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अनामिका

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StoryPublisher

Guest
दोस्तों आपकी खिदमत में एक और नई कहानी शेयर करने जा रहा हूँ | आल क्रेडिट गोज टू ओरिजिनल राइटर | उम्मीद करता हूँ आपको पसंद आएगी |
 
मैं बचपन से ही बहुत सुंदर थी | मेरा एक छोटा भाई है विक्की | विक्की मुझसे दो साल छोटा है | विक्की भी लम्बा तगड़ा जवान है | मेरी छातियाँ भर आई थी | बगल में और टांगों के बीच में काफी बाल निकलने लगे थे | 18 साल तक पहुँचते पहुँचते तो मैं मानो पूरी जवान लगने लगी थी | गली में और बाज़ार में लड़के आवाजें कसने लगे थे | ब्रा की ज़रुरत तो पहले से ही पड गई थी | 18 साल में साइज़ 34 इंच हो गया था | अब तो टांगों के बीच में बाल बहुत ही घने और लम्बे हो गए थे | हालाँकि कमर काफी पतली थी | लेकिन मेरे चुतड काफी भारी और चौड़े हो गए थे | मुझे एहसास होता जा रहा था कि लड़कों को मेरी दो चीज़ें बहुत आकर्षित करती हैं , मेरे चुतड और मेरी उभरी हुई छातियां | स्कूल में मेरी बहुत सी सहेलियों के चक्कर थे लेकिन मैं कभी इस लफड़े में नहीं पड़ी | स्कूल से ही मेरे पीछे बहुत से लड़के दीवाने थे | लड़कों को और भी ज्यादा तडपाने में मुझे बड़ा मज़ा आता था | स्कूल में सिर्फ घुटनों से नीचे तक की स्कर्ट ही अलाऊड थी | क्लास में बैठ कर मैं अपनी स्कर्ट जांघों तक चढ़ा लेती थी और लड़कों को अपनी गोरी गोरी सुडोल मांसल टांगों के दर्शन कराती रहती |

कई लड़के जानबूझ कर अपना पेन या पेंसिल नीचे गिराकर उठाने के बहाने मेरी टांगों की बीच में झांक कर मेरी पैंटी की झलक पाने की नाकामयाब कोशिश करते रहते |

16 साल की उम्र में तो मेरा बदन पूरी तरह से भर गया था | अब तो अपनी जवानी को कपड़ों में समेटना मुश्किल होता जा रहा था | छातियों का साइज़ 36 इंच हो गया था | मेरे चूतडों को संभालना मेरी पैंटी के बस में नहीं रहा और तो और टांगों के बीच में बाल इतने घने और लम्बे हो गए थे कि बाहर निकलने लगे थे | ऐसी अल्हड़ जवानी किसी पर भी कहर बरसा सकती थी | मेरा छोटा भाई विक्की भी जवान हो रहा था | लेकिन आप जानते हैं लड़कियां जल्दी जवान हो जाती हैं | हम दोनों एक ही स्कूल में पड़ते थे | हम दोनों भाई बहन में बहुत प्यार था | कभी कभी मुझे महसूस होता कि विक्की भी मुझे अक्सर और लड़कों की तरह देखता है |

