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इंतकाम की ज्वाला

मुन्नी बोली- चुन्नी का मतलब?

भाभी बोली- तू घोड़ी बन, फिर बताती हूँ।

मुन्नी घोड़ी बन गई, भाभी ने उसकी साड़ी और पेटीकोट पीछे से पूरी कमर तक उठा दी, उसकी जवान नंगी गांड और झलक दिखलाती चूत मेरे लण्ड को गर्म करने लगी।

गीता ने उसकी चूत में पूरी अंदर तक अपनी बड़ी उंगली घुसाई और बोली- मेरी प्यारी कुतिया रानी, यह है तेरी मुन्नी, उसके बाद उंगली निकाल कर उसकी कसी गांड में उंगली अंदर तक डाली और बोली- यह है तेरी प्यारी चुन्नी। बड़ा मज़ा आएगा जब तेरी मुन्नी और चुन्नी में राकेश का लण्ड घुसेगा।

मुन्नी रोती सी बोली- दीदी, इसमें राकेश जी का मोटा लण्ड घुस गया तो मैं तो मर ही जाऊँगी।

भाभी हँसते हुए बोली- तेरे खसम ने कभी इसमें डाला नहीं, इसका मतलब यह तो नहीं है कि चुन्नी चुदती नहीं हैं। मेरी तो मोहन ने सुहागरात के दिन ही चुन्नी और मुन्नी दोनों चोद दीं थी, पूरे चार दिन तक दुखती रही थी। पहले की तू भूल गई जब कुसुम ने मेरी गांड मोमबत्ती से चुदवाई थी? तब तुम दोनों ताली बजा बजा कर मज़े जो ले रही थीं। राकेश जी पढ़े लिखे हैं प्यार से मारेंगे, चुदने में तो औरतों को भी मज़ा ही आता है। एक बार खुल गई तो बार बार चुन्नी चुदवाएगी। अब जल्दी से हाँ कर या न हम कोई गंदे लोग थोड़े ही हैं जो जबरदस्ती तेरी चोदेंगे।

मुन्नी मरी सी आवाज़ में बोली- ठीक है, मैं तैयार हूँ लेकिन मुझे बदनाम मत करना !

भाभी बोली- परेशान क्यों होती है, चाय पीते हैं, फिर बात करते हैं।

चाय बनाने के बाद भाभी मुन्नी से बोलीं- तेरा मर्द परसों आ रहा है ना? कल तेरी चुन्नी और मुन्नी की चुदाई करवा देते हैं।

भाभी ने अपनी जेब से निकाल कर पाँच हजार रुपए दे दिए और बोली- बाकी के चुदने के बाद दूंगी, इन्हें संभाल कर घर में रखना और कल दो बजे आ जाना। शाम को 3 से 5 बजे तेरी जवानी का मुजरा जो देखना है।

भाभी की आँखों में विजेता वाली चमक थी, कल तीन बजे मुन्नी नंगी होकर मेरे लोड़े पर उनके सामने जो बैठने वाली थी।

दो बजे मुन्नी अंदर कमरे में आ गई, साड़ी और ब्लाउज पहने थी। भाभी थोड़ी दूर पर एक फ्लैट में काम करती थीं, उसके मालिक आजकल नहीं थे, वो हम सबको फ्लैट में ले गईं।

भाभी ने उधर जमीन पर बिस्तर लगा रखे थे। थोड़ी देर के बाद गीता भाभी ने मुन्नी की साड़ी उतरवा दी।

गीता हँसते हुए बोली- राकेश जी, अब देर क्यों कर रहे हैं?

मैंने आगे बढ़कर मुन्नी के ब्लाउज के ऊपर से उसकी चूचियाँ दबाते हुए कहा- आज तो तुम्हारी माल गाड़ी दौड़ाने में मज़ा आ जाएगा। मुन्नी का ब्लाउज उतार कर मैंने दोनों चूचियाँ अपने कब्ज़े में ले लीं।

क्या सुन्दर सामने को तने हुए स्तन थे एक दूसरे से मिला कर रगड़ते हुए मुन्नी की दोनों चूचियाँ दबा दीं और उसके स्तन मुँह में चूसने लगा।

लोड़ा पूरा टनटना रहा था और चूत की खुदाई के लिए तैयार था।

भाभी कुटिल हंसी के साथ बोली- कुतिया, अब जल्दी से अपनी चड्डी उतार और अपनी चूत को राकेश जी के लण्ड पर लगा ! मेरा तो कब से मन कर रहा है गैर मर्द से तेरी चुदाई देखने का।

मुन्नी ने अपने सारे कपड़े उतार दिए, उसका हसीन जवान नंगा बदन देखकर मेरे मुँह और लण्ड से लार टपकने लगी।

उसकी नंगी जवानी देखकर भाभी से भी रहा नहीं गया, उन्होंने आगे बढ़कर उसकी चूत पर अपना हाथ फिराया और बोली- वाह, क्या फूली हुई माल पाव रोटी है तेरी। भैयाजी, अब देर न करो, इस कुतिया को रगड़ दो।

मैंने भी अपने सारे कपड़े उतार दिए थे और नीचे दीवार के सहारे लेटता हुआ बैठ गया, मेरा आठ इंची मोटा लण्ड मुन्नी एकटक देख रही थी।

भाभी कुटिल मुस्कान से बोलीं- मुन्नी रंडी, देख क्या रही है, अपनी चूत जरा इस लोड़े के ऊपर टिका !

मैंने मुन्नी को अपनी तरफ खींच लिया और उसकी चूत को पीछे से अपने टनकते हुए लण्ड के ऊपर छुला दिया और हॉर्न दबाते हुए बोला- अब थोड़ी देर को शर्म छोड़ दो।

मैंने मुन्नी की चूत में लण्ड अंदर तक घुसाते हुए उसे अपनी जाँघों पर बैठा लिया। उसका मुँह सामने भाभी की तरफ था।

 
गीता भाभी को आँख मारते हुए मैंने कहा- भाभी देखो, कुतिया तुम्हारे सामने नंगी होकर चुदवा रही है।

भाभी बोली- वाकई मान गए तुम्हें ! इस रंडी को कस कर बजाओ, आज मेरा बदला पूरा हो रहा है।

अब मुझे मुन्नी को चोद कर उसकी जवानी का मज़ा लेना था। मैंने बैठे बैठे मुन्नी के चुचे दबाते हुए उसकी चूत में नीचे से हल्के धक्के मार कर मुन्नी को चोदना शुरू कर दिया।

थोड़ी देर बाद भाभी ने चूचों से मेरा हाथ हटा दिया और बोलीं- जरा इसके गुब्बारों का डांस तो देख लेने दे !

