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अहसान complete

अपडेट-42

उसके बाद मैं ऑर लाला दोनो कार मे बैठ कर निकल पड़े. कुछ ही देर मे लाला मुझे आबादी से निकाल कर ऐसी जगह ले गया जहाँ ना तो कोई ऊँची बिल्डिंग थी ना हो कोई चका-चोंध थी. रास्ता एक दम सुनसान था अंधेरी रात अपने पूरे शबाब पर थी. सिर्फ़ हेड लाइट ही थी जिसकी रोशनी से हमे सामने का नज़र आ रहा था वरना आस-पास कही कोई आबादी नही थी इसलिए मुझसे रहा नही गया ऑर मैने पूछ लिया...

मैं : लाला हम कहाँ जा रहे हैं?

लाला : भाई तुमको बताया तो था कि जापानी ऑर सूमा भी तुझसे मिलना चाहते हैं.

मैं : ऑर कितना दूर है....

लाला : बस 15 मिंट आँख बंद करके बैठ ऑर समझ पहुँच ही गये (गाड़ी की स्पीड बढ़ाते हुए)

कुछ ही देर मे गाड़ी अपनी फुल स्पीड पर थी ऐसा लग रहा था जैसे गाड़ी दौड़ नही रही बल्कि उड़ रही है लाला एक दम मेरे जैसे गाड़ी चला रहा था. शायद इसलिए मुझे भी ऐसी तेज़ गाड़ी चलाने की आदत थी. लाला ने 15 मिंट से भी कम वक़्त मे एक बस्ती मे गाड़ी को घुसा दिया जहाँ गलियाँ बेहद तंग थी लोग सड़को पर ही बैठ कर अपना समान बेच रहे थे लाला को ऑर मुझे देख कर सब लोग हैरान हो रहे थे ऑर हाथ उठा कर मुझे सलाम कर रहे थे मुझे बार-बार सबके सलाम का जवाब देना पड़ रहा था इसलिए जब तक गाड़ी उस गली से गुज़रती रही मैने अपना हाथ हवा मे उठा कर ही रखा. कुछ ही देर मे एक ऐसी जगह लाला ने गाड़ी रोक दी जो बाहर से देखने मे किसी गॉडाउन जैसा लग रहा था लेकिन अंदर से बहुत शोर आ रहा था. मैं बड़े गौर से उस जगह को देखने लगा मुझे जाने क्यो वो जगह मुझे जानी-पहचानी सी लग रही थी.

मैं : लाला ये कौनसी जगह है...

लाला : चल भाई तुझे मर्दो वाला खेल दिखाता हूँ (कार रोकते हुए)

मैं : (कार का गेट खोलते हुए) चल....

उसके बाद मैं ऑर लाला उस जगह के अंदर चले गये वहाँ बहुत ज़्यादा भीढ़ थी यहाँ तक कि सही से खड़े होने की भी जगह नही थी लोग एक दूसरे पर चढ़ रहे थे इतना बूरा हाल था तभी लाला ने अपनी जेब से फोन निकाला ऑर किसी को फोन किया....

लाला : हल्लो....भेन्चोद बुलाने से पहले ये तो बता देता कि यहाँ दबा के मारना है हम को....

लाला : हाँ साथ ही आया है...यार कहाँ से आएँ यहाँ पैर रखने की जगह नही है....

लाला : साला इसी लिए मैं यहाँ आता नही हूँ....

लाला : अच्छा ठीक है....

लाला : ओके भाई 5 मिंट मे मिलते हैं बस

उसके बाद उसने फोन काट दिया.....

लाला : चल भाई शेरा इसके बीच मे से ही निकलना पड़ेगा.... जानता है तेरी ऑर जापानी की ये मनपसंद जगह है तुम दोनो सारा दिन यही पड़े रहते थे.... (हँसते हुए) यार तू यहाँ सारा दिन रहता कैसे था मुझे तो ये समझ नही आ रहा ये भीढ़ मे निकलते हुए मेरी तो जान निकल जाएगी तू पता नही कैसे जाता था.

लाला की ये बात सुनकर जाने मुझे ऐसा क्यो लगा कि मैं पहले भी हवा मे फाइयर निकाल कर रास्ता सॉफ कर चुका हूँ इसलिए मैने फॉरन लाला से कह दिया...

मैं : तू बोले तो रास्ता मैं सॉफ करूँ....

लाला : (हैरान होते हुए) कैसे....

मैं : (अपनी गन निकालते हुए) तू बस देखता जा...

मैं उस गेट के सामने जाके खड़ा हो गया ऑर सब लोग शोर मचा रहे थे कोई जाने का रास्ता नही दे रहा था मैने 2-3 बार आवाज़ लगाई लेकिन कोई नही सुना इसलिए मैने गन को हवा मे उपर उठाया ऑर एक फाइयर निकाल दिया. सबकी नज़र पिछे मेरी तरफ देखने लगी ऑर मुझे देखते ही सब ने हाथ उठा कर शेरा.... शेरा.... शेरा.... करने लगे ऑर मेरे लिए रास्ता छोड़ दिया मैने पलटकर लाला की तरफ देखा ऑर बस मुस्कुरा दिया. जवाब मे वो भी मुझे देख कर मुस्कुराया ऑर मेरे कंधे पर थपकी मारते हुए मुझे शाबाशी देने लगा. उसके बाद मैने जैसे ही चलना शुरू किया वहाँ पर कुछ लोगो ने हवा मे अपनी बंदूके तान ली ऑर गोलियाँ चलानी शुरू कर दी साथ सारी भीढ़ मेरे नाम का नारा बुलंद करने लगी. मैं ऑर लाला जब आगे गये तो सामने मुझे एक बड़ा सा पिंजरा नज़र आया जिसमे 2 लोग आपस मे लड़ रहे थे. आगे जाते ही मेरे ऑर लाला के लिए वहाँ बैठे लोगो ने कुर्सियाँ खाली करदी ऑर सब लोग वहाँ मेरा हाल-चाल पुछ्ने लगे हम दोनो वहाँ कुर्सी पर बैठ कर उन दोनो लड़ने वाले आदमियो का मॅच देखने लगे. जाने क्यो मुझे यहाँ आके एक अजीब सी खुशी हो रही थी जैसे मुझे गाँव जाते खुशी होती थी मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मैं अपने घर ही आ गया हूँ.

मैं कुर्सी पर आराम से बैठा था कि इतने मे एक घंटी की टॅनन्न्न की आवाज़ से फाइट शुरू हो गई. सब लोगो ने दोनो फाइटर्स पर अपना दाव लगाना शुरू कर दिया. मैं बड़े गौर से दोनो फाइटर्स को देख रहा था जो घंटी की आवाज़ से ही एक दूसरे पर टूट पड़े थे ऑर लड़ना शुरू हो गये थे. कुछ देर फाइट ऐसे ही चलती रही तभी फाइट के बीच मे पिछे से मेरे कंधे पर किसी ने हाथ रखा. मैने पलट कर देखा तो ये जापानी था जैसा की मुझे ख़ान ने बताया था की इश्स पुर गांग मे यही मेरा सबसे जिगरी दोस्त था. मैं उसको देखते ही फॉरन अपनी कुर्सी से खड़ा हो गया ऑर उसको मुस्कुरा कर देखने लगा. वो बिना कुछ बोले मुझे गौर से देख रहा था वो मुझे देखकर रो भी रहा था ऑर मुस्कुरा रहा था ऑर फिर उसने मुझे अपनी तरफ खींच कर गले से लगा लिया.

जापानी : (रोते हुए ओर मुस्कुरकर) भाई तू कहाँ चला गया था यार तुझे कितना ढूँढा मैने.

मैं : बस यार क्या बताऊ जाने दे बहुत लंबी कहानी है फिर कभी बताउन्गा.

जापानी : शेरा तू यहाँ क्यो बैठा है चल उपर आजा अपने ऑफीस मे वहाँ से फाइट देखेंगे.

मैं : (लाला को देखते हुए) चल लाला चलते हैं.

उसके बाद हम तीनो वहाँ से उठे ऑर सीढ़िया चढ़ते हुए एक आलीशान से कमरे मे आ गये जिसकी सामने की पूरी दीवार किसी काँच के ग्लास की बनी थी जिससे हम आर-पार देख सकते थे मैं कॅबिन मे घुसते ही ग्लास के पास जाके खड़ा हो गया ऑर नीचे हो रही फाइट देखने लगा. उपर से नीचे का नज़ारा ऑर भी शानदार दिखाई दे रहा था. तभी मुझे जापानी की आवाज़ आई.

जापानी : शेरा भाई यहाँ क्यो खड़ा है ये ले ये टी.वी मे लाइव फाइट देख ले. (बड़ा सा टीवी ऑन करते हुए)

मैं : (पलटकर टीवी मे देखते हुए) ये तो ऑर भी सॉफ नज़र आ रहा है.

जापानी : भाई अब तू बैठ कर फाइट देख मैं थोड़ा काम कर लूँ (परेशान होते हुए)

उसके बाद वो लोग बैठकर बाते करने लगे ऑर मैं बैठा आराम से टीवी मे फाइट देखने लगा. फाइट ख़तम होते ही कुछ लोग जापानी के कॅबिन मे आ गये ऑर आते ही 1 आदमी ने ज़ोर-ज़ोर से हँसना शुरू कर दिया. मैने नोट किया कि उन लोगो के आने से जापानी कुछ ऑर ज़्यादा परेशान हो गया था.

उनमे से एक आदमी जापानी से : जापानी भाई तेरा फाइटर आज फिर से हार रहा है.

जापानी : छोड़ ना यार साली तक़दीर ही खराब है (कुछ काग़ज़ के टुकड़ो को फाड़ते हुए)

मैं : क्या हुआ जापानी परेशान लग रहा है भाई

जापानी : कुछ नही यार ये तो चलता रहता है तू आराम से फाइट देख मैं थोड़ी देर मे आता हूँ लाला इसका ख्याल रखना.

लाला : (हाथ हिलाते हुए ) ओके....

मैं : क्या हुआ लाला ये परेशान क्यो लग रहा था सब ठीक तो है.

लाला : कुछ नही यार इसने अपना बेड़ा-गर्क खुद किया है कितनी बार बोला है कि ये फाइट क्लब इसके बस का नही है. इस धंधे को छोड़कर मेरे साथ क्लब मे आ जाए लेकिन ये मानता ही नही.

मैं : ये बता समस्या क्या है.

लाला : होना क्या है यार अभी जो लोग आए थे ना उनके साथ इसकी बेट्टिंग चलती है करोड़ो रूपिया दाव पर लगता है ऑर हर बार इसका फाइटर हार जाता है जापानी इस वक़्त काफ़ी लॉस मे चल रहा है अब अगले हफ्ते बाबा को हिसाब देना है बस इसलिए ये परेशान है.

मैं : क्या हम जापानी की मदद नही कर सकते.

लाला : (अपनी कुर्सी मेरे पास करते हुए) मेरी जान अभी तो तू आया है इतनी जल्दी ये सब पंगे मे मत पड़ तू बस ऐश कर यार.

मैं : लेकिन यार जब मैं था तब भी क्या ये फाइट क्लब ऐसे ही लॉस मे चलता था?

लाला : नही यार जब तू था.... तब तो यही बाबा का टॉप बिज़्नेस होता था उस वक़्त यहाँ सब अच्छा था लेकिन आज तेरे ही बनाए हुए सब फाइटर शम्मी के लिए काम करते हैं ऑर उसकी तरफ से फाइट करते हैं. इसलिए तो जापानी के पास लड़ने के लिए स्ट्रॉंग फाइटर नही है.

मैं : ये शम्मी कौन है.

लाला : वही बंदा जो अभी हँस रहा था पागलो की तरह.

मैं : (हाँ मे सिर हिलाते हुए) ठीक है... अच्छा मुझे फाइट के रूल्स बता मेरे पास एक फाइटर है.

लाला : (ज़ोर से हँसते हुए) रूल्स कौन्से यार.... कोई रूल नही है जब तक सामने वाला फाइटर अपने पैरो पर खड़ा होने लायक है तब तक फाइट चलती रहती है.

मैं : (हाँ मे सिर हिलाते हुए) समझ गया... एक काम कर शम्मी को बोल एक ऑर फाइट रख ले ऑर यहाँ के फेव फाइटर को बुला ले जो भी उसके पास है.

लाला : (हैरानी से मुझे देखते हुए) भाई तू क्या करने वाला है.

मैं : हिसाब बराबर करने का वक़्त आ गया है.

लाला : (परेशान होते हुए ऑर साथ ही फोन उठा कर किसी को फोन लगाते हुए ) जल्दी उपर आ यार शेरा का कुछ समस्या है...

उसके बाद कुछ देर कॅबिन मे खामोशी छाई रही ऑर थोड़ी देर मे जापानी उपर आ गया.

जापानी : हाँ क्या हुआ

लाला : शेरा भाई जान कुछ फर्मा रहे हैं.

जापानी : (सवालिया नज़रों से मुझे देखते हुए ) क्या बात है शेरा....

मैं : शम्मी को बोल अपने बेस्ट फाइटर को लेके आए आज यहाँ फिर से फाइट होगी.

जापानी : नही यार आगे ही बहुत पैसा हार चुका हूँ बाबा मेरी जान ले लेंगे अगर उनको पता चल गया तो....

मैं : मुझे पर ऐतबार है तो फाइट रख ले तुझे हारने नही दूँगा

जापानी : तुझ पर तो जान से ज़्यादा ऐतबार है यार लेकिन ये तो बता फाइटर कौन है.

मैं : रिंग मे देख लेना... अभी जितना बोला है उतना कर.

उसके बाद जापानी कुछ देर मेरे सामने खामोश खड़ा कुछ सोचता रहा ऑर फिर बिना कुछ बोले वापिस नीचे चला गया ऑर कुछ देर बाद उसके साथ शमी ऑर उसके आदमियो के साथ दुबारा उपर आ गया.

शमी : (मुझसे हाथ मिलाते हुए) क्या हाल है शेरा भाई आपका नाम बहुत सुना था दर्शन पहली बार हुए हैं.

मैं : जनाब आज की एक फाइट ऑर रख लेते हैं

शमी : आपका हुकुम सिर आँखो पर लेकिन बाबा का हुकुम है कि यहाँ हफ्ते मे एक ही फाइट होगी दूसरी फाइट की इजाज़त नही है मुझे बाबा से पुछ्ना पड़ेगा.

मैं : बाबा से पुच्छने की ज़रूरत नही है जब मैं कह रहा हूँ तो गारंटी भी मेरी है.

शमी : वो तो ठीक है लेकिन दाव पर क्या लगाओगे आप लोगो का आज का कलेक्षन तो जापानी हार चुका है (मुस्कुराते हुए)

मैं : अगर मैं हार गया तो मैं सामने बैठा हूँ तुम्हारे जो चाहे कर सकते हो लेकिन अगर जीत गया तो मेरे जीतने के बाद तुमने जो भी जापानी से जीता है सब वापिस करना पड़ेगा.

शम्मी : (हँसते हुए) मैं इतना चूतिया लगता हूँ क्या जो एक जान का सौदा करोड़ो मे करूँगा.

जापानी : (बीच मे बोलते हुए) अगर हम ये फाइट हार गये तो हमारा फाइट क्लब आपका.

शम्मी : ये हुई ना मर्दो वाली बात मुझे मंज़ूर है

लाला : घंटा मंज़ूर है.... तुम दोनो पागल तो नही हो गये हो इतना बड़ा दाँव खेल रहे हो वो भी बाबा से इजाज़त लिए बगैर.

जापानी : जो होगा मैं देख लूँगा मुझे मेरे यार पर आज भी पूरा ऐतबार है (मेरे कंधे पर हाथ रखते हुए)

लाला : तुम दोनो पागल हो गये हो जापानी यार एक बार फिर सोच ले बहुत लफडा हो जाएगा.

मैं : कुछ नही होगा यार भरोसा कर मुझ पर

लाला : (सिर झटकते हुए) तुम जो मर्ज़ी करो लेकिन याद रखना कुछ पंगा हुआ तो बाबा को जवाब तुम दोनो दोगे मैने बोल देना है कि मैने मना किया था तुम दोनो को.

जापानी : ठीक है.... जो होगा देखा जाएगा (मुस्कुराते हुए)

शमी : ठीक है फिर स्पेशल फाइट है तो स्पेशल रिंग भी होना चाहिए क्या कहते हो...

जापानी : स्पेशल रिंग ही होगा शम्मी भाई (मेरी तरफ मुस्कुरा कर देखते हुए)

उसके बाद शम्मी वहाँ से चला गया ऑर मैं ऑर जापानी नीचे रिंग मे चले गये जहाँ हमने एक स्पेशल फाइट अनाउन्स कर दी. जिसके जवाब मे वहाँ के लोगो ने शोर मचा कर अपनी खुशी का इज़हार किया. उसके बाद जापानी अपने लोगो को कुछ समझाने चला गया ऑर मैं वापिस उपर कॅबिन मे आके बैठ गया. आते ही लाला फिर से मेरे पास आ गया ऑर मुझे समझाने मे लग गया.

लाला : यार एक बार फिर सोच लो तुम बहुत जल्दबाज़ी कर रहे हो कुछ समस्या ना हो जाए.

मैं : कुछ नही होगा यार फिकर मत कर.

लाला : लेकिन तुम जिस फाइटर पर इतना बड़ा दाँव खेल रहे हो वो फाइटर हैं कौन मिलवा तो दे यार.

मैं : (मुस्कुरकर ) ले मिल ले फिर... फाइटर तेरे सामने बैठा है.

लाला : (हड-बडाकर खड़ा होते हुए) शेरा तेरा दिमाग़ तो ठीक है यार तू अभी इतनी बड़ी बीमारी से वापिस आया है.... नही...नही.... यार तू रहने दे तू इन फाइटर्स का मुक़ाबला नही कर पाएगा ऑर वैसे भी जापानी भी तुझे लड़ने की इजाज़त नही देगा.

मैं : तू फिकर मत कर कुछ नही होगा यार मैं हूँ ना सब संभाल लूँगा ऑर अपने यार को इतना कमज़ोर मत समझ....

अपन ही जीतेंगे.... आज साला चंगेज़ ख़ान भी क्यो ना आ जाए साला अपने पैरो पर चलकर नही जाएगा.

लाला : देख यार तू हमारा यार है इसलिए रोक रहे हैं हमारा काम पैसा लगाना है यार खुद रिंग मे उतरकर लड़ना नही है.

मैं : क्या मैने पहले कभी फाइट नही की इस रिंग मे?

लाला : की है यार बहुत फाइट की है ऑर आज तक तू कभी हारा भी नही लेकिन पहले ऑर अब मे बहुत फरक है यार अब तो तुझे कुछ याद भी नही है तू कैसे लड़ेगा उसके फाइटर के साथ.

मैं : (कुछ सोचते हुए) अभी फाइट मे बहुत वक़्त है.... एक काम कर अगर मेरी पुरानी फाइट की कोई वीडियो पड़ी है तो लेके आ मैं देखना चाहता हूँ.

लाला : अच्छा अभी लाता हूँ

Update-42

Uske baad main or lala dono car me baith kar nikal pade. kuch hi der me lala mujhe abaadi se nikaal kar aisi jagah le gaya jahan na to koi oonchi building thi na ho koi chaka-chondh thi. rasta ek dam sunsaan tha andheri raat apne poore shabaab par thi. sirf head light hi thi jiski roshni se hume samne ka nazar aa raha tha warna aas-pass kahi koi abaadi nahi thi isliye mujhse raha nahi gaya or maine puch liya...

Main : lala hum kaha jaa rahe hain?

Lala : bhai tumko bataayaa to tha ke japani or sooma bhi tujhse milna chahte hain.

Main : or kitna door hai....

Lala : bas 15 mint aankh band karke baith or samajh pohonch hi gaye (gaadi ki speed badhate hue)

Kuch hi der me gaadi apni full speed par thi aisa lag raha tha jaise gaadi daud nahi rahi balki udd rahi hai lala ek dam mere jaise gaadi chala raha tha. Shayad isliye mujhe bhi aisi tez gaadi chalane ki aadat thi. lala ne 15 mint se bhi kam waqt me ek basti me gaadi ko ghusa diya jahan gaaliyanan behad tang thi log sadko par hi baith kar apna samaan bech rahe the lala ko or mujhe dekh kar sab log hairaan ho rahe the or hath utha kar mujhe salaam kar rahe the mujhe bar-bar sabke salaam ka jawab dena pad raha tha isliye jab tak gaadi uss gali se guzarti rahi maine apna hath hawa me utha kar hi rakha. Kuch hi der me ek aisi jagah lala ne gaadi rok di jo bahar se dekhne me kisi godown jaisa lag raha tha lekin andar se bahut shor aa raha tha. main bade gaur se uss jagah ko dekhne laga mujhe jane kyo wo jagah mujhe jaani-pehchani si lag rahi thi.

Main : lala ye kounsi jagah hai...

Lala : chal bhai tujhe mardo wala khel dikhata hun (car rokte hue)

Main : (car ka gate kholte hue) chal....

Uske baad main or lala uss jagah ke andar chale gaye wahan bahut jaada bheedh thi yahan tak ki sahi se khade hone ki bhi jagah nahi thi log ek dusre par chadh rahe the itna boora haal tha tabhi lala ne apni jeb se phone nikala or kisi ko phone kiya....

Lala : hallo....bhenchod bulaane se pehle ye to bata deta ki yahan daba ke maarna hai ham ko....

Lala : haa sath hi aya hai...yaar kaha se aaye yahan pair rakhne ki jagah nahi hai....

Lala : sala isi liye main yahan aata nahi hun....

Lala : achha thik hai....

Lala : ok bhai 5 mint me milte hain basss

Uske baad usne phone kaat diya.....

Lala : chal bhai shera iske bich me se hi nikalna padega.... janta hai teri or japani ki ye manpasand jagah hai tum dono sara din yhi pade rehte the.... (hansate hue) yaar tu yahan sara din rehta kaise tha mujhe to ye samajh nahi aa raha ye bheedh me nikalte hue meri to jaan nikal jayegi tu pata nahi kaise jata tha.

Lala ki ye baat sunkar jane mujhe aisa kyo laga ki main pehle bhi hawa me fire nikaal kar rasta saaf kar chuka hun isliye maine foran lala se keh diya...

Main : tu bole to rasta main saaf karu....

Lala : (hairaan hote hue) kaise....

Main : (apni gun nikalte hue) tu bas dekhta jaa...

Main uss gate ke samne jake khada ho gaya or sab log shor macha rahe the koi jane ka rasta nahi de raha tha maine 2-3 baar awaaz lagayi lekin koi nahi suna isliye maine gun ko hawa me upar uthaya or ek fire nikaal diya. sabki nazar pichhe meri taraf dekhne lagi or mujhe dekhte hi sab ne hath utha kar shera.... shera.... shera.... karne lage or mere liye rasta chod diya maine palatkar lala ki taraf dekha or bas muskura diya. jawab me wo bhi mujhe dekh kar muskuraya or mere kandhe par thapki marte hue mujhe shabashi dene laga. uske baad maine jaise hi chalna shuru kiya wahan par kuch log ne hawa me apni bandooke taan lee or goliyaan chalani shuru kar di sath saari bheedh mere naam ka naara buland karne lagi. Main or lala jab aagey gaye to samne mujhe ek bada sa pinjra nazar aaya jisme 2 log apas me lad rahe the. aagey jaate hi mere or lala ke liye wahan baithe logo ne kursiyaan khaali kardi or sab log wahan mera haal-chal puchhne lage hum dono wahan kursi par baith kar unn dono ladne wale aadmiyo ka match dekhne lage. Jane kyo mujhe yahan aake ek ajeeb si khushi ho rahi thi jaise mujhe gaav jate khushi hoti thi mujhe aisa lag raha tha jaise main apne ghar hi aa gaya hun.

Main kursi par araam se baitha tha ki itne me ek ghanti ki tannnn ki awaz se fight shuru ho gai. sab logo ne dono fighters par apna daav lagana shuru kar diya. Main bade gaur se dono fighters ko dekh raha tha jo ghanti ki awaz se hi ek dusre par toot pade the or ladna shuru ho gaye the. Kuch der fight aise hi chalti rahi tabhi fight ke bich me pichhe se mere kandhe par kisi ne hath rakha. Maine palat kar dekha to ye japani tha jaisa ki mujhe khan ne bataayaa tha ki iss poore gang me yhi mera sabse jigri dost tha. Main usko dekhte hi foran apni kursi se khada ho gaya or usko muskurakar dekhne laga. wo bina kuch bole mujhe gaur se dekh raha tha wo mujhe dekhkar rou bhi raha tha or muskura raha tha or fir usne mujhe apni taraf khinch kar gale se laga liya.

Japani : (Rote hue or muskurakar) bhai tu kaha chala gaya tha yaar tujhe kitna dhundha maine.

Main : bas yaar kya batau jane de bahut lambi kahani hai fir kabhi bataunga.

Japani : shera tu yahan kyo baitha hai chal upar aaja apne office me wahan se fight dekhenge.

Main : (lala ko dekhte hue) chal lala chalte hain.

Uske baad hum teeno wahan se uthe or sidhiya chadhte hue ek alishan se kamre me aa gaye jiski samne ki poori deewar kisi kaanch ke glass ki bani thi jisse hum aar-paar dekh sakte the main cabin me ghuste hi glass ke pass jake khada ho gaya or niche ho rahi fight dekhne laga. upar se niche ka nazara or bhi shaandar dikhayi de raha tha. tabhi mujhe japani ki awaz aayi.

Japani : shera bhai yahan kyo khada hai ye le ye T.V me Live fight dekh le. (Bada sa Tv on karte hue)

Main : (palatkar Tv me dekhte hue) Ye to or bhi saaf nazar aa raha hai.

Japani : bhai ab tu baith kar fight dekh main thoda kaam kar loo (pareshaan hote hue)

Uske baad wo log baithkar baate karne lage or main baitha aram se Tv me fight dekhne laga. Fight khatam hote hi kuch log japani ke cabin me aa gaye or aate hi 1 admi ne jor-jor se hasna shuru kar diya. Maine note kiya ki unn logo ke aane se japani kuch or jyaadaa pareshaan ho gaya tha.

Unme se ek aadmi japani se : japani bhai tera fighter aaj phir se haar raha hai.

Japani : chod naa yaar sali taqdeer hi kharab hai (kuch kaagaz ke tukdo ko phadte hue)

Main : kya hua japani pareshan lag raha hai bhai

Japani : kuch nahi yaar ye to chalta rehta hai tu araam se fight dekh main thodi der me aata hun lala iska khyaal rakhna.

Lala : (hath hilte hue ) ok....

Main : kya hua lala ye pareshan kyo lag raha tha sab thik to hai.

Lala : kuch nahi yaar isne apna beda-gark khud kiya hai kitni baar bola hai ki ye fight club iske bas ka nahi hai. iss dhandhe ko chodkar mere sath club me aa jaye lekin ye manta hi nahi.

Main : ye bata samasya kya hai.

Lala : hona kya hai yaar abhi jo log aaye the naa unke sath iski betting chalti hai carodo rupiyaa daav par lagta hai or har baar iska fighter haar jata hai japani iss waqt kaafi loss me chal raha hai ab agle hafte baba ko hisaab dena hai bas isliye ye pareshaan hai.

Main : kya hum japani ki madad nahi kar sakte.

Lala : (apni kursi mere pass karte hue) meri jaan abhi to tu aaya hai itni jaldi ye sab pangey me mat pad tu bas aish kar yaar.

Main : lekin yaar jab main tha tab bhi kya ye fight club aise hi loss me chalta tha?

Lala : nahi yaar jab tu tha.... tab to yhi baba ka top business hota tha uss waqt yahan sab achha tha lekin aaj tere hi banaye hue sab fighter shammi ke liye kaam karte hain or uski taraf se fight karte hain. isliye to japani ke pass ladne ke liye strong fighter nahi hai.

Main : ye shammi koun hai.

Lala : wahi banda jo abhi hass raha tha paglo ki tarah.

Main : (haa me sir hilate hue) thik hai... achha mujhe fight ke rules bata mere pass ek fighter hai.

Lala : (jor se hansate hue) rules kounse yaar.... koi rule nahi hai jab tak samne wala fighter apne pairo par khada hone layak hai tab tak fight chalti rehti hai.

Main : (haa me sir hilate hue) samajh gaya... ek kaam kar shammi ko bol ek or fight rakh le or yahan ke fav fighter ko bula le jo bhi uske pass hai.

Lala : (hairani se mujhe dekhte hue) bhai tu kya karne wala hai.

Main : hisaab barabar karne ka waqt aa gaya hai.

Lala : (pareshaan hote hue or sath hi phone utha kar kisi ko phone lagate hue ) jaldi upar aa yaar shera ka kuch samasya hai...

Uske baad kuch der cabin me khamoshi chhayi rahi or thodi der me japani upar aa gaya.

Japani : haa kya hua

Lala : shera bhai jaan kuch farma rahe hain.

Japani : (sawaliya nazaro se mujhe dekhte hue ) kya baat hai shera....

Main : shammi ko bol apne best fighter ko leke aaye aaj yahan fir se fight hogi.

Japani : nahi yaar aagey hi bahut paisa haar chuka hun baba meri jaan le lenge agar unko pata chal gaya to....

Main : mujhe par aitbaar hai to fight rakh le tujhe haarne nahi dunga

Japani : tujh par to jaan se jyaadaa aitbaar hai yaar lekin ye to bata fighter koun hai.

Main : Ring me dekh lena... abhi jitna bola hai utna kar.

Uske baad japani kuch der mere samne khamosh khada kuch sochta raha or fir bina kuch bole wapis niche chala gaya or kuch der baad uske sath shami or uske aadmiyo ke sath dubara upar aa gaya.

Shami : (mujhse hath milate hue) kya haal hai shera bhai aapka naam bahut suna tha darshan pehli baar hue hain.

Main : janab aaj ki ek fight or rakh lete hain

Shami : aapka hukum sir aankho par lekin baba ka hukum hai ki yahan hafte me ek hi fight hogi dusri fight ki ijajat nahi hai mujhe baba se puchhna padega.

Main : baba se puchhne ki jarurat nahi hai jab main keh raha hun to garenty bhi meri hai.

Shami : wo to thik hai lekin daav par kya lagaoge aap logo ka aaj ka collection to japani haar chuka hai (muskurate hue)

Main : agar main haar gaya to main samne baitha hun tumhare jo chahe kar sakte ho lekin agar jeet gaya to mere jeetne ke baad tumne jo bhi japani se jeeta hai sab wapis karna padega.

Shammi : (hansate hue) main itna chutiya lagta hun kya jo ek jaan ka sauda carodo me karunga.

Japani : (bich me bolte hue) agar hum ye fight haar gaye to hmara fight club aapka.

Shammi : ye hui naa mardo wali baat mujhe manzoor hai

Lala : ghanta manzoor hai.... tum dono pagal to nahi ho gaye ho itna bada daav khel rahe ho wo bhi baba se ijajat liye baigair.

Japani : jo hoga main dekh lunga mujhe mere yaar par aaj bhi poora aitbaar hai (mere kandhe par hath rakhte hue)

Lala : tum dono pagal ho gaye ho japani yaar ek baar fir soch le bahut lafda ho jayega.

Main : kuch nahi hoga yaar bharosa kar mujh par

Lala : (sir jhatakte hue) tum jo marji karo lekin yaad rakhna kuch panga hua to baba ko jawab tum dono dogey maine bol dena hai ki maine mana kiya tha tum dono ko.

Japani : Thik hai.... jo hoga dekha jayega (muskurate hue)

Shami : thik hai fir special fight hai to special ring bhi hona chahiye kya kehte ho...

