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अनोखी चुदाई complete

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मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था, मैं आराम से लेट गई थी, तब जय ने कहा – भीमा, ऊपर तक तेल मालिश करो…

यह कहते ही, मैंने कहा – क्या कहते हो… अब रहने दो…

जय बोला – भीमा, इन की मैक्सी ऊपर तक कर दो…

जय ने मेरी मैक्सी, चूतड़ों तक उठा दी..

मैंने बहुत ही, पतली सी चड्डी पहन रखी थी.

उसके उपर उठाते ही, मेरी चूत ने अपनी “धार” छोड़ दी.

कसम से, अपने पति के सामने नंगी होने का मज़ा क्या होता है ये मुझ से अच्छे से कोई नहीं जानता..

जैसे ही, भीमा ने तेल लगाया और मालिश करने लगा मैं तो जैसे आनंद में आ गई.

तभी जय ने कहा – सुमन, सीधी हो कर भी मालिश करवा लो… मैं बाद में करवा लूँगा…

मैं सीधी हो गई और भीमा, मालिश करने लगा..

मैंने देखा की भीमा का 10” लण्ड खड़ा हो गया है.

जय को मैंने इशारा किया की देख लो… अब इस घोड़े का खड़ा हो गया है…

मैंने इंग्लीश में कहा की इसे अपनी गाण्ड में ले लो, बड़ा मज़ा आएगा…

तो जय बोला – पहले तेरी… फिर मैं पक्का… और हम हंस पड़े..

अब जय ने भीमा से कहा की भीमा, बीबी जी कैसी लगती हैं तुझे…

वो बोला – साहब, बहुत अच्छी हैं… सुंदर भी हैं…

अच्छा तो भीमा, एक बात बताओ… अगर, तुझे बीबीजी एक रात को मिल जाएँ तो क्या करोगे…

वो बोला – बीबी जी से पूछूँगा, साब जी…

जय ने मुझे इशारा किया और कहा – भीमा, ज़रा पानी तो लाओ…

जैसे ही भीमा उठा, निक्कर में उस का भारी लण्ड तना हुया था.

जय ने कहा – भीमा, यह क्या हो गया…

वो बोला – साहब, पता नहीं अपने आप ही ऐसा हो गया है…

अच्छा तो अब कैसे बैठेगा, यह तेरा घोड़े जैसा लण्ड… – जय ने पूछा..

वो बोला – साहब, पता नहीं…

जय ने मुझे को इंग्लीश में कहा की चड्डी उतार के आ जाऊं…

मैं तुरंत, चड्डी उतार कर आ गई थी.

जय ने भीमा को कहा की तेल ले कर, बीबी जी की चूत पर लगाओ…

जय बिना टाइम बर्बाद करे, सीधी बात करने लगा था.

इधर, मैंने भीमा को पहले ही बता दिया था इस प्लान के बारे में.

भीमा ने तेल की शीशी, मेरी चूत पर डाली और धीरे से लगाने लगा.

जय का लण्ड, खड़ा हो गया था या कहूँ “नाच” रहा था.

जय ने मुझे से कहा की उतार दे अपने मैक्सी को और उस ने भी उतार दिए अपने कपड़े.

अब जय ने भीमा को कहा की बीबी जी, कैसी लग रही है “नंगी”…

तो वो बोला की बहुत ही सुंदर हैं…

यहाँ अपने पति के सामने नंगी होने से, मेरी चूत में से भबकारे छूट रहे थे.

जय बोले की भीमा, तुम क्या देख रहे हो अब उतार दो अपने कपड़े…

जब भीमा ने अपने कपड़े उतरे तो जय देखता ही रह गया, उस के लण्ड को और बोला – यार, बहुत बड़ा और लंबा है, तेरा भीमा… कहीं गधी को तो नहीं चोदता फिरता है…

इस पर, भीमा हंस पड़ा और बोला – नहीं साहब… बस ऐसे ही, देसी घोड़ियों को ही पेलता हूँ…

भीमा, तू आज़ बीबीजी को चोदेगा… – जय ने सीधे सीधे पूछा..

भीमा, चुप रहा.

जय बोला – देख, मैं क्या करता हूँ…

उस ने मेरी चूत चाटना शुरू किया और फिर चूत में, उंगली डाली तेल लगा कर.

दो चार बार, अंदर बाहर करने के बाद घुसेड दिया अपना लण्ड मेरी चूत में और शायद 3 या 5 धककों में ही झड़ गया, मेरी चूत में ही.

इधर, मेरी चूत ने भी मूत दिया, वहीं पड़े पड़े..

जय बोला – अब तेरी बारी है, अपनी मेम साब को चोदने की…

चलो, अब चढ़ जा इन पर और घुसेड दे, अपना “मोटा, फौलादी लण्ड”… मेरी आँखें के, सामने..

भीमा, वियाग्रा की डोस में तो था ही अपने लण्ड को तेल लगाया और सीधे ही, उस ने मेरी टाँगें कंधे पर रखी और तब भीमा ने एक ही धक्के में पूरा का पूरा लण्ड घुसेड दिया.

मुझ को यह उमीद नहीं थी, उस से..

सोचा था, आराम से डालेगा..

मेरी तो “चीख” निकल गई..

शायद वो भी मेरे पति के सामने, मुझे चोदने के एहसास से पगला गया था.

मैं चिल्ला पड़ी – भीमा, मां के लौड़े… फाड़ दी, तू ने मेरी चूत साले, सांड… तेरी बहन की चूत, मैं भैंस हूँ क्या, जो सांड की तरह घुसेड दिया है… मां चुद जाए तेरी, कुत्ते…

यहाँ विग्रा की वजह से, उस का लण्ड “बंदूक” जैसा हो गया था.

उसे कोई फ़र्क नहीं पड़ा और वो लगा, चोदने जय के सामने और बड़े मज़े से भका भक चोद रहा था, मुझे..

पूरा का पूरा निकालता और दे मारता, सीधा अंदर चूत में.

जय देखता ही रहा और बोला – भीमा, चोद जितना चोदना है तुझे आज… यह मौका फिर नहीं मिलेगा…

भीमा भी बोला – ठीक है, साहब…

मैं तिलमिलती रही और चुदवाती रही.

जय का 3 बार निकल चुका था, मुझे चुदते देख.

एक बार, वो वहीं “मूत” चुका था.

यहाँ मेरा इतना निकला था की मुझ पर बेहोशी छा रही थी.

पूरा मुँह, सुख चुका था.

कोई 20 मिनट में, उस का पानी आने वाला था तो उसने पूछा – कहाँ डालूं बीबी जी…

मैं बोली छोड़ दे फबारे को, मेरी चूत में देसी घोड़े…

उस ने अपना लण्ड चूत की जड़ तक घुसेड़ा और पूरा निकाल दिया, उस में.

फिर अपनी हिम्मत बटोरते हुए, मैं बोली – अगर रह गया तो घोड़ा ही पैदा होगा, जय…

जय बोला – घबरा मत… कल “कच्चा पपीता”, खा लेना…

फिर मैं उठी और बाथरूम में जा के चूत साफ की, मुता और सारा पानी बाहर निकाला.

मैं 9 या 10 बार झड़ चुकी थी, इसी बीच.

जय बोला, ऐसी चुदाई मैंने कभी नहीं देखी थी… किसी भी “पॉर्न या ब्लू फिल्म” से अच्छा है, अपनी बीबी को चुदते देखना…

मैं बोली – अपनी बीबी को कुतिया की तेरह चुद्वा कर मज़ा आया, तुम्हें…

जय, हँसने लगा.

हम तीनों को ही शायद, सबसे ज़्यादा मज़ा आया था..

मैं तो अंदर से बहुत ही खुश थी की रास्ता अब फ्री है जब चाहो, पति के सामने ही चुदवा लो…

चूत खुलने की भी चिंता नहीं..

उस हरामी भीमा ने, मेरी चूत चौड़ी कर दी थी, इतना ज़ोर से चोदा था कुत्ते ने.

हम तीनों ही अब तक नंगे थे और भीमा का लण्ड, अभी भी खड़ा हुआ था.

मैंने जय को कहा – लो अब, क्या करना है… इस का तो खड़ा हुआ है… अब किस की चौड़ी करवानी है, इस से… मेरी हिम्मत नहीं है, अब इस के धक्के झेलने की… याद है ना, अब तुम्हारी बारी…

जय बोला – जानू, कुछ करते हैं… इस में शरमाना क्या है…

जय ने भीमा को बोला – अपने लण्ड को, धो कर आ…

भीमा जैसे ही आया, जय ने उस का लण्ड चूसने शुरू कर दिया..

 
मुझे तो विश्वास ही नहीं हुआ..

वो बोला इस का सुपाड़ा, बड़ा लंबा है..

कोई 5 मिनट तक, वो चूसता रहा.

एक पल के लिए भी, मुझे अपनी आँखों पर विश्वास नहीं हुआ..

फिर वो, मुझ को बोला – सरसों का तेल ला…

मैं सदमे में ही, तेल ले कर आ गई..

जय ने भीमा को बोला की तेल अपने लण्ड पर लगाए और मुझ को बोला दो उंगलियों से तेल, उस की गाण्ड में डाले अंदर तक.

मैंने, वैसा ही क्या.

जय ने कहा – भीमा, अब धीरे से अपना मोटा लण्ड मेरी गाण्ड में घुसेड दे… पूरी कर दे, अपनी बीबी जी की खाविश…

मैं तो डर गई की जय की गाण्ड, कहीं फट ना जाए.

मैं भीमा को बोली – भीमा, धीरे से चोदना साब को…

भीमा बोला – ठीक है, बीबी जी…

भीमा ने धीरे धीरे, तेल लगा लगा कर अपना पूरा लण्ड जय की गाण्ड में घुसेड दिया और लगा, धक्के मारने और फिर उसने स्पीड तेज कर दी.

भीमा ने जय की गाण्ड का भरता बना दिया, चोद चोद कर.

सुमन देख रही थी की भीमा का लण्ड, जय की गाण्ड में बंदूक की तरह अंदर बाहर हो रहा है.

भीमा, सुमन को देख रहा था और जय की गाण्ड मार रहा था.

फिर वो बोला – बीबीजी, साहब की गाण्ड बड़ी टाइट है, बड़ा मज़ा आ रहा है… साहब को भी आ रहा होगा…

जय को बेशक भयंकर दर्द हो रहा था पर वो बोला – बड़ा मज़ा आ रहा है, भीमा… पूरा अंदर पेल दो…

कोई आधे घंटे तक, भीमा ने जय की गाण्ड एक सांड की तरह खूब धक्के मार मार के मारी.

जय की गाण्ड मारने के बाद, पूरा पानी उस की गाण्ड मैं ही छोड़ दिया भीमा ने.

फिर वो बोला – मज़ा आ गया, साहब को चोदने में…

जय, घोड़ी की तरह झुका रहा.

मैं बोली – जय, भीमा ने तो तुम्हारी गाण्ड का छेद चौड़ा कर दिया..

जय, हंसते हुए बोला – साले का बहुत ही मोटा है पर मज़ा आ गया मरवाने में, इस से… शादी के बाद, पहली बार मरवाई है…

फिर दोनों बाथरूम में गये और साफ कर के आ गये.

मैं बोली – जय, आप तो बहुत चालू निकले… मुझे तो पता ही नहीं था, तुम्हें यह शौक भी है…

जय बोला – कॉलेज में थे तो कई बार, आपस में गाण्ड मारते और मरवाते थे… लेकिन इतना मोटा और लंबा लण्ड नहीं देखा और ना ही, गाण्ड में लिया था… आज तो भीमा का देख कर, मेरा भी मन कर पड़ा मरवाने का… क्या चीज़ है, भीमा तेरा लण्ड… औरतें क्या, मर्द भी अंदर लेने को तडप पड़े…

मैं हंस पड़ी.. सुना तो बहुत था लड़के बेचारे आपस में गांड मार के और मरवा के काम चला लेते हैं.. आज, साबित हो गया..

खैर, अब तक रात के 2 बजने को थे और फिर चाय पी हम सब ने..

भीमा का तब तक, फिर खड़ा हो गया था..

अब मैंने सोचा की मैं फँस गई.. क्या करूँ..

मैंने कहा – क्यूँ रे, भीमा… फिर, डंडा खड़ा हो गया तेरा…

वो बोला – आप ने दूध ही ऐसा पिलाया है, बीबी जी… बड़ी ताक़त है, उस में… मैंने ऐसा दूध नहीं पिया, पहले कभी भी…

फिर, भीमा बोला – आज तो, बीबी जी आप की चूत और गाण्ड दोनों का भोसड़ा बना दूगा, मैं… इतनी जल्दी निकलने वाला नहीं है मेरा, इस बार…

मैं बोली – ठीक है तो चढ़ जा, मेरे घोड़े इस घोड़ी पर और कर दे चौड़ी आगे पीछे की दोनों ही… मना कौन कर रहा है, यहाँ…

भीमा को बड़ा मज़ा आ रहा था, इस “नंगे खेल” में..

भीमा ने मुझे को कमर से पकड़ा और अपना लण्ड, गाण्ड पर रगड़ना शुरू किया..

मैं बोली – तेल लगा ले, साले… फाड़ डालेगा क्या, मेरी गाण्ड… साहब की तरह चौड़ी नहीं है, मेरी…

जय उठा और उसने मेरी गाण्ड में अपनी दो उंगलियों से तेल लगाया, अंदर तक और खूब तेल भर दिया, उस में…

फिर जय, भीमा को बोला – अब तेल लगा ले, अपने लंड पर और पेल दो अंदर… लेकिन, भीमा धीरे धीरे ही डालना… मेरी बीबी की गाण्ड बहुत टाइट है…

उस ने मुझ को घोड़ी बनाया और अपना लण्ड, गाण्ड पर रखा और एक धक्का मारा.

आधा लण्ड घुस गया, अंदर…

मैं चिल्लाई – बहन के लौड़े…

पर इसी दौरान, उसने एक और ज़ोरदार धक्का दे मारा और पूरा लण्ड घुसेड दिया, जड़ तक…

भीमा बोला – बस बीबी जी, पूरा अंदर घुस गया है…

मैं बोली – अबे, साले घोड़े निकाल बाहर… तेरी मैया की चूत… बहुत दर्द हो रही है, मेरी गांड… भोसड़ी वाले…

भीमा बोला – अब तो बीबी जी, अंदर घुस चुका है… डरना क्या, मज़ा लो ना… आप की गाण्ड बहुत साफ और सुंदर है, बीबी जी… मैं तो क्या, गधा भी अपना लण्ड डालने को आप के पीछे खड़ा कर के भागना शुरू कर दे… बहुत मज़ा आ रहा है, आप की गाण्ड मारने में…

यहाँ, जय भी बोला – भीमा, पूरी ताक़त से ठोको बीबी जी को… पता चले की, फौलादी लण्ड क्या होता है… पेल दो और फूला दो, इस की गाण्ड…

भीमा बोला – साहब जी, बीबीजी की गाण्ड तो क्या चूत भी “स्प्रिंग” की तरह है… जो कोई भी इन की मारेगा, मज़ा ही मिलेगा…

भीमा ने बडाल बडाल के मेरी चूत और गाण्ड को, मार मार कर चौड़ा कर दिया था..

