी, और वह मधु को ढूंढते ढूंढते रसोई घर मैं पहुंच गया जहां पर मधु खाना बना रही थी अशोक जाते ही उसे पीछे से अपनी बाहों में भर लिया,,, यू तो मादकता और जवानी से भरी हुई मधु को मोटी औरत अपने लंड से चोदने की इच्छा होती थी लेकिन मजबूरी बस ना चाहते हुए भी उसे अपने बड़े भाई अशोक के साथ हमबिस्तर होना पड़ता था क्योंकि इसमें उसकी बहुत बड़ी मजबूरी थी इस हालत में अशोक के सिवा उसके पास और कोई ना तो ठिकाना था और ना तो कोई सहारा था इसलिए ना चाहते हुए भी वह अशोक को सहकार देते हुए चुंबन करने लगी,, और कुछ ही मिनट में अशोक मधु से एकाकार हो गया कुछ देर बाद जब शांत हुआ था मधु उसे बोली,,,।

भैया कल रात शुभम ने हम दोनों को उबाल में देख लिया है अगर कहीं उसने भाभी को बता दिया तो क्या होगा,,,?

कुछ नहीं होगा तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो मैं उसे सब कुछ समझा दिया हूं और उसे कुछ भी मांगने की लालच भी दे दिया हूं,,, इसलिए अपनी मां से कुछ भी नहीं कहेगा,,,।

अच्छा हुआ भैया कि तुमने सब कुछ संभाल लिया वरना मुझे रात भर नींद नहीं आई थी।

डरने की कोई बात नहीं है बहुत ही जल्द में तुम्हें कहीं दूसरा फ्लैट दिला दूंगा जहां पर तुम आराम से रह सकोगी,,।

( जवाब में मधु मुस्कुरादी और अशोक नहाने के लिए बाथरूम चला गया,,,,

निर्मला और शुभम के स्कूल आने से शीतल बहुत खुश नजर आ रही थी वाह नजरें बचाकर शुभम को इस्माइल देते हुए उसे आंख मार दी जिसका जवाब शुभम भी उसे आंख मार कर ही दिया,,,, कुछ दिन ऐसे ही गुजर गए किसी को भी मौका नहीं मिल रहा था ना तो अशोकं को नाही शुभम और निर्मला

को,, सब लोग अंदर ही अंदर तड़प रहे थे,,, लेकिन यह तड़प निर्मला में कुछ ज्यादा ही थी उसकी आदत पड़ चुकी थी सुभम के साथ संभोग करने की,,,,,,,, शुभम मधु पर कुछ ज्यादा ही डोरे डालने लगा था और वह थी की उससे नजरें चुरा लेती थी,,,, धीरे-धीरे दिन गुजर रहा था,,,। शुभम की भी हालत खराब हुए जा रही थी,, मौका मिलने पर शुभम अपनी मां के अंगों से उसे दबाकर सहलाकर खेल रहा था और निर्मला भी शुभम के ही देना चुंबन करके तो कभी शुभम के मुसल को मसलकर अपने मन को बहला ले रही थी,, लेकिन दोनों को अपनी प्यास बुझाने का मौका बिल्कुल भी नहीं मिल रहा था।,,,

ऐसे ही एक दिन सुबह निर्मला मंदिर गई हुई थी और ऑफिस में जरूरी काम होने की वजह से अशोक जल्दी ही घर से निकल गया था। शुभम बाथरूम चला गया और मधु रसोई में रसोई का काम कर रही थी कि तभी उसे पेशाब का प्रेशर महसूस होने लगा और वह बाथरूम की तरफ जाने लगी तरफ जल्दबाजी में शुभम बाथरूम का दरवाजा लॉक करना भूल गया और अपने सारे कपड़े उतार कर बिल्कुल नंगा होकर नहा रहा था मधु को याद करके उसका लंड पूरी तरह से खड़ा हो गया था क्योंकि बार-बार उसे वहीं पल याद आता था जब वह अपने नितंबों को छुपाने की कोशिश करते हुए पेंट पहनते हुए सीढ़ियो पर चढ़ रही थी और छुपाने की पूरी कोशिश करने के बावजूद भी उसी की लड़ाई जवानी की परिभाषा उसके गदराए नितंबो ने बिना कुछ कहे बयां कर रहे थे,,, वह पल याद आते ही किसी भी स्थिति में सुभम का लंड पूरी तरह से खड़ा हो जाता था,,, इस समय भी सुभम की बिल्कुल ही वैसी हालत थी, उसके जेहन में मधु का गदराया बदन हिचकोले खा रहा था।,,,, दरवाजे की तरफ पीठ करके शावर लेता हुआ नहा रहा था की तभी अचानक दरवाजा खुला और मधु पेशाब की प्रेशर को रोक नहीं पाई और बाथरूम में आ गई, और आते ही उसकी नजर दरवाजे की तरफ पीठ करके नहाते हुए शुभम पर पड़ी तो वह शुभम के नंगे बदन को देखकर एकदम से चौंक गई और दूसरी तरफ दरवाजा खुलने की आवाज सुनकर शुभम भी चौक कर दरवाजे की तरफ मुंह करके देखने लगा,,, और बाथरूम में मधु को देखकर वह पूरी तरह से चौक गया और यही हाल मधु का भी हुआ वह चौक ते हुए अपने कदम वापस लेती की इससे पहले ही उसकी नजर,,, शुभम के तने हुए लंड पर पड़ गई औरउस पर नजर पड़ते ही जैसे मधु मंत्रमुग्ध सी हो गई हो इस तरह से, आश्चर्य से मुंह खोले हुए ही वह शुभम कै खड़े लंड को देखने लगी,,, वह तो पूरी तरह से आश्चर्य में थी जिस तरह से मधु शुभम के लंड को देख रही थी उसे देखकर शुभम एक पल के लिए घबरा गया,,, उसे समझ में नहीं आया कि क्या करें लेकिन जब वह देखा कि मधु अपनी नजर उसके लंड पर से हटा ही नहीं रही है तो, वह कुछ सोच कर. बेझिझक अपने खड़े लंड को पकड़कर हीलाते हुए मधु से बोला,,,।

क्या देख रही हो बुआ पापा से बड़ा है ना,,।

(सुभम पुरी तरह से बेशर्मी दिखाते हुए बोला,,,, पुरुष की आवाज सुनकर मधु जेसेे नींद से जागी हो इस तरह से हड़बड़ाते हुए बोली,,,

हं,,,,, ( इतना कहकर वह कभी आश्चर्य से सुभम की तरफ देखती तो कभी उसके खड़े लंड की तरफ,,,,, सुभम समझ गया की उसकीे बुआ ऊसके लंड के प्रति पूरी तरह से आकर्षित हो चुकी है, इसलिए वह दुबारा बोला,,,, इस बार बड़ी बेशर्मी के साथ जोर जोर से अपने मोटे तगड़े लंबे लंड को हिलाता हुआ बोला जिसकी वजह से उसका लंड ऊपर से नीचे की तरफ बड़ी कामुकता पूर्वक झूला झूल रहा था।)

क्या देख रही हो बुआ यह पापा से बहुत बड़ा है ना,,,,।

( इस बार वाह शुभम की बात सुनकर एकदम से शर्मा कर तुरंत बाथरूम से बाहर निकल कर खड़ी हो गई,,, और निकलते समय बाथरूम का दरवाजा बंद कर दी,,, अपनी आंखों के सामने बुआ को उसका लंड ताकता हुआ देखकर सुभम पूरी तरह से उत्तेजित हो गया था और अपने लंड को सहलाते हुए बोला,,, ।

क्या हुआ बुआ (शुभम इस बार ऊंचे स्वर में बोला क्योंकि वह जानता था कि घर में उसके और उसकी बुआ के सिवा कोई दूसरा मौजूद नहीं था,,,, मधु उत्तेजना के दरवाजे के बाहर खड़ी थी उत्तेजना के मारे उसकी सांसे बड़ी तेजी से चल रही थी,,,, ऊसे यकीन नहीं हो रहा था कि, उसने जो देखी वह वास्तविक है,, क्योंकि अब तक उसने इस तरह का मजबूत और तगड़ा, लंड

नही देखी थी,,, उसकी सांसे अभी भी तेज चल रही थी,, वह वहां से चली जाना चाहती थी लेकिन लंड के आकर्षण की वजह से वहां जा नहीं सकी और वैसे भी उसे बहुत जोरों से पेशाब लगी थी,,,, शुभम को उसकी चूड़ियों की आवाज आती तक सुनाई दे रही थी इसलिए वह समझ गया कि वह दरवाजे के बाहर ही खड़ी है इसलिए वह फिर से बोला,,,।

क्या हुआ बुआ चली क्यों गई अंदर आ जाओ,,,

तुम दरवाजा बंद करके नहा नहीं सकते थे क्या?

