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अफ़रोज़ की पड़ोसन संगीता

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Guest
अफ़रोज़ की पड़ोसन संगीता --01



उस सोसाइटी का नाम अमन सोसाइटी था और रियल मै वहाँ से सब धरम के लोग अमन शांति से रहते थे .सब लोग एकदुसरे के काम आते थे,सब फेस्टिवल्स मिलके धूम धाम के साथ मानते थे. जब कोई भी डिस्प्यूट होती तो सब लोग एक साथ मिलके सल्यूशन ढूनडते और प्राब्लम का फ़ैसला करते. इससे कोई भी बात हाथ से ज़्यादा बाहर नही जाती**** सोसाइटी के 3र्ड फ्लोर पे अपनी बीवी और बेटी के साथ रहते थे मिस्टर प्रमोद भोसले. वो सुशील स्वाभाव के पति पत्नी जॉब करते थे. उनकी बेटी संगीता, अब सीनियर कॉलेज जाने लगी थी. संगीता एक अछी लड़की थी जिसपे उमर के साथ-साथ जवानी भी आये थी.17-18 के उमर होने से जिस्म अब भरने लगा था उसका .दिखने मै कोई हूर तो नही थी संगीता पर जिस्म सही जगहो पे भरने और बढ़ने से वो काफ़ी खूबसूरत लगती थी. कॉलेज के लड़के उसपे कॉमेंट्स मारते थे और संगीता को वो अक्चा भी लगता थ.ईन सबके बावजूद वो क़िस्सी को लिफ्ट नही देती थी क्योंकि उसका दिल मै तो उसके सोसाइटी मई रहनेवाले अफ़रोज़ के लिए प्यार जाग गया था. अफ़रोज़ रहीम ख़ान, जो 2न्ड फ्लोर पे रहता अपनी मा बाप की दूसरी औलाद था अफ़रोज़ की बड़ी बेहन, सलमा का निकाह पिछले साल हुआ था अफ़रोज़के मया बाप भी नौकरी करते थे. अफ़रोज़ 25 साल का था, पढ़ाई पोरी करके अब जॉब ढ़ूंड रहा था. दिखने मई एकद्ूम स्मार्ट और बतो मई किसको भी अपना बनाने मै वो एकद्ूम माहिर था . आcचि नौकरी मिलने तक कोई आइसे वैसे नौकरी नही करना चाहता था वो. अफ़रोज़ गये कई दीनो से देख रहा था की संगीता उससे आते जाते देखती थी. जब वो किसी के साथ बिल्डिंग के नीचे खड़ी होके बात करती थी और अफ़रोज़ बालकोनी मई आता तो वो नज़र चुराते उससे देखती. अफ़रोज़ भी संगीता को देखने लगा थ.ज़ब संगीता स्टेरकेस से नीचे या उप्पर जाती तो वो ज़रूर अफ़रोज़ के डोर मई झाँकती. अफ़रोज़ को भी संगीता पसंद थी. कई दीनो तक यह सिलसिला चलता रहा. अफ़रोज़ अब संगीता को देखके स्माइल भी करने लगा और धीरे-धीरे संगीता भी अब उसके स्माइल का जवाब दाने लगी. अफ़रोज़ संगीता से बात करना चाहता था पर मौका ही नही मिल रहा था. संगीता भी अफ़रोज़ से बात करना चाहती थी पर शर्म से वो कर नही पा रही थी. आख़िर मै संगीता को मिलने की अफ़रोज़ ने पोरी प्लांनिंग की. वो जनता था की दोफर को सोसाइटी मई एकदम सन्नाटा रहता है. घर के मर्द काम पे जाते है और उनकी बीवी घर का काम पूरा करके ज़रा आराम करती है. 3-4 बार अफ़रोज़ ने संगीता को डूफर को घर आते देखा था. संगीता को डूफर के वक़्त मिलने का उसने फ़ैसला किया अफ़रोज़ दिन अफ़रोज़ बाल्कनी मई खड़ा था जब उससे संगीता बिल्डिंग के गाते से अंदर आती दिखी. जल्दी से अफ़रोज़ घर से निकलते जाके स्टेर केस पे खड़ा हुआ. 2 मिनिट बाद उससे संगीता के आने की आहत हुई.1स्ट फ्लोर की सीढ़िया चढ़के जैसे संगीता उप्पर आए तो उसने अफ़रोज़ को देख.शन्गित की धड़कन अब तेज़ हुई. जिस अफ़रोज़ के लिए वो तड़प रही थी वो आज जब खुद उसके सामने खड़ा था तो संगीता कुछ बोल ही नही पा रही थि.शन्गित ने सलवार कमीज़ पहनी थि.शन्गित को इस दुविधा मई देखके अफ़रोज़ हल्के से स्माइल करके बोला,"हेलो संगीता,कैसे हो तुम?"संगीता शरमाते बोली,"हेलो अफ़रोज़,मई ठीक हून,तुम कैसे हो?"अफ़रोज़ संगीता के पास आते बोला,"जब तक तुझे नही देखा ठीक नही था पर अब तुझे देखके जान मई जान आई मेरि.शन्गित मुझे तुमसे एक बात कहनी है, मई तुमसे बहाड़ मोहब्बत करता हून और तुमको मेरी माशुका बनाना चाहता हून,क्या तुम भी मुझे चाहती हो संगीता?"अफ़रोज़ की बात सुनके संगीता शरमाये अफ़रोज़ ने आइसा सीन आजतक सिर्फ़ हिन्दी मूवीस मई देखा था. अफ़रोज़ की बात से उसकी धड़कन तेज हुई. अब नीचे देखते बोली,"अफ़रोज़ यह तुम क्या बोल रहे हो?मुझे कुछ समझ मई नही आ रहा है."अफ़रोज़ संगीता के और पास आते उसका हाथ हल्के से थमते बोला,"संगीता आईसी नादान मत बनो,तुम भी तो मुझे चुप-चिपके देखती हो ना?मुझे मालूम है की तुम भी मुझे चाहती हो है ना?"अफ़रोज़ के हाथ पकड़ने से संगीता डर गयी. अफ़रोज़ की हिम्मत देखके उस्से अछा भी लगता है पर क़िस्सी के आने का डर भी थ.Wओह अफ़रोज़ को चाहती थी पर ऐसे अचानक अपने प्यार का इज़हार कैसे करती?अपना हाट चुराने की कोशिश करते वो बोली, "प्लीज़ अफ़रोज़ तुम मेरा हाथ चोरो ना,यह मेरा हाथ क्यों पकड़ा है तूने?देखो कोई भी आ सकता है यहाँ. मेरा हाथ छोरो."अफ़रोज़ को पता था की इस वक़्त कोई नही आता इसलिए वो बिंडास्ट थ.शन्गित जैसे हाथ चुराने की कोशिश करने लगी अफ़रोज़ उसका हाथ और कासके पकड़ते उसके और पास आया और अब उसकी कमर मई एक हाथ डालते बोला,"आरे हाथ क्यों खिच रही है तू?क्या तू मुझसे प्यार नही करती?मई तेरा दीवाना हो गया हूँ संगीता अब तू ही मेरी ज़िंदगी है.शन्गित तेरा हाथ ज़रूर चूर दूँगा लेकिन पहले मेरी बात का जवाब दे और मेरा प्यार कबूल कर."संगीता अब पूरी तरह डर गये.आप्ने आपको अफ़रोज़ की गिरफ़्त से डोर करते, हाथ चुराने की कोशिश करते वो बोली,"अफ़रोज़ यह क्या कर रहे हो तुम?देख प्लीज़ मुझे जाने दो.Mऐ मनती हून की मुझे तू पसंद है पर अब सोचा तो समझी की मई तारे सामने कितनी छोटी हून."अफ़रोज़ फिर संगीता की कमर मई हाथ डालके उससे अब अपने से चिपकता है. चिपकने से अब संगीता का सीना अफ़रोज़ के सिने पे दबा है.ईधर उधर देखके अफ़रोज़ बोला,"संगीता तू मुझे प्यार करती है तो उसमे छोटा बड़ा क्या करना है. वैसे माना की उमर मई तू छोटी है, बाकी देखो तुम्हारा बदन कैसे एक जवान लड़की के जैसा है. देख जबतक तू हन मई बोलती तुझे जाने नही दनेवाला मई."संगीता अब कोई जवाब नही दे पाई. पहला प्यार जिसे किया वोही लड़के के बहो मई वो अब थी पर डर गये थि.Wऐसे संगीता ज़रा भोली और शर्मीली लड़की थी पर अपनी सहेलियो की चुदाई की बाते सुनके उसके दिल मई भी अपनी चूत चुड़वा लाने की उमंग जाग उठी थी. अफ़रोज़ के हॅंडसम लुक्स पे वो फिदा थी और इसलिए उससे बार-बार देखती. अफ़रोज़ उमर और एक्सपीरियेन्स मई संगीता से काफ़ी बड़ा था. वो संगीता जैसे भोली लड़की को फसके मस्ती करने के मूड मई था. जबसे उससे समझा की संगीता उससे देखती है उसने भी संगीता को देखना शुरू किया था. अफ़रोज़ ने इस संगीता की कोरी जवानी को मसल्ने का पोरा प्लान बनाया था. संगीता के मुहसे कोई जवाब ना पके अफ़रोज़ हल्के से संगीता के मम्मे पे हाथ फेरते बोला,"संगीता, मई तुझसे शादी करना चाहता हून.टुझे दुनिया की सब खुशी दूँगा,अcचे ड्रेसस दूँगा और तुझे हमेशा खुश रखूँगा. देख संगीता,आगर तूने फिर भी इनकार किया तो मई जान दे दूँगा तारे नाम से."अपने सिने पे पहले बार और वो भी आइसे खुले जगह मई मर्द का हाथ महसूस करते ही संगीता हड़बड़ाई अफ़रोज़ का जिस्म मई एक करेंट दौड़ते जिस्म मई सरसराहट फैलि.शन्गित पे एक अजेब मस्ती छा गये और वो उससी मस्ती मई बोली है,"अफ़रोज़ देख मई भी तुझे प्यार करती हून और मुझे यकीन है की तू मुझे खुश रखेगा पर शादी कैसे कर सकती हून तुझसे?एक तो हमारा धर्म अलग है और हमारी उमर मई भी कितना फ़र्क है ना?प्लीज़ अब मुझे जाने दे अफ़रोज़,कोई हमे यहाँ देखेगा तो मेरी बड़ी बदमानी होगी."अफराज़ जनता था की कोई नही आता है उस डूफर के वक़्त इसलिए वो बींदस्त थ.ःअल्के से संगीता के सिने पे हाथ घूमते वो बोला,"संगीता अगर तुझे मुझसे प्यार नही तो क्यों मारे आते जाते तू मुझे देखती रहती है?क्यों बार बार मारे सामने से आते जाते तड़पति हो?अगर तू जानती है की मई तुझे खुश रखूँगा तो क्यों खुले दिल से मेरा प्यार नही आक्सेप्ट करती है तू? और यह धरम की बात तूने तब सोचनी चाहाए थी जब तू मुझे देखने लगी. आरे मुस्लिम हुआ तो क्या मई भी तो इंसान हून ना?" अचानक संगीता का लेफ्ट मम्मा दबाते असलम बोला,"जैसे तारे इधर एक दिल है वैसे मुझे भी दिल है. मुझमे नेया पसंद की यह क्या बात है संगीता?"मम्मा दबने से संगीता को मज़ा आता है पर वो बहुत शरमाती भी है. अफ़रोज़ की दरिंग पे संगीता खुश हुई पर डर से उसका दिल और ज़ोरो से धड़कने लगता है. मम्मा दबने से वो हकले से चीकते बोली,"आह,अफ़रोज़ दर्द हो रहा है,क्यों दबा रहे हो आइसा?देखो मई कुछ नही जानती यह सब,मुझे प्लीज़ तुम जाने दो अफ़रोज़."अफ़रोज़ समझा की संगीता शर्म से इनकार कर रही थि.शन्गित का सीना हल्के मसालते उसका गाल किस करते अफ़रोज़ बोला, "संगीता तुझे तेरा दिल दिखाने मैने सीना दबय.डेखो मुझे पता है है तू भी मुझे चाहती है तो क्यों इतना तडपा रही है मुझे? एक बार प्यार का इज़हार तू कर तो तुझे जाने दूँगा मई."अफ़रोज़ के किस से संगीता पूरी तरह हड़बड़ा गये.आफ्रोz को धक्के डाके डोर करते वो बोली,"उम्म्म मुझे छोरो प्लीज़ अफ़रोज़,यह सब क्या है?मुझसे दूर रहो तुम." अफ़रोज़ से दूर होके संगीता जैसे जाने लगती है अफ़रोज़ उसका हाथ पकड़ते बोला, "अच्छा संगीता एक काम करो,मुझे आज श्याम को मारे घर मई मिलके बताओ की तुझे मई क्यों पसंद नही ओक?मुझे मिलने तू आएगी ना मेरी जान?प्लीज़ आओ ना,एक बार सिर्फ़ एक बार . नही तो मई आज जान दे दूँगा और देअथ नोट मई तेरा नाम लिखूंगा,तब तो आओगी ना रानी मुझे मिलने?"अफ़रोज़ से हाथ चुराते संगीता बोली,"नही मई नही आयूंगी अफ़रोज़ तुमसे मिलने." पर अफ़रोज़ की जान दाने की धमकी से डरके उसने आगे कहा,"नही अफ़रोज़ ऐसा मत करना प्लीज़,नही मुझे कुछ सोचने का समय दो,मै तुमको सोचके बतौँगी पर तब तक तुम अपने आप को कुछ मत करना,मेरी कसम है तुमको.

