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आ बैल मुझे मार- मोना चौधरी सीरीज complete

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"पागल तो नहीं हो गए तुम I" मोना चौधरी ने सिर हिलाकर कढवे स्वर में कहा…"जिस चीज को पाने के लिए मैं अपने देश हिंदुस्तान से जान हथेली पर रखकर आईं हू, वह तुम्हें दे दू ऐसा कभी हुआ है?"

चियाग के होठो से गुर्राहट गुर्राहट निकली।

"नहीं हुआ तो अब होगा । जानती हो इस समय तुम कहा' हो ।"

"चियाग डियर की बाहो' में ।" मोना चौधरी जहरीली हसी' हँसी ।

"अभी मालूम हो जाता है I " चियांग' ने दात पीसकर कहा और एक तरफ मौजूद टेबल की तरफ बढा I

"बस चियाग I वस I और नहीं I जहा हो वहीं रुक जाओ । " आवाज ने' मौत के सर्द भाव थे I

चियांग ठिठका I उसने गर्दन घुमाकर देखा I

मोना चौधरी के हाथों दबी रिबाल्बर का रुख चियाग की त्तरफ था I आखों में मौत चमक रही थी I उसका चेहरा बता रहा था कि कभी भी वह चियांग क्रो शूट कर सकती थी । चियाग के जबडों में कसाव आ गया I

"पहली बार यहा किसी ने रिवाॅल्बर का रुख मेरी तरफ़ किया हे I ” चियाग खतरनाक लहजे में बोला ।

"मै जानती हू तुम सच कह रहे हो I " मोना चौधरी कुर्सी से उठ खडी हुईं…"और ऐसा पहले कभी इसलिए नहीं हुआ कि मोना चौधरी ने यहा कदम नहीं रखा था और अब रख दिया है I"

एकाएक चियाग के होठो पर वहशी मुस्कान उभरी I

तुम शायद भूल रही हो कि यह मेरा टापू है मेरी जगह है । 'बाहर हर कदम पर हथियारों सहित मेरे आदमी तैनात हैं I तुम, यहां से किसी भी कीमत पर बाहर नहीं निकल सकती, फरार नहीं हो सकतीं I बेहतर यही होगा कि मेरी रिवाॅल्बर मुझे वापस दे दो I जिसके चैंबर में सिर्फ तीन गोलियाँ हैं I तुम देख भी चुकी हो I "

" मैं यहा से फरार हो सकी कि नहीं l यह देखने के 'लिए तुम तो जिदा' होगे नहीं I " मोना चौधरी ने एकाएक शब्द चबाकर वहशी स्वर में कहा---"इसलिए इस वारे में चिता करना छोड दो ।"

चियांग के होठो से गुर्राहट गुर्राहट निकली I

""तुम अपनी मौत्त को दावत दे रही हो।"

"बेकार की बातें छोडो और हाथ ऊपर कर लो । कोई देर करें मुझे पसद नहीं । "

मोना चौधरी की आवाज में मौत के भावों को पहचानकर चियाग ने दोनों हाथ ऊपर उठा लिए I

"जो भी हो तुम यहा से बाहर नहीं निकल सकतीं I मौत . तुम्हारा मुकद्दर बन चुकी है I "

मोना चौधरी रिवाॅल्बर थामे चियाग की तरफ बढी I

" बेकार की भौ भौ मत करो मेरी सुनो I अगर मुझे मरना है तो तुम्हारे बाद ही मरूगी तुमसे ज्यादा जी लूगी I हो सकता है बच भी जाऊ' । परतु यहां से निकलने से पहले तुम्हें शूट करूगी I यानी कि तुम तो मरे ही मरे I अब अगर अपनी जान बचाना चाहते हो तो एंक ही रास्ता है तुम्हारे पास I " मोना चौधरी चियाग से दो कदम पहले पहुचका ठिठक उठी I

"क्या ? " चियाग ने कसे जबडों से पूछा I

"मुझे टापू से बाहर पहुचा दो I इस हद तक कि कोई । खतरा ना रहे I ऐसा होने पर मैं वायदा करती हूं कि तुम्हें शूट नहीं करूगी I बोलो चलते हो मेरे साथ चियाग I” मोना चौधरी ने क्रूर स्वर में कहा-"नहीँ तो तुम्हें शूट करके' अपने बारे में सोचू । चाहो तो एक मिनट सोच सकते हो । "