दरवाजा बंद करके नहाता तो तुम अंदर कैसे आती और इतना खूबसूरत नजारा केसे देख पाती,,,,।

तुम बहुत बेशर्म हो गए हो जल्दी करो बाहर आओ मुझे जोरों से पेशाब लगी है,,,।

( बुआ के मुंह से पेशाब लगने वाली बात सुनकर शुभम का लंड ठुनकी मारने लगा,, वह एकदम से ऊत्तेजना से भर गया,,,, और अपने लंड को हिलाता हुआ बोला।)

तो चली आओ इसमें शर्माने की क्या बात है वैसे भी घर पर तुम्हारे और मेरे सिवा कोई नहीं है।

 
पागल हो गए हो क्या मैं तुम्हारे सामने,, धत्त,,, ( दरवाजे के बाहर खड़ी होकर शरमाते हुए मधु बोली)

अरे इसमें कौन सी बड़ी बात हो गई जब तुम पापा के साथ मेरा मतलब समझती हो ना अब चली आओ,,,

( शुभम की यह बात सुनकर मधु थोड़ा झेंप सी गई,,, वह समझ गई कि सुभम का इरादा कुछ ठीक नहीं है,,, एक तरफ उसके मन में कुछ और कर रहा था तो एक तरफ शुभम के लंड को लेकर उसके तन बदन में उत्तेजना की लहर दौडनें लगी थी,,, वह फिर से शुभम के लंड को देखना चाहतेी थी,,,,, वह अजीब सी उलझन में फंसी हुई थी। एक तरफ शर्म के मारे वहां बाथरूम में दोबारा नहीं जाना चाहती थी तो दूसरी तरफ सुभम के मोटे तगड़े और जिस तरह के लंड़ से वह चुदने की कामना करती थी उसी तरह के लंड को देखने की उत्सुकता उसके मन में बढ़ती जा रही थी,,,, और उसके तन बदन को पेशाब का प्रेशर भी बुरी तरह से परेशान कर रहा था अगर वह कुछ देर वहीं रुकी रही तो इतना तय था कि वह अपने कपड़े गीले कर लेती,,, इसलिए शर्म भय और उत्सुकता का मिलाजुला भाव लेकर जो होगा देखा जाएगा ऐसा मन में सोच कर मधु बाथरूम का दरवाजा खोल कर वापस बाथरूम में घुस गई

शुभम मधु को इस तरह से दोबारा बाथरूम का दरवाजा खोल कर अंदर आता हुआ देखकर पहले तो शुभम पूरी तरह से चौक गया,,, लेकिन वह समझ गया कि वह भी वही चाहती है जो कि वह चाह रहा है।,, मधु पूरी तरह से शर्मिंदगी का एहसास लिए नजरें झुका ही हुई थी लेकिन सुभम के मोटे लंड को देखने की लालच वह अपने मन से हटा नहीं पा रही थी,, इसलिए बात चोर नज़रों से बार-बार शुभम के लंड को देख ले रही थी क्योंकि अभी भी पूरी तरह से खड़ा होकर शुभम की हथेली में गश्त लगा रहा था। यह नजारा ही मधु के लिए काफी था उसकी बुर टपकने लगी थी। शुभम बड़ी ही कामुकता के दर्शन कराता हुआ अपनी हथेली को जोर जोर से अपने मोटे तगड़े मुसल पर चला रहा था।,,, मधु मन ही मन यह सोचकर उत्तेजित में जा रही थी कि अगर शुभम उसकी बुर में अपना मोटा लंड डाले तो उसे कैसा महसूस होगा,,,। शुभम प्यासी नजरों से मधु के बदन के ऊपर से नीचे तक ताड़े जा रहा था, और मधु शर्मा और संकोच के कारण अपने आप में ही सिकुड़ी जा रही थी,,।,, उत्तेजना और साथ ही पेशाब का प्रेशर उसे बूरी तरह से परेशान किए जा रहा था,,,। शुभम की भी हालत खराब हुई जा रही थी,, काफी दिनों से उसे भी बुर में लंड डालने का मौका बिल्कुल भी प्राप्त नहीं हुआ था इसलिए उसका नंबर काफी समय से प्यासा था इसलिए तो अपनी आंखों के सामने एक बेहद खूबसूरत औरत को देखते ही उसकी जवानी को सलामी भरते हुए ऊपर नीचे हो रहा था।,,, बार-बार चोर नज़रों से ना करती हुई मधु अंदर ही अंदर बेहद प्यासी होते जा रही थी, वह तो मजबूरी बस अपने बड़े भाई की पतले और कमजोर लंड से चुद़वाते आ रही थी वरना उसे तो ऐसे ही लंड की कामना थी।,,, दोनों के बीच किसी भी प्रकार का संवाद नहीं हो रहा था बस मन की बात को वह दोनों नजरों से इजहार कर रहे थे मधु की आंखों में नशा सा छाने लगा था,,। बदन की प्यास कामरस की बूंदे बन कर बुर की पतली दरारों से टपक रही थी। सारे अरमान मचल रहे थे वह भी सुभम की मजबुत बाहों में अपनी बहकती जवानी को तोड़ना चाहती थी,,,,, लेकिन कैसे यह उसको बिल्कुल भी पता नहीं था इसलिए तो नजरें झुका कर खड़ी थी काफी देर तक बस आंखों ही आंखों से,, अपने दिल की बात को इशारों में व्यक्त करने के बाद जब रहा नहीं गया तो मधु बोली,,,,।

शुभम तुम बाहर जाओ ना मुझे जोरो से पेशाब लगी है, मुझे कर लेने दो फिर आ जाना,,,,

( मधु यह बात बेहद नशीले अंदाज में कही थी,,, क्योंकि वह जानती थी कि भले ही पेशाब वाली बात औपचारिक ही हो लेकिन औरतो के मुंह से पेशाब करने की बात सुनकर दुनिया का हर मर्द मदहोश हो जाता है और एकदम से उत्तेजना का अनुभव करने लगता है और यही हाल शुभम का भी हो रहा था मधु के मुंह से उसकी आंखों के सामने खड़े होकर पेशाब करने की बात जिस अंदाज से वह कर रही थी उसे सुनकर शुभम का लंड मधु की जवानी को भोगने की कामना करते हुए ऊपर नीचे हो रहा था।,,, और कामुकता का एहसास लिए हुए शुभम बोला,,,।)

तो कर लो ना तुम्हें रोका किसने है

तेरे सामने कैसे कर लु, तू बाहर जाना,,,

मुझसे कैसी शर्म मेरे सामने ही तो तुम पापा से चुदवा रही थी,,।

तू बार-बार मुझसे वही बात क्यों करता है,,, भूल से हो गया था,,,।

भूल से कोई किसी से चुदवा लेता है क्या?

ऐसी बातें तो मुझसे क्यों कर रहा हूं तो मुझे परेशान मत कर बाहर चला जा बस 2 मिनट की बात है,,।

तो यह 2 मिनट तुम मेरे नाम कर दो,,, मेरी देखना चाहता हूं कि बुआ कैसे पेशाब करती है,,।

तु एकदम बेशर्म हो गया है।

जब से तुमको पापा से चुदवाते हुए देखा हुं तबसे मेरी भी शर्म फुर्र हो गई है।,,,,,

( शुभम अपने लंड को हिलाता हुआ बोला,,, और मधु भी शुभम की इस हरकत को चोर नज़रों से देख कर मस्त हुए जा रही थी।)

तू बार-बार पापा पापा क्या लगा रखा है देख शुभम तु यह वाली बात को भाभी से बिल्कुल भी मत बताना,,,,

लेकिन राज को राज रखने के लिए कुछ मेरा भी तो फायदा होना चाहिए ना,,,,( इतना कहते हुए शुभम आगे बढ़ने लगा अभी भी वह अपने लंड को हिला रहा था,,, उसे अपने करीब आता देख कर मधु के दिल की धड़कन बढ़ने लगी और वह कपकपी भरे स्वर में बोली