 
इतना कहते संगीता वहाँ से निकल गये.Wओह अफ़रोज़ को बहुत चाहती थी और जब अफ़रोज़ ने उससे बहो मै लिया तो उससे बड़ा अक्चा लगा पर ऐसे ओपन जगह मै यह सब करने से वो डर गये थी****दिन संगीता अफ़रोज़ के बारे मै सोचने लगि.ज़ब अफ़रोज़ ने उसके मम्मे दबाए तब अपनी मस्ती की फीलिंग के बारे मै सोचके संगीता बहुत शरमाये****से डर भी लगता है की अब अफ़रोज़ उससे कही और भी अकेले मै ना पक्दे.आब उसके दिमाग़ मै अफ़रोज़ बस गया था.2-3 दिन जब वो अफ़रोज़ को देखती तो अफ़रोज़ उससे आँख मरता और इससे संगीता सर्मति.आब अफ़रोज़ हफ्ते मै 2-3 बार संगीता को आइसे पकड़ते उसका जिस्म मसालते प्यार का इज़हार माँगता और संगीता हर बार कोई ना कोई बहाना बनके वहाँ से भाग जति.Yएह सिलसिला करीब 2 हफ्ते चला पर संगीता कोई जवाब नही दे रही थि.आअखिर मै इस बात का फ़ैसला करने का इरादा अफ़रोज़ ने बनय.आफ्रोz भी संगीता के मस्त जिस्म के बारे मै सोचके अपना लंड सहलाता थ.एक श्याम जब वो घर आ रहा था तो उससे बिल्डिंग के पीछे वाली रोड से संगीता को आते देखा. बिल्डिंग के पीछे अंधेरा था,लोग आते थे उस शॉर्टकट से पर ज़्यादा नही**** रोड के साइड्स मै काफ़ी झाड़िया थि.शन्गित अपने आप से कुछ सोचते आ रही थी और अफ़रोज़ अचानक उसके सामने खड़ा हुअ.आफ्रोz को देखके वो एकद्ूम रुक गये****का दिल ज़ोर्से धड़कने लग.श्मिले करते अफ़रोज़ बोला,"आरे संगीता, कैसे हो तुम?"इस वीरान जगह मै अफ़रोज़ को देखके संगीता कुछ बोल ही नही पये.आप्ने जिस्म पे अफ़रोज़ का स्पर्श क्या करता है वो जानती थि.आब वो यहा रुकी तो अफ़रोज़ क्या कर सकता था कोई भरोसा नही था इसलिए अफ़रोज़ को साइड स्टेप करके अफ़रोज़ की बात का कोई जवाब दिए बिना संगीता जल्दी-जल्दी वाहा से चलने लगि.आफ्रोz भी कचा खिलाड़ी नही था****ने संगीता का हाथ पकड़ते रोड के साइड मै ले जाते कहा, "आरे संगीता,इतना क्यों डर रही है तू?देख मै तुझसे सुकचा प्यार करता हून डियर, मुझसे क्यों भाग रही है तू?"संगीता अब और भी डरते छूटने की कोशिश करते बोली,"मुझे जाने दो अफ़रोज़,मै तुमसे बात नही करना चाहती हून,प्लीज़ मुझे जाने दो."संगीता को बहो मै भरते अफ़रोज़ बोला,"क्यों लेकिन संगीता,मेरा गुनाह क्या है यह तो बताओ?मई तुझे दिलो जान से प्यार करता हून,तू भी मुझे चाहती है तो इकरार करने से क्यों डरती हो?"संगीता को वैसे अक्चा लगा अफ़रोज़ की बहो मै आने से,उसकी बतो से और उसका हाथ अपने जिस्म पे लगा ने से पेर शर्म और डर से वो बोली,"मुझे चोरो ना प्लीज़ अफ़रोज़,यह क्या कर रहे हो?मैने बोला ना अफ़रोज़ मै कितनी छोटी हून तुमसे और इसलिए मुझे डर लगता है.आब मुझे जाने दो." अफ़रोज़ संगीता को और अंदर ले जाता है.ज़ह वो अब खड़े है वो जगा कोई नही देख सक्त.शन्गित को बहो मै भरते अफ़रोज़ उसके गाल चूमते बोला, "संगीता, मै तुझपे प्यार बरसा रहा हून और तू मुझसे दूर भाग रही है.शन्गित,तारे दिल मै कितना प्यार है मारे लिए यह मुझे जानना है आज."गाल चूमने से संगीता हड़बड़ते अफ़रोज़ को हल्का सा धक्का डाके उससे दूर करते बोली,"उम्म्म प्लीज़ चोरो मुझेँअहि अफ़रोज़ यह नही हो सकता की हमारी शादी हो क्योकि मै तुमसे छोटी हून और तुम एक मुस्लिम हो.डूर रहो ना प्लीज़,अफ़रोज़ मुझे डर लगता है.शन्गित के धक्के से अफ़रोज़ ज़रा तोड़ा दूर होता है पर फिर उससे पकड़के गाल किस करते करते अब संगीता के भरे सिने पे हाथ रखते बोला,"संगीता इसमे धरम को क्यों लाती है,देख प्यार दो दिलो का मिलन होता है.Mऐ जनता हून की तू भी मुझे प्यार करती है पर बताने शर्मा रही है. संगीता अभी प्यार की शुरूर्वात ही हुई की तू सीधे शादी की बात तक पौच्ी,क्या सुहग्रात मानने का इरादा है तेरा?"सुहग्रात की बात सुनके और सिने पे अफ़रोज़ का हाथ पके संगीता का चहेरा शर्म से लाल हो गया. वो कुछ बोल ही नही पये.शन्गित के दुविधा का फ़ायदा उठाते अफ़रोज़ उसके शर्ट के 2 बटन ओपन करके मम्मो से भरे ब्रा पे हाथ रखते बोला,"और तुझे कैसा डर संगीता?देख मै तुझसे बहुत प्यार करता हून रनि.शन्गित रानी देख तेरा दिल मारे लिए कितना ज़ोर्से धड़क रहा है,तारे इस दिल मै मारे लिए प्यार है लेकिन तू इसलिए डार्ती है क्योंकि मै मुसलमान हून और तू हिंदू है ना?"अपने शर्ट के अंदर ब्रा के उप्पर अफ़रोज़ का स्पर्श होते ही संगीता का दिल और ज़ोर से धड़कता है. उससे गुदगुदी भी होती है और उसका जिस्म कापने लगता है.आब भी जब संगीता कोई जवाब नही देती तो अफ़रोज़ को बड़ा गुस्सा आता है.Wओह क़िस्सी भी तरह इस कमसिन लड़की को छोड़ना चाहता था इसलिए दिल मै संगीता को गलिया डटे पर संगीता का क्लीवेज मसालते वो बोला,"संगीता रानी देखो क्यों मारे प्यार से इनकार कर रही हो तुम? तुझे मारे मुसलमान होने पे तक़लीफ़ है ना तो मै तारे लिए तो धर्म बदल दूँगा,फिर तुझे कोई तक़लीफ़ नही होगी ना?"इस बात से संगीता खुश होती है****से यकीन होता है की अफ़रोज़ उससे सॅकी मै प्यार करता है. वो अफ़रोज़ की मीठी बातो मै आती है.आप्ने जिस्म पे चल रहा अफ़रोज़ का हाथ उससे बड़ा अक्चा लगता है और वो कहती है,"ऑश अफ़रोज़ उफ़फ्फ़ क्या कर रहे हो तुम?अफ़रोज़ मुझे कुछ नही मालूम प्यार के बारे मै पेर उस्दीन के बाद से तुम्हारा ख़याल बार-बार आया था अफ़रोज़****दिन से मै हर पल तुमको याद करती हून."संगीता के इस जवाब से अफ़रोज़ समझा की संगीता उसकी बतो मै फस गये**** दिन का उसके जिस्म के साथ किया खेल संगीता को अछा लगा था यह जानके अफ़रोज़ अब संगीता के शर्ट के सब बटन खोलते झुकके क्लीवेज चूमते और लेफ्ट मम्मा हल्के से दबाते बोला,"संगीता,मुझपे भरोसा रख रानी,मै तुझे कभी धोका नही दूँगा, ज़िंदगी भर तेरा साथ दुन्ग.आब तो बोल क्या तुझे भी मुझसे उतना ही प्यार है जितना मुझे तुझसे है?क्या तारे इस दिल मै मारे लिए प्यार है संगीता?"संगीता अफ़रोज़ को ना शर्ट खोलने से रुकती है और ना ही अपने मम्मे मसल्ने से.आप्न जिस्म अफ़रोज़ से सहलाने उससे अक्चा लग रहा था****से बस डर था की कोई उनको ना देखे इसलिए अफ़रोज़ को दूर करने की नाकाम कोशिश करते वो बोली,"मुझे नही मालूम अफ़रोज़,प्लीज़ मुझे चोरो,कोई देख लेगा हुमको.""कोई नही देखेगा संगीता,यहा इस वक़्त कोई नही आता है.टु मेरी बात का जवाब दे,क्या तारे दिल मै मारे लिए उतना ही प्यार है जितना मारे दिल मै तारे लिए है?" ब्रा के उप्पर से संगीता के मम्मे वो दबा रहा है जिसे संगीता गर्म होती है और उससे अफ़रोज़ टच अछा लगता है.एक मोटे पेड़ से संगीता को सटके अफ़रोज़ अब उसके मम्मे मसालते अपना लंड उसकी चूत पे हल्के-हल्के रगड़ते बोला,"संगीता मै तुझे बहुत प्यार दूँगा मेरी रानी,ज़िंदगी भर तुझपे प्यार की बरसात करता रहूँगा मै."संगीता को बहुत मज़ा आता है बार-बार अफ़रोज़ से मम्मे दबाने से और गुदगुदी भी होती है.आफ्रोz से अपनी चूत पे गर्म लंड रगड़ने से अब वो और गरम होते बोली,"उम्म्म अफ़रोज़,यह क्या कर रहा है? प्लीज़ मुझे जाने दो,कोई देखलेगा प्लेअसे.Mऐ तुमसे बाद मै मिलूँगा,प्लीज़ मुझे अभी जाने दो."अफ़रोज़ भी सोचा की इससे अब ज़्यादा तंग किया तो कही नाराज़ ना हो.ळेकिन फिर भी उसके जिस्म से खेलते वो बोला,"ठीक है चोरँगा रानी तुझे लेकिन उसके पहले तुझे भी मुझसे तू प्यार करती है यह सुनने के बाद,तुझसे प्यार का इज़हार होने के बाद तुझे जाने दुन्ग.शन्गित मुझे तुझसे अकले मै मिलके बहुत सी बाते करनी है,कब मिलेगी मुझे फ़ुर्सत मै?"संगीता अब अफ़रोज़ के हाथ से छूटने की कोशिश करने लगी****से असल मै अफोर्ज़ से जिस्म मसल्ने मै माज़ा आ रहा था पर फिर भी वो बोली,"नही अफ़रोज़ मै तुमसे नही मिलुन्गि.Mउझे डर लगता है तुमसे अकेले मिलने,प्लीज़ अब जाने दो मुझे."संगीता का यह नाटक देख अफोर्ज़ को गुस्सा आय.Pअर अपने आप पे काबू रखते वो ब्रा कप उठाके संगीता के मम्मे नंगे करता है.शन्गित के गोरे टाइट मम्मे देखके अफ़रोज़ खुश होके निपल मसालते बोला,"संगीता अगर तूने प्यार का इज़हार और कल मिलने का वादा नही किया तो मै तुझे अब यही नंगी करूँगा, अब सूच तुझे क्या चाहाए रानी,नंगी होना है या प्यार का इज़हार करोगी?"इतना कहते अफ़रोज़ एक निपल चूसने लग.शन्गित को निपल चुसवाने से गुदगुदी होती है पर अब उसका जिस्म और गर्म होता है.Wओह सिसकारिया लाते बोली,"उम्म आह अफ़रोज़्ज़,नहिी प्लीज़ मुझे चोरो न.आफ्रोz मै हार गये,हन मै तुमसे प्यार करती हून अफ़रोज़,ई लोवे यौ.Pलेअसे देख मैने तेरी बात मान ली अब जाने दे मुझे अफोर्ज़."संगीता की बात सुनके अफ़रोज़ खुश होता है पर अब तड़पने की बारी उसकी होती है.आब वो संगीता को तब ही जाने दनेवाला था जब उसका दिल हो.Mअम्मे लीक करके एक निपल चूस्ते अफ़रोज़ बोला,"ओह थॅंक्स डार्लिंग,मै भी तुझसे बहुत प्यार करता हून.Pअर संगीता यह बता तू कितना प्यार करती है मुझसे?और मुझसे फुरस्त मै कब मिलेगी मारे घर यह भी बताओ रानी?संगीता को बड़ा अक्चा लग रहा थ.Wओह अफोर्ज़ के सिर पे हाथ रखते बोली, "आह अफ़रोज़्ज़्ज़्ज़ मै तुमसे बहुत प्यार करती हून,बहुत प्यार करती हून,मारे दिल मै सिर्फ़ तुम ही तुम है.आफ्रोz मै कल तुमसे मिलुन्गि.Mऐ डूफर को 2 बजे आयूंगी तारे घर.Pलेअसे अफ़रोज़ अब मुझे चोरो ना प्लीज़,कोई देखेगा हुमको तो बड़ी मुश्किल होगी मुझे."