चियाग ने सोच-भरी मुद्रा मेँ कश लिया ।

मोना चौधरी जानती थी कि चियाग इस समय फसा पडा है और अपने हालात से वह अच्छी तरह वाकिफ भी है I चियाग के पास इसके सिवा और कोई रास्ता भी नहीँ कि उसकी बात मान ले ।

आखिरकार चियाग ने सह्रमतिपूर्ण मुद्रा में सिर हिलाया ।

"तुम अच्छी तरह जानती हो कि मैं तुम्हारी बात मानने के लिए मजबूर हू और I ” इसके साथ ही चियाग' के शरीर मे बिजली की-सी गति से हरकत हुई I उसका जूता मोना चौधरी के हाथ में पडे रिवाल्वर पर पडा I रिवाल्वर हाथ से निकली और छत से जा टकराई I क्षण-भर के लिए मोना चौधरी ठगी सी खडी रह गई ।

बह कुछ समझ ही नहीं पाई I दूसरे ही पल चियाग के जूते की ठोकर मोना चौधरी के पेट

में पडी । वह कराहकर दोहरी हो गई I इसके साथ ही चियाग का हयोड़े के समान घूसा मोना चौधरी के चेहरे पर पंडा । मोना चौधरी के पाव उखड गए, वह पीठ के बल पीछे जा गिरी

चियाग के दो ही बारो' ने मोना चौधरी को इस बात का एहसास करा दिया कि चियाग यू ही चियाग नहीं है I वह कुछ है । जिस तरह उसने बाजी पलट दी थी, वह काबिले तारीफ बात थी ।

मोना चौधरी कराही और सीधी हुई

"कुछ तो शर्म करो I इस बात का भी ध्यान नहीं कि कुछ देर पहले मेरे साथ बेड पर थे । "

चियांग के चेहरे पर खतरनाक भाव छाए हुए थे I

"वो वक्त वेड का था और यह वक्त बेड के नीचे. का है I " चियाग गुर्राया I

"बहुत मतलबी आदमी हो I काम निकला और खिसक गए। " मोना चौधरी ने गहरी सास ली ओर मुह बनाकर हाथ बढाते हुए कहा---"अब कमसे कम उठा तो दो I ” ~

चियाग उसी मुद्रा में आगें बढा ।

मोना चौधरी के उठे हाथ को उसने थामा और झटका दिया I अगले ही पल मोना चौधरी । पावों के बल खडी हो गई । और उससे अगले ही पल मोना . . . चौधरी का लोहे' के समान सिर चियाग के माथे से जा टकराया I

चियांग के होठो से दर्दभरी चीख निकली I वह लंड़खड़ाकर दो कदम पीछे हटा I . मोना चौधरी उछली और उसके दोनो' घुटने चियाग की छाती से जा टकराए ।

चियाग उछलकर पीछे जा गिरा I . तभी मोना चौधरी करीब हीँ नीचें पडी रिवाल्वर पर झपटी और उसे उठा लिया I चियाग कुछ पल अपनी सासे' सयत करता रहा । फिर धीरे से उठा । उसकी आखो से चिगारिया बरस रही थी । चेहरे पर छाए मौत के सर्द भाव और भी गहरे . हो गए थे I

सीधा खडा होते ही मोना चौधरी के हाथ में रिवाॅल्बर देखी तो ठिठक गया I मोना चौधरी के रंग ढंग में मौत के भाव नाच रहे थे ।

"मैं तुम्हें शूट करने जा रही हूं चियाग I" मोना चौधरी गुर्राई I

" नही मुझे मत मारना I " चियाग ने अपनी सासों को सयत करके जल्दी से कहा I

"अफसोस है मुझें कि इसके सिवाय मेरे पास और कोई रास्ता नहीं I ”

"म मैँ तुम्हें टापू से बाहर निकाल दूंगा I I"

" 'टापू से बाहर निकालने के बहाने तुम फिर कोई चालाकी करोगे चियांग-ओर तुम्हारी वह चालाकी मेरी मौत का कारण ~ भी बन सकती हे I मैं किसी भी तरह. का रिस्क नहीं ले सकती I "

"मेरी जान लेना तुम्हारे लिए रिस्क ही है कि तुम बाद में अपने को नहीं बचा पाओगी I समझोता कर ले कि मैँ तुम्हें बाहर निकाल देता दू और तुम मेरी जान नहीं लोगी । "

मोना चौधरी कई पलों तक चियांग को देखती रही I

चियाग की व्याकुल निगाहे मोना चौधरी पर थीं I ~

कई पल ऐसे ही बीत गए।

"ठीक हे चियाग I मुझे तुम्हारी बात मजूर है I लेकिन कोई गड़वड़... I " . .