मैंने हाथ हटाकर मुन्नी की चुदाई तेज कर दी मुन्नी के चुचे ऊपर नीचे जोरों से हिल रहे थे मुन्नी भी उह… उह… आह… आह… करते हुए चुदने का मज़ा ले रही थी।

भाभी ये सब देखकर खुश हो रहीं थी।

इसके बाद मैंने मुन्नी को नीचे लेटा दिया, मुन्नी कामवासना से उबल रही थी, अपनी टांगें फ़ैलाती हुई चिल्लाई- ऊई… ऊई… और चोदो… जल्दी करो… बड़ी आग लगी हुई है।

मैं उसकी जाँघों के बीच में बैठ गया और उसकी टांगें उठाकर लण्ड उसकी चूत में घुसा दिया, 3-4 शॉट मारने के बाद उसके ऊपर लेट कर उसके स्तन चूसने लगा।

स्तन चूसते हुए हाथों से उसकी दोनों निप्पल कड़ी कर दीं। मुन्नी पूरी गर्म हो रही थी मेरी पीठ पर पैरों के पंजे आपस में जोड़कर कस कर चिपक गई और लण्ड पूरा अंदर तक ले लिया, टट्टे चूत के दरवाज़े को छूने लगे, आहें भरती हुई कुम्हलाती हुई सी बोली- आह… बड़ा मज़ा आ रहा है… ऊ… ऊ… आह… उह… उह… उह… और पेलो… चोदो… और चोदो… फाड़ दो इस निगोड़ी चूत को… आह… आह।

हल्के हल्के दो तीन धक्के मारने के बाद मैंने मुन्नी के होंटों में होंट डाल दिए और धक्के मारना रोक कर उसके होंट चूसने लगा, इस समय मुन्नी की चूत की आग इतनी बढ़ गई थी कि वो खुद चूतड़ हिला हिला कर लण्ड अपनी चूत में आगे पीछे होकर चुद रही थी।

मुझे अहसास हो गया था कि चुदाई अपनी चरम सीमा पर है, मैं भी हल्की आहें भर रहा था, हम दोनों की आहों से कमरा गूंज रहा था।

इस बीच भाभी भी अपना पेटीकोट और ब्लाउज उतार के पूरी नंगी हो गईं थीं और बगल में बैठकर अपनी चूत में उंगली करते हुए लाइव ब्लू फ़िल्म का आनन्द ले रही थीं।

इसके बाद कुछ झटकों में ही मुन्नी ने अपना रस छोड़ दिया और मुझसे चिपक गई। मैंने अपना लण्ड बाहर निकाल लिया, लण्ड मेरा अभी भी तना हुआ था।

भाभी ने मुन्नी को हटा दिया, मेरे लोड़े को अपने हाथों से सहलाया और बोलीं- इस बहन की लोड़ी को तो सजा बाद में देते रहना, पहले इस गर्म हथोड़े को मेरी फ़ुद्दी में डाल दो, उंगली करते करते थक गई !

मैंने भाभी को पेट के बल लेटा दिया और इस तरह से उनके चूतड़ उठाए की पीछे से उनकी चूत का उभार साफ़ दिखने लगा।

अब मैंने लण्ड उनकी चूत के मुँह पर छुला दिया और अपने अनुभव का प्रयोग करते हुए पीछे से चूत में लण्ड पेल दिया। गीता की पनीली चूत टाइट हो रही थी, दम लगाते हुए मैंने लण्ड उसकी चूत में घुसा दिया।

गीता भाभी आहें भरने लगीं, उनकी चुदाई शुरू हो गई थी, स्तनों को दबाते हुए चूत धक्के पर धक्के खा रही थी, गीता चुदाई का मज़ा ले रही थी।

थोड़ी देर बाद उसकी चूत और मेरे लण्ड ने साथ साथ पानी छोड़ दिया।

भाभी को सीधा कर मैंने अपनी बाँहों में चिपका लिया, मेरे से लिपटते हुए बोलीं- आह बड़ा मज़ा आया।

इसके बाद गीता और मुन्नी उठ कर चाय बनाने लगी। चाय पीते पीते गीता बोली- मुन्नी को चुदने में मज़ा आ गया, इसे तो सजा के बदले मज़ा मिल गया।

 
मैंने कहा- भाभी, अभी तो एक पारी हुई है, सजा तो इसे दूसरी पारी में मिलेगी जब इसकी चुन्नी चुदेगी।

मुन्नी भाभी से चिपक कर बोली- गीता तुमने मुझे बदनामी से बचा लिया है, मैं किसी भी सजा के लिए तैयार हूँ।

कुछ देर बातें करने के बाद मैंने अपने पप्पू की तरफ इशारा करते हुए मुन्नी से कहा- इसे मुँह में चूसना है।

मुन्नी इतराते हुए बोली- मैं नहीं चूसती !

मैंने कहा- चूसोगी तो तुम आज ही ! और अपनी मर्ज़ी से ! आओ पहले तुम्हें गर्म करता हूँ !

मैंने उसे लेटा दिया और उसकी चूत की फलकों पर अपना मुँह लगा दिया और दाने को होंटों में दबा कर चूसने लगा। औरतों को कैसे गर्म किया जाता है, मुझे यह कला आती है, थोड़ी देर में ही उसका बुर-रस बहने लगा।

अब मैं अपनी जीभ उसकी चूत के अंदर घुसा कर चूत को चाटने लगा उसने मुझे अपने से कस कर चिपका लिया और भींचते हुए बोली- आह… बड़ा मज़ा आ रहा है… अब चोद दो… देर न करो…मेरा लण्ड हथोड़ा हो रहा था, मैंने निप्पल चूसते हुए कहा- पहले मेरा लोड़ा चूसो !

और मैंने उसके मुँह पर अपना लोड़ा रख दिया। काम की गर्मी से पागल मुन्नी ने लोड़ा अपने मुँह में भर लिया और चूसने लगी।

इस बीच मैं उसकी गांड में उंगली घुमाने लगा। गांड पूरी टाइट हो रही थी।

मैं अपने साथ जेली ट्यूब लाया था पास पड़ी पैंट से मैंने ट्यूब निकाली और उसकी गांड में पिचका दी, पूरी गांड क्रीम से भर गई।

मुन्नी प्यार से मेरा लण्ड चूसे जा रही थी। थोड़ी देर बाद मुन्नी को उठा कर तकियों के ऊपर मैंने घोड़ी बना दिया और उसकी गांड पर ढेर सारा थूक डाल कर उसकी टांगें चोड़ी करते हुए सामने पड़े तकियों के ढेर के ऊपर उसे लेटा दिया उसकी गांड का छेद मेरे लण्ड के सामने था।