लेकिन मैं यह विचार मन से निकाल देती | लड़कों की और मेरा आकर्षण बढता जा रहा था , लेकिन मैं लड़कों को तडपाकर ही खुश हो जाती थी | मेरी एक सहेली थी नीलम , उसका कॉलेज के लड़के सुधीर के साथ चक्कर था | वो अक्सर अपने इश्क की रसीली कहानियां सुनाया करती थी | उसकी कहानियां सुनकर मेरे बदन में भी आग लग जाती | नीलम और सुधीर के बीच में शारीरक सम्बन्ध भी थे | नीलम ने ही मुझे बताया था कि लड़कों के गुप्तांगों को लंड या लौडा और लड़कियों के गुप्तांगों को चूत या फुद्दी कहते हैं | जब लड़के का लंड लड़की की चूत में जाता है तो उसे चोदना कहते हैं | नीलम ने ही बताया कि जब लड़के उत्तेजित होते हैं तो उनका लंड और भी लम्बा मोटा और सख्त हो जाता है | जिसको लंड का खड़ा होना बोलते हैं | 16 साल की उम्र तक मुझे ऐसे शब्दों का पता नहीं था | अभी तक ऐसे शब्द मुंह से निकालते हुए मुझे शर्म आती है | पर लिखने में संकोच कैसा? हालाँकि मैंने बच्चों की नूनियां बहुत देखी थी | पर आजतक किसी मर्द का लंड नहीं देखा था | नीलम के मुंह से सुधीर के लंड का वर्णन सुनकर मेरी चूत भी गीली हो जाती | सुधीर नीलम को हफ्ते में तीन चार बार चोदता था |

एक बार मैं सुधीर और नीलम के साथ स्कूल से भाग कर फिल्म देखने गई | पिक्चर हाल में नीलम हम दोनो के बीच में बैठी थी | लाइट ऑफ हुई और पिक्चर शुरू हुई | कुच्छ देर बाद मुझे ऐसा लगा मानो मैंने नीलम के मुंह से सिसकी की आवाज़ सुनी हो | मैं कनखियों से नीलम की और देखा | रौशनी कम होने के कारण साफ़ तो दिखाई नहीं दे रहा था | पर जो कुछ दिखा , उसे देख कर मैं दंग रह गई | नीलम की स्कर्ट जांघों तक उठी हुई थी और सुधीर का हाथ नीलम की टांगों के बीच में था | सुधीर की पैंट के बटन खुले हुए थे और नीलम सुधीर के लंड को सहला रही थी | अँधेरे में मुझे सुधीर का लंड का साइज़ तो पता नहीं लगा | लेकिन जिस तरह नीलम उस पर हाथ फेर रही थी | उससे लगता था कि काफी बड़ा होगा | सुधीर का हाथ नीलम की टांगों के बीच में क्या कर रहा होगा , यह सोच सोच कर मेरी चूत बुरी तरह से गीली हो चुकी थी और पैंटी को भी गीला कर रही थी | इंटरवल में हम लोग बाहर कोल्ड ड्रिंक पीने गए | नीलम का चेहरा उत्तेजना से लाल हो गया था | सुधीर की पैंट में भी लंड का उभार साफ़ नज़र आ था | सुधीर ने मुझे अपने लंड के उभार की और देखते हुए पकड लिया | मेरी नज़रें उसकी नज़रों से मिली और मैं मारे शर्म के लाल हो गई | सुधीर मुस्कुरा दिया | किसी तरह इंटरवल ख़त्म हुआ और मैंने चैन की सांस ली | पिक्चर शुरू होते ही नीलम का हाथ फिर से सुधीर के लंड पे पहुच गया | लेकिन सुधीर ने अपना हाथ नीलम के कन्धों पर रख लिया | नीलम के मुंह से सिसकी की आवाज़ सुन कर मैं समझ गई कि अब वो नीलम की चूचियां दबा रहा था | अचानक सुधीर का हाथ मुझे टच करने लगा | मैंने सोचा गलती से लग गया होगा , लेकिन धीरे धीरे वो मेरी पीठ सहलाने लगा और मेरी ब्रा के ऊपर हाथ फेरने लगा | नीलम इससे बिलकुल बेखबर थी | मैं मारे डर के पसीना पसीना हो गई और हिल ना सकी | अब सुधीर का साहस और बढ़ गया और उसने साइड से हाथ डाल कर मेरी उभरी हुई चूची को शर्ट के ऊपर से पकड कर दबा दिया | मैं बिलकुल बेबस थी, उठकर चली जाती तो नीलम को पता लग जाता | हिम्मत मानो जवाब दे चुकी थी | सुधीर ने इसका पूरा फायदा उठाया | वो धीरे धीरे मेरी चूची सहलाने लगा | इतने में नीलम मुझसे बोली , “अनामिका पेशाब लगी है , ज़रा बाथरूम जा कर आती हूँ” | मेरा कलेजा तो धक से रह गया | जैसे ही नीलम गई | सुधीर ने मेरा हाथ पकडकर अपने लंड पर रख दिया | मैंने एकदम से घबरा कर हाथ खींचने की कोशिश की , लेकिन सुधीर ने मेरा हाथ कस कर पकड रखा था | लंड काफी गरम,मोटा और लोहे के सामान सख्त था |