Japani : special ring hi hoga shammi bhai (meri taraf muskurakar dekhte hue)

Uske baad shammi wahan se chala gaya or main or japani niche ring me chale gaye jahan hamane ek special fight announce kar di. jiske jawab me wahan ke logo ne shor machake apni khushi ka izhaar kiya. Uske baad japani apne logo ko kuch samjhane chala gaya or main wapis upar cabin me aake baith gaya. aate hi lala fir se mere pass aa gaya or mujhe samjhane me lag gaya.

Lala : yaar ek baar fir soch lo tum bahut jaldbaaazi kar rahe ho kuch samasya na ho jaye.

Main : kuch nahi hoga yaar fikar mat kar.

Lala : lekin tum jis fighter par itna bada daav khel rahe ho wo fighter hain koun milwa to de yaar.

Main : (muskurakar ) leh mil le fir... fighter tere samne baitha hai.

Lala : (had-badakar khada hote hue) shera tera dimaag to thik hai yaar tu abhi itni badi bimari se wapis aaya hai.... nahi...nahi.... yaar tu rehne de tu inn fighters ka muqabla nahi kar payega or waise bhi japani bhi tujhe ladne ki ijajat nahi dega.

Main : tu fikar mat kar kuch nahi hoga yaar main hun naa sab sambhaal lunga or apne yaar ko itna kamzor mat samajh.... apne hi jeetenge.... aaj sala changez khaan bhi kyo na aa jaye sala apne pairo par chalkar nahi jayega.

Lala : dekh yaar tu hmara yaar hai isliye rok rahe hain humara kaam paisa lagana hai yaar khud ring me utarkar ladna nahi hai.

Main : kya maine pehle kabhi fight nahi ki iss ring me?

lala : ki hai yaar bahut fight ki hai or aaj tak tu kabhi hara bhi nahi lekin pehle or ab me bahut farak hai yaar ab to tujhe kuch yaad bhi nahi hai tu kaise ladega uske fighter ke sath.

Main : (kuch sochte hue) abhi fight me bahut waqt hai.... ek kaam kar agar meri purani fight ki koi video padi hai to leke aa main dekhna chahta hun.

Lala : achha abhi lata hun

 
अपडेट-43

उसके बाद मैं अकेला कॅबिन मे बैठा था इसलिए वापिस शीशे के पास आके नीचे देखने लगा जहाँ जापानी के तमाम लोग लगे हुए थे नया रिंग तेयार करने मे. मैं बस यही सोच रहा था कि मैने लड़ने के लिए हाँ तो बोल दिया है लेकिन क्या मैं लड़ भी सकता हूँ या नही. अंदर से मुझे भी डर लग रहा था लेकिन इन लोगो के दिल मे जगह बनाने का मेरे पास इससे अच्छा मोक़ा नही था इसलिए मैने लड़ाई के लिए हाँ बोल दिया था. कुछ ही देर बाद लाला वापिस आया उसके हाथ मे एक बड़ा सा कार्टून था जिसमे बहुत सी सी.डी पड़ी थी.

लाला : ले भाई तेरा काम कर दिया है आज तक तूने जितनी भी फाइट लड़ी है उन सब की वीडियो फुटेज इसमे मोजूद है आराम से बैठ कर देखता रह.

मैं : ठीक है

लाला : ऑर कुछ चाहिए....

मैं : (ना मे सिर हिलाते हुए) शुक्रिया.

उसके बाद मैं वो कार्टून मे से वीडियो सीडी निकाल कर प्लेयर मे लगाने लगा ओर अपनी पुरानी जिंदगी को याद करने की कोशिश करने लगा. लेकिन अफ़सोस मुझे कुछ भी याद नही आ रहा था इसलिए मैं बस अपने दाव-पेच ही गौर से देखने लगा जो शायद मेरी फाइट मे काम आ सकते थे मुझे नही पता था कि ये दाव- पेच मेरे किसी काम भी आ सकते हैं या नही लेकिन फिर भी मैं इस फाइट को जीतने के लिए सब को बड़े गौर से देख रहा था. उसके बाद फाइट शुरू होने का वक़्त आ गया नीचे लोगो की भीढ़ भी बढ़ने लगी थी ऑर सब तेयारियाँ भी मुकम्मल हो चुकी थी रिंग भी तेयार था ऑर शम्मी का फाइटर ऑर शम्मी भी नीचे आ चुके थे. लेकिन मैं अभी तक उन्ही वीडियो फुटेज को ही देख रहा था तभी लाला कॅबिन मे आ गया.

लाला : भाई सब कुछ रेडी है.

मैं : हाँ चलो मैं भी रेडी हूँ.

लाला : यार एक बात फिर सोच ले तुझे ये फाइट लड़ने की कोई ज़रूरत नही है

मैं : ज़रूरत है लाला अपने लिए नही अपने यारो के लिए आज शेरा लड़ेगा ऑर ना सिर्फ़ लड़ेगा बल्कि जीतेगा भी.

लाला : (मुझे गले लगाते हुए) कौन बोलता है तू पहले जैसा नही रहा.

उसके बाद मैने अपनी शर्ट उतार दी ऑर सिर्फ़ जीन्स पेंट पहना हुआ सीढ़ियो से नीचे उतर गया तब तक शमी का फाइटर भी रिंग मे आ चुका था जो इस रिंग का अब फेव. बन चुका था ऑर एक भी फाइट नही हारा था. मेरे नीचे उतरते ही रेफ़री ने मेरा नाम पुकारा जिस पर सब लोग ने हाथ हवा मे उठा कर मेरे नाम का नारा बुलंद कर दिया. लाला मेरे पिछे मेरा नाम पुकारते हुए आ रहा था लेकिन मुझे जापानी कहीं भी नज़र नही आ रहा था मेरी नज़रे चारो तरफ जापानी को ढूँढ रही थी इसलिए मैने लाला को इशारे से जापानी के बारे मे पूछा तो उसने रिंग के अंदर इशारा किया. उसके बाद मैं बिना कोई जवाब दिए रिंग की तरफ बढ़ गया जहाँ शमी ऑर शमी का फाइटर मोजूद थे. मेरे रिंग के पास आते ही जापानी मेरे पास आके खड़ा हो गया ऑर मेरा एक हाथ पकड़ कर हवा मे उपर उठा दिया....

जापानी : भाई आज दिखा दे पुराना शेरा....

मैं : (मुस्कुरा कर जापानी को गले लगाते हुए) कोशिश करूँगा...

उसके बाद मैं रिंग के अंदर चला गया जहाँ शमी का फाइटर मेरे सामने आके खड़ा हो गया वो क़द मे ऑर शरीर मे मुझसे लग-भग दोगुना था लेकिन फिर भी वहाँ पर मोजूद तमाम लोग शेरा...शेरा....शेरा..... नाम पुकार रहे थे जिससे मुझे बहुत होसला मिल रहा था.

फाइटर : शम्मी साहब ये लड़ेगा मेरे साथ.

शमी : हाँ भाई क्या करें कुछ लोगो को शहीद होने का शॉंक होता है.

फाइटर : (हँसते हुए) लोगो ने तुझे शेर बोला ऑर तू आ गया पिंजरे मे मरने के लिए, आज तो इस शेर की भी क़ुर्बानी होगी....

मैं : (हँसते हुए) हाथी कितना भी बड़ा हो जाए शेर का शिकार नही कर सकता मुन्ना ऑर वैसे भी क़ुर्बानी बकरे की दी जाती है शेर की नही शेर अपनी खुराक खुद ढूँढ लेता है.

फाइटर : देखते हैं आज कौन किसको खुराक बनाता है तेरे जैसे कितने ही आए ऑर धुंल चाट कर चले भी गये. लेकिन मैं वही का वही खड़ा हूँ.

मैं : तू खड़ा है क्योंकि तेरा शेरा से सामना नही हुआ था आज तेरा ये खड़े रहने का वेहम भी दूर हो जाएगा क्योंकि फाइट के बाद तू खड़ा होना तो दूर की बात है कीड़े की तरह रेंगने लायक भी नही बचेगा.

उसके बाद शम्मी ऑर जापानी रिंग से बाहर चले गये ऑर रेफरी हम दोनो का नाम एलान करने के बाद वो भी रिंग से बाहर चला गया. अब रिंग का दरवाज़ा बाहर से बंद हो गया था ऑर मैं घंटी बजने का इंतज़ार करने लगा तभी उपर से पानी बरसने लगा जैसे बारीष हो रही हो. मैने सिर उठा कर उपर देखा तो उपर बहुत सारे फुव्वारे लगे हुए थे जिनसे बारीष जैसे पानी निकल रहा था कुछ ही देर मे रिंग की ज़मीन पूरी तरह गीली हो गई. अब मैं ऑर वो फाइटर दोनो रिंग के अलग-अलग कौने मे खड़े थे. तभी घंटी की टॅन से आवाज़ हुई ऑर वो फाइटर मेरी तरफ भागा ऑर जंप लगाके मेरे उपर कूद पड़ा. उससे बचने के लिए मैने अपनी करवट बदल ली जिससे वो जाके लोहे की जाली से टकरा गया. मैने जल्दी से पलटकर एक टाँग हवा मे उठाई ऑर उसकी पीठ मे मार दी. जब मैं दुबारा उसको टाँग मारने लगा तो वो पलट गया ऑर उसने मेरी टाँग पकड़ ली इससे पहले कि वो कुछ कर पाता मैने अपनी बॉडी का सारा वेट उसी पकड़ी हुई टाँग पर डाल दिया ऑर उसके हाथ पर खड़ा होके उपर को उछल गया साथ ही अपना घुटना उसके मुँह पर मारा जिससे उसकी नाक से खून निकलने लगा. अब मैं उससे कुछ दूर खड़ा था ऑर उसके अगले हमले का इंतज़ार कर रहा था. वो अपने हाथ से अपना नाक सॉफ करते हुए फिर से मेरी तरफ गुस्से से बढ़ने लगा. मैने गीली ज़मीन का फ़ायदा उठाया ऑर जल्दी से नीचे ज़मीन पर फिसल गया जिससे मेरी दोनो टांगे उसकी टाँगो के सामने आ गई मैने अपनी एक टाँग उसके घुटने के जोड़ पर ज़ोर से मारी जिससे वो खुद को संभाल नही पाया ऑर मेरे उपर ही गिर गया. मेरे उपर गिरते ही उसने मेरा गला पकड़ लिया ऑर मेरा गला दबाने लगा. मैने काफ़ी कोशिश की लेकिन उसके हाथ की पकड़ काफ़ी मज़बूत थी. उसके गला दबाने से नीचे पड़े पानी से मुझे साँस लेने मे तक़लीफ़ हो रही थी. मैने जल्दी से अपने दोनो हाथ उसके मुँह पर रखे ऑर अपने हाथ की 2 उंगालिया उसकी आँखों पर मार दी जिससे कुछ पल के लिए उससे दिखना बंद हो गया मेरे लिए इतना वक़्त काफ़ी था मैने जल्दी से उसको पलट दिया ऑर खुद उसके उपर आ गया था अब मैने उसकी एक हाथ से गर्दन पकड़ी ऑर दूसरे हाथ से उसके चेहरे पर मुक्के मारने लगा लेकिन शायद मेरे मुक्को से उसके चेहरे पर कुछ खास असर नही हो रहा था इसलिए मैने अपनी कोहनी को उसके सिर मे ज़ोर से मारा जिससे उसके सिर से खून निकलने लगा.

मुझे मेरा ये दाव काम का लगा इसलिए मैने बार-बार अपनी कोहनी उसके सिर मे मारनी शुरू करदी. 5-6 बार सिर मे चोट खाने के बाद उसने अपनी दोनो बाजू उपर कर लिए ऑर अपना सिर बचा लिया अब मैने अपनी जगह बदली ऑर उसका पैर पकड़ लिया ऑर उल्टी डाइरेक्षन मे घुमाने लगा जिससे शायद उसको इंतेहा दर्द हुआ था इसलिए उसने अपना दूसरा पैर ज़ोर से मेरे पेट मे मारा ऑर मैं दूर जाके गिर गया. मैं फिर से खड़ा हो गया ऑर उसके खड़े होने का इंतज़ार करने लगा इस बार उसने कुछ वक़्त लिया खड़ा होने मे ऑर लोहे की जाली को पकड़ कर वो फिर से खड़ा हो गया मैं अब उससे काफ़ी फ़ासले पर था मैं अब सोच रहा था कि इसको कैसे दुबारा गिराऊ तभी मुझे वीडियो फुटेज का एक मूव याद आया जो मैने काफ़ी वीडियो मे इस्तेमाल किया था मैं दूर जाके खड़ा हो गया ऑर किसी जानवर की तरह अपने दोनो हाथो पर ऑर घुटनो पर बैठ गया वो पूरे गुस्से के साथ मेरी तरफ बढ़ने लगा. वो जैसे ही मेरी तरफ भागा मैं भी नीचे झुक कर भागने लगा ऑर हवा मे उच्छल कर किसी मेंढक की तरह उस पर कूद पड़ा मेरा कंधा उसके पेट मे लगा जिससे वो वही ज़मीन पर गिर गया. अब मैं उसको उठने नही देना चाहता था इसलिए जल्दी से उसके पास गया ऑर उसका सिर अपनी दोनो टाँगो मे दबा कर ज़ोर से खींच दिया इससे डेथ लॉक कहा जाता है. वो कुछ देर अपने हाथ-पैर हिलाता रहा लेकिन अब उसकी साँस टूटने लगी थी मैने जब देखा कि वो एक दम बेजान सा होने लगा है तो मैने अपनी पकड़ से उसको आज़ाद कर दिया. इस बार वो खड़ा नही हो सकता था काफ़ी देर इंतज़ार करने के बाद भी जब वो खड़ा नही हुआ तो रिंग का गेट खुल गया ऑर जापानी ऑर लाला रिंग मे आ गये ऑर मुझे अपने कंधो पर उठा लिया. वो दोनो मेरे जीतने से बहुत खुश थे ऑर बाहर लोगो की भीढ़ सिर्फ़ मेरा ही नाम पुकार रही थी. तभी रिंग मे शम्मी आ गया...

शम्मी : (फीकी हँसी के साथ) मुबारक हो शेरा भाई

जापानी : अब बोलो शम्मी भाई क्या कहते हो... अफ़सोस !!! आपका पैसा ऑर आपका फाइटर दोनो काम से गये. अब अपना अगला पिच्छला सब हिसाब बराबर.

शमी : (अपने माथे से पसीना सॉफ करते हुए) ठीक है....

उसके बाद शम्मी अपने ज़मीन पर पड़े फाइटर को एक लात मार कर रिंग से चला गया ऑर मेरे दोस्त मेरे आने की ऑर जीतने की खुशी मे लग गये. फिर जैसे ही मैं रिंग से बाहर आया तो वहाँ पर खड़े लोगो ने मुझे उपर उठा दिया ऑर पूरे फाइट क्लब मे मेरा नाम पुकारा जाने लगा. कुछ देर मैं ऐसे ही उन लोगो के साथ अपनी खुशी मनाता रहा फिर उपर से मुझे लाला ने इशारा किया ऑर उपर आने को कहा तो मैं वहाँ के लोगो का शुक्रिया अदा करके वापिस उपर आ गया.

लाला : आजा मेरे शेर आज तो तूने कमाल कर दिया यार तू नही जानता तूने शम्मी को कितना बड़ा लॉस दिया है.

मैं : मैने ये फाइट लॉस या प्रॉफिट के लिए नही दोस्ती के लिए की थी.

जापानी : (ग्लास मे शराब डालते हुए) जानता हूँ यार लेकिन कुछ भी बोल साले शम्मी की शक़ल देखने वाली थी ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने उसकी इज़्ज़त लूट ली हो...

मैं : चल अब जो होना था हो गया कल से तू यहाँ नये लड़के बुला जिनको मैं फिर से ट्रैनिंग दूँगा.

लाला : लेकिन यार तू कैसे.....

मैं : क्यो मुझे क्या है मैं अगर लड़ सकता हूँ तो लड़ना नही सीखा सकता क्या.

जापानी : वो बात नही है यार लेकिन पहले तू बाबा से इजाज़त ले लेगा तो बेहतर होगा.

मैं : हाँ यार ये बाबा का नाम बहुत सुना है कौन है ये बाबा इनसे कब मिलूँगा मैं.

लाला : शेरा बाबा वो है जिन्होने तेरी मेरी हम सबकी परवरिश की है ये सब कुछ बाबा का ही तो है.

मैं : क्या बाबा जानते हैं मैं वापिस आ गया हूँ.

जापानी : मेरे दोस्त जो भी होता है वो सब कुछ बाबा को पता होता है

मैं : तो मुझे बाबा से भी मिलवओ ना यार

लाला : अभी नही यार कुछ दिन तू हमारे साथ ही रह फिर बाबा से भी मिल लेना क्योंकि अभी बाबा मुल्क़ से बाहर गये हुए हैं.

उसके बाद मैं कुछ दिन वहाँ रहा ऑर सब लोगो के साथ घुलने मिलने की कोशिश करने लगा मैं वहाँ के तमाम लोगो का दिल जीत भी लिया था लेकिन मेरा मकसद यहाँ से इन्फर्मेशन कलेक्ट करना था इसलिए अब मेरा सारा दिन होटेल्स मे ऑर रात फाइट क्लब मे गुज़रने लगी थी. मेरे बहुत कोशिश करने के बाद भी मैं किसी भी तरह की इन्फर्मेशन नही निकाल पा रहा था क्योंकि सब मुझे किसी मेहमान की तरह ट्रीट कर रहे थे वो लोग मुझे अपने जशन मे ऑर पार्टी मे तो शामिल करते थे लेकिन अपने बिज़्नेस की कोई भी बात मेरे सामने नही करते थे. कुछ दिन ऐसे ही गुज़रने के बाद एक दिन मुझे लाला से पता लगा कि छोटे शीक (शीक साहब का बेटा) वापिस आ रहा है ऑर मुझसे मिलना चाहता है. क्योंकि मुझे पिच्छला कुछ भी याद नही था इसलिए मैं उसे भी अपना दोस्त ऑर हमदर्द ही समझ रहा था यही आगे चलकर मेरी सबसे बड़ी ग़लती साबित हुई.

मैं रोज़ की तरह अपने होटेल के रूम मे तेयार हो रहा था कि किसी ने मेरा रूम नॉक किया जब दरवाज़ा खोला तो मुझे पता चला कि छोटा शीक ने मुझे नीचे लाला के कॅबिन मे बुलाया है. मैं फॉरन तेयार होके नीचे चला गया. नीचे जाते ही 2 गार्ड ने मुझे रोक लिया ऑर मेरी तलाशी लेने लगे. ये दोनो लोग मेरे लिए नये थे क्योंकि लाला के सब आदमियो को मैं जानता था. मेरी तलाशी लेने के बाद उन्होने मेरी गन निकाल ली ऑर मेरे लिए कॅबिन का दरवाज़ा खोल दिया ऑर मैं बिना कुछ बोले चुप-चाप अंदर चला गया. अंदर कुर्सी पर एक आदमी बैठा जिसने टेबल पर अपनी दोनो टांगे रखी हुई थी ऑर उसके पास ही लाला अपने दोनो हाथ बाँधे खड़ा था. सबसे अजीब बात तो ये थी कि आज वहाँ रोज़ की तरह लाला का एक भी आदमी मोजूद नही था सब लोग हाथ मे हथियार पकड़े थे ऑर सब नये चेहरे थे.

छोटा शीक : (अपनी सिग्रेट जलाते हुए) ओह्हुनो.... तो मेरे आदमी सही कह रहे थे शेरा सच मे वापिस आ गया है भाई वाहह.

मैं : (अदब से सलाम करते हुए) जी... आपने मुझे याद किया था.

छोटा : अर्रे ये सलाम करना कब से सीख लिया अपन तो पुराने दोस्त हैं यार... चलो यहाँ आओ बैठो.

मैं : (कुर्सी पर बैठ ते हुए) जी शुक्रिया....

छोटा : तो तुमको पुराना कुछ भी याद नही है हमम्म.

मैं : (ना मे सिर हिलाते हुए) जी नही....

छोटा : हम्म.... तो ये बात है.... (अपने आदमियो को इशारा करते हुए)

मैं : (कुछ ना समझने वाले अंदाज़ मे ) मुझे कुछ समझ नही आ रहा आपने बस मुझसे यही पुच्छना था.

छोटा : नही यार मैं तो तुम्हारे लिए एक तोहफा लाया था सोचा तुमको पसंद आएगा.

मैं : जी कौनसा तोहफा

छोटा : चलो आओ तुमको तुम्हारा तोहफा दिखाऊ.... (मेरे पास आते हुए) तुम जानना नही चाहोगे तुमको गोली किसने मारी थी.

मैं : (चोन्क्ते हुए) क्या.... आप जानते हैं.... कौन है वो कमीना उस साले को तो मैं ज़िंदा दफ़न कर दूँगा जिसने मेरी ये हालत की है. (गुस्से से)

छोटा : भाई तुम्हारा दुश्मन हमारा दुश्मन.... मेरे आदमी तो उसको वही ठोक देते जहाँ वो हम को मिला था फिर सोचा तुमको पहली बार मिल रहा हूँ ठीक होने के बाद खाली हाथ जाउन्गा तो तुमको अच्छा नही लगेगा इसलिए तुम्हारे लिए इससे आला तोहफा नही हो सकता था इसलिए तुम्हारे लिए बचा के रखा है.

मैं : कौन है वो हरम्खोर क्या नाम है उसका बताओ मुझे शीक साहब आपका अहसानमंद रहेगा ये शेरा.

छोटा : खुद ही चलकर देख लेना.

उसके बाद छोटा शीक,मैं ऑर लाला साथ मे शीक के आदमी नीचे चले गये ऑर फिर हमारे लिए कार्स आ गई मैं, लाला ऑर छोटा शीक एक गाड़ी मे बैठे थे बाकी सब आदमी पिछे दूसरी गाडियो मे आ रहे थे. मेरे बार-बार पुच्छने पर भी छोटा शीक मुझे उस आदमी का नाम नही बता रहा था. इधर मेरे अंदर एक अजीब सा तूफान जाग गया था मैं बे-क़रार हुआ जा रहा था उस आदमी को अपने हाथो से गोली मारने के लिए जिसने मेरा अतीत मेरी शक्सियत मुझसे छीन ली थी. आज अगर मुझे मेरे बारे मे कुछ भी याद नही था तो उसका ज़िम्मेदार वही आदमी था. अब मुझे इंतज़ार था उस पल का जब मेरा ऑर उस आदमी का सामना होगा जिसने मुझे गोली मारी थी.

कुछ देर बाद हमारी कार एक आलीशान मकान के सामने रुक गई. गाड़ी के रुकते ही लोग गाड़ी से उतर गये मैने अपनी कोट के साइड मे हाथ डाला ताकि मैं गन निकाल सकूँ ऑर जाते ही उस आदमी पर गोली चला सकूँ जिसने मेरी ये हालत की थी. लेकिन कोट मे हाथ डालते ही मुझे याद आया कि मेरी पिस्टल तो छोटे शीक के आदमियो ने ले ली थी.

मैं : (पलट ते हुए) शीक साहब मुझे मेरी गन चाहिए

छोटा : अर्रे भाई इतनी भी क्या बे-सबरी पहले अंदर तो चलो तुमको तुम्हारी गन भी मिल जाएगी. फिर जो दिल चाहे कर लेना उसके साथ.

मैं : ठीक है

उसके बाद हम सब लोग घर के अंदर चले गये. अंदर जाने के बाद हम सब को शीक ने सोफे पर बैठने का इशारा किया ऑर खुद अपने दो गार्ड्स के साथ सीढ़ियो से उपर चला गया. उस वक़्त इंतज़ार का एक-एक पल मेरे लिए कई साल के इंतजार जैसा हो रहा था मैं चाहता था कि जल्दी से जल्दी वो इंसान मेरे सामने आ जाए ऑर उसकी जान ले लूँ ताकि मेरे दिल को कुछ क़रार आ सके. मैं खामोश होके गर्दन नीचे लटकाए बैठा था मेरे साथ लाला ऑर जापानी बैठे थे बाकी के तमाम लोग सोफे के आस-पास खड़े हुए थे. कुछ ही देर मे छोटा शीक एक मुस्कान के साथ सीढ़ियो से नीचे उतरता हुआ नज़र आया. उसके पिछे कुछ लोग एक आदमी को पकड़ कर नीचे ला रहे थे उसके चेहरे को एक काले नक़ाब से ढका हुआ था ऑर देखने से लग रहा था जैसे वो आदमी उसको घसीट कर नीचे ला रहे थे ऐसा लग रहा था जैसे वो बेहोश हो. कुछ ही देर मे वो लोग उसको उठाके नीचे ले आए ऑर एक कुर्सी पर बिठा दिया. तभी छोटा शीक मेरे पास आया ऑर गन निकाल कर मुझे पकड़ा दी.

Update-43

Uske baad main akela cabin me baitha tha isliye wapis sheeshe ke pass aake niche dekhne laga jahan japani ke tamaam log lage hue the naya ring teiyaar karne me. main bas yhi soch raha tha ki maine ladne ke liye haa to bol diya hai lekin kya main lad bhi sakta hun ya nahi. andar se mujhe bhi darr lag raha tha lekin inn logo ke dil me jagah banane ka mere pas isse achha moqa nahi tha isliye maine ladayi ke liye haa bol diya tha. kuch hi der baad lala wapis aaya uske hath me ek bada sa cartoon tha jisme bahut si C.D padi thi.

Lala : leh bhai tera kaam kar diya hai aaj tak tune jitni bhi fight ladi hai unn sab ki video footage isme mojood hai araam se baith kar dekhta reh.

Main : thik hai

Lala : or kuch chahiye....

Main : (naa me sir hilate hue) shukriya.

Uske baad main wo cartoon me se video CD nikal kar player me lagane laga or apni purani jindagi ko yaad karne ki koshish karne laga. Lekin afsos mujhe kuch bhi yaad nahi aa raha tha isliye main bas apne daav-pech hi gaur se dekhne laga jo shayad meri fight me kaam aa sakte the mujhe nahi pata tha ki ye daav- pech mere kisi kaam bhi aa sakte hain yaa nahi lekin fir bhi main iss fight ko jeetne ke liye sab ko bade gaur se dekh raha tha. uske baad fight shuru hone ka waqt aa gaya niche logo ki bheedh bhi badhne lagi thi or sab teiyaariyan bhi mukammal ho chuki thi ring bhi teiyaar tha or shammi ka fighter or shammi bhi niche aa chuke the. Lekin main abhi tak unhi video fottege ko hi dekh raha tha tabhi lala cabin me aa gaya.

Lala : bhai sab kuch ready hai.

Main : haa chalo main bhi ready hun.

Lala : yaar ek baat fir soch le tujhe ye fight ladne ki koi jarurat nahi hai

Main : jarurat hai lala apne liye nahi apne yaaro ke liye aaj shera ladega or naa sirf ladega balki jeetega bhi.

Lala : (mujhe gale lagate hue) koun bolta hai tu pehle jaisa nahi raha.

Uske baad maine apni shrt utaar di or sirf jeans pent pehna hua sidhiyo se niche utar gaya tab tak shami ka fighter bhi ring me aa chuka tha jo iss ring ka ab fav. ban chuka tha or ek bhi fight nahi hara tha. Mere niche utarte hi reffary ne mera naam pukara jis par sab log ne hath hawa me utha kar mere naam ka naara buland kar diya. Lala mere pichhe mera naam pukaarte hue aa raha tha lekin mujhe japani kahi bhi nazar nahi aa raha tha meri nazre chaaro taraf japani ko dhundh rahi thi isliye maine lala ko ishare se japani ke baare me puchaa to usne ring ke andar ishara kiya. uske baad main bina koi jawab diye ring ki taraf badh gaya jahan shami or shami ka fighter mojud the. Mere ring ke pass aate hi japani mere pass aake khada ho gaya or mera ek hath pakad kar hawa me upar utha diya....

Japani : bhai aaj dikha de purana shera....

Main : (muskurakar japani ko gale lagate hue) koshish karunga...

Uske baad main ring ke andar chala gaya jahan shami ka fighter mere samne aake khada ho gaya wo qadd me or shareer me mujhse lag-bhag doguna tha lekin fir bhi wahan par mojud tamaam log shera...shera....shera..... naam pukaar rahe the jisse mujhe bahut hosla mil raha tha.

Fighter : shammi sahab ye ladega mere sath.

Shami : haa bhai kya kare kuch logo ko shaheed hone ka shonk hota hai.

Fighter : (hansate hue) Logo ne tujhe sher bola or tu aa gaya pinjre me marne ke liye, Aaj to iss sher ki bhi qurbani hogi....

Main : (hansate hue) hathi kitna bhi bada ho jaye sher ka shikaar nahi kar sakta munna or waise bhi qurbaani bakre ki di jati hai sher ki nahi sher apni khuraak khud dhundh leta hai.

Fighter : dekhte hain aaj koun kisko khuraak banata hai tere jaise kitne hi aaye or dhunl chaat kar chale bhi gaye. lekin main wahi ka wahi khada hun.

Main : tu khada hai kyonki tera shera se samna nahi hua tha aaj tera ye khade rehne ka weham bhi door ho jayega kyonki fight ke baad tu khada hona to door ki baat hai keede ki tarah rengne layak bhi nahi bachega.

Uske baad shammi or japani ring se bahar chale gaye or reffery hum dono ka naam elaan karne ke baad wo bhi ring se bahar chala gaya. ab ring ka darwaza bahar se band ho gaya tha or main ghanti bajne ka intzaar karne laga tabhi upar se paani barasne laga jaise bareesh ho rahi ho. Maine sir utha kar upar dekha to upar bahut saare fuwware lage hue the jinse bareesh jaise paani nikal raha tha kuch hi der me ring ki zameen poori tarah geeli ho gai. Ab main or wo fighter dono ring ke alag-alag koune me khade the. Tabhi ghanti ki tannnn se awaaz hui or wo fighter meri taraf bhaga or jump lagake mere upar kood pada. Usse bachne ke liye maine apni karwat badal lee jisse wo jake lohe ki jaali se takra gaya. maine jaldi se palatkar ek taang hawa me uthayi or uski peeth me maar di. jab main dubara usko taang maarne laga to wo palat gaya or usne meri taang pakad lee isse pehle ki wo kuch kar pata maine apni body ka sara weight usi pakdi hui taang par daal diya or uske hath par khada hoke upar ko uchhal gaya sath hi apna ghutna uske munh par maara jisse uske naak se khun nikalne laga. ab main usse kuch door khada tha or uske agle hamle ka intzaar kar raha tha. wo apne hath se apna naak saaf karte hue fir se meri taraf gusse se badhne laga. Maine gili zameen ka faida uthaya or jaldi se niche zameen par fisal gaya jisse meri dono taangey uski taango ke samne aa gai maine apni ek taang uske ghutne ke jod par jor se maari jisse wo khud ko sambhaal nahi paya or mere upar hi gir gaya. mere upar girte hi usne mera gala pakad liya or mera gala dabane laga. maine kaafi koshish ki lekin uske haath ki pakad kaafi mazboot thi. Uske gala dabane se niche pade paani se mujhe saans lene me taqleef ho rahi thi. maine jaldi se apne dono hath uske munh par rakhe or apne hath ki 2 ungaaliyana uski aankhon par maar di jisse kuch pal ke liye usse dikhna band ho gaya mere liye itna waqt kaafi tha maine jaldi se usko palat diya or khud uske upar aa gaya tha ab maine uski ek hath se garden pakdi or dusre hath se uske chehre par mukke marne laga lekin shayad mere mukko se uske chehre par kuch khass asar nahi ho raha tha isliye maine apni kohni ko uske sir me jor se maara jisse uske sir se khun nikalne laga.