इसके बाद मुन्नी की गांड पर लोड़ा छुला कर मैंने सुपाड़े से गांड के मुँह पर ठक ठक करी और सुपारा गांड में घुसा दिया।

मुन्नी जब तक कुछ समझती, लोड़ा उसकी गांड में प्रवेश कर चुका था, बिना देर किये पूरी दम लगा कर सेकंड्स में लोड़ा आधा अंदर तक उसकी गांड में पेल दिया और उसकी कमर दोनों हाथों से पकड़ ली।

अब मुन्नी की गांड मेरे कब्ज़े में थी, मुन्नी जोर से चीख पड़ी और लोड़ा बाहर निकालने की कोशिश करने लगी।

लेकिन अब कोई फायदा नहीं था उसकी कुंवारी गांड खुल गई थी और मेरा लण्ड उसमें घुसा हुआ था। मैंने उसकी चोटी खींचते हुए उसकी गांड चोदनी शुरू कर दी और कहा- तूने मेरी भाभी को झूठा रंडी साबित किया, ऊपर से दो हजार रुपए भी लिए, यह उसकी सजा है, अब गांड में अंदर लोड़ा लेने की कोशिश कर, नहीं तो और दर्द होगा।

यह सुन कर भाभी का सर गर्व से तन गया था।

मुन्नी की गांड बहुत तंग थी, आधे लोड़े के बाद लोड़ा अंदर घुस ही नहीं पा रहा था, दर्द के मारे मारे मुन्नी चीख रही थी, उसकी आँखों से पानी आ रहा था।

मैं गांड चोदने के साथ साथ मुन्नी की गांड खोद भी रहा था मुझे पूरा लोड़ा उसकी गांड में जो डालना था।

मेरी जीत तभी थी जब मुन्नी की गांड पर मेरे टट्टे तबला बजाते, मुझे सफलता मिल रही थी और मेरा लोड़ा मुन्नी की गांड में धीरे धीरे और अंदर घुसने लगा था मुन्नी अब एक बकरी बनी हुई थी और दर्द से चीख रही थी और लोड़ा बाहर निकालने की पूरी कोशिश कर रही थी।

उसकी गांड की आज सुहागरात मन रही थी, एक चोदु की तरह थोड़ी देर में मैंने लगभग पूरा लोड़ा उसकी गांड में पेल दिया था।

वो गद्दों और तकियों पर फिसल गई थी। मैं उसकी गांड मारने का पूरा मज़ा ले रहा था।

थोड़ी देर बाद लोड़ा बाहर निकाल कर मैंने उसे कुछ राहत दी, इसके बाद मैंने झुककर उसकी चूचियाँ दबाते हुए दुबारा उसकी गांड में नंगा लण्ड पेल दिया।

 
मेरी पकड़ के आगे वो बेबस थी, अब गांड चुदवाने के अलावा उसके पास कोई रास्ता नहीं था, आँखों से आंसू टपकाते और दर्द से चीखती हुई मुन्नी ने अपनी गांड चुदवाने की सहमति दे दी और मेरे कहे अनुसार लोड़ा गांड में अंदर लेने लगी।

गांड चोदने में मुझे बहुत ताकत लगानी पड़ रही थी। कुछ देर बाद लोड़ा पूरा अंदर घुस गया और मेरे टट्टे उसके चूतड़ों से टकराने लगे, अब मुझे गांड चोदने में बहुत मज़ा आ रहा था।

मुन्नी को भी गीता के अपमान की सजा मिल रही थी।

5 मिनट करीब तक उसकी गांड चोदने के बाद मेरा लण्ड-रस उसकी गांड में बह गया।

मुन्नी निढाल होकर नीचे गिर गई।

गरीबी और मज़बूरी आदमी के वाकयी दो सबसे बड़े रोग होते हैं।

मुन्नी की गांड भी इस रोग का शिकार हो गई थी।

भाभी ने आकर मुझे बाँहों में भर लिया और मेरे ऊपर पप्पियों की बारिश कर दी और बोली- सच, तुमने मेरी बेइज्ज़ती का बदला ले लिया। वाह, मज़ा आ गया ! क्या गांड मारी है ! कुतिया के आंसुओं से पूरा बिस्तर गीला हो गया, आह… आज मेरा बदला पूरा हो गया।

मुन्नी दर्द से कराह रही थी, भाभी ने उसको थोड़ा चलवाया और पेशाब करवाया, इसके बाद वो मेरे पास आकर लेट गई।

मैंने भाभी से कहा- आप इसकी गांड की सिकाई के लिए गर्म पानी करके आधे घंटे बाद आना। मुझे मुन्नी को अब थोड़ा प्यार करना है।

भाभी दूसरे कमरे में चली गईं।

मैंने लेट कर मुन्नी को अपने बदन से चिपका लिया, उसका हाथ अपने हाथ में ले लिया और उसे देखते हुए बोला- मुन्नी, गांड बहुत दुःख रही है ना?

मुन्नी रुआंसी सी होती हुई बोली- बड़ा दर्द हो रहा है।

मैंने उसे अपने से चिपकाते हुए उसके बाल सहलाए और बोला- गांड का दर्द 2-3 दिन में ठीक हो जाएगा। अब तुम बदनामी से भी बच जाओगी और दुबारा जब गांड में लण्ड लोगी तो दर्द भी नहीं होगा और मज़ा चूत से भी ज्यादा आएगा।

मुन्नी कस कर चिपकती हुई बोली- मुझे तो ऐसा लग रहा है कि मैं रंडी न बन जाऊँ।

मैंने उसके होंटों पर पप्पी लेते हुए कहा- क्या बात करती हो ! तुम तो रंडी बनने से बच गई हो।

मुन्नी बोली- मैंने पैसे वापस करने को हाँ तो कर दी है लेकिन मैं पैसे कैसे वापस करुँगी? और पैसे वापस नहीं हुए तो आपके साथ साथ आपके दोस्त भी मुझे चोदेंगे ! रंडी तो मुझे बनना ही पड़ जाएगा।

मुन्नी को सीधा करते हुए मैंने उसकी चूत की फलकों को सहलाया और बोला- तुम्हारी चूत तो अब मेरे लोड़े की दोस्त है, इसको अपने दोस्तों से क्यों चुदवाऊंगा ! वो तो भाभी को खुश करने के लिए मैंने कहा था।

मुन्नी मुझसे चिपकते हुए बोली- सच?

मैंने उसे चिपकाते हुए कहा- सौ फीसदी सच।

उसके कान में मैंने धीरे से कहा- मुझसे तो प्यार से चुदोगी न?