 
अफ़रोज़ की पड़ोसन संगीता - 02

संगीता के मम्मे,सीना मसलके चूमते अफ़रोज़ अब उसके होठ चूमने लगता है. संगीता भी गर्म होके अपना सीना अफ़रोज़ के हाथ पे दबाते उसके गले मै हाथ डालके किस का जवाब दाने लगती है.शन्गित की चूत पे लंड रगड़ते अफ़रोज़ उसको चूमते उसका जिस्म खूब मसालते बोला,"संगीता,तू कल शॉर्ट रेड त शर्ट और उसके नीचे वो मिनी ब्लॅक स्कर्ट पहंके आजा जो तूने लास्ट सनडे पहना था. तू उस ड्रेस मै बड़ी सेक्सी लगती है,आएगी ना रानी वोही ड्रेस पहंके?"संगीता को अफोर्ज़ से यह सब करवाने बड़ा माज़ा आ रहा था इसलिए वो अब जाने की कोई बात नही कर रही थि.आप्न जिस्म अफ़रोज़ के हाथो मै ढीला चोर्ते फिर भी नाटक करती बोली,"हन अओयूंगी मै ज़रूर अफ़रोज़ लेकिन प्लीज़ अब चोरो ना मुझे.घ्हर लाते गये तो मया चिल्लाएगी."अफ़रोज़ संगीता को आज इतना गर्म करना चाहता था की कल संगीता अपना जिस्म मसलवाने ज़रूर आए. इस लिए अभी भी संगीता के नंगे मम्मो से खेलते अब स्कर्ट के नीचे से उसकी नंगी झांग सहलाते वो बोला,"अछा रानी अब एक गुड नाइट किस दो मुझे,जिसके सहारे आज की रात गुज्रे.टु अपनी तरफ से एक किस मुझे दे फिर तुझे जाने दूँगा यहाँ से."संगीता को अब यहा बहुत डर लग रहा है पेर मज़ा भी बहुत आरहा था. वो असल मै चाहती थी की अफ़रोज़ और मसले उसका जिस्म.आफ्रोz को किस करने की बात से शरमाते वो बोली,"उम्म अफ़रोज़,ज़िद मात करो,मुझे जाने दो न.डेखो किस कल दूँगी तारे घर आके.Mउझे अभी जाने दे प्लीज़."अफ़रोज़ अब ज़िद पकड़के बैठा थ.शन्गित की झांग और नंगे मम्मे मसालते उससे और गर्म करते अफ़रोज़ बोला,"जाने दूँगा रानी पहले तुझसे प्यार तो जताने दो मुझे,तारे जैसे गर्लफ्रेंड तो नसीब्वलो को मिलती है.Zअर तारे इस जिस्म पे प्यार तो बरसाने दे मुझे जान."संगीता फिर अफ़रोज़ का हाथ पकड़ते बोली,"अफ़रोज़ अगर तुम मुझे प्यार करते हो तो प्लीज़ मुझे जाने दो.डेखो मुझे बहुत डर लग रहा है.Mऐने तेरी बात मानी ना,तो प्लीज़ मुझे जाने दे."संगीता की झंगो पे हाथ फेरते अब उसकी चूत को पनटी के उप्पर से हल्के सहलाते अफ़रोज़ बोला, "आरे रानी दारगी तो मज़ा कैसे पावगी?देखो मै हू ना तो डरना नही समझी?तूने मेरी सब बाते कहा मानी जान,मैने बोला मुझे किस करके कल आने का वादा करके जा,पर तू किस ही नही कर रही मुझे तो तुझे जाने कैसे डून?कविता मै तुमको जाने नही देना चाहता हू रानी,मुझे तेरा साथ हमेशा के लिए चहये.टुम रूको तोड़ा टाइम और,आज पहले बार तुमसे प्यार की बाते कर रहा हू मै.टुझे क्यों इतने जल्दी जाना है?क्या मेरा हाथ अक्चा नही लग रहा तुझे?"अफ़रोज़ चूत सहलाते अब मम्मे बार-बार चूसने लगता है.शन्गित को अपनी चूत गिल्ली होने का अहसास होता है****के जिस्म मै बड़ी गर्म भर जाती है.आफ्रोz के मसल्ने से उसपे एक नशा सा छा जाता है और वो अफ़रोज़ को बाहू मै भरते बोली,"उम्म अफ़रोज़्ज़्ज़,बड़ा अक्चा लग रहा है मुझे.Mऐ भी नही चाहती तुमसे दूर होना पर अगर घर लाते गये तो मया चिल्लएगि.Mऐने वादा किया है ना तुझे की कल आयूंगी तो ज़रूर आयूंगी,अभी मुझे जाने दे अफ़रोज़."संगीता की चूत से हाथ निकलते अफ़रोज़ अब लंड चूत पे रगड़ते बोला,"संगीता क्या तुझे मेरा साथ अक्चा नही लगता रानी जो तू बार-बार जाने की बात कर रही है?क्या मारे साथ प्यार की बाते नही करनी तुझे?क्या तारे जिस्म से कर रहा प्यार तुझे अक्चा नही लग रहा?"संगीता तो गर्म थी ही पर अफ़रोज़ की हरकटो से वो डर रही थी की कही अफ़रोज़ उससे यही नंगी ना करेऑहुत पे रग़ाद रहे लंड की दीवानी हो गये थी वो. अफ़रोज़ को अपने बदन पे और खिचते संगीता मादक स्वर मै बोली,"हन अफ़रोज़, मै भी तारे साथ बहुत सारा वक़्त गुज़रना चाहती हून,मै तुमको बहुत प्यार करने लगी हून अफ़रोज़ पेर मुझे अब घर जाना है.Pलेअसे मेरी मजबूरी साँझ आफ्रोz.Mउझे बहुत लाते हो रहा है,मया ने पूछा तो क्या जवाब दूँगी?"अफ़रोज़ समझा की संगीता नाटक कर रही है.Wओह चाहती है की अफ़रोज़ उसका जिस्म और मसले,और खेले उसके साथ पर क़िस्सी के आने का डर था उस्से.झुक्के संगीता के मम्मो की दरार चूमते अफ़रोज़ बोला, "अगर तू मुझसे इतना प्यार करती है तो क्यो जल्दी जाना है तुझे मुझसे दूर संगीता?मई हमेशा के लिए तुझे मेरी बाहू मै भरके रखना चाहता हून रनि.शन्गित,प्लीज़ रूको ना तोड़ा टाइम मेरा दिल भरा नही रानी." अफ़रोज़ अब संगीता के मम्मे और निपल्स पिंच करता है जिससे संगीता और गर्म हो रही है.डिल ही दिल मै वो कहता है,'साली हरामी लड़की एक बार मारे हाथ से नंगी हो जेया फिर देख तुझसे क्या क्या करवाता हून मै.' निपल पिंच होने से और मज़ा आता है संगीता को और वो आहे भरते अफ़रोज़ से ज़्यादा चिपकते बोली,"अफ़रोज़ मुझे भी तुमसे दूर होने का दिल नही होता है पेर यहा डर लग रहा है किसी के आने का और घर लाते जाने का भी."संगीता का स्कर्ट पूरा उप्पर करके उसकी नंगी झांगे और छोटी पनटी देखके अफ़रोज़ और खुश होके नीचे बैठके झांग चटके बोला,"आरे रानी कोई नही आता यहाँ,आया तो भी हम कोने मै खड़े है तो दिखाने ही नही,तू घबरा मत. बस जवानी का माज़ा लेती रह मारे साथ." अफ़रोज़ ने सोचा की साली बहुत नाटक कर रही है अभी यह,लेकिन कल देख तुझे कैसे रंडी जैसे नाचता हून सालि.आप्नि झांगे चत्वाके लाते संगीता भी मज़ा लाते अफ़रोज़ से और छिपकने लगी. उससे यह फीलिंग बड़ी अची लगती है,ऐसा कभी फील नही हुआ था उस्से.ज़ब अफ़रोज़ पनटी के उप्पर से उसकी चूत चूमता है तो संगीता बहाल होके कमर आयेज करके,चूत अफ़रोज़ के मूह पे दबाते बोली,"अफ्फरूज़्ज़ ऊओ उम्म्म्ममम यह क्या कर रहे हो?मुझे अजीब सा लग रहा है तारे उधर चूमने से आफ्रोz.Pअर अब बस करो अफ़रोज़, मुझे जाने दो,कल मै आयुगी ना,अभी तो जाने दो मुझे."अफ़रोज़ खड़ा होके अब संगीता को पीछे से पकड़के उसकी गंद पे लंड रगड़ते दोनो हाथ से उसके मम्मे दबाते बोला,"संगीता,क्या तू सिर्फ़ अफ़रोज़-अफ़रोज़ बोलेगी या आयेज भी कुछ कहेगी रानी?" माममे मसालते वो सोचा की साली तारे जिस्म मै आज इतनी आग लगौँगा की कल तू बेचैन होके आएगी मारे पास अपनी चूत चुद्वन.आफ्रोz की इस हरकत से संगीता और ही मदहोश होके आँखे बंद करके बोली, "उउंम्म,हन अफ़रोज़,ई लोवे यौ.टु मुझे आज बहुत खुशी दे रहा है अफ़रोज़. आइसा माज़ा तो पहले कभी नही मिला था मुझे."अपना तगड़ा लॉडा अब संगीता की गंद पे घिसते उसके मम्मे ज़ोर्से दबाने लगता है अफ़रोज़ जिससे संगीता के कमसिन बदन मै आग बढ़ती जाती है.खस्के संगीता को पकड़के अफ़रोज़ ने सोचा की साली कल इससे छोड़के इसके सब नाटक बंद करुन्ग.Bअहुत इतराती है साली यह चुतँइप्प्लेस को उंगलिओ से पकड़के उन्हे हल्का सा खिचते वो बोला,"संगीता,मुझसे कितना प्यार करती है यह तो बताओ ना?"अफ़रोज़ की हरकटो से संगीता को बहुत अक्चा लग रहा था****के जिस्म पे नशा चाड रहा थ.आफ्रोz के लंड के टच होने से सारी बॉडी मै आग लगी थी और दूध मसल्ने से और भी बढ़ रही था आग. अपने मम्मो पे लगे अफ़रोज़ के हाथ वही मम्मो पे थमते वो बोली,"अफ़रोज़ मै बहुत प्यार करती हून. मारे दिल मै,ज़हन मै सिर्फ़ तुम ही तुम हो.आअज दुनिया मै तुमसे बढ़के कोई नही है मारे लिए." इस जवाब दे अफ़रोज़ का दिल नही भर.Wओह और ज़्यादा कुछ सुनना चाहता था संगीता से,इसलिए अब पीछे से उसने संगीता का स्कर्ट उठाके पनटी के उपर से अपना लंड संगीता गंद पे रगड़ते संगीता को और ही ज़्यादा गर्म करते सोचा की साली कैसे तड़प रही है यह कमसिन लड़की?इसकी चूत छोड़के इससे औरत बनाने मै बड़ा माज़ा आयेग.श्किर्त उठाने और अफ़रोज़ का लंड सिर्फ़ पनटी के उप्पर से गांद पे टच होने से संगीता चमकते स्कर्ट नीचे करती है.Wओह तुर्न होते घबराहट से बोली,"अफ़रोज़ यह क्या कर रहे हो?मेरा स्कर्ट क्यो उठा रहे हो पीछे से?प्लीज़ अब मुझे जाने दो,अब मुझे बहुत डर लग रहा है." रियल मै संगीता को उस मोटा लंड के टच से बहुत मज़ा आता है.Wओह कड़क लंड अपनी नरम गांद पे दबने से उससे करेंट लगता है.आफ्रोz उससे तुर्न नही होने देता और फिर स्कर्ट पीछे से उप्पर करके लंड रगाते बोला,"तुझे मेरा प्यार दिखा रहा हून रानी,क्योकि तू मुझे नही बता रही है की तू मुझसे कितना प्यार करती है मै दिखा रहा हून की मुझे तुझसे कितना प्यार है." संगीता बार-बार स्कर्ट को नीचे करने की कोशिश कर रही थि.Pअर अफ़रोज़ उससे कमियाब नही होने दे रहा था इस कोशिश मै.आअखिर मै संगीता की कमर तक स्कर्ट उठाके जान अफ़रोज़ संगीता की गांद पे लंड रगड़ने लगता है.आब संगीता रेज़िस्टेन्स कम करते बोली,"उम्म नही अफ़रोज़,स्कर्ट आइसे उप्पर मत करो,तू बता मै प्यार का इज़हार कैसे करू?अफ़रोज़ साची मै तुमको बहुत प्यार करती हून मै पर अब प्लीज़ ऐसा मात करो,कोई आयेग.Mउझे डर लग रहा है क़िस्सी के भी आने का.