"नहीं होगी I लेकिन मैं तुम्हें आफर देना चाहता दू। ”

"क्या ?"

"हिंदुस्तानी सीक्रेट फिल्म के बदले में तुम्हें मोटी रकम दे सकता हूं। “

" हम दोनों के बीच अब इस फिल्म के बारे में कोई बात नहीं होनी चाहिए I " मोना चौधरी ने सख्त स्वर में कहा I

चियाग ने फिर कुछ नहीं कहा । ~

"रास्ते में किसी भी तरह की कोई गडबड करने की कोशिश मत करना ।"

" अब ऐसी कोई बात नही होगी !"

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जीप चियाग ने खुद ड्राइव की I

मोना चौधरी चियाग की बाह में वाह डालकर इस तरह चली थी कि जैसे चियांग की सोहबत में रहकर उसे बहुत खुशी हो रही हो I जबकि चियाग की कमर से उसने रिवॉल्वर सटा रखी थी I मोना चौधरी के इशारे पर चियाग ने होठो पर मुस्कान बिखेरी हुई थी I . ..

देखने बाले के आदमियों ने उसकी तरफ ध्यान नहीं दिया ।।

चियांग ने जीप को मोटरबोट स्टेशन के करीव रोका जो टापू के किनारे पर था I इस समय वहा चार बोट मौजूद थीं I जीप में बैठे ब्रैठे मोना चौधरी ने चियाग की कमर से नाल को दबाया था I I तुम मेरे साथ चलोगे और अपने आदमियों से कहोगे कि हम धूमने जा रहे हैं ।"

"ले लेकिन मैं वापस कैसे आऊगा ?" चियाग के होठो से ,निकला I

"जव मैं बोट छोढ़ दूगी तो तुम उसी बोट से वापस आ जाना I "

" चलो I"

दोनों जीप से उतरे ।

मोना चौधरी ने रिवाॅल्बर इस तरह थाम रखी थ्री कि कोई देख न सके I वेसे भी वे दो आदमी थे । खास खतरे वाली बात ~ नहीँ थी ।

चियाग को एकाएक वहा देखकर वे वैसे ही हड़बडा उठे थे ।

चियाग खुद को बेबस महसूस कर रहा था I इस तरह मजबूर तो वह कभी नहीँ हुआ था I और अब भी नही होना था अगर मोना चौधरी को बेड पर लेने के चक्कर मे ना आता I

मोना चौधरी कितनी खतरनाक है इस बात का एहसास उसे हो चुका था I वह इस बात का फैसला कर चुका था कि आजाद होते ही उसका सबसे पहला मकसद मोना चौधरी को खत्म करना होगा I बेशक इसके लिए उसे यहा से हिंदुस्तान ही क्यो न जाना पडे ।
 
वही हुआ, जैसा मोना चौधरी चाहती थीं I

चियाग ने मोटरबोट की ड्राइविंग सभाली और मोना चौधरी पीछे वाली सीट पर बैठ गई । हाथ में रिवाल्वर दबा हुआ था I रुख ड्राइबिग सीट पर बैठे चियाग की पीठ की तरफ था I

चियाग ने बोट स्टार्ट की और आगें बढा दी I

ठडी' हवा का झोका' उसके पसीने से भरे शरीर से टकराया I सकून मिला राहत मिली I सब कुछ ठीक होने के बाद भी मोना चौधरी… चियाग के . प्रति लापरवाह, नहीं हुईं थी'। वह जानती थी कि वह मौत के खेल का आखिरी दोर हे I जरा सी भी बाजी पलटी तो खेल खत्म । वह भी खत्म I

चियाग उसे मारकर उससे फिल्म बरामद करके उसे फौरन समदर की मछलियों के हवाले कर देगा ।

चियाग एक घटा बोट ड्राइव करता रहा I इस बीच उसने बीसियों बार गर्दन घुमाकर मोना चौधरी को देखा था परंतु I मोना चौधरी को उसने अपने प्रति हर बार सतर्क पाया या I

