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"पागल तो नहीं हो गए तुम I" मोना चौधरी ने सिर हिलाकर कढवे स्वर में कहा…"जिस चीज को पाने के लिए मैं अपने देश हिंदुस्तान से जान हथेली पर रखकर आईं हू, वह तुम्हें दे दू ऐसा कभी हुआ है?"
चियाग के होठो से गुर्राहट गुर्राहट निकली।
"नहीं हुआ तो अब होगा । जानती हो इस समय तुम कहा' हो ।"
"चियाग डियर की बाहो' में ।" मोना चौधरी जहरीली हसी' हँसी ।
"अभी मालूम हो जाता है I " चियांग' ने दात पीसकर कहा और एक तरफ मौजूद टेबल की तरफ बढा I
"बस चियाग I वस I और नहीं I जहा हो वहीं रुक जाओ । " आवाज ने' मौत के सर्द भाव थे I
चियांग ठिठका I उसने गर्दन घुमाकर देखा I
मोना चौधरी के हाथों दबी रिबाल्बर का रुख चियाग की त्तरफ था I आखों में मौत चमक रही थी I उसका चेहरा बता रहा था कि कभी भी वह चियांग क्रो शूट कर सकती थी । चियाग के जबडों में कसाव आ गया I
"पहली बार यहा किसी ने रिवाॅल्बर का रुख मेरी तरफ़ किया हे I ” चियाग खतरनाक लहजे में बोला ।
"मै जानती हू तुम सच कह रहे हो I " मोना चौधरी कुर्सी से उठ खडी हुईं…"और ऐसा पहले कभी इसलिए नहीं हुआ कि मोना चौधरी ने यहा कदम नहीं रखा था और अब रख दिया है I"
एकाएक चियाग के होठो पर वहशी मुस्कान उभरी I
तुम शायद भूल रही हो कि यह मेरा टापू है मेरी जगह है । 'बाहर हर कदम पर हथियारों सहित मेरे आदमी तैनात हैं I तुम, यहां से किसी भी कीमत पर बाहर नहीं निकल सकती, फरार नहीं हो सकतीं I बेहतर यही होगा कि मेरी रिवाॅल्बर मुझे वापस दे दो I जिसके चैंबर में सिर्फ तीन गोलियाँ हैं I तुम देख भी चुकी हो I "
" मैं यहा से फरार हो सकी कि नहीं l यह देखने के 'लिए तुम तो जिदा' होगे नहीं I " मोना चौधरी ने एकाएक शब्द चबाकर वहशी स्वर में कहा---"इसलिए इस वारे में चिता करना छोड दो ।"
चियांग के होठो से गुर्राहट गुर्राहट निकली I
""तुम अपनी मौत्त को दावत दे रही हो।"
"बेकार की बातें छोडो और हाथ ऊपर कर लो । कोई देर करें मुझे पसद नहीं । "
मोना चौधरी की आवाज में मौत के भावों को पहचानकर चियाग ने दोनों हाथ ऊपर उठा लिए I
"जो भी हो तुम यहा से बाहर नहीं निकल सकतीं I मौत . तुम्हारा मुकद्दर बन चुकी है I "
मोना चौधरी रिवाॅल्बर थामे चियाग की तरफ बढी I
" बेकार की भौ भौ मत करो मेरी सुनो I अगर मुझे मरना है तो तुम्हारे बाद ही मरूगी तुमसे ज्यादा जी लूगी I हो सकता है बच भी जाऊ' । परतु यहां से निकलने से पहले तुम्हें शूट करूगी I यानी कि तुम तो मरे ही मरे I अब अगर अपनी जान बचाना चाहते हो तो एंक ही रास्ता है तुम्हारे पास I " मोना चौधरी चियाग से दो कदम पहले पहुचका ठिठक उठी I
"क्या ? " चियाग ने कसे जबडों से पूछा I
"मुझे टापू से बाहर पहुचा दो I इस हद तक कि कोई । खतरा ना रहे I ऐसा होने पर मैं वायदा करती हूं कि तुम्हें शूट नहीं करूगी I बोलो चलते हो मेरे साथ चियाग I” मोना चौधरी ने क्रूर स्वर में कहा-"नहीँ तो तुम्हें शूट करके' अपने बारे में सोचू । चाहो तो एक मिनट सोच सकते हो । "