मुन्नी ने दुबारा अंगड़ाई ले रहे मेरे लोडे को पकड़ते हुए कहा- आपसे चुदने में तो मुझे बड़ा आनन्द आता है, आज भी बड़ा आनन्द आ रहा था लेकिन आपने मेरी गांड मारकर मेरा सारा मज़ा ख़त्म कर दिया, गांड बहुत दुःख रही है और आज तो आपने मेरी चूत में अपना रस भी नहीं डाला। अगर आप मुझसे थोड़ा भी प्यार करते हैं तो एक बार मेरी चूत में अपना रस डालिए न ! आपका घोड़ा भी खड़ा हो गया है।

मैंने मुन्नी को बाँहों में भरते हुए उसकी चूत में अपना लण्ड घुसा दिया और उसके निप्पल उमेठते हुए कहा- तुम्हें एक इनाम देना है। इनाम में नौकरी करना पसंद है?

मुन्नी बोली- मुझ पाँचवीं पास को नौकरी कौन देगा?

मैंने उसके होंटों को चूमते हुए कहा- नौकरी मैं दिलवाऊँगा।

मैंने मुन्नी से कहा- एक नौकरी है।

मुन्नी बोली- क्या करना होगा?

मैंने कहा- एक लेडी डॉक्टर की दुकान पर सुबह 10 से शाम 3 बजे तक क्लीनिक पर मरीजों को संभालना है, चार हजार रुपए देगी।

मुन्नी खुश होते हुए बोली- सच? मैं तो तैयार हूँ।

इसके बाद मुन्नी और मैं दोनों आपस में चिपक गए और मैं उसकी चूत चोदने लगा। हम दोनों एक साथ झड़े और मैंने पूरा रस उसकी चूत की टंकी में भर दिया।

इसके बाद भाभी आ गईं उन्होंने मुन्नी की गांड की सिकाई गर्म पानी से कर दी और उसको बचे हुए दस हजार रुपए दे दिए।

इसके बाद हम सब लोग तैयार होकर वापस चाल में आ गए।

अगले दिन मुन्नी के पति वापस आ गए और 5-6 दिन बिना किसी हंगामे के निकल गए।

भाभी मुझसे बहुत खुश थीं और उन्होंने मुझे अपनी चूत का फ्री लाइसेंस दे दिया था। हर 2-3 दिन में एक बार उनकी चूत मार लेता था।

मुन्नी-भाभी की दोस्ती हो गई थी, जब मैं घर वापस आता था तो राखी, भाभी और मुन्नी अक्सर बातें करती दिख जाती थीं।

मुन्नी मुझे देख कर एक मीठी मुस्कान देती थी।

कहानी जारी रहेगी।

 
अगले दिन मुन्नी के पति वापस आ गए और 5-6 दिन बिना किसी हंगामे के निकल गए।

भाभी मुझसे बहुत खुश थीं और उन्होंने मुझे अपनी चूत का फ्री लाइसेंस दे दिया था। हर 2-3 दिन में एक बार उनकी चूत मार लेता था।

मुन्नी-भाभी की दोस्ती हो गई थी, जब मैं घर वापस आता था तो राखी, भाभी और मुन्नी अक्सर बातें करती दिख जाती थीं।

मुन्नी मुझे देख कर एक मीठी मुस्कान देती थी।

मुन्नी का मर्द एक हफ्ते बाद दुबारा ट्रक पर चला गया।

मुन्नी ने मुझसे नौकरी के लिए कहा, मैंने उसको डॉक्टरनी से मिलवा दिया। मुन्नी को नौकरी मिल गई।

मुन्नी की ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा, अगले दिन से वो नौकरी पर जाने लगी। दो दिन बाद मुन्नी को आँख मारते हुए मैंने कहा- 3-4 दिन बाद महिना होने वाला है।

मुन्नी बोली- कल आपके पैसे दे दूँगी।

अगले दिन मुन्नी ने भाभी के सामने पैसे दे दिए।

भाभी उँगलियों से चूत का ईशारा करते हुए बोली- भैयाजी को ब्याज भी देना है।

मुन्नी बोली- ब्याज देने को तो मेरा भी मन कर रहा है।

मैंने आगे बढ़कर उसकी दाएँ तरफ की ब्लाउज ऊपर उठाकर उसका एक गोल गुदाज़ स्तन बाहर निकाला और उसकी निप्पल भाभी के सामने चूसी और बोला- कल इतवार है, पार्क में मिलते हैं।

मुन्नी बोली- पक्का ना?

और हम दोनों अगले दिन 12 बजे अपनी पुरानी जगह आ गए। मुन्नी सज़ धज कर आई थी।

मैंने उससे कहा- एक नई जगह चलते हैं।

मुन्नी को मैं एक घर में ले गया और उसकी मालकिन को दो सौ रुपए दो घंटे के दे दिए।

अंदर एक पलंग पड़ा था, दरवाज़ा बंद करने के बाद मुन्नी मेरी गोदी में आकर बैठ गई, उसने अपना ब्लाउज उतार दिया और मेरे हाथ अपनी चूचियों पर रख कर बोली- आपसे चुदने में बड़ा मज़ा आता है, आप हर इतवार मुझे चोदा करो ना।

मुन्नी ने मुझे अपनी चूत का फ्री लाइसेंस दे दिया था, उसकी माल चूचियाँ मलते हुए मैंने उसके होंट चूसे और इसके बाद एक घंटे तक उसकी जवानी का रस पिया।

इसके बाद मुन्नी और मैं एक दूसरे से लिपट कर लेट गए और बातें करने लगे।

मुन्नी ने बताया कि उसके महीने के दस दिन हुए थे, डॉक्टरनी ने डेढ़ हजार उसे दे दिए थे उससे उसने उधार चुका दिया।

मैंने मुन्नी को चूमते हुए कहा- तुम्हारे पैसे किसने चुराए होंगे?

मुन्नी बोली- पैसे 15 दिन पहले मेरे आदमी ने ट्रक पर जाने से पहले मेरे पास रखवाए थे और मैंने एक डिब्बे में रख दिए थे।

लेकिन मेरी समझ में यह नहीं आता कि चोर को यह कैसे पता चला कि पैसे उस डिब्बे में रखे हैं। और मैंने अपनी याद में कभी घर अकेला भी नहीं छोड़ा।

मैंने पूछा- तुम्हारे घर इन 15 दिन में कौन कौन औरत आदमी आये थे?