Mujhe mera ye daav kaam ka laga isliye maine bar-bar apni kohni uske sir me maarni shuru kardi. 5-6 baar sir me chot khane ke baad usne apni dono baaju upar kar lee or apna sir bacha liya ab maine apni jagah badli or uska pair pakad liya or ulti direction me ghumane laga jisse shayad usko intehaa dard hua tha isliye usne apna dusra pair jor se mere pet me mara or main door jake gir gaya. Main fir se khada ho gaya or uske khade hone ka intzaar karne laga isse baar usne kuch waqt liya khada hone me or lohe ki jaali ko pakd kar wo fir se khada ho gaya main ab usse kaafi fasle par tha main ab soch raha tha ki isko kaise dubara girau tabhi mujhe video fottage ka ek move yaad aaya jo maine kaafi video me istemaal kiya tha maine door jaake khada ho gaya or kisi janwar ki tarah apne dono hatho par or ghutno par baith gaya wo poore gusse ke sath meri taraf badhne laga. wo jaise hi meri taraf bhaga main bhi niche jhuk kar bhagne laga or hawa me uchhal kar kisi mendhak ki tarah uss par kood pada mera kandha uske pet me laga jisse wo wahi zameen par gir gaya. ab main usko uthane nahi dena chahta tha isliye jaldi se uske pass gaya or uska sir apni dono taango me daba kar jor se khinch diya isse death lock kaha jata hai. wo kuch der apne hath-pair hilata raha lekin ab uski saans tootne lagi thi maine jab dekha ki wo ek dam bejaan sa hone laga hai to maine apni pakad se usko azaad kar diya. Iss baar wo khada nahi ho sakta tha kaafi der intzaar karne ke baad bhi jab wo khada nahi hua to ring ka gate khul gaya or japani or lala ring me aa gaye or mujhe apne kandho par utha liya. wo dono mere jeetne se bahut khush the or bahar logo ki bheedh sirf mera hi naam pukaar rahi thi. tabhi ring me shammi aa gaya...

Shammi : (phiki hassi ke sath) mubaarak ho shera bhai

Japani : ab bolo shammi bhai kya kehte ho... afsos !!! apka paisa or aapka fighter dono kaam se gaye. ab apna agla pichhla sab hisaab barabar.

Shami : (apne maathe se paseena saaf karte hue) thik hai....

Uske baad shammi apne zameen par pade fighter ko ek laat maar kar ring se chala gaya or mere dost mere aane ki or jeetne ki khushi me lag gaye. Fir jaise hi main ring se bahar aaya to wahan par khade logo ne mujhe upar utha diya or poore fight club me mera naam pukaara jane laga. kuch der main aise hi unn logo ke sath apni khushi manata raha fir upar se mujhe lala ne ishara kiya or upar aane ko kaha to main wahan ke logo ka shukriya ada karke wapis upar aa gaya.

Lala : Aaja mere sher aaj to tune kamaal kar diya yaar tu nahi janta tune shammi ko kitna bada loss diya hai.

Main : maine ye fight loss ya profite ke liye nahi dosti ke liye ki thi.

Japani : (glass me sharab dalte hue) janta hun yaar lekin kuch bhi bol sale shammi ki shaqal dekhne wali thi aisa lag raha tha jaise kisi ne uski ijjat loot lee ho...

Main : chal ab jo hona tha ho gaya kal se tu yahan naye ladke bula jinko main fir se training dunga.

Lala : lekin yaar tu kaise.....

Main : kyo mujhe kya hai main agar lad sakta hun to ladna nahi seekha sakta kya.

Japani : wo baat nahi hai yaar lekin pehle tu baba se ijajat le lega to behtar hoga.

Main : haa yaar ye baba ka naam bahut suna hai koun hai ye baba inse kab milunga main.

Lala : shera baba wo hai jinhone ne teri meri hum sabki parvarish ki hai ye sab kuch baba ka hi to hai.

Main : kya baba jante hain main wapis aa gaya hun.

Japani : mere dost jo bhi hota hai wo sab kuch baba ko pata hota hai

Main : to mujhe baba se bhi milwao naa yaar

Lala : abhi nahi yaar kuch din tu hamaare sath hi reh fir baba se bhi mil lena kyonki abhi baba mulq se bahar gaye hue hain.

Uske baad main kuch din wahan raha or sab logo ke sath ghulne milne ki koshish karne laga main wahan ke tamaam logo ka dil jeet bhi liya tha lekin mera maksad yahan se information collect karna tha isliye ab mera sara din hotels me or raat fight club me guzarne lagi thi. mere bahut koshish karne ke baad bhi main kisi bhi tarah ki information nahi nikaal paa raha tha kyonki sab mujhe kisi mehmaan ki tarah treat kar rahe the wo log mujhe apne jashan me or party me to shamil karte the lekin apne business ki koi bhi baat mere samne nahi karte the. kuch din aise hi guzarne ke baad ek din mujhe lala se pata laga ki chhote sheikh (sheikh sahab ka beta) wapis aa raha hai or mujhse milna chahta hai. Kyonki mujhe pichhla kuch bhi yaad nahi tha isliye main use bhi apna dost or hamdard hi samajh raha tha yhi aagey chalkar meri sabse badi galati sabit hui.

Main roz ki tarah apne hotel ke room me teiyaar ho raha tha ki kisi ne mera room knock kiya jab darwaza khola to mujhe pata chala ki chhota sheikh ne mujhe niche lala ke cabin me bulaya hai. main foran teiyaar hoke niche chala gaya. niche jate hi 2 guard ne mujhe rok liya or meri talashi lene lage. ye dono log mere liye naye the kyonki lala ke sab aadmiyo ko main janta tha. Meri talashi lene ke baad unhone meri gun nikaal lee or mere liye cabin ka darwaza khol diya or main bina kuch bole chup-chap andar chala gaya. andar kursi par ek aadmi baitha jisne table par apni dono taangey rakhi hui thi or uske pass hi lala apne dono hath bandhe khada tha. Sabse ajeeb baat to ye thi ki aaj wahan roz ki tarah lala ka ek bhi aadmi mojud nahi tha sab log hath me hathiyaar pakde the or sab naye chehre the.

Chhota sheikh : (Apni cigratte jalate hue) ohhuno.... to mere aadmi sahi keh rahe the shera sach me wapis aa gaya hai bhai waahhhh.

Main : (adab se salam karte hue) ji... aapne mujhe yaad kiya tha.

Chhota : arre ye salaam karna kab se seekh liya apne to purane dost hain yaar... chalo yahan aao baitho.

Main : (kursi par baith te hue) ji shukriya....

Chhota : to tumko purana kuch bhi yaad nahi hai hhhmmm.

Main : (na me sir hilate hue) ji nahi....

Chhota : Hhhmm.... to ye baat hai.... (apne aadmiyo ko ishara karte hue)

Main : (kuch naa samajhne wale andaaz me ) mujhe kuch samajh nahi aa raha aapne bas mujhse yhi puchhna tha.

Chhota : nahi yaar main to tumhare liye ek tohfa laya tha socha tumko pasand aayega.

Main : ji kounsa tohfa

Chhota : chalo aao tumko tumhara tohfa dikhau.... (mere pass aate hue) tum janna nahi chahoge tumko goli kisne maari thi.

Main : (chonkte hue) kya.... aap jante hain.... koun hai wo kameena uss sale ko to main zinda dafan kar dunga jisne meri ye halat ki hai. (gusse se)

Chhota : bhai tumhara dushman hamara dushman.... mere aadmi to usko wahi thok dete jahan wo ham ko mila tha fir socha tumko pehli baar mil raha hun thik hone ke baad khali hath jaunga to tumko achha nahi lagega isliye tumhare liye isse alaa tohfa nahi ho sakta tha isliye tumhare liye bachake rakha hai.

Main : koun hai wo haramkhor kya naam hai uska bataao mujhe sheikh sahab aapka ahsaanmand rahega ye shera.

Chhota : khud hi chalkar dekh lena.

Uske baad chhota sheikh,main or lala sath me sheikh ke aadmi niche chale gaye or fir hamaare liye cars aa gai main, lala or chhota sheikh ek gaadi me baithe the baaki sab aadmi pichhe dusri gaadiyo me aa rahe the. mere baar-bar puchhne par bhi chhota sheikh mujhe uss aadmi ka naam nahi bata raha tha. idhar mere andar ek ajeeb sa toofaan jaag gaya tha main be-qrar hua jaa raha tha uss aadmi ko apne hatho se goli marne ke liye jisne mera ateet meri shaksiyat mujhse cheen lee thi. Aaj agar mujhe mere bare me kuch bhi yaad nahi tha to uska zimmedar wahi aadmi tha. Ab mujhe intzaar tha uss pal ka jab mera or uss aadmi ka samna hoga jisne mujhe goli maari thi.

Kuch der baad hamaari car ek alishaan makaan ke samne ruk gai. Gaadi ke rukte hi log gaadi se utar gaye maine apni coat ke side me hath daala taaki main gun nikaal saku or jate hi uss admi par goli chala saku jisne meri ye haalat ki thi. lekin coat me hath dalte hi mujhe yaad aya ki meri pistol to chhote sheikh ke aadmiyo ne le lee thi.

Main : (palat te hue) sheikh sahab mujhe meri gun chahiye

Chhota : arre bhai itni bhi kya be-sabri pehle andar to chalo tumko tumhari gun bhi mil jayegi. Fir jo dil chahe kar lena uske sath.

Main : thik hai

Uske baad hum sab log ghar ke andar chale gaye. andar jane ke baad hum sab ko sheikh ne sofe par baithne ka ishara kiya or khud apne do guards ke sath seedhiyo se upar chala gaya. Uss waqt intzaar ka ek-ek pal mere liye kai saal ke intezzar jaisa ho raha tha main chahta tha ki jaldi se jaldi wo insaan mere samne aa jaye or uski jaan le loo taki mere dil ko kuch qarar aa sake. Main khamosh hoke garden niche latkaye baitha tha mere sath lala or japani baithe the baaki ke tamaam log sofe ke aas-pass khade hue the. kuch hi der me chhota sheikh ek muskaan ke sath seedhiyo se niche utarta hua nazar aaya. Uske pichhe kuch log ek aadmi ko pakad kar niche laa rahe the uske chehre ko ek kaale naqaab se dhaka hua tha or dekhne se lag raha tha jaise wo aadmi usko ghaseet kar niche laa rahe the aisa lag raha tha jaise wo behosh ho. kuch hi der me wo log usko uthake niche le aaye or ek kursi par bitha diya. tabhi chhota sheikh mere pass aya or gun nikaal kar mujhe pakada di.

 
अपडेट-44

छोटा : (मुझे गन देते हुए) ले भाई शेरा अपना तोहफा क़बूल कर ऑर थोक दे साले को.

मैं : (गन पकड़ते हुए) शीक साहब क्या मैं इस हरंखोर का चेहरा देख सकता हूँ एक बार अगर आपको ऐतराज़ ना हो तो.

छोटा : ज़रूर यार क्यो नही..... (अपने आदमी को इशारा करते हुए) नक़ाब हटाओ इसका.

मैं : (चोन्क्ते हुए) ये तो राणा है शीक साब.

छोटा : ठीक पहचाना ये राणा ही है साला पोलीस का खबरी है मुझे पता चला है कि इसी ने तुम्हारी इन्फर्मेशन पोलीस तक पहुँचाई थी.

मैं : (गन नीचे करते हुए) लेकिन शीक साहब यही तो मुझे यहाँ तक लेके आया था ये कैसे पोलीस का खबरी हो सकता है अगर ये पोलीस का खबरी होता तो मुझे पोलीस तक लेके जाता यहाँ क्यों लाता.... आपको किसी ने ग़लत इन्फर्मेशन दी है.

लाला : हाँ शीक साहब शेरा सही कह रहा है

छोटा : (अपनी गन निकालते हुए) मैने जो बोला वो करो... तुम लोग अपना भेजा मत चलाओ समझे.

मैं : ख़ान साहब आपको इतना यक़ीन कैसे हैं.

छोटा : (गुस्से से अपनी पिस्टल मेरे सिर पर रखते हुए) तुझे सुना नही मैने क्या बोला तू इसको ठोक नही तो मैं तुझे ठोक दूँगा. 3 गिनने तक का वक़्त देता हूँ तुझे... अगर तेरी गोली नही चली तो मेरी चलेगी.

मैं : शीक साहब मेरी बात सुनिए एक बार....

छोटा : 1........

जापानी : यार तू पागल हो गया है ठोक देना साले को इसके लिए क्यो अपनी जान से खेल रहा है.

मैं गहरी सोच मे डूबा हुआ था ऑर फ़ैसला नही कर पा रहा था कि राणा को बचाऊ या खुद को अगर मैं राणा पर गोली नही चलाता तो शीक मुझे मार देता लेकिन अब मैं कोई अपराधी नही था इसलिए चाह कर भी उस पर गोली नही चला सकता था. अभी मैं अपनी ही सोचो मे गुम था कि शीक की आवाज़ मेरे कानो से टकराई.

छोटा : 2........

मैं : (अपनी गन नीचे करते हुए)

शीक : तुझसे गोली नही चलेगी नीर.... (मेरे हाथ से गन लेते हुए ऑर राणा को अपनी पिस्टल से गोली मारते हुए)

शीक ने मेरे सामने राणा को मार दिया. लेकिन ये बात मेरे लिए किसी झटके से कम नही थी कि शीक को मेरी असलियत पता थी क्योंकि उसने मुझे शेरा नही नीर कहकर पुकारा था. इसका मतलब ख़ान के दफ़्तर मे कोई था जो शीक का आदमी था ऑर उसको मेरे बारे मे सब कुछ बता रहा था.

जापानी : शीक साहब ये नीर नही शेरा है.

शीक : खा गये ना धोखा तुम सब भी.... जिसको तुम शेरा समझ रहे हो वो शेरा नही नीर है इसको हमारा काम तमाम करने के लिए ही पोलीस ने यहाँ भेजा है....

जापानी : (चोन्क्ते हुए) क्याआ.... नही... नही... शीक साहब आपको किसी ने ग़लत इन्फर्मेशन दी है ये शेरा ही है मैं अपने दोस्त को पहचानने मे धोखा नही खा सकता....

शीक : जो गया था वो शेरा था लेकिन अब जो वापिस आया है ये शेरा नही नीर है समझा...

लाला : लेकिन ये कैसे हो सकता है शेरा मर जाएगा लेकिन पोलीस का साथ कभी नही देगा आप से ज़्यादा हम शेरा को जानते हैं.

शीक : ठीक है अगर ये शेरा है तो पुछो इसको बाबा का सेफ कहाँ है ऑर उन्होने सारा सोना कहाँ रखा हुआ है... अब ये बात तो सिर्फ़ शेरा ही जानता है ना... अगर ये शेरा है तो इसको साबित करनी होगी ये बात.

मैं : मेरा यक़ीन करो शीक साहब मैं शेरा ही हूँ लेकिन मुझे पिच्छला कुछ भी याद नही है मैं सच कह रहा हूँ.

शीक : ठीक है फिर याद कर लो आराम से जब तक तुमको याद नही आ जाता तब तक तुम इस घर से बाहर नही जा सकते ( अपने आदमियो को इशारा करते हुए) डाल दो इसको राणा की जगह पर ऑर इसको तब तक मारो जब तक ये सब कुछ बता नही देता.

उसके बाद शीक के आदमियो ने मुझे पकड़ लिया ऑर उपर एक कमरे मे ले गये जहाँ मुझे एक कमरे मे बंद कर दिया गया जिसका दरवाज़ा लोहे का बना था. मैं अंदर से चिल्लाता रहा ऑर दरवाज़ा खोलने की नाकाम कोशिश करता रहा. लेकिन दरवाज़ा बंद होने के बाद किसी ने मेरी बात नही सुनी. अभी मुझे कमरे मे दाखिल हुए कुछ ही देर हुई थी कि दरवाज़े के नीचे से धुआँ आने लगा जिससे मुझे अज़ीब सी घुटन होने लगी ऑर लगातार खाँसी आने लगी. वो अज़ीब किस्म की गॅस थी जिससे कुछ ही देर मे मेरी आँखो के सामने अंधेरा छा गया ऑर मैं बेहोश हो गया. मुझे नही पता मैं कितनी देर वहाँ ज़मीन पर बेहोश पड़ा रहा लेकिन जब मुझे होश आया तो मैं कुर्सी से बँधा पड़ा था. मेरे चारो तरफ बहुत सारे लोग खड़े थे ऑर एक अँग्रेज़ आदमी मेरी बाजू को रूई (कॉटन) से सॉफ कर रहा था.

मैं : कौन हो तुम ऑर मुझे बाँधा क्यो है खोलो मुझे...

अँग्रेज़ : रिलॅक्स !!! अभी सब ठीक हो जाएगा. (दूसरे आदमी से एक इंजेक्षन लेते हुए)

मैं : हरामखोर खोल मुझे... (अपने आप को छुड़ाने की नाकाम कोशिश करते हुए)

अँग्रेज़ : कम डाउन !!! अभी सब ठीक हो जाएगा.

शीक : आखरी बार पूछ रहा हूँ बाबा का सेफ कहाँ है ऑर उसको कैसे खोलते हैं बता नही तो कुछ देर बाद तू सब कुछ खुद ही बता देगा.

मैं : मैने बोला ना मुझे कुछ याद नही एक बार बात समझ मे नही आती.

शीक : डॉक्टर यू कॅन कंटिन्यू ये ऐसे नही बताएगा साला बहुत पुराना पापी है.

उसके बाद वो अँग्रेज़ डॉक्टर ने मुझे वो इंजेक्षन लगा दिया जिससे मुझे एक अजीब सा नशा छाने लगा मेरे चारो तरफ की चीज़े मुझे गोल-गोल घूमती हुई नज़र आने लगी मैं बोलना चाह रहा था लेकिन मुझसे बोला नही जा रहा था ऑर बहुत तेज़ नींद आ रही थी.

अँग्रेज़ : (मेरे गाल थप-थपाते हुए) क्या नाम है तुम्हारा.

मैं : (अँग्रेज़ को गौर से देखते हुए) हमम्म्म...

अँग्रेज़ : क्या नाम है तुम्हारा.

मैं : कभी शेरा कभी नीर मैं दोनो हूँ हाहहहहहहाहा

अँग्रेज़ : तुमको यहाँ किसने भेजा है

मैं : (ज़ोर-ज़ोर से हँसते हुए)

अँग्रेज़ : तुमको यहाँ किसने भेजा है

मैं : तेरी माँ ने.... हाहहहहहहाहा

शीक : (मुझे थप्पड़ मारते हुए) डोज बढ़ाओ डॉक्टर...

अँग्रेज़ : (एक ऑर इंजेक्षन मुझे लगाते हुए) तुमको यहाँ किसने भेजा है

मैं : बाबा ने (यहाँ मे गाव वाले बाबा का ज़िक्र कर रहा हूँ) हाहहहहहाहा

शीक : (चोन्क्ते हुए) तुमको बाबा ने किस लिए यहाँ भेजा है

मैं : तेरी मारने के लिए भोसड़ी के.... हाहहहहहहाहा

उसके बाद मुझे कुछ याद नही क्योंकि मेरी आँखो के आगे अंधेरा छा गया ऑर मैं फिर से बेहोश हो गया. जब आँख खुली तो मैं वापिस उसी कमरे मे था जहाँ मुझे पहले रखा गया था ऑर मेरे सामने जापानी बैठा था ऑर मेरे मुँह पर पानी मार रहा था.

जापानी : उठ जा मेरे बाप साला कब्से सोया पड़ा है.

मैं : (अपनी आँखें सॉफ करते हुए) जापानी तू यहाँ...

जापानी : हाँ मैं... अब बात सुन मेरी ये सब साले पागल हो गये हैं लेकिन मैं जानता हूँ तू मेरा भाई है मेरा शेरा.

मैं : तू यहाँ कैसे आया.

जापानी : वो सब छोड़ ये ले मेरी गन ऑर ये कुछ पैसे रख ले तेरे काम आएँगे ऑर ये ले मेरी गाड़ी की चाबी... अब तू यहाँ से निकल जा तेरा यहाँ रहना ठीक नही वरना छोटा शीक ऑर उसके आदमी तुझे ठोक देंगे.

मैं : लेकिन तू....

जापानी : मेरी फिकर मत कर यार तेरे वैसे ही मुझ पर बहुत अहसान है आज बहुत मुद्दत के बाद मोक़ा मिला है यारी का हक़ अदा करने का अब तू यहाँ से जा ऑर यहाँ से चले जाना यहाँ तू एक दम सेफ रहेगा ऑर तुझे तेरे हर सवाल का जवाब भी मिल जाएगा जो तू अक्सर सबसे पुछ्ता रहता है ऑर इस जगह के बारे मे किसी को कुछ भी मत बताना ( एक पर्ची मेरे हाथ मे देते हुए)

उसके बाद मुझे कमरे के बाहर फाइयर की आवाज़ सुनाई देने लगी. मैं पूरी तरह होश मे तो नही था फिर भी चलने के क़ाबिल था मुझे जापानी ने पकड़कर जल्दी से खड़ा किया ऑर अपनी कोट की जेब से एक ऑर गन निकाल ली ऑर मेरे आगे आके खड़ा हो गया. ऑर कमरे के बाहर मेरा हाथ पकड़कर ले गया बाहर नीचे बहुत से लोग थे जो फाइयर कर रहे थे. वही बाल्कनी मे कुछ जापानी के लोग भी थे जो जवाब मे फाइयर कर रहे थे लेकिन नीचे खड़े लोगो की तादाद बहुत ज़्यादा थी ऑर उपर खड़े लोग गिनती मे बस 5-6 ही थे. तभी एक गोली आके जापानी के पेट मे लगी. जिससे वो वही गिर गया मैने उसको जल्दी से संभाला ऑर जापानी की दी हुई पिस्टल से मैने भी नीचे खड़े लोगो पर फाइयर करना शुरू कर दिया.

जापानी : तू रहने दे शेरा तू जा यहाँ से हम लोग संभाल लेंगे.

मैं : पागल हो गया तुझे गोली लगी तू चल मेरे साथ जो होगा देखा जाएगा.

जापानी : नही यार अपना साथ यही तक था अब तू जा मैं इनको ज़्यादा देर नही रोक पाउन्गा ऑर याद रखना छोटा शीक तुझ पर मेरा उधार है जब हाथ लगे तो साले के भेजे मे गोली मारना मेरी तरफ से. यहाँ किसी पर भी भरोसा मत करना सब साले कुत्ते हैं मेरी बात याद रखना.

मैं : (रोते हुए) यार तू कैसी बात कर रहा है तुझे कुछ नही होगा तू चल मेरे साथ इन सब को मैं अकेला ही देख लूँगा ऑर शीक को तू खुद मारेगा.

जापानी : (हँसते हुए) शेर की आँख मे आँसू अच्छे नही लगते तू जा यहाँ से.

तभी एक गोली मेरी गर्दन को छू कर निकल गई जिससे मेरी गर्दन से खून निकलने लगा ऑर दर्द की एक तेज़ लहर मेरे पूरे बदन मे दौड़ गई. ये देखकर जाने जापानी को क्या हुआ उसने मुझे पिछे धक्का दे दिया जिससे मैं ज़मीन पर गिर गया ऑर खुद खड़ा होके अँधा-धुन्ध नीचे खड़े लोगो पर गोलियाँ बरसाने लगा. नशे के इंजेक्षन की वजह से मैं चाह कर भी कुछ नही कर पा रहा था इससे पहले कि मैं खड़ा होता जापानी सीढ़ियो से नीचे उतरने लग गया ऑर उन लोगो पर अपनी दूसरी पिस्टल से भी गोलियाँ चलाने लगा. जब तक मैं वापिस अपने पैरो पर खड़ा हुआ नीचे सब लोग मर चुके थे. ऑर जापानी सीढ़ियो मे पड़ा तड़प रहा था उसके पूरे बदन से पानी की तरह खून निकल रहा था. मैं दवाई के नशे मे लड़-खडाता हुआ सीढ़ियो से नीचे की तरफ आया ऑर जाके जापानी को देखा तो वो भी मुझे छोड़ कर जा चुका था. मैने आज अपनी जिंदगी का सबसे कीमती दोस्त खो दिया था जिसने जिंदगी के हर मोड़ पर मेरा साथ दिया था. मेरी आँखो मे आँसू ऑर दिल मे छोटे शीक के लिए बे-इंतेहा नफ़रत थी. मैने अपने आँसू सॉफ किए ऑर अपने दोस्त जापानी का स्काफ जो वो हमेशा अपने हाथ पर बांधता था उसे उतार कर अपने हाथ पर बाँध लिया ऑर वहाँ से सीधा घर के बाहर निकल गया ऑर जल्दी से जापानी की कार मे बैठ गया.

मैने कार स्टार्ट की ऑर अपनी जेब मे हाथ डाल कर जापानी की दी हुई पर्ची को देखने लगा. उसमे लिखा पता देखा ऑर अपनी कार को तेज़ रफ़्तार से दौड़ा दिया मैं नही जानता था कि जापानी ने मुझे कहाँ भेजा है. मैं काफ़ी देर से गाड़ी चला रहा था ऑर अब मैं उस इलाक़े से काफ़ी दूर भी निकल आया था अचानक मुझे याद आया कि आज के हुए इस हादसे के बारे मे ख़ान को बता दूं ऑर अब आगे क्या करना है ये भी पूछ सकूँ. लेकिन फिर मुझे राणा की याद आई ऑर इतना तो मैं समझ गया कि ज़रूर ख़ान के ऑफीस मे ही कोई खबरी है जो मेरी पल-पल की खबर छोटे शीक तक पहुँचा रहा है इसलिए मैने ख़ान को भी उस ठिकाने के बारे मे बताना ठीक नही समझा क्योंकि ये मुमकिन था कि कोई ख़ान का फोन भी टॅप कर रहा हो. यही सब सोचता हुआ मैं लगातार गाड़ी को दौड़ाता रहा कुछ घंटे की ड्राइव के बाद मुझे हाइवे पर एक पेट्रोल पंप नज़र आया वहाँ मैने रुक कर अपनी गाड़ी मे फ़्यूल भरवाया.

मैं : सुनिए यहाँ कोई टेलिफोन है मुझे एक फोन करना है.

लड़का : जी साहब अंदर है कर लीजिए फोन.

मैं : (गाड़ी से बाहर निकलते हुए) शुक्रिया.

लड़का : साहब आपको तो बहुत चोट लगी है ऑर आपकी गर्दन से खून भी निकल रहा है.

मैं : कोई बात नही ये ठीक हो जाएगा मेरा छोटा सा एक्सीडेंट हुआ था.

लड़का : बुरा ना मानो साहब तो मेरा घर पास ही है अगर आप चाहे तो मैं आपकी पट्टी करवा सकता हूँ.

मैं : नही कोई बात नही शुक्रिया.

उसके बाद वहाँ पड़े एक पानी के घड़े से पहले मैने अपना मुँह धोया ऑर अपनी गर्दन पर लगा खून सॉफ किया. क्योंकि इस बात को आब काफ़ी वक़्त हो गया था इसलिए जखम से खून निकलना बंद हो गया था ऑर मेरी गर्दन पर लगा खून भी सूख गया था. उसके बाद मैं पेट्रोल पंप के अंदर चला गया ऑर ख़ान का नंबर डायल किया.

ख़ान : हल्लो....

मैं : हल्लो ख़ान साहब मैं नीर बोल रहा हूँ.

ख़ान : नीर तुम... ये किसका नंबर है

मैं : ख़ान साहब ये एक पेट्रोल पंप का नंबर है ऑर यहाँ बहुत गड़बड़ हो गई है

ख़ान : क्या हुआ....

उसके बाद मैने सारी बात तफ़सील से ख़ान को बता दी...

ख़ान : हमम्म यार ये तो बहुत गड़बड़ हो गई है ऑर तुम्हारी बात एक दम सही है मुझे भी लगता है कोई ना कोई मेरे दफ़्तर मे ही है जो छोटा शीक से मिला हुआ है. उस कमीने खबरी की वजह से ही मेरे सबसे खास इनफॉर्मर राणा की जान गई है. खैर कोई बात नही वो सब मैं संभाल लूँगा. अब तुम ये बताओ कि अब तुम कहाँ हो.

मैं : पता नही ख़ान साहब अभी तो मैं उसी शहर मे हूँ ( मैने झूठ बोला क्योंकि जापानी ने मुझे उस जगह के बारे मे किसी को भी बताने से मना किया था)

ख़ान : तुम कुछ दिन के लिए अंडर-ग्राउंड हो जाओ कुछ दिन बाद मुझसे कॉंटॅक्ट करना ऑर मेरे मोबाइल पर फोन करके बताना कि तुम कहाँ हो फिर मैं तुमको तुम्हारा अगला कदम बताउन्गा तब तक छोटे शीक को भूल जाओ.

मैं : जी ठीक है...

उसके बाद मैने फोन बंद किया ऑर बाहर आ गया जहाँ वो लड़का खड़ा मेरा ही इंतज़ार कर रहा था. मैने उसको फ़्यूल के पैसे दिए ऑर वापिस अपनी कार मे आके बैठ गया. ऑर वापिस अपनी कार को तेज़ रफ़्तार से दौड़ा दिया. मुझे मेरी मज़िल पर पहुँचते-पहुँचते रात हो गई थी. जापानी ने जहाँ का मुझे पता दिया था मैं नही जानता था कि उसने मुझे कहाँ भेजा है इसलिए मेरे दिमाग़ मे अब भी कई सवाल घूम रहे थे. कुछ ही देर मे मैं अपनी मंज़िल पर पहुँच गया जो एक बस्ती सी लग रही थी. वहाँ काफ़ी घरो मे रोशनी नज़र आ रही थी लेकिन मुझे जितना पता दिया गया था वो सिर्फ़ उस बस्ती तक का ही था आगे मुझे पता नही था कि कौन्से घर मे जाना है क्योंकि वहाँ मुझे बहुत से घर नज़र आ रहे थे. मैं कार से उतरा ऑर एक घर का दरवाज़ा खट-खाटाया. कुछ ही देर मे दरवाज़ा खुल गया. उस घर मे से एक आदमी बाहर आया.

मैं : जी इतनी रात को आपको तक़लीफ़ देने के लिए माफी चाहता हूँ दर-असल मुझे रसूल से मिलना था.

अभी मैने अपनी बात भी मुक़ाम्मल नही की थी कि मेरे सामने खड़ा आदमी मुझे देख कर खुश हो गया ऑर मेरे गले से लग गया.

आदमी : शेरा भाई तुम ज़िंदा हो.

मेरे कुछ समझ नही आ रहा था कि ये आदमी मुझे कैसे जनता है.

मैं : क्या आप मुझे जानते हैं.

आदमी : कैसी बातें कर रहे हो भाई तुमको यहाँ कौन नही जानता तुम तो हमारे अपने हो. बाहर क्यो खड़े हो अंदर आओ.

मैं : जी शुक्रिया.

मेरी कुछ भी समझ नही आ रहा था कि ये मेरे साथ क्या हो रहा है ये आदमी मुझे कैसे जानता है. तभी एक औरत मेरी तरफ आई ऑर अदब से मुझे सलाम किया ऑर मेरे सामने पानी का एक ग्लास रख दिया ऑर वापिस अंदर चली गई. उस ख़ातून ने नक़ाब किया हुआ था इसलिए मैं उसका चेहरा नही देख पाया. तभी वो आदमी मेरे पास आया.

आदमी : तुम यही बैठो मैं सारी बस्ती को बताके आता हूँ कि हमारा शेरा वापिस आ गया है ऑर हमारी दुआ रंग ले आई है.