कैसा फायदा तू कहना क्या चाहता है,,,,।

( मधु शुभम के इरादे को भाप गई थी और उसे डर भी लग रहा था और उसकी उत्सुकता भी बढ़ते जा रही थी, वह इतना कह पातीै इससे पहले ही शुभम ऊसके बेहद करीब पहुंच गया था। शुभम यह बात तो अच्छी तरह से जान चुका था कि मधु का भी मन आगे बढ़ने में दिलचस्पी रख रहा है इसीलिए तो वह बाथरूम में दोबारा आई है वरना अगर वह आगे बढ़ना नहीं चाहती तो वह बाथरूम में दोबारा आती ही नहीं और वैसे भी जिस नजर से वह उसके लंड को घूर रही थी,,, ऊसे देखकर सुभम समझ गया था कि वह कि वह ऊसके लंड को अपनी बुर में लेना चाहती है।,,,, इसलिए वह बेहद उत्तेजना का अनुभव करते हुए एक हांथ आगे बढ़ा कर,,,उसकी कमर में डाल दिया और उसे अपनी तरफ खींच लिया,,,, शुभम की हरकत से मधु एकदम से मचल उठी,,, इससे पहले कि वह कुछ समझ पाती इससे पहले ही शुभम अपने होठो को उसके गुलाबी होठो पर रख कर चूसना शुरू कर दिया,,,,, और उसकी उत्तेजना बढ़ाने हेतु उसका एक हांथ पकड़ कर, अपने लंड पर रख दिया और देखने वाली बात यह थी कि मधु अपना हाथ पीछे हटाने की चेष्टा बिल्कुल भी नहीं की बल्कि वह तो गर्म सिसकारी लेते हुए अपनी मुट्ठी का कसाव शुभम के लंड पर और ज्यादा बढ़ा दी,,, मधु का इस तरह की हरकत की वजह से शुभम की उत्तेजना और ज्यादा बढ़ गई और वह देखते ही देखते उसके होठों को चूसते हुए उसकी बड़ी बड़ी गोल चुचियों को एक हाथ से दबाना शुरू कर दिया,,,,, जिसकी वजह से मधु के मुंह से लगातार गरम सिसकारियों की आवाज आने लगी जो की होठो पर होंठ रखने की वजह से घुटी घुटी सी निकल रही थी,,,।

ऊहहहहहहहह,,,,, ऊममममममम,,,, ऊहहहहहहहह

मधु को भी मजा आने लगा शुभम पूरी तरह से नंगा और गीला था जिसकी वजह से मधु का गाउन भी गीला होने लगा,,,,,। कुछ देर तक इसी अवस्था में मजा लेने के बाद शुभम अपना एक हाथ नीचे की तरफ ले जाकर गाउन को ऊपर की तरफ सरकाने लगा,,,, जो कि मधु उसका हाथ पकड़ कर उसे रोकने की कोशिश करते हुए बोली,,,।

भाभी आ जाएगी,,,,

अभी तुम्हारी बात ही नहीं आने वाली उन्हें आने में 1 घंटे से ज्यादा लग जाएगा । (इतना सुनते ही मधु शुभम के हाथ पर से अपना हाथ हटा ले और उसे गाउन उत्तर की तरफ सरकाने में मदद करने ,लगी,,,, कमर तक गाऊन सरकते ही,,, शुभम की हथेली उसकी जांघो के बीचो-बीच फिर रही थी,,, जिससे शुभम को अंदाजा लग गया कि मधु अंदर कुछ नहीं पहनी थी गाउन के नीचे वह बिल्कुल नंगी ही थी,,, और वह तुरंत अपनी पांचों अंगुलियों को मधु की बुर पर रगड़ने लगा,,,, जिससे मधु और ज्यादा उत्तेजित होने लगी शुभम की हरकत की वजह से उसकी पेशाब का प्रेसर और ज्यादा बढ़ता जा रहा था,,,,। उससे बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा था लेकिन बड़ी मुश्किल से वह अपने आप को रोके हुए थी वरना कब से उसकी पेशाब निकल गई होती।,,,, शुभम जिस तरह से अपने हाथों की हरकतों से मधु को मदहोश कर रहा था उसे देख कर मधु समझ गई थी कि शुभम उसे ढेर सारा मजा देने वाला है,, क्योंकि शुभम की मादक हरकतों की वजह से उसकी बुर में पानी का सैलाब उठ रहा था,,, जिससे शुभम की उंगलियां पूरी तरह से गिली हुए जा रही थी,,।,,,, शुभम मदहोश हुआ जा रहा था वह देखते ही देखते अपनी बीच वाली उंगली को मधु की गीली बुर में अंदर तक उतार दिया,,,,।

सससहहहहहहहहह,,,,,, आहहहहहहहहहह,,,,,,, सुभम,,,,

( मधु गरम सिसकारी लेते हुए बोली,,, तब तक शुभम मधु के गुलाबी होठो पर से अपने होट हटाकर,,,, गाउन के ऊपर से ही,,, मधु की मधु की नरम नरम चुचियों को मुंह में भर कर पीने की नाकाम कोशिश करने लगा। शुभम कि इस तरह की चूची पीने की नाकाम कोशिश मधु के तन बदन में और ज्यादा आग भड़काने लगी उसके गांऊनकी कंधे पर की पट्टी बेहद पतली थी,,, जिसकी वजह से तुरंत उसने एक हाथ से अपने दोनों तरफ की तख्ती को नीचे कंधे की तरफ गिरा दी और अपने गांऊन को अपनी चुचियों के नीचे करके,, अपनी नंगी गोलियों को शुभम के मुंह में दूध की बोतल की भांती ठुंस दी ताकी सुभम आराम से पी सके,, सुभम छोटे बच्चे की भांति जितना हो सकता था उतना मुंह में भरकर दबाते हुए पीना शुरू कर दिया,,,, दोनों पागलों की तरह एक दूसरे को बांहों में भींचने लगे,,, दोनों की मदहोशी पन की हद बढ़ती जा रही थी, शुभम जोर जोर से अपने बीच वाली उंगली को मधु की रसीली बुर के अंदर बाहर करते हुए उसे उंगली से ही पेल रहा था,,,,, जिससे मधु के मुंह से लगातार गर्म सिसकारियां निकल रही थी।,,, दोनों एक-दूसरे को बाहों में भींचते हैं इधर उधर कसम लड़खड़ा ते हुए मजा ले रहे थे,,, और धीरे-धीरे दोनों सागर के नीचे पहुंच गए जहां से ठंडे पानी की फुहार दोनों के बदन को ठंडक पहुंचा रही थी।। झरने की तरह झर रहे पानी के नीचे दोनों की कामोत्तेजना और ज्यादा बढ़ने लगी,,,, शुभम पागलों की तरह उसकी दोनों चूचियों को दबाते हुए नीचे की तरफ बढ़ने लगा,, और देखते ही देखते शुभम घुटनों के बल बैठ गया और प्यासी नजरों से मधु की जांघों के बीच के खूबसूरत मनोरम दृश्य को देखने लगा जहां पर जांघों की आखिरी कटाव के ऊपरी सतह पर हल्की सी पतली दरार नजर आ रही थी जो कि पूरी तरह से गरम रोटी की तरह फुल चुकी थी,, और इसी पतली हल्की सी दरार की वजह से ही पता चल रहा था की यहअंग बुर है वरना पता ही नहीं चलता जिस पर हल्की हल्की रोंएदार मखमली झांटो का झुरमुट बुर की खूबसूरती को और ज्यादा बढ़ा रहा था,,, शुभम नजर भर कर मधु के इस अंग को देखे जा रहा था। और यह देखकर मधु की हालत खराब हुए जा रही थी। वह पूरी तरह से उत्तेजना से भर चुकी थी,,, पेशाब का प्रेशर परेशान कर रहा था सो अलग,

शुभम शॉवरर के नीचे घुटनों के बल बैठ कर,, अपने दोनों हाथ आगे बढ़ाकर मधु की मखमली मांसल चिकनी जांघों पर रखकर उत्तेजना बस उसे दबोच लिया,,,, और मधु कसमसाते हुए सिसक रही थी।