मुन्नी बोली- मेरी याद में तो मेरी जान पहचान की 5-6 औरतें ही आई थीं।

बातों बातों में मैंने पूछा- तुम्हारी सहेली कुसुम भी तो है।

हँसते हुए बोली- हाँ, वो तो मेरे गाँव की सहेली है, मेरा हाथ टूटा था तब उसी ने सारा घर देखा था। वो बेचारी एक दिन इस बीच आई थी, परेशान थी गाँव की लड़ाई में बाप और भाई जेल चले गए थे, मुझसे पैसे मांग रही थी, कह रही थी मनी आर्डर करना है। बेचारे अभी 7-8 दिन पहले छूटे हैं। उसके जाने के तो दो दिन बाद मैंने पैसे डिब्बे में देखे ही थे। कल रात को वो मेरे घर आएगी और दो दिन रहेगी भी।

मैंने मुन्नी की चूत में उंगली करते हुए कहा- उससे मुझे मिला देना।

मुन्नी बोली- तुमसे मिला दूँगी लेकिन बहुत तीखी लड़की है। एक बार तेरे मोहन भैया ने अकेला देखकर पीछे से उसके चूतड़ सहला दिए थे, उसने उन्हें एक थप्पड़ मार दिया था।

मैंने मुन्नी की चूत में लोड़ा लगाते हुए कहा- मेरी प्यारी मुन्नी रंडी, मैं उन्हीं औरतों को छेड़ता हूँ जो खुद मस्ती का इशारा करती हैं या बदमाश होती हैं और आज तक मैंने उन्हीं औरतों की चोदी है जिन्होंने खुद चूत खोलकर मुझसे चुदवाई है।

मुन्नी मेरी टांगों पर टांगें लपेटती हुई लण्ड और अंदर लेते हुई बोली- नाराज क्यों होते हो? चोदो न, पूरी आग लगा दी है इस चूत में तुमने !

और मैं एक बार फिर मुन्नी को चोदने लगा। चुदाई के बाद मुन्नी पेटीकोट पहनने लगी, मैंने उसके पेटीकोट का नाड़ा बाँधते हुए कहा- तुम्हारा चोर भी मैं जल्दी ही पकड़ लूँगा, यह पक्का है ! तुम्हारा चोर, चोर नहीं एक चोरनी है।

 
मुन्नी ब्लाउज पहनती हुई बोली- अगर मेरा चोर कोई औरत हुई तो मैं उसको कुतिया की तरह चुदवाऊँगी और साली की गांड पक्का फटवाऊँगी ! मेरी मदद करोगे न? मेरे सामने उसकी गांड चोदोगे न?

मैंने उसके दोनों स्तन उमेठते हुए उसके ब्लाउज के बटन लगाए और कहा- चिंता न कर, उस कुतिया को तो मैं दो दो लण्डों से एक साथ तुम्हारे सामने चुदवाऊँगा ! अपनी प्यारी मुन्नी की बेइज्ज़ती का बदला भी तो लेना है।

इसके बाद कपड़े पहन कर हम दोनों बाहर आ गए।

मुन्नी से बातें करके मुझे लगा कि कुसुम पैसे चुरा सकती है।

राखी ने मेरे कहे अनुसार कुसुम को बताया भी था कि मुन्नी के पास पच्चीस हजार की रकम है और कुसुम के बाप और भैया जेल से छूट भी चुके हैं साथ ही साथ कुसुम मुन्नी की रसोई में भी काम कर चुकी है।

मेरे दिमाग में विचार आया कि पोस्ट ऑफिस में चेक किया जाए, अगर मुन्नी ने पैसे चुराए होंगे तो उसने मनीआर्डर किया होगा।

अगले दिन शाम को मैं आया तो मुन्नी और कुसुम बाहर गली में खड़ी थी।

कुसुम एक पतली सी 23-24 साल की सेक्सी औरत थी। मुन्नी ने मुझे नमस्ते की और कुसुम को बताया- ये राकेश भाईसाहब हैं, गीता के देवर हैं।

मैंने एक मुस्कान कुसुम को मारी।

मेरे आगे निकलने पर कुसुम मजाक उड़ाने वाले लहजे में मुन्नी से बोली- ये उन्हीं मोहन जी के भाई हैं जिनके गाल पर मैंने पंजा छापा था और गीता भाभी वो ही हैं न जिनकी चुदती चूत का मज़ा हम दोनों ने लिया था।

मैंने मन ही मन सोच लिया कि इस कुसुम की चूत बजानी ही पड़ेगी।

अगले दिन समय निकाल कर मैं डाकघर गया और वहाँ पर बैठे बाबू को सौ का नोट देकर पता किया कि कुसुम ने कोई मनीआर्डर किया है या नहीं?

मेरा शक सही निकला, कुसुम ने एक महीने में पच्चीक हजार के दो मनी आर्डर अपने गाँव में किए थे।

एक मनीआर्डर उसी दिन हुआ था जिस दिन मुन्नी के पैसे चुराए गए थे। बाबू को सौ रुपए और देकर मैंने कागज़ की फोटोकॉपी ले ली।

अब मेरा शक पक्का हो गया कि कुसुम ने ही मुन्नी के पैसे चुराए हैं।

साथ ही साथ मेरे चेहरे पर एक कुटिल मुस्कराहट भी आ गई क्योंकि मेरी चाल सफल हो गई थी।

मुझे कुसुम की चूत का दरवाज़ा खोलने की चाभी भी मिल गई थी।

इसके अलावा गीता, मुन्नी की बेइज्ज़ती और मोहन भैया के थप्पड़ का भी बदला लेना था।

अगले दिन हम और मोहन भैया रात में चाल में खड़े थे, कुसुम नीचे से निकली। मोहन भैया की तरफ मैंने देखते हुए कहा- साली टनाटन माल है।

भैया बोले- मरखनी है, संभल कर रहना ! साली ने एक बार मुझे थप्पड़ मार दिया था।

मैंने कहा- भैया, तुम चिंता न करो, कुछ दिनों में हम दोनों इसकी चोदेंगे।

मोहन ने मेरी बात हंसी में उड़ा दी।

अगले दिन सुबह कुसुम सलवार सूट पहने सीढ़ियों से नीचे जा रही थी, आस पास कोई नहीं था, पीछे से मैंने उसके चूतड़ सहला दिए।

उसने गुस्से से मुझे देखा और थप्पड़ मारने वाली थी, मैं धीरे से बोला- पोस्टऑफिस- मनीआर्डर पच्चीस हजार !

उसका चेहरा सफ़ेद पड़ गया, उसके हाथ मैं पहले से लिखी अपने मोबाइल नंबर की चिट देकर मैंने उसकी गांड में पीछे से उंगली की और मुस्कराता हुआ वहाँ से खिसक लिया।

जैसा मैंने सोचा था वैसा ही हुआ मेरे घर से निकलने के थोड़ी देर के बाद ही उसका फ़ोन आ गया, उसने पूछा- तुम ये पच्चीस हजार क्या कह रहे थे?