मैं बोली – बस, अब और नहीं… बहुत हो गया, आज़… दोनों मेरी मिल के मां चोद रहे हो… बस करो, अब… चल, मेरे घोड़े सो जा… अब कल काम भी करना है…

फिर कुछ देर बाद, भीमा ने अकेले में कहा – बीबी जी, आपने अपना वादा निभा दिया आज़… आप बहुत अच्छी हैं और आप की चूत और गाण्ड भी बहुत ही जबरदस्त हैं…

अगले दो दिन भी खूब खुल कर चुदाई हुई..

जय ने खूब लण्ड पिलवाया, मुझ में और दो बार और अपनी गाण्ड भी मरवाई, भीमा से..

मैं भी खूब चुदी और हर बार, भीमा ने अपना बीज़ मेरे चूत में ही डाला.

फिर, जय वापिस चला गया और मुझ को बोला – बड़ा मज़ा आया मुझे… तुझे चुदवाते हुए देखने के बाद, अब मैं मर भी गया तो कोई गम नहीं… इससे ज़्यादा मज़ा मुझे अब जिंदगी में किसी चीज़ में नहीं आएगा… अब ख़याल रखना, खुली चुदाई मत करते रहना…

मैंने कहा – जानू, मरे आपके दुश्मन… अभी तो हमे बहुत मज़े लेने हैं… वैसे, भीमा का माल, मेरी चूत के अंदर तक घुस गया है… कहीं गड़बड़ ना हो जाए…

तो वो बोला – कोई बात नहीं, वापस आ जाओ… फिर देखेंगे…

मैंने जय को यह बता दिया की उस का बीज़ मेरी चूत के अंदर चला गया है, जब भीमा ने मेरी टाँगे उठा कर चुदाई की थी और अपना पानी उस ने मेरी चूत में छोड़ा था..

पूरा लण्ड, जड़ तक मेरी चूत में घुसेड दिया था, हरामी ने.. पूरी पिचकारी अंदर ही मारी थी, अपने पानी की..

कहीं रह गया तो क्या होगा .?.

जय चला गया, वापस और अब मैं अकेले ही थी घर पर..

एक दिन भीमा रात को आ गया, बिना बुलाइए ही..

आते ही बोला – बीबी जी, मुझे आप की चुदाई करने का बड़ा मॅन है…

मैंने भी कहा – ठीक है, भीमा… अब तो तूने साहब के सामने ही, मेरी ले ली है… उनकी भी गाण्ड चौड़ी कर दी है… अब कोई डर नहीं है… जी भर के चोद, मेरी हरामजादि चूत को…

वो बोला – साहब, बहुत अच्छे हैं…

मैंने कहा – हाँ क्यों नहीं… गाण्ड जो मिल गई, मुफ़्त में तुझे…

भीमा, ज़ोर से हँसने लगा..

उस रात, मैंने भीमा को फिर वियाग्रा डाल कर दूध पीला दिया..

जय एक गोली छोड़ गया था, अलमारी में.. मेरे मज़े के लिए..

मैं भी अब “फ्री” थी, जैसे भी चुदवा लूँ..

मैं पूरी नंगी हो गई और भीमा को भी नंगा कर दिया.

मैंने भीमा से कहा की अब जितना चोदना है, चोद… आज़ मैं, तेरी हूँ पूरी तरह से…

भीमा ने मुझे दिल भर के खूब पेला और पूरा बीज़, मेरी चूत में फ़चा फ़चा भर दिया.

वियाग्रा खाने के बाद तो उस का लण्ड, इतना कड़क हो गया था की हिलता तक नहीं था..

लोहे की रोड जैसा, सीधा घुस जाता और भीमा पूरी ताक़त लगा कर घुसेड़ता..

जाने कितनी देर, उस ने अपना लण्ड मेरी चूत में ही डाले रखा.

गाण्ड भी, कुत्ते ने खूब मारी.. समझो, भोसड़ा बना दिया था उस ने आगे पीछे दोनों साइड से..

पूरी रात, अपना लण्ड मेरी चूत में ही घुसेडे रखा था.

 
मैंने भी अपनी हसरत पूरी की और उसके मुँह के उपर बैठ कर, उसके मुँह के अंदर अपनी धार छोड़ी..

साला शरबत की तरह, मेरी मूत पी गया..

फिर सुबह, भीमा बोला – बीबी जी लगता है, बड़ी दीदी की तरह आप भी मेरे बीज़ से ही बच्चा पैदा करने की सोच रहीं हैं…

मैं बोली – देखेंगें, वो तो… भीमा, तूने तो चूत भर दी है… देसी सांड की तरह, तेरा पानी बड़ा घड़ा है… इस से पैदा हुआ बच्चा, बहुत काला और तगड़ा होगा… अब तूने मेरी चूत खूब भर दी, चोद चोद कर और तेरा बीज़ अंदर चला तो गया है… ये तो पक्का है की रुकेगा… लेकिन, भीमा जो भी हो, किसी को इस बात का पता ना चले… तूने हमारे परिवार में अपना बीज़ डाल दिया है… बड़ी दीदी में भी तेरा ही बीज है… अब मेरी चूत में भी भर दिया पर मुझे देखना होगा, बॉम्बे जा कर की जय क्या चाहते हैं… चल ये सब बाद की बात है… ये बता, बड़ी भाभी की क्या हालत है…

भीमा बोला – बीबी जी, भाभी की बात क्या कहने… बहुत मस्त हैं… बहुत चौड़ी होकर चुदवाती हैं… वो भी आज कल, मेरा पूरा बीज़ अंदर ले जाती हैं… कहती हैं की भर दे अपने मूठ से, मेरी चूत को…

सुमन बोली – तू भाभी का सांड जो ठहरा और भाभी, तेरी “गोरी गाय”… लगता है, तूने अपना बीज़ उस की चौड़ी चूत में भर ही दिया है…

वो बोला – हाँ, बीबी जी… मेरा लण्ड जब पानी छोड़ता है तो भाभी एक दम से टाँगें उठा कर, पूरा अंदर घुसेड लेती हैं… मेरी गाण्ड को ज़ोर से दबा लेती हैं… बहुत देर तक, नहीं छोड़ती…

वाह रे, भीमा… पूरा परिवार, तेरे बीज़ के बच्चे पैदा करेगा, लगता है… अब तू हमारे परिवार का “पालतू सांड” हो गया है… अब तो जब चाहे, जिसे चाहे चोद सकता है… – मैं हंसते हुए, बोली..

अब ये बता, कोई नयी बात हुई तेरे साथ क्या… कोई और फँसी की नहीं… – इसके बाद मैंने पूछा..

वो बोला – बीबी जी बहुत बड़ी घटना हुई थी, मेरे साथ… मुझे शर्म आती है बताने में… सोचता हूँ, आपको बताना भी चाहिए की नहीं…

सुमन – मादार चोद… अब भी शरमाता है तू… पूरा परिवार को चोद कर बैठ गया है… बता, क्या हुया था… मैं भी सुनू तो…

सो, वो बोला की कोई 6 महीने पहले, मैं कुकी को चोद रहा था… रात के 9 बजे होंगे और बारिश, बहुत ही जोरों से हो रही थी… मेरे कमरे में, धीमी लाइट थी… हम बे फिक्र चुदाई में मगन थे… मां जी को कुकी की ज़रूरत पड़ी, किसी काम को ले कर… तो वो हमारे कमरे की तरफ आ गयीं और पता नहीं, कब तक हमारी चुदाई देखती रहीं… जब उन से रहा नही गया तो सीधे अंदर आ गयीं… हम अपने दरवाजा कभी लॉक नहीं करते हैं… कुछ होने का सवाल ही नही उठता क्यूंकी आप तो जानती हो, मां जी तो कितनी जल्दी सो जाती हैं… ना जाने, उस दिन क्या वजह थी… खैर, जो भी हो माँ बहुत ही गुस्से में थी और पूरी की पूरी भीग गयीं थी… मैंने देखा की उन की साँसे भी तेज़ चल रहीं है, मुँह लाल हो रहा है… शायद, गुस्से के कारण… लेकिन उन की सलवार कमीज़, एक दम से गीली और शरीर से चिपक गी थी…

कुछ देर, खामोश रहने के बाद वो बोली – तुम दोनों, मेरे कमरे में आओ…

बहुत ही गुस्से में थीं, वो..

हम डर गये थे की अब क्या होगा, हमारा..

मैं तो सोच रहा था की अब ना जाने कहीं और काम मिलेगा की नहीं.. जिंदगी का गुज़ारा, कैसे होगा..

खैर, हम डरते डरते मां के कमरे में चले गये..

मां ने सीधा पूछा – क्या कर रहे थे, तुम लोग…

हम चुप रहे..

तो उन्होने दुबारा, ज़ोर से पूछा – सुना नहीं, बताओ…

कुकी बोली – मां जी, प्यार कर रहे थे..

मां बोली – प्यार की, मां का भोसड़ा… ये बता कुकी, भीमा तुझे कब से चोद रहा है…

कुकी बोली – लगभग 5, 6 महीनो से, मां जी…

हूँ… – मां बोली – कुकी, साली छीनाल की चुदि… तेरी चूत में लगता है ज्यादा ही खुजली रहती है… तभी मैं देख रही थी की तेरी गाण्ड, मोटी होती जा रही और तू चुद चुद कर निखर गई है… मर्द तो तेरा, है नहीं… मैं भी सोच में थी… रंडी साली, तू विधवा है पता है ना तुझे, बहन की लौड़ी… भीमा का क्या इसे तो चूत चाहिए सो मिल गई… और तू चौड़ी हो कर, इतना लंबा मोटा लण्ड घचा घच ले रही है… तुम दोनों को, मैं इस घर से बाहर फैंक दूँगी… मुझे नहीं चाहिए, ऐसे मादार चोद नौकर…

हम बहुत डर गये थे सो रोते हुए, मां के पैरों पर पड़ गये और माफी माँगने लगे.

मां बोली – ठीक है, भीमा… तेरी इतनी ग़लती नहीं… तू तो मर्द है… तुम जाओ, अब… तू छीनाल की जनि, कुकी इधर आ…

मैं चला गया, अपने रूम में.

कुकी ने फिर मुझे बाद में बताया, मां ने कुकी से कहा की मेरे कपड़े उतार दे गीले हैं…

कुकी ने मां की पतली कमीज़ उतार दी और फिर मां ने अपनी सलवार भी उतार दी, कुकी के सामने..

कुकी शर्मा गई, मां को अपने सामने “पूरी नंगी” देख कर..

उसने मुझे बताया की मां, इस उम्र में भी कितनी सुंदर और गठे हुए बदन वाली हैं..

कुकी बोली – मां जी, आप तो अब भी बहुत सुंदर हैं…

चुप रांड़… – मां बोली..

(गाँव में औरतें, काफ़ी शारीरिक मेहनत करती है जिससे अपने आप ही उनका शरीर का व्यायाम होता जाता है.. इससे उनका बदन कसा ही रहता है… मखन, दूध, दही, छाछ, देसी घी जैसे चीज़ें बड़ी मात्रा में खाने से चिकनाई भी खूब रहती है..)

इसी दौरान, मां ने अपनी मैक्सी पहन ली, बिना चड्डी..

कुकी ने गौर किया की मां की चूत, एक दम से साफ़ और एक भी बाल नहीं है और तो और उतेज्ना में “फूली” भी हुई है..

फिर, मां ने पूछा – ये बता छीनाल, तू इतना मोटा और लंबा कैसे अपनी चूत में ले लेती है…

कुकी बोली – मां जी, मेरे से नहीं रहा गया… भरी जवानी में, मर्द छोड़ के चला गया… कुँवारी ही रहती तो शायद चुदने का कभी मन भी नहीं होता पर 10 12 बार चूत को, लंड का स्वाद लगा कर मुझे अकेली छोड़ गया… फिर जब मैंने भीमा का घोड़े जैसा लण्ड देखा था, बस फिर मैंने इसे मना लिया और अब खूब दिल भर के खेल खेला… मां जी, बुरी तरह चोदता है वो मुझे… लेकिन मुझे बहुत मज़ा आता है… मेरी चूत चौड़ी कर दी है इस ने और अब खूब मज़े लेते हैं हम… बहुत ताकतवर है, भीमा का लण्ड मां जी… कम से कम 50 ग्राम पानी निकलता है हर बार, इस के लण्ड से… चोद भी काफ़ी देर लेता है… पति नामुराद तो 5 10 मिनिट में ही निकाल देता था और ये तो, 5 बार मेरी चूत से पानी निकाल देता है…

धीरे धीरे, मां का गुस्सा शांत होता गया..

कुकी ने भी खूब तेल मालिश की मां की उस दिन और मेरे लण्ड का गुणगान किया..

मां बोली – देख, कुकी तू इस से शादी कर ले… अच्छा रहेगा… तुझे मोटा लण्ड भी मिल जायगा और काम वासना भी पूरी हो जाएगी…

कुकी ने देखा की अब तक मां की आँखों में “वासना” आ गई है, इन बातों से..

अब, भीमा बोला – बीबी जी, अब हुआ ऐसे की जैसी ही वो आई मैंने कुकी से सब कुछ पूछ लिया की मां क्या बोलीं..

जब मैं सुन चुका तो मैं बेफ़िकर था.

कुकी बोली – भीमा, मुझे लगता है अब तेरे मज़े हो जाएँगें क्यों की मुझे पूरा भरोसा है अब तुझे जल्द ही मां की चिकनी, गोरी, गुलाबी चूत मारने को मिलेगी..

मैं खुश था..

क्यूंकी ना केवल, मेरा काम धंधा बच गया बल्कि कुक्की के अनुसार सच में हो सकता था की मुझे मां की चूत भी मिल जाए..

मुझे मां शुरू से, बहुत अच्छी लगती थी..

 
जब मैं जवान हुआ था, उस वक्त जब वो झुकती थी तो उनकी गांड देख कर मेरे अंदर करंट दौड़ जाता था.

उन दिनों तो मैं सोचता था की कब आएगा, वो दिन जिस दिन मैं मां की टाँगे चौड़ी करूँगा और अपना यह मोटा तगड़ा लण्ड उस की चूत में घुसेड दूँगा..

पहली बार, मैंने उनको सोच कर ही अपना लंड हिलाया था..

इसके बाद, मां ने कुकी को 2 दिन में ही अपने गाँव में भेज दिया.. कुछ पैसे दे कर की वो अपनी मां से मिल कर आ जाए…

कुकी, वैसे भी बहुत दिनों से पूछ रही थी मां से..

कुकी भी खुश थी और जाते जाते बोली – भीमा, अब तू अपने लण्ड पर तेल मालिश कर ले… तेरे लण्ड को मां की चूत पुकार रही है… बोल रही है, आ प्यारे घुस जा अंदर… एक औरत होने के नाते, मैं जानती हूँ एक औरत के दिल मे क्या चल रहा है… समझा…

मैंने कुकी को बोला की तू बेफ़िककर रह और खुशी से छुट्टी पर जा… मां को तो मैं बड़े प्यार से चोद दूँगा… मुझे भी अब पता है की मां को भी मेरे मोटे और लंबे लण्ड की चाहत है…

और फिर, कुकी 10 दिनों की छुट्टी ले कर चली गई अपने गाँव..