सॉवर से बह रहे पानी के नीचे दोनों नहाते हुए भीग रहे थे मधु भी पूरी तरह से गीली हो चुकी थी जबसे सुभम कहा था कि अभी उसकी मम्मी नहीं आने वाली है तब से मधु का भी मन और ज्यादा खुलने को हो रहा था इसलिए वह अपने गाउन को ऊपर की तरफ से कहते हुए निकाल फेंकी,,, अब मैं तो बन के आंखों के सामने संपूर्ण रूप से निर्वस्त्र अवस्था में खड़ी थी और उसकी खूबसूरत गोरी गोरी जवानी को देखकर शुभम के मुंह में पानी आ रहा था और वह अपनी प्यास बुझाने के लिए जांघों पर रखें अपनी हथेली को उपर की तरफ सरका कर उसके गोल गोल गदराए हुए नितंबों पर रखकर दबाते हुए उसे दबाते हुए अपने प्यासे होठ को उसकी बुर पर रख दिया शुभम की हरकत की वजह से मधु के तन बदन में चुदास की लहर अपना असर दिखाने लगी,,, और वह लंबी आहें भरते हुए अपने दोनों हाथ को शुभम के सिर पर रख कर जोर से अपनी बुर पर दबाकर अपने नितंबों को गोल-गोल घुमाते हुए उसके होठों पर अपनी बुर की गुलाबी पत्तियों को रगड़ना शुरू कर दी,, मधु का यह साथ सहकार देखकर शुभम से रहा नहीं गया और वह जोर जोर से मधु की गांड को मसलते हुए

उसकी बुर को चाटना शुरू कर दिया,,, शुभम की इस कामुक हरकत की वजह से मधु के तन बदन में उत्तेजना की चिंगारियां फूटने लगी और उससे अपने आप पर सब्र कर पाना मुश्किल सा होने लगा और ना चाहते हुए भी वह अपने पेशाब की प्रेसर को रोक नहीं पाई ओर छलछलाकर,,,, मुतना शुरू कर दी अब ईस हालत में मधु कर भी क्या सकती थी एक तो उसके ऊपर दोनों से ही मदहोशी छाई हुई थी ऊपर से सब अपनी अपनी हरकत के द्वारा उसकी कामोत्तेजना को और अधिक बढ़ा दिया पहले से ही पेशाब की प्रेशर से वह तड़प रही थी बदन में हो रही इस प्रकार की हलचल को वह रोक नहीं पाई और वह छल छलाकर मुतना शुरू कर दी थी,,,

पहले तू सावन के नीचे शुभम को समझ में नहीं आया कि उसकी बुआ उसके मुंह में ही मुतना शुरू कर दी है उसे यही लग रहा था कि सावर से पानी की वजह से ऐसा हो रहा है,,,, लेकिन स्वाद में खारे पानी की वजह से उसे यकीन हो गया कि उसकी बुआ उसके मुंह में ही मुतना शुरू कर दि है। लेकिन आश्चर्य की बात यह थी कि शुभम को इस बात से बिल्कुल भी किसी भी प्रकार की आपत्ति नहीं हो रही थी, बल्कि वह तो अपनी बुआ की इस हरकत की वजह से पूरी तरह से उत्तेजित हो गया था और वह लबालब अपनी जीभ दूर की गहराई में उतारता हुआ उसके पेशाब को गटक जा रहा था,,,,

मधु को यकीन नहीं हो रहा था कि सुभम ऊसकी पेशाब की बूंदों को चट कर जा रहा है,,,, वह अपने बदन में और भी ज्यादा उत्तेजना का अनुभव करने लगी,,,, उससे रहा नहीं गया और वह अपनी कमर को आगे पीछे करके हिलाते हुए बोली,,,,।

ससससहहहहहहहहह,,,, सुभम,,,, आहहहहहहहहह,,,,,

मुझसे कंट्रोल नहीं हुआ,,,,ससससससहहहहहहह,,,,,, शुभम और यह अचानक हो गया।,,,,,आहहहहहहहहहहह,,,,,, तुझे बुरा तो नहीं लग रहा है ना,,,,,,,,,,,,

( शुभम जवाब देने के मूड में बिल्कुल भी नहीं था वह तब तक अपनी बुआ की बुर को चाटता रहा जब तक कि उसकी पेशाब की आखरी बूंद तक टपक नहीं गई,,,,, अब उससे बिल्कुल भी सब्र नहीं हो रहा था वह जल्दी से खड़ा हुआ और अपनी बुआ की एक टांग उठा कर अपनी कमर से लपेटता हुआ,,,, उसकी कमर को थामे हुए अपने लंड के सुपाड़े को उसकी बुर की गुलाबी पत्तियों के बीच रख दिया,,, और जोर से धक्का देता हुआ बोला,,,

मैं बिल्कुल भी नाराज नहीं हूं मेरी जान तुम तो बल्कि मेरी उत्तेजना को और ज्यादा बढ़ा रहीे थी,,,

( इतना कहने के साथ ही शुभम अपने लंड को पूरा का पूरा अपनी बुआ की बुर की गहराई में उतार दिया,,,

मधु शुभम के एकाएक हुए ईस वार को झेल नहीं पाई और दर्द से बिल मिलाते हैं उसके मुंह से चीख निकल गई,,,,

आहहहहहहहहह,,,, शुभम बहुत दर्द कर रहा है,,,,,ओहहहहह,,,,,,

मजा भी तो मिल रहा है ना मेरी जान,,,,

तेरा बहुत मोटा है रे,,,,

तभी तो देखना पापा से ज्यादा मजा दूंगा,,,,

आहहहहहहहह,,,,, यह मजा कहीं सजा ना बन जाए मेरे लिए,,,, आज तो लगता है कि तू अपने मोटे लंड से मेरी बुर फैला देगा,,,,

तभी तो मजा आएगा मेरी जान मेरा मोटा लंड तुम्हारी बुर की गुलाबी पत्तियों को चौड़ा करते हुए अंदर जा रहा है,,,,।

आहहहहहहहहह,,,, रगड़ रगड़ के जा रहा है।

पापा का कैसे जाता था,,,,( अपनी कमर को आगे पीछे हिलाते हुए मधु को चोदते हुए बोला)

तेरे पापा का तो पता ही नहीं चलता कि अंदर जा रहा है कि बाहर जा रहा है,,,,,।

फिर भी तो उनके साथ लगी हुई हो,,,,

आहहहहहहहह,,,,, सुभम धीरे,,,,, लगी हुई नहीं है मेरी मजबूरी है,,, मेरा अब तेरे पापा के सिवा कोई सहारा भी नहीं है तो जाऊंगा रही बात का तेरे पापा फायदा उठाते हुए मेरा उपयोग कर रहे हैं भले ही उनसे कुछ होता नही है लेकिन फिर भी ना जाने कितनी प्यास लगी हुई है।

तुम हो ही इतनी मस्त की किसी को भी प्यास लग जाए,,( शुभम जोर जोर से अपनी कमर हिलाते हुए मधु की चुचियों को मसलते हुए बोला,,,)

आहहहहहहहहहह,,,,,, ऊईईीईीी मा,,,,,,, आहहहहहहहहहहहह,,,,, अरे तेरे पापा के पास तो एकदम मस्त माल फिर भी ना जाने क्यों वह इस तरह की हरकत करते हैं,,।

किसकी बात कर रही हो बुआ( अनजान बनते हुए जोर जोर से धक्का लगाते हैं बोला)

तेरी मां की और किसकी देखता नहीं है तू इतनी मस्त गोल गोल चुचीया है बड़ी-बड़ी,, ब्लाउज में नहीं समा पाती,, बड़ी बड़ी गांड साड़ी के ऊपर से भी देखने पर किसी का भी लंड खड़ा हा जाता है । तेरे पापा की तो किस्मत अच्छी है कितनी सुंदर और खूबसूरत बीवी मिली है कि दिन रात उसकी बुर में लंड डालकर पड़े रहो,,, ( बुआ की बातों को सुनकर सुभम उत्तेजित हुआ जा रहा था और जोर जोर से धक्के लगाते जा रहा था,,)