मैंने हँसते हुए कहा- पूरी कहानी मुन्नी दीदी के सामने शाम को आकर बता दूँगा।

कुसम की आवाज़ अचकचा गई, बोली- तुम मुन्नी से कुछ नहीं कहना, मुझे तुमसे मिलना है।

मैंने उसे पार्क में बुला लिया।

पार्क में कुसुम आ गई, उसे लेकर मैं कमरे पर आ गया। पलंग पर हम दोनो बैठ गए, मैंने उससे पूछा- तुमने पैसे चुराए थे?

वो अचकचाती हुई बोली- यह झूठ है।

मैंने उसकी कुर्ती में हाथ घुसा दिया और उसकी छोटी छोटी चूचियाँ दबाते हुए मैंने उससे कहा- तुम्हारी चोरी अब पकड़ी गई है, सीधे सीधे बता दो कि पैसे कैसे चुराए हैं और बाकी के पच्चीस हजार कहाँ से आए नहीं तो मुन्नी और तुम्हारे आदमी को सब बता दूंगा।

अब कुसुम टूट गई थी, बोली- हाँ, मैंने ही चुराए थे। गाँव की लड़ाई में बाप और भाई जेल चले गए थे, मामला सुलझाने के लिए पचास हजार रुपए चाहिए थे। मेरे घर के लोग सोचते हैं कि हम मुंबई में बहुत पैसे कमा रहे हैं। उन्होंने मुझसे मदद मांगी, मेरे पास तो पाँच हजार भी नहीं थे। जब मैं परेशान थी तो एक दिन राखी मिल गई, उसने मुझे बताया कि मुन्नी के पास पच्चीस हजार रुपए ट्रक के रखे हैं। मुझे पता था कि मुन्नी किस डिब्बे में पैसे रखती है क्योंकि जब उसका हाथ टूटा था तब उसका खाना मैं ही बनाती थी। मेरे पास उसके ताले की डुप्लीकेट चाभी भी थी। अगले दिन मैं मुन्नी के घर गई, घर पर मुन्नी जब पेशाब करने गई तो चुपके से मैंने डिब्बा खोलकर देखा तो उसमें रुपए रखे थे। दो दिन बाद जब मुन्नी बाहर थी तब मैं राखी की एक साड़ी पहन कर आई और डिब्बे में से रुपये निकाल लिये

 
इस बीच मैंने कुसुम का कुरता उतार दिया और उसके छोटे छोटे टमाटर जैसी चूचियाँ देखकर मैंने कहा- आह, आज तो मज़ा आ जाएगा, छोटी छोटी चूचियाँ पिए तो अरसा हो गया।

मैं अपने को रोक नहीं पाया और कुसुम की एक चूची पूरी मुँह में भर ली और स्तन का रस पीने लगा।

कुसुम ने बोलना जारी रखा, बोली- जब पैसे लेकर वापस जा रही थी तब गली के मोड़ पर मोहन भैया ने मेरे चूतड़ सहला दिए, मैंने घबरा कर एक थप्पड़ उन्हें मार दिया और जल्दी से वहाँ से भाग ली।

मैं दूसरे हाथ से उसकी पजामी का नाड़ा खोलते हुए बोला- मुन्नी को पता चल गया तो वो तुम्हारे गाँव में और तुम्हारे खसम को सब बता देगी।

मुझसे चिपकते हुए कुसुम बोली- आप मुन्नी दीदी को कुछ मत बताना ! आप जो कहोगे वो मैं करवा लूँगी।

मैंने उसके होंटों पर पप्पी लेते हुए उसके चुचूकों पर नाख़ून गड़ाए और कहा- पहले अपनी फुद्दी का दर्शन तो करा दो।

कुसुम ने बिना देर किये अपनी पजामी नीचे सरका दी, उसकी चिकनी जांघें और लड़कियों जैसी चूत अपनी जवानी का मुजरा पेश कर रही थीं। मैंने उसकी चूत के होंटों पर उंगली फिराते हुए कहा- आह, आज तो मज़ा आ जाएगा ! तुम्हारी जवानी तो बड़ी रसीली है !

उसकी टांगें फ़ैला कर मैंने अपना हाथ उसके योनि प्रदेश में घुसा दिया और उसकी चूत और जांघें सहलाने लगा।

कुसुम अब पूरी नंगी थी और मेरी जाँघों पर बैठी हुई थी उसकी चूत में उंगली करते हुए मैंने पूछा- यह बताओ, बाकी के रुपए कहाँ से आए?

कुसुम रोते हुए बोली- मैं रेलवे कॉलोनी में एक साहब के यहाँ नौकरी करती हूँ, पच्चीस हजार साहब से लिए थे। बदले में उन्होंने मेरी चूत और गांड दोनों चोद दी और मेरी फिल्म भी बना ली है, अब रोज़ मेरी जवानी लूटते हैं। मेरे साथ सब तरह का काम करते हैं। उनकी बीवी गाँव में रहती है। उन्होंने मुझे अपनी रखैल बना कर रखा हुआ है। ऊपर से पैसे और वापस मांग रहे थे। मुझसे कह रहे थे पैसे वापस कर नहीं तो मेरे दोस्तों से चुदना शुरू कर। आप मुन्नी दीदी की तरह मेरी भी नौकरी लगवा दो ना, मैं उनके पैसे लौटा दूंगी। उस 55 साल के बुड्ढे से तो अच्छा है आप पर अपनी जवानी लुटवाऊँ।

कुसुम की चिकनी जांघों और चूत पर हाथ फिराते हुए मैंने उसका दाना रगड़ा और कहा- तुम उसे अब चाहे जितने पैसे वापस कर दो वो तुम्हारी चूत का रस पीना नहीं छोड़ेगा, उसे उसके हथियार से ही मारना पड़ेगा। मैं तुम्हें उस बदमाश आदमी से छुट्टी दिला दूँगा।

मैंने उसकी चूत के होंट सहलाते हुए कहा- बदले में तुम्हें अपनी मुन्नी प्यार से मुझसे चुदवानी पड़ेगी।

कुसुम मेरी पैंट के बटन खोलते हुए बोली- आप मेरी आज ही चोद लीजिये पर आप मुझे उस कमीने से छुट्टी दिला दें।

कुसुम के दोनों चुच्चे दबाते हुए मैंने उसके चुचूक उमेठे और बोला- तुम उनका फिल्म वाला मोबाइल चुरा लाओ।

कुसुम मुझसे चिपकते हुए बोली- उनके कंप्यूटर में भी वो फिल्म है।

मैंने उसे चिपकाते हुए कहा- तुम भोली हो ! मोबाइल चुरा कर लाओ ! उसमें तुम्हारी चुदाई की फिल्म होनी चाहिए।

मैंने उसके कान में अपना प्लान बताया। कुसुम ने इस बीच मेरी पैंट खोलकर मेरा लण्ड बाहर निकाल लिया। उसे अपने हाथ से वो धीरे धीरे सहला रही थी, मुझसे बोली- आप मेरी इतनी मदद कर रहे हैं तो एक मदद और कर दो !