दो दिन तक तो मैं चुप चाप रहा और काम करता रहा..

मां भी जैसे कुछ नहीं हुआ था, मेरा और अपना काम देखती रहीं.

लेकिन हाँ, मैंने महसूस किया अब मां मेरी निक्कर पर ज्यादा ध्यान से देखती है और मुस्करा कर चली जाती हैं.

दो दिन बाद, बहुत ही जोरों की बारिश पड़ने लगी थी..

रात को कोई 9 बजे, मां ने मुझे बुलाया और कहा – भीमा, तू तो बहुत हरामी है रे… तूने कुकी की चूत चौड़ी कर दी, मार मार कर… कैसी लगती है, कुकी…

भीमा बोला – मां जी, एक दम अच्छी लगती है मुझे…

मां ने पूछा – शादी करेगा…

तो मैं तुरंत बोला की कर लूगा, मां जी…

ठीक है, जब करनी हो तो बता देना मुझे… लेकिन ध्यान से चोद उसे… कही बच्चा ना रह जाए… विधवा है, सब की बदनामी हो जाएगी, समझे… – मां मुझे समझाते हुए बोली..

फिर मां ने कहा की बैठ जा…

तब तक लगभग 9:30 बज रहे थे, रात के और बारिश जोरों पर थी..

मां ने कहा – दूध पियोगे, क्या…

तो मैंने सिर हिला दिया..

मैं समझ गया था की आज भीमा तुझ को, एक अल मस्त सांड़नी चोदने को मिलेगी..

इधर, मां ने दूध में शहद मिलाया और मुझे दे दिया पीने को..

मां ने कहा की मेरे दूसरे बेड रूम में आ जाओ और वहाँ पर बैठ कर पियो.

इतने में मां मैक्सी पहन कर आ गयीं थीं और वो भी दूध पीने लगीं.

फिर, वो बोली – देख भीमा, सीधी बात करती हूँ… मैंने जब से तुझे कुकी को चोदते हुए देखा है, मेरी नींद हराम हो गई है… मैंने तेरा इतना मोटा और लंबा मूसल जब से देखा है नींद ही नहीं आती… तेरे लण्ड का ही ध्यान आता है… मैंने सोचा की क्यों ना, मैं भी कुकी जैसे तेरा लण्ड अपनी चूत मैं ले कर देखूं… काफ़ी समय से, मैं विधवा हूँ और किसी का नहीं लिया… मेरी उम्र भी ऐसी ज़्यादा नहीं है… गाँव में बचपन में ही, शादी हो गई थी… 16 17 की उम्र तक तो 2 बच्चे भी हो गये थे…

भीमा बोला की बीबी जी, मां की इन बातों को सुन कर मेरा तो लण्ड उछाल भरने लगा था… वैसे भी जब भी मैं मां को देखता था तो दिल में सोचता था क्या मस्त औरत है, मां जी… मिल जाई तो चोद चोद कर भोसड़ा बना दूँ, इन की चूत और गाण्ड का… आख़िर, वो दिन आ गया था…

फिर, मां बोली की तू अब अपने कपड़े खोल दे, भीमा… देखने दे, मुझे तेरा यह “फौलादी लण्ड” कैसा है…

मेरा खड़ा हो गया था, अब तक..

आपको तो बताया ही था मैंने, मेरे लंड ने 14 15 साल की उम्र में “पहला मूठ”, मां जी के नाम का ही छोड़ा था..

जैसे ही, मैंने निक्कर खोली झंझनाता हुया लण्ड बाहर आ गया.

मां बोली – हो हो, मेरी दैया… वाह, क्या लण्ड है… जा जल्दी, बाथरूम में जा और अच्छी तरह धो कर आ जा इसे…

जैसे ही मैं आया, देखा की मां “नंगी” हो गई हैं..

वैसे मैं, मां को अपने सामने नंगी होती देखना चाहता था पर देखा की मां बहुत ही सुंदर लग रही थीं..

काफ़ी देर तो मेरी नज़र ही नहीं हटी..

गोरी चिट्टी, साफ सूत्री और साफ चूत, गोल दूध और मोटी गाण्ड, तथा भरपूर शरीर..

उनकी नाभि का छेद और दूध के निप्पल, बिल्कुल आपके जैसे हैं बीबी जी..

बस उनके दूध, बड़े बहुत हैं.. आप सभी से बड़े..

कुछ देर बाद, मैंने कहा – मां जी, आप इतनी सुंदर हैं मुझे पता नहीं था…

तो वो बोली – अच्छा… भीमा तो अब क्या देख रहा है, नंगा हो जा और चढ़ जा, अपनी इस भैंस पर…

मैंने अपना लण्ड हिलाया, दो तीन बार..

तब मां बोली – भीमा, तू एक तगड़ा भैंसा है और तेरा लण्ड, उसी जैसा लंबा है…

फिर मां ने कहा – भीमा, मेरी चूत चाट…

मैंने देर किए बिना, अपनी जीभ मां की चूत में डाल दी..

मां चौड़ी टाँगे कर के बिस्तर पर लेट गयीं..

कोई 10 मिनट तक, खूब चाटी मैंने मां की चूत..

फिर मां ने मूत दिया और मेरा मुँह अपनी चूत पर दबा लिया, जब तक उनकी पूरी मूत मेरे मुँह में नहीं चली गई..

बीबी जी आप मनोगी नहीं पर उनकी मूत का स्वाद भी आपकी मूत जैसा ही था..

फिर, मां बोली – मादार चोद, कहाँ से सीखी चूत चाटना…

मैं चुप रह गया नहीं तो बड़ी दीदी की पोल खुल जाती..

फिर मैंने भी अपना लण्ड, मां के मुँह में घुसेड दिया और वो भी चूसने लगीं थीं.

खूब चूसा मां ने पूरा लण्ड..

मुँह के अंदर तक ले लेती और ऊपर नीचे करती..

बड़ा मज़ा आ रहा था, लण्ड चूसने में… कुकी ने तुझे मास्टर बना दिया है, चुदाई करने का…

मां बोली – भीमा, अपने इस मोटे डंडे पर थूक लगा ले और मेरी चूत में भी लगा..

मैंने जैसा मां ने कहा किया और अपना लण्ड उन की मोटी फूली हुई चूत पर रख दिया..

यहाँ मुझे ये सोच कर हँसी आ रही थी, जमाना कोई भी हो चूत चटाना और लंड चूसना हमेशा से प्रचलन में था..

ये भी समझ गई थी की मुझे झड़ने के बाद मुतना और अपनी मूत पिलाना पसंद क्यूँ है..

खैर, भीमा ने आगे बताया.. ..

फिर, मां बोली – धीरे धीरे अंदर घुसेड़ना भीमा, इसे… बहुत सालों से चुदाई नहीं करवाई है ना, थोड़ा दर्द होगा…

तब मैंने अपना लण्ड धीरे से, एक ही बार में पूरा अंदर घुसेड दिया “सररर” से..

मां की सिसकियाँ, निकल गयीं.

इधर, मां की चूत से हल्की सी “खून की धार” बह निकली..

बीबी जी मेरी ये ग़लत फहमी भी दूर हो गई की सिर्फ़ कुँवारी लड़की की झिल्ली फटने से ही खून निकलता है… 4 बच्चों की अम्मा भी अगर सालों से ना चुदि हो तो तक थोड़ा बहुत खून रिस जाता है…

मैंने कहा – हाँ, महीनों में ही चूत कसा जाती है… सालों की तो बात ही छोड़… चल आगे बता…

वाह!! क्या चूत है… – मैंने कहा, मां से.

वो बोली – तेरे को अच्छी लगी क्या… कुक्की की जवान चूत मारता है तू तो… ये चूत तो 4 बच्चों को निकाल चुकी है और हज़ारो बार लंड ले चुकी है, तेरे साब का…

हाँ, मां जी… बहुत पसंद आई… इतने सालों से नहीं चुदने से ये कुक्की की चूत से भी ज़्यादा टाइट हो गई है… पूरा फिट बैठ गया है… – मैंने जवाब दिया..

तो फिर, क्या देख रहा है… हो जा शुरू, मेरे घोड़े… – मां हंसते हुए, बोली..

मैंने पहले मां के मम्मे दिल भर के चूसे और फिर जितना ज़ोर था, लगा दिया चोदने को…

थापा थप की आवाज़ आती रहीं… बीबी जी बुरा ना मानना इतना मज़ा तो बड़ी दीदी और आप की चूत मारने में भी नहीं आया था…

कुछ देर बाद, मां बोली – अपने बीज़ को मेरी चूत में मत डालना नहीं तो गजब हो जायगा… गाँव वाले पीपल से लटका के जला डालेगे मुझे…

उस दिन, मैंने मा को दो बार चोदा..

दोनों बार, मैंने उनके पेट पर छोड़ा..

काफ़ी देर, मैंने अपने लण्ड को चूत मैं ही डाले रखा..

फिर मां बोली – भीमा, तू बहुत तगड़ा है और तेरा लण्ड भी… ऐसा तो तेरा साहब का भी नहीं था… उन का भी कोई 9” था और बहुत चोदते थे, दिन मे तीन बार चोदते मुझे… मैं जवानी में बहुत सुन्दर थी इसी लिए बाहर से आते ही ऊपर चढ़ जाते थे और खूब चूत मारते… बड़ा मज़ा आता था… वो तो इतने बेशर्म थे की जब घर पर होते, मुझे नंगी ही रखते… अब सालों बाद जा कर तूने वो मज़ा दिया है, भीमा… तेरा लण्ड बड़ा मोटा, लंबा और तगड़ा भी है… मज़ा आ गया…

फिर तो यह सिलसिला शुरू हो गया और जब भी मां की चूत में खुजली होती बुला लातीं हैं..

सबसे आख़िर में मैंने मां की चूत मारी पर सबसे ज़्यादा, उनकी मार चुका हूँ..

अब तो मां की चूत भी घोड़ी की तरह चौड़ी हो गई है..

मां कहती है – भीमा, घोड़ी और मेरे में अब कोई अंतर नहीं है… तेरा यह लंड घोड़े के ही जैसा है… अब तो घोड़ा भी घुसेड दे तो ले लूँगी…

मैंने कहा – मां जी घोड़ा है तो है गाँव में कहो तो इंतज़ाम कर दूँ…

तो वो बोली – अरे बाबरे… मेरा मतलब, ये नहीं था… तू घोड़े से कम है क्या… घोड़ा तो 10 12 धक्कों में ही झड़ जाता है… तू तो आधा घंटे तक, खूब चोदता है… तेरे से अच्छा घोड़ा और नहीं है, गाँव में… बस खूब खाया कर जो चाहिए ले आया कर… मेवा, फल… पैसे ले लिया कर जितना चाहिए… तेरी सेहत बनी रहनी चाहिए…

तो मेरी मां भी, भीमा के मूसल लंड से चुद चुकी थी..

यहाँ मुझे, सबसे ज़्यादा मज़ा अपनी मां की चुदाई की बाते सुन कर आ रहा था..

अपने पति के सामने, टाँगें उठा कर चुदने से भी ज़्यादा.. अपनी चूत को अपने ही हाथ से भींच कर बैठी थी, मैं..

सो, मैंने पूछा – और बता ना भीमा, और क्या क्या हुआ मां के साथ… क्या क्या बातें हुई…

भीमा, फिर शुरू हो गया –

बीबी जी, एक दिन मां बोली – भीमा, तेरा लण्ड का सुपाड़ा बहुत बड़ा है और कटा हुआ है… मुझे पता है की तू “पठान” है… तेरे साहब ने बताया था, मुझे… जब वो लाए थे, तुझे… कहा था, अच्छा लड़का है और काम भी अच्छा करता है… किसी को बताना मत की यह लड़का, पठान है… तू इस का कोई हिंदू नाम रख दे… मैंने सोचा और कहा था की “भीमा” होगा इस का नाम… तेरा नाम मेरा दिया हुआ ही है… तेरे साहब बोले थे – रेणु, ध्यान रखना की यह लड़का पठान है… इन का लण्ड, अक्सर बड़ा होता है… लड़कियों के नज़दीक ज्यादा ना रहे… नहीं तो कोई भी गड़बड़ हो सकती है… तब मैंने ध्यान में रखी, यह बात और मैंने कई बार ध्यान दिया की तेरा लण्ड काफ़ी बड़ा है लेकिन चुप रही क्योंकि मैं मां जो हूँ…

सो मैंने मां से पूछा की आप ने भीमा ही क्यों रखा था, मेरा नाम…

वो बोली – इस नाम से मेरा पुराना नाता है…

वो क्या… – मैंने पूछा..

तो मां बोली की जब हम श्री नगर पोस्टिंग पर थे तो हमारा जो काम करने आता था उस का नाम भीम सिंह था… हरियाणा का था, वो… बड़ा ही हटा कट्टा, तगड़ा लंबा ज़बान था… दिन भर, बस कसरत करता था और खिलाड़ी भी था… हमारे घर का काम करता था और अपने यूनिट चला जाता था… हमारा घर, थोड़ी दूरी पर था दूसरे ऑफिसर्स से और जंगल सा था, वहाँ पर… हुआ ऐसे की साहब को 15 दिनों के लिए, दूसरे यूनिट में जाना पड़ा और में अकेले रह गई थी… मुझे डर लगता था, वहाँ पर… एक तो जंगल था, दूसरे बिल्कुल अकेली हो गई थी… दूसरे दिन, जब भीम सिंह आया तो मैंने कहा की तुम शाम को आना काम पर और रात को यहीं रहना मुझे डर लगता है… सर्वेंट रूम था ही, वहाँ पर… सो मैंने उसे कहा, बहीं सो जाना…

वो बोला – ठीक है, भाभी जी…

 
सर्वेंट रूम का एक दरवाजा हमारे किचन के साइड से अंदर को खुलता था और एक बाहर से, अलग से खुलता था…

रात को, भीम आ गया था..

थोड़ा काम कर के, वो सोने चला गया अपने रूम में..

मैं अपने रूम में चली गई और मैक्सी पहन ली..

नींद नहीं आ रही थी तो सोचा चाय पी लेती हूँ..

उठी और किचन में चली गई, देखा की भीम किचन में था और चाय बना रहा था..

वो सिर्फ़ लूँगी में ही था और कोई कपड़ा नहीं पहना था, उसने..

उसे क्या पता था की में आ जाउंगी, आधी रात को किचन में और मुझे भी क्या पता था की वो इस समय, किचन में आया होगा.

मैं डर गई पर संभल गई और भीम सिंह से कहा की बो एक कप चाय मुझे भी बना दे…

मैं किचन में ही खड़ी रही, इसी दौरान भीम सिंह ने मेरी तरफ देखा और देखते ही रह गया..

मेरे पतले कपड़ों में, मेरा सब कुछ दिखाई दे रहा था.

यानी, बड़े बूब्स.. गोल गाण्ड और चूत तक…

मैंने देखा की भीम का 10 इंच लण्ड, उस की लूँगी में तना हुआ है और टोपा बाहर दिखाई दे रहा है.

मेरी तो हालत, देखने वाली थी..

मैंने पहले भी यह भाँपा था की भीम सिंह, मेरी तरफ चोर आँखों से देखता रहता था कभी कभी..