मैं रुआंसी हो कर बोली ,“सुधीर यह क्या कर रहे हो? छोडो मुझे, नहीं तो नीलम को बता दूंगी”|

सुधीर मंजा हुआ खिलाडी था , बोला, “मेरी जान तुम पर तो मैं मरता हूँ , तुमने मेरी रातों की नींद चुरा ली है , मैं तुमसे बहुत प्यार करने लगा हूँ” | यह कहकर वो मेरा हाथ अपने लंड पर रगड़ता रहा |

“सुधीर तुम नीलम को धोखा दे रहे हो , वो बेचारी तुमसे शादी करना चाहती है और तुम दूसरी लड़कियों के पीछे पड़े हो”

“अनामिका मेरी जान तुम दूसरी कहाँ , मेरी हो नीलम से दोस्ती तो मैंने तुम्हें पाने के लिए की थी”

“झूठ ! नीलम तो अपना सब कुछ तुम्हे सौंप चुकी है , तुम्हें शर्म आनी चाहिए , उस बेचारी को धोखा देते हुए , प्लीज मेरा हाथ छोड़ो” |

इतने में नीलम वापिस आ गई | सुधीर ने झटसे मेरा हाथ छोड़ दिया | मेरी लाचारी का फायदा उठाने के कारन मैं बहुत गुस्से में थी , लेकिन ज़िन्दगी में पहली बार किसी मर्द के खड़े लंड को हाथ लगाने के अनुभव से खुश भी थी | नीलम के बैठने के बाद सुधीर ने फिर से अपना हाथ उसके कंधे पर रख दिया | नीलम ने उसका हाथ अपने कन्धों से हटाकर अपनी टांगों के बीच में रख दिया और सुधीर के लंड को फिर से सहलाने लगी | सुधीर भी नीलम की स्कर्ट में हाथ डाल कर उसकी चूत सहलाने लगा | जैसे ही नीलम ने जोर की सिसकी ली | मैं समझ गयी कि सुधीर ने अपनी ऊँगली उसकी चूत में घुसा दी है |

इस घटना के बाद मैंने सुधीर से बिलकुल बात करना बंद कर दिया , लेकिन अब सुधीर मेरे घर के चक्कर लगाने लगा और मेरे भाई विक्की से भी दोस्ती कर ली | वो विक्की से मिलने के बहाने घर आने लगा | लेकिन मैंने उसे कभी लिफ्ट नही दी | कुछ दिनों बाद हमने अपना घर बदल लिया | सुधीर यहाँ भी आने लगा |

 
मेरे कमरे के बाहर खुला मैदान था | लोग अक्सर मेरी खिड़की के नज़दीक पेशाब करने खड़े हो जाया करते थे | मेरी तो मानो मन की मुराद ही पूरी हो गई | मैं रोज़ खिड़की के पीछे से लोगों को पेशाब करते देखती | दिन में कम से कम 10 से 15 लोगों के लंड के दर्शन हो जाते थे | मुझे काफी निराशा होने लगी | क्योंकि किसी भी आदमी का लंड 2 se 3 इंच से लम्बा नहीं था | सभी लंड सिकुड़े हुए और भद्दे से लगते थे | किसी का भी लंड देखने लायक नहीं था |

नीलम ने मुझे हिंदी की सेक्स की कहानियों की एक दो किताबें दी थी | उनमें तो 8 इंच या 10 इंच के लंड का वर्णन था | यहाँ तक कि एक किताब में एक फूट लम्बे लंड का भी ज़िक्र था | कई दिन इंतज़ार करने के बाद मेरी मनोकामना पूरी हुई |