चियाग ने सोच-भरी मुद्रा मेँ कश लिया ।
मोना चौधरी जानती थी कि चियाग इस समय फसा पडा है और अपने हालात से वह अच्छी तरह वाकिफ भी है I चियाग के पास इसके सिवा और कोई रास्ता भी नहीँ कि उसकी बात मान ले ।
आखिरकार चियाग ने सह्रमतिपूर्ण मुद्रा में सिर हिलाया ।
"तुम अच्छी तरह जानती हो कि मैं तुम्हारी बात मानने के लिए मजबूर हू और I ” इसके साथ ही चियाग' के शरीर मे बिजली की-सी गति से हरकत हुई I उसका जूता मोना चौधरी के हाथ में पडे रिवाल्वर पर पडा I रिवाल्वर हाथ से निकली और छत से जा टकराई I क्षण-भर के लिए मोना चौधरी ठगी सी खडी रह गई ।
बह कुछ समझ ही नहीं पाई I दूसरे ही पल चियाग के जूते की ठोकर मोना चौधरी के पेट
में पडी । वह कराहकर दोहरी हो गई I इसके साथ ही चियाग का हयोड़े के समान घूसा मोना चौधरी के चेहरे पर पंडा । मोना चौधरी के पाव उखड गए, वह पीठ के बल पीछे जा गिरी
चियाग के दो ही बारो' ने मोना चौधरी को इस बात का एहसास करा दिया कि चियाग यू ही चियाग नहीं है I वह कुछ है । जिस तरह उसने बाजी पलट दी थी, वह काबिले तारीफ बात थी ।
मोना चौधरी कराही और सीधी हुई
"कुछ तो शर्म करो I इस बात का भी ध्यान नहीं कि कुछ देर पहले मेरे साथ बेड पर थे । "
चियांग के चेहरे पर खतरनाक भाव छाए हुए थे I
"वो वक्त वेड का था और यह वक्त बेड के नीचे. का है I " चियाग गुर्राया I
"बहुत मतलबी आदमी हो I काम निकला और खिसक गए। " मोना चौधरी ने गहरी सास ली ओर मुह बनाकर हाथ बढाते हुए कहा---"अब कमसे कम उठा तो दो I ” ~
चियाग उसी मुद्रा में आगें बढा ।
मोना चौधरी के उठे हाथ को उसने थामा और झटका दिया I अगले ही पल मोना चौधरी । पावों के बल खडी हो गई । और उससे अगले ही पल मोना . . . चौधरी का लोहे' के समान सिर चियाग के माथे से जा टकराया I
चियांग के होठो से दर्दभरी चीख निकली I वह लंड़खड़ाकर दो कदम पीछे हटा I . मोना चौधरी उछली और उसके दोनो' घुटने चियाग की छाती से जा टकराए ।
चियाग उछलकर पीछे जा गिरा I . तभी मोना चौधरी करीब हीँ नीचें पडी रिवाल्वर पर झपटी और उसे उठा लिया I चियाग कुछ पल अपनी सासे' सयत करता रहा । फिर धीरे से उठा । उसकी आखो से चिगारिया बरस रही थी । चेहरे पर छाए मौत के सर्द भाव और भी गहरे . हो गए थे I
सीधा खडा होते ही मोना चौधरी के हाथ में रिवाॅल्बर देखी तो ठिठक गया I मोना चौधरी के रंग ढंग में मौत के भाव नाच रहे थे ।
"मैं तुम्हें शूट करने जा रही हूं चियाग I" मोना चौधरी गुर्राई I
" नही मुझे मत मारना I " चियाग ने अपनी सासों को सयत करके जल्दी से कहा I
"अफसोस है मुझें कि इसके सिवाय मेरे पास और कोई रास्ता नहीं I ”
"म मैँ तुम्हें टापू से बाहर निकाल दूंगा I I"