 
अफ़रोज़ की पड़ोसन संगीता - 03

संगीता की गंद पे अपना तगड़ा लंड और ज़ोर्से रगड़ते अफ़रोज़ बोला,"यह तू ही बता संगीता की तू कैसे तारे प्यार का इज़हार करेगि.ख्य मैने तारे जिस्म से खेलने के फेल तेरी पर्मिशन ली थी?अब जैसे मै तारे जिस्म के साथ खेकले मेरा तुझे कितना प्यार है यह दिखा रहा हून वैसे अब तू बता तू मुझे कितना प्यार करती है." अफ़रोज़ के दिल मै यह बात आए की 'साली आगर तू मेरा लंड मूह मै लेगी तो मै समझुगा की तू अब मुझे पसंद करने लगी है मेरी कमसिन छीनाल.'संगीता अब मोटे लंड के टच और निपल के दबने से बहुत मचलती है****की हालत बहुत ही खराब हो रही है.शन्गित बहुत मचल रही है और उससे बहुत बेचैनी हो रही है.Wओह सिसकारिया भरते बोली,"क्या करू अफ़रोज़ जिससे तुमको भरोशा हो जाए की मेरा भी तुमपे कितना प्यार है?अफ़रोज़ उम्म मात करो ना श कोई आज्एगा ना प्ल्ीएआआसस्स्सीईई."यह बात सुनके अफ़रोज़ संगीता की पनटी थोड़ी नीचे करते अपनी ज़िप खोलके लंड बहार निकलते उससे संगीता की कमसिन गंद पे रखक्के आहिस्ता-आहिस्ता रगड़ते उसके मम्मे ज़्यादा ज़ोर्से दबाते बोला,"सुनो मेरी संगीता रानी,अगर मै काहु की तू मेरा यह एक बार चूस(यह कहते अफ़रोज़ संगीता का हाथ अपने नंगे लंड पे ले जाता है)तो क्या मेरा यह चुस्के भरोसा दिलाएगी की तू मुझसे कितना प्यार करती है?बोल कविता क्या जवाब है तेरा?"पहले पंत के आंदार से रग़ाद रहे लंड का टच संगीता को बहाल बना चुका था और अब अफ़रोज़ के नंगे लंड को चूके जिसे उसके हाथ गर्म लोहा लगा हो वैसे संगीता हाथ हटती है.ळेकिन पहले बार नंगे लंड को टच करना उससे अक्चा भी लगता है****से अब जिस्म को अफ़रोज़ से मसल लाने मै और माज़ा आ रहा था पर क़िस्सी के आने का डर भी थ.आफ्रोz के लंड से हाथ हटते अपना स्कर्ट नीचे करते बहुत डारते बोली, "अफ़रोज़ मै बोल रही हून ना की ई लोवे उ.Mऐ तुमसे बहुत प्यार करती हून.टुम्को किस भी करूँगी,अब मुझे जाने दो.डेखो यह आइसे मुझे नंगी मत करो और वो मारे हाथ मै मत दो.Pलेअसे होश मै आ जाओ अफ़रोज़."अफ़रोज़ संगीता को अब झुकना चाहता था****से अपना लंड एक बार तो संगीता से आज किस करके लेना ही थ.शन्गित का हाथ दुबारा अपना लंड पे रखते अफ़रोज़ बोला,"हन किस कर पर जान तुझे हाथ रखा है उसको किस करके मुझपे तेरा कितना प्यार है इसका सबूत दो,डोगी मारे उसको एक किस संगीता रानी?दिखा देगी ना तारे दिल मै कितना प्यार है मारे लिए वो किस करके?"संगीता कैसे भी होके अपने आप को अफ़रोज़ के हाथ से चुराते स्कर्ट ठीक करती है.आफ्रोz का नंगा लंड उसके सामने थ.आफ्रोz अपना लंड सहलाते उससे देख रहा थँअzअर लंड पे रखते संगीता अपने मम्मे ब्रा मै डालके अफ़रोज़ का हाथ पकड़ते उसका गाल किस करते बोली,"देख अफ़रोज़ मैने अब तुझे किस भी दिया अब मुझे जाने दे प्लेअसे.Mऐ तुझे कल मिलने ज़रूर आयूंगी पर अब मुझे जाने दे."अफ़रोज़ ने फिर संगीता के मम्मे ब्रा से बाहर निकलते उससे नीचे बिताया और अपना लंड उसके चहेरे पे घूमते ज़रा रौब से बोला,"संगीता अगर तू मुझसे सूचा प्यार करती है तो मेरा लंड चूस रनि.आअज मेरा लंड चुस्के मुझे अहसास दिला की तू मुझे सच मै प्यार करती हैऑहल मूह खोल और मेरा चूसने लग जाओ."चहेरे पे घूम रहे लंड को देखके संगीता अंदर ही अंदर मचलती है. उससे बहुत मज़ा आरहा है इस नये फीलिंग से.Wओह अपना चहेरे पीछे लिए बिना एक बार लंड को किस करके बोली,"अफ़रोज़ यह क्या हुआ है तुझे?आइसे कैसे बिहेव कर रहा है?क्यों नंगा होके यह मारे मूह पे घुमा रहा है?देख अब मैने किस किया ना इससे अब मुझे जाने दे ना,देख कोई आएगा प्लीज़ अब जाने दे मुझे."अफ़रोज़ किस से खुश होके अब थोड़ी जबरदस्त करते लंड संगीता के मूह पे दबाता है.ळुन्द का प्रेकुं संगीता के होतो पे लगता है.शन्गित की गर्दन पकड़के लंड उसके होतो पे रगड़ते उसके नंगी मम्मे मसालते अफ़रोज़ बोला, "आरे रानी सिर्फ़ किस नही,मेरा पोरा लंड मूह मै लेक चुसेगी तो ही तुझे यहा से जाने दुन्ग.शन्गित अब कौन आएगा यहा अब इतने अंधेरे मैऑहलो लेलो मेरा लंड एक बार मूह मै तो जाने दूँगा तुझे मेरी रानी,लेकिन पहले एक बार मेरा लंड चूस."संगीता अब अफ़रोज़ का लंड हाथ मै पकड़के उससे देख रही थि.वोह अब एकद्ूम गर्म हुई थी और उससे यह पता थी की अब अफ़रोज़ छोड़ना भी चाहे तो वो छुड़वा के लेगि.ःओथो पे लगे लंड का प्रेकुं झेब से चटके वो बोली,"आ नही अफ़रोज़ यह तुम क्या कर रहे हो?तुमको भरोसा क्यों नही है?मेने कहा ना मै तुमसे प्यार करती हू फिर मुझे ये करने के लिए बोलके परेशन क्यो करते हो?उउंम नही दूर रहो प्लेअसे.Yएह अब नही कर सकती मै."अफ़रोज़ संगीता की कोई बात माने बिना अब संगीता का मूह खोलके लंड मूह मै डालते सोचा की यह साली छीनाल बहनचोड़ ज़्यादा नखरे करने लगी है साली रंडी. आज तो इससे लंड चुस्वके लूँगा ही. अपना लंड मूह मै दबाते अफ़रोज़ बोला, "हन संगीता,मै जानती हून तू मुझे प्यार करती है लेकिन तू मेरा लंड चूस के मुझे उसका यकीन दिला मेरी रनि.डेख अब लंड मूह मै घुस तो गया है, अब चूस मेरा लॉडा मेरी जान."संगीता लंड मूह से निकलते शर्माके बोली,"उम्म नही,अफ़रोज़ यह मुझे गंदा लग रहा है,मुझे शर्म भी आती है.Yएह काम मुझसे मत कारवओ." लंड मूह पे दबाते संगीता के मम्मे दबके उससे और गर्म करते अफ़रोज़ बोला, "आरे अब शरम कैसे संगीता?तू मेरी बीवी बननेवाली है ना रानी,अपने होने वेल पति का लंड चूसने मै कैसे शर्म?चल मूह खोलके मेरा लॉडा चूस." संगीता अपना मम्मे मसलवाने से और भी मचलती है,पर मूह बंद करके लंड घुसने नही देति.शन्गित की इस हरकत से अफ़रोज़ को गुस्सा आता है और वो संगीता के दोनो निपल्स ज़ोर्से पिंच करते बोला,"ले रानी और अंदर ले मारे मुसलमानी लॉडा,देखो अब अगर तूने मेरा लंड नही चूसा तो मै तुझे पूरी नंगी करके अभी यही छोड़ूँगा." संगीता दर्द से हल्के से चिल्लती हैऑहुदै की बात सुनके वो डार्ती है और अफ़रोज़ को उससे जाने दाने बोलती है.आफ्रोz अब लंड फिरसे संगीता के मूह मै डालते,निपल से खेलते बोला,"हन चूर दूँगा संगीता, लेकिन मेरा लंड चूसने के बाद."और कोई रास्ता नही यह देखके आख़िर मै संगीता मूह खोलके अफ़रोज़ का लंड मूह मै लेती है.आफ्रोz का गर्म सकता लंड उसके मूह मै घुसता है****की टेस्ट ज़रा खराब लगती है पर अब चूसने के बिना उसके पास कोई रास्ता नही थ.आफ्रोz संगीता का सिर पकड़के लंड उसके मूह मै डालते बोला,"चूस मेरा लंड मेरी रानी,कितना गर्म मूह है तेरा,एकद्ूम तारे जिस्म जैस.आcचे से मेरा लॉडा चूस के तू अपने प्यार का भरोसा दिला मुझे.खैसे है मेरा लॉडा संगीता?" अफ़रोज़ संगीता के छोटे-छोटे मम्मे ज़ोर्से दबा रहा था. संगीता के मूह मै बहुत दर्द होता है.ळुन्द बहुत मोटा और लंबा था****से लगा की लंड और मूह मै गया तो मूह फाट जाएगा. जब अफ़रोज़ उसके मम्मे दबाते है तब संगीता उचक जाती है और लंड अcचे से चूसने लगती है