मैं : अच्छा लेकिन तुम्हारा नाम क्या है

आदमी : कमाल है 4 दिन हम से दूर क्या हुए अब तुम मेरा नाम भी भूल गये हो. मैं रसूल हूँ तुम्हारे बचपन का साथी. तुम बैठो मैं अभी आया.

Update-44

Chhota : (mujhe gun dete hue) Leh bhai shera apna tohfa qabool kar or thok de sale ko.

Main : (Gun pakadte hue) sheikh sahab kya main iss haramkhor ka chehra dekh sakta hun ek baar agar aapko aitraaz na ho to.

Chhota : jarur yaar kyo nahi..... (apne aadmi ko ishara karte hue) Naqab hatao iska.

Main : (chonkte hue) ye to rana hai sheikh saab.

Chhota : thik pehchana ye raana hi hai sala police ka khabri hai mujhe pata chala hai ki isi ne tumhari information police tak pohonchayi thi.

Main : (Gun niche karte hue) lekin sheikh sahab yhi to mujhe yahan tak leke aaya tha ye kaise police ka khabari ho sakta hai agar ye police ka khabri hota to mujhe police tak leke jata yahan kyo laata.... aapko kisi ne galat information di hai.

Lala : haa sheikh sahab shera sahi keh raha hai

Chhota : (apni gun nikalte hue) maine jo bola wo karo... tum log apna bheja mat chalao samjhe.

Main : Khan sahab aapko itna yaqeen kaise hain.

Chhota : (gusse se apni pistol mere sir par rakhte hue) tujhe suna nahi maine kya bola tu isko thok nahi to main tujhe thok dunga. 3 ginne tak ka waqt deta hun tujhe... agar teri goli nahi chali to meri chalegi.

Main : sheikh sahab meri baat suniye ek baar....

Chhota : 1........

Japani : yaar tu pagal ho gaya hai thok dena sale ko iske liye kyo apni jaan se khel raha hai.

Main gehri soch me dooba hua tha or faisla nahi kar paa raha tha ki raana ko bachau ya khud ko agar main rana par goli nahi chalata to sheikh mujhe maar deta lekin ab main koi apradhi nahi tha isliye chah kar bhi uss par goli nahi chala sakta tha. abhi main apni hi socho me gumm tha ki sheikh ki awaaz mere kaano se takrayi.

Chhota : 2........

Main : (apni gun niche karte hue)

Sheikh : tujhse goli nahi chalegi Neer.... (mere hath se gun lete hue or rana ko apni pistol se goli maarte hue)

Sheikh ne mere samne Rana ko maar diya. Lekin ye baat mere liye kisi jhatke se kam nahi thi ki Sheikh ko meri asliyat pata thi kyonki usne mujhe shera nahi Neer kehkar pukara tha. iska matlab khan ke daftar me koi tha jo sheikh ka aadmi tha or usko mere bare me sab kuch bata raha tha.

Japani : sheikh sahab ye Neer nahi shera hai.

Sheikh : Khaa gaye na dhokha tum sab bhi.... jisko tum shera samajh rahe ho wo shera nahi Neer hai isko hmara kam tamaam karne ke liye hi police ne yahan bheja hai....

Japani : (chonkte hue) kyaaaa.... nahi... nahi... sheikh sahab aapko kisi ne galat information di hai ye shera hi hai main apne dost ko pehchanne me dhokha nahi khaa sakta....

Sheikh : Jo gaya tha wo shera tha lekin ab jo wapis aya hai ye shera nahi Neer hai samjhaa...

Lala : lekin ye kaise ho sakta hai shera mar jayega lekin police ka sath kabhi nahi dega aap se jyaadaa hum shera ko jante hain.

Sheikh : thik hai agar ye shera hai to puchho isko Baba ka safe kaha hai or unhone sara sona kaha rakha hua hai... ab ye baat to sirf shera hi janta hai naa... agar ye shera hai to isko sabit karni hogi ye baat.

Main : mera yaqeen karo sheikh sahab main shera hi hun lekin mujhe pichhla kuch bhi yaad nahi hai main sach keh raha hun.

Sheikh : thik hai fir yaad kar lo araam se jab tak tumko yaad nahi aa jata tab tak tum iss ghar se bahar nahi jaa sakte ( apne aadmiyo ko ishara karte hue) daal do isko rana ki jagah par or isko tab tak maaro jab tak ye sab kuch bata nahi deta.

Uske baad sheikh ke aadmiyo ne mujhe pakad liya or upar ek kamre me le gaye jahan mujhe ek kamre me band kar diya gaya jiska darwaza lohe ka bana tha. Main andar se chillata raha or darwaza kholne ki nakaam koshish karta raha. lekin darwaza band hone ke baad kisi ne meri baat nahi suni. Abhi mujhe kamre me dakhil hue kuch hi der hui thi ki darwaze ke niche se dhuan aane laga jisse mujhe azeeb si ghutan hone lagi or lagataar khansi aane lagi. wo azeeb kism ki gas thi jisse kuch hi der me meri aankho ke samne andhera chha gaya or main behosh ho gaya. Mujhe nahi pata main kitni der wahan zameen par behosh pada raha lekin jab mujhe hosh aya to main kursi se bandha pada tha. Mere charo taraf bahut sare log khade the or ek angrez aadmi meri baaju ko rooyi (cotton) se saaf kar raha tha.

Main : Kaun ho tum or mujhe bandha kyo hai kholo mujhe...

Angrez : relax !!! abhi sab thik ho jayega. (dusre aadmi se ek injection lete hue)

Main : Haramkhor khol mujhe... (apne aap ko chhudane ki nakaam koshish karte hue)

Angrez : calm down !!! abhi sab thik ho jayega.

Sheikh : Akhri baar puch raha hun baba ka safe kaha hai or usko kaise kholte hain bata nahi to kuch der baad tu sab kuch khud hi bata dega.

Main : maine bola naa mujhe kuch yaad nahi ek baar baat samajh me nahi aati.

Sheikh : Doctor you can continue ye aise nahi batayega sala bahut purana paapi hai.

Uske baad wo angrez doctor ne mujhe wo injection laga diya jisse mujhe ek ajeeb sa nasha chhane laga mere charo taraf ki chije mujhe gol-gol ghumti hui nazar aane lagi main bolna chha raha tha lekin mujhse bola nahi jaa raha tha or bahut tez neend aa rahi thi.

Angrez : (mere gaal thap-thapate hue) kya naam hai tumhara.

Main : (Angrez ko gaur se dekhte hue) Hhhmmmm...

Angrez : kya naam hai tumhara.

Main : kabhi shera kabhi Neer main dono hun hahahahahahahaha

Angrez : tumko yahan kisne bheja hai

Main : (zor-zor se hansate hue)

Angrez : tumko yahan kisne bheja hai

Main : teri maa ne.... hahahahahahahaha

Sheikh : (mujhe thappad marte hue) dose badhao doctor...

Angrez : (ek or injection mujhe lagate hue) tumko yahan kisne bheja hai

Main : baba ne (Yahan me gaav wale baba ka zikr kar raha hun) Hahahahahahaha

Sheikh : (chonkte hue) Tumko baba ne kis liye yahan bheja hai

Main : teri maarne ke liye bhosdi ke.... hahahahahahahaha

Uske baad mujhe kuch yaad nahi kyonki meri aankho ke aagey andhera chha gaya or main fir se behosh ho gaya. Jab aankh khuli to main wapis usi kamre me tha jahan mujhe pehle rakha gaya tha or mere samne japani baitha tha or mere munh par paani maar raha tha.

Japani : Uth ja mere baap sala kabse soya pada hai.

Main : (Apni aankhen saaf karte hue) Japani tu yahan...

Japani : haa main... Ab baat sun meri ye sab sale pagal ho gaye hain lekin main janta hun tu mera bhai hai mera shera.

Main : tu yahan kaise aya.

Japani : wo sab chod ye le meri gun or ye kuch paise rakh le tere kaam aayenge or ye le meri gaadi ki chaabi... ab tu yahan se nikal jaa tera yahan rehna thik nahi warna chhota sheikh or uske aadmi tujhe thok denge.

Main : lekin tu....

Japani : meri fikar mat kar yaar tere waise hi mujh par bahut ahsaan hai aaj bahut muddat ke baad moqa mila hai yaari ka haq ada karne ka ab tu yahan se jaa or yahan chale jana yahan tu ek dam safe rahega or tujhe tere har sawaal ka jawab bhi mil jayega jo tu aksar sabse puchhta rehta hai or iss jagah ke bare me kisi ko kuch bhi mat batana ( ek parchi mere hath me dete hue)

Uske baad mujhe kamre ke bahar fire ki awaaz sunayi dene lagi. Main poori tarah hosh me to nahi tha fir bhi chalne ke qabil tha mujhe japani ne pakadkar jaldi se khada kiya or apni coat ki jeb se ek or gun nikaal lee or mere aagey aake khada ho gaya. or kamre ke bahar mera hath pakadkar le gaya bahar niche bahut se log the jo fire kar rahe the. wahi balcony me kuch japani ke log bhi the jo jawab me fire kar rahe the lekin niche khade logo ki tadaad bahut jyaadaa thi or upar khade log ginti me bas 5-6 hi the. Tabhi ek goli aake japani ke pet me lagi. jisse wo wahi gir gaya maine usko jaldi se sambhala or japani ki di hui pistol se maine bhi niche khade logo par fire karna shuru kar diya.

Japani : tu rehne de shera tu jaa yahan se hum log sambhaal lenge.

Main : pagal ho gaya tujhe goli lagi tu chal mere sath jo hoga dekha jayega.

Japani : nahi yaar apna sath yhi tak tha ab tu jaa main inko jyaadaa der nahi rok paunga or yaad rakhna chhota sheikh tujh par mera udhaar hai jab hath lage to sale ke bheje me goli marna meri taraf se. Yahan kisi par bhi bharosa mat karna sab sale kutte hain meri baat yaad rakhna.

Main : (Rote hue) yaar tu kaise baat kar raha hai tujhe kuch nahi hoga tu chal mere sath inn sab ko main akela hi dekh lunga or sheikh ko tu khud marega.

Japani : (hansate hue) sher ki aankh me aansu achhe nhi lagte tu jaa yahan se.

Tabhi ek goli meri garden ko chho kar nikal gai jisse meri garden se khun nikalne laga or dard ki ek tez lehar mere poore badan me daud gai. Ye dekhkar jane japani ko kya hua usne mujhe pichhe dhakka de diya jisse main zameen par gir gaya or khud khada hoke andha-dhundh niche khade logo par goliyaan barsane laga. Nashe ke injection ki wajah se main chah kar bhi kuch nahi kar paa raha tha isse pehle ki main khada hota japani seedhiyo se niche utarne lag gaya or unn logo par apni dusri pistol se bhi goliyaan chalane laga. Jab tak main wapis apne pairo par khada hua niche sab log mar chuke the. or japani seedhiyo me pada tadap raha tha uske poore badan se paani ki tarah khun nikal raha tha. Main dawayi ke nashe me lad-khadata hua seedhiyo se niche ki taraf aaya or jake Japani ko dekha to wo bhi mujhe chod kar jaa chuka tha. Maine aaj apni jingadi ka sabse keemti dost kho diya tha jisne jindagi ke har mod par mera sath diya tha. Meri aankho me aansu or dil me chhote sheikh ke liye be-intehaa nafrat thi. Maine apne aansu saaf kiye or apne dost japani ka skaff jo wo hamesha apne hath par bandhta tha usse utaar kar apne hath par baandh liya or wahan se seedha ghar ke bahar nikal gaya or jaldi se japani ki car me baith gaya.

Maine car start ki or apni jeb me hath daal kar japani ki di hui parchi ko dekhne laga. Usme likha pata dekha or apni car ko tez raftaar se dauda diya main nahi janta tha ki japani ne mujhe kaha bheja hai. Main kaafi der se gaadi chala raha tha or ab main uss ilaake se kaafi door bhi nikal aya tha achanak mujhe yaad aya ki aaj ke hue iss hadse ke bare me khan ko bata doo or ab aagey kya karna hai ye bhi puch saku. Lekin fir mujhe rana ki yaad aayi or itna to main samajh gaya ki jarur khan ke office me hi koi khabri hai jo meri pal-pal ki khabar chhote sheikh tak pohoncha raha hai isliye maine khan ko bhi uss thikane ke bare me batana thik nahi samjha kyonki ye mumkin tha ki koi khan ka phone bhi tabb kar raha ho. Yhi sab sochta hua main lagataar gaadi ko daudata raha kuch ghante ki drive ke baad mujhe Highway par ek parol pump nazar aaya wahan maine ruk kar apni gaadi me feul bharwaya.

Main : suniye yahan koi telephone hai mujhe ek phone karna hai.

Ladka : ji sahab andar hai kar lijiye phone.

Main : (gaadi se bahar nikalte hue) shukriya.

Ladka : sahab aapko to bahut chot lagi hai or aapki garden se khun bhi nikal raha hai.

Main : koi baat nahi ye thik ho jayega mera chhota sa acident hua tha.

Ladka : bura na mano sahab to mera ghar pass hi hai agar aap chahe to main aapki patti karwa sakta hun.

Main : nahi koi baat nahi shukriya.

Uske baad wahan pade ek paani ke ghade se pehle maine apna munh dhoya or apni garden par laga khun saaf kiya. kyonki iss baat ko aab kaafi waqt ho gaya tha isliye jakham se khun nikalna band ho gaya tha or meri garden par laga khun bhi sookh gaya tha. Uske baad main patrol pump ke andar chala gaya or Khan ka number dail kiya.

Khan : hallo....

Main : hallo khan sahab main Neer bol raha hun.

Khan : Neer tum... ye kiska number hai

Main : khan sahab ye ek patrol pump ka number hai or yahan bahut gadbad ho gai hai

Khan : kya hua....

Uske baad maine saari baat tafseel se khan ko bata di...

Khan : Hhhmmm yaar ye to bahut gadbad ho gai hai or tumhari baat ek dam sahi hai mujhe bhi lagta hai koi na koi mere daftar me hi hai jo chhota sheikh se mila hua hai. uss kameene khabri ki wajah se hi mere sabse khas informer raana ki jaan gai hai. Khair koi baat nahi wo sab main sambhaal lunga. ab tum ye bataao ki ab tum kaha ho.

Main : pata nahi khan sahab abhi to main usi shehar me hun ( maine jhooth bola kyonki japani ne mujhe uss jagah ke bare me kisi ko bhi batane se mana kiya tha)

Khan : Tum kuch din ke liye under-ground ho jao kuch din baad mujhse contact karna or mere mobile par phone karke batana ki tum kaha ho phir main tumko tumhara agla kadam bataunga tab tak chhote sheikh ko bhul jao.

Main : ji thik hai...

Uske baad maine phone band kiya or bahir aa gaya jahan wo ladka khada mera hi intzaar kar raha tha. maine usko feul ke paise diye or wapis apni car me aake baith gaya. or wapis apni car ko tez raftaar se dauda diya. mujhe meri mazil par pohonchte-pohonchte raat ho gai thi. Japani ne jahan ka mujhe pata diya tha main nahi janta tha ki usne mujhe kaha bheja hai isliye mere dimaag me ab bhi kai sawaal ghum rahe the. Kuch hi der me main apni manzil par pohonch gaya jo ek basti si lag rahi thi. Wahan kaafi gharo me roshni nazar aa rahi thi lekin mujhe jitna pata diya gaya tha wo sirf uss basti tak ka hi tha aggey mujhe pata nahi tha ki kounse ghar me jana hai kyonki wahan mujhe bahut se ghar nazar aa rahe the. Main car se utra or ek ghar ka darwaza khat-khataya. kuch hi der me darwaza khul gaya. Uss ghar me se ek aadmi bahar aaya.

Main : ji itni raat ko aapko taqleef dene ke liye maafi chahta hun dar-asal mujhe rasool se milna tha.

Abhi maine apni baat bhi muqammal nahi ki thi ki mere samne khada aadmi mujhe dekh kar khush ho gaya or mere gale se lag gaya.

Admi : shera bhai tum zinda ho.

Mere kuch samajh nahi aa raha tha ki ye aadmi mujhe kaise janta hai.

Main : kya aap mujhe jante hain.

Aadmi : kaisi baaten kar rahe ho bhai tumko yahan koun nahi janta tum to hamaare apne ho. bahar kyo khade ho andar aao.

Main : ji shukriya.

Meri kuch bhi samajh nahi aa raha tha ki ye mere sath kya ho raha hai ye aadmi mujhe kaise janta hai. Tabhi ek aurat meri taraf aayi or adab se mujhe salam kiya or mere samne paani ka ek glass rakh diya or wapis andar chali gai. Uss khatoon ne naqab kiya hua tha isliye main uska chehra nahi dekh paya. Tabhi wo aadmi mere pass aaya.

Aadmi : tum yhi baitho main saari basti ko batake aata hun ki hmara shera wapis aa gaya hai or hamaari dua rang le aayi hai.

Main : Achha lekin tumhara naam kya hai

Aadmi : kamaal hai 4 din humse door kya hue ab tum mera naam bhi bhul gaye ho. main rasool hun tumhare bachpan ka sathi. Tum baitho main abhi aya.

 
अपडेट-45

मैं चुप-चाप वहाँ बैठा रहा साथ ही पानी पीने लगा ऑर चारो तरफ नज़र दौड़ा कर उस घर को देखने लगा घर कुछ खास नही बना हुआ था एक दम मेरे गाव के घर जैसा था. तभी एक छोटा सा बच्चा मेरे पास आया.

बच्चा : आप शेरा चाचा हो ना.

मैं : (उस बच्चे को उठा कर अपनी गोद मे बिठाते हुए) हंजी बेटा मैं शेरा हूँ लेकिन आप मुझे कैसे जानते हो.

बच्चा : (उंगली से एक कमरे मे इशारा करते हुए) अम्मी ने बताया मुझे कि आप मेरे शेरा चाचा हो.

मैं : अच्छा.... ये तो बहुत अच्छी बात है ऑर आपका नाम क्या है.

बच्चा : मेरा नाम अली है आपका नाम क्या है शेरा चाचा.

मैं : (हँसते हुए) अच्छा जी.... तुम तो बहुत प्यारी बाते करते हो.

अभी मैं उस बच्चे से बात ही कर रहा था कि बाहर मुझे लोगो का शोर सुनाई दिया इसलिए मैने उस बच्चे को अपनी गोद मे उठाया ऑर बाहर जाके देखने लगा. बाहर बहुत से लोग जमा हो गये थे जो मुझे बड़ी हैरानी से देख रहे थे. तभी उस भीड़ मे से एक बूढ़ी सी औरत मेरे सामने आके खड़ी हो गई ऑर मुझे बड़े गौर से देखने लगी. फिर बड़े प्यार से मुझे गले से लगा लिया ऑर मेरा माथा चूम लिया साथ ही मुझे दुआ देने लगी.

अम्मा : (रोते हुए) कहाँ चला गया था बेटा अपनी अम्मा को छोड़ कर ऑर इतना वक़्त तू था कहाँ जानता है हमने तुझे कितना याद किया ऑर तेरी सलामती के लिए कितनी दुआएँ की थी.

मैं : मेरा आक्सिडेंट हो गया था जिससे मेरी याददाश्त चली गई थी. आप लोग कौन है ऑर मुझे कैसे जानते हैं.

अम्मा : मुझे पहचाना नही शेरा मैं अम्मा हूँ.

मैं : (ना मे सिर हिलाते हुए) मुझे यहाँ जापानी ने भेजा है.

अम्मा : जापानी.... है कहाँ वो ना-मुराद तू वापिस आ गया है ऑर उसने हमे बताना भी ज़रूरी नही समझा.

उसके बाद मैने अपनी सारी कहानी अम्मा को ऑर वहाँ खड़े तमाम लोगो को सुना दी ऑर साथ ही ये भी बता दिया कि जापानी के साथ क्या हुआ ये सुनकर सब लोग बेहद दुखी हो गये.

अम्मा : क्या तक़दीर मिली है हमे एक बेटा वापिस मिला तो दूसरा बेटा दूर चल गया.

मैं : अम्मा मैने उससे बहुत कहा था साथ चलने के लिए लेकिन वो माना ही नही ऑर खुद उन लोगो से मेरे लिया लड़ता रहा. मेरे लिए अपनी जान क़ुरबान कर दी.

अम्मा : ऐसा ही था वो तुझ पर तो जान देता था ऑर तुम दोनो की दोस्ती को कौन नही जानता.

मैं : (रोते हुए) अम्मा मुझे बहुत अफ़सोस है कि मैं जापानी के लिए कुछ कर नही पाया.

उसके बाद काफ़ी देर वहाँ सब लोग खड़े रहे ऑर सब लोग मुझसे तरह-तरह के सवाल पुछ्ते रहे रात काफ़ी हो गई थी इसलिए अम्मा ने सबको जाने का कह दिया ऑर मुझे वापिस रसूल के साथ एक घर मे भेज दिया जो मुझे बताया गया कि ये मेरा ही घर है. उसके बाद मैं उस घर के अंदर चला गया ऑर पूरे घर को बड़े गौर से देखने लगा. घर काफ़ी शानदार था ऑर वहाँ रखी हर चीज़ काफ़ी कीमती लग रही थी. उस घर की एक-एक चीज़ मुझसे जुड़ी थी लेकिन जाने क्यो मुझे कुछ भी याद नही था. मैं उस घर की एक-एक चीज़ को बड़े गौर से देख रहा था ऑर पहचाने की कोशिश कर रहा था. कुछ देर यहाँ-वहाँ घूमने के बाद मैं अपने बिस्तर पर आके लेट गया ऑर दिन भर हुए तमाम हादसो के बारे मे सोचने लगा. कुछ ही देर मे मुझे नींद आ गई ऑर मैं सुकून की नींद सो गया.

सुबह अपनी आदत के मुताबिक़ मैं जल्दी उठ गया ऑर नहा-धो कर तेयार हो गया उसके बाद रसूल का बेटा अली मुझे उसके घर बुलाने के लिए आ गया वहाँ मैने रसूल ने ऑर अली ने साथ मिल कर नाश्ता किया. फिर रसूल मुझे वही बैठने का कह कर खुद कहीं चला गया. मैं भी अब एक दम फारिग था इसलिए अली के साथ खेलने मे लग गया. कुछ देर बाद रसूल वापिस आ गया.

रसूल : चलो शेरा चलें.

मैं : कहाँ चलना है.

रसूल : तुम चलो तो सही बहुत से लोग हैं जो तुम्हारा इंतज़ार कर रहे हैं.

मैं : अच्छा चलो....

रसूल : सुनो पहले ये कपड़े बदल लो ऑर ये जूते ऑर लॉकेट भी उतार दो.

मैं : लेकिन क्यो

रसूल : सबर करो तुमको तुम्हारे सब सवालो का जवाब मिल जाएगा.

उसके बाद मैं कपड़े बदलकर ऑर रसूल के दिए कपड़े पहनकर रसूल के साथ घर से बाहर निकल गया जहाँ बाहर एक कार हमारा इंतज़ार कर रही थी हम दोनो चुप-चाप उस कार मे जाके बैठ गये. कुछ देर बाद कार ने हम को एक खंडहर के बाहर उतार दिया.

मैं : रसूल ये कौनसी जगह है.

रसूल : (खुश होते हुए) तुम चलो तो सही

मैं सवालिया नज़रों से रसूल को देखता हुआ उसके पीछे-पीछे चलने लगा. खंडहर के अंदर घुसते ही बाहर मुझे बाहर कुछ लोग खड़े नज़र आए जिनके हाथ मे बंदूकें थी. उनको देखते ही मैं अलर्ट हो गया ऑर अपना हाथ पीछे अपनी गन के उपर रख लिया ताकि ज़रूरत पड़ने पर मैं जल्दी से गन निकाल सकूँ. लेकिन वहाँ तो सब उल्टा हो गया था वो लोग मुझे देखते ही खुश हो गये ऑर बारी-बारी मुझसे गले मिलने लगे. वो सब लोग मुझे देख कर बहुत खुश थे. उसके बाद एक आदमी जल्दी से एक क़बर के सामने जाके खड़ा हो गया उसने एक नज़र मुझे मुस्कुरा कर देखा ऑर फिर क़बर पर लगे एक पत्थर को घुमा दिया जिससे क़बर किसी दरवाज़े की तरह खुल गई फिर वो आदमी मुझे पिछे आने का इशारा करके नीचे उतर गया. मैं भी बाकी लोगो के साथ उस क़बर के अंदर उतर गया जो कि बाहर से क़बर जैसी लगती थी लेकिन अंदर से एक ख़ुफ़िया रास्ता थी लेकिन मुझे ये नही पता था कि ये रास्ता जाता कहाँ है मैं बस उनके पीछे-पीछे चल रहा था.

कुछ ही देर मे हम एक आलीशान जगह पर खड़े थे वहाँ नीचे बहुत से लोग पहले से मोजूद थे सब ने बारी-बारी आके मुझे गले से लगाया ऑर जापानी का अफ़सोस किया मेरे साथ. उसके बाद वो लोग मुझे एक कमरे मे ले गये जहाँ एक बुजुर्ग बेड पर लेटे हुए थे जिनके एक तरफ खून की बोतल लगी थी शायद वो बहुत ज़्यादा घायल थे ऑर उनके बाजू मे सूमा, गानी ऑर लाला भी बैठे थे. उनको वहाँ देख कर मैं बेहद हैरान था कि ये लोग यहाँ कैसे हैं.

मैं : तुम दोनो यहाँ कैसे.

लाला : सब बताते हैं पहले बाबा से तो मिल ले यार.

मैं : (चोन्क्ते हुए) क्या ये बड़े शीक साहब है?

सूमा : हाँ भाई

बाबा : (हाथ उठाकर मुझे पास आने का इशारा करते हुए) यहाँ आओ बेटा.

मैं : (बाबा का हाथ चूमते हुए) लेकिन छोटा तो बोल रहा था ये दुबई मे हैं.

बाबा : (मेरा हाथ पकड़ते हुए) यहाँ बैठो बेटा मैं जानता हूँ तुम्हारे दिमाग़ मे बहुत से सवाल है ऑर आज मैं तुमको तुम्हारे हर सवाल का जवाब दूँगा. उसने तुम्हारे साथ ही नही बल्कि हम सब के साथ भी धोखा किया है. लेकिन पहले ये बताओ तुम इतना वक़्त तक थे कहाँ पर ऑर वो कौन फरिश्ते थे जिन्होने तुमको बचाया.

मैने बाबा को अपनी गुज़री हुई तमाम जिंदगी के बारे मे सच-सच बता दिया. उसके बाद मैं अपने सवालो के जवाब चाहता था इसलिए मैने बारी-बारी बाबा से सवाल पुच्छने शुरू कर दिए.

बाबा : अब पुछो बेटा क्या पुच्छना चाहते हो

मैं : बाबा आप तो छोटे के वालिद हैं फिर आपके साथ उसने धोखा किसलिए किया....

बाबा : वो इंसान किसी का वफ़ादार नही उसका पैसा ही मज़हब है ऑर मक्कारी ही ईमान है.

मैं : लेकिन बाबा आपकी ऐसी हालत कैसे हुई.

बाबा : बेटा मैं बहुत पहले जान गया था कि वो मेरी जगह लेने के लिए किसी भी हद तक गिर सकता है इसलिए मैने अपनी कुर्सी का वारिस उसे नही बल्कि तुम्हे बनाना चाहता था. लेकिन उस को ये बात पता चल गई ऑर उसने दुनिया को ये बताया कि मैं दुबई मे हूँ जबकि मुझे अपने ही क़िले मे क़ैद कर दिया कुछ दिन बाद उसने मेरी तमाम दोलत के बारे मे मुझसे पूछा जब मैने नही बताया तो उसने मुझे भी गोली मार दी अब मेरे बाद मेरे वारिस तुम थे इसलिए उसने तुम पर भी धोखे से हमला करवा दिया तुमको अपने रास्ते से हटाने के लिए. जिसमे तुम तो बच गये लेकिन तुम्हारी याददाश्त ख़तम हो गई उपर वाले के करम से मैं भी बच गया फिर मेरे ये बच्चे तुमको बहुत दिन तक तलाश करते रहे लेकिन तुम्हारी कोई खबर नही मिली... छोटे को शक़ ना हो इसलिए सूमा, लाला, गानी ऑर जापानी उसकी गॅंग मे काम करते रहे सिर्फ़ इसलिए कि उसकी सारी खबर मुझ तक पहुँचती रहे. फिर एक दिन अचानक से तुम भी वापिस आ गये लेकिन तुमको किसी की कोई खबर नही थी तुम्हारे वापिस आ जाने से छोटे की कुर्सी को सबसे बड़ा ख़तरा हो गया इसलिए उसने हर तरीके से तुमको नुकसान पहुँचाने की कोशिश की... रिंग मे भी तुम्हारे खिलाफ जो फाइटर खड़ा हुआ था उसको तुम्हे मारने के लिए कहा गया था लेकिन तुमने उसे ही मार दिया फिर तुम्हारी कार मे उसने बॉम लगवाया लेकिन तुम उस दिन घर से बाहर ही नही निकले ऑर तुम फिर बच गये जब जापानी को ये बात पता चली तो उसने तुमको कभी अकेला नही छोड़ा बहाने से हमेशा लाला या जापानी तुम्हारे साथ रहे. उसके बाद जापानी ने तुम्हे अपने साथ रख लिया ऑर हर क़दम पर बिना तुम्हे पता चले तुम्हारी हिफ़ाज़त करता रहा.

मैं : लेकिन बाबा इन्होने तो मुझे भी कभी कुछ नही बताया.

बाबा : बेटा जैसे तुम वापिस आए थे तुमको ये सब बताना ख़तरे से खाली नही था क्योंकि तुम पर नज़र रखी जा रही थी इसलिए मैने ही इनको तुम्हे कुछ बताने से मना किया था.

मैं : एक बात समझ नही आई आपको मेरा पता कैसे चला.

बाबा : (मुस्कुराते हुए) बेटा तुम लोगो को मैने पैदा नही किया तो क्या हुआ लेकिन तुमको मैने पाला है ऑर तुम सब की मैं रग-रग जानता हूँ.

मैं : बाबा अब मेरे लिए क्या हुकुम है.

बाबा : (अपने तकिये के नीचे हाथ डाल कर गन निकालते हुए) एक म्यान मे 2 तलवारे नही रह सकती शेरा तुमको उसे ख़तम करना होगा ऑर मेरी कुर्सी संभालनी होगी.

मैं : बाबा वो आपका बेटा है

बाबा : मेरे बेटे इस वक़्त मेरे साथ मोजूद हैं. जिसको मैं तुम्हे ख़तम करने के लिए बोल रहा हूँ वो मेरा तो क्या किसी का भी बेटा नही है. मुझे अफ़सोस होता है ऐसी औलाद पर, एक तुम लोग हो जो सिर्फ़ मेरी परवरिश के लिए अपनी जान तक दाँव पर लगाने को तेयार रहते हो मेरे लिए एक वो है जो कुर्सी के लिए अपने ही बाप को मारना चाहता है.

मैं : जी बाबा जैसा आप चाहेंगे वैसा ही होगा.

बाबा : (मुस्कुराते हुए) मुझे तुमसे यही उम्मीद थी बेटा.

उसके बाद बाबा को हमने आराम करने दिया ऑर हम सब बाहर आके बैठ गये आज मैं बहुत खुश था क्योंकि एक मुद्दत के बाद मुझे सुकून मिला था मैं अब अपने बारे मे सब कुछ जान चुका था.