करीब घटे-भर की खामोशी के बाद मोना चौधरी ने चुप्पी तोडी I

"चियाग I माई डार्लिंग' I तुम कितने अच्छे हो I“ मोना चौधरी ने शोख और कड़वे स्वर में कहा I

"चियांग कुछ ना बोला l जाहिर हैं उसने होठ भीच लिए होगे I

"मैं तुम्हारे अड्डे पर गई-तुमने मेरी सेवा की वेड पर भी I नाचे भी मारधाढ़ भी की और अब अच्छे मेजबान की तरह मुझे विदा भी करने जा रहे हो I सच चियाग तुम बहुत अच्छे हो I चीनियों के प्रति मैने नई राय कायम की है I "

चियाग फिर भी कुछ न बोला ।

"बस एक गडबड हो-गई है I " मोना चौधरी ने मुह बनाया I

इस बार चियाग ने गर्दन घुमाकर मोना चौधरी को धूरा । फिर सामने देखने लगा I I

"तुमने पहले मुझे टापू से निकाल देने का वायदा किया I मैं तुम्हारे झासे में आ गई । फिर धोखे से तुमने मुझ पर वार कर दिया I अगर मै तुम्हारा मुकाबला न कर पाती तो मैं तो गई थी ना I"

चियाग ने पुन गर्दन घुमाकर पीछे देखा I उसके होठ भिचे हुए थे I

"तुम्हारे शब्द तुम्हारी आवाज वादाखिलाफी की तरफ जा रही है ।" चियाग बोला I

"मौत. की शतरज में वायदे नहीं गोलियों का इस्तेमाल होता है चियाग I

एकाएक मोना चौधरी फुफकार उठी-"तुम्हे जिदा छोढ़ देने का मतलव है अपनी मौत को दावत देना तुम हर तरफ से साधनसपन्न हो I हिदुस्तान तक तुम्हारे हाथ फैले हैं I तुम आजाद हौते ही फोरन मेरी मौत का....आर्डर सबको दे दोगे । और फिर कब तक मैँ बचती फिरूगी तुम्हारे हमलों से I कभी तो कोई गोली मुझे खा ही जाएगी I इसलिए बेहतर है जड को ही जला दिया जाए I "

एकाएक बोट की स्पीड धीमी होने लगी I

"इसलिए मैं तुम्हारे सिर का निशाना लेने जा रही हू। " यही वह क्षण थे जिन्होने जिदगी और मौत का फैसला करना था I चियाग ने किसी चीते की भाति उठते हुए पलटते हुए, मोना चौधरी पर छलाग लगा दी । वह सब मात्र क्षण में हुआ । मोना चौधरी क्रो इस बात की पूरी पूरी आशा थी ।

मोत को सामने देखकर कोई भी हाथ पर हाथ रखे नहीं बैठ सकता । और चियाग तो बिल्कुल ही नहीं बैठ सकता ।

पलकक झपकते ही मोना चौधरी अपनी जगह से खडी होकर एक तरफ हट गई । चियाग सीधा उस जगह से जा टकराया जहा मोना चौधरी बैठी थी I बोट को एक तीव्र झटका लगा I बोट पर खडी मोना चौधरी का वैलेस' बिगडा वह समदर में गिरने को हुई तो कठिनता से उसने खुद को सभाला I तव तक चियाग सीधा हो चुका था और उस पर झपटने ही जा रहा था I बिना पल.की देरी, के मोना चौधरी ने अपने जूते की ठोक उसके पेट व कमर में मारी I ठोकर तगडी तो न पडी , परंतु फिर भी चियाग का ध्यान दो पल के लिए बटाने के लिए काफी थी। चियाग ने ठोकर से बचने की चेष्टा की I ठीक उसी समय मोना चौधरी ने दात भीचकर रिवाल्वर सीधी की और ट्रेगर दबा दिया । फायर की तेज आवाज गूजी ! गोली चियाग की छाती में लगी । उसके शरीर को तीव्र झटका लगा

मोना चौधरी ने पुन ट्रैगर दबाया ।

गोली चियाग की नाक को फोढ़ती हुई भीतर जा घुसी I उसके चेहरे के चीधड़े उढ़ गए I चद पल तो चियांग उसी तरह खडा घूरता रहा I और जब बेजान होकर बोंट. पर गिरने लगा तो मोना चौधरी ने दात किटकिटाकर जोरदार ठोकर उसे मारी I