" 'टापू से बाहर निकालने के बहाने तुम फिर कोई चालाकी करोगे चियांग-ओर तुम्हारी वह चालाकी मेरी मौत का कारण ~ भी बन सकती हे I मैं किसी भी तरह. का रिस्क नहीं ले सकती I "
"मेरी जान लेना तुम्हारे लिए रिस्क ही है कि तुम बाद में अपने को नहीं बचा पाओगी I समझोता कर ले कि मैँ तुम्हें बाहर निकाल देता दू और तुम मेरी जान नहीं लोगी । "
मोना चौधरी कई पलों तक चियांग को देखती रही I
चियाग की व्याकुल निगाहे मोना चौधरी पर थीं I ~
कई पल ऐसे ही बीत गए।
"ठीक हे चियाग I मुझे तुम्हारी बात मजूर है I लेकिन कोई गड़वड़... I " . .
"नहीं होगी I लेकिन मैं तुम्हें आफर देना चाहता दू। ”
"क्या ?"
"हिंदुस्तानी सीक्रेट फिल्म के बदले में तुम्हें मोटी रकम दे सकता हूं। “
" हम दोनों के बीच अब इस फिल्म के बारे में कोई बात नहीं होनी चाहिए I " मोना चौधरी ने सख्त स्वर में कहा I
चियाग ने फिर कुछ नहीं कहा । ~
"रास्ते में किसी भी तरह की कोई गडबड करने की कोशिश मत करना ।"
" अब ऐसी कोई बात नही होगी !"
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जीप चियाग ने खुद ड्राइव की I
मोना चौधरी चियाग की बाह में वाह डालकर इस तरह चली थी कि जैसे चियांग की सोहबत में रहकर उसे बहुत खुशी हो रही हो I जबकि चियाग की कमर से उसने रिवॉल्वर सटा रखी थी I मोना चौधरी के इशारे पर चियाग ने होठो पर मुस्कान बिखेरी हुई थी I . ..
देखने बाले के आदमियों ने उसकी तरफ ध्यान नहीं दिया ।।
चियांग ने जीप को मोटरबोट स्टेशन के करीव रोका जो टापू के किनारे पर था I इस समय वहा चार बोट मौजूद थीं I जीप में बैठे ब्रैठे मोना चौधरी ने चियाग की कमर से नाल को दबाया था I I तुम मेरे साथ चलोगे और अपने आदमियों से कहोगे कि हम धूमने जा रहे हैं ।"
"ले लेकिन मैं वापस कैसे आऊगा ?" चियाग के होठो से ,निकला I
"जव मैं बोट छोढ़ दूगी तो तुम उसी बोट से वापस आ जाना I "
" चलो I"
दोनों जीप से उतरे ।
मोना चौधरी ने रिवाॅल्बर इस तरह थाम रखी थ्री कि कोई देख न सके I वेसे भी वे दो आदमी थे । खास खतरे वाली बात ~ नहीँ थी ।
चियाग को एकाएक वहा देखकर वे वैसे ही हड़बडा उठे थे ।
चियाग खुद को बेबस महसूस कर रहा था I इस तरह मजबूर तो वह कभी नहीँ हुआ था I और अब भी नही होना था अगर मोना चौधरी को बेड पर लेने के चक्कर मे ना आता I
मोना चौधरी कितनी खतरनाक है इस बात का एहसास उसे हो चुका था I वह इस बात का फैसला कर चुका था कि आजाद होते ही उसका सबसे पहला मकसद मोना चौधरी को खत्म करना होगा I बेशक इसके लिए उसे यहा से हिंदुस्तान ही क्यो न जाना पडे ।
चियाग के होठो से गुर्राहट गुर्राहट निकली।
"नहीं हुआ तो अब होगा । जानती हो इस समय तुम कहा' हो ।"
"चियाग डियर की बाहो' में ।" मोना चौधरी जहरीली हसी' हँसी ।
"अभी मालूम हो जाता है I " चियांग' ने दात पीसकर कहा और एक तरफ मौजूद टेबल की तरफ बढा I