मैं : यार लाला तुम लोगो से मैं अक्सर इतने सवाल पुछ्ता था कभी तो मुझे बता देते

लाला : यार हम क्या करते बाबा का हुकुम था जब तक तू ठीक नही हो जाता तुझे कुछ ना बताया जाए जानता है अगर छोटे को तेरे बारे मे पता ना चलता तो अब भी तुझे हम लोगो ने कुछ नही बताना था लेकिन अफ़सोस उस कमीने को तेरे बारे मे सब पता चल गया ऑर इसी चक्कर मे जापानी को अपनी जान गँवानी पड़ी.

मैं : यार मैं सच कहता हूँ अगर मुझ पर नशे का असर नही होता तो मैं जापानी को खरॉच भी नही आने देता.

सूमा : हम जानते हैं यार तू हम सब के लिए अपनी जान भी दाव पर लगा सकता है लेकिन क्या करते दोस्त तू एक क़ोरा काग़ज़ बनके वापिस आया था तुझे ये सब कुछ बताते भी तो कैसे.

मैं : कोई बात नही यार तुम लोगो ने ठीक किया

उसके बाद बाकी का दिन ऐसे ही गुज़रा लेकिन आज मैं बहुत खुश था ऑर दिल को एक तसल्ली थी कि मेरा भी कोई है. ऑर सबसे बड़ी बात मुझे मेरा सुकून मिल गया था क्योंकि जो सवाल हमेशा मेरे दिमाग़ मे घूमते रहते थे ऑर मुझे परेशान करते थे उनसे आज मुझे निजात मिल गई थी मेरा दिल चाह रहा था कि मैं अपनी ये खुशी बाबा, नाज़ी, फ़िज़ा, हीना ऑर रिज़वाना के साथ भी बांटु लेकिन अफ़सोस मैं उन लोगो से बहुत दूर था. मेरा दिल चाह रहा था कि काश वो भी आज मेरे साथ होते तो ये देख कर कितना खुश होते कि मेरा भी एक परिवार है जिसमे उन सब लोगो की तरह ये लोग भी बे-इंतेहा प्यार करते हैं. ऐसी सोचो के साथ मेरा पूरा दिन गुज़र गया शाम को रसूल हम सब के लिए खाना ले आया जो हम सब ने मिलकर खाया. उसके बाद मैं रसूल के साथ वापिस अपनी बस्ती मे आ गया ऑर अपने घर मे जाके सुकून से सो गया.

रात को मैं सुकून से सोया पड़ा था कि अचानक किसी ने मेरा दरवाज़ा खट-खाटाया जिससे एक दम से मेरी नींद खुल गई. मैं अपनी आँखें मलता हुआ दरवाज़े के पास पहुँचा ऑर दरवाज़ा खोल दिया सामने एक लड़की खड़ी थी जो मुझे आँखें फाडे घूर-घूर कर देख रही थी. उसके पिछे रसूल ऑर बाकी कुछ ऑर लोग खड़े थे. वो लड़की शायद कही बाहर से आई थी क्योंकि उसके हाथ मे एक छोटा सा बॅग था ऑर बाकी के कुछ बड़े बॅग्स रसूल ने उठा रखे थे.

मैं : रसूल तुम इतनी रात को यहाँ... ऑर ये कौन है...

रसूल : ये... वो... (नीचे देख कर मुस्कुराते हुए)

इससे पहले कि रसूल अपनी बात पूरी करता वो लड़की ने बिना कुछ बोले मुझे अपने गले से लगा लिया ऑर रोना शुरू कर दिया. मुझे कुछ समझ नही आ रहा था कि ये लड़की कौन है ऑर मुझे इस तरह गले लगाकर क्यो रो रही है.

रसूल : (अपनी आँखों पर हाथ रखते हुए) अहम्...अहम्... अच्छा शेरा भाई सुबह मिलेंगे.

लड़की : (मुझे गले लगाए हुए ही) चलो अंदर....

मुझे कुछ भी समझ नही आ रहा था कि इतनी रात को ये कौन लड़की है जो इस तरह मेरे घर मे घुस आई है ऑर मुझे पर इतना हक़ जता रही है. वो लड़की मेरे देखते-देखते घर के अंदर चली गई ऑर मैं उसके बाकी बॅग्स उठा कर घर के अंदर ले आया. इससे पहले कि मैं उस लड़की से कुछ पुछ्ता वो फिर से आके मुझसे चिपक गई ऑर उसने एक साथ मुझसे कई सवाल पूछ लिए.

लड़की : (मेरा चेहरा पकड़कर चूमते हुए) कहाँ चले गये थे मुझे छोड़कर, मेरी याद नही आई तुमको, जानते हो तुमने मुझे कितना रुलाया है, क्या हुआ ऐसा क्यो देख रहे हो मुझे जैसे पहली बार देखा हो.

मैं : (उसको खुद से दूर करते हुए) ये क्या बेहूदगी है कौन हो तुम....

लड़की : अच्छा... तो अब मैं कौन हो गई हूँ.... शाबाश... क्या बात है कोई नयी ढूँढ ली है क्या जो अब मुझे पहचानना भी बंद कर दिया है.

मैं : देखिए मुझे कुछ भी याद नही है आक्सिडेंट के बाद से मेरी याददाश्त जा चुकी है.

लड़की : (बेड से उठकर मेरे पास आते हुए) हाए.... ये कैसे हो गया.

उसके बाद मैने उसको सारी बात फिर से बता दी जिसको वो बड़े गौर से सुन रही थी.

लड़की : शेरा तुमको मैं भी नही याद.

मैं : (ना मे सिर हिलाते हुए) नही... मुझे पिच्छला कुछ भी याद नही है.

लड़की : (परेशान होते हुए) ऊओ..... माफ़ करना मुझे पता नही था... मुझे सिर्फ़ इतना ही बताया गया कि मेरा शेरा वापिस आ गया है तो मैं खुशी से पागल हो गई थी ऑर मुझसे सुबह तक भी इंतज़ार नही हुआ इसलिए मैं फॉरन चली आई.

मैं : आपका नाम क्या है.

लड़की : मेरा नाम रुबीना है लेकिन सिर्फ़ तुम मुझे प्यार से रूबी बुलाते थे.

मैं : अच्छा... तुम करती क्या हो

रूबी : मैं यतीम बच्चों की देखभाल करती हूँ ऑर उनको पढ़ाती हूँ.... तुम्हारे जाने के बाद यही मेरी जिंदगी थी.

मैं : क्या तुम मेरी बीवी हो.

रूबी : (मुस्कुराते हुए) कह तो तुम बहुत साल से रहे हो कि शादी करेंगे लेकिन अभी तक वो दिन आया नही है.

मैं : तुमने खाना खा लिया...

रूबी : तुमको देखते ही सारी भूख मिट गई.... अब तो सुबह ही खाएँगे दोनो साथ मे... खैर जाने दो ये सब... अब काफ़ी रात हो गई है बाकी बातें सुबह करेंगे... मैं कपड़े बदलने जा रही हूँ उसके बाद सो जाते हैं ठीक है.

मैं : ठीक है

Update-45

Main chup-chap wahan baitha raha sath hi paani peene laga or charo taraf nazar daudakar uss ghar ko dekhne laga ghar kuch khas nahi bana hua tha ek dam mere gaav ke ghar jaisa tha. tabhi ek chhota sa bacha mere pass aya.

Bacha : aap shera chacha ho naa.

Main : (uss bache ko utha kar apni god me bithate hue) hanji beta main shera hun lekin aap mujhe kaise jante ho.

Bacha : (ungali se ek kamre me ishara karte hue) ammi ne bataayaa mujhe ki aap mere shera chacha ho.

Main : Achhaaaa.... ye to bahut achhi baat hai or aapka naam kya hai.

Bacha : mera naam Ali hai aapka naam kya hai shera chacha.

Main : (hansate hue) Achha ji.... tum to bahut pyaari baate karte ho.

Abhi main uss bache se baat hi kar raha tha ki bahar mujhe logo ka shor sunayi diya isliye maine uss bache ko apni god me uthaya or bahar jake dekhne laga. bahar bahut se log jama ho gaye the jo mujhe badi hairaani se dekh rahe the. Tbhi uss bheed me se ek budhi si aurat mere samne aake khadi ho gai or mujhe bade gaur se dekhne lagi. Fir bade pyaar se mujhe gale se laga liya or mera matha chum liya sath hi mujhe dua dene lagi.

Amma : (rote hue) kaha chala gaya tha beta apni amma ko chod kar or itna waqt tu tha kaha janta hai hamane tujhe kitna yaad kiya or teri salamati ke liye kitni duayen ki thi.

Main : Mera accident ho gaya tha jisse meri yaddasht chali gai thi. Aap log kaun hai or mujhe kaise jante hain.

Amma : mujhe pehchana nahi shera main amma hun.

Main : (Naa me sir hilate hue) mujhe yahan japani ne bheja hai.

Amma : Japani.... hai kaha wo na-muraad tu wapis aa gaya hai or usne hume batana bhi jaruri nahi samjha.

Uske baad maine apni saari kahani amma ko or wahan khade tamaam logo ko suna di or sath hi ye bhi bata diya ki japani ke sath kya hua ye sunkar sab log behad dukhi ho gaye.

Amma : kya taqdeer mili hai hume ek beta wapis mila to dusra beta door chal gaya.

Main : amma maine usse bahut kaha tha sath chalne ke liye lekin wo mana hi nahi or khud unn logo se mere liya ladta raha. Mere liye apni jaan qurbaan kar di.

Amma : aisa hi tha wo tujh par to jaan deta tha or tum dono ki dosti ko koun nahi janta.

Main : (rote hue) amma mujhe bahut afsos hai ki main japani ke liye kuch kar nahi paya.

Uske baad kaafi der wahan sab log khade rahe or sab log mujhse tarah-tarah ke sawaal puchhte rahe raat kaafi ho gai thi isliye amma ne sabko jaane ka keh diya or mujhe wapis rasool ke sath ek ghar me bhej diya jo mujhe bataayaa gaya ki ye mera hi ghar hai. Uske baad main uss ghar ke andar chala gaya or poore ghar ko bade gaur se dekhne laga. Ghar kaafi shandaar tha or wahan rakhi har chij kaafi keemti lag rahi thi. Uss ghar ki ek-ek chij mujhse judi thi lekin jane kyo mujhe kuch bhi yaad nahi tha. Main uss ghar ki ek-ek chij ko bade gaur se dekh raha tha or pehchaane ki koshish kar raha tha. Kuch der yahan-wahan ghamane ke baad main apne bistar par aake let gaya or din bhar hue tamaam hadso ke bare me sochne laga. kuch hi der me mujhe neend aa gai or main sukoon ki neend so gaya.

Subaah apni aadat ke mutabiq main jaldi uth gaya or naha-dho kar teiyaar ho gaya uske baad rasool ka beta ali mujhe uske ghar bulane ke liye aa gaya wahan maine rasool ne or ali ne sath mil kar nashta kiya. fir rasool mujhe wahi baithne ka keh kar khud kahi chala gaya. main bhi ab ek dam farig tha isliye ali ke sath khelne me lag gaya. Kuch der baad rasool wapis aa gaya.

Rasool : chalo shera chalen.

Main : kaha chalna hai.

Rasool : tum chalo to sahi bahut se log hain jo tumhara intzaar kar rahe hain.

Main : achha chalo....

Rasool : suno pehle ye kapde badal lo or ye jutte or locket bhi utaar do.

Main : lekin kyo

Rasool : sabar karo tumko tumhare sab sawaalo ka jawab mil jayega.

Uske baad main kapde badalkar or rasool ke diye kapde pehankar rasool ke sath ghar se bahar nikal gaya jahan bahar ek car hmara intzaar kar rahi thi hum dono chup-chap uss car me jaake baith gaye. Kuch der baad car ne ham ko ek khandar ke bahar utaar diya.

Main : rasool ye kounsi jagah hai.

Rasool : (khush hote hue) tum chalo to sahi

Main sawaliyaa nazaro se rasool ko dekhta hua uske piche-piche chalne laga. khandar ke andar ghuste hi bahar mujhe bahar kuch log khade nazar aaye jinke hath me bandooken thi. unko dekhte hi main alert ho gaya or apna hath piche apni gun ke upar rakh liya taaki jarurat padne par main jaldi se gun nikaal saku. Lekin wahan to sab ulta ho gaya tha wo log mujhe dekhte hi khush ho gaye or bari-bari mujhse gale milne lage. Wo sab log mujhe dekh kar bahut khush the. Uske baad ek aadmi jaldi se ek qabar ke samne jake khada ho gaya usne ek nazar mujhe muskurakar dekha or fir qabar par lage ek pathar ko ghuma diya jisse qabar kisi darwaze ki tarah khul gai fir wo aadmi mujhe pichhe aane ka ishara karke niche utar gaya. main bhi baaki logo ke sath uss qabar ke andar utar gaya jo ki bahar se qabar jaisi lagti thi lekin andar se ek khufiya rasta thi lekin mujhe ye nahi pata tha ki ye rasta jata kaha hai main bas unke piche-piche chal raha tha.

Kuch hi der me hum ek alishan jagah par khade the wahan niche bahut se log pehle se mojud the sab ne bari-bari aake mujhe gale se lagaya or japani ka afsos kiya mere sath. Uske baad wo log mujhe ek kamre me le gaye jahan ek bujurg bed par lete hue the jinke ek taraf khun ki bottal lagi thi shayad wo bahut jyaadaa ghayal the or unke baaju me sooma, gaani or lala bhi baithe the. Unko wahan dekh kar main behad hairaan tha ki ye log yahan kaise hain.

Main : tum dono yahan kaise.

Lala : sab batate hain pehle baba se to mil le yaar.

Main : (chonkte hue) kya ye bade sheikh sahab hai?

Sooma : haa bhai

Baba : (hath uthakar mujhe pass aane ka ishara karte hue) yahan aao beta.

Main : (baba ka hath chumte hue) lekin chhota to bol raha tha ye dubai me hain.

Baba : (mera hath pakadte hue) yahan baitho beta main janta hun tumhare dimaag me bahut se sawaal hai or aaj main tumko tumhare har sawaal ka jawab dunga. Usne tumhare sath hi nahi balki hum sab ke sath bhi dhokha kiya hai. lekin pehle ye bataao tum itna waqt tak the kaha par or wo koun farishtey the jihone tumko bachaya.

Maine baba ko apni guzri hui tamaam jindagi ke bare me sach-sach bata diya. Uske baad main apne sawaalo ke jawab chahta tha isliye maine bari-bari baba se sawaal puchhne shuru kar diye.

Baba : ab puchho beta kya puchhna chahte ho

Main : Baba aap to chhote ke walid hain fir aapke sath usne dhokha kisliye kiya....

Baba : wo insaan kisi ka waffadar nahi uska paisa hi mazhab hai or makkari hi imaan hai.

Main : lekin baba aapki aisi haalat kaise hui.

Baba : beta main bahut pehle jaan gaya tha ki wo meri jagah lene ke liye kisi bhi had tak gir sakta hai isliye maine apni kursi ka waris usse nahi balki tumhe banana chahta tha. lekin uss ko ye baat pata chal gai or usne duniya ko ye bataayaa ki main dubai me hun jabki mujhe apne hi qile me qaid kar diya kuch din baad usne meri tamaam dolat ke bare me mujhse puchaa jab maine nahi bataayaa to usne mujhe bhi goli maar di ab mere baad mere waris tum the isliye usne tum par bhi dhokhe se hamla karwa diya tumko apne raste se hataane ke liye. jisme tum to bach gaye lekin tumhari yaddasht khatam ho gai upar wale karam se main bhi bach gaya fir mere ye bache tumko bahut din tak talash karte rahe lekin tumhari koi khabar nahi mili... chhote ko shaq na ho isliye sooma, laala, gaani or japani uski gang me kaam karte rahe sirf isliye ki uski saari khabar mujh tak pohonchti rahe. fir ek din achanak se tum bhi wapis aa gaye lekin tumko kisi ki koi khabar nahi thi tumhare wapis aa jane se chhote ki kursi ko sabse bada khatra ho gaya isliye usne har tareeke se tumko nuksaan pohonchane ki koshish ki... ring me bhi tumhare khilaaf jo fighter khada hua tha usko tumhe maarne ke liye kaha gaya tha lekin tumne use hi maar diya fir tumhari car me usne bumb lagwaya lekin tum uss din ghar se bahar hi nahi nikle or tum fir bach gaye jab japani ko ye baat pata chali to usne tumko kabhi akaila nahi choda bahane se hamesha lala ya japani tumhare sath rahe. uske baad japani ne tumhe apne sath rakh liya or har qadam par bina tumhe pata chale tumhari hifazat karta raha.

Main : lekin baba inhone to mujhe bhi kabhi kuch nahi bataayaa.

Baba : beta jaise tum wapis aaye the tumko ye sab batana khatre se khaali nahi tha kyonki tum par nazar rakhi jaa rahi thi isliye maine hi inko tumhe kuch batane se mana kiya tha.

Main : ek baat samajh nahi aayi aapko mera pata kaise chala.

Baba : (muskurate hue) beta tum logo ko maine paida nahi kiya to kya hua lekin tumko maine paala hai or tum sab ki main rag-rag janta hun.

Main : baba ab mere liye kya hukum hai.

Baba : (apne takiye ke niche haath daal kar gun nikalte hue) ek meyaan me 2 talwaare nahi reh sakti shera tumko usse khatam karna hoga or meri kursi sambhalni hogi.

Main : Baba wo aapka beta hai

Baba : mere bete iss waqt mere sath mojud hain. jisko main tumhe khatam karne ke liye bol raha hun wo mera to kya kisi ka bhi beta nahi hai. Mujhe afsos hota hai aisi aulaad par, ek tum log ho jo sirf meri parvarsih ke liye apni jaan tak dawo par lagane ko teiyaar rehte ho mere liye ek wo hai jo kursi ke liye apne hi baap ko marana chahta hai.

Main : ji baba jaisa aap chahenge waisa hi hoga.

Baba : (muskurate hue) mujhe tumse yhi ummeed thi beta.

Uske baad Baba ko hamane araam karne diya or hum sab bahar aake baith gaye aaj main bahut khush tha kyonki ek muddat ke baad mujhe sukoon mila tha main ab apne bare me sab kuch jaan chuka tha.

Main : yaar lala tum logo se main aksar itne sawaal puchhta tha kabhi to mujhe bata dete

Lala : yaar hum kya karte baba ka hukum tha jab tak tu thik nahi ho jata tujhe kuch na bataayaa jaye janta hai agar chhote ko tere bare me pata na chalta to ab bhi tujhe hum logo ne kuch nahi batana tha lekin afsos uss kameene ko tere bare me sab pata chal gaya or isi chakkar me japani ko apni jaan gawani padi.

Main : yaar main sach kehta hun agar mujh par nashe ka asar nahi hota to main japani ko kharoch bhi nahi aane deta.

Sooma : hum jante hain yaar tu hum sab ke liye apni jaan bhi daav par laga sakta hai lekin kya karte dost tu ek qora kagaz banke wapis aaya tha tujhe ye sab kuch batate bhi to kaise.

Main : koi baat nahi yaar tum logo ne thik kiya

Uske baad baaki ka din aise hi guzra lekin aaj main bahut khush tha or dil ko ek tasalli thi ki mera bhi koi hai. Or sabse badi baat mujhe mera sukoon mil gaya tha kyonki jo sawaal hamesha mere dimaag me ghumte rehte the or mujhe pareshaan karte the unse aaj mujhe nijaat mil gai thi mera dil chah raha tha ki main apni ye khushi baba, nazi, fiza, heena or rizwana ke sath bhi baantu lekin afsos main unn logo se bahut door tha. Mera dil chah raha tha ki kaash wo bhi aaj mere sath hote to ye dekh kar kitna khush hote ki mera bhi ek parivaar hai jisme unn sab logo ki tarah ye log bhi be-intehaa pyaar karte hain. Aisi socho ke sath mera poora din guzar gaya shaam ko rasool hum sab ke liye khana le aaya jo hum sab ne milkar khaya. Uske baad main rasool ke sath wapis apni basti me aa gaya or apne ghar me jake sukoon se so gaya.

Raat ko main sukoon se soya pada tha ki achanak kisi ne mera darwaza khat-khataya jisse ek dam se meri jaag khul gai. Main apni aankhen malta hua darwaze ke pass pohoncha or darwaza khol diya samne ek ladki khadi thi jo mujhe aankhen phaade ghur-ghur kar dekh rahi thi. Uske pichhe rasool or baaki kuch or log khade the. Wo ladki shayad kahi bahar se aayi thi kyonki uske hath me ek chhota sa bag tha or baaki ke kuch bade bags rasool ne utha rakhe the.

Main : rasool tum itni raat ko yahan... or ye koun hai...

Rasool : ye... wo... (niche dekh kar muskurate hue)

Isse pehle ki rasool apni baat poori karta wo ladki ne bina kuch bole mujhe apne gale se laga liya or rona shuru kar diya. mujhe kuch samajh nahi aa raha tha ki ye ladki koun hai or mujhe iss tarah gale lagakar kyo rou rahi hai.

Rasool : (apni aankhon par hath rakhte hue) Ahm...Ahm... achha shera bhai subah milenge.

Ladki : (mujhe gale lagaye hue hi) Chalo andar....

Mujhe kuch bhi samajh nahi aa raha tha ki itni raat ko ye kaun ladki hai jo iss tarah mere ghar me ghus aayi hai or mujhe par itna haq jata rahi hai. wo ladki mere dekhte-dekhte ghar ke andar chali gai or main uske baaki bags utha kar ghar ke andar le aaya. Isse pehle ki main uss ladki se kuch puchhta wo fir se aake mujhse chipak gai or usne ek sath mujhse kai sawaal puch liye.

Ladki : (mera chehra pakadkar chumte hue) kaha chale gaye the mujhe chodkar, Meri yaad nahi aayi tumko, jante ho tumne mujhe kitna rulaya hai, kya hua aisa kyo dekh rahe ho mujhe jaise pehli baar dekha ho.

Main : (usko khud se door karte hue) ye kya behudgi hai kaun ho tum....

Ladki : achhaaaa... to ab main kaun ho gai hun.... shabaash... kya baat hai koi nayi dhundh lee hai kya jo ab mujhe pehchanna bhi band kar diya hai.

Main : Dekhiye mujhe kuch bhi yaad nahi hai Accident ke baad se meri yaddasht jaa chuki hai.

Ladki : (bed se uthkar mere pass aate hue) Haaye.... ye kaise ho gaya.

Uske baad main usko saari baat fir se bata di jisko wo bade gaur se sunn rahi thi.

Ladki : shera tumko main bhi nahi yaad.

Main : (naa me sir hilate hue) nahi... mujhe pichhla kuch bhi yaad nahi hai.

Ladki : (pareshan hote hue) Ooohhh..... maaf karna mujhe pata nahi tha... mujhe sirf itna hi bataayaa gaya ki mera shera wapis aa gaya hai to main khushi se pagal ho gai thi or mujhse subah tak bhi intzaar nahi hua isliye main foran chali aayi.

Main : aapka naam kya hai.

Ladki : mera naam rubina hai lekin sirf tum mujhe pyaar se rubi bulate the.

Main : Achha... Tum karti kya ho

Rubi : Main yateem bacho ki dekhbhaal karti hun or unko padhati ho.... tumhare jane ke baad yhi meri jindagi thi.

Main : kya tum meri biwi ho.

Rubi : (muskurate hue) keh to tum bahut saal se rahe ho ki shaadi karenge lekin abhi tak wo din aya nahi hai.

Main : tumne khana khaa liya...

Rubi : tumko dekhte hi saari bhukh mit gai.... ab to subah hi khayenge dono sath me... Khair jane do ye sab... ab kaafi raat ho gai hai baaki baaten subah karenge... main kapde badalne jaa rahi hun uske baad so jate hain thik hai.

Main : thik hai

 
अपडेट-46

मेरे घर मे एक ही बेड था इसलिए मैने उसको अपने बिस्तर पर सुलाना ही मुनासिब समझा ऑर खुद अपना बिस्तर सोफे पर लगा लिया. इतनी देर मे रूबी भी कपड़े बदलकर आ गई थी जो मुझे देखकर मुस्कुरा रही थी.

रूबी : क्या कर रहे हो जनाब.

मैं : बिस्तर कर रहा हूँ अपना.

रूबी : सोफे पर....

मैं : हंजी बेड पर आप सो जाना मैं सोफे पर सो जाउन्गा.

रूबी : (मुस्कुराते हुए) हाए तुम इतने शरीफ कब्से हो गये... कोई ज़रूरत नही सोफे पर सोने की चलो यहाँ आओ ऑर मेरे साथ आके सो जाओ.

मैं : क्या पहले भी हम साथ मे सोते थे.

रूबी : हां बाबा.... पहले भी साथ मे ही सोते थे अब चलो आओ यहाँ ऑर आके सो जाओ मैं तुमको खा नही जाउन्गी.

मैं : ठीक है

उसके बाद मैं उसके साथ जाके लेट गया वो मेरी तरफ मुँह करके लेटी हुई थी ऑर मुझे ही देख रही थी ऑर मुस्कुरा रही थी. मैं उसको बड़े गौर से देख रहा था ऑर याद करने की कोशिश कर रहा था लेकिन अफ़सोस मुझे कुछ भी याद नही आ रहा था. लड़की देखने मे काफ़ी खूबसूरत थी बड़ी-बड़ी आँखें, पतले से होंठ, तीखा सा लेकिन बहुत छोटा सा नाक ऑर गालो पर पड़ने वाली बालो की छोटी सी लट तो उउफफफ्फ़ एक दम जानलेवा थी. मैं काफ़ी देर उसको देखता रहा ऑर वो मुझे देख रही थी ऑर मुस्कुरा रही थी इसलिए मैने ही बात शुरू की.

मैं : क्या हुआ रूबी.

रूबी : (ना मे सिर हिलाते हुए) मुझे अपनी किस्मत पर यक़ीन नही हो रहा कि तुम वापिस आ गये हो जानते हो तुम्हारे बिना एक-एक दिन मैने मौत जैसा गुज़ारा है.

मैं : अब तो वापिस आ गया हूँ ना

रूबी : लेकिन अब तुम पहले जैसे नही हो.

मैं : क्यो पहले मे ऑर अब मे क्या फरक पड़ा है ओर मैं पहले कैसा था.

रूबी : एम्म्म... पहले बहुत बदमाश थे हमेशा मुझे सताते रहते थे अब तो....

मैं : अब तो क्या....

रूबी : (मुस्कुराते हुए) कुछ नही जाने दो... एक बात बोलूं अगर तुमको ऐतराज़ ना हो तो.

मैं : हमम्म बोलो.

रूबी : तुमको गले लगने का बहुत दिल कर रहा है अगर तुमको ऐतराज़ ना हो तो.

ये बात सुनकर जाने क्यो मैने खुद उसे गले लगा लिया. ये पहली बार था जब मैं खुद उसको अपने गले से लगाया था. मेरे बिना कुछ बोले इस तरह गले लगाने से वो भी बहुत खुश हो गई ऑर उसने भी अपनी उपर वाली बाजू मेरी कमर मे डालकर मुझे ज़ोर से पकड़ लिया. कुछ देर वो ऐसे ही मेरे साथ गले लगी लेटी रही फिर अचानक मुझे ऐसा महसूस हुआ जैसे वो रो रही हो इसलिए मैने फॉरन उसका चेहरा अपने हाथो से पकड़कर उपर किया तो वो सच मे रो रही थी.

मैं : (उठकर बैठते हुए) क्या हुआ रो क्यो रही हो... मेरा तुमको गले लगाना बुरा लगा?

रूबी : (आँसू साफ करते हुए ऑर ना मे सिर हिलाते हुए) नही बहुत अच्छा लगा ऑर ये तो खुशी के आँसू हैं... जानते हो इस पल का मैने कितना इंतज़ार किया है.

मैं : मुझे माफ़ कर दो मैं भी तुमको छोड़ कर नही जाना चाहता था लेकिन उस दिन जाने मे क्यो चला गया ऑर उसके बाद मेरे साथ ये सब हो गया. मैं तो तुम्हारा दर्द भी नही बाँट सकता क्योंकि मुझे कुछ भी याद नही है.

रूबी : कोई बात नही अब मैं आ गई हूँ ना तुमको सब याद आ जाएगा. ऑर आगे से मुझे कभी छोड़कर कभी मत जाना.

मैं : (कान पकड़ते हुए) नही जाउन्गा.

उसके बाद हम दोनो फिर से लेट गये इस बार वो मेरे उपर लेटी थी ओर मेरी गाल पर अपने नाज़ुक से हाथ फेर रही थी.

रूबी : तुमने मूच्छे सॉफ करदी अपनी.

मैं : हमम्म क्यो अच्छा नही लग रहा.

रूबी : नही... नही... बहुत अच्छे लग रहे हो. उल्टा मैं तो खुद तुमको इससे सॉफ करने को कहती थी लेकिन तुम हमेशा ये कहकर मना कर देते थे कि मूछ के बिना शेर अच्छा नही लगेगा. अब खुद ही देखो मेरा शेर क्लीन शेव कितना सेक्शी लगता है. (मेरी गाल चूमते हुए)

मैं : (बिना कुछ बोले मुस्कुराते हुए) कमाल है आज तक तो लड़कियाँ ही सेक्सी होती थी अब लड़के भी सेक्सी हो गये हैं...

रूबी : (मुस्कुराते हुए) तुम तो मेरे सब कुछ हो.... मेरी जान हो.

मैं : जानती हो मुझे 2 दिन हो गये यहाँ आए हुए ऑर तुम मुझे आज मिलने आई हो.

रूबी : मैं क्या करती मुझे रसूल भाई जान ने बताया ही आज है नही तो तुमको क्या लगता है मैं रुकने वाली थी क्या. तुमको नही पता मैने तुम्हारे बिना ये वक़्त कैसे निकाला है तुम साथ होते थे तो ऐसा लगता था मेरी हर खुशी मेरे पास है मैं हमेशा महफूज़ हूँ लेकिन तुम्हारे जाने के बाद तो जैसे मेरी दुनिया ही लूट गई थी मैं सारा दिन रोती रहती थी ऑर यही तुम्हारे घर मे ही पड़ी रहती थी फिर एक दिन रसूल भाई जान की बीवी असमा भाभी ने मुझे समझाया ओर मैने तुम्हारे अधुरे सपने को ही अपना मक़सद बना लिया.

मैं : मेरा सपना.... कौनसा.

रूबी : तुम्हारी ख्वाहिश थी कि तुम अपना एक यतीम खाना खोलो जहाँ तमाम बे-घर बच्चो को अच्छी तालीम ऑर अच्छा खाना पीना मिल सके इसलिए मैने बाबा की इजाज़त से तुम्हारा सपना पूरा किया ऑर तुम्हारे नाम से एक यतीम खाना खोल दिया बस अब मैं सारा दिन उन्ही बच्चो को पढ़ती रहती हूँ.

मैं : ये तो तुम बहुत नेक़ काम कर रही हो.