एक दिन मैं और नीलम मेरे कमरे में पढ़ रहे थे कि नीलम की नज़रे खिड़की के बाहर गई | उसने मुझे कोहनी मार के बाहर देखने का इशारा किया | खिड़की के बिलकुल नज़दीक ही एक लम्बा तगड़ा साधू खड़ा इधर उधर देख रहा था | अचानक साधू ने अपना तहमद पेशाब करने के लिए ऊपर उठाया | मेरे मुंह से तो चीख ही निकल गयी | साधू की टांगों की बीच में मोटा , काला और बहुत ही लम्बा लंड झूल रहा था | ऐसे लग रहा था जैसे उसका लंड उसके घुटनों से तीन या चार इंच ही ऊँचा था | नीलम भी पसीनो पसीने हो गयी | लंड बहुत ही भयंकर लग रहा था | साधू ने दोनों हाथों से अपना लंड पकडके पेशाब की | साधू का लंड देख कर मुझे गधे के लंड की याद आ गयी | मैदान में कई गधे घुमते थे | जिनके लटकते हुए मोटे लम्बे लंड को देख कर मेरी चूत गीली हो जाती थी | जब साधु चला गया तो नीलम बोली, “हाए राम ! ऐसा लंड तो औरत की जिन्दगी संवार दे , खड़ा हो के तो बिजली के खम्बे जैसा हो जायेगा , काश मेरी चूत इतनी खुशनसीब होती” |

“ नीलम ! नीलम ! तू यह क्या बोल रही है , कण्ट्रोल कर , तुझे तो सिर्फ सुधीर के बारे में ही सोचना चाहिए” |

“हाँ मेंरी प्यारी अनामिका ! फर्क सिर्फ इतना है कि सुधीर का खड़ा होके 6 इंच का होता है और साधू महाराज का सिकुड़ा हुआ लंड भी 10 इंच का था , जरा सोच अनामिका , एक फूट का मूसल तेरी चूत में जाए तो तेरा क्या होगा , भगवान् की माया देख , एक फूट का लौडा दिया भी उसे , जिसे औरत में कोई दिलचस्पी नहीं” |

“तुझे कैसे पता साधू महाराज को औरतों में दिलचस्पी नहीं है , हो सकता है साधू महाराज अपने लंड का पूरा इसतेमाल करते हों”, मैंने नीलम को चिड़ाते हुए कहा |

“हाए मैं मर जाऊं , काश तेरी बात बिलकुल सच हो , साधू महाराज की रास लीला देखने के लिए तो मैं एक लाख रूपये देने को तैयार हूँ” |

“और साधू महाराज से चुदवाने के लिए?”

“ऊईइउउइ माँ ,,,,साधू महाराज से चुदवाने के लिए तो मैं जान भी देने को तैयार हूँ , अनामिका तूने चुदाई का मज़ा लिया ही कहाँ है , तूने कभी घोडे को घोडी पर चडते देखा है? जब तीन फूट का लौडा घोड़ी के अंदर जाता है तो उसकी हालत देखते ही बनती है , साधू महाराज जिस औरत को चोदेंगे , उस औरत का हाल भी घोड़ी जैसा ही होगा” |

मैंने कुत्ते को कुतिया पर और सांड को गाय पर चडते तो देखा था लेकिन घोड़े को घोड़ी पर चडते कभी नहीं देखा था | अब तो साधू महाराज का लंड मुझे सपनो में भी आने लगा | बड़े और मोटे लंड की तो मैं दीवानी हो गयी थी हालाँकि मेरे हजारों दीवाने थे , पर मैं किसी को लिफ्ट नहीं देती थी | मुझे उन सबका इरादा अच्छी तरह मालूम था |