मेरे सामने कैसी बातें करती हो बुआ,,,,,

ओह हो,,,,, एैसा शरीफ होता तो अपनी बुआ को बाथरूम में आज ये ना कर रहा होता,,,,,,आहहहहहहहह आहहहहहहहहह,,,,,, ( अपनी बुआ के इस तरह की बातें सुनकर उत्तेजना के मारे शुभम जोर जोर से धक्के लगाने लगा वह मधु को संभलने का बिल्कुल भी मौका ना देते हुए अपनी मजबूत भुजाओं में उसी हालत में अपना एक हाथ उसके नितंबों के नीचे ले जाकर उसे अपनी गोदी में उठा दिया,,, हालांकि अभी भी उसका लंड उसकी बुर की गहराई में था और वह सीधे ले जाकर बाथरूम की दीवार से सटाकर जोर जोर से धक्के लगा कर ऊसे चोदने लगी,,, मधु को बहुत मजा आ रहा था जिंदगी में पहली बार उसने इस तरह की जबरदस्त चुदाई करवा रही थी,,, वह जानती थी कि घर में समय कोई भी मौजूद नहीं है इसलिए खुलकर अपनी गरम सिसकाारियों के साथ बाथरूम के साथ साथ पूरे घर मैं अपनी आवाज गुंजा रही थी,,, शुभम बिना रुके तकरीबन 20 मिनट तक ऐसे ही धक्के लगाता रहा,,,,, और आखिर में दोनों एक साथ झड़ने लगे,,,, मधु की पूरी तरह से गीली हो चुकी थी इसलिए वह जल्दी से नहा कर बाथरूम से बाहर चली गई कुछ देर बाद शुभम तौलिया लपेटकर बाथरूम से बाहर निकला और अपने कमरे में चला गया,,,,

मधु की चुदाई कर के सुभम बेहद खुश नजर आ रहा था।

दूसरी ओर स्कूल में शीतल को कुछ ज्यादा खास मौका नहीं मिल रहा था सुभम के साथ समय व्यतीत करने के लिए,,,, हालांकि वह मौका देखकर शुभम को छेंड जरूर देती थी कभी पेंट के ऊपर से लंड को दबा देती तो कभी उसे अपनी तरफ खींच कर उसके होठों को चूमना शुरू कर देती शुभम भी इसका फायदा उठाते हुए उसके नितंबों को दबा देता तो कभी उसकी चूची को मसल देता,,, शुभम को धीरे धीरे ईस छेड़खानी में मजा आने लगा था,,,, निर्मला को भी कुछ दिनों से अजीब सा लगने लगा था वह इस बात पर नोटिस करने लगी थी कि सीतल भले ही उसके साथ बातें करती थी लेकिन वह शुभम को ही ताकते रहती थी उदयपुर का साथ नहीं होता था तो वह सुभम के बारे में ही पूछती रहती थी। शुभम भी शीतल के साथ समय बिताकर खुश नजर आता था ऐसा आभास निर्मला को होने लगा था इस बात को लेकर निर्मला के मन में डर बैठने लगा था,,,, क्योंकि निर्मला अच्छी तरह से जानती थी थी शुभम की कद काठी कसरत ई बदन को देखकर किसी का भी मन उसकी तरफ बहकने लगता था और कोई भी अगर उसकै मुसल जैसे लंड को देख ले तो उससे चुदे बिना नहीं रह सकती थी,,,, इस बात को लेकर निर्मला काफी परेशान नजर आ रहे हैं क्योंकि जिस तरह की हरकतें और व्यवहार शीतल का लग रहा था उसे देखते हुए,,, सुभम का ऊसकी तरफ आकर्षित होना तय था। उसे इस बात का भी डर बराबर बना हुआ था कि कहीं शीतल उसके बेटे को बहला-फुसलाकर अपने साथ शारीरिक संबंध ना बना ले,, और अगर ऐसा हो गया तो जो अभी तक उसके आगे पीछे लट्टु बन कर घूमता था वह सीतल का दीवाना हो जाएगा,,,, शीतल की हरकतें और उसकी चालाकीयो के बारे में निर्मला अच्छी तरह से जानतीे थी। और वह ऐसा नहीं होने देना चाहती थेी इसलिए अब वह शुभम और सीतल दोनों पर नजर रखना शुरू कर दी थी।

 


निर्मला के अंदर की बेचैनी बढ़ती जा रही थी काफी दिनों से उसके मन में शंका ने घर कर लिया था की शुभम का झुकाव शीतल की तरफ बढ़ता जा रहा है और उसका ऐसा शंका करना बेमतलब का भी नहीं था। यह हकीकत भी था कि शुभम का भी झुकाव शीतल की तरह बढ़ता जा रहा था। इसका एक कारण था जो कि सनातन सत्य भी था की घर की मुर्गी दाल बराबर,,,

निर्मला जो की पूरी तरह से शुभम की हो चुकी थी एवं जैसे चाहे वैसे निर्मला का उपयोग और उपभोग कर सकता था,,, बला की खूबसूरत सुंदर सुगठीत बदन की मालकिन निर्मला,,, जो कि हम तरह से शुभम को संभोग सुख का आनंद देते आ रही थी,,, और इसीलिए तो शुभम भी अच्छी तरह से जानता था कि निर्मला को वह कभी भी किसी भी समय चोद कर अपनी प्यास बुझा सकता था। इसलिए तो शुभम को भी घर की मुर्गी दाल के बराबर लग रही थी और यही वजह थी कि जहां पर संपूर्ण रूप से अपना सब कुछ निछावर कर देने वाली निर्मला के प्यार की अपेक्षा उसे शीतल की छेड़खानी अच्छी लगने लगी थी। घर का खाना खा खा कर शुभम भी बोर हो गया था इसलिए होटल के खाने की इच्छा बढ़ती जा रही थी। और यही बात निर्मला को परेशान किए जा रही थी।,,,,

घर में मधु की मौजूदगी अब निर्मला को खटकने लगी थी, क्योंकि उसके रहते वह अपनी प्यास नहीं बुझा पा रही थी,,, शुभम के लंड को लेने के लिए उसकी बुर बेकरार हो रही थी,,, लेकिन कोई जुगाड़ नहीं हो पा रहा था।,,,,,, अशोक भी मधु को ठिकाना दीलाने के लिए कार्यरत था वह मधु को घर से दूर और ऑफिस के करीब रखना चाहता था। ताकि उसे आने जाने में कोई दिक्कत ना हो,,,। लेकिन उसे भी अपने पसंद की जगह पर कोई फ्लैट नहीं मिल रहा था।,,,

स्कूल में अपनी क्लास की तरफ जाती निर्मला सामने से आ रही शीतल को देख कर रुक गई,,, सीतल अब उसे अपनी सौतन की तरह लगने लगी थी,,,, शीतल के चेहरे पर जवानी की चमक बरकरार थी,,, शीतल मुस्कुराते हुए निर्मला के अभिवादन की जिसका जवाब निर्मला ने भी मुस्कुराकर अभिवादन करते हुए दी,,,

और बताओ निर्मला मेरी जान केसा चल रहा है।,,, आजकल और ज्यादा निखरती जा रही हो ऐसा लग रहा है कि जवानी तुम्हारे बदन पर आकर रुक गई है। हमेशा तरोताजा लगती हो आखिरकार यह राज क्या है,,,

कुछ नहीं यार पहले की तरह तो दिखती हूं तुम्हें ही कुछ और नजर आने लगता है,,,,।

ऐसा तुम्हें लगता है लेकिन देखने वालों को तो तुम रोज का रोज एकदम जवान होती नजर आ रही हो,,,

( शीतल के मुंह से अपनी तारीफ सुनते हुए निर्मला को अच्छा लगने लगा कुछ देर के लिए वह भूल गई कि,,, शीतल से उसे जलन हो रही है,,, तभी सामने से आ रहे शुभम की तरफ देखकर शीतल मुस्कुराते हुए बोली,,,।

निर्मला तुम्हारा बेटा जब जवान हो गया और खूबसूरत भी,,,,( ऐसा कहते हुए शीतल,, एकटक शुभम की तरफ देखने लगी,,,, निर्मला को शीतल का इस तरह से देखना अच्छा नहीं लग रहा था,,, इसलिए वह बोली,,,।)

क्यों इरादा क्या है तुम्हारा,, कहीं मेरे बेटे पर तो नैन मटक्का करने का इरादा नहीं है ना,,,। देखना तेरे बेटे की ही उम्र का है वह,,,।

काश सुभम मेरा बेटा होता तो,,,, पर अपनी किस्मत में कहा,, तेरी तो बहुत अच्छे से कट रही होगी,, ।

क्या मतलब,,,,,

जिंदगी और क्या चलो अच्छा मुझे देर हो रही है मैं जा रही हूं,,,।( तब तक सुभम एकदम करीब आ चुका था और शीतल उसे बाय करते हुए मुस्कुरा कर अपने क्लास की तरफ जाने लगी और शुभम भी उसकी तरफ देख कर मुस्कुरा रहा था और निर्मला ने जब उसकी नजरों का पीछा की तो वह हैरान रह गई क्योंकि का बेटा शुभम शीतल की मटकती हुई गांड को ही देख रहा था,,, ओर वह अच्छी तरह से जानती थी की बड़ी बड़ी गांड सुभम की सबसे बड़ी कमजोरी है।,,,,,