उसके बाद हम सुबह तक ऐसे ही बातें करते रहे सुबह कब हुई हम दोनो को पता ही नही चला लेकिन एक रात मे मैं रूबी के बहुत नज़दीक आ गया था उसमे एक अजीब सा अपनापन था जिसने मेरे दिल मे उसके लिए जगह बना दी थी. कुछ देर ऐसे ही बातें करने के बाद हम दोनो सुबह जल्दी तेयार हो गये क्योंकि हमे बड़े शीक साहब (बाबा) से मिलने भी जाना था. उसके बाद हम सुबह बाबा से मिलने चले गये वहाँ कोई ख़ास बात नही हुई बाबा रूबी से यतीम खाने के बारे मे पूछते रहे. बाबा हम दोनो को एक बार फिर साथ देखकर बहुत खुश थे. उसके बाद रूबी मुझसे कही घूमने चलने की ज़िद्द करने लगी इसलिए बाबा से मिलकर वहाँ से हम एक जीप मे बैठे ऑर घूमने चले गये. मैं रूबी से बातें करते हुए गाड़ी चला रहा था कि अचानक एक कार तेज़ रफ़्तार से मेरे पास से गुज़र गई ऑर आगे जाके कुछ दूरी पर सड़क के बीच मे रुक गई जिसने मुझे भी चोन्का दिया ऑर मैने भी अपनी जीप रोक दी. इससे पहले कि मैं कुछ समझ पता सामने खड़ी कार का दरवाज़ा खुला ऑर उसमे से कुछ लोग निकले ऑर मेरी जीप पर अँधा-धुन्ध गोलियाँ चलाने लगे. मैं इस अचानक हमले के लिए तेयार नही था ना ही उनसे मुक़ाबला करने के लिए उस वक़्त मेरे पास कोई हथियार था. 1 गोली जब जीप के सामने वाले काँच पर लगी तो मैने रूबी को पकड़कर नीचे कर दिया ताकि गोली रूबी को ना लग जाए ऑर जीप को रिवर्स मे पिछे की तरफ चलाने लगा.

रूबी : शेरा ये कौन लोग है जो पागलो की तरह हम पर गोलियाँ चला रहे हैं.

मैं : पता नही शायद छोटे शीक के लोग हैं.

रूबी इस तरह अचानक हुआ हमले से बहुत ज़्यादा डर गई थी इसलिए मैने वहाँ से निकलना ही मुनासिब समझा. मैं पूरी रफ़्तार से गाड़ी पिछे की तरफ दौड़ा रहा था ऑर वो लोग लगातार हमारी जीप पर गोलियाँ चला रहे थे. अब हम उनसे काफ़ी दूर आ गये थे इसलिए वो लोग वापिस कार मे बैठ गये ऑर कार को हमारी तरफ भगाने लगे. मैने भी गाड़ी घुमा कर रोड की जगह जंगल मे जीप को घुसा दिया था. मैने अपनी जीप बंद की ऑर रूबी को जीप से उतारकर थोड़ी दूरी पर एक पेड़ के पीछे खड़ा कर दिया जिससे सामने से वो किसी को नज़र नही आ सकती थी.

मैं: तुम यही रूको मैं अभी आता हूँ.

रूबी : कहाँ जा रहे हो शेरा उनके पास हथियार है.

मैं : डरो मत कुछ नही होता उनके पास हथियार है तो शेरा खुद एक हथियार का नाम है.

रूबी : मत जाओ ना... मुझे डर लग रहा है.

मैं : (उसका गाल को सहलाते हुए) कुछ नही होगा फिकर मत करो मैं बस अभी आ रहा हूँ.

तब तक वो कार भी जंगल के बाहर रुक चुकी थी ऑर उसमे बैठे तमाम लोग जंगल के अंदर आ चुके थे. वो 5 लोग थे ऑर सबके हाथ मे पिस्टल थी इसलिए मैं सामने से उनका मुक़ाबला नही कर सकता था. इसलिए मैने एक तरकीब सोची ऑर एक पेड़ पर चढ़ गया जिसकी लताये नीचे ज़मीन पर लटक रही थी. मैने पेड़ पर चढ़ कर कुछ लताओ को पकड़ा ऑर उनका एक फँदा बना लिया. पेड़ बहुत घना था इसलिए नीचे से मुझे कोई देख नही सकता था लेकिन मैं सबको देख पा रहा था उनमे से 2 लोग जल्दी से जीप के पास आए ऑर अंदर देखने लगे जब जीप खाली मिली तो 1 आदमी वही खड़ा हो गया ऑर बाकी 4 लोग इधर उधर मुझे ढूँढने लगे. जो 1 आदमी जीप के पास खड़ा था उस तक मैं आराम से पहुन्च सकता था इसलिए मैने वो लताओ का बनाया हुआ फँदा नीचे फैंका ऑर उस आदमी के गले मे डाल कर झटके से उपर खींच लिया वो आदमी वही मर गया. फिर मैने पेड़ से नीचे छलाँग लगाई ऑर जीप के नीचे घुस गया ऑर बाकी के लोगो का इंतज़ार करने लगा तभी 2 लोग वापिस आते हुए नज़र आए. मुझे नीचे से सिर्फ़ 4 टांगे ही नज़र आ रही थी इसलिए मैने नीचे से वो दोनो लोगो की टाँगो को पकड़ कर खींच दिया जिससे वो दोनो गिर गये. मैं जल्दी से बाहर निकला ऑर पूरी ताक़त के साथ अपने दोनो घुटने उन दोनो के सिर मे मारे जिससे वो दोनो भी वही ढेर हो गये. मैने जल्दी से उन दोनो को धकेल कर जीप के नीचे कर दिया ताकि उनके साथी उनको देख ना सके.

अब सिर्फ़ 2 लोग बचे थे जो ना-जाने कहाँ चले गये थे. मैं वापिस पेड़ पर चढ़ कर उनका इंतज़ार करने लगा कुछ देर इंतज़ार करने के बाद जब कोई नही आया तो मैने पेड़ से नीचे उतरने का सोचा. तभी 1 आदमी सामने से आता हुआ नज़र आया इसलिए मैं वही रुक गया. वो आदमी चारो तरफ देखने लगा शायद वो अपने साथियो को तलाश कर रहा था. मैं उस पर भी हमला करना चाहता था लेकिन वो आदमी मुझसे कुछ दूरी पर खड़ा था इसलिए उसको पास बुलाने के लिए मैने उस आदमी को नीचे फैंक दिया जिसको मैने लताओ का फँदा लगाके मारा था. मेरी ये तरकीब काम कर गई वो दौड़ता हुआ आया ऑर अपने आदमी को देखने लगा इससे पहले कि वो उपर देखता मैने उसके उपर छलाँग लगा दी. लेकिन इस अचानक हमले से उसकी गन से फाइयर निकल गया जिसकी आवाज़ पूरे जुंगल मे गूज़ गई. मैने जल्दी से उसकी गन पकड़ी ऑर उसके मुँह मे उसकी पिस्टल डाल कर फाइयर कर दिया वो भी वही ढेर हो गया. लेकिन अब जो आखरी बचा था वो शायद अलर्ट हो गया था गोली की आवाज़ सुनकर इसलिए मैं जानता था कि वो अपनी कार के पास ही भागेगा इसलिए मैं फॉरन तेज़ी से भागता हुआ उसकी कार के पास चला गया. मैं उसको मारने के चक्कर मे ये भी भूल गया कि रूबी मेरे साथ थी जिसको मैने जंगल मे अकेला छोड़ दिया है. कुछ ही देर मे वो आदमी मुझे रूबी के साथ नज़र आया उसने रूबी के सिर पर गन लगा रखी थी ओर मुझे आवाज़ लगा रहा था.

आदमी : शेरा जहाँ भी है बाहर आजा नही तो ये लड़की गई समझ.

मेरे पास भी अब एक पिस्टल थी लेकिन मैं रूबी की जान का जोखिम नही ले सकता था इसलिए चुप-चाप बाहर आ गया ओर पिस्टल को पिछे अपनी बेल्ट मे सेट कर लिया ताकि उसको पिस्टल नज़र ना आए.

आदमी : सामने आके खड़ा होज़ा.

मैं : लड़की को छोड़ दे.

आदमी : नही तो क्या कर लेगा अगर मैं चाहूं तो तुम दोनो को यही दफ़न कर सकता हूँ.

मैं : तेरे जैसे कितने ही आए ऑर आज ज़मीन के 4 फीट नीचे पड़े हैं इसलिए मुझे गुस्सा मत दिला ऑर इसको छोड़ दे तेरी जान बक्ष दूँगा नही तो साले तडपा-तडपा कर मारूँगा.

आदमी : (हँसते हुए) रस्सी जल गई लेकिन बल नही गया गुस्सा आ गया तो क्या कर लेगा.... लगता है तुझे गोली मार कर ही यहाँ से लेके जाना पड़ेगा तू ज़िंदा तो चलेगा नही.

Update-46

Mere ghar me ek hi bed tha isliye maine usko apne bistar par sulana hi munasib samjha or khud apna bistar sofe par laga liya. Itni der me rubi bhi kapde badalkar aa gai thi jo mujhe dekhkar muskura rahi thi.

Rubi : Kya kar rahe ho janab.

Main : bistar kar raha hun apna.

Rubi : sofe par....

Main : hanji bed par aap so jana main sofe par so jaunga.

Rubi : (muskurate hue) haaye tum itne shareef kabse ho gaye... koi jarurat nahi sofe par sone ki chalo yahan aao or mere sath aake so jao.

Main : kya pehle bhi hum sath me sote the.

Rubi : haa baba.... pehle bhi sath me hi sote the ab chalo aao yahan or aake so jao main tumko khaa nahi jaungi.

Main : thik hai

Uske baad main uske sath jake let gaya wo meri taraf munh karke leti hui thi or mujhe hi dekh rahi thi or muskura rahi thi. Main usko bade gaur se dekh raha tha or yaad karne ki koshish kar raha tha lekin afsos mujhe kuch bhi yaad nahi aa raha tha. ladki dekhne me kaafi khubsurat thi badi-badi aankhen, patle se honth, teekha sa lekin bahut chhota sa naak or gaalo par padne wali baalo ki choti si latt to uuffff ek dam jaanlewa thi. Main kafi der usko dekhta raha or wo mujhe dekh rahi thi or muskura rahi thi isliye maine hi baat shuru ki.

Main : kya hua rubi.

Rubi : (naa me sir hilate hue) mujhe apni kismat par yaqeen nahi ho raha ki tum wapis aa gaye ho jante ho tumhare bina ek-ek din maine maut jaisa guzara hai.

Main : Ab to wapis aa gaya hun naa

Rubi : Lekin ab tum pehle jaise nahi ho.

Main : kyo pehle me or ab me kya pharak pada hai or main pehle kaisa tha.

Rubi : Mmmm... pehle bahut badmash the hamesha mujhe satate rehte the ab to....

Main : ab to kya....

Rubi : (muskurate hue) kuch nahi jane do... ek baat bolu agar tumko aitraaz na ho to.

Main : Hhhmmm bolo.

Rubi : tumko gale lagane ka bahut dil kar raha hai agar tumko aitraaz na ho to.

Ye baat sunkar jane kyo maine khud usse gale laga liya. ye pehli baar tha jab main khud usko apne gale se lagaya tha. mere bina kuch bole iss tarah gale lagane se wo bhi bahut khush ho gai or usne bhi apni upar wali baaju meri kamar me daalkar mujhe jor se pakad liya. kuch der wo aise hi mere sath gale lagi leti rahi fir achanak mujhe aisa mehsoos hua jaise wo rou rahi ho isliye maine foran uska chehra apne hatho se pakadkar upar kiya to wo sach me rou rahi thi.

Main : (uthkar baithte hue) kya hua rou kyo rahi ho... mera tumko gale lagana bura laga?

Rubi : (ansu saf karte hue or naa me sir hilate hue) nahi bahut achha laga or ye to khushi ke aansu hain... jante ho iss pal ka maine kitna intzaar kiya hai.

Main : mujhe maaf kar do main bhi tumko chod kar nahi jana chahta tha lekin uss din jane me kyo chala gaya or uske baad mere sath ye sab ho gaya. main to tumhara dard bhi nahi baant sakta kyonki mujhe kuch bhi yaad nahi hai.

Rubi : koi baat nahi ab main aa gai hun na tumko sab yaad aa jayega. Or aagey se mujhe kabhi chodkar kabhi mat jana.

Main : (kaan pakadte hue) nahi jaunga.

Uske baad hum dono fir se let gaye iss bar wo mere upar leti thi or meri gaal par apne nazuk se hath fer rahi thi.

Rubi : tumne mooche saaf kardi apni.

Main : hhhmmm kyo achha nahi lag raha.

Rubi : nahi... nahi... bahut achhe lag rahe ho. Ulta main to khud tumko isse saaf karne ko kehti thi lekin tum hamesha ye kehkar mana kar dete the ki mooch ke bina sher achha nahi lagega. Ab khud hi dekho mera sher clean shave kitna sexi lagta hai. (meri gaal chumte hue)

Main : (bina kuch bole muskurate hue) kamaal hai aaj tak to ladkiyaan hi sexi hoti thi ab ladke bhi sexi ho gaye hain...

Rubi : (muskurate hue) tum to mere sab kuch ho.... Meri jaan ho.

Main : janti ho mujhe 2 din ho gaye yahan aaye hue or tum mujhe aaj milne aayi ho.

Rubi : Main kya karti mujhe rasool bhai jaan ne bataayaa hi aaj hai nahi to tumko kya lagta hai main rukne wali thi kya. tumko nahi pata maine tumhare bina ye waqt kaise nikala hai tum sath hote the to aisa lagta tha meri har khushi mere pass hai main hamesha mehfooz hun lekin tumhare jane ke baad to jaise meri duniya hi loot gai thi main sara din roti rehti thi or yhi tumhare ghar me hi padi rehti thi fir ek din rasool bhai jaan ki biwi asma bhabhi ne mujhe samjhaya or maine tumhare adhunre sapne ko hi apna maqsad bana liya.

Main : mera sapna.... Kounsa.

Rubi : tumhari khwahish thi ki tum apna ek yateem khana kholo jahan tamaam be-ghar bacho ko achhi taleem or achha khana peena mil sake isliye maine baba ki ijajat se tumhara sapna poora kiya or tumhare naam se ek yateem khana khol diya bas ab main sara din unhi bacho ko padhati rehti hun.

Main : ye to tum bahut neq kaam kar rahi ho.

Uske baad hum subah tak aise hi baaten karte rahe subah kab hui hum dono ko pata hi nahi chala lekin ek raat me main rubi ke bahut nazdeek aa gaya tha usme ek ajeeb sa apnapan tha jisne mere dil me uske liye jagah bana di thi. kuch der aise hi baaten karne ke baad hum dono subah jaldi teiyaar ho gaye kyonki hume bade sheikh sahab (baba) se milne bhi jana tha. Uske baad hum subah baba se milne chale gaye wahan koi khaas bat nahi hui baba rubi se yateem khane ke bare me puchte rahe. baba hum dono ko ek bar fir sath dekhkar bahut khush the. Uske baad rubi mujhse kahi ghamane chalne ki zidd karne lagi isliye baba se milkar wahan se hum ek jeep me baithe or ghamane chale gaye. Main rubi se baaten karte hue gaadi chala raha tha ki achanak ek car tez raftaar se mere pass se guzar gai or aagey jake kuch doori par sadak ke bich me ruk gai jisne mujhe bhi chonka diya or maine bhi apni jeep rok di. Isse pehle ki main kuch samajh pata samne khadi car ka darwaza khula or usme se kuch log nikle or meri jeep par andha-dhundh goliyaan chalane lage. Main iss achanak hamley ke liye teiyaar nahi tha na hi unse muqabla karne ke liye uss waqt mere pass koi hathiyaar tha. 1 goli jab jeep ke samne wale kaanch par lagi to maine rubi ko pakadkar niche kar diya taaki goli rubi ko naa lag jaye or jeep ko reverse me pichhe ki taraf chalane laga.

Rubi : shera ye kaun log hai jo paglo ki tarah hum par goliyaan chala rahe hain.

Main : pata nahi shayad chhote sheikh ke log hain.

Rubi iss tarah achanak hua hamle se bahut jyaadaa darr gai thi isliye maine wahan se nikalna hi munasib samjha. Main poori raftar se gaadi pichhe ki taraf dauda raha tha or wo log lagatar hamaari jeep par goliyaan chala rahe the. Ab hum unse kaafi door aa gaye the isliye wo log wapis car me baith gaye or car ko hamaari taraf bhagaane lage. maine bhi gaadi ghuma kar road ki jagah jungle me jeep ko ghusa diya tha. Maine apni jeep band ki or rubi ko jeep se utaarkar thodi doori par ek ped ke piche khada kar diya jisse samne se wo kisi ko nazar nahi aa sakti thi.

Main: tum yhi ruko main abhi aata hun.

Rubi : kaha jaa rahe ho shera unke pass hathiyaar hai.

Main : Daro mat kuch nahi hota unke pass hathiyaar hai to shera khud ek hathiyaar ka naam hai.

Rubi : mat jao naa... mujhe darr lag raha hai.

Main : (uski gaal ko sehlate hue) kuch nahi hoga fikar mat karo main bas abhi aa raha hun.

Tab tak wo car bhi jungle ke bahar ruk chuki thi or usme baithe tamaam log jungle ke andar aa chuke the. wo 5 log the or sabke hath me pistol thi isliye main samne se unka muqabla nahi kar sakta tha. isliye maine ek tarkeeb sochi or ek ped par chadh gaya jiski lataayen niche zameen par latak rahi thi. maine ped par chadh kar kuch lataao ko pakda or unka ek phanda bana liya. Ped bahut ghana tha isliye niche se mujhe koi dekh nahi sakta tha lekin main sabko dekh paa raha tha unme se 2 log jaldi se jeep ke pass aaye or andar dekhne lage jab jeep khali mili to 1 aadmi wahi khada ho gaya or baaki 4 log idhar udhar mujhe dhundhne lage. Jo 1 aadmi jeep ke pass khada tha uss tak main aaram se pohonch sakta tha isliye maine wo lataao ka banaya hua phanda niche fainka or uss aadmi ke gale me daal kar jhatke se upar khinch liya wo aadmi wahi mar gaya. fir maine ped se niche chalaang lagayi or jeep ke niche ghus gaya or baaki ke logo ka intzaar karne laga tabhi 2 log wapis aate hue nazar aaye. mujhe niche se sirf 4 taangey hi nazar aa rahi thi isliye maine niche se wo dono logo ki taango ko pakad kar khinch diya jisse wo dono gir gaye. Maine jaldi se bahar nikla or poori taqat ke sath apne dono ghutne unn dono ke sir me maare jisse wo dono bhi wahi dher ho gaye. Maine jaldi se unn dono ko dhakel kar jeep ke niche kar diya taaki unke sathi unko dekh na sake.

Ab sirf 2 log bache the jo na-jane kaha chale gaye the. main wapis ped par chadh kar unka intzaar karne laga kuch der intzaar karne ke baad jab koi nahi aaya to maine ped se niche utarne ka socha. Tabhi 1 aadmi samne se ata hua nazar aaya isliye main wahi ruk gaya. wo aadmi charo taraf dekhne laga shayad wo apne sathiyo ko talaash kar raha tha. main uss par bhi hamla karna chahta tha lekin wo aadmi mujhse kuch doori par khada tha isliye usko pass bulane ke liye maine uss aadmi ko niche faink diya jisko maine lataao ka phanda lagake maara tha. meri ye tarkeeb kam kar gai wo daudta hua aaya or apne aadmi ko dekhne laga isse pehle ki wo upar dekhta maine uske upar chalaang laga di. lekin iss achanak hamle se uski gun se fire nikal gaya jiski awaaz poore jungal me gooj gai. maine jaldi se uski gun pakdi or uske munh me uski pistol daal kar fire kar diya wo bhi wahi dher ho gaya. lekin ab jo aakhri bacha tha wo shayad alert ho gaya tha goli ki awaz sunkar isliye main janta tha ki wo apni car ke pass hi bhagega isliye main foran tezi se bhagta hua uski car ke pass chala gaya. main usko maarne ke chakkar me ye bhi bhul gaya ki rubi mere sath thi jisko maine jungle me akela chod diya hai. kuch hi der me wo aadmi mujhe rubi ke sath nazar aaya usne rubi ke sir par gun laga rakhi thi or mujhe awaaz laga raha tha.

Aadmi : shera jahan bhi hai bahar aaja nahi to ye ladki gai samajh.

Mere pass bhi ab ek pistol thi lekin main rubi ki jaan ka jokhim nahi le sakta tha isliye chup-chap bahar aa gaya or pistol ko pichhe apni belt me set kar liya taki usko pistol nazar naa aaye.

Aadmi : samne aake khada hoja.

Main : ladki ko chod de.

Aadmi : nahi to kya kar lega agar main chahu to tum dono ko yhi dafan kar sakta hun.

Main : tere jaise kitne hi aaye or aaj zameen ke 4 feet niche pade hain isliye mujhe gussa mat dila or isko chod de teri jaan baksh dunga nahi to sale tadpa-tadpake marunga.

Aadmi : (hansate hue) rassi jal gai lekin bal nahi gaya Gussa aa gaya to kya kar lega.... Lagta hai tujhe goli maar kar hi yahan se leke jana padega tu zinda to chalega nai.

 
अपडेट-47

ये सुनकर रूबी को जाने क्या हुआ उसने उस आदमी की कलाई पकड़ी जिसमे उसने गन पकड़ी थी ऑर झटके से घुमा दिया ऑर भाग कर मेरी तरफ आ गई. अब वो आदमी अकेला था ऑर उसके हाथ से गन गिर चुकी थी मैने जल्दी से ज़मीन पर गिरी उसकी पिस्टल को ठोकर मार कर दूर फैंक दिया ऑर उसकी तरफ गुस्से से बढ़ा ऑर जाते ही मैने उसकी नाक पर अपने सिर की टक्कर मारी जिससे उसके नाक से खून निकलने लगा. अब मैने उसकी एक बाजू को पकड़ा ऑर सीधा करके घुमा दिया ऑर अपने घुटने के जोड़ मे फसा लिया ऑर उल्टी तरफ खींच दिया जिससे उसका हाथ टूट गया वो दर्द से चीख ऑर चिल्ला रहा था. अब यही मैने उसके दूसरे हाथ के साथ भी किया ऑर अब उसके दोनो हाथ टूट चुके थे वो ज़मीन पर गिरा हुआ रो रहा था ऑर चिल्ला रहा था मैं जल्दी से उस पेड़ के पास गया जहाँ वो लताये लटक रही थी वहाँ से मैने कुछ लताये तोड़ी ऑर उनका एक फँदा बना लिया ऑर वापिस आके उसके एक पैर मे डाल दिया जबकि दूसरा सीरा मैने जीप के पिछे बाँध दिया. मैने रूबी को साथ लिया ऑर हम दोनो जल्दी से जीप मे बैठ गये. अब मैं तेज़ रफ़्तार से जीप चलानी शुरू कर दी ऑर बँधा होने की वजह से वो आदमी भी सड़क पर घसीट ता हुआ हमारे साथ आ रहा था. कुछ ही देर मे हम अपने इलाक़े मे पहुँच चुके थे जहाँ सब लोग उसको गौर से देख रहे थे. तभी रसूल ऑर मेरे कुछ लोग दौड़ते हुए मेरी जीप के पास आए.

रसूल : शेरा ये आदमी कौन है.

मैं : मुझ पर हमला हुआ था आज... 5 लोग थे बस यही बचा है.

रसूल : क्या बात कर रहा है तुम दोनो ठीक तो हो.

मैं : हम ठीक है.... लेकिन इसका क्या करना है अब.

रसूल : करना क्या है इसको तो मेरे हवाले कर्दे.

रूबी : भाई जान ज़्यादा मत मारना पहले ही शेरा ने इसको बहुत मारा है.

रसूल : (हँसते हुए) अच्छा भाभी.... शेरा तू खंडहर पर चला जाना बाबा के पास इसको मैं देख लूँगा.

मैं : ठीक है...

उसके बाद मैने फिर से जीप दौड़ा दी ऑर अपने घर के सामने लाके जीप को रोक दिया. फिर हम दोनो जैसे ही जीप से उतरे तो बाकी के लोग हमारे पास आ गये ऑर हमारा हाल-चाल पुच्छने लगे. मैने रूबी को अम्मा के पास छोड़ा ऑर खुद खंडहर पर चला गया. वहाँ लाला पहले से मोजूद था जिसने मुझे गले लगाकर मेरा इस्तक़्बाल किया. फिर हम दोनो बाबा के पास चले गये. बाबा को मैने तमाम हादसे के बारे मे बता दिया.

बाबा : हमम्म तो वो ज़लील इंसान यहाँ तक पहुँच गया है बेटा इसलिए मैं तुमको कहता था कि तुम अब अपनी कुर्सी संभाल ही लो ताकि ये रोज़-रोज़ का खून खराब तो बंद हो जाए. जब तक मेरी कुर्सी खाली रहेगी कोई ना कोई उसको हासिल करने की कोशिश करता रहेगा.

मैं : तो बाबा मेरे लिए क्या हुकुम है.

बाबा : मैं चाहता हूँ कि तुम मेरी कुर्सी को संभाल लो... पता नही अब मैं ओर कितने दिन हूँ मैं चाहता हूँ कि मेरे होते हुए ही तुम मेरी कुर्सी पर बैठ जाओ.

मैं : लेकिन बाबा अभी मैं ठीक कहाँ हुआ हूँ मुझे कुछ भी याद नही है.

बाबा : नही ठीक हुए तो ना सही... तुम्हे अब तक का तो सब कुछ याद है ना बस उतना ही काफ़ी है बाकी मैं तुमको सब बता दूँगा.

लाला : हाँ शेरा बाबा ठीक कह रहे हैं.

मैं : ठीक है बाबा.... जैसा आप बेहतर समझे.

मेरी ये बात सुनकर बाबा बहुत खुश हुए ओर मुझे गले से लगा लिया.

बाबा : लाला जाओ जाके मीटिंग का एलान करो ओर सबको यहाँ बुलाओ ऑर बता दो कि मेरा वारिस आ गया है अपनी कुर्सी संभालने के लिए.

लाला : जी बाबा अभी सबको फोन कर देता हूँ.

बाबा : शेरा बेटा मेरे पास आओ ऑर मैं तुमको हमारे बिज़्नेस का तमाम राज़ बता देता हूँ लेकिन पहले जाके दरवाज़ा बंद करके आओ.

उसके बाद मैने दरवाज़ा बंद कर दिया ऑर बाबा के पास जाके बैठ गया बाबा ने मुझे तमाम बिज़्नेस के बारे मे बताया ऑर ये भी बताया कि कौनसा बिज़्नेस कैसे चलाना है ऑर उसको कौन आदमी बेहतर चला सकता है. साथ ही उन्होने मुझे तमाम दौलत ऑर पैसे के बारे मे बताया फिर उन्होने आज तक कमाए तमाम सोने के बारे मे मुझे बताया जिसके पिछे छोटा पड़ा था ऑर मुझे बाबा ने ये भी बताया कि तमाम दौलत कहाँ पर पड़ी है ऑर हर सेफ को खोलने का तरीका क्या है.

शाम होने तक हमारे धंधे से जुड़े तमाम लोग वहाँ मोजूद थे जिनमे छोटा शीक ऑर शम्मी भी था. सबका इज़्ज़त के साथ इस्तक़्बाल हुआ ऑर उनको हॉल मे बिठा दिया गया. मैं बाबा के साथ ही था क्योंकि बाबा अब चल नही पाते थे इसलिए हमने उन्हे व्हील चेयर पर बिठा दिया ऑर मैं खुद व्हील चेयर को चला कर बाबा को हॉल तक लेकर गया. बाबा के आते ही सब लोग बाबा के लिए खड़े हो गये ऑर बाबा ने हाथ के इशारे से सबको बैठने को कहा. कुछ देर सब लोग बाबा की तबीयत पुछ्ते रहे. उसके बाद बाबा ने काम की बात शुरू की.

बाबा : आप सब इतने कम वक़्त मे यहाँ आए उसका शुक्रिया.

1 आदमी : बाबा लेकिन आपने आज इतने दिन बाद हम सब को एक साथ कैसे याद फरमाया.

बाबा : आप सब तो जानते ही हैं कि अब मुझ मे वो ताक़त नही रही कि मैं अपना इतना फैला हुआ बिज़्नेस एंपाइयर संभाल सकूँ इसलिए मैने अपना ये सारा बिज़्नेस आप मे से ही किसी एक को देने का फ़ैसला किया है.

छोटा : इसमे फ़ैसला क्या करना है बाबा आपका बेटा मैं हूँ तो आपकी कुर्सी पर पहला हक़ भी मेरा है.

बाबा : बेटा हो जाने से काबिलियत नही आ जाती. मैं अपनी कुर्सी उसको दूँगा जो ना सिर्फ़ मेरी कुर्सी को संभाल सके बल्कि मेरे बनाए बिज़्नेस को बढ़ा भी सके.

आदमी : अगर छोटा नही है तो फिर वो कौन है बाबा.

बाबा : आज के बाद से शेरा ही मेरी कुर्सी संभालेगा इसका हर हुकुम मेरा हुकुम है अब से ये जिसको जो भी धंधा देगा उसको वही संभालना होगा ऑर महीने की सारी कमाई लाके तुम सब पहले की तरह अब शेरा को दोगे जिसमे से शेरा तुम लोगो का हिस्सा तुमको देगा.

मेरा नाम सुनते ही वहाँ बैठे तमाम लोग खुश हो गये ऑर मेरे लिए तालियाँ बजाने लगे तभी शम्मी ऑर छोटे का मुँह गुस्से से लाल हो गया.

छोटा : बाबा आप ये ठीक नही कर रहे मेरा हक़ आप किसी ऑर को कैसे दे सकते हैं.

बाबा : मुझे तुमसे सीखने की ज़रूरत नही है कि मुझे क्या करना चाहिए ऑर क्या नही समझे तुमको जो मिला है उसी से काम चलाओ क्योंकि तुम उसके ही लायक हो.

छोटा : (गुस्सा होते हुए) मुझे आपकी खैरात नही चाहिए जो आपने मुझे दिया है वो भी संभाल कर रखू मैं जा रहा हूँ यहाँ

से आपको क्या लगता है आपकी कुर्सी पर अगर ये बैठ जाएगा तो ये मुझसे बेहतर बिज़्नेस को संभाल पाएगा.

बाबा : मुझे लगता नही है मैं जानता हूँ ये मेरा हर बिज़्नेस को दोगुना कर देगा.

छोटा : ज़िंदा रहेगा तब करेगा ना...

लाला : यहाँ से दफ्फा हो जा नही तो तेरा फ़ैसला मैं यही कर दूँगा.

बाबा : (हाथ से लाला को इशारा करते हुए ) मैने जो कहा है वो मेरा आखरी फ़ैसला है जिसको भी मेरा फ़ैसला मंजूर है वो यहाँ शॉंक से बैठा रह सकता है जिसको ऐतराज़ है वो छोटे ऑर शम्मी के साथ जा सकता है

बाकी के तमाम मोजूद लोगो ने एक आवाज़ मे एक साथ कहा " हमे आपके फ़ैसले से कोई ऐतराज़ नही है" उसके बाद बाबा के इसरार पर आज पहली बार मैं बाबा की कुर्सी पर जाके बैठ गया ऑर मुझे जैसा बाबा ने समझाया था मैने सबको उनके हिस्से के बिज़्नेस चलाने को दे दिए. कुछ देर वहाँ बैठने बाद बाबा आराम करने के लिए चले गये इसलिए मैं उनको वापिस उनके कमरे मे छोड़ आया ऑर खुद वापिस आके अपने बाकी लोगो के पास जाके बैठ गया ऑर हम सब को उनके काम को चलाने के बारे मे समझाने लगा. रात को सब ज़िद्द करने लगे कि मेरे कुर्सी संभालने की खुशी मे जशन होना चाहिए इसलिए रात को लड़कियो को बुलाया जिन्होने महफ़िल मे चार-चाँद लगा दिए ओर तमाम आए मेहमानो को मदहोश कर दिया.