अब मैं 18 बरस की हो गयी थी और स्कूल में 12 क्लास में मेरा आखरी साल था | मुझे साड़ी में देख कर कोई कह नहीं सकता था कि मैं स्कूल में पड़ती हूँ | छातियाँ 38 इंच होने जा रही थी | मेरे बदन का सबसे सेक्सी हिस्सा शायद मेरे भारी नितम्ब थे | लड़कों को देखकर मैं और मटक कर चल्रती | उनकी आहें सुन कर मुझे बड़ा मज़ा आता | अक्सर मेरे नितम्बो पर लड़के कमेंट पास किया करते थे | एक दिन तो हद ही हो गई | मैंने एक लड़के को बोलते सुना, “हाए क्या कातिल चुतड हैं , आजा मेरी जान पूरा लौडा तेरी गांड में पेल दूँ” मैं ऐसी अश्लील बातें खुलेआम सुनकर दंग रह गई | जब मैंने उस लड़के के कमेंट के बारे में नीलम को बताया तो वो हसने लगी |

“तू कितनी अनाडी है अनामिका , तेरे चुतड हैं ही इतने सेक्सी कि किसी भी लड़के का मन डोल जाए”

“लेकिन वो तो कुछ और भी बोल रहा था |

“तेरी गांड में लंड पेलने को बोल रहा था? मेरी भोली भाली सहेली बहुत से मर्द औरत की चूत ही नहीं , गांड भी चोदते हैं , ख़ासकर तेरी जैसी लड़कियों की , जिनकी गांड इतनी सुंदर हो अभी तो सती सावित्री है , जब तेरी शादी होगी तो याद रख एक दिन तेरा पति तेरी गांड जरुर चोदेगा , सच अनामिका अगर मेरे पास लंड होता तो मैं भी तेरी गांड ज़रूर मारती” |

“हट नालायक, सुधीर ने भी तेरी गांड चोदी है?”

“नहीं रे अपनी किस्मत में इतने सेक्सी चुतड कहाँ” |

मुझे पहली बार पता लगा कि औरत की आगे और पीछे दोनों और से ली जाती है | तभी मेरे आँखों के सामने साधू महाराज का लंड घूम गया और मैं काँप उठी | अगर वो बिजली का खम्बा गांड में गया तो क्या होगा मुझे अभी भी नीलम की बात पर विश्वास नहीं हो रहा था | इतने छोटे से छेद में लंड कैसे जाता होगा |

इस दौरान सुधीर ने मेर भाई विक्की से अच्छी दोस्ती कर ली थी | दोनों साथ साथ ही घूमा करते थे | एक दिन जब मैं बाज़ार से वापिस आई तो मैंने देखा कि सुधीर और विक्की ड्राइंग रूम में कुछ खुसर फुसर कर रहे हैं और हंस भी रहे हैं | मैं दीवार से कान लगाकर उनकी बातें सुनने लगी उनकी बातें सुनके मैं हैरान रह गई |

 
सुधीर कह रहा था ,

“विक्की तूने कभी किसी लड़की की चूत देखी है ?”

“नहीं यार अपनी किस्मत ऐसी कहाँ ? तूने देखी है ?”

“देखि ही नहीं , ली भी है”

“झूठ मत बोल किसकी ली है ?”

“तू विश्वास नहीं करेगा”

“अरे यार बोल ना विश्वास की क्या बात है?”

“तो सुन , तेरी बहन अनामिका की सहेली नीलम को मैं रोज़ चोदता हूँ ?”

“क्या बत कर रहा है ? मेरी दीदी की सहेलियां ऐसी हो नहीं सकती , मेरी दीदी ऐसी लड़कियों से दोस्ती नहीं कर सकती” |

“देख विक्की तू बहुत भोला है , तेरी बहन जवान हो चुकी है और अच्छी तरह जानती है कि नीलम मुझसे चुद्वाती है”

“मैं सोच भी नहीं सकता कि दीदी ऐसी लड़की से दोस्ती रखती है”

“विक्की एक बात कहूँ , बुरा तो नहीं मानेगा ?”