"बस चियाग I वस I और नहीं I जहा हो वहीं रुक जाओ । " आवाज ने' मौत के सर्द भाव थे I
चियांग ठिठका I उसने गर्दन घुमाकर देखा I
मोना चौधरी के हाथों दबी रिबाल्बर का रुख चियाग की त्तरफ था I आखों में मौत चमक रही थी I उसका चेहरा बता रहा था कि कभी भी वह चियांग क्रो शूट कर सकती थी । चियाग के जबडों में कसाव आ गया I
"पहली बार यहा किसी ने रिवाॅल्बर का रुख मेरी तरफ़ किया हे I ” चियाग खतरनाक लहजे में बोला ।
"मै जानती हू तुम सच कह रहे हो I " मोना चौधरी कुर्सी से उठ खडी हुईं…"और ऐसा पहले कभी इसलिए नहीं हुआ कि मोना चौधरी ने यहा कदम नहीं रखा था और अब रख दिया है I"
एकाएक चियाग के होठो पर वहशी मुस्कान उभरी I
तुम शायद भूल रही हो कि यह मेरा टापू है मेरी जगह है । 'बाहर हर कदम पर हथियारों सहित मेरे आदमी तैनात हैं I तुम, यहां से किसी भी कीमत पर बाहर नहीं निकल सकती, फरार नहीं हो सकतीं I बेहतर यही होगा कि मेरी रिवाॅल्बर मुझे वापस दे दो I जिसके चैंबर में सिर्फ तीन गोलियाँ हैं I तुम देख भी चुकी हो I "
" मैं यहा से फरार हो सकी कि नहीं l यह देखने के 'लिए तुम तो जिदा' होगे नहीं I " मोना चौधरी ने एकाएक शब्द चबाकर वहशी स्वर में कहा---"इसलिए इस वारे में चिता करना छोड दो ।"
चियांग के होठो से गुर्राहट गुर्राहट निकली I
""तुम अपनी मौत्त को दावत दे रही हो।"
"बेकार की बातें छोडो और हाथ ऊपर कर लो । कोई देर करें मुझे पसद नहीं । "
मोना चौधरी की आवाज में मौत के भावों को पहचानकर चियाग ने दोनों हाथ ऊपर उठा लिए I
"जो भी हो तुम यहा से बाहर नहीं निकल सकतीं I मौत . तुम्हारा मुकद्दर बन चुकी है I "
मोना चौधरी रिवाॅल्बर थामे चियाग की तरफ बढी I
" बेकार की भौ भौ मत करो मेरी सुनो I अगर मुझे मरना है तो तुम्हारे बाद ही मरूगी तुमसे ज्यादा जी लूगी I हो सकता है बच भी जाऊ' । परतु यहां से निकलने से पहले तुम्हें शूट करूगी I यानी कि तुम तो मरे ही मरे I अब अगर अपनी जान बचाना चाहते हो तो एंक ही रास्ता है तुम्हारे पास I " मोना चौधरी चियाग से दो कदम पहले पहुचका ठिठक उठी I
"क्या ? " चियाग ने कसे जबडों से पूछा I
"मुझे टापू से बाहर पहुचा दो I इस हद तक कि कोई । खतरा ना रहे I ऐसा होने पर मैं वायदा करती हूं कि तुम्हें शूट नहीं करूगी I बोलो चलते हो मेरे साथ चियाग I” मोना चौधरी ने क्रूर स्वर में कहा-"नहीँ तो तुम्हें शूट करके' अपने बारे में सोचू । चाहो तो एक मिनट सोच सकते हो । "
चियाग ने सोच-भरी मुद्रा मेँ कश लिया ।
मोना चौधरी जानती थी कि चियाग इस समय फसा पडा है और अपने हालात से वह अच्छी तरह वाकिफ भी है I चियाग के पास इसके सिवा और कोई रास्ता भी नहीँ कि उसकी बात मान ले ।
आखिरकार चियाग ने सह्रमतिपूर्ण मुद्रा में सिर हिलाया ।