ऐसे ही कुछ दिन गुज़र गये अब मैं सारा काम सीख चुका था. हर काम को मैं बहुत अच्छे से मुक़ाम्मल कर रहा था जिसे देख कर बाबा भी बहुत खुश हो रहे थे कि उनका फ़ैसला सही था. मैं सोच भी नही सकता था कि जहाँ मुझे एक इनफॉर्मर बनाके भेजा गया था वहाँ के तमाम गिरोह का अब मैं हेड बन गया था. अब मैं मेरी मर्ज़ी का मालिक था इसलिए अपने तरीके से अपने बिज़्नेस को चलाने मे लग गया कुछ ही दिन मे मैने बिज़्नेस को बढ़ाना शुरू कर दिया. मेरे बिज़्नेस मे जितनी भी रुकावट थी सबको मैने हटा दिया था क्योंकि जो भी मेरे काम के बीच मे आ रहा था मेरे लोग उसे ख़तम करते जा रहे थे. अब तो ये आलम था कि छोटा ऑर शम्मी भी डर कर कही अंडरग्राउंड हो गये थे मेरी ताक़त दिन-ओ-दिन बढ़ती जा रही ऑर मेरा गॅंग भी बड़ा होता जा रहा था जिसमे मैने हर काम के लिए स्पेशलिस्ट रखे हुए थे जो मेरे एक हुकुम के गुलाम थे. मैं ताक़त के नशे मे ये भी भूल चुका था कि मुझे ख़ान ने किस मक़सद से यहाँ भेजा था. ना तो मेरे दिमाग़ मे नाज़ी थी ना ही हीना ऑर नाही फ़िज़ा थी यहाँ तक की मुझे बेटा मानने वाले बाबा को भी मैं भूल गया. ऐसे ही मुझे काम करते हुए 1 महीना हो गया था.

लेकिन महीने के आखरी दिन जब तमाम लोग अपने बिज़्नेस की कमाई मेरे पास लेके आए तो मैने उन सबको उनका हिस्सा वापिस दे दिया ऑर बाकी का तमाम पैसा बाबा की ही तरह सेफ मे रखने चला गया जो नीचे बाबा के कमरे के नीचे जाती एक सुरंग मे बना हुआ था जहाँ सिर्फ़ मैं ही जा सकता था क्योंकि बाबा ने सिर्फ़ मुझे ही वहाँ जाने का रास्ता बताया था. सबसे पहले मैं सारा पैसा लेके बाबा के पास गया ऑर उनको हिसाब दिया.

मैं : बाबा ये तमाम महीने की कलेक्षन है.

बाबा : बेटा ये तो पहले से काफ़ी ज़्यादा लग रही है तुमने सबको उनका हिस्सा तो दे दिया है ना.

मैं : जी बाबा सबको दे दिया है.

बाबा : ठीक है बेटा... अब मुझे नीचे लेके चलो ऑर एक बार मेरे सामने तुम मुझे सेफ खोल कर दिखा दो तो मुझे भी तसल्ली हो जाएगी.

मैं : जी बाबा.

उसके बाद मैने बाबा को उनकी व्हील चेयर पर बिठाया ऑर उनको नीचे बनी सुरंग मे ले गया ऑर उनको तमाम सेफ खोल कर दिखा दिए जिसे देखकर वो बहुत खुश हुए. बाबा तमाम सेफ के बारे मे मुझे साथ-साथ बताते भी जा रहे थे कि कहाँ कौनसी चीज़ पड़ी है. तभी एक छोटे से लॉकर पर मेरी नज़र गई.

मैं : बाबा उसमे क्या है.(छोटे लॉकर की तरफ इशारा करते हुए)

बाबा : बेटा उसमे हमारे बिज़्नेस की ही फाइल्स है जिसमे हमारे तमाम दुश्मनो के नाम हैं साथ ही कुछ फाइल्स ऐसी है जिसमे हमारे पोलीस मे कौन-कौन से लोग काम करते हैं उनके नाम हैं ऑर बाकी कुछ हमारे विदेशो मे जो लोग कॉंटॅक्ट्स है उनकी डीटेल्स हैं.

मैं : तो बाबा अपने वो फाइल मुझे पहले क्यो नही दी दुश्मनो का भी इलाज कर देते.

बाबा : नही बेटा अभी वो लोग अंडरग्राउंड है तो रहने दो तुम अपने काम पर ध्यान दो जब वो लोग अपनी टाँग अड़ाएँगे तो उनको रास्ते से हटा देना.

मैं : जी बाबा जैसा आप कहे.... बाबा आपको ऐतराज़ ना हो तो क्या मैं वो लॉकर भी खोल कर देख लूँ. (छोटे लॉकर की तरफ इशारा करते हुए)

बाबा :(मुस्कुराते हुए) ऐतराज़ कैसा बेटा अब तो सब तुम्हारा है जो चाहे करो.

मैं : (खुश होते हुए) शुक्रिया बाबा.

Update-47

Ye sunkar rubi ko jane kya hua usne uss aadmi ki kalayi pakdi jisme usne gun pakdi thi or jhatke se ghuma diya or bhaag kar meri taraf aa gai. ab wo aadmi akela tha or uske hath se gun gir chuki thi maine jaldi se zameen par giri uski pistol ko thokar maar kar door faink diya or uski taraf gusse se badha or jaate hi maine uski naak par apne sir ki takkar maari jisse uske naak se khun nikalne laga. ab maine uski ek baaju ko pakda or sidha karke ghuma diya or apne ghutne ke jod me phasa liya or ulti taraf khinch diya jisse uska hath toot gaya wo dard se cheekh or chilla raha tha. ab yhi maine uske dusre hath ke sath bhi kiya or ab uske dono hath toot chuke the wo zameen par gira hua rou raha tha or chilla raha tha main jaldi se uss ped ke pass gaya jahan wo lataayen latak rahi thi wahan se maine kuch lataayen todi or unka ek phanda bana liya or wapis aake uske ek pair me daal diya jabki dusra seera maine jeep ke pichhe baandh diya. Maine rubi ko sath liya or hum dono jaldi se jeep me baith gaye. ab main tez raftaar se jeep chalani shuru kar di or bandha hone ki wajah se wo aadmi bhi sadak par gashit ta hua hamaare sath aa raha tha. Kuch hi der me hum apne ilaake me pohonch chuke the jahan sab log usko gaur se dekh rahe the. tabhi rasool or mere kuch log daudte hue meri jeep ke pass aye.

Rasool : shera ye aadmi kaun hai.

Main : mujh par hamla hua tha aaj... 5 log the bas yhi bacha hai.

Rasool : kya baat kar raha hai tum dono thik to ho.

Main : Hum thik hai.... lekin iska kya karna hai ab.

Rasool : karna kya hai isko to mere hawaley karde.

Rubi : bhai jaan jyaadaa mat marna pehle hi shera ne isko bahut maara hai.

Rasool : (hansatey hue) Achha bhabhi.... Shera tu khandar par chala jana baba ke pass isko main dekh lunga.

Main : thik hai...

Uske baad maine fir se jeep dauda di or apne ghar ke samne laake jeep ko rok diya. fir hum dono jaise hi jeep se utare to baaki ke log hamaare pass aa gaye or hmara haal-chaal puchhne lage. Maine rubi ko amma ke pass choda or khud khandar par chala gaya. Wahan lala pehle se mojud tha jisne mujhe gale lagakar mera istaqbaal kiya. Fir hum dono baba ke pass chale gaye. Baba ko maine tamaam hadse ke bare me bata diya.

Baba : Hhhmmm to wo zaleel insaan yahan tak pohonch gaya hai beta isliye main tumko kehta tha ki tum ab apni kursi sambhaal hi lo taaki ye roz-roz ka khun kharab to band ho jaye. jab tak meri kursi khaali rahegi koi na koi usko hasil karne ki koshish karta rahega.

Main : to baba mere liye kya hukum hai.

Baba : main chahta hun ki tum meri kursi ko sambhaal lo... pata nahi ab main or kitne din hun main chahta hun ki mere hote hue hi tum meri kursi par baith jao.

Main : lekin baba abhi main thik kaha hua hun mujhe kuch bhi yaad nahi hai.

Baba : nahi thik hue to naa sahi... tumhe ab tak ka to sab kuch yaad hai naa bas utna hi kaafi hai baaki main tumko sab bata dunga.

Lala : haa shera baba thik keh rahe hain.

Main : thik hai baba.... jaisa aap behtar samjhe.

Meri ye baat sunkar baba bahut khush hue or mujhe gale se laga liya.

Baba : lala jao jake meeting ka elaan karo or sabko yahan bulao or bata do ki mera waris aa gaya hai apni kursi sambhalne ke liye.

lala : ji baba abhi sabko phone kar deta hun.

Baba : shera beta mere pass aao or main tumko hamaare business ka tamaam raaz bata deta hun lekin pehle jake darwaza band karke aao.

Uske baad maine darwaza band kar diya or baba ke pass jake baith gaya baba ne mujhe tamaam business ke bare me bataayaa or ye bhi bataayaa ki kounsa business kaise chalana hai or usko koun aadmi behtar chala sakta hai. Sath hi unhone mujhe tamaam daulat or paise ke bare me bataayaa fir unhone aaj tak kamaye tamaam sone ke bare me mujhe bataayaa jiske pichhe chhota pada tha or mujhe baba ne ye bhi bataayaa ki tamam daulat kaha par padi hai or har safe ko kholne ka tareeka kya hai.

Shaam hone tak hamaare dhandhe se jude tamaam log wahan mojud the jinme chhota sheikh or shammi bhi tha. sabka izzat ke sath istaqbaal hua or unko hall me bith diya gaya. Main baba ke sath hi tha kyonki baba ab chal nahi paate the isliye hamane unhe wheel chair par bitha diya or main khud wheel chair ko chala kar baba ko hall tak lekar gaya. Baba ke aate hi sab log baba ke liye khade ho gaye or baba ne hath ke ishare se sabko baithne ko kaha. Kuch der sab log baba ki tabiyat puchhte rahe. Uske baad baba ne kaam ki baat shuru ki.

Baba : aap sab itne kam waqt me yahan aaye uska shukriya.

1 Admi : baba lekin apne aaj itne din baad hum sab ko ek sath kaise yaad farmaya.

Baba : Aap sab to jante hi hain ki ab mujh me wo taqat nahi rahi ki main apna itna faila hua business empire sambhaal saku isliye maine apna ye sara business aap me se hi kisi ek ko dene ka faisla kiya hai.

Chhota : isme faisla kya karna hai baba aapka beta main hun to aapki kursi par pehla haq bhi mera hai.

Baba : beta ho jane se kabiliyat nahi aa jati. Main apni kursi usko dunga jo naa sirf meri kursi ko sambhaal sake balki mere banaye business ko badha bhi sake.

Aadmi : Agar chhota nahi hai to fir wo koun hai baba.

Baba : Aaj ke baad se shera hi meri kursi sambhalega iska har hukum mera hukum hai ab se ye jisko jo bhi dhandha dega usko wahi sambhalna hoga or maheene ki saari kamayi laake tum sab pehle ki tarah ab shera ko doge jisme se shera tum logo ka hissa tumko dega.

Mera naam sunte hi wahan baithe tamaam log khush ho gaye or mere liye taaliyaan bajane lage tabhi shammi or chhote ka munh gusse se laal ho gaya.

Chhota : baba aap ye thik nahi kar rahe mera haq aap kisi or ko kaise de sakte hain.

Baba : mujhe tumse seekhne ki jarurat nahi hai ki mujhe kya karna chahiye or kya nahi samjhe tumko jo mila hai usi se kaam chalao kyonki tum uske hi layak ho.

Chhota : (gussa hote hue) mujhe aapki khairaat nahi chahiye jo aapne mujhe diya hai wo bhi sambhaal kar rakho main jaa raha hun yahan se aapko kya lagta hai aapki kursi par agar ye baith jayega to ye mujhse behtar business ko sambhaal payega.

Baba : mujhe lagta nahi hai main janta hun ye mera har business ko doguna kar dega.

Chhota : Zinda rahega tab karega naa...

Lala : yahan se daffa ho ja nahi to tera faisla main yhi kar dunga.

Baba : (hath se lala ko ishara karte hue ) maine jo kaha hai wo mera aakhri faisla hai jisko bhi mera faisla manjoor hai wo yahan shonk se baitha reh sakta hai jisko aitraaz hai wo chhote or shammi ke sath jaa sakta hai

Baaki ke tamaam mojud log ne ek awaaz me ek sath kaha " hume apke faisle se koi aitraaz nahi hai" Uske baad baba ke israr par aaj pehli baar main baba ki kursi par jaake baith gaya or mujhe jaisa baba ne samjhaya tha maine sabko unke hisse ke business chalane ko de diye. Kuch der wahan baithne baad baba araam karne ke liye chale gaye isliye main unko wapis unke kamre me chod aaya or khud wapis aake apne baaki logo ke pass jake baith gaya or hum sab ko unke kaam ko chalane ke bare me samjhane laga. Raat ko sab zidd karne lage ki mere kursi sambhalne ki khushi me jashan hona chahiye isliye raat ko ladkiyo ko bulaya jinhone mehfil me chaar-chaand laga diye or tamaam aaye mehmaano ko madhosh kar diya.

Aise hi kuch din guzar gaye ab main sara kaam seekh chuka tha. Har kaam ko main bahut achhe se muqammal kar raha tha jisse dekh kar baba bhi bahut khush ho rahe the ki unka faisla sahi tha. main soch bhi nahi skta tha ki jahan mujhe ek informer banake bheja gaya tha wahan ke tamaam giroh ka ab main head ban gaya tha. ab main meri marzi ka malik tha isliye apne tareeke se apne business ko chalane me lag gaya kuch hi din me maine business ko badhana shuru kar diya. Mere business me jitni bhi rukawat thi sabko maine hata diya tha kyonki jo bhi mere kaam ke bich me aa raha tha mere log usse khatam karte jaa rahe the. Ab to ye aalam tha ki chhota or shammi bhi darr kar kahi underground ho gaye the meri taqal din-o-din badhti jaa rahi or mera gang bhi bada hota jaa raha tha jisme maine har kaam ke liye specialist rakhe hue the jo mere ek hukum ke gulaam the. Main taqat ke nashe me ye bhi bhul chuka tha ki mujhe khan ne kis maqsad se yahan bheja tha. Na to mere dimaag me nazi thi na hi heena or naahi fiza thi yahan tak ki mujhe beta manne wale baba ko bhi main bhul gaya. Aise hi mujhe kaam karte hue 1 maheena ho gaya tha.

Lekin maheene ke aakhri din jab tamaam log apne business ki kamayi mere pass leke aaye to maine unn sabko unka hissa wapis de diya or baki ka tamaam paisa baba ki hi tarah safe me rakhne chala gaya jo niche baba ke kamre ke niche jaati ek surang me bana hua tha jahan sirf main hi jaa sakta tha kyonki baba ne sirf mujhe hi wahan jaane ka rasta bataayaa tha. Sabse pehle main sara paisa leke baba ke pass gaya or unko hisaab diya.

Main : baba ye tamaam maheene ki collection hai.

Baba : beta ye to pehle se kaafi jyaadaa lag rahi hai tumne sabko unka hissa to de diya hai na.

Main : ji baba sabko de diya hai.

Baba : thik hai beta... Ab mujhe niche leke chalo or ek baar mere samne tum mujhe safe khol kar dikha do to mujhe bhi tasalli ho jayegi.

Main : ji baba.

Uske baad maine baba ko unki wheel chair par bithaya or unko niche bani surang me le gaya or unko tamaam safe khol kar dikha diye jise dekhkar wo bahut khush hue. Baba tamaam safe ke bare me mujhe sath-sath batate bhi jaa rahe the ki kaha kounsi chij padi hai. Tabhi ek chhote se locker par meri nazar gai.

Main : baba usme kya hai.(chhote locker ki taraf ishara karte hue)

Baba : beta usme hamaare business ki hi files hai jisme hamaare tmaam dushmano ke naam hain sath hi kuch files aisi hai jisme hamaare police me koun-koun se log kaam karte hain unke naam hain or baaki kuch hamaare videsho me jo log contacts hai unki details hain.

Main : to baba apane wo file mujhe pehle kyo nahi di dushmano ka bhi ilaaj kar dete.

Baba : nahi beta abhi wo log underground hai to rehne do tum apne kam par dhyaan do jab wo log apni taang adayenge to unko raastey se hata dena.

Main : ji baba jaisa aap kahe.... Baba apko aitraaz na ho to kya main wo locker bhi khol kar dekh loo. (chhote locker ki taraf ishara karte hue)

Baba :(muskurate hue) aitraaz kaisa beta ab to sab tumhara hai jo chahe karo.

Main : (khush hote hue) shukriya baba.

 
अपडेट-48

उसके बाद मैने जल्दी से लॉकर खोला ऑर अपने दुश्मनो की फाइल खोल कर देखने लगा उसमे हर आदमी की फोटो के साथ तमाम डीटेल भी साथ दर्ज थी जिनमे तक़रीबन लोगो को मेरे लोग ख़तम कर चुके थे. उसके बाद मैने दूसरी फाइल उठाई जिसमे हमारे दूसरे मुल्क़ो मे कहाँ-कहाँ कॉंटॅक्ट्स है उन सब के बारे मे था. लेकिन तीसरी फाइल वो थी जिसमे हमारे पोलीस मे कितने लोग काम करते थे उनके बारे मे लिखा था. मैने जल्दी से वो फाइल भी निकाली ऑर 1-1 पेज पलटकर देखने लगा लेकिन एक पेज के आते ही मेरे होश उड़ गये क्योंकि मैं कभी सोच भी नही सकता कि ये इंसान भी धोखेबाज़ निकलेगा मतलब इसी ने राणा की ओर मेरी खबर छोटे तक पहुँचाई थी.

मैं हैरान परेशान उस फाइल मे लगी तस्वीर को देख रहा था. मेरा सारा बदन ठंडा पड़ गया था ऑर मैं समझ नही पा रहा था कि मेरे साथ ये क्या हो गया है. क्योंकि वो तस्वीर किसी ऑर की नही बल्कि इनस्पेक्टर ख़ान ऑर रिज़वाना की थी. इन दोनो पर ही मैने ऐतबार किया था ऑर आज मुझे दोनो तरफ से एक साथ धोखे का झटका लगा था. क्योंकि ख़ान वो इंसान था जिसने मुझे यहाँ भेजा था इस गांग को ख़तम करने के लिए ऑर रिज़वाना वो थी जो मेरे लिए सब कुछ छोड़ने का दावा करती थी मुझसे अपनी जान से भी ज़्यादा प्यार करने का दावा करती थी. अब मुझे सारी कहानी समझ मे आ रही थी कि क्यो रिज़वाना मेरे इतने करीब आई क्यो ख़ान ने मुझे रिज़वाना के पास ही रहने को कहा ऑर क्यो मुझे तेयार करके यहाँ भेजा गया. राणा की मौत, क़ानून की वफ़ादारी, ज़ुर्म का ख़ात्मा सब नाटक था ख़ान का. उन दोनो की तस्वीर देख कर मैं गुस्से से पागल हुआ जा रहा था लेकिन ये बात मैं बड़े शीक साहब (बाबा) को ज़ाहिर नही कर सकता था कि मैं उन दोनो को जानता हूँ ऑर मुझे यहाँ एक इनफॉर्मर बनाके उन्होने ही भेजा है. मेरा दिमाग़ सुन्न हो गया था कुछ समझ नही आ रहा था कि अब मैं क्या करूँ कहाँ जाउ क्योंकि मैं उनके बनाए हुए जाल मे फस गया था ये एक ऐसा दल-दल था जहाँ रह कर ही मैं ज़िंदा रह सकता था क्योंकि अगर अब मैं इस गॅंग को छोड़ता तो मेरे लोग ही मुझे ख़तम कर देते इनसे बच भी जाता तो अब मैं भी क़ानून का मुजरिम था क़ानून मुझे कभी माफ़ नही करता ऑर ज़ाहिर सी बात है अब मुझे क़ानून से माफी मिलने का भी कोई रास्ता नही था. इसलिए जिन लोगो ने मुझे इस मुसीबत मे फसाया था उनको ख़तम करने के बारे मे सोचने लगा. अब मैं ये काम कर भी सकता था क्योंकि अब मैं इस गॅंग का लीडर था. लेकिन इनको अब मैं इनके ही हथियार से मारना चाहता था जैसा धोखा इन्होने मेरे साथ किया था वैसा ही धोखा इनको देना चाहता था. मैं अपने ही ख़यालो मे खोया हुआ था कि अचानक बाबा की आवाज़ मेरे कानो से टकराई...

बाबा : क्या हुआ बेटा कहाँ खो गये...

मैं :(चोन्क्ते हुए) जी... जी कुछ नही बाबा.

बाबा : क्या सोचने लगे....

मैं : कुछ नही बाबा मैं बस तस्वीरे देख रहा था. क्या ये पोलीस मे सब कम करने वाले लोग हमारे हैं.

बाबा : बेटा किसी ज़माने मे ये सब लोग हमारे ही थे लेकिन जब से छोटा अलग हुआ है गॅंग से तो उसके लोग उसके लिए काम करते हैं ऑर हमारे लोग हमारे लिए.

मैं : क्या बाबा उस डिपार्टमेंट मे हमारे लोग भी है.

बाबा : हाँ बेटा अब भी हमारे लोग वहाँ मोजूद है.

मैने ये बात सुनते ही जल्दी से लॉकर बंद किया ऑर वो फाइल उठा के ले आया जिसमे तमाम इनफॉर्मर्स की इन्फर्मेशन थी....

मैं : बताओ बाबा इसमे हमारे लोग कौन है.

बाबा : लेकिन तुम्हे आज पोलीस मे हमारे इनफॉर्मर की क्या ज़रूरत पड़ गई अचानक.

मैं : बाबा मैं हर जगह से गॅंग को मजबूत करना चाहता हूँ कही कोई कमज़ोरी बाकी नही रहने देना चाहता इसलिए जो छोटे के लिए काम करते हैं उनको ख़तम करवा दूँगा जिससे छोटे का इन्फर्मेशन रॅकेट टूट जाएगा.

बाबा : (खुश होते हुए) ये हुई ना बात... तुमने ठीक कहा अगर उसका धंधा ख़तम कर दिया तो वो भी ख़तम हो जाएगा... लेकिन बेटा ये तुम करोगे कैसे.

मैं : बाबा आप बस देखते जाइए मैं क्या-क्या करता हूँ.

बाबा : (मुस्कुराते हुए) आज क्या बात है बहुत दिन बाद मुझे मेरे पुराना शेरा नज़र आ रहा है तुम्हारे अंदर.

मैं : बस बाबा अब तो आपको पुराने वेल शेरा से भी क़ाबिल ओर ख़तरनाक बनके दिखौँगा.

उसके बाद मैने वो फाइल को पकड़ा ऑर बाबा को उपर उनके कमरे मे ले गया ऑर बेड पर लिटा कर खुद अपने ऑफीस मे आ गया. कुछ देर फाइल को अच्छे से देखने के बाद मैं याद करने लगा कि हेड क्वॉर्टर्स मे मैने इन सब लोगो मे से किसको देखा है जो हमारे लिए काम करता है. लेकिन अफ़सोस कोई भी चेहरा मेरे देखे हुए चेहरो से नही मिलता था सब नये ही चेहरे थे. इसका मतलब ख़ान ने सिर्फ़ अपने लोगो से ही मुझे मिलवाया था जो उसके लिए काम करते थे. मैं अब आगे क्या करना है उसके बारे मे ही सोच रहा था. आज के इस हादसे ने कई राज़ खोल दिए थे. अब मुझे इतना तो पता चल ही गया था कि कौन मेरा अपना है ओर कौन अपना होने का दिखावा कर रहा है एक तरफ ख़ान ऑर रिज़वाना थे जो मुझसे शीक साहब की दौलत का पता निकलवाने के लिए इस्तेमाल कर रहे थे ऑर मेरे सामने मेरे हम दर्द बन रहे थे.

दूसरी तरफ बाबा थे फ़िज़ा थी नाज़ी थी हीना थी जिन्होने बिना किसी लालच के मेरी देख भाल की मुझे इतना प्यार दिया ऑर मैं ताक़त के नशे मे चूर सब अहसान भूल गया मेरे बिना जाने वो कैसे होंगे ऑर मुझे कितना याद करते होंगे. मैं तो उन लोगो की ज़िम्मेवारी भी ख़ान को दे आया था जाने उन लोगो का मेरे बिना क्या हाल होगा. यहाँ आने के बाद मैने एक बार भी उनके बारे मे जानना ज़रूरी नही समझा ना ही ख़ान ने मुझे उनके बारे मे कुछ बताया. अब मुझे खुद की खुद-गर्जी पर गुस्सा आ रहा था कि मैं उनका प्यार भूल गया उनके किए हुए मुझ पर अहसान भूल गया. फिर मुझे मेरी उनके साथ गुज़री हुई ज़िंदगी का एक-एक लम्हा याद आने लगा.

कैसे बाबा फ़िज़ा ऑर नाज़ी ने मेरी जान बचाई मेरी इतने वक़्त तक देख-भाल की कैसे बाबा ने मुझे अपना बेटा बना लिया ऑर मुझ पर अपने बेटे से भी ज़्यादा ऐतबार किया. कैसे जब मैं बीमार हुआ था तो हीना मेरे लिए शहर से डॉक्टर लेके आई थी ऑर मेरे बीमार होने पर अपने अब्बू से झगड़ा करके अपने मुलाज़िम मेरे खेतो मे लगा दिए थे. वो सब कुछ किसी फिल्म की तरह मेरे आँखो के सामने चलने लगा. अब मैं अकेला बैठा रो भी रहा था ऑर उन सब को याद भी कर रहा था. वो दिन मेरा उदासी के साथ ही गुज़रा मुझे अपनी ग़लती का अहसास हो रहा था कि जाने-अंजाने मैने उनको भी मुसीबत मे डाल दिया है. रात काफ़ी हो गई थी इसलिए मैने घर जाने का सोचा ऑर अपनी सोचो के साथ मैं गाड़ी मे बैठ गया. ड्राइवर ने मुझे मेरे घर के सामने उतार दिया. मैने बुझे हुए दिल के साथ दरवाज़ा खट-खाटाया तो रूबी ने जल्दी से दरवाज़ा खोला ऑर एक दिल-क़श मुस्कान के साथ मेरा स्वागत किया.

रूबी : आज बहुत देर कर दी तुमने कहाँ थे इतनी देर.

मैं : कही नही बस ऐसे ही बैठा था ऑफीस मे.

रूबी : (मेरा हाथ पकड़कर मुझे घर के अंदर ले जाते हुए) क्या बात है आज मेरा शेर उदास लग रहा है कुछ हुआ क्या.

मैं : (ना मे सिर हिलाते हुए) बस ऐसे ही आज दिल उदास है

रूबी : (मुझे बेड पर बिठा कर गले से लगते हुए) अगर तुमको बुरा ना लगे तो तुम मुझे अपनी परेशानी की वजह बता सकते हो इससे मन हल्का हो जाएगा तुम्हारा.

मैं : नही कुछ नही हुआ बस वैसे ही सिर मे ज़रा दर्द है. (मैं रूबी को अपना बीता हुआ कल नही बताना चाहता था इसलिए बात को घुमा दिया)

रूबी : अच्छा ऐसा करो खाना खा लो फिर मैं तुम्हारा मूड ऑर सिर दर्द दोनो ठीक कर दूँगी.

मैं : मुझे भूख नही है तुम खा लो.

रूबी : अर्रे... ऐसे कैसे भूख नही है. भूखे रहने से भी सिर मे दर्द होता है जानते हो... तुम यही बैठो मैं खाना लेके आती हूँ तुम्हारे लिए आज मैं मेरी जान को अपने हाथो से खिलाउन्गी (मुस्कुराते हुए वो रसोई मे चली गई)

मैं कुछ देर उसको जाते हुए देखता रहा फिर मैं वापिस अपनी सोचो मे गुम्म हो गया. कुछ ही देर मे रूबी खाना ले आई ऑर मेरे साथ आके बैठ गई ऑर अपने हाथो से मुझे खाना खिलाने लगी. उसको इस तरह खाना खिलाता देख कर मुझे नाज़ी ऑर फ़िज़ा की याद आ गई क्योंकि जब मैं नाराज़ हो जाता था तो वो भी मुझे ऐसे ही खाना खिलाती थी. उसको इतने प्यार से खाना खिलाते देख कर मैं रूबी को ना नही कह पाया ऑर भूख ना होने के बावजूद मैं खाना खाने लगा साथ ही मैने भी रोटी उठाई ओर अपने हाथ से रूबी को खिलाने लगा. ये पहली बार था जब मैं रूबी को इतने प्यार से देख रहा था वो मुझे इस तरह खाना खिलाते देख कर बहुत हेरान थी ऑर बिना कुछ बोले वो भी खाना खाने लगी अब हम दोनो एक दूसरे को खाना खिला रहे थे.

खाने के बाद मैं बिस्तर पर लेट गया ऑर रूबी हमेशा की तरह अपना नाइट गाउन पहनकर आ गई ऑर मेरे साथ आके लेट गई. वो आज भी मुझे वैसे ही प्यार से देख रही थी जैसे पहले दिन मिली थी तब देख रही थी.

मैं : क्या देख रही हो.

रूबी : देख रही हूँ तुम कितने बदल गये हो

मैं : क्या बदल गया.

रूबी : पहले तुमने कभी मुझसे ये भी नही पूछा था कि मैने खाया या नही ऑर आज तुमने खुद मुझे खाना खिलाया.

मैं : आज इसलिए खिलाया क्योंकि मेरा मन था तुमको खाना खिलाने का मैं जानता हूँ तुम मेरे बाद ही खाना खाती हो.

रूबी : (बिना कुछ बोले मुझे गले से लगते हुए) मुझे ये वाला शेरा बहुत पसंद है ऑर इसको मैं पहले से भी ज़्यादा प्यार करने लगी हूँ. मुझे तुम्हारी सबसे अच्छी बात जानते हो क्या लगी.

मैं : क्या....

रूबी : तुम अब दूसरो का बहुत सोचते हो पहले ऐसे नही थे.

मैं : रूबी तुमको एक सवाल पुच्छू अगर बुरा ना मानो तो...

रूबी : तुम्हारी कभी कोई बात बुरी नही लगती मेरी जान पुछो क्या पुच्छना है.

मैं : तुम मुझे इतना प्यार करती हो फिर भी कभी अपना हक़ नही जमाती मुझ पर ना ही तुमने कभी मेरे काम के बारे मे पूछा ना कभी ये पूछा कि मैं कहाँ था किसके साथ था ऐसा क्यो.

रूबी : (मुस्कुराते हुए) क्योंकि एक बार तुमने ही कहा थे कि अपनी औकात मे रहा करो मैं कहाँ जाता हूँ क्या करता हूँ इससे तुमको कोई मतलब नही है ऑर हर बात तुमको बतानी मैं ज़रूरी नही समझता इसलिए तब से मैं हमेशा अपनी औकात मे ही रहती हूँ.

मैं : पहले जो भी बोला था उसको भूल जाओ ऑर मुझे माफ़ कर दो... अब जो कह रहा हूँ वो याद रखना तुम जब हक़ जमाती हो तो अच्छा लगता है ऐसा लगता है मेरा भी कोई अपना है.

रूबी : (खुश होके मुझे ज़ोर से गले लगाते हुए) हाए मैं मर जाउ.... आज तुम मेरी जान लेके रहोगे.... ऐसी बाते ना करो कही मैं पागल ही ना हो जाउ खुशी से.

मैं : (रूबी का चेहरा अपने दोनो हाथो से पकड़ते हुए) तुम जब हँसती हो तो बहुत अच्छी लगती हो इसलिए हँसती रहा करो.