मैंने कहा- और क्या?

मेरे लण्ड के सुपारे पर उँगलियाँ फिराती हुई बोली- इस मोटू को जल्दी से मेरी चूत में डाल दो ना ! बहुत खुजली हो रही है।

मैंने कुसुम के स्तन दबाते हुए कहा- पहली बार जब भी मैं किसी औरत को चोदता हूँ तो वो मेरा लण्ड अपनी चूत में खुद लेती है, मैं जबरदस्ती किसी की चूत नहीं मारता।

कुसुम मुस्कराई और बोली- आपके लण्ड को चूत में लेकर मुझे बहुत खुशी होगी। आप अपने कपड़े तो उतार दीजिए !

मैंने उसकी पटाखा चूत की तरफ देखा चमचम चूत फड़क रही थी और मेरे लण्ड को कुश्ती के लिए बुला रही थी।

मैंने उसे उठाकर अपने कपडे उतारे और पलंग पर लेट गया।

मेरा तना हुआ लण्ड कुसुम को चुदने के लिए बुलाने लगा।

 
कुसुम नज़रें नीची करते हुए मेरे लौड़े के ऊपर आकर बैठने लगी उसकी चूत का छेद मेरे सुपाड़े से टकराया और उसके बाद चूत फिसलती हुई मेरे लण्ड को अपने अंदर लील गई।

मैंने कुसुम को अपने से चिपका लिया और मैंने उसकी गर्म जाँघों पर अपनी टांगें लपेट लीं और और उसके होंट चूसने लगा।

कुसम मस्ती भरी आहें भरने लगी मेरे बाल सहलाते हुए बोली- चोदो न बड़ा मज़ा आ रहा है।

मैंने उसे पलटी खिलाकर अपने नीचे कर लिया और उसकी चूत चोदना शुरू कर दिया।

वो चुदाई का मज़ा लेने लगी चूत फटी हुई थी लेकिन एक जवान औरत का मज़ा अलग ही होता है उह अह ईह की आवाज़ों ने सेक्स का आनन्द बढ़ा दिया था लण्ड उसकी सुरंग में दौड़ रहा था।

आज मैं एक नई हसीना की चूत का मज़ा ले रहा था।

हम दोनों का बदन एक दूसरे से रगड़ खा रहा था।

उसकी चूत का मज़ा 3-4 आसनों से चोद चोद कर मैंने खुद भी लिया और उसको भी दिया।

उसके बाद हम अलग हो गए, अगले दिन मिलने का वादा करके मैं आ गया।

अगले दिन कुसुम साहब का मोबाइल चुरा कर ले आई, उसकी चार मिनट की ब्लू फिल्म में उसका चेहरा और चुदती चूत दिख रही थी, साहब की सिर्फ पीठ दिख रही थी।

मैंने देखा साहब की पीठ पर 3-4 तिल थे और उनके हाथ पर ॐ लिखा था। इतना मेरे लिए काफी था।

फोन मैंने ओन कर दिया, उसमें रमेश के ऑफिस का नंबर था, उधर मेरी बात हुई, मैंने कहा- रमेश का मोबाइल एक कूड़ादान में पड़ा मिला है, अपने नंबर पर रिंग कर लें।

थोड़ी देर बाद रमेश का फोन आ गया।

मैंने हँसते हुए कहा- क्या रमेश, मोबाइल पर तुम्हारी और तुम्हारी नौकरानी की ब्लू फ़िल्म पड़ी हुई है। क्या मस्त लण्ड है तुम्हारा। हाथ पर लिखा ॐ और पीठ के तिल तो तुम्हारे चेहरे से भी सुंदर लग रहे हैं।

रमेश की आवाज़ से पता चल गया कि वो परेशान है।

वो बोला- तू हरामी कौन बोल रहा है? साले मरवा दूँगा।

मैं बोला- पहले तेरे बॉस से बात कर लूँ, फिर तुझसे बात करता हूँ।

मैंने फोन काट दिया।

थोड़ी देर बाद मैंने एक औरत को सौ रुपए देकर रमेश के नए नंबर पर PCO से फ़ोन कराया और उससे कहा- महिला विभाग से बोल रहे हैं, आपकी ब्लू फिल्म बनाने की शिकायत आई है, आप मामला सुलझा लो, वरना दिक्कत हो सकती है।

इस बीच रमेश के घर मैंने एक दोस्त से दूसरे नंबर से फ़ोन करवा दिया कि रमेश जी रण्डियों के चक्कर में पड़ गए हैं।

थोड़ी देर में रमेश का फोन आ गया, अब वो समझौते के मूड में था, मैंने उससे कहा- कल कुसुम को तीस हजार रुपए दे देना और उसके पैर छूकर माफ़ी मांग लेना ! तेरा मोबाइल नाली में डाल दूँगा और कुसुम की सारी फ़िल्में मिटा देना। कुसुम को कभी कोई दिक्कत हुई तो तेरी और तेरी नौकरी की खैर नहीं।

 
अगले दिन रमेश ने बिना कहे कुसुम को तीस हजार रुपए दे दिए और मेरे कहे मुताबिक पैर छुकर उससे माफ़ी मांग ली।

पैसे लेने के बाद कुसुम मुझसे मिलने पार्क मैं आ गई और मुझसे चिपक गई, बोली- रमेश जी, तो मेरे पैरों में पड़ गए। आपने मुझे बचा लिया !

मैंने उसके होंटों में होंट डालकर काटते हुए कहा- उस दिन तो टेंशन में तुमने अपनी चूत चुदवाई थी, आज ख़ुशी ख़ुशी मुझे खुश कर दो। कुसुम बोली- जब से मुझे रमेश जी से छुट्टी मिली है, मेरा भी आपसे चुदने का बहुत मन कर रहा है चलिए कमरे पर चलते हैं।

मैं कुसुम को परिचित अड्डे पर ले गया।

कुसुम बोली- ये रुपए आप रख लो।

उसके पास बीस नोट एक हज़ार के थे और एक सौ की गड्डी थी।

मैंने उसे पैसे वापस करते हुए कहा- ये तुम्हारे पैसे हैं, तुम चाहो तो मुन्नी को उसके पैसे वापस कर देना।

कुसुम से बोला- चलो पहले तुम्हारी मुन्नी से खेल लें, फिर आगे की सोचते हैं।

मैंने कहा- आज तुम्हारी प्यार वाली चुदाई करूँगा !