साहब थे तो मैं बेफ़िकर थी लेकिन आज तो मैं फँस गई थी..

एक तो मैं पारदर्शी मैक्सी में थी, दूसरे नीचे कुछ नहीं पहना था..

मुझे तेरे साब पर बहुत गुस्सा आ रहा था, उस वक्त.. वो हमेशा घर में पहनने के लिए, ऐसे ही कपड़े लाते थे..

खैर, ग़लती उनकी भी नहीं थी उन्हें क्या पता था की कभी ऐसा होगा.

इधर, चाय बन गई थी.

वो कुछ नहीं बोला और चाय का कप, मुझे थमा दिया.

मैं ड्रॉयिंग रूम में बैठ गई चाय पीने और भीम भी, मेरे सामने बैठ गया.

अपना लण्ड, “खड़ा” किए हुए..

मैं उसे क्या कहती… ग़लती भी मेरी थी… एक तो अकेली होने पर बुलाया भी मैंने था, दूसरे कपड़े भी ऐसे…

उसे तो पक्का ये ही लग रहा होगा की मैं ही, उससे चुदवाना चाहती हूँ..

मैंने चाय पी और जैसे ही उठी, भीम सिंह ने पीछे से मैक्सी ऊपर कर के अपना लंबा लोडा, मेरी गाण्ड पर टीका दिया पर फिर भी बोला कुछ नहीं..

मेरी तो हालत, पतली पड़ गई..

इस के सांड जैसे, लंबे और मोटे लण्ड को देख कर.

मैं तब जवान तो थी ही सो वो बेकाबू सांड की तरह, पीछे से अपना लण्ड मेरी गाण्ड पर रगड़ने लगा और मुझे चूमने लगा, पागलों की तरहा..

मैंने कहा की क्या कर रहे हो… बंद करो, यह सब… मैं तुम्हारी शिकायत कर दूँगी…

फिर भी वो कुछ नहीं बोला और पागलो की तरह, चूमता चाटता रहा…

मैं तो बहुत, गरम हो गई थी.

तेरे साब के सिवा, पहली बार किसी “गैर मर्द” ने मुझे छुआ था..

10 मिनट तक, यह सब चलता रहा..

फिर वो मुझे अपने हाथों में उठा कर, मेरे बेड रूम में ले आया और बेड पर पटक दिया..

अब तक वो मुँह से बोला, कुछ नहीं..

उस की चुप्पी से, मैं डर सी गई थी, अंदर ही अंदर..

फिर उस ने मेरी मैक्सी खोल दी और खुद भी नंगा हो गया..

देखने वाला, सीन था.

लण्ड, एक दम सीधा खड़ा तना हुआ एक बाँस का मोटा डंडा लग रहा था..

उस ने धीरे से, मेरी टाँगें चौड़ी की और अपना मुँह मेरी चूत पर रख दिया..

जानवरों की जैसे, चाटने लगा..

मेरी चूत, पानी पानी हो गई..

पहली बार, मेरी चूत से “मूत” निकल गई और वो हरामी, पूरी पी गया..

तब तक साहब, चूत कभी नहीं चाटते थे.

मुझे बहुत मज़ा आ रहा था.

फिर भी मैंने कहा – भीम सिंह, अब बस करो…

मूत निकलने से, मैं थोड़ा शर्मा सी गई थी..

फिर भी उस ने 2 मिनट और चाटी और फिर, अपने लण्ड को मेरे मुँह में डालने लगा..

मैंने कहा की नहीं…

पर बिना कुछ बोले ही, उसने अपना आधा लण्ड मेरे मुँह के अंदर कर दिया और लगा, अंदर बाहर करने..

मैंने 10 मिनट तक चूसा, उस का लण्ड..

अब उस ने ढेर सारा थूक, अपने लंबे लण्ड पर लगाया और ढेर सारा मेरी चूत पर लगाया.

फिर लगा अपने लण्ड को रगड़ने, मेरी खुली हुई चूत की फांकों पर और फिर एक भयंकर झटके के साथ, पूरा जड़ तक अंदर घुसेड दिया..

पूरा का पूरा लण्ड, मेरी चूत में अंदर चला गया..

मेरी तो चीख निकल गई..

फाड़ दी तूने मेरी चूत, गधे… – मैंने कहा..

लेकिन क्या करती.. उस पर तो चोदने का भूत सवार था.

मुँह बंद कर के पड़ी रही और धक्के सहती रही… तकरीबन 30 मिनिट तक बिना रुके, उस ने मुझे पूरी ताक़त लगा कर चोदा..

चूत से आवाज़ें आ रही थी “फ़चा फॅक” की.

दो बार झड़ चुकी थी, मैं और मेरी चूत बिल्कुल ढीली पड़ गई थी..

मेरी चूत की धज़ियाँ उड़ा दीं उस ने और पूरा का पूरा बीज़, मेरी चूत में ही भर दिया.

कोई 100 ग्राम होगा..

बहुत गरम लगा था, मुझे..

मैंने कहा – यह क्या मेरी चूत भर दी तू ने अपने बीज़ से… अगर गड़बड़ हो गई तो में फँस जाउंगी…

लास्ट में, जब उस का निकाला तब उस की आवाज़ निकली..

तब जा के वो बोला की भाभी, क्या साहब नहीं चोदते हैं आप को… उन का लोडा क्या छोटा है, जो मज़ा नहीं देता और अपना पानी चूत में नहीं डालते क्या…

मैंने कहा – साब, तो जब घर पर रहते हैं मेरी चूत में ही घुसे रहते हैं… अंदर भी डालते हैं पर इतना नहीं जितनी तूने भर दी है मेरी चूत… तू ने तो फाड़ दी मेरी चूत सांड़ की तरह अपने मोटे और लंबे लण्ड से…

ओह !! बड़ा मज़ा आ रहा है, मुझे भाभी.

मैंने कहा – अब तक तेरी आवाज़ कहाँ थी, बहन चोद. तूने तो मेरी बुरी हालत कर दी.

तो वो बोला – भाभी आप मुझे बहुत अच्छी लगती है. मैंने सोचा जो होगा देखेंगें पर पहले आप की चूत को फाड़ कर भोसड़ा बना लूँ.

मैं कहा – भीम सिंह तेरा तो इतना बड़ा है की नॉर्मल औरत नहीं ले पाएगी इस सांड जैसे लंबे लण्ड को.

वो बोला – भाभी जब आप की चूत पूरा ले गई तो और भी ले लेगें. जब से इस घर में काम कर रहा हूँ, आप की गाण्ड देख कर मेरी बुरी हालत हो जाती थी. आप एक मस्त घोड़ी की तरह चलती हैं और जब चलतीं हैं तो गाण्ड की फकें अलग अलग हिलती हैं. जैसे इन में एक मोटा लण्ड ले रखा है. पूरी रात आप के ही सपने देखता हूँ. अब सपने पूरा हो गये. आप की मर्ज़ी है चुदना हो मेरे से तो कह देना मैं हाज़िर रहूँगा. साहब से तो आप कह नहीं सकेंगी इस लिए जितना चाहो चुदवा लो. मेरा लण्ड हाज़िर है आप की चूत और गाण्ड की सेवा में.

भीम सिंह ने 10 दिनों तक मुझे तीन तीन बार चोदा अपने मूसल जैसे लण्ड से और खूब चूत चाटी मेरी. चौड़ी कर दी उस ने अंदर तक.

पूरी रात लण्ड चूत के अंदर ही डाल कर सोता था.

बड़ा मज़ा आया इस सांड की चुदाई से. चूत का भोसड़ा बना दिया था. पूरा माल चूत में ही डालता था और उस का नतीजा तेरा बड़ा भाई है.

वो उस का ही बीज़ है.

भीमा बोला – मां आप तो अब भी बहुत सुंदर हैं.

माँ बोली – यह सुंदरता ही तो मेरी दुश्मन बन गई थी, जो भी देखता सीधा चोदने की ही सोचता. कई बार बची मैं दूसरों से चुदने से. जब भी इधर उधर जाते थे तो भी कोई ना कोई पीछे पड़ा ही रहता था. खैर, छोड़ो पुरानी बातें अब तू है ना. बस काम चल जायगा. अब चुदाई का मन तो होता ही है और तेरा है भी खूब बड़ा साइज़ का फिट बैठता है.

यह बात भीमा ने बीबी जी यानी छोटी को सुनाई उन दो रातों में जब छोटी ने जय के जाने बाद भीमा के साथ गुज़रीं थी.

छोटी ने जब यह सुना की भीमा ने तो मां को भी नहीं छोड़ा तो छोटी को बहुत गुस्सा आया भीमा पर. पर इस में भीमा की क्या ग़लती है यह तो मां को सोचना चाहिया था की भीमा से चुदवा लूँ की नहीं.

अगर चुद गई है तो अब मज़ा लेने दो मां को.. वो भी तो एक औरत है. उस की चूत भी चौड़ी होने दो.

भीमा है ना एक खुला पालतू सांड़.

सब को चोदेगा यह सांड़. जैसे किसी गाँव में पालतू सांड काई गाय में घुसेड़ता है अपने मोटे लण्ड को.

भीमा से यह बातें सुमन ने सुनी और फिर भीमा को कहा की मैं भी जाने वाली हूँ, भीमा 10 दिनों में. अब जब में बुलाऊं तब ही आना मेरे पास. समझे ना तुम.

वो बोला – ठीक है बीबी जी.

मैं सोचती रही जो हुया ठीक हुया की ग़लत, यह बॉम्बे जाने पर ही फ़ैसला लूँगी जय के साथ बैठ कर.

इस के बाद में बड़ी दीदी के पास फिर गई और खूब बातें की.

बड़ी दीदी ने कहा की तूने भीमा के साथ बहुत मज़ा लिया छोटी. कहीं कुछ हुया तो नहीं.

मैंने कहा की जो होना था हो गया है दीदी. उस सांड ने भर दी है मेरी चूत अपने बीज़ से.

तो फिर क्या करोगी. – उन्होने पूछा..

मैंने कहा की वापस जाने के बाद देखती हूँ.

बड़ी दीदी बोली की बड़ा तगड़ा है, साला एक ही पिचकारी से भर देता है चूत को.

मैं हंस पड़ी और बोली की बहुत चोदा उस ने मुझे दीदी और खूब माल डाला मेरे अंदर.

दीदी बोली – रख ले और कर ले पैदा इस के बीज़ से. अच्छा ही होगा.

चलो देखते हैं दीदी. बता दूँगी बाद में. लेकिन दीदी आप भी तो बहुत चुदी इस घोड़े से ना. – मैने कहा

दीदी – छुटकी इस का लण्ड इतना मज़ा देता है की पूछ मत. फिर मैने सोचा क्यों ना इस के बीज़ का ही इस्तेमाल क्या जाई. फिर क्या था खूब चुदी भीमा से मैं. दिल भर कर पूरी पूरी रात चुदाई करते थे हम. अब तो एक महीने मैं बच्चा पैदा होना है. बताउंगी तुझे कैसा है.

जीजा को पता है क्या. – मैने पूछा

वो बोली – नहीं, पर उन दिनों मैंने तुम्हारे जीजा से भी खूब चुदाई करवाई सो उसे पता ना चले की भीमा का बीज़ अंदर ले लिया है मैंने. जब बच्चा ठहरा तो बो बहुत खुश हुए. बस अब कुछ ही दिनों की बात है.

मैंने अपने दिल में सोचा सब ठीक है जो हुआ सो हुआ.

कम से कम चूत में बीज़ तो अच्छे तगड़े सांड का डलवाया, जैसे गाँव में गाय, भैंस को मोटे तगड़े सांड या फिर भैंसे से चुड़वते हैं ताकि हट्टा कटा बच्चा पैदा हो और एक ही बार में रह जाए. बस इसी तरह.

दूसरे दिन, मैं भाभी से मिलने गई और पूछा – कैसे हो भाभी.

तो वो बोलीं – सब ठीक है उस को दूसरा महीना था.

मैं – भाई कैसे हैं.

भाभी – वो भी ठीक हैं बाहर काम पर हैं.

उस रात मैं भाभी के ही घर रही.

भाभी भी सुंदर हैं और अब तो मोटे मोटे मम्मे और भारी चूतड़ हो गये हैं. चलती हैं तो ऐसे जैसे चूत में मोटा लण्ड ले रखा हो.

मैंने पूछा – भाभी काफ़ी मोटी हो गई हो.

तो हंसते हुए बोली की बच्चा है ना पेट के अंदर इस लिए लग रहा होगा.

अच्छा यह कब हो गया भाभी. लगता है कहीं पर ज्यादा मज़ा तो नहीं ले रहीं हैं आप.

इस पर वो बोली – खूब मज़ा ले लिया. दिल भर के चुदाई करवा ली और अब भी चल रही है कभी कभी.

फिर वो बोली – तेरे भाई तो अब इतनी ठुकाई नहीं कर पाते. लेकिन जब भी करते हैं दिल भर के चोदते हैं. लण्ड भी तगड़ा है उन का. लेकिन अब इस घोड़े की रफ़्तार धीमी हो गई है.

हम दोनों ही बहुत हंसने लगी इस बात पर.

 
मैंने मौके का फ़ायदा उठाया और पूछा की क्या कोई और बड़ा मोटे लण्ड वाला घोड़ा है जो इस सुंदरी की सुंदर चूत का रस पान कर रहा है तेज रफ़्तार से.

भाभी बोली – हमारा रस पीने वाला कोई दिलदार ही होना चाहिए जो हमारे जैसी की उबलटी हुई चूत में अपना लण्ड डाल कर गरमी सहन कर सके.

भाभी बोली – छोटी चुदाई के मामले में मैं बहुत गरम हूँ. मुझे तेज रफ़्तार वाला घड़ा ही पेल सकता है, जो अपना पूरा का पूरा मोटा लंबा और तगड़ा लण्ड डाल कर मक्खन निकले और भर दे चूत को.

मैंने देखा की भाभी बहुत ही गर्म हो रहीं हैं इन बातों में.

मैंने पूछा – भाभी, सच बताओ कौन है बो खुश नसीब घोड़ा, जो मेरी सुंदर भाभी की चूत चौड़ी कर रहा है.

भाभी बोली – बहुत नज़दीक है वो. बताती हूँ तुझे अगर किसी को ना बताए तो.

मैं बोली की भाभी कसम से कोई भी जान नहीं पाएगा इस बात को.