क्या देख रहे हो,,,( जैसे शुभम की चोरी पकड़ी गई हो इस तरह से वह एकदम से चौंक गया,,,) जाओ अपनी क्लास में,,,।

जी मम्मी ( इतना कहकर वह अपनी क्लास की तरफ चला गया,,, निर्मला उसे जाते हुए देखती रह गई ओर मन ही मन सोचने लगी कि दोनों के बीच कुछ ना कुछ जरुर खिचड़ी पक रही है,,,। धीरे धीरे कर के दो-चार दिन और गुजर गए मधु भी शुभम को भोगने के लिए तड़प रही थी वह समझ गई थी कि सुभम असली मर्द है। क्योंकि बाथरूम में किस तरह की जबरदस्त उसने चुदाई किया था उसकी वजह से वह 2 दिन तक ठीक से चल नहीं पा रही थी और ऐसा अब तक बिल्कुल भी नहीं हुआ था। लेकिन उसे भी मौका नहीं मिल पा रहा था।,,,

निर्मला तो घर में मधु की मौजूदगी में कुछ भी नहीं कर पा रही थी,,,। ऐसे ही एक दिन दोपहर के समय निर्मला किचन में पानी पीने के लिए गई और ऐन मौके पर सुभम भी वहां पर पहुंच गया,,, शुभम को किचन में इस तरह से तो आकर एकांत का फायदा उठाते हुए यु सुभम को अकेला देखकर निर्मला एकदम से कामा तूर हो गई,,, और शुभम को अपनी बाहों में भीच करो उसके होठों को चूमना शुरु कर दी,,, और चूमते हुए उसे बोले जा रही थी,,,

ओहहहहहह शुभम मेरे राजा बहुत दिन हो गए तेरे लंड का स्वाद चखें,,, मेरी बुर तड़प रही है तुम्हारे लंड को अंदर लेने के लिए,,,,,( ऐसा कहते हुए निर्मला ने पेंट के ऊपर से ही सुभम के लंड को मसलना शुरू कर दी,, सुभम भी आखिर क्या करता उसे भी काफी दिन हो चुके थे अब तक उसने बुर का स्वाद नहीं चखा था इसलिए वह भी अंदर ही अंदर तड़प रहा था,,, और अपनी मां को कामातुर होता हुआ देखकर वह भी अपना सब्र खोने लगा,,,, वह भी एकदम से चुदवासा हो गया,,, उसने भी अपने हाथों को हर कत देते हुए ब्लाउज के ऊपर से अपनी मां की चुचियों को दबाना शुरू कर दिया,,,, निर्मला के मुख से सिसकारी छूटने लगी,,,

सससहहहहहहह शुभम मुझसे रहा नहीं जा रहा है रे अब तो तू मेरे ऊपर ध्यान ही नहीं देता जब से गांव से वापस आई हूं तबसे प्यासी हूं,,,, और तू इतना बेदर्दी हो गया है कि मेरी तरफ जरा भी ध्यान ही नहीं देता,,,,

( इतना कहते हुए निर्मला अपने बेटे के पेंट को नीचे सरका कर ऊसके नंगे लंड को हाथ में पकड़ कर हिलाने लगी,,) क्या मैं तुझे इतनी खराब लगने लगी,, क्या आप मुझसे तेरा मन भर गया है,,,।

यह क्या कह रही होमम्मी,,, तुम तो बहुत सेक्सी और खूबसूरत हो,,( ब्लाउज के ऊपर से ही बड़ी-बड़ी चुचियों को दबाते हुए बोला,,,)

खूबसूरत होती तो तू सीतल कों प्यासी नजरो से नही देखता,,, ।

( अपनी मां के मुंह से शीतल का नाम सुनते ही वह चौंक गया। और अपनी मां की चूची को जोर जोर से दबाता हुआ बोला।)

तुम्हें गलतफहमी हो रही है ऐसा कुछ भी नहीं है,,,।

मुझे गलतफहमी नहीं सुभम,, मैं पक्के यकीन के साथ कह सकती हूं कि उस दिन तू शीतल जब मेरे पास उसे क्लास की तरफ जाने लगी तब तुझे बाय कर के जा रही थी और तू भी उसकी मटकती गांड को देख कर मन ही मन प्रसन्न हो रहा था,,,,।( निर्मला अपने बेटे की लंड को हिला हिला कर बड़ा करते हुए बोली।)

नहीं मम्मी ऐसा कुछ भी नहीं है आप जैसा सोच रही हैं वह सब गलत है,,,।

अच्छी बात है कि जो मैं सोच रही हूं गलत ही हो अगर सच निकली तो सुभम मुझसे बुरा कोई नहीं होगा,,,,

( इतना कहने के साथ ही निर्मला चुदवांसी होकर अपनी घुटनों के बल बैठ गई और जैसे कई दिनों की प्यासी हो इस तरह से शुभम के लंड को मुंह में लेकर चुसना शुरू कर दी,,। सीतल की बात से सुभम एकदम से घबरा गया था,,, उसे लगने लगा था कि उसकी मां को शक हो गया है,, और मन में ठान लिया कि वह इस बारे में शीतल से जरूर बात करेगा ताकि उसकी मां को बिल्कुल भी शक ना हो इस समय शुभम के मन में यह सब ख्याल आप चल ही रहे थे कि तभी निर्मला अपनी जीभ का कमाल दिखाते हुए शुभम के लंड को चूस कर एकदम से टाइट कर दी,,,, निर्मला पूरी तरह से चुदवासी हो चुकी थी उसकी बुर से मधुर रस की बुंदे टपक रही थी। यह जानते हुए भी कि मधु घर में मौजूद हैं लेकिन फिर भी चुदाई का नशा निर्मला पर इस कदर छाया हुआ था कि,, वह सब कुछ भूल चुकी थी इस समय उसे बस शुभम का मोटा तगड़ा लंड ही दिखाई दे रहा था जो कि अपनी बुर में लेने के लिए तड़प रही थी।,,, अब निर्मला से सब्र कर पाना मुश्किल हुआ जा रहा था और दूसरी तरफ से सुभम भी पूरी तरह से तैयार था अपनी मां की बुर में लंड डालने के लिए,,,, शुभम का मोटा तगड़ा बंद उसकी मां के मुंह में उत्तेजना के मारे और ज्यादा फूल गया था,,, और यही हाल निर्मला की बुर का भी था।

निर्मला की बुर भी उत्तेजना के मारे फुल कर गरम रोटी की तरह हो गई थी,,, अब उससे भी सहन नहीं हो रहा था इसलिए वह तुरंत खड़ी हुई,,, और किचन की तरफ मुंह करके झुकते हुए अपने साड़ी को अपनी कमर तक उठा कर खड़ी हो गई,,,, निर्मला अपनी मदमस्त गांड को अपने बेटे के सामने परोस कर पीछे नजर घुमाकर उसकी तरफ देख रही थी मानो की कह रही हो,, ले अब शुरू हो जा,,,

काफी दिनों बाद शुभम भी अपनी मां की मदमस्त गांड का दर्शन कर रहा था,,, इसलिए उसकी आंखों में नशा उतरने लगा और वह भी एक पल की देरी किए बिना ही अपनी मां की गुलाबी पेंटिं को दोनों हाथों से पकड़कर नीचे की तरफ सरकाने लगा,,, अगले ही पल उसकी आंखों के सामने निर्मला कीमत मा की नंगी गांड थिर कट कर रही थी,,, जिसे निर्मला उत्तेजना वश कसमसाते हुए बार-बार दाएं बाएं करके हिला रही थी,,, और अपनी मां की ईस अदा को देखकर शुभम से बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं हुआ और वह,,, आगे बढ़कर अपनी मां की गांड की बड़ी-बड़ी दोनों भागों को पकड़ कर फैलाता हुआ अपने लंड के सुपाड़े को बुर से सटा कर एक ही धक्के में अंदर तक ऊतार दिया,,, काफी दिनों बाद अपने बेटे के मोटे लंड को अपने बुर के अंदर महसूस करके निर्मला पूरी तरह से मदहोश होने लगी और उसके मुंह से सिसकारी छूटने लगी,,,, शुभम काफी उत्तेजित नजर आ रहा था इसलिए अपनी मां की कमर पकड़ कर उसे चोदना शुरू कर दिया दोनों अत्यंत कामोत्तेजित अवस्था में एक दूसरे को मजा देते हुए एक दूसरे की तरफ धक्के लगा रहे थे। निर्मला अपने बेटे से चुदकर चुदाई का अद्भुत आनंद को महसूस कर रही थी।