अपनी शर्ट पेंट उतारते हुए कहा- अब तुम भी अपने कपड़े उतार लो, प्यार भरी चुदाई का मज़ा अलग ही होता है।

कुसुम ने अपने कपड़े उतारने शुरू कर दिए, ब्लाउज उतारते हुए बोली- आप दीदी को यह मत बताना कि मैंने पैसे चुराए थे !

आगे बढ़कर मैंने उसके दूध हाथों में बंद कर लिए और दबाते हुए बोला- ये सब बातें अब बाद में, पहले प्यार।

कुसुम अब चड्डी में थी, उसका पूरा नंगा बदन मेरी आँखों के सामने था।

उसकी तराशी हुई मांसल जांघें, नंगी दूधिया चूचियाँ और चमकती गहरी नाभि ने मेरे लण्ड को फुला कर रख दिया था।

मुझसे रहा नहीं गया, मैंने अपनी चड्डी उतार कर लण्ड बाहर निकाल लिया।

कुसुम मेरी बाहों में आ गई मेरे लण्ड को पकड़ते हुए बोली- कितना सुंदर लोड़ा है आपका ! मेरी चूत में डालिए न, बहुत खुजला रही है। देर क्यों कर रहे हैं !

मैंने उसकी चूचियाँ मलते हुए कहा- पहले अपनी चड्डी तो उतार लो या चड्डी के ऊपर से ही घुसवाएगी?

कुसुम ने मेरे कहने पर अपनी चड्डी उतार ली और वो मेरी एक टांग पर जांघें फ़ैला कर बैठ गई, उसकी चिकनी चूत देखने लायक थी।

मैंने अपने एक हाथ से उसकी चूत के होंटों और दाने से खेलना शुरू कर दिया।

कुसुम मेरे लण्ड की मुठ मारने लगी।

उसके भावों से मुझे लग गया था कि वो पूरे दिलोजान से मुझसे चुदना चाह रही है।

उसे हटाकर मैं आराम से दीवार पर टेक लगा कर बैठ गया और बोला- आज यह लण्ड तुम्हारा है, आओ, इसके ऊपर बैठ जाओ।

कुसुम अपनी चूत को सुपाते के मुँह पर छुलाती हुई मेरे लोड़े पर बैठ गई और एक कुशल खिलाड़िन की तरह पूरा लोड़ा अपनी चूत में ले लिया और अपनी जीभ मेरे मुँह में घुसा कर चूसने लगी।

कुसुम की जवानी मसलने में मुझे मुन्नी और गीता की चुदाई से ज्यादा मज़ा आ रहा था।

नीचे से हौले हौले धक्के मारते हुए मैं उसकी चूत चोद रहा था और उसकी छोटी छोटी चूचियाँ दबा रहा था।

इस समय हम दोनों की आँखों में आनन्द का भाव था। थोड़ी देर इस तरह चोदने के बाद उसकी टांगें फ़ैलाकर उसे लेटा दिया, लण्ड उसकी चूत में पेल दिया और कुसुम के नुकीले चुचूकों को चूसते और उमेठते हुए उसे चोदने लगा।

 
एक दूसरे की सांसों और आहों का का मज़ा लेते हुए हम दोनों चुदाई का खेल खेल रहे थे।

कुछ देर में मेरा और उसका रस एक साथ छुटा।

दस मिनट आराम के बाद मैंने कुसुम को लोड़ा चूसने के लिए कहा, वो ख़ुशी ख़ुशी मेरे सिकुड़े हुए लण्ड को मुँह में लेकर चूसने लगी। लण्ड दुबारा उसके मुँह में गर्म होने लगा।

मैंने भी मुँह उसकी चूत के फलकों पर लगा दिया और जीभ उसकी चूत में घुसा दी। अब हम 69 में एक दूसरे के अंगों को चूस रहे थे।

मैंने उसकी गांड में उंगली करी तो गांड चुदी हुई थी। कुछ देर बाद कुसुम को अलग करते हुए बोला- तुम्हारी गांड तो अच्छी चुदी हुई लग रही है। किस किस से चुदवा चुकी हो?

मेरे से चिपकते हुए कुसुम बोली- शादी से पहले मेरे जीजाजी अक्सर मेरी गांड चोदते थे, उन्होंने ही मेरी गांड की सील तोड़ी थी और शादी के बाद से मेरे पति मेरी गांड ही ज्यादा मारते हैं, चूत में तो जब भी उन्होंने डाला तो 10 सेकंड में झड़ गए। रमेश जी का बुड्ढा लण्ड था एक मिनट से पहले ही वो झड़ जाते थे। सच बताऊँ तो कल पहली बार आपने चूत का असली मज़ा दिया है और आज तो आपने पूरा मस्त कर दिया, पहली बार चूत की पूरी आग बुझी है। अब तक तो मुझे गांड चुदवाने मैं ही ज्यादा मज़ा आता था। आप भी एक बार मेरी गांड चोदिये न।

मैंने कुसुम को घोड़ी बनाकर लण्ड उसकी गांड में डाल दिया प्यार से कुसुम ने गांड को आगे पीछे हिला कर लण्ड पूरा अंदर ले लिया मैंने उसकी गांड चोदनी शुरू कर दी।

चुदते हुए ‘आह… बड़ा मज़ा आया… आह… और चोदो…’ की आहें भर कर वो अपनी ख़ुशी प्रकट कर रही थी।

अगर औरत चुदने का मज़ा ले तो चुदाई का आनन्द दुगना हो जाता है। मैं आगे धक्का मारता तो पीछे हटते हुए चुदने लगती।

एक आनन्द का माहौल था, काफ़ी गांड चुदाई के बाद मैंने अपना वीर्य कुसुम की गांड में भर दिया।

इसके बाद कुसुम मेरी बाँहों में चिपक गई और बोली- यह चूत अब आपकी है !

और उसने अपनी चूत का फ्री लाइसेंस मुझे दे दिया। आज उसको तीनों छेदों का सुख जो मिला था।

मैंने उसको बाँहों में भरकर बताया कि मुन्नी को पैसे पाने के लिए क्या क्या करना पड़ा और अगर उसे पता चल गया कि तुम चोर हो तो वो तुम्हें दो दो लण्डों से गीता भाभी के सामने चुदवाएगी।

कुसुम रोते हुए बोली- मुन्नी मेरी अच्छी सहेली है। कल बेचारी ने पति से छुप कर हज़ार के दो नोट दिए थे, बोली थी ‘अपने घर भेज देना, तेरे मम्मी पापा मुश्किल में हैं।’ आप उसे कुछ मत बताना।

कुसुम बोली- मैं पच्चीस हजार उसके डिब्बे में वापस रख दूँगी, कम से कम मुन्नी को पैसे तो मिल जाएंगे।

कहानी जारी रहेगी।

 
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