"तुम अच्छी तरह जानती हो कि मैं तुम्हारी बात मानने के लिए मजबूर हू और I ” इसके साथ ही चियाग' के शरीर मे बिजली की-सी गति से हरकत हुई I उसका जूता मोना चौधरी के हाथ में पडे रिवाल्वर पर पडा I रिवाल्वर हाथ से निकली और छत से जा टकराई I क्षण-भर के लिए मोना चौधरी ठगी सी खडी रह गई ।
बह कुछ समझ ही नहीं पाई I दूसरे ही पल चियाग के जूते की ठोकर मोना चौधरी के पेट
में पडी । वह कराहकर दोहरी हो गई I इसके साथ ही चियाग का हयोड़े के समान घूसा मोना चौधरी के चेहरे पर पंडा । मोना चौधरी के पाव उखड गए, वह पीठ के बल पीछे जा गिरी
चियाग के दो ही बारो' ने मोना चौधरी को इस बात का एहसास करा दिया कि चियाग यू ही चियाग नहीं है I वह कुछ है । जिस तरह उसने बाजी पलट दी थी, वह काबिले तारीफ बात थी ।
मोना चौधरी कराही और सीधी हुई
"कुछ तो शर्म करो I इस बात का भी ध्यान नहीं कि कुछ देर पहले मेरे साथ बेड पर थे । "
चियांग के चेहरे पर खतरनाक भाव छाए हुए थे I
"वो वक्त वेड का था और यह वक्त बेड के नीचे. का है I " चियाग गुर्राया I
"बहुत मतलबी आदमी हो I काम निकला और खिसक गए। " मोना चौधरी ने गहरी सास ली ओर मुह बनाकर हाथ बढाते हुए कहा---"अब कमसे कम उठा तो दो I ” ~
चियाग उसी मुद्रा में आगें बढा ।
मोना चौधरी के उठे हाथ को उसने थामा और झटका दिया I अगले ही पल मोना चौधरी । पावों के बल खडी हो गई । और उससे अगले ही पल मोना . . . चौधरी का लोहे' के समान सिर चियाग के माथे से जा टकराया I
चियांग के होठो से दर्दभरी चीख निकली I वह लंड़खड़ाकर दो कदम पीछे हटा I . मोना चौधरी उछली और उसके दोनो' घुटने चियाग की छाती से जा टकराए ।
चियाग उछलकर पीछे जा गिरा I . तभी मोना चौधरी करीब हीँ नीचें पडी रिवाल्वर पर झपटी और उसे उठा लिया I चियाग कुछ पल अपनी सासे' सयत करता रहा । फिर धीरे से उठा । उसकी आखो से चिगारिया बरस रही थी । चेहरे पर छाए मौत के सर्द भाव और भी गहरे . हो गए थे I
सीधा खडा होते ही मोना चौधरी के हाथ में रिवाॅल्बर देखी तो ठिठक गया I मोना चौधरी के रंग ढंग में मौत के भाव नाच रहे थे ।
"मैं तुम्हें शूट करने जा रही हूं चियाग I" मोना चौधरी गुर्राई I
" नही मुझे मत मारना I " चियाग ने अपनी सासों को सयत करके जल्दी से कहा I
"अफसोस है मुझें कि इसके सिवाय मेरे पास और कोई रास्ता नहीं I ”
"म मैँ तुम्हें टापू से बाहर निकाल दूंगा I I"
" 'टापू से बाहर निकालने के बहाने तुम फिर कोई चालाकी करोगे चियांग-ओर तुम्हारी वह चालाकी मेरी मौत का कारण ~ भी बन सकती हे I मैं किसी भी तरह. का रिस्क नहीं ले सकती I "
"मेरी जान लेना तुम्हारे लिए रिस्क ही है कि तुम बाद में अपने को नहीं बचा पाओगी I समझोता कर ले कि मैँ तुम्हें बाहर निकाल देता दू और तुम मेरी जान नहीं लोगी । "
मोना चौधरी कई पलों तक चियांग को देखती रही I
चियाग की व्याकुल निगाहे मोना चौधरी पर थीं I ~
कई पल ऐसे ही बीत गए।
"ठीक हे चियाग I मुझे तुम्हारी बात मजूर है I लेकिन कोई गड़वड़... I " . .