 
अफ़रोज़ की पड़ोसन संगीता--04

संगीता का मूह हल्के-हल्के चोद्ते अफ़रोज़ बोला,"अफ साली क्या मस्त चुस्ती है तू संगीता,और अन्दर लेके चूस मेरा लंड मेरी रानी." अपना लंड संगीता के मूह मई घूमाते अफ़रोज़ आगे बोला,"संगीता कैसा है मेरा लंड बताओ?"संगीता बिना बोले लंड चूसने लगती है.लंड चूसने से उसका मूह दुखने लगता है.लंड से ज़रा पानी निकलके उसके मूह मई गिरता है तो वो लंड मुहसे निकाल ने की कोशिश करती.लेकिन अफ़रोज़ उससे लंड निकालने नही देता उल्टा उसके माममे दबाते लंड उसके मूह मई घुसता है.संगीता का सिर पकड़के उसका मूह ज़ोर्से चोदने लगता है.अफ़रोज़ अब ज़ड़नेवाला है इसलिए संगीता के मूह मई ज़ड़ना चाहता है.कासके सिर पकड़ते अफोर्ज़ बोला,"ले और चूस मेरा लंड संगीता,तेरे मूह की गर्मी इससे पागल बना रही है मेरी रानी.और मस्ती से चूस मेरा लॉडा संगीता."संगीता अब जी-जान से अफ़रोज़ के हाथ से छूटने की कोशिश करती है.इतना लंड घुसने से उसका मूह फाट रहा था और उससे बहुत दर्द होता है.पर अफ़रोज़ बेरहम बनके उससे छूटने नही देता उल्टा उससे और कासके पकड़के उसका मूह और जल्दी-जल्दी चोदने लगता है****का लंड जब पानी छोड़ने लगता है वैसे अफ़रोज़ पूरा लंड संगीता के मूह मई घुसके अपनी गंद आगे पीछे करते संगीता के मूह मई ज़दते बोला,"उफफफ्फ़ आआअहह संगित्त्ताआ ले ले मेरा पानी ले साली.साली तारे गर्म मूह ने बड़ी जल्दी मारे लंड को ज़ड़वा दिया संगीता. तेरा मूह इतना गर्म है तो चूत कैसे होगी रानी?" ज़िंदगी मई पहले बार मूह मई लंड के ज़दने के बाद संगीता लंड मुहसे निकलती है.मूह से काफ़ी पानी संगीता के नंगे सिने पे गिरता है.मूह मई जितना पानी था उससे बाजू मई ठूकते बोली, "उम्म्म्म उफफफफ्फ़ ओह,अफ़रोज़ यह क्या किया तुमने?मारे मूह मई यह पानी कैसे आया?क्या तूने पिशब की मारे मूह मई?श्िीिइ, कितना गंदा लग रहा है मुझे." संगीता बार-बार ठूकते सब पानी मूह से निकालने लगती है.सीना पे गिरा पानी संगीता के मम्मो पे रगड़ते अफ़रोज़ बोला,"संगीता,यह पिशब नही,मेरा पानी है,आज यह पानी तारे मूह मई डाला है,जब तेरी चूत मई डालूँगा तब तू मारे बcचे पैदा करेगी." अफ़रोज़ का हाथ सिने से हटाने की कोशिश करते संगीता ज़रा गुस्से से बोली,"श अफ़रोज़ मुझे छोड़ो मुझे.तुम बहुत गंदे हो." अफ़रोज़ संगीता को नही छोड़ता उल्टा लंड संगीता के मम्मो पे घूमते बोला,"क्यों गंदा हून मई?आइसा क्या किया मैने रानी?" संगीता अभी भी बहुत गर्म है पेर शर्मा रही है.वो अफ़रोज़ से नज़र भी नही मिला पा रही थी.अपने सिने पे हाथ रखते वो शरमाते बोली,"और नही तो क्या?देखो तुमने मुझे गांडा कर दिया.अफ देखो क्या किया है तूने मारे सिने पे पानी डालके."संगीता के हाथ उसके ही माममे पे दबाते और अपना लंड फिर संगीता के चहेरे पे घूमते अफ़रोज़ अब प्यार से बोला,"क्या गंदा किया मैने संगीता?आरे तारे सिने पे तो मैने तो अपने प्यार की निशानी दी है.देखो इसमे गांडा कुछ नही,सब पति पत्नी आइसे ही करते है समझी मेरी रानी?" दिल मई तो संगीता को खूब गल्लिया डटे अफ़रोज़ सोचा की साली रांड़ कल तुझे देख कैसे छोड़ूँगा, छीनाल मुझे बहुत तडपया है तूने.'संगीता ज़रा नाराज़ी से बोली,"अफ़रोज़ यह सब मुझे अछा नही लगा.मुझसे आजके बाद ऐसा मॅट करना कभी ठीक है?" अफ़रोज़ भी प्यार से बोला,"ओक मेरी रानी नही करूँगा,ठीक है?पर मुझसे मिलने तो आओगी ना कल मारे घर?" संगीता हॅंकी से अपना नंगा सीना अफ़रोज़ के सामने सॉफ करने लगती है.सीना सब जगह चिप छिपा हुआ था उसका पर अफ़रोज़ की हरकत सोचके उससे अक्चा भी लग रहा था. वो ज़रा नाराज़ी से बोली,"अब नही आयूंगी अफ़रोज़ तुमसे अकेली मिलने.तुम बहुत गंदे हो,कुछ भी कही भी कर डालते हो मारे साथ." अफ़रोज़ संगीता की हॅंकी खिचके दूर फेकटे उसके माममे सहलाते बोला, "आगर तू नही आयागी तो तुझे अभी जाने ही नही दूँगा समझी संगीता?रातभर तुझे यही रुकके रखते खूब मस्ती करूँगा तारे जिस्म से,बोल आएगी ना?" संगीता को अफ़रोज़ से मसलके लाने फिर अछा लगता है.अफ़रोज़ अब उसके निपल चोस्टे उसकी चूत सहलाता है. संगीता अफ़रोज़ के हाथ का खिलोना बनते जिस्म अब फिर से उसके हवाले करते बोली,"अफ़रोज़ मुझे जाने दो प्लीज़,ऐसा मॅट करो.उम्म नही अफ़रोज़ तुम मेरे साथ ये गंदा करते हो ना इसलिए मई नही आयूंगी.मुझे नही पता था तुम ऐसा करोगे नही तो मई तुमसे कभी बात नही करती." इस बात पे गुस्सा होते अफ़रोज़ संगीता की पनटी मई हाथ डालके उसकी छूट सहलाते माममे बेरहमसी से मसालते और उससे किस करते बोला,"ठीक है मत आना,लेकिन अब मई तुझे जाने ही नही दूँगा तो क्या करेगी?बोलो आओगी या नही संगीता मुझसे मिलने कल मारे घर?"अपने जिस्म से हो रही मस्ती संगीता को बहुत आक्ची लग रही थी.वो 'ना-ना' करते खेल का माज़ा ले रही थी.10 मिनिट अपना जिस्म ऐसे ही मसालते लाने के बाद संगीता अफ़रोज़ के इस खेल के सामने हारके हल्की आवाज़ मई बोली,"ह हाआँ आज़ौंगी,प्लीज़ मुझे छोड़ो,आह उहीई.अब बस करो अफ़रोज़,मई कल आयूंगी बोला ना?अब मेरा जिस्म और मॅट मस्लो." संगीता के पुर जिस्म से खेलते अफ़रोज़ बोला,"तू क्या बोली,मुझे कुछ समझा नही,ज़रा ठीक से उँची आवाज़ मई बताओ मुझे संगीता रानी." संगीता को अब बहुत मज़ा आता है और दर्द भी होता है अफ़रोज़ के मसालने से पर वो बोली,"अफ़रोज़ तुमसे मई कल मिलूंगे तारे घर आके.उूुउउफ़फ्फ़ अहह मुझे छोड़ो ना अब अफ़रोज़,दर्द हो रहा है अब."आख़िर मई संगीता की बात मनके अफ़रोज़ उससे छोड़ता है.संगीता अपना माममे ब्रा मई भरके,शर्ट के बटन लगती है.अपना हुलिया ठीक करके जैसे वो जाने लगती है अफ़रोज़ उससे पकड़के किस करके और उसके माममे मसलके कल दोपहर को मिलने का वादा लेता है.संगीता को भी यह खेल का और मज़ा लेना था इसलिए उससे कसम खाए की वो कल ज़रूर आयगी और फिर अपने घर गये.संगीता उस रात सो ना सकी.अपना जिस्म से उससे अजीब से फीलिंग आ रही थी.मर्द का स्पर्श इतना अछा हो सकता है यह उससे पता नही था.वो खुद अपना जिस्म मसलके ले रही थी अपने हाथो.अफ़रोज़ का अपने माममे और चूत का मसलना, गांद पे लंड रगड़ना और फिर उसका लंड चूसना अभी भी बड़ा याद आ रहा था.बिस्तर पे लाते के वो यह सब सोच रही थी की कल अफ़रोज़ और क्या-क्या करेगा उसके जिस्म के साथ.वाहा अफ़रोज़ भी कमसिन संगीता के बारे मई सोचके लंड मसल रहा था****ने ठन ली की कल वो संगीता को चोद्के ही रखेगा.जिस हिसाब से आज उसने लंड चूसना था अफ़रोज़ समझ गया की ज़रसा प्रेशर डालने से संगीता कोई भी बात मान लेती है****ने टाई किया की कल वो संगीता को डॉमिनेट करके उसके चूत चोद्के रखेगा.दूसरे दिन अफ़रोज़ सिर्फ़ लूँगी और शर्ट मई बैठा था जब संगीता आए.दरवाज़ा खुला ही था और वो घर मई आए.जैसे संगीता आंदार आए अफ़रोज़ ने डोर बंद करके उससे गौर से देखा****के बताने के मुताबिक संगीता ने शॉर्ट रेड त शर्ट और नीचे मिनी ब्लॅक स्कर्ट पहना था.इस ड्रेस मई संगीता का जिस्म बड़ा सेक्सी लग रहा था.संगीता सोफे पे ज़रा डरते नज़र नीचे करके बैठती है.अफ़रोज़ संगीता को बहो मई लेक गाल चूमते बोला,"कैसे है मेरी जान तू?मुझे रात भर नींद नही आए.मई तो बस पूरी रात तारे बारे मई सूच रहा था.मेरी संगीता जान,इतनी डारी क्यों हो तुम रानी?" संगीता अफ़रोज़ का हाथ थमते बोली, "अफ़रोज़ मेरा भी यही हाल था.मुझे भी रात भर तेरी बड़ी याद आए.मई भी रात भर सो ना सकी."संगीता को पास खिचते उसके हूथ चूमते अफ़रोज़ बोला,"आ मेरी जान,तेरी बात सुनके बड़ा अछा लगा मुझे.संगीता अपने इस पहले मिलन की खुशी मई मैने तारे लिए गिफ्ट लाया है.तारे जिस्म पे बिल्कुल अची लगेगी वो गिफ्ट.बड़े प्यार से चुन के लाया हून तारे लिए." अफ़रोज़ के बालो से हाथ फेरते संगीता बोली,"अफ़रोज़ थॅंक्स मारे लिए गिफ्ट लाने.लेकिन सॉरी मैने तारे कुछ नही लाया. नेक्स्ट टाइम मई ज़रोर कुछ ना कुछ लायुंगी तारे लिए." शर्ट के उप्पर से कविता के माममे दबाता अफ़रोज़ बोला,"आरे उसकी कोई ज़रोरत नही रानी,मारे लिए गिफ्ट के बदले तेरा यह जिस्म है ना?इतना सेक्सी और गर्म गिफ्ट है मारे लिए तो मुझे और क्या चाहाए है ना?संगीता तुझे वो गिफ्ट जाके उस अलमारी के उप्पर से उतरना पड़ेगा ठीक है?" अफ़रोज़ के उसके जिस्म के बारे मई की बात सुनके संगीता खुश होती है. अफ़रोज़ के हाथ जैसे उसके माममे पे पड़ते है वो मचलते अफ़रोज़ को लंबा किस करते बोली,"बड़ा शैतान है तू,सीधे-सीधे ऐसे बात करने शर्म नही आती तुझे?अफ़रोज़ गिफ्ट मई जाके उतरके देखती हून."संगीता अलमारी के पास जाती है पर गिफ्ट उसके हाथ नही लगता.वो जैसे पैर उँचे करती है उसका स्कर्ट पीछे से उठ जाता है.अफ़रोज़ इसी वक़्त के इंतज़ार मई था.जैसे ही संगीता का स्कर्ट करीबान उसकी पनटी तक आता है वो झट से उसके पास जाके संगीता की मिनी स्कर्ट के नीचे हाथ डालके उसकी पनटी नीचे खीची.जब तक संगीता को इस बात का अंदाज़ा होता है अफ़रोज़ उसकी पनटी पूरी तरह नीचे खिचता है.संगीता अचानक हुए इस हमले से सावरते नीचे झुकके पनटी उठा ते बोली,"ऑश अफ़रोज़ नहियीई,,यह क्या कर रहे हो?प्लीज़ मुझे छोड़ो नेया,यह मेरी पनटी क्यों उतरी तूने?" जैसे संगीता पनटी उप्पर करने झुकी अफ़रोज़ उसकी नंगी गांद पे हल्के से 2-3 थप्पड़ मारते संगीता की पैरो मई पड़ी पनटी को अपने पैर से दबाता है जिसके वजह से संगीता अब अफ़रोज़ सामने झुककी थी.दूसरे हाथ से झुकी हुई संगीता के माममे दबाते अफ़रोज़ बोला,"उम्म संगीता रानी, गिफ्ट चाहाए तो मुझे पहले तारे इस जिस्म को नंगा करके चोदने का गिफ्ट देना होगा तुझे समझी? आइसे फ्री मई गिफ्ट तो मई किसी को भी नही देता तो तेरी जैसे मस्त माल को कैसे डून रानी?वैसे मई जनता हून की तुझे भी यह सब चाहाए,तेरी यह कमसिन जवानी अब मर्द की बाहू मई सोना चाहती है.बोल गिफ्ट चाहाए तो मुझे तारे मस्त जिस्म को नंगी करके देगी ना संगीता?"..