तो भाभी बोली – छोटी, अगर औरत गरम हो जाए तो वो लण्ड तो क्या गधे का डंडा भी अपनी चूत में घुसेड ले. बस ऐसे ही हुआ मेरे साथ भी. तो सुनो वो और कोई नहीं पर भीमा है हमारा नौकर. बड़ा मोटा और लंबा लण्ड है उस का समझो गधा ही है. जब अंदर डालता है ना तो चूत चारमरा जाती है चीरता ही चला जाता है. एक ही मजबूत धक्के में पूरा अंदर कर देता है. पूछ मत छुटकी इतना मज़ा देता है चुदाई का की सब कुछ भूल जाती हूँ और जड़ तक अंदर ले ले के ठुकाई करवाती हूँ. अब तो थोड़ा बंद कर दिया है क्योंकि मैं उस के ही बच्चे की मां बनने वाली हूँ, शायद. लगता है बच्चा एक हट्टा कटा पैदा होगा क्यों की उस ने कई बार अपना गाड़ा और एक कप बीज़ मेरी चूत में फुल प्रेशर से भरा है और मुझे पता है की उस का फल अब मेरी कोख में है. छोटी बहुत ही तगड़ा सांड है वो. इतने ज़ोर से घुसेड़ता है की तारे दिखाई देते हैं. पता नहीं क्यों, सोचता होगा की मैं नौकर होकर मालेकिन को चोद रहा हूँ और वो भी सुंदर और इतनी पड़ी लिखी को. हरामी चोदते वक्त ज़रा भी रहम नहीं करता है बस ठोकते जाता है जब तक की नीचे पड़ी हुई औरत की बस ना हो जाए. मैंने ऐसी चुदाई कभी नहीं करवाई थी आज तक और ना ही किसी ने मुझे ऐसे धम्मके के साथ चोदा है. वैसे तो तेरा भाई भी चोदने मैं माहिर हैं पर इतने लंबे और मोटे लण्ड की तो बात ही कुछ और है.

अच्छा भाभी, बड़ा मज़ा देता है क्या.

वो बोली की मज़ा ही नहीं गले तक भर देता है चूत को. गाण्ड मारने को बड़ा उतेज़ित रहता है.

तो भाभी गाण्ड का छेद चौड़ा करवाया उस से की नहीं. – मैने पूछा

भाभी – छुटकी सिर्फ़ एक बार ही, फाड़ डाली थी मेरी गाण्ड उस साले ने. घोड़ी बनाया और खूब तेल लगाया अपने लौड़े और मेरी गाण्ड पर. फिर बोला, भाभी धीरे से करूँगा घबरा मत. मैंने सोचा चलो देखते हैं यह करवा के कैसा मज़ा आता है. मेरी सखियाँ कहती हैं की गाण्ड मरवाने में कुछ अलग ही आनंद आता है. फिर भीमा ने धीरे से अपने लण्ड का टोपा अंदर किया और इतने ज़ोर का धक्का मारा की उस का लण्ड सीधा पूरा का पूरा जड़ तक अंदर घुस् गया. मैं तड़पती हुई पूरा ज़ोर से चिल्लाई, पर वो तो सांड़ की तरह जो ऊपर चड़ा तो लण्ड डाल कर ठोकता ही रहा. मेरी तो बोलती बंद हो गई. मैंने बोला भोसड़ी के लण्ड बाहर निकल. फट गई है मेरी गाण्ड. फिर उस ने खूब तेल लगाया और धड़क से अंदर घुसेड दिया. अब मुझे भी कुछ मज़ा आने लगा था. मैंने कहा की चोद ले दिल भर के क्योंकि मुझे भी मज़ा आने लगा था और मैं भी और झुक गई ताकि पूरा जड़ तक अंदर जाता रहे. उसने कोई 40 मिनट तक मेरी गाण्ड का भुर्ता बना दिया मार मार के. लण्ड ऐसे अंदर बाहर हो रहा था जैसे रेल एंजिन का पिस्तन होता है. चिप चिप होने लगी थी. पूरा पानी अंदर उडेल दिया था उस ने मेरी गाण्ड में. कहने लगा था की भाभी जी आप की गाण्ड स्प्रिंग दार और बहुत अच्छी और टाइट है. दिल करता है की लण्ड अंदर ही डाले रखूं. मैं बोली की अब फाड़ तो दी तूने अपने मन की कर ही ली. ज्यादा दिल है तो अपना लंड अब अपनी गाण्ड में डाले रहे साले.

कई दिन गाण्ड में दर्द रहा.

तेरे भाई बोले की क्या हुआ बड़ी डुबक डुबक के चल रही है.

मैंने बोला टाँग में थोड़ा दर्द है, नहीं तो पकड़ी जाती. उस के बाद जब भी वो आता है कहता है भाभी जी हो जाए पीछे से.

मैंने कहा की अब नहीं बहुत दर्द होता है. तू कोई और घोड़ी देख इस काम के लिए.

वो कहता है – अच्छा भाभी जी जब भी दिल करे कह देना भीमा का यह लोडा हाज़िर है. बहुत हरामी हो गया है अब भीमा. अपने लण्ड को हाथ में लिए घूमता रहता है. सच बताऊँ तो उस का लण्ड तो घोड़ी में भी फिट बैठ जायगा. कोई छोटी मोटी लड़की फँस गई तो उस की चूत को तो फाड़ ही डालेगा.

भाभी जी आप ने भाई और भीमा के सिवा किसी और से भी मरवाई है क्या.

तो वो बोली – छोटी तू क्यों पूछ रही यह सब कुछ क्या तेरी फुददी भी फुदक रही है किसी का मोटा लण्ड लेने को. बता दे भीमा तो है ही जब चाहो चुदवा लो उस घोड़े से. लेकिन ध्यान रहे की तेरी चूत फट जाएगी उस के मोटे लण्ड से.

नहीं भाभी पहले आप की सुन लूँ की भाभी ने और किस का लण्ड अपनी सुंदर चूत की फांकों में लिया है जो आप को याद आता है. – मैने फिर छेड़ा

भाभी बोली की छोटी ऐसा तो कोई ख़ास नहीं है पर हां एक हादसा हुआ था मेरे साथ. हम सोचते कुछ और होता कुछ और है. ऐसे ही मेरे साथ भी हुआ था. शादी से पहले तो मैं कई बार बच गई थी दूसरे से चुदने से, कॉलेज या फिर शहर में रहते हुए. मैं काफ़ी ध्यान रखती थी की ऐसा ना हो की दूसरी लड़कियों की तरह मैं भी किसी का लण्ड अपनी चूत में ले बैठू. बस किसी तरह सब ठीक ही रहा था.

शादी हो गई तो आप के भाई ने पहले दो तीन महीनो में दिल भर के चोदा मुझे, जब भी लण्ड खड़ा होता बिना पूछे चूत में थोक देते थे. बड़ा मज़ा आता.

मैं काफ़ी निखर गई थी और सुंदर भी काफ़ी हो गई थी. पूरी तरह से बदन भर सा गया था चुदाई करवा कर. मैंने देखा था की कई आदमी मुझे घूरते रहते थे, जिन में से कुछ तो प्रोफेसर भी थे. पर मेरे ऊपर कोई असर नहीं था इन सब की नज़रों का.

एक दो ने ट्राइ भी की की लिफ्ट मिल जाई पर मैंने नहीं दी कोई लिफ्ट विफ़्ट किसी को भी. मेरी शादी को सात महीने हो गये थे और हम मज़े में रहते थे और खूब चुदाई करते थे.

जब मूड होता था चढ़ जाते थे एक दूसरे के ऊपर. बस गाण्ड नहीं मरवाई थी मैंने तेरे भाई से. वो कमी भीमा ने कर दी अपना मूसल डंडा घुमा घुमा कर और फिर यह सिलसिला चलता रहा. तब तक मैं प्रोफेसर बन गई थी. मेरे टूर यहाँ बहन की यूनिवर्सिटी में लगते रहते थे और एक बार ऐसा हुआ की मुझे कोइंबतूरे में जाना पड़ा. इनकार भी नहीं कर सकती थी सो अकेले ही जाना था और सब कुछ यूनिवर्सिटी की ही तरफ से था.

मुझे एक सेमिनार में लेक्चर्स देने थे और यह 5 दिन का प्रोग्राम था. लेक्चर के बाद फ्री ही रहती थी. सो मुझे कॉलेज की तरफ से कार ड्राइवर के साथ मिली हुई थी की जब भी शॉपिंग या घूमने जाना हो तो जा सकती हूँ.

सो मैंने एक दिन घूमने का मन बना लिया और निकल जाती थी साइट सीयिंग को. खाना बाहर ही खा आती थी और ड्राइवर को भी खाने का पैसा दे देती की जैसा चाहिए खा ले.

ड्राइवर का नाम सुंदरम था, नाम से ही सुंदरम था, पर वैसे वो काला और हट्टा कटा आदमी था.

बहुत ही शांत स्वाभाव था, उस का.

हँसमुख तथा एक दम से पूरी सेवा भाव रखता था. जो कहो, जहाँ जाना चाहो ले जाता था. मैं उसे शाम को अपनी ओर से 100 रुपए दे देती थी टिप के तौर पर.

एक दिन हम थोड़ा दूर निकल गये ऊटी की साइड में और काफ़ी घूमी मैं.

सुंदरम साथ था और वो गाइड का कम करता रहा.

उस दिन शाम को थोड़े लेट हो गये घूमते हुए और 8 बजे तक अपने रूम में पहुँची थी जो यूनिवर्सिटी की तरफ से ही था.

मेरे रहने का फ्लैट छोटा सा था लेकिन बहुत अच्छी तरह से सेट किया हुआ था.

साइड वाले दोनों ही फ्लैट खाली थे.

मैने सुंदरम को बोला की मुझे आस पास से डोसा ला के दे दे और अपने लिए भी ले ले.

इस के बाद वो घर चला जाए.

सुंदरम बोला – ठीक है, मैडम. 20 मिनिट लगेंगे में ले के आता हूँ.

मैंने सोचा – अच्छा आदमी है.

वो चला गया तो में फ्रेश होने चली गई और 10 मिनिट में नहा कर बाहर आ गई.

मैंने अपना ड्रेस लोवर और टॉप पहन लिया और सुंदरम का इंतजार करने लगी.

5 मिनिट् में आ गया वो.

जैसे ही अंदर आया वो चौंक सा गया और मेरी तरफ देखता ही रह गया.

फिर बोला – मैडम ले आया हूँ खाना. आप खा लो.

मैंने कहा – ठीक है तुम जाओ.

तो वो बोला – क्या, मैं भी अपना खाना यही खा लूँ मैडम.

मुझे कुछ समझ नहीं आया.

मैंने कहा – खा लो जल्दी से और जाओ.

मैं भी खाना खाने लगी तो बीच में सुंदरम बोला – मैडम साउत इंडिया डिश कैसी है.

मैंने कहा – बहुत टेस्टी है. मैं आप को एक खास डिश खिलाऊंगा मैडम.

मैंने ने कहा – खा लेंगे कभी.

तब तक खाना ख़तम हो गया पर मैंने देखा की वो मेरी तरफ देखता ही रहा.

मुझे कुछ शक़ हुआ. मैंने कहा की तुम अब जाओ कल में फिर बताउंगी, कब आना है.

इस से पहले की मैं उस के जबाब का इंतजार करती वो मेरे पास आया और मेरा मुँह पकड़ कर अचानक किस करने लग पड़ा.

मैं इस अचानक हमले से बेख़बर थी. मैंने उसे पीछे धकेल दिया ज़ोर से और बोली की तुम्हारी नौकरी तो गई. मैं कंप्लेन कर दूँगी सब से.

तो वो भैंसे की तरह हंसा और बोला – मैडम जी, मैंने तकरीबन 80% औरतों को चोदा है इस यूनिवर्सिटी में और किसी की भी हिम्मत नहीं हुई मेरी कंप्लेन करने की. आप कर देना मेरी कंप्लेन कोई बात नहीं पर पहले मेरा लण्ड तो चूस लो.

वो एक दम से नंगा हो गया था एक बेशरम की तरह.

मैंने क्या देखा की उस का लण्ड एक काले नाग की तरह काला है और 9” लंबा तथा 3” मोटा और लोहे की रोड के जैसे खड़ा हो गया है.

सुंदरम कोई 27 साल का हट्टा कटा ड्राइवर है और बॉडी भी अच्छी ताकतवर है. पर है एक दम से काला.

मैं बोली सुंदरम बाहर जाओ नहीं तो में चिल्ला दूँगी.

वो बोला की मैडम आप ने ही तो मुझे बुलाया है यहाँ. मैं कह दूँगा की मैडम को काला लण्ड बहुत पसंद है.

मैं डर गई क्योंकि ग़लती मेरी ही थी.

सुंदरम ने एक ही झटके से मेरी स्लॅक्स नीचे खींच दी और मैं नीचे से नंगी हो गई.

इस से पहले मैं कुछ करती उस ने मुझे धक्के से सोफे पर झटक दिया.

मैं औंदी सी हो गई और मेरी गोरी गाण्ड पूरी नंगी हो गई.

उस ने बिजली की तरह मुझे पीछे से पकड़ा और घोड़ी बना दिया. बड़ा ज़ोर था उस में.

मैं देखती ही रह गई क्यूंकि जो हुआ अचानक हो गया और हो रहा था.

इस छीना झपटी में मैंने देखा की उस ने ढेर सारा थूक मेरी चूत पर लगा दिया और अपने लण्ड पर भी, और पीछे से अपने लण्ड को मेरी चूत पर रगड़ने लगा.

उस का लण्ड बहुत गरम लग रहा था.

मेरी चूत ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया था की अचानक एक ज़ोर का धक्का मारा उस ने और पूरा लण्ड जड़ तक अंदर धकेल दिया.

मैं चिल्लाई पर उस ने अपने हाथ मेरे मुंह पर रख दिया. जल्दी से और बोला की मैडम चिल्लाई तो दो और आ जाइएँगे तुम्हारी आवाज़ सुन कर और तुम्हारी चूत का भोसड़ा बना देंगे चोद चोद कर. इसलिए चुप चाप घोड़ी बनी रहो और इस घोड़े के काले और मोटे लण्ड का मज़ा लो. इतना तगड़ा और काला लण्ड आप को जिंदगी में नहीं मिलेगा. और वो ज़ोर ज़ोर से ठोकता रहा पीछे से.

मेरी चूत सील बंद तो थी नहीं की बहुत दर्द होगी घुसने में सो एक तगड़े धक्के में ही पूरा सरर से चला गया.

तेरे भाई ने अपने 8” लंबे लण्ड से चूत पहले ही खुली की हुई थी. सो यह धना धना लण्ड अंदर बाहर करने लगा. सच में मुझे भी बड़ा मज़ा आया चुदने में क्योंकि उस का लण्ड एक दम से फिट जा रहा था मेरी चूत में.

कोई 15 मिनिट के बाद वो झड़ गया और नीचे फ्लोर पर अपना पानी फैंक दिया.

इसी दौरान में भी झड़ गई.

अब वो नंगा ही बैठ गया सोफे पर.

फिर बोला – मैडम सॉरी मैं अपने आप को रोक नहीं पाया था क्यों की एक आप बहुत सुन्दर हैं और दूसरा नॉर्थ की औरतों को देखते ही मैं पागल हो जाता हूँ. तीसरा आप के कपड़े ही ऐसे थे की बूढ़े का भी खड़ा हो जाए. आप मेरी पहली शिकार नहीं हैं पिछले 5 साल मैं मैंने जितनी भी प्रोफेसर या लेक्चरर्स यहाँ आईं तकरीबन सब को चोदा. चाहे कितनी भी तेज़ तरार क्यों ना हो. मैने अपना काला नाग उन की चूत के बिल में घुसेड ही दिया चाहे प्यार से या फिर ज़बरदस्ती और काई तो उन मैं से दो बार आ चुकी हैं. जब भी आईं मेरे साथ मुलाकात ज़रूर करती हैं और पूरी पूरी रात मेरे से चुदाई करवाती रहीं. बोलती थी की तेरे काले लण्ड का मज़ा खींच लाया हम को. बहुत चोदा था उन को मैंने. लेकिन मैडम आप जितनी सुंदर और सीधी हैं उतनी कोई नहीं है. आप की गाण्ड को देखते ही मेरा लण्ड खड़ा हो गया था, जब मैं आप को स्टेशन से लाया था. आप जब चलती हैं तो गजब की चलती हैं देखने वाले की खुद की गाण्ड फट जाए. आप की गाण्ड को हिलते देख कर. तब से ही मैंने सोच लिया था की मैडम को ज़रूर चोदना है मैंने चाहे कुछ भी हो. सच कहूँ बड़ा मज़ा आया आप को चोदने में और वो भी घोड़ी बना कर.