“नहीं , बोल”

“यार तेरी दीदी भी पटाका है , क्या गदराया हुआ बदन है , तूने कभी अपनी दीदी की और ध्यान नहीं दिया?”

“सुधीर क्या बकवास कर रहा है, अगर तुम मेरा दोस्त नहीं होता तो मैं तुझे धक्के मार के घर से निकाल देता”

“नाराज़ मत हो मेरे दोस्त , तू और मैं दोनों मर्द हैं , लड़की तो लड़की ही होती है , बहन ही क्यों ना हो , सच कहूँ , मैं तो अपनी बड़ी बहन को कई बार नंगी देख चूका हूँ , मैंने बाथरूम के दरवाज़े में एक छेद कर रखा है , जब भी वो नहाने जाती है तो मैं उस छेद में से उसको नंगी नहाते हुए देखता हूँ , तू मेरे साथ घर चल , एक दिन तुझे भी दिखा दूंगा , अब तो खुश है ना , सच सच बता तूने अपनी दीदी को नंगी देखा है”?

विक्की थोडा हिचकिचाया और फिर जो बोला उसे सुन कर मैं दंग रह गई |

“नहीं यार दिल तो बहुत करता है , लेकिन मौका कभी नहीं मिला , कभी कभी दीदी जब लापरवाही से बैठती है तो एक झलक उसकी पैंटी की मिल जाती है , जा कभी वो नहा कर निकलती है , तो मैं झट से बाथरूम में घुस जाता हूँ और उसकी उतारी हुई पैंटी को सूंघ लेता हूँ और अपने लंड पे रगड लेता हूँ” |

“वह प्यारे! तू तो छुपा रुस्तम निकला , कैसी सुगंध है तेरी दीदी की चूत की”?

“बहुत ही मादक है यार, दीदी की चूत पे बाल भी बहुत लम्बे हैं , अक्सर पैंटी पर रह जाते हैं ,कम से कम तीन इंच लम्बी झांटें होंगी” |

“हाए यार मेरा लंड तो अभी से खड़ा हो रहा है ,एक दिन अपनी दीदी की पैंटी की महक हमें भी सुंघा दे, तेरा कभी अपनी दीदी को चोदने का मन नहीं करता?”

“करता तो बहुत है , लेकिन जो चीज़े मिल नहीं सकती , उसके पीछे क्या पड़ना? दीदी के नाम की मुठ मार लेता हूँ” |

विक्की और सुधीर की बातें सुनकर मेरा पसीना छूट गया | मेरा सगा भाई भी मुझे चोदना चाहता है | मैंने अब अपनी पैंटी बाथरूम में कभी नहीं छोड़ी | मुझे डर था कि विक्की मेरी पैंटी सुधीर को ना दे दे | मुझे विक्की से कोई शिकायत नहीं थी | आखिर वो मेरा छोटा भाई था | अगर विक्की मुझे नंगी देखने के लिए इतना उतावला था तो हालाँकि मैं उसके सामने खुलेआम नंगी तो नहीं हो सकती थी | पर किसी ना किसी बहाने अपने बदन के दर्शन ज़रूर करा सकती थी | स्कूल ड्रेस में अपनी पैंटी की झलक देना बड़ा आसान था | सोफे पर बैठ कर टीवी देखते वक़्त अपनी टांगों को पकड कर फैला लेती | विक्की को मेरी पैंटी के दर्शन हो जाते |