 
अफ़रोज़ की पड़ोसन संगीता --05

गांद पे पड़े थप्पड़ और बेदर्दी से मसलने जानेवाले मम्मो के दर्द से संगीता चिल्लती है.अफ़रोज़ जो बात बोल रहा था वो सही थी और वो इसके लिए ही आये थे यहा पर अफ़रोज़ इतनी जल्दी उससे नंगी करेगा यह नही पता था उससे. थप्पड़ की जगह अपनी गांद मसालते और अफ़रोज़ का हाथ माममे से हटाने की कोशिश करते संगीता बोली,"ह अफ़रोज़्ज़्ज़्ज़्ज़ मुझे लग रहा है.यह क्या हुआ है तुझे आज?उूुउउहीईए माआ आआआआआः उुउउहीईए माआ बहुत दर्द होता है अफ़रोज़.प्लीज़ आइसा मत करो, दर्द हो रहा है ना मुझे." संगीता की आँखो मॅ आसू आए.पर अफ़रोज़ अब संगीता की कोई बात सुनने के मूड मे नही था.बहुत दीनो से संगीता के जिस्म ने उससे तडपया था****ने संगीता को टर्न करके एक हाथ उसके करके शर्ट के नीचे से डालके माममे ब्रा के उप्परसे मसालते बोला,"मेरी रानी,मर्द के हाथ पहली बार जिस्म से खेलने लगता है तो तेरी जैसे लड़की को दर्द होता ही है.पर संगीता इस दर्द के बाद जो खुशी मिलेगी उसके बाद यह दर्द बार-बार चाहाए होगा तुझे.आज देख तेरी आइसे हालत करता हून की तू पहले रोएगी पर उसके बाद तेरी यह चूत मारे लॉड के लिए तरसेगी." संगीता की नंगी गांद पे हल्के से और थप्पड़ मरते फिर अफ़रोज़ दोनो हाथ से संगीता का शर्ट खोलने लगा.संगीता को कुछ समझ मई आने के पहले अफ़रोज़ ने उसका शर्ट खोलके उतरा.अब संगीता अफ़रोज़ के आगे सिर्फ़ स्कर्ट और ब्रा मई खड़ी थी. संगीता अफ़रोज़ के कार्मेन से डर और दर्द से घबराते बोली,"अफ़रोज़ नही प्लीज़, मारे कपड़े क्यों उतारे?मुझे नंगी क्यों कर रहे हो?देख यह ठीक नही है, कुछ गड़बड़ हुई तो मेरी कितनी बदनामी होगी.प्लीज़ आइसा मत कर, मुझे जाने दो अफ़रोज़." संगीता के माममे बेरहमी से मसालते और अब उसका गाल चूमते अफ़रोज़ बोला,"हन ज़रूर जाने दूँगा पर तेरी मस्त जवानी को पहले चोदुन्ग. संगीता बहुत तडपा हून मई तेरी यह जवानी देखके.कल रात को कितने नाटक किए थे तूने अब तभी मैने टाई किया की तुझे आज मई ज़रूर चोदुन्गा जिसे फिर कभी तू मारे सामने नाटक नही करेगी." अफ़रोज़ ब्रा के उप्पर से माममे मसल ते पीछे से संगीता की गांद पे लंड रग़ाद रहा था.संगीता को यह सब अक्चा लग रहा था पर उससे डर भी लग रहा था.अपना जिस्म अफ़रोज़ के हाथ ढीला छोडवो फिर अफ़रोज़ को प्लीड करते बोली,"आआआआआआः ऊवू उूउउफफफफफफफ्फ़ इतने ज़ोर्से मत दब्ाओ ना ह." अफ़रोज़ इस प्लीडिंग पे ध्यान दिए बिना अब संगीता की ब्रा खोलके उससे घूमके,सामने से उसके निपल को ज़रा बेरहमी से पिंच करते स्कर्ट खिचके उतरते बोला,"तो मेरी रानी,नाटक क्यों करती है?उस्दीन से तारे नाटक देखके सहन कर रहा हून,कल श्याम को भी कितना तडपया तूने मुझे याद है?बोल नाटक करेगी मुझसे?" अफ़रोज़ संगीता का एक निपल ज़ोर्से खिचता है जिसे वो दर्द से और भी रोते बोली, "आआआआआआआः मुझे म्‍म्म्ममफफफफ्फ़ करो.मुझे इतना दर्द मत दो,मई अब कोई नाटक नही करूँगी, पर प्लीज़ ऐसा मत करो अफ़रोज़ उउऊहीई माआ बहुत दर्द हो रहा है."अपनी लूँगी खोलते टंके खड़ा लॉडा संगीता के सामने मसालते अफ़रोज़ बोला, "साली मुझे इतना तडपया उसका कितना दर्द हुआ होगा मुझे?सुन संगीता, अगर माफी चाहाए तो मेरा लॉडा चूस.मेरा लंड चूसने के बाद शायद तुझे माफ़ करू.चल जलदे नीचे बैठके मेरा लंड चूस नही तो और दर्द दूँगा मई तुझे." संगीता अब डारी है.अफ़रोज़ का यह रूप उसके लिए नया था. अफ़रोज़ आज उससे कितना दर्द दे रहा था और कितनी गंदी गलिया दे रहा था.डरते हुए नीचे बैठ के उसने अफ़रोज़ का लंड हाथ मई लाते मूह मई डाला.वैसे उसके कल अफ़रोज़ का लंड चूसा था इसलिए बिना दिक्कत वो फिर लंड चूसने लगती है.अफ़रोज़ उसका सिर पकड़ते मूह छोड़ने लगा.कल की प्रॅक्टीस से वो अब ठीक से लंड चूस रही थी. वो आज अपना सब कुछ अफ़रोज़ के हवाले करने आए थी पर प्यार से पर अफ़रोज़ के रववये को देखके वो समझी थी की आज अफ़रोज़ उससे बेरहमी से चोद ने वाला था.संगीता का मूह चोद्ते अफ़रोज़ खुशी से बोला, "ह आइसे ही चूस मेरा लॉडा बहनचोड़.तेरी जैसे कमसिन चूत से लॉडा चुस्वके लाने बड़ा अक्चा लगता है.साली कल तो तूने चुस्के मेरा पानी निकाला पर आज तेरी कमसिन चूत चोद के उसमे पानी डालूँगा मई."आचे से लंड चुसवाने के बाद संगीता को खड़ी करते उसकी ब्रा उतार डालते, उसके नंगे माममे मसालते अफोज़ ने उससे अपनी स्कर्ट उतरने कहा.अब अफ़रोज़ ने सामने पोरी नंगी होने संगीता शर्मा रही थी पर अफ़रोज़ का गुस्सा याद करके उसने स्कर्ट उतरी.संगीता का नंगी कमसिन जिस्म देखके अफ़रोज़ खुश हुआ. संगीता के गोरे जिस्म पे वो कड़क मम्मो पे गुलाबी निपल थे****की कमसिन चूत को रेशम जैसे झाटों से ढाका था.संगीता को बीच मई खड़ी करके,गोल घूमते उसका पूरा नंगा जिस्म सहलाते अफ़रोज़ बोला,"अफ साली,क्या कड़क कमसिन जिस्म है तेरा संगीता.बहनचोड़ साली,तेरा यह जिस्म देखके तो मेरा लॉडा देख कैसे उछाल रहा है.बड़ा माज़ा आएगा तुझे चोदने मेरानी." अब अफ़रोज़ भी नंगा होके संगीता को सोफे पे लिथके उसके माममे चूसने लगता है.संगीता के बदन मई वासना पूरी तरह फैल गये.इतनी गंदी गल्लिया और दर्द लेक भी वो अफ़रोज़ के बालो से हाथ फेरते सिसकारिया भरते अपने माममे उससे चुस्वके लाने लगती है.बरी-बरी माममे चाटते अफ़रोज़ अब निपल से खेलते उनको उंगली मई घूमने लगा जिसे संगीता और बहाल हो गये.संगीता डरते-डरते इस खेल का मज़ा ले रही थी****से यह खेल अक्चा लग रहा था पर अफ़रोज़ के रावय्यए से वो बहाल थी.अपना जिस्म अब पूरी तरह अफ़रोज़ के आघोष मार करते वो बोली,"प्लीज़ अफ़रोज़ मुझे अब और दर्द मत दे,मैने तेरा क्या बिगाड़ा है जो मुझे इतना दर्द दे रहा है तू?इतने दिनसे तू जो चाहे वो कर रहा था और मई करने दे रही थी तो आज क्या हुआ तुमको?जो तुम चाहती हो वोही करने मई भी आए हून पर तुम जैसे जानवर ही बान गये हो.अब जैसा तू कहोगे मई करूँगी पर अब प्यार से करो जो करना है वो."अफ़रोज़ संगीता के बॉल खिचते उसका मूह अपने पास लेक बोला,"संगीता,कामिनी अब तो मई सिर्फ़ मेरे लंड की आग शांत करने के बाद ही तुझसे शराफ़त से पेश आयुंगा,आज मई तुझे जीभरके छोड़के ही यहा से जाने दूँगा.संगीता तूने मुझे इतने दीनो से बेकरार किया था,कितने नाटक किए थे इसलिए तेरे साथ ऐसे पेश आ रहा हून मई समझी?"संगीता डर के अफ़रोज़ के सामने हाथ जोड़के बहुत गिड़गिदई पर अफ़रोज़ के उसका कोई असर नही हुआ. कुछ सोचके संगीता अफ़रोज़ को धक्का देके भागी पर मेन डोर तक जाने के बाद उससे अहसास हुआ की वो एकद्ूम नंगी थी इसलिए वोही रुके फिर रोते अफ़रोज़ से बोली,"नही प्लीज़ अफ़रोज़,ऐसा प्लीज़ मत करो,दर्द होता है मुझे.प्लीज़ मुझसे ऐसा मत बिहेव करो,मई तेरा सब कहना मानूँगी पर प्लीज़ मुझे और दर्द मत देना."अफ़रोज़ लंड सहलाते संगीता के पास गया और उसकी कमर मई हाथ डालके बिस्तर पे लेक बिताते उसके मूह पे लंड रखते बोला,"साली अब गिड़गिडती है,इतने दिन जब मई बोल रहा था तब नाटक करती थी और तब मुझपे रहम नही आया तुझे.देख हरामी,मुझे तेरी यह चूत चोदानी है,तेरी यह कमसिन जवानी का भोसड़ा बनाना है,तूने जितना मुझे बकरार किया उतना ही बेकरार करके तुझे चॉड्ना है.चल अब बिना कोई ज़्यादा नाटक करते मेरा लंड चूस फिर तेरी चूत चोदुन्गा मैं इससे." cont........

 


अफ़रोज़ की पड़ोसन संगीता --06

संगीता ने अब ज़्यादा नाटक करना मुनासिब नही समझा.अफ़रोज़ का लंड सहलाते उससे प्यार से चूमते उसने लंड मूह मई डालते चूसना शुरू किया.कभी पूरा लंड मूह मई लेक चूस्ते फिर उससे बाहर निकलके झेब से पूरा चाटने लगी वो.अफ़रोज़ प्यार से उसके बालो से हाथ फेरते अपना लंड चुस्वके लाने लगा था****से संगीता को दिखना था की जब वो अफ़रोज़ के साथ होगी तो सिर्फ़ अफ़रोज़ की ही बात फाइनल होगी,उससे कोई बहस नही चाहाए थी इसलिए उसने संगीता से आइसा बर्ताव किया था.अपना लंड और गोतिया संगीता से अकचे से चुसवाने के बाद अफ़रोज़ ने उससे बेड पे सुलके उसकी जंघे खोलते उसमे बैठ गया****के सामने संगीता बिल्कुल नंगी लेती थी****के गोरा नंगा सिने पे खड़े दोनो मम्मो को एक हाथ से मसालते दूसरे हाथ से उसकी झतो भारी चूत सहलाते अफ़रोज़ बोला,"मया कसम, संगीता,तेरी जैसे जवानी से भारी लड़की नही देखी कभी.तुझे चोद्के मई अपनी तक़दीर पे खुश हो जायूंगा की उसने इतनी मस्त लड़की को मारे नीचे सुलने का मौका दिया." संगीता भी अपनी जवानी अफ़रोज़ के हाथो लुटवने तय्यार थी. उठके बैठते अफोर्ज़ का मूह अपने सिने पे दबाते और उसकी पीठ सहलाते संगीता बोली, "अफ़रोज़ राजा,मई भी अपनी किस्मत पे खुश हून की उसने तुझे मेरी ज़िंदगी मई लाया.अब मई भी तुझसे सब कुछ करवके लाने तय्यार हून.इतने दीनो तारे हाथ से गर्म होके घर जाती थी और उंगली डालके शती करके लेती थी पर आज असली लंड से चुड़वा के लूँगी तुझसे."संगीता की इस अदा पे खुश होके अफ़रोज़ ने उससे चूम लिया.अफ़रोज़ देखता है की संगीता अब एकद्ूम गर्म थी.संगीता को सुलके उसकी टाँगे फैलते अफ़रोज़ ने अपना लंड उसकी चूत के सामने रखा.संगीता के हूथो पे अपने हूथ रखते उससे किस करने लगा हू.एक हाथ से उसके माममे दबाते अफ़रोज़ ने एकद्ूम से लंड एक झटके के साथ लंड चूत पे दबाते अपना आधा लंड उसकी चूत मई डालते बोला, "साली अब देख इतने दीनो की भादस कैसे निकलता हून.अब तू मेरी रांड़ बान ही गयी,आजसे तू मेरी रांड़ है, इस लंड की रांड़ है.आज उंगली की जगह मेरा लंड लेगा और तुझे चोद्के पूरी खुशी देगा.तय्यार हो जेया मेरी जान पहली बार अपनी चूत चुड़वाके लड़की से औरत बनने."अचानक आधा लंड चूत मई घुसने से संगीता का सील टूट जाता है और वो ज़ोर्से चिल्लती है पर इसका कोई असर अफ़रोज़ पे नही होता****के नीचे संगीता चटपटती है और अफ़रोज़ को अपने बदन से हटा दाने की नाकाम कोशिश करते रोते चिल्लाते बोली,"न्‍न्न्नाआआअहहिईीईई माआआआआआअ मैईईईईई माआआररररर गइई,हहाआअराअंम्मिईिइ साअलीए धूओक्ककककक्क्ीएबब्बाआआज़्ज़्ज़्ज़्ज़,प्लीज़,भगवान के लिए मुझे जाने दो आइसा मत करो,मार मारी जेया रही हून दर्द से,निकालो अपना लंड अफ़रोज़.प्लीज़ मुझे जाने दो,मुझे नही चुड़वाना तुमसे."अफ़रोज़ संगीता के बॉल पकड़के खिचते बोला,"हरामज़ादी कुतिया साली रंडी.तू बनी ही इसलिए है की मुझ जैसे मर्द की रांड़ बने.अब तू क्या नही,तेरी मा भी चूड़ेगी मुझे मदरचोड़." अफ़रोज़ एक और धक्का देते अपना पूरा लंड संगीता की चूत मई घुसा देता है.फिर बेरहमी से अपना लंड अंदर बाहर करते वो बोला,"साली अब जहा जाना है जेया,मई तो तुझे अcचे से चोद्के लूँगा और फिर जाने दूँगा." एक हाथ से एक मम्मा ज़ोर्से मसालते दूसरे हाथ से संगीता के बॉल खिचते अफ़रोज़ दूसरे माममे को चूस्ते,काटते बोला,"साली आजसे तू मेरे लंड की गुलाम है,मई तुझे कुतिया बनके चोदुन्गा,सबके सामने रोड पे चोदुन्गा मई तुझे.अब तेरी यह जिस्म पे सिर्फ़ मेरा ही हक है समझी?" कुछ टाइम के लिए कोई कुछ नही बोला.संगीता दर्द से करहा रही थी और अफ़रोज़ बेरहमी से उसको चोद रहा था.सिर्फ़ करहाने और चुदाई की आवाज़ आ रही थी. संगीता समझी की अफ़रोज़ उसकी कोई बात नही सुनेगा इसलिए उसने अपने टांगे और फैलाई जिससे अफ़रोज़ का लंड बिना ज़्यादा दर्द दिए उसकी चूत मई जेया सके.अब अफ़रोज़ के धक्के पे वो करहाने के साथ-साथ हल्के से मोन भी करने लगी.जब उससे भी लंड का मज़ा आने लगा तब संगीता ने अफ़रोज़ को जंगो मई टाइट पकड़ते अपने गाड़ उठाके चूत उसके लंड से सटके रखते बोली,"आआहह, उूउउफफफफ्फ़ सालीए चोद्द्द मुझे और चोद्द्द,मारे रजाअ आइसे ही चोद्ते चोद्ते मुझे अपनी रांड़ बना,मई तेरी रखैल बनना ही चाहती थी और आज मौका मिला तेरी रांड़ बनने का.हन अफ़रोज़ मई तारे लंड की रॅंड हून, तेरा आइटम हून,तेरी प्रॉपर्टी हून जो करना है कर मुझसे.तू कहेगा तो मई रोड पे भी छुड़ा के लूँगी तुझसे राजा जो इतना मस्त लंड मिलेगा तो मई कुछ भी करने तय्यार रहूंगी तारे लिए,यह बदन अब तेरी अमानत है,जैसा चाहे वैसे इस्तामाल कर मुझे."अब मस्ती से संगीता को छोड़ते अफ़रोज़ बोला,"कुटिया,बहुत नाटक किए तूने,अब बोल की की तू ही हमेशा मुझसे चुड़वके लेगी ना?जो मई कहूँगा वो मानेगी ना हरामी?" संगीता लंड पे अपनी चूत रगड़ते बोली,"हन अफ़रोज़,मेरा बदन तारे जैसे मस्त मर्द के लिए है,तू मेरा मलिक है और मई तेरी रांड़. अफ़रोज़ आजसे तेरा लंड ही मारे लिए सब कुछ है." अफ़रोज़ संगीता के जवाब पे खुश होके और मस्ती से उससे चोदने लगा.बारी-बारी उसके माममे चूस्ते,निपल बीते करते वो बोला,"साली हरमज़ड़ी रंडी अब तू मुझसे रोज़ चुड़ाएगी.अब मई तेरा मलिक हू और तू मेरी रखैल,अबसे तू सिर्फ़ मुझे खुस करने का काम करेगी समझी हरमज़ड़ी?"संगीता अफ़रोज़ को पूरा झखड़ के उसके जिस्म से अपना पसीने से भरा जिस्म रगड़ते अपनी गर्म चूत को और मस्ती से चुड़वाते बोली,"हन अफ़रोज़ अबसे तू जब कहेगा जहा कहेगा जिसे कहेगा और जिसके सामने कहेगा मई तुझसे चुड़ा लूँगी,तेरी खुशी मई ही मेरी ख़ुसी है अफ़रोज़.अफ अफ़रोज़ ऐसे ही चोद्ता रह मुझे. ऊऊुुऊउक्कककचह प्ल्ीएआास्स्स्सीए आइसे मत कतो मारे निपल अफ़रोज़,दर्द होता है,क्यों अपनी रांड़ को इतना दर्द दे रहे हो?" संगीता के निपल उंगली मई पकड़के खिचते अफ़रोज़ उसके माममे काटने लगा.संगीता उछलके देख अफ़रोज़ अब और मस्ती से बोला,"साली हरमज़ड़ी पहले कितनी नौटंकी कर रही थी की मई एक शरीफ लड़की हून,प्लीज़ मुझे बर्बाद मत करो.और अब देख बहनचोड़ साली कैसे गांद उठाके लंड ले रही है.अब देख कैसे साली मज़े ले रही है.आख़िर बन ही गयी ना तू इस लंड की रांड़?साली तू मेरी रांड़ है और मारे जैसा मर्द अपनी रंडी को ऐसे ही बेरहमी से चोद्ते है समझी हरमज़ड़ी कुतिया?"अफ़रोज़ का पूरा चहेरा चूमते,संगीता उसके गाल चटके बोली,"अफ़रोज़,आज मई तुझसे चुडाने के इरादे से आए थी.तूने जो मारे जिस्म मई आग लगाई उससे आज शांत करके लेना मेरा भी इरादा था. पर तूने जो मुझपे हमला बोल दिया उससे मई डर गये और मुझे लगा जैसे मैने कोई ग़लती की है इसलिए मैने तुझे इतना रेज़िस्ट किया.पर जब चूत का दर्द कम होके माज़ा आने लगा मई अपने आप को रोक ना सकी और तुझे पूरी तरह साथ दाने लगी.दूसरी बात यह की मेरी सहेली ने बताया था की मर्द को जितना रेज़िस्ट करो वो उतना ही बेरहम बनता है और फिर आइसे चोद्ता है की लड़की बहाल होती है उसके सामने और यही मेरा हाल हुआ है.तुझे तंग किया तो तू मुझे देख कैसे बेरहमी से चोद रहा है,मुझे ज़्यादा गलिया देके.इतने दिन तारे हाथ से खेलके असल मई तुझसे बेरहमी से चुड़के लेना चाहती थी इसलिए बार बार तुझे बेइज़्ज़त किया और तुझे गल्लिया दी.लेकिन यह भी उतना की सच है की मई तुझे बहुत प्यार करती हून और अब अपने आप को तारे हवाले किया है."संगीता की बात सुनके अफ़रोज़ भी उससे चूमते चोद्ने लगा.10 मिनिट तक संगीता की चूत की ठुकाई करने के बाद जब वो ज़दने के करीब आया तो उसने संगीता को ज़ोर्से बहो मई दबोचते अपना लंड उसकी चूत मई पूरा घुसके कमर पे कमर रगड़ते कहा,"अहह साअलल्ल्ल्लीइीईई रर्रांन्ँद्दद्डिईई कचहुउऊउउत्त्त्तत्त, लीईई मीईईररर्ाआ पााअन्णननिईीईईई.उउउफफफफफफफफफ्फ़ साली क्या अक्चा लग रहा है तेरी चूत मई ज़दंन्‍न्णनीईईई सस्स्स्साआअन्न्‍नननगगगगगगीइइत्त्त्ताआआअ."अपने लंड का पानी संगीता के चूत मई डालते अफ़रोज़ उसपे लेट लगा.संगीता भी अपने चूत से अफ़रोज़ के लंड का पोरा पानी निचोड़ के ले रही थी.जब पूरा पानी निकाला अफ़रोज़ संगीता के बाजू मई लेट गया.शांत होने के बाद अफ़रोज़ संगीता को लेके बाथरूम गया और उसकी खून और लंड से भरे चूत को गर्म पानी से ढोने लगा.चूत धोके वही अफ़रोज़ ने संगीता की चूत चटके उससे आराम दिया.अफ़रोज़ का यह रूप उसके चुदाई से पहले रूप से एकद्ूम अलग था.15-20 मिनिट आइसा करने के बाद अफ़रोज़ ने संगीता को गोड मई उठाके लेक बिस्तर पे लिटाया और बोला,"मेरी जान,तू हैरान है मुझे इस बदले रूप मई देखके यह मई जनता हून पर वो चुदाई मई मस्ती लाने मई इतना बेरहम बनता हून पर चुदाई के बाद मई कोई बेरहमी नही करूँगा तुझसे यह वादा रहा."अफ़रोज़ की बात सुनके संगीता ने उससे चूम लिया****से यकीन हुआ की उसका लवर दुनिया का सबसे अक्चा लड़का है.फिर श्याम को अफ़रोज़ के पेरेंट्स आने तक अफ़रोज़ ने और 2 बार संगीता को छोड़ा और फिर उससे घर जाने दिया.