चियाग का शरीर उछला और समदर मेँ जा गिरा ।

मोना चौधरी रिवाॅल्बर थामे मौत से भरी मुद्रा में कई पलो तक उसी तरह खडी समदर क्रो निहारती रही I फिर गहरी सास लेकर रिवाल्वर वापस रखी I अब रिवल्बर में मात्र एक गोली शेष बची थी I

मोटरबोट का इजन स्टार्ट था, परंतु उसकी गति अब ना के बराबर' थी I

आगे बढकर मोना 'चौधरी बोट की ' ड्रीइविग सीट पर बैठी I सिगरेट सुलगाकर कश लिया I फिर स्पीड के साथ बोट आगे बढा दी I एक निगाह चारों तरफ मारी I गहरा अघेरा हर तरफ था । समदर की सतह भी काली ही थी I चंद्रमा जब बादलों क्री ओट से निकलता तो समदर अवश्य चमक उठता था I .

मोना चौधरी ने निगाह सामने कर ली I होंठो के बीच सुलगती सिगरेट फसी थी I बोट पूरी रफ्तार के साथ दौडी जा रही थी I

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भोर का उजाला फैल चुका था I लोगों का आना जाना शुरू हो गया था । सडकों पर वाहन भी नजर आने शुरू हो गए थे I मात्र दो घटे पहले होशाग अपने मुर्गीखाने जैसे घर में आकर सोया था I सारा दिन और फिर रात के सफर ने उसे थका मारा था I

जोर जोर से दरबाजा खटखटाने की आवाजें सुनकर कठिनता से उसकी नीद' टूटी । वह समझ नहीँ' पाया कि इस वक्त कौन हो सकता है I नीद में ही डूबे झल्लाते हुए उसने आगे बढकर दरवाजा खोला तो रिवाॅल्बर की नाल होशाग के पेट से आ लगी ।

नीद' से भरी होशाग की आखें पूरी खुलती चली गई' I

सामने मोना चौधरी खडी थी I

"गुड मार्निंग होशाग I"

"तु तु तुम? ? "

" तो तुम क्या समझते हो कि मुझे मौत के मुहे में झोककर' खुद . चैन की नीद' ले लोगे ?" मोना चौधरी ने उसे रिवाल्वर की ताल के जरिए भीतर किया और खुद भी आगे बढकर दरवाजा बद किया ।

होशांग तो अभी तक सकते की-सी हालत मेँ था-"तुम्हारे बाप चियाग को तो मैंने शूट करके समदर में फेक दिया और जो मुझे चाहिए था वह भी मैं उससे ले आई।"

होशाग की आखें और फैल गईं I

"तुम I तुमने चियाग को मार दिया ?"

रिवाल्वर की नाल के दम पर उसे धकेलती हुईं मोना चौधरी भीतर ले आई । मोना चौधरी के चेहरे पर मौत के भाव नाच रहे थे । आखें सुलग रही थीं।

"याद है होशाग I मैने' तुम्हें यही पर कहा था कि मेरे साथ होशियारी मत करना । "

हौशाग. ने सूखे होठो पर जीभ फेरी I मुझे सिर्फ एक सवाल का ज़वाब चाहिए I ”

"क क्या ?" होशाग का स्वर लढ़खड़ा रहा था ।

"तुम मुझे सीधे तौर पर आसानी से चियाग तक ले जा सकते थे फिर तुमने शागली को बीच में क्यों लिया ?”

"द...दो बाते थीं I" होशाग सूखे होठो पर जीभ फेरकर रिवाल्वर को देखता हुआ बोला…"अगर मैं तुम्हें सीधे तौर पर ले जाता तो तुम मुझ पर शक कर सकती थी कि मैं तुम्हें लेकर चियाग तक आसानी से केसे पहुच गया I और दूसरे शागली गैग का लीडर था जबकि मैं लीडर बनना चाहता था I उसे रास्ते से हटाना बहुत जरूरी था I इसलिए उसे बीच में लिया कि चियाग शागली को जिदा' वापस नहीं आने देगा I "

" यानी कि एक तीर से दो शिकार मोना चौधरी मौत से मरी हसी हसी I"

होशाग को स्पष्ट तौर पर अपनी मौत नजर आ रही थी ।

"प्लीज मुझे मत मारना । ” होशाग घबराए स्वर में कह उठा…"मैं तुम्हें समझ नहीं सका था I वास्तव में मुझसे भूल हुई । भविष्य में तुम्हें कभी भी शिकायत का मौका नहीं मिलेगा I"