एक दिन मैं स्कूल ड्रेस में ही लेटी बुक पड रही थी | कि विक्की के क़दमों की आहट सुनाई दी | मैंने झट से टांगें मोड़ कर ऊपर कर ली और बुक पड़ने का नाटक करती रही | मेरी गोरी गोरी मांसल टांगें पूरी तरह नंगी थी | स्कर्ट कमर तक ऊपर चढ़ गयी थी | मैंने ज्यादा ही छोटी पैंटी पहन रखी थी | जो बड़ी मुश्किल से मेरी चूत को ढके हुए थी | मेरी लम्बी घनी झांटें पैंटी के दोनों और से बाहर निकली हुई थी | इतने में विक्की आ गया और सामने का नज़ारा देख कर हडबडा कर खड़ा हो गया | उसकी आँखें मेरी टांगों की बीच में जमी हुई थी | इस मुद्रा की प्रैक्टिस मैं शीशे के सामने पहले ही कर चुकी थी | मुझे भली भांति पता था कि इस वक़्त मेरी चूत के घने बाल पैंटी के दोनों और से झांक रहे थे | पैंटी बड़ी मुश्किल से मेरी फूली हुई चूत के उभार को ढके हुए थी | मैंने उसे जी भर के अपनी पैंटी के दर्शन करवाए | इतने में मैंने बुक नीचे करते हुए पूछा , “विक्की क्या कर रहा है ? कुछ चाहिये?”

विक्की एकदम से हडबडा गया | उसका चेहरा उत्तेजना से लाल था | “कुछ नहीं दीदी अपनी बुक ढूंढ रहा था” | उसकी पैंटी के उभार को देख कर मैं समझ गई कि उसका लंड खड़ा हो गया है | लेकिन विक्की की पैंट का उभार देख कर ऐसा लगता था कि उसका लंड काफी बड़ा था | जब से विक्की के पैंट का उभार देखा | तब से मेरे दिमाग में एक ही बात घूमने लगी कि किस तरह विक्की का लंड देखा जाए |

मुझे पता था कि विक्की रात को लुंगी पहन कर सोता है | मेरे दिमाग में एक प्लान आया | मैं रोज़ सुबह जल्दी उठ कर विक्की के कमरे में इस आस में जाती कि किसी दिन उसकी लुंगी खुली हुई मिल जाए , जा कमर तक उठी हुई मिल जाए और मैं उसके लंड के दर्शन कर सकूँ | कई दिन तक किस्मत ने साथ नहीं दिया | अक्सर उसकी लुंगी जाँघों तक उठी हुई होती | लेकिन लंड फिर भी नज़र नहीं आता | लेकिन मैंने भी हार नहीं मानी आखिर एक दिन मैं कामयाब हो ही गयी |

एक दिन जब मैं विक्की के कमरे में घुसी तो देखा विक्की पीठ के बल लेटा हुआ है | उसकी लुंगी सामने से खुली हुई थी | सामने का नज़ारा देख कर तो में बैहोश होते होते बची | मैंने तो सपने में भी ऐसे नज़ारे की कल्पना नहीं की थी | इतना लम्बा! इतना मोटा! इतना काला लंड! जैसे के मैंने बताया विक्की पीठ के बल लेटा हुआ था | लेकिन उसके लंड का सुपाड़ा बिस्तर पर टिका हुआ था | बाप रे बाप! मैंने अपने आप को नोचा | कहीं मैं सपना तो नहीं देख रही थी | क्या भयंकर लग रहा था विक्की का लंड! इसने तो साधू महाराज के लंड को भी मात दे दी |

अब तक तो मैं लंड एक्सपर्ट हो चुकी थी | नीलम और मैंने अब तक ना जाने कितने छोटे छोटे पेशाब करते भद्दे से लंड देखे थे | मैं मन ही मन सोचने लगी कि घर में इतना लम्बा मोटा लंड मौजूद है और मैं बेकार में ही दूसरों के लंड देख्ने में अपना समय बर्बाद कर रही थी | मुझे तो जैसे सांप सूंघ गया था | अचानक विक्की ने हरकत की और मैं जल्दी से भाग गई | उसदिन के बाद से तो मेंरी नींद हराम हो गई | रोज़ सुबह पागलों की तरह उठ के विक्की के लंड के दर्शन करने उसके कमरे में जाती लेकिन हमेशा निराशा ही हाथ लगती | मैंने सोच लिया था कि एक दिन यह लंड मेरी चूत में ज़रूर जाएगा |

 
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