 
अफ़रोज़ की पड़ोसन संगीता --07

पहली चुदाई के बाद अब संगीता के ज़हन मई अफ़रोज़ पूरी तरह बस गया था. वो अफ़रोज़ की दीवानी बान गये थी.अफ़रोज़ के लंड ने जो उसके चूत मई आग लगाई थी वो बुझाने अब वो बार-बार उससे मिलने जाती.संगीता जैसे अफ़रोज़ की रंडी बान गये थी****से अफ़रोज़ से चुड़वाने का इतना शौक लगा था की वो कई बार तू कॉलेज बंक करके अफ़रोज़ के दोस्त सलीम के घर आके दिनभर अफ़रोज़ से अपनी चूत चुड़वति थी.यह चुदाई का सिलसिला शुरू होके अब 2-3 महीने हो गये थे जिसमे संगीता ने खूब चुदाई करके ली अफ़रोज़ से.यह सब बाते सलीम देख रहा था.जब अफ़रोज़ संगीता को उसके घर लेक चोद ता तब सलीम हॉल मई रहता.आते जाते वो संगीता से बाते करता था.चुडाने के बाद जब संगीता चली जाती थी तब वो और अफ़रोज़ संगीता के बारे मई बाते करते रहते.आइसे ही एक दिन सलीम ज़रा मज़ाक मई अफ़रोज़ से बोला,"यार अफ़रोज़,तू बड़ा हरामी है.मारे घर मई संगीता को चोद्ता है पर मुझे क्या मिलता है उससे?तेरा तो लंड शांत होता है पर आते जाते संगीता को देखके मेरा लंड खड़ा होता है उससे तो मुझे मूठ मरके शांत करना पड़ता है." सलीम के बात सुनके अफ़रोज़ बेशर्मी से बोला,"तो भद्वे तू भी चोद ना संगीता को.तूने उससे चोदा तो मारे बाप का क्या जाएगा?साली है मस्त माल,अब मई तो उससे शादी नही करनेवाला तो कोई और भी उससे चोदे मुझे कोई फराक नही पड़ता." अफ़रोज़ की बात सुनके सलीम खुश हुआ और फिर दोनो ने प्लान बनाया की सलीम कैसे संगीता को चोद सके.अफ़रोज़ ने अब धीरे-धीरे सलीम के सामने ही संगीता से खेलना शुरू की.वो सलीम के सामने उसका जिस्म हल्के सहलाता,गाल चूमता,पीठ और गांद पे हाथ घूमता.संगीता ने पहले उससे रोका था पर कुछ दीनो बाद उससे आदत पद गये.अब तो अफ़रोज़ उसके माममे भी मसलता था और किस्सिंग भी करने लगा था. संगीता बेशार्मो जैसे अफ़रोज़ को सब करने देती.वो समझी की सलीम को तो पता है की वो उसके घर अफ़रोज़ से चुड़वके लाने आती है तो अब उससे क्या शरमाना****से यह भी देखा की अब सलीम उससे हवस भारी नज़रो से देखने लगा था.संगीता ने यह बात अफ़रोज़ को बताई पर अफ़रोज़ ने हेस्ट उसकी बात ताल दी.संगीता को डर था की कही सलीम उससे ना पकड़ ले पर उससे यह यकीन था की सलीम अफ़रोज़ के सामने होते ऐसा कुछ नही करेगा और इससे विश्वास पे वो निश्चिंत हो गये.अफ़रोज़ संगीता को सलीम के सामने बेशर्म करने लगा था और अंजाने मई संगीता वैसे ही कर रही थी जैसा अफ़रोज़ चाहता था.अफ़रोज़ संगीता को सलीम से चुड़वाना चाहता था और सलीम भी संगीता की कमसिन जवानी चोद्नना चाहता है.संगीता का भरोसा जेटने अफ़रोज़ सलीम को उससे दूर रखता था पर सलीम के सामने उससे खूब खेलता.संगीता को अब उससे डर नही लगता क्योकि उससे सलीम पे भरोसा हुआ था की सलीम उससे कुछ नही करेगा.जब अफ़रोज़ को यकीन हुआ की संगीता सॅकी मई उसकी रंडी बान गये और सलीम से नही शरमाती तब एकदिन संगीता को सलीम से चुड़वाने का प्लान रंग लाया.अफ़रोज़ एक वीक से संगीता से मिला नही.संगीता जब-जब उससे फोन करती वो कोई ना कोई बहाना बना लेता और उससे नही मिलता.आख़िर 10 दिन बाद उससे संगीता को कल सलीम के घर मिलने बुलाया.अफ़रोज़ ने यह भी बताया की कल सलीम नही होगा इसलिए वो पुर घर मई चुदाई कर सकते है.यह बात सुनके संगीता बड़ी खुश हुई.पहले चुदाई के बाद यह अफ़रोज़ से उसकी सबसे लंबी जुदाई थी और दूसरे दिन दिल खोलके चुदाई करके इस जुदाई को मिटाने वो बेकरार हुई.संगीता स्कर्ट और शर्ट पहंके अफ़रोज़ से मिलने सलीम के घर गये और डोर नॉक किया.सलीम को दरवाज़ा खोलते देख वो ज़रा चॉक गये.सलीम स्माइल करते उससे उप्पर से नीचे देखते बोला,"आरे संगीता तुम,आओ आंदार." संगीता आंदार आके हैरानी से बोली,"सलीम,अफ़रोज़ आज मिलने वाला था,आया नही क्या वो अभी?" दरवाज़ा बंद करते सलीम बोला,"अफ़रोज़ आनेवाला है संगीता, उसने तुझे रुकने बोला है,वो आधे घंटे मई आएगा,आओ बैठो तो सही अफ़रोज़ आने तक." संगीता सोफे पे बैठ गये.यहा-वाहा की बाते करते-करते सलीम बोला,"वैसे अफ़रोज़ तेरी बहुत तारीफ करता है संगीता.अब तो अफ़रोज़ कहता है की संगीता मेरी जान है और वो तुझे बहुत चाहता है,तू उससे कितना चाहती है?बता ना संगीता,तारे दिल मई उसके लिए क्या है?" सलीम के मूह से यह बात सुनके संगीता बड़ी शरमाते बोली,"सलीम तुम भी ना कुछ भी पूछते हो?अब तुझे सब पता है फिर भी मारे दिल मई उसके लिए क्या है यह पूछना ज़रूरी है क्या?" फिर सलीम का ध्यान उस बात से हटाने संगीता जाके बाल्कनी मई खड़ी होते बोली, "उफ़फ्फ़,यह अफ़रोज़ कब आनेवाला है?"संगीता बाल्कनी की रेलिंग पे झुकके खड़ी थी,उसकी गंद बहार आए थी यह देखके सलीम खुश हुआ.उठके वो भी बाल्कनी मई संगीता के पास खड़े होते बोला,"क्या हुआ संगीता जो इतनी डिस्टर्ब्ड लगती हो?यह तो बता की अफ़रोज़ से मिलने तू इतनी बेताब क्यों है?" संगीता ने सलीम की तरह देखते सोचा की सलीम कैसे ओपन्ली बात कर रहा है****से ज़रा सलीम की नज़र मई खोट लगी इसलिए वो जल्दी पर शरमाते बोली,"नही आइसा कुछ नही,वो बहुत दीनो से मिला नही था इसलिए उससे मिलना था पर लगता है आज भी नही मिलेगा वो.मई जाती हून सलीम,अफ़रोज़ आए तो उससे बोल मुझे फोन करे." संगीता मुदके आंदार जाने देखती है तब सलीम उससे वही रुकते सीना घूरते बोला,"आरे तू उससे बिना मिले जाएगी तो अफ़रोज़ नाराज़ होगा संगीता,ज़रा रुक जेया वो बस आता ही होगा अब. वैसे तुम दोनो इतने बार मारे फ्लॅट पे मिलके बेडरूम का दरवाज़ा बंद करके क्या करते हो यह तो बताओ?"सलीम के इस सवाल से संगीता एकद्ूम शर्मा गये****से समझ मई नही आया की इस सवाल का क्या जवाब दे.ज़रा हड़बड़ते वो बोली,"सलीम कैसे सवाल पूच रहे हो?क्या तू नही जनता हम क्या करते है? अक्चा मई अब जाती हू तुम अफ़रोज़ को बोलना वो मुझे घर पे फोन ले." संगीता जैसे ही जाने मूडी सलीम ने उसका हाथ पकड़के उससे सोफे पे ले जाके बिताते बोला,"आरे संगीता तुझे अफ़रोज़ का गुस्सा पता है ना?उससे बिना मिले गये तो वो तुझसे कभी बात नही करेगा तू रुक तोड़ा टाइम,चल यहा पे बैठके बात करते है.सच मई मुझे नही मालूम तुम बेडरूम मई क्या बाते करते रहते हो तो अब तू ही बता इतनी क्या बाते करते हो तुम दोनो संगीता?" संगीता को सलीम का हाथ अफ़रोज़ के हाथ से ज़्यादा कड़क लगा****के हाथ की रफनेस उससे अपने गेंतले स्किन पे महसूस होते ही कुछ अक्चा भी लगा पर शरमाते वो बोली,"नही सलीम कुछ खास नही बस मई उसको अपने कॉलेज की बात बता ती हू और वो आपनी बात बस और कुछ नही