मैं कुछ नहीं बोली उठी और सीधी बाथरूम में चली गई चूत को साफ करने और मूतने के लिए.

सुंदरम मेरे पीछे ही आ गया और उधर ही खड़ा हो कर मूतने लगा.

उसी समय उस का लण्ड फिर से तन गया और बोला – क्या करूँ इस का मैडम यह मानता ही नहीं. मैं चुप रही और बेड रूम की और चलने लगी तो सुंदरम ने मुझे अपने हाथों में उठा लिया और बेड पर लिटा दिया.

नंगा तो था ही उस का लण्ड घोड़े की तरह हिल रहा था और मेरी गाण्ड को टच कर रहा था.

मैं भी आधी नंगी थी, उस ने मेरा टॉप निकाला और लगा मेरे बूब्स को चूसने. मैं चुप थी देखना चाहती थी की क्या करता है अब यह काला सांड़.

थोड़ी देर के बाद, वो मेरी टाँगों के बीच आया और चूत को चाटने लगा, पागलों की तरह.

बड़ा मज़ा आ रहा था मुझे. मैं भी अब उस का साथ देने लगी और कहा सुंदरम – खूब चाट मेरी चूत को यह तेरी है आज़. सुंदरम बहुत खुश हुआ और कोई 10 मिनट तक दिल भर के चूत को चाटता रहा और मेरा पानी भी पी गया.

मेरी तो बस हो गई थी.

मैंने कहा – घुसेड दे अब इस नाग को और चोद अपनी मैडम को जितना चोदना है तुझे मेरे काले सांड़.

बड़ा हंसा वो.

फिर बोला – मैडम आज तो मैं अपने लण्ड को आप की चूत से बाहर नहीं आने दूँगा. आप भी क्या याद करेंगी की कोई चोदने वाला मिला था. इतनी साफ़ सूत्री चूत मैंने नहीं देखी आज तक.

फिर उस ने मेरी टाँगें अपने कंधे पर रखी और एक ज़ोर दर धक्के से सरर करता हुया लण्ड घुसेड दिया मेरी फूली हुई चूत में.

उस रात मुझे तीन बार पोज़िशन बदल कर दिल भर के चोदा उस ने .

मैंने भी उस का काला लण्ड दिल भर के चूसा और चुदाई का भरपूर मज़ा लिया.

गाण्ड मारने को बहुत पीछे पड़ा रहा पर मैंने कहा नहीं यह नहीं हो सकता. किंतु उस ने मेरी गाण्ड में पहले एक फिर दो उँगलियाँ घुसेड कर खूब आगे पीछे की. मूड तो बना था की गाण्ड भी खुली करवा लूँ पर मुझे वापस भी आना था इस लिए गाण्ड मरवाने की बात को मैंने ख्याल से निकल ही दिया क्यों की उस का लण्ड काफ़ी मोटा और लम्बा था.

वैसे तो मैंने तेरे भाई का लण्ड भी काफ़ी बार चूसा है और उन का पानी भी गले से अंदर लिया है पर दूसरे का पानी अंदर लेना मुझे अच्छा नहीं लगता चाहे भीमा ही क्यों ना हो.

दूसरे दिन रात की फ्लाइट से मुझे वापस आना था और एयरपोर्ट पर सुंदरम को ही लाना था मुझे. वो जाने से पहले कोई एक घंटा पहले मेरे फ्लैट में आया और चलने का समय पूछा.

मैं उस समये मैक्सी में ही थी, मुझे इस ड्रेस में देख कर वो पागल हो गया और उस का लण्ड फिर सीधा खड़ा हो गया था.

उस ने बिना टाइम गावाए खड़े खड़े ही लण्ड पर टेबल पर रखी हुई क्रीम लगाई और घुसेड दिया फ़च से अंदर पूरा का पूरा एक ही धक्के में.

बहुत ज़ोर के धक्के मार मार कर मेरी चूत फूला दी उस ने.

कहा – मैडम, मैं जिंदगी भर यह चुदाई नहीं भूलूंगा. इतना मज़ा मुझे कभी नहीं आया था. और ज़ोर से किस किया उस ने मुझे और कहा की सपनो में याद रखना मुझे. गुड बाइ.

यह थी उस काले सांड से चुदाई की कहानी.

 
कभी कभी याद आता है लेकिन अब तो भीमा का लण्ड सब कुछ भुला चुका है.

छुटकी तेरी चूत तो अब पूरा पानी छोड़ रही होगी, क्यों ठीक है की नहीं.

हाँ भाभी आप की यह दास्तान सुन कर किसी की भी चूत पानी छोड़ देगी मेरी ही नहीं.

भाभी बोली – कहो तो बूलौऊन भीमा को अभी का अभी खोल देगा तेरी चूत के सुराख को. खुला सांड है जब चाहो ठुकवा लो. तेरे भाई घर पर नहीं हैं इस लिए कह रही हूँ. अगर चुदाई करवानी है तो बोल.

छोटी कुछ नहीं बोली तो भाभी कुछ समझ सी गई की छोटी का शायद मन है लण्ड लेने का.

भाभी धीरे से साइड रूम में गई और भीमा को टेलिफोन कर बुला लिया और कहा की छोटी भी आई है, उसे पता ना चले. मैं पीछे के दरवाजे से तुझे अंदर ले आउंगी चुपके से. तू एक पतली सीटी बजा देना बस.

छोटी को मालूम नहीं पड़ा क्योंकि वो किचन में थी खाना तैयार कर रहीं थी.

लेकिन छोटी ने दिल में सोचा की पिछले तीन दिन पहले भीमा ने उस की चूत ढीली कर दी चोद चोद कर इतनी बुरी तरह से चोदा है हरामी ने. लेकिन फिर भी दिल नहीं भरा चुदाई से.

यह तो भाभी की कहानी पता करनी थी, मुझे की भीमा ने खूब चोदा है भाभी को की बंडल ही मार रहा था.

छोटी बोली – लेकिन मज़ा आ गया बातों का भाभी. ऐसे लग रहा था की सुंदरम का काला लण्ड मेरी चूत में ही जा रहा हो.

दोनों ज़ोर से हंस पड़ी.

अच्छा तो काले लण्ड की शौकीन हो तुम. बॉम्बे में नहीं मिला कोई क्या अब तक. – भाभी ने पूछा..

शौकीन तो नहीं पर एक बात है की काले आदमी का लण्ड तगड़ा, मोटा और लम्बा ही रहता है अक्सर. यह मैंने ब्लू फ़िल्मो में देखा है की कुछ काले लोगो का तो घोड़े से भी बड़ा होता है. ब्लू फ़िल्मो में तो औरतें पूरा ले लातीं हैं अपने भोसडे में. पता नहीं इतना बड़ा कैसे लेती हैं और उन कालों में बहुत ताक़त भी होती है. असली काले घोड़े की तरह ही धक्का मारते हैं. – मैने कहा.

भाभी – अरे छुटकी जब लेना होगा ना तब सोचना.. अभी से ही तेरी फटी जा रही जैसे तेरे सामने वो लण्ड पकड़ के खड़ा हो. चल खाना खा लेते हैं और फिर बाकी बातें होती रहेंगी.

8 बजने को थे और हम अपने बेड रूम में जाने को तैयार थी.

मैंने भाभी को बोला की मुझे कोई मैक्सी दे दो रात के लिए.

भाभी ने मज़ाक में कहा की उस की क्या ज़रूरत है नंगी ही सो जाओ. रात ही तो है. यहाँ कौन आने वाला है की आते ही ऊपर चढ़ जायगा. यह गाय और सांड की चुदाई थोड़े ही है की आते ही ऊपर चढ़ गया और घुसेड दिया. 25 इंच का लंबा रोड चूत में.

फिर भाभी ने कहा की बेफ़िककर रह, छोटी अगर कोई आता भी है तो मैं हूँ ना अपने ऊपर चढ़ा लूँगी तू देखते रहना कैसे लेती हूँ उसका.

भाभी ने एक खुली सी मैक्सी दे दी और आप भी पहन ली.

भाभी ने छोटी को नहीं बताया की भीमा आ रहा है 9 बजे के बाद.

सो वो दोनों ही फ्री हो कर अपने अपने बिस्तरे पर आ गयीं और बातें करने लगीं.

भाभी ने छोटी से पूछा की छोटी जय के इलावा किसी और का लण्ड भी अपनी चूत में लिया या उस से ही काम चला रही हो.

छोटी – भाभी क्या बताऊँ, यह अंदर की बात है जो अब तक किसी से भी शेयर नहीं की है मैंने. जय भी कभी बाहर जाता रहता है टूर पर. एक बार वो 5 दिनों के लिए बॉम्बे से बाहर गये थे और मैं अकेले ही थी घर पर. हुआ ऐसे की हमारे बिल्डिंग के आस पास सब्जी और फल फ्रूट्स वाले आवाज़ लगते रहते हैं, उन का समान बेचने के लिए. मुझे सब्जी और फ्रूट्स लाना था सो मैंने उसे आवाज़ दी की ऊपर सब्जी और केले बगैरा ले के आ जाए. हमारी बिल्डिंग में बहुत फ्लैट है. 20 मंज़िल बिल्डिंग है. किसी को किसी से कुछ लाना देना नहीं. लिफ्ट्स हैं उन में ही आते जाते हैं. सब्जी बेचने वाले का नाम अब्दुल था, जिस से ज़्यादातर हम सब्जी लाते थे. अच्छी और ताजी सब्जी रखता था वो. थोड़ी देर में वो सब्जी लेकर ऊपर आ गया. तीसरी मंज़िल पर है हमारा फ्लैट. दो बेड रूम किचन, हॉल और बाथरूम है. वो सब्जी ले कर आया और बोला – मैडम यह है सब्जी और फ्रूट्स. जो चाहिए ले लो.

मैंने कहा की ठीक सी दे दो. केले छोटे और बहुत बड़े दोनों ही थे.

सो मैंने कहा – केले कौन से अच्छे हैं..

तो वो फट से बोला की मेडम बड़े वाले सही हैं, बड़ा केला खाने में जो मज़ा है वो छोटे में नहीं.

और बैगान कैसे दिए. छोटे नहीं है हैं क्या. – मैने पूछा.

वो बोला – मैडम, आज कल यह काले और लंबे वाले ही ज्यादा चल रहे हैं.

मैंने कहा की तुम्हारे पास सब बड़े और लंबे ही हैं छोटे कुछ भी नहीं.

वो बोला – मेडम छोटे गोल हैं लेकिन अच्छे नहीं होते.

मैं अक्सर उस से ही सब्जी लाती थी और वो कभी कभी मज़ाक भी कर लेता था.

मैंने कहा – यह अच्छा नहीं, वो अच्छा नहीं, यह छोटा, यह लंबा क्या कहते रहते हो.

तो वो बोला की मैडम, आप मेरे से ही लेती हैं ना इस लिए बता रहा हूँ.

लेकिन वो सब कुछ फ्रेश रखता था उस के पास.

मैंने कहा – चलो डालो बड़े वाले ही सही.

कितना डालूं, मैडम जी. – उसने पूछा

आधी दर्ज़न केले और आधा किलो बेगन. – मैने बताया

वो – बस मैडम इतने ही, और ले लो.

नहीं. – मैंने कहा – यह काफ़ी लंबे हैं. काम चल जायगा.

वो बोला – अच्छा यहाँ तो सब को यह लंबे वाले बहुत पसंद हैं और हर रोज लेते भी हैं.

उस की उम्र कोई 35 साल की होगी. पतला बदन और लंबा कोई 6 फुट था. वो पतली टी शर्ट और लूँगी पहने हुए था.

मैं ज्यादातार घर मैं मैक्सी ही पहनती हूँ और कुछ नहीं.

दिन के कोई 11 का टाइम था.

मैक्सी पतली सी थी.

मैं नहा कर आई ही थी और दिन का खाना बनाना था इसलिए सोचा सब्जी ले लूँ.

मेरे शरीर के अंग थोड़े से दिखाई दे रही थे.

फिर मैंने सब्जी और फ्रूट्स लिए और अंदर रखने चली गई.

यह भी पीछे आ गया किचन में बोला की पानी पीना है.

क्या कहती.

मैंने सोचा की हर रोज तो इन लोगों से सब्जी लेते हैं तो कोई बात नहीं.

लेकिन मैंने देखा की वो मेरी तरफ देख रहा है और मैंने अब्ज़र्व किया की उस की लूँगी में उस का लंबा लण्ड तन गया है देखने से लग रहा था की काफ़ी बड़ा है.

अब वो भी क्या करे डंडा तो उठ गया है.

मैंने पानी दिया और कहा की पैसे लाती हूँ.

जैसे ही मैं अंदर से पैसे ले कर आई उस ने अपना लण्ड लूँगी से बाहर निकल रखा था. कोई 11 इंच लंबा था लेकिन मोटा थोड़ा कम था.

मेरे होश उड़ गये. क्या करूँ लगता है फँस गई इस के चक्कर में.

मैंने कहा की यह क्या मज़ाक है बाहर निकल.

वो बोला – मैडम, क्या करूँ. कैसे जाऊं बाहर मैं. जब तक यह बैठ नहीं जाता मैं बाहर नहीं जा सकता. मैं ऐसे करता हूँ की मूठ मार लेता हूँ यहाँ पर फिर बैठ जायगा.

मेरे को पसीना आ गया की क्या करूँ. ज़ोर से शोर मचाया तो कोई और ना सुन ले.

इसी सोच में थी की उस ने अपनी लूँगी नीचे रख दी खोल कर.

मैंने इतना लम्बा लण्ड आज तक नहीं देखा था.

वो उधर ही हाथ में ले कर थूक लगा कर आगे पीछे करने लग पड़ा.

मैंने कहा की रुक भाईं क्या कर रहा है तू.

तो वो गुस्से से बोला की और क्या करूँ. तेरी गाण्ड में डालूं क्या.

मुझे उस से यह उमीद नहीं थी.

मुझे पता था की यह लोग खतरनाक होते हैं. कुछ भी करने से नहीं डरते. झट से मेरे पास आया और फुर्ती से मेरी मैक्सी में हाथ डाल दिया और दूसरे हाथ से फाटक से चूत में अंगुली घुसेड दी.

नीचे से नंगी हो, इस का मतलब लण्ड को तैयार हैं, आप बोल कर उसने मेरी मैक्सी ऊपर कर दी.