सुभम हर धक्के को निर्मला अपनी बुर के अंदर महसूस कर के भाव विभोर हुए जा रही थी।

ऐसा लग ही नहीं रहा था कि निर्मला अपने बेटे से बहुत बार चुदवा चुकी है । निर्मला शुभम के हर धक्के को एकदम जवान औरत की तरह महसूस कर रही थी। इतने जोश से वह शुभम से चुदवा रही थी मानो पहली बार ही वह चुदाई का आनंद लूट रहीे हैं।,,, अद्भुत नजारा किचन में नजर आ रहा था चुदाई का ऐसा नशा निर्मला पर छाया था कि वह बिल्कुल भी भूल गई थी कि घर में उसकी ननद मधु मौजूद है।,,, संभोग की चाह में वह इतनी उतावली हो गई थी कि संपूर्ण रूप से नंगी ना हो करके बस उस अंग को ही वित्त विहीन कर दी थी जिस अंग की चुदाई के समय आवश्यकता होती है। बाकी के अंग अभी भी वस्त्रों से ढके हुए थे भले ही से बंद वस्त्र के ऊपर से ही उस अंगों को मसल कर आनंद ले रहा था। निर्मला की सांसे तीव्र गति से चल रही थी से बेहद आनंद की अनुभूति हो रही थी और सुभम के धक्के किसी मशीन की भांति आगे पीछे हो रहे थे। दोनों पसीने से तरबतर हो चुके थे हालांकि किचन में पंखा तीव्र गति से चालू था लेकिन बदन की गर्मी दोनों को पिघला रही थी शुभम हाफ रहा था निर्मला भी से बम का डटकर सामना करते हुए अपनी भारी भरकम गांड को पीछे की तरफ ठेल दे रही थी।,,,,, दोनों का जोश बढ़ता जा रहा था वह दोनों इस बात से बिल्कुल हम जानते हैं कि किचन में कोई भी आ सकता है और ऐसा हुआ भी दूसरी तरफ मधु को प्यास लगने लगी तो वह खाली गिलास लेकर अपने कमरे से बाहर आने लगी,।

वह सीढ़ीयो से ऊतर ही रही थी कि अचानक उसके हाथ से ग्लास छूटकर नीचे गिर गया,,, और बर्तन की आवाज से संभोगनिए मुद्रा में मदहोश हो चुके निर्मला और शुभम की तंद्रा भंग हुई,, और तुरंत उन्हें इस बात का ज्ञान हो गया कि कोई किचन की तरफ आ रहा है और दोनों तुरंत स्फुर्ती दिखाते हुए एक दूसरे से अलग हुए और तुरंत अपने कपड़ों को दुरुस्त करने लगे,,, निर्मला और शुभम ने इतनी ज्यादा उसको उड़ती दिखाई थी कि मधु के रसोई घर के दरवाजे तक आते-आते निर्मला तुरंत छोटे बर्तनों को इधर-उधर करने लगी और शुभम फ्रिज से पानी की बोतल निकाल कर पीने लगा मधु रसोई घर में प्रवेश करते हुए यह देखी तो उसे इस बात का जरा भी अंदेशा भी नहीं हुआ कि इस कीचन में कुछ गड़बड़ चल रही थी। उसे बिल्कुल भी भान नहीं हुआ कि कुछ सेकंड पहले ही उसकी भाभी अपने ही बेटे से चूद रही थी । अपनी भाभी को झूठे बर्तन इकट्ठा करते हुए देखकर मधु बोली।

भाभी ने साफ कर देती हैं आप क्यों परेशान हो रही हो मैं आपसे पहले भी कही थी कि जब तक मे यहां हुं तब तक रसोई का काम मे हीं सभालूंगी,,,,

( इतना कहते हुए वहां निर्मला के हाथों से बर्तन लेकर दोनों शुरू कर दी और निर्मला दी जवाब में मुस्कुरा कर किसी से बाहर निकल गई और मन ही मन भगवान से प्रार्थना करने लगी थी अच्छा हुआ आज बच गई लेकिन उसे मधु पर बहुत ही गुस्सा आ रहा था,, वह अपने चरम सुख को प्राप्त भी नहीं कर पाई थी कि ऐन मौके पर मधु के आ जाने की वजह से उसका सारा मजा किरकिरा हो गया था। इसलिए वह अशोक से बात करके मधु को जल्द से जल्द कहीं और फ्लैट दिलाने की बात करने वाली थी और ऐसा हुआ कि रात को अशोक के आते ही उसने मधु को कहीं और रहने की बंदोबस्त करने के लिए अशोक को जल्द से जल्द बोल दी,,, क्योंकि वह अच्छी तरह से जानती थी कि जब तक मधु यहां रहेगी,,,तब तक वह चुदाई का मजा पूरी तरह से नहीं ले पाएगी निर्मला की बातें सुनकर अशोक ने भी उसे जल्द से जल्द कहीं और रूम दिलाने का वादा कर दिया,,,,।

दूसरी तरफ शुभम दूसरे दिन स्कूल में शीतल को यह बता दिया कि उसकी मां को हम दोनों के बीच कुछ खिचड़ी पक रही है इस बारे में शंका हो गई है इसलिए कुछ दिन तक वह दूरी बनाकर रखें वर्ना सारा काम बिगड़ जाएगा यह बात सुनकर शीतल को भी झटका लगा था और वह भी वह नहीं चाहती थी कि यह बात निर्मला को किसी भी कीमत पर पता चला क्योंकि शीतल कुछ लंबे प्लान में ही थी। सुबह अपने पति को लेकर चिंतित हो गई क्योंकि भविष्य की खुशियां शुभम से ही जुड़ी हुई थी इसलिए वह कुछ दिन तक अपने आप को संभालने की कोशिश करने लगी। लेकिन कितने दिन तक वह अपने आप पर सब्र कर ती शुभम की हाजिरी ले वह अजीब सा महसुस करने लगती थी,, जब भी सुभम उसकी आंखों के सामने होता था तो,

ऊसकी बुर में चींटिया रेंगने लगती थी,,, उसका बदन मीठे-मीठे दर्द से टूटने लगता था उसकी बुर में खुजली सी महसूस होने लगती थी,, और वह अच्छी तरह से जानती थी कि यह खुजली कौन मिटा सकता है।

उससे यह खुजली बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं हो रही थी,,, और एक दिन रीशेष मे वह सुभम को इशारे से अपने रूम में बुलाई,,,। शुभम भी रिशेष होते ही शीतल के रूम की तरफ जाने लगा रिशेष होने की वजह से सभी कमरे खाली थे सारे स्टूडेंट स्कूल के ग्राउंड में थे। शीतल कुर्सी पर बैठ कर बड़ी बेसब्री से शुभम का इंतजार कर रही थी।

 
मदमस्त शीतल जवानी से भरी हुई थी,,, हालांकि उसकी जवानी के रस को पीने वाला सछम रूप से असली मर्द मिला ही नहीं था जो कि उसकी जवानी को रगड़ कर उसका रस निचोड़ सकें इसलिए तो वह तड़प रही थी अपनी जवानी के रस को बाहर निकालने के लिए और ऐसा सक्षम और संपूर्ण रूप से बलशाली मर्द शुभम ही था।,,, इसलिए तो जब से शुभम ने बताया था कि उसकी मां को उन दोनों पर शक होने लगा है तब से, दोनों ने मिलना कम कर दिया था ताकी निर्मला को उन पर बिल्कुल भी शक ना हो। लेकिन यह दूरी अब शीतल से बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं हो रही थी,, शुभम शेगाव जाने के बाद शुभम को याद करके ना जाने कितनी बार उसने अपनी हथेली से अपनी गरम बुर को रगड़ कर शांत करने की कोशिश की थी,, इससे उसकी प्यास बढ़ती जरूर थी लेकिन शुभम की कल्पना करने से उसके तन मन को बेहद शांति प्रतीत होती थी। लेकिन शुभम के शहर वापस आ जाने के बाद शीतल के सब्र का बांध अब टूटने लगा था।,,, इसलिए तो उसके मन में इस समय बेहद अजीब से हालात उमड़ रहे थे कुर्सी पर बैठ कर वा टेबल से हाथों की कोहनी को टीकाकर शुभम के बारे में सोच रही थी।,,,, तभी दरवाजे पर दस्तक हुई ।