 


अफ़रोज़ की पड़ोसन संगीता --08

संगीता की चूत अब इतने दिन से प्यासी थी और अफ़रोज़ की बातो ने उससे और रसीली बनाया.वो अब ज़रा बेशर्मी से बोली,"हन अफ़रोज़ इसी लिए मई तुझे मिलने आए क्योंकि मुझे भी तेरी बहुत याद आ रही है.ठीक है अफ़रोज़ मई रुकती हून पर तू जल्दी आ." अफ़रोज़ अपना प्लान कमियाब होते देख खुश होके बोला,"श मेरी प्यारी जान,मेरी चिकनी रंडी,तू वही रुक,मई जल्दी आता हून तुझे चोदने.तब तक सलीम से बात करो और सुनो उसकी कोई बात से इनकार मत करना नही तो तेरी चूत चोदने उसका घर हमे नही मिलेगा कभी और मेरा लंड नही मिला तो तू क्या करेगी?समझी ना मेरी बात रंडी?"संगीता झट से बोली,"हन रुकती हून पेर अगर वो...." संगीता आगे कुछ बोल ही नही पाती शर्म से इसलिए टॉपिक चेंज करते बोली,"अफ़रोज़ तुमको कितना और टाइम लगेगा?" अफ़रोज़ संगीता की रुकी बात पकड़ते बोला,"हन अगर वो क्या रखैल, बोल ना आगर वो क्या?मुझे आधा घंटा और लगेगा" सलीम के संगीता उसकी बुराई नही कर सकती इसलिए बोली,"तुम जल्दी आओ ना अफ़रोज़,मई बेचेन हून तुमसे मिलने." पर अफ़रोज़ ज़िद पकड़ते बोला,"देख संगीता अगर तू नही बताएगी सलीम के बारे मई क्या कहना चाहती है तो मई आयुंगा ही नही समझी?अब बोल अगर सलीम क्या?" संगीता अफ़रोज़ की बातो से गरम हुई और अब उसके दिल मई सलीम का क्या डर है,वो क्या कर सकता है उसके साथ यह सब अफ़रोज़ को बताने के इरादे से हल्की आवाज़ मई बोली,"अफ़रोज़ प्लीज़ समझो तुम,सलीम मुझे घूर रहा है,उसकी नज़र ठीक नही है अफ़रोज़.कही उसने कुछ गड़बड़ की तो?इसलिए मई बोलती हू मुझे जाने दो या फिर तुम जल्दी आओ यहा.तुम जल्दी आओ देखो मई यहा और नही रुक सकती हून."संगीता की बात सुनके अफ़रोज़ हेस्ट बोला,"आरे रंडी कुछ नही होगा,उसके बारे मई शक भी मत कर, वो बड़ा अछा लड़का है,तुझे भाभी मानता है वो समझी?चल अब एक पप्पी दे मुझे जल्दी से ताकि तेरी याद मुझे बेकरार करे और मई जल्दी आउ तुझे चोद्नेने,एक किस दे मुझे रंडी जल्दी." अफ़रोज़ की डिमॅंड सुनके संगीता बोली,"नही अफ़रोज़,तुम यहा आओ फिर जहा चाहो किस दूँगी पर अभी कुछ नही." अफ़रोज़ गुस्से से बोला,"नही रंडी,अभी किस दे तो जल्दी आयुंगा." इस्पे संगीता ने धमकी दी की,"अफ़रोज़ तूने आइसे कुछ भी माँगा सलीम के सामने तो देख मई चली जायूंगी." इस धमकी से अफ़रोज़ एकद्ूम गुस्सा होके बोला, "मदरचोड़ रंडी,तेरी मा की चूत,साली मुझे धमकी देती है?ठीक है रॅंड तो तू घर जेया और देख तेरी क्या हालत होगी बाद मई.तारे बाप को तेरी सब करतूत बतौँगा,उसके बाद तू क़िस्सी को मूह दिखाने के काबिल नही रहेगी.आखरी बार पूच रहा हून,किस देगी या नही."इस धमकी से डारके संगीता बिना बोले सीधे फोन रिसीवर किस करती है. सलीम उससे रिसीवर किस करते देखके स्माइल करता है.किस करके संगीता बोली,"अफ़रोज़ देख अब तेरी बात मान ली अब प्लीज़ जल्दी आओ ना." खुश होके अफ़रोज़ बोला,"अहह जनंनणणन् तू मेरी रंडी है,अक्चा अब मई जल्दी आता हून.छमिया अब नाराज़ मत हो,अभी आके तुझे इतमीनान से चोदुन्गा ठीक है?" संगीता हन बोलती है और अफ़रोज़ फोन डिसकनेक्ट करता है.सलीम उठके संगीता के हाथ से रिसीवर लेक रखते बोला,"अक्चा हो गये अफ़रोज़ से बात कूशबू?क्या बोला अफ़रोज़,कब आ रहा है वो?" संगीता शर्माके कुछ नही बोली तो सलीम आगे बोला,"संगीता तू बार-बार मारे बारे मई क्यों बोल रही थी अफ़रोज़ से?तुझे क्या मुझसे डर लगता है जो तू अफ़रोज़ को जल्दी आने कह रही थी?क्या मई बुरा आदमी हून?" संगीता तोड़ा शरमाते बार-बार नज़र बचा के सलीम को देखते बोली,"नही-नही ऐसे बात नही है सलीम,बस वो आइसे ही अफ़रोज़ को जल्दी आने बोल रही थी." सलीम आँख मरते बोला,"तो क्या बात है संगीता जो तू अफ़रोज़ से मिलने बड़ी बेताबी हो रही है?बहुत याद आ रही है क्या उसकी?" संगीता शर्माके सिर झुकते बोली,"ऐसा कुछ भी नही है सलीम,बस बहुत दीनो से उससे मिली नही इसलिए जल्दी आने बोल रही थी.""ठीक है लेकिन इसमे इतना शरमाना क्या संगीता?अक्चा आ इधर बैठ,अफ़रोज़ आने तक हम कुछ बाते करंगे." सलीम संगीता का हाथ पकड़के उससे सोफे पे अपने पास बिताते बोला,"वैसे संगीता अभी तूने अफ़रोज़ को किस दिया क्या फोन पे?" संगीता सलीम से अपना हाथ चुराते उसके सवाल ककोई जवाब नही देती.सलीम फिर उसका हाथ पकड़ते बोला,"बोल ना संगीता,इसमे शरमाना कैसे?" संगीता फिर हाथ चुराने की कोशिश करते बोली,"प्लीज़ मेरा हाथ चोरो सलीम,मुझे टच मत करो.मई अफ़रोज़ की गर्ल फ्रेंड हून तेरी नही." इस्पे सलीम संगीता के दोनो हाथ पकड़ते बोला,"पता है तू अफ़रोज़ का माल है पर मेरी बात का जवाब दिए बिना हाथ नही चोरँगा तेरा." संगीता गुस्से पे अपना हाथ खिचते बोली,"यह क्या?हाथ चोरो ना मेरा सलीम.और यह क्या तुम बोलते हो की मई अफ़रोज़ का माल हून?क्या मतलब है इसका?"संगीता इतने ज़ोर्से अपना हाथ खिचती है की उससे सलीम भी उसकी तरफ खिछा चला आते उसके सिने से टकराता है.अपना सीना वैसे ही संगीता के सिने से लगाके सलीम बोला,"आरे इतना क्यों गुस्सा होती है तू संगीता?मैने सिर्फ़ यही पूछा ना की अफ़रोज़ को फोन पे किस दिया क्या तूने?और तू अफ़रोज़ की गर्लफ्रेंड है इसलिए मैने तुझे उसकी माल बताया." संगीता पीछे होके आख़िर बोली,"हन किया था उससे फोन पे मैने किस,प्लीज़ अब मेरा हाथ चोरो ना,नही तो अफ़रोज़ को बोलूँगे की तुम मुझे इतना तंग करते हो." इस्पे सलीम अब ज़रा स्टाइल बदलके बोला,"क्या बोलेगी अफ़रोज़ को तू संगीता?की मैने तेरा हाथ पकड़ा था यही ना?आरे मैने तो तुझे भाभी मान के तेरा हाथ पकड़ा था,क्योकि तू अब अफ़रोज़ की बीवी बननेवाली है ना संगीता?" यह बोलते सलीम फिर उससे आँख मरते हाथ पकड़ा. खुद को सलीम की भाभी और अफ़रोज़ की बीवी के रूप मई मान ही मान मई देखते अब संगीता शर्ंके बोली,"हन मई तो तय्यार हून उसकी बीवी बनने पेर उसने अभी तक बोला नही की वो कब मुझसे शादी करेगा.सलीम प्लीज़ मुझे अककचा नही लगता तुमारे आइसे मुझे हाथ लगाना,तुम ज़रा दूर रहो ना,मई अफ़रोज़ की अमानत हून."अब संगीता हाथ चुराने की कोशिश नही कर रही थी यह देखके सलीम उसके हाथ मसालते बोला, "आरे वो मुझसे बोला की वो तुझे बहुत चाहता है और तुझसे ही शादी करेगा,और तो और उसने तुम्हारे लिए एक अछा फ्लॅट पे देख रखा है शादी के बाद रहने के लिए.अब तुझे भाभी बोला तो भी क्यों अपने देवर से इतना शरमाना?अब तो फ्री हो मारे सामने." संगीता अब भी सपने मई थी और बिना सोचे बोली,"प्लीज़ चोरो ना मेरा हाथ अफ़रोज़,यह क्या कर रहा है तू?" संगीता की इस ग़लती को पकड़ते सलीम बोला,"आरे संगीता मई अफ़रोज़ नही सलीम हून.लगता है तुझे अफ़रोज़ की बहुत याद आ रही है.वैसे और क्या-क्या करते हो तुम दोनो अकले मेरी बेडरूम मई संगीता?सिर्फ़ किस्सिंग ही या और कुछ भी करते हो?" सलीम के हाथ रगड़ना,सिने पे नज़र रखना और अफ़रोज़ के बारे मई सवाल सुनके संगीता परेशन होके अब ज़रा डरते बोली,"प्लीज़ मुझसे तुम और कुछ बाते मॅट करो सलीम, मुझे टच मॅट करो और ऐसे बात मॅट पूछो."सलीम अब संगीता के शर्म और डर का फ़ायदा उठाते बोला,"आरे आइसा मत बोलो संगीता,तुझे देखा तो मुझे मारे गर्लफ्रेंड नीता की बड़ी याद आती है.वो यहा होती तो ना जाने मई क्या-क्या करता उसके साथ.बेडरूम मई उससे ले जाके पुर दिन भर आइश् करते हम जैसा तू और अफ़रोज़ करते है."संगीता सलीम के मूह से इतनी ओपन बाते सुनके और शर्माके कुछ बोलने बोली,"ऑश तो तुम्हारी गर्ल फ्रेंड भी है सलीम?देख अब तो तू समझा होगा ना की मारे दिल मई क्या होता है जब अफ़रोज़ से मिलने आती हून?इसलिए अब तू आगे कुछ मत पूच मुझसे.अब यह अफ़रोज़ को कितना टाइम लगेगा और?" सलीम ने अब संगीता की कमर मई हाथ डालते संगीता से और ओपन्ली बात करने का फ़ैसला करने का इरादा करते बोला,"हन संगीता मेरी भी लवर है,जैसे तू अफ़रोज़ का माल है नीता मेरा माल है,और तो और नीता तारे जैसे शर्मीली नही है.वो एकद्ूम बींदस्त ओपन लड़की है,मई जो बोलू करती है और तुझे पता है कभी-कभी अफ़रोज़ भी उससे किस करता है.पहली बार ना-ना किया पर जब मैने उससे समझाया तब वो अफ़रोज़ जब चाहये उससे किस देती है.हन आएगा अफ़रोज़ जल्दी,वैसे तू चाहे तो वो आने तक मई उसकी कमी पोरी करू?अफ़रोज़ आके जो करनेवाला है उसकी शुरुवत मई करू संगीता? वैसे अफ़रोज़ ने मुझे बोला है की अगर मई चाहू तो मई तुझे किस कर सकता हून,तो बोल देती है क्या एक किस मुझे?..

 
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