"मैं जानती हूं कि भविष्य में तुमसे मुझे कभी भी शिकायत नहीं होगी I" मोना चौधरी ने वहशी स्वर मे कहा रिवाल्वर की नाल सीधी की I दहशत से होशाग का मुह खुल गया I

"नहीं I" पागलों की तरह होशांग रिवाल्वर पर झपटा ।

मोना चौधरी ने तुरत रिवाॅल्बर वाला हाथ पीछे किया, दूसरे हाथ से होशाग के सिर के बालों को पकढ़कर उसका चेहरा ऊपर उठाया और उसके खुले मुह में रिवाॅल्बर की गाल घुसेड़कर द्रेगर दबा दिया I

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मिस्टर पहाडिया ने सिर हिलाकर गभीर निगाहों से मोना चौधरी क्रो देखा।

"मुझे इस बात पर कोई हैरानी नहीं कि होशाग हमारे साथ गद्दारी कर रहा था और हमारे पहले दोनों एजेट होशाग की गद्दारी के कारण मरे I हम लोगों की जिदगी हीं ऐसी होती है I कौन एजेट' कब गद्दारी पर उतर आए यह मालूम ही नहीं हो पाता I कब कौन कत्ल कर दे पता नहीं चलता । बहरहाल. मुझे खुशी है कि तुमने समझदारी के साथ इन सबका मुकाबला किया और काम में सफल होकर वापस लौटीं I

मोना चौधरी के होठो पर हल्की सी मुस्कराहट उभरी I

" वह फिल्म तो तुमने नष्ट कर दी होगी ?’” मिस्टर पहाडिया ने पूछा I

अगले ही पल मोना चौधरी ने जेब में हाथ डाला और चने के दाने के समान छोटी सी फिल्म जेब से निकालकर. मिस्टर पहाडिया के सामने रख दी I

मिस्टर पहाडिया की आखो में चमक उभरी और होठ' सिकुड गए I

" बडरफुल I " मिस्टर पहाडिया ने वह फिल्म उठा ली । करीव ही खडे के के कालिया ने हैरानी से मोना चौधरी को देखा…"तुम फिल्म अपने साथ ले आई ?"

र्मोंना चौधरी ने एक मुस्कराहट उस पर डाली I

"यह तो तुमने बहुत बडा रिस्क लिया I ऐसी चीज तो हाथ . आते ही नष्ट कर देते हैँ।"

"ऐसी चीजों को सभालकर रखना मेरे लिए मामूली काम है। भोना चौधरी:ने कहा ।
 
" छिपाकर लाईं ?" कालिया ने पूछा !

"हां !!"

" एयरपोर्ट पर मशीन चैकिंग में यह फिल्म सामने भी आ सकती थी I कहा छिपाया था ???"

" वही !"

"क्या वहीं ? ” कालिया नें असमजस भरी निगाहों से उसे देखा I

"वही"

"मैं मैं समझा नही ।"

"नही समझें ?"

"नहीं !"

" बिलकुल भी नहीँ ?" सोना चौधरी के होठो पर गहरी मुस्कान फैली थी ।

वह कुर्सी से उठ खडी हुईं।

कालिया ने नकारात्मक अदाज में सिर हिलाया I

"तुम्हारी बीवी है ?"

"हा।है।"

"घर पर है ?"

"हा I " कालिया ने सिर हिलाया I ~

मोना चौधरी ने सिगरेट सुलगाकर कश लिया I

"तो घर जाकर अपनी बीबी को सारी बात बताना I वह तुम्हें फौरन बता देगी कि मेरा वहीँ क्या हे…क्योकि हर. . औरत .का "वंही" वही होता हे I " मोना चौधरी ने कहा और बाहर निकलने वाले दरवाजे की तरफ बढ गई I

मिस्टर पहाडिया ने मोना चौधरी को. कुछ कहने के लिए मुह खोला कि फिर जाने क्या सोचकर गहरी सास लेते हुए कहने का इरादा छोइ दिया I

जबकि कालिया का चेहरा मोना चौधरी का ’वहीं' जानकर कानों तक लाल सुर्ख. हुआ पडा था I

मोना चौधरी दरवाजा खोलकर बाहर निकल चुकी थी I

समाप्त
 
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