रूबी : (खामोश होके हाँ मे सिर हिलाते हुए) हमम्म

मैं : तुमको पता है तुम बहुत अच्छी हो... (रूबी का माथा चूमते हुए)

रूबी : (बिना कुछ बोले मेरे ऑर पास सरकते हुए ऑर अपनी आँखें बंद करते हुए) हमम्म

मैने अपना चेहरा उसके चेहरे के एक दम सामने कर दिया ऑर हल्के से उसके गाल को चूम लिया उसने अपनी आँखें खोली ऑर मुझे मुस्कुरा कर देखने लगी. मैने एक बार फिर से उसकी गाल को चूम लिया. इस बार उसने भी मेरा चेहरा अपने दोनो हाथो मे थाम लिया ऑर बड़े प्यार से मेरे माथे पर ऑर गालो को चूम लिया. अब मैने उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए जिससे मैं एक दम मदहोश सा हो गया हम दोनो की आँखें अपने आप बंद हो गई. कुछ देर हम दोनो एक दूसरे के होंठों के साथ अपने होंठ जोड़कर लेटे रहे फिर उसने धीरे-धीरे अपने होंठों को हरकत दी ओर हल्के से अपने होंठ खोलकर मेरे नीचे वाले होंठों को अपने होंठों मे समा लिया ऑर धीरे-धीरे चूसने लगी. मैने भी धीरे-धीरे उसके उपर वाले होंठ को चूसना शुरू कर दिया कुछ ही देर मे हमारे चूमने मे कशिश आने लगी हम दोनो एक दूसरे के शिद्दत से होंठ चूसने लगे. अब हम दोनो की साँसे भी तेज़ होने लगी थी.

हम दोनो ने एक दूसरे को इतनी कसकर गले से लगा रखा था जैसे एक दूसरे के अंदर समा जाना चाहते हो. उसके होंठ चूस्ते हुए मैने उसकी पीठ पर अपने हाथ फेरने शुरू कर दिए इस पर वो भी अपना एक हाथ मेरे गले मे डाले लेटी रही ऑर दूसरा हाथ मेरी छाती पर हाथ फेरने लगी. साथ ही उसने अपनी दोनो टाँगो मे मेरी टाँगो को जाकड़ लिया. कुछ देर ऐसे ही लेटे रहने के बाद वो मेरे उपर आके लेट गई ऑर फिर से मेरे होंठ चूसने लगी. मैं मज़े से मदहोश हो गया था इसलिए अपने पूरा जिस्म ढीला छोड़ दिया. अब रूबी मुझे प्यार कर रही थी वो कभी मेरे पूरे चेहरे को चूमती कभी होंठों को. उसने मेरे उपर बैठे-बैठे ही अपना गाउन उतार दिया अब वो सिर्फ़ ब्रा ऑर अंडरवेर मे थी. कुछ देर मुझे चूमने के बाद उसने मेरे सिर के नीचे अपना हाथ रखा ऑर मुझे थोड़ा सा उपर की तरफ उठा दिया. उसका इशारा समझते हुए मैं जल्दी से उठ गया उसने मेरे होंठ चूस्ते हुए ही मेरी शर्ट के बटन खोले ऑर फिर दुबारा मेरी छाती पर हाथ रख कर नीचे को दबा दिया जिससे मैं वापिस बेड पर लेट गया. अब वो दुबारा मेरे चेहरे को चूम रही थी ऑर नीचे के तरफ आ रही थी. मेरे चेहरे को चूमते हुए पहले वो गर्दन तक आई ओर फिर मेरी छाती पर आके चूमने ऑर चूसने लगी. मैं मज़े से मधहोश हुआ पड़ा था मुझे उसके छाती पर चूमने ऑर चूसने से बे-इंतेहा मज़ा आ रहा था अब वो ओर नीचे की तरफ बढ़ रही थी. अब उसके हाथ मेरी पेंट बेल्ट पर थे लेकिन उसके होंठ मेरे पेट पर अपना कमाल दिखा रहे थे. उसने जल्दी से मेरी पेंट की बेल्ट का बक्कल खोला ओर फिर एक ही झटके मे बेल्ट को खींच का पेंट से जुदा कर दिया ऑर उसको बेड से नीचे फेंक दिया.

अब उसने जल्दी से मेरी पेंट के हुक्क खोले ऑर झटके से पेंट को घुटने तक नीचे कर दिया. अब वो अंडरवेर के उपर से ही मेरे लंड को चूम रही थी ऑर उस पर हाथ फेर रही थी. मैं मज़े की दुनिया मे सैर कर रहा था तभी उसने मेरे पेट पर चूमते-चूमते जीभ फेरना शुरू कर दिया ऑर धीरे-धीरे नीचे को आने लगी. अब उसने अपने दोनो हाथो की उंगालियाँ मेरे अंडरवेर मे फसा ली ऑर उसको धीरे-धीरे नीचे की तरफ खींचने लगी. कुछ ही देर मे मेरा अंडरवेर भी घुटने तक आ गया था. मेरा लंड लोहे की तरह सख़्त हुआ पड़ा था. वो मेरे लंड के चारो तरफ चूम रही थी ऑर अपनी जीभ फेर रही थी जिससे मुझे बेहद मज़ा आ रहा था. उसके बाद उसने एक हाथ से मेरे लंड को पकड़ा ऑर लंड की टोपी पर हल्के-हल्के चूमने लगी. मैने मज़े से अपना हाथ उसके सिर पा रख दिया ताकि वो मेरे पूरे लंड को मुँह मे ले सके लेकिन उसने मेरा हाथ पकड़ लिया ऑर वापिस बेड पर रख दिया वो ऐसे ही कुछ देर तक मेरे लंड को चूमती रही अब उसने अपना थोड़ा सा मुँह खोला ऑर टोपी के चारो तरफ ज़ुबान को गोल-गोल घुमाने लगी. कुछ देर ऐसे ही करने के बाद उसने अपने एक हाथ से मेरे लंड को पकड़ा ऑर एक दम से अपना मुँह खोल के मेरा आधा लंड अपने मुँह मे डाल लिया जो उसके हलक तक जा रहा था कुछ देर वैसे ही रहने के बाद उसके लंड को थोड़ा मुँह से बाहर निकाला ऑर मुँह के अंदर भी वो लंड पर अपनी ज़ुबान को गोल-गोल घुमाने लगी. साथ ही अपने मुँह को भी अब उसने हिलाना शुरू कर दिया था. कुछ देर ऐसे करने के बाद वो तेज़-तेज़ मेरे लंड को चूस रही थी ऑर अपने दोनो हाथ मेरी छाती पर फेर रही थी. मैं मज़े की वादियो मे खो चुका था इसलिए मुझे नही पता कब उसने अपनी ब्रा ऑर अंडरवेर उतार दी थी.

कुछ देर मेरा लंड चूसने के बाद रूबी वापिस मेरे उपर आके लेट गई ऑर फिर से मेरे होंठ चूसने लगी साथ ही अपनी चूत को मेरे लंड के उपर रगड़ने लगी. मैने जल्दी से अपने हाथ नीचे किया ऑर लंड को पकड़ कर चूत की छेद पर अड्जस्ट किया लेकिन रूबी ने फिर से मेरा हाथ पकड़ लिया ऑर होंठ चुस्ते हुए ही ना मे सिर हिला दिया. उसकी चूत लगातार पानी छोड़ रही थी जिससे मेरा लंड भी पूरा गीला हो गया था. अब शायद उससे भी बर्दाश्त करना मुश्किल हो गया था इसलिए उसने खुद अपना एक हाथ नीचे ले जा कर मेरे लंड को पकड़ा ऑर उसको अपनी चूत के छेद पर सेट कर दिया ऑर वापिस मेरे गाल को चूमने लगी साथ ही उसके होंठ मेरे कान के एक दम पास आ गया. इतने वक़्त मे ये पहला अल्फ़ाज़ था जो उसके मुँह से निकला था.

रूबी : आराम से डालना धीरे-धीरे झटका मत मारना.

मैं : हमम्म्म

रूबी : जब मैं रुकने को कहूँ तो रुक जाना ठीक है

मैं : हमम्म

उसके बाद उसने मेरे लंड पर अपनी चूत का दबाव बढ़ाना शुरू कर दिया ऑर खुद साथ-साथ उपर नीचे भी होने लगी लेकिन उसकी रफ़्तार बहुत धीरे थी. कुछ ही देर मे मेरा आधा लंड उसकी चूत मे उतर चुका था. वो आधे लंड को ही धीरे-धीरे अंदर बाहर कर रही थी. अब मुझसे बर्दाश्त करना मुश्किल हो रहा था इसलिए उसके मना करने के बावजूद मैने अपने दोनो हाथ उसकी गान्ड पर रख दिए ऑर एक जोरदार नीचे से झटका मारा जिससे मेरा लंड जड़ तक पूरा उसकी चूत मे उतर गया. साथ ही एक तेज़ सस्सस्स आअहह आयययययीीईई रूबी के मुँह से निकल गई.

रूबी : कहा था ना झटका मत मारना... जंगली कही के....

मैं : (मुस्कुराते हुए) सॉरी.... मुझसे बर्दाश्त नही हो रहा था.

वो बिन कुछ बोले वापिस मेरे होंठ चूसने लगी ऑर अब वैसे ही मेरे लंड पर बैठी थी अब वो सिर्फ़ मेरे होंठ चूस रही थी नीचे से अपनी गान्ड नही हिला रही थी. मेरा पूरा लंड उसके अंदर ही था जिसको उसकी चूत की दीवारो ने सख्ती से जकड़ा हुआ था. थोड़ी देर ऐसे ही रहने के बाद अब उसने धीरे-धीरे हिलना शुरू कर दिया जिससे मेरा लंड भी उसकी चूत मे अंदर बाहर होने लगा. अब वो मेरी छाती को बार-बार चूम रही थी ऑर साथ मे अपनी गान्ड भी हिला रही थी. अब उसने मेरे दोनो हाथो को अपने हाथो से पकड़ा ऑर मेरे हाथ अपने मम्मों पर रख दिए जिन्हे मैने थाम लिया ऑर दबाने लगा अब उसका उछल्ना भी तेज़ हो गया था शायद वो फारिग होने के करीब थी इसलिए उसने तेज़-तेज़ अपनी गान्ड को हिलाना शुरू कर दिया उसके मुँह से निकलने वाली सस्सस्स सस्सस्स भी अब काफ़ी तेज़ आवाज़ मे निकल रही थी. मैने भी उसके मम्मों को छोड़कर सिर्फ़ उसके निपल्स को पकड़ लिया ऑर अपनी उंगलियो से दबाने ऑर मरोड़ने लगा. कुछ देर ऐसे ही उपर नीचे होने के बाद रूबी का पूरा बदन झटके खाने लगा ऑर उसका मुँह खुल गया कुछ देर के लिए वो फिर से मेरे उपर बैठ गई ऑर हिलना बंद कर दिया थोड़ी देर ऐसे ही रहने के बाद वो मेरे उपर लेट गई ऑर तेज़-तेज़ सांस लेने लगी साथ ही मेरी छाती पर अपना हाथ फेरने लगी. मुझे अपने लंड पर पहले से ज़्यादा गीलापन महसूस हो रहा था. अब उसने मेरे दोनो हाथ जो उसके मम्मों पर थे वहाँ से उठा कर अपनी कमर पर रख दिए ऑर खुद घूम कर बेड पर आ गई ऑर मुझे उपर आने का इशारा किया. मैं बिना चूत से लंड को बाहर निकाले वैसे ही घूम कर उसके उपर आ गया अब उसने फिर से मेरे होंठों पर हमला कर दिया ऑर बुरी तरह से मेरे होंठ चूसने लगी.

 
Update-48

Uske baad maine jaldi se locker khola or apne dushmano ki file khol kar dekhne laga usme har aadmi ki photo ke sath tamaam detail bhi sath darj thi jinme taqreeban logo ko mere log khatam kar chuke the. Uske baad maine doosri file uthayi jisme hamaare dusre mulqo me kaha-kaha contacts hai unn sab ke bare me tha. Lekin teesri file wo thi jisme hamaare police me kitne log kaam karte the unke bare me likha tha. maine jaldi se wo file bhi nikali or 1-1 page paltakar dekhne laga lekin ek page ke aate hi mere hosh udd gaye kyonki main kabhi soch bhi nahi sakta ki ye insaan bhi dhokhebaaz nikalega matlab issi ne raana ki or meri khabar chhote tak pohonchayi thi.

Main hairaan pareshaan uss file me lagi tasveer ko dekh raha tha. Mera sara badan thanda pad gaya tha or main samajh nahi paa raha tha ki mere sath ye kya ho gaya hai. Kyonki wo tasveer kisi or ki nahi balki Inspector khan or rizwana ki thi. Ye dono par hi maine aitbaar kiya tha or aaj mujhe dono taraf se ek sath dhokhe ka jhatka laga tha. kyonki khan wo insaan tha jisne mujhe yahan bheja tha iss gang ko khatam karne ke liye or rizwana wo thi jo mere liye sab kuch chodne ka daava karti thi mujhse apni jaan se bhi jyaadaa pyaar karne ka daava karti thi. Ab mujhe saari kahani samajh me aa rahi thi ki kyo rizwana mere itne kareeb aayi kyo khan ne mujhe rizwana ke pass hi rehne ko kaha or kyo mujhe teiyaar karke yahan bheja gaya. Rana ki maut, Kanoon ki waffadari, zurm ka khatma sab naatak tha khan ka. Unn dono ki tasveer dekh kar main gusse se pagal hua jaa raha tha lekin ye baat main Bade sheikh sahab (baba) ko zahir nahi kar sakta tha ki main unn dono ko janta hun or mujhe yahan ek informer banake unhone hi bheja hai. Mera dimaag sunn ho gaya tha kuch samajh nahi aa raha tha ki ab main kya karu kaha jau kyonki main unke banaye hue jaal me phas gaya tha ye ek aisa dal-dal tha jahan reh kar hi main zinda reh sakta tha kyonki agar ab main iss gang ko chodta to mere log hi mujhe khatam kar dete inse bach bhi jata to ab main bhi kanoon ka mujrim tha kanoon mujhe kabhi maaf nahi karta or zahir si baat hai ab mujhe kanoon se maafi milne ka bhi koi rasta nahi tha. Isliye jinn logo ne mujhe iss musibat me phasaya tha unko khatam karne ke bare me sochne laga. Ab main ye kaam kar bhi sakta tha kyonki ab main iss gang ka leader tha. Lekin inko ab main inke hi hathiyaar se marna chahta tha jaisa dhokha inhone mere sath kiya tha waisa hi dhokha inko dena chahta tha. Main apne hi khayaalo me khoya hua tha ki achanak baba ki awaz mere kaano se takrayi...

Baba : kya hua beta kaha kho gaye...

Main :(chonkte hue) ji... ji kuch nahi baba.

Baba : kya sochne lage....

Main : kuch nahi baba main bas tasveere dekh raha tha. kya ye police me sab kam karne wale log hamaare hain.

Baba : beta kisi zamane me ye sab log hamaare hi the lekin jab se chhota alag hua hai gang se to uske log uske liye kaam karte hain or hamaare log hamaare liye.

Main : kya baba uss department me hamaare log bhi hai.

Baba : haa beta ab bhi hamaare log wahan mojud hai.

Maine ye baat sunte hi jaldi se locker band kiya or wo file utha ke le aaya jisme tamaam informers ki information thi....

Main : bataao baba isme hamaare log koun hai.

Baba : lekin tumhe aaj police me hamaare informer ki kya jarurat pad gai achanak.

Main : baba main har jagah se gang ko majboot karna chahta hun kahi koi kamjori baaki nahi rehne dena chahta isliye jo chhote ke liye kaam karte hain unko khatam karwa dunga jisse chhote ka information racket toot jayega.

Baba : (khush hote hue) ye hui naa baat... tumne thik kaha agar uska dhandha khatam kar diya to wo bhi khatam ho jayega... lekin beta ye tum karoge kaise.

Main : baba aap bas dekhte jayiye main kya-kya karta hun.

Baba : (muskurate hue) aaj kya baat hai bahut din baad mujhe mere purana shera nazar aa raha hai tumhare andar.

Main : bas baba ab to aapko purane wale shera se bhi qabil or khatarnaak banke dikhaunga.

Uske baad maine wo file ko pakda or baba ko upar unke kamre me le gaya or bed par lita kar khud apne office me aa gaya. Kuch der file ko achhe se dekhne ke baad main yaad karne laga ki head quarters me maine inn sab logo me se kisko dekha hai jo hamaare liye kaam karta hai. Lekin afsos koi bhi chehra mere dekhe hue chehro se nahi milta tha sab naye hi chehre the. Iska matlab khan ne sirf apne logo se hi mujhe milwaya tha jo uske liye kaam karte the. Main ab aagey kya karna hai uske bare me hi soch raha tha. Aaj ke iss hadse ne kai raaz khol diye the. ab mujhe itna to pata chal hi gaya tha ki kaun mera apna hai or kaun apna hone ka dikhawa kar raha hai ek taraf Khan or Rizwana the jo mujhse sheikh sahab ki daulat ka pata nikalwane ke liye istemaal kar rahe the or mere samne mere ham dard ban rahe the. Dusri taraf Baba the fiza thi nazi thi heena thi jinhone bina kisi laalach ke meri dekh bhaal ki mujhe itna pyaar diya or main taqat ke nashe me chunr sab ahsaan bhul gaya mere bina jane wo kaise honge or mujhe kitna yaad karte honge. Main to unn logo ki jimmewari bhi khan ko de aya tha jane unn logo ka mere bina kya haal hoga. yahan aane ke baad maine ek baar bhi unke bare me janna jaruri nahi samjha na hi khan ne mujhe unke bare me kuch bataayaa. Ab mujhe khud ki khud-garzi par gussa aa raha tha ki main unka pyaar bhul gaya unke kiye hue mujh par Ahsaan bhul gaya. fir mujhe meri unke sath guzari hui zindagi ka ek-ek lamha yaad aane laga.

Kaise baba fiza or nazi ne meri jaan bachayi meri itne waqt tak dekh-bhaal ki kaise baba ne mujhe apna beta bana liya or mujh par apne bete se bhi jyaadaa aitbaar kiya. kaise jab main beemar hua tha to heena mere liye shehar se doctor leke aayi thi or mere bimaar hone par apne abbu se jhagda karke apne mulazim mere kheto me laga diye the. wo sab kuch kisi film ki tarah mere aankho ke samne chalne laga. ab main akela baitha rou bhi raha tha or unn sab ko yaad bhi kar raha tha. Wo din mera udaasi ke sath hi guzra mujhe apni galati ka ahsaas ho raha tha ki jane-anjane maine unko bhi musibat me daal diya hai. Raat kaafi ho gai thi isliye maine ghar jane ka socha or apni socho ke sath main gaadi me baith gaya. Driver ne mujhe mere ghar ke samne utaar diya. maine bujhe hue dil ke sath darwaza khat-khataya to rubi ne jaldi se darwaza khola or ek dil-qash muskaan ke sath mera swaagat kiya.

Rubi : aaj bahut der kar di tumne kaha the itni der.

Main : kahi nahi bas aise hi baitha tha office me.

Rubi : (mera hath pakadkar mujhe ghar ke andar le jate hue) kya baat hai aaj mera sher udaas lag raha hai kuch hua kya.

Main : (naa me sir hilate hue) bas aise hi aaj dil udaas hai

Rubi : (mujhe bed par bitha kar gale se lagate hue) agar tumko bura na lage to tum mujhe apni pareshani ki wajah bata sakte ho iss mann halka ho jayega tumhara.

Main : nahi kuch nahi hua bas waise hi sir me zra dard hai. (main rubi ko apna bita hua kal nahi batana chahta tha isliye baat ko ghuma diya)

Rubi : achha aisa karo khana khaa lo fir main tumhara mood or sir dard dono thik kar dungi.

Main : mujhe bhukh nahi hai tum khaa lo.

Rubi : arre... aise kaise bhukh nahi hai. Bhukhe rehne se bhi sir me dard hota hai jante ho... Tum yhi baitho main khana leke aati hun tumhare liye aaj main meri jaan ko apne hatho se khilaungi (muskurate hue wo rasoyi me chali gai)

Main kuch der usko jate hue dekhta raha fir main wapis apni socho me gumm ho gaya. kuch hi der me rubi khana le aayi or mere sath aake baith gai or apne hatho se mujhe khana khilane lagi. Usko iss tarah khana khilata dekh kar mujhe nazi or fiza ki yaad aa gai kyonki jab main naraz ho jata tha to wo bhi mujhe aise hi khana khilati thi. Usko itne pyaar se khana khilate dekh kar main rubi ko naa nahi keh paya or bhukh na hone ke bawjood main khana khane laga sath hi maine bhi roti uthayi or apne hath se rubi ko khilane laga. Ye pehli baar tha jab main rubi ko itne pyaar se dekh raha tha wo mujhe iss tarah khana khilate dekh kar bahut heran thi or bina kuch bole wo bhi khana khane lagi ab hum dono ek dusre ko khana khila rahe the.

Khane ke baad main bistar par let gaya or rubi hamesha ki tarah apna night gown pehankar aa gai or mere sath aake let gai. wo aaj bhi mujhe waise hi pyaar se dekh rahi thi jaise pehle din mili thi tab dekh rahi thi.

Main : kya dekh rahi ho.

Rubi : dekh rahi hun tum kitne badal gaye ho

Main : kya badal gaya.

Rubi : pehle tumne kabhi mujhse ye bhi nahi puchaa tha ki maine khaya ya nahi or aaj tumne khud mujhe khana khilaya.

Main : aaj isliye khilaya kyonki mera mann tha tumko khana khilane ka main janta hun tum mere baad hi khana khati ho.

Rubi : (bina kuch bole mujhe gale se lagate hue) mujhe ye wala shera bahut pasand hai or isko main pehle se bhi jyaadaa pyaar karne lagi hun. mujhe tumhari sabse achhi baat jante ho kya lagi.

Main : kya....

Rubi : tum ab dusro ka bahut sochte ho pehle aise nahi the.

Main : rubi tumko ek sawaal puchu agar bura na mano to...

Rubi : tumhari kabhi koi bat buri nahi lagti meri jaan puchho kya puchhna hai.

Main : tum mujhe itna pyaar karti ho fir bhi kabhi apna haq nahi jamati mujh par na hi tumne kabhi mere kaam ke bare me puchaa na kabhi ye puchaa ki main kaha tha kiske sath tha aisa kyo.

Rubi : (muskurate hue) kyonki ek baar tumne hi kaha the ki apni aukaat me raha karo main kaha jata hun kya karta hun isse tumko koi matlab nahi hai or har baat tumko batani main jaruri nahi samjhta isliye tab se main hamesha apni aukaat me hi rehti hun.

Main : pehle jo bhi bola tha usko bhul jao or mujhe maaf kar do... ab jo keh raha hun wo yaad rakhna tum jab haq jamati ho to achha lagta hai aisa lagta hai mera bhi koi apna hai.

Rubi : (khush hoke mujhe jor se galae lagate hue) Haaye main mar jau.... aaj tum meri jaan leke rahoge.... aisi baate naa karo kahi main pagal hi na ho jau khushi se.

Main : (Rubi ka chehra apne dono hatho se pakadte hue) tum jab hansatee ho to bahut achhi lagti ho isliye hansatee raha karo.

Rubi : (khamosh hoke haa me sir hilate hue) Hhhmmm

Main : tumko pata hai tum bahut achhi ho... (rubi ka matha chumte hue)

Rubi : (bina kuch bole mere or pass sarakte hue or apni aankhen band karte hue) Hhhmmm

Maine apna chehra uske chehre ke ek dam samne kar diya or halke se uske gaal ko chum liya usne apni aankhen kholi or mujhe muskurakar dekhne lagi. maine ek baar fir se uski gaal ko chum liya. iss bar usne bhi mera chehra apne dono hatho me thaam liya or bade pyaar se mere maathe par or gaalo ko chum liya. Ab maine uske honthon par apne honth rakh diye jisse main ek dam madhosh sa ho gaya hum dono ki aankhen apne aap band ho gai. kuch der hum dono ek dusre ke honthon ke sath apne honth jodkar lete rahe fir usne dheere-dheere apne honthon ko harkat di or halke se apne honth kholkar mere niche wale honthon ko apne honthon me sama liya or dheere-dheere chusne lagi. maine bhi dheere-dheere uske upar wale honth ko chusna shuru kar diya kuch hi der me hamare chumne me kashish aane lagi hum dono ek dusre ke shiddat se honth chusne lage. ab hum dono ki saanse bhi tez hone lagi thi. hum dono ne ek dusre ko itni kaskar gale se laga rakha tha jaise ek dusre ke andar sama jana chahte ho. Uske honth chuste hue maine uski peeth par apne hath ferne shuru kar diye iss par wo bhi apna ek hath mere gale me daale leti rahi or dusre hath se meri chaatee par hath ferne lagi. sath hi usne apni dono taango me meri taango ko jakad liya. kuch der aise hi lete rehne ke baad wo mere upar aake let gai or fir se mere honth chusne lagi. main maze se madhosh ho gaya tha isliye apne poora jism dheela chod diya. Ab rubi mujhe pyaar kar rahi thi wo kabhi mere poore chehre ko chumti kabhi honthon ko. Usne mere upar baithe-baithe hi apna gown utaar diya ab wo sirf Bra or underwear me thi. kuch der mujhe chumne ke baad usne mere sir ke niche apna hath rakha or mujhe thoda sa upar ki taraf utha diya. Uska ishara samajhte hue main jaldi se uth gaya usne mere honth chuste hue hi meri shirt ke button khole or fir dubara meri chaatee par hath rakh kar niche ko daba diya jisse main wapis bed par let gaya. Ab wo dubara mere chehre ko chum rahi thi or niche ke taraf aa rahi thi. mere chehre ko chumte hue pehle wo garden tak aayi or fir meri chaatee par aake chumne or chusne lagi. Main maze se madshosh hua pada tha mujhe uske chaatee par chumne or chusne se be-intehaa mazaa aa raha tha ab wo or niche ki taraf badh rahi thi. Ab uske hath meri pant ki belt par the lekin uske honth mere pet par apna kamaal dikha rahe the. Usne jaldi se meri pent ki belt ka bukkal khola or fir ek hi jhatke me belt ko khinch ka pent se juda kar diya or usko bed se niche fenk diya.

Ab usne jaldi se meri Pent ke hukk khole or jhatke se pent ko ghutne tak niche kar diya. Ab wo underwear ke upar se hi mere lund ko chum rahi thi or uss par hath fer rahi thi. Main maze ki duniya me sair kar raha tha tabhi usne mere pet par chumte-chumte jibh ferna shuru kar diya or dheere-dheere niche ko aane lagi. Ab usne apne dono hatho ki ungaaliyanan mere underwear me phasa lee or usko dheere-dheere niche ki taraf khinchne lagi. Kuch hi der me mera underwear bhi ghutne tak aa gaya tha. Mera lund lohe ki tarah sakht hua pada tha. Wo mere lund ke charo taraf chum rahi thi or apni jeebh fer rahi thi jisse mujhe behad maza aa raha tha. uske baad usne ek hath se mere lund ko pakda or lund ki topi par halke-halke chumne lagi. maine maze se apna hath uske sir pa rakh diya taaki wo mere poore lund ko munh me le sake lekin usne mera hath pakad liya or wapis bed par rakh diya wo aise hi kuch der tak mere lund ko chumti rahi ab usne apna thoda sa munh khola or topi ke charo taraf zubaan ko gol-gol ghumane lagi. kuch der aise hi karne ke baad usne apne ek hath se mere lund ko pakda or ek dam se apna munh khol ke mera adha lund apne munh me daal liya jo uske halak tak jaa raha tha kuch der waise hi rehne ke baad uske lund ko thoda munh se bahar nikala or munh ke andar bhi wo lund par apni zubaan ko gol-gol ghumane lagi. sath hi apne munh ko bhi ab usne hilana shuru kar diya tha. kuch der aise karne ke baad wo tez-tez mere lund ko chus rahi thi or apne dono hath meri chaatee par fer rahi thi. Main maze ki wadiyo me kho chuka tha isliye mujhe nahi pata kab usne apni bra or underwear utaar di thi.

Kuch der mera lund chusne ke baad rubi wapis mere upar aake let gai or fir se mere honth chusne lagi sath hi apni chut ko mere lund ke upar ragadne lagi. Maine jaldi se apne hath niche kiya or lund ko pakad kar chut ki ched par adjust kiya lekin rubi ne fir se mera hath pakad liya or honth chuste hue hi naa me sir hila diya. Uski chut lagataar paani chod rahi thi jisse mere lund bhi poora geela ho gaya tha. Ab shayad usse bhi bardasht karna mushkil ho gaya tha isliye usne khud apna ek hath niche le jaa kar mere lund ko pakda or usko apni chut ki ched par set kar diya or wapis mere gaal ko chumne lagi sath hi uske honth mere kaan ke ek dam pass aa gaya. Itne waqt me ye pehla alfaaz tha jo uske munh se nikla tha.

Rubi : Araam se dalna dheere-dheere jhatka mat marna.

Main : Hhhmmmm

Rubi : jab main rukne ko kahu to ruk jana thik hai

Main : Hhhhmmm

Uske baad usne mere lund par apni chut ka dabav badhana shuru kar diya or khud sath-sath upar niche bhi hone lagi lekin uski raftaar bahut dheere thi. Kuch hi der me mera adha lund uski chut me utar chuka tha. wo adha lund ko hi dheere-dheere andar bahar kar rahi thi. Ab mujhse bardasht karna mushkil ho raha tha isliye uske mana karne ke bawjood maine apne dono hath uski gaanD par rakh diye or ek jordaar niche se jhatka maara jisse mera lund jad tak poora uski chut me utar gaya. sath hi ek tez sssss aaahhhhhhh aayyyyyiiiiii rubi ke munh se nikal gai.

Rubi : kaha tha naa jhatka mat marna... Jungali kahi ke....

Main : (muskurate hue) sorry.... mujhse bardasht nahi ho raha tha.

Wo bine kuch bole wapis mere honth chusne lagi or ab waise hi mere lund par baithi thi ab wo sirf mere honth chus rahi thi niche se apni gaanD nahi hila rahi thi. Mera poora lund uske andar hi tha jisko uski chut ki diwaro ne sakhti se jakda hua tha. thodi der aise hi rehne ke baad ab usne dheere-dheere hilna shuru kar diya jisse mera lund bhi uski chut me andar bahar hone laga. ab wo meri chaatee ko bar-bar chum rahi thi or sath me apni gaanD bhi hila rahi thi. Ab usne mere dono hatho ko apne hatho se pakda or mere hath apne mummo par rakh diye jinhe maine thaam liya or dabane laga ab uska uchhalna bhi tez ho gaya tha shayad wo farig hone ke kareeb thi isliye usne tez-tez apni gaanD ko hilana shuru kar diya uske munh se nikalne wali sssss sssss bhi ab kaafi tez awaz me nikal rahi thi. maine bhi uske mummo ko chodkar sirf uske nipples ko pakad liya or apni ungaliyo se dabane or marodne laga. Kuch der aise hi upar niche hone ke baad Rubi ka poora badan jhatke khane laga or uska munh khul gaya kuch der ke liye wo fir se mere upar baith gai or hilna band kar diya thodi der aise hi rehne ke baad wo mere upar let gai or tez-tez sans lene lagi sath hi meri chaatee par apna hath ferne lagi. Mujhe apne lund par pehle se jyaadaa geelapan mehsoos ho raha tha. Ab usne mere dono hath jo uske mummo par the wahan se utha kar apni kamar par rakh diya or khud ghum kar bed par aa gai or mujhe upar aane ka ishara kiya. Main bina chut se lund ko bahar nikale waise hi ghum kar uske upar aa gaye ab usne fir se mere honthon par hamla kar diya or buri tarah se mere honth chusne lagi.

 
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