"नहीं होगी I लेकिन मैं तुम्हें आफर देना चाहता दू। ”
"क्या ?"
"हिंदुस्तानी सीक्रेट फिल्म के बदले में तुम्हें मोटी रकम दे सकता हूं। “
" हम दोनों के बीच अब इस फिल्म के बारे में कोई बात नहीं होनी चाहिए I " मोना चौधरी ने सख्त स्वर में कहा I
चियाग ने फिर कुछ नहीं कहा । ~
"रास्ते में किसी भी तरह की कोई गडबड करने की कोशिश मत करना ।"
" अब ऐसी कोई बात नही होगी !"
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जीप चियाग ने खुद ड्राइव की I
मोना चौधरी चियाग की बाह में वाह डालकर इस तरह चली थी कि जैसे चियांग की सोहबत में रहकर उसे बहुत खुशी हो रही हो I जबकि चियाग की कमर से उसने रिवॉल्वर सटा रखी थी I मोना चौधरी के इशारे पर चियाग ने होठो पर मुस्कान बिखेरी हुई थी I . ..
देखने बाले के आदमियों ने उसकी तरफ ध्यान नहीं दिया ।।
चियांग ने जीप को मोटरबोट स्टेशन के करीव रोका जो टापू के किनारे पर था I इस समय वहा चार बोट मौजूद थीं I जीप में बैठे ब्रैठे मोना चौधरी ने चियाग की कमर से नाल को दबाया था I I तुम मेरे साथ चलोगे और अपने आदमियों से कहोगे कि हम धूमने जा रहे हैं ।"
"ले लेकिन मैं वापस कैसे आऊगा ?" चियाग के होठो से ,निकला I
"जव मैं बोट छोढ़ दूगी तो तुम उसी बोट से वापस आ जाना I "
" चलो I"
दोनों जीप से उतरे ।
मोना चौधरी ने रिवाॅल्बर इस तरह थाम रखी थ्री कि कोई देख न सके I वेसे भी वे दो आदमी थे । खास खतरे वाली बात ~ नहीँ थी ।
चियाग को एकाएक वहा देखकर वे वैसे ही हड़बडा उठे थे ।
चियाग खुद को बेबस महसूस कर रहा था I इस तरह मजबूर तो वह कभी नहीँ हुआ था I और अब भी नही होना था अगर मोना चौधरी को बेड पर लेने के चक्कर मे ना आता I
मोना चौधरी कितनी खतरनाक है इस बात का एहसास उसे हो चुका था I वह इस बात का फैसला कर चुका था कि आजाद होते ही उसका सबसे पहला मकसद मोना चौधरी को खत्म करना होगा I बेशक इसके लिए उसे यहा से हिंदुस्तान ही क्यो न जाना पडे ।