मे आई कम इन मैडम,,,

ओहहहह अाओ सुभम में कब से तुम्हारा इंतजार कर रही थी (टेबल पर से अपने दोनों कहानियों को हटाते हुए मुस्कुराकर शीतल बोली।)

मेरा इंतजार लेकिन क्यों मैडम आप तो जानते ही हैं कि मम्मी को हम दोनों पर कुछ शक सा होने लगा है,,, ऐसे में हम दोनों को स्कूल में इस तरह से मिलना,,,,

हां मैं जानती हूं शुभम हम दोनों को इस तरह से नहीं मिलना चाहिए,,,( शुभम की बात पूरी होने से पहले ही उसकी बात को बीच में काटते हुए शीतल बोली तब तक शुभम अंदर आ चुका था) लेकिन क्या करूं शुभम तुम्हारी मौजूदगी में मुझे तुमसे मिले बिना रहा नहीं जा रहा है,,,। ना जाने मुझे क्या हो गया है मैं सब कुछ जानती हूं कि तुम्हारी उम्र और मेरी उम्र में जमीन आसमान का फर्क है मैं उम्र में लगभग तुम्हारी मम्मी के समान ही हूं लेकिन फिर भी मुझे ना जाने क्यों तुमसे प्यार होने लगा है।,,,

मेडम,,,,,, ( आश्चर्य से सुभम बोला)

मैडम नहीं मुझे शीतल बोला करो इस तरह से अकेले में मुझे शीतल ही बोला करो,,, मैं जानती हूं कि तुम्हें बड़ा अजीब लग रहा होगा कि मैं यह क्या बोल रही हूं लेकिन जो मैं कह रही हो बिल्कुल सच है,,,,।( इतना कहते हुए शीतल कुर्सी पर से खड़ी हुई और धीरे धीरे चलते हुए सुभम के करीब जाने लगी,,,, शीतल की बातों को सुनकर शुभम के तन बदन में झुंरझुकी से फैलने लगी थी,, शीतल शुभम के बिल्कुल करीब जाते हुए बोली,,,।)

शुभम मैं तुमसे प्यार करने लगी हुं,, और प्यार करने की कोई उम्र की सीमा नहीं होती यह तो अपने आप ही दिल से हो जाता है,,,,

( शीतल की बातें शुभम को प्रभावित कर रही थी और इस समय यह रोमांटिक बातें शुभम को बेहद उत्तेजक लग रही थी शुभम की उत्तेजना को बढ़ाने के उद्देश्य से शीतल लंबी लंबी सांसे भरते हुए अपने विशाल स्तनों को ऊपर नीचे कर रही थी और शुभम की नजरें शीतल के ऊपर नीचे हो रही छातियों पर टिकी हुई थी जोकि ट्रांसपेरेंट साड़ी होने की वजह से चूचियों के बीच की खाई साफ साफ नजर आ रही थी। शीतल कि चोर नज़रों ने अपनी शारीरिक चेष्टाओ के द्वारा शुभम के भजन में आए बदलाव को साफ तौर पर देख रही थी और यह भी देख रही थी कि उसके बदन मे उत्तेजना का असर बेहद तीव्र गति से हो रहा है जिसके फलस्वरूप शुभम के पेंट का तंबू ऊंचा उठने लगा था ओर यह देख कर शीतल की बुर कुलबुलाने लगी थी,,।,,, उसके बदन में भी उत्तेजना का असर बड़ी तीव्र गति से हो रहा था,,, वह अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,,,।)

शुभम तुम्हें देख कर जिस तरह का अनुभव मैं करती हूं क्या तुम भी वैसा ही अंबा करते हो,,, बोलो सुभम क्या तुम भी मुझसे प्यार करते हो,,,,, ( शीतल जैसी खूबसूरत औरत का यह प्रस्ताव और उसकी रोमांटिक बातों को सुनकर शुभम के बदन में रोमांच फैल गया था। उसे समझ में नहीं आ रहा था कि कल के इस तरह के ईस तरह के इजहार का वह क्या जवाब दे,,, उसे भला कब इंकार होने वाला था,,, शीतल के अोंफर से तो उसकी दसो उंगलियां घी में नजर आ रही थी,,,, सुभम की सबसे तेज गति से चलने लगी थी क्योंकि शीतल सुभम के बहुत करीब आ चुकी थी,, इतने करीब कि दोनों की सांसे एक दूसरे के चेहरे पर अठखेलियां कर रही थी,, शीतल भी कामज्वर से तप रही थी,,,, उसके बदन में कामाग्नि की ज्वाला भड़क रही थी,,,,, वह इतनी ज्यादा रोमांचित और उत्तेजित हो चुकी थी कि शुभम का जवाब जाने बिना ही वह तुरंत अपनी गुलाबी होठों को सुगम के होठों पर रख कर पागलों की तरह ऊसे चूसना शुरू कर दी,,, शुभम भला कैसे शांत रहने वाला था,,,, अगर वह इस स्थिति में शांत रहना चाहता भी तो भी शांत नहीं रह सकता था भला एक जवान मर जवानी से भरपूर मतलब काया को अपने बदन से लिपटा हुआ पाकर कब तक शांत रह पाता,,, शुभम ने भी वही किया जो इस वक्त एक जवान मर्द को करना चाहिए था वह भी अपनी बाहों को खोल कर शीतल को अपनी बाहों में भर लिया,,,, जवानी से भरपुर सीतल की मदमस्त काया सुभम की भुजाओं में समा नहीं पा रही थी,,, लेकिन फिर भी सुबह में अपनी ताकत का प्रदर्शन करते हुए सीतल की मदमस्त काया को अपनी भुजाओं में ताकत लगाकर समाए हुए था। कुछ ही सेकंड मे सुभम मदहोश हो गया और मदहोशी के असर मे सुभम की दोनो हथेलियां शीतल के संगमरमकरी बदन पर फिराने लगा,,,सुभम सीतल के बड़े बड़े नितंबो को बड़ी मदहोशी के साथ अपनी हथेली मे भरकर दबा रहा था।

भले ही सुभम शीतल की बड़ी बड़ी गांड को साड़ी के ऊपर से दबा रहा था, लेकीन सीतल की नंगी गांड की गर्माहट को पुरी तरह से महसुस कर रहा था। शुभम की हथेलिया शीतल के ऊस अंग पर अधिक फीर रही थी जहा पर ऊसके अंग वस्त्र से ढंके हुए नही थे। दोनो पुरी तरह से गरमा चुके थै। शीतल एकदम मदहोश हो चुकीथी । शीतल के बदन की गर्मी शुभम को पूरी तरह से अपने आगोश में ले चुकी थी, बरसो से प्यासी शीतल मदहोशी के नशे मे यह भी भुल गई की, वह एक शक्षिका है,, और वह क्लासरूम मे है। काफी दिनों से

सुभम की गैरहाजीरी मे ऊसकी कल्पना कर करके शीतल बहुत गर्म हो चुकी थी,, खास करके शीतल की कल्पनाओ को घोड़ा सुभम के मोटे लंड की सवारी करता रहता था, इसलिए शीतल चुदवासी होकर सुभम के मोटे लंड को पेंट के ऊपर से पकड़कर दबाना शुरु कर दी, दोनों के होठ अभी भी आपस में भिड़े हुए थे,, और सुभम पागलो की तरह शीतल के लाल लाल होठो को चुसता हुआ ऊसकी चुचीयां दबा रहा था। दोनों की गर्म सांसे पुरे क्लासरुम मे गुंजने लगी थी । शीतल लंड की प्यासी हो चुकी थी ईसलिए वह सुभम के पेंट की बटन खोलकर ऊसके मोटे तगड़े लंड को पकड़कर हीलाना शुरु कर दी,,,

ओहहहहहहह सुभम तेरालंड तो बहुत मोटा और लंबा है।,,, ( ऐसा कहते हुए वह सुभम के लंड को जोर जोर से हीलाने लगी,,, सुभम बिना जवाब दीए शीतल की जवानी से खेल रहा था। शीतल चुदवासी हो चुकी थी। वह यह भुल गई की वह स्कुल मे है,, वह पुरी तरह से सुभम के लंड को अपनी बुर मे लेने की मन बना चुकी थी वह सुभम के लंड को एकबार फीर से अपने मुंह मे लेकर चुसना चाहती थी, ईसलिए वह नीचे झुकने ही वाली थी की भड़ाक से दरवाजा खुला और दरवाजे पर निर्मला को देखकर दोनो बुरी तरह से चोंक गए।

 
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