 
मेरी गोरी गाण्ड और टाँगे देखते ही उस के लण्ड में और जोश आ गया और बिजली की तरह मेरे पर झपट पड़ा.

फट से पीछे से पकड़ कर सीधा लण्ड मेरी गाण्ड पर रख कर घुसेड़ने लगा.

मैंने ज़ोर से एक झापड़ मारा कहा की क्या जबरदस्ती है ये. उसे और गुस्सा आ गया और झट से मुझे नीचे पटक दिया और अपने लण्ड पर थूक लगाने लगा.

रांड़ तेरी जैसी बहुत घोड़ियों को मैंने काबू क्या है. पहले उकसाती हैं फिर एक ही धक्के में पूरा लण्ड जब चूत में जाता है ना तो शांत हो जाती हैं.

मैं थोड़ी ढीली पड़ गई की गुस्से का कोई फ़ायदा नहीं है इस जानवर से.

मैंने कहा – कितना बड़ा है और बहुत लंबा है. डर लग रहा है की कहीं फट ना जाए.

तो वो बोला की साहब नहीं ठोकता तेरे को क्या जो इतनी डर रही है. घबरा मत आराम से चोदूँगा तुम को.

फिर उस ने मेरी टाँगें अपने कंधे पर रखी. ढेर सारा थूक मेरी चूत पर लगाया और दे मारा ज़ोर का धक्का और घुसेड दिया अपने लण्ड को मेरी चूत में.

फिर बोला – ले अब उचक ऊपर को. जितना उचकेगी उतना ही अंदर घुसेगा.

आठ इंच सीधा ही घुस गया पतला तो था ही.

जय के लण्ड से पतला था थोड़ा सो तकलीफ़ नहीं हुई.

दूसरे धक्के में पूरा का पूरा ही घुसेड दिया. गले तक चला गया. चीख निकल गई मेरी.

बोला अब उछल जितना उछालना है और फिर उस की स्पीड देखने वाली थी.

फ़चा फॅक होने लगी थी.

कोई आधा घंटा चोदा उस ने मुझे उचक उचक कर दो बार झड़ गई मैं.

मज़ा तो आया पर यह सोच कर घिन भी आ रही थी की सब्जी वाले से जो की गंदी बदबू मार रहा था से चुद गई आज में.

जब शांत हो गया तो मैंने कहा की भोसड़ी के अब क्या चाहिए चलो बाहर.

वो बोला – मैडम, जितना मज़ा आप को चोदने में आया उतना किसी और को चोदने में नहीं. क्या बदन पाया है आप ने.

मैं बोली – तुम्हारा धंधा है क्या ऐसे चुदाई करने का. कितनी और को चोद चुका है तू.

तो अब्दुल बोला की आप की पड़ोसेनो को तो मैं बहुत पहले चोद चुका हूँ. सिर्फ़ आप की लेने का चान्स ढूँढ रहा था मैं. सब की चूत ढीली है आप की छोड़ कर. आप बहुत टाइट हैं. मैं सोच रहा हूँ की एक बार और चोद लूँ फिर चान्स मिले या ना मिले. क्या ख्याल है, मैडम जी.

उस का लण्ड बहुत लंबा था और फिर डंडे की तरह खड़ा हो गया था.

मैं हैरान थी की 35 की उम्र भी क्या जोश पाया है इसने.

अब तो मैंने सोचा की ज़बरदस्ती चुदने तो अच्छा है की चोदने दे साले को और मज़ा ले लो चुप चाप.

15 मिनट तक तो चूत चाटी और पूरा बदन चाट चाट के रख दिया, उस ने. यहाँ तक की गाण्ड का छेद भी खूब चाटा. लाल कर दी चूत और गाण्ड चाट कर उस ने.

फिर बोला – मैडम तेल या क्रीम देना मुझे. मैंने उसे तेल की शीशी दे दी.

उस ने तेल मेरे बूब्स पर और पूरे बदन पर लगाया.

फिर मेरी गाण्ड पर दो उंगलियों से अंदर तक डाला और गाण्ड थोड़ी ढीली कर दी.

अब और देर ना करते हुए उस ने मेरी टाँगे उठाईं कंधे पर और पेल दिया पूरा का पूरा ही अंदर.

10 मिनिट्स में, मैं झड़ गई.

फ़चा फॅक होने लगी थी मेरी चूत में.

अब उस ने कहा की घोड़ी बन जाओ. मैं घोड़ी बन गई.

उस ने धीरे से अपने लण्ड को मेरी गाण्ड पर रखा जो की मेरे पानी से लूब्रिकेट था.

वो धीरे धीरे घुसेड़ने लगा.

मुझे काफ़ी दर्द हो रहा था पर सहन कर गई.

पाँच मिनिट्स में पूरा अंदर थोक दिया.

फिर तो दे धना धन ठोकने लगा और 20 मिनिट्स में झड़ गया, मेरी गाण्ड में ही.

बहुत मज़ा आया मैडम जी. आप जैसा बदन किसी का नहीं देखा मैंने आज तक. कोई 10 से भी ज्यादा को चोद चुका हूँ मैं. उसके बाद उस से नहीं मिली ना तो समान ही लिया. कई बार देखता था मुझे लेकिन मैंने कोई लिफ्ट नहीं दी उसे जैसे कभी कुछ हुया ही ना हो.

हम ने फिर वहाँ से शिफ्ट भी कर लिया था दूसरी जगह जहाँ से ऑफीस नज़दीक पड़ता है.

भाभी यह घटना मैंने किसी से भी नहीं बताई है. नहीं तो मुश्किल हो जाती.

जय सहन नहीं कर पता यह सब. चालू तो जय भी कम नहीं लेकिन इस बात को वो कभी भी सहन नहीं करता की मैंने सब्जी वाले से चुद गई.

वो यह सोचता की शायद में इस के जाने बाद घर पर चुदाई का यह खैल इन बेकार के लोगों के साथ खेलती रहती हूँ.

ठीक कहा, तूने छोटी और यही सही भी है. औरतों को कई बातें छुपाने पड़ती हैं अपने पति से और अपनी सेफ्टी के लिए यह ज़रूरी भी है.

मैंने उसे कुछ पैसे दिए और बोला की अब यहाँ नज़र ना आए.

मुझे तो एक अनोखा अनुभव हुआ था और बहुत मज़ा भी आया था.

बस फिर उस से कोई मुलाकात तक नहीं की. दूर दूर ही रही.

बॉम्बे में यह सब्जी, भाजी बैचने वाले बहुत औरतों को चोदते हैं.

कई इन में से ख़तरे से खाली नहीं होते सो जो फँस गई चुद गई इन से. ब्लॅकमेल तक करते हैं, यह लोग औरतों को.

बातों बातों में भाभी बोली – भूल जा इस बात को जैसे कुछ हुआ ही नहीं. कौन सी तेरी सील भंग कर दी उस ने. बहती नदी में किसी ने हाथ धो लिया तो कोई फ़र्क नहीं पड़ता. ऐसा होता है कभी कभी जो हम ने कभी ना सोचा हो. चल अब लंबे लण्ड को भूल जा, सो जातें हैं अब चूत में उंगली ले कर. वैसे भी तेरी बातें सुन कर मेरी भी चिप चिप करने लग पड़ी है. क्या अच्छा होता अगर तेरा भाई या भीमा यहाँ होता तो एक ट्रिप लगवा लेती. ठंड पड़ जाती और आराम से नींद आ जाती.

छुटकी हंसते हुए भाभी को बोली की आप भी ऐसी बातें करती हैं पूछो मत.

प्रोफेसर है ना इस लिए बिस्तर से बातें करती हूँ. बाकी बातें कल करेंगे. तब तक मोटे लंबे लण्ड के सपने ले. तेरे भाई दो दिनों बाद ही आएँगे, सो फिर भी चुदाई का ख्याल हो तो बता दे.

भाभी का बच्चा उन की मां के पास रहता था और वहीं पढ़ने भी डाला था. सो भाभी के पास अकेले काफ़ी टाइम रहता था.

रात के खाने के बाद 9 बजने को थे हम दोनों ही नाइट ड्रेस यानी मैक्सी में थीं और सोने की तैयारी में थीं.

मैं अपने बेड पर लेटी हुई थी.

भाभी ने टी वी धीमी आवाज़ में चला रखा था और न्यूज़ आ रही थी.

मेरा ध्यान उन में था.

भाभी बोली – बाथरूम से होकर आती हूँ तो देख टीवी.

10 मिनट के बाद भाभी आ गई और कुछ किचन में रखा.

फिर आ कर अपने बेड पर लेट गई.

आने से पहले भाभी ने चुप चाप भीमा को अंदर ले कर साइड रूम में भेज दिया और कहा की जब मैं कहूँ आना और चुप रहना.

ठीक है भाभी जी. – भीमा ने जवाब दिया..

भाभी बोली – छोटी और बता किसी और ने नहीं चोदा तेरे को. यार तू चीज़ ही ऐसी है की तेरी गाण्ड को दखते ही किसी का भी लोडा उछाल भरने लगे.

छोटी बोली – भाभी, गाण्ड तो आप की भी कोई कम नहीं है जब आप चलती है ना तो एक मस्त घोड़ी की तरह हिलती चलती हैं. गाण्ड की फाँकें अलग अलग हिलती हैं. आदमी तो क्या गधा भी अपना लण्ड खड़ा कर के पीछे भागे. आप बहुत सुंदर हैं भाभी, लगता है की आप को हर रात लण्ड चाहिए चूत में. भैया के बस की बात नहीं है अब. अब तो आप को आप का प्यारा भीमा ही ठंडा कर सकता है या फिर कोई पठान जिस का लण्ड 12 इंच का हो.

भाभी बड़े ज़ोर से हँसी और बोली – छोटी बात तो सही है, भीमा का लण्ड लेने के बाद आप के भाई का तो अब लुल्ली जैसा ही लगता है. चोदने में वो भी कम नहीं हैं, जब चोदते हैं ना तो दिल भर के ठोकते हैं.

 
भाभी ने कहा की छोटी मेरा दिल तो अब भी चुदने का कर रहा है. सोच रही हूँ की भीमा का लण्ड मिल जाए अब तो में दिल भर के चुदाई करवा लूँ. क्या करूँ तुझे भी मरवाने का दिल है क्या.

मैने कहा – है तो लण्ड कहाँ से लाऊँ. अरे घबरा मत तू थूक लगा ले अपने चूत पर लण्ड आ जायगा. बोल बुलाऊं लण्ड को.

बुला लो भाभी नींद नहीं आएगी अब. चूत पानी पानी हो रही है. ठीक है पहले तू मरवा लेना बाद में मैं चुदवा लूँगी. एक मिनट ठहर अभी लण्ड हाजिर होता है. – भाभी ने हंसते हुए बोला.

भाभी ने भीमा को आवाज़ दे दी.

छोटी बोली – भाभी ? भीमा यहाँ कहा है इस वक़्त.

देख ले तू अभी आता है अंदर. – भाभी ने आँख मारी.

भीमा नंगा हो कर अपना लण्ड खड़ा किए हुए घोड़े की तरह हिलता हुया अंदर आ गया.

छोटी की साँसे बंद हो गई उस ने तो ऐसा सोचा भी नहीं था की भीमा यहाँ होगा इस वक़्त.

छोटी ने कहा भाभी जी आप बहुत चालू हैं. यह कहाँ से आ गया इस वक़्त. बाप रे इतना बड़ा लंबा और मोटा लण्ड मैंने तो कभी नहीं देखा. भाभी पहले आप इस मूसल को अंदर घुसेड लो फिर मैं देखती हूँ.

भाभी बोली ठहर मैं क्रीम लाती हूँ और दूध गरम करती हूँ तब तक तू भीमा का लण्ड देख और बातें कर इस से. तेरी तो देख कर ही फटे जा रही है, अंदर घुसेगा तब क्या होगा.

भाभी अंदर चली गई दूध लाने, मैंने भीमा को धीरे से कहा भाभी को ज़रा सा भी शक़ ना हो की तू मुझे पहले ही दिल भर के चोद चुका है. अब हमे नाटक करना है. मैं चिल्लाऊंगी जब तेरा लण्ड मेरी चूत में घुसेगा. तू डरना मत भाभी को दिखाने के लिए ज़ोर से एक ही धकके मैं घुसेड देना. फिर देखना भाभी क्या कहती है. बस पहले भाभी की चूत को ठंडा कर दे अच्छी तरह से जितना ज़ोर है आज लगा देना उस पर जिस से उस की आग बुझ जाए. बड़ी आग लगी है उस को आज. तेरे लण्ड का इंतजार कर रही थी.

तब तक भाभी अंदर से आ गई दूध ला कर और हम तीनों ने ही पिया.

भाभी बोली मेरे काले सांड पहले किस की फाड़ेगा.

मैंने कहा – भाभी आप चुदवा लो पहले इस से, फिर मैं फड़वा लूँगी.

मैं सोच रही हूँ की इतना मोटा कैसे जायगा मेरी चूत में.

भाभी बोली – छोटी, अब देख तमाशा इस घोड़े के लौड़े का कैसे जाता है मेरी फुददी में खचा खच.

छोटी बोली तो आप जाओ, दूसरे कमरे में.

भाभी बोली – क्यों तुझे शर्म आती है क्या. नहीं. इधर ही इस रूम में ही चुदाई होगी. जिस से तेरे को भी पता चले की भाभी कैसे लेती है इस मोटे डंडे को अपनी चूत में.

मैं धीरे से बोली – भाभी, अपना ध्यान रखना अंदर है भी ना कुछ.

तो भाभी इंग्लीश में बोली – नहीं कुछ नहीं है तो मत घबरा सब साफ़ हो गया है. तेरे भाई का बीज़ ही डलवा लूँगी मैं अब. लेकिन पहले मुझे इस सांड से दिल भर के चुदवाना है. फिर टाइम आउट ले के दूसरे की सोचेंगे.

अच्छा तो यह बात है, तभी मैं सोच रही थी की भाभी इतनी गरम क्यों हो रही है जैसे गये सांड का लेने को रामभती है.

भाभी ज़ोर से हंस पड़ी और बोली – छोटी करना पड़ा, यार. अभी मज़े ले फिर बाद में सब विस्तार से बताती हूँ. सही में, मैं आज बहुत गरम हो गई हूँ और मुझे चूत की गर्मी ठंडी करवानी है. तुझे पता नहीं अबॉर्षन के बाद चूत बहुत फड्फडा थी है. सो शुरू हो जाते हैं हम दोनों ही.

भाभी ने बिस्तर को नीचे कर दिया और तुरंत नंगी हो गई.

वाह क्या बदन है भाभी का. क्या चूत है भाभी की. एक दम से साफ़ सूत्री और डबल रोटी के जैसे फूली हुई.

मैंने कहा – भाभी बिस्तर नीचे क्यों. क्या बेड पर ही रहने देतीं.

तो भाभी बोली की भीमा के धक्के यह बेड सहन नहीं कर पाएगा और नीचे चुदाई करने पर पूरा लण्ड जड़ तक चूत में समा जाता है और बेड की आवाज़ भी नहीं आती.

बस चूत की फ़चा फॅक ही होती है.

मैने भीमा को पहले कह दिया था की जितना ज़ोर है आज भाभी की मस्ती ठंडी करनी है.

भाभी नंगी तो थी ही बो नीचे बेड पर लेट गई और भीमा को कहा की चल भीमा, अब जो करना है कर.

भीमा भाभी की चूत चाटने लगा और मैं देखती रही.

10 मिनिट के बाद जब भाभी बहुत गरम हो गई तो भीमा ने अपने मोटा लण्ड उस की चूत पर रखा और ज़ोर का धक्का मारा.

जैसे सांड़ घुसेड देता है एक ही धक्के में.

भाभी के मुँह से आह आह निकल गई और भीमा को अपनी बाहों में जाकड़ कर बोली – भीमा बिना बंद किए हुए चोद मुझे स्टॉप नहीं करना.

यह सुन कर भीमा की रफ़्तार देखने वाली थी.

दे धना धन पूरा बाहर निकलता और अंदर घुसेड देता.

भाभी की टाँगें अपने आप ही ऊपर उठ गयीं थीं.

करीब 10 मिनट के बाद लगी फ़चा फॅक होने.

मैं समझ गई की भाभी की चूत ने पानी छोड़ दिया है इसी से यह फॅक फॅक की आवाज़ आ रही है..

इधर मेरी हालत भी खराब हुई जा रही थी.

भाभी बोली – अब शरमाती क्यों है खोल दे अपनी मैक्सी को और आ जा नीचे बेड पर. नज़दीक से देख, कैसे घुस रहा है.

मैं भी तुरंत नंगी हो गई और उठ कर भाभी के पास बैठ गई और चुदाई देखने लगी.

भाभी ने धीरे से अपनी उंगली मेरी चूत में घुसेड दी. मैं चिहुनक उठी.

भाभी बोली – इतनी टाइट नहीं है तेरी चूत की मेरी उंगली भी ना ले सके. पूरी गीली हो रही है.

भाभी ने भीमा को आँख मारी और कहा की उठा इस की टाँगें और एक ही सूपर धक्के मे घुसेड दे अंदर.

भीमा ने फुर्ती से मेरी टाँगें पकड़ी और चौड़ी कर दी.

फिर उठा कर कंधे पर रख कर दे दिया ज़ोर का धक्का अपने लण्ड का.

सररर से पूरा का पूरा जड़ तक अंदर घुस गया.

मैं जानबूझ कर चिल्ला पड़ी – “आआआः फट गई रे भीमा. यह आदमी का लण्ड है की गधे का लोडा.

भाभी ने कहा की भीमा बंद मत करना चोद इस को ज़ोर लगा के.

10 धक्कों के बाद भाभी बोली की अब आराम से चोद, जब तक फ़चा फॅक की आवाज़ नहीं आती.

मैं गरम तो थी ही कोई 5 मिनट में मेरा पानी निकल गया.

अब भीमा तीन धक्के भाभी की चूत और तीन धक्के मेरी चूत में लगाने लगा.

हम दोनों को ही चोदने लगा था और उस ने भाभी से पूछा की भाभी, पानी किस के खेत में डालूं.

भाभी बोली – चल, मेरे में ही डाल और लण्ड निकालना मत जब तक पूरी तरह से झड़ ना जाए.

मैंने देखा की भाभी ने अपनी टाँगें चौड़ी कर दी और भीमा से लिपट गई जैसे साँप लिपटे हो.

भीमा ने पूरे ज़ोर से पिचकारी उस की चूत में भर दी और हम ठंडे पड़ गये दोनों ही.

 
जब शांत हुए तो भाभी बोली – छोटी, कैसा लगा भीमा का लण्ड.

मैंने कहा – भाभी बहुत तगड़ा लण्ड है. मैंने आज तक ऐसा लोडा नहीं देखा और ना इतना जोश किसी आदमी में ही देखा. एक साथ दो छीनाल को ठंडा कर दिया इस ने.

भाभी बोली – तू देख अब तो शुरू ही हुआ है पूरी रात बाकी है. तेरी चूत को चौड़ा करना है इसे आज. मेरी तो चोद चोद के पहले ही चौड़ी कर रखी है. मेरी बात कुछ और है. फिर तू बॉम्बे भी जाने वाली है ना 5 दिनों में. सो भीमा अब तेरी चुदाई पूरा जोश में करेगा. मैं तब तक इस सांड को गरम दूध का एक ग्लास मसाला डाल कर पीला देती हूँ. सो जल्दी तैयार हो जाए और लण्ड भी खंबे की तरह खड़ा हो जाए.

भीमा बाहर मूतने गया तो मैंने पूछा – भाभी, यह मसाला क्या है.

वो बोली – बाहर मिलती हैं लण्ड खड़ा करने की गोली. उस को दूध में पीला दो तो लण्ड में दस गुणी ताक़त आ जाती है. तेरा भाई काफ़ी खरीद कर रखते हैं और मुझे चोदते हैं और जब भी मेरी पलंग तोड़ चुदाई करनी हो तो यह गोली दूध में ले लेते हैं और फिर रात भर कभी चूत तो कभी गाण्ड में अपने लण्ड को डाले रहते हैं. खूब मज़ा आता है.

मैने कहा – अच्छा फिर तो आज पलंग तोड़ चुदाई होने वाली है.

और हँसने लग पड़ी, हम दोनों ही.

भाभी ने भीमा को दूध पिलाया और कहा की चल मेरे सांड़ अब 15 मिनट आराम कर ले. आज तुझे बड़ा काम करना है.

भीमा बोला – भाभी जी वो क्या काम है.

भाभी बोली की छोटी की चूत और गाण्ड दोनों का भोसड़ा बनाना है. ऐसा की क्या याद रखेगी यह भी बॉम्बे जा कर की भाभी का सांड कैसे घुसेड़ता है, जो दो दो को एक साथ ठंडा कर देता है.

भाभी को क्या पता था की छोटी अब वो छोटी नहीं रही है. उस ने भीमा के लण्ड से बहुत पहले अपनी चूत को चुदवा कर भोसड़ा बना लिया है. वो भी अपने पति के ही सामने. भाभी की चूत तो सही में देखने लायक थी ही पर अगर भाभी को कोई नंगी देख ले तो उस का तो पानी बिने चोदे ही निकल जाए.

मैंने भाभी को मज़ाक में कहा की भाभी, अगर आप बॉम्बे में आ जाएँ और एक चक्कर मार्केट् में लगाएँ तो शाम तक आप की गाण्ड वैसे ही लोग उंगली घुसेड कर ढीली कर देंगें.

बड़ी हँसी भाभी और बोली – क्यों तुम्हें मेरी गाण्ड इतनी पसंद आ रही है क्या.

मैंने कहा गाण्ड ही नहीं चूत और बूब्स, पूरी बॉडी एक दम से टाइट और सही फिट है. मैं लड़का होती तो अपना लण्ड तुम्हारी चूत और गाण्ड में घुसेडे ही रखती. लेकिन कोई बात नहीं मैं नहीं तो मेरा भाई ही सही. भैया तो पागल हो गये होंगे जब शादी हुई थी इस सुंदरी को पा कर.

भाभी बोली की बहुत खुश थे और फुल ताक़त से चुदाई करते थे. बोलते थे की तुम इतनी सुंदर हो की मन करता है की पूरा दिन रात नंगे ही रहें और चुदाई में डूबे रहें. बड़ा मज़ा किया है हम ने छोटी और तू भी कोई कम कयामत नहीं है. तेरे भैया ही तुझे नंगी देख लेते तो उन्हें बहन चोद बनने में वक्त नहीं लगता. यह तो भीमा नहीं पर भीमा के लण्ड की किस्मत है की हम जैसी एक नहीं दो दो सुंदरियाँ एक साथ चोदने को मिल रही हैं.

मैने कहा – वाह रे भीमा तू और तेरा लण्ड.

हम बड़ी ज़ोर से हँसने लगें दोनों ही और भीमा भी.

भाभी बोली – भीमा, तेरा खंबा फिर बाँस के डंडे की तरह खड़ा हो गया है. चढ़ जा अपनी प्यारी छोटी बीबी जी पर और कर दे चौड़ी इस की चूत और गाण्ड दोनों को ही. जितना चोदना है चोद ले आज इस को फिर मौका नहीं मिलेगा ऐसी सुंदरी को चोदने का.

भीमा छोटी पर जानवर की तरह टूट पड़ा और कोई दो घंटों तक गाण्ड और चूत का बडाल बडाल कर भोसड़ा बना दिया.

भाभी भीमा को उत्साहित करती रही – शाबाश मेरे सांड़ ज़ोर लगा के चोद. ऐसे चोद वैसे चोद. और भीमा छोटी को ठोकता रहा.

छोटी की हालत अब देखने वाली थी.

वो भाभी से बोली की अब नहीं भाभी. बहुत हो गई ठुकाई अब सहन नहीं होता. लगता है बहुत माल है इस सांड़ के अंदर. यह नहीं थकता बस कुत्ते की तरह लण्ड घुसड़ जाता है. भाभी अब तू ही संभाल इस को और इस के लण्ड को. मेरी तो अब बस हो गई है. मैं आराम करूँगी.

भीमा ने बाद में भाभी की चुदाई दिल लगा के की. आगे और पीछे से और पूरा बीज़ इन दोनों की चूत में भर दिया.

बाद में दोनों को ही नंगी सोते हुए छोड़ कर भीमा घर चला गया.

जब दोनों की आँख खुली तो सुबेह के 10 बज रहे थे.

छोटी बोली की भाभी, पूरा बदन दर्द कर रहा है.

भाभी बोली की मेरा भी छोटी. गजब की ताक़त है इस आदमी में और ऊपर से आप ने और खुराक पीला दी. बड़ी बेरेहमी से चोदता है साला.

मैंने भाभी को कहा की भीमा ने अपना पूरा बीज़ मेरी चूत में भर दिया है. पता नहीं क्या होगा अब.

भाभी बोली की अगर, तुझे इस का बच्चा चाहिए तो ठीक है रहने दो और नहीं तो देर मत करना बाहर निकल देना. इस का बीज़ अंदर गया नहीं और बच्चा ठहरा नहीं, ये मुश्किल है. बहुत गाड़ा है इस का बीज़.

आप ने भी तो निकाल दिया ना पहले जो अंदर था. – मैने पूछा

हाँ छोटी इस को पता चल गया था की भाभी के बच्चा रह गया है. मैं वो नहीं चाहती थी की इसे यह पता चले. मैं इस के बीज़ से बच्चा पैदा कर रही हूँ. फट से साफ़ कर दिया दानी को और देख फिर तैयार हूँ चुदाई के लिए. अब तो मैंने गर्भ निरोधक गोलियाँ रखी हैं इसलिए फट से खा लाती हूँ जिस से सब सॉफ होता रहे.

फिर हम फ्रेश हुईं और फिर इधर उधर की बातें होती रहीं और मैं शाम को अपने घर आ गई.

भाभी को सब कुछ के लिए शुक्रिया दिया स्पेशली चुदाई के लिए.

दूसरे दिन मैं बड़ी बहन से मिली. फिर मां से बातें हुई. मां बड़ी खुश थी और अब और मोटी हो गई हैं.

मैं समझ गई की भीमा की चुदाई रंग ला रही है.

मां की गाण्ड काफ़ी मोटी हो गई है अब.

भीमा अब हमारे घर का कॉल बॉय बॅन गया है. जहाँ का बुलावा आया चला गया.

सब उस के खाने का और सेहत का खास ध्यान रखते हैं.

इसके बाद, भीमा से चुदाई नहीं करवाई और मैं पाँच दिनों बाद वापस बॉम्बे आ गई.

बॉम्बे आकर जय ने मुझे दो दिनों तक खूब चोदा और सब के बारे में पूछा.

मैंने भीमा का जिक्कर भी किया तो जय ने कहा की कैसा है वो सांड़.

मैंने कहा की भाभी को चोद रहा है आज कल और भाभी भी उस का लण्ड मज़े से ले रही है.

अच्छा उस को भी भीमा के लण्ड का चस्का लग गया है क्या. – उसने पूछा.

हाँ – मैंने कहा. – बहुत चोदता है भाभी को. वो कह रहा था की बीबी जी भाभी की चूत बहुत ही रसीली है और भाभी उचक अचक कर मरवती हैं. तो तूने भीमा से बाद में भी चुदाई करवाई.

मैंने कहा की हाँ.

एक दिन रात को मुझे मां के घर से वापस आना था सो मैं उसे साथ में ही ले आई. फिर वो उस रात मेरे पास ही सो गया था. उस रात उस ने मुझे जानवरों की तरह दिल भर के चोदा और में भी चुदवाती रही. पूरा दिल से चुदी मैं और भीमा अपना बीज़ मेरी चूत में भरता रहा.

जय बोला की भीमा, बहुत ही तगड़ा है और उस से तगड़ा उस का लण्ड. तू तो खैर उधर ही थी अपनी चूत मरवाने के लिए लेकिन मैं भी भीमा को भूला नहीं हूँ. क्या गाण्ड मारी है. मैंने कभी ऐसे लण्ड से गाण्ड नहीं मरवाई आज तक. भीमा तो मुझे भी याद आता है तो औरतों का क्या हाल होगा. सुमन यह तो बता की भाभी की चूत कैसी है.

सुमन बोली – ऐसी गरम और टाइट जिस्म वाली औरत मैंने नहीं देखी है आज तक जय. अप्सरा लगती है जब बो नंगी होती है. कोई भी उस हालत में उसे चोदे बिना नहीं रह सकता.

फिर मैंने जय को वो पूरी कहानी बता दी जो मज़ा हम ने भाभी के घर किया था.

जय बोला – हाय रे, भीमा. तेरे मज़े हैं साले जो उठती है तेरे लण्ड की दीवानी हो जाती है.

जय बोला की मुझे दुख हो रहा है. अगर मैं उधर होता तो भाभी की चूत ज़रूर मरता. क्या उस की गाण्ड है. साड़ी में देखते ही लण्ड खड़ा हो जाता है. चलो फिर कभी सही.

अब मैने कहा की अब मुझे बताओ की भीमा के बीज़ का क्या करें. निकाल दूँ या रख लूँ. जैसा आप कहें.

जय बोला – बाहर निकलना ही ठीक रहेगा. हम अपने बीज़ से बच्चा पैदा करेंगे उस देसी सांड के बीज़ से नहीं. चुदाई तक ठीक है बात पर बच्चा पैदा करना उस का. नहीं यार. कल को कुछ दिक्कत ना हो जाए.

मैंने अगले दो दिन में दानी साफ़ करवा दी और तैयार हो गई नयी फसल के लिए.

जय को बोला – जब बच्चा चाहिए होगा बता देना.

वो बोला – ठीक है सुमन.

मैंने जय को बताया की भाभी ने भी उसका बीज़ निकाल दिया है कहतीं है की पति का बीज़ ही डलवाऊंगी.

उधर बड़ी दीदी को लड़का हुआ और सब बड़े खुश थे.

मैंने बड़ी दीदी से कहा की कैसा है.

तो वो बोली – छोटी बहुत सुंदर है. शुक्र है की मेरे पे गया है. बाकी सब उस पर गया है समझी ना तू.

मैंने कहा – ठीक है दीदी ध्यान रखना अपना और बच्चे का भी.

अगली छुट्टी में आ कर देखेंगे.

 
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